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बालक और समाज

बालक और समाज

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Published by Omprakash kashyap
समस्या यह है कि जिसे हम सीखना कहते हैं, वह स्थापित मान्यताओं, रीति-रिवाजों, विभिन्न ज्ञान-शैलियों का बोध तथा उसके प्रति अनुकूलन है. औपचारिक शिक्षा का अधिकांश विद्यार्थी को समाज अथवा समाजों की सभ्यता, सांस्कृतिक विशेषताओं, उपलब्धियों से परचाने पर खर्च होता है, उसमें बालक के मौलिक विकास की बहुत कम संभावना होती है. प्रकट में हर समाज मौलिक ज्ञान को बढ़ावा देने की बात करता है. इसके निमित्त भारी-भरकम तामझाम भी रचता है, मगर तब उसका आयोजन एकपक्षीय होता है. उसकी खास सुविधाएं अभिजन-वर्ग से आगे बढ़ ही नहीं पातीं.
समस्या यह है कि जिसे हम सीखना कहते हैं, वह स्थापित मान्यताओं, रीति-रिवाजों, विभिन्न ज्ञान-शैलियों का बोध तथा उसके प्रति अनुकूलन है. औपचारिक शिक्षा का अधिकांश विद्यार्थी को समाज अथवा समाजों की सभ्यता, सांस्कृतिक विशेषताओं, उपलब्धियों से परचाने पर खर्च होता है, उसमें बालक के मौलिक विकास की बहुत कम संभावना होती है. प्रकट में हर समाज मौलिक ज्ञान को बढ़ावा देने की बात करता है. इसके निमित्त भारी-भरकम तामझाम भी रचता है, मगर तब उसका आयोजन एकपक्षीय होता है. उसकी खास सुविधाएं अभिजन-वर्ग से आगे बढ़ ही नहीं पातीं.

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Published by: Omprakash kashyap on Jan 28, 2013
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07/02/2013

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आलेख 
ओमपकरश क 
 बरलक औ समरज 
कोई भी समाज चाहेजतना उदार हो,वह हमेशा चाहता हक भवष केनागरक केप मबालक ापत माताओयको समझे,उनका पालन करे.उसक- आचारसयहता,र/0त रवाज1 को अपनाए ता तशदा मादाओयमरहकर वहार करे.ह न तो अन0चत हन ह/ अवाभावक.आखर समाज कसी एक  ा एक दन क- रचना तो नह/य!उसकोबननेमसकड़1 वलग जातेह.हजार1 लोग उसक- वकासमान अवा को बनाए रखनेके 0लए जमेदार होतेह.जबक लाख1करोड़1  उसक- आचारसयहता जसेाि पयरपरा अवा र/0तरवाज कहा जाता ह,सेज ड़ेहो सकतेह.ह डर भी अा नह/यहक समाज द अपनेेक नागरक को तशदा 0नम1,मादाओयकेपालन सेछ   देनेलगेतो उसका मलभत ढायचा ह/ चरमरा जाएगा.सEता और सयक0त केतब कोई मानेह/ नह/य रहगे.बालक को ह छ  ट न दए जानेकेसयबयमएक तकह भी हो सकता हक उसे समाज केबारेमबह   तकछ सीखनासमझना होता ह.कसी परयपरा ा र/0तरवाज क-अयत0नहत वशेताओय,उसक- खब1खा0म1 को समझनेकेबाद ह/ उसक- आलोचना समीIा करना ासयगत माना जाता ह.तदनसार बालक सेअपेIा होती हक वयको ो 0शष दशातेह  ए उससेजतना बन पड़े,गसमाज सेहण करे.समाज का दा लौटानेको तो उ पड़/ ह.सननेमह बह   त तकसयगत और आदशतीत होता ह.समा ह हक जसेहम सीखना कहतेह,वह ापत माताओय,र/0तरवाज1,व0भन ानश0ल1 का बोध ताउसके0त अनकलन ह.औपचारक 0शIा का अ0धकायश वा को समाज अवा समाज1 क- सEता,सायक0तक वशेताओय,उपलSध1 सेपरचानेपर खचहोता ह,उसमबालक के मौ0लक वकास क- बह  त कम सयभावना होती ह.कट महर समाज मौ0लक ान को बढ़ावादेनेक- बात करता ह.इसके0न0म भार/भरकम तामझाम भी रचता ह,मगर तब उसका आोजन एकपIी होता ह.उसक- खास सवधाएयअ0भजनवगसेआगेबढ़ ह/ नह/यपातीय. 0नणाक पद1 पर वराजत अ0भजन समाज केबह  सयक वगको बह  त आसानी सेछोटेछोटेगट1 मबायदेतेह.इतनछोटेक सयाबल मकह/यअ0धक होनेकेबाबजद जनसाधारण वयको शवह/न मान लेता ह.ह/ वXास उसको समझौतावाद/ बनाए
 
