हभें रेने हैं अच्छे सॊस्काय

ऩज्
ू म सॊत श्री आशायाभजी फाऩू का ऩावन सॊदेश
गवव कयो कक तुभ बायत के रार हो

हे बायतबूमभ के वीय सऩूतो ! तुभ बायत के गौयव, याष्ट्र की सम्ऩत्तत तथा दे श की शान

हो। अऩनी बत्तत को औय अऩनी शत्तत को इतना अधधक ववकमसत कय दो कक तुभभें वीय

मशवाजी औय भहायाणा प्रताऩ का स्वामबभान जाग उठे ... सुबाषचन्द्र फोस औय बगत मसॊह का
दे शप्रेभ जाग उठे .... यानी रक्ष्भीफाई औय चेनम्भा का साहस जाग उठे .... ऩारूशाह की धभमननष्ट्ठा

व मोग साभर्थमम जाग उठे .... सॊत श्री रीराशाह जी फाऩू का मोग-साभर्थमम, ब्रह्भऻान तथा सभाज
के उतकषम का ददव्म दृत्ष्ट्िकोण जाग उठे .....

हे वीयो ! दहम्भत कयो, ननबमम फनो औय गवम कयो कक तुभ बायत के रार हो। दीन-

द्ु खिमों व शोवषतों की सहामता कयो.... शोषकों का ववयोध कयो.... दे श के साथ गद्दायी कयने

वारों को सफक मसिाओ.... औय ननबमम होकय आतभऩद भें त्स्थनत प्राप्त कय रो। शाफाश वीय !
शाफाश.... ईश्वय औय सॊतों के आशीवामद तुम्हाये साथ हैं।
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अऩने फच्चों को स्वस्थ, प्रसन्द्नधचतत, उतसाही, एकाग्र, रक्ष्बेदी एवॊ काममकुशर फनाने हे तु

ऩूज्म फाऩूजी की ऩावन प्रेयणा से चरामे जा यहे ʹफार सॊस्काय केन्द्र भें बेत्जमे। आमु भमामदा्
फार सॊस्काय केन्द्र् 6 से 10 वषम, फार सॊस्काय केन्द्र् 10 से 18 वषम, कन्द्मा फार सॊस्काय केन्द्र्
10 से 17 वषम।
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प्राथमना
सदगरु
ु भदहभा
सॊत-अवतयण

आदशम फारक की ऩहचान
ववद्मा
जीवन भें दृढ़ता राओ
फारबतत ध्र् ररुव

बायतीम ऩयम्ऩया
स्भयणशत्तत फढ़ाने के उऩाम
गुरुबतत एकरव्म
भात-ृ वऩत ृ बतत

ऩीड़ ऩयाई जाणे ये ....
सुषुप्त शत्ततमाॉ जगाने के प्रमोग
करुणाभम रृदम

जन्द्भददवस कैसे भनामें ?
तमा करू, तमा नहीॊ
मशवाजी का साहस
ऩयीऺा भें सपर होने के मरए....
ऩर्थ
ृ वी का अभत
ृ ्गोदग्ु ध

मोगासन एवॊ मौधगक भुराएॉ
ताड़ासन

दीऺा मानी सही ददशा

ववषम-सच
ू ी

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सम्ऩकम् भदहरा उतथान रस्ि सॊत श्री आशायाभजी आश्रभ,
सॊत श्री आशायाभजी फाऩू आश्रभ भागम, अहभदाफाद-5

पोन् 079-27505010-11,
email: ashramindia@ashram.org website: http://www.ashram.org
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प्राथवना

हय कामम के ऩहरे बगवान मा सदगुरुदे व की प्राथमना कयना बायतीम सॊस्कृनत का

भहततवऩूणम अॊग है । इससे हभाये कामम भें ईश्वयीम सहामता, प्रसन्द्नता औय सपरता जुड़ जाती है ।
गरू
ु ब्रमह्भा गरू
ु ववमष्ट्ण्ु गरू
ु दे वो भहे श्वय्।

गरू
ु सामऺात ऩयब्रह्भ तस्भै श्री गयु वे नभ्।।

अथम् गरू
ु ही ब्रह्भा हैं, गरू
ु ही ववष्ट्णु हैं। गुरूदे व ही मशव हैं तथा गरू
ु दे व ही साऺात र

साकाय स्वरूऩ आददब्रह्भ हैं। भैं उन्द्हीॊ गरू
ु दे व के नभस्काय कयता हूॉ।
ध्मानभर
ू ॊ गयु ोभनूम तम् ऩज
ू ाभरॊ गयु ो् ऩदभ र।
भॊत्रभर
ू ॊ गयु ोवामतमॊ भोऺभर
ू ॊ गयु ो् कृऩा।।

अथम् ध्मान का आधाय गुरू की भयू त है , ऩज
ू ा का आधाय गरू
ु के श्रीचयण हैं , गरू
ु दे व के

श्रीभि
ु से ननकरे हुए वचन भॊत्र के आधाय हैं तथा गरू
ु की कृऩा ही भोऺ का द्वाय है ।
अिण्डभण्डराकायॊ व्माप्तॊ मेन चयाचयभ र।
ततऩदॊ दमशमतॊ मेन तस्भै श्रीगुयवे नभ्।।

अथम् जो साये ब्रह्भाण्ड भें जड़ औय चेतन सफभें व्माप्त हैं, उन ऩयभ वऩता के श्री चयणों
को दे िकय भैं उनको नभस्काय कयता हूॉ।

तवभेव भाता च वऩता तवभेव तवभेव फन्द्धश्ु च सिा तवभेव।
तवभेव ववद्मा रववणॊ तवभेव तवभेव सवं भभ दे व दे व।।

अथम् तुभ ही भाता हो, तभ
ु ही वऩता हो, तुभ ही फन्द्धु हो, तुभ ही सिा हो, तुभ ही

ववद्मा हो, तुभ ही धन हो। हे दे वताओॊ के दे व! सदगुरूदे व! तुभ ही भेया सफ कुछ हो।
ब्रह्भानन्द्दॊ ऩयभसुिदॊ केवरॊ ऻानभूनतं

द्वन्द्द्वातीतॊ गगनसदृशॊ तततवभस्माददरक्ष्मभ र।
एकॊ ननतमॊ ववभरभचरॊ सवमधीसाक्षऺबूतॊ

बावातीतॊ त्रत्रगुणयदहतॊ सदगुरूॊ तॊ नभामभ।।
अथम् जो ब्रह्भानन्द्द स्वरूऩ हैं, ऩयभ सि
ु दे ने वारे हैं, जो केवर ऻानस्वरूऩ हैं, (सि
ु -

द्ु ि, शीत-उष्ट्ण आदद) द्वॊद्वों से यदहत हैं, आकाश के सभान सूक्ष्भ औय सवमव्माऩक हैं,

तततवभमस आदद भहावातमों के रक्ष्माथम हैं, एक हैं, ननतम हैं, भरयदहत हैं, अचर हैं, सवम फुविमों

के साऺी हैं, सततव, यज, औय तभ तीनों गुणों के यदहत हैं – ऐसे श्री सदगुरूदे व को भैं नभस्काय
कयता हूॉ।
हभें बी प्राथमना से ईश्वयीम भदद प्राप्त कयनी है । ववषम-सूची

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
ʹश्रीयाभचरयत भानसʹ भें आता है ्

सदगुरु भहहभा

गयु त्रफन बव ननधध तयइ न कोई। जौं त्रफयॊ धच सॊकय सभ होई।।

ʹगरु
ु के त्रफना कोई बवसागय नहीॊ तय सकता, चाहे वह ब्रह्भाजी औय शॊकयजी के सभान

ही तमों न हो !ʹ

सदगरु
ु का अथम मशऺक मा आचामम नहीॊ है । मशऺक अथवा आचामम हभें थोड़ा-फहुत ऐदहक
ऻान दे ते हैं रेककन सदगरु
ु तो हभें ननजस्वरूऩ का ऻान दे दे ते हैं। त्जस ऻान की प्रात्प्त के फाद
भोह उतऩन्द्न न हो, द्ु ि का प्रबाव न ऩड़े औय ऩयब्रह्भ की प्रात्प्त हो जाम ऐसा ऻान गरु
ु कृऩा
से ही मभरता है । उसे प्राप्त कयने की बूि जगानी चादहए। इसीमरमे कहा गमा है ्
गुरु गोत्रफन्द्द दोउ िड़े, का के रागों ऩाॉव।

फमरहायी गुरु आऩने, त्जस गोत्रफन्द्द ददमो फताम।।

जफ श्रीयाभ, श्रीकृष्ट्ण आदद अवताय धया ऩय आमे, तफ उन्द्होंने बी गुरु ववश्वामभत्र,

वमसष्ट्ठजी तथा साॊदीऩनी भुनन जैसे ब्रह्भननष्ट्ठ सॊतों की शयण भें जाकय भानवभात्र को सदगुरु
भदहभा का भहान सॊदेश प्रदान ककमा।

याभ, कृष्ट्ण से कौन फड़ा, नतन्द्ह ने बी गुरु कीन्द्ह।
तीन रोक के हैं धनी, गुरु आगे आधीन।।

हभें बी भहाऩुरुषों सदगुरुओॊ के श्रीचयणों भें फैठना है । ववषम-सूची

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सॊत-अवतयण

अऩने ऩूज्म सॊत श्री आशायाभजी फाऩू के जन्द्भ के ऩहरे अऻात सौदागय एक शाही झूरा

अनुनम-ववनम कयके दे गमा, फाद भें ऩज्
ू म श्री अवतरयत हुए। नाभ यिा गमा आसुभर। ʹमह तो
भहान सॊत फनेगा, रोगों का उद्धाय कये गा....ʹ ऐसी बववष्ट्मवाणी कुरगुरु ने कही। तीन वषम की
उम्र भें फारक आसुभर ने चौथी कऺा भें ऩढ़ने वारे फच्चों के फीच चौथी कऺा की कववता

सुनाकय मशऺक एवॊ ऩूयी कऺा को चककत कय ददमा। आठ-दस वषम की उम्र भें ऋवि-मसविमाॉ
अनजाने भें आववबत
ूम हो जामा कयती थीॊ। 22 वषम की उम्र तक उन्द्होंने मबन्द्न-मबन्द्न आध्मात्तभक

मात्राएॉ की औय कुछ उऩरत्धध की। वातसल्मभमी भाॉ भहॉ गीफा का दर
ु ाय, घय ऩय ही यिने के

मरए रयश्तेदायों की ऩुयजोय कोमशश एवॊ नववववादहता धभमऩतनी श्री रक्ष्भीदे वी का तमागऩूणम

अनुयाग बी उनको अऩने रक्ष्म ऩय ऩहुॉचने के मरए गह
ृ तमाग से योक न सका। धगरय गुपाओॊ,
कन्द्दयाओॊ को छानते हुए, कॊिकीरे एवॊ ऩथयीरे भागों ऩय ऩैदर मात्रा कयते हुए, अनेक साध-ु सॊतों
का सम्ऩकम कयते हुए आखिय वे इसी जीवन भें जीवनदाता से एकाकाय फने हुए आतभसाऺातकायी
ब्रह्भवेतता ऩूज्मऩाद स्वाभी श्री रीराशाहजी भहायाज के ऩास नैनीतार के अयण्म भें ऩहुॉच ही
गमे। आध्मात्तभक मात्राओॊ एवॊ कसौदिमों से वे िये उतये । साधना की ववमबन्द्न घादिमों को ऩाय
कयते हुए सम्वत र 2021, आत्श्वन शत
ु र ऩऺ द्ववतीम को उन्द्होंने अऩना ऩयभ ध्मेम हामसर कय
मरमा.... ऩयभातभ-साऺातकाय कय मरमा।
तभाभ ववघ्न फाधाएॉ, प्ररोबन एवॊ ईष्ट्मामरओ
ु ॊ की ईष्ट्मामएॉ, ननॊदक व जरने वारों की

अपवाहें उन्द्हें आतभसि
ु से, प्रबु प्मामरमाॉ फाॉिने के ऩववत्र कामम से योक न सकीॊ। उनके ऻानरोक
से केवर बायत ही नहीॊ वयन र ऩयू े ववश्व के भानव राबात्न्द्वत हो यहे हैं। ववषम-सच
ू ी

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

हभें बी फाऩू जी के प्माये फनना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

आदशव फारक की ऩहचान

उद्मभ, साहस, धैम,म फुवि, शत्तत औय ऩयाक्रभ – मे छ् गुण त्जस व्मत्तत के जीवन भें

हैं, अॊतमामभी दे व उसकी सहामता कयते हैं।

आऻाकायी फुविभान सॊत स्वबाव स्वाध्मामी।

अबमॊ सत्तत्तवसॊशद्धु द्धऻावनमोगव्मवस्स्थतत्।

दानॊ दभश्च मऻश्च स्वाध्मामस्तऩ आजववभ ्।।

ʹननबममता, अॊत्कयण की शवु ि, ऻान औय मोग भें ननष्ट्ठा, दान, इत्न्द्रमों ऩय काफू मऻ

औय स्वाध्माम, तऩ, अॊत्कयण की सयरता का बाव – मे दै वी सम्ऩत्ततवारे के रक्ष्ण हैं।ʹ (श्रीभद
बगवद् गीता 16.1)
भात-ृ वऩत ृ

बत्तत,

गरु
ु बत्तत,

सतमननष्ट्ठा,

सहनशीरता,

सभता,

प्रसन्द्नता,

उतसाह,

ववनम्रता, उदायता, आऻाकारयता आदद सदगण
ु बी आदशम फारक के जीवन भें होते हैं। ववषम-सच
ू ी
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

हे प्रब!ु आनन्ददाता!!

