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गुरुत्व कामाारम द्राया प्रस्तुत भाससक ई-ऩत्रिका

NON PROFIT PUBLICATION.

जुराई- 2012

FREE
E CIRCULAR

गुरुत्व ज्मोसतष ऩत्रिका जुराई 2012
सिॊतन जोशी

सॊऩादक

गुरुत्व ज्मोसतष त्रवबाग

गुरुत्व कामाारम

सॊऩका

92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA,
BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA

पोन

91+9338213418, 91+9238328785,

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ऩत्रिका प्रस्तुसत

सिॊतन जोशी, स्वस्स्तक.ऎन.जोशी

पोटो ग्राफपक्स

सिॊतन जोशी, स्वस्स्तक आटा

हभाये भुख्म सहमोगी स्वस्स्तक.ऎन.जोशी (स्वस्स्तक सोफ्टे क इस्डडमा सर)

ई- जडभ ऩत्रिका
अत्माधुसनक ज्मोसतष ऩद्धसत द्राया
उत्कृ द्श बत्रवष्मवाणी के साथ
कुर 150+ ऩेज भं प्रस्तुत

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Excellent Prediction
Total 150+ Pages

फहॊ दी/ English भं भूल्म भाि 1050/GURUTVA KARYALAY
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अनुक्रभ
स्वप्न पर त्रवशेष
स्वप्न शकुन से सॊफॊसधत त्रवशेष सूिना

6

स्वप्न की अशुबता सनवायण हे तु सयर उऩाम

16

स्वप्न ज्मोसतष

7

सतसथमं से स्वप्न पर का सभम सनधाायण

17

स्वप्न द्राया जाने धनप्रासद्ऱ के मोग

8

स्वप्न से योग एवॊ भृत्मु के सॊकेत

20

त्रववाह से सॊफॊसधत स्वप्न

9

वणाभारा के अनुशाय स्वप्न पर त्रविाय

23

स्वप्न औय योग

11

स्वप्न भं दे वी-दे वता के दशान

60

स्वप्न भं यत्न दशान

12

स्वप्न से सॊफॊसधत ऩौयास्णक भत

13

बगवान भहावीय की भाता त्रिशरा के 16

61

अद्भत
ु स्वप्न
गुरु ऩुष्माभृत मोग

64

हभाये उत्ऩाद
भॊि ससद्ध दर
ा साभग्री
ु ब

7

सयस्वती कवि औय मॊि

43

भॊिससद्ध रक्ष्भी मॊिसूसि

67

याशी यत्न एवॊ उऩयत्न

74

शादी सॊफसॊ धत सभस्मा

11

बाग्म रक्ष्भी फदब्फी

50

भॊि ससद्ध दै वी मॊि सूसि

67

शसन ऩीड़ा सनवायक

80

कनकधाया मॊि

15

भॊिससद्ध स्पफटक श्री मॊि

55

यासश यत्न

68

भॊगरमॊि से ऋण भुत्रि 83

द्रादश भहा मॊि

17

दग
ु ाा फीसा मॊि

57

भॊि ससद्ध रूद्राऺ

69

ऩढा़ई सॊफसॊ धत सभस्मा

85

भॊि ससद्ध भूग
ॊ ा गणेश

18

गणेश रक्ष्भी मॊि

58

श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि/ कवि

70

सवा योगनाशक मॊि/

90

सवा कामा ससत्रद्ध कवि

19

ऩुरुषाकाय शसन मॊि

62

याभ यऺा मॊि

71

भॊि ससद्ध कवि

92

सॊऩण
ू ा जडभ कुॊडरी ऩयाभशा

20

नवयत्न जफड़त श्री मॊि

65

जैन धभाके त्रवसशद्श मॊि

72

YANTRA

93

धन वृत्रद्ध फडब्फी

40

श्री हनुभान मॊि

66

अभोद्य भहाभृत्मुज
ॊ म कवि

74

GEMS STONE

95

क्मा आऩके फच्िे कुसॊगती के सशकाय हं ?

24

घॊटाकणा भहावीय सवा ससत्रद्ध भहामॊि

73

ऩसत-ऩत्नी भं करह सनवायण हे तु

26

भॊि ससद्ध वाहन दघ
ा ना नाशक भारुसत मॊि
ु ट

66

प्रद्ल कुण्डरी से स्स्टक उत्तय प्राद्ऱ फकस्जए

59

भॊि ससद्ध साभग्री-

83,84,85

स्थामी औय अडम रेख
सॊऩादकीम

4

फदन-यात के िौघफडमे

87

भाससक यासश पर

75

फदन-यात फक होया - सूमोदम से सूमाास्त तक

88

जुराई 2012 भाससक ऩॊिाॊग

79

ग्रह िरन जुराई -2012

89

जुराई-2012 भाससक व्रत-ऩवा-त्मौहाय

81

सूिना

97

जुराई 2012 -त्रवशेष मोग

86

हभाया उद्दे श्म

99

दै सनक शुब एवॊ अशुब सभम ऻान तासरका

86

GURUTVA KARYALAY

सॊऩादकीम
त्रप्रम आस्त्भम
फॊध/ु फफहन
जम गुरुदे व
बायतीम प्रािीन शास्त्रोि भाडमताओॊ के अनुशाय स्वप्नं की उत्ऩत्रत्त का सॊफॊध व्मत्रि के ऩूवज
ा डभ, सिऩी हुई
भहत्वकाॊऺाओॊ तथा ईश्वयीम प्रेयणा से होता है , वहीॊ ऩाद्ळात्म दे शं के जानकाय ने अऩने शोध एवॊ अनुसॊशान के आधय
ऩय स्वप्नं का भुख्म कायण व्मत्रि की

सिऩी हुई तथा अऩूणा इच्िाओॊ, काभवासनाओॊ तथा वताभान ऩरयस्स्थसतमं के

अनुरुऩ भाना है । सयर बाषा भं हन सभझे तो स्वप्न वह हं जो सोते सभम व्मत्रि को हो होने वारी अनुबूसतमाॊ होती
हं , स्वप्न दे खते सभम अॊतय भन भं होने वारे अनुबवो को आधुसनक त्रवऻान से जुडे़ रोग भ्रभ से जोडते हं तो कुि
बायतीम ऩयॊ ऩया औय शास्त्रं की सत्मता को स्वीकाय कयने वारे रोग स्वप्न को व्मत्रि के वताभान कार, बूतकार तथा
बत्रवष्मकार से जोडते हं क्मोकी त्रवद्रानो के भत से स्वप्न भं कुि ना कुि एसी सभानता होती हं , जो व्मत्रि के
व्मत्रिगत मा सभाजीक जीवन को सनस्द्ळत रुऩ से प्रबात्रवत कयती हं ।
स्वप्न क्मं आते हं ? मह जानने का प्रमास कयने ऩय मह ऻात होता हं की जफ यात नीयवता हो मा फदन भं
शाॊसत का वातावयण हो, तफ भनुष्म का अविेतन भन सशसथर हो जाता हं , जफ भनुष्म की िेतना शत्रि सशसथर हो
जाती हं तो वह उत्तेजना यफहत होता हं तफ भनुष्म का भन स्वबावीक रुऩ से अऩने जीवन भं बूत -बत्रवष्म आफद भं
घफटत होने वारे घटना क्रभं को दे खने की ऺभता अस्जात कय रेता हं । व्मत्रि की इस अद्भत
ु ऺभता के कायण ही
प्रकृ सत सभम-सभम ऩय उसे शुब-अशुब सॊकेतं के भाध्मभ से उसे अवगत कयने का प्रमास कयती हं । इसी सरए त्रवद्रानो
का कथन हं की स्वप्न हभंशा सनयाधाय, सनयथाक व सनरुद्दे श्म नहीॊ होते हं , अनेको फाय इन स्वप्नं भं भहत्वऩूणा व
प्रेयणादामक सॊकेत सनफहत होते हं , ससपा आवश्मिा हं उन सॊकेतो को त्रवस्ताय से सभझने की। इसतहास बी इस फात
का गवाह हं की अफतक हुए अनुशॊधान भं हभाये सभऺ अनेको उदाहयण आते यहे हं की स्वप्न भं फकसी व्मत्रि त्रवशेष
को अनेकं फाय गूढ़ यहस्मभम सॊकेत िूऩे सभरे व कई फाय मह स्वप्न उनके बत्रवष्म की भहत्वऩूणा घटनाओॊ के सूिक
बी यहे हं ।
स्वप्न के त्रवषम भं अफ तक हुवे वैऻासनक अनुसॊधानो के आधय ऩय अफतक साभने आमे ऩरयणाभं से मह फात
स्ऩद्श हो गमी हं की असधकतय स्वप्न भं हभ वही दे खते हं स्जस त्रवषम ऩय हभाया भन-भस्स्तष्क ज्मदा सभम कल्ऩना
कयता यहता हं प्राम: हभे वह सफ घटनाए मा त्रवषम स्वप्न भं फदखाइ दे ता हं । कुि जानकायं का भानना हं की
ज्मादातय हभ स्वप्न के उन भहत्व ऩूणा बागं को बूर जाते हं जो हभाये जीवन के सरए त्रवशेष अथा यखते हं ।
सोते सभम दे खे जाने वारे कुि स्वप्न बत्रवष्म के सूिक बी होते हं । बायतीम शकुन शास्त्रं भं इन स्वप्नं के
शुब-अशुब प्रबावं के फाये भं सत्रवस्ताय उल्रेस्खत फकमा गमा है ।
बायतीम भाडमाता के अनुशाय ज्मादातय ब्रह्म भुहूता भं जो स्वप्न दे खे जाते हं , वह सि होते हं मा हभाये बत्रवष्म

भं होने वारी घटनाओॊ के ऩूवा आबास की सूिना प्रदान कयते हं । महीॊ कायण हं की हजायं वषा ऩूवा हभाये त्रवद्रान ऋषीभुसनमं एवॊ आिामं नं मह फात ससद्ध कय फद थी की असधकतय स्वप्न भनुष्म की सिऩी हुई इच्िाओॊ का प्रसतत्रफॊफ मा
ऩरयणाभ होते हं । इस फात को आज के आधुसनक मुग के त्रवद्रान एवॊ वैऻासनक बी भानते हं ।
हजायं वषा ऩूवा ही हभाये त्रवद्रान ऋषी-भुसनमं ने अऩने मोग फर एवॊ शोध से मह बी ऻात कय सरमा था की
स्वप्न भं व्मत्रि के जीवन से जुडे़ गूढ़ यहस्म जो प्रत्मऺ औय ऩयोऺ सॊकेत के रुऩ भं सिऩे होते हं ।

त्रवद्रानं का कथन

हं की मफद स्वप्नं को अस्च्ि तयह से सभझकय उनका सूक्ष्भ अध्ममन फकमा जाए तो उससे अनेक प्रकाय के राब
व्मत्रि को सन्सॊदेह ही प्राद्ऱ हो सकता हं । क्मोफक स्वप्न भं फदखाई दे ने वारे दृश्मं से शुब-अशुब दोनं तयह के सॊकेत
प्राद्ऱ होते हं , मह सॊकेत स्वप्न दृद्शा व्मत्रि के जीवन की भहत्वऩूणा घटनाओॊ से जुड़े हो सकते हं । कुि ग्रॊथकायं ने
स्वप्न पर के सनणाम कयने भं सतसथमं का त्रवशेष भहत्व फतामा है । त्रवद्रानो के भतानुसाय अरग-अरग सतसथमं औय
ऩऺ भं स्वप्न पर की प्रासद्ऱ के यहस्म सिऩे होते हं । इन यहस्मं से मह ऻात फकमा जा सकता हं की व्मत्रि को स्वप्न
पर की प्रासद्ऱ शीघ्र होगी मा त्रवरॊफ से होगी मह ऻात फकमा जा सकता हं ।
बत्रवष्म से जेडे़ अशुब स्वप्न भं व्मत्रि को मफद आने वारे सभम भं उसके उऩय कोई आऩत्रत्त-त्रवऩत्रत्त मा योग
आफद के आगभन की आशॊका हो औय उसका सॊकेत मफद व्मत्रि को स्वप्न के भाध्मभ से प्राद्ऱ हो जामे तो वह उस
सॊकट से सावधान हो सकता हं औय फकसी फडे ़ खतये मा अनहोनी से फि सकता हं मा उसकी अशुबता भं कभी रा
सकता हं । बायतीम त्रवद्रानं नं अशुब स्वप्नं की अशुबता को दयू कयने से रेकय शुब स्वप्नं की शुबता भं वृत्रद्ध कयने
वारे सयर उऩामं खोज सनका हं , स्जससे इस साभडम व्मत्रि को त्रवशेष राब की प्रासद्ऱ हो सकं।
प्रािीन बायतीम धभाग्रॊथो भं स्वप्न शकुन के भहत्व को सभझते हुवे सैकड़ं ग्रॊथो की यिना की हं । स्जसके
भाध्मभ से भनुष्म के बूत, बत्रवष्म औय वताभान से सॊफॊसधत स्वप्नं का उत्तय प्राद्ऱ फकमे जा सकते हं । स्वप्न शकुन
का परादे श कयते सभम कुि भहत्व ऩूणा फातं का ख्मात यखना असत आवश्मक हं स्जनभं से कुि का सॊकरन इस
अॊक भं आऩके भागादशान हे तु फकमा गमा हं ।

ऩाठकं के भागादशान के सरमे स्वप्न पर त्रवशेषाॊक फक प्रस्तुसत फक गई हं ।
सबी ऩाठको के भागादशान मा ऻानवधान के सरए

स्वप्न पर से सॊफॊसधत त्रवसबडन उऩमोगी जानकायी इस अॊक भं

त्रवसबडन ग्रॊथो एवॊ सनजी अनुबवो के आधाय ऩय सॊकसरत की गई हं । जानकाय एवॊ त्रवद्रान ऩाठको से अनुयोध हं , मफद
स्वप्न पर से सॊफॊसधत त्रवषम भं सभम, स्थान, वस्तु, स्स्थसत इत्माफद के सॊकरन, प्रभाण ऩढ़ने, सॊऩादन भं, फडजाईन भं,
टाईऩीॊग भं, त्रप्रॊफटॊ ग भं, प्रकाशन भं कोई िुफट यह गई हो, तो उसे स्वमॊ सुधाय रं मा फकसी मोग्म जानकाय मा त्रवद्रान से
सराह त्रवभशा कय रे । क्मोफक जानकाय स्वप्न पर कथन कयने वारे एवॊ त्रवद्रानो के सनजी अनुबव व त्रवसबडन ग्रॊथो भं
वस्णात स्वप्न पर से सॊफॊसधत जानकायीमं भं एवॊ त्रवद्रानो के स्वमॊ के अनुबवो भं सबडनता होने के कायण स्वप्न पर
का त्रविाय कयते सभम स्वप्न कार की स्स्थसत इत्माफद के स्स्टक पर के सनणाम भं सबडनता सॊबव हं ।

सिॊतन जोशी

6

*****

जुराई 2012

स्वप्न शकुन से सॊफॊसधत त्रवशेष सूिना*****

 ऩत्रिका भं प्रकासशत स्वप्न शकुन से सम्फस्डधत सबी जानकायीमाॊ गुरुत्व कामाारम के असधकायं के साथ ही
आयस्ऺत हं ।

 स्वप्न शकुन शास्त्र ऩय अत्रवद्वास यखने वारे व्मत्रि स्वप्न शकुन के त्रवषम को भाि ऩठन साभग्री सभझ
सकते हं ।

 स्वप्न शकुन का त्रवषम शास्त्रोि होने के कायण इस अॊकभं वस्णात सबी जानकायीमा बायसतम शकुन शास्त्रं
से प्रेरयत होकय सरखी गई हं ।

 स्वप्न शकुन से सॊफॊसधत त्रवषमो फक सत्मता अथवा प्राभास्णकता ऩय फकसी बी प्रकाय फक स्जडभेदायी
कामाारम मा सॊऩादक फक नहीॊ हं ।

 स्वप्न शकुन से सॊफॊसधत बत्रवष्मवाणी फक प्राभास्णकता एवॊ प्रबाव फक स्जडभेदायी कामाारम मा सॊऩादक फक
नहीॊ हं औय ना हीॊ प्राभास्णकता एवॊ प्रबाव फक स्जडभेदायी के फाये भं जानकायी दे ने हे तु कामाारम मा सॊऩादक
फकसी बी प्रकाय से फाध्म हं ।

 स्वप्न शकुन से सॊफॊसधत रेखो भं ऩाठक का अऩना त्रवद्वास होना आवश्मक हं । फकसी बी व्मत्रि त्रवशेष को
फकसी बी प्रकाय से इन त्रवषमो भं त्रवद्वास कयने ना कयने का अॊसतभ सनणाम उनका स्वमॊ का होगा।

 स्वप्न शकुन से सॊफॊसधत ऩाठक द्राया फकसी बी प्रकाय फक आऩत्ती स्वीकामा नहीॊ होगी।

 स्वप्न शकुन से सॊफॊसधत रेख शकुन शास्त्र के प्राभास्णक ग्रॊथो, हभाये वषो के अनुबव एव अनुशॊधान के
आधाय ऩय फद गई हं ।

 हभ फकसी बी व्मत्रि त्रवशेष द्राया स्वप्न शकुन ऩय त्रवद्वास फकए जाने ऩय उसके राब मा नुक्शान की

स्जडभेदायी नफहॊ रेते हं । मह स्जडभेदायी स्वप्न शकुन ऩय त्रवद्वास कयने वारे मा उसका प्रमोग कयने वारे
व्मत्रि फक स्वमॊ फक होगी।

 क्मोफक इन त्रवषमो भं नैसतक भानदॊ डं, साभास्जक, कानूनी सनमभं के स्खराप कोई व्मत्रि मफद नीजी स्वाथा
ऩूसता हे तु स्वप्न शकुन का प्रमोग कताा हं अथवा स्वप्न शकुन का सूक्ष्भ अध्ममन कयने भे िुफट यखता हं
मा उससे िुफट होती हं तो इस कायण से प्रसतकूर अथवा त्रवऩरयत ऩरयणाभ सभरने बी सॊबव हं ।

 स्वप्न शकुन से सॊफॊसधत जानकायी को भानकय उससे प्राद्ऱ होने वारे राब, हानी फक स्जडभेदायी कामाारम मा
सॊऩादक फक नहीॊ हं ।

 हभाये द्राया ऩोस्ट फकमे गमे स्वप्न शकुन ऩय आधारयत रेखं भं वस्णात जानकायी को हभने सैकडोफाय स्वमॊ

ऩय एवॊ अडम हभाये फॊधग
ु ण ने बी अऩने नीजी जीवन भं अनुबव फकमा हं । स्जस्से हभ अनेको फाय स्वप्न
शकुन के आधाय ऩय स्स्टक उत्तय की प्रासद्ऱ हुई हं । असधक जानकायी हे तु आऩ कामाारम भं सॊऩका कय सकते हं ।
(सबी त्रववादो केसरमे केवर बुवनेद्वय डमामारम ही भाडम होगा।)

जुराई 2012

7

स्वप्न ज्मोसतष

 सिॊतन जोशी
सोते सभम व्मत्रि को हो होने वारी अनुबूसतमं को स्वप्न कहा जाता हं । स्वप्न दे खते सभम अॊतय भन भं होने
वारे अनुबवो को कुि रोग भ्रभ से जोडते हं तो कुि इसे वताभान कार, बूतकार तथा बत्रवष्मकार से जोड कय व्मत्रि
के जीवन के साथ जोडने का कामा अनाफदकार से िरा आ यहा हं । क्मोकी त्रवद्रानो के भत से स्वप्न भं कुि ना कुि
एसी सभानता होती हं , जो व्मत्रि के व्मत्रिगत मा सभाजीक जीवन से भेर खाती हं ।
हभाया भस्स्तष्क ज्मदा सभम तक स्जस त्रवषम की कल्ऩना कयता ये हता हं प्राम: हभे वह सफ स्वप्न भं फदखाइ
दे ता हं । एवॊ ज्मादातय हभ स्वप्न के उन भहत्व ऩूणा बागं को बूर जाते हं जो हभाये जीवन के सरए त्रवशेष अथा यखते
हं ।
सोते सभम दे खे जाने वारे कुि स्वप्न बत्रवष्म के सूिक बी होते हं । बायतीम शकुन शास्त्रं भं इन स्वप्नं के
शुब-अशुब प्रबावं के फाये भं सत्रवस्ताय उल्रेस्खत फकमा गमा है ।
बायतीम भाडमाता के अनुशाय ज्मादातय ब्रह्म भुहूता भं जो स्वप्न दे खे जाते हं , वह सि होते हं मा हभाये बत्रवष्म

भं होने वारी घटनाओॊ के ऩूवा आबास की सूिना प्रदान कयते हं ।

स्वप्न भे दे खए गमे त्रवषमो के शुकन-अऩशुकन के फाये भे कोई ठोस प्रभाण नहीॊ होने के उऩयाॊत शकुन शास्त्रं
भं अनेक प्रकाय के स्वप्नं की त्रवस्तृत जानकायी दे कय स्वप्न का असधक भहत्व फतामा गमा हं । शास्त्र भं वस्णात कई
जानकायीमा फहुउऩमोगी होने ऩय बी उससे प्राद्ऱ जानकाये से स्वप्न के फाये भं सही त्रवद्ऴेषण कयना इतना आसान नहीॊ
हं क्मोकी ज्मादातय भभरं भे व्मत्रि दे खे गमे स्वप्नो भं से कुि एक त्रवषम को ही माद कय ऩाता हं एवॊ फाकी के
त्रवषमं को वह सही पर जानने से ऩेहरे ही सभम के साथ बूरा दे ता हं । इस सरमे स्वप्न के फाये ने त्रवद्ऴेषण कयना
थोडा़ कफठन हो जाता हं ।

कुि भनोवैऻासनक का भत हं की स्वप्नं का हभायी वास्तत्रवक अवस्था से कोई सॊफॊध नहीॊ होता। रेफकन

बायतीम त्रवद्रानं के भतानुशाय स्वप्नं का शुब-अशुब प्रबाव का हभाये जीवन ऩय सनस्द्ळत रुऩ से ऩड़ता हं ।

भॊि ससद्ध दर
ा साभग्री
ु ब
हत्था जोडी- Rs- 370

घोडे की नार- Rs.351

भामा जार- Rs- 251

त्रफल्री नार- Rs- 370

भोसत शॊख- Rs- 550

धन वृत्रद्ध हकीक सेट Rs-251

ससमाय ससॊगी- Rs- 370

दस्ऺणावतॉ शॊख- Rs- 550

इडद्र जार- Rs- 251

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जुराई 2012

8

स्वप्न द्राया जाने धनप्रासद्ऱ के मोग

 सिॊतन जोशी
स्वप्न भं दे वी-दे वता के दशान होने से धन राब के साथ सपरता दशााता है ।
स्वप्न भं गाम का दध
ू सनकारना म सनकारते दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
सपेद घोडे को दे खना धन की प्रासद्ऱ एवॊ उज्जवर बत्रवष्म का सॊकेत है ।

स्वप्न भं नीरकण्ठ मा सायस ऩऺी को दे खना धन राब एवॊ याज सम्भान फक

100 से असधक
जैन मॊि

प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
स्वप्न भं कदम्फ के वृऺ को दे खना धन प्रासद्ऱ, स्वास््म राब, याजसम्भान प्रासद्ऱ
का सॊकेत है ।

स्वप्न भं कानं भं फारी मा धायण फकमे दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
स्वप्न भं नृत्म कयती स्त्री/कडमा को दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
स्वप्न भं फकसान को खेत भं काभ कयते दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
स्वप्न भं भृत ऩऺी को दे खना आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।

हभाये महाॊ जैन धभा के सबी प्रभुख,

दर
ा एवॊ शीघ्र प्रबावशारी मॊि ताम्र
ु ब
ऩि, ससरवय (िाॊदी) ओय गोल्ड (सोने)
भे उऩरब्ध हं ।

स्वप्न भं जरता हुवा दीऩक दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।

हभाये महाॊ सबी प्रकाय के मॊि कोऩय

स्वप्न भं िूहं को दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।

(सोने) भे

स्वप्न भं स्वणा को दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।

स्वप्न भं सपेद िीफटमाॉ दे खना धन राब का सॊकेत है ।

स्वप्न भं कारे त्रफच्िू को दे खना धन राब का सॊकेत है ।
स्वप्न भं नेवरे का को दे खना हीये -ज्वाहयात फक प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
स्वप्न भं भधुभक्खी का ित्ता दे खना धन राब का सॊकेत है ।
स्वप्न भं सऩा को पन उठामे दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
स्वप्न भं हाथी को दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
स्वप्न भं भहर को दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
स्वप्न भं तोते को खाते दे खना प्रफर धन प्रासद्ऱ के मोग का सॊकेत है ।
स्वप्न भं अॊगुरी भं अॊगूठी ऩहनं हुवे दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।

स्वप्न भं आभ का फसगिा दे खना आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।

ताम्र ऩि, ससरवय (िाॊदी) ओय गोल्ड
अरावा

फनवाए

आऩकी

जाते

है ।

आवश्मकता

इसके
अनुशाय

आऩके द्राया प्राद्ऱ (सिि, मॊि, फड़ज़ाईन)
के अनुरुऩ मॊि बी फनवाए जाते है .
गुरुत्व कामाारम द्राया उऩरब्ध कयामे
गमे सबी मॊि अखॊफडत एवॊ 22 गेज
शुद्ध कोऩय(ताम्र ऩि)- 99.99 टि शुद्ध
ससरवय (िाॊदी) एवॊ 22 केये ट गोल्ड
(सोने) भे फनवाए जाते है । मॊि के त्रवषम
भे

असधक

जानकायी

के

सरमे

हे तु

स्वप्न भं सऩा को त्रफर के साथ दे खना आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।

सम्ऩका कयं ।

स्वप्न भं गाम के दशान होने से अत्मडत शुब होता हं , व्मत्रि को मश,

GURUTVA KARYALAY

वैबव एवॊ ऩरयवाय वृत्रि से राब प्राद्ऱ होती है ।
स्वप्न भं ऩवात औय वृऺ ऩय िढ़ते दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
स्वप्न भं गौ दग्ु ध, घी, पर वारे वृऺ दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
स्वप्न भं आॊवरे औय कभर को दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।

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9

जुराई 2012

त्रववाह से सॊफॊसधत स्वप्न

 सिॊतन जोशी
कुि प्रकाय के स्वप्न एक त्रवशेष प्रकाय का पर दे ते हं । आऩके भागा दशान के सरमे ज्मोसतष के ग्रॊथो भं उल्रेस्खत दाॊऩत्म जीवन
एवॊ प्रेभ-प्रसॊगं से सम्फॊसधत स्वप्न पर का त्रविाय महा दशााएॊ गएॊ हं ।

 स्वप्न शास्त्र के अनुसाय नीॊद भं फदखाई दे ने वारे सऩनं से बी प्रेभ त्रववाह होने मा ना होने के सॊकेत प्राद्ऱ होते हं ।
 रडकी का स्वप्न भं फकसी सिफडय़ा को िहिहाती हुई दे खना प्रेभ त्रववाह होने का सॊकेत हं ।
 रड़की का स्वप्न भं स्वमॊ को त्रफस्तय ऩय िद्दय त्रफिाते हुए दे खना फकसी से जल्दी प्रेभ होने का मा अऩना प्रेभ त्रववाह होने का
सॊकेत हं





















स्वप्न भं स्वमॊ को सॊगीत सुनते हुए दे खना प्रेभ सॊफॊध भं सपरता प्रासद्ऱ का सॊकेत हं ।

स्वप्न भं सकास जेसी कराफाजी दे खना उसके प्रेभ भं कोई तीसया व्मत्रि दखर दे ने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं प्रणम दृश्म दे खना प्रेभ सॊफॊध भं ऩये शासन आने के सॊकेत हं ।
स्वप्न भं हीये -जवाहयात मा हीये के आबूषण उऩहाय भं प्राद्ऱ होते दे खना दाॊऩत्म जीवन भं ऩये शासनमाॊ आसकती हं ।
स्वप्न भं सोने के आबूषण दे खना सभृद्ध ऩरयवाय भं त्रववाह होने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं फाजाय भं घुभते दे खे दे खना भनऩसॊद जीवन साथी प्राद्ऱ होने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं शव दे खना गृहस्थ जीवन भं सॊकटं के आने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं स्वमॊ को सुयॊग भं दे खना प्रेभ सॊफॊध अथवा वैवाफहक जीवन ऩये शासनमाॊ आसकती हं ।
स्वप्न भं सुॊदय कराकायी वारे वस्त्र दे खना सुॊदय औय सुशीर जीवन साथी प्राद्ऱ होने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं स्वमॊ को नािते दे खना शीघ्र त्रववाह होने का औय वैवाफहक सुख भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं सुॊदय स्त्री की साड़ी दे खना अऩने प्रेभ ऩाि से शीघ्र सभरने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं सुॊदय रड़की से भस्ती कयते दे खना औय रड़की को हॊ सते दे खना बोग त्रवरास प्राद्ऱ होने का सॊकेत हं ।
सऩने भं कऩड़े खोरते दे खना प्रेभ औय स्त्री सुख स्त्री सुख प्राद्ऱ होने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं स्वमॊ को शहद का सेवन कयते दे खना शीघ्र ही त्रववाह होने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं स्वमॊ को हवाई जहाज िराते हुए दे खना त्रववाह होने का सॊकेत हं ।

स्वप्न भं स्वमॊ को केरा खाते दे खना प्रेभ एवॊ वैवाफहक जीवन के सरमे अशुब सॊकेत हं ।
स्वप्न भं स्वमॊ को कॊगन ऩहनने दे खना शीघ्र वैवाफहक फॊधन भं फॊधने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं स्वमॊ को भॊफदय अथवा ऩूजा स्थान ऩय ऩूजा-अिाना कयते दे खना प्रेभ त्रववाह भं सपर होने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं अऩनो से सॊफॊध टू टते दे खना शीघ्र ही त्रववाह होने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं फकसी बवन मा भहर से फाहय आते दे खना सगाई टू ट ने का सॊकेत हो सकता हं ।
स्वप्न भं अऩने प्रेभी, ऩसतऩत्नी को अडम के साथ भं अनैसतक सॊफॊध फनाते दे खना अच्िे िरयि के जीवन साथी प्राद्ऱ होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं अऩने प्रेभी के साथ भं पूरं के फगीिं भं घूभतेफपयते दे खना शीघ्र ही त्रववाह होने का औय सुखी दाॊऩत्म जीवन का सॊकेत हं ।

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जुराई 2012

स्वप्न भं फैर को ऩानी ऩीता दे खना दाॊऩत्म जीवन भं सपरता का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं केवर फडे बवन अथवा त्रफल्री को दे खना प्रेभ सॊफॊधो भं ऩये शानी आने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं फकसी का त्रववाह होते दे खना शीघ्र ही त्रववाह होने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं फकभती आबूषण खोते दे खना दाॊऩत्म जीवन भं ऩये शानी आने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं नुफकरे हसथमाय दे खना ऩारयवारयक जीवन भं क्रेश होने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं फकभती भं अॊगूठी उऩहाये भं प्राद्ऱ होते दे खना शीघ्र ही त्रववाह होने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं िभकते कऩडे दे खना भान सम्भान भं वृत्रद्ध एवॊ शीघ्र ही त्रववाह होने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं कयी खाते दे खना त्रवधवा मा त्रवधुय से त्रववाह होने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं गुड्डे -गुफडमा दे खना शीघ्र ही त्रववाह होने का सॊकेत हं ।

स्वप्न भं उडती सततरी ऩास आते दे खना प्रेभ त्रववाह भं सपरता का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं उडती सततरी दयू जाते दे खना वैवाफहक जीवन भं ऩये शानी सॊकेत हं ।
स्वप्न भं नीरकॊठ दे खना त्रववाह होने का सॊकेत हं ।

स्वप्न भं फकसी को प्रेभ प्रस्ताव यखते दे खना शादी भं त्रवरॊफ होने का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं यॊ गफी-यॊ गे पूरं से बया फगीिा दे खना प्रेभ त्रववाह भं सपरता का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं अऩने शयीय ऩय बस्भ रगाते दे खना शीघ्र ही त्रववाह एवॊ गृहस्थ सुख भं वृत्रद्ध का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं जरती भोभफत्ती दे खना शीघ्र ही त्रववाह का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं यसीरे पर खाते दे खना शीघ्र ही त्रववाह का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं सुऩायी दे खना शीघ्र ही त्रववाह का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं फहयन दे खना शीघ्र त्रववाह एवॊ धन राब का सॊकेत हं ।
स्वप्न भं केतरी के पूर दे खना दाॊऩत्म जीवन सुख-शाॊसत का सॊकेत हं ।

असरी 1 भुखी से 14 भुखी रुद्राऺ
गुरुत्व कामाारम भं सॊऩण
ू ा प्राणप्रसतत्रद्षत एवॊ असरी 1 भुखी से 14 भुखी तक के रुद्राऺ उऩरब्ध हं ।
ज्मोसतष कामा से जुडे़ फॊध/
ु फहन व यत्न व्मवसाम से जुडे रोगो के सरमे त्रवशेष भूल्म ऩय यत्न, उऩयत्न
मॊि, रुद्राऺ व अडम दर
ा साभग्रीमाॊ एवॊ अडम सुत्रवधाएॊ उऩरब्ध हं । रुद्राऺ के त्रवषम भं असधक
ु ब
जानकायी के सरए कामाारम भं सॊऩका कयं ।

त्रवशेष मॊि
हभायं महाॊ सबी प्रकाय के मॊि सोने-िाॊफद-ताम्फे भं आऩकी आवश्मिा के अनुशाय फकसी बी बाषा/धभा
के मॊिो को आऩकी आवश्मक फडजाईन के अनुशाय २२ गेज शुद्ध ताम्फे भं अखॊफडत फनाने की त्रवशेष
सुत्रवधाएॊ उऩरब्ध हं । असधक जानकायी के सरए कामाारम भं सॊऩका कयं ।
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जुराई 2012

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स्वप्न औय योग

 सिॊतन जोशी



स्वप्न भं मफद अभरतास के पूर फदखे तो ऩीसरमा मा कोढ़ का योग होने की सॊबावना होती हं ।
स्वप्न भं मफद अॊजन अथाात काजर फदखे तो नेि योग होने की सॊबावना होती हं ।
स्वप्न भं मफद अयहय खाते दे खना ऩेट ददा का सूिक हं ।

स्वप्न भं मफद अिाय, ऩऩीता, अयफी, कद ू दे खना ससय ददा औय ऩेट ददा होने के सॊकेत हं । मफद अऩना ऩेट
फढाहुआ नझय आमे तो ऩेट से सॊफॊसधत ऩये शानी का सूिक हं ।

 स्वप्न भं मफद अॊग यऺक फदखे तो गॊसबय िोट रगने का खतया होता हं ।
 मफद स्वप्न भं जरती हुई अगयफत्ती, स्वमॊ को उड़ते, कोई कायखाना दे खना आकस्स्भक दघ
ा ना का सॊकेत हं ।
ु ट
 स्वप्न भं मफद अॊगायं ऩय िरते, आक का ऩौधा मा पूर, पॊसा हुआ िूहा, उड़ती हुई वाष्ऩ दे खना शायीरयक
कद्श होने के सॊकेत हं ।

 मफद स्वप्न भं फकसी प्रकाय की ऩुफडमा फॊधते, पूटी आॉख फदखे तो महॊ शायीरयक कद्श भं वृत्रद्ध के सॊकेत हं ।
 मफद स्वप्न भं इद्श भूसता िोयी फदखना भृत्मुतुल्म कद्श होने के सॊकेत हं ।
 मफद स्वप्न भं फदखे तो उऩवन, करी, कम्फर, कसयत कयते, ऩोशाक ऩहनना, योटी खाना मा ऩकाना, वासागय
सूखता, ित्त से सगयते साॊऩ, नकाफ रगाते, गभा ऩानी का झयना, ऩीरे यॊ गका
खाना, त्रवषैरे जीव, खारी खाट दे खना फीभायी की ऩूवा सूिना के सॊकेत हं ।

झॊडा, दल्
ू हा /दल्
ु हन फायात, ऩॊजीयी

 िॊिर आॉखे दे खना
 मफद स्वप्न भं फदखे तो कॊघी दे खना दाॊत मा कान भं ददा औय आकस्स्भक िोट रगने का सॊकेत हं ।
 मफद स्वप्न भं घय भं आग, तयाजू भं तुरता साभान, फादाभ खाता, हकीभ-वैद्य, स्वमॊ को बूसभ ऩय, भखभर ऩय
फैठे, सोना, शयीय की भासरश, आईना, गीरी वस्तु, फदखे तो फीभायी फढने के सॊकेत हं ।

 मफद स्वप्न भं सेवा कयवाना, सोरह श्रृग
ॊ ाय, ऩीरा यॊ ग, त्रऩजया दे खना, ऩारकी फदखे तो स्वास््म खयाफ होने के
रऺण हं ।

शादी सॊफॊसधत सभस्मा
क्मा आऩके रडके-रडकी फक आऩकी शादी भं अनावश्मक रूऩ से त्रवरम्फ हो यहा हं मा उनके वैवाफहक

जीवन भं खुसशमाॊ कभ होती जायही हं औय सभस्मा असधक फढती जायही हं । एसी स्स्थती होने ऩय

अऩने रडके-रडकी फक कॊु डरी का अध्ममन अवश्म कयवारे औय उनके वैवाफहक सुख को कभ कयने
वारे दोषं के सनवायण के उऩामो के फाय भं त्रवस्ताय से जनकायी प्राद्ऱ कयं ।

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12

जुराई 2012

 मफद स्वप्न भं अऩना कद रम्फा फदखे मा सूमा िडद्र आफद का त्रवनाश होता फदखे तो भृत्मुतुल्म कद्श होने का
सॊकेत हं ।





मफद स्वप्न भं कभॊडर फदखे तो ऩरयवाय के फकसी सदस्म से त्रवमोग होने का सॊकेत हं ।
मफद स्वप्न भं ऩीरे यॊ ग की

गाम मा फैर दे खना बमॊकय भहाभायी आने के रऺण हं ।

मफद स्वप्न भं गयभ ऩानी दे खना फुखाय मा अडम फीभायी आने के रऺण हं ।
स्वप्न भं आकाश, ध्रुव ताया, ग्रहण, सूमा दशान औय स्वणा फदखे तो शायीरयक कद्श होने के सॊकेत हं ।
मफद स्वप्न भं शयी यफडे से

िोटा व िोटे से फडा होते फदखे, हाथ से िरना, जानवयं की तयह िरना, भनुष्म

के स्थान ऩय ऩशु मा ऩऺी आवाज सुनना, जॊगरी ऩत्ते-घास खाते दे खना स्वास््म से सॊफॊसधत सभस्माओॊ से
सभुस्खन होने का सॊकेत हं ।

 मफद स्वप्न भं कोई वस्तु पूटते दे खना, िीय-पाड आसध फदखाई दे तो शल्मफक्रमा अथाात ऑऩये शन का सॊकेत हं ।
स्वप्न औय उत्तभ स्वास््म के सॊकेत
 मफद स्वप्न भं अॊगूय, अजवाईन, िूयन, सयसं का साग, संठ खाते दे खना त्रफभायी से िुटकाया औय स्वस््म राब
होने का सॊकेत हं ।

 मफद स्वप्न भं शयीयका कोई कटा अॊग, खयंि, खुजरी, ताराफ भं तैयना, तोसरमा, दवा का सगयना, दऩु ट्टा, दे वी
दशान, नभक, नीभ का व्रऺ, ऩयी, प्रसाद फाॉटना,

फटु आ दे खना, अऩने बाई को दे खना, मभयाज दे खना, हयं यॊ ग

के कऩडे , शयफत दे खना, ऺभा-दान कयते, साफुन, हड्डी दे खना योग से िुटकाया सभरने का सॊकेत हं ।

 मफद स्वप्न भं िूहे दानी से िूहा सनकरते दे खना योग, कद्श से भुत्रि के सॊकेत हं ।
फदधाामु मोग
 मफद स्वप्न भं अऩहयण, आत्भहत्मा, कपन, नय कॊकार, भीनाय, शभशान-कब्रस्तान, हत्मा मा अऩने ऩय हभरा
होते दे खना आमु वृत्रद्ध के सॊकेत हं ।
नोट: स्वप्न का पर दे खते सभम केवर यात्रि के उत्तयाद्धा के उऩयाॊत फदखाई दे ने वारे स्वप्न को ही बत्रवष्म का सॊकेत
सभझना िाफहमे।

स्वप्न भं यत्न दशान
स्वप्न भं भास्णक यत्न दे खना शत्रि तथा सत्ता भं वृत्रद्ध होने का

स्वप्न भं नीरभ यत्न दे खना उडनत्रत्त होने का सॊकेत हं ।

सॊकेत हं ।

स्वप्न भं गोभेद यत्न दे खना अनावश्मक सभस्माएॊ आने का

स्वप्न भं भोती यत्न दे खना भानससक शाॊसत सभरने का सॊकेत हं ।

सॊकेत हं ।

स्वप्न भं भूॊगा यत्न दे खना शिु ऩय त्रवजम सभरने का सॊकेत हं ।

स्वप्न भं रहसुसनमा यत्न दे खना – भान सम्भान फढ़ने का

स्वप्न भं ऩडना यत्न दे खना व्मवसाम भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत हं ।

सॊकेत हं ।

स्वप्न भं ऩुखयाज यत्न दे खना सुख-सौबाग्म फढ़ने का सॊकेत हं ।

स्वप्न भं फपयोज़ा यत्न दे खना व्मवसाम भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत

स्वप्न भं हीया यत्न दे खना आसथाक उडनसत होने का सॊकेत हं ।

हं ।

जुराई 2012

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स्वप्न से सॊफॊसधत ऩौयास्णक भत

 सिॊतन जोशी, स्वस्स्तक.ऎन.जोशी
क्मा

स्वप्न

सिऩाई

प्रसतत्रफॊफ/ऩरयणाभ होते हं ?

