आज, ॅष्टाचार के िखलाफ आंदोलन एक जरुरी कदम आगे बढ़ा रहा है । सत्ता के उच्च पदों पर व्याप्त ॅष्टाचार के

िखलाफ जनता के आबोश को नए िवकल्प की मांग में सकारात्मक रुप से ढालकर इस आंदोलन ने अपनी शुरुआत
की। एक मजबूत, ताकतवर और ःवतंऽ जांच एजेंसी के रुप में लोकपाल की मांग करते हुए िपछले साल अन्ना जी
ने तीन अनशन िकए िजसमें रामलीला मैदान में िकया गया ऐितहािसक अनशन भी शािमल है । यह अिभयान लोगों
के िदलो-िदमाग पर छा गया क्योंिक लोगों को लगा वे अब असहाय नहीं हैं । बहरहाल, व्यापक जन-समथर्न और
संसद के संकल्प के बावजूद लोकपाल पर अमल नहीं हुआ। हमने जान िलया िक सत्ताधारी पािटर् यों के साथ-साथ
िवपक्ष में भी लोकपाल बनाने के िलए जरुरी राजनीितक इच्छाशिक्त की कमी है । िफर भी, अन्नाजी, मनीष, गोपाल
,सैकड़ों बांितकारी और मैं सरकार से आिखरी बार अपील करने के िलए मौजूदा अनशन पर बैठे। इस बार भी
नतीजा कुछ अलग नहीं िनकला। सरकार ने हमारी मांगों की तरफ से मुंह फेर िलया और उसने बड़े घोटाले के
दोिषयों को सज़ा िदलाने के मामले में िदलचःपी नहीं िदखायी। 
और, इसी बात से हमारी लड़ाई का यह अगला कदम उठा है । कल 23 गणमान्य नागिरकों ने हमारा आह्वान करते
हुए कहा िक हम राज-व्यवःथा से उम्मीद लगाना छोड़ दें और एक ऐितहािसक चुनौती के मद्दे नजर अपनी ऊजार्
वैकिल्पक राजनीितक ताकत गढ़ने में लगायें। हमने आप सबों से पूछा िक क्या इस ूःताव पर हमें चलना चािहए।
आपने तत्काल और एकमत से कहा िक.. हां। इसी कारण हमने अनशन खत्म करने और एक वैकिल्पक राजनीितक
ताकत गढ़ने की तरफ सकारात्मक रुप से बढ़ने का फैसला िकया है ।यह नया कदम एक साल पहले शुरु हुई हमारी
लड़ाई की तािकर्क पिरणित है । 
यह कदम सत्ता हिथयाने के िलए नहीं बिल्क राजसत्ता के ःवभाव को बदलने के िलए उठाया गया है ।हमारा उद्दे ँय
एक राजनीितक िवकल्प मुहैया कराने का है । सत्ता के लोकतंऽीकरण और िवकेंिीकरण, सत्ता संरचना को और ज्यादा
पारदशीर् तथा लोगों के ूित जवाबदे ह बनाने के िलए यह िवकल्प चुनावी बांित के जिरए साकार िकया जाएगा।
हमारा मौजूदा शासन-तंऽ अंमेजी जमाने की बनावट पर आधािरत है । यह बनाया ही गया था ऊंचे पदों पर बैठकर
लोगों पर हुक्म चलाने के िलए। हमारे मौजूदा शासन-तंऽ की बनावट ऐसी नहीं है िक वह जनता की सेवा करे या
िफर शासन को लोगों के ूित जवाबदे ह बनाये। हमें इसका ध्यान रखते हुए अपनी िवधाियका, कायर्पािलका,
न्यायपािलका और िनगरानी रखने वाली संःथाओं की बनावट को बदलने और उसमें सुधार करने की जरुरत है ।  
आंदोलन के इस मुकाम पर हम अपनी शुरुआत बस एक बड़े सपने और कुछ िदशािनदेर् शक िसद्धांतों के सहारे कर
रहे हैं । तकरीबन 2300 साल पहले के सॆाट अशोक के एक िशलालेख में सभी ूािणयों का सम्मान, वंिचत लोगों
के ूित करुणा और शासन में पारदिशर्ता बरतते हुए एक नैितक, सामािजक और ूशासिनक बांित करने की बात
कही गई है । सॆाट अशोक की यह पुकार सहॐािब्दयों से गूंज रही है और आज इस पुकार का ःवर सबसे ऊँचा है ।  
भारत को लेकर हमने जो सपना दे खा है उसका रं ग उन्हीं मूल्यों से बना है जो मूल्य दे श के संिवधान को
अनुूािणत करते हैं और िजन मूल्यों के सहारे आजादी की लड़ाई से खाद-पानी हािसल करने वाले ःवराज के सपने
ने अपना आकार महण िकया था।  
हमारा िवश्वास है िक: 

