ऩययावरण प्रदषण ू

• ऩययावरण प्रदषण भयरत की ही नहीीं अपऩतु ू सम्ऩणा पवश्व की एक गींभीर समस्यय है । ू • यह मख्य रूऩ से प्रकृतत क सयथ ककये गए े ु अन्यययों कय सयकयर रूऩ है । .

जऱु ू ू प्रदषण एवीं ध्वतन-प्रदषण शयममऱ हैं। ू ू .• प्रदषण में मख्य रूऩ से वययु-प्रदषण.

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ीं आक्सीजन म ग (रयसययतनक एवीं जैपवक). रयसययतनक एवीं जैपवक अवस्थयओीं ऩर तनभार करती है । • जऱ प्रदषण को इसकी सख्ततय. तयऩमयन आदद गणों से ु ऩहचयनय जय सकतय है । . ू ऺयरीयतय. गींध. रीं ग. स्वयद. घनत्व. रे डियो धममातय. अम्ऱीयतय. अऩयरदमशातय.• भौततक.

वययु-प्रदषण ू .

• ऩथ्वी ऩर जीवन प्रकृतत-सींतुऱन से ही सींभव ृ है । • आज सभी ऱोग वययु-प्रदषण की समस्यय से ू चचींततत हैं। • वययु में प्रयकृततक रूऩ से नहीीं ऩयए जयने वयऱे तत्व यय अचधक सयींद्रतय क सयथ यय सयमयन्य े से अऱग तत्वों को प्रदषक कहय जयतय है . ू .

• वययु में बहुत से तत्त्व होते हैं जो ऩौधों और ऩशओीं (मयनव समेत) कय स्वयस्थ्य कर सकते ु हैं यय नजर ख़रयब कर सकते हैं यह प्रयकृततक प्रकिययओीं तथय मयनव गततपवचधयों दोनों से उत्ऩन्न होते हैं। .

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