गई

इच्िाओॊ

का

हजायं वषा ऩूवा हभाये त्रवद्रान ऋषी-भुसनमं एवॊ
आिामं नं मह फात ससद्ध कय फद थी की असधकतय
स्वप्न भनुष्म की सिऩी हुई इच्िाओॊ का प्रसतत्रफॊफ मा
ऩरयणाभ होते हं । इस फात को आज के आधुसनक मुग के
त्रवद्रान एवॊ वैऻासनक बी भानते हं ।
हजायं वषा ऩूवा ही हभाये त्रवद्रान ऋषी-भुसनमं ने
अऩने मोग फर एवॊ शोध से मह बी ऻात कय सरमा था
की स्वप्न भं व्मत्रि के जीवन से जुडे़ गूढ़ यहस्म जो
प्रत्मऺ औय ऩयोऺ सॊकेत के रुऩ भं सिऩे होते हं ।
त्रवद्रानं का कथन हं की मफद स्वप्नं को अस्च्ि
तयह से सभझकय उनका सूक्ष्भ अध्ममन फकमा जाए तो
उससे अनेक प्रकाय के राब व्मत्रि को सन्सॊदेह ही प्राद्ऱ
हो सकता हं । क्मोफक अफतक हुवे शोध के अनुशाय स्वप्न

भं फदखाई दे ने वारे दृश्मं से शुब-अशुब दोनं तयह के
सॊकेत प्राद्ऱ होते हं , मह सॊकेत स्वप्न दृद्शा व्मत्रि के
जीवन की भहत्वऩूणा घटनाओॊ से जुड़े हो सकते हं ।
सयर बाषा भं स्वप्न क्मं आते हं मह जानने का
प्रमास कयने ऩय मह ऻात होता हं की जफ यात नीयवता
हो मा फदन भं शाॊसत का वातावयण हो, तफ भनुष्म का
अविेतन भन सशसथर हो जाता हं , जफ भनुष्म की िेतना
शत्रि सशसथर हो जाती हं तो वह उत्तेजना यफहत होता हं
तफ भनुष्म का भन स्वबावीक रुऩ से अऩने जीवन भं

शुब-अशुब सॊकेतं के भाध्मभ से उसे अवगत कयने का
प्रमास कयती हं । इसी सरए त्रवद्रानो का कथन हं की
स्वप्न हभंशा सनयाधाय, सनयथाक व सनरुद्दे श्म नहीॊ होते हं ,
अनेको फाय इन स्वप्नं भं भहत्वऩूणा व प्रेयणादामक
सॊकेत सनफहत होते हं , ससपा आवश्मिा हं उन सॊकेतो को
त्रवस्ताय से सभझने की। इसतहास बी इस फात का गवाह

हं की अफतक हुए अनुशॊधान भं हभाये सभऺ अनेको
उदाहयण आते यहे हं की स्वप्न भं फकसी व्मत्रि त्रवशेष

को अनेकं फाय गूढ़ यहस्मभम सॊकेत िूऩे सभरे व कई
फाय मह स्वप्न उनके बत्रवष्म की भहत्वऩूणा घटनाओॊ के
सूिक बी यहे हं ।

स्वप्नशास्त्र की भूर ग्रॊथो भं स्वप्नो के सात
प्रकाय होने का उल्रेख सभरता हं ।

दृद्श् श्रुतोऽनुबत
ू द्ळ प्रासथात् कस्ल्ऩतस्तथा ।

बात्रवको दोषजश्िेसत स्वप्न् सद्ऱत्रवधो भत्
1. दृद्श

जो दृश्म जागृत अवस्था भं दे खे जाते हं उसी से सॊफॊसधत
दृश्म को स्वप्न भं दे खना दृद्श स्वप्न कहराते हं ।

2. श्रुत
फकसी से सुनी हुई फातं से सॊफॊसधत दृश्म को स्वप्न भं
दे खना श्रुत स्वप्न कहराते हं ।

बूत-बत्रवष्म आफद भं घफटत होने वारे घटना क्रभं को

3. अनुबत

दे खने की ऺभता अस्जात कय रेता हं । व्मत्रि की इस

जागृत अवस्था के दौयान अनुबव की हुई फातं को स्वप्न

अद्भत
ु ऺभता के कायण ही प्रकृ सत सभम-सभम ऩय उसे

भं दे खना अनुबूत स्वप्न कहराते हं ।

जुराई 2012

14

4. प्रासथात
मफद व्मत्रि ने अऩनी जागृत अवस्था भं फकसी प्राथानावस्तु की इच्िा की हो उस से सॊफॊसधत दृश्म को स्वप्न
भं दे खना प्रासथात स्वप्न कहराते हं ।

5. कस्ल्ऩत
मफद व्मत्रि ने अऩनी जाग्रतावस्था भं फकसी की कल्ऩना
की हो उस से सॊफॊसधत दृश्म को स्वप्न भं दे खना कस्ल्ऩत

फड़ा पर दे ता हं , औय स्जस स्वप्न को दे खने के फाद भं
ऩुन् सनद्रा नहीॊ आती औय जो स्वप्न प्रसतकूर विनो से
उऩहत अथाात प्रबात्रवत नहीॊ होता उसका बी उसी फदन
फहुत फड़ा पर (शुब-अशुब पर सॊफॊसधत व्मत्रि को) प्राद्ऱ
होता हं ।

नोट् कुि त्रवद्रानो का भानना हं की केवर
बात्रवक स्वप्नो का प्रबाव ही त्रवशेष रुऩ से व्मत्रि

स्वप्न कहराते हं ।

के जीवन ऩय होता हं ।

6. बात्रवत

ग्रॊथकायं ने स्वप्न के पर प्रासद्ऱ भं सॊबॊत्रवत

स्जसे व्मत्रि ने न कबी दे खा हो औय नाहीॊ सुना हो,
रेफकन जो बत्रवष्म भं घफटत होने वारा हो वह बात्रवक
स्वप्न कहराते हं ।

7. दौषज।
वात, त्रऩत्त औय कप से त्रवकृ त हो जाने ऩय फदखाई दे ने
वारे स्वप्न को दोषज कहाजाता हं ।

तेष्वाद्या सनष्परा् ऩञ्ि मथास्वप्रकृ सतफदा वा ।

त्रवस्भृतो दीघाह्रस्वोऽसत ऩूवया ािे सियात्परभ ्

दृद्श् कयोसत तुच्िॊ ि गो सगे तदहभाहत ् ।
सनद्रमा वाऽनुऩहत् प्रतीऩैवि
ा नैस्तथा

अथाात: उि सात प्रकाय के स्वप्नं भं से ऩहरे ऩाॊि
स्वप्न तो सनष्पर (अथाात शुब-अशुब परं से यफहत)
होते हं , औय जो स्वप्न वाताफद प्रकृ सत के अनुसाय होते हं ,
फदन भं आते हं , बूर जाते हं , फहुत रम्फे मा फहुत िोटे

होते हं वे सफ सनष्पर होते हं । अॊसतभ दो प्रकाय के
स्वप्न (अथाात बात्रवक तथा दोषज) का पर अवश्म
सभरता हं वह बी जो स्वप्न यात्रि की ऩूवा बाग भं फदखते
हं उनका पर सिय कार के ऩद्ळात होता हं तथा स्वल्ऩ
पर होता हं , औय प्रात् कार का स्वप्न उसी फदन फहुत

सभम को दशााते हुए कहा हं ।

यात्रि के त्रवसबडन प्रहय के अनुसाय स्वप्न पर:
 यात्रि के ऩहरे प्रहय जो स्वप्न दे खे जाते है उसका
पर एक वषा भं सभरता हं ।

 यात्रि के दस
ू ये प्रहय भं दे खे गए स्वप्न का पर
आठ भाह भं सभरता हं , फकसी आिामं नं सात
भाह (भुसन िडद्रसेन) तो फकसी ने ि् भाह कहं
हं ।

 यात्रि के तीसये प्रहय भं दे खे गए स्वप्न का पर
तीन भाह भं सभरता हं ।

 यात्रि के िैथे प्रहय भं दे खे गए स्वप्न का पर एक
भहीने भं सभरता हं । वयाहसभफहय के भत से िैथे
प्रहय के स्वप्न 16 फदनं भं पर दे ते हं ।

 यात्रि के अॊत अथाात ब्रह्म भुहूता भं दे खे गए स्वप्न
का दश फदन भं पर दे ते हं ।

 सूमोदम से ऩूवा दे खे गमे स्वप्न असतशीघ्र पर
दे ते हं ।

 मफद कोई व्मत्रि एक ही यात भं शुब-अशुब दोनं
तयह के स्वप्न दे खता हं तो पर कथन के सभम
केवर ऩीिे वारे स्वप्न से ही पर का सनणाम
कयना िाफहए।

जुराई 2012

15

 त्रवद्रानो ने फदन के सभम फदखने वारा स्वप्न को
त्रवशेष प्रबावशारी नहीॊ भाना हं ।

पर का प्रबात्रव होना, व्मत्रि के ग्रह, नऺि एवॊ उसकी

बात्रवत स्वप्न के सॊदबा भं मही ऻात होता हं की जो
शुद्ध सित्त वारे सास्त्वक व्मत्रि होते हं उनको प्रकृ सत
प्रत्मऺ रुऩ से सॊकेत दे ती हं । इसी सरए व्मत्रि के अव
िेतन भन से स्वप्न के रुऩ भं वह प्रकट हो कय उसे
शुब-अशुब से अवगत कयाती है । क्मोफक स्जस त्रवषम ऩय
व्मत्रि ने कबी न सोिा

हो, न दे खा हो, न सुना

हो,

उससे सॊफॊसधत त्रवषमं के स्वप्न को बात्रवत स्वप्न कहा
जाता हं । बात्रवत स्वप्न के त्रवषम भं त्रवद्रानो का महाॊ
तक भाना हं फक बात्रवत स्वप्न दे य-सवेय अऩना शुबअशुब प्रबाव अवश्म फदखाते हं ।

ज्मोसतष त्रवद्या के जानकाय भानते हं की स्वप्नं के
दशा-अॊतयदशा ऩय सनबाय कयता हं ।

इस सरए व्मत्रि को

फकसी बी स्वप्नं का शुब-अशुब पर ऻात कयने से ऩूवा
अऩनी जडभ कुण्डरी भं ग्रह-नऺिं का फर अवश्म दे ख
रे।
असधकतय स्वप्न दौषज होते हं , स्जसका शुब-अशुब
पर प्राद्ऱ नहीॊ होता हं । क्मोफक असनद्रा की स्स्थती भं ,
शायीरयक अस्वस्थता के दौयान, फदन भं फदखने वारे
स्वप्न, जो स्वप्न जागने के फाद माद नहीॊ होते एसे
स्वप्न असधकतय सनयाधाय, सनयथाक व सनरुद्दे श्म भाने
जाते हं ।

कनकधाया मॊि
आज के मुग भं हय व्मत्रि असतशीघ्र सभृद्ध फनना िाहता हं । धन प्रासद्ऱ हे तु प्राण-प्रसतत्रद्षत
कनकधाया मॊि के साभने फैठकय कनकधाया स्तोि का ऩाठ कयने से त्रवशेष राब प्राद्ऱ होता हं । इस

कनकधाया मॊि फक ऩूजा अिाना कयने से ऋण औय दरयद्रता से शीघ्र भुत्रि सभरती हं । व्माऩाय भं
उडनसत होती हं , फेयोजगाय को योजगाय प्रासद्ऱ होती हं ।

श्री आफद शॊकयािामा द्राया कनकधाया स्तोि फक यिना कुि इस प्रकाय फक हं , स्जसके श्रवण एवॊ
ऩठन कयने से आस-ऩास के वामुभॊडर भं त्रवशेष अरौफकक फदव्म उजाा उत्ऩडन होती हं । फठक उसी

प्रकाय से कनकधाया मॊि अत्मॊत दर
ा मॊिो भं से एक मॊि हं स्जसे भाॊ रक्ष्भी फक प्रासद्ऱ हे तु अिूक
ु ब

प्रबावा शारी भाना गमा हं । कनकधाया मॊि को त्रवद्रानो ने स्वमॊससद्ध तथा सबी प्रकाय के ऐद्वमा
प्रदान कयने भं सभथा भाना हं । जगद्गरु
ु शॊकयािामा ने दरयद्र ब्राह्मण के घय कनकधाया स्तोि के ऩाठ
से स्वणा वषाा कयाने का उल्रेख ग्रॊथ शॊकय फदस्ग्वजम भं सभरता हं ।

कनकधाया भॊि:- ॐ वॊ श्रीॊ वॊ ऐॊ ह्रीॊ-श्रीॊ क्रीॊ कनक धायमै स्वाहा' | भूल्म: Rs.550 से Rs.8200 तक

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जुराई 2012

16

स्वप्न की अशुबता सनवायण हे तु सयर उऩाम

 ऩॊ.श्री बगवानदास त्रिवेदी जी,
अशुब स्वप्नं के त्रवषम भं ग्रॊथं भं उल्रेख हं

मासत ऩाऩोऽल्ऩपरताॊ दानहोभजऩाफदसब् ।

अकल्माणभत्रऩ स्वप्नॊ दृष्ट्वा तिैव म् ऩुन्

ऩश्मेत्सौम्मॊ शुबॊ तस्म शुबभेव परॊ बवेत ् ।

अथाात: ऩाऩ -अशुब स्वप्न का अशुब पर त्रवसध ऩूवक
ा दान, हवन तथा जऩ आफद कयने से स्वल्ऩ हो जाता हं । अशुब
स्वप्न को दे ख कय जो ऩुन् सो जाता हं औय उसभं शुब स्वप्न दे खता हं अथवा सुख दामक स्वप्न दे खता हं उसका
पर शुब होता हं । औय शुब स्वप्न को दे ख कय ऩुन् अशुब स्वप्न दे खता हं उसका पर अशुब होता हं ।

स्वप्न की अशुबता सनवायण के उऩाम

जो स्वप्न डयावने, अत्रप्रम, अशुबता सूिक, स्जससे व्मत्रि सनद्रा से उठ जाता हं , एसे स्वप्न फदखने ऩय सनॊद
खुरने ऩय फकसी को नहीॊ फताने िाफहए।


मफद फकसी को एसे स्वप्न आते हं तो व्मत्रि को अऩने इद्श को प्राथना कयके ऩुन् सो जाना िाफहए।
मफद फकसी व्मत्रि को एसे स्वप्न आते हं औय मफद प्रात् उसे सवाप्रथभ गाम, भोय, दे वारम, सौबाग्मवती स्त्री,
बगवाने भं श्रद्धा यखने वारे सास्त्वक व्मत्रि आफद शुब शुकन वारे जीव मा ऩदाथा के दशान से स्वप्न की
अशुबता सभाद्ऱ हो जाती हं ।

मफद फकसी कायण से उि साधनं की व्मवस्था मा दशान सॊबव न हो सके तो, अशुब स्वप्न भं दे खे हुए दृश्म
को शौिारम भं दोहायाना दे ना िाफहए इससे उसकी असनद्शता नद्श हो जाती हं ।

मफद फकसी व्मत्रि को अशुब स्वप्न के कायण असधक बम मा उसकी अशुबता की सिॊता सता यही हो तो व्मत्रि
को प्रात् स्नानाफद से सनवृत्त हो कय फकसी जानकाय मा त्रवद्रान से सराह प्राद्ऱ कय उसकी शाॊसत के सरए हवन
कयना िाफहए। सुऩाि व्मत्रि को मथा शत्रि दान दे कय इद्वय से अशुबता दयू कयने हे तु प्राथना कयनी िाफहए।

शुब स्वप्न की शुबता भं वृत्रद्ध के सरए शास्त्रॊ भं उल्रेख हं

मफद फकसी व्मत्रि को शुब, सित्त को प्रसडन कयने वारे, सुख-सौबाग्म के सॊकेत दे ने वारे स्वप्न फदखाई दे तो
उस स्वप्न को गुद्ऱ यखना िाफहए। स्वप्न की गोऩनीमता भं उसकी शुबता सिऩी होती हं । फकसी को इन स्वप्न
के फायं भं फतादे ने से स्वप्न की शुबता भं कभी आसत हं ओय सॊबवत स्वप्न सनष्पर बी हो सकता हं ।

मफद स्वप्न भं शुब सॊकेत फदखाई दे तो व्मत्रि को प्रात् स्नानाफद से सनवृत्त हो कय धूऩ -दीऩ आफद से इद्श की
ऩूजा अिाना कयके अऩने इद्शदे व से शुब स्वप्न के पर शीघ्र प्राद्ऱ हो इस सरए त्रवशेष प्राथना कयनी िाफहए।

स्वप्न भं फदखे शुब सॊकेत फदखे तो व्मत्रि को प्रात् अऩने गुरु का दशान कय आसशवााद प्राद्ऱ कय रेने िाफहए
फहए स्जससे शीघ्र राब प्राद्ऱ हो सके हं ।

जुराई 2012

17

सतसथमं से स्वप्न पर का सभम सनधाायण

 स्वस्स्तक.ऎन.जोशी
कुि ग्रॊथकायं ने स्वप्न पर के सनणाम कयने भं
सतसथमं

का

त्रवशेष

भहत्व

फतामा

है ।

त्रवद्रानो

के

भतानुसाय अरग-अरग सतसथमं औय ऩऺ भं स्वप्न पर
की प्रासद्ऱ के यहस्म सिऩे होते हं । इन यहस्मं से मह ऻात
फकमा जा सकता हं की व्मत्रि को स्वप्न पर की प्रासद्ऱ
शीघ्र होगी मा त्रवरॊफ से होगी।

दस
ू यं को सभरता हं व मफद व्मत्रि ने स्वप्न भं दस
ू यो को
राब सभरते दे खा हं तो उसका पर उसे प्राद्ऱ होता हं ।
शुक्र ऩऺ की तृतीमा:
मफद व्मत्रि तृतीमा सतसथ को स्वप्न दे खता हं तो उसका
पर त्रवरॊफ से औय त्रवऩयीत सभरता हं ।
शुक्र ऩऺ की ितुथॉ मा ऩॊिभी:

शुक्र ऩऺ की प्रसतऩदा:
मफद व्मत्रि प्रसतऩदा को स्वप्न दे खता हं तो उसके पर
की प्रासद्ऱ भं त्रवरॊफ होता हं ।

मफद व्मत्रि ितुथॉ मा ऩॊिभी सतसथ को स्वप्न दे खता हं
तो उसका पर व्मत्रि को दो भफहने से रेकय दो वषा के
बीतय सभरता हं ।

शुक्र ऩऺ की फद्रतीमा:
मफद व्मत्रि फद्रतीमा सतसथ को स्वप्न दे खता हं तो उसे
स्वप्न का पर त्रवऩयीत प्राद्ऱ होता हं । अथाात मफद व्मत्रि
ने स्वप्न भं स्वमॊको राब सभरते दे खा हं तो उसका राब

शुक्र ऩऺ की षद्षी, सद्ऱभी, अद्शभी, नवभी मा दशभी:
मफद व्मत्रि षद्षी, सद्ऱभी, अद्शभी, नवभी औय दशभी सतसथ
को स्वप्न दे खता हं तो वह स्वऩन सत्म होता हं व
व्मत्रि को उसका पर शीघ्र प्राद्ऱ होता है ।

द्रादश भहा मॊि
मॊि को असत प्रासिन एवॊ दर
ा मॊिो के सॊकरन से हभाये वषो के अनुसॊधान द्राया फनामा गमा हं ।
ु ब

 ऩयभ दर
ा वशीकयण मॊि,
ु ब

 सहस्त्राऺी रक्ष्भी आफद्ध मॊि

 बाग्मोदम मॊि

 आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ मॊि

 भनोवाॊसित कामा ससत्रद्ध मॊि

 ऩूणा ऩौरुष प्रासद्ऱ काभदे व मॊि

 याज्म फाधा सनवृत्रत्त मॊि

 योग सनवृत्रत्त मॊि

 गृहस्थ सुख मॊि

 साधना ससत्रद्ध मॊि

 शीघ्र त्रववाह सॊऩडन गौयी अनॊग मॊि

 शिु दभन मॊि

उऩयोि सबी मॊिो को द्रादश भहा मॊि के रुऩ भं शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से भॊि ससद्ध ऩूणा प्राणप्रसतत्रद्षत एवॊ िैतडम मुि फकमे
जाते हं । स्जसे स्थाऩीत कय त्रफना फकसी ऩूजा अिाना-त्रवसध त्रवधान त्रवशेष राब प्राद्ऱ कय सकते हं ।

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जुराई 2012

18

शुक्र ऩऺ की एकादशी मा द्रादशी:

कृ ष्ण ऩऺ की ऩॊिभी मा षद्षी :

मफद व्मत्रि एकादशी मा द्रादशी को स्वप्न दे खता हं तो

मफद व्मत्रि ऩॊिभी मा षद्षी सतसथ को स्वप्न दे खता हं तो

उस स्वप्न का पर व्मत्रि को त्रवरॊफ से प्राद्ऱ होता हं ।

उस स्वप्न का पर व्मत्रि को दो भफहने से तीन वषा के
बीतय सभरता हं ।

शुक्र ऩऺ की िमोदशी मा ितुदाशी:

कृ ष्ण ऩऺ की सद्ऱभी:

मफद व्मत्रि िमोदशी मा ितुदाशी को स्वप्न दे खता हं तो

मफद व्मत्रि सद्ऱभी सतसथ को स्वप्न दे खता हं तो उस

उस स्वप्न का पर व्मत्रि को प्राद्ऱ नहीॊ होता अथाात वह

स्वप्न का पर व्मत्रि को शीघ्र प्राद्ऱ होता हं ।

स्वप्न प्रबाव फहन होता हं ।
कृ ष्ण ऩऺ की अद्शभी मा नवभी:
ऩूस्णाभा:

मफद व्मत्रि अद्शभी मा नवभी सतसथ को स्वप्न दे खता हं

मफद व्मत्रि ऩूस्णाभा को स्वप्न दे खता हं तो उस स्वप्न

तो उस स्वप्न का पर व्मत्रि को त्रवऩयीत प्राद्ऱ होता हं ।

का पर व्मत्रि को अवश्म सभरता हं ।
कृ ष्ण ऩऺ की दशभी, एकादशी, द्रादशी मा िमोदशी:
कृ ष्ण ऩऺ की प्रसतऩदा:

मफद व्मत्रि दशभी, एकादशी, द्रादशी मा िमोदशी सतसथ

मफद व्मत्रि प्रसतऩदा को स्वप्न दे खता हं तो उस स्वप्न

को स्वप्न दे खता हं तो उस स्वप्न का कोई पर व्मत्रि

का पर सनष्पर होता हं ।

को प्राद्ऱ नहीॊ होता हं ।

कृ ष्ण ऩऺ की फद्रतीमा:

कृ ष्ण ऩऺ की ितुदाशी:

मफद व्मत्रि फद्रतीमा सतसथ को स्वप्न दे खता हं तो उस

मफद व्मत्रि ितुदाशी सतसथ को स्वप्न दे खता हं तो उस

स्वप्न का पर व्मत्रि को त्रवरॊफ से प्राद्ऱ होता हं । कुि

स्वप्न का पर व्मत्रि को शीघ्र सभरता हं ।

जानकायं ने इस सतसथ ऩय दे खे गए स्वप्न को त्रवशेष
परदामी भाना हं ।

अभावस्मा
मफद व्मत्रि अभावस्मा को स्वप्न दे खता हं तो उस स्वप्न

कृ ष्ण ऩऺ की तृतीमा मा ितुथॉ:

का पर व्मत्रि को नहीॊ सभरता हं ।

मफद व्मत्रि तृतीमा मा ितुथॉ सतसथ को स्वप्न दे खता हं
तो उस स्वप्न का पर व्मत्रि को प्राद्ऱ नहीॊ होता अथाात
वह स्वप्न प्रबाव फहन होता हं ।

***

भॊि ससद्ध भूॊगा गणेश
भूॊगा गणेश को त्रवध्नेद्वय औय ससत्रद्ध त्रवनामक के रूऩ भं जाना जाता हं । इस के ऩूजन से जीवन भं सुख
सौबाग्म भं वृत्रद्ध होती हं ।यि सॊिाय को सॊतुसरत कयता हं । भस्स्तष्क को तीव्रता प्रदान कय व्मत्रि को ितुय
फनाता हं । फाय-फाय होने वारे गबाऩात से फिाव होता हं । भूॊगा गणेश से फुखाय, नऩुॊसकता , सस्डनऩात औय
िेिक जेसे योग भं राब प्राद्ऱ होता हं ।

भूल्म Rs: 550 से Rs: 10900 तक

19

जुराई 2012

सवा कामा ससत्रद्ध कवि
स्जस व्मत्रि को राख प्रमत्न औय ऩरयश्रभ कयने के फादबी उसे भनोवाॊसित सपरतामे एवॊ फकमे गमे कामा
भं ससत्रद्ध (राब) प्राद्ऱ नहीॊ होती, उस व्मत्रि को सवा कामा ससत्रद्ध कवि अवश्म धायण कयना िाफहमे।

कवि के प्रभुख राब: सवा कामा ससत्रद्ध कवि के द्राया सुख सभृत्रद्ध औय नवग्रहं के नकायात्भक प्रबाव को
शाॊत कय धायण कयता व्मत्रि के जीवन से सवा प्रकाय के द:ु ख-दारयद्र का नाश हो कय सुख-सौबाग्म एवॊ

उडनसत प्रासद्ऱ होकय जीवन भे ससब प्रकाय के शुब कामा ससद्ध होते हं । स्जसे धायण कयने से व्मत्रि मफद
व्मवसाम कयता होतो कायोफाय भे वृत्रद्ध होसत हं औय मफद नौकयी कयता होतो उसभे उडनसत होती हं ।

 सवा कामा ससत्रद्ध कवि के साथ भं सवाजन वशीकयण कवि के सभरे होने की वजह से धायण कयता
की फात का दस
ू ये व्मत्रिओ ऩय प्रबाव फना यहता हं ।

 सवा कामा ससत्रद्ध कवि के साथ भं अद्श रक्ष्भी कवि के सभरे होने की वजह से व्मत्रि ऩय भाॊ भहा

सदा रक्ष्भी की कृ ऩा एवॊ आशीवााद फना यहता हं । स्जस्से भाॊ रक्ष्भी के अद्श रुऩ (१)-आफद
रक्ष्भी, (२)-धाडम रक्ष्भी, (३)-धैयीम रक्ष्भी, (४)-गज रक्ष्भी, (५)-सॊतान रक्ष्भी, (६)-त्रवजम
रक्ष्भी, (७)-त्रवद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन सबी रुऩो का अशीवााद प्राद्ऱ होता हं ।

 सवा कामा ससत्रद्ध कवि के साथ भं तॊि यऺा कवि के सभरे होने की वजह से ताॊत्रिक फाधाए दयू
होती हं , साथ ही नकायत्भन शत्रिमो का कोइ कुप्रबाव धायण कताा व्मत्रि ऩय नहीॊ होता। इस
कवि के प्रबाव से इषाा-द्रे ष यखने वारे व्मत्रिओ द्राया होने वारे दद्श
ु प्रबावो से यऺाहोती हं ।

 सवा कामा ससत्रद्ध कवि के साथ भं शिु त्रवजम कवि के सभरे होने की वजह से शिु से सॊफॊसधत

सभस्त ऩये शासनओ से स्वत् ही िुटकाया सभर जाता हं । कवि के प्रबाव से शिु धायण कताा
व्मत्रि का िाहकय कुि नही त्रफगड सकते।

अडम कवि के फाये भे असधक जानकायी के सरमे कामाारम भं सॊऩका कये :
फकसी व्मत्रि त्रवशेष को सवा कामा ससत्रद्ध कवि दे ने नही दे ना का अॊसतभ सनणाम हभाये ऩास सुयस्ऺत हं ।

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जुराई 2012

20

स्वप्न से योग एवॊ भृत्मु के सॊकेत

 स्वस्स्तक.ऎन.जोशी, सनसध व्मास
स्वप्ने भद्यॊ सह प्रेतैम्ा त्रऩफन ् कृ ष्मते शुना।

स भत्मो भृत्मुना शीघ्रॊ ज्वयरूऩेण नीमते

४०

यिभाल्मवऩुवस्त्र
ा ो मो हसन ् फह्रमते स्स्त्रमा।
सोऽस्रत्रऩत्तेन भफहषश्ववयाहोद्सगदा ब्ै

४१

रता कण्टफकनी वॊशस्तारो वा रृफद जामते

४२

मस्म तस्माशु गुल्भेन मस्म वफनिमभनसिाषभ ्।

४३

ऩद्भॊ स नश्मेत्कुद्षेन िण्डारै् सह म् त्रऩफेत ् ।
स्नेहॊ फहुत्रवधॊ स्वप्ने स प्रभेहेण नश्मसत ४४
उडभादे न जरे भज्जेद्यो नृत्मन ् याऺसै् सह ।

अऩस्भाये ण मो भत्मो नृत्मन ् प्रेतेन नीमते

४५

मस्म प्रेतै् श्रृगारैवाा स भृत्मोवातत
ा े भुखे

४६ ।

मानॊ खयोद्सभाजाायकत्रऩशादा र
ू सूकयै ् ।

अस्ग्न भं आहुसतमाॉ डारता हं , नॊगा हो कय शयीय ऩय घृत
(घी) का सेवन कयता हं औय उसके शीने ऩय कभर

उगता फदखे तो उसकी कुद्ष से भृत्मु हो जाती हं । जो
िाण्डारं के साथ फैठ कय घृत (घी) तैर आफद अनेक

म् प्रमासत फदशॊ माम्माॊ भयणॊ तस्म मक्ष्भणा।

जुह्वतो घृतससिस्म नग्नस्मोयसस जामते

उसकी गुल्भयोग से भृत्मु हो जाती हं । जो ज्वारा यफहत

अऩूऩशष्कुरीजाग्ध्वा त्रवफुद्धस्तफद्रधॊ वभन ् ।
न जीवत्मस्ऺयोगाम सूमडे दग्र
ु हणेऺणभ ्

सूमाािडद्रभसो् ऩातदशानॊ दृस्ग्वनाशनभ ्।

अथाात: जो योगी स्वप्न भं प्रेतं के साथ फैठ कय भद्य
ऩीता हं औय कुत्तं द्राया खीॊिा-घसीटा जाता हं उसकी
भृत्मु ज्वय से होती हं । जो व्मत्रि रार यॊ ग के पूरं की
भारा धायण फकमे हं , अऩने शयीय को रार यॊ ग से यॊ गा
दे खता हं , रार वस्त्र धायण फकमे हं , हॉ सता हं औय स्त्री
द्राया खीॊिा जाता हं उसकी यित्रऩत्त द्राया भृत्मु हो जाती
हं । जो व्मत्रि बैसा, कुत्ता, सूअय, उॉ ट मा गझ ऩय सवाय
हो कय दस्ऺण फदशा को जाता हं उसकी याज्मसबा से
भृत्मु होजाती हं । स्जसके रृदम प्रदे श ऩय काण्डो वारी
रता-वेर, फाॉस अथवा ताड़ उत्ऩडन होते फदखाई दे तो

प्रकाय के द्रव्मं का ऩान कयता हं उसकी प्रभेह से भृत्मु
हो जाती हं । जो याऺसं के साथ नािता हुवा जर भं डू फ
जाता हं मा डू फकी रगाता हं उसकी उडभाद से भृत्मु हो

जाती हं । जो नािता हुवा बूत-प्रेत द्राया खीॊिा मा घसीटा
जाता हं उसकी अऩस्भाय (सभगॉ) द्राया भृत्मु हो जाती हं ।

जो योगी-गधा, उॉ ट, त्रफल्री, फडदय, शादर
ू तथा सूअय के
साथ अथवा प्रेतं मा ससमायं के साथ िरता हं मा उन

ऩय सवाय हो कय िरता हं उसकी भृत्मु हो जाती हं । जो
स्वप्न भं भारऩूआ- योटी अथवा किौयी खाता हं औय
जागने ऩय वैसे ही वभन कय दे ता हं वह जीत्रवत नहीॊ
यहता । स्वप्न भं सूमा मा िडद्रभा का ग्रहण दे खना
नेियोगं का कायण औय उसका ऩतन होते दे खना दृत्रद्शनाश
अथाात अडधेऩन का कायण होता हं ।

सॊऩूणा जडभ कुॊडरी ऩयाभशा
जडभ कॊु डरी भं उऩस्स्थत अच्िे -फुये मोगं तथा दोषं

के फाये भं सॊऩण
ू ा जानकायी प्राद्ऱ कय इन मोगं अथवा
दोषं से होने वारे राब-हासन के फाये भं जानकायी
प्राद्ऱ कय उन दोषं के सनवायण के उऩाम से सॊफॊसधत
त्रवस्तृत जानकायी प्राद्ऱ कयने हे तु सॊऩका कयं ।

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जुराई 2012

21
भूस्ध्ना वॊशरतादीनाॊ सम्बवो वमसाॊ तथा

४८

सनरमो भुण्डता काक-गृध्राद्यै् ऩरयवायणभ ् ।

तथा प्रेतत्रऩशािस्त्रीद्रत्रवडाऽडध्रगवाशनै्

४९

सङ्गो वेिरतावॊशतृणकण्टकसॊकटे ।

द्वभ्रश्भशानशमनॊ ऩतनॊ ऩाॊसब
ु स्भनो्

५०

भज्जनॊ जरऩङ्कादौ शीघ्रेण स्रोतसा रृसत् ।

नृत्मवाफदिगीतासन यिस्रग्वस्त्रधायणभ ्

५१

ऩक्वाडनस्नेहभद्याश् प्रच्िदा नत्रवये िने

५२

वमोङ्गवृत्रद्धयभ्मङ्गो त्रववाह् श्भश्रुकभा ि ।
फहयण्मरोहमोरााब् कसरफाडधऩयाजमौ ।

उऩानद्युगनाशश्ि प्रऩात ऩादिभाणो्

५३

हषो बृशॊ प्रकुत्रऩतै् त्रऩतृसबश्िावबत्सानभ ् ।
प्रदीऩग्रहनऺि दडतदै वतिऺुषाभ ् ५४

ऩतनॊ वा त्रवनाशो वा बेदनॊ ऩवातस्म ि ।
कानने यिकुसुभे ऩाऩकभासनवेशने

५५

सिताडधकायसॊफाधे जनडमाॊ ि प्रवेशनभ ् ।

ऩात् प्रासादशैरादे भत्ा स्मेन ग्रसनॊ तथा

५६

काषासमणाभसौम्मानाॊ नग्नानाॊ दण्डधारयणाभ ् ।

यिाऺाणाॊ ि कृ ष्णानाॊ दशानॊ जातु नेष्मते

५७

अथाात: जो स्वप्न भं सशय ऩय फाॊस, रता एवॊ झाफड़मं
को उगते दे खना मा ऩस्ऺमं का फैठना मा घंसरा फनाना,
अथवा सशय का भुण्डन मा कौवा एवॊ सगद्ध आफद ऩस्ऺमं
से सघय जाना तथा प्रेतं, त्रऩिाशं, स्त्रीमं, फकसी प्रदे श के
सनवाससमं, अथवा गोभाॊस बऺको द्राया सघय जाना, वेतं
के, रताओॊ के, फाॉसं की, तृणं के तथा काॊटं की झाड़ीमं
भं पस जाते दे खना मा गढ्ढा एवॊ श्भशान भं सोना, धूसर
तथा बस्भ भं सगयना, जम अथवा कीिड़ भं डू फना मा
डु फकी रगाना, तेजधाय वारी नदी-नारे भं फह जाना,
नािना, फजाना तथा गाना, रार पूरं की भारा तथा
वस्त्रं का धायण, उम्रको फढ़ते दे खना, तथा अॊगं की वृत्रद्ध,
अभ्मङ्ग, त्रववाह, ऺौय कभा (फार तथा दाढ़ी फनाना),

ऩक्वाडन बऺण, स्नेह ऩान, भद्य ऩान, वभन, त्रफये िन
फक्रमा, सोना अथवा रोह सभरना, करह, फॉध जाना,
ऩयास्जत होना, दोनो जूतं का खोना, ऩाॉव की िभड़ी
सगयते दे खना, असधक हषा, प्रकुत्रऩत त्रऩत्तयं द्राया सबड़्का
जाना औय दीऩक, सूमा आफद ग्रह, अस्द्वनी आफद नऺि मा
ताये , दडत, दे व प्रसतभा तथा नेि का सगयना अथवा
त्रवनाश, ऩवात का पटना औय वन भं , रार ऩुष्ऩ भं,
ऩाऩीमं की घय भं, अडधकाय भं, बीड़ भं, सॊकत भं

अथवा भाता के गबा भं प्रवेश, ित, वृऺ मा ऩवात आफद
से सगयना, भिरी द्राया सनगर जाना, औय कषाम वस्त्र,
धारयमं का क्रूयं का, नग्नं का, दण्ड धारयमं का, रार
आॉख वारं का तथा कारे वणा के रोगं का फदखना
फकसी बी दशा भं शुब नहीॊ हं (अथाात स्वस््म मा योगी
के सरए मह हासन कायक हं ।)

भृत्मु सूिक स्वप्न
कृ ष्णा ऩाऩाऽननािाया दीघाकेशनखस्तनी ।

त्रवयागभाल्मवसना स्वप्ने कारसनशा भता

५८

अथाात: स्वप्न भं कारे वणा वारीॊ, दभ
ुा ी, दयु ािारयणी,
ु ख
रम्फे केशं, नखं तथा स्तनं वारी, त्रवकृ त वणा वारी,
भारा तथा त्रवकृ त वणा वारे वस्त्रं वारी स्त्री का फदखना
कार यात्रि के सभान भाना जाता हं ।

