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सफलता की कुंजी

सफलता की कुंजी

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05/01/2013

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 / ?
 
रस मे एक बहत  ु बड  लखक हए  ु है 
,
इतन बि ि    ु नयाउहेजान 
 
उनका नाम था िलयो टॉटॉय
,
प हमा    श मे उहे महि टॉटॉय कहत    । उहन   
 
बहत  ु 
-
सी िकताबे िलखी ह  । इन िकताब मे बडी अचछी 
-
अचछी बाते ह  । उनकी कहािनय का 
 
तो कहना ही या 
!
एक
-
स एक बिया ह  । उहे पत  
-
पत  जी नह भता।
 
इह टॉटॉय की एक कहानी ह  
-‘
आदमी को िकतनी जमीन ािहए
.?’
इस कहानी 
 
मे उहन यि
-
बस के िलए िकनती मीन की 
 
जरत ह  । उहोने तो दस  ू ी ही बात कह ह  । वह कहत  है िक आदमी यादा 
-
स
-
यादा 
 
जमीन पान कि एकिशकाह  
,
उसक  िलए ह  ान होता ह  
,
भाग
-
दौड कता ह  
,
प
 
आिख मे िकतनी जमीन उसक  काम आती ह  
?
  ु 
:
  ु 
,
 िजसमे वह हमशा   िलए सो
 
जाता ह  
 
य कहन क  
,
प इसमे दो बाते बड  पत  की कही गयी ह  । पहली यह
 
 िक आदमी की इचछाऍ ं
,
कभी पू ी नही होत। ज  स
-
  स आदमी उनका गु लाम बनता जाता ह  
,
  औ बती जाती है। दस  ू   
,
आदमी आपाधापी कता ह  
,
भटकता ह  
,
प अत मे उसक  
 
साथ क  ु छ भी नह जाता।
 
आपको शायद मालू म न हो
,
यह कहानी गधीजी को इतनी पद आयी थी िक उहोने
 
इसका गुजाती मे अनु वाद िकया। हजा कािपयॉँ छप औ लोग क  हाथ मे पहँ  ु । धती 
 
  लाल मे भागत  
-
भागत  जब आदमी मता ह  तो कहानी पन वखगीलीहो
 
आती ह  । उनका िदल कह उठता ह  
-‘
ऐसा धन िकस काम का 
!’ 
अपनी इस काहानी मे टॉसटॉय न ज  
,
ठीक वह बात हमा  साधु 
-
त
,
औ यागी 
-
महामा सदा स कहत  आय    । उहोन किकयहदि    ु नयाएकमाया 
-
जाल ह  
 
जो इसमे फ  ँ सा िक िफ िनकल नह पाता। लमी यानी धन 
-
दौलत को उहन लामाना 
 
    कहत  है 
, “
  सा िकसी क  पास नह िटकता। जो आज ाजा ह  
,
वही कल को िभखाी 
 
बन जाता ह  
 
आदमी इस दि    ु नया मे खाली हाथ आता ह  
,
खाली हाथ जाता ह  । िकसी न कहाह  न 
: 
आया था यहॉँ िसकद
,
दि    ु नया स ल गया या 
? 
थ दोन हाथ खाली 
,
बाह कन स िनकल।
 
संत कबी न य  ू    ंगसकहीह  
: 
कबी सो धन सं िय  
,
जो आग क  ू   ँ होइ।
 
सीस ाय  पोटली 
,
जात न द  खा कोई।।
 
उद कू ू किवनजीनज  ोकहाह  
, 
वह तो बच
-
बच की जवान प ह  
: 
सब ठाठ पडा ह जाय  गा 
,
 
जब लाद लगा बज ंाा।
 
एक मुसलमान त न त  
,
इस ंान 
,
दौलत की वािहश न क। सोन म  
,
 
 
उसकी मौजू दगी मे मुह   ु बत खु दगज औ ठ ंी हो जाती ह  
 
घमं ओ िदखाव  का बुखा  जाता ह  
 
आप कहग ं
,
वाह जी वाह
,
आपन तू 
 
 िबना धन क  िकसका काम लता ह  
?
साधु 
-
त की बात छोड दीिजए
,
ल िकन िजसक  घ
- 
बा ह  
,
उस खान कोअािहए
,
पहनन कऔहनक  ोमकानािहए।
,
आप
 
