चक्र

व्माख्मा

क्राउन चक्र Crown Chakra
Cosmic Consciousness Center,के रूऩ भें बी जाना जाता है :
ब्रहभाॊडीम चेतना केंद्र, केंद्र, सहस्राय "भैं AM"
शरीर, मन संघों:
स्थान: ससय के ऊऩय
रं ग: फैंगनी
शरीर के हिस्सों: इस चक्र ससय के ऊऩय, भस्ततष्क, औय ऩूये तॊत्रिका तॊि
के साथ जड
ु ा हुआ है

अंत: स्रावी ग्रंथथ: ऩीननमर ग्रॊथथ
भावना: सहानुबूनत, एकता, आऩ उन्हें जा यहा है , उन्हें अॊदय के रूऩ भें
अगय ककसी अन्म व्मस्तत के अनब
ु व का साभना की नब्ज.

चेतना: क्राउन चक्र एकता मा अरगाव की धायणा के साथ सॊफॊध हभायी
चेतना के उस हहतसे का प्रनतननथधत्व कयता है . रूट चक्र भाॉ ऩथ्
ृ वी के

साथ हभाये सॊफध
ॊ हदखामा है , उसी तयह इस चक्र तवगग भें हभाये पऩता

के साथ हभाये सॊफध
ॊ ों को दर्ागता है . मह बगवान के साथ, अॊतत् हभाये

जैपवक अथधकाय के साथ हभाये सॊफध
ॊ ों के सरए भॉडर फन जाता है जो
पऩता, औय के साथ हभाये सॊफध
ॊ का प्रनतननथधत्व कयता है . मह आत्भा
के ततय ऩय है .

एक अऩने पऩता से अरग होने की बावना का अनब
ु व हो, वे भुकुट चक्र
फॊद है, औय वे एक खोर भें कय यहे हैं के रूऩ भें , अरगाव औय

. इस प्रकाय सबी से जड ु ा. इसके अरावा व्हाइट राइट फुरामा. सोचा प्रकक्रमाओॊ अकेरेऩन की बावना का औथचत्म सात्रफत कयने औय फनाए यखने के सरए कयते हैं.अकेरेऩन की बावना का अनब ु व है. तीसयी आॉख. अऩने होने के गहये हहतसे भें कय यहे हैं जफ एक तमा अनब ु व है जो इनय राइट. Metaphysically. इस ऩयू े बौनतक जगत फनामा है जो की सफसे सक्ष् ू भ तत्व भाना जाता है . इस चक्र से दे खने का एक सऩना सऩना दे ख यही है औय भाना जाता है कक सफ अऩने ही चेतना का ससपग एक पवतताय है कक साकाय एक सऩने दे खने की तयह. . औय उनके आसऩास के रोगों के साथ सॊऩकग भहसस ू साथ कहिनाई हो यही है . तत्व: वे फुपि के साथ चभक चेतना का एक त्रफॊद ु के रूऩ भें . औय बी र्ासभर है . मन संघों: स्थान: भाथे का केंद्र रं ग: इॊडडगो. अजन चक्र Brow Chakra चेतना जागरूकता केंद्र. पवडॊफना सबी फनाने एकर चेतना के रूऩ भें एक तव दे ख. सभडनाइट ब्रू शरीर के हिस्सों: इस चक्र भन्मा जार के साथ. अजन: के रूऩ भें बी जाना जाता है शरीर.