द्ु स्वप्न का कायण
भनोवहानाॊ ऩूणत्ा वात्स्रोतसाॊ प्रफरैभर
ा ै् ।
दृश्मडते दारुणा् स्वप्ना योगी मैमाासत ऩञ्िताभ ् ५९
अयोग् सॊशमॊ प्राप्म कस्द्ळदे व त्रवभुच्मते ।

अथाात: अत्मडत प्रकुत्रऩत वाताफद दोषं द्राया भनोवाही
स्त्रोत बय जाने से उि प्रकाय के बमानक बीष्ण स्वप्न
फदखते हं , स्जसके कायण योगी की भृत्मु हो जाती हं औय
स्वस््म व्मत्रि बी योगी हो जाता हं तथा कुि ही योग
भुि हो ऩाते हं ।

जुराई 2012

22

भहत्रषा ियक ने स्वप्न के रऺण इस प्रकाय

नयाशनॊ दीद्ऱतनुॊ सभडताद्रसु धयोस्ऺतभ ्

फतामे हं ।
नासत प्रसुद्ऱ् ऩुरुष् सपरान अपरान अत्रऩ।
इस्डद्रमेशेन भनसा स्वप्नान ऩश्मत्मनेकधा
अथाात: जफ भानुष्म गहयी सनद्रा भं नहीॊ होता तथा दशं
इस्डद्रमं के ईद्वरयम प्रेयक भन द्राया वह अनेक प्रकाय के
स्वप्न

दे खता

हं ।

कबी

श्रवण

इस्डद्र

से

म् ऩश्मेल्रबते मो वा ििादशात्रवषासभषभ ् ।
शुक्रा् सुभनसो वस्त्रभभेध्मारेऩनॊ परभ ्
शैरप्रासादसपरवृऺससॊहनयफद्रऩान ् ।
आयोहे द्गोऽद्वमानॊ ि तये डनदह्रदोदधीन ्
ऩूवोत्तये ण गभनभगम्मागभनॊ भृतभ ् ।

सुनता,

िऺुरयस्डद्रम से दे खता हं , त्वसगस्डद्रम से स्ऩशा का अनुबव
कयता हं , यसनेस्डद्रम से यस का औय घ्रौणेस्डद्रम से गडध
का अनुबव कयता हं । वासगस्डद्रम से फोरता हं - हस्तेस्डद्रम
से ऩकड़्ता हं ,

कडमा् कुभायकान ् गौयान ् शूक्रवस्त्राडसुतेजस् ।

शुदेस्डद्रम से ऩुरयष ( एवॊ भूि का) त्माग

कयता हं , उऩस्थेस्डद्रम (सशश्न एवॊ बग) से शुक्र (वीमा)
का त्माग कताा हं , इसी को स्वप्नदोष कहा जाता हं ,
स्जसभं शुक्र स्राव का स्खरन होता हं , औय ऩादे स्डद्रम से
िरता हं इस प्रकाय दस इस्डद्रम के स्वप्न दोष होते हं
औय भनसू नाभक इस्डद्रम से सुख-द्ु ख का अनुबव होता
हं मथा स्वप्न भं डय रगता हं , क्रोध एवॊ शोक आफद का
अनुबव होता हं । मह 11 प्रकाय के स्वप्नदोष हं रेफकन
असधकतय उऩस्थ का स्वप्नदोष असधक होता हं । वह बी
मुवावस्था भं यात्रि बोजन भं शुक्र वद्धा क भराई एवॊ दग्ु ध
आफद के सेवन से अथवा तीव्र भैथन
ु ासबराष से।
नोट् जानकायं का भानना हं की स्वप्नदोष ऩुरुष एवॊ स्त्री
दोनो को होता हं औय ऋतुस्नाता स्त्री को तो कबी-कबी
गबाधान बी हो जाता हं , फपय िाहे वह अस्स्थ आफद
ऩैतक

गुणं से हीन होता हं । शय्माभूि जो असधकतय
फारक-फासरकाओॊ को होता हं औय स्वप्नदोष जो मुवकमुवसतमं को होता हं वह सफ स्वप्न के दोष है ।

दे वान ् फद्रजान ् गोवृषबान ् जीवत् सुरृदो नृऩान ् ।
साधून ् मशस्स्वनो वफनिमसभद्धॊ स्वच्िान ् जराशमान ्

सॊफाधास्डन्सृसतदे व्ै त्रऩतृसबद्ळासबनडदनभ ्
योदनॊ ऩसततोत्थानॊ फद्रषताॊ िावभदा नभ ् ।
मस्म स्मादामुयायोग्मॊ त्रवत्तॊ फहु ि सोऽश्नुते
अथाात: स्वप्न भं जो दे वताओॊ, फद्रजं (ब्राह्मण), साॉढं,
जीत्रवत सभिं, याजाओॊ, सज्जनं, मशस्स्वमं, इडधन मुि
अस्ग्न, सनभार जर के जराशम, कडमा, फारक, गौय वणा
वारं, श्वेत वस्त्र वारं, तेजस्स्वमं अथवा दे दीप्मभान
शयीय वारे यि से ससस्डित शयीयवारे याऺस को दे खता हं
औय जो िि, दऩाण, त्रवष, भाॊस, श्वेत ऩुष्ऩ, श्वेत वस्त्र,
अऩत्रवि

(ऩुयीष अथाात भरभूि इत्मादी) ऩदाथा के रेऩन

को अथवा आम्र आफद परं को प्राद्ऱ कयता हं , औय जो
ऩवात, बवन, परवारे वृऺ, ससॊह, भानव की ऩीठ, हाथी
अथवा गाम-फैर की तथा घोड़ा गाड़ी ऩय िढ़ता हं , जो
नदी, झीर, तथा सभुद्रको तैय कय ऩाय कयता हं , जो
ऩूवोत्तय की औय जाता हं ( अथाात

ऩूवोत्तय की मािा

कयता हं ), अगम्म नायी से सहवास कयता हं , जो भृसतभयण को दे खता हं , बीड़ सॊकट भं से सनकर जाता हं ,
स्जसका दे वताओॊ एवॊ त्रऩत्तयं द्राया असबनडदन होता हं , जो
योता हं , जो सगय कय उठ खड़ा होता हं तथा जो शिुओॊ
का भदा न कयता हं वह आमु को, आयोग्म को तथा
असधक भािा भं धन को प्राद्ऱ कयता हं ।

***

जुराई 2012

23

वणाभारा के अनुशाय स्वप्न पर त्रविाय

 स्वस्स्तक.ऎन.जोशी, श्रेमा.ऐस.जोशी, सनसध व्मास
 स्वप्न भं स्वमॊको अिाय खाते मा फनाते दे खना ससय
ददा अथवा ऩेट ददा होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फकसे अध्माऩक दे खना फकसी कामा भं
सपरता सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अॉधेया फदखे तो मह त्रवऩत्रत्तमं के आने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं अडध व्मत्रि को दे खना फकसी भहत्वऩूणा
 स्वप्न भं अखयोट दे खना धन प्रासद्ऱ एवॊ उत्तभ प्रकाय
का बोजन सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अनाज दे खना भानससक सिॊता भं वृत्रद्ध का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को भीठा अनाय खाते दे खना धन
प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को अनाय के ऩत्ते खाते दे खना शीघ्र
त्रववाह एवॊ दाॊऩत्म सुख भं वृत्रद्ध का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फकसी अजनफी से बेट होते दे खना फकसी
असनद्श पर के सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को अजवामन खाते दे खना स्वास्थ
राब का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को अभरुद खाते दे खना धन प्रासद्ऱ का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को अनानास खाते दे खना ऩये शानी के
फाद याहत सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को अदयक खाते दे खना भान सम्भान
भं वृत्रद्ध का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को अयहय खाते दे खना ऩेट ददा मा
ऩेट के योग होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को अॊगूय खाते दे खना स्वस््म राब
सभरने का सॊकेत है ।

कामा भं रुकावट का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अप्सया को दे खना धन प्रासद्ऱ एवॊ साभास्जक
भान सम्भान भं वृत्रद्ध का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अॊसतभ सॊस्काय मा अथॉ दे खना धन राब
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अभरतास के पूर दे खना ऩीसरमा मा कोढ़
योग के होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अयहय की दार दे खना शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अयफी दे खना ससय भं मा ऩेट भं ददा होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अरभायी फॊद दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं अरभायी खुरी दे खना धन हासन का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं अॊग यऺक का फदखना शयीय ऩय िोट रगने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ ऩय अडम द्राया हभरा दे खना होते
दे खना फदधाामु का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फकसी के अॊग कटे दे खना स्वास्थ राब का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अॊग दान कयते दे खना फकसी ऩुयस्काय की
प्रासद्ऱ मा सुनहये बत्रवष्म का सॊकेत है ।

जुराई 2012

24

 स्वप्न भं अॊगुरी कटते दे खना ऩारयवायीक झगडे एवॊ
करेश का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं अऩहयण दे खना फदधाामु का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को असबभान कयते दे खना फकसी

 स्वप्न भं अॊगूठा िूसते दे खना ऩारयवायीक सॊऩत्रत्त के
वाद-त्रववाद होने का सॊकेत है ।

त्रप्रमजन से अऩभासनत होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अधािडद्रभा दे खना फकसी स्त्री से सहमोग

 स्वप्न भं अॊत्मेद्षी दे खना ऩारयवाय भं फकसी भाॊगसरक
कामा के सॊऩडन होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अस्स्थ दे खना फकसी सॊकट के टरने का

सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अभावस्मा होते दे खना द्ु ख एवॊ सॊकटं से
िुटकायाका सभरने का सॊकेत है ।

सॊकेत है ।

 स्वप्न भं अगयफत्ती दे खना फकसी धासभाक अनुद्षान भं

सॊकेत है ।

 स्वप्न भं अस्ग्न मुि अगयफत्ती दे खना

 स्वप्न भं अॊजन (सुयभा) दे खना नेि योग होने का
 स्वप्न भं स्वमॊको अकेरे दे खना दयू स्थ मािा ऩय जाने
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं अऽफाय दे खना फकसी से वाद-त्रववाद होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को अट्हास कयते

दे खना अशुब

सभािाय सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को अध्मऺ फनते दे खना साभास्जक
भान-सम्भान की हासन होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को अध्मन कयते दे खना असपरता
सभरने का सॊकेत है ।

शासभर होने का सॊकेत है ।
सॊकेत है ।

दघ
ा ना का
ु ट

 स्वप्न भं स्वमॊ को अगयफत्ती अत्रऩत
ा कयते दे खना शुब
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अस्ऩद्श अऺय ऩढ़ते दे खना दख
ु द सभािाय
सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं फुझी हुई अॊगीठी दे खना शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अॊगीठी जरती दे खना अशुब सॊकेत है ।

 स्वप्न भं अॊगायं ऩय िरते दे खना शायीरयक ऩीड़ा का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अनोखी मा अजीफ वस्तु दे खना

त्रप्रमजन
से

 क्मा आऩके फच्िे कुसॊगती के सशकाय हं ?
 क्मा आऩके फच्िे आऩका कहना नहीॊ भान यहे हं ?
 क्मा आऩके फच्िे घय भं अशाॊसत ऩैदा कय यहे हं ?
घय ऩरयवाय भं शाॊसत एवॊ फच्िे को कुसॊगती से िुडाने हे तु फच्िे के नाभ से गुरुत्व कामाारत द्राया शास्त्रोि त्रवसधत्रवधान से भॊि ससद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुि वशीकयण कवि एवॊ एस.एन.फडब्फी फनवारे एवॊ उसे अऩने

घय भं स्थात्रऩत कय अल्ऩ ऩूजा, त्रवसध-त्रवधान से आऩ त्रवशेष राब प्राद्ऱ कय सकते हं । मफद आऩ तो आऩ भॊि
ससद्ध वशीकयण कवि एवॊ एस.एन.फडब्फी फनवाना िाहते हं , तो सॊऩका इस कय सकते हं ।

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जुराई 2012

25

सभराऩ का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अजगय दे खना शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अस्त्र दे खना फकसी सॊकट से यऺा का सॊकेत
है ।

 स्वप्न भं स्वमॊ के आॊसू दे खना ऩरयवाय भं फकसी
भाॊगसरक कामा के सॊऩडन होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं आग दे खना अनैसतक कामा से धन प्रासद्ऱ का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं स्वमॊ को अस्त्र से कटा हुवा दे खना फकसी

 स्वप्न भं आग जरा कय बोजन फनाते

 स्वप्न भं सभ सॊख्मा वारे अॊक दे खना अशुब सॊकेत

 स्वप्न भं आग आग से कऩडा जरते दे खना नेि योग

फफड़ त्रवऩत्रत्त के आने का सॊकेत है ।
है ।

 स्वप्न भं त्रवषभ सॊख्मा वारे अॊक दे खना शुब सॊकेत
है ।

दे खना

ऩदौडनसत औय धन राब का सॊकेत है ।
एवॊ त्रवसबडन कद्श सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न

भं

आवाज

सुनते

दे खना

शुब

सभम

के

आगभन का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को फकसी फॊधन से आजाद होते
दे खना सकर सिॊताओ से भुत्रि का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं आरू दे खना स्वाफदद्श बोजन सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं आॊवरा दे खना कामा ससत्रद्ध भं मा इच्िा
ऩूसता भं त्रवघ्न का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को आॊवरा खाते दे खना भनोकाभना

 स्वप्न भं आइना दे खना फकसी सभि से बेट मा इच्िा
ऩूसता का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं आइना भं अऩना भुहॊ दे खना स्त्री से कद्श मा
नौकयी भं ऩये शानी का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं आसभान दे खना ऩदोडनसत मा उच्ि ऩद की
प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को आसभान भे उड़ते दे खना कामा भं
सपरता सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को आसभान भे दे खना मािा भं शुब
पर की प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को आसभान से सगयते दे खना आसथाक
नुक्शान होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं आसभान ऩय िरते दे खना फीभायी आने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं आसभान हाथ से िूते दे खना भनोकाभना
ऩूणा होने का सॊकेत हं ।

ऩूणा होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं आक के पूर मा ऩत्ते दे खना शायारयक कद्श
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं आग की रऩटं दे खना ऩरयवाय भं

झगडा

ऽतभ होने औय शास्डत फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को आभ खाते दे खना सॊतान का सुख
भं वृत्रद्ध एवॊ धन प्रासद्ऱ के सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं फकसी ऩुरुष का स्त्री को आसरॊगन कयते
दे खना काभ सुख की प्रासद्ऱ का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं फकसी स्त्री का ऩुरुष को आसरॊगन कयते
दे खना ऩसत से फेवपाई का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं फकसी ऩुरुष का ऩुरुष को आसरॊगन कयते
दे खना फकसी से शिुता फढ़ने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं फकसी स्त्री का स्त्री को आसरॊगन कयते
दे खना फकसी से धन प्रासद्ऱ का सॊकेत हं ।

जुराई 2012

26

 स्वप्न भं स्वमॊ को आत्भहत्मा कयते मा फकसी को
आत्भहत्मा कयते दे खना फदधाामु की प्रासद्ऱ का सॊकेत
हं ।

 स्वप्न भं आॊधी से स्वमॊको सगयते दे खना सपरता
प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं स्वमॊ को आवायागदॊ कयते दे खना योजगाय
प्रासद्ऱ मा धन प्रासद्ऱ का सॊकेत हं ।
 स्वप्न

सभरने का सॊकेत है ।

भं

फकसी

स्त्री

का

 स्वप्न भं औषधी दे खना गरत सॊगसत भं पॊसने का
सॊकेत हं ।

आॉिर

दे खना

फकसी

प्रसतमोसगता भं त्रवजम सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं फकसी स्त्री को आॉिर आॊसू ऩोिते दे खना
शुब सभम आने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं फकसी स्त्री को आॉिर भं भुॉह सिऩाते दे खना
साभास्जक भान-सम्भान की प्रासद्ऱ का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं आया िरते दे खना फकसी सॊकट से शीघ्र
भुत्रि सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं आया रूका हुवा फदखे तो फकसी अऻात
सॊकट के आनेका ऩूवा सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं आवेदन कयते दे खना दयू स्थ स्थानं की
मािा से राब सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं आश्रभ दे खना व्मवसाम भं हासन होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं आइसक्रीभ खाते दे खना शीघ्र सुख औय
शाॊसत सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं आॊधी आते दे खना सॊकटं से िुटकाया

 स्वप्न भं इभरी

खाते दे खना स्त्री के

सरए शुब सॊकेत रेफकन ऩुरुष के सरए अशुब सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं इद्श प्रसतभा के िोयी दे खना त्रवसबडन कद्श
एवॊ सॊकटो का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं इनाभ सभरते दे खना अऩभासनत होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं इि रगाते दे खना भान-सम्भान की वृत्रद्ध
एवॊ शुबपरं की प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।

ऩसत-ऩत्नी भं करह सनवायण हे तु
मफद ऩरयवायं भं सुख-सुत्रवधा के सभस्त साधान होते हुए बी िोटी-िोटी फातो भं ऩसत-ऩत्नी के त्रफि भे करह होता यहता
हं , तो घय के स्जतने सदस्म हो उन सफके नाभ से गुरुत्व कामाारत द्राया शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से भॊि ससद्ध प्राणप्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुि वशीकयण कवि एवॊ गृह करह नाशक फडब्फी फनवारे एवॊ उसे अऩने घय भं त्रफना फकसी
ऩूजा, त्रवसध-त्रवधान से आऩ त्रवशेष राब प्राद्ऱ कय सकते हं । मफद आऩ भॊि ससद्ध ऩसत वशीकयण मा ऩत्नी वशीकयण
एवॊ गृह करह नाशक फडब्फी फनवाना िाहते हं , तो सॊऩका आऩ कय सकते हं ।

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जुराई 2012

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 स्वप्न भं इभायत दे खना भान-सम्भान भं वृत्रद्ध एवॊ
धन राब सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ईंट दे खना कद्श सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फकसी इॊ जन को िरता दे खना मािा ऩय
जाने का एवॊ शिु से सतका यहने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं इडद्रधनुष दे खना धन हासन औय सॊकटं की
वृत्रद्ध होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं स्वमॊ को उल्टे कऩडे ऩहने दे खना फकसी
त्रप्रमजन से अऩभान होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं उजारा होते दे खना शीघ्र ही उत्तभ सपरता
सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं उठते औय सगयते दे खना भहत्वऩूणा कामा
हे तु कडे ़ सॊघषा का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं उरझे फार अथवा धागे दे खना ऩये शासनमं
भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत हं ।

 ऊ

 स्वप्न भं स्वमॊ को फकसी ऊॊिाई वारे स्थान ऩय
दे खना अऩनो से अऩभासनत होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ऊन मा ऊनी वस्त्र दे खना धन राब सभरने
का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ऊॊिा ऩहाड़ दे खना फकसी भहत्वऩूणा कामा के
सरए कफठन ऩरयश्रभ से सपरता सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं उजाड़ा स्थान दे खना दयू स्थ स्थान की मािा
होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं ऊॊिे वृऺ दे खना इच्िा ऩूसता भं त्रवरॊफ का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं उस्तया िरते दे खना धन हासन मा धन की
िोयी का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं उस्तया िरते दे खना मािा भं धन राब
सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं उऩवन दे खना फकसी फीभायी का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं उदघाटन का दृष्म दे खना अशुब सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं फकसी को उदास होते दे खना शुब सभािाय
की प्रासद्ऱ का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं उधायी की रेन-दे न होते दे खना धन राब
का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को उड़ते दे खना फकसी गॊबीय दघ
ा ना
ु ट
होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं स्वमॊ को उिरते दे खना फकसी अशुब
सभािाय सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं उल्रू को दे खना फकसी सॊकट मा दख
ु के
आने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं उफासी रेते दे खना द्ु ख प्रासद्ऱ का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं स्वमॊ का कद िोटा दे खना त्रप्रमजन से
अऩभान एवॊ त्रवसबडन ऩये शानी सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ का कद फड़ा दे खना सनकटतभ बत्रवष्म
भं बायी सॊकट आने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को कसभ खाते दे खना सॊतान ऩऺ ऩय
सॊकट आने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं करभ दे खना त्रवद्या प्रासद्ऱ एवॊ धन प्रासद्ऱ का
सॊकेत है ।

जुराई 2012

28

 स्वप्न भं कजा दे ते दे खना जीवन भं खुशहारी आने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कजा रेते दे खना व्मवसामीक कामा भं हासन
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फकसी करा कृ सतमं को दे खना सभाज भं
भान-सभान फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कऩूय दे खना व्माऩाय भं राब होने का सॊकेत
है ।

 स्वप्न भं कफाड़ मा कफाडी़ को दे खना जल्द ही अच्िे
फदनं की शुरूआत होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कफूतय को दे खना प्रेसभ-प्रेसभका से प्माय
फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कफूतयं का झुॊड दे खना फकसी शुब सभािाय
के सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कभर का पूर दे खना ऻान प्रासद्ऱ का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं कऩास दे खना घय की सुख-सभृत्रद्ध फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कॊगन दे खना फकसी से अऩभासनत होने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं कब्र खोदते दे खना धन राब एवॊ बूसभ-बवन
से सॊफॊसधत राब सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ का कत्र दे खना शुब सॊकेत है भ
रेफकन अनुसित कभा से दयू यहं ।

 स्वप्न भं कत्रब्रस्तान दे खना फकसी कामा भं सनयाशा
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कॊघी दे खना शयीय ऩय िोट रगने एवॊ दाडत
मा कान भं ददा होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं कसयत होते दे खना फकसी योग से ऩीफड़त
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कारी आॉखे दे खना व्माऩाय भं राब सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कारा यॊ ग दे खना शुब परं की प्रासद्ऱ का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्व्मॊको काजू खाते दे खना नमे व्माऩाय मा
नौकयी सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कान दे खना शुब सभािाय सभरने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं कान साप कयते दे खना ऻान वृत्रद्ध का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं कद ू दे खना ऩेट भं ददा होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं कायखाना दे खना फकसी दघ
ा ना भं पसने
ु ट

 स्वप्न भं कपन दे खना फदधाामु होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं कारी त्रफल्री दे खना कोई फड़ा राब सभरने

 स्वप्न भं फकसी कडमा दे खना धन वृत्रद्ध का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं किुआ दे खना शुब सभािाय सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं करश दे खना फकसी कामा भं सपरता
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कॊफर दे खना स्वास््म सभस्मा होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्व्ममॊ को कऩडे ़ धोते दे खना फकसी कामा भं

की सूिना सभरने का सॊकेत है ।
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं स्वमॊको कुॊडर ऩहने दे खना सॊकट सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कुफडा दे खना फकसी कामा भं त्रवघ्न होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कुभकुभ दे खना फकसी कामा भं सपरता
सभरने का सॊकेत है ।

रूकावट के फाद भं सपरता सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं कुल्हाडी दे खना फकसी कामा भं असधक

 स्वप्न भं फकसी का कटा ससय दे खना फकसी के सभऺ

ऩरयश्रभ के उऩयाॊत अल्ऩ राब सभरने का सॊकेत है ।

शसभंदा होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं कुत्ते को बंकते दे खना सभाज भं हास्म के
ऩाि फनने का सॊकेत है ।

जुराई 2012

29

 स्वप्न भं कुत्ते को झऩटते दे खना दश्ु भन को हयाने

 स्वप्न भं कभॊडर दे खना ऩरयवाय के फकसी सदस्म से

 स्वप्न भं कुसॉ को खारी दे खना नई नौकयी सभरने

 स्वप्न भं कयवा िौथ का दृष्म मफद औयत दे खे तो

सॊकेत है ।

का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कूड़े का ढे य दे खना थोड़ी कफठनाई के फाद
धन सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फकरा दे खना सनकटतभ बत्रवष्म भं ऽुशी
प्राद्ऱ होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं कीर दे खना ऩरयवाय भं फटवाया होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं केश सॊवायते दे खना तीथा मािा ऩय जाने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं केरा दे खना जल्द ही ऽुशी सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं केक दे खना उऩमुि वस्तु सभरने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं कैभया दे खना अऩने बेद सिऩा कय यखने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कोढ़ दे खना धन राब सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कोहया दे खना फकसी सॊकट के सभाद्ऱ होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कोठी दे खना द्ु ख सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं कोमर को दे खना मा सुनना जल्द ही शुब
सभािाय सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फकसी ऊॊिे स्थान से कूदते दे खना फकसी
कामा भं असपरता प्राद्ऱ होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नय कॊकार दे खना फदधाामु प्राद्ऱ होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कद रम्फा होते दे खना भृत्मुतुल्म कद्श होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कद घटते दे खना सभाज भं अऩभासनत होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कटोया दे खना फनते कामा भं त्रवघ्न आने का
सॊकेत है ।

त्रवमोग होने का सॊकेत है ।
वह आजीवन सौबाग्म वती यहती हं , मफद ऩुरुष दे खे
तो धन-धाडम की वृत्रद्ध होती हं ।
 स्वप्न भं कागज कोया फदखे तो शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कागज सरखा हुवा फदखे तो अशुब सॊकेत
है ।

 स्वप्न भं कुयता सपेद यं ग का दे खना शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कुयता अडम यॊ ग का दे खना अशुब सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को कुसॉ ऩय फैठा दे खना फकसी
भहत्वऩूणा ऩद की प्रासद्ऱ एवॊ ऩदोडनती होने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं कुसॉ ऩय फकसी अडम को फैठा दे खना
अऩभासनत होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कब्र खोदते दे खना शीघ्र बवन सनभााण होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कऩड़े का व्मऩाय होते दे खना व्माऩाय भं
राब होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कऩडे िभक तेदेखना शीघ्र त्रववाह औय
भान-सम्भान भं वृत्रद्ध का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं कऩडे सपेद यॊ ग के दे खना दे खना शुब
सभािाय सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कऩडे हये यॊ ग के धन दौरत फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कऩडे ऩीरे यॊ ग के दे खना स्वस््म भं खयाफी
एवॊ िोयी होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कऩडे भैरे दे खना धन हासन होने का सॊकेत
है ।

स्वप्न भं कऩडे ऩय खून धब्फे दे खना व्मथा ही

फदनाभी सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं किुआ दे खना बायी भािा भं धन राब
सभरने का सॊकेत है ।

जुराई 2012

30

 स्वप्न भं कभर ककड़ी दे खना उत्तभ बोजन सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को कयी खाते दे खना त्रवधवा मा त्रवधुय
से सॊऩका फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कान कटते दे खना स्वजनं से त्रवमोग का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कारा कुत्ता दे खना फकसी कामा भे सपरता
सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं काना व्मत्रि फदखे तो प्रसतकूर सभम का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कीड़ा दे खना शत्रि एवॊ फर की वृत्रद्ध का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कुम्हाय को दे खना शुब सभािाय सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं केतरी के पूर दे खना दाॊऩत्म सुख भं वृत्रद्ध
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं कंिी दे खना अकायण फकसी से वाद-त्रववाद
होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं खटभर भायते दे खना कफठनाई से िुटकाया
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं खयफूजा दे खना कामा ऺेि भं सपरता
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऽत ऩढ़ना फकसी शुब सभािाय के सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं खयगोश दे खना स्त्री से फेवपाई का सॊकेत
है ।

 स्वप्न भं खसरहान दे खना भान-सम्भान फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं खटाई खाते दे खना धन हासन होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं खॊबा (रोहे का) दे खना शीघ्र त्रववाह होने
औय कामा भं सपरता सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं खॊबा मा भीनाय दे खना फदधाामु होने औय
सुख शास्डत फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं खारी खफटमा दे खना फकसी फीभायी से कद्श
सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं कोमरा दे खना प्रेभ जार भं पॉस ने से द्ु ख

 स्वप्न भं खारी फतान दे खना कामा भं नुक्शान होन

 स्वप्न भं कुयान दे खना घय भं सुख-शाॊसत फढ़ने का

 स्वप्न भं स्खरस्खराते दे खना दख
ु द सभािाय सभरने

सभरने का सॊकेत है ।
सॊकेत है ।

का सॊकेत है ।
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं स्खल्री उडाते दे खना स्वजनं से सनयाशा
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्खरौना दे खना सुख सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं खुजरी होते दे खना योग से िुटकाया सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऽुशी सभरते दे खना ऩये शानी फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं खुशफू रगाते दे खना सम्भान फढ़ने का
 स्वप्न भं खयंि रगना शयीय स्वस्थ होने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं खटभर दे खना जीवन भं सॊघषा फढ़ने का
सॊकेत है ।

सॊकेत है ।
 स्वप्न भं खून दे खना धन राब सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं खून-खयाफा होते दे खना सौबाग्म वृत्रद्ध होन
का सॊकेत है ।

जुराई 2012

31

 स्वप्न भं खून की वषाा होते दे खना याज्म मा दे श भं
अकार ऩड़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं खून भं रुढ़के दे खना धन-सम्ऩसत प्राद्ऱ होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं खेर कूद भं बाग रेते दे खना बाग्मोदम
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं खेत दे खना दयू स्थ स्थानो की मािा एवॊ
त्रवद्या, धन की वृत्रद्ध का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं खेत काटते दे खना ऩत्नी से भन भुटाव होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं खोऩडी दे खना फौसधक कामो भं सपरता
सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं गॊजा ससय दे खना ऩयीऺा भं ऩास होने एवॊ
भान-सम्भान फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गरी दे खना, सुनसान गरी दे खने से राब
की प्रासद्ऱ का सॊकेत एवॊ बीड़-बाड़ वारी गरी दे खने
से भृत्मु का सभािाय सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गवाही दे ते दे खना फकसी अऩयाध भं पॊसने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गभरा दे खना, गभरा खारी दे खने ऩय
झभेरे भं पसने का सॊकेत, गभरे भं पूर स्खरे दे खने
ऩय शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गरीिा अथवा ़ारीन दे खना मा उस ऩय
फैठना फकसी त्रप्रमजन के महाॉ शोक भं शासभर होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ग्वारा (दध
ू वारा) मा ग्वासरन (दध
ू वारी)
को दे खना शुब पर सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं गाजय दे खना खेत भं पसर अच्िी होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गाड़ी दे खना मािा सपर होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गासरमा दे ते दे खना सभाज भं फदनाभी होने
 स्वप्न भं गधा दे खना स्वजनो से प्माय सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गधे ऩय भार रदा हुआ दे खना व्माऩाय भं
राब सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं गधे की िीख सनकरते सुनना दख
ु सभरने
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं गधे की सवायी कयते दे खना शुब सभािाय
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गाम दे खना उत्तभ धन राब प्राद्ऱ होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गाम मा फैर को ऩीरे यॊ ग की दे खना याज्म
मा दे श भं भहाभायी होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गयभ ऩानी दे खना फुखाय मा अडम फीभायी
होने का सॊकेत है ।

का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गामिी भॊि का ऩाठ कयते दे खना सकर
भनोयथं की ऩूसता एवॊ सुख सभृत्रद्ध फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सगरास दे खना अनावश्मक खिो भं कटोटी
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सगनती कयते दे खना कामा भं हासन होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सगयसगट दे खना फकसी झगडे भं पसने का
सॊकेत

है ।

 स्वप्न भं सगरहयी को दे खना अत्मॊत शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गीदढ़ को दे खना शिु से कद्श सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गीरी वस्तु दे खना रम्फी फीभायी से कद्श
होने का सॊकेत है ।

जुराई 2012

32

 स्वप्न भं गीता दे खना कद्शं से भुि एवॊ शुब सभम
आने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गुराफ के पूर दे खना भान-सम्भान भं वृत्रद्ध
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गुड खाते दे खना फकसी कामा भं सपरता
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गुफडमा दे खना शीघ्र त्रववाह होने का मा
दाॊऩत्म जीवन भं प्रेभ फढ़ने का, सॊतान सुख सभरने
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं गुठरी खाते मा पंकते दे खना प्रिूय भािा भं
धन राब प्राद्ऱ होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गंहू दे खना कफठन ऩरयश्रभ एवॊ भेहनत से
धन राब सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं गंद दे खना ऩये शानी फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गंदे का पूर दे खना भानससक अशाॊसत होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं गेरुआ वस्त्र दे खना शुब सभम के आगभन
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं घय भं फकसी औय का प्रवेश होते दे खना
शिु ऩय त्रवजम प्राद्ऱ होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं घय भं आग दे खना सयकाय से राब प्राद्ऱ
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं घय सुवणा से फना दे खना घय भं आग
रगने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं घय रोहे का फना दे खना सभाज भं भान
सम्भान फढ़ने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं घडा बया दे खना धन राब प्राद्ऱ होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं घॊटे की आवाज़ सुनाई दे ना फकसी वस्तु के
िोयी होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं घॊटाघय दे खना फकसे अशुब सभािाय प्राद्ऱ
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं घाट दे खना फकसी तीथा मािा ऩय जाने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं घामर को दे खना सॊकट से िुटकाया सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं घास दे खना कामा ऺेि भं राब होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं घी दे खना धन-सॊऩत्रत्त भं वृत्रद्ध का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं घुटने टे कते दे खना फकसी से वाद त्रववाद भं
सपरता सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं घुॊघरू की आवाज सुनना साभास्जक भानसम्भान भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं घडी दे खना दयू स्थ स्थान की मािा ऩय जाने
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं घडी गुभ होते दे खना मािा का कामाकभा
स्थसगत होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं घय खॊडहय अवस्था भं दे खना बूसभ-सॊऩत्रत्त
का भं राब सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं घय सजामा हुआ दे खना बूसभ-सॊऩत्रत्त की
हासन का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं घूॊघट दे खना नमा व्माऩाय मा नौकयी भं
राब सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं घोड़ा सजा हुआ दे खना फकसी भहत्वऩूणा
कामा भं हासन होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं घोड़ा कारे यॊ ग का दे खना सभाज भं भानसम्भान फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं घोड़े मा हाथी ऩय िड़ते दे खना बाग्मोदम
होने का सॊकेत है ।

जुराई 2012

33

 स्वप्न भं ियखा िराते दे खना भशीनयी खयाफ होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िश्भा रगते दे खना त्रवद्या प्रासद्ऱ एवॊ भानसम्भान की प्रासद्ऱ का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं िश्भा खोते दे खना िोयी से नुक्शान होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िाॊदी के फतान भं दध
ू ऩीते दे खना धन स्वप्न भं िरता ऩफहमा दे खना कायोफाय भं उडनत्रत्त
होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं िप्ऩर ऩहनने दे खना दयू स्थ स्थान की
मािा ऩय जाने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं िक्की दे खना भान सम्भान फढ़ने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं िभडा दे खना द्ु ख से कद्श सभरने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं िफूतया दे खना सभाज भं भान सम्भान
फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िट्टान कारे यॊ ग की दे खना शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िट्टान सपेद यॊ ग की दे खना अशुब सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं ियफी दे खना कामा स्थर मा सनवास स्थान
ऩय आग रगने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िडद्र ग्रहण दे खना फनते कामा त्रफगड ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िभगादय उड़ते दे खना दयू स्थ स्थान की
मािा ऩय जाने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं िभगादय रटका हुवा दे खना अशुब सॊकेत
है ।

 स्वप्न भं िम्भि दे खना स्वजन से धोखा सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िप्ऩर दे खना फकसी मािा ऩय जाने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िटनी खाते दे खना दख
ु ो भं वृत्रद्ध होने का
सॊकेत है ।

सॊम्ऩत्रत्त भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं िायऩाई दे खना धन हासन होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िादय सभेट कय यखते दे खना – िोयी होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िादय भैरी दे खना धन राब सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िॊिर आॉखे दे खना फकसी फीभायी से कद्श
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िाॊदी की वस्तु दे खना गृह क्रेश फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िोकरेट खाते दे खना शुब सभम आने वारा
है
 स्वप्न भं िाम दे खना

धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं िावर दे खना कफठनाई से धन सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िाकू दे खना दे खना सॊधषा के फाद त्रवजम
प्राद्ऱ होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सिि दे खना फकसी ऩुयाने सभि से बेट होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सिफडमा दे खना फकसी भेहभान के आने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िीॊटी दे खना धन राब सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िीॊटी भायना फकसी काम भं शीघ्र सपरता
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िीॊफटमं का जभघट दे खना ऩये शानी से कद्श
होने का सॊकेत है ।

जुराई 2012

34

 स्वप्न भं िीर दे खना सभाज भं फदनाभी होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िुम्फन रेते दे खना आसथाक सभृसध होने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं िौकीदाय दे खना आकस्स्भक धन राब
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िौथ (ितुथॉ) का िाॉद दे खना अशुब सॊकेत
है ।

 स्वप्न भं िुम्फन दे त दे खना सभि से प्रेभ फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िुटकी रेते दे खना ऩरयवाय भं करेश फढ़ने
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं िुडैर दे खना धन हासन होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िूहा दे खना औयत से धोखे का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िूहा पॊसा दे खना शायीरयक कद्श होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िूहे को िूहे दानी से सनकरते दे खना फकसी
कद्श से शीघ्र भुत्रि सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िूहा भया दे खना धन राब प्राद्ऱ होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िूहा भायते दे खना धन हासन होने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं िूफडमा तोड़ते फकसी स्त्री को फदखे तो उसके
ऩसत के दीघाामु होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िूफडमा सपेद यॊ ग की दे खना धन राब होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िूल्हा दे खना उत्तभ बोजन प्राद्ऱ होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िूयन खाते दे खना फीभायी से याहत सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िेिक सनकरे दे खना धन प्रासद्ऱ का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं िोय का ऩकड़े जाना धन राब सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िोटी ऩय स्वमॊ को दे खना नुक्शान होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िोयाहा दे खना मािा भं सपरता सभरने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं ित दे खना बवन सनभााण का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िड़ी दे खना सॊतान से राब प्राद्ऱ होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ितयी खोर कय िरते दे खना फकसी
भुसीफतं से िुटकाया सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं िि दे खना सयकाय से सम्भान सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िरनी दे खना व्माऩाय भं हासन होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िल्रा ऩहने दे खना सशऺा भं सपरता
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िराॊग रगाते दे खना असपरता प्राद्ऱ होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िभ-िभ (ऩामर जैसी) आवाज़ सुनना
भेहभान के आगभन का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िाज दे खना सभाज भं सम्भान फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िाि ऩीते दे खना धन राब सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िाऩाई खाना दे खना धन राब सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं िािो का सभूह दे खना सशऺा भं राब
सभरने का सॊकेत है ।

जुराई 2012

35

 स्वप्न भं सिऩकरी दे खना दश्ु भन से कद्श प्रद्ऱ होने

 स्वप्न भं जभीन ऩय िरते दे खना नमा योजगाय

 स्वप्न भं िीॊक आते दे खना अशुब सॊकेत है ।

 स्वप्न भं जभीन खोदते दे खना कामा भं कफठन

का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं िुआया खाते दे खना धन राब सभरने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं िुया दे खना दश्ु भन से बम सभरने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं िोटे फच्िे दे खना भोनोकाभना ऩूणा होने का
सॊकेत है ।

