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Kala Gulab

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Length: 366 pages3 hours

Summary

इस उपन्यास में लेखक ने एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था पर अपनी कलम चलाई है जिसके आकर्षण में फंसकर नई उम्र के युवक युवतियां अंधे होकर पतन की राह पर बढ़ते जा रहे है। न उन्हे भविष्य की चिन्ता है, पीछे मुड़कर देखना उन्हे गवारा नहीं है। बस वर्तमान का सुख ही उन्हे चाहिए। उसे प्राप्त करने के लिए उन्हे चाहे कितना ही नीचे गिरना पड़े। लेखन ने इस उपन्यास के माध्यम से नई पीढ़ी की सोच पर प्रहार किया है। आशा है कि यह उपन्यास समाज को सोचने पर मजबूर कर देगा कि अगर समय रहते इस समस्या पर विचार नही किया गया तो क्या होगा युवा पीढ़ी का भविष्य ???

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