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16 Sanjivani Vidya Ka Vistar

16 Sanjivani Vidya Ka Vistar

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05/16/2013

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 गमंथ  
:
 
ॐ भू भु  वः वः
 
 सिवु व   रे णयं
 
भगो दे वय धीमिह 
 
 धय य नः पचदया्
 
 उस पाव 
,
 द   ुःखनाशक 
,
 सु खव 
,
ेष 
,
 े जवी 
,
 ानाशक 
,
 दे वव रमामा क हम अनी 
 
अं ःकर म   धार कर   
.
 वह रमामा हमारी बु  क समाग  म   पे र करे
. -
 
 ऋवेद ३
/
६२
/
१०
,
 सामवेद १४६२
,
 यजु व     द ३
/
३५
,
२२
/
,
३०
/
,
३६
/
.
Gayatri Mantra and its meaning:
Om bhurbhuvaha swahatatsaviturvarenyambhargo devasya dhimahidhiyo yo naha prachodayat.We embrace that supreme being, the effulgent divine sun, the ultimate life force, omnipresentand omnipotent, the destroyer of all sins and sufferings and the bestower of bliss. May he inspire andenlighten our intellect to follow righteous path. -Rigveda 3/62/10, Samveda 1462, Yajurveda 3/35,22/9, 30/2, 36/3.
 
 
 संििर 
- (
 
 ि ा 
- 16)
 सर 
-
 
 संे 
 
 नवसृ जन किनिम आज जसक सवा धक आवयका अनुभव क जा रही है
,
 उसे िवा या मेधा नाम से
 
 जाना जाा है। इसकलए िवालय र िनभ   र नह रहा जा सका। पय उदाहर क पे रापद माहौल सामने
 
आए िबना समझा नह जा सका िक िवा या है व इसे कैसे जीवन म   उारा जाए 
?
 िविभ भााओं
,
 सं पदाय म   
 
 बँटे ६०० करड मनु य क से इस य   ु गचेना पवाह से जडा जाए 
,
 उसी का पा है सं जीवनी िवा का 
 
 िवार।
 
 गायती रवार सू  त 
-
 सं चालक ने अखण यि ितका क अनी सं रचनामक स माना है और 
 
 ू  रा िववास जाया है िक चीस लाख ाठक ारा ढी या सु नी जाने वाली 
-
 िवा 
-
 
 िवार करने वाली यह 
 
 पिया जन 
-
 
 जन क ह     ँ चेगी। सं जीवनी िवा मू  छ    ना से उबारने हे ु ऋि पी एक पयग है। इसी महािवा क 
 
अनौिचय से िनटने और औिचय क सिय करने हेु िनयज िकया जाना हैसं जीवनी िवा साथ जु डी 
 
आदश   वादी उक   ृा सीधे अं  
:
 
 कर म   उर जाी है। िवा से िववेक उभरा है
,
 यव रक   ृ हा है था 
 
 पिभा िनखरी हैशालीना इनी ँ ची उठ जाी है
,
 जससे सामाय आदमी भी दे वमानव बन सक। जले ह    ए 
 
 दीक ही बु झ क जला सके ह   
-
 
 इस माया क यान म   रख सृ जन 
-
 
 साधक िनमा  हे ु बारह वय य   ु गसं ध 
 
 महाु रचर का पावधान ह   आ एवं इकसव सदी के य   ु गिशय पिश हेु शाक   ुम   सं जीवनी साधना 
 
 किश क िवृ  यवथा है
 
 िा 
 1.
 य   ु गि जन 
,
 से ििि 
2.
 एििेश 
3.
 संिए 
4.
 मिय   ु दय 
5.
 जले  झगे
6.
 मू  छ   न न गिय  है
7.
 लस 
-
 
 ि 
8.
 ंिू  ल ू म व 
 
 य   ु गि जन 
,
 से िये िि आवयक 
-
 
अनावयक जानकारयाँ सर र लादने और नौकरी 
-
 
 र क क   ु छ आजीिवका कमा लेने लय 
 
 क सीिम व   मान क   ू  ली िशा अने र    र चली भी रह सकी है। जह   उसम   िच ह 
,
 वे उसे अनाये भी 
 