सभरने का सॊकेत है ।
ऩरयश्रभ से राब सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं जॊगर दे खना कद्श दयू होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं जरेफी खाते दे खना सुख-ऐद्वमा भं वृत्रद्ध का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं जरते घय दे खना फीभायी ऩये शानी फढ़ने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं जरता भुदाा दे खना फकसी शुब सभािाय की
प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं जहाज दे खना फकसी दघ
ा ना भं पॊसने का
ु ट
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं जाद ू दे खना मा कयना धन हासन होने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं जार भकडी का दे खना शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं जभघट दे खना अऩने कामा की प्रशॊसा होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं जमकाय सुनना फकसी सॊकट ग्रस्त होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं जरते दे खना साभास्जक भान सम्भान की
प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ज्मोसतषी को दे खना सॊतान को कद्श होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं जटाधायी साधु दे खना शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं जॊजीय को खुरी दे खना जुठे इल्जाभ रगेने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को जॊजीय भं जकडे दे खना फकसी
सभस्माओ से िुटकाया सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं जर दे खना सॊकट से ग्रस्त होने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं जड़े दे खना शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ज्वाराभुखी दे खना स्थान ऩरयवतान होने का
सॊकेत है ।

भिरी का फदखे तो सॊकट से ग्रस्त होने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं जाभुन दे खना भहत्वऩूणा मािा जाने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं जुरूस दे खना नौकयी भं ऩदोडनत्रत्त सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं जूते से ऩीटते दे खना सभाज भं भान
सम्भान फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं जेफ खारी दे खना अशुब सॊकेत है
 स्वप्न भं जेफ बयी दे खना असधक खिा होने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं जेर दे खना भान-सम्भान की हानी होने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं जेर से िूटते दे खना फकसी कामा भं
सपरता सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं जोकय दे खना सभम की फफाादे होने का
सॊकेत है ।

जुराई 2012

36

 स्वप्न भं टे रीपोन कयते दे खना नमे रोगं से सभिता
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं टे फर दे खना रेने-दे ने सॊफॊसधत कामा से राब
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं टै क्स दे ते दे खना िरते कामा भं रूकावट
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं टै क्स रेते दे खना आसथाक राब सभरने का
 स्वप्न भं झगडा होते दे खना शुब सभािाय सभरने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं झयना ठॊ डे ऩानी का दे खना सॊकेत है ,
रेफकन गभा ऩानी का झयना योग से ऩीफड़त होने
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं झॊडा सपेद यॊ ग का मा फकसी भॊफदय का
दे खना शुब सभािाय सभरने का सॊकेत है ।

सॊकेत है ।

 स्वप्न भं टोकयी खारी दे खना शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं टोकयी बयी दे खना अशुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं टोऩी उतायते दे खना सभाज भं भान सम्भान
फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं टोऩी सय ऩय यखी दे खना स्वजनो से
अऩभान होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं झॊडा हये यॊ ग का दे खना मािा भं कद्श होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं झॊडा ऩीरे यॊ ग का दे खना फीभायी होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं झाडू रगाते दे खना घय भं िोयी होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं झुनझुना दे खना ऩरयवाय भं सुख-सभृत्रद्ध
फढ़ने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं डॊ डा दे खना दश्ु भन से सावधान यहने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं डपरी फजाते दे खना घय भं भाॊगसरक कामा
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं डाक खाना दे खना फुये सभािाय सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं डाफकमा दे खना शुब सभािाय सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं टॊ की खारी दे खना शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं टॊ की बयी हुई दे खना अशुब सॊकेत है ।

 स्वप्न भं टाई सपेद यॊ ग की दे खना अशुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं टाई यॊ गीन दे खना शुब सॊकेत है ।

 स्वप्न भं डॉक्टय दे खना सनयाशा सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं डाकू दे खना धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फडब्फा खारी दे खना शुब सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं फडब्फा बया दे खना अशुब सॊकेत हं ।

जुराई 2012

37

 स्वप्न भं ताराफ भं तैयते दे खना स्वस््म राब का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तारा दे खना िरते काभ भं रूकावट आने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तारी फजते दे खना त्रफगडे कामा फनने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ताॊगा दे खना जीवन भं सुख वृत्रद्ध एवॊ मािा
 स्वप्न भं तयफूज दे खना धन राब प्राद्ऱ होने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं तयाजू दे खना कामा उसित ढॊ ग से ऩूणा होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तफरा फजते दे खना जीवन भं सुख-शाॊसत
प्राद्ऱ होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तफकमा दे खना सभाज भं भान सम्भान
फढने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तरवाय दे खना धसभाक कामा सॊऩडन होने एवॊ
शिु ऩय त्रवजम प्राद्ऱ होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तऩस्वी दे खना भन की शाॊसत सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तरा ऩकवान खाते दे खना शुब सभािाय
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तराक दे खना धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तभािा भायते दे खना शिु ऩय त्रवजम प्राद्ऱ
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तयाजू भं तुरते दे खना बमॊकय फीभायी होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तवा खारी दे खना अशुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तवे ऩय योटी सेकते दे खना धन-सॊऩत्रत्त फढने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तहखाना दे खना तीथा मािा ऩय जाने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ताम्फा दे खना सयकाय से राब सभरने का
सॊकेत है ।

भं राब सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं ताफीज फाॊधा दे खना कामा भं हासन होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ताफीज़ दे खना – शुब सभम का आगभन
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ताश के ऩत्ते दे खना फकसी से रडाई होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ताये दे खना अशुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सततरी दे खना शीघ्र

त्रववाह होने व प्रेभ की

वृत्रद्ध का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सततरी उड़ती फदखे तो दाॊऩत्म जीवन भं
क्रेश होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सततरी ऩकड़ते दे खना सॊतान सुख भं वृत्रद्ध
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सतर दे खना व्माऩाय भं राब सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सतयाहा (तीन यास्ते) मा त्रिसॊगभ दे खना
रडाई-झगडा होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं त्रिशूर दे खना भहत्वऩूणा भागा दशान सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं त्रिभूसता दे खना नौकयी सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सतजोयी फॊद कयते दे खना धन वृत्रद्ध होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सतजोयी टू टती दे खना व्माऩाय भं फढोतयी
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सतरक कयते दे खना व्माऩाय भं फढोतयी होने
का सॊकेत है ।

जुराई 2012

38

 स्वप्न भं तूपान दे खना मा उसभे पॉसते दे खना सॊकट
से िुटकाया सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं थैरी खारी दे खना बूसभ-बवन से सॊफॊसधत
कामं भं वाग-त्रववाद फढ़ने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं तेर मा तेरी को दे खना सभस्मा फढने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तोऩ दे खना शिु ऩय त्रवजम प्राद्ऱ होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तोता दे खना प्रसडनता फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं तंद फढ़ी दे खना ऩेट सॊफॊसधत ऩये शानी होने
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं तोसरमा दे खना स्वस््म राब सभरने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दयवाजा फॊद दे खना भानससक सिॊता फढने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दयवाजा खोरते दे खना नमा कामा शुरू होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दयवाजा सगयते दे खना अशुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दही दे खना धन राब प्राद्ऱ होने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं दसरमा खाते दे खना स्वस््म सॊफॊसधत
सभस्मा होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं थप्ऩड़ खाते दे खना कामा भं सपरता सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं थप्ऩड़ भायते दे खना फकसी वाग-त्रववाद भं
पॉसने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं थक जाते दे खना कामा भं सपरता सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं थय थय शयीय का कॊऩन होते दे खना
साभास्जक भान सम्भान फढने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं थारी बयी दे खना अशुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं थारी खारी दे खना सपरता सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं थूकते दे खना सभाज भं भान सम्भान फढने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं थैरी बयी दे खना दे खना बूसभ-बवन आफद
भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दयाय दे खना घय भं पूट ऩड़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दरदर दे खना काभ भं अरुसि होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दस्ऺणा की रेन-दे न होते दे खना व्माऩाय भं
नुक्शान होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दभकर (इॊ जन) िराते दे खना धन वृत्रद्ध
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दऩाण दे खना भानससक अशाॊसत फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दस्ताना ऩहनने दे खना शुब सभािाय सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दहे ज़ का रेन-दे न होते दे खना िोयी होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दयजी को काभ कयते दे खना कोटा -किहयी
के कामा भं सपरता सभरने का सॊकेत है ।

जुराई 2012

39

 स्वप्न भं दवा खाते-स्खराते दे खना नमे रोगं से
फॊधत
ु ा होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दवा सगयते दे खना योगं से िुटकाया सभरने
का सॊकेत है ।

राब सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दाग-धब्फा दे खना िोयी होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दाभाद को दे खना ऩुिी को कद्श होने का

 स्वप्न भं दाॊत टू टते दे खने शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दाॊत भं ददा होते दे खना नमे कामा भं राब
सभरने का सॊकेत है ।

सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दार कऩड़ो ऩय सगयते दे खना शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दार ऩीते दे खना कामा भं रूकावट का सॊकेत

 स्वप्न भं दादा मा दादी को भृत दे खना भान सम्भान
फढने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दान रेते दे खना धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत
है ।

है ।

 स्वप्न भं दाढ़ी सपेद दे खना कामा भं रूकावट का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दाढ़ी कारी दे खना धन वृत्रद्ध का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दान दे ते दे खना धन हासन होने का सॊकेत
है ।

 स्वप्न भं दीऩक फुझाते दे खना नमे कामा के शुबायॊ ब
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दाह फक्रमा होते दे खना भनोइस्च्ित कामा
सॊऩडन होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दीऩक जराना फकसी अशुब सभािाय सभरने
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दातुन कयते दे खना कद्श दयू होने का सॊकेत
है ।

 स्वप्न भं दाना ऩस्ऺमो को डारते दे खना व्माऩाय भं

 स्वप्न भं दीवारी दे खना व्माऩाय भं घाटा होने का
सॊकेत है ।

 क्मा आऩको उच्ि असधकायी से ऩये शानी हं ?
 क्मा आऩकी अऩने सहकभािायी से अनफन होती हं ?
 क्मा आऩके असधनस्थ कभािायी आऩकी फात नही भानते?
मफद आऩको अऩने उच्ि असधकायी, सहकभािायी, असधनस्थ कभािायी से ऩये शानी हं । आऩके अनूकुर कामा नहीॊ कयते मा
आऩको कयने नहीॊ दे ते? वह आऩकी फात नहीॊ भानतं? त्रफना वजह आऩको ऩये शान कयते हं ? अन आवश्मक कामा आऩसे
कयवाते हं । आऩका प्रभोशन रुकवादे ते हं । उसित कामा कयने ऩय बी आऩके कामा भं नुक्श सनकारते हं ? मफद आऩ इसी
तयह फक फकसी सभस्मा से ग्रस्त हं तो आऩ उन असधकायी, सहकभॉ, असधनस्थकभॉ मा अडम फकसी व्मत्रि त्रवशेष के
नाभ से गुरुत्व कामाारत द्राया शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से भॊि ससद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुि वशीकयण कवि एवॊ
एस.एन.फडब्फी फनवारे एवॊ उसे अऩने घय-ओफपस भं स्थात्रऩत कय अल्ऩ ऩूजा, त्रवसध-त्रवधान से आऩ त्रवशेष राब प्राद्ऱ
कय सकते हं । मफद आऩ भॊि ससद्ध वशीकयण कवि एवॊ एस.एन.फडब्फी फनवाना िाहते हं , तो सॊऩका कयं ।

GURUTVA KARYALAY

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जुराई 2012

40

 स्वप्न भं दीऩक दे खना सभाज भं भान सम्भान फढने

सॊकेत है ।

का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दीऩक दान कयते दे खना फीभायी दयू होने
का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं दल्
ु हन दे खना सुख-सभृत्रद्ध सभरने का सॊकेत
है ।

 स्वप्न भं दक
ु ान कयते दे खना भान साभास्जक सम्भान
फढने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दक
ु ान फेिते दे खना सभाज भं भानहासन
होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दक
ु ान खयीदते दे खना धन का राब होने
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दक
ु ान फॊद होते दे खना कद्शं भं वृत्रद्ध होने
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दऩ
ु ट्टा दे खना स्वस््म राब का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दल्
ू हा मा दल्
ु हन फनते दे खना सभाज भं
भान-सम्भान भं हासन होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दल्
ू हा-दल्
ु हन फायात सफहत दे खना फकसी
योग के फढ़ने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दयू फीन दे खना सभाज भं भान-सम्भान भं
हासन होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दध
ू दे खना धन राब सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दक
ु ान ऩय फैठते दे खना धन राब औय ऩदप्रसतश्ठा फढ़ने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दोभुहा साॊऩ दे खना दघ
ा ना से सम्भुस्खन
ु ट
होने व सभि द्राया त्रवद्वासघात होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं दौड़ते दे खना कामा भं असपरता सभरने का

 स्वप्न भं धभाका सुनना कद्श फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं धतूया खाते दे खना सॊकट से यऺा होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं धनुष दे खना सबी कभो भं सपरता सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं धब्फे दे खना शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं धासभाक आमोजना दे खना शुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं धागा दे खना कामा भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं धुयी दे खना साभास्जक भान सम्भान भं
वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं धुआ दे खना ऩये शानीमाॊ फढ़ने औय सॊकट भं
पॊसने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं धुध
ॊ दे खना शुब सभािाय सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं धुन सुनना (भधुय) ऩये शानी फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं धूर दे खना मािा भं राब सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं धोफी दे खना कामा भं सपरता सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं धोती दे खना मािा ऩय जाने का सॊकेत है ।

धन वृत्रद्ध फडब्फी
धन वृत्रद्ध फडब्फी को अऩनी अरभायी, कैश फोक्स, ऩूजा स्थान भं यखने से धन वृत्रद्ध होती हं स्जसभं कारी हल्दी,
रार- ऩीरा-सपेद रक्ष्भी कायक हकीक (अकीक), रक्ष्भी कायक स्पफटक यत्न, 3 ऩीरी कौडी, 3 सपेद कौडी, गोभती
िक्र, सपेद गुॊजा, यि गुॊजा, कारी गुॊजा, इॊ द्र जार, भामा जार, इत्मादी दर
ा वस्तुओॊ को शुब भहुता भं तेजस्वी
ु ब
भॊि द्राया असबभॊत्रित फकम जाता हं ।

भूल्म भाि Rs-730

जुराई 2012

41

 स्वप्न भं नक्शा फनाना कोई नई मोजनामे शुरू होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नकसीय फहते दे खना भानससक ऩये शासनमा
फढ़ने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नकाफ रगाना फकसी गॊबीय फीभायी के
आगभन का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नट (कराफाज़) को दे खना ऩारयवारयक सुख
 स्वप्न भं नर खुरा दे खना कामा भं शीघ्र सपरता
सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं नर फॊद दे खना कामा भं त्रवघ्न-फाधा आने
का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नयक दे खना कफठनाइमाॉ फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नगीना दे खना शुब सभािाय सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नगाडा दे खना धन राब औय भान-सम्भान
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नभाज़ ऩढ़ते दे खना ऩूयाने कद्श दयू हो कय
शास्डत प्राद्ऱ होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं नभक खाते दे खना झगडे भं पॉसने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नभक दे खना ऩुयानी फीभायी दयू हं औय
कामा ऺेि भं राब की प्रासद्ऱ होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं नभकदानी दे खना गृहस्थ सुख भं वृत्रद्ध का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं स्वमॊ को नशे भं दे खना धन वृत्रद्ध हं होने
रेफकन सभस्मा फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नयसगस का पूर दे खना ऩारयवारयक सुख
वृत्रद्ध का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नदी-नारे भं सगयते दे खना अनेक सॊकट
आने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ऩर स्वमॊ को कयते दे खना कामा भं
असपरता सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ऩर अडम को कयते दे खना मािा भं
रुकावट व फनते काभ त्रफगडने का सॊकेत हं ।

शासत फढ़ने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं नसवाय सूॊघते दे खना भानससक ऩरयशासनमा
फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नदी दे खना बत्रवष्म भं सुखं की प्रासद्ऱ होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नदी भं स्नान कयते दे खना कामा भं
सपरता सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नदी भं सगयते दे खना कामा भं फकसी रुकावट
के फाद भं सपरता सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नहय खोदना कामा सम्फडधी नई मोजनामे
सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नग्न होते दे खना बोग-त्रवरास के साधन
फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नदी दे खना द्ु ख दयू हो कय धन सभरने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं नाखून टू टते दे खना सपरता त्रवरम्फ से
सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नाक फहुत फड़ी दे खना भान सम्भान फढ़ने
औय ऩदौडनसत होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं नाखून दे खना कामा भं फाधा आने का सॊकेत
हं ।
 स्वप्न भं नाक से खून फहते दे खना धन वृत्रद्ध होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नाटक दे खना गृहस्थ का सुख भं वृत्रद्ध
रेफकन बत्रवष्म असनस्द्ळत होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नाटक भं बाग रेते दे खना स्वजन से धोखा
सभरने का सॊकेत हं ।

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 स्वप्न

भं

नारयमर

दे खना

धन

राब,

धासभाक

आमोजना भं शासभर होने व स्वाफदद्श बोजन सभरने
का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नाक ऩय िोट रगते दे खना भान सम्भान
भं हासन होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं नासूय दे खना फकसी फीभायी से िुटकाया
सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नाऩतोर कयना व्माऩाय भं घाटा होने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं नाग को त्रफर भं जाते दे खना धन वृत्रद्ध होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नाग को त्रफर से फाहय सनकरते दे खना धन
हासन का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नाग का डॊ क भायना सभाज भं भान
सम्भान फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नाग को घय भं दे खना उस दे खे गए स्थान
की ऩत्रविता का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फकसी को नाग उठामे दे खना धन-सॊऩत्रत्त
प्राद्ऱ होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नाना-नानी को दे खना ऩारयवारयक सुख फढ़ने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नाडा फॊधते-टू टते दे खना ऩारयवारयक करेश
फढ़ने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं सनयादय होते दे खना भान सम्भान फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सनशाना हाथ रगते दे खना ऩुयानी इच्िा
ऩूणा होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सनतम्फ दे खना गृहस्थ सुख भं वृत्रद्ध होने
का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नीभ का वृऺ दे खना ऩुयानी त्रफभायी दयू होने
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं नीरभ यत्न दे खना शुब सभािाय सभरने औय
दश्ु भन के ऩयस्त होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं नीॊद भं सोते मा नीॊद से उठाते दे खना धन
राब होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नीरकॊठ दे खना भान सम्भान फढ़ने का
सॊकेत है व अत्रववाफहत हं तो शीघ्र त्रववाह होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नीॊफू काटते मा सनिोड़ते दे खना धासभाक
कामा भं सासभर होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नुकीरी िीज़ से िोट रगते दे खना फकसे से
वाद त्रववाद भं पसने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नुकीरा जूता दे खना सभाज भं भान
सम्भान फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नेवरा दे खना ऩुयाने सॊकट सभाद्ऱ हो एवॊ
सूवणा की प्रासद्ऱ का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं नारा दे खना कामा भं सपरता सभरने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नाव दे खना गृहस्थ सुख भं वृत्रद्ध का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नाव भं फैठना अनेक सॊकट से ग्रस्त होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नाई से हजाभत फनवाते दे खना फकसी से
धोखा सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नायद दे खना धन राब रेफकन रड़ाई झगडा
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं नासब दे खना कामा ऺेि भं प्रगसत तथा धन
राब होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं ऩयी दे खना कामा भं सपरता एवॊ बौसतक
सुख साधनं की प्रासद्ऱ होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩहाड़
सॊकेत है ।

दे खना शिु ऩय त्रवजम होने का

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 स्वप्न भं ऩम्ऩ से ऩानी सनकारते दे खना व्मवसाम भं
रुकावट आने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं प्रसाद फाॉटते दे खना स्वास््म राब एवॊ सुख
-सभृत्रद्ध फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩहाड़ ऩय िढ़ते दे खना भान सम्भान एवॊ
धन वृत्रद्ध का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩहाड़ से उतयते दे खना व्माऩाय भं सभस्माएॊ
आने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं ऩयदे शी को दे खना भनोकाभना ऩूसता का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩटका (कभयफॊद) फाॊधते दे खना साभास्जक

 स्वप्न भं ऩदाा कारे यॊ ग का दे खना शीघ्र धन वृत्रद्ध
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩवात मा वृऺ दे खना द्ु ख दयू होने धन
राब सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं ऩसा दे खना कोई गुद्ऱ कामा ऩूया होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩफहमा दे खना कामा ऺेि भं शीघ्र प्रगसत होने
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं ऩॊडार दे खना फकसी फड़े उत्सव भं शासभर
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं प्रेट दे खना मा उसभं खाना शुब सॊकेत है ।

भान सम्भान एवॊ धन वृत्रद्ध का सॊकेत है ।

त्रवद्या प्रासद्ऱ हे तु सयस्वती

 स्वप्न भं ऩटाखा दे खना ऽुशी सभरने का सॊकेत है ।

कवि औय मॊि

 स्वप्न भं ऩरॊग दे खना फकसी से अऩभासनत होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩनघट को सूना दे खना फकसी से सनभॊिण
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩनघट ऩय बीड़ दे खना – ऩरयवाय भं उत्सव
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩरयवाय दे खना शुब सभािाय सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩनीय खाते दे खना धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं ऩऩीता खाते दे खना ऩेट के योग होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩहये दाय को दे खना भूल्मवान वस्तु के िोयी
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩॊजीयी खाते दे खना फकसी फीभायी के आने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩयिाई दे खना अशुब सभािाय सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩगड़ी दे खना धन हासन होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩदाा सपेद यॊ ग का दे खना सभाज भं भान
हासन का सॊकेत है ।

आज के आधुसनक मुग भं सशऺा प्रासद्ऱ जीवन की
भहत्वऩूणा आवश्मकताओॊ भं से

एक है । फहडद ू धभा भं

त्रवद्या की असधद्षािी दे वी सयस्वती को भाना जाता हं । फच्िो
की फुत्रद्ध को कुशाग्र एवॊ तीव्र हो, फच्िो की फौत्रद्धक ऺभता
औय स्भयण शत्रि का त्रवकास हो इस सरए सयस्वती कवि
अत्मॊत राबदामक हो सकता हं ।
सयस्वती कवि को दे वी सयस्वती के ऩयॊ भ दर

ू ब

तेजस्वी भॊिो द्राया ऩूणा भॊिससद्ध औय ऩूणा िैतडममुि फकमा
जाता हं । स्जस्से जो फच्िे भॊि जऩ अथवा ऩूजा-अिाना
नहीॊ कय सकते वह त्रवशेष राब प्राद्ऱ कय सके औय जो
फच्िे ऩूजा-अिाना कयते हं , उडहं दे वी सयस्वती की कृ ऩा
शीघ्र प्राद्ऱ हो इस सरमे सयस्वती कवि अत्मॊत राबदामक
होता हं ।

सयस्वती कवि :

सयस्वती मॊि :भूल्म :

भूल्म: 460 औय 550

370 से 1900 तक

GURUTVA KARYALAY
92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA,
BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
Call Us - 9338213418, 9238328785
Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in,
gurutva.karyalay@gmail.com

जुराई 2012

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 स्वप्न भं ऩत्थय दे खना सयकाय से धन राब होने का
सॊकेत है ।

है ।
 स्वप्न भं ऩानी ऩीते दे खना धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत

 स्वप्न भं ऩि सरखते दे खना ऩये शानी होने का सॊकेत
है ।

है ।
 स्वप्न भं ऩानी ऩय िरते दे खना कायोफाय भं हासन

 स्वप्न भं प्माज खाते दे खना दब
ु ााग्म से सम्भुस्खन
होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं प्रशॊसा सुनना अशुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं प्माऊ फनवाना धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं ऩयीऺा स्थर ऩय फैठे दे खना कामा भं
असपरता सभरने का सॊकेत है ।

होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩोसरश कयते दे खना नौकयी भं उडनसत होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩान का वृऺ दे खना सॊतान के सरए सभृत्रद्ध
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं ऩागर को दे खना शुब कामा भं सपरता

 स्वप्न भं ऩतॊग उड़ते दे खना रम्फी मािा ऩय जाने का
सॊकेत है ।

सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩाउडय रगाते दे खना सभाज भं भान

 स्वप्न भं ऩढ़ते मा ऩढाते दे खना कामा भं सपरता
सभरने का सॊकेत है ।

सम्भान फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩामर को फजते दे खना स्त्री से त्रवमोग होने

 स्वप्न भं ऩकवान खाते मा फनाते दे खना दख
ु ो भं
वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं ऩफहमा दे खना मािा सपरता सभरने का
सॊकेत है ।

का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩारकी ऩय फैठे दे खना स्वस््म सॊफॊसधत
सभस्मा होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩारना दे खना ऩारयवारयक सुख भं वृत्रद्ध होने

 स्वप्न भं ऩानी दे खना सुख सभृसध फढ़ने का सॊकेत

का सॊकेत है ।

नवयत्न जफड़त श्री मॊि
शास्त्र विन के अनुसाय शुद्ध सुवणा मा यजत भं सनसभात श्री मॊि के िायं औय मफद नवयत्न जड़वा ने ऩय मह नवयत्न
जफड़त श्री मॊि कहराता हं । सबी यत्नो को उसके सनस्द्ळत स्थान ऩय जड़ कय रॉकेट के रूऩ भं धायण कयने से व्मत्रि
को अनॊत एद्वमा एवॊ रक्ष्भी की प्रासद्ऱ होती हं । व्मत्रि को एसा आबास होता हं जैसे भाॊ रक्ष्भी उसके साथ हं ।

नवग्रह को श्री मॊि के साथ रगाने से ग्रहं की अशुब दशा का धायण कयने वारे व्मत्रि ऩय प्रबाव नहीॊ होता हं ।
गरे भं होने के कायण मॊि ऩत्रवि यहता हं एवॊ स्नान कयते सभम इस मॊि ऩय स्ऩशा कय जो जर त्रफॊद ु शयीय को

रगते हं , वह गॊगा जर के सभान ऩत्रवि होता हं । इस सरमे इसे सफसे तेजस्वी एवॊ परदासम कहजाता हं । जैसे
अभृत से उत्तभ कोई औषसध नहीॊ, उसी प्रकाय रक्ष्भी प्रासद्ऱ के सरमे श्री मॊि से उत्तभ कोई मॊि सॊसाय भं नहीॊ हं एसा
शास्त्रोि विन हं । इस प्रकाय के नवयत्न जफड़त श्री मॊि गुरूत्व कामाारम द्राया शुब भुहूता भं प्राण प्रसतत्रद्षत कयके
फनावाए जाते हं ।

GURUTVA KARYALAY
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 स्वप्न भं ऩारना झुराना सॊतान ऩऺ को कद्श होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩासार रेते खना आकस्स्भक धन राब
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩातार दे खना सभाज भं भान सम्भान
फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩाय तैयकय कयते दे खना भान सम्भान फढ़ने
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं त्रऩटाया दे खना धन राब सभरने का का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं त्रऩजया दे खना स्वस््म खयाफ होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं त्रऩजया खारी दे खना धन वृत्रद्ध होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं त्रऩजये भं ऩऺी दे खना गृह करेश होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩीऩर दे खना शुब सभािाय सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩीरा यॊ ग दे खना स्वास््म खयाफ होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩीठ दे खना फॊध-ु फाॊधवं से राब होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩीतर के फतान दे खना धन राब होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩीरी सयसं दे खना सफ प्रकाय से भॊगर
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩीरी त्रफल्री दे खना अशुब सभािाय सभरने
का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ऩुस्तकारम दे खना सुख-सभृसध फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩुस्तक खोते दे खना भानहासन होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩुस्तक सभरते दे खना भान सम्भान भं वृत्रद्ध
होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं ऩुजायी फनते दे खना कामा ऺेि भं उडनसत
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩुफडमा फॊधते दे खना शायीरयक कद्श फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩुयस्काय सभरते दे खना फकसी कामा भं हासन
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩुर ऩाय कयते दे खना धन राब सभरने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं ऩुर टू टते दे खना सॊकट से िुटकाया सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩूजा ऩाठ कयते दे खना सुख-शास्डत तथा
सभृत्रद्ध सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩूवज
ा दे खना सभृत्रद्ध फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩूजा मा प्राथाना कयते दे ख भानससक शास्डत
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं प्रेभ प्रस्ताव यखते दे खना त्रववाह भं त्रवरॊब
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩेड़ ऩौधे दे खना कामा ऺेि भं राब सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩेटी खोरते दे खना िोयी होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩेशाफ कयते दे खना ऩुयाने सॊकट दयू होने व
धनप्रासद्ऱ का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं ऩैय कटे दे खना शिु ऩऺ ऩय त्रवजम प्रासद्ऱ
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩैय खुजराते दे खना शीघ्र ऩय मािा जाने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ऩैफॊद रगाना कद्श सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ऩैसा सभरना भुफ्त का धन सभरने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ऩेन मा ऩंससर दे खना ऩयीऺा भं सपरता
प्राद्ऱ होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ऩोिा रगाना स्थान ऩरयवतानहोने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ऩोशाक ऩहनना फकसी फीभायी के आगभन
का सॊकेत हं ।

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 स्वप्न भं पुल्का खाते दे खना आसथाक सभृत्रद्ध के साथ
फकसी अत्रप्रम सभािाय सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं पुरझडी िूटते दे खना फकसी भाॊगसरक कामा
भं सस्म्भसरत होने सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं पुहाय ऩढ़ते दे खना धन-सभृत्रद्ध फढने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं पूरदान दे खना सभाज भं भान सम्भान
 स्वप्न भं पराहाय कयते दे खना सुख सभृत्रद्ध फढने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं पटे कऩडे दे खना धनहासन होने व सिॊताए
फढने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं फ़कीय दे खना कामा भं सपरता प्राद्ऱ होने
का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं फ़रयश्ता दे खना भनोकाभना ऩूणा होने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं पॊदा रगाए दे खना भुसीफतं से िुटकाया
सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं पपोरा टू टना भुसीफतं िुटकाया सभरने का

फढने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं पूटी आॉख दे खना शायीरयक औय आसथाक
कद्श फढने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं पूर स्खरते दे खना सॊतान सुख भं वृत्रद्ध एवॊ
प्रसडनता फढने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं पूर को जरते दे खना त्रप्रम व्मत्रि से
त्रवमोग होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं पूर की करी दे खना स्वास््म सॊफॊसधत
ऩये शासन होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं पूॊक भायना साभास्जक कामो से भान
सम्भान फढने का सॊकेत हं ।

सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं पवाया दे खना ऩुयानी भुसीफते दयू हो ने व
प्रसडनता फढने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं पाखता दे खना स्त्री से कद्श सभरे , भानससक
ग्रानता होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं पाटक दे खना कोटा -किहयी के कामा भं
सपर होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं पाटक ऩाय कयते दे खना कामा भं सपरता
सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं फपटकयी दे खना धन राब सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं पाॊसी रगाते दे खना जीवन भं नई याहे
सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं फपयोजा यत्न दे खना शिुओॊ ऩय त्रवजम प्राद्ऱ
होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं पूरवायी दे खना भनोवाॊसित त्रववाह होना एवॊ
प्रभ फढ़ने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं फतक (फतख) को ऩानी भं तैयता दे खना
शुब सभािाय सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फतख ज़भीन ऩय दे खना धन हासन होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फडदय को दे खना धन वृत्रद्ध होने व उत्तभ
बोजन सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फटन दे खना धन फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फटन रगाते दे खना सॊकट आने का सॊकेत है ।

जुराई 2012

47

 स्वप्न भं फयसात शहय भं होते दे खना िायं औय
खुशहारी फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फयसात अऩने घय भं होते दे खना सॊकट
फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फयसात भं िाता खर कय िरते दे खना
सॊकट दयू होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं फकयी िुयाते मा खोते दे खना फकसी से
रडाई-झगडे ़ होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं फाॊस दे खना कामा ऺेि भं रगाताय उडनसत
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फाज़ दे खना फकसी दघ
ा ना भं पॉसने का
ु ट
साॊकेत हं ।

 स्वप्न भं फाज़ द्राया झऩट्टा भायते दे खना उिाई से
सगयने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं फयात भं जाते दे खना अशुब सभािाय
सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं फपा खाते दे खना भानससक सिॊताए दयू होने

 स्वप्न भं फाघ दे खना शिु ऩय त्रवजम प्राद्ऱ होने का

 स्वप्न भं फपा सगयते दे खना आसथाक राब होने का

 स्वप्न भं फायहससॊघा को दे खना फकसी दयू स्थान की

का सॊकेत है ।
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं फसनए को दयवाज़े ऩय दे खना ़ज़ा भं वृत्रद्ध
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फटु आ दे खना धन राब प्राद्ऱ होने का औय
ऩुयाने योग से िुटकाया सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं फनमान ऩेहेनते दे खना धन-धाडम फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फगुरा सफ़ेद यॊ गका दे खने से ऩय राब,
कारे यं ग का दे खने ऩय हासन होने का सॊकेत है ।

सॊकेत है ।
मािा होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं फाढ़ आते दे खना सॊकटं से िुटकाया सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फाढ़ भं सघयते दे खना भाहोर खुशहार होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फाढ़ भं पॊसे रोगं को फिाते दे खना गृह
करेश फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फाढ़ के ऩानी ऩय तैयते दे खना व्माऩाय भं
सपरता सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं फधाई का सडदे श सभरते दे खना द्ु खद

 स्वप्न भं फाढ़ भं रोगं को डू फते दे खना फकसी रम्फी

 स्वप्न भं फिड़ा दे खना शुब सभािाय सभरने का

 स्वप्न भं फादर को फयसते दे खना ऩारयवारयक सुख-

सभािाय सभरने का सॊकेत है ।
सॊकेत है ।

मािा ऩय जाने का सॊकेत है ।
सभृत्रद्ध फढ़ने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं फॊदक
ू िराते दे खना शिुता सभाद्ऱ होने का

 स्वप्न भं फादर से त्रफजरी सगयते दे खना फकसी अशुब

 स्वप्न भं फार सगयते दे खना आसथाक द्रत्रद्श कभजोय

 स्वप्न भं फादर को िूते दे खना धन वृत्रद्ध होने का

सॊकेत है ।

होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फाजू काटते दे खना स्वजनो से अऩभासनत
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फाजू ऩय िोट रगाते दे खना भाता-त्रऩता को
कद्श होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं फाजू कटी हुई दे खना शिु ऩय त्रवजम प्राद्ऱ
होने का सॊकेत है ।

सभािाय की प्रासद्ऱ होने का सॊकेत है ।
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं फाज़ाय भं स्वमॊ को घूभते दे खना शुब
सभािाय सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फाजीगयी के दृष्म दे खना फकसी षडमॊि भं
पसने का सॊकेत है ।
 स्वप्न

भं

फादाभ

खाते

सभस्मा होने का सॊकेत है ।

दे खना

स्वस््म

सॊफॊसधत

जुराई 2012

48

 स्वप्न भं फादाभ दे खना धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फादशाह दे खना भान-सम्भान एवॊ धन वृत्रद्ध
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फार सय के कटे दे खना ़ज़ा से याहत
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फार स्वमॊ के कारे दे खना प्रिुय धन राब
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फार स्वमॊ के सफ़ेद दे खना सभाज भं उच्ि
स्थान की प्रासद्ऱ का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं फार कटे दे खना गृह करेश फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फार हथेरी मा तरुओॊ भं दे खना ़ज़ा भं
पसने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फार फगर के मा नासब के नीिे के अॊग के
दे खना सभाज भं अऩभासनत होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फातं असधक कयते दे खना भान-सम्भान की
प्रासद्ऱ एवॊ कामा भं वृत्रद्ध औय होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फारू दे खना धन राब होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फारू िानते दे खना आसथाक सॊकट फढ़ने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं त्रफिु जैसे बमानक जीव दे खना – धन
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं फौना दे खना शीघ्र सुख-सौबाग्म की प्रासद्ऱ
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं बबूत रगाते दे खना शीघ्र त्रववाह व गृहस्थी
का सुख भं वृत्रद्ध का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बाई को दे खना बाई फदधाामु होने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं बाबी दे खना स्वमॊ को कद्श सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बागते इॊ सान को दे खना कामा भं सॊघषा के
फाद भं राब सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं बाॊग का नशा कयते दे खना अऩनं से
अऩभासनत होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बाॊड दे खना फकसी से वाद-त्रववाद भं पॉसने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बारा रेकय िरते दे खना शिु ऩय त्रवजम
प्राद्ऱ होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बारा भायते दे खना अऩनो से अऩभासनत
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बारे के खेर का प्रदशान कयते दे खना सॊकट
मा दघ
ा ना होने का सॊकेत हं ।
ु ट

 स्वप्न भं सबडडी दे खना ऩारयवायीक सुखो भं वृत्रद्ध होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सबखायी को दे खना कामा के अनुशाय अच्िे
पर सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बीगते दे खना सुख-सभृत्रद्ध भं वृत्रद्ध होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बीख भाॊगते मा दे ते दे खना ऩारयवारयक
सुख, सॊऩत्रत्त औय सभृत्रद्ध फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बीड़ का िटना दे खना प्रिुय धन राब
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बीड़ का कटना दे खना द्ु ख सभरने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं बण्डाय दे खना बायी भािा भं धन राब होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बट्टठा दे खना बूसभ-बवन इत्माफद सॊऩत्रत्त
भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं बीड़ दे खना मा उसभे िरते दे खना कामा
अधूया यहने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बीड़ को उग्र रूऩ भं दे खना कामा भं
सपरता सभरने का सॊकेत है ।

जुराई 2012

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 स्वप्न भं बूकॊऩ दे खना तफाही आने औय

सॊकट फढ़ने

का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बूसा दे खना ऩशुओॊ से राब सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बूसभगत स्वमॊ को दे खना बमॊकय फीभायी
औय त्रवऩत्रत्त होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बेफडमा दे खना त्रवद्वाश घात होने का सॊकेत
है ।

 स्वप्न भं बेड़ को अकेरी दे खना अशुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बेड़ो को सभूह दे खना कामा भं राब होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बंसा दे खना कामा ऺेि भं सॊघषा कयने के
उऩयाॊट सपरता सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं बैस दे खना उत्तभ बोजन सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं भगय को दे खना फकसी शुब सभािाय सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भॊिी दे खना सभाज भं भान-सम्भान भं वृत्रद्ध
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भासिस जरते दे खना दश्ु भनी फढ़ने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं भारा ऩूजा की दे खना सुख-सौबाग्म की
वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं भारा पूरं की ऩहने दे खना भान-सम्भान
भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भातभ कयते दे खना खुशहारी फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भारी को दे खना घय भं सभृसध फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सभिा खाते दे खना कामा भं सपरता सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सभगॉ से ऩीफड़त दे खना फुफद्द तेज होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सभठाई खाते मा फाॉटते दे खना त्रफगडे कामा
सवयने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं भाॊस खाते दे खना भनोकाभना ऩूणा होने का

 स्वप्न भं भच्िय दे खना अऩनो से अऩभासनत होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भिरी दे खना गृहस्थ सुख भं वृत्रद्ध का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भखी दे खना धन हासन होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भकडी दे खना कफठन ऩरयश्रभ के फाद भं
सपरता सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भकान फनते दे खना भान-सम्भान भं वृत्रद्ध
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भराई खाते दे खना धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भय जाते दे खना धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भखभर ऩय फैठते दे खना रम्फी फीभायी
आमे

सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भुदाा रे जाते दे खना आकस्स्भक राब
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भुदे को स्जडदा दे खना सिॊता दयू होने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं भुदाा शयीय से आवाज़ आते दे खना फना
फनामा कामा त्रफगड़ ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भुदं का सभूह दे खना गरत कामा भं
सरग्न होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं भुदे को नहराते दे खना धन वृत्रद्ध होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भुदे को कुि दे ते हुए दे खना शुब सभािाय
सभरने का सॊकेत हं ।

