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aaश्रीलंका का इतिहास

aaश्रीलंका का इतिहास

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शीऱॊका का इतिषाश

http://hi.wikipedia.org/s/2ot

इतिषाशकारो मे इश बाि की आम धारणा थी कक शीऱॊ का के आदिम तिळाशी और िकसण भारि के आदिम मािळ
एक षी थे । पर अभी िाजा खु िाई शे पिा चऱा षै कक शीऱॊ का के ऴु रआिी मािळ का शमबॊ ध उतिर भारि के ऱोगो
शे था । भाषवक षळशऱेवणो शे पिा चऱिा षै कक सशॊ षऱी भावा, गु जरािीऔर सशॊ धी शे जुडी षै ।
पाचीि काऱ शे षी शीऱॊ का पर ऴाषी सशॊ षऱा ळॊ ऴ का ऴाशि रषा षै । शमय शमय पर िकसण भारिीय राजळॊ ऴो का
भी आकमण भी इशपर षोिा रषा षै । िीशरी शिी इशा पू ळव मे मौयव शमाट अऴोक के पु तमषे नर के यषाॊ आिे
पर बौद धमव का आगमि ष

आ । इबिबिू िा िे चौिषळीॊ शिी मे दळीप का भमण ककया ।
पागैतिषासशक काऱ[शॊपादिि करे ]
इश दळीप पर बाऱॊ गोडा ऱोगो (इश िाम के सथाि पर िामक

ि) का तिळाश कोई ३४,००० ळवव पू ळव शे था । उनषे
मेशोसऱथथक सऴकारी शॊ गषकिाव के रप मे मानयिा िी गई षै । जौ और क

छ अनय खादयानिो शे दळीपतिळासशयो
का पररचय ईशापू ळव १५,००० इसळी िक षो गया था । पाचीि समस मे ईशा पू ळव १५०० ईसळी के आशपाश िाऱचीिी
(िारचीिी) उपऱबध थी जजशका मू ऱ शीऱॊ का शमझा जािा षै , अथावि् उश शमय शे इि िो िे ऴो के बीच वयापाररक
शमबॊ ध रषे षोगे । अॊ गेज याती और राजितयक शर जे मश इमशव ि टे िेनट िे शीऱॊ का के ऴषर गाऱे की पषचाि
दषबू बाइबऱ मे ळरणव ि सथाि टासऴव ऴ शे की षै ।
भारिीय पौरारणक कावयो मे इश सथाि का ळणव ि लं का के रप मे ककया गया षै । रामायण, जजशकी रचिा
शमभळि् ईशापू ळव ४थी शे िू शरी शिी के बीच ष

ई षोगी, मे इश सथाि को रासशराज राळण का तिळाश सथाि बिाया
गया षै । बौद गॊ थ िीपळॊ ऴ और मषाळॊ ऴ मे दिए गए षळळरण के अिु शार इश दळीप पर भारिीय आयो के आगमि
शे पू ळव यस िथा िागो का ळाश था ।
अिु राधपु रा (या अिु राधापु रा) के पाश पाए गए म

िभाॊडो पर बाहमी िथा गै र-बाहमी सऱषप मे सऱखाळट समऱे षै जो
ईशापू ळव ६०० इसळी के षै ।
पाचीि काऱ[शॊपादिि करे ]
पासऱ शामतयक िीपळॊ ऴ, मषाळॊ ऴ और चाऱु ळॊ ऴ, कई पसिर ऱेख िथा भारिीय और बमाव के शामतयक ऱे ख छठी
शिी ईशापू ळव के शीऱॊ का की जािकारी िे िे षै ।मषाळॊ ऴ पाॊचळी शिी मे सऱखा गया बौद गॊ थ षै जजशकी
रचिा िागशेि िे की थी । यष भारिीय िथा शीऱॊ काई ऴाशको का षळळरण िे िा षै । इशशे षी शमाट अऴोक के
जीळिकाऱ का शषी पिा चऱिा षै जजशमे सऱखा षै कक अऴोक का जनम बु द के २१८ शाऱ बाि ष

आ । इशके
अिु शार राजा षळजय के ७०० अिु यायी इश दळीप पर कसऱॊ ग (आधु तिक उडीशा) शे आए । इश दळीप पर षळजय िे
अपिे किम रखे जजशमे उशिे इशे िामपणी का िाम दिया (िाॊबे के पतिो जैशी) । यषी िामटॉऱेमी के िकऴे मे भी
अॊ ककि ष

