बाल वििाह

गाॉधी जी आरभ में ही बताते है की वे इस अध्याय को लऱखना नहीॊ चाहते | ऩरन्तु वे तो सत्य क े ऩज ु ारी है , उन्हें सत्य का साथ दे कर अऩने बऱ वववाह की चचाा करनी ऩड़ी | इस भाग में वे बताते है की उन का वववाह क ै से हुआ तथा उस क े बारे में उनका क्या ववचार है | सवाप्रथम गाॉधी जी बताते है की सगाई और वववाह में क्या अॊतर है | सगाई ररश्तेदारों क े बबच होता है | ऱड़का और ऱड़की इस क े बारे में जानते नहीॊ| वववाह ऱड़का और ऱड़की बे बबच होता है और इस क े बारे में उन्हें तब ऩता चऱता है जब शादी ककउ तैयाररयाॊ आरॊ भ होता है | इस से ऩअत चऱता है की भारत में शादी क े वऱ माता वऩता की मर्ज़ी से होती है , इसमें बच्चों क े सख े बेरे में सोचा नहीॊ जाता| इस में ऩैसे ु क और समय बबााद होते है ये अऱग बात है | जब गाॉधी जी का वववाह हो रहा था, तो वे समझते नहीॊ थे की उन क े साथ क्या हो रहा था| वे तो नये कऩडे लमऱने की ख़ुशी में मस्त थे| ऩर वे आज्ञाकारी बेटे थे, जो वऩता कहते वे वाही करते थे| इस भाग में हमें यह भी जानने का अवसर लमऱता है की भारत में सभी सभ ु अवसर में ऩरॊ ऩरा, रीती ररवार्ज़ का बहुत महत्व है | अॊत में गाॉधी जी बऱ वववाह का ववरोध करते है और आज की ऩीड़ी को बढई दे ते है की वे इन सब क ू है | जजनका बऱ वववाह हुआ है , गाॉधी जी कहते है की उन ऱोगों का बचऩन उन से ु रीततयों से दर चचन्ना गया है |

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