या जानत  नह 
,
 िजसक  पास प  सा   
,
उसी को लोग इजत कत  है 
,
गीब को कोई नह 
 
पू छता।
आपकी बात मे साई ह  
,
प एक बात बताइए
—“
आप ोटी खात  
 
है 
?”
जी हॉँ। सभी खात  है।
 िकसिलए
?”
  ट भन क िलए।
जानव खात  है 
?”
जी हॉँ।
 िकसिलए
?”
  ट भन क िलए
?”
ठीक। अब मुझ  यह बताइए िक जब आदमी औ जानव दोन प  ट भन किलएखात  है 
 
तो िफ दोन मे या अत या हा 
?”
यह भी आपन खू बकही 
!
साहब
,
आदमी आदमी ह  
,
जानव जानव।
यह तो मै भी मानता ह  ू   ँ 
,
प मा सवाल तो यह ह  िक उन दोन मे अत या ह  
?”
अत
!
त  िक जानव खान किलएजीताह  
,
आदमी जीन क िलए
 
खाता ह  
वाह
,
आपन त 
 
जब आदमी जीन किलएखाताह  
,
तब उसक  जीवन को कोई उ  य धन कमाना नह हो
 
सकता। धन कमान क    टक   िलएजीना 
;
औ जो प    िलए जीता ह  
,
उसका प  ट कभी नह भता। आदमी ितजोी मे भी जगह को नह द  खता। उसकी िनगाह
 
खाली जगह प हती ह  । इसी को
 िनयानव  का   
कहत  है । वामी ामतीथ न ए  
 
बडी सु द कहानी िलखी ह  । एक धनी आदमी था। वह ओ उसकी ी 
,
दोन ह घडी 
 
  शान हत  थ औ अस आपस मे लडत  हत  थ। उनका पडोसी गीब था 
,
 िदन 
-
भ
 
मजू ी कता था। औत घ का काम कती थी। ात को दोन न की नद सोत  थ। एक
 
 िदन धनी ी न क  हा 
, “
इन पडोिसय को द  खो
,
  स न स हत  है 
!”
आदमी न क  हा 
, “
ठी 
 
क कहती हो।
 
अगल िदन उसन ि  ि ि  प
 
पडोसी क  घ मे ाल िदया। पडोसी न रख।उसकीआँखमक
 
लोभ न उो  व ह ि न     सौऔसोक  एक
 
 िफ या था 
!
उसकी नद हाम हो गयी। सुख भाग गया। महनत की खी कमाई का 
 
आनद सपना हो गया।
 
हममे स ादात लोग ऐस ही  मे पड    । हम यह भू ल जात    िक इस  मे
 
कह सु   तो वह नकली ह  । सुख स अिधक द  ु 
:
  । असल मे प  सा अपन   
-
आपमे बुा 
 
नह ह  बु ा   उसका मोह। बु ा   उसका संह। ोी 
-
पान   
 
का अिधका सबक है 
,
प
 
  सा जोडक खन काअिधका
 
 िकसी को भी नह ह  
 
आाय िवनोवा न ब  
,
धन 
 
को धाण कन पवहिनधन 
(
मृयु 
)
का काण बन जाता ह  
 
इसिलए धन को
य
बनना ािहए। जब धन बहन लगताह  
,
तभी वह य बनता ह  । य बनन प  
 
 
गधीजी क  शद मे
,
सची दौलत सोना 
-
ॉँदी नह 
,
बिक वय मु षयहीह  ।धन 
 
की खोज धती क  भीत नह 
,
मनु षय     ृदय मे ही कनी ह  
 
 िजस समाज औ द    पास इस ंान की दौलत ह  
,
उसका मुकाबला कौन क सकता 
 
  
!

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