हे प्रबु! आनन्द्ददाता !! ऻान हभको दीत्जमे।
शीघ्र साये दग
ु ण
ुम ों को दयू हभसे कीत्जमे।।

हे प्रबु......

रीत्जमे हभको शयण भें हभ सदाचायी फनें।
ब्रह्भचायी धभमयऺक वीय व्रतधायी फनें।।
हे प्रबु......

ननॊदा ककसी की हभ ककसी से बूरकय बी न कयें ।

ईष्ट्माम कबी बी हभ ककसी से बूरकय बी न कयें ।।
हे प्रब.ु ..

सतम फोरें झठ
ू तमागें भेर आऩस भें कयें ।

ददव्म जीवन हो हभाया मश तेया गामा कयें ।।
हे प्रब.ु ...

जाम हभायी आमु हे प्रबु ! रोक के उऩकाय भें ।
हाथ डारें हभ कबी न बर
ू कय अऩकाय भें ।।
हे प्रबु....

कीत्जमे हभ ऩय कृऩा अफ ऐसी हे ऩयभातभा!
भोह भद भतसय यदहत होवे हभायी आतभा।।
हे प्रबु....

प्रेभ से हभ गुरुजनों की ननतम ही सेवा कयें ।

प्रेभ से हभ सॊस्कृनत ही ननतम ही सेवा कयें ।।
हे प्रबु...

मोगववद्मा ब्रह्भववद्मा हो अधधक प्मायी हभें ।
ब्रह्भननष्ट्ठा प्राप्त कयके सवमदहतकायी फनें।।
हे प्रबु.... ववषम-सूची
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हभें बी आदशम फारक फनना है ।

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आदशव हदनचमाव

जीवन ववकास औय सवम सपरताओॊ की कॊु जी है एक सही ददनचमाम। सही ददनचमाम द्वाया

सभम का सदऩ
ु मोग कयके तन को तॊदरूस्त, भन को प्रसन्द्न एवॊ फुवि को कुशाग्र फनाकय फुवि
को फुविदाता की ओय रगा सकते हैं।

ब्राह्भभुहूतव भें जागयण

प्रात् 4.30 फजे से 5 फजे के फीच उठें , रेिे-रेिे शयीय को िीॊचें। कुछ सभम फैठकय

ध्मान कयें । शशक आसन कयते हुए इष्ट्िदे व, गुरुदे व को नभन कयें ।
कयदशवन् दोनों हाथों के दशमन कयते हुए मह श्रोक फोरें ।

कयाग्रे वसते रक्ष्भी् कयभध्मे सयस्वती।
कयभूरे तू गोववन्द्द् प्रबाते कयदशमनभ र।।

दे वभानव हास्म प्रमोग् तामरमाॉ फजाते हुए तेजी से बगवन्द्नाभ रेकय दोनों हाथ ऊऩय
उठाकय हॉसें।
बमू भवॊदन् धयती भाता को वॊदन कयें औय मह श्रोक फोरें।

सभर
ु वसने दे वव ऩवमतस्तनभत्ण्डते।

ववष्ट्णऩ
ु त्तन नभस्तभ्
ु मॊ ऩादस्ऩशं ऺभस्व भे।।

ऩानी प्रमोग् सफ
ु ह िारी ऩेि एक अथवा दो धगरास यात का यिा हआ ऩानी वऩमें।
शौच द्धवऻान् स्नान कयते सभम मह भॊत्र फोरें। ૐ ह्ीॊ गॊगामै। ૐ ह्ीॊ स्वाहा।

ऋवष स्नान् ब्राह्भ भुहूतम भें । भानव स्नान् सूमोदम से ऩूव।म दानव स्नान् सूमोदम के
फाद चाम, नाश्ता रेकय 8-9 फजे।
शौच जाते सभम कानों तथा मसय ऩय कऩड़ा फाॉधें, दाॉत बीॊचकय भर तमाग कयें । शौच के
सभम ऩहने हुए कऩड़े शौच के फाद धो रें ।
दॊ त सयु ऺा् नीभ की दातन
ु अथवा आमव
ु ैददक भॊजन से दाॉत साप कयें ।

स्नान् ठॊ डे ऩानी से नहा यहे हों तो सवमप्रथभ मसय ऩय ऩानी डारें। यगड़-यगड़कय स्नान

कयें । ववषम-सच
ू ी
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी सुसॊस्कायी जीवन जीना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
ईश्वय उऩासना

"हे ववद्माथॉ ! ईश्वयप्रात्प्त का रक्ष्म फना रो। फाय-फाय सतसॊग का आश्रम रो, ईश्वय का
नाभ रो, उसका गुणगान कयो, उसको प्रीनत कयो। औय कबी कपसर जाओ तो आतमबाव से
ऩुकायो। वे ऩयभातभा-अॊतयातभा सहाम कयते हैं, त्रफल्कुर कयते हैं।" – ऩूज्म फाऩू जी।

आयती् हभें मह अनभोर जीवन ईश्वयकृऩा से मभरा है । अत् आऩ योज के 24 घॊिों भें

से कभ-से-कभ एक घॊिा ईश्वय-उऩासना के मरए दें । प्रात् शौच-स्नानादद से ननवतृ त होकय

सवमप्रथभ भ्रूभध्म भें नतरक कयें । ततऩश्चात प्राणामाभ, प्राथमना, जऩ-ध्मान, सयस्वती उऩासना,
त्रािक, शुब सॊकल्ऩ, आयती आदद कयें ।

मे बी कयें

ननममभत रूऩ से व्मामाभ, मोगासन एवॊ सूमोऩासना कयें ।
5-7 तुरसी के ऩतते चफाकय एक धगरास ऩानी वऩमें।
वऩमें।

भाता-वऩता औय गुरुजनों को प्रणाभ कयें । हरका-ऩौत्ष्ट्िक नाश्ता कयें मा दध
ू (गोदग्ु ध)
प्रनतददन ववद्मारम जामें औय एकाग्रताऩूवक
म ऩढ़ाई कयें । ववषम-सूची
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी पूर की तयह भहकना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
बोजन प्रसाद

हाथ ऩैय धोकय ऩव
म बोजन कयें ।
ू म मा उततय ददशा की ओय भि
ु कयके भौनऩव
ू क
स्वास्र्थमकायक, सऩ
ु ाच्म व सात्ततवक आहाय रें ।
फाजारू चीज-वस्तए
ु ॉ न िामें।

बोजन से ऩव
ू ्व इस श्रोक का उच्चायण कयें हरयदामता हरयबोतता हरययन्द्नॊ प्रजाऩनत्।

हरय् सवमशयीययथो बत
ु ते बोजमते हरय्।।

श्रीभद् बगवद् गीता के ऩन्द्रहवें अध्माम का ऩाठ अवश्म कयें ।
इन भॊत्रों से प्राणों को 5 आहूनतमाॉ अऩमण कयें ।
ૐ प्राणाम स्वाहा।

ૐ अऩानाम स्वाहा।
ૐ व्मानाम स्वाहा।

ૐ उदानाम स्वाहा।

ૐ सभानाम स्वाहा।

अध्ममन् ववद्मा ददानत ववनमभ र।
ʹववद्मा से ववनमशीरता आती है ।ʹ

सवमप्रथभ हाथ-ऩैय-धोकय, नतरक कय ʹहरय ૐʹ का उच्चायण कयें । अफ शाॊत होकय ननत्श्चॊत

होकय ऩढ़ने फैठें।

अध्ममन के फीच-फीच भें एवॊ अॊत भें शाॊत हों औय ऩढ़े हुए का भनन कयें ।
कभय सीधी यिें। भुि ईशान कोण (ऩूवम औय उततय के फीच) की ददशा भें हो।
जीब की नोक को तारु भें रगाकय ऩढ़ने से ऩढ़ा हुआ जल्दी माद होता है ।
िेरकूद के फाद ननमत सभम ऩय ऩढ़ाई कयें ।
सॊध्माकार भें प्राणामाभ, जऩ, ध्मान व त्रािक कयें ।

सदग्रॊथों का ननममभत ऩठन कयें । ववषम-सूची
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हभें बी उच्च मशऺा प्राप्त कयनी है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
शमन

सोने से ऩहरे् सतसॊग की ऩुस्तक, सतशास्त्र ऩढ़ें अथवा कैसेि मा सीडी सुनें।
ईश्वय मा गुरुभॊत्र से प्राथमना तथा ध्मान कयके सोमें।
मसय ऩूवम मा दक्षऺण की ओय हो।
भॉह
ु ढककय न सोमें।

जल्दी सोमें, जल्दी उठें ।
श्वासोच्छवास की धगनती कयते हुए सीधा (भॉह
ु ऊऩय की ओय कयके) सोमें। कपय जैसी
आवश्मकता होगी वैसे स्वाबाववक कयवि रे री जामेगी।
ऻानवधवक ऩहे मरमाॉ-

कारा घोड़ा गोयी सवायी, एक के फाद एक की फायी। (तवा औय योिी)
ददन को सोमे यात को योमे, त्जतना योमे उतना िोमे। (भोभफतती)
फोरो ककसके प्राण फचामे, ऩयभेश्वय ने नमृ सॊह रूऩ धय।

फोरो ककसके दष्ट्ु ि वऩता को, ईश्वय ने भाया दे हयी ऩय। (बतत प्रह्राद)
जन-जन

के योगों को हयने, वे ऩर्थ
ृ वी ऩय आमे।

फोरो आमुवेद के ऻान को, कौन धया ऩय रामे ? (बगवान धन्द्वॊतयी) ववषम-सूची
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हभें बी अऩनी नीॊद को बत्ततभम फनाना है।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
द्धवद्मा

तीन प्रकाय कक द्धवद्माएॉ-

ऐहहक द्धवद्मा् स्कूर औय कारेजों भें ऩढ़ामी जाती है ।

मोग द्धवद्मा् मोगननष्ट्ठ भहाऩुरुषों के सात्न्द्नध्म भें जाकय मोग की कॊु त्जमाॉ प्राप्त कयके

उनका अभ्मास कयने से प्राप्त होती है ।

आत्तभद्धवद्मा् आतभवेतता ब्रह्भऻानी सदगुरु का सतसॊग-सात्न्द्नध्म प्राप्त कयके उनके

उऩदे शों के अनुसाय अऩना जीवन ढारने से मह प्राप्त होती है । मह ववद्मा सवोऩरय ववद्मा है ,
त्जससे अॊतयातभा ऩयभातभा भें ववश्रात्न्द्त मभरती है औय कोई कतमव्म शेष नहीॊ यहता। मोगववद्मा

एवॊ आतभववद्मा की उऩासना से आतभफर फढ़ता है , दै वी गुण ववकमसत होते हैं, स्वबाव सॊमभी

फनता है औय फड़ी-फड़ी भुसीफतों के मसय ऩय ऩैय यिकय उन्द्ननत के ऩथ ऩय आगे फढ़ने की
शत्तत प्राप्त होती है ।

साखिमाॉ

फच्चों के जीवन भें सदगुणों का सॊचाय कयने के मरए उऩमोगी साखिमाॉहाथ जोड़ वॊदन करूॉ, धरूॉ चयण भें शीश।

ऻान बत्तत भोहे दीत्जमे, ऩयभ ऩुरुष जगदीश।।
भैं फारक तेया प्रब,ु जानॉू मोग न ध्मान।
गरु
ु कृऩा मभरती यहे , दे दो मह वयदान।।

बमनाशन दभ
ु नम त हयण, कमर भें हरय को नाभ।

ननशददन नानक जो जऩे, सपर होवदहॊ सफ काभ।।
आरस कफहुॉ न कीत्जमे, आरस अरय सभ जानन।
आरस से ववद्मा घिे , फर फवु ि की हानन।।
तुरसी साथी ववऩत्तत के, ववद्मा ववना वववेक।

साहस सुकृत सतमव्रत, याभ बयोसो एक।। ववषम-सूची
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी आतभववद्मा प्राप्त कयनी हैं।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
जीवन भें दृढ़ता राओ
हे ववद्माथॉ !

