खिलौना माटी का

-अभिषेक अंजन

२०१३

! ननकर ऩड़ा स्क े ू गॊगा नदी क ू र से दय सीढ़िमों से उतयते हुए जफ वह ककनाये तक ऩहुॊचा . मह एक बमानक तूफ़ान था। . औय हवा भें होते हुए तेज़ धाय क े साथ चर ननकरी। शामद याभू ने सही कहा था . तो दे खा की धया का प्रवाह कर की तुरना भें तेज़ है । कापी दे य तक दे खने क े फाद भछ ु वाये (याभू) ने कौशर से फोरा . तफ़ ू ान बी आवै को है . रेककन ७ सार ककनाये भछलरमाॉ का कौशर कहाॉ भानने वारा था .."का दे खत हो कोसर फाफू .अम्भा दे खने को। ने आज ऩाॊचवी फाय कहा था की स्क ू र से सीधे घय को आना. क ु छ ऩता ही ना चरा। भछ े धल े ऩास भें यहने वारी ु आयों क ू भ र कऩड़े हवा भें उड़ते ढ़दखाई ऩड़ यहे थे।नदी क बाबी जी की छत ऩय प ै री फनायसी साड़ी ने बी उनसे अरववदा कहा . बगवानौ सफ दश् ु भनी गयीफन ऩे ही ननकरत हैं " रोगों से भुॊह नछऩाने वारा कौशर हभेशा की तयह चऩ ु यहा। क े ु छ दे य फाद उसने अऩना फस्ता उठामा औय घय चरने को तैमाय ही हुआ . की नदी क स्तय से ६ सीढ़ढमाॊ ऊऩय उसक े ऩैयों को तेज़ रहयों ने छ े ककनाये फैठा याभू कफ ु आ। नदी क सीढ़ढमाॊ चिकय ऊऩय जा चक ु ा था. आज तीनै प ॊ सी फस ..

स्नान कय रीजजमे ! आऩ गॊदे हो गए हैं। " तौलरमा रेकय स्नानागाय की तयप फिते हुए जफ कौशर ने यसोई भें ऩटक -ऩटक कय की गरी क े फहते हुए गॊदे ऩानी भें आधा डूफ कय धोए जा यहे फततनों की आवाज़ सुनी तो सभझ गमा की आज यसोई भें गभी ज्मादा है . इसलरए नाश्ते क े लरए अम्भा से क ु छ फोरना ठीक नहीॊ है । .कौशर बी ऊऩय याभू क े ऩास भॊढ़दय क े ओट भें फै ठ गमा। रेककन अफ घय क लरए दे यी हो यही थी। अगय फारयश हो गमी तो भुहल्रे जाना ऩड़ेगा। वह भॊढ़दय क े ओट याभू को याभ याभ कहते हुए ननकरा औय घय की तयप दौड़ा। इसी प्रकाय दौड़ते हुए उसे २ ककरोभीटय का यास्ता तम कयना था। फारयश की छोटी छोटी फॊद ू ों ने बी अऩना भूसराधाय रूऩ ढ़दखाना शुरू ककमा। "फेटा जी ! इतना सभम कहाॉ व्मतीत कय ढ़दमा आऩने ? आऩकी भाता जी ऩये शान हो यही थीॊ। " दयवाजे ऩय बीगते हुए कौशर क े वऩताजी फोरे। "जाइए.

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