महायान

बौद्ध धमम की शाखा नहीं
डॉ. एल. आर. अहिरवार
महायान बौद्ध धमम की शाखा नहीं है. महायान बौद्ध धमम के साथ विश्वासघात है. महायान ने
बौद्ध धमम को दरवकनार वकया. महायान ने बौद्ध धमम को प्रदूवित वकया. महायान ने कालाांतर
में ब्राह्मण धमम के साथ तालमेल बैठाया. महायान ने बद्ध
ु को ईश्वर बनाकर पेश वकया.
महायान ने बद्ध
ु की पूजा शरू
ु करिायी. महायान ने बद्ध
ु की मूवतम की पूजा प्रारांभ की. बद्ध
ु को
गणु -प्रदाता के रूप में पूजा जाने लगा. बद्ध
ु से मन्नतें माांगी जाने लगीं. महायान ने मानि बद्ध

को वहन्दू देिता बना वदया. महायान ने बद्ध
ु के ऐवतहावसक महत्ि को धोकर उन्हें दैिीय और
अलौवकक बना वदया. महायान बौद्ध धमम की शाखा है ये सत्य नहीं है बवकक महायान वहन्दू
धमम का एक पांथ है. महायान िैवदक धमम का एक पांथ है. िी.डी.सािरकर तथा दलाई लामा
बद्ध
ु -धम्म को वहन्दू धमम की शाखा मानते हैं, जबवक बद्ध
ु -धम्म वहन्दू धमम की शाखा नहीं है, ये
शाखा महायान है. येसा होने से बड़ा भ्रम पैदा हुआ है. आवद-बद्ध
ु , मूल बद्ध
ु थेरिादी,
श्रािकिादी बद्ध
ु कहे जाने लगे.
मूल बद्ध
ु -धम्म का हत्यारा, महायान, कहााँ से आया? महायान की पष्ठृ भूवम क्या है? महायान
उत्तरोत्तर शविशाली कै से हुआ? आइये इस वििय पर मनन करें.
बद्ध
ु इस धरती पर अस्सी साल रहे. बद्ध
ु का जन्म 563 ई.पू. में तथा मत्ृ यु 483 ई.पू. में हुई
थी. उन्होंने स्ियां अपने धम्म का 45 साल तक प्रचार-प्रसार वकया. करीब आधी शताब्दी,
उन्होंने भ्रमण कर-कर के लोगों को अपने धम्म की रौशनी दी. बद्ध
ु धम्म के कारण अांध-