 लोकतंऽ में सत्ता. जो सत्य पर एकािधकार का दावा करता है । ये राजनीितक दल अपने कामकाज में अलोकतांिऽक और अपारदशीर् हैं . उन पर िकसी पिरवार या कुनबे का कब्जा है और ये दल भारी-भरकम अवैध धन से चलते हैं । िकसी वैकिल्पक राजनीितक ताकत को राजनीितक दलों के इस ूचिलत रुप का िवकल्प तलाशना पड़े गा। चुनाव और चुनावों से अलग के दायरों में राजनीितक िवकल्प गढ़ने की कोिशश करने वाले सामािजक-राजनीितक आंदोलनों के भरे -पूरे अनुभवों से हम सीखने की कोिशश करें गे।  हमें इस बात का अहसास है िक हम एक लंबे.   हम राजसत्ता या समूह-सत्ता के मनमाने इःतेमाल से मुिक्त के साथ-साथ भय और भूख(बुिनयादी जरुरती) से मुिक्त के हामी हैं . जनता के सलाह-मशिवरे से चलती है और इस सत्ता पर अंितम िनयंऽण जनता का ही होता है .   िकसी भी व्यिक्त का कल्याण िकसी दस ू रे व्यिक्त के कल्याण या ूकृ ित की कीमत चुकाकर ना हो. जो सामािजक और धािमर्क िविभन्नताओं का सम्मान करती है और अल्पसंख्यक समुदाय की िवशेष जरुरतों का ध्यान रखती है . आवँयकताओं और सरोकारों के साथसाथ अपने पीछे के बहुिवध आंदोलनों के अनुभवों को समझने की जरुरत है । इसके बाद हम अपना एक व्यापक नीितगत वक्तव्य जारी करें गे।  इस सपने को साकार करने के िलए एक नए तरीके के राजनीितक साधन की जरुरत होगी। आमतौर पर मान िलया जाता है िक ऐसा साधन कोई राजनीितक दल बनाना हो सकता है । िफर भी. किठन और झंझावाती राह पर चल िनकले हैं । चूंिक इस सफर का एकमाऽ उद्दे ँय चालू खेल के िनयमों को बदलने का है इसिलए इसके पिरणामों को ‘सफल’  और ‘असफल’  जैसे चालू पैमाने पर नहीं मापा जा सकता। राह पर चलते हुए हमें अपनी कसौटी आप बनानी होगी।  इस लंबे सफर में हमने शुरुआती तौर पर एक दे शव्यापी ःवराज-याऽा’ चलाने की योजना बनायी है तािक हम अपने संदेश को लोगों तक ले जा सकें. और    हम दे श के आंतिरक और िवदे शी संबध ं ों में शांित के हामी हैं ।  ये कीमती मगर साधारण िसद्धांत हैं । अगामी कुछ महीनों में हम इन िसद्धांतों को ठोस नीितयों और व्यवहारों में ज्यादा व्यापक तरीके से बदलना चाहें गे। हमें अपने नागिरकों की आकांक्षाओं. जहां सबसे पीछे खड़े आदमी का कल्याण सबसे पहले आता है और जीवन में हािसल होने वाले अवसरों का िनधार्रण जन्म लेने की पिरिःथितयों से तय नहीं होता।   हमारा िवश्वास धमर्िनरपेक्षता में है . इसिलए हम अवसरों और बुिनयादी पिरणामों की समानता के हामी हैं ।    हम सामािजक न्याय के िवश्वासी है . लोगों से सीख सकें. जनता के नजदीक होती है . अपने दोःतों और िहतैिषयों से जुड़ सकें और इस लड़ाई में . राजनीितक दलों का मौजूदा रुप इस उद्दे ँय के िलए उिचत नहीं है । तकरीबन हर राजनीितक दल ऊंच-नीच पर आधािरत एक सीढ़ीनुमा संगठन है .

समय. कौशांबी.2010@gmail.   आप हमें: ए‐119. खासकर िवश्विवद्यालयों और कॉलेजों में। इसके साथ-साथ हमारी योजना दस ू रे संगठनों तथा आंदोलनों के साथ सलाह-मशिवरा करने की भी है ।  यिद यह आंदोलन इतनी दरू तक आगे बढ़ा है तो िसफर् आप सबके समथर्न के कारण। हमारे अगले कदम का भिवंय आपकी भागीदारी पर िनभर्र है । इस आंदोलन को आपके िवचारों. उजार् और संसाधन की जरुरत है ।  कृ पया हमसे िनम्निलिखत ई-मेल पते पर संपकर् करें : indiaagainstcorruption.com.नए साथी खोज सकें।दे श के युवा-वगर् के साथ संवाद की ूिबया चलायी जाएगी. गािजयाबाद. यूपी – 201010 के पते पर िचट्ठी भी भेज सकते हैं ।    .

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