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मे
पहलेमेरगांव तक िफएक पगडडी 
 
आत थ इ पगडडी पर ेलोग पैदल ही आतेजाते थे। लोग कध पर होते थेछोटछोटथैलेजनम होत थ छोटी छोटी इचछाएंछ बह  ुत ही छोटे छोटे इरादे।तब हमारा ूरज भ जापान े नहींपछवाड़क पोखर े ही उगा करता था ।लेकन अब हां
,
अब तो मेरे गांव तक पक ड़क आ गय है।इ ड़क करासतेवाहन म भर भर कर आधुिनकता क एक नय फज़ा भ आ रही है।अानक एक दन मेरे गांव एक क भ आया था इ ड़क ेमेरे गांव मक का आना ौधरी कदरवाजेछ पेटयां उतारना और ले जाना मेरे गांव किलयेएक अभूतपू कौतुह  ूलतावश जब ाा ौधरी े पुछा तो पता ला क आध पेटय पर पाने वाले खाने म
 
मेरे गांव कपुजारी का नाम था और बाक आध पेटय पर मेरे गांव क मसजद कमौलव का नाम था कतुगौर तलब बात यह थ क ारी पेटय पर ेषक कखानेमएक ही नाम था।क एक ने एक ही मतय ेअलग अलग गतय पर भेज थ बराबर बराबर एक  ही पेटयां।छ ही दन ममेरे गांव क फज़ा म एक बकल नय मक थ।मेरे गांव क मसजद का मौलव मेरबपन का ाथ जो वगत कई वष ेहर ुबह मुझे िमलता अपनेरान वालेहाथ को ऊपर उठा कर मुझे
राम राम
करता और मसजद क ओर ल देता ।तब उकहाथ म करान मु ंह म राम और ेहरपर एक नूर ह  ुआ करता था।हांआजकल भ हर ुबह वह दखता है।लेकन अब उकेहरपर दोसत का नूर नहींएक अजनब पन का एहा रता है।अब हाथ म करान नही 
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05 / 29 / 2011This doucment made it onto the Rising List!
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