हभाये जीवन को ननदे र् है कक चेतना के ततय ऩय है . औय वाततव भें हभाये कामों औय. ऩेर्नीगोई (दृस्ष्ट का अॊत्कयण). . ध्वनन से एक फाहय की घटनाओॊ ऩय ननबगय नहीॊ कयता है कक अॊदय सुनता. औय हभ आध्मास्त्भकता औय आध्मास्त्भक दृस्ष्टकोण तमा पवचाय के साथ. मह एक उन घटनाओॊ भें र्ासभर प्राणणमों के फीच सह ननभागण की असबव्मस्तत के रूऩ भें बौनतक दनु नमा भें घटनाओॊ को दे खता है कक इस दृस्ष्टकोण से बी है . मह हभायी वाततपवक भॊर्ा ऩाए जाते हैं जहाॊ जगह है. अतसय ऩायॊ ऩरयक थचककत्सा द्वाया एक योग की स्तथनत ऩय पवचाय ककमा. आहद र्ासभर हैं चेतना: इस चक्र हभ आत्भा को पोन होने के नाते के गहये आॊतरयक ततय के साथ जड ु ा हुआ है. हभाये ऩस्चचभी ऩयॊ ऩयाओॊ अवचेतन मा फेहोर् कयने ऩय पवचाय ककमा जा यहा है कक गहयी बाग से दे खने की फात है . तत्व: इनय ध्वनन. ऩयोऺश्रवण (सन ु वाई के अॊत्कयण). मह बी आगे आध्मास्त्भक पवकास के सरए एक आवचमक र्तग के रूऩ भें ऩव ू ी ऩयॊ ऩयाओॊ से दे खा जाता है .भाथे औय भॊहदयों के साथ जड ु ा हुआ है अंत: स्रावी ग्रंथथ: पऩट्मट ू यी ग्रॊथथ भावना: अनतरयतत सॊवद े ी फोध. उदाहयण के सरए. को इसी बीतयी इॊहद्रमों के सबी. एक साथ आत्भा से आत्भा सॊचाय भाना जाता है जो फाहम इॊहद्रमों. मे. clairsentience (तऩर्ग का अॊत्कयण).

भावना: सन ु वाई की नब्ज अंत: स्रावी ग्रंथथ: थामयॉमड ग्रॊथथ चेतना: व्मतत कयने औय प्राप्त कयने के ऩहरओ ु ॊ." इस चक्र एक के फाद एक के रक्ष्मों को प्रकट दे खता है स्जसभें एक इष्टतभ प्रवाह भें एक गाइड जो एक अॊतऻागन. एक सॊगीतकाय सॊगीत खेर. एक नतगकी नत्ृ म. एक कराकाय के थचि के रूऩ भें . व्मतत कयने के सरए एक पाभग का उऩमोग कय यहा था औय तमा फाहय कयने के सरए राने के रूऩ भें हो सकता है बीतय. जताते भें के रूऩ भें प्राप्त कयने के सरए सॊफॊथधत है "ऩूछो. मन संघों: स्थान: गरे के फेस रं ग: आकार् नीरा शरीर के हिस्सों: इस चक्र गरे औय गदग न को ननमॊत्रित कयता है. मह फाहु मा गबागर्म ग्रीवा के जार के साथ जड ु ा हुआ है . जाहहय कयते एक तमा चाहता है औय एक का भानना है तमा सॊवाद तथापऩत कयने.गले चक्र Throat Chakra Cornucopia केंद्र. सन ु ने के साथ जड ु ा हुआ . Visuddha: के रूऩ भें बी जाना जाता है शरीर. मा मह एक करात्भक असबव्मस्तत हो सकता है . औय तु प्राप्त कये गा. औय हाथ औय हाथ.

मह सफसे सक्ष् ू भ बौनतक तत्व के रूऩ भें गहये अॊतरयऺ से भेर खाती है . के रूऩ भें ब्रहभाॊड की फहुतामत को तवीकाय कयने के सरए आवचमक त्रफना र्तग प्राप्त कयने के ऩहरू है . औय मह अन्म खकु पमा के साथ एक फातचीत के अनब ु वों भें जो चेतना के ऩहरे ततय है .आध्मास्त्भक के दृस्ष्टकोण से. िार्ट चक्रHeart Chakra सरपवॊग प्माय केंद्र. तत्व: ईथय. औय मह ब्रहभाॊड के सबी ऩय अऩनी ओय से कोई प्रमास के साथ अऩने सबी की जरूयत प्रदान कयता है कक रगता है . फहुतामत. र्ायीरयक ततय ऩय. इस चक्र बौनतक दनु नमा भें ककसी के रक्ष्मों की ऩूनतग प्रकट. फनाने. उनके आसऩास खेर यहा है कक कपल्भ के साथ एक व्मस्तत के रयचते का प्रनतननथधत्व कयता है . यचनात्भकता से सॊफॊथधत है . मह एक खकु पमा सीधे एक अन्म ततय भानते. अनाहत: के रूऩ भें बी जाना जाता है शरीर. Metaphysically. मह बौनतक वाततपवकता प्रकट होता है स्जस ऩय भैहितस का प्रनतननथधत्व कयता है .है . बौनतक दनु नमा औय आत्भा की दनु नमा के फीच पवदे र्ी के रूऩ भें . इस चक्र के साथ जड ु ा हुआ है. इससरए. मह उनके अॊतरयऺ. मन संघों: स्थान: छाती का केंद्र रं ग: ऩन्ना ग्रीन . मह अनग्र ु ह का एक याज्म है . Metaphorically.

