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Hindi Soham Vol1 Issue29

Hindi Soham Vol1 Issue29

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Published by M K Mishra
Tanuja Thakur spiritual discourses news letter
Tanuja Thakur spiritual discourses news letter

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Categories:Types, Research
Published by: M K Mishra on May 11, 2013
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05/11/2013

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 1
सोऽहंसोऽहंसोऽहंसोऽहं
 – 
त त तन  ुजा न  ुजा न  ुजा न  ुजा ठाक  ुर ठाक  ुर ठाक  ुर ठाक  ुर 
 
ारा सपादत ारा सपादत ारा सपादत ारा सपादत वष
 
- १
 
अंक 
 
- २९
लेखकेलेखकेलेखकेलेखकम  ुय म  ुय म  ुय म  ुय शीषक शीषक शीषक  शीषक::::१....स  ुवचन स  ुवचन स  ुवचन स  ुवचन  २....ग  ु संमरण ग  ु संमरण ग  ु संमरण ग  ु संमरण  ३....
 
साधना साधना साधना साधना  ४....
 
ेरक कथा ेरक कथा ेरक कथा ेरक कथा  ५....
 
साधकक अन  ुभ  ूतयांसाधकक अन  ुभ  ूतयांसाधकक अन  ुभ  ूतयांसाधकक अन  ुभ  ूतयां ६....
 
शंका समाधान शंका समाधान शंका समाधान  शंका समाधान 
 
७....
 
स  ूम जगत स  ूम जगत स  ूम जगत स  ूम जगत  ८....
 
साधक कसे कहतेह    साधक कसे कहतेह    साधक कसे कहतेह    साधक कसे कहतेह   ???? 
सोऽहंसोऽहंसोऽहंसोऽहं
साधकव व  ृ हेत  ुसा साधकव व  ृ हेत  ुसा साधकव व  ृ हेत  ुसा साधकव व  ृ हेत  ुसााह ाह ाह ाहक आयािमक पका क आयािमक पका क आयािमक पका क आयािमक पका 
ईमेल ईमेल ईमेल ईमेल ::::
soham@vedicupasana.com|www.vedicupasana.com
 
संपकसंपकसंपक संपक: ९९९९८६१९०८ 
लॉग लॉग लॉग लॉग 
– www.tanujathakur.com 
|| ी गणेशाय नमः |||| ी ग  ुरवेनमः ||
 
 2
सोऽहंसोऽहंसोऽहंसोऽहं
 – 
त त तन  ुजा न  ुजा न  ुजा न  ुजा ठाक  ुर ठाक  ुर ठाक  ुर ठाक  ुर 
 
ारा सपादत ारा सपादत ारा सपादत ारा सपादत वष
 
- १
 
अंक 
 
- २९
१....
 
स  ुवचन स  ुवचन स  ुवचन स  ुवचन 
अ अ अ....
 
ीग  ु उवाच ीग  ु उवाच ीग  ु उवाच ीग  ु उवाच ::::परम प  ूय डॉ परम प  ूय डॉ परम प  ूय डॉ परम प  ूय डॉ.... जयंत बालाजी आठवलेजयंत बालाजी आठवलेजयंत बालाजी आठवले जयंत बालाजी आठवलेसाधना कर स  ूमातीस  ूम होकर या सवयापी होकर, ईर समान उनकस  ूमातीस  ूम या सवयापी पसे एकप होते ह | यानयोगसे स  ूमातीस  ूम होकर ईरसे एकपसे एकप होतेह जबक सम साधनासेईरकसवयापी पसे एकप होतेह| यानयोगक अपेा ग   ुक  ृपायोग अन  ुसार सम साधना अधक सहज और स  ुलभ है अतः इसकारा आयािमक उनत शी होती है | - परम प  ूय डॉ. जयंत बालाजी आठवले |आ.
 
शा वचन शा वचन शा वचन शा वचन ::::भवाथाय भ  ूतानांधमवचनंक   ृतम  ्य: याभवसंय  ु: स धमइत नचय: ।। - महाभारत १२.१०९.१०ाणी माक सवागीण उनत धमक संकपनाका म   ूलभ  ूत उेय है | एक सात अन  ुसार नित पसे धमउसेकहतेहजो उनत करवानेका सामयरखता हो |
 
 3
सोऽहंसोऽहंसोऽहंसोऽहं
 – 
त त तन  ुजा न  ुजा न  ुजा न  ुजा ठाक  ुर ठाक  ुर ठाक  ुर ठाक  ुर 
 
ारा सपादत ारा सपादत ारा सपादत ारा सपादत वष
 
- १
 
अंक 
 
- २९
इ इ इ....
 
धमधारा धमधारा धमधारा  धमधारा १.
 
क  ुछ तथाकथत देवी उपासकक बौक और आयािमक दवालयापनक एक झलक :एक गांवम क  ुछ 'जम ाण' सपरवार रहतेह, मेरा उस गांवम क  ुछ दन रहना ह  ुआ, उन सबकघरम ती पत  ृदोष एवंद  ूसरे व तीसरे पातालकमंकका (स  ूम जगत क बलाय आस  ुर श) आमण भी था | मने वहांप  ुष जो अपने आपको देवीकपरम उपासक माननेका ढग करतेहजब उह इस बारेम बताया उन सबने कहा स  ूम आस  ुर श इयाद होतेह नहंहै और यह सब मन गढ़ंत बात और अंधवास ह! िजस देवीक वेउपासना करते ह और  िजस देवी प  ुराणको वेपढतेह उसम आस  ुर शयकसाथ देवताओंकय  ु और अस  ुर एवंदेवताओंय  ुक रणनीत ह इतना होनेपर भी उसेन माननेवाले देवी भक आयािमक दवालयापन उनकआयािमक पतनको दशाती है ! अतःहंद  ुओंको वधवत अयामशा एवंस  ूमका ान बढाने हेत  ुधमशण देना कतना आवयक हो गया है यह समझमआता है ! उह देवी भका ढग करनेवाले इसलए कहा यक वेसब सावजनक पसे कालक तमाक थापना करतेह, तब सावजनक पसे एकत धनसे घटया और रज-तम धान फमी गाने बजाकर वसजनकसमय वक   ृत कारसेमांकालकसामने न  ृय करतेह और अपनी वासनाक त  ृ करते हऔर क  ुछ म  ूक होकर यह सब क  ुक  ृय देखते ह , अब ऐसे देवी भको ढगी न कह तो या कह!!२.
 
वणयवथा आधारत ाचीन भारतीय संक  ृतक क  ुवशेषता इकार थी :* पद और ता जम अन  ुसार नहंकमअन  ुसार मलता था |* िजसका िजतना अधक अधक याग और धमाचरणको क  ृतम लानेकयास होतेथे, उसे समाजम उतना ह उच थान ा होता था |* दंडका वधान भी उसी कार था िजसका वणिजतना ऊचा उसे उसकच  ूकका उतना ह कठोरतम दंड मलता था |* छ  ुआछ  ूत और भेदभाव समाजम नहंथा |* सभीको साधना करनेका अधकार ा था |*अपनी आयािमक मता बढाकर कोई भी अगले वणका अधकार हो सकता था |* येक य अपने वणअन  ुसार अपनी य और सम उरदायव नभाता था |

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