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10 Navsrijan Ke Nimitta Mahakal Ki Taiyaari

10 Navsrijan Ke Nimitta Mahakal Ki Taiyaari

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Published by Brijesh Verma
10 Navsrijan Ke Nimitta Mahakal Ki Taiyaari doc
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 गमंथ  
:
 
ॐ भू भु  वः वः
 
 सिवु व   रे णयं
 
भगो दे वय धीमिह 
 
 धय य नः पचदया्
 
 उस पाव 
,
 द   ुःखनाशक 
,
 सु खव 
,
ेष 
,
 े जवी 
,
 ानाशक 
,
 दे वव रमामा क हम अनी 
 
अं ःकर म   धार कर   
.
 वह रमामा हमारी बु  क समाग  म   पे र करे
. -
 
 ऋवेद ३
/
६२
/
१०
,
 सामवेद १४६२
,
 यजु व     द ३
/
३५
,
२२
/
,
३०
/
,
३६
/
.
Gayatri Mantra and its meaning:
Om bhurbhuvaha swahatatsaviturvarenyambhargo devasya dhimahidhiyo yo naha prachodayat.We embrace that supreme being, the effulgent divine sun, the ultimate life force, omnipresentand omnipotent, the destroyer of all sins and sufferings and the bestower of bliss. May he inspire andenlighten our intellect to follow righteous path. -Rigveda 3/62/10, Samveda 1462, Yajurveda 3/35,22/9, 30/2, 36/3.
 
 
 न जििैी 
- (
 
 ि ा 
- 10)
 
 ससंे 
 
अशुभ समय सं सार कइिहास म   अनेक बार आे रहे ह   
,
 र ा का यह िनयम है िक वह अनौिचय क 
 
 सीमा से बाहर बढने नह दे ा। ा का आश ब उभरा है
,
 जब अनाचारी अनी गििवधयाँ नह छडे और 
 
 ीि़  य उसे रकने लए किटब नह हे। यदा 
-
 यदा िह धम   य वाली पिा का िनवा ह करने लए 
 
 ा वचनब है
 
 य   ु गसं ध कदस व  दहरी भू  िमकाओं से भरे ह    ए ह   । पसव जै सी थि हगी। पसवकाल म   जहाँ एक ओर 
 
 पसू  ा क अस क सहना डा है
,
 वहाँ द   ू  सरी ओर सं ानपा क सु ं दर संभावनाएँ भी मन 
-
 ही 
-
 
 मन ु लकन 
 
 उ करी रही ह   । जसम   मनु य शां ि और सौजय कमाग  र चलना सीखे
,
 कम   फल क सु िनच पिया से
 
अवग ह और वह करे
,
 ज करना चािहए 
,
 उस राह र चले
,
 जस र िक बु मान क चलना चािहए।
 
शाक   ुञ से उभर रहे एक छटे पवाह ने नवय   ु ग कअनु  पिश क ऐसी यवथा बनाई है
,
 ज िक 
 
 उसकसाधन क दे खे ह    ए संभव नह थी। ऐसी सा शै ली और क  पिया शाक   ुञ ने पु  क है
,
 जससे लकमाया म   असाधार रव   न दे खे जा सके ह   । इन िदन मानव 
-
 
शरीर म   पिभावान्दे वद   ू   पकट 
 
 हने जा रहे ह   । लकमानस का रकार कर वे नवय   ु ग क संभावना सु िनच कर    गे
-
 
 िनच ही बडभागी बन    गे।
 
 
 
 िा 
1.
अनौिचय का पिकार 
2.
 दंी 
3.
 य   ु गसंले िन 
4.
 ब संिक   ृि 
5.
 पििम   बढे पयास 
6.
 पु  लने ह   
7.
 य   ु ग चेक 
-
 
 िर 
8.
अगले िदन ज करना है
9.
 य   ु ग 
-
 
अवर क पिया 
 
अनौिचय का पिकार  कभी 
-
 
 कभी ऐसा समय आा है िक छ   ू   क बीमारी क रह अनाचार भी गि कड लेा है और अने आ 
 
अमरबे ल क रह बढने लगा है। अनी िनज क जड न हने र भी यह बे ल िवार कडी जाी है और दे खे
-
 
 दे खे िकसी भी वृ र ू  री रह छा जाी है। वनिय र िचकने वाले कडे भी िबना िकसी द    ू  सरे क सहाया 
 
 कअनी वंश 
-
 
 वृ  करे रहे ह   और उह   न कर ाले ह    द   ु  
-
 
 िचन और  आचर इन िदन एक पकार से पचलन जै सा बन गया हैृवी क गु वाक     
-
 
श हर वु क नीचे क ओर ही खची है। ानी भी िबना िकसी पयन के नीचे क ओर ही गि कडा है
 
 द   ु ा क पवृ  भी ऐसी ही है। वह न और राभव क िदशा ही कडी है
;
 जबिक िकसी क ँ चा उठाने
 
 लए असाधार कसाय रम करना डा है
 
 उदाहर लए राव जमा  अकला ही था। उसकबेटे
-
 
  ने ही नह 
,
 वंशज और पजाजन ने भी 
 
 वही रीि 
-
 
 नीि अना ली थी। सव   त अनाचार ही ल गया था। कंस 
,
 जरासध 
,
 वृ तासु र 
,
 मिहासु र आिद ने भी 
 
अने
-
 
अने समय म   ऐसे ही िवार 
-
 
 म अनाए थे और अनाचार क सब ओर भरमार दीख डने लगी थी। ऐसे
 
अशुभ समय सं सार इिहास म   अने क बार आे रहे ह   
,
 र ा क िनयि यह है िक अनौिचय क सीमा से
 
 बाहर नह बढने दे ी। छटे बचे जब क सीिम गली करे ह   
,
 ब क अिभभावक उह   छ   ू  ट देे रहे ह   
,
 र जब 
 
 वे मया दाओं का उं घन करकअवां छनीया क अनाने लगे ह    
,
 ब उनकगाल र च लगाने और कान उमेठे
 
 जाने का पिकार भी िकया जाने लगा है। यिद ऐसा न हा  उणा बढी ही जाी और सृ  का सारा 
 
 यवथा 
-
 
 म ही गडबडा जाा।
 
 िछले द हजार व  ऐसे बीे ह   
,
 जनम   अनीि और अनाचार ने अनी सभी मया दाओं का उं घन िकया 
 
 है
;
 समथो  ंने असमथो  ंक तास दे ने म   कई कसर नह छडी। सामवादी य   ु ग नाम से इसी क अधकारकाल 
 
 कहा जाा रहा है। समथ  लग ने िगरहब हकर अनी सं य   ु  श का द   ु यग करने म   कह कई कसर नह 
 
 रहने दी। इस अवध म   ीिड ने भी मानवीय मया दा अनु  कई पिरध नह िकया। क सहना ही है  
 
 द   ू  सर का सही 
,
अना ख   ू  न  बहा ही सके ह   
-
 
 सं कट से जू  झने क मनु य क यह शाव सामय   ही उसक 
 
 िविशा रही है। मनु य वु  
:
 ऐसी िमी से बना है िक वह अनीि से जी भले ही सक
,
 र उससे टकर  
 
 ले ही सका है। अनीि क िनबाध चलने दे ने या उसे सहे रहने थान र उससे टकराे ह     ए मानवीय गरमा 
 

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