E-Thar Samvad 04102012

थार संवाद

ह द ू सं कृ ित को अ ुण बनाये रखने क आव यकता -

4 अ-टू बर २०१२

सरसंघचालक पूजनीय मोहन जी भागवत

जैसलमेर २ अ-टू बर २०१२ . सीमावत4

े5 के जैसलमेर 6जले म7 पहली बार

वयंसेवक संघ के सरसंघचालक पूजनीय मोहन जी भागवत
संगम संप न हुआ. जैसलमेर के
था.

सव@Aथम चार अलग अलग

क उप6 थित

वयंसेवको तथा नाग=रक गण( का
थान( से पथ संचलन Aारं भ हुए.

वयंसेवको का पुGप से

वागत

म7

ह द ू श;<

उ>साह दे खते ह? बनता
6जसका ;5वेणी

हनुमान चौक म7 ठEक ३.२१ बजे हुआ. संचलन म7 आठ हजार से अिधक
िलया. जगह जगह पर

पधारे रा)ीय

संगम

वयंसेवको ने ह सा

कया गया.शह?द

पूनम िसंह

टे डयम म7 ह द ू श;< संगम काय@Iम पांच बजे Aारं भ हुआ. सरसंघचालक पूजनीय मोहन
भागवत जी पहले शह?द पूनम िसंह,

महा>मा गाँधी एवं लाल बहादरु शाLीके िच5( पर

पुGपांजिल अ;प@त क . सरसंघचालक मोहन जी भागवत ने सबसे पहले मंच पर ;वराजमान संतो
का अिभवादन कया. Mवजारोहण एवं Aाथ@ना के पNात ् सPगीत हुआ.

अ दर के पृ'( पर
कतरने

4

सरसंघचालक

5

पूजनीय मोहन जी
भागवत ने रा) क

वयंसेवक(

Qारा दं ड, दं ड योग , सूय@ नम कार का Aदश@न कया गया. पूजनीय सरसंघचालक

मोहन जी भागवत ने

वयंसेवको तथा उप6 थत नाग=रक गण( को उधबोधन दे ते हए कहा क

हं द ु तान को फर से परम वैभव पर पहुचाने के िलए हम7 अपने आप को पहचानना

होगा.हम7

गुण संप न बनना होगा तभी दे श का भाSय बदलेगा. ह द>ु व ;वT के िलए कUयाणकार? है .
वाथ@ को छोड़ कर दे श के िलए

योछावर होना के िलए तैयार रहना होगा.

दे श के सुर ा के बारे म7 बोलते हुए भागवत जी ने कहा क सीमाय7 कह? से भी सुर6 त नह?ं

सीमाओं क सुर ा

है .

क कामना

कह? कह? तारबंद? अXछE है मगर बंगलादे श से वैसे ह? आ जा सकते है .

मुYा लेकर कोई भी कह? आ जा सकता है .

जाली

न प6Nम म7 पा क तान और न ह? उतर म7 चीन

पर कोई ;वTास कर सकता है . ह द ू अपने ह? दे श म7 ;व था;पत क तरह जी रहा है . गर?ब
4

कसान क िचंता करते हुए ऍफ़ ड? आई के िनण@य को कसानो तथा छोटे दक
ु ानदारो के िलए
अित नुकसानदायक बतलाया. सार? नीितय( म7 राजनीित
वोटो

के िलए चल रह? है . महाभारत और

ह? चल रह? है और राजनीित

वामी ;ववेकानंद जी के Y^ा त

बतलाते हुए

मोहन जी भागवत ने ह द ू सं कृ ित को अ ुण बनाये रखने क आव यकता Aितपा दत क .

2

थार संवाद

हमारा दे श खतर( से िघरा हुआ है , यह बात सभी लोग महसूस भी कर रहे ह_ । दे श के कसी
कोने म7 शांित नह?ं है । उaर, द6 ण, पूव@ और प6Nम म7 रा) ;वरोधी ताकत7 पनपी हुई ह_ । मोहन
भागवत ने कहा क ऐसा कोई दे श नह?ं है जहां का दे शवासी अपने ह? दे श म7 शरणाथ4 िश;वर म7
रह रहा हो, ले कन हमारे दे श म7 ह द ू ;व था;पत( के िश;वर म7 रह रहा है । चाहे वह क मीर हो
या फर गुवाहट?। उ ह(ने कहा क अभारतीय ताकत7 कcटरपंथी ह_ . सार? रा);वरोधी ताकत7 चार(

१५० वां ज म वष@

तरफ छोटे छोटे उपYव करवाकर ह द ु तान को आजमा रह? है । उ ह7 दे श म7 अ दर

समथ@न भी

िमल जाता है ।

मानव-दे

मानव दे ह ह? सव@l'

दे श के सुर ा के बारे म7 बोलते हुए भागवत जी ने कहा क सीमाय7 कह? से भी सुर6 त नह?ं

दे ह है , एवं मनुGय ह?

