संगोठ

थान: ान क, जीवन वया तठान, गोवंदपुर, बीजनोर
फरवर" 3-10, 2013
जीवन वया तठान, गोवंदपुर, बीजनोर म ान क क) क*पना क) गई है । उ0े2य यह है 3क हम अपनी ान
पर5पराओं का अपनी 7िट से अ:ययन कर , उ;हे समझे, उनका मू*यांकन करे और सह" लगे तो उनपर कुछ 
योग भी हB। पछले दो, अढ़ाई सौ वषF म हमने अपने को समझने म भी Gयादातर, पराई ान पर5पराओं का
सहारा Hलया है । अभी तक हम अपने इतहास को भी अपनी 7िट से नह"ं Hलख पाये। सम त दु नया म यरू ोपीय
7िट से Hलखे इतहास का ह" अ:ययन होता है । दे श दु नया, अि तLव को समझने के हर परं परा अपनी 7िट होती
है अपनी 7िट होती है , अपने संवगM (categories) होते हY। हम िजन भावB से घरे हY, िजस वातावरण म जीते
हY, उसमे पराई 7िट 3कसी न 3कसी कारण हरे क पर कमोबेश हावी है । बहुदा तो इस भाव का हमे पता ह" नह"ं
चलता। धरमपाल जी कहा करते थे ‘हम अपनी दु नया को पराई 7िट से दे खने लगे हY’। ान क पर एक पचाM
तैयार 3कया गया है जो साथ म संलaन है । 
ान क म इसी ओर एक यास है 3क हम 7िटयB, संवगF के भेद के त सचेत हB और अपनी दु नया को
अपनी नज़र से दे खने लगे। और तट थक हो कर, सह" 7िट पर आधाdरत ान पर5पराओं पर काम करे । आज के
माहौल म इस कार का द"घMकाल"न काम कeठन है , चन
ु ौतयाँ (अंदgनी और बाहर से) अनेकB हY। पर 3फर भी हमे
लगता है 3क इस कार के यास क) ज़gरत है । 3कशन पटनायक जी कहते थे

‘जो समहू लंबे समय तक गुलाम

बने रहते हY, उनके वभाव और चdरh म एक बदलाव आ जाता है । वे अपने नणMय से, कeठन काम नह"ं कर
सकते, वह HसफM आदे श Hमलने पर ह" कeठन काम कर सकता है , अनiछा से करता है । कeठन (और ल"क से हट
कर लंबे समय तक एक जन
ु न
ू लेकर) करने म जो रस है , जो तिृ kत है वह समझ नह"ं पाता। वह कठोर नणMय से
भागता है । जो कeठन है वह संभव है , द"घMकाल"न eहत के Hलए कeठन कायM आव2यक है – यह भाव उसके आचरण
से गायब हो जाता है ’।

‘लंबे समय तक गल
ु ाम रहने पर mयिnतLव बीमार हो जाता है । सहज gप से नह"ं, अथक कोHशश करके ह" इससे
उबरा जा सकता है । राजनैतक दासता के बारे म तो बहुतB ने सोचा पर बौoक और आpथMक दासता के बारे म
हमार" समझ गहर" नह"ं है । आज़ाद" क) लड़ाई के वnत भी इसके बारे म पटता HसफM महाLमा गांधी को थी’।
आज तो यह लगभग नदारद है । वड5बना यह है 3क आधुनक वकास के वक*प के बारे म भी यूरोप और
अमर"का म ह" मल
ू gप से सोचा जा रहा है । पर इस सोच या इस 7िट म उपभोकतावाद को चन
ु ौती दे ने के Hलए
वे तैयार नह"ं eदखते। 3कशन जी ऐसा मानने लगे थे 3क ‘आधु नक वकास का वक*प गैर-आधु नक ह" होगा। और
गैर-आधु नक का मतलब है - पीछे चलना। गल
ु ामी के अtय त eदमाग को गैर-आधु नक होने क) बात (इ*जाम) से