आ । षळजय एक राजक

मार था जजशका जनम, कथाओॊ के अिु शार एक राजक

मारी और सशॊ ष (ऴे र) के
शॊ योग शे ष

आ था । उशके ळॊ ऴज सशॊ षऱी कषऱाए । षॊ ऱाॊकक ळॊ ऴािु गि ळै हातिक अिु शॊ धािो शे पिा चऱिा षै कक
यषाॊ के ऱोग एक समथशि जाति के ऱोग षै और इिका भारिीय उपमषादळीप के ऱोगो शे शमबॊ ध अब भी षळळाि का
षळवय षै ।
उतिर भारि के ऱोगो के आगमि शे और िकसण भारिीय शामाजयो की ऴजकि बढिे शे दळीप पर िकसण भारिीय
आकमण भी ऴु र ष

ए । शेिा और गु टका िो पाचीि िसमल ऴाशक थे जजनषोिे िू शरी शिी इशापू ळव के आशपाश
ऴाशि ककया । इिके अजसितळ का पमाण िो क

छ िषीॊ समऱिा षै पर मषाळॊ ऴ मे इिका अपतयस जजक ककया गया
षै ।
इशी पकार पाचीि भारि के मषाजिपि कमबोजो शे भी इिका शमबॊ ध ऱगाया जािा षै । यळि (गीक), जोकक
उतिर पजशचम भारि मे कमबोजो के पडोशी थे, शे भी इिका वयापाररक शमबॊ ध था और उिके वयापाररक उपतिळेऴ
भी इि से तो मे थे - खाशकर अिु राधपु रा के इऱाके मे ।
मधयकाऱ[शॊपादिि करे ]
िे ळिमषपया दटसशा (ईशापू ळव २५० इसळी - ईशापू ळव २१० इसळी) के शॊ बॊ ध राजा अऴोक शे थे जजशके कारण उश िौराि
शीऱॊ का मे बौद धमव का आगमि और पशार ष

आ । अऴोक के पु त मषे नर (मषे नि), शॊ घसमत के शाथ , बोथध ळ


अपिे शाथ जमबू कोऱा (शजमबसऱिु रै ) ऱाया । यष शमय थे राळाि बौद धमव िथा शीऱॊ का िोिो के सऱए मषतळपू णव षै

पसशद चोऱ राजा एऱारा िे २१५ ईशापू ळव शे ईशापू ळव १६१ ईसळी िक राज ककया । कळण दटसशा के पु त िु तिु गेमु िु िे
उशे ईशापू ळव १६१ ईसळी मे , िॊ िकथाओॊ के अिशार १५ ळवव के शॊ घवव के बाि षरा दिया । इशके बाि पाॊच िसमऱ
शरिारो िे यषाॊ राज ककया जजशके बाि िसमऱ ऴाशि का ितकाऱ अॊ ि षो गया । इशी शमय बौद गॊ थ ततषपटक की
रचिा ष

ई ।
मषाशेि (२७४-३०१ ईसळी) िे थेराळाि का िमि ककया और मषायाि बौद धमव पधाि षोिा गया । पाॊडु (४२९ ईसळी)
इश दळीप का पषऱा पाॊडय ऴाशक था । उशके ळॊ ऴ के आरखरी ऴाशक को मिळममा (६८४-७१८ ईसळी) िे पलऱळो
की मिि शे षरा दिया । अगऱे िीि शदियो िक पलऱळो के अधीि रषिे के बाि िकसण भारि मे पाॊडयो का किर शे
उिय ष

आ । अिु राधपु रा पर पाॊडयो का आकमण ष

आ और उशे ऱू ट सऱया गया । षॊ ऱाॊकक इशी शमय सशॊ षसऱयो िे
पाॊडयो पर आकमण ककया और उनषोिे पाॊडयो के िगर मिु रै को ऱू ट सऱया ।
िशळीॊ शिी मे चोऱो का उिय ष

आ और राजेनर चोऱ पथम िे शबको िकसण-पू ळव की ओर खिे ड दिया । पर १०५५
ईसळी मे षळजयबाष

िे ळापश पू रे दळीप पर अथधकार कर सऱया । िे रषळीॊ शिी के आरॊ भ मे कसऱॊ ग के राजा माघ िे
िसमल िथा के रऱाई ऱडाको के शाथ इश दळीप पर आकमण कर दिया । उशके और परळिी ऴाशको के काऱ मे
राजधािी अिु राधपु रा शे िकसण की िरफ रखशकिी गई और कै डी पष