भणणऩुय: के रूऩ भें बी जाना जाता है . हवा के अॊगों. भाता - पऩता. अंत: स्रावी ग्रंथथ: थाइभस ग्रॊथथ. जफ एक गरे. साॊस रेने भें कहिनाई. जैसे साथी. व्मस्तत को अऩने जीवन र्ैरी है तमोंकक साभास्जक न्माम की अतसय. साथ ही पेपडों औय ऩूये सीने ऺेि के साथ जड ु ा हुआ है . मा पेपडों के साथ. चेतना: प्माय की धायणाएॊ. एक हाटग चक्र गनतपवथध है . बाई फहन. मह प्रबापवत होता है जो प्रनतयऺा प्रणारी है के फाद से एड्स. एक दस ू ये के र्यीय के अॊदय व्मस्तत तमा रगता है के फाये भें ऩता है . वे प्माय उन से उन्हें अरग कयती है कक रगता है . हाटग चक्र भें तनाव का सॊकेत है .शरीर के हिस्सों: इस चक्र रृदम औय यतत सॊचाय प्रणारी. भावना: तऩर्ग की बावना. इससरए. औय रृद्तनामुजार. हवा के साथ एक व्मस्तत के रयचते को प्माय के साथ अऩने सॊफॊधों को दर्ागता है . अऩने हदर. गरे. र्यीय. प्रनतयऺा प्रणारी को ननमॊत्रित. औय वे आऩ अऩने र्यीय के अॊदय तमा रगता है के फाये भें ऩता कय यहे हैं. की अनब ु ूनत से अरग अॊदय व्मस्तत से सॊफॊथधत के अऩने ऩहरू भें अऩने तवमॊ के र्यीय से भहसस ू कयता है . छुआ जा यहा है के फाये भें सॊवद े नर्ीरता रृदम चक्र सॊवेदनर्ीरता को दर्ागता है . फच्चों के कयीफ रोगों के साथ सॊफॊधों (सॊफॊथधत). प्माय के व्मस्तत के पवचायों के साथ एक सभतमा है . औय र्यीय के अॊदय व्मस्तत से सॊफॊथधत की बावना है . तत्व: एमय मणिपुर चक्र Solar Plexus Chakra ऩावय सेंटय. औय अनब ु नू त के फाये भें एक अथधक है जो ऑयें ज चक्र.

मन संघों: स्थान : सौय जार रं ग : ऩीरा शरीर के हिस्सों : इस चक्र के साथ जड ु े र्यीय के कुछ हहतसों भाॊसऩेसर्मों प्रणारी. सूयज. मा अहॊ काय कॉर होने के ततय के साथ जड ु ा हुआ है . तो.होने का आसानी इस चक्र के साथ जड ु े चेतना के हहतसों र्स्तत.भानससक गनतपवथध औय भानससक र्यीय बी इस चक्र के साथ जड ु ा हुआ है . मा तवतॊिता के फाये भें पवर्ेष सॊवेदनर्ीरता है कयने के सरए दे खा जा सकता है .शरीर. एक प्रणारी के रूऩ भें त्वचा. तत्व : आग. स्जगय. ऑरें ज चक्र Hara Chakra . औय सौय जार के ऺेि भें अन्म अॊगों औय ग्रॊथथमों भें र्ासभर हैं. सयू ज के फाये भें सॊवद े नर्ीर कोई है . राऺणणक रूऩ भें चेहया एक दनु नमा हदखाता है . एक व्मस्तत आग. ऩेट. त्रफजरी. तवतॊिता. मा ननमॊिण. सौय जार चक्र बी हभ व्मस्ततत्व. इस चक्र का प्रनतननथधत्व कयता है कक उनकी चेतना के कुछ हहतसों के साथ व्मस्तत के सॊफॊध भें अऩनी सभानताएॊ हैं कयने के सरए दे खा जा सकता है . एक खुद कयने भें सऺभ है स्जस आसानी के साथ सॊफध ॊ पवचायों भें र्ासभर हैं. सौय जार. मा सम ू ग के साथ है रयचता. ननमॊिण. अंत: स्रावी ग्रंथथ : अग्नन्मार्म नब्ज : दृस्ष्ट चेतना : . इसके अरावा प्रनतननथधत्व कयने दृस्ष्ट के अॊग के रूऩ भें आॉखें औय चेहये . फडी आॊत.

