050 Kano Suni So

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सतगु कया सुजान
ूवचन: १ 
दनांक: ११.७.७७
ौी रजनीश आौम, पूना

जन दरया हर भ!" क#, गुरां बताई बाट।
भुला उजड़ जाए था, नरक पड़न के घाट।
नहं था राम रह/म का, म0 मितह/न अजान।
दरया सुध-बुध 5यान दे , सतगु कया सुजान।।
सतगु स6दां िमट गया, दरया संसय सोग।
औषध दे हरनाम का तन मन कया िनरोग।।
रं जी साःतर 5यान क#, अंग रह/ िलपटाय।
सतगु एकह स6द से, द/;ह/ तुरत उड़ाय।।
जैसे सतगु तुम कर/, मुझसे कछू न होए।
!वष-भांडे !वष काढ़कर, दया अमीरस मोए।
स6द गहा सुख ऊपजा, गया अंदेसा मोह।
सतगु ने करपा कर/, Cखड़क# द/;ह/ं खोह।।
पान बेल से बीछुड़ै , परदे सां रस दे त।
जन दरया हरया रहै , उस हर/ बेल के हे त।।
अथातो ूेम CजDासा! अब ूेम क# CजDासा। अब पुनः ूेम क# बात। दो ह/ बातG ह0 परमाHमा
क#--Iयान क# या ूेम क#। दो ह/ मागJ ह0 --या तो शू;य हो जाओ या ूेम मG पूणJ हो जाओ।
या तो िमट जाओ समःत-Mपेण, कोई अCःमता न रह जाए, कोई !वचार न रह जाए, कोई
मन न बचे; या रं ग लो अपने को सब भांित ूेम मG, रNी भी !बना रं गी न रह जाए।
तो या तो शू;य से कोई पहंु चता है सHय तक, या ूेम से। संत दरया ूेम क# बात करG गे।
उ;हOने ूेम से जाना। इसके पहले क हम उनके वचनO मG उतरG ...अनूठे वचन ह0 ये।

और

वचन ह0 !बलकुल गैर-पढ़े िलखे आदमी के। दरया को श6द तो आता नह/ं था; अित गर/ब
घर मG पैदा हए
ु --धुिनया थे, मुसलमान थे। लेकन बचपन से ह/ एक ह/ घुन थी क कैसे
ूभु का रस बरसे, कैसे ूाथJना पके।
बहत
ु Rार खटखटाए, न मालूम कतने मौल!वयO, न मालूम कतने पंडतO के Rार पर गए
लेकन सबको छूंछे पाया। वहां बात तो बहत
ु थी, लेकन दरया जो खोज रहे थे, उसका
कोई भी पता न था। वहां िसTांत बहत
ु थे, लेकन दरया को शाU और िसTांत से कुछ
लेना न था। वे तो उन आंखO क# तलाश मG थे जो परमाHमा क# बन गई हो। वे तो उस Vदय
क# खोज मG थे, CजसमG परमाHमा का सागर लहराने लगा हो। वे तो उस आदमी क# छाया

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मG बैठना चाहते थे Cजसके रोएं-रोएं मG ूेम का झरना बह रहा हो। सो, बहत
ु Rार खटखटाए
लेकन खाली हाथ लौटे । पर एक जगह गु से िमलन हो ह/ गया।
जो खोजता है वह पा लेता है । दे र-अबेर गु िमल ह/ जाता है । जो बैठे रहते ह0 उ;ह/ं को नह/ं
िमलता है ; जो खोज पर िनकलते ह0 उ;हG िमल ह/ जाता है । और खयाल रखो, ठWक Rार
पर आने के पहले बहत
ु से गलत RारO पर खटखटाना ह/ पड़ता है । यह भी अिनवायJ चरण है
खोज का। जब तुम खोज लोगे तब तुम पाओगे क जो गलत थे उ;हOने भी सहारा दया।
गलत को गलत क# तरह पहचाना लेना भी तो ठWक को ठWक क# तरह पहचानने का कदम
बन जाता है ।
तो गए बहत
ु Rार-दरवाजO पर। जहां जहां खबर िमली वहां गए। लेकन बात तो बहत
ु पाX,
िसTांत बहत
ु पाए, शाU बहत
ु पाए; सHय क# कोई झलक न िमली। पर िमली, एक जगह
िमली। और Cजसके पास िमली, उस आदमी का Yया नाम था यह भी ठWक ठWक पYका पता
नह/ं है । उस आदमी के तन-ूाण ऐसे ूेम मG पगे थे क लोग उ;हG संत ूेमजी महाराज ह/
कहने लगे थे। इसिलए उनके ठWक नाम का कोई पता नह/ं है । पहंु चते ह/ बात हो गई।
[ण भर भी दे र नह/ं होती। आंख खोजनेवाली हो, आंख खोजी को ह/ तो जहां भी रोशनी
होगी वहां जोड़ बैठ जाएगा, !बठाना नह/ं पड़ता; !बठाए !बठाना पड़े तो फर बैठा ह/ नह/ं।
!बठाए !बठाए कभी बैठता ह/ नह/ं।
गु का िमलन तो ूेम जैसा है । जैसे कसी को दे खते ह/ ूेम उमड़ आता है । अवश! तु]हारा
कुछ उपाय नह/ं है ; असहाय हो। कहते हो, बस हो गया ूेम। ऐसी ह/ गु क# भी ^!_ है ।
यह आCखर/ ूेम है । और सब ूेम तो संसार मG ले आते ह0 ; यह ूेम संसार के बाहर ले
जाता है । यह ूेम क# पराका`ा है । और सब ूेम तो अंततः शर/र पर ह/ उतार लाते ह0 ; यह
ूेम शर/र के पार ले जाता है । और सारे ूेम तो ःथूल ह0 ; यह ूेम ःथूल का ूेम है । इस
एक संत को दे खकर बात हो गई। एक [ण मG ह/ गई, !बजली कaध गई।
यह ूेमजी महाराज दाद ू दयाल के िशंय थे--संत दाद ू के िशंय थे। और संत दाद ू ने अपने
मरते समय खाट पर आंखG खोली थी। सौ साल पहले...दरया से सौ साल पहले संत दाद ू हए।

मरते व" िशंय इकcठे थे, दाद ू ने आंखG खोली और जो कहा वह अजीब सी बात थी,
भ!वंयवाणी थी। मरते दाद ू ने कहा था:
दे ह पड़;ता दाद ू कहे , सौ बरसां एक संत।
रै न नगर मG परगटे , तारे जीव अनंत।।
दरया का ज;म सौ साल बाद हआ
ु , रै न नगर मG हआ।

संत ूेमजी महाराज दाद ू के िशंय थे। इस बात क# पूर/-पूर/ संभावना है क दाद ू ने जो
घोषणा क# थी वह दरया के संबध
ं मG ह/ थी। YयOक दादू के ह/ एक ूेमी से फर Rार
िमला। दाद-ू पंथी तो मानते ह0 क दरया दाद ू के ह/ अवतार एक ूेमी से फर Rार िमला।
दाद-ू पंथी तो मानते ह0 क दरया दाद ू के ह/ अवतार ह0 । एक अथJ मG ठWक भी ह0 YयOक जो
दाद ू ने कहा, Cजस ूेम क# महमा दाद ू ने गाई है , उसी महमा को दरया ने भी गाया है ।

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एक अथJ मG ूेम के सभी अवतार ूेम के ह/ अवतार ह0 । dय!"यO के थोड़े ह/ अवतरण होते
ह0 , सHयO के अवतरण होते ह0 ।
दे ह पड़;ता दाद ू कहे ...िगरती थी दे ह, जाती थी दे ह, आCखर/ घड़/ आ गई थी, यमदत
ू Rार
पर खड़े थे, और दाद ू ने कहा: दे ह पड़;ता दाद ू कहे ...।
िगरती है मेर/ दे ह, मगर िगरते समय एक घोषणा कए जाता हंू --सौ बरसां एक संत... सौ
बरस बाद आएगा एक संत; रै न नगर मG परगटे , तारे जीव अनंत। बहत
ु लोगO को उससे
उTार होगा। रोते हए
ु िशंयO को कहा था क घबड़ाओ मत मेरे जाने से कुछ जाना नह/ं हो
जाता, कोई और भी आनेवाला है , ूती[ा करना। 
फर दरया का आगमन--एक धुिनया। लेकन बचपन से एक ह/ रस, एक ह/ लगाव। न
ःकूल गए, न भेजे गए ःकूल, न कुछ पढ़ा, न िलखा। हःता[र भी कर नह/ं सकते थे।
जैसा कबीर ने कहा है , मसी कागद छुओ नह/ं--कभी कागज छुआ नह/ं, ःयाह/ छुई नह/ं,
ठWक वैसे ह/, ठWक कबीर जैसे ह/।
कहा है दरया ने: जो धुिनया तो भी म0 राम तु]हारा। मान क धुिनया हंू , कुछ पढ़ा-िलखा
नह/ं, कुछ सूझ-बूझ नह/ं है , अDानी हंू --इससे Yया फकJ पड़ता है ! जो धुिनया तो भी म0
राम तु]हारा लेकन हंू तो तु]हारा!
भ" कहता है , म0 Yया हंू यह तो बात ह/ dयथJ है ; तु]हार/ कृ पा-^!_ मेर/ तरफ है , बस
सब हो गया। अहं कार/ और भ" का यह/ भेद है । अहं कार/ कहता है म0 कुछ हंू , दे खो पढ़ािलखा हंू , धनी हंू , पद ूित`ा है , चरऽवान हंू , Hयागी हंू , ऐसा हंू , वैसा हंू । अहं कार/
दावा करता है । भ" कहता है , जो धुिनया...म0 तो धुिनया , म0 तो कुछ भी नह/ं, मेर/
तरफ तो कोई गुणवNा नह/ं है , तो भी म0 राम तु]हारा। लेकन मेर/ इतनी गुणवNा है , क
म0 तु]हारा हंू । और यह बड़/ से बड़/ गुणवNा है, अब और Yया चाहए? इससे gयादा मांगना
भी Yया है , इससे gयादा होना भी Yया है ? इतना ह/ हो जाए क तुम राम क# तरफ हो
जाओ, तो तु]हारे अंधेरे मG रोशनी आ जाएगी। इतनी धारणा ह/ बनने से सब बांित घट
जाती है , सारा पलड़ा बदल जाता है ।
दे खा ूेमजी महाराज को और घटना घट गई: खोजते थे...
कोई दल-सा ददJ आशना चाहता हंू
रहे इँक मG रहनुमा चाहता हंू
ूेम के राःते पर कोई पथ-ूदशJक खोजते थे।
कोई दल-सा ददJ आशना चाहता हंू
रहे इँक मG रहनुमा चाहता हंू
गए बहत
ु पंडतO के पास, लेकन ूेम के मागJ पर पंडत से Yया रोशनी िमले! थोथे श6दO
का जाल! द/वानगी नह/ं, मःती नह/ं, मदरा नह/ं। और भ" शराब क# बातG करने मG
उHसुक नह/ं होता, भ" शराब पीने मG उHसुक होता है । पंडत शराब क# बातG करते ह0 ,
!वjेषण करते ह0 , चचाJ करते ह0 , पीते इHयाद कभी नह/ं। कंठ को कभी शराब ने छुआ ह/

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नह/ं, आंख से कभी आंसू नह/ं ढलके और न कभी पैरO मG घूंघर बंधे, न कभी नाचे मःत
होकर, न कभी गुनगुनाए, कभी अपने को डु बाया नह/ं। सारा पांडHय अहं कार क# सजावट
है , शृंगार है ।
जैसे ह/ दे खा ूेमजी महाराज को, कोई कली Cखल गई, बंद कली Cखल गई।
ऐसा बहत
है मनुंय के आIयाCHमक जीवन के इितहास मG। अगर कोई dय!" बुT
ु बार हआ

के चरणO मG बैठा हो और बुT से कुछ सीखा हो, कुछ पाठ िलया हो, फर बुT !वदा हो
जाए--तो यह dय!" उस पाठ को अपने भीतर दबाए हए
ु , अपने अचेतन मG संभाले हए

भटकता रहे गा, खोजता रहे गा; जब तक इसे फर कोई बुT जैसा dय!" न िमल जाए, तब
तक इसक# िचनगार/ दबी रहे गी। बुT जैसे dय!" के पास आते ह/ लौ ूगट हो जाएगी। पास
आते ह/! सC;नकट माऽ--और भभककर जलने लगेगी रोशनी। कोई dय!" अगर कृ ंण के
पास रहा हो तो ज;मO-ज;मO तक वह फर उ;ह/ं क# तलाश करे गा--जाने-अनजाने, होश मG
बेहोशी मG, जागते-सोते, वह कृ ंण को टटोलेगा। और जब तक कोई कृ ंण जैसा dय!" फर
उसके पास न आ जाए तब तक उसका दया बुझा रहे गा।
मेरे दे खे दरया दाद ू के िशंयO मG एक रहे हOगे। म0 ऐसा नह/ं कहता क दाद ू के ह/ अवतार
ह0 , YयOक दाद ू का Yया अवतार होगा! जो जाग गए वो गए, उनका फर अवतार नह/ं। 
फर लौटना नह/ं होता। तो म0 दाद-ू पंिथयO से कहंू गा क ऐसा मत कहो क दाद ू का अवतार।
इतना ह/ कहो क उसी ूेम का अवतार Cजसके अवतार दाद ू थे। लेकन दाद ू का ह/ अवतार
मत कहो। YयOक दाद ू तो गए सो गए। गीत वह/ है , धुन वह/ है , सुर वह/ है । फूल ठWक
वैसा ह/ है --वह/ गंध, वह/ रं ग। लेकन यह मत कहो क वह/ फूल है , वैसा ह/ है । YयOक
दाद ू तो गए।
यह दाद ू को उस दन, उनक# मृHयु-शlया पर घेर कर जो िशंय खड़े हOगे, उनमG से ह/
कोई ह0 । ये उसी को चेताने के िलए वचन कहे हOगे:
दे ह पड़;ता दाद ू कहे , सौ बरसां एक संत।
रै न नगर मG परगटे , तारे जीव अनंत।।
यह बीज-मंऽ उस भीड़ मG खड़े हए
ु कसी िशंय के िलए कहा होगा।
बहत
ु बार तुमसे बातG कह/ गई ह0 जो तुमने सुनी नह/ं ह0 । बहत
ु बार तुमसे बातG कह/ गई ह0
जो तुमने समझी नह/ं ह0 । और वे बातG कभी पूर/ होती रहG गी। एक बार भी जो कसी सदगु
के िनकट आ गया, अब ज;मO-ज;मO क# सार/ याऽा इसी िनकटता मG ह/ चलेगी। सदगु
रहे क जाए, दे ह मG रहे क दे ह से मु" हो जाए, लौटे ; क न लौटे ; लेकन जो एक बार 
कसी सदगु से जुड़ गया, यह नाता कुछ ऐसा है क ज;म-ज;म का है । यह गांठ बंधती है
तो फर खुलती नह/ं। यह गांठ खुलनेवाली गांठ नह/ं है । जुड़े ह/ न तो बात अलग लेकन
जुड़ जाए तो फर ज;मO-ज;मO तक साथ चलता है ।

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घूमते रहे दरया, बहत
ु लोगO के पास गए; लेकन फर दाद ू के ह/ एक भ", जहां दाद ू
जैसी ह/ रोशनी थी, जहां दाद ू ह/ जैसे पुनः ूगट हो रहे थे, वहां gयोित जग गई। वहां
बुझा दया एकदम दमक उठा, द/िm आ गई।
Cखली हो कतनी कोई Cखले वीरान मG जैसे
िनकल आएं नई बालG कुंआरे धान मG जैसे
ऐसे कुछ Cखल गया भीतर।
िनकल आएं नई बालG कुंआरे धान मG जैसे
हां याद है कसी क# वो पहली िनगाह-ए-लुHफ 
फर खूं को यूं न दे खा रगO मG रवां कभी
वह आंख ूेमजी महाराज क#, आंख से जुड़ते ह/ बांित कर गई
हां याद है कसी को वे पहली िनगाह-ए-लुHफ 
फर खूं को यूं न दे खा रं गO मG रवा कभी
जल गया जो जलना था। िमट गया जो िमटना था। होना था जो हो गया। कभी-कभी एक
[ण से, एक पल मG हो जाती है बात--ठWक-ठWक dय!" से िमलन हो जाए।
अIयाHम क# खोज मG, सदगु क# खोज सबसे बड़/ है । परमाHमा से भी महHवपूणJ खोज है
सदगु क# खोज, YयOक परमाHमा से तो सीधे तुम जुड़ ह/ न पाओगे। कोई Cखड़क#, कोई
Rार

चाहए होगा। परमाHमा तो सब तरफ मौजूद है । मौजूद ह/ है , उसे Yया खोजना है ?

इसे थोड़ा समझना। परमाHमा तो मौजूद ह/ है , उसे Yया खोजना है ? लेकन मौजूद है , पर
तु]हG दखाई नह/ं पड़ता, तो तु]हारे िलए तो गैर-मौजूद है । तु]हारे िलए तो मौजूद तभी
होगा, जब तुम परमाHमा जैसे कसी dय!" से िमल बैठोगे। जब दो दल एक हOगे, कसी
ऐसे dय!"--Cजसके िलए परमाHमा मौजूद हो गया है , उस जोड़ मG ह/ तु]हारे िलए भी
मौजूद होगा, उसके पहले नह/ं मौजूद होगा। हां, एक बार दख गया, एक बार खुल गई
Cखड़क#, उठा पदाJ, फर कोई अड़चन नह/ं है । फर तो गु और परमाHमा मG भेद ह/ नह/ं
रह जाता। फर परमाHमा और गु एक के ह/ दो नाम हो जाते ह0 ।
कबीर ने कहा है :
गु गो!वंद दोऊ खड़े , काके लागूं पांव
बिलहार/ गु आपने गो!वंद दयो बताए 
कसके छुऊं पैर? अब दोनO सामने खड़े ह0 । बड़/ द!वधा
हो गई। पहले कसके पैर छुऊं? गु

के छुऊं तो परमाHमा का कह/ं अस]मान न हो जाए। परमाHमा के छुऊं यह भी बात जंचती
नह/ं, YयOक Cजसके Rारा परमाHमा तक आए, उसका अस]मान न हो जाए। वचन मधुर
है : कसके पैर छुऊं? लेकन कहा नह/ं कबीर ने क कसके पैर छुए, तो अलग-अलग लोगO
ने अलग-अलग अथJ कर िलए। कुछ ने अथJ कया क गु ने इशारा कर दया क शंका मत
कर, संदेह मG मत पड़, परमाHमा के पैर छू। बिलहार/ गु आपने गो!वंद दयो बताए।
िनवारण हो गया शंका का।

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वह कतने ह/ सुद ं र श6दO का आयोजन करे . ऐसे वचन ह0 । YयOक पढ़े -िलखे होने से Yया संबंध है ? Vदय मG जब घटना घटती है तो टटे ू -फूटे श6द भी ःवणJमंडत हो जाते ह0 । Cजसके पास कहने को कुछ है . वह खबर दे रहा है क गु के ह/ चरण छुए हालांक गु ने इशारा कर दया परमाHमा क# तरफ. Cजन पर तीर बना होता है --आगे क# तरफ याऽा क# खबर! गु तो एक तीर का एक िचn है । गु तो कहता है : और आगे और आगे और आगे! गु तो तब तक कहता चला जाता है और आगे. गु से िमलन हो गया। वह परम !ववाह हो गया. जैसे oयासे को पानी िमल गया! एक छोट/ सी नजर ने कांित उपCःथत कर द/। गीत अपने अब नह/ं कुंआरे रहे मीत के ःवर से भंवर कर आ गए फर दिन ु या कुंआरे नह/ं रहे . जब तक क परम से िमलन न हो जाए। बिलहार/ गु आपक#.dkuks lquh lks >wB lc ऐसा अिधक लोग अथJ करते ह0 । ऐसा म0 नह/ं करता। म0 तो यह अथJ करता हंू क कबीर ने गु के ह/ चरण छुए। YयO? इसिलए गु के चरण छुए क गु ने परमाHमा बताया। बिलहार/ मG ह/ चरण छुए। वह जो बिलहार/ श6द है . बु!T से समझोगे तो चूकोगे। Vदय से समझना। तरं िगत होना इनके साथ। एक गैर-पढ़े िलखे आदमी के. इसिलए तो गु के चरण छुए। गु का तो सारा काम ह/ इशारा है । गु तो एक इं िगत है । मील के पHथर दे खे न. गुरां बताई बाट भूला ऊजड़ जाए था. इससे मुदp जी!वत नह/ं होते। और जीवन तो अगर न5न भी खड़ा हो तो भी सुंदर होता है । सुनो इन वचनO को-जन दरया हर भ!" क#. दरया के. इसी मG ह/ बात आ गई। िमलन ूेमजी महाराज का--Cजंदगी बदल गई दरया क#। खोज समाm हो गई.com .ह/ं भी श6दO मG कहे . वह क. Cजसके बाद फर एक ह/ मंCजल और रह जाती है --परमाHमा िमलन क#। गु Rार है ..oshoworld. गांठ जुड़ गई.. परमाHमा मंदर है । इन वचनO को. वे श6द ःवणJमंडत हो जाते ह0 । और Cजसके पास कहने को कुछ भी नह/ं है . वे सब मुदp के ऊपर लगाए गए आभूषण ह0 । उनसे थोड़/ ह/ दे मG दगq ु ध आएगी। तुम मुदr को कतने ह/ सुंदर वU पहना दो. नरक पड़न के घाट जन दरया हर भ!" क# गुरां बताई बाट। गु ने हर-ूेम का राःता बता दया। राःता बता दया--इसका ऐसा अथJ मत लेना क गु ने बड़ा समझाया। समझाया तो जरा भी नह/ं। यह बात समझने-समझाने क# नह/ं। यह तो गु के होने मG ह/ इशारा है । यह तो गु के पास बैठने मG ह/ घट जाता है । यह तो छूत क# बीमार/ है । यह तो सHसंग है । गु के पास बैठे क घटने लगता है । कं!पत होने लगता है । कसी अ^ँय लोक क# हवाएं तु]हG चारO तरफ से घेर Page 6 of 256 http://www. लेकन बड़े oयारे वचन ह0 । उपिनषद और वेद भी ःपधाJ करG .! लेकन फर कबीर ने पैर कसके छुए? मेरे हसाब से तो पैर गु के ह/ छुए। यह जो बिलहार/ श6द का उपयोग कया.

म0 मुसलमान हंू । यह बात ह/ न उठW। ूेम कह/ं हं द ू होता. गीत न राम का है न रह/म का. मगर गु को पीना। पीते-पीते ह/ इशारा साफ होता है । जन दरया हर भ!" क# गुरां बताई बाट गु ने इशारा कर दया. कह/ं मुसलमान होता! हर क# भ!" का Yया लेना कुरान से और Yया लेना गीता से? हर भ!" कोई िसTांत तो नह/ं है . भ!" ूेम का परम Mप है । ूेम के तीन Mप ह0 --काम. जहां कोई ःवर नह/ं उठता था. न अधोमुख न ऊIवJमुख. ूेम. या क दोनO का है । दरया जैसे संतO ने ह/ धमJ को ूित`ा द/ है । जरा भी भेदभाव नह/ं सोचा क हं द ू है यह आदमी. वहां हजार ःवर उठने लगते ह0 । मगर यह बात है छूत क#। यह लगने वाली बात है । यह लगने वाली बीमार/ है । इसिलए ूेम के मागJ के पर सHसंग का अथJ है गु के पास होना. गु के पास बैठना। कभी कुछ कहे तो सुनना. ूेम. समतल पर गितमान.. कभी कुछ न कहे तो सुनना. ूेम मन से। भ!" तीसरा Mप है . ऊपर क# तरफ जाता हआ ु . नीचे क# तरफ जाता हआ ूेम दसरा Mप है --न ऊपर जाता ू ु . नाव मG !बठा दया--हर भ!" क#! दरया मुसलमान है . आHमा मG अवगाहन। मनुंय के तीन तल ह0 --शर/र. राह पर लगा दया. न शर/र से बंधा है न मन से.com . कोई दशJनशाU तो नह/ं है । यह तो डु बक# है एक ऐसे लोक मG जहां हम तकJ और !वचार और बु!T के सब !वjेषण को छोड़कर पहंु चते ह0 । यह तो अपने ह/ अंतरतम मG िनवास है । जन दरया हर भ!" क#. शर/र से बंधा हआ ु हआ ु . मन. भ!"। काम िनकृ _तम Mप है -अधोमुखी. आHमा। वैसे ह/ मनुंय के ूेम के तीन तल ह0 --काम.oshoworld. भ!"। जब तक तु]हारा ूेम भ!" न बने तब तक तुम आनंद न पाओगे। काम ूेम न बने तब तक तुम सुख न पाओगे। और जब तक तु]हारा काम अगर ह/ बना रहे . तो तुम दख ु ह/ दख ु पाओगे। तु]हारा काम अगर ूेम बन जाए तो तुम कभी दख ु और कभी सुख भी पाओगे। तु]हारा काम अगर ूेम बन जाए तो तुम कभी दख ु और कभी सुख भी पाओगे.dkuks lquh lks >wB lc लेती ह0 । कोई वसंत आ जाता है । जो Vदय सूना-सूना था. भ!" मG मु!" है । ूेम मIय है । इसिलए ूेम मG थोड़ा बंधन भी है और थोड़/ ःवतंऽता भी। ूेम समझौता है । इसिलए ूेम मG थोड़/-सी काम क# भी छाया पड़ती है और थोड़/ भ!" क# भी। इसिलए तुम Cजसे ूेम करते हो उसमG तु]हG थोड़/-थोड़/ कभी-कभी ूभु क# झलक भी दखाई पड़ती है । तुमने Cजसे ूेम कया है उसमG कभी न कभी ूेम का आभास भी होता है । कभी-कभी तुम उसके साथ पशु जैसा dयवहार भी करते हो और कभी-कभी ूभु जैसा भी। ूेम मIय मG है । इसिलए ूेम मG एक तनाव भी है । कामी मG gयादा तनाव नह/ं होता। कामी अपने पशुःवभाव से बंधा है । उसके भीतर द!वधा नह/ं है । इसिलए तो पशुओं मG द!वधा नह/ं है । और ु ु Page 7 of 256 http://www. आHयंितक Mप है --ऊIवJमुखी. लेकन गीत न हं द ू का है न मुसलमान का. मIय मG। काम शर/र से बंधा है . तुम सुखMप हो जाओगे। काम से बंधन है ..

गरम करो. जो है तो रे िगःतान लेकन दरू-दरू मृग-मर/िचकाएं दखाई पड़ती ह0 । लगता है क खूब जल के सरोवर ह0 . कह/ं नह/ं जाता था. जलधार बहाओ तो नीचे क# तरफ जाती है । वह जल का ःवभाव है । फर जल को जमा दो. YयOक ूेम उड़ना तो चाहता है आकाश मG और पैर उसके जमीन मG गड़े ह0 । काम तो जड़O जैसा है और भ!" पC[यO जैसी है । और ूेम बड़/ द!वधा मG है . बरफ बन जाए. ऐसा कंपता है पूरे व"। ूेम मG एक िचंता है . धीरे -धीरे आहःता-आहःता बांित हो जाती है । आहट भी नह/ं होती और बांित हो जाती है । जन दरया हर भ!" क# गुरां बताई बाट भूल ऊजड़ जाए था. ऊपर नह/ं जाता. अपने अCःतHव से। गु ने अपने ूेम के अCःतHव से खबर दे द/ क जो काम है उसमG बड़/ महमा िछपी है . जब भाप बन जाता है । जल ह/ है । जब नीचे क# तरफ जाता था तब भी जल था.oshoworld. सूयrमुख हो गया है . ूेम को भ!" बनानी है । !वरोध कह/ं भी नह/ं है । इसिलए तुम Cजसे ूेम करते हो. जब बरफ क# तरह क गया था तब भी जल था. तब भी जल ह/ है । जैसे जल क# तीन अवःथाएं ह0 ऐसी ह/ ूेम क# तीन अवःथाएं ह0 । काम मG नीचे क# तरफ जाता है । ूेम मG नीचे नह/ं जाता. जाता ह/ नह/ं. धीरे -धीरे हर भ!" का रस आने लगा। इसिलए तुम Cजसके ूित कामातुर हो उससे ूेम करो कम से कम. उड़ा दो. जो क वःतुतः ऊजड़ है . अगर उसी मG तुम परमाHमा को दे खना शुM कर दो तो तुम पाओगे. ूेम का Mपांतरण है । काम को ूेम बनाना है . उसे मु" कर लो। ऐसा समझो. नरक पड़न के घाट कामवासना ह/ नरक का घाट है । नरक जाना हो तो वह/ तीथJ है . बड़/ ु अड़चन मG है । इस बात को खयाल मG रखना। भ!" के मागJ पर ूेम का !वरोध नह/ं है . ठहर जाता है । भ!" मG Page 8 of 256 http://www.com . नरक पड़न के घाट म0 तो भूला था। और म0 तो उस तरफ भागा जा रहा था--काम क# तरफ. थोड़े -थोड़े बढ़ो। Cजसके ूित कामातुर हो उसे ूेम करो। Cजसके ूित ूेम से भरे हो उसके ूित थोड़/ भ!" भी लाओ। लड़ने क# कोई जMरत नह/ं है . वह/ं से उतरा जाता है । लेकन गु ने राह बता द/। और बता द/--श6दO से नह/ं. तो जल ऊपर क# तरफ जाने लगता है . और अब जब भाप क# तरह आकाश क# तरफ उठ रहा है .dkuks lquh lks >wB lc भ" भी मु" है । उसमG भी द!वधा नह/ं है । वह भी पूरा का पूरा परमाHमा से जुड़ा है । और ु कामी पूरा का पूरा दे ह मG डू बा है । द!वधा होती है ूेमी मG। वह मIय मG खड़ा है । एक हाथ ु भ!" क# तरफ जा रहा है डांवाडोल है । जैसे कोई रःसी पर चलता है . हरे वृ[ ह0 और छायाएं ह0 । और मन भागा जाता है । भागा जा रहा था काम क# तरफ। भूला ऊजड़ जाए था. तो फर न नीचे जाता है न ऊपर. क जाता है । वह बरफ का ःवभाव है । फर जल को वांपीभूत कर दो.

. एक पैर नकJ मG। ूेमी दो नावO पर सवार रहता है । इसिलए दिनया मG ूेमी या तो एक न एक दन तय कर लेता है क कामी हो जाए या तय ु करना पड़ता है क भ" हो जाए। gयादा दन तक ूेमी ूेमी नह/ं रह सकता। वह द!वधा क# ु घड़/ है । इसिलए लोग एक ना एक दन िनणJय ले लेते ह0 क या तो अब कामी हो जाओ और या फर भ" हो जाओ। भौितकवाद/ आदमी धीरे -धीरे ूेम को तो भूल जाता है . बातचीत थी। मंदर जाता था तो भी कुछ अथJ न था. हं द-ू मुसलमान होने क# बात ह/ नह/ं है । नहं था राम रह/म का. YयOक ूेम बड़/ द!वधा क# दशा है । अगर तुमने िनणJय न िलया तो तुम ु पीड़ा और बेचैनी मG ह/ रहोगे। इसिलए ूेमी से gयादा तुम और कसी को क_ मG न पाओगे। कुछ ना कुछ करना होगा। जीवन मG एकरसता लानी होगी। या तो नीचे के तल पर लाओ एकरसता या ऊपर के तल पर। या तो पशु बनकर एकरस हो जाओ. वह सबका हो गया। जो ठWक से मुसलमान हो गया वह हं द ू भी हो गया और जैन भी हो गया और ईसाई भी हो गया। और जो ठWक से हं द ू हो गया वह ठWक से मुसलमान भी हो गया। असल मG धािमJक आदमी होने क# बात है . !वC[m नह/ं होते.dkuks lquh lks >wB lc ऊपर क# तरफ उठने लगता है । नीचे क# तरफ नरक है . नरक पड़न के घाट नह/ं था राम रह/म का.। दे खो..। जब तक तुम राम के नह/ं हो. सतगु कया सुजान नहं था राम रह/म का. पशु एकरस है ! पशु पागल नह/ं होते.हG पता ह/ नह/ं क इसके ऊपर होना भी कुछ हो सकता है । और भ" भी एकरस है । वह भी भूल गया है क इससे नीचे भी कुछ हो सकता है । लेकन जो दोनO के बीच मG खड़ा है . उसका क_ बहुत है । भूल ऊजड़ जाए था.. वहां के राम से मेर/ कोई पहचान न थी। और मCःजद जाता था तो भी dयथJ था. काम मG ह/ क जाता है । अIयाHम का खोजी धीरे -धीरे ूेम को तो भूल ह/ जाता है और भ!" मG डू ब जाता है । मगर िनणJय लेना होता है . आHमघात नह/ं करते। एकरस ह0 । जहां ह0 वहां पूर/ तरह से ह0 । उ. रह/म के भी कैसे होओगे? और जब तक रह/म के नह/ं हो तब तक राम के भी कैसे होओगे? तो लोग बातG कर रहे ह0 राम और रह/म क#. ऊपर क# तरफ ःवगJ है । और ूेमी दोनO के बीच अटका रहता है --ःवगJ और नकJ। एक पैर ःवगJ मG. वहां के रह/म से मेर/ कोई पहचान न थी। अपने भीतर के ह/ भगवान से पहचान न हो तो मंदर-मCःजदO के भगवान से पहचान नह/ं हो पाती। पहली पहचान तो आHमपहचान है । जन दरया हर भ!" क# गुरां बताई बाट Page 9 of 256 http://www. न तो राम का था न तो रह/म था..oshoworld.। दरया कहते ह0 . म0 मितह/न अजान दरया सुध-बुध 5यान दे . न कोई राम का है न कोई रह/म का है । YयOक जो एक भी हो गया. बेचन ै नह/ं होते.com ...

