बाल भजनमाला

हे पभु! आननददाता!!

हे पभु! आननददाता !! जान हमको दीिजये।
शीघ सारे दगु र ुणो को दरू हमसे कीिजये।।
हे पभु......
लीिजये हमको शरण मे हम सदाचारी बने।
बहचारी धमर रकक वीर वतधारी बने।।
हे पभु......
िनंदा िकसी की हम िकसी से भूलकर भी न करे।
ईषयार कभी भी हम िकसी से भूलकर भी न करे।।
हे पभु...
सतय बोले झूठ तयागे मेल आपस मे करे।

िदवय जीवन हो हमारा यश तेरा गाया करे।।
हे पभु....
जाय हमारी आयु हे पभु ! लोक के उपकार मे।
हाथ डाले हम कभी न भूलकर अपकार मे।।
हे पभु....
कीिजये हम पर कृपा अब ऐसी हे परमातमा!
मोह मद मतसर रिहत होवे हमारी आतमा।।
हे पभु....
पेम से हम गुरजनो की िनतय ही सेवा करे।
पेम से हम संसकृित ही िनतय ही सेवा करे।।
हे पभु...
योगिवदा बहिवदा हो अिधक पयारी हमे।
बहिनषा पाप करके सवर िहतकारी बने।।
हे पभु....
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कदम अपने आगे बढाता चला जा....

कदम अपना आगे बढाता चला जा।
सदा पेम के गीत गाता चला जा।।
तेरे मागर मे वीर ! काँटे बडे है।
िलये तीर हाथो मे वैरी खडे है।
बहादरु सबको िमटाता चला जा।
कदम अपना आगे बढाता चला जा।।
तू है आयर वंशी ऋिषकुल का बालक।
पतापी यशसवी सदा दीनपालक।
तू संदेश सुख का सुनाता चला जा।
कदम अपना आगे बढाता चला जा।।
भले आज तूफान उठकर के आये।
बला पर चली आ रही हो बलाये।
युवा वीर है दनदनाता चला जा।
कदम अपना आगे बढाता चला जा।।
जो िबछुडे हु ए है उनहे तू िमला जा।
जो सोये पडे है उनहे तू जगा जा।।
तू आनंद डंका बजाता चला जा।
कदम अपना आगे बढाता चला जा।।
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बहचयर के पालन से .....

बहचयर के पालन से सवासथय का संचार करे।
शिक का िवकास करे चिरत का िनमारण करे।। टेक।। - 2
यौवन की सुरका से जीवन का उदार करे।
संयम की शिक से सवारगीण िवकास करे।।
यौवन धन बरबाद हु आ है सवचछनदी उचछृंखल जीवन से,
टीवी सीरीयल चलिचतो से अशलील सािहतयो से।
इन सबको अब छोड के अपने यौवन को महकाये,
संतो के सतसंग मे जाकर जीवन धनय बनाये।।
बहचयर के पालन से....।। टेक।।

संयमहीन देशो मे हु ई है यौवन धन की तबाही,
तन-मन के कई रोग बढे है दषु च चिरत अपराधी।
छोड के उनका अंध अनुकरण अपना देश बचाये,
धयान योग सेवा भिक से संसकृित को अपनाये।।
बहचयर के पालन से....।। टेक ।।
संयम से ही शिक िमलेगी तन-मन सवसथ रहेगे,
बुिद खूब कुशाग बनेगी िनतय पसन रहेगे।
जीवन के हर कोई केत मे उनित हो के रहेगी,
लौिकक और पारलौिकक जग मे पगित हो के रहेगी।।
बहचयर के पालन से....।। टेक ।।
देख लो अपनी संसकृित मे भी संयमी वीर हु ए है,
महावीर और भीषम िपतामह जैसे वीर हु ए है।
संयम की सीख उनसे ले के हम भी वीर बनेगे,
िवशवगुर के पद पर सथािपत अपना देश करेगे।।
बहचयर के पालन से..... ।। टेक ।।
यौवन सुरका के गंथो को जन-जन तक पहु ँचाये,
भटके उलझे युवावगर को संयम पथ िदखलाये।
युवाधन रकक अिभयान को वयापक तेज बनाये,
राषरोतथान के दैवी कायर मे जीवन सफल बनाये।।
बहचयर के पालन से.... ।। टेक ।।
यौवन की सुरका से....
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पीछे मुड कर कया दे खे है .....

पीछे मुडकर कया देखे है आगे बढता चल।
सफलता चरण चूमेगी आज नही तो कल।।
तू मीरा जैसी भिक कर, तू िकसी भी दःु ख से कभी न डर।
तू जनम-जनम के िफर ना मर, तारेगे तुझको बस गुरवर।।
गुरभिक को अब तू पा ले, आये ना िफर ये पल।।
सफलता तेरे.....
तू वीर िशवाजी जैसा बन, तू भिक करने वाला बन।
तू धुव के जैसा आज चमक, पहाद के जैसा पयारा बन।।
बीती बातो को कया सोचे, आगे बढता चल।
सफलता तेरे....
तू शिक अपनी जान ले, तू खुद को ही पहचान ले।
कहना तू गुर का मान ले, ऊँचा उठने की ठान ले।।
तेरे भीतर ही िछपा है, ईशपािप का बल।
सफलता तेरे.....
तेरे भीतर अमर खजाना है, बस पदे को हटाना है।
बुिद शिक को बढाना है, बस ईशवर को ही पाना है।।
करनी जैसी भी तू करेगा, पायेगा उसका फल।
सफलता तेरे....
गुरपेम मे डु बकी लगाये जा, गुरमंत को कवच बनाये जा।
तू जान का अमृत पाये जा, गुरवर के गुण ही गाये जा।।
जनमो से तू भटक रहा है, अब तो जरा सँभल।
सफलता तेरे....
तुझे पतन से खुद को बचाना है, तुझे संयम अपना बढाना है।

तुझे कभी नही घबराना है, बस आगे बढते जाना है।।
शुद रहे तेरा जीवन, िजसमे न हो कपट और छल।
सफलता तेरे....
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हम बचचे ʹ बाल सं स कार ʹ के ....

