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Hindi Soham Vol1 Issue32

Hindi Soham Vol1 Issue32

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Published by M K Mishra
Tanuja Thakur spiritual discourses news letter
Tanuja Thakur spiritual discourses news letter

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Published by: M K Mishra on May 11, 2013
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05/11/2013

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1

सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२







सभी वाचक|को द|पावल|क| हाÍद क श

भकामनाय


लेख|के लेख|के लेख|के लेख|के म

Eय म

Eय म

Eय म

Eय शीष क शीष क शीष क शीष क: :: :
१ ११ १. .. . स

वचन स

वचन स

वचन स

वचन
२ २२ २. .. . गु³ गु³ गु³ गु³ सं1मरण सं1मरण सं1मरण सं1मरण
३ ३३ ३. .. . सग

ण ग

³के सग

ण ग

³के सग

ण ग

³के सग

ण ग

³के Îन Îन Îन Îनग

ण ग

ण ग

ण ग

ण Îनराले मा²यम भाग Îनराले मा²यम भाग Îनराले मा²यम भाग Îनराले मा²यम भाग
४ ४४ ४. . . . स

+म स

+म स

+म स

+म जगत जगत जगत जगत
५ ५५ ५. .. . साधक साधक साधक साधक Íकसे Íकसे Íकसे Íकसे कहते कहते कहते कहते ह ह ह ह
सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं
साधकïव व

Í@ हे तु सा साधकïव व

Í@ हे तु सा साधकïव व

Í@ हे तु सा साधकïव व

Í@ हे तु साBाÍह BाÍह BाÍह BाÍहक आ²यािcमक पͳका क आ²यािcमक पͳका क आ²यािcमक पͳका क आ²यािcमक पͳका
ईमेल ईमेल ईमेल ईमेल: : : : soham@vedicupasana.com | www.vedicupasana.com
संपक संपक संपक संपक : ९९९९८६१९०८
«लॉग «लॉग «लॉग «लॉग – www.tanujathakur.com
|| ÷ी गणे शाय नमः ||
|| ÷ी गु रवे नमः ||



2

सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
६ ६६ ६. . . . साधक|क| अन



Îतयां साधक|क| अन



Îतयां साधक|क| अन



Îतयां साधक|क| अन



Îतयां
७ ७७ ७. .. . dत dत dत dत – –– – cयोहार cयोहार cयोहार cयोहार
८ ८८ ८. .. . धम या³ाक| Fपरे खा धम या³ाक| Fपरे खा धम या³ाक| Fपरे खा धम या³ाक| Fपरे खा


१ ११ १. .. . स

वचन स

वचन स

वचन स

वचन

अ अअ अ. .. . ÷ीगु ³ उवाच ÷ीगु ³ उवाच ÷ीगु ³ उवाच ÷ीगु ³ उवाच : : : :


परम पू7य डॉ परम पू7य डॉ परम पू7य डॉ परम पू7य डॉ. . . . जयंत बालाजी आठवले जयंत बालाजी आठवले जयंत बालाजी आठवले जयंत बालाजी आठवले

अ²याcमम गु³9ाÎB होना अथा त Îश*य पद 9ाB करना है, यह आ²यािcमक या³ाका एक महcवपू ण चरण
है | Îश*य होने के प°ात गु ³क| सव आ7ाका पालन कर , ऐसा लगता है | आ7ापालन होनेके कारण मन
एवं बु Í@के लयक| 9ÍHयाको गÎत Îमलती है | फल1वFप अ7य कोई भी साधनामाग क| अपे Hा मनोलय
और बुÍ@लय शीU होनेके कारण, Îश*य, सं त पदपर शीU आसीन होता है | गु³ Îश*यके Fपम 1वीकार
कर इस हे तु पहले से ह| आ7ापालनक| 9व

Íô चाÍहए | इसÎलए अपने माग दश क, उôरदायी साधक
इcयाÍदके आ7ाका पालन करनेक| आदत डालनी पडती है |
- परम पू 7य डॉ. जयं त बालाजी आठवले



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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२


आ आआ आ. .. . शाU वचन शाU वचन शाU वचन शाU वचन
चा³ो धम| 9याÍददे वात् 9व

ô: ।
प°ात् अ7ये शेषभू ता° धमा : ।
- महाभारत १२.६४.२१

अथ : परमे +रने सव 9थम राजधम 9ÎतपाÍदत Íकया व तcप°ात धम क| अ7य सं Íहताएं सि+मÎलत क|ं |


इ इइ इ. .. . धम धारा धम धारा धम धारा धम धारा

- द|पावल| सािïवक प@Îतसे मनाने हे तु 4या करना टाल ?
१. मोमबôी तमोगु णी होती है अतः मोमबôीके 1थानपर शु@ घीके या तेलके Îम§ीके Íदए जलाएं |
२. Çयू नी ब~बसे सजावटक| अपेHा द|प|क| लडीसे घरको सजाएं , द|प सािïवक होता है और Íबजल|के ब~बम दे वcवको
आक

8 करनेक| रôी भर भी Hमता नह|ं होती, उसके Íवपर|त उससे काल| शÍñ 9HेÍपत होती है जो स+पू ण वा1तुको
अपÍव³ कर ल+मीके 9वेशको विज त करती है |
३. रं गोल|, तोरण, दे सी फू ल जैसे ग दा, के लेके 1त+भ जैसे सािïवक चीज|से
घरके §ारको सजाएं , इससे ल+मीका 9वेश सहज होता है | नकल| फू ल, कागजके फू लसे सजावट करना टाल |
४. जहां तक हो सके पटाख न छोड इससे वातारणम तमोगुणका 9माण तो बढता है ह|, अÎन8 शÍñ वातारणम आक

8
होकर काल| शÍñ 9Hे Íपत कर वातावरणको तमोगु णी बनाकर ल+मीका 9वेश विज त करती है | साथ ह| पै से भी ¯यथ
जाते ह |
५. बाहरक| Îमठाइय|क| अपेHा घरम पकवान बनाय और बाट |
६. शु भकामना प³ दे नेक| अपेHा मु हं से बोलकर शु भकामनाएं द , उससे शु भकामनाएं फÎलत भी होती ह और 9ेम बढता है
|
७. उपहारम सािïवक उपहार द जै से Íकसी सं तके आ÷मसे 07थ एवं अ7य पू जा साÍहcय इcयाÍद लाकर बाट |
८. नये सािïवक भारतीय परं परा अनुसार पÍरधान धारण कर इससे भी दे वताका तïव आक

8 होता है | काले वU कमसे
कम शु भÍदनम न पहन |


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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
९. म²यराͳ तक एक द|प घरके सामने और एक द|प घरके Íपछवाडे जल रहा हो यह ²यान रख इससे ल+मीका 9वे श
सु गमतासे होता है |
१० ल+मी पूजन कर भावपू ण आरती कर घरम द|प 977वलन आर+भ कर , आनेवाले काल अcयंत Íवकट है अतः मां
ल+मीसे 9ाथ ना कर Íक उनक| क

पा हम सबपर और राçपर बनी रहे | यÍद ल+मी गणेशक| Îम§ीक| मूÎत क| 1थापना
करते ह तो Íपछले वष क| गणेश-ल+मीको अगले Íदन Íवसिज त करना न भू ल |
११. ल+मीके Îच³युñ पठाखेका Íवरोध कर |
१२ . Îमठाईके Íड«बे म आये गणेश या ल+मीके Îच³ को, शु भकामना प³म गणेश-ल+मीके Îच³को क

डे दानम न फ के उसे
जल समाÎध या अि¹न समाÎध द |




• हमारे दे व1थान|के धनका सह| सदु पयोग होना चाÍहए !
िजतना धन हमारे दे व1थान|म है यÍद उनका सह| सदु पयोग Íकया जाए तो भारत के ९५ करोड Íह7दु ओंको धम ÎशHण
अcयं त सहजतासे Îमल सकता है , 9cये क 0ामम एक सं1क

त Íव²ालय खु ल सकता है , एक गौशाला खु ल सकती है , एक
गु³क

ल हो सकता है | ऐसा करनेसे वैÍदक सं1क

Îतका पोषण होगा, Íह7दु ओंम धमाÎभमान जाग

त होगा और धमाÎभमानी,
जाग

त Íह7दु कभी भी इस ÷े8 धम को छोडकर Íकसी अ7य धम और पं थम धमातÍरत नह|ं होगा ! परं तु मंÍदरके
कोषा²यH और कता -धता को ह| इस बातका महïव पता नह|ं ! अतः इस कालको कÎलयु ग कहते ह ! उ7ह यह समझम
नह|ं आता Íक धम ÎशHण नह|ं दे नेके कारण आज इतनी धम ¹लाÎन ह

ई है और चह

ं ओर ³ाÍहमांक| ि1थÎत ¯याB हो गयी
है | जब धम पर आघात होगा तो धम 1थलपर भी होगा और जब धम 1थल ह| नह|ं रह गे तो धम 1थलका धन कहां
सुरÍHत रह पाएगा !! इÎतहास इस त³यका साHी है Íक दु राचार| आHमणकाÍरय|ने Íकस 9कार Íहं दु ओंके धम 1थलको
कñगाहम पÍरवÎत त कर Íदया !!

• 95 करोड़ Íह7दु ओं को धम ÎशHण दे ना, यह सरकारका काय था; पर7तु उ7ह अपने Îलए ि1वस ब कम पै से एकͳत
करनेसे और अ7य धÎम य|के तुÍ8करणसे ह| समय नह|ं Îमलता ; अतः अब हम सभी Íह7दु ओंको ह| पहल कर
धम क| सीख दे नी होगी !!



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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
• Íहं दु ओंके आ²यािcमक ÍदवाÎलयापनक| एक झलक -
एक ओर ल+मी मांके Îच³ या मू Îत क| पू जा करते ह और दू सर| ओर ल+मी मां के Fपवाले Îच³के पटाखे छोड
उनके 1वFपके Îचथडे उडाते ह , एक ओर गणेशजीक| पू जा करते ह दू सर| ओर गणेशजीके Îच³वाले Îमठाईके
Íड«बेक| Îमठाई समाB होनेपर उसे गणेशजीके Îच³के साथ कचरे के Íड«बे म डाल दे ते ह !! एक ओर पूजा और
एक ओर अनादर वाह रे ! Íह7दु ओंका धम 9ेम ! और ऐसा कर कहते ह पता नह|ं हमपर ल+मी और गणेशक|


पा 4य| नह|ं हो रह| है !

• Íद~ल| म एक िज7ासु मुझसे Îमलने आए, उ7ह|ने ‘उपासना’ के एक साधकके बारे म बताया Íक म तो उ7ह
अनेक वष से जानती ह

ं ; परं तु Íपछले आठ मह|नेसे, अथा त जबसे वे आपके साथ जु डे ह म उनम अcयÎधक
पÍरवत न दे ख रह| ह

ं , वे अcयÎधक नH हो गए ह और उनके चेहरे म चमक और आनंद Íदखने लगा है ! ऐसे ह|
मुंबईके एक साधकके बारे म एक िज7ासु ने मुझसे कहा ! जब आपके आस-पासके ¯यÍñ आपम ह

ए पÍरवत नको
बताने लग तो समझ साधना सह| Íदशाम हो रह| है ! और मु झे भी आनं द आया सु नकर Íक ‘उपासना’ के
साधकक| साधनाक| Íदशाको समाज भी अनु भव करने लगा है !