कोई भी कह? आ जा सकता है .

सवmXच Aाणी है ,

है .

कह? कह? तारबंद? अXछE है मगर बंगलादे श से वैसे ह? आ जा सकते है .

जाली मुYा लेकर

न प6Nम म7 पा क तान और न ह? उतर म7 चीन पर कोई

;वTास कर सकता है . ह द ू अपने ह? दे श म7 ;व था;पत क तरह जी रहा है . गर?ब कसान क
िचंता करते हुए ऍफ़ ड? आई के िनण@य को

कसानो तथा छोटे दक
ु ानदारो के िलए अित

नुकसानदायक बतलाया. सार? नीितय( म7 राजनीित

ह? चल रह? है और राजनीित वोटो

-य( क इस मानवमानव

चल रह? है . महाभारत और

दे ह तथा इस ज म

हमारा दे श खतर( से िघरा हुआ है , यह बात सभी लोग महसूस भी कर रहे ह_ । दे श के कसी

म7 ह? हम इस

ह दू

सं कृ ित

वामी ;ववेकानंद जी के Y^ा त

के िलए

को अ ुण

बनाये

रखने

बतलाते हुए मोहन जी भागवत ने
आव यकता

Aितपा दत

क.

कोने म7 शांित नह?ं है । उaर, द6 ण, पूव@ और प6Nम म7 रा) ;वरोधी ताकत7 पनपी हुई ह_ । मोहन
भागवत ने कहा क ऐसा कोई दे श नह?ं है जहां का दे शवासी अपने ह? दे श म7 शरणाथ4 िश;वर म7
रह रहा हो, ले कन हमारे दे श म7 ह द ू ;व था;पत( के िश;वर म7 रह रहा है । चाहे वह क मीर हो

सापे6 क जगत ् से

या फर गुवाहट?। उ ह(ने कहा क अभारतीय ताकत7 कcटरपंथी ह_ . सार? रा);वरोधी ताकत7 चार(

संपूणत
@ या बाहर हो

िमल जाता है ।

सकते ह_ ÐिनNय ह?
मु;< क अव था
Aाo कर सकते ह_ ,
और यह मु;< ह?
हमारा चरम लpय
है ।
- वामी ;ववेकान द

तरफ छोटे छोटे उपYव करवाकर ह द ु तान को आजमा रह? है । उ ह7 दे श म7 अ दर

समथ@न भी

संघ Aमुख भागवत ने कहा क हमारे सामने जो सम याएं और ताकत7 ह_ वह हमार? दब
@ ताओं
ु ल
पर पलने वाली ह_ । इसिलए दग
ु@ छोड़कर एक होना पड़े गा। प;व5 ह द ू धम@ को िमटाने क
ु ण
ताकत कसी म7 नह?ं है । उ ह(ने उप6 थत लोग( से एकजुट होने का आeान कया। उ ह(ने कहा
क ह द ु तान को ;वT गुf बनाने वाला

वयंसेवक ब ती ब ती म7 चा हए। वातावरण बनाना है ,

समा य gय;< वातावरण म7 काम करता है । दे श क वत@मान 6 थित हम7 भुगतनी पड़े इसिलए
इस 6 थित को बदलना होगा। संघ को पैसा व शाबाशी नह?ं चा हए काय@कता@ चा हए। दे श व
ह द ू समाज के उhार के िलए

वािभमान के आधार पर संपूण@ एकता लानी होगी, दे श के िलए

जीना होगा।

कदम से कदम िमलाते हुए

वयंसेवक जब शहर के मुiय मागj से िनकले तब शहर का माहौल

ह? बदल गया। लगभग शहर के हर कोने म7
सुनाई पड़ रह? थी।

वयंसेवक( क कदम ताल व ब_ड वादन क धुन

वयंसेवक( के पथ संचलन को दे खने पूरा शहर उमड़ पड़ा। बाजार म7 जाम

लग गया और कदम रखने तक क जगह नह?ं िमली। जगह जगह पुGप वषा@ और वंदे मातरम व
भारत माता जयकार7 लगाए जा रहे थे। यह नजारा था रा)ीय