ૐૐ.... ૐ हिर ૐ.... – 2
हम बचचे ʹ बाल संसकार ʹ के।
हम पयासे पभु के पयार के।। टेक ।। -2
हममे साहस शिक है, मातृ-िपतृ गुरभिक है। - 2
हम ऋणी है इनके उपकार के। - 2
हम बचचे... ।। टेक ।।
हम झकदोर दे अचछे -अचछो को,
कमजोर न समझो हम बचचो को। - 2
बडे वीर धीर गमभीर है,
पर दशु मन के िलए तीर है। - 2
हम तेज धार तलवार की।। हम बचचे.....।। टेक ।।
हमको चलना आता है, आगे िनकलना आता है। - 2
दमदार है कदम हम बचचो के।। -2
हम िगरते है तो कया हु आ, हमको सँभलना आता है। -2
हम ढलते घडे कुमहार के।। -2
हम बचचे..... ।। टेक ।।
हम फूलो से भी कोमल है, हम जल से भी िनमर ल है। -2
सब पयार करते है हम बचचो को।। 2
हम हँसते-िखलते सावन है,
हम पावन से अित पावन है। - 2
हम आधार सृिष शृगं ार के।। - 2
हम बचचे बाल संसकार के....।। टेक।।
हम सबका लकय महान है, हमे पाना आतमजान है। - 2
अिधकार है ये पूरा हम सभी को।। -2
हम ऋिषयो की संतान है, हमे करनी िनज पहचान है। - 2
हम पयासे पभु दीदार के।। - 2
हम बचचे.... हममे साहस...
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बाल सं स कार के नद का...

बाल संसकार केनद का बस यही है नारा।-2
हर शहर, हर गाँव-गाँव मे बहेगी संसकार धारा।। टेक।। -2
धरती से अमबर तक देखो, अपना शुभ संकलप फेको।
गुरकृपा जो है सब पे तो, मदद करेगे देव अनेको।। -2
बाल संसकार केनद.... हर शहर... ।।टेक।।
बचचा बचचा जाग उठे गा, हर इनसाँ बेदाग उठे गा।
संतकृपा से उनत होने, ततपर हो बेताब उठे गा।। -2
बाल संसकार केनद.. हर शहर...।।टेक।।
बचचो तुम बलवान बनो, गुरसेवा और धयान करो।
गुरमंत का जाप करके, बुिद से धनवान बनो।। -2

बाल संसकार... हर शहर..।।टेक।।
महापुरषो की शरण मे जाकर, अपना जीवन धनय बनाकर।
आतमपद की पािप करके, सांसकृितक सुवास फैलाओ।।−2
बाल संसकार.... हर शहर....।।टेक।।
िवशवगुर हो भारत पयारा, बस यही संकलप हमारा।−3
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बढे चलो, बढे चलो......

बढे चलो, बढे चलो, बढे चलो, बढे चलो। −2
न हाथ एक शस हो, न साथ एक अस हो।
न अन नीर वस हो, हटो नही डटो वही।।
बढे चलो, बढे चलो....। −2
बढे चलो.... न हाथ एक शस....।।टेक।।
रहे समझ िहम िशखर, तुमहारा पग उठे िनखर।
भले ही जाये तन िबखर, रको नही झुको नही।।
बढे चलो, बढे चलो....। – 2
बढे चलो... न हाथ एक शस.....।।टेक।।
घटा िघरी अटू ट हो, अधमर कालकूट हो।
वही अमृत घूँट हो, िजये चलो करे चलो।।
बढे चलो, बढे चलो....। −2
बढे चलो.... न हाथ एक शस... ।।टेक।।
जमी उगलती आग हो, िछडा मरण का राग हो।
लहू का अपने फाग हो, अडो वही गडो वही।।
बढे चलो, बढे चलो....। – 2
बढे चलो... न हाथ एक शस...।।टेक।।
चलो नयी िमसाल हो, जलो तुमही मशाल हो।
बढो नया कमाल हो, रको नही झुको नही।।
बढे चलो, बढे चलो....। −2
बढे चलो... न हाथ एक शस....।।टेक।।
बढे चलो, बढे चलो, बढे चलो, बढे चलो।। − 3
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पलक पावडे अिभनं द न को....

( पूज य बापू जी के ʹ अवतरण−िदवस ʹ पर अिपर त शदा−सुम न)
पलक पावडे अिभनंदन को −2
हमने पथ मे िबछाये है।।टेक।।2
अिपर त है सवीकार कीिजये – 2 शदा सुमन जो लाये है।। −2
धारण करते धनुष कभी और – 2 बंसी कभी बजाते है।
जब−जब होती हािन धमर की – 2, पभु धरा पर आत है।
घोर िनराशा हरने को – 2, सदगुर रप मे आये है।
पलक पावडे....।।टेक।।
इनदधनुष उतरा अमबर से−2, चरण चूमने गुरवर के।
साधक बन गये गोप गोिपयाँ झूमे −2, संग−संग पयारे गुरवर के।
आपने अपनी मधु िचतवन से −2, सबके िचत चुराये है।

पलक पावडे...।।टेक।।
परम पिवत अवसर आया है −2, मंगल घिडयाँ लाया है।
आज के शुभ िदन ही तो हमने −2, पयारा सदगुर पाया है।
शीचरणो मे आकर हमने −2, अपने भागय जगाये है।
पलक पावडे....।।टेक।।
अजर−अमर गुरदेव आपसे−2, िहरदय की भावना यही।
बढता रहे यश तेज आपका−2, हम सबकी कामना यही।
भावो की माला चरणो मे अपर ण −2, करने हम सब आये है।
पलक पावडे... अिपर त है.... ।।टेक।।
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हे भारत के िवदािथर यो !.....

