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21 Navayug Ka Matsyavataa

21 Navayug Ka Matsyavataa

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Published by Brijesh Verma
21 Navayug Ka Matsyavataa doc
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05/23/2012

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 गमंथ  
:
 
ॐ भू भु  वः वः
 
 सिवु व   रे णयं
 
भगो दे वय धीमिह 
 
 धय य नः पचदया्
 
 उस पाव 
,
 द   ुःखनाशक 
,
 सु खव 
,
ेष 
,
 े जवी 
,
 ानाशक 
,
 दे वव रमामा क हम अनी 
 
अं ःकर म   धार कर   
.
 वह रमामा हमारी बु  क समाग  म   पे र करे
. -
 
 ऋवेद ३
/
६२
/
१०
,
 सामवेद १४६२
,
 यजु व     द ३
/
३५
,
२२
/
,
३०
/
,
३६
/
.
Gayatri Mantra and its meaning:
Om bhurbhuvaha swahatatsaviturvarenyambhargo devasya dhimahidhiyo yo naha prachodayat.We embrace that supreme being, the effulgent divine sun, the ultimate life force, omnipresentand omnipotent, the destroyer of all sins and sufferings and the bestower of bliss. May he inspire andenlighten our intellect to follow righteous path. -Rigveda 3/62/10, Samveda 1462, Yajurveda 3/35,22/9, 30/2, 36/3.
 
 
 नय   ु ग र 
- (
 
 ि ा 
- 21)
 
 िा 
 1.
  ने ी 
2.
 िचेव 
3.
 उम   पु एक उदाहर 
4.
अय चेना ारा 
-
 
 संन 
5.
 बडे डे म 
6.
 नय 
-
 
 न 
7.
 स ग   थ   
8.
 सशंम    
-
 
 सम   है
9.
 वेर   
10.
 ईचेसे  ड   
11.
थडा ही सही 
,
 ििर   
12.
 प 
-
 
 चेख   
 
 
  ने िा 
 
 ा जी पा 
:
 
 काल संया 
-
 
 वदन लए बै ठे। चु     म   आचमन कलए ानी लया। उसम   छटा सा कडा 
 
 िवचरे दे खा। ाजी ने सहज उदारावश उसे जल भरे क मणल म   छड िदया और अने िया 
-
 
 क   ृय म   लग गए।
 
थडे ही समय म   वह कडा बढकर इना बडा ह गया िक सारा क मणल ही उससे भर गया। अब उसे अयत 
 
भे जना आवयक ह गया। उसे समीव ालाब म   छडा गया। दे खा गया िक वह ालाब भी उस छटे से कडे
 
 िवार से भर गया। इनी ेज पगि और िवार क दे खकर वे वयं आचय   चिक ह    ए और एक द बार इधर 
-
 
 उधर उठक 
-
 
 टक करने बाद उसे समु  म   ह     ँचा आए। आचय  यह िक सं सार भर का जल थल ेत उसी छटे
 
 कडे क म   उ ह    ई मछली ने घे र लया।
 
 इना िवार आचय   जनक 
,
अभू  ू  व  
,
 समझ म   न आने यय था। जीवधारय क क   ु छ सीमाए
,
 मया दाए
 
 ही ह
,
 वे उसी कअनु  गि कडे ह   
,
 र यहाँ  सब क   ुछ अनु म था। ाजी जनने उस मछली क जीवन 
-
 
 रा और सहाया क थी 
,
आचय   चिक रह गए। बु  काम दे ने र वे उस महामय से ू  छ ही बै ठे िक यह 
 