मित हो जाता है । नहं था राम रह/म का.ह/ं को खंडत करते ह0 । तुम कभी खयाल करना: जब ईtर के !वरोध मG कोई तकJ दे ते हो तो Iयान रखना. इससे ईtर को तो कुछ भेद नह/ं पड़ता. और Cजनको तुम बु!Tमान कहते हो--अित बु!Tमान सोच-!वचार से भरे हए ु लोग. लेकन जीवन के अCःतHव मG सोए हए ु मन का नाम मन. लेकन न मानने से तु]हार/ संभावना का Rार बंद हो गया। न मानने से जो बीज अंकुरत हो सकता था. सुमित। जो मूCsछJ त है वह मन और जो जाग गया वह मित। यह/ मन जागकर सुमित हो जाता है . म0 मितह/न अजान बु!T तो थी.dkuks lquh lks >wB lc लेकन गु ने राह सुझा द/। गु ने आंख खोल द/। गु ने बुझी बाती जला द/। दरया सुध-बुध 5यान दे . इस चौराहे पर कैसे आकर खड़ा हो गया हंू .com . क जाने लूं उसे क म0 कौन हंू । छोड़ो ईtर! ईtर श6द से कुछ लेना-दे ना नह/ं है । अगर बु!Tमान हो तो इतना तो करो क जान लो क म0 कौन हंू । कहां से आता हंू . मित बहत ु कम लोगO के पास है । मित का Yया अथJ होता है ? भाषाकोश मG तो मित का अथJ मन ह/ होता ह0 . कहां जाता हंू . स. लेकन मित नह/ं थी। बु!T तो थी. सोच-!वचार था. वे जरा भी गितमान नह/ं हो पाते। वे हजार तकJ करते ह0 । और उनके सब तकJ उ. इतना तो जान लो! नहं था राम रह/म का. अंकुरण होता ह/ नह/ं। तो बीज पHथर क# तरह पड़ा रह जाएगा। ईtर के !वरोध मG तुमने अगर कुछ भी कहा हो तो वह तु]हारे ह/ !वरोध मG गया है । तुमने अगर सHय को झुठलाने के िलए कुछ कोिशश क# हो तो सHय नह/ं झुठलाया जाता. लेकन बु!T का भी ठWक उपयोग करने का बोध नह/ं था। अिधक लोग बु!T का दपयोग कर रहे ह0 । अिधक लोग ऐसे ु ह0 जैसे अपने ह/ हाथ से अपनी ह/ गरदन काट रहे हO। उनक# बु!T ह/ उनके जीवन क# सबसे बड़/ कठनाई हो गई है । अपनी बु!T से वे इतने ह/ उपाय करते ह0 Cजनसे उनका जीवन ऊपर नह/ं उठ पाता। तो कभी-कभी ऐसा भी हो जाता है क सरलिचN लोग. सतगु कया सुजान --म0 तो मितह/न था। मन तो सबके पास है . इससे ईtर खंडत नह/ं होता. Cजनको तुम बुTू कहो. जागे हए ु मन का नाम मित. तु]ह/ं झुठलाया जाते हो। यह सब ऐसा ह/ है जैसे कोई आकाश क# तरफ मुंह उड़ाए और थूके.मित हो जाता है .oshoworld. म0 मितह/न अजान दरया सुधबुध 5यान दे सतगु कया सुजान Page 10 of 256 http://www. िसफJ तु]हारा भ!वंय खंडत होता है । ईtर Yया खंडत होगा? ईtर को Yया फकJ पड़े गा? तुम मानो न मानो. तुमने कह दया क नह/ं. वे भी गितमान हो जाते ह0 ऊIवJ दशा मG. वह थूक अपने पर ह/ िगर जाता है । मगर बु!Tमान आदमी इस तरह क# बातG करते ह0 । मित नह/ं है । मित होती तो अपने जीवन क# सार/ ऊजाJ का एक ह/ उपयोग करते.

Cजन पर कमल ितरते हO! दे खी हOगी वे आंखG और डू ब गए हOगे उनमG। उस ूेम ने पकड़ िलया। पकड़े गए। बहत ु बु!Tमान होते. सब संदेह िमट गया। अब इसको थोड़ा समझना। ऐसा मत समझना क जो भी दरया के गु के पास के गए थे.मO लग जाएं तो भी बाहर न आ सको। जंगलO मG भटका तो िनकल आए. क सुध-बुध खो बैठे। अब यह बड़े मजे क# बात है ! Cजसके साथ तुम सुध-बुध खो बैठो उसी के पास सुध-बुध पैदा होती है । यह बड़ा !वरोधाभास है । कुछ तु]हार/ िनगाह काफर थी.ओ। रखे रहो इस फामूल J े को. दरया संसय सोग सतगु स6दां िमट गया. सतगु कया सुजान अजान था. सारे संशय.टू . खूब.. गु ने कोई शाUDान नह/ं दया.. इसका मंऽ-जाप करो: एच. कताबO मG भटका नह/ं िनकल पाता। YयOक जंगल क# तो एक सीमा है .टू . सब संशय िमट गए.सुधबुध 5यान दे । सुध का अथJ है चेताया। चेताया क तू कौन है । जगाया.ओ! गुनगुनाओ। मगर oयास नह/ं बुझेगी। oयास मंऽO से नह/ं बुझती। oयास के िलए जल चाहए। और आvयr का आvयJ यह है क तुम एच. श6दO क# कोई सीमा नह/ं है । . इसको गले मG लटका लो.oshoworld. दे खी हOगी वे आंखG--रस से सरोबोर! दे खी हOगी वे आंखG शांत झील क# तरह.com .ओ.dkuks lquh lks >wB lc सुधबुध 5यान दे ..। सतगु के श6दO को सुनकर. तकJ से नह/ं। तकJशू. झकझोरा। उस झकझोरने मG ह/ बुध. सुध-बुध द/। दो तरह के Dान ह0 । एक शाUीय Dान है .टू . YयOक इस आदमी के ूेम मG पड़ गए। इस आदमी को दे खा नह/ं. पढ़े -िलखे होते तो सोचते क कह/ं इस आदमी ने स]मोहत तो Page 11 of 256 http://www.टू . श6दDान है .मO-ज. तु]हारा तकJजाल बीच मG बाधा न दे । ूेम से सुनना है . उसका बड़ा जंगल है । उसमG भटके तो ज.य होकर सुनना है । वह/ ौTा का अथJ है । दरया के तो िमट गए सारे लोक. भूख िमटती नह/ं। लगी तो है oयास और फामूल J ा िलए बैठे ह0 क जल कैसे िनिमJत होता है --एच. बोध पैदा होता है । और इस सुध-बुध का नाम ह/ Dान है । शेष तो सब dयथJ बकवास है । शेष तो ऐसा है जैसे लगी है भूख और पाकशाU खोले हए ु कताब पढ़ रहे ह0 । पढ़ो. इसका ताबीज बना लो. जो !वuालय-!वt!वuालय मG िमलता है । एक शाUीय Dान है .ओ का पाठ कर रहे हो और सामने नद/ बह रह/ है । मगर तुम अपने पाठ मG ऐसे तwलीन हो क नद/ दे खने क सु!वधा कसे! दरया सुध-बुध 5यान दे ... सुजान कया। सदगु स6दां िमट गया. एच. कुछ मुझे भी खराब होना था.. सभी के संशय िमट गए हOगे। सुनने क# एक कला चाहए। तुम बुT के पास भी जाओ तो भी संशय ले आ सकते हो। सुनने क# एक कला चाहए। सुनने क# एक अनूठा ढं ग चाहए। इस भांित सुनना है क तु]हार/ बु!T.। खयाल करना. इस आदमी क# आंख मG आंख पड़/ नह/ं.

। Yया िमट गया? दरया िमट गया। सुने वे श6द... लेकन तुम डर बहत ु रहते हो क कह/ं कुछ खो न जाए! है Yया तु]हारे पास खोने को? स]मोहत करके तुमसे िलया Yया जा सकता है ? आHमा तो तु]हार/ !बलकुल खाली है । डरते YयO हो? भय Yया है ? खोओगे Yया? तु]हारे पास Yया है ? लेकन बड़ा डर है । बड़े होश से सुनते हो। होश का मतलब? होश नह/ं। होश का मतलब इतना ह/ क दरू-दरू रहते हो. सुने वे िमठास भरे श6द. शायद इस आदमी को पता हो। एक मौका इसे दो। इस आदमी के सामने अपने Vदय को खोल दो। इस आदमी को उठाने दो संगीत Vदय मG। इस आदमी को छे ड़ने दो तार. न कोई तकJ था. यहां तो बड़/ बेबझ ू बातG हो रह/ थीं। यहां तो !पयYकड़ बैठे थे। यह तो मधुशाला थी। ये ूेमजी महाराज क# मधुशाला मG डू ब गए। सतगु स6दां िमट गया। यहां तो कुछ ऐसी बातG कह/ जा रह/ थीं. उसको सुनना पड़ता है । Page 12 of 256 http://www. कह/ं मुझे उलझा मत दे ना. स]मोहत मत कर लेना. सुने वे oयार भरे श6द. इसिलए ये बड़े फकJ क# बातG ह0 । ऐसा नह/ं है क उन श6दO मG बड़ा िसTांत था। िसTांितयO के पास तो दरया बहत ु गए थे. इस आदमी को बजाने दो वीणा मेरे Vदय क#। लेकन तकJिन` आदमी ू!व_ ह/ नह/ं होने दे ता कसी को Vदय तक। खुद तो जानता नह/ं कैसे अपनी वीणा बजाए और जो जानते ह0 उनके हाथ को भीतर नह/ं जाने दे ता। कहता है .oshoworld. इसिलए वे जंचे। उन श6दO मG बड़ा ूेम था. कसी झंझट मG न पड़ जाऊं। अब यह बड़े आvयJ क# बात है क तु]हारे पास खोने को कुछ भी नह/ं. पंडत और मौल!वयO के Rार खटखटाए थे। िसTांत वहां खूब था. दरू-दरू खड़े । रहकर सुनते सुनते तो ऐसे सुनते जैसे क . काश तु]हG ह/ पता होता क Yया ठWक है और Yया गलत है तो आए ह/ YयO थे? सुनने वाले को ऐसे सुनना चाहए क मुझे तो पता नह/ं है क Yया ठWक और Yया गलत इसिलए म0 कैसे िनणाJयक बनूंगा? िनणJय छोड़कर सुनता हंू । मुझे तो पता नह/ं है Yया ठWक है और गलत है . बाहर रखना हाथ. जो कह/ ह/ नह/ं जा सकतीं। यहां तो कुछ ऐसी बातG कह/ं जा रह/ थीं क अगर तुम श6दO पर ह/ अटक जाओ तो समझ ह/ न सकोगे। श6दO के बीज जो खाली जगह होती है . पकड़ा न जाऊं। बड़/ होिशयार/ से सुनते हो। बड़/ चालबाजी से सुनते हो। बड़/ चालाक# से सुनते हो। Cजसने चालाक# से सुना वह चूक जाएगा। ये बातG चालाकO के िलए नह/ं ह0 । ये बातG द/वानO के िलए ह0 । सतगु स6दां िमट गया.यायाधीश सुनता है अदालत मG। सुनते तो ऐसे सुनते जैसे पर/[ण होकर आए ह0 । सुनते तो ऐसे सुनते क िनणJय मुझे करना है क ठWक हो क गलत अब. वहां से आगे नह/ं बढ़ते। खयाल रखते हो क इतनी दरू खड़ा रहंू क अगर भागने क# नौबत आ जाए तो भाग सकूं. सघन था। तकJ वहां काफ# ूित!`त था। जो भी वे कहते थे.com . भागे-भागे रहते हो। एक जगह तक जाते हो. ूHयेक बात के िलए शाUO से ूमाण दे ते थे। यहां वे तो शाU था न ूमाण था.dkuks lquh lks >wB lc नह/ं कर िलया! क म0 यह कस जाल मG पड़ा जा रहा हंू ! अपने को संभालते। अपने तकJ को िनखारते। सुनते भी तो भी डू बकर न सुनते. सुने वे मःती के श6द! ऐसे नह/ं है क उन श6दO मG बड़ा तकJ था.

य है िछपा हआ ु . सब दख ु गए. यह ु रामायण से मेल खाता है . खंड-खंड टटे ू कर यह Cजंदगी इस भांित टकड़O ु बंट/ है टट मG दरारG जोड़ना इनक# नह/ं इतना सरल कोई ु बड़े टू टे ह0 टकड़O मG हम। ू कर यह Cजंदगी इस भांित टकड़O ु बंट/ है टट मG दरारG जोड़ना इनक# नह/ं इतना सरल कोई जब तक क तुम कसी के ूेम मG !बलकुल न बह जाओ. या खो ह/ दया. क Yया ये कह रहे ह0 ठWक है या नह/ं. तकJ तोड़ता है । !वचार खंडत करते ह0 . उनके भीतर जो शू.य है वह उसमG झलक दे ने लगता है । ु तुमने अगर बहत ु gयादा चालाक# से सुना तो श6द को तुम मार डालते हो. दरया संसय सोग। और एक ऐसे तुम सुन सकते हो जैसे !वuाथx सुनता है क नोट लेने ह0 . चलो सोचकर रख लGगे.। सतगु स6दां िमट गया. संशय गया। और संशय गया तो सब शोक.. मुदाJ श6द तु]हारे हाथ मG रह जाते ह0 । gयादा से gयादा िसTांत तु]हारे हाथ मG आ जाएगा. तुम जुड़ न पाओगे। जब तक क तुम कसी के ूेम मG बेबस न हो जाओ. तु]हारा जाना हआ बोल रहा है क हां ठWक है . िनवेदत होकर. यह कुरान से मेल खाता है . यह बात नह/ं जंचती. बाद !वचार कर लGगे। और जब तुम सुन रहे हो तब भी भीतर तु]हारा अतीत. YयOक ू ह0 । संशय के कारण हम !वभ" ह0 . या खोला ह/ नह/ं िलफाफा.य चूक जाएगा। और असली बात वह/ थी। ऐसा समझो क म0ने तु]हारे पास एक पऽ भेजा और तुमने िलफाफा रख िलया और भीतर जो पऽ था वह तुमने दे खा ह/ नह/ं.com . सब भांित सम!पJत होकर. उसक# मृHयु हो जाती है . िलफाफे मG ह/ बहत ु मोहत हो गए। श6द तो िलफाफे ह0 . लेकन शू..dkuks lquh lks >wB lc पं!"यO के बीच मG जो र" ःथान होता है उसमG झांकना पड़ता है । यहां हर श6द के साथ जुड़ा हआ िनश6द था। उस िनश6द मG झांकना होता है । जब कोई श6द को बहत ु ु ौTा से सुनता है तो उसके हाथ मG िनश6द आ जाता है । जब श6दO को कोई बहत ु सहानुभिू त और लगाव से सुनता है तो फर श6दO मG जो िछपा हआ शू. तुम जुड़ न पाओगे। जब तक क तुम कसी के ूेम मG !बलकुल न बह जाओ. या भूल ह/ गए.oshoworld. तुम जुड़ न पाओगे। ूेम जोड़ता है . िन!वJचार अखंड बनता है । तुम मुझे सुन रहे हो. वह/ं ह0 संदेश। मगर शू. दो ढं ग से सुन सकते हो। एक तो दरया का ढं ग--तो तुम सौभा5यशाली। कसी दन तुम कह सकोगे: सतगु स6दां िमट गया.य को सुनना हो तो Vदय जरा भी सुर[ा करता हो अपनी. दरया संसय सोग दरया ह/ िमट गया फर संशय कहां! संशय तो अहं कार क# छाया है । तुम जब तक हो तब तक संशय है । तुम गए. तो नह/ं सुन पाओगे। असुरC[त होकर. यह हमारे धमJ के Cखलाफ है । ऐसा तुम पूरे व" कमGश/ कर रहे भीतर। तुम चल रहे हो। इधर म0 बोल रहा हंू . उधर तुम बोल रहे हो। तब तो बड़ा मुCँकल होगा। कुछ का कुछ सुन लोगे। कुछ Page 13 of 256 http://www.

YयOक तु]हार/ भी आHयंितक संभावना वह/ है । तुम भी बुT होने को हो.शाU-Dान क# धूल मुझे खूब िलपट/ थी चारO तरफ। बकवास थी सब. पढ़/-पढ़ाई बातG--िलपट/ थीं चारO तरफ। उधार बातG. वह सार/ धूल उड़ गई। सतगु वह/ जो तुमसे तु]हारे शाU छWन ले। जो तु]हG शाU दे ता हो वह सतगु नह/ं--जो तुमसे तु]हारे शाU छWन ले। जो तु]हG Dान दे वह सतगु नह/ं--जो तु]हG बोध दे और तु]हारा सारा Dान छWन ले। सतगु वह नह/ं जो तु]हG बहत ु gयादा िसTांती बनाए--सतगु वह/ जो तु]हारे जीवन से सारे िसTांतO क# धूल अलग कर दे .oshoworld.य तुम भी िलए चल रहे हो। इसको कब मौका दोगे क तु]हारा वेद ूगट हो? जीसस और बुT और महावीर तु]हारे भीतर भी बोलने को आतुर ह0 . वैसा ह/ चैत. जामत बना दे । शाU न दे . अंग रह/ िलपटाय सतगु एक ह/ श6द से. सब िनरोग हो गया.dkuks lquh lks >wB lc छूट जाएगा. हरनाम क# औषिध उसे ह/ द/ जा सकती है जो ूेम से सुनने मG तHपर हो जाए। सुना. उससे कम पर तु]हार/ भी याऽा पूर/ Page 14 of 256 http://www. अंग रह/ िलपटाय दरया कहते ह0 . तु]हG जीवंत. सब ःवःथ हो गया। सब रोग गए. मेरे अंग-अंग मG धूल लगी थी शाU-Dान क#। सुनी-सुनाई बातG. द/..ह/ं तुरत उड़ाय और सतगु के एक श6द से ःनान हो गया. बासी बातG। रं जी साःतर 5यान क#. अंग रह/ िलपटाए सतगु एक ह/ श6द से. YयOक सारे रोग मन के ह0 । सारे रोग अCःमता के ह0 । औषध दे हरनाम का... मगर खूब िलपट/ थी। उसी मG म0 गंदा हो रहा था। ःनान क# जMरत थी। और उस धूल को म0 सब कुछ समझे बैठा था। रं जी साःतर 5यान क#. गीत उठे ? तु]हारे भीतर के ऋ!ष को कब अवसर दोगे? वेद मG Cज..हOने गाए अपूवJ वचन. अपूवJ वचन है -रं जी साःतर 5यान क#... तु]हG शाU बना दे --वह/ सतगु। तु]हारे भीतर भी वह/ तो िछपा है जो उपिनषद के ऋ!षयO मG िछपा था। तुम उपिनषदO को कब तक पकड़े बठे रहोगे? कब भीतर के ऋ!ष को मौका दोगे क गुनगुन हो.ह/ं तुरत उड़ाय रं जी का अथJ होता है धूल। रं जी साःतर 5यान क#. द/. कुछ जुड़ जाएगा। कुछ का कुछ हो जाएगा। फर तुम उतने सौभा5यशाली नह/ं िसT होओगे जैसे दरया सौभा5यशाली िसT हए। ु सतगु स6दां िमट गया.com . Cजसने ूेम से कसी सदगु के श6द सुन िलए वह िमट ह/ जाता है । उसी िमटने मG होना है । उसी मृHयु मG नया ज.म है । औषध दे हरनाम का तन मन कया िनरोग और सब आरो5य हो गया.

मारने क# जMरत नह/ं पड़ती. बस उसी को पूरा कर लूंगा। और बुT ने उससे कुछ न कहा. फर बड़ा पुलकत होकर उठा. रट रहा है । वह खड़े होकर सुनता है और उसे कहता है . अंग रह/ िलपटाए सतगु एकह स6द से. कोड़ा फटकारा क चल पड़ता है । और फर Page 15 of 256 http://www. कुछ होता नह/ं। एक ह/ श6द से हो गया होगा? ूेम से सुना जाए तो एक श6द भी काफ# हो जाता है । ूेम से न सुना जाए तो करोड़O श6द भी काफ# नह/ं होते। फर समझदार को इशारा काफ# होता है । बुT कहते थे: एक दन एक आदमी आया और उसने बुT को कहा क आप तो संC[m मG कह दG . कुछ गुप चुप हो गया! ु बुT ने कहा: आनंद. मुझे याद है जब हम रामकुमार थे.oshoworld. कतने लोगO क# बातG सुनते ह0 . आनंद बुT का ह/ चचेरा भाई था। तो मुझे घोड़O का बहत ु शaक था. म0 जwद/ मG हंू । आप सार बात कह दG . फर भी चलता नह/ं। एक वह भी घोड़ा होता है क जरा मारा क चल पड़ता है । फर एक वह भी घोड़ा होता है. वे चुप ह/ बैठे रहे । वह आदमी आधा घड़/ चुप बैठा रहा. बुT के चरण छुए और कहा: ध. बगीचे के पास से गुजर रहा है . और उसका एक िशंय वृ[ के नीचे बैठा बुT-वचनO को कंठःथ कर रहा है . कह/ं ऐसा न हो क शाU तुझे गड़बड़ा दे .ह/ं तुरत उड़ाय पर यह कैसे होता होगा? YयOक कतने ह/ तो लोग. द/. चीन मG एक अदभुत झेन फक#र हआ ु --हईनG ु ग। िनकल रहा है आौम मG.यवाद! िमल गई बात। बुT ने कह/ नह/ं और उसको िमल गई। िमल गई बात! जब वह चला गया तो आनंद ने बुT से पूछा क इसको Yया िमल गया? YयOक म0 इधर तीस साल से आपके साथ हंू --सुन सुनकर थक गया हंू । और यह आदमी आधा घड़/ बैठा और आपने इससे कुछ कहा भी नह/ं.न थे जब उसने कहा िमल गया और वह भी बड़ा अपूवJ आनंदत था! जMर कुछ हआ तो है . सुन! खयाल रखना. गठर/ उधार क# िसर पर िलए रहोगे तब तक तु]हार/ अपनी संपदा पैदा न होगी। तो गु तो वह/ है जो तुम से शाU छWन ले। म0ने सुना. भूल नह/ं गया होगा। घोड़े कई तरह के होते ह0 । एक तो वह घोड़ा होता क क मारो मारो. घुड़सवार/ मG तू नंबर एक था। तुझे खयाल होगा. कह/ं ऐसा न हो क शाU तुझे गड़बड़ा दे । फर तो झेन फक#रO ने इस पर काफ# काम कया। फर तो दसरे एक झेन फक#र ने अपने सारे िशंयO को अपने मरते व" इकcठा कया और ू सारे शाU इकcठे करके आग लगवा द/ और कहा क दे खो यह मेरा आCखर/ संदेश है । जब तक ऐसे ह/ तु]हारे भीतर के सभी शाU न जल जाएंगे तब तक तु]हारे भीतर का शाःता पैदा न होगा। रं जी साःतर 5यान क#. तू शाU को गड़बड़ा दे ना! अपूवJ वचन है क तू शाU को गड़बड़ा दे ना. इसको िमला कैसे? इसको िमला Yया? यह मामला Yया है ? और आप भी ूस.dkuks lquh lks >wB lc नह/ं होगी। लेकन जब तक तुम उधार को बांधे रहोगे.com .

. दया अमीरस मोए एक श6द माऽ से! इशारे माऽ से! आंख मG आंख डाल द/ और सब कर दया! !वष-भांड़े !वष काढ़कर. और ूेम के मागJ पर ूसाद..dkuks lquh lks >wB lc एक वह भी घोड़ा होता है आनंद.. बहत ु सहज है । तुम बाधा न डालो बस। तो फकJ समझना। Iयान के मागJ पर ौम। इसिलए Iयान का मागJ अथक परौम का मागJ है । इसिलए तो बुT और महावीर क# संःकृ ित "ौमण संःकृ ित' कहलाती है --ौम। वहां भ!" का कोई उपाय नह/ं है . इनकार करते रहे । और जब द/ भी तो बड़े संकोच से द/ और Page 16 of 256 http://www.com . तुमने ु !वष भी िनकाल दया और कब मुझे अमृत से भर दया मुझे पता भी न चला! सतगु एकह श6द से. ूभुकृपा। ूभु-कृ पा क# पहली करण--गु-कृ पा। !वष-भांड़े !वष काढ़कर. कठन था काम यह. YयOक भ!" का वहां कोई उपाय नह/ं है । महावीर के माननेवाले तो कहते ह0 क Uी-पयाJय से तो मो[ नह/ं हो सकता। Uी-पयाJय का Yया अथJ होता है ? Uी-पयाJय का अथJ होता है --ूेम क# पयाJय। बुT ने वषr तक CUयO को द/[ा नह/ं द/. घोड़े को. मुझसे कछू न होए !वष-भांडे !वष काढ़कर दया अमीरस मोए और दरया कहते ह0 : गजब कया! खमब कया! चमHकार कया! कैसे तुमने कया?--जैसे सतगु तुम कर/. बहत ु सरल.oshoworld. मुझसे कुछू न होए अब मुझे पYका पता है क यह ूसाद से हआ है । ु खयाल रखना. म0 तो कर-कर हार गया था। म0 तो थक रहा था। नह/ं. मुझे तो हताशा घेरने लगी थी। मेरे कए तो कुछ नह/ं हो रहा था। जैसे सतगु तुम कर/. हमारे पास ऐसे घोड़े थे तुझे याद होगा क उसको फटकारना भी नह/ं पड़ता कोड़ा YयOक वह भी उसका अपमान हो जाएगा--बस कोड़ा हाथ म0 है . मगर पलक मारते हो गया। परमाHमा पलक मारते हो जाता है । यह काम कठन है अगर तुम करना करना चाहो. कोई dयवःथा नह/ं है । वहां Iयान ह/ एक माऽ मागJ है । इसिलए बुT और महावीर दोनO के मागJ पर Uी थोड़/ परे शान रह/ है . अगर तुम होने दो तो यह काम कठन नह/ं है . कोड़े को भी नह/ं रखना पड़ता Cजसके साथ. YयOक वह उसका अपमान हो जाएगा। उसे तो कोड़े क# छाया भी काफ# है । दरू क# छाया भी पयाJm है । ऐसा ह/ यह आदमी था--यह जो घोड़ा था। उसे कोड़े को छाया काफ# थी। आदमी-आदमी अलग अलग ढं ग से सुनते ह0 । दरया ने बड़े डू बकर सुना होगा। एक श6द तोड़ गया सार/ कारा.। चमHकार तुमने कया क म0 तो !वष से भरा हआ घड़ा था. सारा अंधकार। एक करण जगा गई भीतर क# रोशनी को। जैसे सतगु तुम कर/.. मुझसे कुछ न होए। YयOक म0 जानता हंू क यह मेरे कए नह/ं हआ है । ु यह मेरे कए तो होता ह/ नह/ं था. इतना काफ# है । फटकारना भी नह/ं पड़ता। और तुमने उस आCखर/ परम घोड़े को भी दे खा होगा Cजसको. Iयान के मागJ पर ूयास.

लwला। वह महावीर जैसी है । वह न5न रह/। पुष का न5न रहना इतना कठन नह/ं मालूम पड़ता. ूती[ा. पुष खोजता है । पुष याऽा पर िनकलता है . इससे कुछ अंतर नह/ं पड़ता। वह भेद तो शर/र का है । चैत. लेकन CUयO को रोक दया। शायद इसी कारण कहा क एक दफा फर तुमको ज. ूाथJना। Uी महण करती है ...म लेना पड़े गा. Uी बाट जोहती है । और ऐसा मत समझना क सभी पुष पुष ह0 और सभी CUयां CUयां ह0 । ऐसा मत समझना। कुछ CUयां ह0 जो Iयान से उपल6ध हOगी। और और पुष ह0 जो ूेम से उपल6ध हOगे। इसिलए Uी-पुष का !वभाजन शर/रगत नह/ं है िसफJ. अगर चैत.यािसिनयO को कहG क तुम न5न हो जाओ। पुष तो न5न हए ु .. जीवन भर न5न रह/। महावीर क# भी ह]मत नह/ं पड़/ क# अपनी द/C[त सं. पुष नह/ं। YयOक पाया भ!" से। ठWक मीरा जैसे dय!" ह0 ..ह/ं खोह स6द गहा सुख ऊपजा. सुख ऊपजा। इधर तुमने श6द दया. मेरा धमJ जो पांच हजार साल चलता. ूयास. जरा भी भेद नह/ं। शर/र के भेद से Yया फकJ पड़ता है ? थोड़े हाम}न कम या gयादा इधर-इधर. बहत ु गहरा है । जैसे चैत.oshoworld. अब पांच सौ साल से gयादा नह/ं चलेगा। यह बात Yया है ? ऐसा Yया कारण है ! धमJ से इनका कोई संबध ं नह/ं है --एक !विश_ ^!_ से। Iयान पुषगत है --ौम.dkuks lquh lks >wB lc दे ने के बाद कहा क आनंद. हो गया। मेरे कए कुछ भी न होता। स6द गहा सुख ऊपजा. अहोभाव. जै!वक नह/ं है . लेकन Iयान रखना. संकwप.। श6द के गहते ह/--श6द को लेते ह/ भीतर. गया अंदेशा मोह सारा भय िमट गया। Page 17 of 256 http://www.य को आIयाCHमक ^!_ से सोचना हो तो Uी कहना पड़े गा.य क# जो चेतना है वह ठWक मीरा जैसी है । काँमीर मG एक महला हई ु . दरया के पास Uी का दल है । सभी भ"O के पास Uी का दल है । मुझसे कछु न होए. इधर सुख उपजा। तु]हारे श6द से सुख क# वषाJ हो गई। स6द गहा सुख ऊपजा. Uी का न5न रहना बहत ु कठन मालूम पड़ता है । मगर लwला रह/. अथक ौम. साधना। ूेम Uीगत है --ूसाद. ःवीकार-भाव. तुमने कया. यह gयादा आHमगत है । जैसे सतगु तुम कर/. गया अंदेसा मोह सदगु ने करपा कर/.य है . पुष बनकर जब तुम सब तरह से छोड़कर दगंबर हो जाओगे तभी पाओगी। मगर इस जनम मG तो कैसे होगा? लेकन लwला काँमीर क# न5न रह/। लwला को Uी कहना ठWक नह/ं। लwला ठWक वैसी ह/ है जैसे महावीर। तो उस भेद को ऐसे मत मान लेना क यह शर/रगत ह/ है .com . तुम मानते नह/ं तो दे ता हंू... Cखड़क# द/.

