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5 Satyug Ki Vapasi

5 Satyug Ki Vapasi

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Published by Brijesh Verma
5 Satyug Ki Vapasi doc
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Published by: Brijesh Verma on May 23, 2012
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05/23/2012

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 गमंथ  
:
 
ॐ भू भु  वः वः
 
 सिवु व   रे णयं
 
भगो दे वय धीमिह 
 
 धय य नः पचदया्
 
 उस पाव 
,
 द   ुःखनाशक 
,
 सु खव 
,
ेष 
,
 े जवी 
,
 ानाशक 
,
 दे वव रमामा क हम अनी 
 
अं ःकर म   धार कर   
.
 वह रमामा हमारी बु  क समाग  म   पे र करे
. -
 
 ऋवेद ३
/
६२
/
१०
,
 सामवेद १४६२
,
 यजु व     द ३
/
३५
,
२२
/
,
३०
/
,
३६
/
.
Gayatri Mantra and its meaning:
Om bhurbhuvaha swahatatsaviturvarenyambhargo devasya dhimahidhiyo yo naha prachodayat.We embrace that supreme being, the effulgent divine sun, the ultimate life force, omnipresentand omnipotent, the destroyer of all sins and sufferings and the bestower of bliss. May he inspire andenlighten our intellect to follow righteous path. -Rigveda 3/62/10, Samveda 1462, Yajurveda 3/35,22/9, 30/2, 36/3.
 
 
 सय   ु ग ी 
- (
 
 ि ा 
- 05)
 सर 
-
 
 संे 
 
 इस सदी क समान वेला म   अब क ह    ई पगि बाद एक ही िनक  िनकला है िक सं वेदना का  
 
 ेजी से सू  खा है
,
 मानवी अराल खखला ह   आ है। भाव 
-
 
 सं वेदना जहाँ जीव 
-
 
 जा्ही है
,
 वहाँ व 
:
 ही 
 
 सय   ु गी वाावर िविनिम    हा चला जाा है। भाव 
-
 
 सं वेदना से भरे
-
 
 ू  रे य ही उस रीि 
-
 
 नीि क समझ ाे
 
 ह   
,
 जसकआधार र सदाओं का 
,
 सु िवधाओं का सद   ु यग बन ाा है समथ   ा 
,
 क   ुशला और सा क आए िदन जय 
-
 
 जयकार ही दे खी जाी है। यह भी सु िनच है िक 
 
 इह ीन ेत म   ली अराजका ने वे सं कट खडे िकए ह   
,
 जनसे िकसी पकार उबरने लए य और समाज 
 
 छटटा रहा है। इन ीन से ऊर उठकर एक चौथी श है भाव 
-
 
 सं वेदना यही दै वी अनु दान क म    जब 
 
 मनु य क वछ अरामा र उरी है  उसे िनहाल बनाकर रख दे ी है। इस एक के आधार र ही 
 
अनेकाने क द वी व उभरे चले जाे ह   
 
 सय   ु ग क वासी इसी सं वेदना कजागर 
,
 का कउभार से हगी। बस एक ही िवक इन िदन है
 
भाव 
-
 
 सं वेदना का जागर। उवल भिवय का यिद कई सु िनच आधार है  वह एक ही है िक जन 
-
 
 जन क भाव 
 
 सं वेदनाओं क उक   ृ 
,
आदश  और उदा बनाया जाए। इसी से यह िवव उान हरा 
-
 
भरा फला 
-
 
 फ   ू  ला व स बन 
 
 सकगा।
 
 
 िा 
 1.
 
 लेने देने हे ह   
?2.
 
 ििछे  कथ   ा 
3.
 
 म् पयेन   
4.
 
 संवेू  खने द   
5.
 
 सम   र   
6.
 
 सन 
-
 
 म म   देवव कअवर से
7.
 बिव 
-
 
 संवेा 
8.
 
 ददेर   
 
 लेने देने हे ह   
?
 च ी क आह 
-
 
 िवला करे दे खकर वामीिक क का जस  उभरी 
,
 उसी समय वे आिद किव 
 
 क म   र ह गए। ऋिय के अथ 
-
 
 ं जर क व   माला दे खकर राम क का ममा ह ह गई और उनसे
 
भु जा उठाकर यह प करे ही बन डा िक िनिशचर हीन कर मिह बाढ 
,
भू  क 
,
 द   ु िभ   
,
 महामारी जै से
 
आकाल म   जब असं य क दे खा जाा है
,
  िनष    र भले ही मू  कदश   क बने रह   
,
 सदय क  अनी सामय  
 
भर सहाया कलए दौऩा ही डा है। इसकिबना उनक अरामआम 
-
 
 पाऩा से याक   ुल ह उठी है
 
 िनष    र क नर 
-
 
 िशाच कहे ह   
,
 उनका मनु य समु दाय म   भी अभाव नह है
 
 िवकास क अम सीढी भाव 
-
 
 सं वेदना क ममा ह कर दे ने वाली का िवार म    ही है। इसी क 
 
आरक उक   ृा भी कहे ह   सं वेदना उभरने र ही से वा साधना बन डी ह। धम   
-
 
धारा का िनवा ह भी इससे
 
 कम म   नह हा। चया और यग साधना का लय भी यही है िक िकसी पकार सं वेदना जगाकर उस दे वव का 
 
 सााकार ह सक
,
 ज जरमद क िदए िबना रह ही नह सका। दे ना ही जनक पक   ृि और िनयि है
,
 उह 
 
 क इस धरी र दे वा कहा जाा है। उह का अनु कर और अिभनदन करे िववे कवान्
,
भजनदे खे जाे ह   
 
 दे ने क पक   ृि वाली आमाओं का जहाँ सं गठन 
-
 
 समवय हा रहा है
,
 उसी ेत क वग  नाम से
 
 सबध िकया जाने लगा है। इस पकार का लक या थान कह भले ही न ह 
,
 र सय है िक सदय 
,
 सेवाभावी 
,
 उदारचेा वल वयं दे वमानव हे ह   
,
 वरन् काय  ेत क भी ऐसा क   ुछ बनाए िबना नह रहे जसे वगोम 
 
अथवा सय   ु ग का सामियक सं कर कहा जा सक
 
अने समय क अभू  ू  व  पगिशीला का य   ु ग कहा और गवोय साथ बखाना जाा है। इस अथ  म   
 
 बा सही भी है िक जने सु िवधा साधन इन िदन उलध ह   
,
 इने इससे हले कभी भी हग नह ह सक
 
 जलयान 
,
 वाय   ु यान 
,
 रे ल 
,
 मटर जै से ु गामी वाहन 
,
 ार 
,
 रे िय 
,
 िफम 
,
 द   ू  रदश   न जै से सं चार साधन 
,
 इससे ू  व  कभी 
 
 कना म   भी नह आए थे। कल 
-
 
 कारखान का व   ाकार उादन 
,
 सज   री 
-
 
अङ पयार जै सी सु िवधाएभू  काल 
 
 म   कहाँ थ 
?
 कहा जा सका है िक िवान ने ौरािक िववकमा क कह ीछे छड िदया है
 
 बु वाद क पगि भी कम नह ह    ई है। ान 
,
 ु रान एकाक धम  शा क ु लना म   अब अथ  शा 
,
 राजनीिशा 
,
 क  शा 
,
 समाजशा 
,
 मनिवानशा जै से अनेकानेक कलेवर म   असाधार  से बढा और 
 

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