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Ruskin Bond's Column

Ruskin Bond's Column

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Published by Kamlesh Maheshwari

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Published by: Kamlesh Maheshwari on Dec 29, 2009
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11/29/2012

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मममम मममम मममम ममम
मममममम ममममम
 
 िहं  ु सतान मु   े
 
बडी िशत े अपनी ओर खच रहा था। मै अपन   े  ु टपन क  ेदोसत 
,
 िहं  ु सतानी 
 
गव 
 
  ेनजार और वह क  ेएक छोट  ेे पहाडी कसब  ेकी ीधी 
-
ादी िज ंदगी को ट  ू टकर
 
याद करता 
 
था। मै वाप आन   े  ेिलए ब  ेइंतहा ब  ेचन था। िफर मुझ  ेअपनी िकताब क  ेिलए
50
पाउं एव
 
 िमले। िह ं  ु सतान का िकराया 
40
पाउं था। अब मै वाप अपन   ेघर
 
 िह ं  ु सतान आ रहा था। मै 
 
 िफर े िज ंदा हो उठा था।
 
 िज ाल िह ं  ु सतान आजाद
 
  ु 
,
मेरी उमर
13
बर थी। ज  े ही द  ेश की रजम क  ेदो ट  ु कड  े
 
  ु 
,
ार  े ंजाब
,
बंगाल और द  ू र  ेभािवत इलाक म दंगे भडक उठ  े। न   ेह और द  ू र  ेियाी 
 
न   ेताओं
 
की शित की तमाम अपील और महामा गधी क  ेअनशन क  ेबावजू द दाियकता क  े
 
अंगार  े
 
धधकत  ेरह  े। इ आग न   ेादी की शल अितयार कर ली। यह थोडा ह  रतअंगे
 
लगता ह  
,
लेिकन गोरी चमडी का लडका होन   े  ेबावजू द मै िदली 
,
 िशमला और द  ेहराद  ू न 
 
की डक पर िबना 
 
 िकी ित या द  ु घटना क  ेिबलक  ु ल आजाद घू मता रहा। डक क  े  ु 
 
शरारतबचे जर मु   े
 
कभी 
-
कभी क  ु छ िवशेषण े नवाजत  ेथे और एक बार कॉलेज क  े  ु 
 
छा न   ेमेरी ाइिकल उठाकर नाली म फक दी थी। ले िकन 
 
यह तो िकी और वत म
 
भी हो कता था।
 
मेरी म और प ंजाबी ौत  ेले िपता मुझ  ेहत  ेम दो
-
तीन 
 
शाम को िन   ेमा   ेखन   ेजान   ेे रोकत  ेनह थे और शो क  ेबाद मै प  दल या कभी 
 
अपनी 
 
ाइिकल पर द  ेहराद  ू   ेिवशालकाय पर  ेमदान े होकर पू व नहर क  ेपा अपन   ेघर वाप
 
लौटता था। यह वही नहर थी 
,
जो   ु छ महीन   ेपहले ढ  ेर ारी त
-
 िवत लाश े पटी ह  ु 
 