अब बचना मुCँकल है । अभी हम !ववाहत ह/ हए ु न आ गए! यह कैसी दघJ ु टना ु थे. िचंता तो रहती होगी--त0तीस हजार िनयम! याद ह/ रखना मुCँकल है . यह/ मेरा उNर है । जब तूफान परमाHमा के हाथ मG है तो Yया घबड़ाना? तलवार उसने वा!पस ]यान मG रख ली। इधर वह तलवार ]यान मG वा!पस रख रहा था क उधर तूफान भी ]यान मG वा!पस रख िलया गया। ूेम जहां है वहां भय नह/ं। इसिलए भ" से gयादा िनभJय कोई भी नह/ं होता Cजसको तुम Iयानी कहते हो. कभी-कभी सोचने लगते हो िमट ह/ जाए.. भय गया। जहां भय आया वहां ूेम गया। म0ने सुना है . और कसको घृणा करोगे? पित प~ी को. Yया घबड़ाना? तलवार जब तु]हारे हाथ मG है . एक जापानी कथा है : एक युवक !ववाह करके. प~ी पित को--Cजससे तुम ूेम करते हो उसी से तो झगड़ोगे! उसी पर नाराज भी होओगे.एक योTा !ववाह करके अपने घर लौट रहा है --अपनी नववधू को लेकर। नाव पर दोनO सवार ह0 । तूफान आ गया है । नाव डांवाडोल हो रह/ है --अब गई.dkuks lquh lks >wB lc समझो। आमतौर से तुम सोचते हो क ूेम और घृणा !वपर/त है । यह बात सच नह/ं है । ूेम और भय !वपर/त ह0 । ूेम और घृणा !वपर/त नह/ं ह0 --ूेम के साथ घृणा चल सकती है । इसिलए !वपर/त नह/ं कह सकते। तुम Cजसको ूेम करते हो उसी को कई बार घृणा करते हो। सच तो यह है उसी को घृणा करोगे. इसिलए असली !वरोध तो ूेम और भय मG है । जहां ूेम आया. अपनी प~ी के गले के पास ले गया। ठWक !बलकुल पास ले गया। ठWक !बलकुल पास ले गया क जरा बाल भर का फासला रह गया। जरा-सी चोट क# क गरदन अलग हो जाए। वह युवती हं सने लगी। उस युवक ने कहा. वह भी डरा रहता है --बहत ु बार डरा रहता है क कह/ं यह न चूक जाए. तू हं सती है ? घबराती नह/ं? तलवार तेर/ गरदन पर है --नंगी तलवार. जरा-सा इशारा और तू गई। घबराती नह/ं? उसने कहा. कुछ अड़चन नह/ं है । लेकन ूेम के साथ भय कभी नह/ं चलता. जैसे कुछ भी नह/ं हो रहा! उस युवक ने अपने ]यान से तलवार िनकाल ली--और तलवार उस युवती के... तुम इस तरह िनCvंत बैठे हो जैसे कुछ भी नह/ं हो रहा है ! दे खते नह/ं क नाव डू बी. कह/ं यह पाप न हो जाए. मर ह/ जाए! Cजसके जीने के िलए जान दे सकते हो.oshoworld. अभी !ववाह का सुख भी न जाना था--और ये कैसे ददJ हई ु जा रह/ है । तुम बैठे YयO हो? तुम ऐसे िनCvंत बैठे हो जैसे घर मG बैठे हो.com . उसी को घृणा भी करोगे। Cजसके िलए जीते हो.कह/ं यह िनयम उwलंघन न हो जाए! बुT के िभ[ु के िलए त0तीस हजार िनयम! सोचो. कुछ न कुछ तो भूल होने ह/ वाली है । नरक िनCvत ह/ है । त0तीस हजार िनयम हO तो नरक से बचोगे कैसे? Page 18 of 256 http://www.। उस युवक ने कहा.. कह/ं यह भूल न हो जाए. तब गई! लेकन वह युवक िनCvंत बैठा है । वह प~ी उसक# घबड़ाने लगी। वह कंपने लगी। उसने उससे कहा. कभी उसक# जान लेने का !वचार भी मन मG आ जाता है । ूेम के साथ घृणा चल सकती है .

Uी महण करती है । िसफJ गहती है । महण करते ह/ उसके गभJ मG अंकुरण हो जाता है । जैसे पृवी बीज को महण करती है . उसके ह/ इशारे पर आई है । भ" मौत को भी आिलंगन कर सकता है । करता है । मौत मG भी िमऽता बांध लेता है । YयOक जो भी उसने भेजा है . एक Page 19 of 256 http://www.. फल को काटा। वह पहली कली हमेशा अपने दास को दे ता था. तुम जानो। अगर भूल करवानी हो भूल करवा लेना. कभी दे खा भी नह/ं! महमूद ने उसे तोड़ा। जैसी उसक# सदा क# आदत थी.com . स6द गहा सुख ऊपजा। इधर म0ने तु]हारा श6द अपने भीतर िलया क उधर म0ने पाया क सुख क# वषाJ हो गई.उHसव का ूारं भ हआ। ु कहते ह0 दरया.. समम है । स6द गहा सुख ऊपजा. महण करते ह/ बीज मG अंकुरण पैदा हो जाता है । ज.उनको भी अपने कमरे मG रात नह/ं सोने दे ता था. अगर न करवानी हो मत करवाना। भ" का अभय पूरा है . डरा रहता था--कोई मार डाले. कोई जहर !पला दे ! लेकन यह दास उसके कमरे ु मG सोता था। इससे उसे कोई भय ह/ नह/ं था। एक दन दोनO जंगल मG खो गए। िशकार करने गए थे. उसके जीवन मG ह/ आनंद हो सकता है । भ" के जीवन मG भय नह/ं.. यह जगत परमाHमा के हाथO मG है । यह तूफान उसके हाथ मG है । यह तलवार उसक# है । भ" मौत के सामने भी भयभीत नह/ं होता. सुख ह/ सुख के फूल Cखल गए। गया अंदेशा मोह। और बड़े चकत होने क# बात है क उस [ण म0ने पाया क सब भय मेरे !वसCजJत हो गए। कोई भय नह/ं बचा। ूेम मG भय कहां! जैसे रोशनी मG अंधेरा नह/ं. यह भी मुझे दे दो। महमूद ने कहा. एक और। ऐसा ु सुःवाद ु फल कभी चखा नह/ं। तो महमूद ने एक कली और दे द/। अब आधा ह/ फल बचा। और दास बोला क एक और। तो महमूद ने एक और दे द/--अब एक ह/ पंखड़ ु / बची.मता है जगत मG तो पुष दे ता है . तीन हःसे तूने ले िलए.। तु]हारे श6द को गहा ह/ नह/ं क सुख उपज गया। यह गहा श6द भी खयाल रखना--जैसे Uी महण करती है । जब एक नया जीवन ज. क भय समाm हो जाता है । और Cजसके जीवन मG भय न रहा. YयOक यह जगत दघJ ु टना नह/ं है . महमूद गजनवी का एक दास था.म शुM हआ ु . साथी !बछुड़ गए। िसफJ यह दास ह/ उसके साथ था। भूखेoयासे एक बगीचे मG पहंु चे। एक वृ[ मG िसफJ एक ह/ फल लगा है । पता नह/ं कस जाित का फल है . यह जरा gयादती है । म0 भी भूखा हंू और एक ह/ फल है इस वृ[ पर. कोई झगड़ा झंझट.न हआ दास। उसने कहा. सभी उसका है । म0ने सुना है . जीवन क# याऽा हई ु . चौथाई हःसा बचा। और दास कहने लगा.oshoworld. YयOक वह मौत भी उसक# ह/ से!वका है . ऐसे ूेम मG भय नह/ं। लाए दया क रोशनी आई नह/ं क अंधेरा गया नह/ं। ऐसे ह/ जला दया ूेम का. Cजससे उसका बड़ा लगाव था। लगाव के लायक था भी आदमी। कहते ह0 क महमूद अपनी पC~यO को भी बहत ु उसक# पC~यां थी.dkuks lquh lks >wB lc लेकन ूेमी को कोई भय नह/ं। वह कहता है . राःता भटक गए. उसने चाकू िनकाला. उसने दास को द/। उसने कली ली। बड़ा ूस.. कोई दँमन से िमल जाए. कैसा फल है .

ह/ खोह और तु]हार/ कृ पा. क कह/ं आह न िनकल जाए! Cजससे इतना िमलता हो उसके िलए हम जरा भी ध.यवाद नह/ं दे ते. जरा िसरददJ हो जाए. दे दो। कहते-कहते भी महमूद ने वह कली चख ली। वह कड़वा जहर थी। थूक द/. परमाHमा क# नह/ं। महावीर परमाHमा क# बात नह/ं करते--आHमा क#। Iयान से Cखड़क# खुलती है अपने भीतर को. क कह/ं अनजाने िशकायत न हो जाए. इतना ह/ काफ# था। महमूद ने अपने संःमरणO मG यह बात िलखी है । भ" क# यह ^!_ है जगत के ूित। इतना आनंद परमाHमा दे ता है क अगर कभी एकाध कांटा कह/ं राःते पर चुभ जाता है तो काई िशकायत क# बात है ? िछपाकर जwद/ से िनकाल लेना क उसको पता न चल जाए. लड़के को नौकर/ न िमले और नाCःतकता िसर उठाने लगती है । बेटा मर जाए और तुम मूितJ इHयाद फGक दे ते हो घर से िनकालकर क हो गया बहत। ु तु]हारा भगवान दो कौड़/ का है । तु]हार/ भगवान से कोई पहचान नह/ं है । तुमने कोई संबध ं जोड़ा नह/ं है । स6द गहा सुख ऊपजा. यह जरा सीमा के बाहर बात हो गई। लेकन दास कहता रहा क मुझे दे दो. क खोल दया Rार Cजसक# म0 तलाश कर रहा था--ूेम का Rार। YयOक ूेम के Rार से ह/ जाना जाता है परमाHमा। Iयान के Rार से जानी जाती है आHमा। ूेम के Rार से जाना जाता है परमाHमा। आHमा भी परमाHमा है. क आदमी नाCःतक हो जाता है । काफ# है िसरददJ नाCःतक होने के िलए। सब आCःतकता इHयाद एक [ण मG खतम हो जाता है . तूने कहा YयO नह/ं क यह जहर है ? और इसको भी ु तू मांग रहा था। और तीन टकड़े तू इस तरह खा गया जैसे अमृत है ! उस दस ने कहा क Cजन हाथO से बहत ु सी सुःवाद ु चीजG िमली हO उनसे कभी एकाध अगर कड़वी भी चीज िमल जाए तो इसमG िशकायत क# बात नह/ं है । Cजन हाथO ने इतना सुख दया है . अंदेशा िमट गया। कैसा तुमने गजब कया! कैसा तुमने चमHकार कया! और म0ने कुछ कया नह/ं--िसफJ श6द गहा! मेर/ तरफ से कुछ करा-कया धरा नह/ं। मेर/ तरफ से तो िसफJ महण हआ। िसफJ म0न. उन हाथO से अगर थोड़ा दख ु भी िमल जाए तो वह भी सौभा5य है । वह उ. तु]हारा श6द बीज बन गया। म0 तो Uी बन गया. सब तरह वह/ दखाई पड़ने लगता है । और ूेमी को पहले दखाई Page 20 of 256 http://www. तु]हारा श6द मेरे भीतर आर गभJ बन गया. अंकुरत होने लगा। सतगु ने करपा कर/.oshoworld. लेकन जरा-सी अड़चन आ जाए--जरा-सी अड़चन. कली फGक द/। कहा क पागल.ह/ं हाथO से आ रहा है । आपके हाथO ने छुआ. े तुमने जो दया. गया अंदेसा मोह कहते ह0 दरया: सब भय िमट गया. परमाHमा भी आHमा है । लेकन इसिलए Iयानी आHमा क# बात करते ह0 . दे दो मुझे। हाथ से छWनने लगा। महमूद ने कहा क ठहर. वह ले िलया। म0 ु तो भूिम बन गया.com . Cखड़क# द/. अंतमुख J ता पैदा होती है । और ूेम से Cखड़क# खुलती है समःत क#.dkuks lquh lks >wB lc मुझे भी लेने दे । लेकन यह दास बोला क नह/ं मािलक.

तु]हारा संबध ं आकाश से हो गया। बिलहार/ गु आपने गो!वंद दयो बताए! अब इस Cखड़क# से छूट सकोगे। और आकाश से कौन छूटना चाहता है ! कौन होना चाहता है [ुि! कौन नह/ं !वराट होना चाहता! कौन सीमा मG बंधना चाहता है ! Cजसको असीम के दशJन हए ु वह YयO सीमा मG लौटना चाहे ! हमार/ सार/ खोज एक ह/ है क कैसे असीम हो जाएं.य माऽ है । सदगु तो शू. Cजसने अनुभव कया. कसी का मुह तो एक ह/ इsछा है : जन दरया हरया रहै . Cखड़क# द/. िमटता नह/ं। न बने और बात.ह/ं खोह और तुमने Rार खोल दए. परदे सां रस दे त ू जाता है तो दसरO पान का पNा होता है . कसी को रस दं .oshoworld. कसी न मुंह ू से पड़े गा. उस हर बेल के हे त और अब तो म0 तुमसे ह/ जुड़ा रहंू गा. तुमसे एक हो नया. अब मेर/ कोई इsछा नह/ं क कह/ं जाऊं.य माऽ है । सदगु तो एक Cखड़क# है आकाश क#। Cखड़क# खुल गई. जब अचानक तुम पाओगे जले दए क# लपट बुझे Page 21 of 256 http://www. िमट जाते ह0 .dkuks lquh lks >wB lc पड़ता है सब तरफ वह/--और तब पता चलता है क म0 भी वह/। Dानी को पहले दखाई पड़ता है म0 वह/ और तब दखाई पड़ता है सब वह/। इतना फकJ होता है । अंितम परणाम एक है । लेकन ूेम का मागJ बड़ा रसपूणJ है । रसो वै सः। बड़ा रसभरा है ! सतगु ने करपा कर/. कैसे अनंत हो जाएं. उस हर बेल के हे त। क तुमसे जो लग गया लगाव वह लगा रहे और वह पNा हरा बना रहे । मगर ऐसा होता ह/ है । एक बार जुड़ गया जो सदगु से. जैसे पान का पNा बेल से जुड़ा रहे तो हरा रहता है । जन दरया हरया रहै . बेल से टट को सुख दे ता फरता है . रस दे गा. कैसे !वराट और !वभु हो जाएं। सदगु श6द पर थोड़/-सी बातG। सदगु का अथJ होता है Cजसने जाना. यह ूेम िसफJ बनता है .com . उस हर बेल के हे त अब तो म0 तुमसे जुड़ गया. कसी के मुंह को लाली करे गा। दरया कहते ह0 . Cजसक# gयोित जली। अब अगर तु]हार/ gयोित बुझी है । तो कसी जले हए ु दए के पास जाओ। और कोई उपाय नह/ं है । िनकट आओ कसी दए जले हए ु दए के। आते जाओ िनकट। िनकटता क# ह/ एक सीमा है . बन जाए फर िमटता नह/ं। पान बेल से बीछुड़ै . परदे सO मG भटकूं. अब मुझे कोई अलग न कर सकेगा। गु के िशंय को फर अलग नह/ं कया जा सकता। एक दफा घटना भर घट जाए. वह जुड़ गया। YयOक सदगु से जुड़ने का आHयंितक अथJ इतना ह/ होता है क वह परमाHमा से जुड़ गया है । सदगु तो कोई है ह/ नह/ं। सदगु तो शू. फर यह गांठ खुलती नह/ं। और सब तरह के ूेम बनते ह0 . ं रं गूं--इस सबक# मुझ कुछ इsछा नह/ं है । अब ू कसी को ूभा!वत कMं. तु]हार/ कृ पा हो गई। पान बेल से बीछुड़ै परदे सां रस दे त जन दरया हरया रहै .

वैसा ह/ जल रहा है जैसा जलता था। उसने जरा भी नह/ं खोया। गु का कुछ खोता नह/ं.com . उतना ह/ गु का आनंद गहन होने लगता है । जैसे माली को दे खकर आनंद होता है जब उसके वृ[O पर फूल Cखल जाते ह0 . जले दए का कुछ खोता नह/ं है । एक दए से हजार दए जला लो. आदमी-आदमी को खोजते ह0 .oshoworld. अनंत िमल जाता है । ऐसा अपूवJ यह dयवसाय है । यहां खोया कुछ जाता ह/ नह/ं। तो गु यह भी नह/ं सोचता एक [ण को भी क उसने तुम पर कोई कृ पा क#। सच तो यह है .यवाद करती है । बादल भी ध.यवाद करते ह0 । चूंक बादल खाली हो गए.dkuks lquh lks >wB lc दए पर छलांग लगा गई। एक [ण मG बांित घट जाती है । जले दए का कुछ नुकसान नह/ं होता। जला दया अब भी वैसा ह/ जलता है । बुझे दए को िमल जाता है . क तुमने थोड़ा सा उसका बोझ बंटा िलया। आनंद भी बंटना चाहता है । आनंद भी घनीभूत हो जाता है । जैसे बादल जब भर जाते ह0 जल से तो बरसना चाहते ह0 । तो तुम यह मत सोचना क जब oयासी धरती पर बादल बरसते ह0 तो िसफJ धरती ह/ ध. जब उसके िशंय Cखल जाते ह0 । गु अनुगह ृ /त होता है क तुम इतने कर/ब आए.हG मु" कर दया बोझ से। जब फूल सुगंध से भर जाता है तो Cखलता है --Cखलता ह/ है . दःतक दे ते फरते ह0 । िशंय जैसे गु को खोजते ह0 वैसे ह/ गु िशंय को भी खोजता है । और जब कभी कसी सदगु का सदिशंय से िमलना हो जाता है तो सारा जगत आनंद से भरता है । YयOक वह/ घटना इस जगत मG परम घटना है । जन दरया हरभ!" क#. Cखलना ह/ पड़ता है । और हजार-हजार मागr से !बखरता है । अपनी सुगंध को !बखेरता है । रं ग मG और गंध मG याऽा करता है दरू-दरू हवाओं क#. नरक पड़न के घाट दरया के इन वचनO मG डू बना। दरया को तीथJ बनाना। दरया से कुछ सीखो। दरया से िमटने क# कला सीखो। और िमटना आ गया तो सब आ गया। आज इतना ह/। रं जी साःतर 5यान क# Page 22 of 256 http://www. तो भी जलता दया जल ह/ रहा है . क पहंु च जाए उन नासापुटO तक जो ूफुCwलत हOगे और आनंदत हOगे। यह अकारण ह/ तो नह/ं है क बुTपुष भटकते ह0 गांव-गांव. ऐसे गु को परम आनंद होता है . िशंय को बहत ु कुछ िमल जाता है . बोझ से मु" हो गए. तुमने इतनी ह]मत क# YयOक गु क# gयोित Cजतने-Cजतने द/यO मG फैलने लगती है .यवाद/ होता है क तुम कर/ब आए. धरती ने उ. गुरां बताई बाट भूला ऊजड़ जाए था. गु तु]हारा ध. Rार-Rार.

म के पीछे बहत ु ज.com . जब भी हम एक ज. दपJण खाली हो गया। Page 23 of 256 http://www. पूना। ूƒ सार गैर-पढ़े िलखे लोगO के मन पर शाUO क# धूल कैसे जमती है ? गु के िनकट अपना Vदय खोलना इतना कठन YयO मालूम पड़ता है ? राम सदा कहत जाई. क गु को उसे उड़ाना पड़ा? पहली बात. आंिधयां उठG गी.dkuks lquh lks >wB lc ूवचन: २ दनांक १२.म ह/ तु]हार/ सार/ कथा नह/ं है । इस ज. न मालूम कतने श6द सुने हOगे। तो एक तो.म खड़े ह0 .oshoworld. यह ज. और शाखाएं और पNे फैलGगे तब दखाई पड़G गे। छोटे से छोटा बsचा भी. Cजसक# आंख मG अभी कोई धूल नह/ं दखाई पड़ती वह भी बड़/ आंिधयां िलए बैठा है । बड़/ आंिधयां भीतर तैयार हो रह/ ह0 । अभी आंख खाली मालूम पड़ती है । अभी पदाJ खाली मालूम पड़ता है । तैयार हो रहा है । जwद/ हमले शुM हो जाएंगे। उसके भीतर िछपे हए ु संःकारO क# भीड़ ूगट होगी। जैस-े जैसे बsचा बड़ा होगा वैसे-वैसे भीड़ उमगेगी. Cजसने सारे ज. अंधड़ घेरेगा। इसिलए िनद}ष तो छोटा बsचा भी नह/ं है । लगता है । िनद}ष तो केवल संत ह/ होता है .मO-ज. राम सदा बहत जाई? Yया दाद ू क# तरह आप भी सौ साल बाद क# भ!वंयवाणी करG ग? े पहला ूƒ: दरया साहब पंडत नह/ं थे. तो दखाई नह/ं पड़ते। जब अंकुरत हOगे. पढ़े िलखे भी नह/ं थे फर उन पर शाUO क# धूल कैसी जमी. १९७७ ौी रजनीश आौम. पतJ पर पतJ संःकारO क# है । तो छोटा सा बsचा भी पूरा-पूरा िनद}ष थोड़े ह/ होता है ! सब तरह के दोष भीतर इकcठे पड़े ह0 । समय पाकर ूगट हOगे। अभी बीजMप ह0 .म के पीछे कतार है .मO क# धूल पOछ डाली। Cजसने धूल माऽ पOछ डाली। Cजसका कुछ पीछा न रहा और Cजसका कुछ आगा भी न रहा। Cजस दन पीछा नह/ं रह जाता उसी दन आगा भी नह/ं रह जाता। YयOक पीछे से ह/ आगा पैदा होता है । अतीत ह/ भ!वंय का िनमाJता है . िनमाJता है । अतीत ह/ भ!वंय क# कुंजी है । तुम जो रहे हो पहले और तुमने जो संमह/त कर िलया है वह/ तु]हारे भ!वंय को भी ूभा!वत करता रहे गा। Cजस दन अतीत से पूरा छुटकारा हो जाता है उसी दन dय!" भ!वंय से भी छूट गया। Cजस दन पुराने सारे संःकारO क# धूल !वदा हो गई उस दन करने को कुछ भी न बचा.म क# बात कर रहे ह0 तो भूल मत जाना क इस ज.७.मO मG न ु मालूम कतने कतने शाU जाने हOगे. पं!"बT ज.म क# बात हई। लेकन ज.मO क# धूल है । दरया पढ़े -िलखे नह/ं थे यह इस ज.

तोते गुनगुनाएगे शाU. िसफJ ू शाU से मु" होने से न चलेगा। लोगO क# बात तो सुनते हो! बsचा बड़ा होगा तो मां-बाप क# बात सुनेगा.म हआ। एक ज.म के पीछे अनंत जीवन कतारबT है । दसर/ बात। अगर न भी पढ़े -िलखे हो. िनजी ढं ग से शाUO मG नह/ं जाता। कोई दसरा शाUO मG गया है .म मां-बाप से िमला था. परवार क# बात तो सुनेगा. बsचे का संःकार थोड़े ह/ नया है ! बsचे के ूाण तो बड़े ूाचीन ह0 । उतने ह/ ूाचीन ह0 Cजतना यह संसार ूाचीन है । हम सदा से चल रहे ह0 इस संसार मG। हमने न मालूम कतनी याऽाएं क# ह0 । हमने न मालूम कतने-कतने मागr पर भीख मांगी है । और हमने न मालूम कतनेकतने दख ु झेले ह0 . !पता को पूजा करते दे खोगे. कूड़ा करकट है । सोना इसमG है ह/ नह/ं। ह/रे यहां पाए ह/ नह/ं जाते। Cजसने असफलता को परपूणत J ा से पहचान िलया. कब कूद पड़े संसार मG। बालक तो संसार के कनारे खड़ा ूिश[ण ले रहा है संसार का। जो संसार मG उतर चुका. कतने !वषाद पाए ह0 . Cजसक# हार आCखर/ हो गई. कतनी िचंताओं से गुजरे ह0 । और हमने बहत ु बार शाU भी पढ़े ह0 । अगर खुद भी न पढ़े हO तो सुने ह0 । और शाU तो हवा मG तैर रहे ह0 । कोई पढ़ा-िलखा होना थोड़े ह/ जMर/ है ! शाUO क# धूल तो हवाओं मG उड़ रह/ है । श6द तो हवा मG तैर रहे ह0 । संःकार को पकड़ने के िलए पढ़ना-िलखना ह/ थोड़/ आवँयक है । संःकार से मु" होने के िलए दसरे से मु" होना जMर/ है .oshoworld. झुकते दे खोगे कह/ं मंदर मG। Page 24 of 256 http://www. बहत ु बार उतर चुका. आस-पास क# बात. खबरG तो सुनेगा. हार चुका. बsचा सुनेगा। संःकार पड़ने लगे। पढ़ने से थोड़े ह/ संःकार पड़ते ह0 ! अगर पढ़ने से ह/ संःकार पड़ते होते तो गैर पढ़े -िलखे तो सभी मु" हो जाते। गैर पढ़ा-िलखा ह/ संःकार इकcठे करता है । उसके संःकार इकcठे करने के ढं ग जरा पुराने ढं ग के ह0 । वह नए ढं ग से इकcठा नह/ं करता.dkuks lquh lks >wB lc इसको भी हम ठWक-ठWक बचपन कहते ह0 । संत ह/ बालक होता है । बालक बालक नह/ं है . Cजसने दे ख िलया संसार सब कोनO से. हताश हो चुका. कुछ भेद नह/ं पड़ता। शाU तो सब तरफ तैर रहे ह0 । ू उनक# गूंज हो रह/ है । मCःजद के पास िनकलोगे तो अwलाह का नाम सुनाई पड़ जाएगा। मंदर के पास से िनकालोगे तो राम का नाम सुनाई पड़ जाएगा। सुन िलया क संःकार बना। मां को पूजा करते दे खोगे. वह आदमी संसार क# आंिधयO के बाहर िनकल आता है । तब सsचे अथr मG बsचा हआ। ु इसको ह/ हम Rज कहते ह0 YयOक यह दसरा ज. ऊब चुका. बालक तो केवल बड़े होने क# तैयारयां ह0 । बालक तो ूती[ा कर रहा है क कब तैयार हो जाए. सब तरफ से पहचान िलया और पाया क dयथJ है .com . उसक# सुन लेता है । ू तो पहली तो बात: एक ज. मंदर का घंटा नाद तो सुनेगा। मंदर मG होती पूजा तो दे खेगा। पंडत दोहराएगा शाU. ू ु मन तो पुराना ह/ रहा था। बोतल बदल गई थी. शराब तो पुरानी ह/ रह/ थी। पुरानी शराब को भी नई बोतल मG रखो तो ॅम पैदा होता है क शराब नई है । बsचे ह/ दे ह नई है .

इकcठW नह/ं होने दे ता। बहत ु पNे इकcठW नह/ं होने दे ता। वह जो दरया ने कहा क शाUO क# जो धूल मुझ पर जमी थी गु ने एक फूंक मार द/.oshoworld. यह मेरा घर है । यहां म0 हजारO-करोड़O साल से रहा हंू । और ऐसे तुम आ जाओ और मुझे अलग कर दो. दए क# जरा सी लपट. जब तुमने दोहराया तो झूठ हो गया। तु]हारा दोहराना तो तोता-रटं त है । तोतारटं त मG कैसे सच हो हो सकता है ? दरया ने कुछ कहा--सच। कहा दया. तुम याद कर लो. YयOक वह/ कसी संत ने कहा हो। लेकन जब संत ने कहा था तो सच था. तुमने कुछ भी न कया था। धूल तो चल ह/ रह/ है । और Cजतने तुम सोए हए ु हो उतनी जwद/ धूल जम जाती है । YयOक झाड़ने वाला तो मौजूद नह/ं है । जागो तो झाड़ने वाला तैयार होता है । ूितपल पड़ती धूल को झाड़ता जाता है . कपड़े थोड़े गंदे हो गए। तुम तो सोए ह/ रहे थे. सुन कर पकड़ा है वह तु]हारा तो नह/ं है । जो तु]हारा नह/ं है वह झूठ है । मुझे इसे दोहराने दो। इसे तुम गांठ बांध लेना: जो तु]हारा नह/ं है वह झूठ है । झूठ का और कोई अथJ नह/ं होता। झूठ का यह अथJ नह/ं होता क तुम जो कह रहे हो वह झूठ है । वह हो सकता है क झूठ न हो. एक श6द से सब उड़ गई। Yया अथJ होगा इसका? इतने संःकारO क# पुरानी और एक श6द से उड़ गई! जंचती नह/ं बात। गCणत क# नह/ं मालूम होती. अब तो श6द तु]हG मालूम है .dkuks lquh lks >wB lc संःकार बहत ु -बहत ु MपO मG चारO तरफ से आते ह0 । असंःकारत रह जाना असंभव है । कोई उपाय नह/ं है । कसी न कसी तरह का संःकार तो पड़े गा ह/। असंःकारत होने का तो एक ह/ उपाय है क कसी दन जागकर तुम सारे संःकारO को.com . म0 हजार साल पुराना हंू . तु]हारे कपड़O पर जमती रहे गी। सुबह तुम पाओगे. और बड़े पुराने अंधेरे को तोड़ दे ती है । ऐसा ह/ होता है गु के पास। वह सHय क# जो छोट/ सी करण है . दरया के पद कंठःथ कर लो। और हो सकता है तु]हारा कंठ दरया से बेहतर हो। और हो Page 25 of 256 http://www. यह नह/ं चलेगा। नह/ं. गCणत क# है । जैसे क कसी कमरे मG हजारा साल से अंधेरा हो और तुम दया ले आओ तो Yया तुम सोचते हो क अंधेरा कहे गा. इससे Yया फकJ पड़ता है ? आया दया. अंधेरा कुछ भी नह/ं कर सकता। अंधेरा नपुस ं क है । बल ह/ नह/ं है अंधेरे मG। अंधेरा का कोई अCःतHव ह/ नह/ं है । जरा सी करण. बेबझ ू लगती है । लेकन जरा भी बेबझ ू नह/ं है . संःकारO मG हए ु तादाH]यO को तोड़ दो। कसी दन जागकर पOछ डालो सार/ धूल। सोए-सोए तो धूल इकcठW होती ह/ है । ऐसा मत सोचना क हम सोए थे तो कैसे धूल इकcठW होगी? सपनO मG धूल उड़ती रहे गी। रात तुम सो जाओ तो भी हवा मG धूल है . पयाJm है . क गया अंधेरा। आते ह/ गया। एक [ण भी Cझझक नह/ं सकता। एक [ण भी यह नह/ं कह सकता क म0 कोई नया वासी नह/ं हंू इस कमरे का। कोई ऐसा नह/ं क कल ह/ रात आकर ठहर गया हंू । यह कोई धमJशाला नह/ं है . सारे शाUO क# धूल को झाड़ दे ने के िलए। YयO पयाJm है ? YयOक जो तुमने श6द से पकड़ा है . इतनी आसानी से हटंू गा नह/ं। हजार साल पुराना हो क करोड़ साल पुराना हो.