 रह   
,
 र उसी क सब क   ु छ मानकर उसी रध म   सीिम रहने से काम चले गा नह। अगले िदन य और समाज 
 
 क जस ाँ चे म   ालना है
,
 उसका पकाश 
-
 
आभास भी उसम   कह    ू   ँढनह िमला 
,
 जस सुधार और सृ जन क 
 
आवयका डेगी 
,
 उसकलए कई सं क क उसम   नह है। आज  सबसे अधक आवयका उसी क है
,
 जसक पाचीनकाल से िवा या मेधा नाम से जाना जाा है
,
 ज वयं ही हर समया का िनराकर करने क 
 
 थि म   ही है। अब आगमन 
-
 
अवर उसी का हने जा रहा है
 
 जन अिभनव जानकारय और प राओं क इह िदन आवयका है
,
 उह   पा करने के लए क   ू  ल र 
 
 िनभ   र नह रहा जा सका। उनम   एक  उन िवय का समावेश ही नह है
,
 द   ू  सरे वह ु क 
-
 
 रटन से ू  री भी नह 
 
 ह सकी। उसकलए पय उदाहर का पे रापद माहौल सामने रहना चािहए 
,
 िवशे 
:
अयाक इस र के
 
 
 
 हने चािहए 
,
 ज अने साँ चे म   ालकछात क ऐसे पिभावान् पावान् बना सक   
,
 ज वल वयं बन   वरन्
 
अने आलक से समू  चे सं क  
-
 
ेत क पकािश कर सक   
 
 पा का अवर और िवार का काय  असाधार  से िवृ  है। उससे िशि 
-
 
अिशि नर 
-
 नारी 
 
 बाल 
-
 
 वृ  वथ 
-
 
 रगी सभी क अवग कराया जाना है। भााओं क छटी 
-
 
 छटी रध म   बँटे ह    ए इस सं सार म   
 
 रहने वाले ६०० करड मनु य क एक पकार से य   ु गचेना 
-
 
 ं त अं ग    पिशि िकया जाना है। यह यजना 
 
 इनी बडी हगी िक ू  री करने म   कम से कम सौ व  का समय और अरब 
-
 
 खरब जना धन जु टाना डे गा।
 
अयाक भरी और पिशि करने ड    गे
,
 स अलग। इसलए य   ु गिशा का व उन आधार क अनाे ह    ए 
 
 िविनिम    करना डेगा 
,
 ज आज क रथिय म   इह िदन कर सकना संभव ह।
 
 बडे पयास क पीा म   करहने क अेा 
,
 यही उय   ु  समझा गया है िक व   मान रथिय म   
 
अने छटे साधन से ज संभव ह 
,
 उसे ु रं  आरंभ िकया जाए और लग क दे खने िदया जाए िक आरंका 
 
 पिफल िकस  म   उलध ह रहा है। बा यिद वजनदार हगी  लग अनाएँगे भी। पचल िशा 
-
 पाली 
 
 िकसी हद क अना अव बनाए भी रह सकी है
,
 र उसक आड म   य   ु ग 
-
 
 िश क रका नह जा सका। य   ु ग 
-
 
 िश म   ये िवय आवयक ह   
: (
)
 यव का सम िवकास 
-
 
 रकार 
(
)
 समाज 
-
 
 सं रचना और 
 
 उसकसाथ जु डे ह    ए पचलन का नव िनधा र 
(
)
अथ  यवथा।
(
)
 सु लभ आजीिवका से उलध ह 
? (
)
 मनु य िचं न 
,
 चरत और यवहार म   शालीना का समावेश िकस पकार बढा चले
? (
)
 रवार क व   मान 
 