• पूव कालम कलाकार दे वी-दे वता, सं त -गु³क| अराधना कर अपनी कलाका 9दश न Íकया करते थे | आज ि1थÎत
पूण त: Íवपर|त है | आजके कलाकारके पास साधना और भावका आधार न होनेके कारण न ह| वे ¯यासपीठक|
गÍरमाको बनाए रखते ह न कलाक| ! कोई सं तक| वाणीका उपहास करता है, तो कोई संत|का, कोई धम शाU|का
तो कोई दे वी दे वताका, तो कोई राç²वज और राçगीतका ! आजके अÎधकां श कलाकारसे रज-तमके 1पंदन आते
है , यश और धन पाने हे तु वे ओछ|से ओछ| और घ

Íणत क

Îत करते ह ! ऐसे कलाकारको मां सर1वती§ारा अगले
ज7मम मूक, बÎधर, मानÎसक Fपसे ÍवÍHB होनेका अÎभशाप Îमलता है और वे इसीके पा³ भी होते ह ! Íह7दु
राçम कोई इस 9कारक| ध

8ता करने क| क~पना भी नह|ं करे गा अतः Íह7दू राçक| 1थापना सभी सम1याओंका
एक मा³ उपाय है ! जयतु जयतु Íह7दु राçम् ।

• हमारे वै Íदक सं 1क

Îतम पा³ दे खकर उ7ह मं ³ Íदया जाता था या वेद पढनेका अÎधकार Íदया जाता था; परं तु आज
ि1थÎत Íवपर|त है | एक दे सी कहावत है ‘सब धान बाईस पसेर|’ अथा त मोटे और मह|न धान, सबको एक समान
मोल लगाना अयो¹य है | कÎलयु गी गु³ Íबना पा³ता दे खे सभीको गाय³ी मं³ या ‘ॐ’ जपने का अÎधकार दे
डालते ह तो कभी सभीको वेदपठन करनेका !!५०% अ²यािcमक 1तरसे कम 1तरका ¯यÍñ यÍद गाय³ी मं³ या
ॐ का जप करे तो इसे उस मं ³क| शÍñ सहन नह|ं होती और अHत हो सकता है , और ६०% आ²यािcमक
1तरके नीचेका ¯यÍñ यÍद वेदपठन करे तो उसे उसका भावाथ समझम नह|ं आता अÍपतु वेदपठनसे उसके अहं क|


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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२


Í@ होती है ; परं तु कÎलयु गी गु³के Îलए सब धान बाईस पसेर| है और ऐसे गु³ओंके पास अयो¹य भñ|क| भरमार
हो जाने पर उनका अहं सातव आसमानको छू लेता है ! जो धम और अ²याcमशाUके Íव³@ धमा चरण Îसखाये वे
सं त कभी हो सकते ह 4या? परं तु आजके Íहं दु उ7ह अपना आरा²य मान लेते ह | अतः Íहं दु ओंको सू +मका 7ान
दे ना, यो¹य साधना बताना और अ²याcम शाU सीखाना परम आव°यक है !

• िजतनी साधना तीd होती है और िजतना अÎधक अहं कार होता है म

cयु उपरां त उस जीवाcमाको उतनी ह|
शÍñशाल| अÎन8 योÎन 9ाB होती है | सीधा समीकरण समझ ल साधना + अहं कार = असुर ! अतः साधकने
सु नने और सीखने क| व

Íô को आcमसात करना चाÍहए एवं सतक तासे 1वभाव दोष Îनमू लन एवं अहं Îनमू लन
हे तु सातcयसे 9यास करने चाÍहए |

• क

छ Íदन पू व एक ¯यÍñका हमार| सं 1थाके कायालयके दू रभाषम एक सु झाव आया Íक आप तनुजाको बोÎलए वे
Íहं दु ïवका राग अलापना छोड दे , तब उनसे अनेक ¯यÍñ जु ड गे और उनक| सं 1थाको अनेक Pोतसे धन भी Îमलने
लग गे !!! ऐसे ¯यÍñको म 1प8 Fपसे बताना चाह

ंगी Íक म मा³ Íहं दु तcवका राग नह|ं आलाप रह| ह

ं ! Íवशु@
Íहं दु ïवका पूरे Íव+म पु न1थापना हे तु सं कलब@ ह

ं ! और मा³ Íहं दु ïव आधाÍरत आं दोलन ह| यश1वी होता है
इÎतहास इसका साHी है , म मा³ ‘जय ÷ी राम’ का जयघोष नह|ं Îसखाती ह

ं अÍपतु 9cये क जीव मा³म
आcमÎनयं³णक| 9ÍHया सा²य होकर उसके अं दर रामरा7य 1थाÍपत हो इस हे तु 9यासरत ह

ं और यह वसुं धरा
भोगभू Îम नह|ं अÍपतु पूव वत साधना भूÎम बने इस हे तु सं क~प ब@ ह

ं ! और रह| बात धनक| तो म िजस
'अ¯यु त' के धरोहरक| संरHण हे तु काय रत ह

ं उनक| 9ाणÍ9या महाल+मी है ऐसेम इस काय हेतु धनक| कभी कमी
हो सकती है 4या ?

• मु झसे एक ¯यÍñने क

छ Íदन पू व कहा " आप इतना कडक Îलखती ह आपसे सब नह|ं जु ड पाएं गे !" म ने कहा, “
कोई बात नह|ं , शेर|क| टोल| बनाने Îनकल| ह

ं और िजनम Hा³व

Íô होगी वे मु झसे जु ड गे ह| | मेमने तो ऐसे
भी कोई कामके नह|ं होते । उनका उपयोग मा³ बÎलके Îलए Íकया जाता है और आनेवाले भीषण कालम ये सब
मेमने ( डरपोक और तथाकÎथत धम ÎनरपेH Íह7दु ) कालचHक| बÎल चढ जाएं गे ” !


• इसे इस दे शक| Íवड+बना ह| कह Íक इस दे शके अनेक Íहं दु ïववाद| नेताक| Íहं दु ïव और अ²याcमम पकड शू7य
बराबर है ; अतः कई बार उनके वñ¯य उनके Íह7दु होने पर भी 9÷Îच7ह Îनमा ण कर दे ते ह , Íहं दु ïववाद| होना तो
बह

त दू रक| बात हो गयी ! !


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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
÷ीयुत राम जेठमलानीजीका कहना है Íक मयादा पु³षोôम 9भु ÷ी राम एक अयो¹य पÎत थे !! आईए जाने उनका
यह वñ¯य अयो¹य 4य| है ?
१. िजस 9भु ÷ीरामको सं त| और 58ा ऋÍषयोने मयादा पु ³षोôम कहा है , उनके पÎतके होनेक| यो¹य पा³तापर 9÷Îच7ह
Îनमा ण करना Íहं दु ïवका अपमान है, सं त|का अपमान है और 9भु ÷ीराम Fपी अवतारका अपमान है !
२. उस कालम जब राजाओंम बह

पõी 9था 9चÎलत थी, 9भु ÷ीराम आजीवन एक पõीdत रहे !
३. जब राजसू य य7के समय सीता माता नह|ं Íव²मान थीं और य7 हे तु एक सहधÎम णीक| आव°यकता थी तब उ7ह|ने
सीता माताके 1थानपर उनक| सोनेक| 9Îतमाक| 1थापना कर राजसू य य7 Íकए |
४. जब तक सीता माता अपने पÎतसे दू र वनम रह|ं तब तक 9भु ÷ीराम सीता माता समान सभी ऐ+य का cयाग कर
नीचे भूÎमपर सोते थे और कं द-मू ल खाते थे !
५. जब सीता माताने भू Îम समाÎध ले ल| तब 9भु ÷ीरामने सरयू नद|म जाकर जल समाÎध ले ल| |
६.क

छके मनम यह 9÷ यह उठता है Íक इतने पõीdत थे तो उ7ह|ने गभ वती सीता माताका पÍरcयाग 4य| Íकया ?
जब कोई ¯यÍñ साव जÎनक पद सं भालता है और वह भी पद यÍद एक राजाका हो तब रा7यम सु¯यव1था रहे यह
²यान रखना, उनका 9थम धम है , इस हे तु उनके सारे 9यõ होने चाÍहए और यह उस ¯यÍñ Íवशेषके नै Îतक कत ¯य ह !
9भु ÷ीरामने सोचा Íक यÍद एक भी 9जाके मनम उनक| पõीके 9Îत सं शय उभरा तो रा7यम काना-फू सी बढे गी और साथ
ह| अराजकता भी फै लेगी ; अतः समÍ8 Íहताथ धम का पालन करते ह

ए अपने (दयपर पcथर रख अपनी 9ाणÍ9याको
अपनेसे अलग कर Íवयोगका Íवषपान Íकया | उनक| इस 7यायÍ9यता और cयागके कारण सीता माताके समाÎध लेने के
प°ात, उ7ह|ने भी जल समाÎध ल| और उनके साथ सभी अयो²यावाÎसय|ने भी जल समाÎध ल| थी ! है 4या आजके कोई
रा7यकता म यह साम³य !!
सीता माताको अलग करनेका एक आ²यािcमक कारण भी था मां सीता 9भु ÷ीरामको अपने गु³ 1वFपम दे खती थी
(भारतीय सं1क

Îतम पÎत-पõीम गु³-Îश*यका संबंध होता था ) और 9भु ÷ी राम उ7ह §ै तसे अ§ै तम ले जाना चाहते थे
अथा त 9cये क जीवम ñHके दश न ह| इसÎलए उ7ह|ने यह क

Îत क| | ²यान रहे गु³ यÍद अपने यो¹य Îश*यको अपने
1थू ल 1वFपसे दू र कर दे ते है तो भी उनका वे ²यान रखनेका साम³य रखते ह , सीता माताको ग

ह cयागके प°ात उ¯च
कोÍटके सं तका साि7न²य 9ाB ह

आ इससे उनक| आगेक| आ²यािcमक 9गÎत ह

ई !
आजके Îनक

8 रा7यकता अपने सु ख और 1व इ¯छापू Îत को 9धानता दे ते ह वह|ं 9भु ÷ी रामने 9जाक| इ¯छा और
सुरा7यको 9धानता द| और १४००० वष प

³वीपर रा7य नह|ं सुरा7य Íकए !! इससे ह| उनके ¯यÍñïवक| ÷े8ता Îस@
होती है !
७. सीता मातासे रामजीने अि¹न पर|Hा इसÎलए करवाई 4य|Íक वे रामक| शÍñ थीं और वनवासम रावण§ारा हरणसे पहले
अि¹नम अपने Îनज 1वFपको Íवल|न कर Îलया था और रावण, मा³ उनक| छायाका हरण कर पाया था ! अि¹न
पर|Hा§ारा सीता माताने पु नः अपने Îनज 1वFपको 9ाB कर Îलया !



