Tips of Life

जीवन मं त

अचूक आयुवे ि दिक उपचार: कै सी भी हो खांस ी
बस दिो िदिन मे ठीक हो जाएगी!
बदिलते मौसम मे कोई भी खांसी की िगरफत मे आ सकता है। इसके अलावा कई बार एलजी या ठंडा-गमर
खाने से भी खांसी हो जाती है। लेिकन लगातार खांसी बने रहना िचंता का िवषय है कयोिक खांसी क ई बडे
रोगो का कारण भी बन सकती है। इसीिलए जब खांसी हो तो इन घरेलू उपायो को जरर अपनाएं , कैसी भी
खांसी हो शीघ राहत िमलेगी।
- 10 गाम िफटकरी को तवा गमर करके उस पर रख दिे। थोडी दिेर बुदिबुदिाहट के बादि वह िफटकरी ठंडी
होकर बैठ जावेगी । िफर उसी िफटकरी को चाकू जैसी िकसी नोकदिार वसतु से उस गमर तवे पर पलट दिे।
थोडी दिेर मे वह िफटकरी बुदिबदिाते िदिखेगी व बैठ जावेगी । यह शोिधत िफटकरी कहलाती है । इस
िफटकरी को बेलन की मदिदि से िबलकुल बारीक पीस ले और इसमे 100 गाम शककर का बुरा िमलाकर इसे
एकजान करके इसकी बराबर वजन की 15 पुिडय़ा बना ले। अगर खांसी कफ वाली हो तो इस पुिडय़ा को
सुबह-शाम पानी से ले, सुखी हो तो गुनगुने दिध
ू से इसका सेवन करे।

वातिवकार.एक नही अने क रोग दि रू हो सकते है इस एक तरीके से सवसथ शरीर सभी चाहते है लेिकन सवसथ शरीर के िलए रोजाना योग व िनयिमत िदिनचयार इसके िलए आवश्यक है। कुछ योगासन ऐसे है िजन्हे िनयिमत रुप से करने से शरीर न िसफर सवसथ रहता है बि एलक एनजी भी िमलती है। िसद्धासन की िविधसमतल सथान पर कंबल आिदि आसन पर बैठकर पैर खुले छोड दिे। अब बाये पैर की एडी को गुदिा और जननेि एन्द्रिय के बीच रखे। दिािहने पैर की एडी को जननेि एन्द्रिय के ऊपर इस प्रकार रखे िजससे जननेि एन्द्रिय और अण्डकोष के ऊपर दिबाव न पडे। पैरो का क्रम बदिल भी सकते है। दिोनो पैरो के तलवे जंघा के मध्य भाग मे रखे। हथेली ऊपर की ओर रहे इस प्रकार दिोनो हाथ एक दिस ू रे के ऊपर गोदि मे रखे। अथवा दिोनो हाथो को दिोनो घुटनो के ऊपर ज्ञानमुद्रिा मे रखे। आं खे खुली अथवा बंदि रखे। श्वास सामान्य रखे और ध्यान केि एन्द्रित करे। पांच िमनट तक इस आसन का अभ्यास कर सकते है। ध्यान की उच्च कक्षा आने पर शरीर पर से मन की पकड छूट जाती है। िसद्धासन के लाभिसद्धासन से शरीर की समसत नािडय़ो का शुिद्धकरण होता है। ध्यान लगाना सरल हो जाता है। पाचनिक्रया िनयिमत होती है। श्वास के रोग. क्षय. अजीणर . जीणर ज्वर. शुक्रदिोष आिदि दिरू होते है। मंदिािग. अितसार. प्लीहा की वृद्धिद्ध आिदि अनेक रोगो दिरू होते है। ब्रह्मचयर पालन मे यह आसन िवशेष रप से सहायक होता है। िवचार पिवत बनते है। िसद्धासन का अभ्यासी भोगिवलास से बच सकता है। वीयर की रक्षा होती है। सवप्नदिोष के रोगी को यह आसन अवश्य करना चािहए। मानिसक शिक्तियो का िवकास होता है। कुण्डिलनी शिक्ति जागृद्धत करने के िलए यह आसन प्रथम सोपान है। . दिमा. संगहणी. मरोडा. हृदिय रोग. मधुप्रमेह.

