कबीर दास जी क े दोहे

फय ु ा जो दे खन भैं चरा, फय ु ा न मभमरमा कोम, जो ददर खोजा आऩना, भझ ु से फय ु ा न कोम। ऩोथी ऩद़ि ऩद़ि जग भआ ु , ऩॊडडत बमा न कोम, ढाई आखय प्रेभ का, ऩ़िे सो ऩॊडडत होम। साधु ऐसा चादहए, जैसा सऩ ू सब ु ाम, साय-साय को गदह यहै, थोथा दे ई उडाम। ततनका कफहुॉ ना तनन्ददमे, जो ऩाॉवन तय होम, कफहुॉ उडी आॉखखन ऩडे, तो ऩीय घनेयी होम। धीये -धीये ये भना, धीये सफ क ु छ होम, भारी सीॊचे सौ घडा, ॠतु आए पर होम। भारा प े यत जुग बमा, फपया न भन का प े य, कय का भनका डाय दे , भन का भनका प े य। जातत न ऩछ ू ो साधु की, ऩछ ू रीन्जमे ज्ञान, भोर कयो तयवाय का, ऩडा यहन दो म्मान। दोस ऩयाए दे खख करय, चरा हसदत हसदत, अऩने माद न आवई, न्जनका आदद न अॊत। न्जन खोजा ततन ऩाइमा, गहये ऩानी ऩैठ, भैं फऩय ु ा फड ू न डया, यहा फकनाये फैठ। फोरी एक अनभोर है, जो कोई फोरै जातन, दहमे तयाजू तौमर क े , तफ भख ु फाहय आतन। अतत का बरा न फोरना, अतत की बरी न चऩ ू , अतत का बरा न फयसना, अतत की बरी न धूऩ।

प ू ल्मा सो क ु भराहीॊ। जो चचतनमा सो ढही ऩडे.तनॊदक तनमये याखखए.न काहू से फैय. जो उग्मा सो अदतफै. अजहूॉ सो ऩहरा ददन. क ॊु भें क ु छ भह ु छ गोद. एक ददना तछऩ जाएगा. हाड जरै ज्मूॊ राकडी. क ै घय क ै ऩयदे स. दहदद ू कहें भोदह याभ पऩमाया. कही कफीय चेत्मा नहीॊ. जफ गण ु को गाहक मभरे. क े स जरै ज्मूॊ घास. फगर ु ा बेद न जानई. जो आमा सो जाहीॊ। झूठे सख ु को सख ु कहे. फहुरय न रागे डाय। कफीया खडा फाजाय भें. तफ कौडी फदरे जाई. ऩानी क े या फद ु फद ु ा. जफ गण ु को गाहक नहीॊ. बफन ऩानी. आऩस भें दोउ रडी-रडी भए ु .ज्मों ताया ऩयबात. खरक चफैना कार का. कार गहे कय क े स. तफ गण ु राख बफकाई. साफन ु बफना. तनभमर कये सब ु ाम। दर म भानष ु ब ु जदभ है. भानत है भन भोद. भोती बफखये आई. ना काहू से दोस्ती. हॊ सा चुनी-चुनी खाई. तक ु म कहें यहभाना. बमा कफीय उदास. दे ह न फायम्फाय. ना . ऑ ॊगन क ु टी छवाम. भाॊगे सफकी खैय. अस भानस ु की जात. तरुवय ज्मों ऩत्ता झडे. कफीय रहरय सभॊद की. कफीय कहा गयबफमो. भयभ न कोउ जाना। कहत सन ु त सफ ददन गए. सफ तन जरता दे खख करय. उयखझ न सय ु झ्मा भन. जाने कहाॉ भारयसी.

भन को बफयरा कोई. तन को जोगी सफ कयें . .ऐसा कोई ना मभरे. कय गदह काढै क े स. जे भन जोगी होइ. बौ सागय भें डूफता. सफ मसपि सहजे ऩाइए. हभको दे उऩदे स.

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