8

सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
८. सीता माताने भूÎम समाÎध 4य| ल| ?
सीता माताका ज7म भूÎमके ÍहरÞयगभ लहÍरय|के घनीभू त होनेके कारण ह

आ था और जो िजस 1वFपसे 9कट होता वह
काय पू ण होनेपर उसी मू ल 1वFपम Íवल|न हो जाता है यह 9क

Îतका Íवधान है , सीता माता भूÎम समाÎधके मा²यमसे
पु नः प

³वीम समाÍहत हो ग( !
इन सब त³य|का अ²ययन Íकए Íबना 9भु ÷ीरामको बु रा पÎत कहना कहां तक यो¹य है यह ÷ी रामजेठमलानीको कोई
बताए !
( इन सब त³य|का आधार हमारे ÷ीगु³ §ारा ÎलÍखत एवं सनातन सं1था§ारा 9काÎशत 0ंथ ‘÷ीराम’ है ! )



ई ईई ई. .. . दे व 1तुÎत दे व 1तुÎत दे व 1तुÎत दे व 1तुÎत
य³ य³ रघु नाथ क|त नं
त³ त³ क

तम1तका¯जÎलम् |
भा*पवाÍर पÍरपूण लोचनं
मा³Îतं नमत राHसा7तकम् ||
असुर|का दलन करने वाले उन हनु मानको वं दन जो जहां भी 9भु ÷ी रामक| 1तु Îत होती वहां ने³|म भावा÷ु Îलए, पूण
शरणागत भाव से , उपि1थत रहते ह !

उ उउ उ. .. . अम

तवाणी अम

तवाणी अम

तवाणी अम

तवाणी

इ¯छाओंका कोई अंत नह|ं | सं तोषक| 9व

Íô आनंद| रहनेका एकमा³ उपाय है | अतः सं तुÍ8को अपनाएं ! – 1वामी
Îशवान7द



9

सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
२ २२ २. .. . ग

³ सं1मरण ग

³ सं1मरण ग

³ सं1मरण ग

³ सं1मरण
और ÷ीगु ³ और ÷ीगु ³ और ÷ीगु ³ और ÷ीगु ³ने ने ने ने अंÎतम Íवदाईके समय नह|ं Íदये दश न अंÎतम Íवदाईके समय नह|ं Íदये दश न अंÎतम Íवदाईके समय नह|ं Íदये दश न अंÎतम Íवदाईके समय नह|ं Íदये दश न
जनवर| २००८ से ह| मुझे एकांतम और मौनम रहना है, इसक| इ¯छा बलवती होती चल| गयी | उस समय म सनातनके
गोवा आ÷मम थी और वहां दो सौ साधक रहते थे और ई+र जाने उस समयसे साधनाका कौन सा चरण आरं भ ह

आ था
Íक मु झे एकां तम रहने Îमले और कोई मुझसे बात न कर और न ह| मेर| एकां तताका Hम टूटे यह लगने लगा | जब भी
म कमरे म एकां त रहती तो म एक ÍवÎच³ आनं द और अͧतीय एवं ÍवलHण भावक| अनु भूÎत लेती थी | जब भी Íकसी
एकांत 1थानम जानेका Íवचार आता तो मेरे ने³पटलके सामने वत मान समयम म जहां रह रह| ह

ं वह T°य मेरे सामने
आ जाता | म सोचती यह मेरे मनका Hम है 4य|Íक म कभी गांवम रह| ह| नह|ं थी और Íपताके पै त

क Îनवास जहांक|
मु झे छÍव Íदखती थी वहांक| पÍरि1थÎत ऐसी थी Íक म रह ह| नह|ं सकती थी और म अपने ÷ीगु ³का आ÷म छोडकर
जानेक| क~पना मा³से Îसहर उठती थी | सू +म यु@क| तीdता अपने चरमपर थी, मेर| 9ाणशÍñ 7यू न थी और म
अcयÎधक कÍठनाईसे मा³ 1नान कर पाती थी और उसीम थक जाती थी और अÎधकां श समय सोयी रहती थी | ऐसेम
एक ऐसे 1थानपर जाना जहां न Íबजल| हो, न रहनेक| और सोनेक| कोई ¯यव1था हो, वहांका Íवचार आनेपर म डर जाती
थी और अपने मनसे उस Íवचारको Îनकालनेका 9यास करती | चार मह|ने, एक ÍवÎच³सा §ं § चलता रहा, और एक Íदन
अचानक ÷ीगु³का आदे श ह

आ Íक तनुजाको अपनी ¯यÍ8 साधनाम ²यान दे ने हे तु अपने घर जानेके Îलए कहो वह भी
तुरं त | उनका यह आदे श सु न म हथ9भ रह गयी, क

छ Hणके Îलए सोचने लगी कहां जाऊं और 4या कFँ | परं तु अपने
मनको सं भाला और आ÷मसे अगले Íदन सव 9थम अपनी छोट| बहनके घर, मुंबई जाने का Îन°य कर Îनकलनेका
Îनयोजन Íकया | आ÷मसे Îनकलते समय म ने आ÷म ¯यव1थापनसे अनुरोध Íकया Íक मु झे एक बार ÷ीगु³से Îमलने द ,
मु झे मा³ उनके एक झलक दश न कर लेने द , परं तु उ7ह|ने हामी नह|ं भर| | यह 9÷ मनम था Íक ऐसा तो कोई
महापाप नह|ं Íकया वे मु झे जाते समय अपने दश नसे भी वं Îचत रख ! म ने सोचा कोई बात नह|ं एक मह|नेम वे पु नः तो
बुला ह| लगे और म अपनी ¯यÍ8 साधनापर और अÎधक ²यान दे ने लगी; परं तु धीरे –धीरे मह|ने और एक वष बीत गया
और मु झे वहांसे बु लावा नह|ं आया, इसके Íवपर|त मु झे 1वतं³ Fपसे गु³ काय एवं धम काय करना है यह Íवचार 9बल
होता गया | म ने सदै व ई+रसे एक ह| 9ाथ ना क| है Íक जो आपके मनम वह| म कFं और जो मे रे मनम हो वह कभी
फÎलत न हो 4य|Íक अ²याcमम साधकने अपने मनके अनुसार नह|ं ई+रक| इ¯छा अनुसार वत न करना चाÍहए तभी
उसपर ई+रक| क

पा होती है और इस 9कार उनक| इ¯छा अनुFप म ने ‘उपासना Íह7दु धम|ïथान सं1थान’ क| पौष क

*ण
षÍ8 अथा त २६ Íदसंबर २०१० म 1थापना क| और गु³काय करने लगी |


10

सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
जब मुझे पता चला Íक आ÷मसे Îनकलते समय मुझे ÷ीगु³के दश न नह|ं हो सकते तो म समझ गयी Íक यह भी
÷ीगु³का ह| आदे श होगा जो साधक मु झे बताना नह|ं चाहते , म ने भार| मनसे आ÷मसे मुंबई आनेका Îनण य ले Îलया |
आ÷मसे ह| ÷ीगु³ने अपनी क

पाके संके त दे ने आरं भ कर Íदये | शार|Íरक ि1थÎत अcयÎधक दयनीय थी, म उस समय
चार घंटे लागतार बैठ भी नह|ं सकती थी; परं तु म ने तब भी Íबना आरHण çे नसे मुंबई जानेका Îन°य Íकया | म ने दो
घंटे पहले छोट| बहनको दू रभाषसे सू Îचत Íकया था Íक म उसके घर आ रह| ह

ं | जैसे ह| म ने आ÷मके बाहर अपना
पहला कदम रखा Íक उसका मेरे Hम7²वÎनपर लघुसंदे श आया, म ने तु +हारे Îलए हवाई जहाजके ÍटÍकटका आरHण करवा
कर सं गणक|य संप³(मेल ) §ारा ÍटÍकट भे ज Íदया है !!! कु छ Hण यह सु न जो साधक मु झे Íवदा करने बाहर आए थे , वे
आनंÍदत ह

ए थे और उ7ह|ने तु रं त ÍटÍकटक| 9Îत सं गणकसे Îनकाल कर मुझे द| और आ÷म ¯यव1थापनके साधकने
मु झे हवाई-अqडे तक छोडनेक| ¯यव1था कर द| !
मेर| Íवदाईके समय अ÷ामके साधक|के ने³म अ÷ु थे , सब कह रहे , “द|द| शीU वाÍपस आना” !!! दो वष प°ात मु झे
समझम आया Íक ÷ीगु ³ मुझसे मेरे आ÷म छोडते समय मु झसे 4य| नह|ं Îमले, उ7ह पता था वह मेर| आ÷मसे एक
9कारसे Íवदाई थी और मे रे मां -समान ÷ीगु³ अपनी इस पु ³ीक| Íवदाई न दे ख पाते और सं भवत: उनके ने³|म भी अ÷ु
आ जाते |
राधा और गोÍपय|के क

*णके 9Îत अन7य 9ेम होते ह

ए भी क

*णने उनका साथ सदै वके Îलए 1थूल Fपसे छोड


7दावनसे मथुरा आ गए और उ7ह अ§ै तक| अनु भूÎत दे द| ! मेरे ÷ीगु³ने मे रा 1थू लसे तो साथ छोड Íदया, परं तु आज
मु झे उनके सगुण आधारके न होते ह

ए भी उनके Îनगु ण आधारक| अखंडतासे 9चीÎत होती है | उनक| इस Íवशेष क

पाका
भास मु झ जै से एक तु¯छ भñको हो इस हे तु इस वे दना9द 9ÍHयाका अनुसरण करवाते ह

ए मुझे आनं दक| 9चीÎत द| इस
हे तु म उनक| सदै व क

त7 रह

ं गी !
मेरा और उनका 1थू ल संबं ध अब समाB होने वाला है इसके उ7ह|ने क

छ सं के त Íदये | सुदश न चे नलपर सं1थाके सcसं गका
9सारण होनेवाला था, उस समय, अ~प समयके Îलए ह| सह| म सं 1थाके ²वÎनÎच³ीकरण Íवभागम से वारत थी | माच
२००८ म उनसे क

छ पू छने उनके कमरे म गयी और म ने पू रे उcसाहसे कहा हम सब साधक उस काय Hमको यश1वी बनाने
हे तु अcयÎधक 9यास कर गे | परं तु उस समय उ7ह|ने जो सेवा म कर रह| थी उसके Îलए एक साधकको वे मुं बईके दे वद
आ÷मसे बु लानेवाले ह यह बताया | मु झे लगा सं भवतः उस साधकके आने के प°ात मुझे कोई अ7य सेवा दे द| जाएगी |


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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
उसी 9कार जनवर| २००८ म एक Íदन वे Íवभागम आए थे और मु झसे अचानक ह| पूछने लगे “इतनी शीUता 4य| है
आपको” ? म उस समय उनके इस सुवचनका भावाथ नह|ं समझ पायी मु झे लगा म ने अपने ²येयको अÎत उ¯च रखा है
और इसÎलए मु झे अÎन8 शÍñका अcयÎधक क8 हो रहा है और वे इसÎलए मु झसे यह कह रहे ह | परं तु दो वष उपरां त
पता चला Íक वे ऐसा 4य| कह रहे ह , उनका कहना था Íक इतनी शीUतासे आगे बढोगी तो भÍव*यम शीU ह| मु झसे
दू र जाना होगा !
मई २००६म एक Íदन उ7ह|ने कहा “ भÍव*यम म आपके रहने के Îलए आपको एक अलग कमरा दू ं गा आप उसम अके ले
एकांतम रह सकते ह ” | और सचम गांवम मु झे एकां तम ह| रहनेक| सं Îध Îमल जाती है |
मई २००५ म एक Íदन जब म उनसे दू रभाषपर बात कर रह| थी तब उ7ह|ने कहा था “आगे आगे आपको सब क

छ ई+र
इ¯छा अनु सार करना पडे गा” | और सच म ‘उपासना’ क| 1थापना ई+र इ¯छा अनु सार मु झे करना पडा !
इस 9कार परोH Fपसे मेरे सव 7 सÿ

³ने मुझे अपने Îनकट भÍव*यके बारे म क

छ संके त Íदये | और आज सब उनक|
इ¯छा मानकर सव कर रह| ह

ं अ7यथा मेरे ई+रको पता है म 1वतं³ Fपसे काय कभी नह|ं करना चाहती थी, म अपने
÷ीगु³क| छ³छायाम सुरÍHत और आनंÍदत थी !





