आतमाराम
वेदो
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ाम म महादेव सनार एक सुवया आदमी था। वह अनेसायबान म पा
:
से संधया क अँगीठ के सामने बैठा ह
ुआ खटखट िकया करा था। यह लगाार धवन सुनने के लग इने अभय ह गये थे िक जब िकसी कारण से वह बंद ह जाी
,
जान डा था
,
कई चीज गायब ह गयी। वह नतय
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प एक बार पा
:
काल अनेेका ंजडा लए कई
जन गाा ह ुआ ालाब की ओर जाा था। उस ँले पका म उसका जजर रर
,
ला मु ँह और झुकी ह
ुई कमर देखकर िकसी अरच मनुषय क उसके ाच हने का म ह सका था। यो ह लगो के कानो मआवाज आी
—‘
स गुद वद दाा
,’
लग समझ जाे िक र ह गयी।महादेव का ारवारक जीवन सूखमय न था। उसके ीन ु थे
,
ीन बह ुऍ ंथीं
,
दजनो नाी
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ाे थे
,
लेिकन उसके बझ क हका करने
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वाला कई न था। लडके कहे
—‘
ब क दादा जीे ह
,
हम जीवन का आनंद ग ले
,
िर यह ढल गले डेगी ह।
’
बेचारे महादेव क की
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की नराहार ह रहना डा। जन के समय उसके घर म सायवाद का ऐसा गगनेद नघ हा िक वह ूखा ह उठ आा
,
और नारयल का ह ुका ीा ह ुआ स जाा। उनका यासायक जीवन और ी आांकारक था। य वह अने काम म नुण था
,
उसकी खटाई औरो से कहं यादा ुकारक और उसकी रासयनक ियाऍ ंकहं यादा कसाधय थीं
,
था उसे आये िदन की और ैय
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ूय पाणयो के अद सुनने डे थे
,
र महादेव अवचल गाीय से सर झुकाये सब कुछ सुना करा था। यो ह यह कलह ां हा
,
वह अने े की ओर देखकर ुकार उठा
—‘
स गुद वददाा।
’
इस मं क जे ह उसके च क ूण ां पा ह जाी
थी।२
एक िदन संयगव िकसी लडके ने ंजडे का ार खल िदया। ा उड गया। महादेव ने सह उठाकर ज ंजडे की ओर देखा
,
उसका कलेजा सन
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से ह गया। ा कहॉ गया। उसने िर ंजडे क देखा
,
ा गायब था। महादेव घबडा कर उठा और इर
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उर खरैलो र नगाह दौडाने लगा।
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