ऩुरुषाथॉ, सॊमभी, उतसाही ऩुरुषों के मरए कुछ बी असम्बव नहीॊ है औय आरसी, राऩयवाह

रोगों के मरए तो सपरता बी ववपरता भें
उतसाही फनो।

फदर जाती है । अत् ऩुरुषाथॉ फनो, दृढ़ सॊमभी फनो,

स्वाभी याभतीथमजी ववद्माथॉ अवस्था भें फड़ी अबावग्रस्त दशा भें यहे । कबी तेर न होता
तो सड़क के ककनाये के रैम्ऩ के नीचे

फैठकय ऩढ़ रेते। कबी तो जूते ियीदने के बी ऩैसे न

होते औय कबी धन के अबाव भें एक वतत ही बोजन कय ऩाते। कपय बी दृढ़ सॊकल्ऩ औय

ननयॊ तय ऩुरुषाथम से उन्द्होंने अऩना अध्ममन ऩूया ककमा। उन्द्होंने रौककक ववद्मा ही नहीॊ ऩामी
अवऩतु आतभववद्मा भें बी आगे फढ़े औय भानवीम ववकास की चयभ अवस्था आतभसाऺातकाय को
उऩरधध हुए। वे एक भहान सॊत फने औय स्वमॊ ऩयभातभा उनके रृदम भें प्रकि हुए। अभेरयका का
प्रेजीडेंि रूज़वेल्ि उनके दशमन औय सतसॊग से धन्द्म-धन्द्म हो जाता था। रािों रोगों को अफ बी

उनके सादहतम से राब हो यहा है। कहाॉ तो एक गयीफ ववद्माथॉ औय कहाॉ ૐकाय के जऩ व
प्रबुप्रात्प्त के दृढ़ ननश्चम से भहान सॊत हो गमे !

रौककक ववद्मा तो ऩाओ ही ऩय उस ववद्मा को बी ऩा रो जो भानव को जीते जी भतृ मु

के ऩाय ऩहुॉचा दे ती है । उसे बी जानो त्जसके जानने से सफ जाना जाता है , इसी भें तो भानवजीवन की साथमकता है । ऩेिऩारू ऩशुओॊ की नाईं त्जॊदगी त्रफतामी तो तमा त्रफतामी ! आतभाऩयभातभा का ऻान नहीॊ ऩामा तो तमा ऩामा ! आतभसुि नहीॊ जाना तो तमा सुि जाना ! ववषमसूची

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी दृढ़सॊकल्ऩवान फनना है ।

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फारबक्त ध्रव

हे ववद्माथॉ !

जीवन भें ककसी बी ऺेत्र भें सपर होना चाहते हो तो कोई-न-कोई अच्छा व्रत रे रो तथा
उसका दृढ़ताऩव
म ऩारन कयो। त्जस प्रकाय गाॊधी जी ने फाल्मावस्था भें याजा हरयशचन्द्र का
ू क
नािक दे िकय जीवन भें सतम फोरने का व्रत मरमा तथा जीवनऩममन्द्त उसका ऩारन ककमा। व्रत

(ननमभ) औय दृढ़तारूऩी दो सदगण
ु हों तो जीव मशवस्वरूऩ हो जाता है , भानव से भहे श्वय फन
जाता है ।

याजा उततानऩाद की दो याननमाॉ थीॊ। वप्रम यानी का नाभ था सुरूधच औय अवप्रम यानी का

नाभ था सुनीनत। दोनों याननमों को एक-एक ऩुत्र था। एक फाय यानी सुनीनत का ऩुत्र ध्र्व
ु िेरतािेरता अऩने वऩता की गोद भें फैठ गमा। वप्रम यानी ने तुयॊत ही उसे अऩने वऩता की गोद से

नीचे उतायकय कहा् "वऩता की गोद भें फैठने के मरए ऩहरे भेयी कोि से जन्द्भ रे।" ध्र्व
ु योतायोता अऩनी भाॉ के ऩास गमा औय सायी फात भाॉ से कही। भाॉ ने िफ
ू सभझामा् "फेिा! मह

याजगद्दी तो नश्वय है , तू तो बगवान का दशमन कयके शाश्वत गद्दी प्राप्त कय।" ध्र्व
ु को भाॉ की
सीि फहुत अच्छी रगी औय वह तुयन्द्त ही दृढ़ ननश्चम कयके तऩ कयने के मरए जॊगर भें चरा
गमा। यास्ते भें दहॊसक ऩशु मभरे कपय बी वह बमबीत नहीॊ हुआ। इतने भें उसे दे ववषम नायद
मभरे। ऐसे घनघोय जॊगर भें भात्र 5 वषम के फारक को दे िकय नायदजी ने वहाॉ आने का कायण

ऩूछा। ध्र्व
ु ने घय भें हुई सफ फातें नायद जी से कहीॊ औय बगवान को ऩाने की तीव्र इच्छा प्रकि
की। नायदजी ने ध्र्व
ु को सभझामा् "तू इतना छोिा है औय बमानक जॊगर भें ठॊ डी-गभॉ सहन
कयके तऩस्मा नहीॊ कय सकता इसमरए तू घऱ वाऩस चरा जा। " ऩयन्द्तु ध्र्व दृढ़ ननश्चमी था।

उसकी दृढ़ ननष्ट्ठा औय बगवान को ऩाने की तीव्र इच्छा दे िकय नायदजी ने ध्र्व
ु को "ૐ नभो

बगवते वासुदेवाम" भॊत्र दे कय आशीवामद ददमा् "फेिा ! तू श्रिा से इस भॊत्र का जऩ कयना।

बगवान जरूय तुझ ऩय प्रसन्द्न होंगे।" ध्र्व
ु तो कठोय तऩस्मा भें रग गमा। एक ऩैय ऩय िड़े
होकय, ठॊ डी-गभॉ, फयसात सफ सहन कयते हुए नायदजी के द्वाया ददमे हुए भॊत्र का जऩ कयने

रगा। उसकी ननबममता, दृढ़ता औय कठोय तऩस्मा से बगवान नायामण स्वमॊ प्रकि हो गमे।
बगवान ने ध्र्व
ु से कहा् "कुछ भाॉग, भाॉग फेिा ! तुझे तमा चादहए। भैं तेयी तऩस्मा से प्रसन्द्न
हुआ हूॉ। तुझे जो चादहए वह भाॉग रे।" ध्र्व
ु बगवान को दे िकय आनॊदववबोय हो गमा। बगवान
को प्रणाभ कयके कहा् "हे बगवन र ! भुझे दस
ू या कुछ बी नहीॊ चादहए। भुझे अऩनी दृढ़ बत्तत

दो।" बगवान औय अधधक प्रसन्द्न हो गमे औय फोरे् "तथास्तु। भेयी बत्तत के साथ-साथ तुझे
एक वयदान औय बी दे ता हूॉ कक आकाश भें एक ताया ʹध्र्व
ु ʹ ताया के नाभ से जाना जामेगा औय
दनु नमा दृढ़ ननश्चम के मरए तझ
ु े सदा माद कये गी।" आज बी आकाश भें हभें मह ताया दे िने को

मभरता है । ऐसा था फारक ध्र्व
ु , ऐसी थी बत्तत भें उसकी दृढ़ ननष्ट्ठा। ऩाॉच वषम के ध्र्व
ु को
बगवान मभर सकते हैं। तो हभें तमों नहीॊ मभर सकते ! जरूयत है बत्तत भें ननष्ट्ठा की औय दृढ़

ववश्वास की। इसमरए फच्चों को हययोज ननष्ट्ठाऩव
म प्रेभ से भॊत्र का जऩ कयना चादहए। ववषमू क
सच
ू ी

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी ध्र्व
ु की तयह अिर ऩद ऩाना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
5 वषव के फारक ने चरामी जोखिभबयी सड़कों ऩय काय !

"भैंने ऩूज्म फाऩूजी से ʹसायस्वतम भॊत्रʹ की दीऺा री है । जफ भैं ऩूजा कयता हूॉ, फाऩू जी

भेयी तयप ऩरकें झऩकाते हैं। भैं फाऩूजी से फातें कयता हूॉ। भैं योज दस भारा जऩ कयता हूॉ। भैं
फाऩूजी से जो भाॉगता हूॉ, वह भुझे मभर जाता है । भुझे हभेशा ऐसा एहसास होता है कक फाऩूजी
भेये साथ हैं।

5 जुराई 2005 को भैं अऩने दोस्तों के साथ िेर यहा था। भेया छोिा बाई छत से नीचे

धगय गमा। उस सभम हभाये घय भें कोई फड़ा नहीॊ था। इसमरए हभ सफ फच्चे डय गमे। इतने भें

ऩूज्म फाऩू जी की आवाज आमी कक ʹताॊशू ! इसे वैन भें मरिा औय वैन चराकय हात्स्ऩिर रे

जा।ʹ उसके फाद भैंने अऩनी दीददमों की भदद से दहभाॊशु को वैन भें मरिामा। गाड़ी कैसे चरी

औय अस्ऩतार तक कैसे ऩहुॉची, भुझे नहीॊ ऩता। भझ
ु े यास्ते बय ऐसा एहसास यहा कक फाऩूजी भेये
साथ फैठे हैं औय गाड़ी चरवा यहे हैं।" (घय से अस्ऩतार की दयू ी 5 कक.भी. से अधधक है ।)
-

ताॊशु फेसोमा, याजवीय कारोनी, ददल्री – 96 ववषम-सूची

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी दृढ़ ननश्चमी फनना है ।

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बायतीम ऩयम्ऩया

ततरक भहहभा् नतरक बायतीम सॊस्कृनत का प्रतीक है ।

वैऻातनक तथ्म् रराि ऩय दोनों बौहों के फीच आऻाचक्र (मशवनेत्र) है औय उसी के ऩीछे
के बाग भें दो भहततवऩूणम अॊत्स्रावी ग्रॊधथमाॉ त्स्थत हैं- ऩीननमर ग्रत्न्द्थ औय ऩीमूष ग्रत्न्द्थ।

नतरक रगाने से दोनों ग्रत्न्द्थमों का ऩोषण होता है औय ववचायशत्तत ववकमसत होती है ।

ʹૐ गॊ गणऩतमे नभ्।ʹ भॊत्र का जऩ कयके, जहाॉ चोिी यिते हैं वहाॉ दामें हाथ की उॉ गमरमों से
स्ऩशम कयें औय सॊकल्ऩ कयें कक ʹहभाये भस्तक का मह दहस्सा ववशेष सॊवेदनशीर हो, ववकमसत
हो।ʹ इससे ऻानतॊतु सुववकमसत होते हैं, फुविशत्तत व सॊमभशत्तत का ववकास होता है ।

अनुबव् याजस्थान के जमऩुय त्जरे भें त्स्थत दे वीनगय भें गजेन्द्र मसॊह िीॊची नाभ का

एक रड़का यहता है । वह ननममभत रूऩ से फार सॊस्काय केन्द्र भें जाता था। केन्द्र भें जफ उसे

नतरक कयने से होने वारे राबों के फाये भें ऩता चरा, तफ से वह ननममभत रूऩ से स्कूर भें बी
नतरक रगाकय जाने रगा।

ऩत्श्चभी सॊस्कृनत से प्रबाववत उसकी मशक्षऺका ने उसे नतरक रगाने से भना ककमा ऩयॊ तु

जफ उस फच्चे ने मशक्षऺका को नतरक रगाने के पामदे फतामे तफ मशक्षऺका ने नतरक रगाने की

भॊजूयी दे दी। नतरक की भदहभा जानकय अन्द्म फच्चे बी नतरक रगाने रगे, त्जससे उनको फहुत
राब हुआ।
नभस्काय् नभस्काय बायतीम सॊस्कृनत की एक सॊद
ु य ऩयम्ऩया है । जफ हभ ककसी फज
ु ग
ु ,म

भाता-वऩता मा सॊत-भहाऩरु
ु ष के साभने हाथ जोड़कय भस्तक झक
ु ाते हैं तो हभाया अहॊ काय
वऩघरता है , अॊत्कयण ननभमर होता है व सभऩमण बाव प्रकि होता है ।