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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
३ ३३ ३. सग

ण ग

³के सग

ण ग

³के सग

ण ग

³के सग

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³के Îन Îन Îन Îनग

ण ग

ण ग

ण ग

ण Îनराले मा²यम Îनराले मा²यम Îनराले मा²यम Îनराले मा²यम
Îसत+बर २००७ म मेरा 1थानां तरण हो गया था और गु³ आ7ा अनुसार म मुंबई आ÷मसे गोवा आ÷म जा रह| थी मेरे
पास सामान अÎधक था छोटे -बडे क

ल सामान जोडकर लगभग ८ नग थे, म अके ल| ह| या³ा कर रह| थी | आ÷मसे दो
साधक आकर सारा सामान तुलवा कर, मु झे çे नम चढा कर गए थे और गोवाके मडगां व रे लवे 1टे शनपर दो साधक मु झे
लेने के Îलए आनेवाले थे | çे न रातके ¹यारह बजे पह

ं चनेवाल| थी ; पर7तु çे न दो-तीन 1थानपर अÎधक समय ³क गयी
और एक तो वातानुक

Îलत Íड«बा और ऊपरसे रात हो जानेके कारण हम कहांपर पह

ं चे यह पता भी नह|ं चल पा रहा था
| म उठकर बै ठ गयी तभी मेरे ऊपरवाले सीटपरसे एक स7जन उतरकर नीचे आये और मेरे पास बैठ गए, उनक| उH
लगभग ६० के आसपास होगी, çे न ÎनधाÍरत समयसे दे रसे चल रह| थी | म ने उन स7जनसे पू छा " 4या आप भी उतरने
वाले ह " उ7ह|ने कहा, “नह|ं ” | म ने पू छा " आप बारह बजे रातको नीचे 4य| आ गए ?" उ7ह|ने कहा " आपको मडगांव
उतरना है वहां çे न मा³ दो Îमनट ³कती है और आपके पास इतना सामान है अतः म आपको सामान उतारने म सहयोग
कर दू ं गा " म ने उनसे कहा Íक आप सो जाएं हमारे साधक भैयाने मुंबई आ÷मसे सब सू Îचत कर Íदया है ; अतः वे
1टे शन अव°य ह| आय गे हम उनक| सहायतासे सब उतार ल गे ” | उ7ह|ने कहा " म गोवाका ह

ं, मुझे पता है रातम रे ल
कम चार| çे नके Îलए सूचना दे नेवाल| दू रभाष कई बार नह|ं उठाते ह ऐसे म यÍद आपके साधक भाईको सह| सूचना नह|ं
Îमल| तो आपको अके ले सामान उतारनेम कÍठनाई हो सकती है " | çे न धीरे -धीरे अनेक 1थानपर ³कती ह

ई आगे बढ
रह| थी और हम तीन बजे मडगांव पह

ं चे और वे स7जन वै से ह| हमारे साथ सीटपर Íबना झपक| Îलए या तÎनक भी
ÍवचÎलत ह

ए बै ठे रहे और न ह| कोई अनाव°यक बात कर रहे थे | मुझे उcसुकता ह

ई, म ने उनसे पू छा, “ आप मे र|
सहायता 4य| करना चाहते ह ” ? उ7ह|ने कहा, " आप जब सामनेवाले सीटपर बै ठ| Uीसे बात कर रह| थीं तब म ने आपक|
सार| बात सु नी थी, मु झे आपक| सार| बात अ¯छ| लगी और मु झे लगा Íक म यÍद आपके कोई काम आ सका तो मु झे
आनंद होगा” | म सामनेवाले Uीसे अपने गु ³के Íवषयम और साधनाके Íवषयम राͳ सोनेसे पू व बात कर रह| थी | उस
Íदन सचमुच आ÷मके साधक भाईको 1टे शन पह

ं चनेम दस Îमनटक| दे र| हो गयी और उन स7जनने बडे 9े मसे मेरा सारा
सामान उतार Íदया | उस समय मेरा 1वा1³य अ¯छा नह|ं रहता था और म उतने कम समयम सारा सामान 1वतः नह|ं
उतार सकती थी यह बात मेरे सव 7 गु³से अÎधक अ¯छे से और कौन जान सकता था अतः उ7ह|ने उन स7जनके
मा²यमसे मेर| सहायता क| ! और आ°य Íक आ÷मके साधक भाईय|का कहना था Íक 1टे शनम कोई दू रभाष नह|ं उठा
रहा था और वे दो बार 1टे शनपर आकर आधे -आधे घंटे Fककर वापस आ÷म गए थे !!


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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
इसी 9कार माच २००० म म धनबादसे अयो²या जा रह| थी, मेरे पास आठ नग थे 4य|Íक मेरा 1थानां तरण ह

आ था
और क

छ नगम 9सार-साÍहcय थे | सव 9थम तो मेरे ÍटÍकट वे Íटं ग Îल1टम तीसरे 1थानपर था परं तु आ°य मेर| ÍटÍकट
आरÍHत सू चीम थी | दो ¯यÍñ िजनका वेÍटं ग Îल1टम मुझसे पहले नाम था, उनम से एकने पूछा ”आपने अÎत ÍवÎश8
¯यÍñके कोटे से आपने ÍटÍकट आरÍHत करवाया है 4या ? म ने मु1क

राते ह

ए कहा नह|ं “ नह|ं अÎत अÎत ÍवÎश8 ¯यÍñके
कोटे से” ! वह थोडी ÍवÎच³ सी भाव भं Îगमा कर मु झे Îनहार कर उतर गया | सामान अÎधक होनेके कारण एक साधकने मेर|
ÍटÍकट वातानु क

Îलत ड«बे म करवायी थी; परं तु वह वे Íटं ग Îल1टम थी | और हमने Îनण य Îलया था Íक यÍद ÍटÍकट आरÍHत
नह|ं हो पायी तब हम उतर कर, दो-चार Íदन प°ात जाएं गे | इसे आप गु³क

पा ह| कह Íक Íपछले चौदह वष के कालखंडम
अनेक बार मे र| ÍटÍकट वेÍटं ग Îल1टम पहले Hमांकपर न होने पर भी पता नह|ं कै से आरÍHत हो जाया करती रह| है और
मेरे ऊपरके Hमांकके ¯यÍñका आरHण नह|ं हो पाता है | जब म यह सब उन स7जनसे कह रह| थी तो ÍटÍकट Îनर|Hक
महोदयने हमारे वाता लापको सु न Îलया था | जब वे ÍटÍकट Îनर|Hण करने आए तो मु झसे पू छने लगे ‘अÎत ÍवÎश8 ¯यÍñ कोटा
( वीआईपी कोटा)’ तो म ने सु ना है , परं तु अÎत अÎत ÍवÎश8 ¯यÍñके कोटे से (‘वीवीआईपी कोटा’) 4या है ? म ने ऊपर ई+रक|
ओर संके त Íकया | उ7ह|ने कहा “इतनी छोट| उH और इतनी ÷@ा” ! म ने कहा, “ये Íकसने कहा आपसे Íक ÷@ा मा³ व

@
¯यÍñको ह| हो सकती है ” ! वे हं सने लगे , उ7ह|ने पू छा, “कहां जा रह| ह आप” ? म ने कहा “रामजीक| नगर|, अयो²या” |
सीटके चार| ओर मे रा सामान था | उ7ह|ने सामानक| ओर दे खकर याͳय|से पूछा ये गôेके ब4से Íकसके है ? म ने कहा “मेरे ह ”
| उ7ह|ने कहा, “आपका Íकतना सामान है और आप Íकतने ¯यÍñ ह ” | म ने कहा “अके ल| ह

ं और आठ नग ह ” | वे मु1क

राने
लगे और बोले “आपको पता है या नह|ं अयो²याम गाडी मा³ दो Îमनट ³कती है, कै से उतार गी इतना सामान” ? म ने कहा “
मेरे तो मा³ एक दो पेट| है शेष रामजीका है , उनक| नगर|, उनका सामान, वे ह| जाने म 4य| Îचं ता कFं ” ? वे मु1क

राने लगे
कहने लग “4या करती ह आप” ? म ने कहा “ धम 9सारक| सेवा करती ह

ं, एक साधारण सी गु³भñ ह

ं ” | वे बोले, “4या
आपको Íव+ास है इस घोर कÎलयु गम भी रामजी आपक| सहायता कर गे ” ? म ने कहा, “हां , 4य| नह|ं ” | वे कहने लगे , “ ठ|क
है जरा बताएं आप 4या बताती ह समाजको” | Íफर 4या मे रा 9वचन आरं भ हो गया, सभी आसपासके ¯यÍñ उसे सु नने लगे |
दस Îमनटके प°ात ÍटÍकट Îनर|Hकने मु झसे कहा, “ आपक| बात अ¯छ| लगीं , चÎलये एक बात आपको बता दू ं जब तक
आपके रामजीका सारा सामान नह|ं उतर जाये , गाडी अयो²याम आगे नह|ं जाएगी, म गाड महाशयको इस संबं धम अभी सूचना
दे दे ता ह

ं “ और उ7ह|ने Íड«बेके अं दर जो Íब1तर इcयाÍद दे ते ह उ7ह हमारा सामान उतारनेके Îलए कह Íदया | और अयो²याम
दो Îमनट लगे या तीन Îमनट परं तु मेरे सामान उतरनेके प°ात ह| गाडी खुल| !! और वे और गाड दोन| ह| अयो²याम मे रे
सामान उतरनेक| 9तीHा कर çे नको हर| झंडी Íदखाई, यह म ने 1टे शनपर उतरनेके प°ात दे खा और इस 9कार मेरे रामजीने
उस ÍटÍकट Îनर|Hकके मा²यमसे मेरे गु³काय म सहयोग Íकया | इस 9कार अनेक बार मेरे ÷ीगु³ने Îभ7न-Îभ7न Fप|म आकर
मेर| सहायता क| |


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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
४ ४४ ४. .. . स

+म जगत स

+म जगत स

+म जगत स

+म जगत
इस लेखक| श

ं¹खलाम म अपने इ8 और अÎन8, पारलौÍकक अनु भू Îत आपके सं ग बांटना चाह

ंगी, इन अनु भूÎतय|से सू +म
संबि7धत जो भी ÍवHे षण Íकए उसके 9cयH 9माणने सू +म जगतक| क

छ अ{

त बात|क| पु Í8 क| |
हमारे पै त

क गांवम (िजला गोqडा, झारखंड ) मई २०१० म एक Íदन एक साधकम एक अÎन8 शÍñ 9कट हो गयी और
जब उसे उसके घरके कोई सद1य Îनयंͳत नह|ं कर पा रहे थे तब वे उसे मेरे पास ले आए | मेरे Îनवास 1थानपर
आने पर उसने कहा Íक उसे मेरे कमरे क| 9cये क व1तु से नामजपक| ²वÎन सु नाई दे रह| है और इसÎलए वह Íकसी भी
व1तु को छू ना नह|ं चाहती थी 4य|Íक इससे उसक| काल| शÍñ कम हो जाती | इस बातका आभास तो मु झे था ह|; परं तु
एक ÍवलHण 9सं गने इस बातक| पुÍ8 कर द| |
अग1त २०१० म एक चुÍहयाने कमरे म अने क सामान क