हे भारत के िवदािथर यो ! −2
तुम बनो जगत मे इतने महान।
गौरव देख तुमहारा तुमको, दिु नया करे पणाम।।टेक।।−2
योगासन, जप−धयान करके, तन−मन को तंदरसत बनाओ तुम।
रामभक हनुमान की नाई बन के, बल, बुिद और भिक बढाओ तुम।।
हे भारत के िवदािथर यो !....।।टेक।।
पढकर के ʹ युवाधन सुरकाʹ, संयम की पाओ तुम िशका।
सदगुर के सािनधय मे जाकर, सारसवतय मंत की लो दीका।।
हे भारत के िवदािथर यो !...।।टेक।।
हे आयर वंश के वीरो ! तुम एक बनो, िवनयी, िववेकी, बुिदमान और नेक बनो।
सदगुर से आतमजान पाकर, तुम कणर धार भारत के िशलालेख बनो।।
हे भारत के िवदािथर यो !....।।टेक।।
बापू जी के ʹ बाल संसकार ʹ मे जाकर, संसकारो से महकाओ उपवन।
उदमी, साहसी, धीर, पराकमी बनकर, शिक, भिक और मुिक का पाओ धन।।
हे भारत के िवदािथर यो !....।।टेक।।
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यह शरीर मं ि दर है पभु का....

यह शरीर मंिदर है पभु का −2, कण−कण मे है भगवान। −2
दैवी समपदा भरते जाये −2, भारत देश महान।।−2
यह शरीर मंिदर है.....
भेद नही है अपना पराया-2, ईशवर की संतान। -2
गुर सनदेश सुनाते जाये -2, भारत देश महान।।।-2
यह शरीर मंिदर है.....
होता है िनदोष बाल मन-2, गुर देते है जानांजन।-2
सुसंसकार ये जाते जाये-2, भारत देश महान।।-2
यह शरीर मंिदर है.....
गुरकुल युग पुनः आयेगा-2, हो जाओ तैयार।-2
ओज तेज यहाँ बढता जाय-2, भारत देश महान।।-2
यह शरीर मंिदर है.....
गीता है आधार यहाँ का-2, गुर का आतमजान-2
यही जान सँजोते जाये-2, भारत देश महान।।-2
यह शरीर मंिदर है.....

माटी है भारत की पावन-2, देव है हर इनसान।-2
जानामृत यहाँ पीते जाये-2, भारत देश महान।।-2
यह शरीर मंिदर है.....
दैवी समपदा भरते जाये.....
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नयारे -नयारे फू ल िखले है .....

नयारे-नयारे फूल िखले है, बाल संसकार केनद मे। -2
सदगुर कृपा से पाप, सुसंसकार मिहमा गायेगे। -2
बापूजी के िदवय जान से-2, सकल धरा महकायेगे।-2
नयारे-नयारे फूल िखले...
उदम, साहस, शिक, पराकम, धैयर से ऊँचा लकय पायेगे।।-2
शिक, भिक और मुिक का -2, मागर सबको बतायेगे।-2
नयारे-नयारे फूल िखले...
योगासन और पाणायाम से, सुषप
ु शिकयाँ जगायेगे।-2
भारतीय संसकृित की गिरमा को-2, जन जन को समझायेगे।-2
नयारे-नयारे फूल िखले...
दीन-दःु िखयो की सेवा करके, सचची राह िदखायेगे।-2
सबक मंगल सबका भला हो-2 ये संदेश फैलायेगे।-2
नयारे-नयारे फूल िखले...
गुरसेवा मे होकर ततपर, गुरनाम पीित जगायेगे।-2
सदगुरजी के संदेश को-2, आदशर अपना बनायेगे।2
नयारे-नयारे फूल िखले है, बाल संसकार केनद मे।-2
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हम भारत के लाल है ....

हम भारत के लाल है, ऋिषयो की संतान है।
कोई देश नही दिु नया मे, बढकर िहनदसु तान से।।टेक।।
हिर ૐ हिर ૐ हिर ૐ हिर ૐ-2
गुर ૐ गुर ૐ गुर ૐ गुर ૐ
गुर ૐ गुर ૐ गुर ૐ गुर ૐ
इस धरती पर पैदा होना, बडे गवर की बात है।
साहस और वीरता अपने, पुरखो की सौगात है।।
हम भारत के.....।।टेक।।
कूद समर मे आगे आये, जब भी हम ललकारने।
अँगुली दाँतो तले दबायी, अचरज से संसार ने।।
हम भारत के.....।।टेक।।
गौरवपूणर इितहास हमारा, अब भिवषय चमकायेगे।
भारत माँ की मिहमा को हम, वापस वही पहु ँचायेगे।।
हम भारत के....।।टेक।।
बाल संसकार केनद के बचचे हम, भारत को िवशवगुर बनायेगे।
आतमजान की िवजय पताका, पूरे िवशव मे फहरायेगे।।
हम भारत के....।।टेक।।
कभी महकते कभी चहकते, जीते मरते शान से।
झुकना नही आगे बढना है, सराबोर गुरजान से।।
हम भारत के....।।टेक।।
हिर ૐ हिर ૐ हिर ૐ हिर ૐ-2

गुर ૐ गुर ૐ गुर ૐ गुर ૐ
गुर ૐ गुर ૐ गुर ૐ गुर ૐ
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नशवर जहाँ मे भगवन्.....

नशवर जहाँ मे भगवन्, हमको तेरा सहारा-सहारा।
मतलब के मीत सारे, सचचा है दर तुमहारा-तुमहार।।
नशवर जहाँ मे भगवन्.....
कोई धन से पयार करता, कोई तन से पयार करता।
बालक हू ँ मै तो तेरा, तुझे मन से पयार करता-करता।
तेरे िबना नही है, अपना यहाँ गुजारा-गुजारा।।
नशवर जहाँ मे भगवन्, हमको तेरा सहारा-सहारा।
नशवर जहाँ मे भगवन्.....
कया भेट तेरी लाऊँ, चरणो मे कया चढाऊँ।
तेरा है तुझको अपर ण, बस बात ये बताऊँ-बताऊँ।
हमको शरण मे ले लो, अनुरोध है हमारा-हमारा।।
नशवर जहाँ मे भगवन्, हमको तेरा सहारा-सहारा।
नशवर जहाँ मे भगवन्.....
तुम हो दयालु सवामी, सेवक तुमहे मनाता।
संकट की हर घडी मे, बस तू ही याद आता-आता।
जब डगमगाती नैया, देता है तू िकनारा-िकनारा।।
नशवर जहाँ मे भगवन्, हमको तेरा सहारा-सहारा।
नशवर जहाँ मे भगवन्.....
दिष दया की रखना, हम है तेरे सहारे।
जीवन की नाव पभु जी, कर दी तेरे हवाले-हवाले।
बन जाय बात अपनी, कर दे तू इशारा-इशारा।।
नशवर जहाँ मे... मतलब के मीत....
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मात िपता गुर पभु चरणो मे .....