जुराई 2012

50

 स्वप्न भं भुदे के साथ फैठ कय खाते दे खना शुब

 स्वप्न भं भोय को नािते दे खना शुब सभािाय सभरने

सभम के आगभन का सॊकेत हं ।

का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं भुगाा दे खना त्रवदे श व्माऩाय से राब सभरने

 स्वप्न भं भोय-भोयनी को दे खना दाॊऩत्म सुख भं वृत्रद्ध

का सॊकेत है ।

होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं भुगॉ दे खना गृहस्थ सुख भे वृत्रद्ध होने का

 स्वप्न भं भोजा ऩहने दे खना ऩसत-ऩत्नी भं प्रेभ फढ़ने

सॊकेत है ।

का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं भोहय रगाते दे खना धन वृत्रद्ध होने का
सॊकेत है ।

 स्वप्न भं भुयझामे पूर दे खना सॊतान को कद्श होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भुॊडन कयाते दे खना गृहस्थ जीवन से तनाव
दयू होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं भुहया भ भनाते दे खना व्माऩाय भं उडनत्रत्त
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भूॊगा दे खना कायोफाय भं उडनत्रत्त होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भूॊग, भसूय मा भोठ(भठ) दे खना त्रवसबडन
ऩये शानीमं से ग्रस्त होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भोिी को दे खना मािा राबदामक होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भोभ दे खना फकसी के साथ झगडे मा त्रववाद
भं सभझोता होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भोभफत्ती दे खना शीघ्र त्रववाह होने व दाॊऩत्म

 स्वप्न भं मडि दे खना अशुब पर सभरने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं मऻ दे खना धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं मभयाज को दे खना ऩुयानी फीभायी दयू होने
का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं मोजना फनाते दे खना अशुब सॊकेत है ।
 स्वप्न भं मोगासन कयते दे खना शुब सॊकेत है ।

सुख भं फृत्रद्ध का सॊकेत है ।

बाग्म रक्ष्भी फदब्फी
सुख-शास्डत-सभृत्रद्ध की प्रासद्ऱ के सरमे बाग्म रक्ष्भी फदब्फी :- स्जस्से धन प्रसद्ऱ, त्रववाह मोग,
व्माऩाय वृत्रद्ध, वशीकयण, कोटा किेयी के कामा, बूतप्रेत फाधा, भायण, सम्भोहन, तास्डिक
फाधा, शिु बम, िोय बम जेसी अनेक ऩये शासनमो से यऺा होसत है औय घय भे सुख सभृत्रद्ध
फक प्रासद्ऱ होसत है , बाग्म रक्ष्भी फदब्फी भे रघु श्री फ़र, हस्तजोडी (हाथा जोडी), ससमाय
ससडगी, त्रफस्ल्र नार, शॊख, कारी-सफ़ेद-रार गुॊजा, इडद्र जार, भाम जार, ऩातार तुभडी
जेसी अनेक दर
ा साभग्री होती है ।
ु ब

भूल्म:- Rs. 910 से Rs. 8200 तक उप्रब्द्ध

गुरुत्व कामाारम सॊऩका : 91+ 9338213418, 91+ 9238328785
c

जुराई 2012

51

 स्वप्न भं यसोई घय स्वि दे खना आसथाक सॊकट होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं यास्ता साप दे खना नौकयी भं तयक्की
सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं यास्ता टे ड़ा भेडा दे खना कामा भं ऩये शानी
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं याख दे खना धन नाश होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं यॉकेट दे खना धन-सॊऩत्रत्त की वृत्रद्ध होने का
 स्वप्न भं यजाई ओढ़े दे खना धन राब सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं यजाई नई फनवाते दे खना स्थान ऩरयवतान
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं यजाई पटी मा ऩुयानी दे खना दे खना शुब
कामा के शासभर होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं यस्सी रऩेटते दे खना सपरता सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं यथ दे खना मािा ऩय जाने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं यसबयी खाते दे खना शीध्र त्रववाह होने औय
दाॊऩत्म सुख भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं यसगुल्रा खाते दे खना धन वृत्रद्ध होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं यद्दी दे खना रुका हुआ धन सभरने का सॊकेत
है ।

 स्वप्न भं यॊ ग कयते दे खना फकसी वस्तु की हासन होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं यऺा कयते दे खना भान-सम्भान भं वृत्रद्ध
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं यपू कयते दे खना नमे वस्त्र-आबूषण की
प्रासद्ऱ होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं यऺा फॊधन होते दे खना धन वृत्रद्ध होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं यसोई घय गडदा दे खना अच्िा बोजन
सभरने का सॊकेत है ।

सॊकेत है ।

 स्वप्न भं यात दे खना ऩये शानीमाॊ फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं याइ दे खना कामा भं रूकावट होने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं याऺश दे खना सॊकट ग्रस्त होने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं याभरीरा होते दे खना सुख सौबाग्म की
वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रयद्वत रेते दे खना सतका यहने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रयक्शा दे खना मा उसभे फैठना प्रसडत्ता फढ़ने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ये रवे स्टे शन दे खना मािा राबदामक होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ये र गाडी़ दे खना कद्श दामक मािा होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ये फडमो फजते दे खना प्रगसत भं रूकावट होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ये फिस्जयटय दे खना आसथाक राब प्राद्ऱ होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ये सगस्तान दे खना धन सम्ऩदा भं वृत्रद्ध होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं योजा यखते दे खना आसथाक सॊकट आने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं योना भान सम्भान भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत
है ।

जुराई 2012

52

 स्वप्न भं योशनदान से झाॊक कय दे खना त्रवदे श से
धन की प्रासद्ऱ होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं योटी खाते मा ऩकाते दे खना फीभायी के
आगभन का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं योटी फाॉटते दे खना धन राब सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं योटी पंकते मा सगयते दे खना शीघ्र दयू स्थ
मािा होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं रगाभ दे खना धन वृत्रद्ध औय भान-सम्भान
फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रक्ष्भी का सिि दे खना धन-सुख सौबाग्म
की वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रहसुन दे खना

धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत

है ।
 स्वप्न भं रक्कड़ फाघ दे खना नमी भुसीफतं आने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रार आॉखे दे खना शुब पर सभरने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रारटे न जरते दे खना िरते हुए कामा भं
त्रवघ्न आने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं रारटे न फुझते दे खना अनेक सभस्माओॊ का
अॊत होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं राठी दे खना सभिं से सहमोग एवॊ सुख
 स्वप्न भं रॊगय खाते दे खना धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं रॊगूय को दे खना फकसी शुब सभािाय सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रॊगोटी दे खना आसथाक सॊकट फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रकीय खीॊिते दे खना गृह करेश फढ़ने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रटकते हुए दे खना सोिा हुआ कामा शीघ्र
सम्ऩडन होने औय धन-सभृत्रद्ध फढ़ने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं अऩने रड़के को गोद भं दे खना व्माऩाय धन
वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं अडम के रड़के को गोद भं दे खना कामा
ऺेि भं ऩये शानी औय घय भं करेश होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रड़ना त्रवद्रोफहमं के साथ दे श-सभाज भं
अशाॊसत पैरने का सॊकेत है ।

शाॊसत भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रार टीका दे खना कामा भं सपरता सभरने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रार वस्त्र दे खना धन नाश होने का सॊकेत
है ।
 स्वप्न भं रार आकाश भं दे खना रडाई-झगडा फढ़ना
आसथाक नुक्शान होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं सरपापा खोरते दे खना सभाज भं भानहासन
होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रोहा दे खना कफठन भेहनत कयने के फाद
सपरता सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रोहाय दे खना शिु से त्रवजम प्रासद्ऱ एवॊ
साभास्जक भान सम्भान फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रोत्रफमा खाते दे खना धन वृत्रद्ध होने का
सॊकेत है ।
 स्वप्न भं रौकी दे खना शुब सभािाय एवॊ धन वृत्रद्ध
होने का सॊकेत है ।

जुराई 2012

53

 स्वप्न भं वीणा अडम को फजाते दे खना शोक सभायोह
भं शासभर होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं वृद्धा दे खना अशुब सभािाय सभरने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं वकीर को कामा ऺेि भं कफठनाई फढ़ने औय
फकसी से झगडा होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं वेतन ऩाना कामा भं असपरता एवॊ धनहासन
होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं वयभारा दे खना त्रप्रमजनो से करेश होने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न

भं

वसीमत

कयते

दे खना

बूसभ-सॊऩत्रत्त

से

सम्फडधी वाद-त्रववाद होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न

भं

वामदा

कयते

दे खना

झूठ

फोरने

का

अभ्मासी होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं वासनाश घय की वस्तुओॊ रगाते दे खना
ऩरयवाय ऩय सॊकट आने एवॊ स्वास््म खयाफ होने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं वाष्ऩ उड़ते दे खना धनहासन, दघ
ा ना तथा
ु ट
शायीरयक कद्श सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं त्रवदाई सभायोह भं बाग रेते दे खना व्माऩाय
भं तेजी एवॊ धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं त्रवभान दे खना धन हासन होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं त्रवयासत राते दे खना व्माऩाय भं हासन होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं त्रवस्पोट होते दे खना मा सुनना नमा
योजगाय भं सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं त्रवऻाऩन ऩढते दे खना धोखा मा िोयी होने
का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं वीणा स्वमॊ को फजाते दे खना धन-धाडम
तथा सभृत्रद्ध प्राद्ऱ होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं शॊख फजाते दे खना मा सुनना शुब सभािाय
सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं शयफत दे खना फीभायी से िुटकाया सभरने
का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं शतयॊ ज दे खना सभम व्मथा भं फफााद होने
का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं शयाफ दे खना आकस्स्भक धन राब सभरने
का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं शयाफ ऩीते दे खना धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत
हं ।
 स्वप्न भं शहद की भक्खी दे खना धन वृत्रद्ध होने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं शहद दे खना शुब कामो भं रूसि फढ़ने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं शहतूत दे खना उत्तभ बोजन सभरने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं शहनाई फजाते दे खना अशुब सभािाय
सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं शभशान ऩय जाते दे खना फदधाामु होने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं शयीय ऩय िादय रऩेटना -गृह क्रेश फढ़ने
का सॊकेत है ।

जुराई 2012

54

 स्वप्न भं शहय की ओय जाना धन वृत्रद्ध होने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं श्रृग
ॊ ाय कयते दे खना प्रेभ प्रसॊगं भं उडनसत
होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं शहय का त्रवनाश होते दे खना अऩना सनवास
स्थान िोड़ने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं श्रृग
ॊ ाय दान टू टते दे हना दाॊऩत्म जीवन भं
सुख एवॊ सपरता सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं शव के साथ िरते दे खना बाग्म वृत्रद्ध होने
का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं शयीय की भासरश कयते दे खना योग फढ़ने
का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं शासभमाना दे खना धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं श्राद्ध कयते दे खना शुब सभम आने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं शार ओढ़े दे खना सभाज भं अऩमश सभरने
का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं स्माही दे खना सयकाय से भान-सम्भान

 स्वप्न भं शाका भिरी दे खना त्रवदे श मािा होने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं स्टौव जरते दे खना उत्तभ बोजन सभरने का

 स्वप्न भं सशकाय कयते दे खना ऩरयवाय ऩय सॊकट आने
का सॊकेत हं ।

सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सॊगीत सुनना कद्श फढ़ने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं शीशा दे खना योग ग्रस्त होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं शीशा तोड़ते दे खना ऩये शानीमाॊ फढ़ने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं शेय दे खना शिु ऩय त्रवजम होने का सॊकेत
हं ।

 स्वप्न भं सॊदक
दे खना आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ एवॊ

दाॊऩत्म जीवन भं खुसशमाॊ सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सजा मा हुवा ऩाना दे खना सॊकटं से
िुटकाया सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सट्टा खेरते दे खना धोखा सभरने का सॊकेत

 स्वप्न भं शोक भगन होते दे खना घय भं भाॊगसरक
कामा का आमोजन होने का सॊकेत हं ।

हं ।
 स्वप्न भं सराद खाते दे खना धन वृत्रद्ध होने का

 स्वप्न भं शौिारम दे खना धन वृत्रद्ध होने का सॊकेत
हं ।

सभरने का सॊकेत हं ।

सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सकास दे खना असधक ऩरयश्रभ के उऩयाॊत

प्रद्ल कुण्डरी से अऩने फकसी बी प्रद्लं का स्स्टक उत्तय प्राद्ऱ फकस्जए।
क्मा आऩ अत्माधुसनक ज्मोसतष प्रणारी से अऩने बत्रवष्म से सॊफॊसधत प्रश्नो का स्स्टक उत्तय प्राद्ऱ कयना िाहते हं तो
आऩ गुरुत्व कामाारम भं सॊऩका कय सकते हं । हभाये प्रद्ल ज्मोसतष त्रवशेऻ आऩके द्राया ऩूिे गमे प्रद्ल का ग्रहं के अधाय
ऩय उनकी सूक्ष्भ गणना कय उसके स्स्टक परादे श से आऩको अवगत कयाने का प्रमास कयं गे। 3 प्रद्ल भाि :550

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जुराई 2012

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सपरता सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सभायोह दे खना ऩये शानी फढ़ने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं सयसं का साग खाते दे खना ऩुयानी फीभायी
दयू होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं ससुयार जाते दे खना गृह करेश फढ़ने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सयसं दे खना व्माऩाय भं राब होने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सभुद्र ऩाय कयते दे खना उडनत्रत्त होने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं ससुय दे खना शुब सभािाय सभरने का सॊकेत
हं ।

 स्वप्न भं साइफकर दे खना कामा भं सपरता सभरने
का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सय कटा दे खना त्रवदे श मािा राबदामक

 स्वप्न भं साइफकर िराते दे खना कामा भं उडनसत

 स्वप्न भं सय पटा दे खना कामा भं हासन होने का

 स्वप्न भं साइन फोडा दे खना व्माऩाय भं राब होने का

होने का सॊकेत हं ।
सॊकेत हं ।

सभरने का सॊकेत हं ।
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सय भुॊडाते दे खना गृह करेश भं वृत्रद्ध होने
का सॊकेत हं ।

सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सय के फार झड़ते दे खना ़ज़ा से भुत्रि
सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सावन आते दे खना जीवन भं ऽुशहासर
 स्वप्न भं साडी दे खना शीघ्र त्रववाह होने एवॊ दाम्ऩत्म
सुख भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत हं ।

भॊि ससद्ध स्पफटक श्री मॊि
"श्री मॊि" सफसे भहत्वऩूणा एवॊ शत्रिशारी मॊि है । "श्री मॊि" को मॊि याज कहा जाता है क्मोफक मह अत्मडत शुब फ़रदमी मॊि

है । जो न केवर दस
ू ये मडिो से असधक से असधक राब दे ने भे सभथा है एवॊ सॊसाय के हय व्मत्रि के सरए पामदे भॊद सात्रफत होता

है । ऩूणा प्राण-प्रसतत्रद्षत एवॊ ऩूणा िैतडम मुि "श्री मॊि" स्जस व्मत्रि के घय भे होता है उसके सरमे "श्री मॊि" अत्मडत फ़रदामी
ससद्ध होता है उसके दशान भाि से अन-सगनत राब एवॊ सुख की प्रासद्ऱ होसत है । "श्री मॊि" भे सभाई अफद्रसतम एवॊ अद्रश्म शत्रि
भनुष्म की सभस्त शुब इच्िाओॊ को ऩूया कयने भे सभथा होसत है । स्जस्से उसका जीवन से हताशा औय सनयाशा दयू होकय वह
भनुष्म असफ़रता से सफ़रता फक औय सनयडतय गसत कयने रगता है एवॊ उसे जीवन भे सभस्त बौसतक सुखो फक प्रासद्ऱ होसत
है । "श्री मॊि" भनुष्म जीवन भं उत्ऩडन होने वारी सभस्मा-फाधा एवॊ नकायात्भक उजाा को दयू कय सकायत्भक उजाा का
सनभााण कयने भे सभथा है । "श्री मॊि" की स्थाऩन से घय मा व्माऩाय के स्थान ऩय स्थात्रऩत कयने से वास्तु दोष म वास्तु से
सम्फस्डधत ऩये शासन भे डमुनता आसत है व सुख-सभृत्रद्ध, शाॊसत एवॊ ऐद्वमा फक प्रसद्ऱ होती है ।

गुरुत्व कामाारम भे "श्री मॊि" 12 ग्राभ से 2250 Gram (2.25Kg) तक फक साइज भे उप्रब्ध है

.

भूल्म:- प्रसत ग्राभ Rs. 9.10 से Rs.28.00

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जुराई 2012

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 स्वप्न भं सायस ऩस्ऺको दे खना धन वृत्रद्ध होने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सारा-सारी दे खना दाम्ऩत्म जीवन भं सुखधनवृत्रद्ध होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सागय को सूखते दे खना फीभायी के आगभन
एवॊ अकार ऩड़ने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सायॊ गी फजते दे खना अऩमश सभरने औय
धन हासन होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं साग (सस्ब्ज़माॊ) दे खना अनावश्मक त्रववाद
होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं ससगये ट ऩीते दे खना व्मथा भं स्वास््म
सभस्मा एवॊ धन फफााद होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ससराई दे खना सभाज भं भान-सम्भान फढ़ने
का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ससराई भशीन दे खना ऩसत-ऩत्नी के त्रफि भं
झगडा होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ससराई कयते खना त्रफगडा कामा फनने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं ससप्ऩीमाॊ ऩय हासन रेफकन उठाने ऩय राब
सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं साफुन दे खना फीभायी दयू होने औय स्वास््म

 स्वप्न भं ससमाय दे खना फीभायी के आगभन एवॊ धन

 स्वप्न भं साॊऩ मा बमानक जीव दे खना धन राब

 स्वप्न भं ससडदयू दे खना दघ
ा ना ग्रस्त होने का सॊकेत
ु ट

राब होने का सॊकेत हं ।
सभरने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं साॊऩ भायते मा ऩकड़ते दे खना शिु ऩय
त्रवजम सभरने औय आकस्स्भक धन राब सभरने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं साॊऩ से डय जाना फॊधु-फाॊधव से त्रवद्वासघात
होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं साॊऩ से फातं कयते दे खना शिु से राब
सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं साॊऩ नेवरे की रडाई होते दे खना कोटा किेहयी के कामा भं पसने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं साॊऩ के दाॊत दे खना फकसी रयश्तेदाय के
कायण कद्श सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं साॊऩ को ित्त से सगयते दे खना घय भं
फीभायी आने, कोटा -किहयी के कामा भं हासन होने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं साॊऩ का भाॊस दे खना प्रिुय धन राब सभरने
के फाद खिा हो जाने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ससऩाही को दे खना असाभस्जक एवॊ अवैध
कामा से हासन होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ससनेभा दे खना सभम व्मथा भं नद्श होने का
सॊकेत हं ।

हासन होने का सॊकेत हं ।
हं ।

 स्वप्न

भं

ससडदयू

दे वी-दे वता

ऩय

िढ़ाते

दे खना

भनोकाभना ऩूणा होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सीतापर दे खना ऩरयश्रभ के उऩयाॊत धन
राब होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सीभा ऩाय कयते दे खना त्रवदे श व्माऩाय से
राब होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सीतापर दे खना स्वास््म राब होने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न

भं

सीना

िौडा

होते

दे खना

साभास्जक

रोकत्रप्रमता भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सीड़ी ऩय िढ़ते दे खना कामा भं असपरता
सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सुतरी यस्सी को कभय भं फॊधे दे खना
गयीफी के आगभन कामा ऺेि भं सॊघषा फढ़ने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सुदशान िक्र दे खना अनैसतक कामा का दॊ ड
शीघ्र सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सुऩायी दे खना शीघ्र त्रववाह होने औय
वैवाफहक सुख फढ़ने का सॊकेत हं ।

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 स्वप्न भं सुनहया यॊ ग दे खना रुका हुआ धन सभरने
का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सुयॊग दे खना नमा कामा आयॊ ब होने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सूद दे ते दे खना धन हासन होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सूरी ऩय िढ़ते दे खना शुब सभािाय सभरने
औय सिडताओ से भुत्रि होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सूमा को दे खना धन सॊऩत्रत्त, भान सम्भान

 स्वप्न भं सूई एक दे खने ऩय सुख तथा असधक दे खने
ऩय कद्श भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत हं ।

फढ़ने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सूमा की तयह स्वमॊ का िेहया िभकते

 स्वप्न भं सुरगती अस्ग्न दे खना शुब सभािाय सभरने

दे खना सभाज भं भान सम्भान फढ़ने का सॊकेत हं ।

का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सूअय दे खना फुये रोगं की सॊगसत होने औय

सम्भान की हासन होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सूअय का दध
ू ऩीते दे खना िरयि खयाफ होने

 स्वप्न भं सुडदय स्त्री को दे खना साभास्जक भान
 स्वप्न भं सुनहयी धूऩ स्खरी दे खना सयकाय से धन
राब एवॊ साभस्जक भान सम्भान फढ़ने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सुयाही (धड़ा मा जग) दे खना योग से

िुटकाया रेफकन गृहस्थ जीवन भं तनाव होने का
सॊकेत हं ।

भानहासन होने का सॊकेत हं ।

एवॊ सयकाय से दॊ ड सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सूयजभुखी का पूर दे खना सॊकट आने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सूम-ा िडद्र आफद ग्रहं का त्रवनाश होते दे खना
भृत्मु तुल्म कद्श सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सुगॊध भहसूस कयते दे खना त्विा योग के
आगभन का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सेभ की परी दे खना धन हासन होने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सुनसान जगह दे खना फरवृत्रद्ध होने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सेफ दे खना द्ु ख के फाद सुख प्राद्ऱ होने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सूद रेते दे खना धन राब सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं संध रगाते दे खना फहुभूल्म वस्तु के खोने

दग
ु ाा फीसा मॊि

शास्त्रोि भत के अनुशाय दग
ु ाा फीसा मॊि दब
ु ााग्म को दयू कय व्मत्रि के सोमे हुवे बाग्म को जगाने वारा भाना

गमा हं । दग
ु ाा फीसा मॊि द्राया व्मत्रि को जीवन भं धन से सॊफॊसधत सॊस्माओॊ भं राब प्राद्ऱ होता हं । जो व्मत्रि

आसथाक सभस्मासे ऩये शान हं, वह व्मत्रि मफद नवयािं भं प्राण प्रसतत्रद्षत फकमा गमा दग
ु ाा फीसा मॊि को
स्थासद्ऱ कय रेता हं , तो उसकी धन, योजगाय एवॊ व्मवसाम से सॊफॊधी सबी सभस्मं का शीघ्र ही अॊत होने रगता
हं । नवयाि के फदनो भं प्राण प्रसतत्रद्षत दग
ु ाा फीसा मॊि को अऩने घय-दक
ु ान-ओफपस-पैक्टयी भं स्थात्रऩत कयने
से त्रवशेष राब प्राद्ऱ होता हं , व्मत्रि शीघ्र ही अऩने व्माऩाय भं वृत्रद्ध एवॊ अऩनी आसथाक स्स्थती भं सुधाय होता
दे खंगे। सॊऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एवॊ ऩूणा िैतडम दग
ु ाा फीसा मॊि को शुब भुहूता भं अऩने घय-दक
ु ान-ओफपस भं
स्थात्रऩत कयने से त्रवशेष राब प्राद्ऱ होता हं ।

भूल्म: Rs.730 से Rs.10900 तक

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का सॊकेत हं ।

सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सेवा कयते कयना ऩरयश्रभ का पर शीघ्र
सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सोरह श्रृग
ॊ ाय दे खना स्वास््म खयाफ होने
का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सेवा कयवाते दे खना स्वास््म खयाफ होने
का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सेहया फॊधते दे खना दाम्ऩत्म जीवन भं
करेश फढ़ने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सैसनक दे खना फर औय साहस भं वृत्रद्ध होने
का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं संठ खाते दे खना स्वास््म भं सुधाय रेफकन
धन हासन होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सोना दे खना ऩरयवाय भं फीभायी फढ़ने औय
धन हासन होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सोना सभरते दे खना धन वृत्रद्ध होने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हड्डी दे खना स्वास््म राब एवॊ शुब
सभािाय सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं हरयमारी दे खना भन की प्रसडनता फढ़़ने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सोना दस
ु ये को दे ते दे खना अऩने कामा का

 स्वप्न भं हल्दी की गाॉठ दे खना आसथाक राब होने का

 स्वप्न भं सोना रुटाते दे खना ऩये शासनमा फढ़ने का

 स्वप्न भं हल्दी ऩीसी दे खना ऩये शानी फढ़़ने का सॊकेत

राब दस
ू यं को सभरने का सॊकेत हं ।
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सोना सगयवी यखते दे खना स्वजनो से
अऩभान होने का सॊकेत हं ।

सॊकेत हं ।
हं ।
 स्वप्न भं हवा भं उड़ते दे खना

मािा भं कद्श होने का

सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं सोते हुए दे खना धन हासन मा िोयी का का

 स्वप्न भं हवा तेजी से िरते दे खना दख
ु ो भं वृत्रद्ध

 स्वप्न भं सोते हुए शेय को दे खना कामा भं सपरता

 स्वप्न भं हवा भध्मभ िरते दे खना शिु से हासन होने

सॊकेत हं ।

गणेश रक्ष्भी मॊि:

प्राण-प्रसतत्रद्षत गणेश रक्ष्भी

मॊि को अऩने घय-दक
ु ान-ओफपस-पैक्टयी भं ऩूजन स्थान,
गल्रा मा अरभायी भं स्थात्रऩत कयने व्माऩाय भं त्रवशेष
राब प्राद्ऱ होता हं । मॊि के प्रबाव से बाग्म भं उडनसत,
भान-प्रसतद्षा एवॊ

व्माऩय भं वृत्रद्ध होती हं एवॊ आसथाक

स्स्थभं सुधाय होता हं । गणेश रक्ष्भी मॊि को स्थात्रऩत
कयने से बगवान गणेश औय दे वी रक्ष्भी का सॊमुि
आशीवााद प्राद्ऱ होता हं ।

Rs.550 से Rs.8200 तक

होने का सॊकेत हं ।
का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हथकडी दे खना ऩये शासनमाॊ फढ़ने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं हथेरी ऩुरुष की दे खना शिुता फढ़ने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं हथेरी स्त्री की दे खना प्माय फढ़ने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं हवेरी दे खना स्वजन से त्रवमोग होने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं हकीभ को दे खना फीभायी फढ़ने औय ऻान
वृत्रद्ध का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं हुॊकाय सुनना शिु से ऩयाजम होने का सॊकेत हं ।

जुराई 2012

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 स्वप्न भं हत्मा होते दे खना दीघाामु होने का सॊकेत
रेफकन शिु से सावधान यहने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं हत्मा स्वमॊ को कयते दे खना रडाई झगडा
से शाॊसत सभरने के सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हाथ कटा हुआ दे खना रडाई-झगडे ़ भं हासन
होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हाथ ऩय सििकायी दे खना आजीत्रवका के
सरए सॊघषा होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हया यॊ ग दे खना सुख शास्डत भं वृत्रद्ध होने
का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हाथ धोना कामा भं असपरता एवॊ त्रवरॊफ
होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हया धसनमा दे खना मािा ऩय जाने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं हथौडा दे खना सभाज भं सम्भान सभरने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हाथ फॊधे दे खना फुये काभ का फुया पर
सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हाथी दे खना सॊतान सुख सभर ने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हजाभत होते दे खना ठगे जाने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हाथी की सवायी कयते दे खना सयकाय से

 स्वप्न भं हज कयते दे खना भनोकाभना ऩूणा होने का

राब एवॊ सभाज भं भान सम्भान फढ़ने का सॊकेत हं ।

सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हाथी को भस्त होते दे खना धनवृत्रद्ध होने

 स्वप्न भं हभरा होते दे खना दघ
ा ना होने का सॊकेत हं ।
ु ट

का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हरवाई की दक
ू ान दे खना इच्िाए अधूयी

 स्वप्न भं फहसाफ-फकताफ रगाते दे खना अनावश्मक

 स्वप्न भं हवाई जहाज़ दे खना व्माऩाय भं असधक राब

 स्वप्न भं फहयन दे खना शीघ्र त्रववाह एवॊ कामा भं

यहने का सॊकेत हं ।
होने का सॊकेत हं ।

सपरता सभरने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हॉ सना अकायण ऩये शानी फढ़ने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं हसती स्त्री दे खना गृह करेश फढ़ने का
सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं फहभऩात दे खना त्रफगडे कामा फनने का एवॊ
धन की प्रासद्ऱ होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं फहभखॊड दे खना फकसी स्वजन से धोखा

 स्वप्न भं दस
ू यं को हसाते दे खना भनोकाभना ऩूणा
होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं हसुरी दे खना जीवन भं आनॊद फढ़ने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं हाथ दे खना सभिं से भुराकात होने का
सॊकेत हं ।

खिा होने का सॊकेत हं ।

सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं हीया दे खना सॊघषा से धन वृत्रद्ध होने का
सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं हुक्का ऩीते दे खना नमे रोगं से सभिता
होने का सॊकेत हं ।

 स्वप्न भं होटर दे खना कामा भं रुकावट एवॊ धन की
सभस्मा होने का सॊकेत हं ।

प्रद्ल कुण्डरी से अऩने फकसी बी प्रद्लं का स्स्टक उत्तय प्राद्ऱ फकस्जए।
क्मा आऩ अत्माधुसनक ज्मोसतष प्रणारी से अऩने बत्रवष्म से सॊफॊसधत प्रश्नो का स्स्टक उत्तय प्राद्ऱ कयना िाहते हं तो
आऩ गुरुत्व कामाारम भं सॊऩका कय सकते हं । हभाये प्रद्ल ज्मोसतष त्रवशेऻ आऩके द्राया ऩूिे गमे प्रद्ल का ग्रहं के अधाय
ऩय उनकी सूक्ष्भ गणना कय उसके स्स्टक परादे श से आऩको अवगत कयाने का प्रमास कयं गे। 3 प्रद्ल भाि :550

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60

जुराई 2012

स्वप्न भं दे वी-दे वता के दशान

 सॊदीऩ शभाा
 स्वप्न भं भॊफदय भं ऩुजायी दे खना करेश फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं धासभाक ऩुस्तक दे खना धासभाक कामो भं रूसि फढ़ने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं भॊि जऩ कयना फकसी कामा भं त्रवजम प्राद्ऱ होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दे वी-दे वता से भॊि प्राद्ऱ होते दे खना फकसी कामा भं सपरता सभरने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं दे वी-दे वता के दशान होना

सुख सॊऩत्रत्त की वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।

 स्वप्न भं श्री कृ ष्ण के दशान प्रेभ सॊफॊधो भं वृत्रद्ध का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं श्री याभ के दशान कामा भं सपरता सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं सशवजी के दशान भन की शाॊसत फढने औय सुखो भं वृत्रद्ध होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं श्री त्रवष्णु के दशान कामा भं सपरता सभरने औय जीवन भं बौसतक सुख साधन प्राद्ऱ का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं ब्रह्मा जी के दशान शुब सभम के आगभन का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं हनुभान जी के दशान शिुओॊ से त्रवजम प्राद्ऱ होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं भाॉ दग
ु ाा के दशान सभस्त योग, शोक के नाश होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं दे वी सीता के दशान कामा भं जीवन भं कद्श के फाद सपरता सभरने औय साभास्जक भान सम्भान
फढ़ने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं याधा जी के दशान शायीरयक सौदमा एवॊ सुख भं वृत्रद्ध होने का साॊकेत हं ।
 स्वप्न भं दे वी रक्ष्भी के दशान धन-धाडम एवॊ ऐद्वमा की प्रासद्ऱ होने का साॊकेत हं ।
 स्वप्न भं दे वी सयस्वती के दशान ऻान वृफद्दह एवॊ उज्जवर बत्रवष्म का साॊकेत हं ।
 स्वप्न भं दे वी ऩावाती के दशान कामा भं सपरता औय सुख सभृसध फढ़ने का साॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नायद जी के दशान फकसी शुब सभािाय सभरने का सॊकेत हं ।

अडम धभं के प्रसतक एवॊ आयाध्म के स्वप्न
 स्वप्न भं धासभाक स्थर दे खना कामा भं धन सभरने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं गुरुद्राया दे खना ऻान की प्रासद्ऱ होने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं भस्स्जद सभस्मा का सभाधान सभरने एवॊ खुशहारी फढ़ने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं नभाज़ ऩढ़ते दे खना ऩुयाने कद्श दयू हो कय सुख-शास्डत प्राद्ऱ होने का सॊकेत है ।
 स्वप्न भं ििा दे खना भानससक शाॊसत फढ़ने का सॊकेत हं ।
 स्वप्न भं धभा ग्रडथ दे खना ऻान भं वृत्रद्ध एवॊ कामा भं सॊघषा के फाद सपरता सभरने का सॊकेत हं ।

61

जुराई 2012

बगवान भहावीय की भाता त्रिशरा के 16 अद्भत
ु स्वप्न

 स्वस्स्तक.ऎन.जोशी
जैन धभा के 24वे तीथंकय बगवान भहावीय के
जडभ से ऩूवा आषाढ़ शुक्र षद्षी के फदन उनकी भाता
त्रिशरा नगय भं हो यही अद्बुत घटना के फाये भं सोि
यही थीॊ। भाता त्रिशरा उसी फाये भं सोिते-सोिते गहयी

3.
यानी को तीसये स्वप्न भं सपेद यॊ ग औय रार फारं वारा
ससॊह फदखाई फदमा था।
ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे

नीॊद भं सो गई। उसी यात्रि के अॊसतभ प्रहय भं भाता

कहाॊ वह ऩुि ससॊह के सभान फरशारी होगा।

जागने ऩय यानी त्रिशरा ने भहायाज ससद्धाथा से अऩने

4.

त्रिशरा ने सोरह शुब एवॊ भॊगरकायी स्वप्न दे खे। नीॊद से

सोहर स्वप्न के त्रवषम भं ििाा की औय उसका पर
जानने की इच्िा प्रकट की।
तफ भहायाजा ससद्धाथा ने भहायानी त्रिशरा द्राया
दे खे गए सऩनं की त्रवस्तृत जानकायी ज्मोसतष त्रवद्रानोकं
दी, तफ त्रवद्रानं ने कहाॊ भहायाज भहायानी ने स्वप्न भं
भॊगरभम प्रसतको के दशान फकए हं ।
त्रवद्रानं ने यानी से कहा फक वह एक-एक कय
अऩने साये स्वप्न फताएॊ, स्जससे उसी प्रकाय उसका पर
फताते गए। तफ भहायानी त्रिशरा ने अऩने साये स्वप्न
उडहं एक-एक कय त्रवस्ताय से सुनाएॊ जो इस प्रकाय हं ..

यानी को िौथे स्वप्न भं कभर आसन ऩय त्रवयाजभान
रक्ष्भी का असबषेक कयते हुए दो हाथी फदखाई फदमे थे।

ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे
कहाॊ दे वरोक से दे वगण आकय उस ऩुि का असबषेक
कयं गे।

5.
यानी को ऩाॊिवं स्वप्न भं दो सुगॊसधत ऩुष्ऩभाराएॊ फदखाई
दी थी।
ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे
कहाॊ वह ऩुि धभा प्रिायक होगा औय जन-जन के सरए
कल्माणकायी होगा।

6.

1.
यानी को ऩहरे स्वप्न भं एक असत त्रवशार सपेद यॊ ग का
हाथी फदखाई फदमा था।
ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे
कहाॊ उनके घय एक अद्भत
ु ऩुि यत्न उत्ऩडन होगा।

यानी को िठे स्वप्न भं ऩूणा िॊद्रभा फदखाई फदमा था।
ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे
कहाॊ उसके जडभ से तीनं रोक आनॊफदत हंगे औय वह
िॊद्रभा के सभान शीतर व सौम्म होगा।

7.
2.

यानी को सातवं स्वप्न भं उदम होता सूमा फदखाई फदमा

यानी को दस
ू ये स्वप्न भं एक सपेद यॊ ग का वृषब फदखाई

था।

ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे

कहाॊ वह ऩुि सूमा के सभान तेजमुि ियौ औय ऻान का

फदमा था।

कहाॊ वह ऩुि सॊसाय का कल्माण कयने वारा होगा।

ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे
प्रकाश पैराने वारा होगा।

62

8.
यानी को आठवं स्वप्न भं कभर ऩिं से ढॊ के हुए दो
स्वणा करश फदखाई फदमे थे।

ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे

जुराई 2012

ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे
कहाॊ ऩुि याज्म का स्वाभी औय प्रजा का फहतसिॊतक
होगा।

कहाॊ वह ऩुि अनेक सनसधमं का स्वाभी होगा।

13.

9.

ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे

यानी को नौवं स्वप्न भं सयोवय भं क्रीड़ा कयती दो
भिसरमाॊ फदखाई दी थी।
ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे

यानी को तेयहवं स्वप्न भं दे व त्रवभान फदखाई फदमा था।
कहाॊ इस जडभ से ऩूवा वह ऩुि स्वगा का दे वता होगा।

14.

कहाॊ वह ऩुि भहाआनॊद का दाता, दख
ु ीका दख
ु हताा होगा।

यानी को िौदहवं स्वप्न भं ऩृ्वी को बेद कय सनकरता

10.

ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे

यानी को दसवं स्वप्न भं कभरं से बया सयोवय फदखाई
फदमा था।

नागं के याजा नागेडद्र का त्रवभान फदखाई फदमा था।
कहाॊ वह ऩुि जडभ से ही त्रिकारदशॉ होगा।

ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे

15.

ससॊहासन त्रवयाजभान होगा।

ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे

कहाॊ वह ऩुि शुब रऺणं से मुि एवॊ कभराकाय

यानी को ऩडद्रहवं स्वप्न भं यत्नं का ढे य फदखाई फदमा था।
कहाॊ वह ऩुि अनॊत गुणं से सॊऩडन होगा।

11.
यानी को ग्मायहवं स्वप्न भं रहयं उिारता सभुद्र फदखाई
फदमा था।
ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे

16.
यानी को सोरहवं स्वप्न भं धुआॊयफहत अस्ग्न फदखाई दी
थी।

कहाॊ ऩुि बूत-बत्रवष्म-वताभान का ऻाता होगा।

ज्मोसतष शास्त्र के त्रवद्रानं ने स्वप्न का पर फताते हुवे

12.