विश्वास, असमानता, अज्ञान, हीनता कई शतावब्दयों तक यहााँ से दरू रहे. बद्ध
ु ने ईश्वर,
आत्मा, स्िगम , नरक, पनु जम न्म में कभी विश्वास नहीं वकया. लेवकन उन्होंने समाज को
योजनाबद्ध तरीके से समझाया वक दुःु ख से कै से मवु ि पाई जा सकती है. उन्होंने लोगों को
सांगवठत वकया, जो विन्न-वभन्न पड़े हुए थे. बद्ध
ु ने िैज्ञावनक, आवधकाररक, िास्तविक और
तावकमक ढांग से लोगों को समझाया वक िे कै से दुःु ख से मवु ि पाकर प्रसन्न और शाांवतपूणम
जीिन जी सकते हैं. इसके वलए उन्होंने कभी स्ियां को मोक्षदाता, पैगम्बर, ईश्वर या देिता
नहीं कहा. उन्होंने कभी वनरथम क प्रदशम न या विज्ञापन नहीं वकया.
बद्ध
ु ने इस बात पर जोर वदया वक वकस तरह मानि दुःु ख के खतरों से दूर रह सकता है.
उन्होंने हमेशा मनष्ु य की तरह वशक्षा दी, और दख
ु ों को दरू करने के वलए मानिीय तरीकों को
इस्तेमाल वकया. उन्होंने दुःु ख को समूल नष्ट करने का मागम बताया. समझदार, बवु द्धमान,
तकमशील व्यवि की तरह उन्होंने बताया वक धम्म के मागम पर चलकर आदमी कै से तेजस्िी
और भद्रपरुु ि बन सकता है. विशद्ध
ु दाशम वनक की तरह सत्य के मागम पर उनका प्रिचन,
उनका आत्मविश्वास इतना परम था वक लोग उनके बताये धम्म को मानने और धम्म-मागम पर
चलने के वलए वििश हो जाते थे. सत्य स्ियां शवििान होता है, इसको वकसी पैगम्बर, ईश्वर
या वकसी देिदतू की आिश्यकता नहीं होती. सत्य को वकसी ईश्वर या पैगम्बर की वसफाररश
की जरूरत नहीं होती. सत्य अपने पैरों पर स्ियां चलता है. सत्य को वकसी के सहारे की
जरूरत नहीं होती. बद्ध
ु ने लोगों को उनके जीिन में आने िाले दख
ु ों को दरू करने के उपाय
बताये. उनके प्रिचनों में कोई अलौवकक या गूढ़ता नहीं थी, बद्ध
ु ने जीिन की िास्तविक
कवठनाइयों और उनके समाधान को बड़े पारदशी और भरोसेमदां तरीके से रखा. उन्होंने
“जन-ककयाण” तथा “अत्त दीपो भि” पर लोगों को व्यिहाररक ज्ञान वदया.
बद्ध
ु की बताई बातें लोग पूरी तरह समझते थे. बहुत लोगों ने िणम भेद के कारण उत्पन्न अपनी
वजन्दगी के तमाम दख
ु की िजह से उन्हें सम्मानपूिमक जीिन
ु ों से िुटकारा पा वलया था. बद्ध
जीने का मौक़ा वमला था. लोग िैवदक धमम के िणाम श्रम के विपरीत बग़ाित पर उतर आये.
लोगों ने महसूस वकया वक बद्ध
ु के कारण वमले, इस स्ितांत्र िातािरण में उनके काम करने के
हुनर में अभूतपूिम िवृ द्ध हुई है. बद्ध
ु के कारण लोगों में आत्म-स्िावभमान बढ़ा. बहुत से लोगों ने
िैवदक धमम द्वारा बताये अपने परम्परागत कायम को िोड़ वदया. बहुत से लोगों की वजन्दागी
उनके सतत और कठोर उद्यम / चेष्टा से प्रकावशत हो उठी. बहुत से लोगों ने जावत के बोझ