मात िपता गुर पभु चरणो मे पणवत बारमबार।
हम पर िकया बडा उपकार, हम पर िकया बडा उपकार।। टेक।।
माता ने जो कष उठाया, वह ऋण कभी न जाये चुकाया।
अँगुली पकडकर चलना िसखाया, ममता की दी शीतल छाया।
िजनकी गोदी मे पलकर हम, कहलाते होिशयार।
हम पर िकया....... मात-िपता...........।। टेक।।
िपता ने हमको योगय बनाया, कमा कमाकर अन िखलाया।
पढा िलखा गुणवान बनाया, जीवन पथ पर चलना िसखाया।
जोड-जोड अपनी संपित का, बना िदया हकदार।
हम पर िकया....... मात-िपता...........।। टेक।।
ततवजान गुर ने दरशाया, अंधकार सब दरू हटाया।
हदय मे भिक दीप जलाकर, हिरदशर न का मागर बताया।
िबन सवारथ ही कृपा करे वे, िकतने बडे है उदार।
हम पर िकया....... मात-िपता...........।। टेक।।
पभु िकरपा से नर तन पाया, संत िमलन का साज सजाया।
बल, बुिद और िवदा देकर, सब जीवो मे शेष बनाया।
जो भी इनकी शरण मे आता, कर देते उदार।

हम पर िकया....... मात-िपता...........।। टेक।।
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िहममत न हािरये .....

िहममत ना हािरये पभु ना िबसािरये।-2
हँसते मुसकराते हु ए िजंदगी न गुजािरये।।-2
काम ऐसे कीिजये िक िजनसे हो सबका भला।
बात ऐसी कीिजये िजसमे हो अमृत भरा।
मीठी बोली बोल सबको पेम से पुकािरये।-2
कडवे बोल-बोल के ना िजंदगी िबगािडये।।
हँसते मुसकराते......
अचछे कमर करते हु ए दःु ख भी अगर पा रहे।
िपछले पाप कमो ं का भुगतान वो भुगता रहे।
सदगुर की भिक करके पाप को िमटाइये।-2
गलितयो से बचते हु ए साधना बढाइये।
गलितयो से बचते हु ए भिक को बढाइये।।
हँसते मुसकराते......
मुिशकलो मुसीबतो का करना है जो खातमा।
हर समय कहना तेरा शुक है परमातमा।
फिरयादे करके अपना हाल ना िबगािडये।-2
जैसे पभु राखे वैसे िजंदगी गुजािरये।।
हँसते मुसकराते......
हदय की िकताब पर ये बात िलख लीिजये।
बन के सचचे भक सचचे िदल से अमल कीिजये।
करके अमल बन के कमल तिरये और तािरये।-2
जग मे जगमगाती हु ई िजंदगी गुजािरये।।
िहममत ना हािरये..... हँसते मुसकराते...
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ते रे फू लो से भी पयार.....

तेरे फूलो से भी पयार, तेरे काँटो से भी पयार।-2
जो भी देना चाहे, दे दे करतार, दिु नया के तारणहार।।
हमको दोनो है पसनद, तेरी धूप और छाँव।-2
दाता ! िकसी भी िदशा मे ले चल, िजंदगी की नाव।-2
चाहे हमे लगा दे पार,चाहे छोड हमे मझदार।।-2
जो भी देना चाहे.....
चाहे सुख दे या दःु ख, चाहे खुशी दे या गम।-2
मािलक ! जैसे भी रखेगे, वैसे रह लेगे हम।-2
चाहे काँटो के दे हार, चाहे हरा भरा संसार।।-2
जो भी देना चाहे....
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हमसे पभुज ी द ू र नही है ......

हमसे पभु जी दरू नही है, ना हम उनसे दरू है, ना उनसे हम दरू है।।टेक।।
जैसा चाहे वैसा राखे, हमको तो मंजूर है, हमको तो मंजूर है।।
उसने हमको जनम िदया है, हमको वो ही पालेगा।
हर हालत मे हमको तो बस, वो ही आ के सँभालेगा।।
उसकी है ये सारी सृिष, सबमे उसका नूर है। हमसे पभु जी....।।टेक।।

एक भरोसा उसपे करके, उसको ही हम मान ले।
िमथया है संसार ये सारा, भेद ये मन मे जान ले।
िमथया है सुख-दःु ख ये सारा, भेद ये मन मे जान ले।।
उसकी पूजा उसकी भिक, करनी हमे जरर है। हमसे पभु जी...।।टेक।।
िकसमे है कलयाण हमारा, ये तो वो ही जाने है।
धूप छाँव दःु ख ददर हमारे, सब वो ही पहचाने है।।
दयादिष उस परम िपता की, हम सब पर भरपूर है। हमसे पभु जी....।।टेक।।
जो भी दे परसाद समझ के, पेम से हमको पाना है।
बँगला दे या दे दे झोपडी, रहकर हमे िदखाना है।
देता सबको यथायोगय है, यह उसका दसतूर है।। जैसा चाहे वैसा....
हमसे पभु जी... जैसा चाहे वैसा....
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जोगी रे कया जाद ू है तुम हरे पयार मे .....