दिेर रात तक जागना और सुबह दिेर तक सोए रहना इस समसया का मुखय कारण है अत: सबसे पहले जलदिी सोकर सुबह जलदिी जागने की िदिनचयार अिनवायर रुप से बनाना आवश्यक समझे । . गाजर. हरी ककडी.मिहलाएं प्राय: इस सोच से अपने बाल काट िलया करती है िक काटने से बाल अिधक बढेगे जबिक यह एक गलत धारणा है । अत: मिहलाएं इस सोच से अपने बाल कभी न काटे । . पालक. दिस ू रे का कंघा व टावेल कभी भी प्रयोग मे न ले । .बालो को कभी भी िकसी बाजारी या इश्तहारी शैमपू से न धोएं । . पके टमाटर.दिोनो वक्ति सुबह-शाम या रात को सोने से पहले शौच िक्रया अवश्य करे िजससे पेट साफ रहे और कबज न रहने पाए । िकसी भी ि एसथित मे तनाव से बचे। .अपना कंघा व तौिलया हमेशा अलग रखे. पता गोभी आिदि कोई भी हरी पतेदिार सबजी का सलादि काली िमचर व सेधा नमक बुरककर िबना चूके प्रितिदिन कम से कम एक बार तो अिधकतम माता मे अवश्य खाएं । शतावरी पाक: ठं ड मे एक अनोखी दिवा बनाकर खाएं और दिे खे कमाल .रक जाएगा कम उम मे बालो का झडऩा.भोजन के साथ सलादि के रुप मे मूली.हमेशा एक ही प्रकार का तेल प्रयोग करे । तेल बदिल-बदिल कर नही । नािरयल के तेल मे नीबू का रस िमलाकर लगाने से बाल सवसथ व चमकीले बने रह सकते है । . रखे इन छोटी -छोटी बातो का ध्यान कम उम मे बालो का झडऩा या गंजापन आना िसफर पुरुषो मे ही नही बि एलक मिहलाओं मे भी एक आम समसया बन गई है। लेिकन यही समसया यिदि 20-30 वषर की युवा उम मे ही सामने आने लगे तो प्रभािवत वयिक्ति का िचि एन्तत होना सवाभािवक हो जाता है। इस समसया के समाधान हेतु सबसे पहले इस समसया से प्रभािवत लोगो को िनमन िनयमो को अपनी िदिनचयार मे शािमल करना बहु त आवश्यक होता है। .

जायफल. छोटी इलायची. एक िकलो िमशी. घी 250 गाम. पवार और िखरेटी तीनो की जड 100-100 गाम.शतावरी. िजनसे ऑकसीजन ज्यादिा भीतर चला जाएगा। तो ताजगी ज्यादिा दिेर रुकेगी. लौग.एक-एक बफी सुबह व रात को सोते समय खाकर एक िगलास मीठा दिध ू पीना चािहए। पूरे शीतकाल इस पाक का सेवन करने से सब प्रकार की कमजोिरयां नष हो कर शरीर मे खूब बलवीयर की वृद्धिद्ध होती है। शॉर्टर कट : िसगरेट छू ट जाएगी.ये पांचो 10-10 गाम.ठंड मे कुछ औषधीयां सी और पुरुष दिोनो के िलए समान रप से पोषक व बलवधर क है। ऐसी ही एक औषिध है शतावरी। आज हम आपको बताने जा रहे है शतावरी पाक की िविध जो सिदिर यो मे शरीर के िलए िवशेष रप से लाभदिायक है। सामगी. और ज्यादिा सवाभािवक होगी। यह एक नई आदित है। . उन आदितो को आपको नई आदितो से बदिलना पडेगा नई बाते सुनकर नही। अगर आपको िसगरेट पीना छोडऩा है तो आपको ताजगी पैदिा करने की दिस ू री आदिते डालना पडेगी। नही तो आप कभी नही छोड पाएँ गे। जब भी आपको िसगरेट पीने का खयाल हो तब गहरी दिस सांस ले.तीनो जडो को कूट पीस कर महीन छान ले। कढाई मे सब घी डाल कर भून ले। मावा अच्छी तरह सेक कर इसमे िमला दिे। िमशी की चाशनी बना कर इसमे चूणर िमला हु आ मावा डाल कर गरम करे। िफर इस चूणर को डालकर भून ले। मावा अच्छी तरह सेक कर लौग. मावा 450 गाम. िजतनी दिेर िनकोिटन से रुकती है. 200-200 गाम। िविध. छोटे गोखरु. इलायची आिदि।पांचो को पीस कर डाल दिे। िकशिमश व कतरी हु ई बादिाम डालकर घी का हाथ लग थाली मे फैला कर बफी जमा ले। 20-20 गाम वजन की बफी काट कर बनी मे भर रख ले। से व न िविध. तो उसे छोडऩे के िलए काफी मशककत करनी पडती है। िफर आदित अच्छी हो या बुरी यह बात दिोनो के िलए लागू होती है। िकसी कायर का बार-बार िकया जाना या अभ्यास आदित का रप ले लेती है। इस आदित या अभ्यास को िवपरीत आदित दारा बदिला जा सकता है। िवज्ञान के अनुसार शरीर एक मशीन है। और उस मशीन मे आपने जो आदिते डाली है. जािवती. वो भी िबना मशककत कहते है िकसी चीज की आदित हो जाए.