दोनों हाथों को जोड़ने से जीवनीशत्तत औय तेजोवरम का ऺम योकने वारा एक चक्र फन
जाता है । इसमरए हाथ मभराकय ʹहै रोʹ कहने के फजाम हाथ जोड़कय ʹहरय ૐʹ अथवा बगवान का
कोई बी नाभ रेकय अमबवादन कयना चादहए। ववषम-सूची

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हभें बी शीरवान फनना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
स्भयणशस्क्त फढ़ाने के उऩाम

हे ववद्माधथममो ! तमा आऩ उततभ स्वास्र्थम की काभना कयते हैं ? अऩनी फुवि को सूक्ष्भ,

तेज व ववचाय-सम्ऩन्द्न फनाना चाहते हैं ? भन को भधयु व आनॊददत यिना चाहते हैं ? जीवन को

स्पूनतमरा, तेजस्वी तथा ओजस्वी यिना चाहते हैं ? शायीरयक, भानमसक, फौविक एवॊ आध्मात्तभक
– सवांगीण ववकास साधकय अऩने जीवन के हय ऺेत्र भें सपर होना चाहते हैं ? हाॉ, अवश्म....
तो आज से ही स्भयणशत्तत को फढ़ाने वारे प्रमोग कयना शरु
ु कय दो।

सम
व भस्काय् सम
म भस्काय एक सयर औय प्रबावशारी व्मामाभ के साथ शत्ततवधमक
ू न
ू न

उऩासना बी है । इसभें सभग्र ववश्व-ब्रह्भाॊड को जीवनशत्तत प्रदान कयने वारे बगवान

सूमन
म ायामण के रूऩ भें ऩयब्रह्भ-ऩयभातभा की उऩासना तन, भन, फुवि एवॊ वाणी से व्मामाभ के
साथ की जाती है । सूमन
म भस्काय भें अनेक मोगासनों का अदबुत सभन्द्वम ककमा गमा है , अत्
इन्द्हें कयने से मोगासनों का राब बी अऩने-आऩ मभर जाता है ।

सूमम नभस्काय के ननममभत अभ्मास से शायीरयक व भानमसक स्पूनतम के साथ ही

ववचायशत्तत तेज व ऩैनी तथा स्भयणशत्तत तीव्र होती है । भत्स्तष्ट्क की त्स्थनत स्वस्थ, ननभमर
औय शाॊत हो जाती है ।

सम
ू व को अर्घमव् सफ
ु ह स्नान के फाद जर से बया ताॉफे का करश हाथ भें रेकय सम
ू म की

ओय भि
ु कयके ककसी स्वच्छ स्थान ऩय िड़े हों। करश को छाती के सभऺ फीचों-फीच राकय
धायावारे ककनाये ऩय दृत्ष्ट्िऩात कयें गे तो हभें सम
ू म का प्रनतत्रफम्फ एक छोिे से त्रफन्द्द ु के रूऩ भें

ददिेगा। उस त्रफन्द्द ु ऩय दृत्ष्ट्ि एकाग्र कयने से हभें सप्तयॊ गों का वरम ददिेगा। इस तयह सम
ू म के
प्रनतत्रफम्फ (त्रफॊद)ु ऩय दृत्ष्ट्ि एकाग्र कयें । सम
ू म फवु िशत्तत के स्वाभी हैं। अत् सम
ू ोदम के सभम सम
ू म
को अघ्मम दे ने से फवु ि तीव्र फनती है । अघ्मम दे ते सभम सम
ू -म गामत्री भॊत्र का उच्चायण कयें ૐ आददतमाम ववद्महे बास्कयाम धीभदह, तन्द्नो बानु् प्रचोदमात र।

भ्राभयी प्राणामाभ् राब् वैऻाननकों ने मसि ककमा है कक भ्राभयी प्राणामाभ कयते सभम
बौंये की तयह गॊज
ु न कयने से छोिे भत्स्तष्ट्क भें स्ऩन्द्दन होते हैं। इससे स्भनृ तशत्तत का ववकास
होता है । मह प्राणामाभ कयने से भत्स्तष्ट्क के योग ननभर
ूम होते हैं। अत् हय योज सफ
ु ह 8-10
प्राणामाभ कयने चादहए।

द्धवधध् सवमप्रथभ दोनों हाथों की उॉ गमरमों को कॊधों के ऩास ऊॉचा रे जामें। दोनों हाथों की
उॉ गमरमाॉ कान के ऩास यिें। गहया श्वास रेकय तजमनी (अॉगठ
ू े के ऩास वारी ऩहरी) उॉ गरी से
दोनों कानों को इस प्रकाय फॊद कयें कक फाहय का कुछ सन
ु ाई न दे । अफ होंठ फॊद कयके बौंये जैसा
गॊज
ु न कयें । श्वास िारी होने ऩय उॉ गमरमाॉ फाहय ननकारें ।

सायस्वत्तम भॊत्र दीऺा् सभथम सदगुरुदे व से सायस्वतम भॊत्र की दीऺा रेकय भॊत्र का

ननममभत रूऩ से जऩ कयने औय उसका अऩुष्ट्ठान कयने से स्भयणशत्तत चभतकारयक ढॊ ग से
फढ़ती है ।

सूमोदम के फाद तुरसी के 5-7 ऩतते चफाकय िाने औय एक धगरास ऩानी ऩीने से बी

स्भनृ तशत्तत फढ़ती है । तर
ु सी िाकय तुयॊत दध
ू न वऩमें। मदद दध
ू ऩीना हो तो तुरसी-ऩतते िाने
के एक घॊिे फाद वऩमें।

यात को दे य तक ऩढ़ने के फजाम सुफह जल्दी उठकय ऩाॉच मभनि ध्मान भें फैठने के फाद

ऩढ़ने से, ऩढ़ा हुआ तुयॊत ही माद हो जाता है । ववषम-सूची

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
तीन वषों से कऺा भें प्रथभ स्थान प्राप्त ककमा

"भैंने वषम 2001 भें ऩूज्म फाऩूजी से सायस्वतम भॊत्र मरमा था। भैं प्रनतददन 10 भारा जऩ

कयती हूॉ। ऩज्
ू म फाऩूजी की कृऩा से ही भैंने रगाताय तीन वषों से कऺा भें प्रथभ स्थान प्राप्त
ककमा है । हभाये ववद्मारम भें ʹफार सॊस्काय केन्द्रʹ की स्थाऩना हुई। हभें वहाॉ फहुत अच्छी फातें

फतामी गमीॊ। ऩहरे भुझे िीवी से इतना रगाव था कक भैं एक बी काममक्रभ नहीॊ छोड़ती थी
रेककन भेये जीवन भें अफ इतना फदराव आ गमा है कक भेयी िीवी के चरधचत्रों व काममक्रभों भें

कोई रूधच नहीॊ यही। अफ ऩता चरा कक इनके द्वाया तो जीवन नछछरा, तुच्छ हो जाता है औय
भन ऩय हरके सॊस्काय ऩड़ते हैं। ववषम-सच
ू ी

ज्मोनत मादव, भस
ु ेऩयु , ये वाड़ी (हरयमाणा)
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
गुरुबक्त एकरव्म

द्वाऩय मुग की फात है । एकरव्म नाभ का बीर जानत का एक रड़का था। एक फाय वह

धनुववमद्मा सीिने के उद्देश्म से कौयवों एवॊ ऩाॊडवों के गुरु रोणाचामम के ऩास गमा ऩयॊ तु रोणाचामम
ने कहा कक वे याजकुभायों के अरावा औय ककसी को धनुववमद्मा नहीॊ मसिा सकते। एकरव्म ने

भन ही भन रोणाचामम को अऩना गुरु भान मरमा था, इसमरए उनके भना कयने ऩय बी उसके
भन भें गुरु के प्रनत मशकामत मा नछरान्द्वेषण (दोष दे िने) की वत्ृ तत नहीॊ आमी, न ही गुरु के
प्रनत उसकी श्रिा कभ हुई।
वह वहाॉ से घय न जाकय सीधे जॊगर भें चरा गमा। वहाॉ जाकय उसने रोणाचामम की मभट्टी

की भूनतम फनामी। वह हययोज गुरुभूनतम की ऩूजा कयता, कपय उसकी तयप एकिक दे िते दे िते
ध्मान कयता औय उससे प्रेयणा रेकय धनुववमद्मा सीिने रगा।

स्वस्स्तक अथवा इष्टदे व-गरु
ु दे व के श्रीधचत्र ऩय एकटक दे िने से एकाग्रता फढ़ती है ।

एकाग्रता फढ़ने से तथा गरु
ु बत्तत, अऩनी सच्चाई औय ततऩयता के कायण एकरव्म को प्रेयणा
मभरने रगी। इस प्रकाय अभ्मास कयते-कयते वह धनवु वमद्मा भें फहुत आगे फढ़ गमा।
एक फाय रोणाचामम धनवु वमद्मा के अभ्मास के मरए ऩाॊडवों औय कौयवों को रेकय जॊगर भें

गमे। उनके साथ एक कुतता बी था, वह दौड़ते दौड़ते आगे ननकर गमा। जहाॉ एकरव्म धनवु वमद्मा

का अभ्मास कय यहा था, वहाॉ वह कुतता ऩहुॉचा। एकरव्म के ववधचत्र वेश को दे िकय कुतता
बौंकने रगा।
कुतते को चोि न रगे औय उसका बौंकना बी फन्द्द हो जामे इस प्रकाय उसके भॉह
ु भें

सात फाण एकरव्म ने बय ददमे। जफ कुतता इस दशा भें रोणाचामम के ऩास ऩहुॉचा तो कुतते की
मह हारत दे िकय अजुन
म को ववचाय आमा् ʹकुतते के भॉुह भें चोि न रगे इस प्रकाय फाण भायने
की ववद्मा तो भैं बी नहीॊ जानता !ʹ

अजुन
म ने गुरु रोणाचामम से कहा् "गुरुदे व ! आऩने तो कहा था कक तेयी फयाफयी कय सके

ऐसा कोई बी धनुधयम नहीॊ होगा ऩयॊ तु ऐसी ववद्मा तो भैं बी नहीॊ जानता।"

रोणाचामम बी ववचाय भें ऩड़ गमे। इस जॊगर भें ऐसा कुशर धनुधयम कौन होगा ? आगे

जाकय दे िा तो उन्द्हें दहयण्मधनु का ऩुत्र गुरुबतत एकरव्म ददिामी ऩड़ा।
रोणाचामम ने ऩूछा् "फेिा ! तुभने मह ववद्मा कहाॉ से सीिी ?"
एकरव्म ने कहा् "गुरुदे व ! आऩकी कृऩा से ही सीिी है ।"

रोणाचामम तो अजुन
म को वचन दे चक
ु े थे कक उसके जैसा कोई दस
ू या धनुधयम नहीॊ होगा

ककॊतु एकरव्म तो अजुन
म से बी आगे फढ़ गमा। एकरव्म से रोणाचामम ने कहा् "भेयी भूनतम को
साभने यिकय तभ
ु ने धनवु वमद्मा तो सीिी ऩयॊ तु गरु
ु दक्षऺणा...?"
एकरव्म ने कहा् "आऩ जो भाॉगें।"

रोणाचामम ने कहा् "आऩ जो भाॉगें।।"
एकरव्म ने एक ऩर बी ववचाय ककमे त्रफना आऩके दामें हाथ का अॉगठ
ू ा कािकय गरु
ु दे व

के चयणों भें अवऩमत कय ददमा।

रोणाचामम ने आशीवामद दे ते हुए कहा् "फेिा ! अजन
ुम बरे धनवु वमद्मा भें सफसे आगे यहे
तमोंकक उसको भैं वचन दे चक
ु ा हूॉ ऩयॊ तु जफ तक सूम,म चाॉद औय नऺत्र यहें गे, तुम्हायी गरु
ु बत्तत
के कायण तुम्हाया मशोगान होता यहे गा।"

एकरव्म की गुरुबत्तत औय एकाग्रता ने उसे धनुववमद्मा भें तो सपरता ददरामी ही, साथ

ही सॊतों के रृदम भें बी उनके मरए आदय प्रकि कय ददमा। धन्द्म है एकरव्म, त्जसने गुरु की
भूनतम से प्रेयणा रेकय धनुववमद्मा भें सपरता प्राप्त की तथा अदबुत गुरुदक्षऺणा दे कय साहस,
तमाग औय सभऩमण का आदशम प्रस्तुत ककमा। ववषम-सूची
है ।

सीि् गुरुबत्तत, श्रिा औय रगनऩूवक
म कोई बी कामम कयने से अवश्म सपरता मभरती
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी एकाग्रधचतत फनना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

साखिमाॉ

धैमम धयो आगे फढ़ो, ऩयू न हों सफ काभ।

उसी ददन ही परते नहीॊ, त्जस ददन फोते आभ।।
साॉच फयाफय तऩ नहीॊ, झठ
ू फयाफय ऩाऩ।
जाके रृदम साॉच है , ताके रृदम आऩ।।

मह तन ववष की फेरयी, गुरु अभत
ृ की िान।
मसय दीजे सदगुरु मभरे, तो बी सस्ता जान।।
तुरसी भीठे वचन ते, सि
ु उऩजत चहुॉ ओय।

वशीकयण मह भॊत्र है , तज दे वचन कठोय।।
ववषम-सूची
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी आदशम गुरुबतत फनना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

भात-ृ द्धऩत ृ बक्त

"भाता द्धऩता औय गुरुजनों का आदय कयने वारा
धचयआदयणीम हो जाता है ।" ऩूज्म फाऩू जी।
हे द्धवद्माथी !