 सब या ह रहा है
?
 मयावार ने कहा 
-
 
 म   जीवधारी दीखा भर ह      ँ
,
 वु  
:
 र ह      ँइस अनगढ सं सार क जब 
 
भी सु यवथ करना हा है
,
  उस सु िवृ काय  क स करने कलए अनी सा क िनयज करा 
 
 ह      ँ। भी अवार पयजन क स बन डी है
 
 ा जी और महामय आस म   वाा ला करे रहे। सृ  क नई साज 
-
 
 सजा साथ सु दर 
-
 समु  
 
 करने क यजना बनाकर 
,
 उस िनधा र क जमेदारी ा जी क सौकर 
,
 वे अया न ह गए और वचन दे गए 
 
 िक जब कभी अयवथा क यवथा म   बदलने क आवयका डेगी 
,
 उसे स करने लए म   ु हारी 
 
 सहाया करने लए अय  म   आा रह      ँ गा।
 
ेय ु ह   िमलेगा 
,
 र पे रा यजना मा मे री ही काय  करे गी। जीवधारी अनी मा कअनु  थडा ही 
 
 क   ुछ कर सके ह   । असाधार कायो  ंका सादन  ाी श ही कर सकी है। स वह महान पयजन म   
 
 सहाया करने लए हर िकसी क 
,
 हर कह उलध रही है। इह रहयमय य से ु ह   था अयाय 
 
 मनीिय क अवग कराने लए म    ने अ   ु  िवार करकयह समझाने का पयास िकया है। महान पयजन यिद 
 
 दै वी पे रा से स िकए गए है और का ने अनी पामािका 
-
 
 पिभा क अु ण रखा है
,
  असभव भी 
 
 सभव हकर रहा है
 
 ह   आ भी वही। ाजी क सृ  क सं रचना का काम सौा गया। वह उहने यथाम स कर िदया।
 
अगला चर यह था िक मनु य र सवोच पािय म   से ज उय   ु  ह उह   
,
 िदय चेना से
,
 द   ू  रदश िववेक 
 
 से
,
 पा और मेधा से सु सज िकया जाए 
,
 ािक वे अने साथ ही असं य अय क समु  
,
 सु सं क   ृ बना सक   
 
 इसकलए वेद 
-
 
 ान िदय लक से अवर ह   आ। ा जी क लेखनी ने उसे ले खब िकया। दे वमानव ने उसे
 
 ढा समझा और अनाया। उस ियावयन से ही धरी र वग  जै सा वाावर बनाने का सलसला चल डा।
 
 िचेव 
 
 लघु से महान्
,
 ु छ से िवशाल हने म   अचभे जै सा यिम  मालू  म हा है
,
 र जस पयजन कीछ
 
 दै वी सा क इछा और यजना काम करी है
,
 उसकु गामी िवार म   कई शं का नह रह जाी है
 िवकासवाद कअनु सार सृ  कआरभ म    सा अय छटा एककशीय जीव था 
,
 र 
 
 जब उस र िदय पे रा उरी 
,
  सं क से ओ 
-
 
 प ह गया। उसी से िवकस हे
-
 
 हे सृ  म   एक द   ू  सरे से
 
 सव  था िभ र के असं य जीवधारी बन गए और अनी आक   ृि था पक   ृि म   असाधार अ   ु ा का रचय 
 
 दे ने लगे। यह चमकार अमीबा का नह 
,
 उसकऊरी िदय सा कपवाह का था 
,
 ज असभव क सभव बना दे ा 
 
 है
 
 एक बीज से उ ेड से िविनिम    हने वाले हजार 
-
 
 लाख बीज क बना 
,
 उगाना 
,
 बढाना सभव ह सक
,
  बीज 
 
 से अगली ीढी अगि वृ वाले वय पदेश िविनिम    कर सकी है। यही सलसला बीज क 
 
 ीसरी 
-
 
 चथी ीढी क भी चला रह सक
,
  समझना चािहए िक आिदकाल जै से सघन हरीिमा लए ह    ए 
,
 वन 
 
 सदा से समू  ची धरती शभायमान दीख डने लगे गी। मनु य 
,
 बीज जै सा िवकासम अनाने वाली कई वु
 

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