तािक िजतना काबर न डाइआकसाइड की जगह थी उतनी ऑकसीजन ले ले। आपके खून मे ताजगी दिौड जाएगी। इस तरह सांस लेने की आदित आपको धीरे-धीरे डालनी होगी। साथ ही जब भी समोिकंग की इच्छा हो सौफ का सेवन भी कर सकते है। इस तरह सांस लेने की िक्रया जैसे-जैसे आपकी आदित बनती जाएगी। आपकी िसगरेट की आदित कम होती जाएगी और धीरे-धीरे छूट जाएगी। िसगरेट पीने वाले एक बात का और ध्यान रखे एक दिम िसगरेट छोडऩे की कोिशश न करे वरना आप शायदि कभी िसगरेट नही छोड पाएं गे। ऐसे करे तो पलभर मे टाइिपं ग की थकान हो जाएगी उडऩ-छू वतर मान समय मे सभी कामो के िलए कमप्यूटर का उपयोग िकया जाता है। ऐसे मे कामकाजी लोगो को लगातार कई घंटो तक कमप्यूटर पर कायर करना पडता है।कमप्यूटर पर विकरग करते समय सबसे अिधक अंगुिलयो को कायर करना पडता है। ऐसे मे सवाभािवक है िक वे थक सकती है और दिदिर भी करे। अगर आपके साथ भी यही समसया है तो ऑिफस मे या अन्य िकसी भी सथान पर कमप्यूटर विकरग करते समय ही एक छोटी एकसरसाइज करे तो आपकी अंगुिलयो का तनाव समाप हो जाएगा और आप अपना कायर अच्छे से कर सकेगे। एकसरसाइज की िविध. जोर से साँस को बाहर फेक दिे. सांस िनकालने से शुर करे। जब भी िसगरेट पीने का खयाल आए एकझेल करे.जब भी िसगरेट पीने का खयाल आए. बाहर चला जाए। िफर जोर से साँस ले.तो आपको प्रोसटेट की समसया से दिो-चार होना पड सकता है। िचिकतसा जगत मे इसे िबनायन प्रोसटेट हायपरप्लेसीया कहा जाता है। इसमे पेशाब की धीरे का रुक-रुक कर आना. करे। िफ र सांस छोडते हु ए नामर ल अवसथा मे आएं । गदिर न सीधी कर ले। इसका िनयिमत अभ्यास करे साथ ही िनमन योग औषिध को भी ले आपको िनि एश्चत लाभ िमलेगा। . तािक भीतर िजतना काबर न डाइआकसाइड है.िजससे आपको इस समसया से राहत िमल पायेगी। अि एश्वनी मुद्रिा : लंबी सांस खीचकर रोके। ठु डी को नीचे झुकाकर छाती से लगाएं । अपने गुदिा दार को िसकोडे। िजतनी दिेर कर सके.चेयर पर बैठे-बैठे ही अपने हाथो को सामने की ओर कंधे के बराबर ले आएं । दिोनो हथेली को नीचे की ओर रखते हु ए मुठी बना ले। ध्यान रहे अंगूठा अंदिर की ओर रखे। अब दिोनो हथेिलयो को घुमाइएं । दिोनो हथेिलयो को दिोनो िदिशाओं मे बारी-बारी से घुमाएं । सांस सामान्य रखे।यह अभ्यास पांचपांच िमिनट तक िदिन मे कई बार कर सकते है। इससे अंगुिलयो और हाथो को तनाव खतम हो जाएगा। ये है बढे हु ए प्रोसटे ट की समसया को िमटाने वाले कु छ कु दिरती नुस खे यिदि आपकी उम पचास को पार कर गयी है . गहरी दिस सांस ले। और सांस लेने से शुर मत करे.रात मे बार-बार पेशाब जाना और पेशाब को न रोक पाना जैसे लक्षण उतपन होते है। हम आपको एक ऐसा उपाय बताते है .