जोगी रे कया जाद ू है तेरे पयार मे... जोगी रे कया जाद ू है तुमहरे जान मे...
सौभागय से िमले ये जोगी, सबको धनय िकया है।
शांित, पेम और जान का, अमृत, हमने यही िपया है।।
जोगी रे कया जाद ू है तुमहरे जोग मे...
दरू भगाकर सारी उदासी, सबको पसनता देते।
तन-मन पुलिकत कर देते, बदले मे कुछ नही लेते।।
जोगी रे कया जाद ू है तुमहरे पयार मे....
दबु र लता कायरता िमटाकर, हमको वीर बनाते।
बल के भाव है भीतर भरते, हर िवपदा को हटाते।।
जोगी रे कया जाद ू है तुमहरे जान मे....
जोगी के दर पे हम आये, भागय हमारा जागे।
दशर न करके इस जोगी के, शोक दःु ख सब भागे।।
जोगी रे कया जाद ू है तुमहरे जोग मे.....
जब-जब मेरा जोगी झूमे, लगे है सावन आया।
मुरझाये िदल िखल जाते है, वसंत जैसे छाया।।
जोगी रे कया जाद ू है तुमहरे पयार मे....
बडा सलोना जोगी मेरा, मनभावन और पावन।
जब भी आये लगे है जैसे, खुिशयो का हो सावन।।
जोगी रे कया जाद ू है तुमहरे जान मे....
िचंता शोक न तिनक रहे यहाँ, ऐसी आभा इनकी।
शरण जो आये दरस जो पाये, बदली दिु नया उनकी।।
जोगी रे कया जाद ू है तुमहरे जोग मे....
जोगी की संगित मे आकर, ऊँचा धन है पाया।
कोई इसको छुडा न पाये, शाशवत रंग लगाया।।
जोगी रे कया जाद ू है तुमहरे पयार मे....
सूयर करे है िदन मे उजाला, चाँद करे रातो मे।
जोगी जान का करे उजाला, सतत सभी के िदलो मे।।
जोगी रे कया जाद ू है तुमहरे जान मे....
जोगी रे कया जाद ू है तुमहरे पयार मे....
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भारत के नौजवानो !......
भारत के नौजवानो ! भारत को िदवय बनाना।

तुमहे पयार करे जग सारा, तुम ऐसा बन िदखलाना।।
भारत के नौजवानो !.....
केवल इचछा न बढाना, संयम जीवन मे लाना।
सादा जीवन तम जीना, पर ताने रहना सीना।।
भारत के नौजवानो !....
जो िलखा है सदगंथो मे, जो कुछ भी कहा संतो ने।
उसको जीवन मे लाना, वैसा ही बन िदखलाना।।
भारत के नौजवानो !.....
सारे जहाँ से अचछा, िहनदोसताँ हमारा।-2
हम बुलबुले है इसकी, ये गुलिसताँ हमारा-2।।
सारे जहाँ से अचछा, िहनदोसताँ हमारा।
तुम पुरषाथर तो करना, पर नेक राह पर चलना।
सजजन का संग ही करना, दज
ु र न से बच के रहना।।
भारत के नौजवानो !....
जीवन अनमोल िमला है, तुम मौके को मत खोना।
यिद भटक गये इस जग मे, जनमो तक पडेगा रोना।।
भारत के नौजवानो ! भारत को िदवय बनाना।-3
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सादा जीवन सचचा जीवन.....

सादा जीवन सचचा जीवन-2, जग मे सबसे अचछा जीवन।
आडमबर और दमभरिहत मन-2, सचची समपित सचचा है धन।।
सादा जीवन सचचा जीवन, सादा जीवन।
शुद पिवत िवचार रखो और करो सदा ही अचछे काम-2
ऐसा काम कभी मत करना, छीने जो मन का िवशाम।
कभी बुरा कोई रप िदखाकर-2, तुमहे डरा न पाये दपर ण।।
सादा जीवन सचचा जीवन, सादा जीवन।
लोभ, मोह, दवु यर सन तयाग और वैर बुराई को तज दे।-2
मेहनत की, ईमान की रोटी खाकर ईशवर को भज ले।
पाप, ताप से मुिक पा ले-2, सवयं सँवार ले अपना जीवन।।
सादा जीवन सचचा जीवन, सादा जीवन।
परम िपता की परम दया से, मानव जीवन हमे िमला।-2
परम पूजय गुरकृपा से इसमे जान, भिक का कमल िखला।
बापू के सतसंग मे जैसे-2, पाया हमने पकाश महान।।
सादा जीवन सचचा जीवन...
आडमबर और दमभरिहत मन....
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बाल सं स कार मे हम जाये गे ......

बाल संसकार मे हम जायेगे, बुिदमान बन आयेगे।।
ितकाल संधया वे बताते है, तन-मन सवसथ बनाते है।
यौिगक पयोग कराते है, समरणशिक भी बढाते है।
खेल पितयोिगता मे जायेगे, बल बुिद को बढायेगे।
बाल संसकार मे हम जायेगे, बुिदमान हम बन आयेगे।।1।।
धयान का भी जान लेना है, सूयर को भी जल देना है।
ताटक भी हमे करना है, िवपितयो से ना हमे डरना है।
मंत-मिहमा हम गायेगे, भगवनाम जपते सो जायेगे।

बाल संसकार मे हम जायेगे, बुिदमान हम बन आयेगे।।2।।
पदासन हमे सुहाता है, आतमबल वह बढाता है।
वजासन भी हमे भाता है, बलवान हमे बनाता है।
ताडासन हम कर पायेगे, संयम ओज बढायेगे।
बाल संसकार मे हम जायेगे, बुिदमान हम बन आयेगे।।3।।
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जागृत हो भारत सारा......