को उतार फें का. एक नत्ृ याांगना “शीलिती” का पत्रु “जीिक” प्रवसद्ध और वनपणु िैद्य बन गया,
स्िच्िक सनु ीत, उपाली नाई, अिूत सोपक और सवु प्रया, वनम्नजावत समु ांगल, कुष्ठ-रोग
प्रभावित सप्रु बब्ु भा तथा और भी बहुत से लोगों ने धम्म अांगीकार कर वलया. बद्ध
ु ने डाकू
अांगवु लमाल, बहुत से अनाथ और अिणम लोगों को धम्म-दीवक्षत वकया. इन सभी का जीिन
बद्ध
ु के कारण प्रकावशत हो उठा.
ये िैवदक धमम की मान्यताओां के विरुद्ध न्याय, सत्य, मानिता का धम्म-यद्ध
ु था. धम्म के
फै लने से असमानता को अपना आदशम मानने िाले िैवदक लोग विन्न-वभन्न होने लगे. इन
लोगों ने अपने परम्परागत िैवदक जीिनशैली को नहीं िोड़ा. इन लोगों को ये महसूस हुआ
वक बद्ध
ु और धम्म उनके वलए खतरनाक हैं. फलस्िरूप बद्ध
ु के जीिनकाल में ही उनके कई
शत्रु बन गए. िां दा तथा उपनांदा बद्ध
ु के प्रवत सदा शत्रतु ापूणम रहे. देिदत्त बद्ध
ु की ख्यावत को
देखकर बद्ध
ु के प्रवत और अवधक ईष्याम लु हो गया. वबवम्बसार के पत्रु अजातशत्रु की मदद से
देिदत्त ने बद्ध
ु को मरिाने के कई असफल प्रयास वकये. लेवकन देिदत्त वभक्खु सांघ को
विभावजत करने में सफल हुआ. बद्ध
ु ने लोगों को नैवतक मूकयों पर चलने के वलए हमेशा जोर
वदया. नैवतक मूकयों पर चलना कई लोगों को कवठन लगा. नैवतक मूकयों पर चलना कई लोगों
को सजा की तरह लगा. कई लोगों को नैवतक मूकयों पर चलना अपनी आज़ादी में बाधक
लगा. ईश्वर और आत्मा में विश्वास न करने की िजह से कुि लोगों को धम्म रास नहीं आया.
सभु द्र उनमें से एक था वजसे बद्ध
ु की मत्ृ यु से प्रसन्नता वमली.
अब िे लोग सांगवठत होने लगे, वजन्हें धम्म पसांद नहीं आया था. उन्होंने मूल धम्म त्यागकर
“महासाांवघक पांथ” बना वलया. “महासाांवघक पांथ” को “महायान पांथ” में बदल वदया गया. ये
कायम बद्ध
ु के महापररवनिाम ण के करीब 100 ििम बाद इन लोगों द्वारा िैशाली में आयोवजत
दूसरे बौद्ध अवधिेशन में वकया गया. महायान उन लोगों ने पैदा वकया वजन्हें बौद्ध धम्म रास
नहीं आया. महायावनयों द्वारा बद्ध
ु के मूल वमशन को एक तरफ रख वदया गया. महायावनयों ने
वत्रवपटक की पाली की मूल इबारत को सांस्कृत में अनिु ावदत करके आम लोगों को अपठनीय
बना वदया. इस तरह धीरे-धीरे पाली सावहत्य नष्ट करके इन लोगों ने पाली भािा को वनबम ल
बनाकर धम्म को विकृत वकया.
बद्ध
ु ने लोगों को बताया वक िे इांसान हैं अतुः उन्हें ईश्वर, पैगम्बर या देिदूत न मानें. लेवकन
महायावनयों ने उन्हें भगिान बना वदया. महायावनयों ने बद्ध
ु को नावस्तक बद्ध
ु से आवस्तक
बद्ध
ु बना वदया. बद्ध
ु पूजा और उपासना के विरुद्ध थे, लेवकन महायावनयों ने उनकी पूजा