तो पहचान लोगे क हां. अब हम कैसे बताएं? वU तो पहने ह/ नह/ं थे। उन बsचO क# बात समझे? बsचO क# पहचान तो वUO क# पहचान है । मगर तु]हार/ पहचान भी वUO से gयादा कहां है सHय अगर न5न खड़ा होगा. फर भी तु]हारे श6द झूठे होते ह0 और संतO के सच। सच का श6दO से कुछ नाता नह/ं है . हमने दे खा झांककर। तो मां ने पूछा क कौन थे वहां. अनुभव से नाता है । तु]हारे अनुभव से जो आए. क जब कोई सHय न5न खड़ा हो जाए तो तुम पहचान ह/ न सकोगे। म0ने सुना. तुम न पहचान सकोगे। तुम तो सHय के वU पहचानते हो। अगर हं द ू के वU पहने खड़ा है और तुम हं द ू के घर मG पैदा हए ु हो तो. वहां सभी लोग न5न थे। CUयां भी न5न थीं. दो छोटे बsचे एक . सHय.हOने कहा.हOने कभी नंगी Uी. वUO और सजावट मG इतने उलझ गए हो. उधार जो हो.com . और नंगे पुष दे खे नह/ं थे वे तो एक ह/ फकJ जानते थे क साड़/ पहने हो तो Uी. अगर तु]हारा भी अनुभव हो जाए तो सच हो जाएगा। Page 26 of 256 http://www. आदमी था क औरतG? उ. ठWक है । यह/ तो िलखा है रामायण मG. पुष भी न5न थे। दोनO छोटे -छोटे बsचे हOगे छहसात साल के. झूठ। यह/ कसौट/ है । तो शाUO से जो सुना था वह झूठ था। खयाल रखना. बासा जो हो. सजावट भी नह/ं होती। और तुम आभूषण. कौन पुष? YयOक उ.oshoworld.यूडःट कै]प के पास से िनकल रहे थे। नंगO क# बःती थी। द/वाल से झांककर द/वाल मG छे द थे--नाली का छे द--उसमG से दोनO ने भीतर दे खा. और साड़/ न पहने हो तो पुष। आज बड़/ मुCँकल मG पड़ गए। घर लौटकर आए तो उ. यह/ तो गीता कहती है । और अगर तुम इःलाम के परवार मG पैदा हए ु हो तो शायद न पहचाना पाओ YयOक यह वU अपरिचत है । तुम तो कुरान क# आयत होगी तो पहचान पाओगे। मगर सHय Yया कुरान से बंधा है क गीता से बंधा है ? सHय के Yया कोई वU ह0 ? सHय तो िनवJU है । वU तो हमने ओढ़ा दए। वU तो हमने लगा दए। वU तो हमारा दान है सHय को। तो खयाल रहे .dkuks lquh lks >wB lc सकता है तुम दरया से gयादा शुT भाषा का उsचार कर सको। हो सकता है दरया भी तु]हारे सामने श6द दोहराएं तो तु]हारा श6द gयादा बलशाली मालूम पड़े । अंधO क# इस दिनया मG बड़/ अड़चन है । यहां कभी-कभी तो झूठ बड़ा बलशाली मालूम पड़ता ु है YयOक झूठ हजार तकJ जुड़ा लेता है । कभी-कभी सच यहां !बलकुल ह/ श!"ह/न मालूम पड़ता है । YयOक सच तकJ तो जुटाता नह/ं। सच कोई ूमाण तो इकcठे नह/ं करता। सच तो बड़ा न5न होता है । आभूषण भी नह/ं होते. फर दोहरा दं ।ू ऐसा मत समझ लेना क शाUO मG जो िलखा है . अपना बःतर लटकाए ःकूल से लौटते थे। दोनO बड़े !वचार मG पड़ गए क कौन Uी है .हOने अपने मां-बाप को कहा क हम नंगO क# बःती से गुजरते थे. वU भी नह/ं होते. वह झूठ है । शाUO को दोहराओगे तो झूठ हो जाएगा। शाUO मG जो िलखा है . कभी-कभी तुम ठWक वे ह/ श6द उपयोग करते हो जो संतO ने कए.

सHय ूकाश जैसा। फर एक ह/ करण काफ# है कोई पूरे सूरज को थोड़े ह/ घर मG लाना पड़ता है ! एक छोटा सा दया काफ# है । इसिलए कहा. थोथी. अपना सा[ाHकार. अब यह तु]हारा अपना अनुभव. लेकन िलखे हए ु को जब तुम मान लेते हो तो तु]हारे पास आकर सब झूठ हो जाता है । म0ने ूेम कया. Cजस दन तुम अपनी छाती पर हाथ रखकर कह सकते हो यह मेरा अनुभव. क कुरान मG िलखा है । अब तुम कहोगे क वह कुरान सच है YयOक मेरे अनुभव मG आ गया है । पहले तुम कहते थे मेर/ मा.मO-ज.हOने िलखा था सच ह/ जानकर िलखा था. म0ने ूेम जाना. गु ने एक फूंक मार द/ और उड़ ू गया। झूठ गई। सHय क# एक करण आई और ज. कुरान Rतीय हआ। ु Cजस दन शाU नंबर दो हो जाता है . वह गु क# उपCःथित. उथली-उथली है । तुम ःवयं उसके गवाह नह/ं हो। आंख दे खी नह/ं है . म0ने तुमसे ूेम क# बात कह/। तुमने न कभी ूेम कया. उस दन शाU को पकड़े रहने क# कोई जMरत नह/ं रह जाती। Yया जMरत रह/? Cजसके पास अपनी अनुभिू त क# संपदा है वह शाU को भूल जाए। और मजा यह है क जो शाU को भूल सकता है वह/ शाU का सबसे बड़ा dया…याकार है । यह !वरोधाभास है । जो शाU क# धूल से मु" हो गया. Cजस दन तुम कह सकते हो क म0ने भी जाना जो शाU मG िलखा है . Cजस दन तुम ूथम हो जाते हो. उसने ह/ पहचाना। वह/ जो कहे गा.com . Cज. गीता कहती है इसिलए सच। अब तुम कहोगे म0 कहता हंू । अब तुम इसिलए नह/ं कहोगे सच. वह/ शाUD है । उसने ह/ जाना. शाUO मG जो िलखा है .oshoworld. अपनी ूतीित. और दरया क# वाणी शाU बन गई। समझने क# बात इतनी ह/ है . फर कसी क# कह/ हई ु बात अफवाह है । कौन जाने ठWक हो। कौन जाने न ठWक हो। भरोसे क# बात है । जब तुम कसी पर भरोसा करते हो तो यह कभी पूणJ ौTा तो हो ह/ नह/ं सकती। पूणJ ौTा तो Page 27 of 256 http://www. दोहराने लगे। तु]हारे िलए बात सब झूठW-झूठW है . झूठ का अंधेरा टट अंधेरे जैसा है . तुम Rतीय थे। अब तुम ूथम हए ु . वह आघात तोड़ गया होगा अंधेरे को। शाUO क# धूल झड़ गई। Cजस दन शाUO क# धूल झड़ जाती है उसी दन तु]हG अपने भीतर का शाU उपल6ध होता है । उसी दन फर तुम बासे नह/ं रह जाते। अब तुम ःवयं जानते हो। अब ये बातG तु]हार/ मा.dkuks lquh lks >wB lc तो दरया कहते ह0 क धूल बहत ु जमी थी शाUO क#. वह मौजूदगी क# चोट. कानO सुनी है : कानO सुनी सो झूठ सब। अपनी दे खी हो। इसीिलए तो हम ि_ा को मूwय दे ते ह0 . पकड़ ली. ौोता को नह/ं। YयO ि_ा को मूwय दे ते ह0 ? आंख से दे खी हो। परमाHमा आंख के सामने दे खा गया हो। कान से सुना गया हो.मO का अंधेरा. न कभी ूेम जाना.यता क# नह/ं है . फर शाU बन जाएगा। दरया क# वाणी शाU बन गई। धूल झाड़ द/ गु ने दरया क#. बात सुनी.यता ठWक है YयOक कुरान मG िलखी है । कुरान ूथम था. अब तुम ःवयं गवाह हो। अब तुम यह न कहोगे. एक श6द से। सच तो यह है क श6द क भी शायद जMरत न पड़/ होगी। यह सब कहने क# बात है । गु क# मौजूदगी काफ# हो गई होगी। वह मौजूदगी का संःपशJ.

योगॅ_। भोगी तो कैसे ॅ_ होगा? कहां ॅ_ होगा? अब िगरने को और जगह कहां है ? िगरा ह/ हआ है । आCखर/ जगह तो पहले से ह/ है ।अब इसके पार और कहां िगरे गा? ःवगJ से ु लोग िगरते ह0 . हर संत का अतीत है . हHयारा है . और कहे क म0ने एक मMuान दे खा। दरू म0ने एक मMuान दे खा। इसक# बात झूठ नह/ं होगी YयOक यह झूठ बोलने का आद/ नह/ं है । तुम मान ले सकते हो ठWक कहता है लेकन दरू दे खा मMuान हो सकता है मृग-मर/िचका रह/ हो। मर/िचका भी होती है । फर जो आदमी आज तक झूठ नह/ं बोला वह आज झूठ बोल सकता है । ऐसी अड़चन Yया है ? जो आज तक झूठ बोलता रहा वह आज सच बोल सकता है । एक [ण मG Mपांतर हो सकते ह0 । कहावत है .यानबे कताबG तो सब उधार और बासी होती ह0 । तो कैसे भरोसा करोगे? इसिलए संदेह तो बना ह/ रहे गा। अनुभव से ह/ जाता है संदेह-सममीभूत। और जब तु]हG अपने पर अनुभव आ जाता है .com . भरोसे यो5य है । न चोर/ क# कभी न कसी को धोखा दया है . िनज अनुभव पर होती है । दसरे पर तो थोड़ा न बहत ू ु शक बना ह/ रहता है . जो ऊंचाइयO पर होता है वह/ िगर सकता है । जो नीचाइयO पर होता है वह िगरे गा कैसे? इसिलए भोग ॅ_ श6द हमारे पास नह/ं है . ईमानदार था. और हर पापी का भ!वंय। अगर जो आदमी आज तक झूठ बोला है . न बेईमानी क# है . नकJ से नह/ं िगरते। नकJ से कहां िगरG गे? नकJ से िगरे तो सौभा5य। YयOक नकJ से िगरG गे तो कह/ं न कह/ं पर ऊपर ह/ िगरG ग. े नीचे तो और बचा नह/ं कुछ। तो जो आदमी आज तब सsचा था. फर तो कोई संभावना ह/ न रह/। जो आदमी आज तक पाप ह/ करता रहा है . उस दन तु]हारे िलए सारे शाUO मG--Iयान रखना सारे शाUO मG. क कौन जाने। आदमी तो भला है . सब तरह से परखा जोखा. कौन था इसका भी पता ु नह/ं। कसी जाननेवाले ने िलखा क दसरO के उधार. YयOक संत भी ॅ_ हो जाते ह0 .फर ऐसा नह/ं होता क हं द ू शाU ठWक हो गए और जैन शाU गलत हो गए और Page 28 of 256 http://www.dkuks lquh lks >wB lc िसफJ अपने ह/ अनुभव पर होती है .oshoworld. कभी सच बोल ह/ न सके. वह आज झूठ हो सकता है । भरोसा कैसे करोगे दसरे पर? ू और फर शाU Cजसने िलखा हो वह कब हआ इसका भी पता नह/ं. झूठा है . फर तो कोई आशा ह/ न रह/. तो ठWक ह/ कहता होगा मगर कौन जाने! यह भी तो हो सकता है क खुद ह/ ॅम मG पड़ गया हो। झूठ भी कहता हो मगर खुद ह/ ॅम मG पड़ गया हो। खुद ह/ धोखा खा गया हो। यह भी तो हो सकता है YयOक मृगमर/िचकाएं भी तो होती ह0 । रे िगःतान से एक आदमी आए--सत चरऽ. उCsछ_ को इकcठा करके िलख दया! ू सभी कताबG अनुभव से तो नह/ं िलखी जातीं। सौ मG से एकाध कताब कभी अनुभव से िलखी जाती है । िन. अपने पर भरोसा आ जाता है . जो आदमी !बलकुल झूठ बोलता रहा हो वह आज सच बोल रहा हो। और कौन जाने. अपनी मG ूतीित हो जाती है . बेईमान है वह भी तो कसी दन बाwया भील क# तरह वाwमीक बन जाता है । तो कौन जाने. पितत हो जाते ह0 । योगॅ_ श6द है हमारे पास। िगर जाते ह0 ऊंचाइयO से। सच तो यह है . सब तरह से ठWक था. चोर है .

com . उठो-बैठो मेरे पास. न ईसाई। धािमJक आदमी तो बस धािमJक होता है । और सारे जगत क# संपदा उसक# अपनी होती है । दसरा ूƒ: िशंय गु के िनकट हो और अपना Vदय खोले. न मुसलमान है .म होगा। िशंय का िनकट होने का एक ह/ अथJ होता है . इसिलए गु को ऐसा तो करना ह/ पड़े गा जो तु]हारे Cखलाफ जाएगा। तुम जैसे हो इसे तो िमटाना ह/ होगा. उलझाओ मत। िशंय गु के िनकट हो। िनकट होने का अथJ होता है िशंय अपी र[ा न करे । तुम सदा अपनी र[ा कर रहे हो। तुम अगर गु के पास भी जाते हो तो बस एक सीमा तक जाते हो--जहां तक तु]हG लगता है खतरे के बाहर हो। तुम गु से भी अपनी र[ा करते हो। तुम बड़े भयभीत हो। तुम डरे रहते हो क कह/ं कुछ ऐसा न गु कर दे . झांको मेर/ आंखO मG. जो मेरे Cखलाफ है । YयOक तुम झूठ हो. और जवाब हो भी नह/ं सकता। तुम ूमाण हो सकते हो. लेकन उस दन से फर न मुसलमान रहे न हं द ू रहे । उस दन से तो बस धािमJक हो गए। धािमJक आदमी न हं द ू होता है . आपको थोड़े ह/ मांगते ह0 । आपसे Yया होता है ? यह अंधा आदमी है । रामकृ ंण का जवाब एकमाऽ जवाब है . आप मौजूद ह0 वह मुझे पता है । म0 ूमाण मांगता हंू परमाHमा का। अब और Yया ूमाण हो सकता है ? रामकृ ंण कहते ह0 . तुम जैसे हो ऐसे तो तु]हG मारना ह/ होगा. तुम ूमाण दे नह/ं सकते। Cजस दन शाUO क# धूल झड़ गई होगी दरया क#. डू बो। म0 ूमाण हंू । लेकन वह आदमी तो राजी नह/ं होता। वह कहता है . पकड़ो मेरा हाथ. म0 मौजूद हंू । वह आदमी थोड़ा ितलिमला गया। उसने कहा क यह तो ठWक है . चलो मेरे साथ.oshoworld. सारे पृवी के शाU सHय हो जाते ह0 । तु]हारा एक छोटा सा अनुभव सारे जगत के मनी!षयO के िलए गवाह/ बन जाता है । तुम ूमाण हो जाते हो। और कोई ूमाण नह/ं है । परमाHमा का और कोई ूमाण नह/ं है । जब तक तुम ह/ ूमाण न हो जाओ तब तक कोई ूमाण नह/ं है । रामकृ ंण से कसी ने पूछा है क आप ईtर का कोई ूमाण दG । रामकृ ंण ने कहा. उस दन तुम पाते हो क अwलाह के नाम से Cजसको पुकारा गया है वह यह/ है । और राम के नाम से Cजसको पुकारा गया है वह भी यह/ है । उस दन सारे शाU. तो ह/ तु]हारा नया ज.dkuks lquh lks >wB lc मुसलमान शाU गलत हो गए। नह/ं. इसका Yया ताHपयJ है ? कृ पया ू अsछW तरह से समझाएं। और आCखर यह इतना मुCँकल YयO है और भय YयO होता है ? ताHपयJ मG गए तो भटके। बात सीधी साफ है . म0 मौजूद हंू । तुम दे खो मेर/ आंखO मG। तुम पकड़ो मेरा हाथ। तुम नाचो मेरे साथ। तुम बैठो ूाथJना मG मेरे िनकट. ये ु Page 29 of 256 http://www. वह अपने शU रख दे । वह कह दे क अब म0 िनरU हआ। यह म0ने छोड़ द/ मेर/ तलवारG और कवच. उस दन दरया ःवयं शाU बने। उस दन उनक# वाणी वेद हो गई। उस दन उनक# वाणी मG उपिनषद का सार आ गया। उस दन उनक# वाणी मG कुरान का गीत आ गया। ये मुसलमान. और ढाल और तीर-कमान. हम ूमाण मांगने आए ह0 . Cजस दन तु]हG अपना अनुभव होता है .

यह/ द/[ा का अथJ है क आज से म0 अपनी मजx छोड़ता हंू । अपनी मजx से रहकर म0ने दे ख िलया। भटका. सब तरफ !वफलता हाथ लगी.यास का अथJ है .यास िलया। म0ने द/[ा ली। अभी भी म0 बचा है . आज म0 अपनी मजx से छोड़ता हंू । यह/ सं. म0ने सं. तु]हG ूसाद दया। और उसी घड़/ से तुम पास होने लगे। फर तुम हजार कोस दरू भी रहे गु से तो कुछ भेद नह/ं पड़ता। तुम िनकट हो। Page 30 of 256 http://www. अकड़ नह/ं गई। अब तुम आCखर अवःथा मG भी अपनी अकड़ को बचाने क# कोिशश कर रहे हो। तुम कहते हो. शांत बढ़ रह/ है . चलते जाओ। फर न कोई समपJण चाहए. और तुम नरक क# याऽा पर हो. तुमने अपना संकwप छोड़ा। संकwप का Hयाग है िनकटता। अगर कह/ं भीतर तुम अपने संकwप को अभी बचाए हए ु हो. और यह भी तु]हारा ह/ संकwप है .यास लेता हंू । सं. बचाना हो तो बचा लो। अब तु]हG जो करना हो. द/[ा क# कोई जMरत नह/ं है । तुम ठWक राःते पर हो। तुम चले जाओ.यास भी ले लोगे और चूक भी जाओगे. और ऐसा लगता हो क जीवन !वषाद से !वषादमय होता जा रहा है . अपने से जो म0ने कया. न कसी के िनकट होने क# कोई आवँयकता है । लेकन अगर ऐसा मालूम न पड़ता हो.com . लगता हो क हाथ खाली के खाली ह0 । और Cजन चीजO को भी संपदा समझा आCखर मG पाया क वह सब ठWकरे िसT हए। ःवणJ समझ कर ु गए थे लेकन केवल पीतल को चमकता हआ पाया। ह/रे -जवाहरात समझकर Cजस इकcठा ु ु कया था वे केवल कांच के टकड़े थे। अगर हर जगह !वफलता हाथ लगती हो. गु ने द/[ा द/। तुमने ली ऐसा नह/ं. अभी भी म0 बोल रहा है । अभी भी म0 काफ# मुखर है तो चूक गया। तो तुम चरण पकड़कर भी बैठ जाओ तो भी तुम हजारO कोस दरू हो। और अगर तुमने म0ने िलया है ऐसे भाव से नह/ं.dkuks lquh lks >wB lc सब म0ने छोड़ दए। अब म0 तुमसे लडू ं गा नह/ं। अब तु]हG मुझे मारना हो तो मार डालो. और हर जगह हार हाथ लगती हो. गु न द/[ा द/. और भी वषाJ होगी। ऐसी तु]हG ूतीित होती है तो गु क# कोई जMरत नह/ं है . तो तुम दरू रहोगे। तुमने कहा क यह मेरा िनणJय है क म0 सं. जैसी तु]हार/ मजx। िनकट होने का अथJ है . कह/ं पहंु चा नह/ं। अपनी मजx के सब आयोजन कर िलए. िचN मG सुगंध बढ़ रह/ है . म0 तो हार चुका. आनंद क# वषाJ हो रह/ है . दख ु पाया.यःत भी हए ु हो.oshoworld. अब म0 Yया लूग ं ा? अब तो अपनी हार मG इन चरणO मG िगर जाता हंू । तब तु]हार/ ूतीित बड़/ िभ.न होगी। तु]हार/ ूतीित ऐसी होगी. अगर तुमने गु के पास द/[ा भी ली है . तो तुम चूकोगे. यह/ िशंय का अथJ है . वरन इस अनुभव से क म0 तो हार चुका-हारे को हरनाम. सं. गलत गया। अहं कार के साथ लंबी याऽा कर-करके आए हो तुम। गौर से दे ख लो अपनी अहं कार क# याऽा को। कहां पहंु चे हो? अगर कह/ं पहंु च रहे हो तब तो कोई जMरत नह/ं है गु क#। अगर तु]हG लग रहा है क याऽा !बलकुल ठWक चल रह/ है . तुम मागJ पर हो. तो फर जMरत है क तुम कसी का हाथ हो. तुम कसी के चरणO मG िगर/ और तुम कह दो क अब आपक# मजx मेर/ मजx होगी। िनकट होने का अथJ है . YयOक तु]हारा िनणJय? तो फर तु]हार/ अभी पुरानी मजx कायम है । अभी पुरानी अकड़ कायम है । रःसी जल गई. मेघ िघर रहे ह0 .

मां से डरते हो. अगर ऐसे हए ु तो अःवीकार हो जाओगे। तुमने अगर अपनी कमजोरयां ूगट क#ं तो तुम िनंदत हो जाओगे। तुमने अपने Vदय को खोलकर अगर वैसा ह/ रख दया जैसा तु]हारे भीतर है --कsचा !बना रं ग-रोगन लगाए. संकwप. तुमने अपने ूेमी से भी िछपाया है । तुमने अपने राज कायम रखे ह0 । तुमने अपनी प~ी से भी पूर/ बात नह/ं कह/ है । तुमने अपने पित से भी पूरा राज नह/ं कहा है । तुमने कुछ बातG िछपा रखी ह0 । तुम रोज िछपाते हो। तुमने कभी भी कह/ अपने Vदय को पूरा नह/ं खोला है । खोल भी नह/ं सकते थे। तु]हG म0 दोष भी नह/ं दे ता. रोने लगेगी. ऐसे होना तो ःवीकार हो. जो चाहते ह0 तु]हG . अनगढ़.oshoworld. हाथ-पैर मारने लगेगी. सुंदर तो सुंदर. बेबना--ऐसा का ऐसा रख दया तो तु]हG कोई भी स]मान न दे गा। स]मान तो तु]हारे पाखंड को िमलता है । तो Cजतना बड़ा पाखंड/ उतना स]मािनत हो जाता है । तो तु]हG दखाना पड़ता है --चाहे तुम महाHमा हो या न हो--तु]हG दखाना पड़ता है क महाHमा तुम हो। तुम आCखर/ दम तक दखाने क# कोिशश करते हो कुछ. तु]हार/ पुरानी अकड़ खो जाए। तुम एक ढे र क# तरह होकर िगर जाओ चरणO मG। िशंय गु के िनकट हो और अपना Vदय खोले इसका Yया ताHपयJ? और Vदय खोलने का अथJ होता है . माहक से डरते हो. जैसे तुम प~ी से डरते हो.dkuks lquh lks >wB lc िनकट का अथJ भौितक िनकटता नह/ं। िनकट का अथJ शार/रक िनकटता नह/ं। िनकट का अथJ है . कुMप तो कुMप. जैसा है कsचा. ं तो अड़चन ह/ खड़/ होगी। इसक# बहुत कम संभावना है क तु]हार/ प~ी समझे। प~ी िसर पीटने लगेगी. मािलक से डरते हो. िमऽ से डरते हो. पास पड़ोस के लोगO को इकcठा कर दे गी। और तु]हG कभी [मा नह/ं कर पाएगी। और उस दन से तुम पर gयादा पाबंद/ और gयादा इं तजाम शुM हो जाएंगे। तु]हG कह/ं अकेला भी न जाने दे गी। कसी Uी क# तरफ आंख उठाकर दे खोगे तो तु]हG अपराध के भाव से भर दे गी। तो कह भी नह/ं सकते हो। इसे तो सरकाकर रख दे ना होगा। इसे िछपाना होगा। इसे ूगट नह/ं कया जा सकता। Vदय को खोला नह/ं जा सकता। YयOक तु]हारे चारO तरफ लोग ह0 . !बना टच-अप के. नौकर से डरते हो अगर ऐसा ह/ तु]हG गु से भी डरना पड़े तो यह गु भी सांसारक है । समझना: गु तभी सांसारक नह/ं है . तुम कुछ िछपाओ मत। तुमने सब से िछपाया है . YयOक Cजनके भी सामने तुम पूरा Vदय खोलते वे वह/ तु]हारे Cखलाफ हो जाते। तो तु]हारा डर नैसिगJक है । अगर तुम अपनी प~ी से आकर कह दे ते क आज राःते पर एक सुंदर Uी को गुजरते दे खकर मेरा मन ऐसा हो आया क काश मG इससे !ववाह कर लू. आCHमक िनकटता। और आCHमक िनकटता तभी होती है जब तु]हारा अहं कार. जो तुम हो। यह तु]हारे जीवन क# ूबया है । इसी ूबया को गु के पास ह/ रखोगे जार/ तो फर तु]हG गु िमला ह/ नह/ं। और फर Cजस गु से डरना पड़े तु]हG वैसा ह/.com . एक खास ढं ग का जीवन तुम !बताओ। चुनाव करते ह0 जो। कहते ह0 . धुवा-उपिव मचा दे गी. जो तुम नह/ं हो। और िछपाने क# कोिशश करते हो वह. Cजसके सामने तुम सब खोलकर रख Page 31 of 256 http://www. पित से डरते हो !पता से.

गु नह/ं ह0 । गु क परभाषा यह/ है . सब तरह से ठWक हंू । यह उसे दखाना ह/ पड़ता है । तो नेता अपने डाYटर को भी िछपाकर रखता है । यह तो बहत ु बाद मG पता चला क ःटे िलन बहत ु बीमार था। यह तो बहत ु बाद मG पता चला हटलर के हार जाने के बाद क हटलर बहत ु बीमारयO से 5ण था। लेकन यह कभी पता Page 32 of 256 http://www.यानबे तथाकिथत ह0 .dkuks lquh lks >wB lc दो और उसक# आंख मG जरा सा भी िनंदा का भाव न उठे । िनंदा का भाव Cजसक# आंख मG उठ आए. सदगु क# परभाषा यह/ है क Cजसके पास जाकर तुम सब खोल सको। जो तु]हG ऐसी सुगमता दे . िनदान के िलए गए हो.oshoworld. तH[ण तु]हार/ गरदन पकड़ लेगा क तुम और ऐसा करते हो? Hयाग करो इसका इसी व"। और तुम सदा के िलए अूित!`त हो जाओगे उसक# आंखO मG। पाखंड क# ूित`ा है । जब तक कोई dय!" तुमसे अपे[ाएं कर रहा है क तु]हG ऐसा होना ह/ चाहए तब तक तुम कैसे अपने Vदय को खोलोगे? इसिलए संसार मG चलता िन. पता चल जाए वोटरO को क खांसी आती है .com . चुनाव मG खड़े हए ु ह0 . जो तु]हG ऐसा अवसर दे क तुम !बना िनंदा-ःतुित के. वह गु नह/ं है । इसिलए तु]हारे सौ गुओं मG से िन. मगर बीमार/ डाYटर से िछपा रहे हो। और गए हो डाYटर के पास। कसिलए गए हो? इलाज के िलए गए हो. और खून भी िगरता हो तो कौन वोट दे गा? तो नेतागण अपनी बीमार/ क# खबर अखबारO मG नह/ं छपने दे ते। अखबारO पर बड़े नाराज हो जाते ह0 अगर उनक# बीमार/ क# कोई खबर छाप दे । मरते दम तक नेता दिनया को यह/ ु दखलाता रहता है क म0 परम ःवःथ हंू । YयO? YयOक नह/ं तो वोट कौन दे गा? मुदr को तो कोई वोट नह/ं दे ता। मरते दम तक नेता यह/ कहता रहता है क कोई मुझे खराबी नह/ं.यानबे गु. सांसारक ह0 । तु]हG डराए हए ु ह0 वे। उतना ह/ डराए हए ु ह0 Cजतना कोई और डराए हए ु है । सच तो यह है क तुम अपने तथाकिथत महाHमाओं के पास और भी gयादा डर जाते हो. !बना डरे अपने Vदय को खोलकर रख सको। तुम कह सको क म0 ऐसा हंू । YयOक जब तक गु तु]हG वैसा ह/ न जान ले जैसे तुम हो. और खांसी मG कभी-कभी खून भी आ जाता है तो डाYटर एकदम मेरे Cखलाफ हो जाएगा और कहे गा क अरे पापी! क कह/ं नौकर/ से िनकलवा दे . क# डाYटर पकड़ ले क बीमार/ Yया है तो िनदान कर दे । डाYटर के पास तुम अपनी बीमार/ नह/ं िछपाते न? तुम डरते तो नह/ं क डाYटर को कह दG गे क मुझे खांसी आती है . उनको भी तुम खोल नह/ं सकते। YयOक वह जो आदमी वहां बैठा है . क सबको पता हो जाए। सब ठWक ठाक चल रहा है . Cजतना तुम और कह/ं डरते हो। अपने महाHमा से तुम यह भी नह/ं कह सकते क म0 चाय पीता हंू । YयOक चाय यानी पाप। तुम अपने महाHमा से यह भी नह/ं कह सकते क मुझे जरा धूॆपान क# आदत है । धूॆपान यानी नकJ जाने का सुिनCvत उपाय। छोट/-छोट/ बातG. तो काम ह/ शुM न होगा। गु से िछपाना तो ऐसे ह/ है जैसे डाYटर के पास गए और बीमार/ िछपा रहे हो। मरे जा रहे हो.

तब भी तु]हारे बुTHव मG उसे जरा भी शक पैदा न हो। तु]हारे परमाHम-ःवMप मG उसे जरा भी शंका न आए. तो डर से तुम डाYटर को न बताओ तो फर इलाज कैसे होगा? फर गए ह/ कसिलए? डाYटर के पास तो तुम खोल दे ते हो। यह तो डाYटर क# नीित का हःसा है क अपने मर/ज क# बीमार/ कसी को न बताए। अपने मर/ज के संबध ं मG एक श6द भी कह/ं न कहे . जैसा म0 हंू . तुम अपने को औषिध से ह/ बचा रहे हो। गु तो वैu है . Vदय खोलकर गु के सामने रखना होता है । Vदय खोलने का अथJ है . यह डाYटर क# नीित का हःसा है । यह मारल कोड है । इसिलए तुम डाYटर के पास जाकर बता भी दे ते हो और फर बीमार/ से तुम छूटना चाहते हो। गु के पास जब तुम आते हो तुम और भी बड़/ बीमारयां लेकर आए हो। वह [य रोग का मामला नह/ं है . यह हंू --बुरा-भला। और सदगु वह/ है क तुम जब अपने ूाणO क# सारा का सारा मवाद भी खोलकर उसके सामने रख दो. बाक# कभी कसी फोटो मG नह/ं पकड़े जा सके। चेचक के दाग से भी इतना बचना पड़ता है । नेता को ऐसा होना चाहए क सवाqग-सुंदर। चेचक के दाग और नेता मG जरा जंचते नह/ं। तो कसी िचऽ मG छपने नह/ं दए गए ह0 । सब िचऽ टच-अप कए गए ह0 । पहले टच-अप हो जाएंगे तब छपGगे। माओ के हाथ-पैर कंपते थे लेकन यह बात अखबारO तक नह/ं पहंु च पाती थी। बोलता था तो ठWक से बोल नह/ं सकता था. उससे िछपाया नह/ं जा सकता। उसके सामने तो सब खोलकर रख दे ना होगा। पाप का. हो सकता है क तुम कह/ं नौकर/ के िलए आवेदन कए हो. जो खतरनाक थे। अगर पता चल जाता तो हटलर एक दन सNा मG नह/ं रह सकता था। इन सब को िछपाकर रखना पड़ता है । जनता के सामने एक चेहरा बताना पड़ता है । ःटे िलन के फोटो !बना सरकार/ आDा के छपते नह/ं थे YयOक उसके मुह ं पर चेचक के दाग थे। िसफJ एक फोटो मG भूल से पकड़े गए ह0 . पु‡य का कsचा िचcठा खोलकर रख दे ना होगा। सब बुरा भला खोलकर रख दे ना होगा। और तुम एक उपिव हो भीतर.com .oshoworld. इन सबके बावजूद भी तुम हो तो परमाHमा। इससे कुछ भेद नह/ं पड़ता। तुमने हजारO पाप कए हO तब भी तु]हारा परमाHम- Page 33 of 256 http://www. और पता चल जाए। हो सकता है क तुम कसी Uी से !ववाह का िनवेदन कए हो और और पता चल जाए क खांसी आती है और खून के कतरे भी िगरते ह0 .मO-ज. वह/ तो सदगु है । यह सार/ बीमारयां ठWक ह0 . तुम गु के सामने अपनी कसी भी तरह क# ूितमा बचाने क# कोिशश मत करना। तुम कहना. जहां हर तरह के पाप दबे पड़े ह0 । जहां डर तरह क# बुराई दबी पड़/ है । िनसंकोच छोड़ दे ना होगा अपने को। इसिलए म0ने कहा. तुम चुनाव मG खड़े हो.dkuks lquh lks >wB lc नह/ं चला जब हटलर ताकत मG था। कसी को कभी पता नह/ं चला। बहत ु बीमारयO से परे शान था। िमरगी क# भी बीमार/ थी। और भी तरह से रोग थे. जबान लड़खड़ाती थी। उॆ हो गई थी। लेकन यह बात जब तक माओ मर नह/ं गया तब तक जाहर नह/ं हो सक#। तो हो सकता है .हG िछपाओगे? तुम गु से िछपाओगे? तब तो फर ऐसा ह/ हो गया.मO क# आIयाCHमक बीमारयां ह0 । तुम इ. और न क0सर का मामला है । ज.