जागृत हो भारत सारा, ʹ बाल संसकार ʹ का है ये नारा।
गीत गाते खुशी मनाते, खेल खेल मे िशका पाते।
नाच नाचते धूम मचाते, मीठे -मीठे भजन भी गाते।
भारत रहे सदा आगे हमारा, ʹ बाल संसकार ʹ का है ये नारा।।1।।
पेरक सुंदर कहानी सुनाते, शवास लेते अंक िगनाते।
धयान पंख लगाकर उडते, जान की सीढी हम है चढते।
केनद तो है पेम का िनझर रा, पयारा-पयारा सबसे नयारा।
जागृत हो भारत सारा, ʹ बाल संसकार ʹ का है ये नारा।।2।।
केनद मे ऐसा आननद आता, ʹ बाल संसकार ʹ मे मै िनत जाता।
न जा पाऊँ तो रोना आता, इतना तो ये मुझको भाता।
बालक है बापू को पयारा, घर-घर बहेगी संसकार धारा।
जागृत हो भारत सारा, ʹ बाल संसकार ʹ का है ये नारा।।3।।
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जनमिदन तुम ऐसा मनाओ....

भारतीय संसकृित तुम अपनाओ, जनमिदन तुम ऐसा मनाओ।
ʹ हैपपी बथर डेʹ भूल ही जाओ, जनमिदन बधाई कहो-कहलवाओ।।
सुबह बहमुहूतर मे जागो, मात-िपता-पभु पाँवो लागो।
सभी बडो के चरण छूना, केक का नाम भूल ही जाना।।
अपने सोये मन को जगाओ, अपना जीवन उनत बनाओ।
भारतीय संसकृित तुम अपनाओ, जनमिदन तुम ऐसा मनाओ।।1।।
जनमिदन होता है दीये जलाना, ना होता ये दीये बुझाना।
दीपजयोित से जीवन जगमगाता, ना इसे तम मे ले जाना।।
वेदो की ये िशका पा लो, जान सुधा से मन महकाओ।
भारतीय संसकृित तुम अपनाओ, जनमिदन तुम ऐसा मनाओ।।2।।
आज तुम अन-पसाद बाँटना, गरीबो को दान भी देना।
गये साल का िहसाब लगाना, नये साल की उमंगे जगाना।।
बापू कहते सदा खुश रहो, यही आशीष है पभु-सुख पा लो।
भारतीय संसकृित तुम अपनाओ, जनमिदन तुम ऐसा मनाओ।।3।।
ʹ हैपपी बथर डेʹ भूल ही जाओ, जनमिदन बधाई कहो-कहलवाओ।।
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जनम िदन बधाई गीत

बधाई हो बधाई जनमिदवस की बधाई
बधाई हो बधाई शुभ िदन की बधाई
बधाई हो बधाई जनमिदन की बधाई
जनमिदवस पर देते है तुमको हम बधाई
जीवन का हर इक लमहा हो तुमको सुखदायी

धरती सुखदायी हो अमबर सुखदायी
जल सुखदायी हो पवन सुखदायी
बधाई हो बधाई शुभ िदन की बधाई
मंगलमय दीप जलाओ उिजयारा जग फैलाओ
उदम पुरषाथर जगा कर मंिजल को अपनी पाओ
हो शतंजीव हो िचरंजीव शुभ घडी आज आई
माता सुखदायी हो िपता सुखदायी
बनधु सुखदायी हो सखा सुखदायी
बधाई हो बधाई शुभ िदन की बधाई
सदगुण की खान बने तू इतना महान बने तू
हर कोई चाहे तुझको ऐसा इनसान बने तू
बलवान हो तू महान हो करे गवर तुझ पर सब हम
दशर न सुखदायी हो सुिमरन सुखदायी
तन मन सुखदायी हो जीवन सुखदायी
बधाई हो बधाई शुभ िदन की बधाई
ऋिषयो का वंशज है तू ईशवर का अंशज है तू
तुझमे है चंदा और तारे तुझमे ही सजर न हारे
तू जान ले पहचान ले िनज शुद बुद आतम
ईशवर सुखदायी ऋिषवर सुखदायी
सुमित सुखदायी हो सतजान सुखदायी
बधाई हो बधाई शुभ िदन की बधाई
आनंदमय जीवन तेरा खुिशयो का हो सवेरा
चमके तू बन के सूरज हर पल हो दरू अंधेरा
तू जान का भणडार है रखना तू है ये संयम
जग सुखदायी हो गगन सुखदायी
जल सुखदायी हो अगन सुखदायी
बधाई हो बधाई शुभ िदन की बधाई
तुझमे न जीना मरना जग है केवल इक सपना
परमेशवर है तेरा अपना िनषा तू ऐसी रखना
तू धयान कर िनज रप का तू सृिष का है उदगम
मंिजल सुखदायी हो सफर सुखदायी
सब कुछ सुखदायी हो बधाई हो बधाई
बधाई हो बधाई शुभ िदन की बधाई
बधाई हो बधाई जनमिदन की बधाई
जल थल पवन अगर और अमबर हो तुमको सुखदायी
गम की धूप लगे न तुझको देते हम दहु ाई
ईशवर सुखदायी िनशवर सुखदायी
सुमित सुखदायी हो सतजान सुखदायी
बधाई हो बधाई शुभ िदन की बधाई
बधाई हो बधाई जनमिदन की बधाई
बधाई हो बधाई शुभ िदन की बधाई
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िवफलता आये तो......

िवफलता आये तो भी हमे, पीछे नही है हटना।
हार के पीछे छुपी है जीत, मायूस कभी ना होना।।

सौ सौ बार िगरे है चीटी, िफर भी मंिजल पे जाये।
िगरने से तुम भी ना डरो, संयम मन मे लाये।
हार से ना डरती िचिडया, सीखे धीरे-धीरे उडना।
हार के पीछे छुपी है जीत, मायूस कभी ना होना।।1।।
आधार काँटे होते हु ए भी, गुलाब सबके मन को भाये।
गलत होते-होते ही, तीर िनशाने पर लग जाये।
अजुरन की तरह एकागता, अपने मन मे लाना।
हार के पीछे छुपी है जीत, मायूस कभी न होना।।2।।
गरीब हो या अमीर, यारी िनषकाम िकया करो।
कृषण-सुदामा जैसा िमतपेम, तुम भी दो और िलया करो।
संकट काल मे कृषण सखा है, िफर िकसी से कया माँगना ?
हार के पीछे छुपी है जीत, मायूस कभी ना होना।।3।।
िवफलता आये तो भी हमे, पीछे नही है हटना।
हार के पीछे छुपी है जीत, मायूस कभी ना होना।।
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मुझको बाल संसकार मे भेिजये.....