वयंसेवक संघ के ;व;वध धारा

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पथ संचलन का 6जसम7

ह दओ
ु ं का रै ला शहर के मुiय मागj से िनकला। मंगलवार को जैसलमेर म7 हुआ काय@Iम

ऐितहािसक रहा। कई लोग( ने कहा क ऐसा काय@Iम पहले कभी नह?ं हुआ।
सीमावत4

5
े म7 माताओं एवं बहन( म7 अपार उ>साह दे खत ह? बन रहा था. सेवा ब6 तय( स हत शहर क सभी ब6 तय( क

सड़को पर सेकड़ो

थान( पर माताओ एवं ब हन( Qारा आकष@क रं गोली सजाई गई. काय@Iम के िलए जैसलमेर शहर

घर से संपक@ कया गया. सभी समाजो ने बाद चढ़ कर ह द ू श;< संगम म7 सहभाग
जैसे मदासर, नौख इ>या द
म7 बढ चढ़ कर ह सा िलया.

थान( से ३०० कलोमीटर चल कर न केवल

के हर

कया. जैसलमेर 6जले के सुदरू गाँव

वयंसेवको ने ब6Uक sामीण बंधुओ

ने भी काय@Iम

थार संवाद

5(
ार प



ने स



.....
क .

4

5

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रा)ीय

वयंसेवक संघ के सरसंघचालक पूजनीय

मोहन जी भागवत ने रा) क सीमाओं क सुर ा क कामना
तनोट, जैसलमेर ३ अ-टू बर . रा)ीय

वयंसेवक संघ के सरसंघचालक पूजनीय मोहन जी भागवत ने तनोट

राय माता जी क पूजा अच@ना कर रा) क सीमाओं क
सुर ा क

कामना क . उUलेखनीय है क

तनोट राय

माता जी के बारे म7 कहा जाता है क १९६५ के युh के
दौरान पा क तान Qारा डाले गए सभी बम( को िन6GIय
कर दया था. इन बम( को आज भी मं दर म7 सुर6 त
रखा गया है .
सीमावत4

े5 म7 ;वशेष wप से पाई जाने वाली सेवन

घास को भी दे खा और उसको ;वकिसत करने क
आव यकता पर बल दया. उUलेखनीय है क सेवन घास
गाय

के

िलए

उaम

पौ;^क

आहार

माना

जाता

है .सरसंघचालक मोहन जी भागवत ने लोगेवाला सीमा पर

पूजनीय सरसंघचालक मोहन जी भागवत तनोत माता क

हं द ु तान के जवान( Qारा पकडे गए ट_ को को भी दे खा.

पूजा करते हुए साथ म7 Aा त Aचारक मुरलीधर जी

पूजनीय सरसंघचालक मोहन जी भागवत क अगवानी सीमा
सुर ा बल( के अिधकार?य( ने क . सीमा सुर ा बल( के
अिधकार?य( से वाता@लाप करते हुए सरसंघचालक जी ने
अिधकार?य( एवं जवान( के >याग क भर? भूर? Aशंसा क .
अिधकार?य(

ने

काय@कता@ओ

Qारा


मृित िच ह

भेट करते सीमा सुर ा बल के अिधकार?

काय@Iम क Aशंसा

सीमाजन

कये

जाने

कUयाण
वाली

सिमित

;विभ न

के

काय@Iम(

सरहाना करते हुए कहा क सिमित के काय@कaा@ अपने

काय@Iम(
पूजनीय सरसंघचालक मोहन जी भगवत को

भी

से जवान( का उ>साहवध@न करते रहते है . सुर ा

बल( के अिधकार?य( ने सीमाजन कUयाण सिमित Qारा हर
वष@ जवान( को र ाबंधन के अवसर पर र ा सू5 बांधने के

क . पूजनीय सरसंघचालक जी मोहन जी भागवत के साथ

े5 Aचारक दग
ु ा@दास जी,

े5

Aचारक Aमुख न दलाल जी, Aा त Aचारक मुरलीधर जी तथा सीमाजन कUयाण सिमित के संघटन मं5ी
नीxब िसंह जी भी थे.पूजनीय सरसंघचालक मोहन जी भागवत को

सीमाजन कUयाण समीित के संघटन मं5ी

नीxब िसंह जी ने प6Nमी राज थान क सीमाओ और उनसे जुड़े ;वषय( क जानकार? द?.

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