(सनवााण) को प्राद्ऱ होगा।

यानी को फायहवं स्वप्न भं हीये -भोती औय यत्नजस़्डत स्वणा

कहाॊ वह ऩुि साॊसारयक कभं का अॊत कयके भोऺ

ससॊहासन फदखाई फदमा था।

सॊऩूणा प्राणप्रसतत्रद्षत 22 गेज शुद्ध स्टीर भं सनसभात अखॊफडत

ऩुरुषाकाय शसन मॊि

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जुराई 2012

64

गुरु ऩुष्माभृत मोग

 सिॊतन जोशी
हय फदन फदरने वारे नऺि भे ऩुष्म नऺि बी एक नऺि है , एवॊ अडदाज से हय २७वं फदन ऩुष्म नऺि होता है ।
मह स्जस वाय को आता है , इसका नाभ बी उसी प्रकाय यखा जाता है ।
इसी प्रकाय गुरुवाय को ऩुष्म नऺि होने से गुरु ऩुष्म मोग कहाजात है ।
गुरु ऩुष्म मोग के फाये भं त्रवद्रान ज्मोसतत्रषमो का कहना हं फक ऩुष्म नऺि भं धन प्रासद्ऱ, िाॊदी, सोना, नमे वाहन,
फही-खातं की खयीदायी एवॊ गुरु ग्रह से सॊफॊसधत वस्तुए अत्मासधक राब प्रदान कयती है ।
हय व्मत्रि अऩने शुब कामो भं सपरता हे तु इस शुब भहूता का िमन कय सफसे उऩमुि राब प्राद्ऱ कय सकता

है औय अशुबता से फि सकता है ।
अऩने

जीवन

भं

फदन-प्रसतफदन

वारे फदन फकसी बी नमे कामा को जेसे
हो िुके कामा शुरू कयने के सरमे एवॊ
कामा कयने से 99.9% सनस्द्ळत सपरता

गुरुऩुष्माभृत

मोग

फहोत

कभ

होता है । तफ फनता है गुरु ऩुष्म

सपरता की प्रासद्ऱ के सरए इस अद्भत
ु भहूता

19

जुराई

प्रात: 10.45
से फदन-यात

गुरुवाय के फदन शुब कामो एवॊ

नौकयी, व्माऩाय मा ऩरयवाय से जुड़े कामा, फॊध
जीवन के कोई बी अडम भहत्वऩूणा ऺेि भं
की सॊबावना होसत है ।
फनता है जफ गुरुवाय के फदन ऩुष्म नऺि
मोग।

आध्मात्भ से सॊफॊसधत कामा कयना असत शुब

एवॊ भॊगरभम होता है ।

ऩुष्म नऺि बी सबी प्रकाय के शुब कामो एवॊ आध्मात्भ से जुडे कामो के सरमे असत शुब भाना गमा है ।

जफ गुरुवाय के फदन ऩुष्म नऺि होता तफ मह मोग फन जाता है अद्भत
ु एवॊ अत्मॊत शुब पर प्रद अभृत मोग।

एक साधक के सरए फेहद पामदे भॊद होता हं गुरुऩुष्माभृत मोग।

इस फदन त्रवद्रान एवॊ गुढ यहस्मो के जानकाय भाॊ भहारक्ष्भी की साधना कयने की सराह दे ते है ।

मह मोग त्रवशेष साधना के सरमे असत शुब एवॊ शीघ्र ऩयीणाभ दे ने वारा होता है ।

भाॊ भहारक्ष्भी का आह्वान कयके अत्मॊत सयरता से उनकी कृ ऩा द्रत्रद्श से सभृत्रद्ध औय शाॊसत प्राद्ऱ फक जासकती है ।

ऩुष्म नऺि का भहत्व क्मं हं ?

शास्त्रो भं ऩुष्म नऺि को नऺिं का याजा फतामा गमा हं । स्जसका स्वाभी शसन ग्रह हं । शसन को ज्मोसतष भं
स्थासमत्व का प्रतीक भाना गमा हं । अत् ऩुष्म नऺि सफसे शुब नऺिो भं से एक हं ।
मफद यत्रववाय को ऩुष्म नऺि हो तो यत्रव ऩुष्म मोग औय गुरुवाय को हो तो औय गुरु ऩुष्म मोग कहराता हं ।
शास्त्रं भं ऩुष्म मोग को 100 दोषं को दयू कयने वारा, शुब कामा उद्दे श्मो भं सनस्द्ळत सपरता प्रदान कयने वारा

एवॊ फहुभूल्म वस्तुओॊ फक खयीदायी हे तु सफसे श्रेद्ष एवॊ शुब परदामी मोग भाना गमा है ।

गुरुवाय के फदन ऩुष्म नऺि के सॊमोग से सवााथा अभृतससत्रद्ध मोग फनता है । शसनवाय के फदन ऩुष्म नऺि के

सॊमोग से सवााथसा सत्रद्ध मोग होता है । ऩुष्म नऺि को ब्रह्माजी का श्राऩ सभरा था। इससरए शास्त्रोि त्रवधान से ऩुष्म नऺि
भं त्रववाह वस्जात भाना गमा है ।

65

जुराई 2012

नवयत्न जफड़त श्री मॊि

शास्त्र विन के अनुसाय शुद्ध सुवणा मा यजत
भं सनसभात श्री मॊि के िायं औय मफद नवयत्न
जड़वा ने ऩय मह नवयत्न जफड़त श्री मॊि
कहराता हं । सबी यत्नो को उसके सनस्द्ळत
स्थान ऩय जड़ कय रॉकेट के रूऩ भं धायण
कयने से व्मत्रि को अनॊत एद्वमा एवॊ रक्ष्भी
की प्रासद्ऱ होती हं । व्मत्रि को एसा आबास
होता हं जैसे भाॊ रक्ष्भी उसके साथ हं ।
नवग्रह को श्री मॊि के साथ रगाने से ग्रहं
की अशुब दशा का धायणकयने वारे व्मत्रि
ऩय प्रबाव नहीॊ होता हं ।

गरे भं होने के कायण मॊि ऩत्रवि यहता हं एवॊ स्नान कयते सभम इस मॊि ऩय स्ऩशा कय जो
जर त्रफॊद ु शयीय को रगते हं , वह गॊगा जर के सभान ऩत्रवि होता हं । इस सरमे इसे सफसे

तेजस्वी एवॊ परदासम कहजाता हं । जैसे अभृत से उत्तभ कोई औषसध नहीॊ, उसी प्रकाय रक्ष्भी
प्रासद्ऱ के सरमे श्री मॊि से उत्तभ कोई मॊि सॊसाय भं नहीॊ हं एसा शास्त्रोि विन हं । इस प्रकाय के
नवयत्न जफड़त श्री मॊि गुरूत्व कामाारम द्राया शुब भुहूता भं प्राण प्रसतत्रद्षत कयके फनावाए जाते
हं ।

असधक जानकायी हे तु सॊऩका कयं ।

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66

जुराई 2012

भॊि ससद्ध वाहन दघ
ा ना नाशक भारुसत मॊि
ु ट

ऩौयास्णक ग्रॊथो भं उल्रेख हं की भहाबायत के मुद्ध के सभम अजुन
ा के यथ के अग्रबाग ऩय भारुसत ध्वज एवॊ
भारुसत मडि रगा हुआ था। इसी मॊि के प्रबाव के कायण सॊऩूणा मुद्ध के दौयान हज़ायं-राखं प्रकाय के आग्नेम अस्त्र-

शस्त्रं का प्रहाय होने के फाद बी अजुन
ा का यथ जया बी ऺसतग्रस्त नहीॊ हुआ। बगवान श्री कृ ष्ण भारुसत मॊि के इस
अद्भत
ा नाग्रस्त कैसे हो
ु यहस्म को जानते थे फक स्जस यथ मा वाहन की यऺा स्वमॊ श्री भारुसत नॊदन कयते हं, वह दघ
ु ट
सकता हं । वह यथ मा वाहन तो वामुवेग से, सनफाासधत रुऩ से अऩने रक्ष्म ऩय त्रवजम ऩतका रहयाता हुआ ऩहुॊिेगा।
इसी सरमे श्री कृ ष्ण नं अजुन
ा के यथ ऩय श्री भारुसत मॊि को अॊफकत कयवामा था।

स्जन रोगं के स्कूटय, काय, फस, ट्रक इत्माफद वाहन फाय-फाय दघ
ा ना ग्रस्त हो यहे हो!, अनावश्मक वाहन को
ु ट

नुऺान हो यहा हं! उडहं हानी एवॊ दघ
ा ना से यऺा के उद्दे श्म से अऩने वाहन ऩय भॊि ससद्ध श्री भारुसत मॊि अवश्म
ु ट

रगाना िाफहए। जो रोग ट्राडस्ऩोफटं ग (ऩरयवहन) के व्मवसाम से जुडे हं उनको श्रीभारुसत मॊि को अऩने वाहन भं अवश्म
स्थात्रऩत कयना िाफहए, क्मोफक, इसी व्मवसाम से जुडे सैकडं रोगं का अनुबव यहा हं की श्री भारुसत मॊि को स्थात्रऩत
कयने से उनके वाहन असधक फदन तक अनावश्मक खिो से एवॊ दघ
ा नाओॊ से सुयस्ऺत यहे हं । हभाया स्वमॊका एवॊ अडम
ु ट
त्रवद्रानो का अनुबव यहा हं , की स्जन रोगं ने श्री भारुसत मॊि अऩने वाहन ऩय रगामा हं , उन रोगं के वाहन फडी से

फडी दघ
ा नाओॊ से सुयस्ऺत यहते हं । उनके वाहनो को कोई त्रवशेष नुक्शान इत्माफद नहीॊ होता हं औय नाहीॊ अनावश्मक
ु ट
रुऩ से उसभं खयाफी आसत हं ।

वास्तु प्रमोग भं भारुसत मॊि: मह भारुसत नॊदन श्री हनुभान जी का मॊि है । मफद कोई जभीन त्रफक नहीॊ यही हो, मा उस
ऩय कोई वाद-त्रववाद हो, तो इच्िा के अनुरूऩ वहॉ जभीन उसित भूल्म ऩय त्रफक जामे इस सरमे इस भारुसत मॊि का
प्रमोग फकमा जा सकता हं । इस भारुसत मॊि के प्रमोग से जभीन शीघ्र त्रफक जाएगी मा त्रववादभुि हो जाएगी। इस सरमे
मह मॊि दोहयी शत्रि से मुि है ।

भारुसत मॊि के त्रवषम भं असधक जानकायी के सरमे गुरुत्व कामाारम भं सॊऩका कयं । भूल्म Rs- 255 से 10900 तक

श्री हनुभान मॊि

शास्त्रं भं उल्रेख हं की श्री हनुभान जी को बगवान सूमद
ा े व ने ब्रह्मा जी के आदे श ऩय हनुभान

जी को अऩने तेज का सौवाॉ बाग प्रदान कयते हुए आशीवााद प्रदान फकमा था, फक भं हनुभान को सबी शास्त्र का ऩूणा

ऻान दॉ ग
ू ा। स्जससे मह तीनोरोक भं सवा श्रेद्ष विा हंगे तथा शास्त्र त्रवद्या भं इडहं भहायत हाससर होगी औय इनके
सभन फरशारी औय कोई नहीॊ होगा। जानकायो ने भतानुशाय हनुभान मॊि की आयाधना से ऩुरुषं की त्रवसबडन फीभारयमं

दयू होती हं , इस मॊि भं अद्भत
ु शत्रि सभाफहत होने के कायण व्मत्रि की स्वप्न दोष, धातु योग, यि दोष, वीमा दोष, भूिाा,

नऩुॊसकता इत्माफद अनेक प्रकाय के दोषो को दयू कयने भं अत्मडत राबकायी हं । अथाात मह मॊि ऩौरुष को ऩुद्श कयता
हं । श्री हनुभान मॊि व्मत्रि को सॊकट, वाद-त्रववाद, बूत-प्रेत, द्यूत फक्रमा, त्रवषबम, िोय बम, याज्म बम, भायण, सम्भोहन
स्तॊबन इत्माफद से सॊकटो से यऺा कयता हं औय ससत्रद्ध प्रदान कयने भं सऺभ हं ।
श्री हनुभान मॊि के त्रवषम भं असधक जानकायी के सरमे गुरुत्व कामाारम भं सॊऩका कयं । भूल्म Rs- 730 से 10900 तक

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जुराई 2012

67

भॊि ससद्ध त्रवशेष दै वी मॊि सूसि
आद्य शत्रि दग
ु ाा फीसा मॊि (अॊफाजी फीसा मॊि)

सयस्वती मॊि

भहान शत्रि दग
ु ाा मॊि (अॊफाजी मॊि)

सद्ऱसती भहामॊि(सॊऩूणा फीज भॊि सफहत)

नव दग
ु ाा मॊि

कारी मॊि

नवाणा मॊि (िाभुॊडा मॊि)

श्भशान कारी ऩूजन मॊि

नवाणा फीसा मॊि

दस्ऺण कारी ऩूजन मॊि

िाभुॊडा फीसा मॊि ( नवग्रह मुि)

सॊकट भोसिनी कासरका ससत्रद्ध मॊि

त्रिशूर फीसा मॊि

खोफडमाय मॊि

फगरा भुखी मॊि

खोफडमाय फीसा मॊि

फगरा भुखी ऩूजन मॊि

अडनऩूणाा ऩूजा मॊि

याज याजेद्वयी वाॊिा कल्ऩरता मॊि

एकाॊऺी श्रीपर मॊि

भॊि ससद्ध त्रवशेष रक्ष्भी मॊि सूसि
श्री मॊि (रक्ष्भी मॊि)

भहारक्ष्भमै फीज मॊि

श्री मॊि (भॊि यफहत)

भहारक्ष्भी फीसा मॊि

श्री मॊि (सॊऩूणा भॊि सफहत)

रक्ष्भी दामक ससद्ध फीसा मॊि

श्री मॊि (फीसा मॊि)

रक्ष्भी दाता फीसा मॊि

श्री मॊि श्री सूि मॊि

रक्ष्भी गणेश मॊि

श्री मॊि (कुभा ऩृद्षीम)

ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊि ऩूजन मॊि

रक्ष्भी फीसा मॊि

कनक धाया मॊि

श्री श्री मॊि (श्रीश्री रसरता भहात्रिऩुय सुडदमै श्री भहारक्ष्भमं श्री भहामॊि)

वैबव रक्ष्भी मॊि (भहान ससत्रद्ध दामक श्री भहारक्ष्भी मॊि)

अॊकात्भक फीसा मॊि
ताम्र ऩि ऩय सुवणा ऩोरीस
(Gold Plated)
साईज
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

भूल्म
460
820
1650
2350
3600
6400
10800

ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीस
(Silver Plated)
साईज
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

भूल्म
370
640
1090
1650
2800
5100
8200

ताम्र ऩि ऩय
(Copper)

साईज
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

मॊि के त्रवषम भं असधक जानकायी हे तु सॊऩका कयं ।

GURUTVA KARYALAY

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Our Website:- http://gk.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.blogspot.com/

भूल्म
255
460
730
1090
1900
3250
6400

जुराई 2012

68

यासश यत्न
भूॊगा

हीया

ऩडना

भोती

भाणेक

ऩडना

Red Coral

Diamond
(Special)

Green Emerald

Naturel Pearl
(Special)

Ruby
(Old Berma)
(Special)

Green Emerald

(Special)
5.25" Rs. 1050
6.25" Rs. 1250
7.25" Rs. 1450
8.25" Rs. 1800
9.25" Rs. 2100
10.25" Rs. 2800

10 cent
20 cent
30 cent
40 cent
50 cent

Rs. 4100
Rs. 8200
Rs. 12500
Rs. 18500
Rs. 23500

(Special)
5.25" Rs. 9100
6.25" Rs. 12500
7.25" Rs. 14500
8.25" Rs. 19000
9.25" Rs. 23000
10.25" Rs. 28000

5.25"
6.25"
7.25"
8.25"
9.25"
10.25"

Rs. 910
Rs. 1250
Rs. 1450
Rs. 1900
Rs. 2300
Rs. 2800

2.25"
3.25"
4.25"
5.25"
6.25"

Rs.
Rs.
Rs.
Rs.
Rs.

12500
15500
28000
46000
82000

(Special)
5.25" Rs. 9100
6.25" Rs. 12500
7.25" Rs. 14500
8.25" Rs. 19000
9.25" Rs. 23000
10.25" Rs. 28000

** All Weight In Rati

All Diamond are Full
White Colour.

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

तुरा यासश:

वृस्द्ळक यासश:

धनु यासश:

भकय यासश:

कुॊब यासश:

भीन यासश:

हीया

भूॊगा

ऩुखयाज

नीरभ

नीरभ

ऩुखयाज

Diamond
(Special)

Red Coral

Y.Sapphire

B.Sapphire

B.Sapphire

Y.Sapphire

(Special)

(Special)

(Special)

(Special)

(Special)

10 cent
20 cent
30 cent
40 cent
50 cent

Rs. 4100
Rs. 8200
Rs. 12500
Rs. 18500
Rs. 23500

All Diamond are Full
White Colour.

5.25" Rs. 1050
6.25" Rs. 1250
7.25" Rs. 1450
8.25" Rs. 1800
9.25" Rs. 2100
10.25" Rs. 2800
** All Weight In Rati

5.25" Rs. 30000
6.25" Rs. 37000
7.25" Rs. 55000
8.25" Rs. 73000
9.25" Rs. 91000
10.25" Rs.108000

5.25" Rs. 30000
6.25" Rs. 37000
7.25" Rs. 55000
8.25" Rs. 73000
9.25" Rs. 91000
10.25" Rs.108000

5.25" Rs. 30000
6.25" Rs. 37000
7.25" Rs. 55000
8.25" Rs. 73000
9.25" Rs. 91000
10.25" Rs.108000

5.25" Rs. 30000
6.25" Rs. 37000
7.25" Rs. 55000
8.25" Rs. 73000
9.25" Rs. 91000
10.25" Rs.108000

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

* उऩमोि वजन औय भूल्म से असधक औय कभ वजन औय भूल्म के यत्न एवॊ उऩयत्न बी हभाये महा व्माऩायी भूल्म ऩय
उप्रब्ध हं ।

GURUTVA KARYALAY
92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
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जुराई 2012

69

भॊि ससद्ध रूद्राऺ
Rudraksh List

Rate In
Indian Rupee

Rate In
Indian Rupee

Rudraksh List

एकभुखी रूद्राऺ (इडडोनेसशमा)

2800, 5500

आठ भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

एकभुखी रूद्राऺ (नेऩार)

750,1050, 1250, आठ भुखी रूद्राऺ (इडडोनेसशमा)

दो भुखी रूद्राऺ (हरयद्राय, याभेद्वय)

30,50,75

नौ भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

910,1250

दो भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

50,100,

नौ भुखी रूद्राऺ (इडडोनेसशमा)

2050

दो भुखी रूद्राऺ (इडडोनेसशमा)

450,1250

दस भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

1050,1250

तीन भुखी रूद्राऺ (हरयद्राय, याभेद्वय)

30,50,75,

दस भुखी रूद्राऺ (इडडोनेसशमा)

2100

तीन भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

50,100,

ग्मायह भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

1250,

तीन भुखी रूद्राऺ (इडडोनेसशमा)

450,1250,

ग्मायह भुखी रूद्राऺ (इडडोनेसशमा)

2750,

िाय भुखी रूद्राऺ (हरयद्राय, याभेद्वय)

25,55,75,

फायह भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

1900,

िाय भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

50,100,

फायह भुखी रूद्राऺ (इडडोनेसशमा)

2750,

ऩॊि भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

25,55,

तेयह भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

3500, 4500,

ऩॊि भुखी रूद्राऺ (इडडोनेसशमा)

225, 550,

तेयह भुखी रूद्राऺ (इडडोनेसशमा)

6400,

िह भुखी रूद्राऺ (हरयद्राय, याभेद्वय)

25,55,75,

िौदह भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

10500

िह भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

50,100,

िौदह भुखी रूद्राऺ (इडडोनेसशमा)

14500

सात भुखी रूद्राऺ (हरयद्राय, याभेद्वय)

75, 155,

गौयीशॊकय रूद्राऺ

1450

सात भुखी रूद्राऺ (नेऩार)

225, 450,

गणेश रुद्राऺ (नेऩार)

550

सात भुखी रूद्राऺ (इडडोनेसशमा)

1250

गणेश रूद्राऺ (इडडोनेसशमा)

750

820,1250
1900

रुद्राऺ के त्रवषम भं असधक जानकायी हे तु सॊऩका कयं ।
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भॊि ससद्ध दर
ा साभग्री
ु ब
हत्था जोडी- Rs- 370

घोडे की नार- Rs.351

भामा जार- Rs- 251

त्रफल्री नार- Rs- 370

भोसत शॊख- Rs- 550

धन वृत्रद्ध हकीक सेट Rs-251

ससमाय ससॊगी- Rs- 370

दस्ऺणावतॉ शॊख- Rs- 550

इडद्र जार- Rs- 251

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जुराई 2012

70

श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि
फकसी बी व्मत्रि का जीवन तफ आसान फन जाता हं जफ उसके िायं औय का भाहोर उसके अनुरुऩ उसके वश
भं हं। जफ कोई व्मत्रि का आकषाण दस
ु यो के उऩय एक िुम्फकीम प्रबाव डारता हं , तफ

रोग उसकी सहामता एवॊ

सेवा हे तु तत्ऩय होते है औय उसके प्राम् सबी कामा त्रफना असधक कद्श व ऩये शानी से सॊऩडन हो जाते हं । आज के
बौसतकता वाफद मुग भं हय व्मत्रि के सरमे दस
ॊ कत्व को कामभ
ू यो को अऩनी औय खीिने हे तु एक प्रबावशासर िुफ

यखना असत आवश्मक हो जाता हं । आऩका आकषाण औय व्मत्रित्व आऩके िायो ओय से रोगं को आकत्रषात कये इस
सरमे सयर उऩाम हं , श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि। क्मोफक बगवान श्री कृ ष्ण एक अरौफकव एवॊ फदवम िुॊफकीम व्मत्रित्व के
धनी थे। इसी कायण से श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि के ऩूजन एवॊ दशान से आकषाक व्मत्रित्व प्राद्ऱ होता हं ।
श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि के साथ व्मत्रिको दृढ़ इच्िा शत्रि एवॊ उजाा प्राद्ऱ
होती हं , स्जस्से व्मत्रि हभेशा एक बीड भं हभेशा आकषाण का कंद्र यहता हं ।
मफद फकसी व्मत्रि को अऩनी प्रसतबा व आत्भत्रवद्वास के स्तय भं वृत्रद्ध,
अऩने सभिो व ऩरयवायजनो के त्रफि भं रयश्तो भं सुधाय कयने की ईच्िा होती
हं उनके सरमे श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि का ऩूजन एक सयर व सुरब भाध्मभ
सात्रफत हो सकता हं ।
श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि ऩय अॊफकत शत्रिशारी त्रवशेष ये खाएॊ, फीज भॊि एवॊ

श्रीकृ ष्ण फीसा कवि
श्रीकृ ष्ण

फीसा

कवि

को

केवर

त्रवशेष शुब भुहुता भं सनभााण फकमा
जाता हं । कवि को त्रवद्रान कभाकाॊडी

ब्राहभणं द्राया शुब भुहुता भं शास्त्रोि

अॊको से व्मत्रि को अद्द्भत
ु आॊतरयक शत्रिमाॊ प्राद्ऱ होती हं जो व्मत्रि को

त्रवसध-त्रवधान से त्रवसशद्श तेजस्वी भॊिो

श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि के ऩूजन व सनमसभत दशान के भाध्मभ से बगवान

मुि कयके सनभााण फकमा जाता हं ।

सफसे आगे एवॊ सबी ऺेिो भं अग्रस्णम फनाने भं सहामक ससद्ध होती हं ।

श्रीकृ ष्ण का आशीवााद प्राद्ऱ कय सभाज भं स्वमॊ का अफद्रतीम स्थान स्थात्रऩत कयं ।
श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि अरौफकक ब्रह्माॊडीम उजाा का सॊिाय कयता हं , जो
एक प्राकृ त्रत्त भाध्मभ से व्मत्रि के बीतय सद्दबावना, सभृत्रद्ध, सपरता, उत्तभ
स्वास््म, मोग औय ध्मान के सरमे एक शत्रिशारी भाध्मभ हं !

श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि के ऩूजन से व्मत्रि के साभास्जक भान-सम्भान व

द्राया ससद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम
स्जस के पर स्वरुऩ धायण कयता
व्मत्रि को शीघ्र ऩूणा राब प्राद्ऱ होता
हं । कवि को गरे भं धायण कयने
से वहॊ अत्मॊत प्रबाव शारी होता
हं । गरे भं धायण कयने से कवि

ऩद-प्रसतद्षा भं वृत्रद्ध होती हं ।

हभेशा रृदम के ऩास यहता हं स्जस्से

कंफद्रत कयने से व्मत्रि फक िेतना शत्रि जाग्रत होकय शीघ्र उच्ि स्तय

एवॊ शीघ्र ऻात होने रगता हं ।

त्रवद्रानो के भतानुशाय श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि के भध्मबाग ऩय ध्मान मोग

व्मत्रि ऩय उसका राब असत तीव्र

को प्राद्ऱहोती हं ।

भूरम भाि: 1900

जो ऩुरुषं औय भफहरा अऩने साथी ऩय अऩना प्रबाव डारना िाहते हं औय उडहं अऩनी औय आकत्रषात कयना
िाहते हं । उनके सरमे श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि उत्तभ उऩाम ससद्ध हो सकता हं ।

ऩसत-ऩत्नी भं आऩसी प्रभ की वृत्रद्ध औय सुखी दाम्ऩत्म जीवन के सरमे श्रीकृ ष्ण फीसा मॊि राबदामी होता हं ।

भूल्म:- Rs. 730 से Rs. 10900 तक उप्रब्द्ध

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जुराई 2012

71

याभ यऺा मॊि
याभ यऺा मॊि सबी बम, फाधाओॊ से भुत्रि व कामो भं सपरता प्रासद्ऱ हे तु उत्तभ मॊि हं । स्जसके प्रमोग
से धन राब होता हं व व्मत्रि का सवांगी त्रवकाय होकय उसे सुख-सभृत्रद्ध, भानसम्भान की प्रासद्ऱ होती
हं । याभ यऺा मॊि सबी प्रकाय के अशुब प्रबाव को दयू कय व्मत्रि को जीवन की सबी प्रकाय की
कफठनाइमं से यऺा कयता हं । त्रवद्रानो के भत से जो व्मत्रि बगवान याभ के बि हं मा श्री
हनुभानजी के बि हं उडहं अऩने सनवास स्थान, व्मवसामीक स्थान ऩय याभ यऺा मॊि को अवश्म
स्थाऩीत कयना िाफहमे स्जससे आने वारे सॊकटो से यऺा हो उनका जीवन सुखभम व्मतीत हो सके
एवॊ उनकी सभस्त आफद बौसतक व आध्मास्त्भक भनोकाभनाएॊ ऩूणा हो सके।

ताम्र ऩि ऩय सुवणा ऩोरीस

ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीस

ताम्र ऩि ऩय

(Gold Plated)

(Silver Plated)

(Copper)

साईज
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

भूल्म
460
820
1650
2350
3600
6400
10800

साईज
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

भूल्म
370
640
1090
1650
2800
5100
8200

साईज
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

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भूल्म
255
460
730
1090
1900
3250
6400

72

जुराई 2012

जैन धभाके त्रवसशद्श मॊिो की सूिी
श्री िौफीस तीथंकयका भहान प्रबात्रवत िभत्कायी मॊि

श्री एकाऺी नारयमेय मॊि

श्री िोफीस तीथंकय मॊि

सवातो बद्र मॊि

कल्ऩवृऺ मॊि

सवा सॊऩत्रत्तकय मॊि

सिॊताभणी ऩाद्वानाथ मॊि

सवाकामा-सवा भनोकाभना ससत्रद्धअ मॊि (१३० सवातोबद्र मॊि)

सिॊताभणी मॊि (ऩंसफठमा मॊि)

ऋत्रष भॊडर मॊि

सिॊताभणी िक्र मॊि

जगदवल्रब कय मॊि

श्री िक्रेद्वयी मॊि

ऋत्रद्ध ससत्रद्ध भनोकाभना भान सम्भान प्रासद्ऱ मॊि

श्री घॊटाकणा भहावीय मॊि

ऋत्रद्ध ससत्रद्ध सभृत्रद्ध दामक श्री भहारक्ष्भी मॊि

श्री घॊटाकणा भहावीय सवा ससत्रद्ध भहामॊि

त्रवषभ त्रवष सनग्रह कय मॊि

श्री ऩद्मावती मॊि

ऺुद्रो ऩद्रव सननााशन मॊि

श्री ऩद्मावती फीसा मॊि

फृहच्िक्र मॊि

श्री ऩाद्वाऩद्मावती ह्रंकाय मॊि

वॊध्मा शब्दाऩह मॊि

ऩद्मावती व्माऩाय वृत्रद्ध मॊि

भृतवत्सा दोष सनवायण मॊि

श्री धयणेडद्र ऩद्मावती मॊि

काॊक वॊध्मादोष सनवायण मॊि

श्री ऩाद्वानाथ ध्मान मॊि

फारग्रह ऩीडा सनवायण मॊि

श्री ऩाद्वानाथ प्रबुका मॊि

रधुदेव कुर मॊि

बिाभय मॊि (गाथा नॊफय १ से ४४ तक)

नवगाथात्भक उवसग्गहयॊ स्तोिका त्रवसशद्श मॊि

भस्णबद्र मॊि

उवसग्गहयॊ मॊि

श्री मॊि

श्री ऩॊि भॊगर भहाश्रृत स्कॊध मॊि

श्री रक्ष्भी प्रासद्ऱ औय व्माऩाय वधाक मॊि

ह्रीॊकाय भम फीज भॊि

श्री रक्ष्भीकय मॊि

वधाभान त्रवद्या ऩट्ट मॊि

रक्ष्भी प्रासद्ऱ मॊि

त्रवद्या मॊि

भहात्रवजम मॊि

सौबाग्मकय मॊि

त्रवजमयाज मॊि

डाफकनी, शाफकनी, बम सनवायक मॊि

त्रवजम ऩतका मॊि

बूताफद सनग्रह कय मॊि

त्रवजम मॊि

ज्वय सनग्रह कय मॊि

ससद्धिक्र भहामॊि

शाफकनी सनग्रह कय मॊि

दस्ऺण भुखाम शॊख मॊि

आऩत्रत्त सनवायण मॊि

दस्ऺण भुखाम मॊि

शिुभख
ु स्तॊबन मॊि

(अनुबव ससद्ध सॊऩण
ू ा श्री घॊटाकणा भहावीय ऩतका मॊि)

मॊि के त्रवषम भं असधक जानकायी हे तु सॊऩका कयं ।

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जुराई 2012

73

घॊटाकणा भहावीय सवा ससत्रद्ध भहामॊि को स्थाऩीत

कयने से साधक की सवा भनोकाभनाएॊ ऩूणा होती हं । सवा
प्रकाय के योग बूत-प्रेत आफद उऩद्रव से यऺण होता हं ।
जहयीरे औय फहॊ सक प्राणीॊ से सॊफसॊ धत बम दयू होते हं ।
अस्ग्न बम, िोयबम आफद दयू होते हं ।

दद्श
ु व असुयी शत्रिमं से उत्ऩडन होने वारे बम

से मॊि के प्रबाव से दयू हो जाते हं ।

मॊि के ऩूजन से साधक को धन, सुख, सभृत्रद्ध,

ऎद्वमा, सॊतत्रत्त-सॊऩत्रत्त आफद की प्रासद्ऱ होती हं । साधक की
सबी प्रकाय की सास्त्वक इच्िाओॊ की ऩूसता होती हं ।

मफद फकसी ऩरयवाय मा ऩरयवाय के सदस्मो ऩय

वशीकयण, भायण,

उच्िाटन इत्माफद जाद-ू टोने वारे

प्रमोग फकमे गमं होतो इस मॊि के प्रबाव से स्वत् नद्श
हो जाते हं औय बत्रवष्म भं मफद कोई प्रमोग कयता हं तो
यऺण होता हं ।

कुि जानकायो के श्री घॊटाकणा भहावीय ऩतका

मॊि से जुडे अद्द्भत
ु अनुबव यहे हं । मफद घय भं श्री

घॊटाकणा भहावीय ऩतका मॊि स्थात्रऩत फकमा हं औय मफद

कोई इषाा, रोब, भोह मा शिुतावश मफद अनुसित कभा

कयके फकसी बी उद्दे श्म से साधक को ऩये शान कयने का प्रमास कयता हं तो मॊि के प्रबाव से सॊऩण
ू ा
ऩरयवाय का यऺण तो होता ही हं , कबी-कबी शिु के द्राया फकमा गमा अनुसित कभा शिु ऩय ही उऩय
उरट वाय होते दे खा हं ।

भूल्म:- Rs. 1650 से Rs. 10900 तक उप्रब्द्ध

सॊऩका कयं । GURUTVA KARYALAY
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जुराई 2012

74

अभोद्य भहाभृत्मुॊजम कवि
अभोद्य् भहाभृत्मुॊजम कवि व

उल्रेस्खत अडम साभग्रीमं को शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से त्रवद्रान

ब्राह्मणो द्राया सवा राख भहाभृत्मुज
ॊ म भॊि जऩ एवॊ दशाॊश हवन द्राया सनसभात कवि अत्मॊत
प्रबावशारी होता हं ।

अभोद्य् भहाभृत्मुॊजम कवि
कवि फनवाने हे तु:
अऩना नाभ, त्रऩता-भाता का नाभ,
गोि, एक नमा पोटो बेजे

अभोद्य् भहाभृत्मुॊजम
कवि
दस्ऺणा भाि: 10900

याशी यत्न एवॊ उऩयत्न
त्रवशेष मॊि
हभायं महाॊ सबी प्रकाय के मॊि सोने-िाॊफदताम्फे भं आऩकी आवश्मिा के अनुशाय

फकसी बी बाषा/धभा के मॊिो को आऩकी
आवश्मक फडजाईन के अनुशाय २२ गेज
सबी साईज एवॊ भूल्म व क्वासरफट के

असरी नवयत्न एवॊ उऩयत्न बी उऩरब्ध हं ।

शुद्ध ताम्फे भं अखॊफडत फनाने की त्रवशेष
सुत्रवधाएॊ उऩरब्ध हं ।

हभाये महाॊ सबी प्रकाय के यत्न एवॊ उऩयत्न व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध हं । ज्मोसतष कामा से जुडे़

फधु/फहन व यत्न व्मवसाम से जुडे रोगो के सरमे त्रवशेष भूल्म ऩय यत्न व अडम साभग्रीमा व अडम
सुत्रवधाएॊ उऩरब्ध हं ।

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75

जुराई 2012

भाससक यासश पर

 सिॊतन जोशी
भेष: 1 से 15 जुराई 2012 : आऩकी आसथाक भं सुधाय होगा। बूसभ-बवन-वाहन की प्राद्ऱी हो सकती हं । व्मवसाम से
सॊफॊसधत का कामं से जुडे रोगो की प्रससत्रद्ध का तेजी से त्रवस्ताय होगा। वाहन से
सावधान यहे आकस्स्भक दघ
ा ना हो सकती हं । जीवन साथी के साथ आऩके रयश्तं भं
ु ट

कुि खटास आ सकती है । इस सरए असधक सभम अऩने जीवन साथी के साथ त्रफताने
का प्रमास कये ।
16 से 31 जुराई 2012 : आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ के मोग फनेगं स्जस्से आसथाक स्स्थती
भं सुधाय होगा। व्मवसाम भं धन प्रासद्ऱ के नमे भागा प्राद्ऱ हो सकते हं । प्रसतमोसगता
भूरक कामो भं अऩनी िाऩ िोडने भं सपरता प्राद्ऱ कयं गे। स्वास््म सुख भं वृत्रद्ध
होगी। आऩको भानससक अस्स्थयता का अनुबव हो सकता हं इस सरए भन को सनमॊिण भं यखने का प्रमास कयं । इद्श
सभिं के सहमोग से नमे सभि फन सकते हं ।

वृषब: 1 से 15 जुराई 2012 : आऩको रॊफे सभम से रुका हुवा बुगतान प्राद्ऱ हो
सकता हं । भहत्व के कामो के सरमे अत्मासधक खिा के मोग फन यहे हं । आऩको कजा

रेना ऩड सकता हं । ऩरयवाय भं फकसी सदस्म का स्वास््म सिॊसतत कय सकता हं ।
सयकायी कामा मा कोटा -किहयी के कामं के सरए सभम अनुकूर हं । थोडे सभम के सरमे
ऩरयवाय भं अशास्डत हो सकती है ।
16 से 31 जुराई 2012 : बूसभ-बवन-वाहन से सॊफॊसध कामं को स्थसगत कयना राबप्रद
यहे गा। अऩनी फुत्रद्धभता से ऩरयवाय की सुख -शास्डत फनामे यखने का प्रमास कयं ।
ऩरयवाय के साथ धासभाक मािा ऩय जाना उत्तभ ससद्ध यहे गा। प्रेभ सॊफॊधं भं असपरता के मोग फन यहे हं । धैमा औय
सॊमभ से काभ रे जल्दफाजी ऩये शानी का कायण फन सकती हं । अऩने स्वास््म का त्रवशेष ध्मान यखे।

सभथुन:

1 से 15 जुराई 2012 : नौकयी-व्मवसाम भं फकमे गमे प्रमासो से ऩूणा

सपरता प्राद्ऱ होगी। ऩरयवाय के फकसी सदस्म का स्वास््म प्राबात्रवत हो सकता हं ।
स्जस कायण आसथाक ऩऺ कभजोय हो सकता हं । सभाज भं आऩका भान एवॊ प्रसतद्षा
फढने के अच्िे मोग फन यहे हं । प्रेभ सॊफॊसधत भाभरो के सरए सभम सभराझुरा सात्रफत
हो सकता हं ।
16 से 31 जुराई 2012 : अऩने प्रमासो एवॊ गोऩसनम मोजनाओॊ से आऩके बाग्म का ससताया
फुरॊफदमं ऩय ऩहुि सकता हं । ऩरयवाय औय रयश्तेदायं से राब प्राद्ऱ हो सकते हं । आऩको बूसभबवन-वाहन से सॊफॊसधत भाभरो से बी धन राब प्राद्ऱ हो सकता हं । अऩने स्वास््म का बी
खमार यखं अडमथा स्वास््म नयभ हो सकता है । जीवन साथी का व्मवहाय आऩके प्रसत फेहद कठोय हो सकता हं ।

76

जुराई 2012

कका: 1 से 15 जुराई 2012 : एकासधक स्त्रोत से आम हो सकती हं । अऩने इद्शसभिं से आऩको साझेदायी का प्रस्ताव
सभर सकता हं । नए रोगं से सभिता स्थात्रऩत हो सकती हं जो कामाऺेि के सरए
राबप्रद हो सकती हं । जीवन साथी का ऩूणा सुख एवॊ सहममोग प्राद्ऱ होगा एवॊ शुब
सभािाय की प्रासद्ऱ बी सॊबव हं । अऩनी सेहत का त्रवशेष रुऩ से खमार यखं राऩयवाही
रॊफे सभम के सरए आऩको योग ग्रस्त कय सकती हं ।
16 से 31 जुराई 2012 : अऩने कामाऺेि से आऩको आऩको आकस्स्भक रुऩ से आसथाक
राब प्राद्ऱ हो सकता हं । िर-अिर सॊऩत्रत्त भं सनवेश कय सकते हं । फकसी कायण से
अनावश्मक अत्मासधक खिा कयना ऩड सकता हं । इस सरए अऩनी आम को ध्मान भं

यख कय खिा कये अडमथा कजा रेने की स्स्थती फन सकती हं । दाॊऩत्म सॊफॊध औय
भधुयता होने के सॊकेत हं ।

ससॊह:

1 से 15 जुराई 2012 : अऩने कामो भं असतरयि सावधासन यखे कोई राऩयवाही आऩको रॊफे सभम का
नुक्शान कय सकती हं । प्रेभ सॊफॊधं के सरए सभम प्रसतकूर सात्रफत हो सकता हं , रयश्तं
भे असतरयि सावधासनमाॊ यखे अडमथा त्रफखय सकते हं । आऩको स्वास््म सॊफॊसधत
ऩये शानी के कायण थोडे सभम के सरमे त्रवश्राभ कयना ऩड सकता हं । कोटा -किहयी के
कामो को स्थसगत कयना उसित यहे गा
16 से 31 जुराई 2012 : आऩकी आसथाक स्स्थसत प्रफर होगी। अऩने सॊसित धन को
ऩूॊस्ज सनवेश कय राब प्राद्ऱ कय सकते है । आऩके प्रमासो एवॊ भेहनत के फर ऩय मह
प्रसतकूर सभम अनुकूर सात्रफत हो सकता हं । अत्मासधक कफठन ऩरयश्रभ के कायण