3 गाम. मकका की जटा की भसम .चबीयुक्ति पदिाथो ं का सेवन बंदि कर दिे। मांस खाने से भी परहेज करे। .अलसी को िमकसर मे चलाकर पावडर बनाले । यह पावडर 20 गाम की माता मे पानी मे घोलकर िदिन मे दिो बार पीये। बहु त लभदिायक उपचार है। .काली तुलसी के जड का चूणर .लगातार लंबे समय पर कायर न करे। थोडी-थोडी दिेर मे शरीर और िदिमाग को िवशाम अवश्य दिे। . प्रात: सायं गाय के दिध ू साथ 2 से 3 माह दिे और लाभ दिेखे। .िवटािमन सी का प्रयोग रक्ति निलयो के अच्छे सवासथय के िलये जररी है। 500 एम जी की 3 गोली प्रितिदिन लेना िहतकर माना गया है। .3-4 िलटर पानी पीने की आदित डाले। लेिकन शाम को 6 बजे बादि जरुरत मुतािबक ही पानी पीएं तािक रात को बार बार पेशाब के िलये न उठना पडे। ..िदिन की शुरुआत योग.सोयाबीन मे फायटोएसटोजीन्स होते है जो शरीर मे टेसटोसटरोन का लेिवल कम करते है। रोज 30 गाम सोयाबीन के बीज गलाकर खाना लाभदिायक उपचार है। .चाय और काफी मे केिफन ततव पाया जाता है। केिफन मूताशय की गीवा को कठोर करता है और प्रोसटेट रोगी की तकलीफ बढा दिेता है। इसिलये केिफन ततव वाली चीजे इसतेमाल न करे। ये फं डू िटप्स अपनाएं और तनाव को भूल जाएं बहु त अिधक विकरग प्रेशर के कारण ऑिफस या विकरग प्लेस पर ही नही। मानिसक अशांित घर तक पीछा नही छोडती। इसका बुरा प्रभाव घर के िरश्तो पर भी पडता है। इससे बचने के िलए संयिमत िदिनचयार की योजना बनाने से िदिनभर के कायर के बादि भी िदिमाग शांत ही रहेगा और पािरवािरक िरश्ते हमेशा खुिशयां दिेने वाले ही रहेगे। सवसथ और िनरोगी शरीर के िलए आवश्यक है िक आप िदिमाग शांित और सुकुन महसूस करे। परंतु आज के दिौर मे िदिमाग को शांित िमलना लगभग असंभव सा ही है। िफर भी प्रयतन करने पर आप कुछ हदि तक मानिसक तनाव को दिरू कर सकते है.कद ू मे िजन्क पाया जाता है जो इस रोग मे लाभदिायक है। कद ू के बीज की िगरी िनकालकर तवे पर सेक ले। इसे िमकसर मे पीसकर पावडर बनाले। यह चूणर 20 से 30 गाम की माता मे िनतय पानी के साथ लेने से प्रोसटेट िसकुडकर मूत खुलासा होने लगता है। .3 गाम .हर साल प्रोसटेट की जांच कराते रहे तािक रोग को प्रारंिभक हालत मे ही पकडा जा सके। . ध्यान से आिदि से करे। .अपने जीवन साथी या अिववािहत अपने प्रेमी के साथ कुछ समय प्रितिदिन अवश्य िबताएं । . वयायाम.