रखता ह.0नणाक पद1 पर वराजमान अ0भजन वगसमाज क- कल प यजी एवयसयसाधन1 का उपोग अपनेवग हत1 क- प0तहेतकरता ह.बालक केसयबयध मअ0भजन मान0सकता, उसको भवष का अ0भजन बनानेकेलोभन केबहाने,Yलहा0नण ा सेकनारे कर देनेक- होती ह.प यजी आधारत समाज1 मजहायहर नई खोज प यजीप0त क- 0तजोर/ को भरनेकेकाम आती ह,समाज,सEता और सयक0त केकमजोर पI1 पर चचाा तो क- नह/यजाती अवा उसकेमानेइस कार बदल दए जातेहक अपनी सा और पह    यच केअन0चत इतेमाल सेअ0भजन वगारा अजवभवसयपदा,मानसमान आद उसका अ0धकार मान 0लए जातेह.अ0भजन वगक- चालाक- सेअनजान जनसमाज द   रवा कोअपनी 0न0त माननेलगता ह.ह आव\क नह/यक जस चालाक- को बड़ेसमझ न पाएय उसको बालक एकाएक समझ ले,लेकन द अपनी खर बचेतना सेसब कदेखता, महसस करता ह  आ कोई बालक उस अवा मद कोई 0ता दजकराना चाहेतो उसे वा होने;कम सेकम उस उ तक इयतजार करना पड़ता ह,जब उसके0नण को कानन केदारेमपरखा जा सके.तब तक वह परवार ता अा जमेदार1 मइतना गहरा Yयस चका होता हक समझौतेऔर समपण सेअलावा कछ सोच ह/ नह/यपाता. ान क- खोज एवयसयवतरण के0लए वयको समपत माननेवालेआकाद0मक सदन1 का ढायचा भी इससेअलग नह/यह.पर/Iा मपछेगए  केउर मछा द अपनी मज सेकछ 0लख आए तो उसेपास होनेक- उमीद छोड़ देनी चाहए.बालक को ानाजन के0लए उसक करनेकेबजा वह उसकेसोच एवयआचरण क- दशा 0नधारत करनेपर जोर देता ह.0शIा का काम ह—बालक क- 0चयतनश को ऊजवत करना,न क उसको व0श दार1 तक सी0मत करना.इसकेबावजद बालक क- 0च केIे1 क- पहचानकर अपनी उदारता का दम भरनेवालेसमाज भी 0शIा और सयकार केमाम सेतशदा वा सेअनकलन क- सीख ह/ देपातेह.बालक केआलोचनामक ववेक को उभारने क- को0शश क- ह/ नह/यजाती.अपनी ओर सेवह कछ मौ0लक करना चाहेतो डायटकर चप करा दा जाता ह.हयसकर टाल देना समझदार/ कह/ जाती ह.ह मनोवा0नक स हक मनष बाावा सेलेकर कशोरावा तक सवा0धक सचेतन,सयवेदनशील,जासएवय मौ0लक होता ह.अपनेआसपास केपरवेश को समझनेक- उसक- जासा इस अवा म चरम पर होती ह.उसका जतना उपोग ानाजन और ान क- व0भन प0त1 को0सखाने,सयवारने,बालमन क- कमजोर1 को सामनेलानेमका जा सके,उतना ह/ लोकहत मह.अब इसेहम अतीत के0त अपना अ0तरेक- समोहन कहअवा नएपन को अपनानेका डर,जो परयपरा केमाम सेा सवधाओय,उन सवधाओयके0छन जानेके भ सेजमतेह,जो हमार/ अपनी ोता,कौशल केबजा वरासत मा ह   ई ह हमबालक को ापत परयपराओयएवयसयक0त केमानक1 सेजोड़ेरखनेमह/ अपनी भलाई
 