तरना आरं भ कर Íदया | उस समय म अÎधकां श समय गांवम
ह| रहती थी और कु छ साधक मेरे पास Íदनम सेवाके Îलए आते थे | एक Íदन एक साधकने कहा “चुÍहया 9सार-साÍहcय
िजसम 0ंथ इcयाÍद थे , उसे काट सकती है और वह बार-बार वातानुक

Îलत यं³म घु सकर उसके अंदर क

छ क

तरती रहती
है ; अतः उसे मारना होगा और हम चू हा मारवाल| औषÎध लाकर राͳम डाल द गे ” | म ने नह|ं चाहते ह

ए भी, हो रह|
हाÎनको दे ख हामी भर| | औषÎध दे नेके प°ात वह चु Íहया नह|ं Íदखी | साधक|ने कहा “सं भवतः वह Íवषवाल| आटे क|
गोल| खाकर बाहर जाकर मर गयी होगी” | इस बातको एक मह|नेसे अÎधक हो गए ह|गे | नवराͳसे पहले एक Íदन म


छ साधकके साथ Îमलकर सारे सामानपर धूल झाडकर उसे ¯यवि1थत लगा रह| थी और म ने पाया Íक जहां सीडी
¯लेयर रखा था वह एक मरे ह

ए चू हे का कं काल था | म ने दे खा Íक उसम एक भी क|डा नह|ं लगा था | िजस कमरे म वह
चुÍहया मर| थी, वह एक १२x१४ फ|टका कमरा है और उतना हवादार भी नह|ं है | हम कु छ साधक 9ÎतÍदन वहां बैठकर
सेवा करते ह , ऐसे म उसके मरनेपर दु ग ध न आना आ°य वाल| बात थी | म ने झटसे सू +म पर|Hण Íकया तो पता चला
Íक वह पंचतôवम Íबना क|डे के ह| Íवल|न हो रह| थी या लगभग हो गयी थी | चूंÍक क|डे नह|ं लगे थे अतः उससे दु ग ध
नह|ं आई और वह उस कमरे के चै त7यके कारण ह

आ था | म ने सभी साधक|को Íदखाया Íक चू हे म एक भी क|डा नह|ं
लगा है और उसके प°ात एक साधकको उसे फ कनेसे पू व आंगनम रखनेके Îलए कहा और जै से ह| उ7ह|ने ऐसा Íकया
पं5ह Îमनटम उसम क|डे लगने लगे | व1तु त: उस कमरे म जो चै त7य था उस कारणसे उसम क|डे नह|ं लगे थे और बाहर
आं गनम सािïवकता कम होनेके कारण तु रं त क|डे लगने लगे थे | इस बातक| पु Í8 अÎन8 शÍñय|ने क

छ मह|ने पूव क|
थी और कहा था Íक इस कमरे क| 9cये क व1तु नामजप कर रह| है | वष २००८ से ह| जबसे म पै त

क Îनवासम रहने लगी


15

सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२


ं उस कमरम कभी मुझे सु गं ध या कभी दु ग धक| अनु भूÎत होती रह| है | जब अÎन8 शÍñका आHमण होता है तो दु ग ध
आती है और जब दे वतïव रहता है तब सु गं ध आती है | सु गंधम भी अनेक 9करके Íद¯य गंध होते ह जो कभी तारक गंध
होता है तो कभी मारक गंध होता है | उस कमरे म म बैठकर जप, ²यान या धम 9सारक| सेवा, सं गणक (क+¯यू टर) के
मा²यमसे करती ह

ं और उस कमरे म मेर| दाद| भी रहती थी जो एक उ¯च 1तरक| साधक थीं और मेरे आनेके पहलेसे उस
कमरे म Íद¯यता थी और उस कमरे क| Íद¯यताने मु झे गांवम जाकर क

छ Íदन साधना करनेक| 9ेरणा द| थी और क


समय प°ात उस भूÎमक| सािïवकताने मु झे वह|ंका बना Íदया !
५ ५५ ५. .. . साधक Íकसे कहते ह साधक Íकसे कहते ह साधक Íकसे कहते ह साधक Íकसे कहते ह ? ?? ?
वष २००३ म जब म ने दे खा Íक परम पू 7य गु³दे व हमारे 7ये 8 साधक|क| बै ठक लेकर उ7ह साधनाके TÍ8कोण दे ते , उनके
चूक बताते और उस माग दश नक| ÎलÍखत 9Îत जब मु झे 9ाB होती तो म यह सोच Îनराश हो जाती Íक परम पू 7य मे र|
चूक नह|ं बता रहे ह ; अतः मेर| 9गÎत नह|ं होगी | साधनाके म²यम होनेवाले चू कसे हमार| साधना न8 हो जाती है यह
TÍ8कोण मनम अं Íकत हो चुका था | मेरे चूक नह|ं पता चलगे तो आ²यािcमक 9गÎत शीU नह|ं हो पाएगी ; अतः म
9ÎतÍदन आत तासे ÷ीगु³के Îच³के सामने वे मु झे मेरे चूक बताए, इस हे तु म 9ाथ ना करती थी | और मेर| 9ाथ ना दस
मह|ने के प°ात सु न ल| गयी और वष २००४ से मेरे “अहं Îनमू लन” क| साधना आरं भ ह

ई और अगले चार वष ÷ीगु³ने
मु झे मेरे सारे चूक अनेक साधकके मा²यमसे बताते रहे |
अ4टूबर २००६ म एक Íदन मुंबईके दे वद आ÷मके ²वÎनÎच³ीकरण Íवभागम सेवा कर रह| थी और क

छ साधक आ÷म
दश न हे तु आए थे | जब वे हमारे Íवभागम पह

ं चे तो हम सबने अपना पÍरचय Íदया, जैसे ह| मेरा नाम उ7ह|ने सु ना वे
कहने लगे “हां , क

छ वष पहले आपक| अचूक 9सार प@Îतके बारे म Íह7द| माÎसक सनातन 9भातम पढा करती थी और
अब आपक| चू क दै Îनक और माÎसक सनातन 9भातम पढती ह

ं ” | उनके कहनेका अथ था Íक पहले आप पाने गु ण|के
Îलए 9Îस@ थीं और अब अपने चूकके Îलए !!! उनक| इस 9कारक| 9ÎतÍHया दे नेपर भी मन शां त और अपने ÷ीगु³के
9Îत क

त7तासे पूण था |
हमारे ÷ीगु³ने 1वभावदोष और अहं Îनमू लन हे तु एक अ{

त प@Îत ÍवकÎसत क| है | पहले तो वे हम सेवाके म²य
होनेवाले अपने चूक 1वयं बताने के Îलए कहते ह और जब कोई साधक अपने चूकका Îनर|Hण नह|ं कर पता या उसे
छु पानेका 9यास करता तो उसे अ7य साधक साधनाम सहायताके Fपम बताते ह | जहां साधक भोजन करते ह वहां अनेक
फलक (बोड ) लगे ह

ए ह िजसम साधक 9ामाÍणक होकर अपने चूक, मनम आए 9ÎतÍHया, 9ायि°तके साथ Îलखते ह


16

सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
और यÍद समÍ8 1तरपर कोई चूक हो जाती तो उसे वे माÎसक या दै Îनक सनातन 9भातम साधकके नामके साथ छाप
Íदया जाता है !! और उनक| यह क

Îत हम साधक|को Íवशेष क

पा समान लगती है और अपने दोष और अहंके लHण दू र
करने हे तु साधक तीdतासे 9यास करते ह | उनके §ारा आÍव*कार क| गयी इस Íवशे ष प@Îतके कारण आज सनातन के २६
साधक सं त पदपर आसीन हो गए ह और १५० से अÎधक साधक ६०% आ²यािcमक 1तर सा²य कर चुके ह और यÍद
उनक| साधना इसी 9कार चलती रह| तो अगले चार-पांच वष म वे सं त पदपर आसीन हो जाएं गे |
फे सबु कपर म ने एक गु ट बनाया है िजसका नाम है ‘उपासनाके ÍHयाशील साधक’ (Active Seekers of Upasana)
उसम दे श-Íवदे शके क

छ साधकको सि+मÎलत Íकया है िजससे Íक वे एक दू सरे से 9ेरणा ले कर साधना कर सक | परं तु
जब हमने कु छ साधक|को उनक| 9थम बार ह| चूक बताई तो उ7ह|ने अपना नाम इस गु टसे Îनकाल Íदया !! जबÍक म ने
उनका नाम भी नह|ं Îलखा था !! अब िजनम इतना अहं हो वे कभी साधना कर सकते ह 4या ? एक बार हमारे ÷ीगु³ने
कहा था ” जब तक कोई हमारा अपना नह|ं होता हम उससे मीठा-मीठा बोलते ह जब वह हमारा हो जाता है तो हम उसे
उसके चू क और अहं के लHण सबके समH बताने लगते ह िजससे Íक उस जीवाcमाम दोष और अहं न8 हो जाए और वह
आcमा 9काशी हो पू रे Íव+को 7योÎत 9दान करे ” !
सं त|क| डांटसे हमारे 9ार«ध और संÎचत जलते ह , अहं न8 होता है और आनं दक| 9ाÎB होती है, म ने सदै व यह
TÍ8कोण रख उनके साधक|§ारा बताए गए चू कको सु नकर अपने दोष|को दू र करनेका 9यास करती रह| !!
६ ६६ ६. .. . साधक|क| अन



Îतयां साधक|क| अन



Îतयां साधक|क| अन



Îतयां साधक|क| अन



Îतयां : : : :
• जब कोई ¯यÍñ यो¹य 9कारसे साधना करने लगता है तब ई+र|य तïवसे उसे अनु भूÎत 9ाB होने लगती है और
ऐसी अनु भू Îतय|का ÍवHे षण मन और बु Í@के 1तरपर कर पाना असंभव होता है 4य|Íक ये अनु भूÎत सू +म
जीवाcमाको होती है और इसे सू +म पं च 7ाने ि75य|§ारा अनभुव Íकया जाता है | अनु भूÎतसे साधक जीवका
ई+रपर Íव+ास बढ जाता है और उसक| साधनाको गÎत Îमलती है | 9ारि+भक अव1थाम साधकको लौÍकक
जगतक| अनु भू Îत होती है और साधना बढनेपर ई+र|य तïवक| अनु भू Îत होने लगती है | क

छ लोग कहते ह Íक
अनु भूÎत नह|ं बांटनी चाÍहए, परं तु ऐसा नह|ं है , अनु भूÎत नाि1तक|के सामने न बताएं और आरं Îभक अव1थाके
साधक तो कदाÍप ऐसे ¯यÍñके समH अपनी अनु भूÎतको न बताएं 4य|Íक जब नाि1तक उनक| अनु भू Îतका
उपहास करते ह तो इससे साधकका Íव+ास डगमगा सकता है , परं तु सcसं गम या अपने गु³ बं धुको अव°य ह|
बता सकते ह , ऐसा करनेसे दू सर|क| भी ÷@ा बढती ह | हमारे ÷ी गु³ने कहा है Íक मा³ २% अ²याcम श«दके


17

सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
मा²यमसे सीखा जा सकता है , ९८% अ²याcमक| 9चीÎत अनु भूÎतके मा²यमसे ह| होती है !
दôा³े यके नामजपसे स+बंÎधत क