बायतवषम भें भाता-वऩता को ऩर्थ
ृ वी ऩय का साऺात दे व भाना गमा है ।
भातद
ृ े वो बव। द्धऩतद
ृ े वो बव।

ववद्माधथममो ! प्राचीनकार भें रोग तमों रम्फी उम्र तक जीते थे ? आऩ जानते हैं ?

तमोंकक उस सभम रोग अऩने भाता-वऩता को प्रनतददन प्रणाभ कयके उनका आशीवामद प्राप्त कयते
थे। शास्त्र कहता है ्
अमबवादनशीरस्म तनत्तमॊ वद्ध
ृ ोऩसेद्धवन्।

चत्तवारय तस्म वधवन्ते आमुद्धववद्मा मशो फरभ ्।। (भनुस्भतृ त् 2.121)

ʹजो भाता-वऩता औय गुरुजनों को प्रणाभ कयता है औय उनकी सेवा कयता है , उसकी आमु,

ववद्मा, मश औय फर चायों फढ़ते हैं।ʹ

ववद्माधथममो ! आऩने श्रवण कुभाय का नाभ तो सुना ही होगा। भाता-वऩता की सेवा का

आदशम आऩ श्रवण कुभाय से सीिो। अऩने भाता-वऩता के इच्छानुसाय उनको कावड़ भें त्रफठाकय वे

उन्द्हें तीथममात्रा कयवाने ननकर ऩड़े। ऩैदर जाना, दहॊसक जानवयों का बम औय भाॉगकय िाना –
इस प्रकाय की अनेक मातनाएॉ सहन कीॊ रेककन भाता-वऩता की सेवा से ववभि
ु नहीॊ हुए। भातावऩता की सेवा कयते-कयते ही उन्द्होंने अऩने प्राण तमाग ददमे। भमामदाऩरु
ु षोततभ बगवान श्रीयाभ
बी आदशम भात-ृ वऩत ृ गरु
ु बतत थे। गोस्वाभी तर
ु सीदास जी ने उनके फाये भें मरिा है ्
प्रात्कार उहि के यघन
ु ाथा।

भातु द्धऩता गुरु नावहहॊ भाथा।।
(श्रीयाभचरयतभानस)

एक फाय बगवान शॊकय के महाॉ उनके दोनों ऩुत्रों भें होड़ रगी कक ʹकौन फड़ा ?ʹ
कानतमक ने कहा् "गणऩनत ! भैं तुभसे फड़ा हूॉ।"

गणऩनत् "आऩ बरे उम्र भें फड़े हैं रेककन गुणों से बी फड़प्ऩन होता है ।" ननणमम रेने के

मरए दोनों गमे मशव-ऩावमती के ऩास।

मशव ऩावमती ने कहा् "जो सम्ऩूणम ऩर्थ
े ा, उसी का
ृ वी की ऩरयक्रभा कयके ऩहरे ऩहुॉचग
फड़प्ऩन भाना जामेगा।"
कानतमकेम तुयॊत अऩने वाहन भमूय ऩय ननकर गमे ऩर्थ
ृ वी की ऩरयक्रभा कयने। गणऩनत जी

चऩ
ु के-से एकाॊत भें चरे गमे। थोड़ी दे य शाॊत होकय उऩाम िोजा। कपय आमे मशव-ऩावमती के ऩास।
भाता-वऩता का हाथ ऩकड़कय दोनों को ऊॉचे आसन ऩय त्रफठामा, ऩत्र-ऩुष्ट्ऩ से उनके श्रीचयणों की
ऩूजा की एवॊ प्रदक्षऺणा कयने रगे। एक चतकय ऩूया हुआ तो प्रणाभ ककमा... दस
ू या चतकय
रगाकय कपय प्रणाभ ककमा... इस प्रकाय भाता-वऩता की सात प्रदक्षऺणाएॉ कय रीॊ।
मशव-ऩावमती ने ऩछ
ू ा् "वतस ! मे प्रदक्षऺणाएॉ तमों की ?"

गणऩनत् "सवमतीथमभमी भाता... सवमदेवभम् वऩता... सायी ऩर्थ
ृ वी की प्रदक्षऺणा कयने से जो

ऩण्
ु म होता है, वही ऩण्
ु म भाता की प्रदक्षऺणा कयने से हो जाता है , मह शास्त्र वचन है । वऩता का
ऩज
ू न कयने से सफ दे वताओॊ का ऩज
ू न हो जाता है तमोंकक वऩता दे वस्वरूऩ हैं। अत् आऩक

ऩरयक्रभा कयके भैंने सम्ऩूणम ऩर्थ
ू म
ृ वी की सात ऩरयक्रभाएॉ कय री हैं।" तफ से गणऩनत प्रथभ ऩज्
हो गमे। ʹमशव ऩुयाणʹ भें आता है ्

द्धऩत्रोश्च ऩूजनॊ कृत्तवा प्रक्रास्न्तॊ च कयोतत म्।
तस्म वै ऩधृ थवीजन्मपरॊ बवतत तनस्श्चतभ ्।।

ʹजो ऩुत्र भाता-वऩता की ऩूजा कयके उनकी प्रदक्षऺणा कयता है , उसे ऩर्थ
ृ वी-ऩरयक्रभाजननत

पर अवश्म सुरब हो जाता है ।ʹ ववषम-सूची

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
"ववद्माथॉ 14 पयवयी को भाता-वऩता का ऩूजन कय
ʹभात-ृ वऩत ृ ऩज
ू न ददवसʹ भनामें।"

भाॉ-फाऩ को बर
ू ना नहीॊ
बर
ू ो सबी को भगय, भाॉ-फाऩ को बर
ू ना नहीॊ।

उऩकाय अगखणत हैं उनके, इस फात को बर
ू ना नहीॊ।।
ऩतथय ऩज
ू े कई तम्
ु हाये , जन्द्भ के िानतय अये ।

ऩतथय फन भाॉ-फाऩ का, ददर कबी कुचरना नहीॊ।।
भि
ु का ननवारा दे अये , त्जनने तम्
ु हें फड़ा ककमा।

अभत
ु को जहय, उनको उगरना नहीॊ।।
ृ वऩरामा तभ
ककतने रड़ाए राड़ सफ, अयभान बी ऩूये ककमे।

ऩूये कयो अयभान उनके, फात मह बूरना नहीॊ।।
रािों कभाते हो बरे, भाॉ-फाऩ से ज्मादा नहीॊ।

सेवा त्रफना सफ याि है , भद भें कबी पूरना नहीॊ।।
सन्द्तान से सेवा चाहो, सन्द्तान फन सेवा कयो।

जैसी कयनी वैसी बयनी, न्द्माम मह बूरना नहीॊ।।
सोकय स्वमॊ गीरे भें , सुरामा तुम्हें सूिी जगह।

भाॉ की अभीभम आॉिों को, बूरकय कबी मबगोना नहीॊ।।
त्जसने त्रफछामे पूर थे, हय दभ तुम्हायी याहों भें ।
उस याहफय के याह के, कॊिक कबी फनना नहीॊ।।

धन तो मभर जामेगा भगय, भाॉ-फाऩ तमा मभर ऩामेंगे?
ऩर ऩर ऩावन उन चयण की, चाह कबी बर
ू ना नहीॊ।।
ववषम-सच
ू ी

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

ऩीड़ ऩयाई जाणे ये .....
ऩय हहत सरयस धभव नहहॊ बाई।
ऩय ऩीड़ा सभ नहहॊ अधभाई।।

ʹदस
ू यों की बराई के सभान कोई धभम नहीॊ है औय दस
ू यों को द्ु ि ऩहुॉचाने के सभान कोई

नीचता (ऩाऩ) नहीॊ है ।ʹ (श्रीयाभचरयतभानस)

भखणनगय (अहभदाफाद) भें एक फारक यहता था। वह िफ
ू ननष्ट्ठा से ध्मान-बजन एवॊ

सेवा-ऩूजा कयता था औय मशवजी को जर चढ़ाने के फाद ही जर ऩीता था। एक ददन वह ननतम

की नाईं मशवजी को जर चढ़ाने जा यहा था। यास्ते भें उसे एक व्मत्तत फेहोश ऩड़ा हुआ मभरा।
यास्ते चरते रोग फोर यहे थे् ʹशयाफ ऩी होगी, मह होगा, वह होगा.... हभें तमा !ʹ कोई उसे जूता
सुॊघा यहा था तो कोई कुछ कय यहा था। उसकी दमनीम त्स्थनत दे िकय उस फारक का रृदम

करुणा से ऩसीज उठा। अऩनी ऩूजा अचमना छोड़कय वह उस गयीफ की सेवा भें रग गमा। ऩुण्म

ककमे हुए हों तो प्रेयणा बी अच्छी मभरती है । शुब कभों से शुब प्रेयणा मभरती है ।
अऩनी ऩूजा की साभग्री एक ओय यिकय फारक ने उस मुवक को उठामा। फड़ी भुत्श्कर
से उसकी आॉिें िुरीॊ। वह धीये से

फोरा् "ऩानी.....ऩानी....."

फारक ने भहादे वजी के मरए रामा हुआ जर उसे वऩरा ददमा। कपय दौड़कय घय गमा औय
अऩने दहस्से का दध
ू राकय उसे ददमा। मुवक की जान भें जान आमी।

उस मुवक ने अऩनी व्मथा सुनाते हुए कहा् "फाफू जी ! भैं त्रफहाय से आमा हूॉ। भेये वऩता
गुजय गमे हैं औय चाचा ददन-यात िोकते यहते थे कक ʹकुछ कभाओगे नहीॊ तो िाओगे तमा !ʹ
नोकयी धॊधा मभर नहीॊ यहा था। बिकते-बिकते अहभदाफाद ये रवे स्िे शन ऩय ऩहुॉचा औय कुरी
का काभ कयने का प्रमतन ककमा। अऩनी योजी योिी भें नमा दहस्सेदाय भानकय कुमरमों ने भझ
ु े

िफ
ू भाया। ऩैदर चरते-चरते भखणनगय स्िे शन की ओय जा यहा थ कक तीन ददन की बूि व
भाय के कायण चतकय आमा औय महाॉ धगय गमा।"

फारक ने उसे िाना खिरामा, कपय अऩना इकट्ठा ककमा हुआ जेफिचम का ऩैसा ददमा। उस
मुवक को जहाॉ जाना था वहाॉ बेजने की व्मवस्था की। इससे फारक के रृदम भें आनॊद की ववृ ि
हुई, अॊदय से आवाज आमी् ʹफेिा ! अफ भैं तुझे जल्दी मभरॉ ग
ू ा.... फहुत जल्दी मभरॉ ग
ू ा।ʹ
फारक ने प्रश्न ककमा् ʹअॊदय से कौन फोर यहा है ?ʹ

उततय आमा् ʹत्जस मशव की तू ऩूजा कयता है वह तेया आतभमशव। अफ भैं तेये रृदम भें

प्रकि होऊॉगा। सेवा के अधधकायी की सेवा भुझ मशव की ही सेवा है ।ʹ

उस ददन फारक के अॊतमामभी ने उसे अनोिी प्रेयणा औय प्रोतसाहन ददमा। कुछ वषों के

फाद वह तो घय छोड़कय ननकर ऩड़ा उस अॊतमामभी ईश्वय का साऺातकाय कयने के मरए।
स्वाभी रीराशाह जी

फाऩू के श्रीचयणों भें फहुत रोग आते थे ऩयॊ तु सफभें अऩने
आतभमशव को दे िने वारे, छोिी उम्र भें ही जाने-अनजाने आतभववचाय का आश्रम रेने वारे इस
मुवक ने उनकी ऩूणम कृऩा प्राप्त कय आतभऻान प्राप्त ककमा। जानते हो वह मुवक कौन था ?
ऩूणव गुरु ककयऩा मभरी, ऩूणव गुरु का ऻान। आसुभर से हो गमे, साॉई आशायाभ।।

