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18 Mahila Jagriti Abhiyan

18 Mahila Jagriti Abhiyan

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Published by Brijesh Verma
18 Mahila Jagriti Abhiyan doc
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05/23/2012

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 गमंथ  
:
 
ॐ भू भु  वः वः
 
 सिवु व   रे णयं
 
भगो दे वय धीमिह 
 
 धय य नः पचदया्
 
 उस पाव 
,
 द   ुःखनाशक 
,
 सु खव 
,
ेष 
,
 े जवी 
,
 ानाशक 
,
 दे वव रमामा क हम अनी 
 
अं ःकर म   धार कर   
.
 वह रमामा हमारी बु  क समाग  म   पे र करे
. -
 
 ऋवेद ३
/
६२
/
१०
,
 सामवेद १४६२
,
 यजु व     द ३
/
३५
,
२२
/
,
३०
/
,
३६
/
.
Gayatri Mantra and its meaning:
Om bhurbhuvaha swahatatsaviturvarenyambhargo devasya dhimahidhiyo yo naha prachodayat.We embrace that supreme being, the effulgent divine sun, the ultimate life force, omnipresentand omnipotent, the destroyer of all sins and sufferings and the bestower of bliss. May he inspire andenlighten our intellect to follow righteous path. -Rigveda 3/62/10, Samveda 1462, Yajurveda 3/35,22/9, 30/2, 36/3.
 
 
 मि ििन 
- (
 
 ि ा 
- 18)
 सर 
-
 
 संे 
 
 माा  म   
,
 दे वी  म   िवधाा क सं रचना है
-
 माृश 
,
 मिहमाश। यह उसका 
 
 रमू  य द वी  हदे वव पीक म    सव   पथम थान नारी का और द   ू  सरा नर का ह। भाव 
-
 
 सं वेदना धम  
-
धारा 
 
और सेवा 
-
 
 साधना क म   उसी क वरषा क चराथ  हे दे खा जाा है
 
 मिहला श ने िछले िदन अने कानेक तास दे खे ह   । सामं वादी अंधकार य   ु ग से उजे अनथ  ने सब क   ु छ 
 
 उलट 
-
 
 ु लट िदया है। उसे अबला समझा गया और कािमनी 
,
 रमी 
,
भया व दासी जै सी थि म   रहने क िववश 
 
 हना डा। ज भाव ू  य रहना चािहए था 
,
 वही क   ु   म   बदल गया 
,
 िकु अब रव   न का ू  फानी पवाह 
 
 इस आधी जनश क उबारने हे ु गि कड चु का है। चम कनारी 
-
 
 मु  दलन 
(
 
 िवमन लब 
)
 से अलग यह 
 
 मिहला श जागर क पिया दै वी चेना ारा सं चाल है
,
 र बु  क आकांा कअनु  ही चल रही है
 
 महारव   न क बेला म   जब सय   ु ग क वासी क चचा ह रही है
,
  गायती रवार ही नह 
,
 सारे िवव म   इस 
 
आधी जनश कउठ खडे हने एवं िवव रं गमं च हर य 
-
 
 टल र अनी मही भू  िमका िनभाे दे खा जा 
 
 सकगा। िशा एवं वावलं बन ी िविवध काय   म मायम से मिहला 
-
 
 जागर क 
,
 उसकौरिहय से लेकर य   ु ग 
 
 ने ृ व सँभालने क क 
,
 ज संभावनाएँ य क जा रही ह   
,
 िमया नह ह   
 
 
 
 िा 
 1.
 नू  दै 
2.
 नी 
-
 
 जद   ु िद   न द   ु द  ा 
3.
    न ू  फह 
4.
 नी 
-
 
 नी 
5.
भार अी था 
-
 
अी रहेगा 
6.
 ये बंट   ू  टने िए 
7.
 सए 
8.
 द लए 
9.
 द   ु चं
-
 
 स ज
10.
 दडे म 
-
 
 िलंन 
11.
 नी 
-
 
अवमू  ए 
12.
 ए यने
13.
 पगे ी 
 
 नू  दे 
 
 जीवसृ  क सं रचना जस आिदश महामाया ारा सं  ही है
,
 उसे िवधाा भी कहे ह   और माा 
 
भी। माृश ने यिद पािय र अनु का न बरसाई ही 
,
  उसका अव ही पकाश म   न आा। भू ् र क 
 
आरं िभक थि एक सू म िबं द    ुमात ही है। माा क चेना और काया उसम   पवेश करकरव बनने क 
 
 थि क ह     ँ चाी है। पसव 
-
 
 वेदना सहकर वही उसकबंधन खली और िवव 
-
 
 उान म   पवेश कर सकने क 
 
 थि उ करी है। असमथ  
-
 
अिवकस थि म   माा ही एक अवलं बन ही है
,
 ज नान कराी और 
 
 ग 
-
 
 ग र उसक आवयकाओं क ू  ि  करी है। यिद नारी के  म   माा समय 
-
 
 समय र िचत 
-
 
 िविचत पकार 
 
 कअनु ह बरसाी  मनु य ही नह 
,
 िकसी भी जीवधारी क सा इस िवव 
-
 
 ाण म   कह भी गचर न 
 
 ही 
,
 इसलए उसी का जीवनदाियनी चेना क म   अिभनं दन हा है। वेदमाा 
,
 दे वमाा व िववमाा क 
 
 म   जस ितदा क ू  जा 
-
 
अच   ना क जाी है
,
 पय 
:
 उसे नारी ही कहा जा सका है
 
 मनु य अिर पिभावान पािय म   दे व 
-
 
 दानव क गना ही है। कथा है िक वे दन ही िदि और 
 
अिदि से उ ह    ए। सृ जनश  म   इस सं सार म   ज क   ु छ भी सश 
,
 सं  
,
 िव और सु ं दर है
,
 उसक 
 
 उ म   नारीव क ही अहं भू  िमका है
,
 इसलए उसक िविशा क अनेकानेक  म   श 
-
 
श नमन िकया 
 
 जाा ह। सरवी 
,
 लमी और काली क म   िवान का था गायती 
-
 
 सािवती क म   ानचेना के अनेकाने क 
 
  का िववे चन हा है
 
 दे वव पीक म   पथम थान नारी का और द   ू  सरा नर का है। लमी 
-
 
 नाराय उमा 
-
 
 महेश शची 
-
 ु रं दर 
 
 सीा 
-
 
 राम राधे
-
 
याम जै से दे व 
-
 
 य   ु म म   पथम नारी का और चा नर का उे ख हा है। माा का कले वर और 
 

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