थी।
 
यह उ िदन की बात ह  
,
जब िन   ेमाहॉल म िफम लॉ इन द सट चल रही 
 
थी। अचानक ोज  ेटर चलत  े
-
चलत  ेक गया 
,
बिय जल ग और मन   ेजर न   ेआकर घोषणा 
 
की िक हमारी िटकट क  े  े लौटा िदए जाए ंगे और हम ब वाप घर जा कत  ेहै।
 
महामा 
 
गधी को अभी 
-
अभी गोली मार दी गई थी। िन   ेमाघर को दोबारा खुले एक हता ही गुजरा 
 
था। कह कोई दंगा 
-
फाद नह 
 
  ु 
,
लेिकन द  ु ख और उदाी क  ेकोहर  ेन   ेपू   ेमु क को
 
 ंक िलया।
 1948
का अंत आत  े
-
आत  े  ेहराद  ू   ेअिधकश अंेऔर
 
 ंलो
-
इं ियन िनवाी द  ेश छोडकर इंलै जा चुक  ेथे। एक ाल क  े
 
बाद मै न   ेिशमला 
 
  ेिबशप कॉट ं सक  ू ल े ीिनयर कै  िज की परीा पा की। िफर मैन   ेभी इंलै
 
जान   े  ेिलए अपना बोिरया 
- 
 िबसतर बध िलया यिक मेरी म को लगता था िक यह 
 
 िह ं  ु सतान म मेरा क  ु छ खा भिवय नह ह  । कई हत की लंबी मुी याा 
 
  े
 
बाद मै न   ेखु द को ज 
,
चनल आइलै क  ेपिलक ह  ेथ िपाटमट म बतौर लक
 
काम करत  े  ु पाया।रकारी कमचारी 
-
मे  े
 
 िलए द  ेखा गया मेरी म का वाब पू रा हो
 
चुका था 
,
लेिकन मेर  ेवाब को घु टन हो रही थी। मै ज म ही ब कता था। मै 
 
अपन   े
 
काम म अछा था और अपन   ेहकिमय   ेबीच काफी मशह  ू र भी था। चाय क  ेमय मै 
 
महान ऑप  ेरा गायक की जोकरई भरी नकल
 
करक  ेउह ह ंाया करता था। लेिकन िह ं  ु सतान 
 
मु   ेबडी िशत े अपनी ओर खच रहा था। मै चमुच अपन   े  ु टपन क  ेदोसत 
,
 िह ं  ु सतानी गव क  ेनजार और वह क  ेएक छोट  ेे पहाडी कसब  ेकी ीधी 
-
ादी 
 
 िज ंदगी को ट  ू टकर याद करता था। मै वाप आन   े  े
 
 िलए ब  ेइंतहा ब  ेचन था। लेिकन ाथ ही 
 
मै एक लेखक भी बनना चाहता था।
 
अगर मै िह ं  ु सतान लौट गया तो या िफ
 
 िलखकर मै अपनी रोजी 
-
रोटी कमा पाऊ ंगा 
?
ज म एक बर गु जारन   े  ेबाद मैन   े
 
सथायी 
 
नौकरी को अलिवदा कहा और लंदन चला गया। वह पर भी मुझ  ेएक दतर म काम
 
करना पडा यिक मे  ेपा आय
 
का कोई और
 
 ोत नह था। दो ाल तक मै न   ेलक 
 
करक  ेिज ंदगी बर की और उी दौरान द  ेर रात अपन   ेिठकान   ेपर लौटन   े  ेबाद मै अपन   े
 
पहले उपया पर भी काम कर रहा था। उ मय मेरी उ उी बर थी 
,
जब मु   ेएक
 
काशक िमला। उ जमान   ेम िकी 
 
लेखक को
50
पाउं की एव रािश िमलना बडी 
 
 िकसमत की बात थी। िह ं  ु सतान का िकराया 
40
पाउं था। मै न   ेअपन   ेबॉ को
 
एक हत  े
 
का नोिट थमाया 
,
 िजन   ेमु   ेशु भकामना दी और एक ू टक  े उपहार म िदया 
(
हालिक वह
 