ह" डर लगता है । इससे घबराहट होती है 3क कोई कह दे गा 3क तम
ु दे श को पीछे ले जाना चाहते हो। यह आरोप
सन
ु कर बड़े से बड़े गांधीवाद" और भारतीयवाद" अपनी बात कहते कहते eहच3कचाने लगते हY। गांधी जी के ‘eह;द
वराज’ क) खूबी यह थी 3क उसमे eहचक और uझझक नह"ं थी। ‘eह;द वराज’ भारत को अठारहवीं सद" म ले
जाने का एक आहmहान था, ता3क गुलामी से पहले वाल" ि थत म खड़े हो कर हम अपनी नई याhा शुg कर ’।
धरमपाल जी का भी यह" आvह हुआ करता था। बक़ौल 3कशन जी के ‘पीछे ले जाने का आरोप लगाने वाले वाकई
महामूखM होते हY। nयB3क समय के बारे म उनका जो अपना दशMन है (सरल रै uखक समय), उसमे पीछे जाना कभी
होता ह" नह"ं। सच यह है 3क युo को छोड़ कर पीछे हटना अपमानजनक नह"ं होता और युo म भी स5मानपूवक
M
पीछे हटने क) अनम
ु त रहती है ’। 
ान क क) शुxआत हम ‘जीवन वया तठान’, गोवंदपुर, बीजनोर म 3 फरवर" से 10 फरवर" 2013 के बीच
एक गंभीर चचाM से करना चाहते हY िजसमे आज क) ि थत पdरि थत और सम याओं को :यान म रखकर 3कस 
कार के यास साथMक हो सकते हY इस पर pचंतन मनन हो। यास अ*प-काल"न और द"घMकाल"न दोनB कार के
हो सकते हY। संभवतः थोड़े बहुत साथMक अ*पकाल"न यास हो भी रहे हY पर द"घMकाल"न यासB क) कमी eदखती
है । चचाM म सम याओं और ि थत के व2लेषण पर ज़ोर न हो कर साथMक यासB पर होगा, वह भी द"घMकाल"न।
चचाM क) शुxआत हम zी रवी; शमाM (अeदलाबाद) के उबोधन से करना चाहते हY। इसके पीछे कारण हY। रवी;
जी मौuखक परं परा के mयिnत हY िजसक) बैठक ठे ठ दे सी है । वे मूलतः एक कलाकार हY, उस परं परा से जहां
कार"गर" और कलाकार" म भेद नह"ं 3कया जाता था। पर कलाकार" और कार"गर" सीखते सीखते उ;होने पारं पdरक
समाज, कार"गर समाज एवं वHभ;न जातयB का अपनी पैनी 7िट से गहरा अ:ययन 3कया है । भारतीय समाज
mयव था कैसे चलती थी, उसक) अथMmयव था के पीछे कैसा दशMन था, इसक) गहर" समझ रवी; जी रखते हY।
पर5पराओं के पीछे दशMन, सं कृत के पीछे स{दयM 7िट और सtयता क) अथMmयव था का जैसा सम;वय उनक)
बातB को सन
ु कर समझ आता है , वैसा अ;यh दे खने को नह"ं Hमलता। उनक) बातB से हमे सोचने के कुछ नए
आयाम Hमल गे िजनसे हम सवMथा अनHभ न होते हुए भी, लगभग वंpचत हY। इसHलए शुxआत उनसे होगी। रवी;
जी से यह चचाM 3-6 तार"ख तक चलेगी। उसके बाद तीन साढ़े तीन eदन हम उन बातB क) चचाM कर गे िजनका
िज़} ऊपर 3कया गया है यान उन यासB को इंpगत करने का यास जो आज के माहौल म हमे द"घMकाल"न 7िट
से आव2यक लगते हY।
आप लंबे समय से दे श के हालात को लेकर pचंतन मनन करते रहे है इसHलए इस गोठ म आप क) भागीदार" क)
हम कामना करते हY। ‘जीवन वया तठान’, गोवंदपुर eद*ल" से लगभग 180 3कलोमीटर, 4 घंटे क) दरू " पर
है । वहाँ आपके रहने खाने क) mयव था रहे गी। कृपया समय नकाल कर इस गोठ म ज़gर शर"क हB। कायM}म

‘जीवन वया तठान’ और ‘Hसo’, मसूर" के संयुnत यास से हो रहा है । 

वनीत
रण Hसंह आयM, “जीवन वया तठान’
पवनकुमार गुkत, ‘Hसo’ मसूर"