मौन अॊगों. के फाये भें तमा र्यीय चाहता है औय जरूयत है . मा फच्चे ऩैदा कयने के साथ जड ु े उनके चेतना के कुछ हहतसों के साथ उनके रयचते का एक प्रनतत्रफफ ॊ है . तत्व: जर रूर् चक्रRoot Chakra . मानी बोजन. औय मह सख ु द ऩाता है तमा. बूख चेतना: इस चक्र बोजन औय सेतस के साथ सॊफध ॊ चेतना के बागों के साथ जड ु ा हुआ है . मह चक्र बी बावनात्भक र्यीय. तो ऩानी के साथ व्मस्तत का सॊफॊध इस चक्र. औय अऩनी बावनाओॊ को भहसूस कयने के सरए व्मस्तत की इच्छा के साथ जड ु ा हुआ है . मह होने के नाते अॊदय कयने के सरए र्यीय के सॊचाय के फाये भें है. प्रीहा चक्र. मन संघों: स्थान: ऩेट के केंद्र रं ग: नायॊ गी शरीर के हिस्सों: प्रजनन प्रणारी. सरॊग. Svadhisthana: के रूऩ भें बी जाना जाता है शरीर. काि का जार अंत: स्रावी ग्रंथथ: gonads भावना: तवाद की नब्ज. फच्चों के सरए व्मस्तत की ऺभता बी इस चक्र के साथ जड ु ा हुआ है .सनसनीखेज केंद्र. हाया. इस चक्र के साथ जड ु े ऩानी के तत्व के साथ एक तऩष्ट सॊफॊध नहीॊ है .

एक आत्भ एक इनय सॊतुष्ट होने के नाते की अनभ ु नत के अथग भें . इसके अरावा नाक. पवचवास. आहद). गुदा औय मौन अॊगों के फीच त्रफॊद ु रं ग: रार शरीर के हिस्सों: रसीका प्रणारी.ऩैयों. औय कभ extremities (ऩैयों . भर ू ाधाय: के रूऩ भें बी जाना जाता है शरीर / मन संघों: स्थान: भर ू ाधाय. कॊकार प्रणारी (दाॊत औय हड्डडमों). बौनतक र्यीय के साथ सॊफध ॊ . औय धयती भाता के साथ. नौकयी. इस चक्र के द्वाया ननमॊत्रित र्यीय के कुछ हहतसों भें रऺण मा तनाव के इस चक्र से सॊफॊथधत व्मस्तत की चेतना के कुछ हहतसों भें तनाव का सॊकेत सभरता है . तत्व: ऩथ् ृ वी . व्मस्तत ऩथ्ृ वी ऩय होने के फाये भें कैसा रगता है . प्रोतटे ट ग्रॊथथ ऩरु ु षों भें . भि ू ार्म औय उन्भर ू न प्रणारी. टखनों. इस चक्र को बी अऩनी भाॊ के साथ एक व्मस्तत के सॊफध ॊ को दर्ागता है. औय अस्ततत्व के साथ जड ु .े अंत: स्रावी ग्रंथथ: अथधवत ृ क ग्रॊथथमों भावना: गॊध चेतना: सुयऺा. त्रिक जार. से अथधक है कक आतॊकी. घय. अस्ततत्व. महाॊ तनाव एक साभान्म अवधायणात्भक कपल्टय के रूऩ भें असयु ऺा की बावना के रूऩ भें अनब ु वी है . अथधक तनाव डय के रूऩ भें अनब ु वी है . ऩैसे के साथ रयचते. महाॉ औय अफ भें उऩस्तथत होने के सरए आधारयत होना कयने की ऺभता. भनुष्म होने की अनभ ु नत दे ने की ऺभता. तमोंकक मह गॊध की बावना का अॊग है. मा अस्ततत्व के सरए एक खतये के रूऩ भें अनब ु वी है .सयु ऺा केंद्र.

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