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Hindi Ki Bhoomika New

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प्रो. महावीर सरन जैन की ई-किताब : महावीर सरन जैन की किताब : हिंदी की अन्तर-क्षेत्रीय, सार्वदेशीय एवं अंतरराष्ट्रीय भूमिका
प्रो. महावीर सरन जैन की ई-किताब : महावीर सरन जैन की किताब : हिंदी की अन्तर-क्षेत्रीय, सार्वदेशीय एवं अंतरराष्ट्रीय भूमिका

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Published by: Ravishankar Shrivastava on Jul 09, 2010
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01/22/2014

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 रचनाकार क त  ु त.
 
 हं द क अंतरे ीय, साव देशीय एवं अं तरराय भ   ू मका 
 
 –
ो. महावीर सरन जैन 
 
    1 
 ई 
-
 ब  ु क 
(http://rachanakar.blogspot.com)
क त  ु त 
 
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------
 हद क 
 
अतर 
-
ेीय 
,
 सावदेशीय 
 
एवं
 
अतरराय 
 
भ  ू मका 
 
ोफसर महावीर सरन जैन 
 
एम 
0
ए 
0,
डी 
0
 फल 
,
डी 
0
 ल 
0
(सेवानव  ृ   त नदेशक 
,
 क  य ह  द सं थान)
123,
हरए  कलेव 
,
 चां दप  ु र रोड 
,
 ब  ु लदशहर 
-
 
203001
 
 अन  ुम 
 
 अयाय 
1
.
 
हद भाषा का े एवंहद केगत प 
 अयाय 
2
.
 
हद एवं उद  ू  का अवैत 
 
 अयाय 
3
.
हद भाषा क सावदेशीय भ  ूमका ( भारत म हद का सपकभाषा कप म यवहार 
 
 अयाय 
4
.
 
वदेशी ववान वारा हद वामीमांसापरक अययन 
 
(
 फलॉलािजकल टडीज) (सन  ् 
1940
ईवी तक)
 
 
 
 रचनाकार  
 क त  ु त 
.
 
 हं द क अंतरे ीय 
,
 साव देशीय एवं अं तरराय भ  ू मका 
 
 –
 ो 
. महावीर सरन जैन 
 
    2 
 अयाय 
5
.
वदेश म हद शण 
:
समयाएँ और समाधान 
 
 अयाय 
6
.
वतीय महाय  ु 
 
पचात  ्वदेश म हद भाषापरक अययन 
 
 अयाय 
7
.
वतीय महाय  ु कपचात  ्वदेश म हद साहय स  ृजन एवंसाहय समीा 
 
 अयाय 
8
.
वतीय महाय  ु कपचात  ्हद क साहियक क  ृतय का वदेशी भाषा म तथा वदेशी साहियक क  ृतय 
 /लोककथाओं 
का हंद म अन  ुवाद 
 
 अयाय 
9
.
 
संय  ुत रा संघ क आधकारक भाषाएँ एवं हद 
भ    ूमका  
 
 वाधीनता कलए जब 
-
 जब आदोलन ती ह  ुआ 
,
 तब-
 तब हद क गत का रथ भी ती गत से आगेबढ़ा। हद  राय चेतना क तीक बन गई। हद को राभाषा क मायता उन नेताओंकारण ात ह  ु ई िजनक मात  ृभाषा  हद नहं थी। वाधीनता आदोलन का नेत  ृ व िजन ने ताओंहाथ म था उहने यह पहचान लया था क वगत 
600-700
 
 वष से हद सप  ू णभारत क एकता का कारक रह है
,
 यह संत 
,
 फकर 
,
 यापारय 
,
 तीथयाय 
,
 सै नक वारा  देश कएक भाग से द  ू सरे भाग तक य  ु त होती रह है। बंगाल कशवच सेन 
,
 राजा राम मोहन राय 
,
 रवीनाथ ठाक  ु र 
,
नेताजी स  ुभाष च बोस 
,
 पंजाब कबपनच पाल 
,
 लाला लाजपत राय 
,
ग  ु जरात कवामी दयानद 
,
 रापता महामा 
गाँधी 
,
महारा 
 
 कलोकमाय तलक तथा दण भारत कस  ु मयम भारती 
,
मोट  ू र सयनारायण आद ने ताओंरा भाषा हद 
 
 कसबंध म यत वचार से मेरे मत क संप  ु िट होती है।
 
 जब संवधान सभा ने देश क राजभाषा कसबध म वचार कया तब तक राय चेतना क धारा का वाह इतना ते ज था क सं वधान सभा ने एकमतेन हद को संघ क राजभाषा घोषत कया। सं वधान सभा म इस वषय पर कोई मतभेद   कभी नहं ह  ुआ क सं घ क राजभाषा हद को बनाया जाए अथवा नहं
 
 बहस का म  ु ा कभी भी यह नहं रह क संघ क  राजभाषा हद को बनाया जाए अथवा अंे जी को। दनां क 
8
 
नवबर 
, 1948
 
 को देश कधानमंी पं डत जवाहर लाल नेह 
ने एक अखल भारतीय भाषा क आवयकता 
'
 पर बल देतेह  ुए यह पट कहा क एक वतं  देश को अपनी ह 
 
 
 रचनाकार  
 क त  ु त 
.
 