इसिलए अच्छे िमतो के साथ समय िबताएं । .खाना-पीना समय पर करे। . एक-एक कायर िनपटाएं । . थोडा समय संगीत के िलए भी िनकाले। .एक साथ कई कायर करने मे उलझे.िकसी भी तरह की िचंता िमतो के पलभर के साथ से ही दिरू हो जाती है.शांत संगीत मन को सुकून दिेता है.कायर को समय पर पूरा करे और योजना बनाकर कायर करे। .मानिसक तनाव की सबसे बडी वजह होती है पैसा। पैसे जुडी समसयाओं जलदि से जलदि सुलझा ले। . गाम कैि एलसयम िमल जाता है। िवटािमन ए और सी भी मेथी मे खूब रहता है। ये दिोनो िवटािमन मेथी दिानो की तुलना मे मेथी की सबजी मे ज्यादिा होते है। साधारण मेथी चमपा व कसूरी मेथी। मेथी व मेथी दिाना डाइिबटीज रोिगयो के िलए बहु त अिधक लाभदिायक है। यिदि िदिनभर मे 25 से 100 गाम तक मेथी दिाने िकसी भी रप मे सेवन कर िलया जाए तो रक्ति शुगर की माता के साथ बढा हु आ कोलेसटर ोल भी धीरे-धीरे कम होने लगता है। रोगी राहत महसूस करता रहता है। पीसे हु ए मेथी दिाने 50 से 60 गाम माता को एक ग्लास पानी मे िभगो दिे। 12 घंटे बादि छानकर पीएं । इस तरह से सुबह-शाम रोज दिो बार पीते रहने से मधुमेह मे आराम िमलता है। इसके अलावा मेथी के पतो की सबजी भी खाएं । ..प्रितिदिन कम से कम 6-8 घंटे की सुकुन की नीदि अवश्य ले। मे थ ीदिाने का अनोखा प्रयोग कर दिे ग ा कोले स टर ोल व डाइिबटीज दि रू आयुवेदि के अनुसार डाइिबटीज व मधुमेह मे मेथी का सेवन बहु त लाभदिायक माना गया है। मेथी को भारतभर मे आमतौर पर सेवन िकया जाता है। यिदि मेथी की सबजी लोहे की कढाही मे बनायी गई तो इसमे लौह ततव ज्यादिा बढ जाती है। एनीिमया यानी खून की कमी के रोिगयो को यह बहु त फायदिेमंदि है। िकसी भी वयिक्ति की कैि एलसयम की िदिनभर की जररत 400 िम.

दिस िमनट का ये प्रयोग कर ले गे तो चे ह रा चमकने लगे ग ा यिदि आप मानिसक तनाव महसूस करते है। िनराशा.धीरे वापस शवासन मे आ जाएं । अब शवासन मे शरीर को िशिथल अवसथा मे आ जाएं । आसन करते समय आं खो को खुला रखे। सावधािनयां. हताशा एवं िचंताएं आिदि समसयाएं सताती रहती है. तो प्रितिदिन योगासन करे। योगासन मन को शांित दिेता और सवासथय के िलए भी लाभदिायक रहता है। साथ ही योग से आं खो की रोशनी और चेहरे की चमक भी बढती है। सवारगासन आं खो और चेहरे के िलए काफी फायदिेमंदि है। सवारग ासन की िविध .कसी सुिवधाजनक सथान पर कंबल या दिरी िबछाकर शवासन मे लेट जाएं । अपने दिोनो हाथो को जांघो की बगल मे तथा हथेिलयो को जमीन पर रखे। पैरो को घुटनो से मोडकर ऊपर उठाइएं तथा पीठ को कंधो तक उठाइएं । दिोनो हाथ कमर के नीचे रखकर शरीर के उठे हु ए भाग को सहारा दिीिजएं । इस तरह ठु डी को छाती से लगाए रखे। अब सांस को रोके नही सवाभािवक रप से चलने दिे। यथाशिक्ति पैर और धड को एक सीध मे रखे। इस ि एसथित मे रुकने के बादिए पैरो को जमीन पर वापस ले आएं । पैरो को घुटनो से मोडते हु ए घुटनो को माथे के पास ले आएं । हाथो को जमीन रखते हु ये शरीर और पैरो को धीरे.जलदिबाजी एवं हडबडाहट मे यह आसन न करे। इस आसन का अभ्यास पीठ दिदिर ए कमर दिदिर ए नेत रोगी और उच्च रक्तिचाप के रोगी ने करे। लाभ.इसके िनयिमत अभ्यास से मानिसक तनावए िनराशाए हताशा एवं िचंताएं आिदि रोगो का नाश होता है। इससे आं खो का तेज बढता है और चेहरा कांितमय बनता है। िसयो के सवासथ मे इस आसन से िवशेष लाभ होता है । िसयो की मािसक धमर से जुडी बीमािरयो मे राहत िमलती है। सवारगासन से शरीर के उन अंगो से रक्ति संचार होने लगता है जहां रक्ति संचार कम होता है। शरीर का प्रतयेक अंग सवसथ हो जाता है। इस आसन के प्रभाव से चेहरे पर झाइयां नही पडती है। लमबी उम तक चेहरे पर चमक बनी रहती है। समय से पूवर बाल सफेदि नही होते है। नेत ज्योित अंत तक बनी रहती है। इस आसन के करने से मानिसक तनाव दिरू होता है। क्रोध और िचडिचडा़़पन दिरू होता है। बच्चो के बौिद्धक िवकास मे यह आसन िवशेष लाभदिायक है। इसके करने से मानिसक और आध्याि एतमक शिक्तियां जागत होती है तथा सतोगुण की वृद्धिद्ध होती है। .

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