रािों कयोड़ों रोगों के इष्ट्ि-आयाध्म प्रात्स्भयणीम जग-वॊदनीम ऩूज्म सॊत श्री आशायाभजी

फाऩू। ववषम-सूची

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी ऩयोऩकायी फनना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

मोग-साभथ्मव के धनी

ब्रह्भननष्ट्ठ अऩने-आऩ भें एक फहुत फड़ी ऊॉचाई है । ब्रह्भननष्ट्ठा के साथ मदद मोग-साभर्थमम
बी हो तो दग्ु ध-शकमया मोग की त्स्थनत उतऩन्द्न हो जाती है । ऐसा ही सभ
े दे िने को मभरता है
ु र
ऩज्
ू म फाऩू जी के जीवन भें । एक ओय जहाॉ आऩकी ब्रह्भननष्ट्ठा साधकों को सात्न्द्नध्मभात्र से
ऩयभ आनॊद, ऩववत्र शाॊनत भें सयाफोय कय दे ती है , वहीॊ दस
ू यी ओय आऩकी करूणा-कृऩा से भत

गाम को जीवनदान मभरना, अकारग्रस्त स्थानों भें वषाम होना, वषों से नन्सॊतान यहे दम्ऩत्ततमों

को सॊतान होना, योधगमों के असाध्म योग सहज भें दयू होना, ननधमनों को धन प्राप्त होना,
अववद्वानों को ववद्वता प्राप्त होना, घोय नात्स्तकों के जीवन भें आत्स्तकता का सॊचाय होना –
इस प्रकाय की अनेकानेक घिनाएॉ आऩके मोग-साभर्थमम सम्ऩन्द्न होने का प्रभाण है । ववषम-सूची
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी मोग साभर्थमम से सम्ऩन्द्न होना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

सुषुप्त शस्क्तमाॉ जगाने के प्रमोग
ऩूज्म सॊत श्री आशायाभजी फाऩू का ऩावन सॊदेश

एकाग्रता स्वमॊ एक अदबुत साभर्थमम है । वह सफ धभों भें श्रेष्ट्ठ है । तऩ तु सवेषु एकाग्रता

ऩयॊ तऩ्। ʹसफ तऩों भें एकाग्रता ऩयभ तऩ है।ʹ श्रीभद् आद्म शॊकयाचामम ने कहा है ्
भनसश्चेस्न्िमाणाॊ च ह्मैकाग्रमॊ ऩयभॊ तऩ्।
तज्जम् सवव धभेभ्म् स धभव् ऩय उच्मते।।

ʹभन औय इत्न्द्रमों की एकाग्रता ही ऩयभ तऩ है। उसका जम सफ धभों से भहान है ।ʹ
त्जसके जीवन भें त्जतनी एकाग्रता होती है वह अऩने काममऺेत्र भें उतना ही सपर होता
है । चाहे वैऻाननक हो, डॉतिय हो, न्द्मामाधीश अथवा ववद्माथॉ हो रेककन जफ ककसी गहये ववषम
को िोजना हो तो सबी रोग शाॊत हो जाते हैं। भन को शाॊत तथा त्स्थय कयने का त्जतना
अधधक अभ्मास होता है , उतनी ही उस ऺेत्र भें सपरता मभरती है ।
त्राटक् त्रािक अथामत दृत्ष्ट्ि को जया बी दहरामे त्रफना एक ही स्थान ऩय त्स्थय कयना।
इष्ट्िदे व मा गुरुदे व के श्रीधचत्र ऩय त्रािक कयने से एकाग्रता भें ववरऺण ववृ ि होती है एवॊ ववशेष
राब होता है। स्वत्स्तक, ૐ मा दीऩक की ज्मोनत ऩय त्रािक ककमा जा सकता है । त्रािक के

ननममभत अभ्मास से ऩढ़ाई भें अदबुत राब होता है । त्रािक कयने वारों की आॉिों से एक ववशेष
प्रकाय का आकषमण एवॊ तेज आ जाता है । उसकी स्भयणशत्तत तथा ववचायशत्तत भें ववरऺणता
आ जाती है । त्रािक का एकाग्रता को मसि कयने की एक सयर एवॊ सचोि साधना है ।
भौन् न फोरने भें नौ गण
ु ।

ननॊदा कयने से फचें गे, असतम फोरने से फचें गे, ककसी से वैय नहीॊ होगा। ऺभा भाॉगने की
ऩरयत्स्थनत नहीॊ आमेगी, सभम का दरु
ु ऩमोग नहीॊ होगा, अऻान ढका यहे गा। अॊत्कयण की शाॊनत
फनी यहे गी, शत्तत का ह्ास नहीॊ होगा, क्रोध से फच सकेंगे।

प्रनतददन कुछ सभम भौन यिने वारा श्रेष्ट्ठ ववचायक व दीघमजीवी फनता है । गाॊधी जी हय

सोभवाय को भौन यिते थे। उस ददन वे अधधक कामम कय ऩाते थे। ववषम-सूची

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी हय एक ऺेत्र भें सपर होना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

करुणाभम हृदम

ऩूज्म सॊत श्री आशायाभजी फाऩू अऩने सदगुरु बगवतऩाद स्वाभी श्री रीराशाहजी भहायाज

का एक ऩावन सॊस्भयण फताते हुए कहते हैं- गरु
ु जी जहाॉ योज फैठते थे वहाॉ आगे एक जॊगरी
ऩौधा था, त्जसे त्रफच्छु का ऩौधा कहते हैं। उसके ऩततों को मदद हभ छू रें तो त्रफच्छु के कािने

जैसी ऩीड़ा होती है । भैंने सोचा, ʹमह त्रफच्छु का ऩौधा फड़ा हो गमा है । अगय मह गुरुदे व के

श्रीचयणों को अथवा हाथों को छू जामेगा तो गुरुदे व के शयीय को ऩीड़ा होगी।ʹ भैंने श्रिा औय
उतसाहऩूवक
म सावधानी से उस ऩौधे को उिाड़कय दयू पेंक ददमा। गुरु जी ने दयू से मह दे िा औय
भुझे जोय से पिकाया् "मह तमा कयता है !"

"गुरुजी ! मह त्रफच्छु का ऩौधा है । कही छू न जाम....."

"फेिा ! भैं हय योज महाॉ फैठता हूॉ... सॊबरकय फैठता हूॉ.... उस ऩौधे भें बी प्राण हैं। उसे
कष्ट्ि तमों दे ना ! जा, कहीॊ गड्ढा िोदकय उस ऩौधे को कपय से रगा दे ।" ववषम-सच
ू ी
भहाऩरु
ु षों का, सदगरु
ु ओॊ का रृदम ककतना कोभर होता है !

वैष्णवजन तो तेने ये कहहमे, जे ऩीड़ ऩयाई जाणे ये ....

ऩयद्ु िे उऩकाय कये तोमे, भन अमबभान न आणे ये ...
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

फुद्धद्ध-ऩयीऺण

यणबमू भ भें मभरा उऩदे श। ददव्म ऻान का तमा सॊदेश ? (श्रीभद् बगवद् गीता)
सॊत की रीराओॊ का है वणमन, ऩाठ से होते मसि सफ काभ।

इस मुग की उस याभामण का फताओ तमा है ऩूया नाभ ? (श्री आसायाभामण मोगरीरा)
गुरुजन, भात-वऩता को कयने से प्रणाभ।

फढ़ते हैं गुण चाय, फताओ तमा हैं उनके नाभ ? (आमु, ववद्मा, मश औय फर)
वऩता शहाजी, भाॉ जीजा का वह था ऩुत्र भहान।

दे श, धभम का यऺक था, बायत भाता की शान।। (मशवाजी)
वे ववबूनत थे द्वाऩय मुग की, कौयव-ऩाॊडवों से थे ऩूत्जत।

ककसने ककमे थे शाॊतबाव से, शय-शय्मा ऩय प्राण ववसत्जमत ? (बीष्ट्भ वऩताभह)
ववषम-सूची
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी करूणावान रृदमवारा फनना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

जन्भहदवस कैसे भनामें ?
तभसो भा ज्मोततगवभम।

हे प्रबु ! तू हभें अॊधकाय से प्रकाश की ओय रे चर ! सनातन सॊस्कृनत के इस ददव्म

सॊदेश को जीवन भें अऩना कय अऩना जीवन प्रकाशभम फनाने का सुअवसय है जन्द्भददवस।

हभ ऩाश्चातम सॊस्कृनत से प्रबाववत होकय प्रकाश, आनॊद व ऻान की ओय रे जाने वारी

अऩनी सनातन सॊस्कृनत का अनादय कयके अऩना जन्द्भददवस अॊधकाय व अऻान की छामा भें

भना यहे हैं। केक ऩय भोभफत्ततमाॉ जराकय उन्द्हें पॉू ककय फुझा दे ते हैं, प्रकाश के स्थान ऩय अॊधेया
कय दे ते हैं।

ऩानी का धगरास होठों से रगाने भात्र से उस ऩानी भें रािों ककिाणु प्रवेश कय जाते हैं

तो कपय भोभफत्ततमों को फाय फाय पॉू कने ऩय थक
ू के भाध्मभ से केक भें ककतने कीिाणु प्रवेश

कयते होंगे ? अत् हभें ऩाश्चातम सॊस्कृनत के अॊधानक
ु यण का तमाग कय बायतीम सॊस्कृनत के
अनस
ु ाय ही जन्द्भददवस भनाना चादहए।

मह शयीय, त्जसका जन्द्भददवस भनाना है , ऩॊचबत
ू ों से फना है त्जनके अरग-अरग यॊ ग हैं।

ऩर्थ
ृ वी का ऩीरा, जर का सपेद, अत्ग्न का रार, वामु का हया व आकाश का नीरा।

थोड़े से चावर, हल्दी, कॊु कुभ आदद उऩयोतत ऩाॉच यॊ ग के रव्मों से यॉ ग रें। कपय उनसे

स्वात्स्तक फनामें औय त्जतने वषम ऩयू े हुए हों, भान रो 11, उतने छोिे दीमे स्वात्स्तक ऩय यि दें
तथा 12वें वषम की शुरूआत के प्रतीक के रूऩ भें एक फड़ा दीमा स्वात्स्तक के भध्म भें यिें ।

कपय घय के सदस्मों से सफ दीमे जरवामें तथा फड़ा दीमा कुिुम्फ के श्रेष्ट्ठ, ऊॉची

सभझवारे, बत्ततबाव वारे व्मत्तत से जरवामें। इसके फाद त्जसका जन्द्भददवस है , उसे सबी
उऩत्स्थत रोग शुबकाभनाएॉ दें । कपय आयती व प्राथमना कयें । ववषम-सूची
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

हभें बी अऩना जन्द्भददवस बायतीम सॊस्कृनत के अनुरूऩ ही भनाना है ।
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

हे ऩुण्मशारी अमबबावको !....