ू टक  े िनहायत ही कमजोर
 
था 
,
ले िकन आज तक मेर  ेपा ुरित ह  
)
। मै अपन   ेघर
 
 िह ं  ु सतान वाप आ रहा था। मै िफर े िज ंदा हो उठा था।
 
  ेहराद  ू न यादा 
 
नह बदला था। पचा क  ेदशक क  ेमय म द  ेहराद  ू न छोटा ा पहाडी कसबा था 
,
जह 
 
बह  ु त ह ंगामाखेज क  ु छ भी नह 
 
होता था। लेिकन वह की ाक यवसथा बह  ु मु सत  और
 
  ेज रतार थी और बह  ु त जद ही मै अखबार और पिकाओं क  ेंपादक 
 
पर अपनी 
 
कहािनय और लेख े बमबारी कर रहा था। तब भारत म िकताब का काशन िफ
 
सक  ू 
-
कॉलेज की को की िकताब 
 
तक ही ीिमत था और अपनी आजीिवका कमान   े  ेिलए मुझ  े
 
 िंट मीिया म िलखना था 
,
 िजका अथ था ढ  ेर ार  ेराीय और क  ु 
 
ेीय
 
अखबार और एकािधक पािरवािरक पिकाए ं। यह तब की बात ह  
,
जब   ेलीिवजन नह आया था और
 
घर म मनोर ंजन   े ियो
,
 िरकॉ लेयर
,
  रम बो और क  ु छ पिकाओं तक ही ीिमत
 
था। मै बीबीी और ऑल इं िया र  े ियो क  ेिलए भी िलखा करता था।
 
 
पर िह ं  ु सतान 
 
  ेाथ मेर  ेतालुक का या ह  ु 
?
या मै वाप आकर खुश था या और लोग की तरह
,
जो
 
जद ही वाप लौट गए
,
मै भी िनराश था। अब ोचता ह  ू  ं िक मै बह  ु त भायशाली था। एक
 
तो मै न   ेकभी बह  ु त यादा की उमीद नह की और द  ू र  ेमु   ेनौकरी 
 
  ेिलए भटकना नह 
 
पडा। मै न   ेीलिंग े रोजी 
-
रोटी का बंदोबसत कर िलया और िपछले पचा ाल े
 
यह काम कर रहा ह  ू  ं
 
 िफर कभी मेर  ेिह ं  ु सतान छोडन   ेकी नौबत नह आई। लेिकन इ द  े
 
म ही िकतनी ारी तलाश अभी अधू री   । िकतना कुछ द  ेखना 
 
और िलखना बचा ह  ु   मै 
 
 िफ पहाड और उरी भारत क  ेमदानी इलाक े वािकफ ह  ू  ं
(
मुक क  ेऔर िहस 
 
को ब गुजरत  े  ु 
 
थोडा ा जाना ह  
)
ले िकन इ द  ेश की धरती और इंािनयत का यह
 
 िवसतार भी कम नह ह  
 
एक िदन एक यु वक न   ेमु झे पू छा 
, ‘
या चीज आपको
 
 िलखन   े  ेिलए ेिरत करती ह  
?’ ‘
लोग
,’
मै न   ेतकाल उर िदया।
लोग क  े
 
बगर
 
कोई कहानी मुमिकन नह।
उन   ेहमित म िर िहलाया 
,
ले िकन िफर तु  ंत ही गु गली फ
 
मु   ेिच कर िदया।
 िफर आप
 
इतनी ारी भू त की कहािनय य िलखत  ेहै 
?’
पहले
 
ण भर को मै घबराया 
,
ले िकन िफर सवीकार िकया 
, ‘
जब लोग की कमी पड
 
जाती ह  तो
 
मै भू त पर िलखन   ेलगता ह  ू  ं। और जो भी हो
,
वो भी तो कभी इंान थे
!’
लेिकन मै 
 
सवीकार करता ह  ू  ं िक मेर  ेभू त यादातर
 
कापिनक है।
 60
  ेदशक म वाप
 
चलत  ेहै । तब इ मु क े अंेजी भाषा को हटान    े  ेिलए आंदोलन हो रह  ेथे
अंेजी हटाओ
मशह  ू र नारा 
 
था। शोषक क  ेाथ
-
ाथ उनकी भाषा े भी आजादी िमलनी 
 
चािहए। लेिकन आज अंेजी ीखन   े  ेिलए होड मची ह  ु   और मै 
 
ऐे नौजवान े
 
 िमलता रहता ह  ू  ं
,
जो चमुच िकताब पत  ेहै। उमीद करता ह  ू  ं िक िकताब पन   े
 
वाल की जमात म इजाफा हो।
 
  ेशक उनम े बह  ु तायत इंटरन   ेट पर पत  ेहै 
,
अछी 
 
बात ह  । अगर इंटरन   े  ेश की और तमाम भाषाओं को भी आगे बाए तो बह  ु 
 
अछा ह  मै 
 
ािहय की हर िवधा का तह  े िदल े मान करता ह  ू  ं। ािहय न   ेमु   ेबचाए रखा ह  और
 
मुझ  ेिज ंदगी बशी ह  
मममम ममममममम ममम मम मममममममममम ममम
,
ममममममम मममममममम मम ममममम ममम मम
============================================================= 
आंख का वह नीला र ं
 