 हं द क अंतरे ीय 
,
 साव देशीय एवं अं तरराय भ  ू मका 
 
 –
 ो 
. महावीर सरन जैन 
 
    3 
भाषा म राजकाज चलाना चाहए तथा यह भाषा अतत 
:
 जनता कमय से ह वकसत होगी 
(
 काटय  ू ट एसेबल  डबेस 
,
 दनां क 
8 - 11 - 1948)
। बहस कम  ु े रहे क 
(
1)
अंे जी कचलते
 
 रहनेक अवध 
10
 
 वषरखी जाए अथवा 
15
 
 वष 
(
2)
 हद का वप कसा हो 
(
3)
अं क देवनागर कनागर अं क ह अथवा अतररा 
 य 
ह।
26
 
अगत 
,1949
को इस 
 वषय पर काफ बहस ह  ु ई िजसम म  ु य म  ु ा अं को का था। मतदान म समान मत पड़े। यह मत वभाजन इतना चच त 
ह  ु
आ क बाद म अंे जी कक  ु छ ववान नेयह मथक गढ़ दया क सं वधान सभा म इस वषय पर बहस ह  ु ई क सं घ  क राजभाषा हद हो अथवा अंे जी हो। वातव म सं वधान सभा नेएकमतेन अथा त सव समत से संघ क राजभाषा   हद को वीकार कया।
14
 
 सतबर 
,1949
को भा 
 र तालय क गड़गड़ाहट म
म  ु ंशी - आयंगर 
'
 फाम  ू लावीकार करते ह  ुए जब हद राजभाषा कपद पर एकमतेन तिठत ह  ु ई तो सभा अय नेअपने जो उगार यत कया वह  तकालन सभा कसदय कमनोभाव को आमसात करनेका लखत दतावे ज है
:
आज पहल बार हम अपने सं वधान म एक भाषा वीकार कर रह ह जो भारत सं घ कशासन क भाषा होगी।
- - -
हमने अपने देश का राजनै तक एककरण  सपन कया है। राजभाषा हद देश क एकता को कमीर से कयाक  ुमार तक अधक स  ु ढ़ बना सकगी। अंे जी क  जगह भारतीय भाषा को थापत करने से हम नचय ह और भी एक द  ू सरनज़दक आयगे
'
 वतं ता ाित कबाद सताधीश ने सामाय जन से अपनी द  ू र दखाने तथा सामाय जन को अपनी भ  ु ता दखाने के लए सामाय जन क भाषा को शासन एवं शण क भाषा नहं बननेदया। तकदया गया 
-
 हद म वैानक एवं  तकनीक शदावल का अभाव है। वैानक एवं तकनीक शदावल आयोग का गठन कर दया गया। काम सप दया गया 
-
शद बनाओ 
,
शद गढ़ो। आज िथत यह है क एक ओर हद कमात  ृभाषय क संया वव म चीनी भाषा कबाद  सवा धक है तथा इसका 
 
 चार सार एवं अययन अयापन अतरराय तर पर है वहंद  ू सर ओर क  ु छ ताकत हद  को उसकअपनेह घर म तोड़नेका क  ु च रच रह ह। इनक शित ययप कम नहंहै फर भी मेरा आकलन है क  हद को आगेबढ़नेसे अब कोई ताकत रोक नहं सकती यक हद नरतर आगे बढ़ रह है। बीसवीं शताद कअितम चरण म एक समेलन का समापन करतेह  ुए मने यह मत यत कया था क 
19
 वींशताद च भाषा क थी 
,20
 
 वीं शताद अंे जी भाषा क थी तथा 
21
 
 वीं शताद हद क होगी। इस मत क थापना ककारण थे
- भाषा बोलने
 वाल क सं या 
,
भाषा यवहार े  का वतार 
,
 हद भाषा एवं लप यवथा क सं रचनामक वशे षताएँ
,
भवय म कय  ू टर के  म
Text to Speech
 तथा 
Speech to Text
 तकनीक का वकास 
,
भारतीय म  ू ल कआवासी एवं अनवासी भारतीय क संया 
,
मशित 
,
मानसक तभा म नरतर अभव  ृ ।
 
 सन  ् 
1998
 
 कप  ू व
,
मात  ृभाषय क संया क िट से वव म सवा धक बोल जाने वाल भाषाओंजो आं कड़ेमलते 
थे
,
उनम हद को तीसरा थान दया जाता था। सन  ् 
1991
 
 कसै सस आफ इिडया का भारतीय भाषाओं
 
 कवलेषण का थ ज  ु लाई 
, 1997
 
म काशत ह  ुआ 
(दे
0 Census of India 1991 Series 1 - India Part I of 1997, Language : India andstates - Table C - 7)
 य  ूने
 को क टेनीकल कमेट फॉर द वडलवेिजज रपोट नेअपने दनां क 
13
ज  ु लाई 
, 1998
 
 कप  कवारा य  ूनेको 
-
 नावल कआधार पर हद क रपोट भेजनेलए भारत सरकार से नवेदन कया। भारत सरकार नेउत दायव कनवाह कलए कय हद सं थान कतकालन नदेशक ोफसर महावीर सरन जैन को प लखा। ोफसर महावीर सरन जैन ने दनां क 
25
मई 
,1999
 
 को य  ूने को को अपनी वत  ृ त रपोट भेजी। ोफसर जैन ने वभन भाषाओं कामाणक आं कड़ एवं तय कआधार पर यह स कया क योताओंक  िट से वव म चीनी भाषा कबाद द  ू सरा थान हद भाषा का है। रपोट तै यार करते समय ोफसर जैन ने टश  काउिसल आफ इिडया से अंे जी मात  ृभाषय क प  ू रे वव क जनसं या कबारे म तयामक रपोट भेजने कलए  नवेदन कया। टश काउिसल 
ऑ 
 फ इिडया ने इसकउतर म गनीज ब  ु क आफ नालेज 
(
1997
 
 सं करण 
,
 प  ृ ठ 
-
57)
 फस वारा भेजा। टश काउिसल वारा भेजी गई स  ू चना कअन  ु सार प  ू रे वव म अंे जी मात  ृभाषय क संया 

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