िपता जी इतना कीिजये, मुझको बाल संसकार मे भेिजये।
माता जी इतना कीिजये, मुझको बाल संसकार भेिजये।।
कया आप चाहते नही है, िक मै तंदरसत बनूँ।
मन पसन बुिद तेज हो, और अचछे कायर चुनँू।
तो कृपा मुझ पे कीिजये, मुझको बाल संसकार मे भेिजये।
िपता जी इतना कीिजये.... माता जी इतना कीिजये....।।1।।
कया नही चाहते सपधारओं मे, बनूँ मै तेजसवी तारा।
किठन पिरिसथित मे साहसपूवरक, खुद को दँ ू सहारा।
तो इतना ठान लीिजये, मुझको बाल संसकार मे भेिजये।
िपता जी इतना कीिजये... माता जी इतना कीिजये....।।2।।
कया नही चाहते आपका लाडला, देश को बनाये महान।
बोले सदा पयार की जुबान, मन मे हो पभु गुणगान।
तो दढ सुिनशचय कीिजये, मुझको बाल संसकार मे भेिजये।
िपता जी इतना कीिजये... माता जी इतना कीिजये....।।3।।
आप भी खुिशयाँ पाइये, समाज को सुंदर बनाइये।
संसकारी बालक अपर ण कर, पभु की कृपा को पाइये।
िवनती मेरी सवीकािरये, मुझको बाल संसकार मे भेिजये।
िपता जी इतना कीिजये... माता जी इतना कीिजये....।।3।।
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सबका मं ग ल सबका भला हो....

सबका मंगल सबका भला हो गुर चाहना ऐसी है।।टेक।।
इसीिलए तो आये धरा पर सदगुर आशारामजी है।
सबका मंगल सबका....
भारत का नया रप बनाने, िवशवगुर के पद पे िबठाने,
योग िसिद के खोले खजाने, जान के झरने िफर से बहाने।
सबका मंगल सबका....।।टेक।।
युवाधन को ऊपर उठाने, यौवन-संयम पाठ िसखाने,
जन-जन भिक शिक जगाने, िनकल पडे गुर राम िनराले।
सबका मंगल सबका.....।।टेक।।

इक-इक बचची शबरी-सी हो, मीरा जैसी योिगनी हो,
सती अनसूया सती सीता हो, मुख पर तेज माँ शिक का हो।
सबका मंगल सबका.....।।टेक।।
नर-नर मे नारायण दशर न, सेवा कर फल पभु को अपर ण,
दीन-दःु खी को गले लगाये, सबका भला हो मन से गाये।
सबका मंगल सबका भला हो गुर चाहना ऐसी है।।-3
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ʹ शीरामचिरत मानस ʹ मे िमत-धमर

जे न िमत द ुः ख होिहं द ुख ारी, ितनही िबलोकत पातक भारी।
िनज सुख िगर सम रज करी जाना। िमतक द ुः ख रज मे र समाना।।1।।।
जो लोग िमत के दःु ख से दःु खी नही होते , उनहे देखने से ही बडा पाप लगता है। अपने पवर त के समान दःु ख
को धूल के समान और िमत के धूल के समान दःु ख को सुमेर (बडे भारी पवर त) के समान जाने।।1।।
िजनह के अिस मित सहज न आई। ते सठ कत हिठ करत िमताई।।
कु पथ िनवािर सुपं थ चलावा। गुन -पगटै अवगुन िनह द ुर ावा।।2।।
िजनहे सवभाव से ही ऐसी बुिद पाप नही है, वे मूखर हठ करके कयो िकसी से िमतता करते है ? िमत का धमर है
िक वह िमत को बुरे मागर से रोककर अचछे मागर पर चलाये। उसके गुण पकट करे और अवगुणो को िछपाये।।2।।
दे त ले त मन सं क न धरई। बल अनुम ान सदा िहत करई।।
िबपित काल कर सतगुन ने ह ा। शुि त कह सं त िमत गुन रहा।।3।।
देने लेने मे मन मे शंका न रखे। अपने बल के अनुसार सदा िहत ही करता रहे। िवपित के समय मे तो सदा
सौ गुना सनेह करे। वेद कहते है िक संत (शेष) िमत के गुण (लकण) ये है।।3।।
आगे कह मृद ु वचन बनाई। पाछे अनिहत मन कु िटलाई।।
जा कर िचत अिह गित सम भाई। अस कु िमत पिरहरे ि हं भलाई।।4।।
जो सामने तो बना-बनाकर कोमल वचन कहता है और पीठ पीछे बुराई करता है तथा मन मे कुिटलता
रखता है – हे भाई ! (इस तरह) िजसका मन साँप की चाल के समान टेढा है, ऐसे कुिमत को तयागने मे ही भलाई है।।
4।।
(शीरामचिरत. िकिषकनधा कांड ः 6.1,2,3,4)
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आतमपं च कम्