ॊ च गई । शाथ षी जाििा का उिय एक पाॊिीय
ऴजकि के रप मे ष

आ । पराकम बाष

वषठ (१४११-६६) एक पराकमी ऴाशक था जजशिे शमपू णव शीऱॊ का को अपिे
अधीि कर सऱया । ळो कऱा का भी बडा पऴॉ शक था और उशिे कई कषळयो को पोतशाषि दिया । उशके ऴाशिकाऱ
मे राजधािी कोटे कर िी गई जो जयळधव िपु रा के िाम शे आज भी शीऱॊ का की पऴाशतिक राजधािी षै (कोऱॊ बो के
पू ळी भाग मे ) ।


रोपीय पभाळ[शॊपादिि करे ]
शोऱषळीॊ ऴिाबिी मे यू रोपीय ऴजकियो िे शीऱॊ का मे किम रखा और शीऱॊ का वयापार का के नर बििा गया ।
िे ऴ चाय, रबड, चीिी, कॉफी, िाऱचीिी शदषि अनय मशाऱो का तियाविक बि गया । पषऱे पु िव गाऱ िे कोऱमबो के
पाश अपिा िु गव बिाया । धीरे धीरे पु िव गासऱयो िे अपिा पभु तळ आशपाश के इऱाको मे बिा सऱया । शीऱॊ का के
तिळासशयो मे उिके पति घ

णा घर कर गई । उनषोिे डच ऱोगो शे मिि की अपीऱ की । १६३० इसळी मे डचो िे
पु िव गासऱयो पर षमऱा बोऱा और उनषे मार थगराया । पर उनषोिे आम ऱोगो पर और भी जोरिार कर ऱगाए । १६६०
मे एक अॊ गेज का जषाज गऱिी शे इश दळीप पर आ गया । उशे कै डी के राजा िे कै ि कर सऱया । उनिीश शाऱ िक
कारागार मे रषिे के बाि ळष यषाॊ शे भाग तिकऱा और उशिे अपिे अिु भळो पर आधाररि एक पु सिक सऱखी
जजशके बाि अॊ गेजो का धयाि भी इशपर गया । िीिरऱै ड पर फाॊश के अथधकार षोिे के बाि अॊ गे जो को डर ष

आ कक
शीऱॊ का के डच इऱाको पर फाॊ सशशी अथधकार षो जाएगा । इशसऱए उनषोिे डच इऱाको पर अथधकार करिा आरॊ भ
कर दिया । १८०० इसळी के आिे आिे िटीय इऱाको पर अॊ गे जो का अथधकार षो गया । १८१८ िक अॊ तिम राजय
कै डी के राजा िे भी आतमशमपव ण कर दिया और इशिरष शमपू णव शीऱॊ का पर अॊ गेजो का अथधकार षो गया । 1930
के िऴक मे सळाधीििा आॊिोऱि िे ज ष

आ । दषळिीय षळशळयु द के बाि ४ िरळरी १९४८ को िे ऴ को शॊ यु कि
राजऴाषी शे पू णव सळिॊ तिा समऱी

