''सत्यार्थ प्रकाश'' पर डा. अनवर जमाल की रिसर्च Dayananad-Ne-Kiya-Khoja-Kiya-Paya--by:----Dr.-anwar-

 
 
 
 
 
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पुस्‍तक में है स्‍वामी दयानन्‍द की पुस्‍तक ''सत्यार्थ प्रकाश'' पर इस्‍लामिक विद्वान की रिसर्च

भूमिका से नमूनाः
''जिस भूमि के अन्न-जल से हमारी परवरिष हुई और जिस समाज ने हमपर उपकार किया उसका हित चाहना हमारा पहला कर्तव्य है। मानवता को महाविनाष से बचाने के उद्देष्य से ही यह पुस्तक लिखी गई है। जगह-जगह मिलने वाले दयानन्दी बंधुओं के बर्ताव ने भी इस पुस्तक की ज़रूरत का अहसास दिलाया और स्वयं स्वामी जी का आग्रह भी था-
‘‘इस को देख दिखला के मेरे श्रम को सफल करें। और इसी प्रकार पक्षपात न करके सत्यार्थ का प्रकाश करके मुझे वो सब महाश्‍यों का मुख्य कर्तव्य काम है।’’
(भूमिका, सत्यार्थ प्रकाश, पृष्‍ठ-5)
सो मैंने अपना कर्तव्य पूरा किया। अब ज़िम्मेदारी आप की है। आपका फै़सला बहुत अहम है। अपना शुभ-अशुभ अब स्वयं आपके हाथ है।
विनीत, डा. अनवर जमाल,बुलन्दशहर

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10/07/2009

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‘‘इस को देख दिखला के मेरे श्रम को सफल करें। और इसी प्रकार पक्षपात न करके सत्यार्थ का प्रकाश करके मुझे वो सब महाश्‍यों का मुख्य कर्तव्य काम है।’’ (भूमिका, सत्यार्थ प्रकाश, पृष्‍ठ-5)

10 / 07 / 2009