मनोबुद धयहं क ारिचतािन नाहं न च शोतिजहे न च घाणने त े।
न च वयोमभूि मनर ते ज ो न वायु ः िचदाननदरपः िशवोઽ हं िशवोઽहम्। ।
मै मन, बुिद, अहंकार और िचत नही हू ँ, कणर और िजहा नही हू ँ, नािसका और नेत नही हू ँ, आकाश और
भूिम नही हू ँ, तेज नही हू ँ, वायु नही हू ँ। मै तो चैतनय आननदसवरप िशव हू ँ.... िशव हू ँ (कलयाणसवरप हू ँ)।।1।।
न च पाणसं त ौ न वै पं च वायु ः न वा सपधातुनर वा पं च कोशः।
न वाकपािणपादौ न चोपसथपायु ः िचदाननदरपः िशवोઽ हं िशवोઽहम्। ।
मै पाण नही हू ँ, संजा नही हू ँ, पाँच वायु नही हू ँ, सात धातु नही हू ँ अथवा पाँच कोश नही हू ँ। मै वाणी नही हू ँ ,
हाथ नही हू ँ, पैर नही हू ँ, मै गुहांग आिद नही हू ँ। मै तो चैतनय आननदसवरप िशव हू ँ .... िशव हू ँ (कलयाणसवरप
हू ँ)।।2।।
न मे देष रागौ न मे लोभमोहौ मदो नै व मे नै व मातसयर भावः।
न धमो न चाथो न कामो न मोकः िचदाननदरपः िशवोઽ हं िशवोઽहम्। ।
मुझे राग और देष नही है, मुझे लोभ और मोह नही है, मुझे मद भी नही है और मातसयर (ईषयार) भी नही है।
मुझे न कोई धमर है न अथर है, न काम है न मोक है। मै तो चैतनय आननदसवरप िशव हू ँ... िशव हू ँ (कलयाणसवरप
हू ँ)।।3।।
न पुण यं न पापं न सौखयं न द ुः खं न मं त ो न तीथर न वे द ा न यजाः।
अहं भोजनं नै व भोजयं न भोका िचदाननदरपः िशवोઽ हं िशवोઽहम्। ।

मुझे न कोई पुणय है न पाप है, न सुख है न दःु ख है, मेरा न कोई मंत है न तीथर है, न वेद है न यज है। न मै
भोजन हू ँ न भोजय पदाथर हू ँ और न भोका हू ँ। मै तो चैतनय आननदसवरप िशव हू ँ... िशव हू ँ (कलयाणसवरप हू ँ)।।
4।।
अहं िनिवर कलपो िनराकाररपो िवभुव यारप य सवर त सवे ि नदयाणाम्।
सदा मे समतवं न मुि कनर बनधः िचदाननदरपः िशवोઽ हं िशवोઽहम्। ।
मै संकलप-िवकलपरिहत हू ँ, िनराकारसवरप हू ँ। मै सवर वयाप, सवर इिनदयो का सवामी हू ँ। मै सदैव समतव मे
िसथत हू ँ, मुझे मुिक या बंधन नही है। मै तो चैतनय आननदसवरप िशव हू ँ... िशव हू ँ (कलयाणसवरप हू ँ)।।5।।
(शीमद् आद शंकराचायर िवरिचतम् ʹ िनवारण षटकम्ʹ से संिकप)
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

गुर वनदना

जय सदगुर देवन देव वरं, िनज भकन रकण देह धरं।
पर दःु ख हरं सुख शांित करं, िनरपािध िनरामय िदवय परं।।1।।
जय काल अबािधत शांितमयं, जन पोषक शोषक ताप तयं।
भय भंजन देत परम अभयं, मन रंजन, भािवक भाव िपयं।।2।।
ममतािदक दोष नशावत है, शम आिदक भाव िसखावत है।
जग जीवन पाप िनवारत है, भवसागर पार उतारत है।।3।।
कहु ँ धमर बतावत धयान कही, कहु ँ भिक िसखावत जान कही।
उपदेशत नेम अर पेम तुमही, करते पभु योग अर केम तुमही।।4।।
मन इिनदय जाही न जान सके, नही बुिद िजसे पहचान सके।
नही शबद जहाँ पर जाय सके, िबनु सदगुर कौन लखाय सके।।5।।
नही धयान न धयातृ न धयेय जहाँ, नही जातृ न जान जेय जहाँ।
नही देश न काल न वसतु तहाँ, िबनु सदगुर को पहु ँचाय वहाँ।।6।।
नही रप न लकण ही िजसका, नही नाम न धाम कही िजसका।
नही सतय असतय कहाय सके, गुरदेव ही ताही जनाय सके।।7।।
गुर कीन कृपा भव तास गयी, िमट भूख गई छुट पयास गयी।
नही काम रहा नही कमर रहा, नही मृतयु रहा नही जनम रहा।।8।।
भग राग गया हट देष गया, अध चूणर भया अणु पूणर भया।
नही दैत रहा सम एक भया भम भेद िमटा मम तोर गया।।9।।
नही मै नही तू नही अनय रहा गुर शाशवत आप अननय रहा।
गुर सेवत ते नर धनय यहाँ, ितनको नही दःु ख यहाँ न वहाँ।।10।।
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

सं त िमलन को जाइये

कबीर सोई िदन भला जा िदन साधु िमलाय।
अंक भरे भिर भेिटये पाप शरीरां जाय।।1।।
कबीर दरशन साधु के बडे भाग दरशाय।
जो होवै सूली सजा काटे ई टरी जाय।।2।।
दरशन कीजे साधु का िदन मे कई कई बार।
आसोजा का मेह जयो बहु त करै उपकार।।3।।
कई बार नही किर सकै दोय बखत किर लेय।
कबीर साधु दरस ते काल दगा नही देय।।4।।
दोय बखत नही किर सकै िदन मे कर इक बार।
कबीर साधु दरस ते उतरे भौ जल पार।।5।।
दज
ू ै िदन नही किर सकै तीजे िदन कर जाय।
कबीर साधु दरस ते मोक मुिक फल पाय।।6।।
तीजे चौथै नही करै सातै िदन कर जाय।

या मे िवलमब न कीिजये कहै कबीर समुझाय।।7।।
सातै िदन नही किर सकै पाख पाख किर लेय।
कहे कबीर सो भकजन जनम सुफल किर लेय।।8।।
पाख पाख नही किर सकै मास मास कर जाय।
ता मे देर न लाइये कहै कबीर समुझाय।।9।।
मात-िपता सुत इसतरी आलस बनधु कािन।
साधु दरस को जब चले ये अटकावै खािन।।10।।
इन अटकाया ना रहै साधू दरस को जाय।
कबीर सोई संत जन मोक मुिक फल पाय।।11।।
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
मिहला उतथान टर सट
संत शी आशाराम आशम
साबरमित, अहमदाबाद- 5 फोनः 079-27505010-11
email: ashramindia@ashram.org http://www.ashram.org
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