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डॉ. वीरे संह यादव कदलत वषय संबंधी आलेख का संह 
 
ई-बक  ु: रचनाकार (
http://rachanakar.blogspot.com 
) क तत  ु.
 
शैणक गतवधय सेज  ुड़ेय  ुवा साहयकार डाँवीरेसंह यादव नेसाहियक 
,
सांक  ृतक 
,
धामक 
,
राजनीतक 
,
सामािजक तथा पयावरणय समयाओंसेसबिधत गतवधय को क म रखकर अपना  स  ृजन कया है। इसकसाथ ह आपनेदलत वमशेम
दलत वकासवाद 
'
क अवधारणा को थापत कर उनकसामािजक 
,
आथक वकास का मागभी शत कया है। आपकसैकड़ लेख का  काशन रारय एवंअंतराय तर क तरय पकाओंम हो च   ुका है। आपम ा एवम  ्तभा का अभ  ुत सामंजय है। दलत वमश
,
ी वमश
,
राभाषा हद एवम  ्पयावरण म अनेक प  ुतक क रचना कर च  ुडाँवीरे नेवव क वलंत समया पयावरण को शोधपरक ढंग सेत   ुत कया है।राभाषा महासंम  ुबई 
,
राजमहल चौक कवधावारा व 
0
ी हर ठाक  ुम  ृत प  ुरकार 
,
बाबा साहब डाँ
0
भीमराव अबेडकर फलोशप समान 
2006,
साहय वारध मानदोपाध एवंनराला समान 
2008
सहत अनेक समानो सेउह अलंक   ृत कया जा च  ुका है। वतमान म आप भारतीय उच शा अययन संथान रापत नवास 
,
शमला 
(
ह 
0
 
0)
म नई आथक नीत एवंदलत कसम च  ुनौतयाँ
(2008-11)
वषय पर तीन वषलए एसोसयेट ह।
 
हद दलत आलोचना क परपरा का नया कनन 
 
 
डॉ 
.
वीरे संह यादव 
 
साहय क नमती अनेक सामािजक तर पर होती है तथाप साहय क याया करना कठन ह नहंच  ुनौतीप  ूणहै। इसलए साहय का अथवह भाषा है
,
िजसकवारा सामािजक 
,
राजनीतक 
,
सांक  ृतक 
,
धामक आद सामािजक यवहार से जो साहय नमाण होता है उसम  मानवीय व  ृित ह आधारभ  ूत होती 
 
है। अथात  ्
 
सामािजक समयाओंका तबब उस साहय से होता है। देशकाल 
,
वातावरण 
,
भाषा 
,
संक  ृत 
,
समाजजीवन से सबिधत था परपराओंका वणन उस साहय म वाभावक प से आता है। इसीलए समाज और संक  ृत एक 
-
द  ूसरे केप  ूरक ह   । क  ुछ अपवाद को छोड़ कदेख  तो हद आलोचना म  साहय को जातीय जीवन से जोड़कर देखने क िट का अभाव रहा है। राज शितयां◌े
,
अतशयोितप  ूण 
◌ा◌ृ◌ंगार वणन और कलामक प कत झान 
,
हमार सतह जीवन िट को कट करता है। क  ूप मंड  ूक क तरह अपनी छोट द  ुनया म   मत रहना 
, ‘
अहो प अहो वन 
'
पर म  ुध रहना इसी का परणाम है। हमारा अहंइतना बड़ा है क छोट 
-
छोट बात पर आहत हो उठता है। ये छोट 
-
छोट बात   हमारे लए जीवन 
-
मरण का न बन जाती ह   । हम इसकलए मरने
-
मारने पर उता हो जातेह   । आज भी ये िथतयाँकमोवेश राजनीतक 
-
सामािजक पटल पर य क य दखती ह   । वराट जीवन िट का अभाव ु आडंबर म  ड  ूबने उतराने कलए हम  बार 
-
बार ववश करता है। पछले हजार वष का इतहास इसका साी है। जातीय जीवन से ज  ुड़ी यापक िट कबदले एकांगी जीवन 
-
िटय से जीवन और साहय परचालत होता रहा है। यह कारण है क साहय क म  ुय धारा परपरावादय क िट से ओझल रह है परपरावादय ने अपनी स  ुवधा कलए छोट 
-
छोट िटयाँनमत कर लं
,
उसी म ऊभ 
-
च  ूभ होते रहे तथा समाज का एक बड़ा शोषत 
,
दलत हसा हमेशा इनक आंख से सदैव ओझल रहा है। उसको क म  रखकर कभी परपरावाद 
 / 
सनातनी 
,
चतन गतशील नहंरहा।इसी का परणाम है क गौतम ब  ु क महाकणा या महावीर जैन का अभय और अहंसा इनकलये अपना अथखो देतेह    । ईसवी सन  ्
 