पकड़/ गई तो नुकसान हआ। इसिलए तु]हारे समःत जीवनO का अनुभव यह है क बेईमानी से ु नुकसान नह/ं होता.oshoworld. बड़/ दआ ु --सलाम कहते हो. कभी-कभी लाभ भी हआ। बेईमानी से कभी नुकसा नह/ं हआ ु ु .dkuks lquh lks >wB lc ःवMप न_ नह/ं होता। तुम कतने ह/ अंधेरे मG भटके हो तो भी तु]हारा ःवभाव िच. परे शान करG गे। Page 34 of 256 http://www.मय को भी दे ख रहा है । वह तुमसे कहे गा ठWक है . तुम कहते हो आओ। पलक-पांवड़े !बछाए ह0 । और भीतर रो रहे हो क फर आ गए! अब पता नह/ं कब जाएंगे। पता नह/ं कतनी दे र पेरGगे. कहते हो बड़ा सौभा5य. वह/ं नुकसान हआ। ु ु जहां बेईमानी क#. वह तु]हारे िच.मय है । सदगु तो वह/ है . लाभ भी लाभ है । सHय नह/ं हारता. तुम कहते हो. सच कभी जीतता हआ अनुभव मG नह/ं आया। जहां ईमानदार/ बरती. अगर पकड़े न जाओ। पकड़े गए तो पापी। तो असली सवाल पकड़े न जाने का है । तो कैसे Vदय खोलो? Vदय खोला तो अपने ह/ हाथ से पकड़े गए। यह तो अपने ह/ हाथ से जाकर और समपJण कर दया। इसिलए सारे जीवन तु]हारा अनुभव यह है क कहो मत.com . सचाई Yया है । Cजतना बन सके. पकड़े जाने से नुकसान होता है । पकड़े भर मत जाओ.मय को दे ख िलया. न सHय जीतता--तु]हारा अनुभव यह है । तुम अगर झूठ को भी सHय क# तरह िसT कर सको तो जीत हो जाती है । पकड़े भर न जाओ। तो तुम संत हो. दशJन हो गए। शुभ मुहू तJ मG घर से िनकलते ह/ दशJन हो गए। बड़े दनO बाद दशJन हए। और भीतर सोच रहे हो क द_ ु का चेहरा कहां से दखाई पड़ गया। ु अब पता नह/ं दन कैसा जाए! भीतर तुम यह सोच रहे हो. यह कबाड़-खाना ठWक है . मगर यह तुम नह/ं हो। फब मत करो। मगर यह अवःथा--वह तु]हG सजग कर सके क यह तुम नह/ं हो--तभी बनेगी जब तुम खोल दो अपना Vदय पूर/ तरह। और आCखर यह इतना मुCँकल YयO है और भय YयO होता है ? मुCँकल है YयOक जब भी कह/ं Vदय खोला तभी घाव लगा। इसिलए मुCँकल है । अनुभव के कारण मुCँकल है । जब भी कह/ं सsची बात कह/ तभी नुकसान हआ है । लोग कहते ह0 क ु सHयमेव जयते। अनुभव उलटा ह/ है : जहां सच बोले वह/ं हारे । कभी-कभी झूठ तो जीता. गले िमलते हो. Cजसने अपने िच. अगर सभी िमऽ एक दसरे के संबध ं मG सच बातG कह दG तो दिनया मG ू ु तीन िमऽताएं भी न बचG। तुम जो िमऽ के संबध ं मG सच-सच सोचते हो अगर वह/ कह दो तो िमऽता बचनी बहत ु मुCँकल है । लोग झूठ मG जी रहे ह0 । लोग झूठ मG पगे ह0 । राह पर कोई िमल जाता है . झुठलाओ। और फर Cजससे भी तुमने कहा उसी से हािन हई। अगर िमऽ को कह द/ सsची बात तो ु िमऽ शऽु हो गया। ृायड ने कहा है . और फर करो बेईमानी Cजतनी करनी है . क यह महाराज कहां से िमल गए। शुभ काम करने िनकले थे और यह सgजन बीच मG ह/ िमल गए। मगर इनसे तुम यह/ कह रहे हो क बड़/ कृ पा क#। घर मG मेहमान आते ह0 .

com . उनको आभा मG. क अितिथ से gयादा शैतान और कोई भी नह/ं। तो तुम दो तल पर जीते हो। यह दो तल पर जीना इतना तु]हG रास आ गया है .. औषिध शायद और नई बीमारयां ले आए। तो अनेक बार तु]हार/ औषिधयO ने तु]हG और बीमार बनाया है । Page 35 of 256 http://www. वे कहने लगे क मेरे एक िमऽ ह0 .मO से अलग तरह क# याऽा कर रहा है । उसके सारे -dय!"Hव क# संरचना िभ. कसी और क# बात बता द/। एक सgजन आए.हG फुसलाना पड़ता है .उनक# ऊजाJ मG. बड़/ कामी ह0 । उनका मन बस कामवासना ह/ से भरा रहता है । उनके िलए कुछ उपाय बताएं। म0ने कहा.. तु]हार/ संरचना िभ. नकली को तो कुछ कया नह/ं जा सकता। अगर तुमने ूƒ ह/ झूठा पूछा तो मेरे उNर का Yया होगा? Yया करोगे उस उNर का? म0 जो तु]हG दवा बता दं ग ू ा वह कस काम आएगी? वह बीमार/ ह/ तु]हार/ नह/ं । अपनी बीमार/ िछपा गए.म0ने सोचा. वह भी बड़/ बेचैनी से आते ह0 । और असली को ह/ सुधारा जा सकता है .. िमऽ को ह/ भेज दे ते और वे मुझसे कह दे ते क मेरे एक िमऽ ह0 । इतनी काहे को झंझट क#? तब वे थोड़े चaके। चaककर चारO तरफ दे खा क.dkuks lquh lks >wB lc ऊपर से कह रहे हो. असली पर आओ। धीरे -धीरे धीरे बामुCँकल वे असली पर आते ह0 .। लेकन आदमी ह]मतवर थे.oshoworld.. इसिलए कठनाई है । इसिलए गु के पास भी आते हो तो पुरानी आदतG एकदम कैसे छुप जाएं? कुछ का कुछ दखलाने लगते हो.हG लाना पड़ता है फुसला-फुसलाकर असली ूƒ पर। मगर जब ूƒ पूछते ह0 लोग.. इतना सघन हो गया है . अितिथ दे वता है और भीतर से तुम जानते हो. तब भी झूठ कर जाते ह0 । YयO? YयOक ूƒ भी ऊंचा पूछना चाहए। उसका ूभाव पड़ता है । हो सकता है उसक# समःया हो कामवासना क# लेकन ूƒ उठाएंगे राम का। काम का होगा ूƒ और उठाएंगे राम क# बात। कहG गे क परमाHमा से कैसे िमलG? अब म0 उनको दे ख रहा हंू क यह परमाHमा क# कोई चाह ह/ कह/ं दखाई नह/ं पड़ती उनके. कहा क आपने पकड़ िलया। बात तो यह/ है । यह उपिव तो मेरा ह/ है । लेकन म0ने यह सोचा क सीधा यह पूछता क म0 बहत ु कामी हंू . कह/ं परमाHमा से कोई मतलब नह/ं दखाई पड़ता। पूछते ह0 परमाHमा कैसे िमले? मुझे उ. एक िमऽ के बहाने पूछ लूं। जो आप बताएंगे वह म0 कर लूग ं ा। मगर िमऽ का ूƒ िमऽ का ूƒ है । और कभी-कभी बीमार/ भी एक जैसी हो तब भी दो आदिमयO को दो तरह क# दवाएं लगती ह0 । ऐसा मत सोचना क तु]हार/ बीमार/ भी तु]हारे िमऽ जैसी बीमार/ है तो एक ह/ दवा दोनO को काम कर जाएगी। तु]हारा िमऽ अनंत ज. कुछ का कुछ कहने लगते हो। म0 रोज अनुभव करता हंू । लोग कुछ ूƒ पूछने आते ह0 और कुछ पूछने लगते ह0 । म0 दे ख रहा हंू क उनका ूƒ कुछ और है । मुझे उ.न है . समझाना पड़ता है क आओ.न है । एक ह/ औषिध काम न पड़े गी। िमऽ के िलए जो औषिध बताई जाएगी वह तुम लेकर और झंझट मG पड़ जाओगे। बीमार/ तो बनी ह/ रहे गी.

YयOक म0 तो मर/ ह/ जा रह/ हंू । एक ह/ मेर/ ूाथJना है --वह मुझे पता है . ये बातG छोड़ो यह मुझे बताओ.com . वह/ तु]हारा गु है । नह/ं तो तु]हारा गु नह/ं। फर तुम खोजो. मेरे जेवर न पहने। इससे मेर/ आHमा को बड़ा क_ होगा। मुwला ने कहा. म0 खूब ूेम करता हंू तु]हG । तु]हारे !बना एक [ण न रह सकूंगा। तुम न होओगी तो मेरा Yया होगा? म0 रह न सकूंगा एक दन। और तुम भलीभांित जानते हो क प~ी न रह जाएगी तो ऊपर तुम कतना ह/ रोओ.dkuks lquh lks >wB lc इसिलए कहता हंू . वह मेरे कपड़े न पहने. इतना ह/ खयाल रखना क Cजस Uी को तुम लेकर आओ.न होओगे क चलो झंझट िमट/.. भीतर तुम ूस. तो फर तुम Yया करोगे? मुwला ने कहा.. Yया कMंगा! तेरे !बना सोच ह/ नह/ं सकता। प~ी ने कहा. जो तु]हG इस झूठ के जाल के बाहर ले जाए। तो उसके पास तो तु]हG ये पुराने अनुभव सब छोड़ दे ने पड़G गे। और Cजसके पास तुम छोड़ सको िनसंकोच. मुwला ने कहा. गुलाबO को तेरे कपड़े आएंगे ह/ नह/ं--गुलाबी से चल ह/ रहा है !--उसक# तू फब ह/ मत कर। समझदार आदमी पहले ह/ से इं तजाम बना लेता है । ऐसा थोड़/ है क प~ी मरे गी.। एक जगत है हमारा.पC~यां भी खूब ह0 . Cजसके पास तुम सब िनसंकोच छोड़ Page 36 of 256 http://www.oshoworld.. फर इं तजाम करG गे। अब प~ी तो मर ह/ रह/ है . तू उसक# फब ह/ मत कर. Yया कMंगा? मर जाऊंगा। Yया कMंगा! एक [ण जी न सकूंगा. कभी नह/ं । कसम खाता हंू कभी नह/ं। तेर/ कसम खाता हंू । प~ी ने कहा.. मेर/ कसम मत खाओ. !ववाह तो तुम करोगे ह/। कभी नह/ं. क उधर तुम !ववाह का इं तजाम कर लोगे। एक ह/ मेर/ ूाथJना है क !ववाह तो तुम करके लाओगे ह/. जहां झूठ ह/ हमार/ dयवःथा है । जहां झूठ ह/ हमारे संबध ं O का सारा सार सूऽ है । गु के साथ भी ऐसा ह/ संबध ं बनाओगे Yया? तो फर गु भी तु]हG इस संसार के बाहर न ले जा सकेगा। गु का अथJ है . उपिव िमटा। चलो फर ःवतंऽ हए। चलो फर कोई ु Uी खोज लG। मुwला नस‰/न क# प~ी मर रह/ थी। वह बैठा है खाट के पास। जैसा उदास पितयO को बैठना पड़ता है वैसे ह/। गुणNारे तो और !बठा रहा है भीतर. Vदय को खोलना। कठनाई है । तुमने जब भी Vदय खोला तभी हािन हई। ु कहते ह0 न. छोड़ो जी! ये सब बातG छोड़ो। कससे बातG कर रहे हो. अभी भी गु खोजो. मरते दम तक ऐसे सवाल उठा दे ती ह0 । प~ी ने मरते-मरते आंखG खोलीं. कह/ं न कह/ं कोई आदमी तुम खोज पाओगे. दध ू का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीने लगता है । ऐसी तु]हार/ अवःथा है । तुम इतनी बार जल गए हो। कसी से भी सच कहा क मुCँकल हई। कसी से भी सच कहा ु क मुCँकल हई। यह सारा संसार झूठ का संसार है । यहां सच बोलने से चलता ह/ नह/ं। यहां ु झूठ ह/ याऽा का पाथेय है . इधर मेरा जनाजा उठा नह/ं. वह/ कलेवा है । उसी के सहारे सब चलता है । यहां हम झूठ से बंधे ह0 एक-दसरे से। ू तु]हG प~ी से रोज-रोज कहना ह/ पड़ता है . इधर म0 मर/ नह/ं. और कहा क एक बात पूछनी मुwला। म0 मर जाऊंगी. वह बात अलग। वह तो कसी से कहनी ह/ नह/ं है । प~ी भी मरते व".

Yया िचwलाना है ? इतने आगबबूला YयO हो गए? इतने उNेCजत YयO हो आए? यह उNेजना बताती है क अभी भीतर डर है । यह उNेजना बताती है क दबा िलया है । सोने के मोह को. तथाकिथत महाHमा होगा. वह जानता है . शांत. हसन.com . भलीभांित जानता है । सदगु का अथJ है क जो कल तक तु]हारे ह/ जैसा था। आज भूल नह/ं गई है बात। अब तो और भी ठWक से समझ मG आती है । सदगु के मन मG अपरं पार कणा होती है । तुमने कतना ह/ गहन पाप कया हो तुम सदगु के पास िसवाय [मा के और कुछ भी न पाओगे। और अगर कुछ और िमले तो समझ लेना क यह सदगु नह/ं है । तुम बचो। यह तु]हारे झूठे जंजाल का ह/ हःसा है । यह होगा पंडत होगा. क कामी हो तो यहां कसिलए आए? ॄŒचयJ का पालन करो नह/ं तो सड़ोगे नकJ मG. तो तु]हारा सोने से मोह अभी तक गया नह/ं? सोने से मोह! हसन ने कहा. क#ड़े काटG गे और कड़ाहO मG जलाए जाओगे और एकदम आगबबूला होने लगे तो एक बात पYक# है क वह अभी कामवासना से मु" नह/ं हआ ु . YयOक वह खुद भी उ. YयO हं सती हो? रा!बया ने कहा. इसके पास सोने के िसवाय कुछ भी Page 37 of 256 http://www. खुद भी उ. पुजार/ होगा.ह/ं कमजोरयO से गुजरा है । खुद भी उ. इस आदमी ने हसन के चरणO मG अशफJया रखीं-सोने क# अशफJया रखीं..dkuks lquh lks >wB lc दोगे। कह/ं तो कोई आदमी तु]हG िमल जाएगा Cजसक# आंखO मG तु]हार/ िनंदा न होगी। और Cजससे सच कहकर भी तुम हारोगे नह/ं बाजी। Cजससे सच कहकर ह/ जीतोगे। सतगु का यह/ अथJ होता है । सतगु मG िनंदा तो होती नह/ं। तुमने Yया कया है इसके ूित अपरं पार कणा होती है । तुमने पाप कया है उसके ूित भी कणा होती है .oshoworld. मोह नह/ं है इसिलए तो म0 इतना िचwलाया क हटा यहां से। रा!बया ने कहा. खुद भी उसने. धमकाने लगे। तुम कहो क म0 कामी हंू और वह एकदम बुT हो जाए.ह/ं कंटकाक#णJ मागr से िनकला है . अभी बोध से मु" नह/ं हआ। ु इसे तुम समझो। तुम नाराज उसी बात पर हो जाते हो जो बात तु]हG अभी भी सताती है । नह/ं तो नाराजगी Yया है ? एक समझ होती है .. िमटा नह/ं है । नह/ं तो Yया इसमG उNेCजत होने क# बात है? इस आदमी को तो दे खो। इस आदमी को तो दे खो। यह बेचारा गर/ब है . एक आदमी आया. तू यह--सोना लेकर यहां YयO आया? सोना िमcठW है . और ऐसा-वैसा तु]हG डराने लगे.धूल है । हटा यहां से सोने को। रा!बया हं सी। हसन ने पूछा. हसन तो एकदम नाराज हो गया। उसने कहा. लेकन अभी इसे खुद भी नह/ं िमला है । एक बात समझना--बहत ु मनोवैDािनक--अगर तुम कसी गु के पास जाकर कहो क म0 बहत ु बोधी हंू और वह तुम से तब कहने लगे क बोध पाप है . तो िमcट/ तो बहत ु पड़/ है तु]हारे आसपास.वे कांटे चुभे ह0 उसे. शीतल। नाराजगी क# बात Yया है ? संत रा!बया के पास एक फक#र हसन ठहरा। दोनO बैठे थे. तुम नह/ं िचwला रहे हो। यह आदमी थोड़/ िमcट/ और ले आया. Iयान रखना। तु]हारे पाप को भी वह समझता है क मनुंय क# कमजोरयां ह0 .ह/ं गŠढO मG िगरा है . और नरक मG सड़ोगे. मोह न होता तो िचwलाते ह/ YयO? अगर िमcट/ ह/ है सोना.

और सोने के अलावा इसके पास कुछ भी नह/ं है । ऐसा हआ जुआर/ थे ु ु . म0 नह/ं रखूंगा। म0 जुआर/ आदमी! कभी मेरे पास लाखO होते ह0 . कल नह/ं है । यह झंझट मुझे मत दG । आपक# झंझट आप जानो. कभी करोड़O भी होते ह0 . म0ने सुना ह0 . और कभी मेरे पास कौड़/ नह/ं होती। तो यह म0 नह/ं रख सकता। आप कसी और को दे दो। तो म0ने कहा.oshoworld. म0 सटोरया हंू । आज है . सटोरया थे. न तु]हG डराएगा। YयOक सदगु तु]हG दे खता है . लेकन मेरे पास कुछ ह0 नह/ं। मेरे पास िसवाय पयO के और कुछ भी नह/ं है । म0 बहत ु गर/ब आदमी हंू । सुनते हो उनक# परभाषा गर/ब आदमी क#? क मेरे पास िसवाय पयO के और कुछ भी नह/ं है । म0 बहत ु गर/ब आदमी हंू । म0 बहत ु गर/ब आदमी हंू । म0 कुछ दे ना चाहता हंू । अगर पया आप न लGगे तो मेरे Vदय को बड़/ चोट पहंु चेगी। मुझे लगेगा क म0 इतना द/न क कुछ भी न दे सका। रा!बया ने हसन से कहा क उस गर/ब को दे ख. ह]मत के होने ह/ चाहए। एक झोले मG भरकर बहत ु से नोट ले आए। पहली दफा मुझे सुना था. भारत के सबसे बड़े सटोरया थे। मगर बड़े ह]मत के आदमी थे। सटोरया थे. यह िमटा नह/ं। सदगु वह/ है .com . कोई फकर न करG । नह/ं हOगे उस समय तो कोई म0 मुकदमा नह/ं चलाऊंगा। म0 भी सटोरया हंू । गए तो गए। तुम रखो। वे तो रोने लगे। वे कहने लगे क नह/ं. दबा िलया है . तु]हारे कृ HयO को नह/ं। कृ HयO का कोई मूwय नह/ं है । कृ Hय तो माया है । तुमने जो कया. जब मुझे जMरत होगी. आHमा म0ने दे खी नह/ं है । ये सब बातG ह0 . उसका कोई मूwय नह/ं है . म0 वा!पस न ले जा सकूंगा। म0 बहत ु गर/ब आदमी हंू YयOक मेरे पास िसवाय पयO के और कुछ भी नह/ं है । और म0 कुछ दे ना चाहता हंू और म0 Yया दं ? ू मेरे पास और कुछ है ह/ नह/ं। ूेम म0 जानता नह/ं. दसरे दन आए और पूरा झोला नोट से भरा हआ मेरे पैरO पर उलटा ू ु दया। म0ने उनसे कहा क इनको संभालकर रख लG. वह कस भाव से लेकर आया है । और हसन ने कहा क रा!बया तूने मुझे खूब चेताया। बात मेरे समझ मG आ गई। म0ने यह कांचन का जो मोह है .हOने कहा क नह/ं. तुमने Yया कया है इससे कोई िनंदा उसके मन मG पैदा नह/ं होगी। और न ह/ तु]हारे िलए नकJ भेज दे गा. जो सच मG जाग गया है । जो जाग गया है . तुम जो हो वह/ मूwयवान है । और तुम जो हो वह तो सा[ात परमाHमा है । Cजसने अपने भीतर के परमाHमा को दे ख िलया उसने सारे जगत मG िछपे परमाHमा को दे ख िलया। फर तुम लाख िछपाओ Page 38 of 256 http://www.dkuks lquh lks >wB lc नह/ं है । यह बहत यह इतना गर/ब है और कुछ ु ु गर/ब है । इस गर/ब को ऐसे मत दतकारो। दे ना चाहता है । इसका तुमसे लगाव है . समपJण का मुझे कुछ पता नह/ं है . म0 खबर कMंगा। अभी जMरत नह/ं है । जMरत जMरत कभी हो सकती है । तो यह मेर/ तरफ से रख लG अमानत आपके पास। वे रोने लगे। म0ने सोचा नह/ं था क कोई आदमी रोने लगेगा। वे रोने लगे। उ. म0 जयपुर मG था और एक बहत ु अपूवJ आदमी थे सोहनलाल दगड़। ऐसे तो वे.

अटके रहते हो। कह/ं तो कोई जगह होनी चाहए.com . तभी घाव बना। वे घाव बढ़ते चले गए। वे घाव भरे नह/ं। वे घाव सब हरे ह0 । तो तुम डरते हो. कभी तुमने इतने-इतने आंखO मG आंखG डालीं. तो भी दे खता है . तभी चोट पाई. न !वचार का कोई मूwय है । ये सब सपने क# बातG ह0 । कुछ सपने आंख बंद करके दे खते ह0 हम. तभी कांटा चुभा. सदा दख ु पाया। तुम इतने डर जाते हो क परमाHमा से भी कहते हो क: आस के उस गांव से आना नह/ं दे नयन मG नयन मुःकाना नह/ं बादलO के पास से आना नह/ं दे नयन मग नयन मुःकाना नह/ं है अंधेर/ रात.oshoworld. कुछ सपने आंख खोलकर दे खते ह0 हम। लेकन तु]हार/ अड़चन म0 जानता हंू । तुमने जब भी ह]मत क#. िछपाते हो. तभी अड़चन आई। बदलO के पास आना नह/ं दे नयन मG नयन मुःकाना नह/ं है अंधेर/ रात. तो भी सदगु दे खता है । पापी के भीतर. म0 तो ि_ा माऽ हंू । न तो कृ Hय का कोई मूwय है . जैसा भी है -सदगु के पास खोलकर रखने मG ह/ तु]हG पहली दफा कमr से छुटकारा िमलता है । यह कमJमु!" का उपाय है । जब तक तुम दबाते हो. म0 भटक# हई ु और िसर से पांव तक अटक# हई ु भाल पर क# रे ख सी अंधी हई ु पायलO सा और तड़पाना नह/ं दे नयन मG नयन मुःकाना नह/ं जब भी तुमने कसी क# आंख मG आंखG डालीं और अपनी सचाई को खोला. परमाHमा तक से डरते हो क कह/ं वह फर Page 39 of 256 http://www.dkuks lquh lks >wB lc परमाHमा को चोर के भीतर. तभी तुमने क_ पाया. बंधे रहते हो. हHयारे के भीतर तो भी दे खता है । तुम सदगु से िछपा नह/ं सकते अपने परमाHमा को। तो जब तुम अपने सारे पापा खोलकर रख दे ते हो--अsछा बुरा जो भी है . म0 भटक# हई ु और िसर से पांव तक अटक# हई ु भाल पर क# रे ख सी अंधी हई ु पायलO सा और तड़पाना नह/ं दे नयन मG नयन मुःकाना नह/ं फर मुझे इस बार भी ॅम हो गया यूं छला जाना सहज बम हो गया आस के उस गांव से आना नह/ं. जहां तुम सब खोलकर रख दो। उसको खोलकर रखते ह/ तु]हG एक बात दखाई पड़ती है क म0 तो पृथक हंू --सा[ी माऽ.

भी कसी क# पुकार तु]हG सुनाई पड़ती हो और कभी कसी के आसपास परमाHमा क# करण दखाई पड़ती हो तो चूक मत जाना अवसर। खोने को Yया है ? एक ॅम और होगा इतना ह/ ना! चलो ठWक. एक कांटा और गड़ जाएगा। इतने लोगO ने धोखा दया. कोई मागJ कह/ं नह/ं ले गया इससे कुछ घबड़ाने क# बात नह/ं है । म0ने सुना है . एक धोखा और सह/। खोने को Yया है तु]हारे पास? लुट तो गए हो। लुटे खड़े हो. िनराश हो जाना है । सच. और Yया होगा? तु]हार/ लुटाई इतनी हई ु है क अब और थोड़े लुट गए तो Yया फकJ पड़ जाएगा? इसिलए ह]मत करो। इसिलए अगर कभी कसी के ूेम मG उतर रहे हो. तो तुम चूक जाओगे। कभी तो ह]मत करो। Yया होगा? gयादा से gयादा एक धोखा और होगा.oshoworld. कुछ और हो. एक बार और ूयोग करG । साहस का अथJ है . सवJ हारा हो। चलो. एक आदमी और धोखा दे जाएगा। इसको म0 साहस कहता हंू । साहस का अथJ है . बहत ु मागr पर तुम गए. अतीत के अनुभव को ह/ सब कुछ न मान लG। संभव है . इस बात का भरोसा ह/ ौTा है । जो अब तक हआ है वह/ सदा होता रहे गा ऐसा ु मान लेना तो फर !वषाद मG िघर जाना है . यह आदमी और थोड़ा लूट लेगा. सनातन के अनुभव इसी बात के िलए तु]हG तैयार कए ह0 । लेकन अगर तुम इसी मG उलझे रहे . फर कह/ं आंख मG आंख डालकर तु]हG कसी और झंझट मG डाल दे । आस के उस गांव से आना नह/ं दे नयन मG नयन मुःकाना नह/ं फर मुझे इस बार भी ॅम हो गया यूं छला जाना समझ बम हो गया Cजंदगी का dयथJ सब ौम हो गया हर बार जब भी तुमने कसी क# आंख मG आंख डाली तभी ॅम हआ तो ु . तभी छल हआ। ु तुम गु के पास भी जाकर आंख मG डालकर नह/ं दे खते हो। इधर उधर दे खते हो। आसपास दे खते हो। तुमने ूेम से इतने धोखे खाए ह0 क तुम गु के ूेम मG भी पूरे नह/ं उतरते हो। वहां भी तुम सुर[ा रखते हो। वहां भी तुम आयोजन रखते हो क अगर जMरत पड़े तो अपनी र[ा कर सको। वहां भी तुम अरC[त नह/ं छोड़ते अपने को। वहां भी समपJण पूरा नह/ं होता। तु]हार/ अड़चन म0 समझता हंू । तु]हारे ूाचीन अनुभव. एक ॅम और सह/। करोड़O ॅम मG एक ॅम जुड़ जाएगा तो Yया अड़चन होनेवाली है ? इतने कांटे गड़े .com . नया हो। नया हो सकता है . अमर/का का ूिसT वैDािनक एड/सन एक ूयोग कर रहा था। सात सौ बार हार गया। रोज ूयोग चलता सुबह से सांझ तक. यह/ न! इतने धोखे खाए.dkuks lquh lks >wB lc तु]हG कसी नए ूेम मG न उलझा दे . और रोज हार होती। वह ूयोग सफल होता न मालूम होता। सात सौ बार काफ# होता है । कोई तीन साल बीत गए। चौथा साल बीतने लगा। उसके सहयोगी तो थक मरे । आCखर उसके सहयोिगयO ने एक दन इकcठा होकर कहा क बहत ु हो गया। कुछ और करना है क Cजंदगी भर इसी को करते रहना है ? Page 40 of 256 http://www.

तुम मुझसे झूठ मत बोलो.मO तक भटके. अब और कब तक भटकना होगा? इसिलए अब ठWक के कर/ब आते ह0 । और ह]मत करG .यानबे हो सकते ह0 । ठWक तो एक ह/ होगा। तो नौ सौ िन.dkuks lquh lks >wB lc और यह कुछ होता दखाई पड़ता नह/ं। और आपसे हम घबड़ा गए ह0 YयOक आप रोज सुबह आ जाते ह0 फर उHसाह से भरे . इतने ूेम परख िलए. सब तु]हारे ूितयोगी ह0 । उ. इतने आदमी जांच िलए. अब ठWक राःता कर/ब ह/ आता होगा। आCखर कतने गलत हOगे? समझो क हजार राःते ह0 अगर कुल िमलाकर. एड/सन ने कहा क ठWक राःता एक ह/ होगा। गलत नौ सौ िन. अब कने क# जMरत है ? सात सौ राःते हम दे ख चुके. और साहस करG और उमंग. अगर वह/ं कोई नद/ पास मG होगी तो उसमG कूद Page 41 of 256 http://www. इतने संबध ं टटोल िलए अब तो ठWक संबध ं कर/ब आता ह/ होगा। अब कब तक दर/ ू रहे गी? अब घड़/ कर/ब आती ह/ होगी। इतने-इतने ज. तु]हारा ूयोजन यह है । पूना क# कह रहे हो तो कह/ं और जा रहे हो इतना पYका। इगतपुर/ जा रहे .com . तुम मुझसे झूठ मत बोलो। वह पहला बहत उसने कहा क म0 ह/ तो कह रहा हंू क पूना जा रहा हंू । ु है रान हआ। ु वह दसरा बोला. बनो मत। तुम ू मुझसे झूठ मत बोलो। मुझे पYका पता है क तुम पूना जा रहे हो. और उHसाह। खयाल रखना. इसिलए उनके साथ अगर तुम सच खोलोगे तो अड़चन मG पड़ोगे। वे तु]हारा सब शोषण करG गे। इस जगत मG सब तु]हारे ूितःपधx ह0 . क कwयाण जा रहे .हG तो तु]हG कुछ का कुछ बताना पड़े गा। म0ने सुना है क दो दलाल--शेयर माकpट बंबई के दो दलाल--शे न मG िमले। पहले ने दसरे से ू पूछा. तो सात सौ तो हमने जांच िलए. क उwहास नगर.यानबे से गुजरना तो होगा ह/। उसके !बना कोई उपाय नह/ं है उस एक तक पहंु चने का। ू हं मतवर आदमी का यह ल[ण है । उसक# आशा नह/ं टटती। उसका भरोसा नह/ं खोता। वह कहता है इतने धोखे खा िलए. फर शुM कर दे ते ह0 । आप थकते ह/ नह/ं। Yया Cजंदगी भर यह/ करना है? एड/सन ने कहा. इस संसार मG और सब तो तु]हारे !वरोध मG ह0 . अगर आप जंगल मG िनहHथे हो और शेर आपका पीछा करना शुM कर दे तो आप Yया करG ग? े मुwला ने उNर दया. गलत िसT हो गए.oshoworld. मगर पूना नह/ं जा रहे इतना तो पYका है । इसिलए वह दसरा कहता है क तुम मुझसे झूठ मत ू बोलो क पूना जा रहे हो. कहां जा रहे हो? दसरे ने कहा. पूना जा रहा हंू । पहले ने कहा. फर उमंग से भरे . मुझे पYका पता है । म0 तु]हारे आफस से पता ू लगाकर आ रहा हंू क तुम पूना ह/ जा रहे हो। मतलब समझे आप? वह यह कह रहा है । क दलाल तो ऐसा झूठ बोलते ह0 । पूना जा रहा हंू मतलब तुम कह/ं और जा रहे हो. तुम पूना ह/ जा रहे हो। ऐसी दिनया है । यहां सब ऐसा ह/ चल रहा है । यहां बड़/ ूितःपधाJ है । ु मुwला नस‰/न अपने एक िमऽ को िशकार के कःसे बता रहा था। तब उसके िमऽ ने पूछा. कसने तुमसे कहा क हार हो रह/ है ? जीत रोज आ रह/ है । हर हार जीत क# तरफ एक कदम है । और यह तो ठWक ह/ है . अब तीन सौ ह/ बचे। जीत रोज कर/ब आ रह/ है पागलO. बड़े िमयां.

