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Satsang Ki Kuch Saar Baatein - Jaydayal Goyandka Gita Press Code- 295

Satsang Ki Kuch Saar Baatein - Jaydayal Goyandka Gita Press Code- 295

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Published by: Gita Press,GitaPrakashan,GitaVatika Books on May 05, 2013
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12/09/2014

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ससंग की कछ सार बाते 
 
 मन य 
-
 जीवन कसमय को अमू  लय समझकर उम 
-
 से
-
 उम कममतीत करन  चहये। एक ण भी थनह बतन चहये
 
 यद कसी करणवश कभी कोई ण भगवत 
-
 चतनकबन बीत जय तो उसकये  प शोकसेभी बढ़कर घोर पतप करन चहये, जससेिर कभी ऐसी भू   न हो ।
 
 
 जसक समय थहोत है, उसनेसमय क मू  लय समझ ही नह
 
 
 मन यको कभी नकम नह रहन चहये; अपतसद 
-
 सव द उम 
-
 से
-
 उम कय  करतेरहन चहये
 
 
 मनसेभगवन्क चतन, वणीसेभगवन्नमक जप, सबको नरयण समझकर  शरीर सेजगनद नक न:वथसे व यही उम 
-
 से
-
 उम कमहै
 
 
 बोनेके समय सय, य, मत और हतभरे शन क वचन बोनचहये
 
 
अपनेदोष को स नकर च मसत होनी चहये
 
 
 यद कोई हमर दोष स करे तो उसकयेजहातक हो , सिई नह दे नी चहये; यक सिई दे नेसेदोष क जड़ जमती हैतथ दोष बतने वे कच मभवय   कयेकवट होती है। इससेहम नदष नह हो पते
 
 
 यद हम नदष हतो दोष स नकर हममौन हो जन चहये, इससेहमरी कोई हन   नह हैऔर सदोष हतो अपन सधर करन चहये
 
१०
 
 दोष बतनेवेक ग त लय आदर 
 
 करन चहये, जससेभवय मउसे   दोष बतनेमउसह हो ।
 
११
 
अपनेनकट सबधीक दोष सहस नह कहन चहये, कहनेसेउसको दुख हो सकत   है; जससेउसक सधर सभव नह ।
 
१२
 
 यद कह कहसेकम े न हो तो उनको अपनेपस न ब कर उही कपस जन   चहये
 
१३
 
 सदगी सेरहन चहये
 
१४
 
 ववबी बनन चहये
 
१५
 
 जीवन को अधक खच नह बनन चहय। ऋष 
-
 म नय क जीवन खच नह थ । अधक खच जीवन मन य को पय और दू  सरे प ष क दस बन दे त है,  जसककरण अने क पप करनेपड़तेहऔर दर 
-
 दर भटकन पड़त है
 
१६
 
शरीर नव ह कयेभी अनसभवसेही पदथ क उपयोग करन चहये
 
१७
 
भोजन कसमय वद क और यन नह दे न चहये;यक यह पतन क हे तहै  वय क ओर य रखन भी वै रय मकमी ही है
 
 
ससंग की कछ सार बाते 
१८
 
 कलयणकमी प ष को तो वै रयय  च सेकेव शरीर नव हकयेही भोजन   करन चहये
१९
 
 वहर कसमय भजन 
 – 
यन मम य वृ  और सं सरी कम मगौण वृ  रखनी   चहये
 
२०
 
 सोतेसमय भी भगवन्के नम, पक मरण वशे षतसेकरन चहये, जससेशयन   क समय थन जय । शयनके समय को सधन बननेयेसं सरक सं कलपक  वहको भ कर भगवन्नम,प,ग ण,भव, चरक चतन करतेए ही सोन   चहये
 
२१
 
अपनेऊपर भगवन्क अहै त क दय और े म समझ 
-
समझकर हर समय स रहन  चहये
 
२२
 
 सब णय पर हे त रहत दय और े म करन चहये ।
 
२३
 
 एकं त ममन को सद यही समझन चहयेक परमम कचतन कसव कसी क   चतन न करो; यक थचतन सेबत हन है
 