आऩको उजाा व उसाह की कभी भहसूस हो सकती हं । अत् आऩके सरए ऩमााद्ऱ नीॊद एवॊ
आयाभ कयना असत आवश्मक यहे गा।

कडमा: 1 से 15 जुराई 2012 : कामाऺेि से सॊफॊसधत कामो की ऩूसता हे तु अत्मासधक
बागदौड़ कयनी ऩड सकती हं । कामा भं आनेवारी रुकावटो भं बी कभी होगी औय
दयू स्थ स्थानं से धनराब प्राद्ऱ हो सकता है । िर-अिर सॊऩत्रत्त मा फकसी घये रू
भाभरं भं फदराव हो सकता है । भौसभ भं फदराव से आऩका स्वास््म नयभ यह
सकता है । जीवन साथी से ऩूणा सहमोग प्राद्ऱ होगा। शुब सभािाय फक प्रासद्ऱ हो सकती
हं ।
16 से 31 जुराई 2012 : आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ होगी स्जस्से आसथाक स्स्थती भं सुधाय
होगा। अऩनी भहत्व ऩूणा मोजनाओॊ को कामो स्स्थगीत कयना मा फकसी औय के बयोसे

िोडना नुक्शान दे ह हो सकता हं । कामा फक असधकता औय व्मस्तता से भानससक शाॊसत भं कभी यहे गी। कोटा -किहयी के
कामो भं सपरता प्राद्ऱ कय सकते हं । सॊतान ऩऺ के प्रसत सिॊता यहे गी।

जुराई 2012

77

तुरा: 1 से 15 जुराई 2012 : नौकयी से सॊफॊसधत कामा भं नमे फदराव हो सकते हं , व्मवसाम भं हं तो उडनती के
नए भागा प्राद्ऱ हंगे। ऩारयवारयक भाहोर िोटी-िोटी घटनाओॊ के कायण तनावऩूणा हो
सकता हं । व्मवसामीक मािाएॊ सपर होगी। अऩनी वाणी एवॊ क्रोध ऩय सनमॊिण यखे
अडमथा आऩके फने फनामे कामा त्रफगड सकते हं । इस सरए असधक सभम अऩने जीवन
साथी के साथ त्रफताने का प्रमास कये ।
16 से 31 जुराई 2012 : नौकयी-व्मवसाम भं उडनसत व आमके नए स्त्रोत सभरने के
मोग हं । आऩकी आसथाक भं सुधाय होगा। बूसभ-बवन-वाहन की प्राद्ऱी हो सकती हं ।
कोटा -किहयी के कामो भं सपरता प्राद्ऱ हो सकती हं । स्वास््म सुख भं वृत्रद्ध होगी
फपय बी खाने- ऩीने का त्रवशेष ध्मान यखना फहतकायी यहे गा।

जीवन साथी से आस्त्भमता की कभी भहसूस कय सकते

हं ।

वृस्द्ळक: 1 से 15 जुराई 2012 : कामाऺेि भं जोस्खभ बये कामा कयने से फिे क्मोफक
आऩकी राऩयवाही आऩको रॊफे सभम का नुक्शान कय सकती हं ।

आम से व्मम असधक

होने के मोग फन यहे हं । प्रेभ सॊफॊसधत भाभरं भं कोई ऩये शानी हो सकती हं । सॊमभ भं
यहने का प्रमास कयं । व्मवसासमक मािा राबदामक ससद्ध होगी। प्रकृ सत भं फदराव से
आऩका स्वास््म नयभ यह सकता है ।
16 से 31 जुराई 2012 : नौकयी, व्मवास्म भं धन प्रासद्ऱ होगी स्जस्से आसथाक स्स्थती
भं सुधाय होगा। साभास्जक भान-सम्भान औय ऩद-प्रसतद्षा भं वृत्रद्ध होगी। रेफकन इस
अवसध भं िर-अिर सॊऩत्रत्त भं ऩूॊस्ज सनवेश कयना प्रसतकूर सात्रफत हो सकता हं । शिुओॊ ऩय आऩका प्रबाव यहे गा।
आऩके त्रवयोधी एवॊ शिु ऩऺ ऩयास्त हंगे। व्मवसासमक मािा भं सपरता प्राद्ऱ हो सकती है ।

धनु:

1 से 15 जुराई 2012 : इस अवसध भं आऩको प्रमासो के अनुरुऩ धनराब प्राद्ऱ

हो सकते हं । शिु एवॊ त्रवयोधी ऩऺ के कायण आसथाक ऩऺ कभजोय हो सकता हं । मफद
आऩ नौकयी भं हं तो ऩदौडनसत के मोग फन यहे हं । व्मवसाम भं भहत्वऩूणा ऩद प्राद्ऱ
कय सकते हं । आऩका कोई ऩरयजन स्वास््म सॊफॊसधत ऩये शानी से ग्रस्त हो सकता हं
इस सरए उसित ध्मान यखने का प्रमास कयं ।
16 से 31 जुराई 2012 : आऩकी भहत्वऩूणा मोजनाए ऩूणा हो सकती हं । ऩरयवाय भं
फकसी सदस्म के स्जद्दी स्वबाव के कायण आऩके ऩरयवाय भं भानससक अशाॊसत का
भाहोर हो सकता है । आऩका व्मवहाय तीव्र एवॊ आक्राभकता से मुि हो सकता हं अत्
त्रप्रमजनो के साथ व्मवहाय कूशर यहं । जीवन साथी के ऩूणा सहमोग से आऩकी प्रसडनता भं वृत्रद्ध होगा।

78

जुराई 2012

भकय: 1 से 15 जुराई 2012 : नौकयी-व्मवसाम से सॊफॊसधत कामं के सरए मह सभम आसथाक राबदे ने वारा यहे गा।
अऩनी असधक खिा कयने फक प्रवृत्रत्त ऩय सनमॊिण कयने का प्रमास कयं । त्रवयोधी एवॊ शिु
ऩऺ से ऩये शानी हो सकती हं । दयू स्थ स्थानं की मािाएॊ राबदामक ससद्ध होगी। आऩके
साभास्जक भान-सम्भान औय ऩद-प्रसतद्षा भं वृत्रद्ध होगी। जीवन साथी से अनावश्म वादत्रववाह हो सकता हं ।
16 से 31 जुराई 2012 : बूसभ-बवन-वाहन से सॊफॊसधत कामो भं राब प्राद्ऱ होगा।
बूसभ-बवन के क्रम त्रवक्रम से धन राब होगा।आऩके बौसतक सुख साधनो भं वृत्रद्ध
होगी। ग्रहं के प्रबाव से अत्मासधक व्मम होने के मोग फन यहे हं । स्वास््म सुख भं
वृत्रद्ध होगी फपय बी खाने- ऩीने का त्रवशेष ध्मान यखना फहतकायी यहे गा। जीवन साथी से रयश्तो भं सुधाय होगा।

कॊु ब: 1 से 15 जुराई 2012 : नौकयी से सॊफॊसधत कामा भं नमे फदराव हो सकते हं ,
व्मवसाम भं हं तो उडनती के नए भागा प्राद्ऱ हंगे। बूसभ-बवन से सॊफॊसधअ भाभरं भं
सपरता प्राद्ऱ हो सकती हं । व्मवसामीक मािाएॊ सपर होगी। आऩके बौसतक सुख
साधनो भं वृत्रद्ध होगी। ऩरयवाय के रोग एवॊ सभि वगा का ऩूणा सहमोग प्राद्ऱ होगा।
जीवन साथी के साथ सॊफॊधं भं भधुयता आएगी।
16 से 31 जुराई 2012 : नौकयी-व्मवसाम भं उडनसत व आमके नए स्त्रोत सभरने के
मोग हं । आऩकी आसथाक भं सुधाय होगा। बूसभ-बवन-वाहन से सॊफॊसधअ कामो से राब
प्रासद्ऱ सॊबव हं । शिुओॊ ऩय आऩका प्रबाव यहे गा। आऩके त्रवयोधी एवॊ शिु ऩऺ ऩयास्त हंगे। आऩका साभास्जक जीवन
उच्ि स्तय का हो सकता हं । ऩरयवाय के फकसी सदस्म का स्वस््म कभजोय हो सकता हं ।

भीन:

1 से 15 जुराई 2012 : मफद आऩ नौकयी भं हं तो ऩदौडनसत हो सकती हं मा

नई नौकयी प्राद्ऱ हो सकती हं , व्मवसाम भं हं तो उडनती फक भागा प्रसस्त हंगे। बूसभबवन-वाहन से सॊफॊसध कामो भं त्रवशेष राब प्रासद्ऱ के मोग उत्तभ यहं गे। अऩनी असधक
खिा कयने फक प्रवृत्रत्त ऩय सनमॊिण कयने का प्रमास कयं । धासभाक कामो भं त्रवशेष रुसि
यख सकते हं ।
16 से 31 जुराई 2012 : अऩने कामाऺेि भं अऩने कामा का अच्िा प्रदशान कयने भं
सभथा हंगे। एकासधक स्त्रोत से धन प्रासद्ऱ के मोग फन यहे हं । आऩके बौसतक सुखसाधनो भं वृत्रद्ध होगी। सभि एवॊ ऩरयवाय के रोगो का सहमोग प्राद्ऱ होगा। इस अवसध भं िर-अिर सॊऩत्रत्त भं ऩूॊस्ज
सनवेश कयना आऩके सरए त्रवशेष रुऩ से पामदे भॊद हो सकता हं । जीवन साथी से ऩूणा सहमोग प्राद्ऱ होगा।

जुराई 2012

79

जुराई 2012 भाससक ऩॊिाॊग
फद

वाय

भाह

ऩऺ

सतसथ

सभासद्ऱ

नऺि

सभासद्ऱ

मोग

सभासद्ऱ

कयण

सभासद्ऱ

िॊद्र

यासश

यत्रव

आषढ़ शुक्र द्रादशी-

09:39:02 अनुयाधा

20:59:39 साध्म

06:29:39 फारव

सोभ

आषढ़ शुक्र िमोदशी

06:30:59 जेद्षा

18:38:29 शुक्र

23:12:14 तैसतर 06:30:59 वृस्द्ळक 18:39:00

3 भॊगर आषढ़ शुक्र ऩूस्णाभा

24:22:00 भूर

16:23:52 ब्रह्म

19:39:49 त्रवत्रद्श

13:50:07 धनु

-

4 फुध

श्रावण कृ ष्ण प्रसतऩदा

21:40:13 ऩूवााषाढ़

14:22:24 इडद्र

16:20:32 फारव

10:58:02 धनु

19:56:00

5 गुरु

श्रावण कृ ष्ण फद्रतीमा

19:23:46 उत्तयाषाढ़

12:46:16 वैधसृ त

13:20:01 तैसतर 08:27:31 भकय

-

6 शुक्र

श्रावण कृ ष्ण तृतीमा

17:42:01 श्रवण

11:40:08 त्रवषकुॊब

10:47:38 वस्णज 06:27:57 भकय

23:22:00

7 शसन

श्रावण कृ ष्ण ितुथॉ

16:42:27 धसनद्षा

11:14:20 प्रीसत

08:46:12 फारव

16:42:27 कुॊब

-

8 यत्रव

श्रावण कृ ष्ण ऩॊिभी

16:29:47 शतसबषा

11:35:24 आमुष्भान 07:22:17 तैसतर 16:29:47 कुॊब

-

9 सोभ

श्रावण कृ ष्ण षद्षी

17:04:56 ऩूवााबाद्रऩद

12:41:30 सौबाग्म

06:35:52 वस्णज 17:04:56 कुॊब

10 भॊगर श्रावण कृ ष्ण सद्ऱभी

18:24:10 उत्तयाबाद्रऩद

14:32:36 शोबन

06:25:06 त्रवत्रद्श

05:39:10 भीन

-

11 फुध

श्रावण कृ ष्ण अद्शभी

20:20:54 ये वसत

17:00:16 असतगॊड

06:48:05 फारव

07:19:01 भीन

17:01:00

12 गुरु

श्रावण कृ ष्ण नवभी

22:42:57 अस्द्वनी

19:56:04 सुकभाा

07:34:31 तैसतर 09:28:53 भेष

-

13 शुक्र

श्रावण कृ ष्ण दशभी

25:16:16 बयणी

23:02:12 धृसत

08:35:57 वस्णज 11:58:27 भेष

-

14 शसन

श्रावण कृ ष्ण एकादशी

27:45:50 कृ सतका

26:08:20 शूर

09:42:05 फव

15 यत्रव

श्रावण कृ ष्ण द्रादशी

30:00:24 योफहस्ण

28:58:32 गॊड

10:42:36 कौरव 16:56:39 वृष

-

श्रावण कृ ष्ण द्रादशी -

06:00:56 भृगसशया

31:24:22 वृत्रद्ध

11:28:07 तैसतर 06:00:56 वृष

18:15:00

17 भॊगर श्रावण कृ ष्ण िमोदशी

07:49:16 भृगसशया

07:24:54 ध्रुव

11:53:58 वस्णज 07:49:16 सभथुन

18 फुध

श्रावण कृ ष्ण ितुदाशी

09:08:33 आद्रा

09:21:41 व्माघात

11:55:26 शकुसन 09:08:33 सभथुन 28:28:00

19 गुरु

श्रावण कृ ष्ण अभावस्मा 09:55:02 ऩुनवासु

10:46:36 हषाण

11:30:39 नाग

1

2

सोभ
16

िमोदशी
- ितुदाशी

िमोदशी

09:39:02 वृस्द्ळक

सभासद्ऱ

14:32:42 भेष

09:55:02 कका

-

06:20:00

05:50:00

-

-

जुराई 2012

80

20 शुक्र

श्रावण शुक्र प्रसतऩदा

10:08:42 ऩुष्म

11:40:35 वज्र

10:42:27 फव

21 शसन

श्रावण शुक्र फद्रतीमा

09:54:15 अद्ऴेषा

12:06:26 ससत्रद्ध

09:29:52 कौरव 09:54:15 कका

22 यत्रव

श्रावण शुक्र तृतीमा

09:14:29 भघा

12:08:52 व्मसतऩात

07:58:33 गय

09:14:29 ससॊह

-

23 सोभ

श्रावण शुक्र ितुथॉ

08:13:10 ऩूवाापाल्गुनी

11:48:47 वरयमान

06:09:25 त्रवत्रद्श

08:13:10 ससॊह

17:41:00

06:52:10 उत्तयापाल्गुनी 11:11:51 सशव

25:45:36 फारव

06:52:10 कडमा

-

21:47:00

भॊगर श्रावण शुक्र ऩॊिभी24

षद्षी

10:08:42 कका

12:07:00

25 फुध

श्रावण शुक्र सद्ऱभी

27:26:28 हस्त

10:18:02 ससत्रद्ध

23:16:09 गय

16:22:43 कडमा

26 गुरु

श्रावण शुक्र अद्शभी

25:23:17 सििा

09:12:02 साध्म

20:34:32 त्रवत्रद्श

14:27:02 तुरा

-

27 शुक्र

श्रावण शुक्र नवभी

23:08:50 स्वाती

07:51:58 शुब

17:45:24 फारव

12:18:13 तुरा

24:46:00

28 शसन

श्रावण शुक्र दशभी

20:46:54 त्रवशाखा

06:22:32 शुक्र

14:46:54 तैसतर 09:59:06 वृस्द्ळक

29 यत्रव

श्रावण शुक्र एकादशी

18:17:28 जेद्षा

27:02:28 ब्रह्म

11:43:43 वस्णज 07:32:28 वृस्द्ळक 27:02:00

30 सोभ

श्रावण शुक्र द्रादशी

15:46:09 भूर

25:18:58 इडद्र

08:36:47 फारव

15:46:09 धनु

-

13:17:39 ऩूवााषाढ़

23:42:02 त्रवषकुॊब

26:31:43 तैसतर 13:17:39 धनु

-

31 भॊगर श्रावण शुक्र िमोदशी

-

शसन ऩीड़ा सनवायक
सॊऩूणा प्राणप्रसतत्रद्षत 22 गेज शुद्ध स्टीर भं सनसभात अखॊफडत ऩौरुषाकाय शसन मॊि
ऩुरुषाकाय शसन मॊि (स्टीर भं) को तीव्र प्रबावशारी फनाने हे तु शसन की कायक धातु शुद्ध स्टीर(रोहे ) भं फनामा गमा
हं । स्जस के प्रबाव से साधक को तत्कार राब प्राद्ऱ होता हं । मफद जडभ कुॊडरी भं शसन प्रसतकूर होने ऩय व्मत्रि को
अनेक कामं भं असपरता प्राद्ऱ होती है , कबी व्मवसाम भं घटा, नौकयी भं ऩये शानी, वाहन दघ
ा ना, गृह क्रेश आफद
ु ट

ऩये शानीमाॊ फढ़ती जाती है ऐसी स्स्थसतमं भं प्राणप्रसतत्रद्षत ग्रह ऩीड़ा सनवायक शसन मॊि की अऩने को व्मऩाय स्थान मा
घय भं स्थाऩना कयने से अनेक राब सभरते हं । मफद शसन की ढै ़मा मा साढ़े साती का सभम हो तो इसे अवश्म ऩूजना
िाफहए। शसनमॊि के ऩूजन भाि से व्मत्रि को भृत्मु, कजा, कोटा केश, जोडो का ददा , फात योग तथा रम्फे सभम के सबी
प्रकाय के योग से ऩये शान व्मत्रि के सरमे शसन मॊि असधक राबकायी होगा। नौकयी ऩेशा आफद के रोगं को ऩदौडनसत
बी शसन द्राया ही सभरती है अत् मह मॊि असत उऩमोगी मॊि है स्जसके द्राया शीघ्र ही राब ऩामा जा सकता है ।

भूल्म: 1050 से 8200

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81

जुराई 2012

जुराई-2012 भाससक व्रत-ऩवा-त्मौहाय
फद

1

2

वाय

भाह

ऩऺ

यत्रव

आषढ़

शुक्र

सोभ

आषढ़

शुक्र

सतसथ
द्रादशी-

सभासद्ऱ

09:39:02 प्रदोष व्रत, िातुभाास व्रत एवॊ सनमभ प्रायॊ ब, श्रीकृ ष्ण द्रादशी, वाभन-

ऩूजन, हाय द्रादशी, श्माभफाफा द्रादशी, वासुदेव द्रादशी. जमाऩावाती व्रत

िमोदशी

प्रायॊ ब (गु ्ज),

िमोदशी - 06:30:59
ितुदाशी

प्रभुख व्रत-त्मोहाय

सशव-शमन ितुदाशी (ओड़ी), ितुदाशी व्रत,

24:22:00 स्नान-दान-व्रत हे तु उत्तभ आषाढ़ी ऩूस्णाभा, गुरु ऩूस्णाभा भहोत्सव,

3

भॊगर

आषढ़

शुक्र

ऩूस्णाभा

व्मास-ऩूजन, भुफड़मा ऩूनभ, गोवद्धा न ऩरयक्रभा, दस्ऺणाभूसता ऩूजन,

सॊडमाससमं का िातुभाास प्रायॊ ब, कोफकरा व्रत प्रायॊ ब, भैसथर सार
1420 प्रायॊ ब,

21:40:13 स्वाभी त्रववेकानॊद स्भृसत फदवस, श्रावण (सावन भास) प्रायॊ ब, सशव

फुध

श्रावण

कृ ष्ण

प्रसतऩदा

5

गुरु

श्रावण

कृ ष्ण

फद्रतीमा

19:23:46 अशूडमशमन व्रत, फहॊ डोरा प्रायॊ ब, जमाऩावाती व्रत ऩूणा (गु ्ज),

6

शुक्र

श्रावण

कृ ष्ण

तृतीमा

17:42:01 सॊकद्शी श्रीगणेशितुथॉ व्रत, (िॊ.उ.या.8:56)

7

शसन

श्रावण

कृ ष्ण

ितुथॉ

16:42:27 -

8

यत्रव

श्रावण

कृ ष्ण

ऩॊिभी

16:29:47 नागऩॊिभी, भौना ऩॊिभी, बैय्मा ऩॊिभी,

9

सोभ

श्रावण

कृ ष्ण

षद्षी

17:04:56 सावन का प्रथभ सोभवाय व्रत, गौयी-शॊकय ऩूजन, रुद्रासबषेक उत्तभ,

10

भॊगर

श्रावण

कृ ष्ण

सद्ऱभी

18:24:10 सावन के प्रत्मेक भॊगरवाय को बौभ व्रत, शीतरा सद्ऱभी (ओड़ी),

11

फुध

श्रावण

कृ ष्ण

अद्शभी

20:20:54 काराद्शभी व्रत, फुधाद्शभी ऩवा (सूमग्र
ा हण के सभान),

12

गुरु

श्रावण

कृ ष्ण

नवभी

22:42:57 कौभायी ऩूजा नवभी

13

शुक्र

श्रावण

कृ ष्ण

दशभी

25:16:16 -

14

शसन

श्रावण

कृ ष्ण

एकादशी

27:45:50 कासभका एकादशी व्रत, व्मसतऩात भहाऩात यात्रि 4:02 फजे से

15

यत्रव

श्रावण

कृ ष्ण

द्रादशी

30:00:24 भहाव्मसतऩात फदन-यात, एकादशी व्रत,

4

16

सोभ

श्रावण

कृ ष्ण

द्रादशी िमोदशी

अिान शुरू, सावन भं िातुभाास के व्रत धायी हे तु साग त्माग कयने का
शास्त्रंि त्रवधान,

06:00:56 जुराई- सावन का दस
ू या सोभवाय व्रत, सोभ-प्रदोष व्रत, भहाव्मसतऩात

प्रात: 6:42 फजे तक, कका-सॊक्रास्डत प्रात: 9:35 फजे, सॊक्रास्डत भं

स्नान-दान हे तु ऩुण्मकार सूमोदम से प्रात: 9:35 फजे तक, सूमा
दस्ऺणामन, अमन सॊक्रास्डत के फाद 3 फदनं तक शुब कामा वस्जात,

82

जुराई 2012

ऩूजा-सॊकल्ऩ भं प्रमोजनीम वषाा ऋतु प्रायॊ ब,
17

भॊगर

श्रावण

कृ ष्ण

िमोदशी

07:49:16 भाससक सशवयात्रि व्रत, भॊगरा गौयी, सशव ितुदाशी,

18

फुध

श्रावण

कृ ष्ण

ितुदाशी

09:08:33 श्राद्ध की अभावस्मा, दीऩ ऩूजा, आफद अभावस्मा (द.बा.), ककाट ऩूजा,

19

गुरु

श्रावण

कृ ष्ण

अभावस्मा

20

शुक्र

श्रावण

शुक्र

प्रसतऩदा

21

शसन

श्रावण

शुक्र

फद्रतीमा

22

यत्रव

श्रावण

शुक्र

तृतीमा

23

सोभ

श्रावण

शुक्र

24

भॊगर

श्रावण

शुक्र

25

फुध

श्रावण

26

गुरु

27

ितुथॉ

09:55:02 स्नान-दान हे तु उत्तभ श्रावणी अभावस्मा, हरयमारी अभावस, सितरगी

अभावस्मा (ओड़ी), ऩुष्म नऺि (फदन 11:6 से)

10:08:42 नवीन िॊद्र-दशान, भहारक्ष्भी-ऩूजा, निव्रत प्रायॊ ब, ऩुष्म नऺि (यात्रि

12:7 तक)

09:54:15 ससॊधाया दज
ू ,
09:14:29 हरयमारी तीज (िोटी तीज), भधुस्रवा तृतीमा व्रत, स्वणागौयी व्रत,

वयदत्रवनामक ितुथॉ व्रत, (िॊ.उ.या. 9:10), दव
ू ाा गणऩसत व्रत,

08:13:10 सावन का तृतीम सोभवाय व्रत, नागऩॊिभी, तऺक-ऩूजन, जाग्रतगौयी

ऩॊिभी (ओड़ी), रोकभाडम सतरक एवॊ िॊद्रशेखय आजाद जमॊती,

ऩॊिभी-

06:52:10 वणा शृमार षद्षी, रुण्ठन षद्षी (फॊगा), कस्ल्क अवताय सतसथ, याॊधण िठ

शुक्र

सद्ऱभी

27:26:28 गोस्वाभी तुरसीदास जमॊती

श्रावण

शुक्र

अद्शभी

25:23:17 श्रीदग
ु ााद्शभी व्रत, श्रीअडनऩूणााद्शभी व्रत,

शुक्र

श्रावण

शुक्र

नवभी

28

शसन

श्रावण

शुक्र

दशभी

20:46:54 -

29

यत्रव

श्रावण

शुक्र

एकादशी

18:17:28 ऩुिदा एकादशी, ऩत्रविा एकादशी व्रत,

30

सोभ

श्रावण

शुक्र

द्रादशी

31

भॊगर

श्रावण

शुक्र

िमोदशी

षद्षी

(गुज),

23:08:50 वयदरक्ष्भी व्रत, नकुर नवभी, फगीिा नवभी, वैधसृ त भहाऩात फदन 3:20

से यात्रि 12:41 फजे तक

15:46:09 सावन का ितुथा सोभवाय व्रत, सोभ प्रदोष व्रत, ऩत्रविा फायस, श्रीत्रवष्णु

ऩत्रविायोऩण, श्रीधय द्रादशी, श्माभफाफा द्रादशी

13:17:39 आखेटक िमोदशी (ओड़ी), सशवऩत्रविायोऩण ितुदाशी

क्मा आऩ फकसी सभस्मा से ग्रस्त हं ?
आऩके ऩास अऩनी सभस्माओॊ से िुटकाया ऩाने हे तु ऩूजा-अिाना, साधना, भॊि जाऩ इत्माफद कयने का सभम नहीॊ हं ?
अफ आऩ अऩनी सभस्माओॊ से फीना फकसी त्रवशेष ऩूजा-अिाना, त्रवसध-त्रवधान के आऩको अऩने कामा भं सपरता प्राद्ऱ
कय सके एवॊ आऩको अऩने जीवन के सभस्त सुखो को प्राद्ऱ कयने का भागा प्राद्ऱ हो सके इस सरमे गुरुत्व कामाारत

द्राया हभाया उद्दे श्म शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से त्रवसशद्श तेजस्वी भॊिो द्राया ससद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुि त्रवसबडन प्रकाय के
मडि- कवि एवॊ शुब परदामी ग्रह यत्न एवॊ उऩयत्न आऩके घय तक ऩहोिाने का है ।

जुराई 2012

83

गणेश रक्ष्भी मॊि
प्राण-प्रसतत्रद्षत गणेश रक्ष्भी मॊि को अऩने घय-दक
ु ान-ओफपस-पैक्टयी भं ऩूजन स्थान, गल्रा मा अरभायी भं स्थात्रऩत
कयने व्माऩाय भं त्रवशेष राब प्राद्ऱ होता हं । मॊि के प्रबाव से बाग्म भं उडनसत, भान-प्रसतद्षा एवॊ

व्माऩय भं वृत्रद्ध होती

हं एवॊ आसथाक स्स्थभं सुधाय होता हं । गणेश रक्ष्भी मॊि को स्थात्रऩत कयने से बगवान गणेश औय दे वी रक्ष्भी का

Rs.730 से Rs.10900 तक

सॊमुि आशीवााद प्राद्ऱ होता हं ।

भॊगर मॊि से ऋण भुत्रि
भॊगर मॊि को जभीन-जामदाद के त्रववादो को हर कयने के काभ भं राब दे ता हं , इस के असतरयि व्मत्रि को ऋण
भुत्रि हे तु भॊगर साधना से असत शीध्र राब प्राद्ऱ होता हं ।

त्रववाह आफद भं भॊगरी जातकं के कल्माण के सरए भॊगर

मॊि की ऩूजा कयने से त्रवशेष राब प्राद्ऱ होता हं । प्राण प्रसतत्रद्षत भॊगर मॊि के ऩूजन से बाग्मोदम, शयीय भं खून की
कभी, गबाऩात से फिाव, फुखाय, िेिक, ऩागरऩन, सूजन औय घाव, मौन शत्रि भं वृत्रद्ध, शिु त्रवजम, तॊि भॊि के दद्श
ु प्रबा,

भूल्म भाि Rs- 730

बूत-प्रेत बम, वाहन दघ
ा नाओॊ, हभरा, िोयी इत्मादी से फिाव होता हं ।
ु ट

कुफेय मॊि
कुफेय मॊि के ऩूजन से स्वणा राब, यत्न राब, ऩैतक
ृ सम्ऩत्ती एवॊ गड़े हुए धन से राब प्रासद्ऱ फक काभना कयने वारे

व्मत्रि के सरमे कुफेय मॊि अत्मडत सपरता दामक होता हं । एसा शास्त्रोि विन हं । कुफेय मॊि के ऩूजन से एकासधक
स्त्रोि से धन का प्राद्ऱ होकय धन सॊिम होता हं ।

ताम्र ऩि ऩय सुवणा ऩोरीस

ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीस

ताम्र ऩि ऩय

(Gold Plated)

(Silver Plated)

(Copper)

साईज
1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

भूल्म
460
820
1650
2350
3600
6400
10800

साईज

भूल्म

साईज

भूल्म

1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

370
640
1090
1650
2800
5100
8200

1” X 1”
2” X 2”
3” X 3”
4” X 4”
6” X 6”
9” X 9”
12” X12”

255
460
730
1090
1900
3250
6400

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84

जुराई 2012

नवयत्न जफड़त श्री मॊि
शास्त्र विन के अनुसाय शुद्ध सुवणा मा यजत भं सनसभात श्री मॊि के िायं औय मफद नवयत्न जड़वा ने ऩय मह नवयत्न
जफड़त श्री मॊि कहराता हं । सबी यत्नो को उसके सनस्द्ळत स्थान ऩय जड़ कय रॉकेट के रूऩ भं धायण कयने से व्मत्रि को
अनॊत एद्वमा एवॊ रक्ष्भी की प्रासद्ऱ होती हं । व्मत्रि को एसा आबास होता हं जैसे भाॊ रक्ष्भी उसके साथ हं । नवग्रह को
श्री मॊि के साथ रगाने से ग्रहं की अशुब दशा का धायण कयने वारे व्मत्रि ऩय प्रबाव नहीॊ होता हं । गरे भं होने के
कायण मॊि ऩत्रवि यहता हं एवॊ स्नान कयते सभम इस मॊि ऩय स्ऩशा कय जो जर त्रफॊद ु शयीय को रगते हं , वह गॊगा
जर के सभान ऩत्रवि होता हं । इस सरमे इसे सफसे तेजस्वी एवॊ परदासम कहजाता हं । जैसे अभृत से उत्तभ कोई

औषसध नहीॊ, उसी प्रकाय रक्ष्भी प्रासद्ऱ के सरमे श्री मॊि से उत्तभ कोई मॊि सॊसाय भं नहीॊ हं एसा शास्त्रोि विन हं । इस
प्रकाय के नवयत्न जफड़त श्री मॊि गुरूत्व कामाारम द्राया शुब भुहूता भं प्राण प्रसतत्रद्षत कयके फनावाए जाते हं ।

अद्श रक्ष्भी कवि
अद्श रक्ष्भी कवि को धायण कयने से व्मत्रि ऩय सदा भाॊ भहा रक्ष्भी की कृ ऩा एवॊ आशीवााद फना

यहता हं । स्जस्से भाॊ रक्ष्भी के अद्श रुऩ (१)-आफद रक्ष्भी, (२)-धाडम रक्ष्भी, (३)-धैयीम रक्ष्भी, (४)गज रक्ष्भी, (५)-सॊतान रक्ष्भी, (६)-त्रवजम रक्ष्भी, (७)-त्रवद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन सबी
रुऩो का स्वत् अशीवााद प्राद्ऱ होता हं ।

भूल्म भाि: Rs-1250

भॊि ससद्ध व्माऩाय वृत्रद्ध कवि
व्माऩाय वृत्रद्ध कवि व्माऩाय के शीघ्र उडनसत के सरए उत्तभ हं । िाहं कोई बी व्माऩाय हो अगय उसभं राब के स्थान ऩय
फाय-फाय हासन हो यही हं । फकसी प्रकाय से व्माऩाय भं फाय-फाय फाॊधा उत्ऩडन हो यही हो! तो सॊऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत भॊि
ससद्ध ऩूणा िैतडम मुि व्माऩात वृत्रद्ध मॊि को व्मऩाय स्थान मा घय भं स्थात्रऩत कयने से शीघ्र ही व्माऩाय वृत्रद्ध एवॊ

भूल्म भाि: Rs.730 & 1050

सनतडतय राब प्राद्ऱ होता हं ।

भॊगर मॊि
(त्रिकोण) भॊगर मॊि को जभीन-जामदाद के त्रववादो को हर कयने के काभ भं राब दे ता हं , इस के असतरयि व्मत्रि को
ऋण भुत्रि हे तु भॊगर साधना से असत शीध्र राब प्राद्ऱ होता हं । त्रववाह आफद भं भॊगरी जातकं के कल्माण के सरए
भॊगर मॊि की ऩूजा कयने से त्रवशेष राब प्राद्ऱ होता हं ।

भूल्म भाि Rs- 730

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85

जुराई 2012

त्रववाह सॊफॊसधत सभस्मा
क्मा आऩके रडके-रडकी फक आऩकी शादी भं अनावश्मक रूऩ से त्रवरम्फ हो यहा हं मा उनके वैवाफहक जीवन भं खुसशमाॊ कभ
होती जायही हं औय सभस्मा असधक फढती जायही हं । एसी स्स्थती होने ऩय अऩने रडके-रडकी फक कुॊडरी का अध्ममन

अवश्म कयवारे औय उनके वैवाफहक सुख को कभ कयने वारे दोषं के सनवायण के उऩामो के फाय भं त्रवस्ताय से जनकायी प्राद्ऱ
कयं ।

सशऺा से सॊफॊसधत सभस्मा
क्मा आऩके रडके-रडकी की ऩढाई भं अनावश्मक रूऩ से फाधा-त्रवघ्न मा रुकावटे हो यही हं ? फच्िो को अऩने ऩूणा ऩरयश्रभ
एवॊ भेहनत का उसित पर नहीॊ सभर यहा? अऩने रडके-रडकी की कुॊडरी का त्रवस्तृत अध्ममन अवश्म कयवारे औय
उनके त्रवद्या अध्ममन भं आनेवारी रुकावट एवॊ दोषो के कायण एवॊ उन दोषं के सनवायण के उऩामो के फाय भं त्रवस्ताय से
जनकायी प्राद्ऱ कयं ।

क्मा आऩ फकसी सभस्मा से ग्रस्त हं ?
आऩके ऩास अऩनी सभस्माओॊ से िुटकाया ऩाने हे तु ऩूजा-अिाना, साधना, भॊि जाऩ इत्माफद कयने का सभम नहीॊ हं ?
अफ आऩ अऩनी सभस्माओॊ से फीना फकसी त्रवशेष ऩूजा-अिाना, त्रवसध-त्रवधान के आऩको अऩने कामा भं सपरता प्राद्ऱ
कय सके एवॊ आऩको अऩने जीवन के सभस्त सुखो को प्राद्ऱ कयने का भागा प्राद्ऱ हो सके इस सरमे गुरुत्व कामाारत
द्राया हभाया उद्दे श्म शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से त्रवसशद्श तेजस्वी भॊिो द्राया ससद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुि त्रवसबडन प्रकाय के
मडि- कवि एवॊ शुब परदामी ग्रह यत्न एवॊ उऩयत्न आऩके घय तक ऩहोिाने का हं ।

ज्मोसतष सॊफॊसधत त्रवशेष ऩयाभशा
ज्मोसत त्रवऻान, अॊक ज्मोसतष, वास्तु एवॊ आध्मास्त्भक ऻान सं सॊफॊसधत त्रवषमं भं हभाये 30 वषो से असधक वषा के
अनुबवं के साथ ज्मोसतस से जुडे नमे-नमे सॊशोधन के आधाय ऩय आऩ अऩनी हय सभस्मा के सयर सभाधान प्राद्ऱ कय
सकते हं ।

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ओनेक्स
जो व्मत्रि ऩडना धायण कयने भे असभथा हो उडहं फुध ग्रह के उऩयत्न ओनेक्स को धायण कयना िाफहए।
उच्ि सशऺा प्रासद्ऱ हे तु औय स्भयण शत्रि के त्रवकास हे तु ओनेक्स यत्न की अॊगूठी को दामं हाथ की सफसे िोटी

उॊ गरी मा रॉकेट फनवा कय गरे भं धायण कयं । ओनेक्स यत्न धायण कयने से त्रवद्या-फुत्रद्ध की प्रासद्ऱ हो होकय स्भयण
शत्रि का त्रवकास होता हं ।

जुराई 2012

86

जुराई 2012 -त्रवशेष मोग
कामा ससत्रद्ध मोग
6

सूमोदम से फदन 11.39 तक

16

सम्ऩूणा फदन-यात

10

सूमोदम से फदन 2.31 तक

19

सम्ऩूणा फदन-यात

12

सूमोदम से सामॊ 7.54 तक

25

सूमोदम से प्रात: 10.17 तक

14/15

यात्रि 2.07 से सूमोदम तक

29/30 यात्रि 3.01 से सूमोदम तक

अभृत मोग
14/15

यात्रि 2.07 से सूमोदम तक

16

सम्ऩूणा फदन-यात

19

प्रात: 10.45 से फदन-यात

फद्रऩुष्कय मोग (दोगुना) मोग
16

प्रात: 4.57 से सूमोदम तक

गुरु ऩुष्माभृत मोग
19

जुराई को प्रात: 10.45 से फदन-यात

मोग पर :

 कामा ससत्रद्ध मोग भे फकमे गमे शुब कामा भे सनस्द्ळत सपरता प्राद्ऱ होती हं , एसा शास्त्रोि विन हं ।
 फद्रऩुष्कय मोग भं फकमे गमे शुब कामो का राब दोगुना होता हं । एसा शास्त्रोि विन हं ।

 गुरु ऩुष्माभृत मोग भं फकमे गमे फकमे गमे शुब कामा भे शुब परो की प्रासद्ऱ होती हं , एसा शास्त्रोि विन हं ।

दै सनक शुब एवॊ अशुब सभम ऻान तासरका
गुसरक कार

मभ कार

(शुब)

(अशुब)

सभम अवसध

सभम अवसध

सभम अवसध

यत्रववाय

03:00 से 04:30

12:00 से 01:30

04:30 से 06:00

सोभवाय

01:30 से 03:00

10:30 से 12:00

07:30 से 09:00

भॊगरवाय

12:00 से 01:30

09:00 से 10:30

03:00 से 04:30

फुधवाय

10:30 से 12:00

07:30 से 09:00

12:00 से 01:30

गुरुवाय

09:00 से 10:30

06:00 से 07:30

01:30 से 03:00

शुक्रवाय

07:30 से 09:00

03:00 से 04:30

10:30 से 12:00

शसनवाय

06:00 से 07:30

01:30 से 03:00

09:00 से 10:30

वाय

याहु कार
(अशुब)

