Welcome to Scribd, the world's digital library. Read, publish, and share books and documents. See more
Download
Standard view
Full view
of .
Look up keyword
Like this
1Activity
0 of .
Results for:
No results containing your search query
P. 1
Raviratlami Ke Gazlal and Vyanjal

Raviratlami Ke Gazlal and Vyanjal

Ratings: (0)|Views: 50 |Likes:
Raviratlami's collections of gazals and Hasya Vyangya Gazals in Hindi रविरतलामी की ग़ज़लें व व्यंज़ल (हास्य व्यंग्य ग़ज़लें) - एक बेहद पठनीय व मनोरंजक संग्रह
Raviratlami's collections of gazals and Hasya Vyangya Gazals in Hindi रविरतलामी की ग़ज़लें व व्यंज़ल (हास्य व्यंग्य ग़ज़लें) - एक बेहद पठनीय व मनोरंजक संग्रह

More info:

Published by: Ravishankar Shrivastava on Jul 07, 2009
Copyright:Attribution Non-commercial

Availability:

Read on Scribd mobile: iPhone, iPad and Android.
download as PDF, TXT or read online from Scribd
See more
See less

07/07/2009

pdf

text

original

 
ग़ज़ल और यंज़ल 
 
रवरतलामी 
 
http://raviratlami.blogspot.com/ 
भूिमका 
 
माना 
,
मेरे अशआर मअथनहं
 
पर जीवन मभी तो अथनहं
!
------------
मेर ग़ज़ल को लेकर पाठक क यदा कदा ितयाएँा होती 
 
रहती ह
.
जो वशु पाठक होतेह
,
वेइहपसंद करतेह चू ंक ये
 
ल नहंहोतीं
,
कसी फ़ॉमूलेसेआब  नहंहोतींतथा कसी उताद 
 
क उताद क कची सेट छट नहंहोतीं
.
वेसीधी 
,
सपाट पर कछ हद तक 
 
तख़ होती ह
.
 
परंतुछ रचनाकार पाठक और वशुतावाद ग़ज़लकार को मेर कछ 
 
ग़ज़लनाग़वार ग़ुज़रती हऔर वेइनमसेक को तो ग़ज़ल माननेसे
 
ह इनकार करतेह
.
 
मयहाँिमजाग़ािलब कदो उदाहरण देना चाहँगा   ू
,
जो उहनेअपने
 
तथा अपनेग़ज़ल के
 
अदाज़ कबारे मकभी कहे थे
.
मुलाहज़ा फरमाएँ
-
 
न सतायश क तमना न िसलेक परवा 
,
गर नहंहै मेरे अशआर ममानेन सह 
.
 
तथा यह भी 
-
 
पूछतेह वो क ग़ािलब कौन है
,
कोई बतलाओ क हम बतलाएँया 
.
 
साथ ह यह भी 
,
क जब ग़ािलब 
,
दवानेग़ािलब किलए अपनी ग़ज़ल क 
 
छंटाई कर रहेथे
,
तो उहनेअपनेिलखेहए करबन   ु२००० सेअिधक अशआर 
 
न कर दयेचू ंक  उनमशायद वज़न क कछ कमी रह गई थी 
.
 
बहरहाल मनेतो अभी िलखना शु ह कया है
.
मेरे अशआर दो हजार से
 
ऊपर हो जाएंगे
,
तो मभी अपनेछ कम वज़नी अशआर को न कर ह दंगा  ू
,
ऐसा सोचता हँ ू
)
,
---------------------------------------.
 
राह 
,
कोई नई राह बना क तेरे पीछआनेवालेराह तुझेयाद कर
...
 *-*-* 
जावेद 
 
अतर 
,
जह कसी साल फ़मफ़यर कपाँच नॉिमनेशन उनकगीत क
 
िलए िमलेथे
,
ग़जल कबारे मबेबाक सेकहतेह क 
इतनी खूबसूरत 
 
ेडशन का धीरे
-
धीरेलोग को इम कम होता जा रहा है
.
ग़ज़ल को 
 
लोकय बनानेमइसक दो पंय म 
इशार म
,
कॉपेट तरके
 
सेकह जानेवाली बात का खासा योगदान रहा है
,
जो ग़ज़लकार को मेहनत से
 
िलखनेिलए मज़बूर करती ह
.
इसकसाथ ह इसकरदफ 
,
क़ाफए और 
 
मकता 
-
मतला जैसी पारंपरक और िनयमब चीज़भी ग़ज़ल िलखने दौरान 
 
कठनाइयाँपैदा करती ह
.
 
मगर 
,
फर भी लोग ग़ज़लिलख रहे ह और या खूब िलख रहे ह
.
भलेह पाठक 
,
ोता और शंसक नदारद ह 
ग़ज़लआ रह ह
...
हद मभी और 
 
उद मभी  ू
.
और 
,
मेरा तो यह मानना है क पारंपरक और िनयमब रचना के
 
पीछपड़नेक जरत ह नहंहै
.
रचना ऐसी रिचए जसमपठनीयता हो 
,
सरलता 
 
हो 
,
वाह हो और जसेरच 
-
पढ़ कर मज़ा आए 
.
बस 
.
कटरपंथी आलोचक तो हर दौर 
 
मअपनी बात कहतेह रहगेऔर उनसेहम  घबराना नहंचाहए 
,
जैसा क 
 
जावेद अपनी बात को समा करतेहए कहतेह  ु
-
तुलसी 
 
दास नेजब राम चरत 
 
मानस िलखी तो उसक बरादर नेिनकाल बाहर कया क कस 
घटया जुबान 
 
(
दोहा 
-
छंद तो बाद क बात है
!)
मरामायण जैसी पव कताब िलखी 
.
वैसा ह 
 
सुलूक शाह अदल क़ादर कसाथ हआ था जब उहनेरान का उद म  ु ु
 
तजुमा कया था 
.
 
---
तो 
,
मेर भी ग़ज़लऔर यंज़ल भलेह िनयमाब न ह 
,
और इसीिलए 
 
गुणी जन नकार
,
मेर कोिशश तव क बात को कहनेक रह ह
....
 *-*-*
ग़ज़ल 
1
*-*-*
अवाम को आईना आखर देखना होगा 
 
हर शस को अब ग़ज़ल कहना होगा 
 
यह दौर है यारो उठाओ अपनेआयुध 
 
वरना ता 
-
उ ववशता मरहना होगा 
 
बड़ उमीद सेआए थेइस शहर म
 
लगता है अब कहंऔर चलना होगा 
 
जमानेनेकाट दए ह तमाम दरत 
 
टली बेल कसाए मपना होगा 
 
इक मतुझेया पता नहंथा रव 
 
फूल िमलया कांटे सब सहना होगा 
 *-*-*
-----.
 
पछलेदन चैनल सफग 
(
पीसी पर नहं
)
दौरान महेश भट क एक तीख़ी टपणी 
 
पर बरबस यान चला गया 
.
उहनेकहा थाः पछड़ और ग़रब कनाम से
 
इस देश 
 
मलोग काफ़ धंधा कर रहे ह
,
और उनका शोषण कर रहे ह
...
 
ग़रब और पछड़े हमेशा ह िसयासत कबड़े वोट बक रहे ह
.
जाितवाद नेभारत का 
 

You're Reading a Free Preview

Download
/*********** DO NOT ALTER ANYTHING BELOW THIS LINE ! ************/ var s_code=s.t();if(s_code)document.write(s_code)//-->