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17 Bhav Samvednaon Ki Gangotri

17 Bhav Samvednaon Ki Gangotri

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Published by Brijesh Verma
17 Bhav Samvednaon Ki Gangotri doc
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 गमंथ  
:
 
ॐ भू भु  वः वः
 
 सिवु व   रे णयं
 
भगो दे वय धीमिह 
 
 धय य नः पचदया्
 
 उस पाव 
,
 द   ुःखनाशक 
,
 सु खव 
,
ेष 
,
 े जवी 
,
 ानाशक 
,
 दे वव रमामा क हम अनी 
 
अं ःकर म   धार कर   
.
 वह रमामा हमारी बु  क समाग  म   पे र करे
. -
 
 ऋवेद ३
/
६२
/
१०
,
 सामवेद १४६२
,
 यजु व     द ३
/
३५
,
२२
/
,
३०
/
,
३६
/
.
Gayatri Mantra and its meaning:
Om bhurbhuvaha swahatatsaviturvarenyambhargo devasya dhimahidhiyo yo naha prachodayat.We embrace that supreme being, the effulgent divine sun, the ultimate life force, omnipresentand omnipotent, the destroyer of all sins and sufferings and the bestower of bliss. May he inspire andenlighten our intellect to follow righteous path. -Rigveda 3/62/10, Samveda 1462, Yajurveda 3/35,22/9, 30/2, 36/3.
 
 
भाव संवेदनाओं क गंगती 
- (
 
 ि ा 
- 17)
 सर 
-
 
 संे भाव 
-
 
 सं वेदना ी गं गती सू  ख जाने र य िनष     र बना चला जाा है। आज का सबसे बडा द   ु िभ   
 
 इह भावनाओं े त का है। जब भी अवारी चेना आई है
,
 उसने एक ही काय  िकया 
-
 
अं दर से उस गं गती
 
 पवाह अवरध क हटाना एवं सृ जन 
-
 
 पयजन म   उसे िनयज करना। क   ु छ कथानक ारा ां  मायम 
 
 से इस य क भली भाँ ि समझा जा सका है
 
 दे वि  नारद एवं वेदयास कवाा ला एक य से  हा है िक मानवीय गरमा का उदय जब भी 
 
 हा है
,
 सबसे हले भावचेना का जागर हा है। भी वह ईवर 
-
 
 ु त क गरमामय भू  िमका िनभा ाा है। चै य 
 
 जै से अं   
-
 
 सं  महाु  भी शा 
-
 
 क  मीमां सा य   ु ग म   इसी िचं न क दे गए। भाव ा पकाश म   
 
 मनु या ज ख गई है
,
 ु न 
:
 ाई जा सकी है। ीां बरा मीरा जीवन भर का िवार का 
,
 ममव का ही सं देश 
 
 दे ी रह। जब सं क जागा है  अशक जै सा िनष     र भी बदल जाा है
-
 चं  अशक से अशक महान् बन जाा 
 
 है। जीसस का जीवन का के जन 
-
 
 जन क िवार का सं देश दे ा ह। िमटर गाँधी इसी भाव 
-
 
 सं वेदना जागर 
 
 से एक घटना मात से महामा गाँधी बन गए 
-
 
 जीवन भर आधी धी हनकर एक राधीन रा   क वं त करने म   
 
 सम ह    ए। ठकर बाा जीवन म   भी यही ा आई। वु  
:
अवारी चेना जब भी सिय ही है
,
 इसी  
 
 म   य क बेचै न कर उसकअं राल क आमू  लचू  ल बदल ाली है
 
 
 िा 
 1.
 वेअंय  ा 
2.
 देि  का सरामश  
3.
अं ी 
-
 
 चैए 
4.
 जसंवेने चेा 
5.
 सि    ै स 
?6.
 संिष    र ा 
7.
 संवेचैसे बैने देी 
8.
 जअं 
:
 म   लौ जली  
9.
 संवेि 
 
 वेअंय  ा 
 
आकचे हरे र खा किच 
!’
आगं ु क ने सरवी नदी कट र 
,
आम किनकट बै ठे ह    ए मनीी 
 
 कमु खमं ल र छाए भाव क ढे ह    ए कहा। इधर िवग कई िदन से वह यथ थे। नदी के ट र बै ठकर घं ट 
 
 िवचारम रहना 
,
शू  य क ओर ाके रहना 
,
 उनक सामाय िदनचया बन गई थी। आज भी क   ु छ उसी पकार बै ठे थे।
 
आगं ु क ककथन से िवचार 
-
‘‘
ं खला ट   ू  टी। अरे
!
 दे वि  आ 
?’
 चे हरे र आचय  व पसा क िमली 
-
 जु ली 
 
अिभय झलक।
 
 र आ यथ य ह   
?’
 उहने ास डे आसन र बै ठे ह    ए कहा 
-
 ीडा 
-
 
 िनवारक क ीडा 
,
 वै  क 
 
 रग 
?
 कसी िविचत थि है
?’
 
 िविचता नह िववशा किहए। इसे उस अं य  था क म   समझए 
,
 ज ीडा 
-
 
 िनवारक क सामने डे
 
 ीिड क दे खकर 
,
 उसकक हरने म   असफल हने र ही हैवै  क उस समय ही है
,
 जब वह सामने डे
 ’’
 रगी क वथ कर ाने म   असफल ह जाा है
 
 क   ु छ ककर उहने गहरी वाँ स ली और ु न 
:
 वाी क गि दी 
-
 
 य और समाज  मे मनु य 
 
 सा रग से  है। कभी हँ सा है
,
 कभी क   ु दका 
-
 
 फ   ुदका है
;
 कभी अहं कार ठसे म   अकडा चला है
 
 रर का िववास ख जाने र आचार 
-
 
 िवचार का र से बने
?
 ज थडा 
-
 
 बह     िदखाई दे ा है
,
 वह अवशे का 
 
 िदखावा भर है
 
और रवार 
...............
 
 इना कहकर उनकमु ख र एक ी मु कान क रे खा उभरी 
,
 नजर उठाकर 
 
 सामने बै ठे
,
‘‘
 दे वि  क ओर दे खा इनक  और भी क दशा है। इनम   मह रह गया है
,
 पे म मर गया है। मह भी 
 
 ब क 
,
 जब क वाथ  सधे। िववािह हे ही सं ान   माँ
-
 
 बा क िलांजल दे दे ी ह   । सारी रीि ही उलटी है
?
 उठे क िगराना 
,
 िगरे क क   ु चलना 
,
 क   ु चले क मसलना 
,
 यही रह गया है। आज मनु य और शु म   भेद आचार 
-
 िवचार 
 
 क  से नह वरन् आकार 
-
’’
 पकार क  से है
-
 
 कहे ऋि का चेहरा िववश ह गया। भाव क जै से
-
 ै से
 
 रके ह    ए धीरे से कहा 
-
 
 दे वा बनने जा रहा मनु य 
,
 शु से भी गया 
-
’’
 गु जरा ह रहा है

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