जुराई 2012

87

फदन के िौघफडमे
सभम

यत्रववाय

सोभवाय

भॊगरवाय फुधवाय गुरुवाय

शुक्रवाय

शसनवाय

06:00 से 07:30

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

शुब

िर

कार

07:30 से 09:00

िर

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

शुब

09:00 से 10:30

राब

शुब

िर

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

10:30 से 12:00

अभृत

योग

राब

शुब

िर

कार

उद्रे ग

12:00 से 01:30

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

शुब

िर

01:30 से 03:00

शुब

िर

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

03:00 से 04:30

योग

राब

शुब

िर

कार

उद्रे ग

अभृत

04:30 से 06:00

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

शुब

िर

कार

यात के िौघफडमे
सभम

यत्रववाय

सोभवाय

भॊगरवाय

फुधवाय गुरुवाय

शुक्रवाय

शसनवाय

06:00 से 07:30

शुब

िर

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

09:00 से 10:30

िर

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

शुब

10:30 से 12:00

योग

राब

शुब

िर

कार

उद्रे ग

अभृत

12:00 से 01:30

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

शुब

िर

01:30 से 03:00

राब

शुब

िर

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

03:00 से 04:30

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

शुब

िर

कार

04:30 से 06:00

शुब

िर

कार

उद्रे ग

अभृत

योग

राब

07:30 से 09:00

अभृत

योग

राब

शुब

िर

कार

उद्रे ग

शास्त्रोि भत के अनुशाय मफद फकसी बी कामा का प्रायॊ ब शुब भुहूता मा शुब सभम ऩय फकमा जामे तो कामा भं सपरता

प्राद्ऱ होने फक सॊबावना ज्मादा प्रफर हो जाती हं । इस सरमे दै सनक शुब सभम िौघफड़मा दे खकय प्राद्ऱ फकमा जा सकता हं ।

नोट: प्राम् फदन औय यात्रि के िौघफड़मे फक सगनती क्रभश् सूमोदम औय सूमाास्त से फक जाती हं । प्रत्मेक िौघफड़मे फक अवसध 1

घॊटा 30 सभसनट अथाात डे ढ़ घॊटा होती हं । सभम के अनुसाय िौघफड़मे को शुबाशुब तीन बागं भं फाॊटा जाता हं , जो क्रभश् शुब,
भध्मभ औय अशुब हं ।

* हय कामा के सरमे शुब/अभृत/राब का

िौघफडमे के स्वाभी ग्रह

शुब िौघफडमा

भध्मभ िौघफडमा

अशुब िौघफड़मा

िौघफडमा स्वाभी ग्रह

िौघफडमा स्वाभी ग्रह

िौघफडमा

स्वाभी ग्रह

शुब

गुरु

िय

उद्बे ग

सूमा

अभृत

िॊद्रभा

कार

शसन

राब

फुध

योग

भॊगर

शुक्र

िौघफड़मा उत्तभ भाना जाता हं ।

* हय कामा के सरमे िर/कार/योग/उद्रे ग
का िौघफड़मा उसित नहीॊ भाना जाता।

जुराई 2012

88

फदन फक होया - सूमोदम से सूमाास्त तक
वाय

1.घॊ

2.घॊ

3.घॊ

4.घॊ

5.घॊ

6.घॊ

7.घॊ

8.घॊ

9.घॊ

यत्रववाय

सूमा

शुक्र

फुध

िॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

िॊद्र

शसन

सोभवाय

िॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर सूमा

शुक्र

फुध

िॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

भॊगरवाय

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

िॊद्र

फुधवाय

फुध

िॊद्र

शसन

गुरु भॊगर सूमा

शुक्र

फुध

िॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

गुरुवाय

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

शुक्रवाय

शुक्र

फुध

िॊद्र

शसन

गुरु भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

िॊद्र

शसन

गुरु

शसनवाय

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

िॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

िॊद्र

िॊद्र
फुध

10.घॊ 11.घॊ 12.घॊ

यात फक होया – सूमाास्त से सूमोदम तक
यत्रववाय

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

सोभवाय

शुक्र

फुध

िॊद्र

शसन

भॊगरवाय

शसन

गुरु

भॊगर

फुधवाय

सूमा

शुक्र

फुध

गुरुवाय

िॊद्र

शसन

गुरु

शुक्रवाय

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

गुरु भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

िॊद्र

शसन

गुरु

सूमा

शुक्र

फुध

िॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

िॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

िॊद्र

शसन

भॊगर सूमा

शुक्र

फुध

िॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शसन

गुरु

भॊगर

सूमा

शुक्र

फुध

िॊद्र

शसनवाय

फुध

िॊद्र

शसन

गुरु भॊगर सूमा

शुक्र

फुध

िॊद्र

शसन

गुरु

भॊगर

िॊद्र

िॊद्र

होया भुहूता को कामा ससत्रद्ध के सरए ऩूणा परदामक एवॊ अिूक भाना जाता हं , फदन-यात के २४ घॊटं भं शुब-अशुब सभम
को सभम से ऩूवा ऻात कय अऩने कामा ससत्रद्ध के सरए प्रमोग कयना िाफहमे।

त्रवद्रानो के भत से इस्च्ित कामा ससत्रद्ध के सरए ग्रह से सॊफॊसधत होया का िुनाव कयने से त्रवशेष राब
प्राद्ऱ होता हं ।

 सूमा फक होया सयकायी कामो के सरमे उत्तभ होती हं ।
 िॊद्रभा फक होया सबी कामं के सरमे उत्तभ होती हं ।
 भॊगर फक होया कोटा -किेयी के कामं के सरमे उत्तभ होती हं ।
 फुध फक होया त्रवद्या-फुत्रद्ध अथाात ऩढाई के सरमे उत्तभ होती हं ।
 गुरु फक होया धासभाक कामा एवॊ त्रववाह के सरमे उत्तभ होती हं ।
 शुक्र फक होया मािा के सरमे उत्तभ होती हं ।
 शसन फक होया धन-द्रव्म सॊफॊसधत कामा के सरमे उत्तभ होती हं ।

जुराई 2012

89

ग्रह िरन जुराई -2012
Day
1

Sun

Mon

Ma

02:15:32

07:07:09

05:04:38

2

02:16:29

07:21:54

3

02:17:26

4

Me

Jup

Ven

Sat

Rah

Ket

Ua

Nep

Plu

03:11:16

01:10:13

01:13:39

05:28:45

07:10:41

01:10:41

11:14:26

10:08:56

08:14:11

05:05:10

03:12:12

01:10:26

01:13:48

05:28:45

07:10:41

01:10:41

11:14:27

10:08:55

08:14:09

08:06:40

05:05:41

03:13:05

01:10:38

01:13:59

05:28:46

07:10:39

01:10:39

11:14:27

10:08:54

08:14:08

02:18:23

08:21:18

05:06:12

03:13:54

01:10:51

01:14:12

05:28:47

07:10:35

01:10:35

11:14:28

10:08:53

08:14:06

5

02:19:20

09:05:42

05:06:44

03:14:39

01:11:04

01:14:26

05:28:48

07:10:30

01:10:30

11:14:28

10:08:52

08:14:05

6

02:20:18

09:19:46

05:07:16

03:15:21

01:11:16

01:14:43

05:28:49

07:10:24

01:10:24

11:14:28

10:08:51

08:14:03

7

02:21:15

10:03:27

05:07:48

03:15:59

01:11:28

01:15:02

05:28:50

07:10:17

01:10:17

11:14:29

10:08:50

08:14:02

8

02:22:12

10:16:42

05:08:20

03:16:33

01:11:41

01:15:22

05:28:51

07:10:12

01:10:12

11:14:29

10:08:49

08:14:00

9

02:23:09

10:29:33

05:08:53

03:17:03

01:11:53

01:15:44

05:28:52

07:10:08

01:10:08

11:14:29

10:08:48

08:13:59

10

02:24:06

11:12:02

05:09:25

03:17:29

01:12:05

01:16:08

05:28:54

07:10:05

01:10:05

11:14:29

10:08:47

08:13:57

11

02:25:04

11:24:14

05:09:58

03:17:50

01:12:17

01:16:34

05:28:55

07:10:04

01:10:04

11:14:30

10:08:46

08:13:56

12

02:26:01

00:06:12

05:10:31

03:18:07

01:12:30

01:17:01

05:28:57

07:10:05

01:10:05

11:14:30

10:08:45

08:13:54

13

02:26:58

00:18:02

05:11:04

03:18:19

01:12:42

01:17:30

05:28:59

07:10:06

01:10:06

11:14:30

10:08:44

08:13:53

14

02:27:55

00:29:50

05:11:37

03:18:27

01:12:53

01:18:00

05:29:00

07:10:07

01:10:07

11:14:30

10:08:43

08:13:51

15

02:28:52

01:11:40

05:12:10

03:18:30

01:13:05

01:18:32

05:29:02

07:10:08

01:10:08

11:14:30

10:08:42

08:13:50

16

02:29:50

01:23:36

05:12:44

03:18:28

01:13:17

01:19:04

05:29:04

07:10:07

01:10:07

11:14:30

10:08:41

08:13:49

17

03:00:47

02:05:42

05:13:17

03:18:21

01:13:29

01:19:39

05:29:06

07:10:04

01:10:04

11:14:29

10:08:39

08:13:47

18

03:01:44

02:18:00

05:13:51

03:18:09

01:13:40

01:20:14

05:29:08

07:09:58

01:09:58

11:14:29

10:08:38

08:13:46

19

03:02:41

03:00:32

05:14:25

03:17:53

01:13:52

01:20:51

05:29:11

07:09:51

01:09:51

11:14:29

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08:13:44

20

03:03:39

03:13:20

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01:14:03

01:21:29

05:29:13

07:09:42

01:09:42

11:14:29

10:08:36

08:13:43

21

03:04:36

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05:15:33

03:17:07

01:14:15

01:22:08

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01:09:33

11:14:28

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22

03:05:33

04:09:37

05:16:07

03:16:38

01:14:26

01:22:48

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07:09:24

01:09:24

11:14:28

10:08:33

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23

03:06:31

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07:09:16

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24

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25

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01:24:54

05:29:26

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01:09:07

11:14:26

10:08:29

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26

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06:04:30

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01:25:38

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07:09:05

01:09:05

11:14:26

10:08:28

08:13:35

27

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07:09:05

01:09:05

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28

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07:09:06

01:09:06

11:14:25

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29

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07:09:06

01:09:06

11:14:24

10:08:24

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30

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07:09:04

01:09:04

11:14:23

10:08:22

08:13:29

31

03:14:09

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05:21:23

03:10:33

01:16:03

01:29:30

05:29:45

07:09:00

01:09:00

11:14:22

10:08:21

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90

जुराई 2012

सवा योगनाशक मॊि/कवि
भनुष्म अऩने जीवन के त्रवसबडन सभम ऩय फकसी ना फकसी साध्म मा असाध्म योग से ग्रस्त होता हं ।
उसित उऩिाय से ज्मादातय साध्म योगो से तो भुत्रि सभर जाती हं , रेफकन कबी-कबी साध्म योग होकय बी असाध्मा
होजाते हं , मा कोइ असाध्म योग से ग्रससत होजाते हं । हजायो राखो रुऩमे खिा कयने ऩय बी असधक राब प्राद्ऱ नहीॊ हो
ऩाता। डॉक्टय द्राया फदजाने वारी दवाईमा अल्ऩ सभम के सरमे कायगय सात्रफत होती हं , एसस स्स्थती भं राबा प्रासद्ऱ के
सरमे व्मत्रि एक डॉक्टय से दस
ू ये डॉक्टय के िक्कय रगाने को फाध्म हो जाता हं ।
बायतीम ऋषीमोने अऩने मोग साधना के प्रताऩ से योग शाॊसत हे तु त्रवसबडन आमुवये औषधो के असतरयि मॊि,
भॊि एवॊ तॊि उल्रेख अऩने ग्रॊथो भं कय भानव जीवन को राब प्रदान कयने का साथाक प्रमास हजायो वषा ऩूवा फकमा था।
फुत्रद्धजीवो के भत से जो व्मत्रि जीवनबय अऩनी फदनिमाा ऩय सनमभ, सॊमभ यख कय आहाय ग्रहण कयता हं , एसे व्मत्रि
को त्रवसबडन योग से ग्रससत होने की सॊबावना कभ होती हं । रेफकन आज के फदरते मुग भं एसे व्मत्रि बी बमॊकय योग
से ग्रस्त होते फदख जाते हं । क्मोफक सभग्र सॊसाय कार के अधीन हं । एवॊ भृत्मु सनस्द्ळत हं स्जसे त्रवधाता के अरावा
औय कोई टार नहीॊ सकता, रेफकन योग होने फक स्स्थती भं व्मत्रि योग दयू कयने का प्रमास तो अवश्म कय सकता हं ।
इस सरमे मॊि भॊि एवॊ तॊि के कुशर जानकाय से मोग्म भागादशान रेकय व्मत्रि योगो से भुत्रि ऩाने का मा उसके प्रबावो
को कभ कयने का प्रमास बी अवश्म कय सकता हं ।
ज्मोसतष त्रवद्या के कुशर जानकय बी कार ऩुरुषकी गणना कय अनेक योगो के अनेको यहस्म को उजागय कय
सकते हं । ज्मोसतष शास्त्र के भाध्मभ से योग के भूरको ऩकडने भे सहमोग सभरता हं , जहा आधुसनक सिफकत्सा शास्त्र
अऺभ होजाता हं वहा ज्मोसतष शास्त्र द्राया योग के भूर(जड़) को ऩकड कय उसका सनदान कयना राबदामक एवॊ
उऩामोगी ससद्ध होता हं ।
हय व्मत्रि भं रार यॊ गकी कोसशकाए ऩाइ जाती हं , स्जसका सनमभीत त्रवकास क्रभ फद्ध तयीके से होता यहता हं ।
जफ इन कोसशकाओ के क्रभ भं ऩरयवतान होता है मा त्रवखॊफडन होता हं तफ व्मत्रि के शयीय भं स्वास््म सॊफॊधी त्रवकायो
उत्ऩडन होते हं । एवॊ इन कोसशकाओ का सॊफॊध नव ग्रहो के साथ होता हं । स्जस्से योगो के होने के कायणा व्मत्रिके
जडभाॊग से दशा-भहादशा एवॊ ग्रहो फक गोिय भं स्स्थती से प्राद्ऱ होता हं ।
सवा योग सनवायण कवि एवॊ भहाभृत्मुॊजम मॊि के भाध्मभ से व्मत्रि के जडभाॊग भं स्स्थत कभजोय एवॊ ऩीफडत
ग्रहो के अशुब प्रबाव को कभ कयने का कामा सयरता ऩूवक
ा फकमा जासकता हं । जेसे हय व्मत्रि को ब्रह्माॊड फक उजाा एवॊ
ऩृ्वी का गुरुत्वाकषाण फर प्रबावीत कताा हं फठक उसी प्रकाय कवि एवॊ मॊि के भाध्मभ से ब्रह्माॊड फक उजाा के
सकायात्भक प्रबाव से व्मत्रि को सकायात्भक उजाा प्राद्ऱ होती हं स्जस्से योग के प्रबाव को कभ कय योग भुि कयने हे तु
सहामता सभरती हं ।
योग सनवायण हे तु भहाभृत्मुॊजम भॊि एवॊ मॊि का फडा भहत्व हं । स्जस्से फहडद ू सॊस्कृ सत का प्राम् हय व्मत्रि
भहाभृत्मुॊजम भॊि से ऩरयसित हं ।

91

जुराई 2012

कवि के राब :

एसा शास्त्रोि विन हं स्जस घय भं भहाभृत्मुॊजम मॊि स्थात्रऩत होता हं वहा सनवास कताा हो नाना प्रकाय फक
आसध-व्मासध-उऩासध से यऺा होती हं ।

ऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एवॊ ऩूणा िैतडम मुि सवा योग सनवायण कवि फकसी बी उम्र एवॊ जासत धभा के रोग िाहे
स्त्री हो मा ऩुरुष धायण कय सकते हं ।

जडभाॊगभं अनेक प्रकायके खयाफ मोगो औय खयाफ ग्रहो फक प्रसतकूरता से योग उतऩडन होते हं ।

कुि योग सॊक्रभण से होते हं एवॊ कुि योग खान-ऩान फक असनमसभतता औय अशुद्धतासे उत्ऩडन होते हं । कवि
एवॊ मॊि द्राया एसे अनेक प्रकाय के खयाफ मोगो को नद्श कय, स्वास््म राब औय शायीरयक यऺण प्राद्ऱ कयने हे तु
सवा योगनाशक कवि एवॊ मॊि सवा उऩमोगी होता हं ।

आज के बौसतकता वादी आधुसनक मुगभे अनेक एसे योग होते हं , स्जसका उऩिाय ओऩये शन औय दवासे बी
कफठन हो जाता हं । कुि योग एसे होते हं स्जसे फताने भं रोग फहिफकिाते हं शयभ अनुबव कयते हं एसे योगो
को योकने हे तु एवॊ उसके उऩिाय हे तु सवा योगनाशक कवि एवॊ मॊि राबादासम ससद्ध होता हं ।

प्रत्मेक व्मत्रि फक जेसे-जेसे आमु फढती हं वैसे-वसै उसके शयीय फक ऊजाा होती जाती हं । स्जसके साथ अनेक
प्रकाय के त्रवकाय ऩैदा होने रगते हं एसी स्स्थती भं उऩिाय हे तु सवायोगनाशक कवि एवॊ मॊि परप्रद होता हं ।

स्जस घय भं त्रऩता-ऩुि, भाता-ऩुि, भाता-ऩुिी, मा दो बाई एक फह नऺिभे जडभ रेते हं , तफ उसकी भाता के सरमे
असधक कद्शदामक स्स्थती होती हं । उऩिाय हे तु भहाभृत्मुॊजम मॊि परप्रद होता हं ।

स्जस व्मत्रि का जडभ ऩरयसध मोगभे होता हं उडहे होने वारे भृत्मु तुल्म कद्श एवॊ होने वारे योग, सिॊता भं
उऩिाय हे तु सवा योगनाशक कवि एवॊ मॊि शुब परप्रद होता हं ।

नोट:- ऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एवॊ ऩूणा िैतडम मुि सवा योग सनवायण कवि एवॊ मॊि के फाये भं असधक जानकायी हे तु हभ
से सॊऩका कयं ।

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 Our all kawach, yantra and any other article are prepared on the Principle of Positiv energy, our
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Our Goal
 Here Our goal has The classical Method-Legislation with Proved by specific with fiery chants
prestigious full consciousness (Puarn Praan Pratisthit) Give miraculous powers & Good effect All
types of Yantra, Kavach, Rudraksh, preciouse and semi preciouse Gems stone deliver on your
door step.

जुराई 2012

92

भॊि ससद्ध कवि

भॊि ससद्ध कवि को त्रवशेष प्रमोजन भं उऩमोग के सरए औय शीघ्र प्रबाव शारी फनाने के सरए तेजस्वी भॊिो द्राया

शुब भहूता भं शुब फदन को तैमाय फकमे जाते हं . अरग-अरग कवि तैमाय कयने केसरए अरग-अरग तयह के
भॊिो का प्रमोग फकमा जाता हं .

 क्मं िुने भॊि ससद्ध कवि?

 उऩमोग भं आसान कोई प्रसतफडध नहीॊ
 कोई त्रवशेष सनसत-सनमभ नहीॊ
 कोई फुया प्रबाव नहीॊ

 कवि के फाये भं असधक जानकायी हे तु

भॊि ससद्ध कवि सूसि
सवा कामा ससत्रद्ध

4600/-

ऋण भुत्रि

910/-

त्रवघ्न फाधा सनवायण

550/-

सवा जन वशीकयण

1450/-

धन प्रासद्ऱ

820/-

नज़य यऺा

550/-

अद्श रक्ष्भी

1250/-

तॊि यऺा

730/-

460/-

सॊतान प्रासद्ऱ

1250/-

शिु त्रवजम

दब
ु ााग्म नाशक

730/-

* वशीकयण (२-३ व्मत्रिके सरए)

1050/-

स्ऩे- व्माऩय वृत्रद्ध

1050/-

त्रववाह फाधा सनवायण

730/-

* ऩत्नी वशीकयण

640/-

कामा ससत्रद्ध

1050/-

व्माऩय वृत्रद्ध

730/--

* ऩसत वशीकयण

640/-

आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ

1050/-

सवा योग सनवायण

730/-

सयस्वती (कऺा +10 के सरए)

550/-

नवग्रह शाॊसत

910/-

भस्स्तष्क ऩृत्रद्श वधाक

640/-

सयस्वती (कऺा 10 तकके सरए)

460/-

बूसभ राब

910/-

काभना ऩूसता

640/-

* वशीकयण ( 1 व्मत्रि के सरए)

640/-

काभ दे व

910/-

त्रवयोध नाशक

640/-

योजगाय प्रासद्ऱ

550/-

ऩदं उडनसत

910/-

योजगाय वृत्रद्ध

730/-

*कवि भाि शुब कामा मा उद्दे श्म के सरमे

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93

YANTRA LIST

जुराई 2012

EFFECTS

Our Splecial Yantra
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10

12 – YANTRA SET
VYAPAR VRUDDHI YANTRA
BHOOMI LABHA YANTRA
TANTRA RAKSHA YANTRA
AAKASMIK DHAN PRAPTI YANTRA
PADOUNNATI YANTRA
RATNE SHWARI YANTRA
BHUMI PRAPTI YANTRA
GRUH PRAPTI YANTRA
KAILASH DHAN RAKSHA YANTRA

For all Family Troubles
For Business Development
For Farming Benefits
For Protection Evil Sprite
For Unexpected Wealth Benefits
For Getting Promotion
For Benefits of Gems & Jewellery
For Land Obtained
For Ready Made House
-

Shastrokt Yantra
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36
37
38
39
40
41
42

AADHYA SHAKTI AMBAJEE(DURGA) YANTRA
BAGALA MUKHI YANTRA (PITTAL)
BAGALA MUKHI POOJAN YANTRA (PITTAL)
BHAGYA VARDHAK YANTRA
BHAY NASHAK YANTRA
CHAMUNDA BISHA YANTRA (Navgraha Yukta)
CHHINNAMASTA POOJAN YANTRA
DARIDRA VINASHAK YANTRA
DHANDA POOJAN YANTRA
DHANDA YAKSHANI YANTRA
GANESH YANTRA (Sampurna Beej Mantra)
GARBHA STAMBHAN YANTRA
GAYATRI BISHA YANTRA
HANUMAN YANTRA
JWAR NIVARAN YANTRA
JYOTISH TANTRA GYAN VIGYAN PRAD SHIDDHA BISHA
YANTRA
KALI YANTRA
KALPVRUKSHA YANTRA
KALSARP YANTRA (NAGPASH YANTRA)
KANAK DHARA YANTRA
KARTVIRYAJUN POOJAN YANTRA
KARYA SHIDDHI YANTRA
 SARVA KARYA SHIDDHI YANTRA
KRISHNA BISHA YANTRA
KUBER YANTRA
LAGNA BADHA NIVARAN YANTRA
LAKSHAMI GANESH YANTRA
MAHA MRUTYUNJAY YANTRA
MAHA MRUTYUNJAY POOJAN YANTRA
MANGAL YANTRA ( TRIKON 21 BEEJ MANTRA)
MANO VANCHHIT KANYA PRAPTI YANTRA
NAVDURGA YANTRA

Blessing of Durga
Win over Enemies
Blessing of Bagala Mukhi
For Good Luck
For Fear Ending
Blessing of Chamunda & Navgraha
Blessing of Chhinnamasta
For Poverty Ending
For Good Wealth
For Good Wealth
Blessing of Lord Ganesh
For Pregnancy Protection
Blessing of Gayatri
Blessing of Lord Hanuman
For Fewer Ending
For Astrology & Spritual Knowlage
Blessing of Kali
For Fullfill your all Ambition
Destroyed negative effect of Kalsarp Yoga
Blessing of Maha Lakshami
For Successes in work
For Successes in all work
Blessing of Lord Krishna
Blessing of Kuber (Good wealth)
For Obstaele Of marriage
Blessing of Lakshami & Ganesh
For Good Health
Blessing of Shiva
For Fullfill your all Ambition
For Marriage with choice able Girl
Blessing of Durga

94

YANTRA LIST

43
44
45
46
47
48
49
50
51
52
53
54
55
56
57
58
59
60
61
62
63
64

जुराई 2012

EFFECTS

NAVGRAHA SHANTI YANTRA
NAVGRAHA YUKTA BISHA YANTRA
 SURYA YANTRA
 CHANDRA YANTRA
 MANGAL YANTRA
 BUDHA YANTRA
 GURU YANTRA (BRUHASPATI YANTRA)
 SUKRA YANTRA
 SHANI YANTRA (COPER & STEEL)
 RAHU YANTRA
 KETU YANTRA
PITRU DOSH NIVARAN YANTRA
PRASAW KASHT NIVARAN YANTRA
RAJ RAJESHWARI VANCHA KALPLATA YANTRA
RAM YANTRA
RIDDHI SHIDDHI DATA YANTRA
ROG-KASHT DARIDRATA NASHAK YANTRA
SANKAT MOCHAN YANTRA
SANTAN GOPAL YANTRA
SANTAN PRAPTI YANTRA
SARASWATI YANTRA
SHIV YANTRA

For good effect of 9 Planets
For good effect of 9 Planets
Good effect of Sun
Good effect of Moon
Good effect of Mars
Good effect of Mercury
Good effect of Jyupiter
Good effect of Venus
Good effect of Saturn
Good effect of Rahu
Good effect of Ketu
For Ancestor Fault Ending
For Pregnancy Pain Ending
For Benefits of State & Central Gov
Blessing of Ram
Blessing of Riddhi-Siddhi
For Disease- Pain- Poverty Ending
For Trouble Ending
Blessing Lorg Krishana For child acquisition
For child acquisition
Blessing of Sawaswati (For Study & Education)
Blessing of Shiv
Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth &
65 SHREE YANTRA (SAMPURNA BEEJ MANTRA)
Peace
Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth
66 SHREE YANTRA SHREE SUKTA YANTRA
For Bad Dreams Ending
67 SWAPNA BHAY NIVARAN YANTRA
For Vehicle Accident Ending
68 VAHAN DURGHATNA NASHAK YANTRA
VAIBHAV LAKSHMI YANTRA (MAHA SHIDDHI DAYAK SHREE
Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & All
69 MAHALAKSHAMI YANTRA)
Successes
For Bulding Defect Ending
70 VASTU YANTRA
VIDHYA
YASH
VIBHUTI
RAJ
SAMMAN
PRAD
BISHA
YANTRA
For Education- Fame- state Award Winning
71
Blessing of Lord Vishnu (Narayan)
72 VISHNU BISHA YANTRA
Attraction For office Purpose
73 VASI KARAN YANTRA
Attraction For Female
 MOHINI VASI KARAN YANTRA
74
Attraction For Husband
 PATI VASI KARAN YANTRA
75
Attraction For Wife
 PATNI VASI KARAN YANTRA
76
Attraction For Marriage Purpose
 VIVAH VASHI KARAN YANTRA
77
Yantra Available @:- Rs- 255, 370, 460, 550, 640, 730, 820, 910, 1250, 1850, 2300, 2800 and Above…..

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जुराई 2012

95

GURUTVA KARYALAY
NAME OF GEM STONE

GENERAL

Emerald
(ऩडना)
Yellow Sapphire
(ऩुखयाज)
Blue Sapphire
(नीरभ)
White Sapphire
(सफ़ेद ऩुखयाज)
Bangkok Black Blue(फंकोक नीरभ)
Ruby
(भास्णक)
Ruby Berma
(फभाा भास्णक)
Speenal
(नयभ भास्णक/रारडी)
Pearl
(भोसत)
Red Coral (4 यसत तक) (रार भूॊगा)
Red Coral (4 यसत से उऩय)( रार भूॊगा)
White Coral
(सफ़ेद भूॊगा)
Cat’s Eye
(रहसुसनमा)
Cat’s Eye Orissa (उफडसा रहसुसनमा)
Gomed
(गोभेद)
Gomed CLN
(ससरोनी गोभेद)
Zarakan
(जयकन)
Aquamarine
(फेरुज)
Lolite
(नीरी)
Turquoise
(फफ़योजा)
Golden Topaz
(सुनहरा)
Real Topaz (उफडसा ऩुखयाज/टोऩज)
Blue Topaz
(नीरा टोऩज)
White Topaz
(सफ़ेद टोऩज)
Amethyst
(कटे रा)
Opal
(उऩर)
Garnet
(गायनेट)
Tourmaline
(तुभर
ा ीन)
Star Ruby
(सुमक
ा ाडत भस्ण)
Black Star
(कारा स्टाय)
Green Onyx
(ओनेक्स)
Real Onyx
(ओनेक्स)
Lapis
(राजवात)
Moon Stone
(िडद्रकाडत भस्ण)
Rock Crystal
(स्फ़फटक)
Kidney Stone
(दाना फफ़यॊ गी)
Tiger Eye
(टाइगय स्टोन)
Jade
(भयगि)
Sun Stone
(सन ससताया)
Diamond
(.05 to .20 Cent )

(हीया)

MEDIUM FINE

200.00
550.00
550.00
550.00
100.00
100.00
5500.00
300.00
30.00
75.00
120.00
20.00
25.00
460.00
15.00
300.00
350.00
210.00
50.00
15.00
15.00
60.00
60.00
60.00
20.00
30.00
30.00
120.00
45.00
15.00
09.00
60.00
15.00
12.00
09.00
09.00
03.00
12.00
12.00
50.00

500.00
1200.00
1200.00
1200.00
150.00
190.00
6400.00
600.00
60.00
90.00
150.00
28.00
45.00
640.00
27.00
410.00
450.00
320.00
120.00
30.00
30.00
120.00
90.00
90.00
30.00
45.00
45.00
140.00
75.00
30.00
12.00
90.00
25.00
21.00
12.00
11.00
05.00
19.00
19.00
100.00

(Per Cent )

(Per Cent )

FINE

SUPER FINE

1200.00 1900.00
1900.00 2800.00
1900.00 2800.00
1900.00 2800.00
200.00
500.00
370.00
730.00
8200.00 10000.00
1200.00 2100.00
90.00
120.00
12.00
180.00
190.00
280.00
42.00
51.00
90.00
120.00
1050.00 2800.00
60.00
90.00
640.00 1800.00
550.00
640.00
410.00
550.00
230.00
390.00
45.00
60.00
45.00
60.00
280.00
460.00
120.00
280.00
120.00
240.00
45.00
60.00
90.00
120.00
90.00
120.00
190.00
300.00
90.00
120.00
45.00
60.00
15.00
19.00
120.00
190.00
30.00
45.00
30.00
45.00
15.00
30.00
15.00
19.00
10.00
15.00
23.00
27.00
23.00
27.00
200.00
370.00
(PerCent )

(Per Cent)

SPECIAL

2800.00 & above
4600.00 & above
4600.00 & above
4600.00 & above
1000.00 & above
1900.00 & above
21000.00 & above
3200.00 & above
280.00 & above
280.00 & above
550.00 & above
90.00 & above
190.00 & above
5500.00 & above
120.00 & above
2800.00 & above
910.00 & above
730.00 & above
500.00 & above
90.00 & above
90.00 & above
640.00 & above
460.00 & above
410.00& above
120.00 & above
190.00 & above
190.00 & above
730.00 & above
190.00 & above
100.00 & above
25.00 & above
280.00 & above
55.00 & above
100.00 & above
45.00 & above
21.00 & above
21.00 & above
45.00 & above
45.00 & above
460.00 & above
(Per Cent )

Note : Bangkok (Black) Blue for Shani, not good in looking but mor effective, Blue Topaz not Sapphire This Color of Sky Blue, For Venus

96

जुराई 2012

BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION
We are mostly engaged in spreading the ancient knowledge of Astrology, Numerology, Vastu and Spiritual
Science in the modern context, across the world.
Our research and experiments on the basic principals of various ancient sciences for the use of common man.
exhaustive guide lines exhibited in the original Sanskrit texts

BOOK APPOINTMENT PHONE/ CHAT CONSULTATION
Please book an appointment with Our expert Astrologers for an internet chart . We would require your birth
details and basic area of questions so that our expert can be ready and give you rapid replied. You can indicate the
area of question in the special comments box. In case you want more than one person reading, then please mention
in the special comment box . We shall confirm before we set the appointment. Please choose from :

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Consultation 30 Min.:
Consultation 45 Min.:
Consultation 60 Min.:

RS. 1250/-*
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*While booking the appointment in Addvance

How Does it work Phone/Chat Consultation
This is a unique service of GURUATVA KARYALAY where we offer you the option of having a personalized
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consideration.
Once you request for the consultation, with a suggestion as to your convenient time we get back with a
confirmation whether the time is available for consultation or not.
 We send you a Phone Number at the designated time of the appointment
 We send you a Chat URL / ID to visit at the designated time of the appointment
 You would need to refer your Booking number before the chat is initiated
 Please remember it takes about 1-2 minutes before the chat process is initiated.
 Once the chat is initiated you can commence asking your questions and clarifications
 We recommend 25 minutes when you need to consult for one persona Only and usually the time is
sufficient for 3-5 questions depending on the timing questions that are put.
 For more than these questions or one birth charts we would recommend 60/45 minutes Phone/chat
is recommended
 Our expert is assisted by our technician and so chatting & typing is not a bottle neck
In special cases we don't have the time available about your Specific Questions We will taken some time for
properly Analysis your birth chart and we get back with an alternate or ask you for an alternate.
All the time mentioned is Indian Standard Time which is + 5.30 hr ahead of G.M.T.
Many clients prefer the chat so that many questions that come up during a personal discussion can be
answered right away.
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GURUTVA KARYALAY
Call Us:- 91+9338213418, 91+9238328785.
Email Us:- gurutva_karyalay@yahoo.in, gurutva.karyalay@gmail.com, chintan_n_joshi@yahoo.co.in,

97

जुराई 2012

सूिना
 ऩत्रिका भं प्रकासशत सबी रेख ऩत्रिका के असधकायं के साथ ही आयस्ऺत हं ।
 रेख प्रकासशत होना का भतरफ मह कतई नहीॊ फक कामाारम मा सॊऩादक बी इन त्रविायो से सहभत हं।
 नास्स्तक/ अत्रवद्वासु व्मत्रि भाि ऩठन साभग्री सभझ सकते हं ।
 ऩत्रिका भं प्रकासशत फकसी बी नाभ, स्थान मा घटना का उल्रेख महाॊ फकसी बी व्मत्रि त्रवशेष मा फकसी बी स्थान मा
घटना से कोई सॊफॊध नहीॊ हं ।
 प्रकासशत रेख ज्मोसतष, अॊक ज्मोसतष, वास्तु, भॊि, मॊि, तॊि, आध्मास्त्भक ऻान ऩय आधारयत होने के कायण
मफद फकसी के रेख, फकसी बी नाभ, स्थान मा घटना का फकसी के वास्तत्रवक जीवन से भेर होता हं तो मह भाि
एक सॊमोग हं ।
 प्रकासशत सबी रेख बायसतम आध्मास्त्भक शास्त्रं से प्रेरयत होकय सरमे जाते हं । इस कायण इन त्रवषमो फक
सत्मता अथवा प्राभास्णकता ऩय फकसी बी प्रकाय फक स्जडभेदायी कामाारम मा सॊऩादक फक नहीॊ हं ।
 अडम रेखको द्राया प्रदान फकमे गमे रेख/प्रमोग फक प्राभास्णकता एवॊ प्रबाव फक स्जडभेदायी कामाारम मा सॊऩादक
फक नहीॊ हं । औय नाहीॊ रेखक के ऩते फठकाने के फाये भं जानकायी दे ने हे तु कामाारम मा सॊऩादक फकसी बी
प्रकाय से फाध्म हं ।
 ज्मोसतष, अॊक ज्मोसतष, वास्तु, भॊि, मॊि, तॊि, आध्मास्त्भक ऻान ऩय आधारयत रेखो भं ऩाठक का अऩना
त्रवद्वास होना आवश्मक हं । फकसी बी व्मत्रि त्रवशेष को फकसी बी प्रकाय से इन त्रवषमो भं त्रवद्वास कयने ना कयने
का अॊसतभ सनणाम स्वमॊ का होगा।
 ऩाठक द्राया फकसी बी प्रकाय फक आऩत्ती स्वीकामा नहीॊ होगी।
 हभाये द्राया ऩोस्ट फकमे गमे सबी रेख हभाये वषो के अनुबव एवॊ अनुशॊधान के आधाय ऩय सरखे होते हं । हभ फकसी बी व्मत्रि
त्रवशेष द्राया प्रमोग फकमे जाने वारे भॊि- मॊि मा अडम प्रमोग मा उऩामोकी स्जडभेदायी नफहॊ रेते हं ।
 मह स्जडभेदायी भॊि-मॊि मा अडम प्रमोग मा उऩामोको कयने वारे व्मत्रि फक स्वमॊ फक होगी। क्मोफक इन त्रवषमो भं नैसतक
भानदॊ डं , साभास्जक , कानूनी सनमभं के स्खराप कोई व्मत्रि मफद नीजी स्वाथा ऩूसता हे तु प्रमोग कताा हं अथवा
प्रमोग के कयने भे िुफट होने ऩय प्रसतकूर ऩरयणाभ सॊबव हं ।
 हभाये द्राया ऩोस्ट फकमे गमे सबी भॊि-मॊि मा उऩाम हभने सैकडोफाय स्वमॊ ऩय एवॊ अडम हभाये फॊधग
ु ण ऩय प्रमोग फकमे हं
स्जस्से हभे हय प्रमोग मा भॊि-मॊि मा उऩामो द्राया सनस्द्ळत सपरता प्राद्ऱ हुई हं ।
 ऩाठकं फक भाॊग ऩय एक फह रेखका ऩून् प्रकाशन कयने का असधकाय यखता हं । ऩाठकं को एक रेख के ऩून्
प्रकाशन से राब प्राद्ऱ हो सकता हं ।
 असधक जानकायी हे तु आऩ कामाारम भं सॊऩका कय सकते हं ।
(सबी त्रववादो केसरमे केवर बुवनेद्वय डमामारम ही भाडम होगा।)

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जुराई 2012

FREE
E CIRCULAR

गुरुत्व ज्मोसतष ऩत्रिका जुराई -2012
सॊऩादक

सिॊतन जोशी
सॊऩका
गुरुत्व ज्मोसतष त्रवबाग

गुरुत्व कामाारम

92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
INDIA
पोन

91+9338213418, 91+9238328785
ईभेर
gurutva.karyalay@gmail.com,
gurutva_karyalay@yahoo.in,

वेफ
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http://www.gurutvakaryalay.blogspot.com/

99

जुराई 2012

हभाया उद्दे श्म
त्रप्रम आस्त्भम
फॊध/ु फफहन
जम गुरुदे व
जहाॉ आधुसनक त्रवऻान सभाद्ऱ हो जाता हं । वहाॊ आध्मास्त्भक ऻान प्रायॊ ब हो जाता हं , बौसतकता का आवयण ओढे व्मत्रि
जीवन भं हताशा औय सनयाशा भं फॊध जाता हं , औय उसे अऩने जीवन भं गसतशीर होने के सरए भागा प्राद्ऱ नहीॊ हो ऩाता क्मोफक
बावनाए फह बवसागय हं , स्जसभे भनुष्म की सपरता औय असपरता सनफहत हं । उसे ऩाने औय सभजने का साथाक प्रमास ही श्रेद्षकय
सपरता हं । सपरता को प्राद्ऱ कयना आऩ का बाग्म ही नहीॊ असधकाय हं । ईसी सरमे हभायी शुब काभना सदै व आऩ के साथ हं । आऩ
अऩने कामा-उद्दे श्म एवॊ अनुकूरता हे तु मॊि, ग्रह यत्न एवॊ उऩयत्न औय दर
ा भॊि शत्रि से ऩूणा प्राण-प्रसतत्रद्षत सिज वस्तु का हभंशा
ु ब
प्रमोग कये जो १००% परदामक हो। ईसी सरमे हभाया उद्दे श्म महीॊ हे की शास्त्रोि त्रवसध-त्रवधान से त्रवसशद्श तेजस्वी भॊिो द्राया ससद्ध
प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुि सबी प्रकाय के मडि- कवि एवॊ शुब परदामी ग्रह यत्न एवॊ उऩयत्न आऩके घय तक ऩहोिाने का हं ।

सूमा की फकयणे उस घय भं प्रवेश कयाऩाती हं ।
जीस घय के स्खड़की दयवाजे खुरे हं।

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(ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION)
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जुराई 2012

JULY
2012

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