पहले यह तो बता दो क तुम मेर/ तरफ हो क शेर क# तरफ? यह/ अड़चन है । यहां संसार मG कोई तु]हार/ तरफ तो है नह/ं। इसिलए सच बोलना खतरे से खाली भी नह/ं है । लेकन सदगु का तो अथJ ह/ होता है क यह आदमी तु]हार/ तरफ है । इससे तु]हारा Yया !वरोध हो सकता है ! यह तु]हG कस भांित क# हािन पहंु चा सकता है ? इससे तु]हार/ कसी भी तरह क# ूितःपधाJ क# संभावना कहां है ? तु]हारे पास जो ह0 उसमG इसक# उHसुकता नह/ं है । तु]हार/ जो आकां[ाएं ह0 वे इसक# आकां[ाएं नह/ं ह0 । अगर तुम घन पाने मG लगे हो. बढ़ गई। अगर आदमी को िमल सकता है . तो तु]हG भी िमल सकता है यह भरोसा आ सकता है । अगर तुम जैसे ह/ हŽड/-मांस-मgजा के आदमी को िमल सकता है तो तु]हG YयO नह/ं िमल सकता? Page 42 of 256 http://www. बढ़ गई। और अगर कसी एक dय!" ने पद पा िलया तो तु]हारे पाने क# संभावना समाm हो गई। अब या तो मोरारजी बैठ जाएं या इं दरा बैठा जाए। एक ह/ बैठ सकते ह0 । दसरा या तो जेल होगा या ू जेल के बाहर. धोखा है । िमऽता सब औपचारक है । भीतर दँमनी चल रह/ है । भीतर ु एक-दसरे को काटने के सब उपाय चल रहे ह0 । ू राजनीित मG िमऽता होती ह/ नह/ं. वहां मैऽी कैसी? ु तो राजनीितD िमऽ हो ह/ नह/ं सकते। िमऽ भी जो दखाई पड़ते ह0 . जेल से भी बदतर हालत मG होगा। जहां पद का संघषJ है . दोनO न पा सकGगे। लेकन कोई अगर परमाHमा को पाने मG लगा हो कसी से कोई ःपधाJ ह/ नह/ं है । म0 परमाHमा को पा लूं इससे मG तु]हारा दँमन थोड़े ह/ हंू ! इससे कुछ परमाHमा तु]हारे िलए ु कम थोड़े ह/ बचा! क अब तुम पाओगे तो थोड़ा तो पहले ह/ कोई ले जा चुका है . यह Iयान पाने मG लगे हो। अगर तुम पद पाने मG लगे हो. यह परमाHमा पाने मG लगा है । और एक मजा क अगर घन पाने मG दो आदमी लगे हO तो दँमन हो ह/ जाएंगे. धमJ मG शऽुता नह/ं होतीं। हो कैसे सकती है ? अगर मुझे कुछ िमल गया है .com . ऊपर-ऊपर है . वे भी िमऽ नह/ं होते। जो एक ह/ पाट मG होते ह0 . वहां तो ःपधाJ है . अगर शेर भी नद/ मG कूद जाए तो? मुwला ने कहा.dkuks lquh lks >wB lc जाऊंगा। िमऽ बोला. वहां तो दँमनी है . तो इससे तु]हारे िमलने क# संभावना कम नह/ं हई ु . YयOक ु धन सीिमत है । और अगर Iयान पाने मG दो आदमी नह/ं. म0 नद/ पार कर जाऊंगा। िमऽ ने कहा. मुwला ने कहा। िमऽ ने फर कहा. वे भी िमऽ नह/ं होते। कैसे हो सकते ह0 ? िमऽता सब दखवा है . अगर शेर भी नद/ पार कर जाए तो? तब म0 पेड़ पर चढ़ जाऊंगा. शेर भी अगर पेड़ पर चढ़ जाए तो? अब क# बार मुwला झुंझला गया और बोला क यार. अब तुमको अधूरा ह/ िमलेगा। आvयJ क# बात तो यह/ है क अगर कसी एक dय!" ने परमाHमा को पा िलया तो तु]हारे पाने क# संभावना बढ़ गई। घट/ नह/ं. दो करोड़ आदमी लगे हO तो भी कोई दँमनी का कारण नह/ं है । YयOक Iयान असीम है । अगर मुझे Iयान उपल6ध हो गया ु तो इसका यह अथJ थोड़े ह/ है क अब तु]हारे िलए कुछ कम बचा दिनया मG। अब तुम Yया ु करोगे? अगर कोई दो आदमी पद पाने मG लगे हO तो एक ह/ पा सकेगा.oshoworld.

अगर तु]हार/ आकां[ा है तो भी कोई ःपधाJ नह/ं है । तुम सदगु के सामने सब खोलकर रख सकते हो। तु]हG अपने ताश के पNे िछपाने क# जMरत नह/ं है . gयादा कर/ब न आओगे. राम सदा बहत जायी.य मG. राम ऐसे िमलत नाह/ं ऐसे बोलने से. कुछ राज न रहे गा. राम-नाम क# चदरया ओढ़ने से राम िमलते होते तो बड़ा सःता हो जाता। फर तो तोतO को भी िमल जाते। राम सदा कहत जाई. समािध पाई. चलत पकड़ो राम नाह/ं.. ताक बचाने को कुछ न रहे । जब बचाने को कुछ न रहे गा.dkuks lquh lks >wB lc तु]हार/ ह]मत जगेगी। तुम अपने खोए उHसाह को पुनः पा लोगे। तु]हारा आHम-!वtास पैदा होगा। सदगु का अथJ है .oshoworld. द/वाल रखोगे. सरल और Yया होगा? राम-राम कहत काह/? राम-राम कसिलए कहते हो? कहने क# बात नह/ं है राम। Vदय मG संभालने क# बात है राम कहना कसको है ? पुकारना कसको है ? चीखना-िचwलाना कसको है । राम कह/ं दरू थोड़े ह/ है ! कबीर कहते ह0 . जरा दरू-दरू रहोगे. राम Page 43 of 256 http://www. जो इतने ु ऊंचे मीनार पर चढ़कर िचwला रहा है ? राम श6द को भी दोहराने क# Yया जMरत है ? भाव को गहो। भाव को संभालो Vदय मG। जैसे गभJवती Uी अपने बsचे को संभालती है गभJ मG. ऐसे राम के भाव को संभालो। राम राम कहत काह/. कुछ रहःय न रहे गा. धमJ पाया। एक तो तु]हार/ आकां[ा नह/ं है इन बातO क#. उसने कुछ ऐसे जगत मG पाया है जहां ूितःपधाJ होती ह/ नह/ं। उसने Iयान पाया. िनश6द मG संभालना है । शू.. परदा रखोगे.com . Yया बहरा हआ खुदा है ? Yया तेरा खुदा इतना बहरा हो गया है. राम सदा !वराजत मांह/ सब दशत राम सह/ सुंदर वचन ह0 । लेकन इनको ूƒ YयO बनाया? इनमG उNर है । सीधे-सरल वचन है । इनक# dया…या क# भी जMरत नह/ं है । इससे सीधा.सुंदर वचन है क तुमने कहा राम क गए राम. राम सदा कहत जाई. हाथ से चूके। कहे क चूके। यह श6द क# बात नह/ं है . YयOक कह/ं सब बात खुल न जाए। सब बात खोल ह/ दो. परमाHमा पाया. मौन मG पकड़ना है । श6द बना क तुम राम से दरू हो गए। श6द बना क मन बन गया। जहां मन आया. तो फर कसिलए ओट करोगे? फर कसिलए परदे डालोगे? फर सब ओट िमट जाएगी। और जहां ओट िमटती है वह/ं कांित घटती है । तीसरा ूƒ: राम राम करत काह/ राम ऐसे िमलत नाह/ं. श]प काडJ भी िछपाने क# जMरत नह/ं है । तुम सारे पNे खोलकर रख सकते हो। अsछा यह/ होगा क तुम सारे पNे खोल दो तो सदगु तु]हG ठWक-ठWक से राःते पर ले चले। तु]हारा हाथ पकड़ ले। तु]हारे सारे पNे खोलकर रख दे ने मG ह/ तुमने अपना हाथ सदगु के हाथ मG रख दया। उसके पहले तुम रखोगे नह/ं। उसके पहले तुम मुcठW बांधे हए ु हो। कुछ िछपाये हए ु हो। बचाना है . ओट रखोगे. राम-राम दोहराने से. कहत पकड़ो राम नाह/ं.

बाक# सब खो गया। dयाकरण !बलकुल ठWक हो गई. वह तो संयोग क# बात है . गलती नह/ं हई। यह ऐसे ु ह/ हआ ु . मगर न भाव था. सब गड़बड़ हो गया. न रस था. ठWक-ठWक उsचारण होना चाहए। नाद का ठWक ःवर होना चाहए.com .oshoworld. मूल खो गया। म0ने उससे बुलाकर पूछा क तू जMर कसी संःकृ त जाननेवाले के चYकर मG आ गई। उसने कहा क हां.dkuks lquh lks >wB lc दरू हो गए। जहां मन नह/ं होता वहां राम !वराजमान है । राम कोई नाम थोड़े ह/ है ! यह तो ूतीक है नाम। भाव क# बात है । इसीिलए तो कहते ह0 वाwमीक मरा-मरा जपते-जपते भी राम को पा गया। भाव क# बात है । गंवार थे. नाद मG डू बता है । पुंपा हॉले. अमृत बरस रहा है । तो गु ने पूछा. इस तरह क# भूल-चूक न हो। तो फर डर पैदा हो जाता है । और डर मG कहां ूेम! जहां भय आया. ठWक dयाकरण होना चाहए। तो बेचार/ पुंपा बात मG पड़ गई। जब यह हमेशा अपने समूह को लेकर आती थी तो परम आनंद क# घटना घटती थी। वे खूब गहरे डू बते थे। इस बार जब आई मेरे पास और उसके समूह ने जब नाद का उsचारण कया तो उsचारण तो सह/ था. भूल गए। सीधे-सादे आदमी थे। इसिलए कभी-कभी गंवार पहंु च जाते ह0 मगर पंडत कभी पहंु चे हO ऐसा सुना नह/ं। पंडत !बलकुल शुTोsचारण क# बात थोड़े ह/ है ! यह कोई भाषा क# बात थोड़े ह/ है .यािसयO का समुदाय उसके पास बैठकर नाद का ूयोग करता है . िमल गया? राम-राम जपते -जपते िमला? तब कह/ं बाwया को याद आया। उसने कहा. मगर आ जाते ह0 । तो कसी संःकृ त जाननेवाले ने ऐतराज उठाया होगा. न राम श6द से कुछ लेन-े दे ने क# बात है । यहां पुंपा बैठW है । वह यहां नाद का ूयोग करती है । एक छोटा सा सं. पढ़े -िलखे न थे। गु तो कह गया क राम-राम जपना. बड़/ भूल हो गई। राम-राम कहा था। म0 तो मरा-मरा जपता रहा। मगर िमल गया। तो न तो राम जपने क# बात है . नह/ं तो वाwमीक अभी तक भटकते। पहंु चते ह/ नह/ं। कोई पंडत आकर ठWक कर दे ता क यह Yया कर रहे हो--मरा-मरा? राम-राम कहो। और याद रखना. पुंपा को समझाया-बुझाया क इस तरह का नह/ं. न डु बक# थी। डर दसरा लगा था। डर यह लगा था क कह/ं कोई ू भाषा क# भूल-चूक न हो जाए! तो गौण तो पकड़ मG आ गया. कुछ गलती हुई? म0ने कहा. भाव क# बात है । भूल गए। राम-राम कहते-कहते कहते--जwद/-जwद/ दोहरा रहे होगे: राम राम राम राम. जैसे क बाwया मरा-मरा जप रहा था. अरे . ूभु ने बड़/ कृ पा क# क कोई पंडत नह/ं भेजा इस व". संकोच आ गया िसकुड़ गया आदमी! फर वह पूरे व" खयाल Page 44 of 256 http://www.ड से आई है . संःकृ त जानती नह/ं। तो कुछ संःकृ त क# भूल-चूक हो जाती होगी। फर यहां तो संःकृ त जानने वाले भी आ जाते ह0 । आना तो नह/ं चाहए. अपूवJ शांित मG !वराजा है । आनंद झर रहा है . वह मरा-मरा हो गया। तो वे उसी को दोहराते रहे । उसी को दोहराते-दोहराते पा गए। जब गु वा!पस आया और दे खा क बाwयाता वाCwमक हो गया है .

लेकन मुझे एक सHय घटना मालूम है । CजसमG गु के िशंय के ूित ऐसा भाव ूगट कया। आप अपनी अमृतसर क# एक याऽा मG लगातार तीन दनO तक कड़वा रस पीते रहे और िशंय को इसक# खबर नह/ं होने द/। इसे समझाने क# अनुकंपा करG । पूछा है चमनलाल भारती ने। उ. पानी भी खुद लाते.राम सदा बहत जाई कहत पकड़ो राम नाह/ं और तुमने कहकर पकड़ िलया राम--चूके। राम बह रहा है . फर तwलीनता ह/ न तो पैदा होती। तो म0ने उनसे कहा.. भोजन भी खुद लाते। इतने ूेम से सेवा कर रहे थे क कडु वे रस क# बात उठानी ठWक नह/ं थी। और उनका Yया कसूर था? कुछ कडु वे फल आ गए हOगे। इतना ूेम डाला था कुछ कडु वे फल आ गए हOगे। Page 45 of 256 http://www. यह नद/ है . यह सरत-ूवाह है । . बुला कसको रहे हो? बुला कौन रहा है ? जो बुला रहा है वह/ राम है । अब राम से ह/ राम-राम कहलवा रहे हो। काहे को क_ दे रहे हो? राम से रामराम कहलवा के Yया सार होगा? जो भीतर पुकार रहा है उसमG ह/ डु बक# ले लो। सब दशत राम सह/ जब भीतर राम दखने लगेगा तो तुम पाओगे. राम सदा कहत जाई। कहा क चूके.हOने बड़े ूेम से सेवा क#.dkuks lquh lks >wB lc रखते ह0 क कह/ं मरा तो नह/ं हो रहा है । फर तो नह/ं हो रहा है मरा। बस चूक जाते। फर लीनता ह/ न बसती.com . इसिलए वे ठWक ह/ कहते ह0 । सब ह/ है बात। लेकन इतने ूेम से !पला रहे थे. नकली क# बात मत करा। भूल सब। कोई भी श6द काम दे गा। अपना ह/ नाम अगर दोहरा लो.ह/ं के घर क# बात है ..oshoworld. तुम भी उसके साथ बहो। बहो धारा के साथ। यह/ समपJण का अथJ है । चलत पकड़ो राम नाह/ं. बहती हई ु है ... जीवंत ूवाह है । यह कोई मुदाJ चीज नह/ं है क बांध ली गांठ और रख ली संभालकर पोटली मG। यह कोई ह/रा नह/ं है . सब दशाओं मG राम है । चौथा ूƒ: आपने कल महं मद गझनी और उसके गुलाम के ूेम क# कहानी कह/. भूल सब भाषा-dयाकरण। यहां कोई म0 भाषा-dयाकरण थोड़े ह/ िसखाने को बैठा हंू । यहां असली क# बात चल रह/ है . तो भी हो जाएगा। यह ूƒ ह/ श6दO का नह/ं है । इसिलए कहते ह0 .। म0 बहत ु घरO मG का हंू । पC~यां तो मुझे बहत ु अनेक घरO मG िमलीं Cज. कहा क गया। राम सदा बहत जाई। और राम तो ूवाह है । तुमने पकड़ने क# कोिशश क# क चूका। मुcठW बांधी क गया। राम के साथ बहो। यह ूवाह है . चमनलाल अनूठे ह0 । खुद ह/ सार/ दे खभाल करते। रात बारह बजे मुझे !वदा करके फर सुबह का इं तजाम करने मG खुद लग जाते। चार बजे उठकर फर सुबह का इं तजाम। रस भी खुद लाते. लेकन जहां तक पितयO का संबध ं है . राम सदा !बराजत मांह/ और राम तु]हारे भीतर बैठा है .

com . मेरे रहते तुम सनाथ YयO नह/ं हो जाते हो? तु]हारे इरादे अनाथ रहने के ह/ ह0 ? म0 तैयार हंू तु]हG सनाथ करने को. मुwला नस‰/न एक दकान पर गया। दे खा क दकानदार एक त…ती लगा रहा ु ु है । तो मुwला ने पूछा क बड़/ oयार/ त…ती है । उसने कहा.यह त…ती दे खकर जा रहे ह0 । अब कल आएंगे। आज नगद कल उधार--तो Cजस हसाब से आए थे. त…ती पर िलखा था आज नगद कल उधार। मुwला थोड़/ दे र चुप बैठा रहा फर बोला.oshoworld.dkuks lquh lks >wB lc इतना ूेम डाला था उसमG क वह कडवाहट कडवाहट नह/ं रह/ थी। जीभ तो जानती थी क कडु वा रस है .मुख ह/ नह/ं करना चाहता। वतJमान मेरे िलए सब कुछ है . कैसे आए. जब दरवाजा बंद हो जाएगा. कैसे चले? उसने कहा क अब जैसे आए थे. लेकन म0 तो कुछ और भी दे ख रहा था जो उसके साथ बह रहा है । वह इतना gयादा था क उसने उस कडु वेपन को ढांक दया था। कभी-कभी तो बेमन से कोई मीठा रस भी !पला दे तो कडु वा हो जाता है । और कभी कोई पूरे Vदय से कडु वा रस भी !पला दे मीठा हो जाता है । एक और भी िमठास है --ूेम क#। आCखर/ ूƒ: संत दाद ू ने अपने िशंयO क# पीड़ा समझकर भ!वंयवाणी क# थी क सौ साल बाद एक संत ूगट होगा। वह/ पीड़ा मेरे समेत आपके सभी िशंयO मG मौजूद है । लगता है क आपक# अनुपCःथित हमG अनाथ बना दे गी। हमारे अंदर भी यह/ गहर/ आकां[ा जगती है । क हमG भी कोई सौ साल बाद संभालनेवाला हो। कृ पा कर ूकाश डालG। पहली तो बात. पढ़ो भी तो Yया िलखा है ! वह मुwला जैसे आदिमयO के िलए ह/ त…ती लगा रहा था. फर अनाथ नह/ं होते। अनाथ वे ह/ हो जाएंगे मेरे जान के बाद. यह/ [ण सब कुछ है । कल न तो आता है . न कभी आएगा. अब वह तो आज चलेगा नह/ं। कल आएंगे। उधार लेने आए थे। Page 46 of 256 http://www... अsछा भाई चलते ह0 । तो दकानदार ने ु कहा. जो मेरे होते हए ु भी अनाथ थे। इसे खूब खयाल मG ले लेना। अगर मुझसे संबध ं जुड़ गया तो परम से संबध ं जुड़ गया। वह/ नाथ है उसके !बना तो अनाथ ह/ रहोगे। और अगर मुझे चूक गए तो सौ साल बाद अगर कोई आ भी जाए तो उसको भी चूक जाओगे। सौ साल मG चूकने क# आदत और मजबूत हो जाएगी। सौ साल अयास कर लोगे न चूकने का! सौ साल के बाद क# फब कर रहे हो। म0 अभी मौजूद हंू . सौ साल बाद कोई दरवाजा खुलेगा क नह/ं? अभी दरवाजा खुला है । तु]हG सौ साल के बाद ह/ ूवेश करना है ? सौ साल और संसार मG रहना है ? अभी थके नह/ं? अभी ऊबे नह/ं? जो अभी हो सकता है उसे कल पर मत टालो। और अगर अभी न कर सके तो कल कैसे कर सकोगे? करना है तो इस [ण हो सकता है । इसिलए म0 सौ साल के बाद क# कोई भ!वंय-वाणी न कMंगा। म0 भ!वंय क# तरफ तु]हG उ. न कभी आया है । कल क# आशा ह/ संसार है । आज मG ूवेश कर जाना ह/ धमJ है । धमJ !बलकुल नगद बात है । उधार/ क# बातG करो। म0ने सुना. दरवाजा अभी खुला है । तुम कहते हो. और तुम कह रहे हो क जब आप चले जाएंगे। अगर तुम एक बार सनाथ हो गए तो सनाथ हो गए.

कह/ं न कह/ं दरवाजा खुल जाता है । ऐसा तो कभी नह/ं होता क परमाHमा तक पहंु चने का कोई उपाय न हो। सदा उपाय है । परमाHमा कसी न कसी Mप मG.और अभी वह इतना ह/ कह पाई थी क गोनू झा बछड़े को वह/ं छोड़कर झप से कुएं मG कूद पड़े । पिनहारन के शोर मचाते ह/ बात ह/ बात मG समूचा गांव इकcठा हो गया और एक रःसी डालकर गोनू झा को कसी तरह बाहर िनकला गया। बाहर िनकालते ह/ गोनू झा जोर से िचwलाए.oshoworld. पचहNर पए। YयO गोनू. कसी न कसी Rार से तु]हG पुकारता ह/ रहता है । तुममG भर ह]मत होनी चाहए। अब तुम कह रहे हो क सौ साल बाद आप क# अनुपCःथित हमG अनाथ बना दे गी। मेर/ उपCःथित तु]हG सनाथ बना रह/ है ? अगर मेर/ उपCःथित तु]हG सनाथ बना रह/ है तो अनाथ होने का फर कोई उपाय नह/ं रहा। बात ह/ खतम हो गई। फर तुम अनाथ कभी नह/ं हो सकोगे। यह नाता कोई दन दो दन का नह/ं है । यह नाता फर शाtत है । जो तु]हG चाहए वह म0 तु]हG दे ने को तैयार हंू . गोनू झा ने झलाकर कहा। आगे गांव का कुंआ था Cजस पर एक पिनहारन पानी भर रह/ थी। पिनहारन भी पूछ बैठW. तो कायर को कभी भी दरवाजा नह/ं है । दरवाजे कभी समाm नह/ं होते। कह/ं न कह/ं दरवाजा बंद होता है .com . दमाग तो ठकाने है ? एक अHयंत वृT dय!" ने पूछा। !बलकुल होश मG हंू । तो यह Yया बक रहे हो? पचहNर पए और कुएं मG कूदने से Yया लेना-दे ना? और कुएं मG कूद ह/ YयO थे? Page 47 of 256 http://www. कतने मG मोल िलया? पचहNर पए मG. कल कभी आता है ? आज ह/ आता है । जो आता है वह आज है । Rार खुला है । ह]मत हो. गोनू झा ने उHसाह से उNर दया और आगे बढ़े । वे गांव मG ूवेश कर चुके थे क पाठशाला मG जाता हआ एक छाऽ ु पूछ बैठा बाबा. बछड़ा तो बड़ा सुंदर है . ूवेश कर जाओ। Yया हसाब रख रहे हो? सौ साल बाद जब जो होगा. तुम भर लेने को तैयार हो जाओ। तुम भर अपना Vदय खोला। मैिथली मG एक लोककथा है । गोनू झा का नाम !बहार मG खूब ूचिलत है । मुwला नस‰/न जैसा आदमी रहा होगा गोनू झा। गोनू झा मेले से सुंदर बछड़ा मोल लेकर अपने गांव लौट रहे थे। अभी वे गांव क# सीमा मG ूवेश कर रहे थे। क एक चरवाहे ने पूछा क पंडत जी. बछड़ा तो बहत ु सुंदर है . पंडत जी. बछड़ा तो बहत ु सुंदर है . महाराज. फर त…ती पर फर िलखा होगा: आज नगद कल उधार। ऐसी Cजंदगी त…ती है . होगा। अगर ह]मत होगी तो उस दन भी दरवाजे िमल जाएंगे। ह]मतवर को सदा दरवाजा है । अगर ह]मत न होगी.. कतने मG मोल िलया? पचहNर पए मG. Cजस पर लगा है : आज नगद कल उधार। तुम कल के िलए ूती[ा कर रहे हो..dkuks lquh lks >wB lc मगर कल फर आज क# तरह आएगा न! कल जब आओगे.

और गांव भर पूछेगा क बाबा.७. एक दफा पचहNर पया छुटकारा पा िलया। जो ूƒ तुमने पूछा है . वह ूƒ औरO के मन मG भी हो सकता है । वह ूƒ कसी एक का नह/ं है । वह म0 बहतO क# आंखO मG दे खता हंू । अलग अलग उNर दे ने क# जMरत नह/ं है । म0 ु इकcठा ह/ कह दे ता हंू : पचहNर पए! दरवाजा खुला है । आज नगद है और कल उधार हो जाएगा। नगद को ःवीकार कर लो। हं मत करो। चुनौती लो। अपने को खोलोगे तो ह/ सनाथ हो सकोगे। ःवयं िमटे !बना कोई सनाथ नह/ं होता। YयOक जब अहं कार िमटता है तब परमाHमा ूवेश करता है । आज इतना ह/। सूर न जाने कायर/ ूवचन: ३ दनांक १३.१९७७ ौी रजनीश आौम. पूना पंडत 5यानी बहु िमले बेद 5यान परबीन। दरया ऐसा न िमला रामनाम लवलीन।। व"ा ॐोता बहु िमले करते ख0चातान। दरया ऐसा न िमला जो स. बछड़ा बड़ा सुंदर है । पचहNर पए तो गोनू झा ने ठWक उपाय कया. कूद पड़े कुएं मG। सारा गांव अपने आप इकcठा हो गया.मुख झेले बान।। दरया सांचा सूरमा सहै स6द क# चोट लागत ह/ भाजै भरम िनकस जाए सब खोट।। सबह कटक सूरा नह/ं कटक माहं कोई सूर। दरया पड़े पतंग gयO जब बाजे रन तूर।। भया उजाला गैब का दौड़े दे ख पतंग। दरया आपा मेटकर िमले अिगन के रं ग।। दरया ूेमी आHमा रामनाम धन पाया। Page 48 of 256 http://www.com .oshoworld.dkuks lquh lks >wB lc ताक सभी गांव वालO के ूƒ का एक ह/ बार मG उNर दे कर छुcट/ पा लूं अब एक-एक आदमी को अलग-अलग उNर दे ते फरना.

बड़े Dानी थे। और कभी-कभी राजा भोज उनक# पर/[ा िलया करता था। एक दन वह अपना तोता राजमहल से ले आया दरबार मG। बस तोता एक ह/ रट लगाता था. राजा भोज के दरबार मG बड़े पंडत थे. जो लोभ के कारण धािमJक है --ःवगJ िमले. खतरनाक मामला था। ठWक जवाब Yया हो? तोते से पूछा भी नह/ं जा सकता। तोता कुछ और जानता भी नह/ं। तोता इतना ह/ कहता है --तुम लाख पूछो. बोध नह/ं। तुम जागे नह/ं. बस एक ह/ भूल है । राजा ने अपने दरबारयO से पूछा. वह इतना ह/ कहता है : बस एक ह/ भूल है । सोच-!वचार मG पड़ गए पंडत। उ. कसी ूलोभन के कारण। दिनया मG तीन तरह के धािमJक लोग ह0 । एक वे जो भय के कारण धािमJक ह0 । डरे ह0 । कह/ं ु कुछ भूल-चूक न हो जाए। कह/ं नकJ न पड़ना पड़े । कह/ं कोई पाप न हो जाए। एक वे. बस एक ह/ भूल है .oshoworld.com . भ!वंय सुंदर हो। यहां तो बहत ु पीड़ा उठा ली है .हOने मोहलत मांगी. एक ह/ बात दोहराता था बार-बार: बस एक ह/ भूल है . एक Dान है जो ःवयं का नह/ं है । जो ःवयं का नह/ं है । जो ःवयं का नह/ं है जो ःवयं का नह/ं है जो ःवयं का नह/ं है वह केवल अDान को ढांकने का उपाय है । जो ःवयं का है उससे ह/ िमटता है भीतर का अंिधयारा। उधार Dान बुझा हआ दया है । शायद बुझा द/या भी नह/ं.dkuks lquh lks >wB lc िनधJन था धनवंत हआ भूला घर आया।। ु सूर न जाने कायर/ सूरातन से हे त।। पुरजा-पुरजा हो पड़े तऊ न छांड़े खेत।। दरया सो सूरा नह/ं Cजन दे ह कर/ चकचूर। मन को जीत खड़ा रहे म0 बिलहार/ सूर।। Dान और Dान मG बड़ा भेद है --आकाश पाताल का। एक Dान है जो ःवयं का है . वह भी घूमने लगा क कह/ं कोई Dानी िमल जाए। अब तो Dानी से पूछे !बना न चलेगा। शाUO मG दे खने से अब कुछ अथJ नह/ं है । अनुमान से भी अब काम नह/ं होगा। जहां जीवन खतरे मG पड़ा हो. कसी भय के कारण. सुख िमले. भयभीत होगा तो धािमJक कैसे होगा? धािमJक होने क# तो अिनवायJ शतJ है क लोभ और भय !वदा हो जाए। म0ने सुना है . यह कौन सी भूल क# बात कर रहा है तोता? पंडत बड़े थे. सHय क# तःवीर से भी नह/ं िमटता है । उधार Dान माऽ ःमृित है . और तुमने मान िलया। ईtर है इसिलए नह/ं. नींद मG पड़े हो। ःवoन मG ह/ तुमने दसरO क# आवाजG ू सुन ली संमह/त कर ली है । कसी ने कहा ईtर है . खोज-बीन मG िनकल गए। जो राजा का सब से बड़ा पंडत था दरबार मG. वहां अनुमान से काम नह/ं चलता। Page 49 of 256 http://www. अगर ठWक जवाब न दया तो फांसी। ठWक जबाब दया तो लाखO का पुरःकार और स]मान। अटकलबाजी भी नह/ं चल सकती थी. मुCँकल मG पड़ गए। और राजा ने कहा. आगे न उठानी पड़े । मगर ये दोनO ह/ धािमJक नह/ं ह0 । धािमJक dय!" लोभ होगा. द/ए क# तःवीर है । द/ए क# ु तःवीर से अंधेरा नह/ं िमटता.

एक ह/ भूल है --लोभ। और भय लोभ का ह/ दसरा हःसा है . तु]हG दो ह/ दखाई पड़ती ह0 ? Page 50 of 256 http://www. नकाराHमक हःसा। यह एक ह/ िसYके के दो पहलू ू ह0 --एक तरफ भय. दो? तो Yया म0 अंधा हंू ? मुझे इतनी हजारO नौकाएं दखाई पड़ती ह0 . और उसने दे खा ु सागर मG बहत ु सी नौकाएं चल रह/ ह0 . क मौत आनेवाली हो. म0 समझा नह/ं। उसने कहा क शाUO मG िलखा है क कुNे को पंडत कुएं तो ःनान करो। और आपका महापंडत कुNे को कंधे पर िलए खड़ा है । लोभ जो न करवाए सो थोड़ा है । बस. क एक चरवाहा िमल गया। उसने पूछा पंडत ू पड़ा आप के ऊपर. भय के कारण कंपन होता है । तु]हार/ भीतर क# gयोित कंपती रहती है । तु]हारे भीतर हजार तरं गG उठती ह0 लोभ क#.com . द!वधा कह/। उस चरवाहे ने कहा फब ु न करG . वह धािमJक नह/ं है । फर धािमJक कौन है ? धािमJक वह/ है Cजसके पास न लोभ है . हजारO नह/ं ह0 . म0 हल कर दं ग ू ा। मुझे पता है । लेकन एक ह/ उलझन है । म0 चल तो सकता हंू लेकन म0 बहत ु ल हंू । और मेरा यह जो कुNा है इसको म0 अपने कंधे पर रखकर नह/ं ले ु दबJ जा सकता। और इसको पीछे भी नह/ं छोड़ सकता हंू । इससे मेरा बड़ा लगाव है । पंडत ने कहा तुम फब छोड़ो। म0 इस कंधे पर रख लेता हंू । उन ॄाŒण महाराज ने कुNे को कंधे पर रख िलया। दोनO राजमहल मG पहंु चे। तोते ने वह/ रट लगाई--एक ह/ भूल है . बहत ु उदास ह0 ? जैसे पहाड़ टट उदास! बात Yया है ? तो उसने अपनी अड़चन कह/. सब फजूल हो गए। वह अनेकO के पास गया लेकन कह/ं कोई जवाब न दे सका क तोते के ूƒ का उNर Yया होगा। बड़ा उदास लौटता था राज-महल क# तरफ. भय क#। चीन मG एक सॆाट हआ। वह अपने महल के ऊपर ऊपर खड़े है छत पर. नौकाएं तो दो ह/ ह0 । उस सॆाट ने कहा. हजारO नौकाएं। उसने अपने बूढ़े वजीर से कहा दे खते ह0 . बस एक ह/ भूल है । चरवाहा हं सा उसने कहा महाराज.dkuks lquh lks >wB lc तकJ इHयाद भी काम नह/ं दG गे। तोते से कुछ राज िनकलवाया नह/ं जा सकता है । तो पुराने Cजतने हथकंडे थे. वासनामःत है ःवगJ से. एक तरफ लोभ। ये दोनO बहत ु अलग-अलग नह/ं ह0 । इसिलए जो भय से धािमJक है . हजारO नौकाएं चल रह/ ह0 । उस बूढ़े वजीर ने कहा मािलक. वह धािमJक नह/ं है । और जो लोभ से धािमJक है . न भय। Cजसे कोई चीज लुभाती नह/ं और कोई चीज डराएगी भी नह/ं। जो भय और ूलोभन के पार उठा है वह/ सHय को दे खने मG समथJ हो पाता है । सHय को दे खने के िलए लोभ और भय से मु!" चाहए। सHय क# पहली शतJ है अभय। YयOक जहां तक भय तु]हG डांवाडोल कर रहा है वहां तक तु]हारा िचN ठहरे गा ह/ नह/ं। भय कंपाता है . डरा है दं ड से.oshoworld. इतने जी. दे खG भूल यह खड़/ है । वह पंडत कुNे को कंधे पर िलए खड़ा था। भूल यह खड़/ है । राजा ने कहा. जो लोलुप हो रहा है .