रिसकन बॉ
इतन   े
 
मय े मेरा िलखा पत  े
-
पत  ेपाठक को अब तक य  ेतो मझ म आ ही गया होगा िक बंदर
 
हमेशा मेर  ेपीछ  ेपड  ेरह  ेहै 
 
और मु   े ंग करत  ेरह  ेहै । और मेर  ेयार  ेपाठको
!
ऐा 
 
ोचकर आप क  ु छ गलत भी नह कर रह  ेहै। और इ मय
,
जब मै य  ेिलख
 
रहा ह  ू  ं
,
अभी भी एक
 
बंदर मेरी िखडकी पर ब  ठा   ु आ अपनी खी िनपोर रहा ह  । िकसमत े िखडकी बं  और
 
वह भीतर नह आ
 
कता। मै उकी ओर नजर करक  ेउे जीभ िदखाता ह  ू  ं और वो रकर पीछ  े
 
हट जाता ह  । ऐा लगता ह    े मै उे अपन   ेदोसत 
 
और िरत  ेदार े कह यादा 
 
भयानक नजर आता ह  ू  ं
 
लेिकन हर बार ऐा नह होता था। क  ु छ ाल पहले की बात ह  । उ मय मै ज ंगल क  े
 
आिखरी िर  ेपर रहता था। उ मय एक
 
छोटी ी बंदिरया चुपचाप शरमाती ह  ु ई ी मेरी 
 
 िखडकी क  ेचौखट पर ब  ठी रहती थी और बडी दोसताना िजाा और उुकता े मेरी 
 
ओर
 
  ेखती रहती थी। उकी िबरादरी क  ेिकी और दसय न   ेएक इंान क  ेप म मुझम कोई
 
िच नह िदखाई
,
 िफ उ छोटी 
 
ी बंदिरया को छोडकर। मै भी उे एक बंदर े
 
यादा एक इंान क  ेप म द  ेखता था।
 
हर ु बह जब मै ब  ठा अपन   ेटाइपराइटर पर काम कर रहा होता था तो वह आ जाती थी और
 
वह चुपचाप ब  ठी रहती थी। जब मै कोई
 
कहानी या लेख टाइप कर रहा होता तो उकी 
 
 िनगाह मु झ पर ही िटकी रहती थ। शायद यह मेरा टाइपराइटर था 
,
जो उे आकिषत
 
करता 
 
था। लेिकन मु   ेयह ोचना अछा लगता ह  िक वह मेरी नीली आंख   ेआकषण म बंधी 
 
  ु ई थी। उकी आंख भी नीली थ।
 
अकर ऐा नह होता ह  िक लडिकय मु   ेलेकर
 
मानी कपनाए ंकरती ह 
,
लेिकन मुझ  ेयह ोचकर बह  ु त अछा लगता ह  िक वह
 
छोटी ी 
 
बंदिरया मेर  ेित आकिषत थी।
 
 
 
उकी आंख म एक शत
,
ौय और अपनी ओर खचन   ेवाला भाव था। वह बह  ु 
 
धीर  े
-
धीर  ेमुसकराती और िकटिकट की आवाज
 
करती थी। इ आवाज को मै यू  ं मझता था िक
 
मानो यह कोई अंतर ंग बातचीत हो। अगर मै उकी ओर द  ेखता तो वह अखरोट क  े
 
  ेड की ाली 
 
े   ू दकर मेरी िखडकी पर आकर बठ जाती थी और मेरी ओर ऐी नजर े द  ेखती मानो कह
 
रही हो िक मै भी वह 
 
उक  ेपा जाऊ ं। लेिकन मेर  े  ेड पर चन   े  ेिदन बीत चुक  े
 
थे। ाथ ही मै उक  ेमाता 
-
 िपता और जान 
-
पहचान वाल े बह  ु 
 
खौफ भी खाता 
 
था।
 
एक िदन मै कमर  ेम आया और द  ेखा िक वह टाइपराइटर पर ब  ठी   ु ई उक  ेबटन े खे
 
रही थी। जब उन   ेमुझ  े  ेखा तो भागकर
 
वाप िखडकी पर चली गई और मेरी तरफ अपराध
-
बोध
 
भरी नजर े द  ेखन   ेलगी। मै न   ेटाइपराइटर पर लगे   ु ए कागज की ओर
 
 िनगाह घुमाई। या 
 
वह मे  ेिलए कोई ं  ेश टाइप कर रही थी 
?
कागज पर क  ु छ इ तरह िलखा ह  ु आ था 
- *!,.-
;:0 -
और इक  े
 
बाद प ं ित टूट गई थी। मु   ेपू रा िवा ह  िक वह
लव
 िलखन   ेकी कोिशश
 
कर रही थी।
 
लेिकन मु   ेकभी भी पे तौर पर इ बात का पता नह चल पाया िक वह या िलखना 
 
चाह रही थी। जाडा आया 
,
  ेज बफ पडनी 
 
शु  हो गई और उन बंदर की पू री िबरादरी ही 
 
वह े चली गई। मेरी छोटी बंदिरया को भी व  ेअपन   ेाथ लेत  ेगए। उक  ेबाद मैन   े
 
उे
 
दोबारा कभी नह द  ेखा। शायद उकी िबरादरी क  ेलोग न   ेउकी कह शादी कर दी 
 
होगी।
 
जब भी शादी क  ेबार  ेम बात चलती ह  तो अकर ही मेर  ेाथ हानु भू  ित रखन   ेवाले
 
पाठक ारा मु झे यह वाल पू छा जाता ह  िक
 
आिखर मैन   ेकभी शादी य नह की 
?
यह एक बह  ु त लंबी और द  ु खद कहानी ह  । यह इन बात क  ेबीच उ द  ु खभरी कहानी का िज
 
