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22 Ikkisavi Sadi Ka Gang Avataran

22 Ikkisavi Sadi Ka Gang Avataran

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Published by Brijesh Verma
22 Ikkisavi Sadi Ka Gang Avataran doc
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05/23/2012

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 गमंथ  
:
 
ॐ भू भु  वः वः
 
 सिवु व   रे णयं
 
भगो दे वय धीमिह 
 
 धय य नः पचदया्
 
 उस पाव 
,
 द   ुःखनाशक 
,
 सु खव 
,
ेष 
,
 े जवी 
,
 ानाशक 
,
 दे वव रमामा क हम अनी 
 
अं ःकर म   धार कर   
.
 वह रमामा हमारी बु  क समाग  म   पे र करे
. -
 
 ऋवेद ३
/
६२
/
१०
,
 सामवेद १४६२
,
 यजु व     द ३
/
३५
,
२२
/
,
३०
/
,
३६
/
.
Gayatri Mantra and its meaning:
Om bhurbhuvaha swahatatsaviturvarenyambhargo devasya dhimahidhiyo yo naha prachodayat.We embrace that supreme being, the effulgent divine sun, the ultimate life force, omnipresentand omnipotent, the destroyer of all sins and sufferings and the bestower of bliss. May he inspire andenlighten our intellect to follow righteous path. -Rigveda 3/62/10, Samveda 1462, Yajurveda 3/35,22/9, 30/2, 36/3.
 
 
 इगं 
- (
 
 ि ा 
- 22)
 
 िा 
1.
 इगं 
2.
 सद   ु ने िडंा 
3.
आज क सबसे पमु ख ा 
4.
 पभारंभ और िवार 
5.
 प रवंंत 
6.
 लसेय   कओं का उादन 
7.
 िय 
8.
 घर 
-
 
 घने िसे
9.
 संबेवं  
10.
भावी ंभावनाएभिवय कथन 
11. 21
 
 वगंी 
12.
 इू   ह    िम 
13.
 िा 
14.
अने समय का महान आंं दन 
-
 
 न 
15.
 ि ि 
-
 
 जर 
16.
 स जििन 
17.
 दैू  त संन 
 
 इगं 
 
 िछले ीन सौ वो  ंम   भौिक िवान और पयवादी ान का असाधार िवकास 
-
 
 िवार ह   है। यिद 
 
 उलधय का सद   ु यग बन े
,
  वह एक बे द   ुभा य का कार बन जाा है। यही इन शादय म   हा 
 
 रहा है। फलव हम 
,
अभाव वाले ु रान काल क अेा कह अधक िव एवं उ रथिय म   रह रहे
 
 ह   
 
 वाय   ुपद   ू   
,
 जल पद   ू   
,
 घाक िविकर 
,
 बढा ामान 
,
आिवक और रासायिनक अ 
-
 
श ऐसी 
 
 
 
 रथियाँ ै दा कर रहे ह   
,
 जसम   मनु य अव क रा किठन ह जाएगी। ु व िघलने लग   
,
 समु  म   
 
भयं कर बाढ जाए 
,
 िहमय   ु ग लौट े
,
 ृवी करा कवच ओजम   बढे जाने वाले छेद 
,
 ृवी र घाक 
 
 ाणडीय िकर   बरसाएँ और ज क   ु छ यहाँ सु दर दीख रहा है
,
 वह सभी जल 
-
भु नकर खाक ह जाए ऐसी 
 
 रथियाँ उ करने वाले िवान 
-
 
 िवकास क िकस पकार सराहा जाए 
?
भले ही उसने थे सु िवधा साधन 
 
 बढाएह।
 
 इसे िवान 
-
 
 िवकास से उ ह   आ उमाद ही कहना चािहए 
,
 जसने इसी शादी म   द िवव य   ु  खे िकए 
 
और अार धन 
-
 
 जन क हािन क। िछटु ट य   ु  क सं या  इसी अवध म   सै क क जा ह     ँची है। धरी क 
 
 समू  ची खिनज 
-
 
 सदा का दहन कर लेने क भी यजना है। अर य   ु  का वह िनयजन चल रहा है
,
 जससे
 
धरी और आसमान र रहने वाले पािय 
,
 वनिय का कह कई नाम 
-
 
 िनशान ही न रहे।
 
 पयवादी वदश   न ने आमा 
,
 रमामा 
,
 कम   फल 
,
 नै िका 
,
 िनषा आिद मानवीय आदशो  ंक गरमा क 
 
 एक कने र उठाकर रख िदया है। ाकालक लाभ ही सब क   ु छ बन गया ह
,
भले ही उसके लए िकनी ही पवं चना 
 
और िनष    रा य अनानी े। लगा है व   मान क िवचारधारा मनु य क शु बाने जा रही है
,
 जस र 
 
 मया दाओं और वज   नाओं का कई अं क   ुश नह हा।
 
 िवनद का पमु ख मायम कामु का ही बन चला है
,
 जसने नर 
-
 
 नारी कबीच बचे ह    ए मया दाओं कु ल क  
 
 िवखं िड िकया ही है
,
 यौनाचार क पवं चना म   भी उलझा िदया है। कार सामने है। गभ  िनरध के पयन चले रहने
 
 र भी जनसं या इस े जी से बढ रही है िक भावी ीढी लए खा 
,
 िनवास 
,
 िशा 
,
 िचिकसा आिद का पबध 
 
 मु कल ह जाएगा और सक र चलने कलए गािडय़ाँ क बद करनी     गी। इस अिभवृ  रहे
,
 िवकास क
 
 िनिम बन रही यजनाओं म   से एक कभी सफल हने क सभावना नह हैभू  खे भेिड़ ए आस म    ही एक द   ू  सरे
 
 क चीर 
-
 
 फा डाले ह   । बढी ह    ई जनसं या क थि म   मनु य भी उसी र क िगर सका है

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