हOने ःवगJ क# कwपनाएं क# ह0 . तो आप भीतर से यह YयO कहते ह0 धीरे से क वह/ तु]हारे िलए भी? उसने कहा. जोर से बूट क# ठोकर करता. वहां भी कामवासना का खूब इं तजाम कर रखा है । शराब के चँमे बह रहे ह0 . लेकन आपक# ^!_ मुझ से बेहतर नह/ं है । आप जवान ह0 . वह/ काम. वह/ ःवगJ को भी बना रहा है । जहां भय है वहां कभी ूेम का ज. तो सलाम तो करता था वह कmान. वह कुछ आHमा से नह/ं हलती। आHमा तो िसफJ एक ह/ मांग करता है क मौका िमल जाए तो गरदन काट दG । म0ने सुना है . मैऽी पैदा नह/ं होती। तो जो आदमी भयभीत होकर परमाHमा क# तरफ आंखG उठा रहा है . अsछW गािलयां दे ता है । तो ऊपर से तो म0 सलाम कर लेता हंू । भीतर से मुझे पता है क भीतर असली मG वह Yया कह रहा है तो उसके भीतर के िलए म0 जवाब दे ता हंू क वह/ तु]हारे िलए भी। जो तुम मेरे िलए कह रहे हो भीतर से. कुछ लोभ क# नौका मG सवार ह0 । और तो सब बातG ह0 । उस बूढ़े ने बड़े काम क# बात कह द/। लेकन जो भय क# नौका मG सवार है या लोभ क# नौका मG सवार है . जो यहां टटोलता था अंधेरे मG. इसके पीछे राज है । म0 कभी िसपाह/ था। मुझे पता है क जब िसपाह/ कmान को सलाम करता है तो भीतर गाली दे ता है । म0 जानता हंू । म0 िसपाह/ था। जब भीतर से-बाहर से सलाम करता है --भीतर से. आप दरू तक दे ख सकते ह0 । म0 बूढ़ा आदमी मुझे साफ-साफ दखाई भी नह/ं पड़ता। लेकन Cजंदगी भर के अनुभव से कहता हंू क दिनया मG दो नौकाएं ह0 । कुछ ु लोग भय क# नौका मG सवार ह0 . सुंदर अoसराएं नाच रह/ ह0 । सब तरह का आयोजन कर रखा है । वह/ लोभ. ये दोनO ह/ धमJ के तट तक नह/ं पहंु चGगे। ये तो बहत ु सांसारक वृ!Nयां ह0 । इन से gयादा तो और कोई सांसारक वृ!N होती नह/ं। फर सारे उपिव तो इ. आपक# आंखG मुझ से बेहतर.com . Vदय मG तो दँमन रहे गा। उसक# परमाHमा से मैऽी नह/ं हो सकती। तुम ु उसको कैसे ूेम करोगे Cजससे तुम भयभीत हो? तुम उससे घृणा कर सकते हो। घृणा ह/ कर सकते हो। हां. लेकन धीरे से यह भी कहता: वह/ तु]हारे िलए भी। वे िसपाह/ बड़े है रान थे क यह YयO कहता है बार-बार--वह/ तु]हारे िलए भी। एक दन उ. ऊपर से चाहो तो ूेम दखा सकते हो YयOक वह बलशाली है । नौकर मािलक के आसपास जो पूछ ं हलाता है . वह/ म0 भी तु]हारे िलए कह रहा हंू । वह उसके िलए उNर है । मुझे भीतर/ बात का पता है । Page 51 of 256 http://www.oshoworld.हOने पूछा क मािलक और तो सब ठWक है लेकन जब भी कोई आपको सलाम करता है . एक िसपाह/ बढ़ते-बढ़ते कmान हो गया। जब वह कmान हो गया तो दो िसपाह/ उसके आसपास चलते थे। लेकन वह दोनO िसपाह/ बड़े है रान थे। जब भी कोई दसरा ू िसपाह/--और सैकड़O िसपाहयO से िमलना होता दनभर के आवागमन मG--जब भी कोई िसपाह/ खड़े होकर सलामी मारता.म नह/ं होता। भय से तो घृणा पैदा होती है । भय से तो शऽुता पैदा होती है . सलाम करता.ह/ं से पैदा होते ह0 । लोभ अगर है तो काम भी रहे गा। लोभ अगर है तो बोध भी रहे गा। YयOक जहां लोभ मG बाधा पड़े गी वह/ं बोध उठ आएगा। और जहां लोभ है वहां काम कैसे जाएगा। इसिलए Cज.dkuks lquh lks >wB lc उस वजीर ने कहा.

Cजनको हम धािमJक कहते ह0 . महाHमा कहते ह0 . जो केवल लोभ और भय का ह/ !वःतार है । वह जो दरया कहते ह0 . अंग रह/ िलपटाए। वह जो शाU क# धूल लगी थी सारे शर/र मG. Cजसको तुमने भय के कारण नमःकार कया है उसके िलए तु]हारे Vदय मG गािलयO के अितर" और कुछ भी न होगा। और लोग कहते ह0 . पूजा-ूाथJना करते ह0 . धािमJक आदमी ईtर-भी होता है । यह बात असंभव है । दिनया क# ु सभी भाषाओं मG इस तरह के श6द ह0 . जो पु‡य करते ह0 . YयOक वे घबड़ाये होते ह0 । तो बुरे लोगO को तुम भय क# नाव मG सवार पाओगे। और Cजनको तुम भले लोग कहते हो. ोत करते ह0 . ऐसा पागलपन ह/ है ईtर से डरना। लहर और सागर से डरे ? लेकन Cजनको हम पंडत कहते ह0 . उसमG तु]हारा शुTतम Mप है । उससे तुम आए हो. जो लोग जीवन मG बुरा कर रहे ह0 . Hयाग करते ह0 .. न भी पहंु चता है । परमाHमा तक तो वह पहंु चा है जो लोभ और भय दोनO को छोड़ दे ता है । छोड़ते ह/ पहंु च जाता है । छोड़ते ह/ बांित घट जाती है । एक Dान है .. कसी से मत डरना लेकन ईtर से डरना। और म0 कहता हंू सबसे डरना लेकन ईtर से मत डरना। ईtर से अगर डरे तो फर और कहां. इनको तुम लोभ क# नाव मG सवार पाओगे। जो पाप करते ह0 उनको तुम भय से कंपते हए ु पाओगे। और जो पु‡य करते ह0 उनको तुम लोभ से भरे हए ु सरोबोर पाओगे। मगर दोनO चूक जाएंगे। परमाHमा तक न तो लोभी पहंु चता है . उपवास करते ह0 . सारे अंग मG. दो नावO मG सवार िमलGगे--यह तो भय क# नाव. उसमG ह/ तुम जाओगे। जैसे लहर सागर से डरे . रं जी साःतर 5यान क#. तु]हारे ूाणO का ूाण है । ईtर तु]हारा शुTतम Mप है । उससे तुम आए हो.फर िनभJय क# वीणा कहां बजेगी? फर अभय के ःवर कहां उठG गे? फर अभय क# अचJना कहां होगी? फर अभय क# थाली कहां सजेगी? फर अभय क# द/पमाला कहां जलेगी? ईtर के साथ भी अगर भय रहा तो फर तो इस संसार मG अभय कह/ं भी नह/ं हो सकता। ईtर कोई सांप-!बsछू नह/ं है क तुम उससे भयभीत होओ। ईtर तु]हारा अंतरतम है . दान करते ह0 . तपःवी कहते ह0 . उसमG तुम हो. ईtर-भी गाड फयर/ंग। ये !बलकुल अधािमJक श6द ह0 । भी. वह गु ने एक ह/ श6द से िगरा द/। तुम हं द ू YयO हो? तुम मुसलमान YयO हो? तुम ईसाई YयO हो? अपने कारण क संयोगवशात? तुमने चुका है ? तुमने िनणJय िलया है ? या क यह केवल माऽ संयोग क# Page 52 of 256 http://www. जो लोभ और भय से मु" होकर उपल6ध होता है । एक Dान है . जांच कर लेना. और या लोभ क# नाव। फकJ भी साफ है क भय क# नाव मG वे लोग सवार होते ह0 . भयभीत तो कैसे ईtर को ूेम करे गा? Cजसका ईtर से ूेम है वह ईtर से भयभीत नह/ं है । ईtर से भयभीत हो अगर तो फर अभय कहां होगा? ईtर तक से भयभीत हो तो फर इस जगत मG कहां शरण कर पाओगे? फर कहां तु]हार/ ूाथJना उठे गी? फर तो गािलयां ईtर के पास भी उठ रह/ ह0 । महाHमा गांधी कहते थे.oshoworld. तप करते ह0 .dkuks lquh lks >wB lc यह आदमी ठWक कह रहा है । तुम जानते हो भली भांित.com .

न मुसलमान. वह तु]हG घुलाएगा। वह तु]हG ताजा करे गा। वह तु]हG वह/ करे गा जैसे तुम हो। वह ऊपर क# सब खोलG अलग कर दे गा। तु]हारे ऊपर Cजतने वU ह0 . साथ ह/ चलना होगा हमारे जीवन क# सब से बड़/ पीड़ा यह/ है क हम घबड़ाए हए ु ह0 । साज उठा लेते ह0 तो हाथ कंपते ह0 वीणा को छूते व"। डरते ह0 . न ईसाई। रं जी साःतर 5यान क#--वह सारे शाU क# Dान क# जो धूल है । वह झाड़ दे गा। वह तु]हG नहलाएगा. पता नह/ं कैसा संगीत पैदा होगा। अपनी ह/ वीणा.com . अपने ह/ हाथ. मुसलमान घर मG पैदा हो गए तो मुसलमान हो। जो धूल तुम पर पड़/ उसी से तुम भर गए हो। गु के पास जाकर न तुम हं द ू रह जाओगे. फूल Cखल गए थे. कोई र”तार है यह? हमको र”तार का आहं ग बदलना होगा Cजहन के वाःते सांचे तो न ढालेगी हयात Cजहन को आप ह/ हर सांचे मG ढालना होगा यह भी जलना कोई जलना है क शोला न धुआं अब जला दG गे जमाने को जो जलना होगा राःते घूमकर सब जाते ह0 मंCजल क# तरफ हम कसी ख से चलG.dkuks lquh lks >wB lc घटना थी क तुम हं द ू घर मG पैदा हो गए हो तो हं द ू हो. और घबड़ाए ह0 । साज उठाया है क मौसम का तकाजा था यह/ वसंत आ गया था.oshoworld. वह सब तोड़ दे गा। इसिलए धािमJक dय!" को बड़ा साहसी होना चाहए। तो भयभीत dय!" तो कैसे इस याऽा पर जाएगा? यह तो बांित क# घटना है । कोई दे ता है हरे दल पर मुसwसल आवाज और फर अपनी ह/ आवाज से घबराता है अपने बदले हए ु अंदाज का एहसास नह/ं मेरे बहके हए ु अंदाज से घबराता है साज उठाया है क मौसम का तकाजा था यह/ कांपता हाथ मगर साज से घबराता है राज को है कसी हमराज क# मु‰त से तलाश और दल सोहबते हमराज से घबराता है शौक यह है क उड़े वह तो जमीन साथ उड़े हौसला यह क परवाज से घबराता है तेर/ तकद/र मG आशायेश अंजाम नह/ं एक ह/ शोर से आकाश से घबराता है कभी आगे. घास का शबनम थी और उठा िलया साज। Page 53 of 256 http://www. पC[यO ने गीत गाए थे. सुबह उठW थी नई-नई. सब हटा दे गा। तु]हारे ऊपर बाहर के तुमने Cजतने आडं बर कर रखे ह0 . कभी पीछे . अपना ह/ जीवन.

यह !वराट आकाश. अनंत आकाश। बैठे ह0 अपने घOसले मG। सब सुरC[त है . अनजान राःते हOगे. इसमG कह/ं खो न जाएं। तो सब ने अपने घर बना िलए ह0 । Page 54 of 256 http://www. माना क दख ु है . वह अDात है । पता नह/ं Yया पैदा होगा। इस साज को तुमने कभी छे ड़ा नह/ं। इस साज को तुमने कभी बजाया नह/ं। यह तु]हार/ वीणा अनबजी पड़/ है --तो पता नह/ं Yया होगा? तुम Dात से बंधे हो। भयभीत आदमी Dात से बंधा रहता है । जो उसने कया है उसी को दोहराता रहता है । जो उसने बार-बार कया है उसी मG वह कुशल हो जाता है । कई बार तो ऐसा होता है क तुम अपने दख ु को भी नह/ं छोड़ते. सब सु!वधा है । यह खुला आकाश. आचायr मृHयु। आचायJ तो मृHयु है । संभलकर जाना. फर लौटना नह/ं है । शौक यह है क उड़े वह तो जमीन साथ उड़े शौक तो हमारे बड़े ह0 । दल मG तरं गG तो बहत ु उठती ह0 । सपने तो हम बहत ु लेते ह0 । आंखG तो हमार/ …वाबO से भर/ ह0 । शौक यह है क उड़े वह तो जमीन साथ उड़े हौसला यह है क परवाज से घबड़ाता है और हौसला !बलकुल नह/ं है । हं मत !बलकुल पःत है । पंख खोलने मG ूाण घबड़ाते ह0 . YयOक पंख खोलने का मतलब है . YयOक उससे बहत ु परिचत हो गए हो। छोड़ने मG डर लगता है । पता नह/ं फर कससे िमलना हो जाए। यह दख ु है .oshoworld.dkuks lquh lks >wB lc साज उठाया है क मौसम का तकाजा था यह/ चारO तरफ वसंत ने घेर िलया था तो उठा ली है वीणा हाथ मG। कांपता हाथ मगर मगर साज से घबराता है लेकन कांप रहा है हाथ। YयOक संगीत जो तुम पैदा करोगे.com . Cजनका नYशा भी पास नह/ं. नई पगडं ड/ बनानी होगी. YयOक फर लौट न सकोगे। गु मG गए तो गए. Cजन पर कभी चले भी नह/ं। अंधेर/ रातG हOगी। पता नह/ं खो न जाए. सोचकर जाना. अपनी मौत से िमलना-पुराने शाUO ने कहा है . मगर अपना है और पुराना है । और जान-पहचान भी हो गई है । अब इससे राजी भी हो गए ह0 । कसी तरह समायोCजत भी हो गए ह0 । नई झंझट कौन ले? तुम अपनी Cजंदगी को बदलते नह/ं। YयOक डर लगता है क बदलकर नए राःतO पर चलना होगा. सब तरह से िनणJय लेकर जाना. भटक न जाए। इसिलए घूमते रहो अपनी ह/ चYकर मG कोwहू के बेल क# तरह। राज को है कसी हमराज क# मु‰त से तलाश कसी क# तुम खोज कर रहे हो क कोई साथ िमल जाए जो तुम अपने हाथ मG ले लो। राज को है कसी हमराज क# मु‰त से तलाश और दल सोहबते हमराज से घबड़ाता है और सHसंग से डर लगता है । YयOक सHसंग तु]हG िमटाएगा। गु से िमलने का अथJ है .

. बsचा मां के पेट मG होता है और घबड़ा जाए. न कोई झंझट थी। सोये थे [ीरसागर मG !वंणु बने। Page 55 of 256 http://www. नए से जो संबध ं नह/ं बनाता। हं द ू घर मG पैदा हआ तो हं द ू ह/ मर जाएगा। ु हं द ू घर मG पैदा हो जाना तो अsछा है लेकन हं द ू घर मG ह/ मर जाना दभाJ ु 5य। मुसलमान पैदा हआ तो मुसलमान घर मG ह/ मर जाएगा। जैसा पैदा हआ है उसी सीमा मG घूमता कोwहू ु ु के बैल क# तरह वह/ं समाm हो जाएगा। एक दन वह/ं िगर जाएगा। नए आकाश. जो पंख ह/ नह/ं मारता.. क रह/म क# हो. अगर इं कलाब से घबड़ाता है . क जैसा हंू वैसा ह/ रहंू गा.यासी हो जाओगे? घर बनता है सुर[ा से.com .यासी भी नह/ं हो सकते। प~ीबsचO से घर ह/ नह/ं बनता तो प~ी बsचO को छोड़कर कैसे सं. क बांित क# आवाज से इतना डर है तो फर तेर/ कःमत से सुख क# कोई संभावना नह/ं। फर तू पYका समझ ले क फर सुख तुझे िमलनेवाला नह/ं है । फर आनंद क# कभी वषाJ न होगी। अमृत कभी तेरे Rार पर दःतक न दे गा। और परमाHमा से कभी तेरा िमलन न होगा। तेर/ तकद/र मG आशायेश अंजाम नह/ं एक ह/ शोर से आकाश से घबड़ाता है अगर बांित क# आवाज से घबड़ाता है . आकाश से घबड़ाता है . जो आदमी कभी अपने घOसले के बाहर नह/ं जाता.oshoworld. कैसे सुख क# दिनया दे खी। न कोई िचंता थी. नई दशाएं पुकारती रहG गी और तुम हौसला न करोगे। शौक यह है क उड़े वह जो जमीन साथ उड़े हौसला यह है क परवाज से घबड़ाता है पंख खोलने मG ूाण अटकते ह0 । जहां पंख खोलने क# बात करो वह/ं वह बचने क# बात करने लगता है । वह कहता है घर बैठे-बैठे बात चले--राम क# हो. मो[ क िनवाJण क# हो.। सोचो. नए आयाम. न कोई दाियHव था. वह तो समाm हो रह/ है । और नौ मह/ने तक कैसी मजेदार Cजंदगी जानी. वह तो खHम हो रह/ है .dkuks lquh lks >wB lc इस घर बनाने क# वृ!N को ह/ म0 कहता हंू गृहःथी। गृहःथ का मतलब मेरे िलए यह नह/ं है क तु]हार/ प~ी है और बsचे ह0 । प~ी और बsचO से Yया कोई घर बनता है ? प~ी और बsचे से घर नह/ं बनता है इसिलए प~ी-बsचO को छोड़कर सं. न कोई ु फब थी. सब सुनGगे। सHयनारायण क# कथा यह/ं करवाएंगे। मगर कह/ं जाएंगे नह/ं। इं च भर बदलGगे नह/ं। तेर/ तकद/र मG आशायेश अंजाम नह/ं एक ह/ शोर से. और मां के बाहर न आए तो Yया हो? एक बात तो साफ है क जब बsचा नौ मह/ने के बाद मां के पेट बाहर आता है तो उसे ऐसा ह/ लगता होगा क मर रहा हंू । िनCvत ह/ लगता होगा क मर रहा हंू । YयOक नौ मह/ने तक जो Cजंदगी जानी. अगर अपने को बदलने से ऐसा भयभीत है . अगर ऐसी बात है क बांित से इतना डर है . घर बनता है कमजोर/ से। घर बनता है भय से। घर बनता है सदा सीमा के भीतर रहने से। गृहःथी का अथJ होता है .

मां ह/ खून पहंु चाती है । सारा काम कोई कर रहा है । उसे उसका पता भी नह/ं है । ध. वह तो अनंतकाल रह िलया। अब इस अनंतकाल रहने मG बाद अचानक एक दन उखड़ना पड़ रहा है . कोई फकर नह/ं। न रोट/ कमानी है . रोज-रोज चुनौितयां बढ़ती जाएंगी। रोज-रोज! जैस-े जैसे बड़ा होगा वैसे-वैसे संसार का दाियHव और संघषJ. और कहां जाना होगा इसका कुछ पता नह/ं है । तो बsचा भी कने क# कोिशश करता है । इसी से पीड़ा होती है मां को। बsचा कने क# कोिशश करता है । बsचा अपने को वह/ं जमाए रखने क# चे_ा करता है . अब परायO मG जाना होगा। अब पता नह/ं वह कैसा dयवहार करG गे। िनCvत वह ऐसा ह/ dयवहार तो नह/ं करG गे जैसा मां करती थी.यवाद भी दे ने क# झंझट नह/ं है । सब हो रहा है .dkuks lquh lks >wB lc तु]हG पता है ना। मां के पेट मG ठWक समुि के जल जैसा जल है । उसी जल मG बsचा तैरता है । मां के शर/र क# गमx उस जल को गभJ रखती है । जैसे कभी गमJ टब मG तुम बैठ जाते हो और सुख से डू ब जाते हो. सुख क# घड़यां खूब लंबी होती ह0 । अनंत काल मालूम पड़ता है । सुख ह/ सुख है । कह/ं दख ु क# कोई करण भी नह/ं है । तो नौ मह/ने जैसे शाtत! कोई शुM नह/ं. अचानक उखड़ना पड़ता है । बस गए थे। और नौ मह/ने तुम थोड़ा मत समझना। तु]हG थोड़े लगते ह0 नौ मह/ने. आना नह/ं चाहता। जगत का उसे पता भी नह/ं है लेकन अगर न आए तो मरे गा। Cजसको वह मृHयु समझ रहा है वह एक नए जीवन क# शुआत है । और अगर वह Cजद करके वह/ं क जाए. भाई बहन करते थे। डरता है बsचा। तुमने दे खा है न! छोटे बsचे को ःकूल भेजने Page 56 of 256 http://www. न कलGडर है । कोई जांच-पड़ताल तो है नह/ं। और एक बात और खयाल रखना. कोई अंत नह/ं। एक ह/ ःवर बजता रहता है । तो बsचे के िलए नौ मह/ने नौ मह/ने नह/ं ह0 . अब उसके आगे जाना है । अब खतरा मोल लेना है । YयOक खतरा मोल िलए !बना जीवन मG कोई !वकास नह/ं होता। अब चुनौितयां झेलनी ह0 । बsचा पैदा होगा. ऐसा बsचा नौ मह/ने उस गभJ जल मG तैरता है । वह [ीरसागर है । कोई िचंता नह/ं. सब छोड़ना पड़ रहा है । Cजसे जीवन जाना था वह छूट रहा है . उपिव बढ़ते जाएंगे। और जैस-े जैसे बड़ा होगा वैसे-वैसे और-और घर भी छोड़ने हOगे। पांच-सात साल का हो जाएगा तो ःकूल जाना पड़े गा। फर एक झंझट। यह घर क# चारद/वार/ बड़/ सुखद थी। यहां सब अपने थे. तो Cजसे वह अब जीवन समझ रहा है वह मृHयु मG परणत हो जाएगा। वह क[ा पार हो गई.oshoworld. अपने आप हो रहा है । परमाHमा सब कर रहा है । फर एक दन अचानक इस अपूवJ घर से उजड़ने क# घड़/ जा जाती है । िनकलना पड़ता है इसे घOसले के बाहर। तो बsचा घबड़ाता है --घबड़ाता ह/ होगा। मनोवैDािनक कहते ह0 क जीवन क# सब से बड़/ पीड़ा जीवन के पहले दन घटती है । फर तो सब पीड़ाएं छोट/ ह0 । उसको शामा कहते ह0 मनोवैDािनक। वह इतना बड़ा घाव हो जाता है बsचे को. !पता करते थे. न घर बनाना है । tास तक अपनी लेने क# फब नह/ं है । मां ह/ tास लेती है । मां भोजन पचाती है . बsचे के िलए तो नौ मह/ने अनंत काल है । YयOक न तो घड़/ है .com .

Cजंदगी तु]हारे िलए तु]हारे बनाए सांचO मG नह/ं ढलेगी। Cजहन को आप ह/ हर सांचे मG ढलना होगा। तु]ह/ं को Cजंदगी के सांचO मG ढलना होगा। इसका नाम समपJण है । Cजस दन यह समझ आ जाती है क नद/ के साथ मुझ ह/ को बहना होगा. अब तो िसफJ बहंू गा। ले जाए जहां नद/. Cजस दन तुम अपने अहं कार को उतारकर रख दे ते हो और तुम कहते हो. उसे छोड़ना होगा। तु]हG ःवयं ह/ उतरना होगा इस अनंत के आकाश मG. क अCःतHव मेरे पीछे चलता है . बाजार मG खड़ा होगा। यह आHम !वकास के िलए अिनवायJ है । ऐसी ह/ अंतयाJऽा पर भी घड़यां ह0 । ऐसे ह/ ठWक मील के पHथर ह0 । वहां भी बांित के िलए तैयार होना पड़ता है । तुमने जो Dान इकcठा कर िलया है शाUO का वह तो ठWक है . अब म0 तैMंगा भी नह/ं.oshoworld.dkuks lquh lks >wB lc व" कैसी घबड़ाहट होती है । कैसा लौट-लौटकर घर क# तरफ दे खता है । वह गृहःथी का मन है । अनजान मG जा रहा है । पता नह/ं कौन िमलGगे। कैसे लोग िमलGगे। Yया dयवहार करG गे। अब तक सुर[ा मG पला है . िगराए पवJतO से तो िगMंगा। डु बाए सागरO मG तो डू बूग ं ा। ले जाए जहां नद/। Page 57 of 256 http://www. और एक नया घर उसे अपना बनाना होगा। अब सारा दाियHव उसका है । अब उसक# Cज]मेदारयां बढ़ती जाती ह0 । अब उसके बsचे हOगे उनक# भी Cज]मेदार/ उस पर होगी। अब संघषJ मG उतर गया पूरे संसार के. क परमाHमा साए क# तरह मेरे पीछे आता है । यह/ दख ु है । अहं कार दख ु का मूल है । Cजहन के वाःते सांचे तो न ढालेगी हयात तुम याद रखो. क म0 िसT कर दं ग ू ा क Cजंदगी मेरे पीछे चलती है . और कालेज है और !वt!वuालय है । और फर !वt!वuालय के बाद एक दन !ववाह है . याद रखना। तुमने Cजंदगी को अपने ढं ग से चलाना चाहा क तुम दख ु मG पड़े । यह/ तो दख ु है । सारा संताप यह/ है । जगत का दख ु Yया है ? क तुम Cजंदगी को अपने ढं ग से चलाना चाहते हो। तुम कहते हो क यह Cजंदगी का dयवहार मेरे ढांचे मG हो। म0 जैसा चाहंू .com . कभी पीछे कोई र”तार है यह! हमको र”तार का आहं ग बदलना होगा हमG र”तार का ढं ग बदलना होगा। Cजहन के वाःते सांचे तो न ढालेगी हयात और Cजंदगी तु]हारे ढं ग से नह/ं चल सकती. अब असुर[ा मG उतर रहा है । फर ःकूल है . वैसा हो। तुम चाहते हो यह नद/ मेरे पीछे चले। यह नद/ तु]हारे पीछे नह/ं चलेगी। तुम इसी नद/ क# छोट/ सी लहर हो। लहर के पीछे नद/ कैसे चल सकती है ? लहर को ह/ नद/ के साथ चलना होगा। अंग को !वराट के साथ चलना होगा। !वराट अंग के साथ नह/ं चल सकता। हम तो छोटे -छोटे हःसे ह0 । मगर Cजंदगी भर हम यह/ तो कोिशश करते ह0 । यह/ तो अहं कार क# घोषणा है . पर मारने हOगे। कभी आगे. कामचलाऊ है .

चुप रह जाता हो। Cजसक# अपनी पकड़ गई. Cजसने अनंत को वर हो। तलाश थी कसी ऐसे क# जो अब तैरता न हो--धारा के !वपर/त क# तो बात ह/ नह/ं. उधार। पंडत 5यानी बहु िमले वेद 5यान परवीन बड़/ कुशलताएं थी उनक#। ूवीण थे बहत ु श6दO मG. दशJन मG बड़/ ूवीण थे। मगर इस ूवीणता का Yया करना? भीतर तो दया जला न था। भीतर तो गहन अंधेरा था। दरया ऐसा न िमला राम नाम लवलीन तलाश दरया को उसक# थी जो राम मG डू बा हो। YयOक जो राम मG डू ब सकता हो वह/ तु]हG भी राम मG डू बा सकता है । शाU मG जो डू बा है वह तु]हG भी शाU मG ह/ डु बाएगा.com . जीवन मG उतरने से। शूरवीर चाहए। आज के इन पदO मG उसी शूरवीर क# ूशंसा है । ये अदभुत पद ह0 । एक-एक पद पर ठWकठWक Iयान दे ना। पंडत 5यानी बहु िमले वेद Dान परबीन दरया ऐसा ना िमला राम नाम लवलीन दरया कहते ह0 . वह/ राम का होता है । बड़े ददJ से कहते ह0 . वेदपाठW हो जाओगे। dयाकरण िसखाएगा. Dानी थे. न गाए. श6द क# महमा िसखाएगा लेकन िनश6द शू.य का चमHकार तो उसके पास नह/ं। मौन तो उसके पास नह/ं पा सकोगे। उसके Vदय मG Iयान तो नह/ं। सुरित तो उसक# नह/ं जगी। तो उसके पास से तुम भी खूब कूड़ा-करकट इकcठा करके लौट आओगे। जान लोगे बहत ु और जानोगे कुछ भी नह/ं। Dान खूब इकcठा हो जाएगा और भीतर का अDान जहां का तहां. और तो कुछ कर नह/ं सकता। वेदपाठW के पास जाओगे. वेद-शाU के Dाता थे. पंडत थे. भाषा िसखाएगा. बाद-!ववाद मG. गाता हो. शाUाथJ मG. जो तैरता ह/ न हो। Cजसने अब छोड़ दया हो अपने को परम !वौाम मG। परमाHमा जहां ले जाए. अनुमान मG. पोथी से। पोथी यानी थोथी। पोथी से जो िमले. तकr मG. दरया ऐसा न िमला--ऐसे गु क# तलाश थी। Page 58 of 256 http://www.dkuks lquh lks >wB lc भाट बनकर उड़े गी बादलO मG तो उड़ू ं गा। ले जाए जहां नद/। अब अपनी इsछा छोड़ता हंू । अब अपनी मजx छोड़ता हंू । यह/ तो राम के होने का अथJ है । तो Dान और Dान मG बड़ा भेद है । एक तो Dान िमलता है . उपिनषद वाणी से झरती थी। तोते थे लेकन। सब दोहरा रहे थे। अपना जाना कुछ भी न था। िनज क# संपदा जरा भी न थी। सब बासा. उसक# जो मजx। जो इसके ह/ इशारे पर जीता हो। जो बांस क# पOगर/ हो। परमाHमा जो गाए.oshoworld. जैसा का तैसा। दरया ऐसा न िमला राम नाम लवलीन तलाश थी कसी क# जो राम मG डू बा हो. उस पर भरोसा मत करना। और एक Dान िमलता है साहस करके. खोजते-खोजते थक गया। बहत ु लोग िमले. उCsछ_. कंठःथ थे वेद. Cजसने अपने अहं कार को छोड़ा हो. खंडन-मंडन मG.