आऩ अऩने राड़रों का जन्द्भददवस बायतीम सॊस्कृनत के अनस
ु ाय ही भनामें ताकक आगे

चरकय मे भासभ
नौननहार ऩाश्चातम सॊस्कृनत के गर

ु ाभ न फनकय बायत के सम्भाननीम
नागरयक फन सकें।

ध्मान दें - जन्द्भददवस के अवसय ऩय ऩादिम मों का आमोजन कय व्मथम भें ऩैसा उड़ाना कहाॉ
तक उधचत है ? इससे दे श के मे बावी कणमधाय कौन सा आदशम रेंगे ? आऩ आज से ही
जन्द्भददवस बायतीम सॊस्कृनत के अनस
ु ाय भनाने का दृढ़ ननश्चम कय रें । इस ददन फच्चे के हाथों
से गयीफ फत्स्तमों, अनाथारमों भें बोजन, वस्त्र इतमादद का ववतयण कयवाकय फच्चे भें अऩने धन

को सतकभम भें रगाने के सुसॊस्काय डारें । रोगों से चीज-वस्तुएॉ (धगफ्िस) रेने के फजामे अऩने
फच्चे को दान कयना मसिामें, ताकक उसभें रेने की नहीॊ अवऩतु दे ने की सवत्ृ तत ववकमसत हो।
फच्चे भें बगवदबाव एवॊ दे शबत्तत के ववकास हे तु उस ददन उसे फारबततों की कहाननमाॉ सुनामें,

गीता-ऩाठ कयामें, फड़े फज
ु ुगों को प्रणाभ कयवाकय उनसे आशीवामद ददरवामें। वऺ
ृ ायोऩण जैसे
ऩमामवयण के प्रनत प्रेभ उतऩन्द्न कयने वारे एवॊ सभाज दहत के कामम कयवामें।

फच्चा उस ददन अऩने गत वषम का दहसाफ कये कक उसने वषम बय भें तमा-तमा अच्छे औय
फुये काभ ककमे ? जो अच्छे कामम ककमे हों उन्द्हें बगवान के चयणों भें अऩमण कय दे औय जो फुये

कामम हुए उनको आगे बूरकय बी न दोहयाने औय सन्द्भागम ऩय चरने का शुब सॊकल्ऩ कये ।
उस ददन फारक से कोई बी एक सॊकल्ऩ कयवामें जैसे - ʹआज से स्वत्स्तक मा सदगुरुदे व

के श्रीधचत्र ऩय ननममभत रूऩ से त्रािक करूॉगा इतमादद। फच्चे से मह बी सॊकल्ऩ कयवामें कक वह
नमे वषम भें सदगण
ु सदाचायों के ऩारन भें ऩयू ी रगन से रगकय अऩने भाता वऩता व दे श के
गौयव को फढ़ामेगा।

मे फच्चे ऐसे भहकते पूर फन सकते हैं कक अऩनी ननष्ट्काभ कभमरूऩी सव
ु ास से वे केवर

अऩना घय, ऩड़ोस, शहय, याज्म व दे श ही नहीॊ फत्ल्क ऩयू े ववश्व को सव
ु ामसत कय सकते हैं।
ववषम-सच
ू ी

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

हभें बी अऩने जन्द्भददवस ऩय दान, ऩुण्म औय ऩयोऩकाय के कामम कयने हैं।
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

क्मा कयें , क्मा नहीॊ

आचाय-ववचाय, िान-ऩान, ऩोशाक आदद का हभाये ददरो-ददभाग ऩय इतना प्रबाव

ऩड़ता है

कक इनसे हभायी ववचायधाया भें कापी ऩरयवतमन आ जाता है , साथ ही हभाये तन-भन के स्वास्र्थम
ऩय बी गहया प्रबाव ऩड़ता है । अत् सुिी, स्वस्थ व सम्भाननत जीवन जीने हे तु हभें सॊतों द्वाया
फतामे गमे एवॊ शास्त्रों व सॊस्कृनत भें वखणमत ननमभों का ऩारन कयना चादहए।

नभस्काय कयें , ऋतु अनस
ु ाय सि
ू ा भेवा िामें, ताजे परों का यस वऩमें, शाकाहाय कयें , दध

वऩमें, पर व सराद िामें।

शेकहैंड नहीॊ, गि
ु िा, धम्र
ू ऩान नहीॊ, शयाफ-कोल्डड्रॊतस नहीॊ, भाॊसाहाय नहीॊ, चाम-कॉपी

नहीॊ, ऩीजा फगमय पास्िपूड नहीॊ। ववषम-सच
ू ी

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें शास्त्र सम्भत आचयण कयना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

मशवाजी का साहस

12 वषॉम मशवाजी एक ददन फीजाऩुय के भुख्म भागम ऩय घूभ यहे थे। वहाॉ उन्द्होंने दे िा

कक एक कसाई गाम को िीॊचकय रे जा यहा है । गाम आगे नहीॊ जा यही थी ककॊतु कसाई उसे डॊडे

भाय-भाय कय जफयदस्ती घसीि यहा था। मशवाजी से मह दृश्म दे िा न गमा। फारक मशवाजी ने
म्मान से तरवाय ननकारी औय कसाई के ऩास ऩहुॉच कय उसके त्जस हाथ भें यस्सी थी उस हाथ
ऩय तरवाय का ऐसा झिका ददमा कक गाम स्वतॊत्र हो गमी।
इस घिना को रेकय वहाॉ अच्छी िासी बीड़ इकट्ठी हो गई रेककन वीय मशवाजी का यौर
रुऩ दे िकय ककसी की आगे फढ़ने की दहम्भत नहीॊ हुई। इस घिना का सभाचाय जफ दयफाय भें
ऩहुॉचा तो नवाफ क्रोध से नतरमभरा उठा औय मशवाजी के वऩता शहाजी के फोरा् "तुम्हाया फेिा
फड़ा उऩरवी जान ऩड़ता है । शहाजी ! तभ
ु उसे तयु ॊ त फीजाऩयु से फाहय बेज दो।"

शहाजी ने आऻा स्वीकाय कय री। मशवाजी को उनकी भाता के ऩास बेज ददमा गमा। वे

मशवाजी को फाल्मकार से ही याभामण, भहाबायत आदद की कथाएॉ सन
ु ामा कयती थीॊ। साथ ही

उन्द्हें शस्त्रववद्मा का अभ्मास बी कयवाती थीॊ। फचऩन भें ही मशवाजी ने तोयणा ककरा जीत मरमा
था। फाद भें तो उनको ऐसी धाक जभ गमी की साये मवन उनके नाभ से काॉऩते थे। वह ददन बी
आमा जफ अऩने याज्म से मशवाजी को ननकारने वारे फीजाऩयु के नवाफ ने उन्द्हें स्वतॊत्र दहन्द्द ू
सम्राि के नाते अऩने याज्म भें ननभॊत्रत्रत ककमा औय जफ मशवाजी हाथी ऩय फैठकय फीजाऩुय के
भागों से होते हुए दयफाय भें ऩहुॉच,े तफ आगे जाकय उनका स्वागत ककमा औय उनके साभने
भस्तक झुकामा। कैसी थी मशवाजी की ननबॉकता ! कैसा गजफ का था उनका साहस,
आतभववश्वास ! ववषम-सूची

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

प्राणवान ऩॊस्क्तमाॉ

जहाजों से जो िकयामे, उसे तुपान कहते हैं।

तूपानों से जो िकयामे, उसे इन्द्सान कहते हैं।।
हभें योक सके, मे जभाने भें दभ नहीॊ।

हभसे है जभाना, जभाने से हभ नहीॊ।।
िद
ु ी को कय फुरन्द्द इतना कक हय तकदीय से ऩहरे।
िद
ु ा फॊदे से मह ऩूछे कक फता तेयी यजा तमा है ।।
फाधाएॉ कफ योक सकी हैं, आगे फढ़ने वारों को।

ववऩदाएॉ कफ योक सकी हैं, ऩथ ऩे फढ़ने वारों को।।
ववषम-सूची
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें वीय मशवाजी की तयह साहसी फनना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

ऩयीऺा भें सपर होने के मरमे
ऩयीऺा भें सपर होने के मरए द्धवद्माथी नीचे हदमे गमे प्रमोगों का अवरम्फन रें।

ववद्माथॉ को अध्ममन के साथ-साथ जऩ, ध्मान, आसन एवॊ प्राणामाभ का ननममभत
अभ्मास कयना चादहए। इससे एकाग्रता तथा फुविशत्तत फढ़ती है ।

सूमम को अघ्मम दे ना, तुरसी सेवन, भ्राभयी प्राणामाभ, फुविशत्तत एवॊ भेधाशत्ततवधमक

प्रमोग व सायस्वतम भॊत्र का जऩ – ऐसे फुविशत्तत औय स्भयणशत्तत फढ़ाने के प्रमोगों का
ननममभत अभ्मास कयना चादहए।

प्रसन्द्नधचतत होकय ऩढ़ें , तनावग्रस्त होकय नहीॊ।
सुफह ब्राह्भभुहूतम भें उठकय 5-7 मभनि ध्मान कयने के ऩश्चात ऩढ़ने से ऩढ़ा हुआ जल्दी
माद होता है ।
दे य यात तक चाम ऩीते हुए ऩढ़ने से फुविशत्तत का ऺम होता है ।
िी.वी. दे िना, व्मथम गऩशऩ रगाना इसभें सभम न गॉवामें।
प्रश्नऩत्र मभरने से ऩूवम अऩने इष्ट्िदे व मा गुरु दे व को प्राथमना कयें ।
सवमप्रथभ ऩूये प्रश्नऩत्र को एकाग्रधचतत होकय ऩढ़ें ।
सयर प्रश्नों के उततय ऩहरे मरिें।

मदद ककसी प्रश्न का उततय न आमे तो ननबमम होकय बगवतस्भयण कयके एकाध मभनि

शाॊत हो जामें, कपय मरिना शुरु कयें ।

भुख्म फात है कक ककसी बी कीभत ऩय धैमम न िोमें। ननबममता फनामे यिे एवॊ दृढ़

ऩरु
ु षाथम कयते यहें ।

इन फातों को सभझकय इन ऩय अभर ककमा जाम तो केवर रौककक मशऺा भें ही नहीॊ

वयन र जीवन की हय ऩयीऺा भें ववद्माथॉ सपर हो जामेगा। ववषम-सच
ू ी
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभे बी ऩयीऺा भें उज्जवर ऩरयणाभ राना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

ऩथ्
ृ वी का अभत
ृ ् गोदग्ु ध

दे शी गाम की यीढ़ भें सूमक
म े तु नाभक एक ववशेष नाड़ी होती है , जो सूमकम कयणों से स्वणम

के सूक्ष्भ कण फनाती है । इसमरए गाम के दध
ू भें स्वणम कण ऩामे जाते हैं। गोदग्ु ध भें 21 प्रकाय
के उततभ कोदि के अभाइनो एमसडस होते हैं। इसभें त्स्थत सेयीब्रोसाइड्स भत्स्तष्ट्क को तयोताजा
यिता है । गाम का दध
ू फुविवधमक, फरवधमक, िन
ू फढ़ाने वारा, ओज शत्तत फढ़ाने वारा है ।

सॊकल्ऩ

स्वास्र्थम की सुयऺा के मरमे हभ सदै व गाम के दध
ू , भतिन व घी का उऩमोग कयें गे औय

चाम-कॉपी जैसे हाननकायक ऩेम ऩदाथों से दयू ही यहें गे तथा दस
ू यों को बी सेवा कयने के मरए
प्रेरयत कयें गे।

आॉतों औय दाॉतों के दश्ु भन

पास्टपूड् डफर योिी(ब्रेड), ऩीजा, फगमय, त्रफस्कुि आदद िाद्म ऩदाथों भें भैदा, मीस्ि

(िभीय) आदद होते हैं। वे आॉतों भें जाकय जभ जाते हैं, त्जससे कधज, फदहजभी, गैस, कभजोय
ऩाचन-तॊत्र, भोिाऩा, रृदमयोग, भधभ
ु ेह, आॉतों के योग आदद होते हैं।

आइसक्रीभ् इसभें ऩेऩयोननर (कीड़े भायने की दवा), इथाइर एमसिे ि (गुदे, पेपड़े औय

रृदमयोग के मरए हाननकायक) आदद घातक यसामन ऩामे जाते हैं। कई फाजारू आइसक्रीभों भें 6
प्रनतशत तक ऩशुओॊ की चफॉ होती है ।

चॉकरेट् कपनामर व इथाइर एभीन, जानथीभ, थामब्रोभीन आदद केमभकल्स ऩामे जाते

हैं, त्जनसे दाॉतों का सड़ना, डामत्रफिीज, कैं सय जैसे बमानक योग हो सकते हैं। ववषम-सूची
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी गोभाता की सेवा कयनी है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

मोगासन एवॊ मौधगक भुिाएॉ

मोगासन ववमबन्द्न शायीरयक कक्रमाओॊ औय भुराओॊ के भाध्मभ से तन को स्वस्थ, भन को

प्रसन्द्न एवॊ सुषुप्त शत्ततमों को जागत
ृ कयने हे तु हभाये ऩूज्म ऋवष-भुननमों द्वाया िोजी गमी
एक ददव्म प्रणारी है ।
ऩद्मासन्

राब् फुवि का आरौककक ववकास होता है । आतभफर व भनोफर फढ़ता है ।

द्धवधध् त्रफछे हुए आसन ऩय फैठ जामें व ऩैय को िर
ु े छोड़ दें , श्वास छोड़ते हुए दादहने ऩैय
को भोड़कय फामीॊ जॊघा ऩय ऐसे यिें कक एड़ी नामब के नीचे आमे। इसी प्रकाय फामें ऩैय को
भोड़कय दामीॊ जॊघा ऩय यिें । ऩैयों का क्रभ फदर बी सकते हैं। दोनों हाथ दोनों घुिनों ऩय ऻान

भुरा भें यहें व दोनों घुिने जभीन से रगे यहें । अफ गहया श्वास बीतय बयें । कुछ सभम तक
श्वास योकें, कपय धीये -धीये छोड़ें। ध्मान आऻाचक्र भें हो। आॉिें अधोन्द्भीमरत हों अथामत र आधी