छ अनु भूÎतयां दे खगे |
पहल| अनु भू Îत है महाराç क| माधुर| दे शपांडे क| –
• मु झे 1व¯न म 9ÎतÍदन सांप Íदखाई दे ते थे | डर लगता था, कभी कभी चlक कर नींद खु ल जाती थी | एक
साÎधका क

मार| माधवी आचाय ने मुझे ' ÷ी गु³दे व दô ' जप करने के Îलए कहा | िजस Íदन म ने जप 9ारं भ
Íकया, उस Íदन से सपने म सांप Íदखाई दे ने बं द हो गए | दो तीन Íदन उपरां त िजस Íदन भी दôा³े य का नाम
जपना भू ल गई उस Íदन पु नः सपने म सांप Íदखाई Íदए |
अनु भूÎतका ÍवHे षण अनु भूÎतका ÍवHे षण अनु भूÎतका ÍवHे षण अनु भूÎतका ÍवHे षण : 1व¯नम सांप और नाग अÎधकतर अत

B पूव ज|के अि1तcवको दशाते ह |
दू सर| अनु भूÎत है महाराçक| सÍवता हडकर क| ---
• • "÷ी गु³दे व"दô” नामजप आरं भ करनेके दो Íदन प°ात म नामजपके समय आंख मूंदकर बै ठ| थी | तब
मु झे Íदखाई Íदया Íक घरसे अनेक ¯यÍñ बाहर Îनकल रहे ह | तदु परां त मेरे Îसर का भार|पन ह~का ह

आ तथा
सीनेम हो रह| वेदना भी ठ|क हो गयी | उस Íदनसे नामजप मनसे होने लगा | "
अनु भूÎतका ÍवHे षण अनु भूÎतका ÍवHे षण अनु भूÎतका ÍवHे षण अनु भूÎतका ÍवHे षण : दôा³े यके जपसे Íपतर|को गÎत Îमल गयी और उ7ह हलकापन अनु भव होने लगा |

७. dत cयोहार :
Íदवाल| अथा त द|पावल| Íदवाल| अथा त द|पावल| Íदवाल| अथा त द|पावल| Íदवाल| अथा त द|पावल|
द|पावल| श«द द|प एवं आवल| क| सं Îधसे बना है । आवल| अथा त पंÍñ । इस 9कार द|पावल| श«दका अथ है, द|प|क|
पंÍñ । द|पावल|के समय सव ³ द|प जलाए जाते ह, इसीÎलए इस cयोहारका नाम द|पावल| है । भारतवष म मनाये
जाने वाले सभी cयौहारोम द|पावल|का सामािजक और धाÎम क दोन| TÍ8य|से अcयÎधक महïव है । इसे द|पोcसव भी कहते
ह । `तमसो मा 7योÎतग मय ।' अथा त `अंधेरे से 7योÎत अथा त 9काशक| ओर जाइए' यह उपÎनषद|क| आ7ा है । अपने
घरम सदै व ल+मीका वास रहे , 7ानका 9काश रहे , इसÎलए हर कोई बडे आनंदसे द|पोcसव मनाता है । 9भु ÷ीराम चौदह
वष का वनवास समाB कर अयो²या लौटे , उस समय 9जाने द|पोcसव मनाया । तबसे 9ारं भ ह

ई द|पावल| ! इसे उÎचत
प@Îतसे मनाकर आप सभीका आनं द ͧगुÍणत हो, यह शु भकामना !
द|पावल| पव के अं तग त आनेवाले महïवपू ण Íदन ह , .......


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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
१. नरक चतुदशी
२. ल+मीपू जन एवं
३. बÎल9Îतपदा
ये तीन Íदन द|पावल|म Íवशे ष उcसवके Fपम मनाए जाते ह । वसु बारस अथा त गोवcस §ादशी, धन³योदशी अथा त
धनतेरस तथा भाईदू ज अथा त यमͧतीया, ये Íदन द|पावल|के साथ ह| आते ह । इसÎलए, भले ह| ये cयोहार Îभ7न ह|,
Íफर भी इनका समावेश द|पावल|म ह| Íकया जाता है ।
नरक चतुद शी नरक चतुद शी नरक चतुद शी नरक चतुद शी : : : :
नरक चतुदशीपर 9दोषकालम अथा त सूया1तके उपरां त ÍवÎश8 कालम भी कु छ धाÎम क ÍवÎधयां क| जाती ह । 9दोषकाल
9cये क Íदन ÍवÎभ7न कालावÎधका होता है । इसके बारे म पं चां गम जानकार| द| होती है । इस कालम क| जानेवाल|
धाÎम क ÍवÎधयां अÎधक फलदायी होती ह ।

नरक चतुदशी के Íदन 9दोषकालम क| जानेवाल| एक ÍवÎध है , .....
१ ११ १. . . . यमद|पदान यमद|पदान यमद|पदान यमद|पदान
द|पावल|के कालम धन ³योदशी, नरक चतुदशी एवं यमͧतीया, इन तीन Íदन|पर यमदे वके Îलए द|पदान करते ह । इनम
धन³योदशीके Íदन यमद|पदानका Íवशेष महïव है । यमद|पदान करनेसे यमदे व संतु 8 होते ह । इससे ¯यÍñका अपम

cयु से
रHण होता है । नरक चतु द शी के Íदन ñाHणभोजन, वUदान, द|पदान, 9दोषपूजा और Îशवपू जा इcयाÍद ÍवÍवध धाÎम क
ÍवÎधयां क| जाती ह ।
२ २२ २. . . . 9दोषपूजा 9दोषपूजा 9दोषपूजा 9दोषपूजा
9दोष काल अथा त सू या 1तके उपरां त ७२ ÎमÎनट

नरक9ाÎBसे बचने हे तु तथा पाप|क| Îनव

Íô हे तु , 9दोषकालम क| जाने वाल| पू जाम चार बÍôय|वाला द|पक जलाना चाÍहए
। और इस Hोकका उ¯चारण करना चाÍहए,
दôो द|प°तुद °यां नरक9ी दôो द|प°तुद °यां नरक9ी दôो द|प°तुद °यां नरक9ी दôो द|प°तुद °यां नरक9ीतये मया । तये मया । तये मया । तये मया ।
चतुव Îत समायुñ चतुव Îत समायुñ चतुव Îत समायुñ चतुव Îत समायुñ: : : : सव पापापनुôये ।। सव पापापनुôये ।। सव पापापनुôये ।। सव पापापनुôये ।। - -- - Îलं गपुराण Îलं गपुराण Îलं गपुराण Îलं गपुराण


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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
इसका अथ है , आज चतुदशी के Íदन नरक के अÎभमानी दे वता क| 9स7नता के Îलए तथा सम1त पाप|के Íवनाशके Îलए
म चार बÍôय|वाला चौमु खा द|प अÍप त करता ह

ं ।

इस पू जाम कालके मा²यमसे ÍHयाशÍñ का पूजन कर उसका संवध न Íकया जाता है । इस मा²यमसे ¯यÍñके Îचôपर
कालमÍहमा का सं1कार अंÍकत होकर उसके अनु सार आचरण करना तथा उ¯च 1तर क| अव1था 9ाB करना उसके Îलए
सं भव होता है । नरक चतु द शीके Íदन Îशवपू जा भी क| जाती है ।
Îशवपू जा Îशवपू जा Îशवपू जा Îशवपू जा
समÍ8को अथा त समाजको क8 दे नेवाल| अधोगामी अथा त नीचे क| ओर जानेवाल| तरं ग|के Îनदा लन के Îलए ई+रके मारक
Fपक| पू जा कर उनके 9Îत क

त7ता ¯यñ करना, Îशवपू जा§ारा सा²य होता है । इस मा²यमसे ई+रक| 9cये क क

Îतके
9Îत आcमीयभाव ÎनÎम त होकर आगे भावव

Í@ होती है तथा ई+रसे एकFप होनेक| TÍ8से माग Hमण होता है ।

नरक चतुदशीके Íदन 9ात: तथा Íवशेषकर सायंकालम घर, आं गन तु लसी व

ं दावन, एवं अ7य 1थान|पर यथाशÍñ ते लके
द|प जलाएं जाते ह ।
शक संवत अनु सार आि+न क

*ण चतुदशी तथा ÍवHम संवत अनुसार काÎत क क

*ण चतुदशी नरक चतुद शीके नामसे
जानते ह । इस ÎतÎथके नामका इÎतहास इस 9कार है -

‘पूव कालम 9ा¹7योÎतषपु रम भौमासुर नामक एक बलशाल| असुर रा7य करता था । उसका एक अ7य नाम भी था -
नरकासुर । यह दु 8 दै cय दे वताओं और पु³ष|के साथ-साथ िUय|को भी अcयं त क8 दे ने लगा । जीतकर लाई ह

ई सोलह
सहP रा7यक7याओंको उसने बं द| बनाकर उनसे Íववाह करनेका Îन°य Íकया । सव ³ ³ाÍह-³ाÍह मच गई । यह समाचार
Îमलते ह| भगवान ÷ीक

*णने सcयभामासÍहत उस असुरपर आHमण Íकया । नरकासुरका अंत कर सव राजक7याओंको
मु ñ Íकया । वह Íदन था शक संवत अनु सार आि+न क

*ण चतु दशी अथा त ÍवHम संवत अनु सार काÎत क क

*ण
चतुदशीका । तबसे यह Íदन नरकचतुद शीके नामसे मनाते ह ।

मरते समय नरकासुरने भगवान ÷ीक

*णसे वर मां गा, Íक ‘आजके Íदन मं गल1नान करने वाला नरकक| यातनाओंसे बच
जाए ।' तदनु सार भगवान ÷ीक

*णने उसे वर Íदया । इसÎलए इस Íदन सूय|दयसे पूव अ¹यं ग1नान करनेक| 9था है ।
भगवान ÷ीक

*ण §ारा नरकासुरको Íदए गए वरके अनु सार इस Íदन सू य|दयसे पूव जो अ¹यं ग1नान करता है, उसे
नरकयातना नह|ं भु गतनी पडती ।


20

सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
अ¹यं ग1नानका महïव अ¹यं ग1नानका महïव अ¹यं ग1नानका महïव अ¹यं ग1नानका महïव
द|पावल|के Íदन|म अ¹यं ग1नान करनेसे ¯यÍñको अ7य Íदन|क| तुलनाम ६ 9Îतशत सािïवकताका अÎधक लाभ Îमलता है
। सु गं Îधत ते ल एवं उबटन लगाकर शर|रका मद न कर अ¹यं ग1नान करनेके कारण ¯यÍñ म सािïवकता एवं तेज बढता है

द|पावल|क| कालावÎधम उबटन लगा द|पावल|क| कालावÎधम उबटन लगा द|पावल|क| कालावÎधम उबटन लगा द|पावल|क| कालावÎधम उबटन लगानेका अ²याcमशाUीय महïव नेका अ²याcमशाUीय महïव नेका अ²याcमशाUीय महïव नेका अ²याcमशाUीय महïव
द|पावल|क| कालावÎध उबटनके उपयोग हे तु अÎधक पोषक है । उबटनका उपयोग करनेसे पू व उसम सु गंÎधत तेल Îमलाया
जाता है । द|पावल|क| कालावÎधम ñHांडम ñHांडसे तेज, आप एवं वायु यु ñ चैत7य9वाहका प

