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Prema (प्रेमा)

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Summary

इस उपन्यास के नायक बाबू अमृतराय का विवाह ‘प्रेमा’ नामक युवती से होना तय हुआ था, लेकिन कुदरत की इह लीला के कारण तब ऐसा नहीं हो सका।
इस कथानक में समाज सुधारक बाबू अमृतराय ने ‘एक विधवा को अपना जीवन संगिनी बनाकर ‘विधवा विवाह’ का विरोध करने वाले समाज के पोंगा पंडितों को गहरी सीख दी है...

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