िर
ु ीॊ, आधी फॊद। मसय, गदम न, छाती, भेरूदण्ड आदद ऩूया बाग सीधा औय तना हुआ हो। अभ्मास
का सभम धीये -धीये फढ़ा सकते हैं। ध्मान, जऩ, प्राणामाभ आदद कयने के मरए मह भुख्म आसन
है । इस आसन भें फैठकय आऻाचक्र ऩय गुरु अथवा इष्ट्ि का ध्मान कयने से फहुत राब होता है ।
सावधानी् कभजोय घुिने वारे, अशतत मा योगी व्मत्तत हठऩूवक
म इस आसन भें न फैठें।

शशकासन

राब् ननणममशत्तत फढ़ती है । त्जद्दी व क्रोधी स्वबाव ऩय ननमॊत्रण होता है ।
द्धवधध् वज्रासन भें फैठ जामें। श्वास रेते हुए फाजुओॊ को ऊऩय उठामें व हाथों को
नभस्काय की त्स्थनत भें जोड़ दें । श्वास छोड़ते हुए धीये -धीये आगे झक
ु कय भस्तक जभीन से रगा
दें । जोड़े हुए हाथों को शयीय के साभने जभीन ऩय यिें व साभान्द्म श्वास-प्रश्वास कयें । धीये -धीये
श्वास रेते हुए हाथ, मसय उठाते हुए भर
ू त्स्थनत भें आ जामें।

द्धवशेष् ʹૐ गॊ गणऩतमे नभ्ʹ भॊत्र का भानमसक जऩ व गरु
ु दे व, इष्ट्िदे व की प्राथमना,

ध्मान कयते हुए शयणागनत बाव से इस त्स्थनत भें ऩड़े यहने से बगवान औय सदगरु
ु के चयणों भें
प्रीनत फढ़ती है व जीवन उन्द्नत होता है । योज सोने से ऩहरे व सवेये उठने के तयु न्द्त फाद 5 से
10 मभनि तक ऐसा कयें ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी भन फुवि ऩय ववजम ऩानी है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

ताड़ासन

राब् एकाग्रता एवॊ शयीय का कद फढ़ता है ।

द्धवधध् दोनों ऩैयों के फीच 4 से 6 इॊच का पासरा यिकय सीधे िड़े हो जामें। हाथों को

शयीय से सिाकय यिें । एड्ड़माॉ ऊऩय उठाते सभम श्वास अॊदय बयते हुए दोनों हाथ मसय से ऊऩय
उठामें। ऩैयों के ऩॊजों ऩय िड़े यहकय शयीय को ऩयू ी तयह ऊऩय की ओय िीॊचें। मसय सीधा व दृत्ष्ट्ि

आकाश की ओय यहे हथेमरमाॉ आभने-साभने हों। श्वास बीतय योके हुए मथाशत्तत इसी त्स्थनत भें
िड़ें यहें । श्वास छोड़ते हुए एड्ड़माॉ जभीन ऩय वाऩस रामें व हाथ नीचे राकय भर
ू त्स्थनत भें आ
जामें।

शवासन्

राब् शयीय के सभस्त नाड़ी तॊत्र को ववश्राभ मभरता है । शायीरयक एवॊ भानमसक शत्तत
फढ़ती है ।
द्धवधध् सीधे रेि जामें, दोनों ऩैयों को एक दस
ू ये से थोड़ा अरग कय दें व दोनों हाथ बी

शयीय से अरग यहें । ऩूये शयीय को भत
ृ क व्मत्तत की तयह ढीरा छोड़ दें । मसय सीधा यहे व आॉिें
फॊद। हाथों की हथेमरमाॉ आकाश की तयह िर
ु ी यिें । भानमसक दृत्ष्ट्ि से शयीय को ऩैय से मसय
तक दे िते जामें। हये क अॊग को मशधथर कयते जामें। फायी-फायी से एक-एक अॊग ऩय भाननसक
दृत्ष्ट्ि एकाग्र कयते हुए बावना कयें कक वह अॊग अफ आयाभ ऩा यहा है ।

ध्मान दें - शवासन

कयते सभम ननदरत न होकय जाग्रत यहना आवश्मक है ।

टॊ क द्धवद्मा की एक मौधगक कक्रमा्

राब् भन एकाग्र होता है । ध्मान-बजन व ऩढ़ाई भें भन रगता है । थामयाइड के योग
नष्ट्ि होते हैं।
द्धवधध् रम्फा श्वास रेकय होंठ फॊद कयके कॊठ से ૐ की ध्वनन ननकारते हुए मसय को

ऊऩय नीचे कयें ।

हटप्ऩणी् मह प्रमोग प्रनतददन भात्र दो फाय ही कयें ।
प्राण भुिा्

प्राणशत्तत फढ़ती है । आॉिों के योग मभिाने एवॊ चश्भे का नम्फय घिाने हे तु अतमन्द्त

उऩमोगी।

ऻानभुिा्

ऻानतॊतुओॊ को ऩोषण मभरता है । एकाग्रता व मादशत्तत भें ववृ ि होती है ।
मौधगक भुिाएॉ

मरॊग भुिा् िाॊसी मभिती है , कप नाश होता है ।
चादहए।

शून्म भुिा् कान का ददम दयू होता है । फहयाऩन हो तो मह भुरा 4 से 5 मभनि तक कयनी
ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी शयीय स्वस्थ औय भन प्रसन्द्न यिना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

ʹदीऺाʹ मानी सही हदशा

जैसा सदगरु
ु फतामें वैसा व्रत-ननमभ रेना दीऺा है औय उसके अनस
ु ाय जीवन फनाना

मशऺा है । ऩहरे दीऺा के फाद ही मशऺा दी जाती थी तो मशऺा परीबूत होती थी औय मह मशऺादीऺा भानव भें से भहाभानव का प्राकट्म कयने का साभर्थमम यिती थी।

ऐदहक मशऺा तुभ बरे ऩाओ ककॊतु उस मशऺा को वैददक दीऺा की रगाभ रगाना जरूयी

है । दीऺा भाने सही ददशा। त्जस ववद्माथॉ के जीवन भें ऐदहक मशऺा के साथ दीऺा हो, प्राथमना,

ध्मान एवॊ उऩासना के सॊस्काय हों, वह सुन्द्दय सूझफूझवारा, सफसे प्रेभऩूणम व्मवहाय कयने वारा,

तेजस्वी-ओजस्वी, साहसी औय मशस्वी फन जाता है । उसका जीवन भहानता की सुवास से भहक
उठता है । दीऺा से ही जीवन की सही ददशा का ऩता चरता है औय वास्तववक रक्ष्म मसि होता
है । सपर उसी का जीवन है त्जसने आतभऻान को प्राप्त ककमा। ववषम-सूची

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

सायस्वत्तम भॊत्र भहहभा

ब्रह्भऻानी सदगुरु से ʹसायस्वतम भॊत्र की दीऺा रेकय जऩ कयने वारे फच्चों के जीवन भें

एकाग्रता, अनुभान शत्तत, ननणमम-शत्तत एवॊ स्भयणशत्तत, चभतकारयक रूऩ से फढ़ती है औय
फुवि तेजस्वी फनती है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी सायस्वतम भॊत्र की दीऺा रेनी है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

ऩज्
ू म फाऩू जी से भॊत्रदीक्षऺत फच्चों के
जीवन भें होने वारे राब्

ऐसे फच्चों के जीवन भें हताशा, ननयाशा, धचॊता, बम आदद दयू हो जाते हैं। वे उतसाही,

आशावादी, ननत्श्चॊत, ननडय तथा फवु िभान फनते हैं, स्वस्थ एवॊ प्रसन्द्नभुि यहते हैं औय ऩढ़ाईमरिाई भें सदा आगे यहते हैं।

सत्तसॊग व भॊत्रदीऺा ने कहाॉ-से-कहाॉ ऩहुॉचा हदमा !

ऩहरे भैं बैंसें चयाता था। योज सुफह यात की रूिी योिी, प्माज, नभक औय भोत्रफर आमर

के ड्डधफे भें ऩानी रेकय ननकारता व दोऩहय को वही िाता था। आधथमक त्स्थनत ठीक न होने से
िामय की ढाई रूऩमे वारी चप्ऩर ऩहनता था।
12वीॊ भें भुझे केवर 60 प्रनतशत अॊक प्राप्त हुए थे। उसके फाद भैंने इराहाफाद भें
इॊजीननमरयॊग भें प्रवेश मरमा। कपय भुझे फाऩू जी द्वाया सायस्वतम भॊत्र मभरा। भेयी भनत भें

सदगुरु की कृऩा का सॊचाय हुआ। भैंने सववधध भॊत्र अनुष्ट्ठान ककमा। इस सभम भैं ʹगो एमयʹ
(हवाई जहाज कम्ऩनी) भें इॊजीननमय हूॉ। भहीने बय का कयीफ 1 राि 80 हजाय ऩाता हूॉ। गुरु
जी ने बैंसें चयाने वारे एक गयीफ रड़के को आज इस त्स्थनत भें ऩहुॉचा ददमा है ।"

क्षऺनतश सोनी (एमयक्राफ्ि इॊजीननमय), ददल्री

ऩूयी डडक्शनयी माद कय द्धवश्व रयकॉडव फनामा्

"ऑतसपोडम एडवाॊस्ड रनमसम ड्डतशनयी (अॊग्रेजी, छठा सॊस्कयण) के 80000 शधदों को
उनकी ऩष्ट्ृ ठ सॊख्मासदहत भैंने माद कय मरमा, जो कक सभस्त ववश्व के मरए ककसी चभतकाय से

कभ नहीॊ है । परस्वरूऩ भेया नाभ ʹमरम्का फुक ऑप रयकॉडमसʹ भें दजम हो गमा। मही नहीॊ ʹजीʹ
िी.वी. ऩय ददिामे जाने वारे रयमामरिी शो ʹशाफाश इॊड्डमाʹ भें बी भैंने ववश्व रयकॉडम फनामा।

भुझे ऩूज्म गुरुदे व से भॊत्रदीऺा प्राप्त होना, ʹभ्राभयी प्राणामाभʹ सीिने को मभरना तथा

अऩनी कभजोयी को ही भहानता प्राप्त कयने का साधन फनाने की प्रेयणा, करा, फर एवॊ उतसाह
प्राप्त होना, मह सफ तो गुरुदे व की अहै तुकी कृऩा का ही चभतकाय है ।

वीये न्द्र भेहता, योहतक (हरयमाणा)

भॊत्रदीऺा व मौधगक प्रमोगों से फद्धु द्ध का अप्रततभ द्धवकास्

"ऩहरे भैं एक साधायण छात्र था। भुझे रगबग 50-55 प्रनतशत अॊक ही मभरते थे। 11

वीॊ कऺा भें तो ऐसी त्स्थनत हुई कक स्कूर का नाभ ियाफ न हो इसमरए प्रधानाध्माऩक ने भेये
अमबबावकों को फर
ु वाकय भझ
ु े स्कूर से ननकार दे ने तक की फात कही थी। फाद भें भझ
ु े ऩज्
ू म
फाऩू जी से सायस्वतम भॊत्र की दीऺा मभरी। इस भॊत्र के जऩ व फाऩू जी से सायस्वतम भॊत्र की

दीऺा मभरी। इस भॊत्र के जऩ व फाऩू जी द्वाया फतामे गमे प्रमोगों के अभ्मास से कुछ ही सभम

भें भेयी फवु िशत्तत का अप्रनतभ ववकास हुआ। ततऩश्चात र ʹनोककमाʹ भोफाइर कम्ऩनी भें ʹग्रोफर
सववमसेस प्रोडति भैनेजयʹ के ऩद ऩय भेयी ननमत्ु तत हुई औय भैंने एक ऩस्
ु तक मरिी जो
अॊतयामष्ट्रीम कम्ऩननमों को सेल्मुरय नेिवकम का ड्डजाइन फनाने भें उऩमोगी हो यही है । एक ववदे शी

प्रकाशन द्वाया प्रकामशत इस ऩुस्तक की कीभत 110 डॉरय (कयीफ 4500 रूऩमे) है । इसके

प्रकाशन के फाद भेयी ऩदोन्द्नती हुई औय अफ ववश्व के कई दे शों भें भोफाइर के ऺेत्र भें प्रमशऺण
हे तु भुझे फुराते हैं। कपय भैंने एक औय ऩुस्तक मरिी, त्जसकी कीभत 150 डॉरय (कयीफ 6000
रूऩमे) है । मह ऩूज्म श्री से प्राप्त सायस्वतम भॊत्र दीऺा का ही ऩरयणाभ है ।" ववषम-सूची

अजम यॊ जन मभश्रा, जनकऩुयी, ददल्री

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
हभें बी सदगण
ु ी, प्रबावशारी व्मत्तततववारा फनना है ।

ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ

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