उपासना प्रारांभ कर दी. दस

ू री शताब्दी में एक ब्राह्मण नागाजम नु ने महायान अपनाया और बद्ध
का एक विशाल स्मारक बनिाया. तीसरी शताब्दी में पेशािर के एक ब्राह्मण पत्रु असांग ने
महायान अपनाया और महायान को योगविद्या से जोड़ वदया. महायान का जन्म हालावाँ क
आन्र प्रदेश में हुआ लेवकन िह शीघ्र ही पांजाब, अफगावनस्तान, मध्य एवशया, वतब्बत, चीन,
कोररया, जापान, वसवक्कम, भूटान, ताइिान, नेपाल में फै ल गया, जहााँ मूवतम पूजा, ध्यान, तांत्र
साधना महायान का वहस्सा बन गए. शून्यिाद जो बाद में वहन्दिु ाद का अद्वैतिाद बना, (ब्रह्म
सत्य है, जगत वमथ्या है, नागाजम नु की देन है. महायावनयों ने न वसफम बद्ध
ु को ईश्वर माना
बवकक वहन्दओ
ु ां के ब्रह्मा, विष्ण,ु महेश, कावतम के, चामांडु ा, गणपवत, महाकाल आवद देिों की
पूजा भी जारी रखी. महायावनयों ने वहन्दओ
ु ां के नौग्रह, यक्ष, गांधिम , विद्याधर आवद की पूजा
भी शरू
ु कर दी. इस तरह महायान को दैविक और चमत्काररक विश्वासों में फां सा वदया गया.
बद्ध
ु के महापररवनिाम ण के बाद जातक कथाएां वलखी गयीं. यह कहावनयााँ बद्ध
ु के वपिले जन्मों
की कहावनयाां हैं. बद्ध
ु ने अपने वपिले जन्मों की सारी कहावनयााँ बता रहे हैं. उन्हीं का
सांकलन जातक-कथायें कहा जाता है. जातक कथा के अांतगम त राजा दशरथ, राम, सीता,
यवु धवष्ठर, विदरु , कृष्ण आवद पात्र रामायण और महाभारत के भी हैं. जातक कथा ईसिी
दूसरी शताब्दी में वलखी गयीं थीं. बद्ध
ु के मूल अऩीश्वरिाद, अनात्मािाद को महासाांवघकों
और महायावनयों द्वारा वनकाल वदया गया. बोवधसत्ि की अिधारणा महायान पांथ से आयी
और जातक कथायें के िल बोवधसत्ि की हैं. जातक कथायें बद्ध
ु के मूल वशक्षाओां के अनरू
ु प
नहीं हैं. बद्ध
ु आत्मा में विश्वास नहीं करते थे. तो वफर िे क्यों पनु जम न्म में विश्वास करने लगे?
और जातक कथायें वहांदू धमम के पनु जम न्म के वसद्धाांत को प्रवतस्थावपत करती हैं. बद्ध
ु से
पहले ब्राह्मण धमम का काफी प्रभाि था. इसी प्रभाि को पूणमतुः खत्म वकया जाना ही बद्ध
ु धम्म
क्ाांवत का आदशम िाक्य था. ऊांची जावत के लोग वजन्होंने बौद्ध धमम को गले लगा वलया था, िे
बद्ध
ु के महापररवनिाम ण के बाद बद्ध
ु की मूल वशक्षाओां पर नहीं चल सके . नतीजन उन्होंने
जातक कथायें बनायीं. िक्षृ , देिता, यक्ष, भगिान की पूजा को अवधक महत्ि और दजाम
वमला. अिदांशातक और वदव्यािदान पस्ु तकों में बद्ध
ु के वपिले जन्मों की कहावनयााँ हैं.
लवलतवित्सर, जातक कथा, बद्ध
ु चररत और सद्धम्मापन्ु डाररक महायान के ग्रांथ हैं.
जातक कथाओां के सभी प्रमेय बद्ध
ु के मूल उपदेशों से वभन्न हैं. जातक कथायें विज्ञान
विरोधी और बद्ध
ु विरोधी हैं. जातक कथाओां को ब्राह्मण धमम के प्रभाि और मूकयों को

पनु ुःस्थावपत करने के वलये वलखा गया है. जातक कथाओां की उत्पवत्त महासाांवघक लोगों
द्वारा की गयी. जातक कथाओां को तब तक वलखा जाता रहा जब तक महासाांवघक
शविशाली नहीं हो गये. महासाांवघकों ने बद्ध
ु के मूल नावस्तक और अनीश्वरिादी वसद्धान्त के
विनाश की आिश्यकता को समझा. बद्ध
ु के मूल वशष्य सांसार को हकीकत समझ रहे थे.
जबवक महायावनयों ने सांसार के अवस्तत्ि को नकार वदया. उन्होंने कहा आध्यावत्मक ज्ञान
के वहसाब से विश्व और उसके सारे भौवतक पदाथम अवस्तत्िहीन हैं, ये सांसार िहृ द् शून्य है.
सांसार काकपवनक और व्यथम है. महायान पांथ ने एक जातक कथा में ये दशाम या है वक ब्राह्मण
कै से बौद्धों से उच्च हैं.
एक जातक कथा में समु ेध ब्राह्मण को स्ियां बद्ध
ु बताया गया. मोक्ष प्रावि के वलये िह तपस्या
करने वहमालय गया. हिा में उड़ते समय, िह अमरािती कस्बा पहुांचा जहाां उसे दीपाांकर बद्ध