२४
 
भगवन्के समन अपन कोई हतै षी नह है, अत: अपनेअधीन सब पदथ को और  अपनेको रज ब क भा ती भगवन्के समप ण कर दे न चहये
 
२५
 
भगव कयेमन य म को प बनन चहये। प बननेपर भगवन्वयं   ही शी दश न देसकतेह
 
२६
 
 स नने व क इछ कबन व को ससं ग कसहय क बतनह स ननी चहये
 
२७
 
 जहायनदत बत ह, वहाजहा तक हो यन न द
 
२८
 
 पू  ज 
 – 
त, ऊचेआसन और ऊचेपदसेसद ही दू  र रहन चहये
 
२९
 
 जहातक जो, ग  बननेक इछ कभी न कर ।
 
३०
 
 कसी सबधी क मृ य
-
 सू  चन मनेपर, जहाआवयकत हो, वहाजन चहये;  कतअपनेघरमेकसी कमरनेपर, जहा तक हो, दू  रथ कटबयको आनये   सयतपू  व क नवरण कर दे न चहये
 
३१
 
 दहे ज़ और दन दे न चहये; जहातक हो, े नेसेबचन चहये
 
३२
 
 जहा तक हो, पञ न बनन चहये। बनेतो पपत नह करन चहये
 
३३
 
 जहा तक हो, सगई 
 – 
ववह आद सबध करने ककमसेदू  र रहन चहये
 
३४
 
 म तमउठन चहये। यद सोते
-
सोतेही सू  यदय हो जय तो दनभर उपवस और जप करन चहये
 
 
ससंग की कछ सार बाते 
३५
 
 एकतकसधन को मू  लयवन बननयेसंय, गयीजप, यन, पू  ज, पठ,  त त, थ न , नमकर आद कअथऔर भव को समझतेए ही नकमभवसे   
-
भपू  व क नय करन चहये
 
३६
 
भगव पव और एकत देश क से वन, ससं ग और वयय , परममक यन  और उसकनम क जप, नकमभव, न, वै रय और उपरत — इनकसमन कोई भी सधन नह है
 
३७
 
 जतम को उचत हैक नय सू  यदय और सू  य त सेपू  वही संयोपसन और   गयी जप करे ।
३८
 
भगवन्नम 
-
 पको यद रखतेए ही समजक, वहरक, आथक आद कम  न:वथभव सेकरे ; यक अपनी सरी चे  न:वथभव सेदू  सरे कहत कये   करनेसेही कलयण होत है
 
३९
 
 न और नयकमकयेबन दत न और जकसव कछ भी म ख मन 
 
४०
 
ीभगवन्भोग गकर तथ यथदकर बवैदे व करकही भोजन कर ।
 
४१
 
 त सीद कसव चतेिरतेय खड़ेए कोई भी चीज कभी न खय
 
४२
 
भोजन के आद और अं त मआचमन करे ।
 
४३
 
 एकत मदो आदमी बत करतेह तो उनक समतके बन उनके समीप न जय ।
 
४४
 
 जीव हस को बचत आ चे
 
४५
 
 घी, दू ध, शहद, ते , ज आद तर पदथछनकर कम मे
 
४६
 
 कत क पन न होनपर तथ अपनेसेब र कम बन जनपर पतप करे, जससे   िर कभी वै स न हो ।
 
४७
 
 कत कमको झं झट मन  नेपर वह भर प हो जत है, वशे ष भदयक नह   होत ।
 
४८
 
 वही कमभगवन्को यद रखतेए सतपू  व क म ध होकर कय जय तो बत ऊचे   दजक सधन बन जत है
४९
 
अकम यत(कत सेजी च रन) महन हनकरक है। पप क यत है, कत   इसक नह । अकम यत क यग ही इसक यत है
 
५०
 
 कत  पन प परम प षथही म  क म य सधन है
 
५१
 
धन क  होन यप अपनेवश क बत नह है, तथप मन य को शरीरनव ह क  येकत ब सेययय  परम तो अवय करन चहये

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