³वीपर आगमन अÎधक
मा³ाम होता है । इसÎलए वातावरणम दे वताओंके तïवक| मा³ा भी अÎधक होती है । इस कालावÎधम दे हपर उबटन
लगाकर उसके घटक|§ारा दे हक| चै त7य 0हण करनेक| संवे दनशीलता बढाई जाती है । इसÎलए दे वताओंके तïवके
चैत7य9वाह ¯यÍñके दे हम संHÎमत होते ह । िजससे ¯यÍñको अÎधकाÎधक मा³ाम चै त7यक| 9ाB होती है ।

नरक चतुद शीके Íदन क| जानेवाल| क

Îतय|का भÍñयोगानु सार महïव नरक चतुद शीके Íदन क| जानेवाल| क

Îतय|का भÍñयोगानु सार महïव नरक चतुद शीके Íदन क| जानेवाल| क

Îतय|का भÍñयोगानु सार महïव नरक चतुद शीके Íदन क| जानेवाल| क

Îतय|का भÍñयोगानु सार महïव


Îत क

Îत क

Îत क

Îत महïव महïव महïव महïव ( (( (9Îतशत 9Îतशत 9Îतशत 9Îतशत) )) )
१. ñाHणभोजन २०
२. वUदान १०
३. द|पदान २०
४. 9दोषपूजा २०
५. Îशवपू जा ३०
----------


ल १००
इस सारणीसे 1प8 होता है Íक, नरक चतुदशी के Íदन ÍवÍवध धाÎम क क

Îतयां करनेके Îलए 4य| कहा गया है ।
द|प द|प द|प द|प 9 99 977व 77व 77व 77वलन लन लन लन
9ात: तथा सायंकालम रसोईघर, 1नानघर, सभाभवन, चाहरद|वार|, कु आं , गल|, गोशाला, मंÍदर इcयाÍद 1थान|पर तथा
अ7य सू ने 1थान|पर भी यथाशÍñ द|प जलाते ह ।



21

सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
द|पावल| द|पावल| द|पावल| द|पावल|
ÍवHम संवत अनु सार काÎत क अमाव1याका Íदन द|पावल|का एक महïवपू ण Íदन है ।
द|पावल|के कालम आनेवाल| अमाव1याका महïव द|पावल|के कालम आनेवाल| अमाव1याका महïव द|पावल|के कालम आनेवाल| अमाव1याका महïव द|पावल|के कालम आनेवाल| अमाव1याका महïव
सामा7यत: अमाव1याको अशु भ मानते ह; परं तु द|पावल| कालक| अमाव1या शरqपू Íण मा अथा त कोजाÎगर| पू Íण माके
समान ह| क~याणकार| एवं सम

Í@दश क है ।
इस Íदन करनेयो¹य धाÎम क ÍवÎधयां ह ..
१. ÷ी ल+मीपू जन
२. अल+मी Îन:सारण
द|पावल|के इस Íदन धन-संपÍôक| अÎध8ा³ी दे वी ÷ी महाल+मीका पूजन करनेका Íवधान है । द|पावल|क| अमाव1याको
अध राͳके समय ÷ी ल+मी का आगमन सÿ

ह1थ|के घर होता है । घरको पू ण त: 1व¯छ, शु@ और सु शोÎभत कर द|पावल|
मनानेसे दे वी ÷ी ल+मी 9स7न होती ह और वहां 1थायी Fपसे Îनवास करती ह । इसीÎलए इस Íदन ÷ी ल+मीजीका
पूजन करते ह और द|प जलाते ह । यथा सं भव ÷ी ल+मीपू जनक| ÍवÎध सपõीक करते ह ।

यह अमाव1या 9दोषकालसे आधी राͳतक हो, तो ÷े8 होती है । आधी राͳतक न हो, तो 9दोष¯याÍपनी ÎतÎथ लेनी
चाÍहए । द|पावल|के Íदन ÷ी ल+मीपू जनके Îलए Íवशेष Îस@ता क| जाती है ।












22

सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२

÷ी ल+मीपू जनके अ7य लाभ ।
१ ११ १. . . . भÍñभाव बढना भÍñभाव बढना भÍñभाव बढना भÍñभाव बढना
÷ी ल+मीपू जनके Íदन ñHां डम ÷ी ल+मीदे वी एवं क

बे र इन दे वताओं का तïव अ7य Íदन|क| तुलनाम ३० 9Îतशत अÎधक
मा³ाम 9HेÍपत होता है । इस Íदन इन दे वताओंका पू जन करनेसे ¯यÍñका भÍñभाव बढता है और ३ घं ट|तक बना रहता
है ।
२ २२ २. . . . सुरHाकवचका Îनमा ण होना सुरHाकवचका Îनमा ण होना सुरHाकवचका Îनमा ण होना सुरHाकवचका Îनमा ण होना
÷ी ल+मीतïवक| मारक तरं ग|के 1पश से ¯यÍñके दे हके भीतर और उसके चार| ओर Íव²मान रज-तम कण|का नाश होता
है । ¯यÍñके दे हके चार| ओर सुरHाकवचका Îनमा ण होता है ।
३ ३३ ३. . . . अÎन8 शÍñय|का नाश अÎन8 शÍñय|का नाश अÎन8 शÍñय|का नाश अÎन8 शÍñय|का नाश होना होना होना होना
÷ी ल+मीपू जनके Íदन अमाव1याका काल होनेसे ÷ी ल+मीका मारक तïव काय रत रहता है । पूजकके भावके कारण पू जन
करते समय ÷ी ल+मीक| मारक तïव तरं गे काय रत होती ह । इन तरं ग|के कारण वायु मंडलम Íव²मान अÎन8 शÍñय|का
नाश होता है । इसके अÎतÍरñ द|पावल|के Íदन ÷ी ल+मीपू जन करनेसे पू जकको, शÍñका २ 9Îतशत, चैत7यका २
9Îतशत आनंदका एक दशमलव प¯चीस 9Îतशत एवं ई+र|य तïवका १ 9Îतशत मा³ाम लाभ Îमलता है । इन लाभ|से ÷ी
ल+मीपू जन करनेका महïव समझम आता है ।
बÎल 9Îतपदा बÎल 9Îतपदा बÎल 9Îतपदा बÎल 9Îतपदा
काÎत काÎत काÎत काÎत क शु4ल 9Îतपदाका ऐÎतहाÎसक महïव क शु4ल 9Îतपदाका ऐÎतहाÎसक महïव क शु4ल 9Îतपदाका ऐÎतहाÎसक महïव क शु4ल 9Îतपदाका ऐÎतहाÎसक महïव
यह ÍवHम संवत कालगणनाका आरं भ Íदन है । ईसा पू व पहल| शता«द|म शक|ने भारतपर आHमण Íकया । वत मान
उ7जÎयनी नगर|के राजा ÍवHमाÍदcयने , मालवाके युवक|को यु @Îनपु ण बनाया । शक|पर आHमण कर उ7ह दे शसे Îनकाल
भगाया एवं धमाÎधÍ8त साHा7य 1थाÍपत Íकया । इस Íवजयके 9तीक1वFप सHाट ÍवHमाÍदcयने ÍवHम संवत् नामक
कालगणना, आरं भ क| । ईसा पूव सन् सôावनसे यह कालगणना 9चÎलत है । इससे 1प8 होता है Íक, कालगणनाक|
संक~पना भारतीय सं1क

Îतम Íकतनी पु रानी है । ईसा पू व कालम सं1क

Îतके वै भवक|, सवा गीण स¹यताक| और एकछ³
रा7य¯यव1थाक| यह एक Îनशानी है ।

काÎत क शु4ल 9Îतपदा वष के साढे तीन 9मु ख शु भ मु ह

त|म से आधा मु ह

त है । इसÎलए भी इस Íदनका Íवशेष महïव है ।


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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

र ठाक

र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
काÎत क शु4ल 9Îतपदाके Íदन क

छ Íवशेष उ£े °य|से ÍवÍवध धाÎम क ÍवÎधयां करते ह । 9cये क ÍवÎध करनेका समय Îभ7न
होता है ।

इनम से महïवपू ण ÍवÎधयां ह
बÎल9Îतपदा बÎल9Îतपदा बÎल9Îतपदा बÎल9Îतपदा
काÎत क शु4ल 9Îतपदा, बÎल9Îतपदा के Fपम मनाई जाती है । इस Íदन भगवान ÷ी Íव*णु ने दै cयराज बÎलको पातालम
भेजकर बÎलक| अÎतदानशीलताके कारण होने वाल| स

Í8क| हाÎन रोक| । बÎलराजाक| अÎतउदारताके पÍरणाम1वFप अपा³
लोग|के हाथ|मे संपÍô जानेसे सव ³ ³ाÍह-³ाÍह मच गई । तब वामन अवतार लेकर भगवान ÷ीÍव*णु ने बÎलराजासे ͳपाद
भूÎमका दान मां गा । उपरांत वामनदे वने Íवराट Fप धारण कर दो पगम ह| संपू ण प

³वी और अं तÍरH ¯याप Îलया । तब
तीसरा पग रखनेके Îलए बÎलराजाने उ7ह अपना Îसर Íदया ।

बÎल9Îतपदा मनानेक| प@Îत बÎल9Îतपदा मनानेक| प@Îत बÎल9Îतपदा मनानेक| प@Îत बÎल9Îतपदा मनानेक| प@Îत
बÎल9Îतपदाके Íदन 9ात: अ¹यं ग1नानके उपरां त सु हाÎगन अपने पÎतका औHण करती ह । दोपहरको भोजनम ÍवÍवध
पकवान बनाए जाते ह । इस Íदन लोग नए वU धारण करते ह एवं संपूण Íदन आनं दम Íबताते ह । क

छ लोग इस Íदन
बÎलराजाक| पõी Íवं ²यावÎल सÍहत 9Îतमा बनाकर उनका पूजन करते ह । इसके Îलए ग£ीपर चावलसे बÎलक| 9Îतमा
बनाते ह । इस पू जाका उ£े°य है Íक, बÎलराजा वष भर अपनी शÍñसे प

³वीके जीव|को क8 न पह

ं चाएं तथा अ7य अÎन8
शÍñय|को शां त रख । इस Íदन राͳम खेल, गायन इcयाÍद काय Hम कर जागरण करते ह ।

यमͧतीया अथा त भै³यादू ज यमͧतीया अथा त भै³यादू ज यमͧतीया अथा त भै³यादू ज यमͧतीया अथा त भै³यादू ज
असामाÎयक अथा त अकालम

cयु न आए, इसÎलए यमदे वताका पूजन करनेके तीन Íदन|म से काÎत क शु4ल ͧतीया एक है ।
यह द|पोcसव पव का समापन Íदन है । `यमͧतीया' एवं `भै ³यादू ज' के नामसे भी यह पव पÍरÎचत है ।

काÎत क शु4ल ͧतीयाको काÎत क शु4ल ͧतीयाको काÎत क शु4ल ͧतीयाको काÎत क शु4ल ͧतीयाको ` `` `यमͧतीया यमͧतीया यमͧतीया यमͧतीया' ' ' ' और और और और ` `` `भै ³यादू ज भै ³यादू ज भै ³यादू ज भै ³यादू ज' ' ' ' कहनेके कारण कहनेके कारण कहनेके कारण कहनेके कारण
काÎत क शु4ल ͧतीयाक| ÎतÎथपर वायु मंडलम यमतरं ग|के संचारके कारण वातावरण तB ऊजा से 9भाÍरत रहता है । ये
तरं ग नीचेक| Íदशाम 9वाÍहत होती ह । इन तरं ग|के कारण ÍवÍवध क8 हो सकते ह , जैसे अपम

cयु होना, दु घ टना होना,
1म

ÎतHंश होनेसे अचानक पागलपनका दौरा पडना, Îमरगी समान दौरे पडना अथा त ÍफÇस आना अथवा हाथम Îलये ह