 सं रचना म   या सुधार 
-
 
 रव   न िकया जाए 
? (
)
शारीरक और मानसक ा से सु िनच छु टकारा िकस पकार 
 
 िमले
? (
)
अवाँ छनीया से िकस पकार िनटा जाए 
? (
)
अब क अेा कह सु खद और सरल 
-
 
 रथिय का 
 
 िनधा र से िकया जाए 
? (
१०
)
 सहकारा और सावना का ेत से बढे
? (
११
)
 वदश   न 
-
 
ेत म   रकार 
 
 िवरधी मायाओं का समीकर से िकया जाए 
? (
१२
)
 राजं त और धम   ं त क उभयीय समथ  शय क 
 
 िकस पकार नये य   ु ग कअनु  साँ चे म   ाला जाए 
?
 यह क   ु छ थडे से िवय क ही चचा है। इह िवय म   से पयेक क अने क शाखाए
-
 
 पशाखाएह   और अने
 
आक एक वं त िवय 
-
 
ेत घि करी ह   । ऐसी दशा म   य   ु गिशा का ु कय 
,
 मौखक और यावहारक 
 
 व पु  करना इना बडा काम ह जाा है
,
 जसे व   मान िशा ं त क अेा कह अधक याक और 
 
 वजनदार ही कहा जाएगा।
 
 िवलब से बनने वाले िकले या महल क ु लना म   यही अछा है िक आज क आवयका ू  री कर सकने
 
 वाली झडी का ाँ चा अने ही हाथ 
,
अने साधन से खडा कर लया जाए।
 
 य   ु गसािहय का सृ जन इस सं दभ  म   पय काय  है
,
 ािक अिभनव पसं ग क ृ षभू  िम और  रे खा कसं बंध 
 
 म   जन बा क अिनवाय   से ाकालक आवयका है
,
 उसे ू  रा न सही 
,
 माग   दश   न  म    पु  िकया ही 
 
 जा सक। लग उयिगा समझ    गे
,
  उस पयग क िवार दे ने म   भी उसाह पदिश    कर    गे
 
 पदश   िनयाँ इसीलए लगाई जाी है िक उह   दे खकर लग िकसी सु यवथ िवय क जानकारी कम समय 
 
 म   पा कर सक   । अनी सामय  और काय  क िवशाला का मयव ाल 
-
 
 मेल जस पकार बै ठ सका था 
,
 उसी 
 
 क इन िदन अनी सू  झ 
-
 
 बू  झ और पभाव कअनु  पु  िकया जा रहा है
 
 य   ु ग िनमा  यजना 
,
 मथु रा और शाक   ुञ 
,
 हरार से ऐसा सािहय पकािश करना आरंभ कर िदया गया 
 
 है
,
 ज पु  समयाओं अनेकानेक िवय र पकाश ाला है। इन िवय के सं ि पुीकर से काम न 
 
 चले गा 
,
 उसका अने क भााओं म   अनु वाद और पकाशन हना चािहए। सीिम लेखन भी या  नह। अब हर िवय 
 
 क अनेक को  ं
,
 य 
,
 पमा और उदाहर साथ पु  करने क आवयका अनुभव क जाी है। अगले
 
 िदन य   ु ग सािहय ऐसे ही िवार क आवयका है। िबना िकसी पीा के
,
 व   मान साधन से ही उसका 
 
शुभारंभ कर िदया गया है। आशा यह रखी है िक रा गया यह अं क    ु र अगले िदन वट 
-
 
 वृ जै सा िवशाल कले वर 
 
धार करे गा।
 
 इस काय   म म   िकनी ही किठनाइयाँ ह   । एक यह िक अने देश क द 
-
 
 िहाई जना अिशि है
,
 वह 
 
 सािहय का लाभ से उठाये
?
 िफर इस घर महँ गाई जमाने म   आथ   क किठनाइय से  अिशि र क 
 
 जना उसे िकस आधार र खरीदे
?
थडे से ज िशि बच जाे ह   
,
 वे भी मनरं जन लए चटटा सािहय भर 
 
 खरीदे ह   य   ु ग सािहय म   ऐसा क   ु छ रहने र उन र भी जबरदी से लादा जाए 
?
 एक  य   ु ग सािहय का 
 

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