कतई वािजब नह होगा। लेिकन उकी जगह मै अपन   ेएक अंकल बथ की कहानी ुना कता 
 
  ू  ं िक य उहन   ेकभी शादी नह 
 
की। अंकल बथ जब जवान थे तो व  ेइशापोर राइफल
 
  ी म काम करत  ेथे। यह फ  ी कलका क  ेबाहर थी।
 
आजादी क  ेपहले िह ं  ु सतान म बह  ु त ार  े ंलो इं ियन और यू रोपीय मु दाय क   ेलोग
 
रहत  ेथे। उनम े बह  ु त ार  ेलोग उ फ  ी म
 
नौकरी करत  ेथे। अंकल बथ थोडा 
 
अधीर और जदबाज िकसम क  ेयित थे। व  ेएक लडकी े ेम करत  ेथे
,
जो वह डक
 
की 
 
  ू री ओर रहा करती थी। एक िदन की बात ह  बह  ु त भीड
-
भडे और शोरगुल क  ेनजदीक
 
ही आम का एक बगीचा था। उ बगीचे
 
म उहन   ेबडी अधीरता और ब  ेताबी े उ लडकी क  े
 
ामन   ेिववाह का सताव रखा। वह लडकी बह  ु त उाह और खुशी े िववाह
 
  ेिलए राजी 
 
हो गई।
 
लडकी उने उ म बडी थी और काफी लंबी भी। उ लडकी का िफगर
46-46-46
था। उ
 
लडकी को मर  े िलन िदएिच या 
 
मिलन मु नरो े जर रक रहा होगा। लडकी क  े
 
माता 
-
 िपता शादी क  ेिलए राजी हो गए थे। िववाह की ारी त  यािरय पू री हो चु की 
 
थ 
,
जब अंकल बथ न   ेअपन   ेइ िनणय क  ेबार  ेम एक बार िफर े िवचार करना शु  िकया।
 
वह हमेशा हर चीज क  ेबार  ेम दोबारा 
 
ोचत  ेथे। जब उनका वह थोड  ेमय का आकषण खम
 
हो गया तो उह इ बात पर आय होन   ेलगा िक बे पहली बात तो यह
 
 िक उहन   े
 
उ लडकी म आिखर ऐा या द  ेख िलया। उ लडकी को नाचना पंद था और बथ नाच नह 
 
पात  ेथे।
 
उका पना िफ क  ु छ िफमी पिकाओं ज  े हॉलीवु या रोम तक ही ीिमत था 
,
जबिक अंकल बथ मिम गोक और एिमल
 
जोला को भी पा करत  ेथे। वह खाना नह बना 
 
कती थी और न ही अंकल को खाना बनाना आता था। खानामा रखना बह  ु 
 
खचला था। उे
 
बाहर खरीदारी क  ेिलए जाना बह  ु त पंद था और बथ अंकल की तनवाह थी तीन ौ पया 
 
महीना। शादी की 
 
तारीख पी हो गई। वह महान िदन आ पह  ु  ंचा और चच ढ  ेर ार  ेिम 
,
 िरत  ेदार और शु भिचंतक े भर उठा। पादरी न   ेअपना गाउन 
 
पहना और िववाह की 
 
िया शु करन   े  ेिलए त  यार हो गया। द  ु न अपन   ेफ  ेद शादी क  ेजोड  ेम जी 
 
  ु ई थी। इी जोड  ेम
 
उकी म की भी शादी ह  ु ई थी। लेिकन अंकल बथ का वह कोई
 
अता 
-
पता नह था। आधा घ ंटा गुजर गया। िफर एक घ ंटा 
,
दो  ंटा 
 
बीत गया 
,
लेिकन द  ू   े
 
का कह पता नह चला।
 
दरअल अंकल बथ कलका े भाग गए थे और कह जाकर भू  िमगत हो गए थे। उक  ेबाद
 
  ु छ मय तक व  ेभू  िमगत ही रह  े
 
इशापोर म हर कोई उनक  ेलौटन   ेका इंतजार कर रहा था।
 
उन भी न   ेबह  ु त अलग
-
अलग और मज  ेदार तरीक  ेे ोच रखा था िक व  े
 
अंकल बथ क  ेाथ
 
या करगे। उनम े क  ु छ लोग तो आज भी उनका इंतजार कर रह  ेहै 

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