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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

र ठाक

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र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
काय म अनेक बाधाएं आना । भूलोकम संचार करनेवाल| यमतरं ग|को 9Îतबं Îधत करनेके Îलए यमाÍद दे वताओंका पू जन
करते ह ।


³वी यमक| बहनका Fप है । इस Íदन यमतरं ग प

³वीक| कHाम आती ह । इसÎलए प

³वीक| कHाम यमतरं ग|के 9वेशके
संबं धम कहते ह Íक, काÎत क शु4ल ͧतीयाक| ÎतÎथपर यम अपने घरसे बहनके घर अथा त प

³वीFपी भू लोकम 9वे श करते
ह । इसÎलए इस Íदनको यम- ͧतीयाके नामसे जानते ह । यमदे वताके अपनी बहनके घर जानेके 9तीक1वFप 9cये क
घरका पु ³ष अपने ह| घरपर पõी §ारा बनाए गए भोजनका न सेवन कर बहनके घर जाकर भोजन करता है । बहन§ारा
यमदे वताका स+मान करनेके 9तीक 1वFप यह Íदन `भै³यादू ज'के नामसे भी 9चÎलत है ।
यह ले ख परम पू7य डॉ. जयं त बालाजी आठवले§ारा ÎलÍखत 0ंथ ‘dत cयोहार एवं धाÎम क उcसव’ से उ@ृ त ह ! इस
Íवषयम और अÎधक जानकार| पानेके Îलए इस Îलं कपर जाएं
http://www.hindujagruti.org/hinduism/knowledge/article/dhantrayodashi-hindi-article.html
इस संदभ म और जानकार|के Îलए पढ :
‘सनातन सं1था’ §ारा 9काÎशत 0ं थ आरती कै से कर ? 0ं थ पानेके Îलए संपक कर – www.sanatan@sanatan.org या
इस Hम7²वÎनपर सं पक कर : ९३२२३१५३१७


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द|पावल|म पूजन कै से कर द|पावल|म पूजन कै से कर द|पावल|म पूजन कै से कर द|पावल|म पूजन कै से कर ? ?? ?
द|पावल|पर मां ल+मी व गणेशक| पू जाक| जाती है । इस Íदन ल+मी पूजनम मां ल+मीक| 9Îतमा या Îच³क| पू जाक|
जाती है । गणेश पूजनके Íबना कोई भी पूजन अधूरा होता है इसÎलए ल+मीके साथ गणेश पू जन भी Íकया जाता है ।
द|पावल| पू जन कै से कर ?
9ातः 1नान करनेके प°ात 1व¯छ वU धारण कर ।
अब Îन+न संक~पसे Íदनभर उपवास रख -


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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

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र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
मम सवाप¯छांÎतपू व कद|घा यु*यबलपु Í8नै³7याÍद-
सकलशुभफल 9ाJयथ
गजतुरगरथरा7यै +या Íदसकलस+पदामुôरोôराÎभव

§ यथ
इं5क

बेरसÍहत÷ील+मीपू जनं कÍर*ये।
सं²याके समय पु नः 1नान कर ।
ल+मीजीके 1वागतक| तै यार|म घरक| 1व¯छता कर गौ मू ³ Îछडक , द|वारको चू ने अथवा गेFसे पोतकर ल+मीजीका Îच³
बनाएं । (ल+मीजीका छायाÎच³ भी लगाया जा सकता है ।)
ल+मीजीके Îच³के सामने एक चौक| रखकर उसपर मौल| बां धे ।
इसपर गणेशजीक| Îम§ीक| मूÎत 1थाÍपत कर ।
तcप°ात गणेशजीको Îतलक कर पू जा कर ।
अब चौक|पर छः चौमुखे व २६ छोटे द|पक रख।
इनम घी और लंबी बôी डालकर जलाएं ।
Íफर जल, मौल|, चावल, फल, गु ड, अबीर, गु लाल, धूप आÍदसे ÍवÎधवत पू जन कर ।
पूजा पहले पु ³ष तथा उसके प°ात िUयां कर ।
पूजाके प°ात एक-एक द|पक घरके कोन|म जलाकर रख ।
÷ी गणपÎत पूजन ÷ी गणपÎत पूजन ÷ी गणपÎत पूजन ÷ी गणपÎत पूजन
सब दे वताओंके पू जनम सव 9थम गणेशजीके पू जनका Íवशेष महïव है 4य|Íक गणेशजी पू जनके समय आने वाले Íव¯न|को
दू र कर पू जन ÍवÎश8 दे वता तक पह

ं चे इस हे तु सव अ8§ार खोलते ह | हाथम पु*प व अHत लेकर ÷ी गणपÎतका ²यान
और आवाहन कर | उनका पंचोपचार पू जन कर |


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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

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र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
÷ीम7गणाÎधपतये नम: .
÷ी गणेशाय नम: .
÷ीमान् महा गणपÎतजीको नम1कार है |
÷ी गणे शजीके ÎनÎमô अHत पु *प अÍप त कर | अथा त् गणेशजीके स+मुख अHत पु *प रख द | अब एक छोटा तथा एक
चौमुखा द|पक रखकर Îन+न मं ³से ल+मीजीका पू जन कर -
नम1ते सव दे वानां वरदाÎस हरे ः Í9या।
या गÎत1cवc9प7नानां सा मे भूयाcवदच नात॥
इस मं³से इं5का ²यान कर -
ऐरावतसमाFढो वHह1तो महाबलः।
शतय7ाÎधपो दे व1तमा इं5ाय ते नमः॥
इस मं³से क

बेरका ²यान कर -
धनदाय नम1तु ¹यं ÎनÎधप²ाÎधपाय च।
भवं तु cवc9सादा7मे धनधा7याÍदस+पदः॥

इस पू जनके प°ात यÍद Îतजोर| हो तो उसम भी गणेशजी तथा ल+मीजीक| मूÎत रखकर ÍवÎधवत पू जा कर ।
ल+मी पू जन रातके बारह बजे करनेका Íवशेष महïव है। अध राͳ अमाव1याके Íदन शÍñ तïव अÎधक काय रत रहता है |
पंचोचार पू जन ऊपर बताई गयी ÍवÎध अनु सार कर और खील , बताशे , लqडू इcयाÍद भोग लगाएं |
मं³-पु*पांजÎल :
( अपने हाथ|म पु*प ले कर Îन+न मं³|को बोल ) :-


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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

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र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
ॐ य7े न य7मयज7त दे वा1ताÎन धमा Íण 9थमा7यासन् ।
तेह नाकं मÍहमानः सच7त य³ पूव सा²याः सि7त दे वाः ॥
ॐ राजाÎधराजाय 9सH साÍहने नमो वयं वै ÷वणाय क

म हे ।
स मे कामान् कामकामाय मHं कामे+रो वै÷वणो ददातु ॥


बेराय वै ÷वणाय महाराजाय नमः ।
ॐ महाल++यै नमः, मं³पु *पांजÎलं समप याÎम ।
(हाथम Îलए फू ल महाल+मीपर चढा द ।)
9दÍHणा कर , सा8ां ग 9णाम कर , अब हाथ जोडकर Îन+न Hमा 9ाथ ना बोल :-
Hमा 9ाथ ना :
आवाहनं न जानाÎम न जानाÎम Íवसज नम् ॥
पूजां चैव न जानाÎम Hम1व परमे+Íर ॥
म7³ह|नं ÍHयाह|नं भÍñह|नं सुरे +Íर ।
यcपूिजतं मया दे Íव पÍरपू ण तद1तु मे ॥
cवमेव माता च Íपता cवमेव
cवमेव ब7धु ° सखा cवमेव ।
cवमेव Íव²ा 5Íवणं cवमेव
cवमेव सव म् मम दे वदे व ।


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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

र ठाक

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र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
पापोऽहं पापकमाहं पापाcमा पापस+भवः ।
³ाÍह माम् परमेशाÎन सव पापहरा भव ॥
अपराधसहPाÍण ÍHय7तेऽहÎन शं मया ।
दासोऽयÎमÎत मां मcवा Hम1व परमे+Íर ॥
पूजन समप ण :
हाथम जल ले कर Îन+न मं³ बोल :-
‘ॐ अनेन यथाशÍñ अच नेन ÷ी महाल+मीः 9सीदतुः’
(जल छोड द , 9णाम कर |)
Íवसज न :
अब हाथम अHत ल (गणेश एवं महाल+मीक| 9Îतमाको छोड़कर अ7य सभी) 9ÎतÍ8त दे वताओंको अHत छोडते ह

ए Îन+न
मं³से Íवसज न कम कर |
या7तु दे वगणाः सव पू जामादाय मामक|म् ।
इ8कामसम

@यथ पु नअ Íप पु नरागमनाय च ॥
ॐ आनंद ! ॐ आनं द !! ॐ आनंद !!!
.(आरती करके शीतल|करण हे तु जल छोड एवं 1वयं आरती ल, पूजाम सि+मÎलत सभी लोग|को आरती द Íफर हाथ धो
ल।)
Íफर यÍद सं भव हो तो राͳ जागरण कर ॐ नमो भगवते वासु दे वाय का जप कर ।
घरके वयोव

@|के चरण|क| वं दना कर ।


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सोऽहं सोऽहं सोऽहं सोऽहं – त तत तनुजा नुजा नुजा नुजा ठाक

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र §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत §ारा स+पाÍदत वष - १ अंक - ३२
¯यावसाÎयक 9Îत8ान, ग£ीक| भी ÍवÎधपूव क पू जा कर ।
रातको बारह बजे द|पावल| पूजन के उपरा7त चू ने या गेFम ³ई Îभगोकर च4क|, चू~हा, Îस~ल, लोढा तथा छाज (सूप)
पर कं कू से Îतलक कर । (हालां Íक आजकल घर|मे ये सभी व1तु य उपल«ध नह|ं है Íक7तु भारतके गांव|म और छोटे
क1ब|म आज भी इन सभी व1तुओं का Íवशेष महïव है 4य|Íक जीवन और भोजनका आधार ये ह| ह ) | ल+मी पू जन के
बाद अपने घरके तु लसीके गमले म , पौध|के गमल|म , घरके आसपास, व

Hके पास द|पक रख और अपने पडोÎसय|के घर
भी द|पक रखकर आएं ।

७ ७७ ७. .. . धम या³ाक| Fपरे खा धम या³ाक| Fपरे खा धम या³ाक| Fपरे खा धम या³ाक| Fपरे खा
१२.११.२०१२ -१७.११.२०१२ - Íद~ल|
१६.११.२०१२ – से4टर 3, वसु7धरा, 9वचन संपक ९८१००१८१२५ (09810018125)
१७.११.२०१२ – आनंद Íवहारम 9वचन संपक – ९९९८६१९०८ (9999861908)
१८.११.२०१२ – ¹वाÎलयर
१७.११.२०१२ -१८.१२.२०१२ – Íववेकानंद नीडम (आनंद क 5 ) Îनकट हÍरशंकर पु रम, ल°कर
संपक - ९८२६२६१२८२ ( 9826261282)
२०.११.२०१२ -२३.११.२०१२ – जोधपु र
२४.११.२०१२ – २५.११.२०१२ - अजमेर

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