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यूं ही बेसबब

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Summary

यह एक बंदिश है, शब्ददारी की अल्हड़ रागदारी है, सात-सुरों के तयशुदा श्रुतियों की ख्याल परंपरा से अल्हदा आवारगी का नाद स्वर है, गढ़े हुए बासबब लफ्जों से इतर स्वतः-स्फूर्तता का बेसबब बहाव है, ठुमरिया ठाठ की लयकारी के सहेजपनें से जुदा सहज-सरल-सुगम आह्लाद है, मूर्त की दहलीज से परे अमूर्त की अनुभूतियों की बेसायदार अभिव्यक्ति है। आप ही से आसनाई को मुंतजिर है यह ‘शब्द-संगीत’, यूं ही बेसबब... चले आइये...

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