बोथध ळस ु मषे न्द्र (मषे न्द्ि). िॊ िकथाओॊ क रचिा षुई । शरिारों िे यषाॊ राज ककया जजशक े बाि िसमऱ ऴाशि का ित्काऱ अॊि षो गया । इशी शमय बौद्ध ग्रॊथ त्रत्रषपटक की मषाशेि (२७४-३०१ ईस्ळी) िे थेराळाि का िमि ककया और मषायाि बौद्ध धमव प्रधाि षोिा गया । पाॊडु (४२९ ईस्ळी) इश द्ळीप का पषऱा पाॊड्य ऴाशक था । उशक े ळॊऴ क े आर्खरी ऴाशक को मिळम्मा (६८४-७१८ ईस्ळी) िे पल्ऱळों की मिि शे षरा दिया । अगऱे िीि शदियों िक पल्ऱळों क े अधीि रषिे क े बाि िक्षसण भारि में पाॊड्यों का किर शे उिय षुआ । अिर ु ाधपर ु ा पर पाॊड्यों का आक्रमण षुआ और उशे ऱट ू सऱया गया । षॊ ऱाॊकक इशी शमय सशॊषसऱयों िे पाॊड्यों पर आक्रमण ककया और उन्द्षोंिे पाॊड्यों क े िगर मिर ु ै को ऱट ू सऱया । िशळीॊ शिी में चोऱों का उिय षुआ और राजेन्द्र चोऱ प्रथम िे शबको िक्षसण-पळ ू व की ओर खिे ड दिया । पर १०५५ ईस्ळी में षळजयबाषु िे ळापश पर े आरॊ भ में कसऱॊग क े राजा माघ िे ू े द्ळीप पर अथधकार कर सऱया । िेरषळीॊ शिी क िसमल िथा क े रऱाई ऱडाकों क े शाथ इश द्ळीप पर आक्रमण कर दिया । उशक े और परळिी ऴाशकों क े काऱ में राजधािी अिर ु ाधपर ु ा शे िक्षसण की िरफ़ र्खशकिी गई और कैं डी पषुॊच गई । शाथ षी जाििा का उिय एक प्राॊिीय ऴजक्ि क े रूप में षुआ । पराक्रम बाषु वष्ठ (१४११-६६) एक पराक्रमी ऴाशक था जजशिे शम्पण ू व श्रीऱॊका को अपिे अधीि कर सऱया । ळो कऱा का भी बडा प्रऴॉशक था और उशिे कई कषळयों को प्रोत्शाषि दिया । उशक े ऴाशिकाऱ में राजधािी कोट्टे कर िी गई जो जयळधविपर े िाम शे आज भी श्रीऱॊका की प्रऴाशतिक राजधािी षै (कोऱॊबो क े ु ाक पळ ू ी भाग में) । .खाशकर अिर े इऱाक े में । ु ाधपर ु ाक उत्िर पजश्चम भारि में कम्बोजों क े पडोशी थे. शॊघसमत्र क ृ । अपिे शाथ जम्बक े सऱए मषत्ळपण ू ोऱा (शजम्बसऱिर ु ै ) ऱाया । यष शमय थेराळाि बौद्ध धमव िथा श्रीऱॊका िोिो क ू व षै प्रसशद्ध चोऱ राजा एऱारा िे २१५ ईशापळ े पत्र ू व शे ईशापळ ू व १६१ ईस्ळी िक राज ककया । कळण दटस्शा क ु ित् ु िु गेमि ु ु िे उशे ईशापळ े अिशार १५ ळवव क े शॊघवव क े बाि षरा दिया । इशक े बाि पाॊच िसमऱ ू व १६१ ईस्ळी में. शे भी इिका व्यापाररक शम्बॊध था और उिक े व्यापाररक उपतिळेऴ मध्यकाऱ[शॊपादिि करें ] िे ळिमषपया दटस्शा (ईशापळ े शॊबध ॊ राजा अऴोक शे थे जजशक े कारण उश िौराि ू व २५० इस्ळी .ईशापळ ू व २१० इस्ळी) क श्रीऱॊका में बौद्ध धमव का आगमि और प्रशार षुआ । अऴोक क े पत्र े शाथ . जोकक भी इि सेत्रों में थे .शॊयोग शे षुआ था । उशक े ळॊऴज सशॊषऱी कषऱाए । षॊ ऱाॊकक ळॊऴािग ॊ ािों शे पिा चऱिा षै कक ु ि ळैहातिक अिश ु ध षळवय षै । यषाॊ क े ऱोग एक समथश्रि जाति क े ऱोग षैं और इिका भारिीय उपमषाद्ळीप क े ऱोगों शे शम्बॊध अब भी षळळाि का उत्िर भारि क े ऱोगों क े आगमि शे और िक्षसण भारिीय शाम्राज्यों की ऴजक्ि बढ़िे शे द्ळीप पर िक्षसण भारिीय आक्रमण भी ऴरु े आशपाश ु षुए । शेिा और गट्ट ु का िो प्राचीि िसमल ऴाशक थे जजन्द्षोंिे िश ू री शिी इशापळ ू वक षै । ऴाशि ककया । इिक े अजस्ित्ळ का प्रमाण िो क ु छ िषीॊ समऱिा षै पर मषाळॊऴ में इिका अप्रत्यस जजक्र ककया गया इशी प्रकार प्राचीि भारि क े मषाजिपि कम्बोजों शे भी इिका शम्बॊध ऱगाया जािा षै । यळि (ग्रीक).

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