समझतेह.मामली वचलन पर हमार/ धड़कनबढ़ जाती ह.ह भल जातेहक जीवन केवल सामाजक,सायक0तक मानक1 ारा अनशा0सत नह/यहोता.वह समाज क- भौ0तक सयपदा,उपादन ता उपभोग सभी 0नयत होता ह.बालक घर सेबाहर जाता हतो परयपरा एवयसयक0त उसकेमनस   ्पर सवार होतेह,जबक भौ0तक सवधाएयता अ लोभन आयख1 केसामने.उनका आकण इतना जबरदत होता हक  अपने मनोभाव1 क- उपेIा करकेभी उनमडब जाना चाहता ह.सामाजकसायक0तक सयरIण और वकास केनाम पर द/ गई 0शIा वहायबह  त कारगर नह/यहोती.वयको सYलता क- दौड़ मबनाए रखनेके0लए बालक चीज1 को पर/ तरह समझनेकेबजा केवल उसका नाटक करने लगता ह.आरय0भक सYलता बौकता केइस छदम   ्को उरोर वतार देती ह.बाजार केलोभन  और समह दोन1 पर लगभग एक जसा भाव डालतेह.व0भन कार के दबाव1 केबीच केवल सचना सम होनेको ानवान होना मान 0ला जाता ह.बालक के मौ0लक सोच,समाज केसयपकमआनेपर जमी मौ0लक उावनाओयक- असर अनदेखी कर द/ जाती ह.इस तरह समाज केलगभग एकचौाई सद 0नण ा सेकट जाते ह.जस कार मातापता सयतान मअपना भवष देखतेह,समाज भी नागरक1 म अपना भवष सरIत रखनेका सपना देखता ह.लोकतायक समाज1 मबालक को जम केसा नागरकता सयबयधी अ0धकार ा हो जातेह.इनमअ0भ का अ0धकार भी सम0लत ह.हायएक अ0तवाभावक  छोड़ा जा सकता हक लोकतायक समाज1 म जो अ0धकार बड़1 को ा होतेह,ा उतनेह/ अ0धकार बच1 को भी ा होतेह?इसका ताका0लक उर नकारामक होगा.खलेपन का दावा करनेवालेसमाज1 मभी बालक के काकार/ अ0धकार बह  त सी0मत होतेह.उसक- वातवक अ0धकारता 8वका होनेतक तीकामक ह/ रहती ह.इसकेपीछेतकाि एक जसेहोतेह.उस सम हम ह बसार देतेहक हमनेजानेअनजानेमौ0लक ान क- आमद के0लए सबसेबड़ा और महवपण दरवाजेबयद कर दए ह.ह qrक हक बालक बौक वकास क- आरय0भक अवा महोता ह.वह द  0नादार/ केमामल1 म,वशेकर उन मामल1 मजहउसका समाज माता देता ह,उतनी जानकार/ नह/यरखता जतनी सामाति बड़ेरखतेह,परयतह भी सच हक उ क- आरय0भक अवा मवह सवा0धक मौ0लक और न0तक होता ह.उ0चत ह/ हक उसक- मौ0लकता का लाभ उqाा जाए.अपनेपरवेश केबारेमबालक जो सोचता,महसस करना ह,उसको अ0भ करनेके0लए उसाहत का जाए.इसकेरातेा ह1,उनका 0नधारण समाज अपनी पर0त1 केअनसार कर सकता ह.ह सयभव हक उन अनेक मामल1 मजहद  0नादार/ कहा जाता ह,बालक क- जानकार/ अप हो,कछ न हो तोभी ह ा बालक को अपनेसमाज और रा केबारेमसोचने,उसको जोड़ेरखनेम

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