के दशम न हुये. दीपाांकर ने उन्हें आशीिाम द वदया और इस आशीिाम द से समु ेध ब्राह्मण
बोवधसत्ि हुआ. कई जन्मों के बाद उन्हें अततुः महामाया और शद्ध
ु ोधन के माध्यम से जन्म
लेने का अिसर वमला. िह गौतम बद्ध
ु हैं. कुि कहानी ये शो करने के वलये पैदा की गयीं वक
प्रवसद्ध व्यवि वसफम ब्राह्मण समदु ाय से ही पैदा हो सकते हैं. (ब्राह्मण समदु ाय द्वारा ये फूहड़
प्रयास भी वकया गया वक डी. के . कुलकणी वशिाजी के जैविक वपता थे) ब्राह्मणों ने वशिाजी
को ब्राह्मण बनाना चाहा था, लेवकन वशिाजी के अनयु ाइयों की सतकमता से िे येसा न कर
सके . इसी तरह प्राचीन काल में महायान पांवथयों ने बद्ध
ु को भी ब्राह्मण बना वदया और
ब्राह्मणों को सिोच्च बताया. उस समय कोई विरोध न कर सका क्योंवक वशक्षा के सारे
अवधकार ब्राह्मणों के पास थे, अतुः इस िड्यांत्र का वकसी को पता नहीं चला.
बद्ध
ु िास्ति में क्या चाहते थे?
िास्तविक में बद्ध
ु एक इांसान थे. उन्होंने कहा वक उनका कभी पनु जम न्म नहीं हुआ. उन्होंने
दृढ़ता से ब्राह्मण धमम की जावत व्यिस्था का विरोध वकया. लेवकन, इसके विपरीत पर, बद्ध

पर बोवधसत्ि रूप में समु ेध ब्राह्मण की झूठी जातक कथा बनाने का आरोप ब्राह्मणों द्वारा
लगाया गया और जिाबी कारमिाई की गई. ऐसे में बद्ध
ु को जावत व्यिस्था के दायरे में रहने के
वलए मजबूर वकया गया था. इस तरह ये महायान सांप्रदाय का कायम रहा. िास्ति में, बद्ध
ु नाग
जावत से थे. नाग जावत गौरिशाली वसांधु सभ्यता से चली आ रही है. खाना-बदोश / जांगली
आयों ने नाग सभ्यता को नष्ट कर वदया और बेरहमी से नागों को मार डाला. बाकी के नाग

वहमालय की ओर चले गये और िहााँ एक साथ रहने लगे और उन्होंने गण का गठन वकया.
अनेक गणों के बीच बद्ध
ु का जन्म हुआ. यह िास्तविकता है. लेवकन महायान पांवथयों ने इन
सबसे इनकार वकया और बद्ध
ु की वशक्षाओां और उसकी तथ्यात्मक जीिनी के वखलाफ उसे
घेरा.
मूल बद्ध
ु के वनयम, जीिन की िास्तविकता पर आधाररत हैं. बद्ध
ु जीिन की िास्तविकता के
आधार और नैवतकता में विश्वास करते थे. िह समानता और भाईचारे में विश्वास करते थे.
बद्ध
ु यही मानते थे वक उनका जीिन दस
ू रे सभी इांसानों के बराबर है. जहााँ तक प्रकृवत का
सांबांध है, यह िास्ति में अभी तक का सबसे बड़ा परम सत्य है. उनकी राय में दवु नया सच
थी. सबसे बड़ी बात थी वक इन्सान का इन्सान से ररश्ता इस दवु नया में कै सा हो!
बद्ध
ु आदमी के बीच के सांबांधों, अज्ञानता, अांध विश्वास और असमानता को वमटा देना चाहते
थे और एक अलग सांस्कृवत की स्थापना करना चाहते थे वजसमें अतकमिाद और असमानता
के वलए कोई जगह न हो. िह चाहते थे वक कोई भी आदमी वकसी दूसरे का शोिण न करे.
बद्ध
ु चाहते थे वक समानता और भाईचारा मानि जावत का मख्ु य वसद्धान्त हो. बद्ध
ु , इांसानों
के आपसी ककयाण और सख
ु शावन्त के वलए आपस में अच्िे सांबांध और विश्वास स्थावपत
करना चाहते थे.

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