सेलगभग 
500
वषप  ूव महावीर जैन और गौतम ब  ु ने आम आदमी कदः ुख 
-
दद सेअपने को जोड़ा और उसकपधर कप म  खड़ेह  ुए। तब से आम आदमी बनाम अभजात वगका यह वव चलता आ रहा है। सनातनी जीवन और साहय दोन े म  आम आदमी कपधर नहंह   उह  तो स 
-
नाथ क कवताओंतक म  साहय और जीवन 
-
िट का अभाव दखता है।
 
डॉ 
0
रामवप चत  ुव  द भारतीय संक  ृत कअतवरोध पर अपनी टपणी करते ह  ुए लखते ह   क हद  ूमानस कअनेक अतवरोध म  सबसे दलचप है
,
स  ूम अवैत दशन और जड़ीभ  ूत जात 
-
यवथा का सह 
-
अितव। तव 
-
चतन क स  ूमतम भाव 
-
भ  ूम अवैत क परकपना म  है। यह अवैत भावना हद  ूदशन क वशट उपलिध है और इस प म  अय नहंमलेगी। वहंजात 
-
था का 
 
थ  ूप 
-
जम पर आधारत 
,
जात कम  ूल अथम  ह ऐसा कहंनहंमलेगा।जातय का जाल और वगकरण 
,
इतना प  ूणऔर यविथत है क छद 
-
शा का तार याद आ सकता है। आचायहजार साद िववेद क यह टपणी अनायास गणत क अनंत राश क ओर संत करती है क हद  ूसमाज म  नीचे से नीचे समझी जानी वाल जात भी अपने से नीची एक और जात ढं ूढ़ लेती है और यह यंय नहंहै
,
यावहारक सच है तो एकव का परम प अवैत म  और वैवय क बहार जात 
-
था म  
,
ये दोन छोर हद  ूयवथा म  बड़ेइमीनान कसाथ समाए ह  ुए ह   । इस तरह दैव 
-
वधान और कमका महव यहाँदशन म   एक साथ आते ह   भारतीय इतहास ु जीवन 
-
िट और संकणताओंका इतहास रहा है। यह  राजनीत म  अभजात वगका इतहास है जो अपनी ुताओंको अवैतवाद के महान दशन 
?
और संक  ृत या अपंश साहय कचमकदार आलंकारक वणन से  ढ़ंकने कलए यनशील रहा है। इसकसमानातर लोक का वप  ुल वशाल वाह है जो इसकवपरत और व अपने ढ़ंग सेगतशील रहा है। अंतवरोध कबीच अपने को गतशील रखने क यह मता अब तक चल आयी है। तभी तो संभव ह  ुआ क इस देश का एक संवधान वतं आयावतम   मन  ुमहाराज ने रचा था और द  ूसरा देश कफर वाधीन होने पर डॉ 
0
अबेडकर ने रचा। मन  ुवधान मअबेडकर कलए थान नहंथा या नहंजैसा था 
,
अबेडकर कवधान म  मन   ु लए प  ूरा थान है। इतहास 
-
च क यह वलणगत सारे समाज 
-
दाशनक को परेशान करने वाल है। और तब समझ म  आता है क हमारे यहाँधमक यवथा धारण करने कअथम  य क गई है। धमवत  ुतः वह है जो इन अंतवरोध को धारण करने क सामयरखता है। वश   ्◌ोष बात यह है क उससेजीवन कअतवरोध को धारण करने क उपेा क जाए। साहय कइतहास क म  ुयधारा कव आज का दलत साहय इनक छ  ुआछ  ूतवाद 
,
अहंकारवाद 
,
अभजात और गैर बराबर वाल वचारधारा कखलाफ यह समतावाद 
,
ेमम  ूलक आपसी भाई 
-
चारे क सहज जीवन क वचारधारा को लेकर त  ुत होता है।भारतीय इतहास म  सवथम महामा गौतम ब  ु ने जात था को च  ुनौती द थी।इसी य  ुम  संत चोखा ने भी दलत चेतना को साहियक अभयित द थी।स 
-
साहय म  भी दलत वगय चेतना मलती है। चौरासी स म  से अधकांश स दलत वगथे। सरइया 
,
ल  ुइया 
,
डािभया 
,
करइया आद ने मोहमाया सांसारक तथा आडबर का वरोध कर सहज जीवन को महास  ुख का मागबताया 
of 00

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