क तुम थोड़े और अकड़ से भर जाओ. खूब ख0चातान चलती है दिनया मG। ु अब गीता पर हजार ट/काएं ह0 । कृ ंण का तो मतलब एक ह/ होगा। पागल तो नह/ं थे क हजार मतलब हO। लेकन खूब ख0चातान चलती है । Dानमागx िसT करता है क गीता का अथJ Dान। और भ!"मागx िसT करता है क गीता का अथJ भ!"। और कमJमागx िसT करता है क गीता का अथJ कमJ। शंकर से पूछो तो Dान। रामानुज से पूछो तो भ!"। ितलक से पूछो तो कमJ। कृ ंण से कसको लेना-दे ना है । खूब ख0चातान चलती है । कृ ंण ने Yया कहा है यह तो कृ ंण हए ु !बना नह/ं कहा जा सकता। कृ ंण ने जो कहा है वह तो कृ ंण होकर ह/ जाना जा सकता है । कृ ंणमय होकर ह/ कृ ंण क# वाणी का अथJ खुल सकता है .oshoworld. मेर/ Mपरे खा न बचे. ऐसे हं मतवर क#. ताक तुम ह/ तुम बचो.मुख झेले बाण लेकन खोज थी उसक#. dया…याओं से नह/ं खुलेगा। लेकन खूब ख0चतान चली है । दे खी होगी दरया ने। व"ा ौोता बहु िमले करते ख0चातान दरया ऐसा न िमला जो स. जो कहे क मुझे मारो ताक म0 जी सकूं। जो कहे मेर/ मृHयु बनो ताक तुम मेरे जीवन हो जाओ। जो कहे मुझे िमटा दो. ू क तु]हG थोड़े और आभूषण दे दं .मुख झेले बाण धािमJक तो वह/ सकता है जो मरने को तैयार है । इसीिलए तो म0 कहता हंू क मेरे पास आए तो सोच-समझकर आना। म0 मृHयु िसखाता हंू । यह पाठ मरने का पाठ है .हOने कनारे लगने क# कोिशश क# वे तो डू ब जाते ह0 । यहां जो डू बते ह0 वे कनारे लग जाते ह0 । Page 59 of 256 http://www. म0 यहां तु]हG सजाने के िलए नह/ं हंू । क तु]हG थोड़ा सजा दं . खूब !ववाद दे खा.dkuks lquh lks >wB lc व"ा ौोता बहु िमले-िमले बहत ु समझाने वाले. जो परमाHमा के बाण को Vदय खोलकर झेल ले ऐसे हं मतवर क#.यासी है । Cजसे एक बात समझ मG आ गई है क मेरे रहते तो दख ु रहे गा। म0 ह/ दख ु का मूल हंू । म0 हंू तो दख ु है म0 हंू तो नरक है । तो जो परमाHमा से एक ह/ ूाथJना करे क ूभु. ू क तुम थोड़े और पंडत और Dानी होकर लौट जाओ. म0 न रहंू । दरया ऐसा न िमला जो स. मुझे िमटाओ। अब बहत ु हो गया यह खेल। अब मुझे डु बाओ। YयOक यह कुछ मामला ऐसा है क यहां जो डू बते ह0 वह/ कनारे लगते ह0 । Cज.com . क तुम दिनया को समझाने लगो.मुख झेले बाण! Iयान मृHयु है । सूली अपने कंधे पर लेकर जो चले वह/ सं. ऐसे दलवाले क# क जो परमाHमा के बाण को Vदय खोलकर झेल ले.यासी है । जो अहं कार के जगत मG मरने को ूितपल तैयार रहे वह/ सं. यहां आए हो तो िमटने क# तैयार/ चाहए। जो स. िमले बहत ु सुनने वाले। करते ख0चातान। और उनके पास खूब तकJ दे खा. ू तु]हG थोड़ा सुंदर बना दं .यासी है । जो मौत का ःवागत करे वह/ सं. मुझे पOछ दो. क दिनया मG Hयागी और ु ु महाHमा बनने लगो। नह/ं.

लेकन वह तुम सब भूल जाओगे। जब कोई झूठ बोलेगा तब तुम एकदम भरोसा कर लोगे. अपनी Cजंदगी मG जांचना। YयOक जो म0 कह रहा हंू वह हर चीज Cजंदगी मG जांची जानी चाहए. वैसा का वैसा जैसा है --नंगा िनवJU Page 60 of 256 http://www. वह खंडत होती है । अYसर ऐसा होता है क जो तुमसे सच बोल दे ता है उसे तुम कभी माफ नह/ं कर पाते। तुम उससे बदला लेते हो.oshoworld. झूठ श6द बड़े oयारे लगते ह0 । सच बड़ा अखरता है । कोई तुमसे कह दे ता है आप बड़े सुंदर है । कैसे गुदगुद/ फैल जाती ूाणO मG। कैसे कमल Cखल जाते ह0 । कोई कह दे ता है .dkuks lquh lks >wB lc दरया ऐसा न िमला जो स.मुख झेले बाण दरया सांचा सूरमा सहे श6द क# चोट लागत ह/ भाजे भरम. लूट ले। अगर तुम अपने Vदय को बचाए-बचाए फर रहे हो तो हर से िमलन न होगा। यह तो सौभा5य है तु]हारा क वह तु]हारे Vदय क# तरफ आक!षJत हो जाए और तु]हG लूट ले। बुलाओ उसे और Vदय को ऐसी जगह रख दो क जहां उसे अड़चन न हो लूटने मG। खोलकर रख दो। दरया सांचा सूरमा सहे श6द क# चोट वह/ है सsचा हं मतवर. वह/ं ूमाण िमलGगे। तुम जांचना. जो सHय श6द क# चोट सह सके। बहत ु कठन है । झूठे श6द बड़े oयारे लगते ह0 । झूठे श6दO मG अहं कार को बड़/ तृिm िमलती है । तुम जांचता. िनकस जाए सब खोट और जो Vदय को खोलकर ूभु के बाण को लेने को तैयार है । ूभु तो िशकार/ है । तु]हG िशकार बनना होगा। इस दे श मG हमारे पास बड़े oयारे श6द ह0 । उन oयारे श6दO मG परमाHमा के नामO मG जो सबसे oयारा है . चोर। हर ले. वह है हर। हर का अथJ होता है जो तु]हारे Vदय को चुराकर ले जाए। हर का अथJ होता है . तुमसे अगर कोई सच कह दे . झपट ले.com . आप बड़े Dानी। आप क# कहां उपमा! आप तो बस आप ह/ हो अपनी उपमा। कसी और से तुलना आपक# हो ह/ नह/ं सकती। कैसे हमालय उठने लगते ह0 अहं कार के भीतर। यह आदमी कतना oयारा लगने लगता है । नह/ं तो खुशामत दिनया मG चलती YयO? और खुशामत इतनी कारगर YयO होती? झूठ ु oयारा लगता है इसिलए खुशामत कारगर होती है । झूठ खूब oयारा लगता है । और ऐसा भी नह/ं है क तु]हG पता नह/ं चलता क यह झूठ है । तुमने अपनी शकल आईने मG दे खी है । तु]हG पता है तुम कतने सुद ं र हो। तु]हG पता है तुम कतने Dानी हो। जीवन क# छोट/-मोट/ ु ु ु ु समःयाएं भी तो हल नह/ं होतीं। टsची -टsची बातG तो उलझा दे ती ह0 । टsची -टsची बातG तो रात क# नींद खराब कर दे ती ह0 । छोटे -छोटे हािन लाभ तो ऐसा डांवाडोल कर जाते ह0 । कैसा तु]हारा Dान है ? नह/ं. तब तुम एकदम मान लोगे। लेकन अगर काई सच कह दे तो चोट लगती है । YयOक सच का मतलब यह है क तुमने जो अपनी ूितमा बना रखी है अहं कार क#.

सदगु के पास तो बहत ु थोड़े लोग आ सकते ह0 -!वरले. भाग नह/ं गए. फर तुम भूलकर वहां ु नह/ं जाते। सच से आदमी बचता है YयOक सच तु]हार/ असली तःवीर को ूगट करता है । हम सब ने एक ूितमा बना रखी है अपनी अपने मन मG क हम ऐसे ह0 . िमटे गा। जो नह/ं बचाएगा अपने को. खंडत हो.हOने तु]हारे आसपास झूठ फैला रखा है । कबीर ने तो कहा है िनंदक नौरे राCखए आंगन कुट/ छवाए। वह जो तु]हार/ िनंदा करता हो उसको तो बुला ह/ लाना. जो अपने को बचायेगा वह िमट जाएगा। और जो अपने को िमटाने को तैयार है उसे फर कोई भी नह/ं िमटा सकता। जो बचाएगा. जो घर बारे आपना चले हमारे संग सब जलाने क# तैयार/ हो तो आ जाओ। कबीरा खड़ा बझार मG िलए लुकाठW हाथ लcठ िलए हाथ खड़े ह0 . हं मत रखी. तीर लग जाता है . वे पहंु च जाते ह0 । जीसस ने कहा है . छोट/-छोट/ [ुि बातO मG उलझकर भाग नह/ं गए. अगर श6द क# चोट सहने क# हं मत रखी. या कम से कम ऐसे होने चाहए. हमG oयारा लगता है । कनको तुम अपने िमऽ कहते हो? Cजनको तुम अपने िमऽ कहते हो अYसर वे ह/ लोग ह0 Cज.dkuks lquh lks >wB lc सHय कह दे . िगरे . सूरमा. आ जाए। खोपड़/ तुड़वानी हो तो कबीर के साथ चलो। मगर जो कबीर के साथ चलो। मगर जो कबीर के साथ चले ह0 वह/ पहंु चते ह0 । िमटते ह0 . दरया सांचा सूरमा सहे श6द क# चोट गु के पास तो वे ह/ लोग आ सकते ह0 . या कम से कम ऐसे होते। और जब भी कोई उस ूितमा को सहारा दे ता है . जो श6द क# चोट सहने को राजी हO। YयOक सदगु तुमसे कुछ ऐसा नह/ं कहे गा Cजससे तु]हारा अहं कार बढ़े । वह तु]हारा दँमन नह/ं है । वह तो जो भी कहे गा उससे ु ू . बचेगा। यह !वरोधाभास धमJ क# बड़/ आHयंितक रहःय क# बात है । लागत ह/ भाजे भरम िनकस जाए सब खोट गु को अगर मौका दया चोट करने का. उसी दन सारे ॅम िमट जाते ह0 --िनकस जाए सब खोट। Page 61 of 256 http://www. कबीर कहते ह0 . अपने घर मG ह/ ठहरा लेना क भैया. तू यहां ह/ रह। अब कहां जाएगा और? Cजतना बन सके उतनी िनंदा कर। सच तो है क शायद िनंदक से तु]हG जो लाभ िमल जाए वह ूशंसक से न िमले। लेकन कौन िनंदक को पसंद करता है ! तुम अपनी असली तःवीर तो दे खना ह/ नह/ं चाहते। तुम तो असली नकली तःवीर दे खना चाहते हो जैसा तुम सपनO मG सजाए बैठे हो। इसिलए कहते ह0 दरया. तो तुम उस आदमी के पास फर दबारा नह/ं फटकते. तो एक दन ऐसी घड़/ आती है क लागत ह/ भाजे भरत। Cजस दन चोट बैठ जाती है . भःमीभूत हो। वह तो तु]हG िमटाने चला है । वह तो तु]हारा अहं कार टटे तु]हG जलाने चला है । वह तो तु]हG िचता पर चढ़ाने चला है । कबीर ने कहा है .com .oshoworld. बाजार मG। अब Cजसक# हं मत हो. सहते गए.

उसके िलए भी कुछ दोगे या नह/ं? तो तुम कहते हो क होगा. खो गए। Cजस दन खो गए उस दन परमाHमा सामने खड़ा था। खोए नह/ं क परमाHमा हआ नह/ं। जब तक थे तब तक परमाHमा न मालूम कहां था। पता नह/ं चलता ु था. चलो ठWक है । हसाब-कताब ऊपर से तो बराबर हो गया लेकन िलए थे लेने चाहे थे. हजार पए दान कर दे ते ह0 । यह हजार पए दान करके तुम सोच रहे हो. हे रत हे रत हे सखी र•ा कबीर हराई। गए थे खोजने. तु]हारा मन भी कह रहा होगा. सब खोट ह/ खोट? कुछ तो ठWक होगा। मान िलया क कभी-कभी चोर/ भी करते ह0 . बुरा और भला साथ-साथ जीता ह/ नह/ं। Cजसको तुम सgजन कहते हो वह एक तरह का झूठ है . दरया साचा सूरमा सहे श6द क# चोट तुम भी सुन रहे हो मेर/ बात. लेकन दान भी तो दे ते ह0 । लेकन जो दान चोर/ से िनकलता है वह दान कैसे होगा? वह तो चोर क# ह/ तरक#ब है । लाख पए चुरा लेते ह0 . तुम नह/ं हो। तु]हारा तो परमाHमा से कभी िमलना नह/ं होगा। तु]हारा तो परमाHमा से िमलना हो ह/ नह/ं सकता। झूठ तो कैसे परमाHमा से िमले? इसिलए कबीर ने कहा है --बड़/ अदभुत बात--क जब तक म0 था तुम न थे. लाख लौटा दए. तय करनी. Cजसके भीतर ःव का होना न रहा--न भला. आदमी तो अंधेरा है । अंधेरे का रोशनी से िमलन कैसे होगा? खोट यानी तुम। यह मत सोचना क खोट िनकल जाएगी तो सब खराब चीजG िनकल जाएंगी और अsछा-अsछा बच जाएगा। अsछा तो तुम मG कुछ भी नह/ं है । यह बड़/ कठन बात है .com . भले को ऊपर झलकाता फरता है लेकन बुरा भीतर िछपा है । बुरे के !बना भला भी न हो सकेगा। मेरे पास एक दं पित िमलने आए। पित ने खूब दान कया है । प~ी उसके पित के संबध ं मG ूशंसा कर रह/ थी। यह/ तो हमारा धंधा है । पित-प~ी क# ूशंसा करता है . वह लाख क# जो चोर/ क# थी उसके पाप को धो डाला। दान का उपयोग तुम साबुन क# तरह कर रहे हो। वे जो दान लग गए थे तु]हार/ चादर पर. बेईमानी भी करते ह0 . प~ी पित क# Page 62 of 256 http://www. कुछ-कुछ हममG बुरा भी है . उनको धो डाला। लाख पए क# चोर/ थी.oshoworld. मान लेना बड़/ कठन है । इसिलए तो कहते ह0 दरया. कहां िछपा है । तो आदमी का कभी परमाHमा से िमलन नह/ं होता। आदमी तो झूठ है . हजार के दान से कैसे िमटे गी? सच तो यह है क लाख पए क# चोर/ लाख पए से gयादा दान होगा तो ह/ िमट सकती है । लाख के दान से भी नह/ं िमटे गी YयOक लाख का दान तो िसफJ जो िलया था वह वा!पस लौटाया। दं ड भी कुछ दोगे क नह/ं लेने के बाबत? लाख चुराए थे. अब तुम हो म0 नह/ं। यह भी खूब रह/। खोजने िनकला था.dkuks lquh lks >wB lc मगर खोट यानी तुम। तु]हारा तो कुछ भी नह/ं बचेगा। तुम तो खोट ह/ खोट हो। जब सार/ खोट िनकल जाएगी तो जो बचेगा वह परमाHमा है . न बुरा। Cजसक# सार/ खोट िनकल गई। सgजन का अथJ होता है बुरे-बुरे का िछपाए हए ु है . एक तरह का पाखंड है । संत का अथJ होता है . कुछ-कुछ भला भी है । नह/ं.

तीन एक मह/ने पहले !वDान भवन मG एक स]मेलन हआ ु Page 63 of 256 http://www. उस संबध ं मG कुछ कहG क लाख आए कहां से? लेकर आए थे जब पैदा हए ु थे? लाए तो नह/ं थे.हOने और महाHमाओं के ूमाणमऽ इकcठे कए हए ु थे क फलां महाHमा ने ऐसा कहा। वे इसके िलए आए भी थे। इतना ह/ ूयोजन था उनका क म0 दो श6द कह दं .dkuks lquh lks >wB lc ूशंसा करती है . म0ने इसिलए उनको बुला भी भेजा था क जरा दे ख तो लूं पहला तीथqकर अगली सृ!_ मG कौन होने जा रहा है ! वह एक लाख दस हजार दान कए ह0 . खूब सःते तीथqकर होना चाहते हो! म0ने उससे पूछा.. पु‡य रtतG ह0 । म0ने सुना.oshoworld. यह औरत कौन है । फर भी गले मG पड़/ बला उतारने के िलए उ. और इरादा रखते ह0 क अगले कwप मG पहले तीथqकर हOगे। मुझे िचcठW िलखी थी आने के पहले तो उसमG यह िलखा था क मेर/ सार/ योजना एक ह/ है . ोत कर रहा हंू . मगर इसके पीछे चोर/ कतनी क# है ? वे तो नाराज हो गए। वे तो फर दबारा नह/ं आए। YयOक वे आए थे मुझसे ु सुनने क म0 उनको एक ूमाणपऽ दं ू क आप महा दानवीर ह0 । वे मेरे पास लाए भी थे अपनी एक कताब. ू िलख दं ू उनक# कताब पर। वे सgजन जैन ह0 . आCखर जब एक दन उसने मोटर कार क# मांग क# तो मंऽी जी ने तंग आकर पूछ ह/ िलया क आप आCखर ह0 कौन? और मेरे साथ कहां और कब सोई थीं? महला ने उNर दया. फर दबारा नह/ं आए। सच क# चोट सहने क# हं मत ु नह/ं होती है । दरया साचा सूरमा सहे श6द क# चोट लागत ह/ भाजे भरम िनकस जाए सब खोट यह सब हमारे दान.. यह/ं कसी से छWने-झपटे हOगे। कतने छWने-झपटे थे? YयOक ऐसा मुझे नह/ं दखाई पड़ता. ऐसे सब पारःपरक लेन-दे न चलता। प~ी ूशंसा कर रह/ थी क मेरे पित बड़े धािमJक। आपको शायद पता भी न हो क उ.। उसके िलए म0 सब तरह के तप कर रहा हंू .com . दान कर रहा हंू . क तुमने Cजतने छWनेझपटे थे. लेकन Yया आप मेरे घर एक ृज िभजवा सकते ह0 ? मंऽी महोदय ने बहते ु रा सोचा लेकन उ. कुछ सmाह पहले म0 आपके पास सोई थी। म0 आपको 6लैकमेल नह/ं कर रह/ हंू .हOने लाख पयO का दान कया है । पित ने जwद/ उसको हाथ मारा क लाख. CजसमG उ. पूरे दे दए हOगे। नाराज ह0 . एक लाख या एक लाख दस हजार. क जब अगली सृ!_ होगी तो म0 पहला तीथqकर. चोर/ कतनी क# थी? ये लाख आए कहां से? यह कस अपराध के कारण दान करना पड़ा? वे तो बेचैन हो गए। वे तो आए थे ूमाणपऽ लेने। उनको तो पसीना आने लगा। म0ने कहा. कभी दो-जार हजार पए नगद क#. एक एक महला ने एक मंऽी को फोन कया और बोली..? एक लाख दस हजार! वह दस हजार चूक गई। म0ने पूछा.हG कुछ भी याद नह/ं आया.. यह तो ठWक.हOने उसे एक ृज िभजवा दया। व" के साथ महला क# मांगG बढ़ती चली गX। कभी वह क#मती हार क# फरमाइश करती.

dkuks lquh lks >wB lc था। आप और म0 साथ-साथ बैठे थे. तो रहःय खुल जाए। तुम एक बार अपने को ह/ आमने-सामने दे ख लो तो कुछ और बचता नह/ं जानने को। कसी शाU मG जाने क# जMरत नह/ं है । अपना आमना-सामना हो जाए तो तुम खोट ह/ पाओगे। और उस दशJन मG ह/ क खोट ह/ खोट है । तु]हारे जीवन मG अितबमण शुM होता है । तो फर खोट से बचने का सवाल नह/ं है क कुछ पु‡य कर लो. भयभीत हOगे तो पूछने क# हं मत नह/ं क क सोई कब थी. कमJ का िसTांत सह/ न हो। हो न हो. दे दो पैसे। ले लेने दो इसको। तु]हारे दान पु‡य बस ऐसे ह/ ह0 । इधर पाप कए चले जाते ह0 . कुछ Hयाग कर दो। खोट को आमूल जड़ से ह/ तोड़ दे ने का सवाल है । यह खोट कहां से उठती है . कहां सोई थी। अब जो कहती है . जब इतनी खोट दखाई पड़े गी? बोलूंगा कैसे. तपvयाJ सब पानी बन जाएंगे उसी अहं कार क# जड़ को और उसे मजबूत करG गे। अहं कार को ह/ काट दे ना है । सबह कटक शूरा नह/ं कटक मांह/ कोई शूर दरया पड़े पतंग gयO जब बाजे रणतूर Page 64 of 256 http://www. तुम तो खोट ह/ खोट हो। अगर गौर से दे खोगे तो खोट ह/ खोट पाओगे। इसीिलए तो आदमी भीतर नह/ं दे खता। डरता है क इतनी खोट दखाई पड़े गी तो फर जीऊंगा कैसे? फर चलूग ं ा कैसे एक कदम. यह तु]हार/ Cजंदगी से पैदा हए ु अपराध भाव के िलए कसी तरह अपने को समझाने क# सांHवना है । इसिलए तुमसे म0 कहना चाहता हंू . नकJ ःवगJ हो। तो कुछ इं तजाम कर लो. और तु]हारा Hयाग और तु]हारा धमJ और तु]हार/ ूाथJना और तु]हार/ पूजा। यह तु]हार/ Cजंदगी नह/ं है .oshoworld. उठू ं गा कैसे.com . उधर थोड़ा. ठWक ह/ कहती होगी। झंझट छुड़ाओ. उस जड़ को ह/ काट दे ना है । नह/ं तो पNे काटते रहते ह0 हम। एक पNा दाना कर दया। मगर एक पNा कटा क चार पNे िनकल आते ह0 । वृ[ समझता है . थोड़ा हािशए मG उसके िलए भी कुछ करते जाओ। Cजंदगी क# पूर/ कताब पर तो जो िलखना है सो िलखो मगर हािशया मG थोड़ा आगे-पीछे का भी हसाब करते जाओ। हािशया है तु]हारा पु‡य. और Hयाग से भी मजबूत होगा. कुछ dयवःथा कर लो। उसक# भी फब रख लो. tास कैसे लूंगा जब इतनी खोट दखाई पड़े गी? इसिलए आदमी भीतर नह/ं दे खता। आदमी अपने से बचता रहता है । अपने आमने-सामने नह/ं आता। तुम अपने ह/ आमने-सामने आ जाओ तो राज खुल जाए. पु‡य कए चले जाते ह0 । तुम कसे धोखा दे रहे हो? भय के कारण है क हो न हो. और पु‡य से भी अहं कार ह/ मरे गा। यह सब पु‡य Hयाग. कलम कर रहे हो। और पNे घने हो जाते ह0 । जड़ काटनी होती है । जड़ यानी अहं कार। दान पु‡य से कुछ भी न होगा। Hयाग तपvयाJ से कुछ भी न होगा। अगर अहं कार भीतर मौजूद है तो तपvयाJ से भी अहं कार मजबूत होगा. एक िनहायत बोर भाषण के दौरान आप भी बैठे-बैठे सो गए थे और म0 भी सो गई थी। लेकन अब मंऽी महोदय तो मंऽी महोदय ह0 । डरे हOगे. और Hयाग से भी मजबूत होगा. और पु‡य से भी अहं कार मजबूत होगा. कह/ं परमाHमा हो ह/ न! कह/ं हो न हो.

oshoworld.हOने उसे बड़े भाले छaके. और उसने कहा क यह Yया कर रहे हो? उसे मार डालोगे? हटो। और उसने कहा क ब0ड लाया. और बड़े युT उसने जीते थे। और राजा को उसने अनेक-अनेक कठनाइयO मG युT के मैदान पर बनाया था। राजा पर उसक# बड़/ बड़/ सेवाएं थीं। तो उसक# बड़/ ूित`ा थी नगर मG। वह एक दन गया था तालाब पर पानी पीने और क#चड़ मG फंस गया--बूढ़ा हो गया था. और क#चड़ मG िगर गया। िनकलने का कोई उपाय न दखाई पड़े । फर तो ःवयं राजा गया। उस बूढ़े हाथी के आंखO से आंसू बह रहे ह0 । वह बूढ़ा हाथी अपनी दयनीयता पर पीड़त हो रहा होगा। बड़े युTO मG लड़ा था. शू. वह बूढ़ा हो गया था। सार/ राजधानी उस हाथी को ूेम करती थी। उसमG बड़े गुण थे. युT का नगाड़ा बजाओ। और कनारे पर रखकर उसने युT का नगाड़ा बजवाया। युT का नगाड़ा बजना था क हाथी एक छलांग मG बाहर आ गया। एक [ण क# दे र न लगी। सूरमा था। उस [ण मG भूल गया जब नगाड़ा बजा. बुT एक गांव मG ठहरे थे। उस गांव का बड़ा ूिसT हाथी था राजा का.य हो जाने क#। कसको कहते ह0 दरया सूरमा? दरया पड़े पतंग gयO जब बाजे रणतूर जैसे दया जले और पतंग दौड़कर आग मG उतर जाए. िशिथल-गाऽ. उसे बड़ा सताया. उ. !वसCजJत होने क#. मरणास. क म0 बूढ़ा हंू . उसे कुछ राज पता हो। वह बूढ़ा आया। राजधानी इकcठW हो गई थी। बुT के िशंय भी इकcठे हो गए वहां। पास ह/ बुT ठहरे थे। वह महावत आया. हं सा. इनक# चोट और मार पीट मG और िशिथल हो गया. क जब रणभेर/ बजे तो भय न उठे और शूरवीर शुT मG पहंु च जाए। ऐसा हआ ु . िनकालने क# कोिशश क# लेकन बूढ़ा तो वैसे ह/ बूढ़ा था. इसके पुराने महावत को बुलाओ। ु ु दखी उस बूढ़े को खोजो कहां है । शायद वह कुछ जानता हो। वह इसके साथ Cजंदगी भर रहा है . घबड़ाकर बैठ गया क#चड़ मG। राज महल खबर पहंु ची। उस हाथी का जो बूढ़ा महावत था वह तो कभी का अवकाश-ूाm हो गया था। नए महावत भेजे गए. पहाड़O से जूझ जाता था. भूल गया क कमजोर हंू .com .न हो गया.dkuks lquh lks >wB lc फौज मG सभी सैिनक बहादरु नह/ं होते। सभी कटक शूरा नह/ं कटक मांह/ कोई शूर बड़/-बड़/ फaजO मG कभी एकाध कोई सूरमा होता है । कसको कहते हो सूरमा? कसको कहते बहादरु? हजारO लाखO क# भी भीड़ मG कभी कोई एकाध आदमी धािमJक होता है । करोड़O मG कभी कोई एकाध आदमी इतनी हं मत करता है िमटने क#. िनकल न सके। Cजतनी चे_ा करे िनकलने क# क#चड़ से उतना फंसता जाए। अब हाथी बजनी. बड़ा बु!Tमान था। और उसक# बड़/ जीवन क# यशोगाथाएं थीं। बड़े युT उसने लड़े थे. आज यह दशा हो गई। इस छोट/ सी क#चड़ से नह/ं िनकल पा रहा है ? उसक# आंख से आंसू बह रहे ह0 । राजा भी बहत हो गया। फर उसे याद आई. फर जवान हो गया। Page 65 of 256 http://www.

दौड़ दे ख पतंग दरया आपा भेटकर िमले अिगन के रं ग सुनना। खूब Vदयपूवक J सुनना। भया उजाला गैब का--जब भी कोई dय!" कह/ं शू. े वे चुनौती को ःवीकार कर लGगे। सबह कटक शूरा नह/ं कटक मांह/ कोई सूर दरया पड़े पतंग gयO जब बाजे रणतूर जब युT क# भेर/ बजे तो सूरमा ऐसे उतर जाता है जलते हए ु द/ए क gयोित मG। फर फब भी नह/ं करता क बचूंगा. ऐसे dय!"यO के िलए तो मोह]मद. िमटंू गा। सोच-!वचार नह/ं करता। सं. गैब का चमHकार होता है । गत मG बड़े से बड़ा चमHकार एक ह/ है : तुम िमट जाओ ताक परमाHमा तुम से ूगट हो सके। तुम हट जाओ ताक परमाHमा तुम से बह सके। तुम मागJ मG मत खड़े रहो। तुम दरवाजा खोल दो। तुम Rार हो। तुम मागJ के पHथर न बनो ताक झरना बह सके। भया उजाला गैब का. जो वःतुतः जी!वत ह0 . और जब भी कभी ऐसी कोई घटना घटती है --कोई बुT हो गया. शू..यासी। Page 66 of 256 http://www.य का. द/प-िशखा बन जाती है । दौड़े दे ख पतंग. जब भी कोई dय!" िनरहं कार को उपल6ध हो जाता है .. जो मुदp नह/ं ह0 . CजनमG थोड़/ सी भी [मता है साहस क# वे िनकल आएंग.dkuks lquh lks >wB lc हम उतने ह/ जवान होते ह0 Cजतनी हमार/ ह]मत होती है । हम उतने ह/ युवा होते ह0 Cजतनी हमार/ ह]मत होती है । ह]मत से आदमी बूढ़ा होता है . कसी शू.य का चमHकार घटता है . भ". CजनमG ह]मत है वे दौड़ने लगते ह0 उस शू.य हो जाता है . जहां कह/ं यह चमHकार घटा है शू..य हो जाता है वह/ं परमाHमा का रहःय ूगट होता है .oshoworld.. युवा होता है । उसके साहस पर चोट लगी। यह तो उसने कभी सहा ह/ नह/ं था। युT के बाजे बज जाएं और वह का रह जाएं! वह मर भी गया होता तो शायद िनकल आता क#चड़ से। बुT के िशंयO ने आकर बुT को कहा. भगवान एक अपूवJ चमHकार दे खा। बुT ने कहा.यास ऐसी ह/ ूबया है -सोच-!वचार क# नह/ं--जैसे पतंग उतर जाए जलती हई ु gयोितिशखा मG। दरया पड़े पतंग gयO जब बाजे रणतूर भया उजाला गैब का. कोई कृ ंण हो गया.फर तो सार/ दिनया के कोने-कोने ु से. कृ ंण क# बुT मौजूदगी gयोितिशखा बन जाती है .य क# तरफ। भया उजाला गैब का दौड़े दे ख पतंग इ. कोई बाइःट हो गया. Cजनके भीतर थोड़ा साहस है .य मG उतर गए dय!" से बहा है --दौड़े दे ख पतंग.com . कोई मोह]मद हो गया. जहां कह/ं परमाHमा ूगट हआ है .. जब भी कह/ं कोई dय!" क# तरह िमट जाता है . सं. साधक. शू.तो ु Cजनके भीतर भी थोड़/ ह]मत है .. जो सूरमा ह0 । यह/ तो म0 भी कर रहा हंू नासमझO! तुम क#चड़ मG फंसे हो और म0 रणभेर/ बजा रहा हंू । तुममG से जो ह]मतवर ह0 . अपूवJ कुछ भी नह/ं है । तुममG भी मेर/ पुकार सुनकर वे ह/ िनकल पाएंगे.ह/ं पतंगO का नाम ूेमी.

उसके साथ एक रं ग हो जाते ह0 । इस दे श मG सं. हं सते हए ु .यासी का वU गैरक इसीिलए चुना गया. अपनी अNा को.. वह अC5न कर रं ग है । वह ूतीक है । वह आग क# लपट है । दरया आपा भेटकर िमले अिगन के रं ग और जब तक यह घटना न घटे तब तक तुम हो न हो. म0 हंू इस भाव को डु बा दे ते ह0 । उस शू. अपने अहं कार को..dkuks lquh lks >wB lc दरया आपा भेटकर िमले अिगन के रं गे और अपने को िमटा दे ते ह0 । अपने आपे को. तब तक बस िसफJ बाहर से सजावट क# गई है । मुःकुराहट वनाJ र/ती गागर/ है । ऊपर-ऊपर लीपेपोते मुःकुराहट को. बराबर हो। तु]हारा होना न होने जैसा है । Cजंदगी मजबूरयO क# सहचर/ है एक चादर है जो पैबद ं O भर/ है हम जतन से रख सकG इनको असंभव gयO क# HयO केवल कबीरा ने धर/ है एक [ण का ःवगJ हो शायद कह/ं पर उॆ का अिधकांश लंबी भुखमर/ है गीत मत खोजो इबारत दे खकर ह/ यह हमारे आप dयय क# डायर/ है िसफJ बाहर से सजावट क# गई है । मुःकुराहट वनाJ र/ती गागर/ है रात िचंताओं क# गूंगी नौकरानी और दन बस dयथJता क# चाकर/ है जब तक Cजंदगी उस अC5न के रं ग मG एक न हो जाए. वह जो अिगन ूगट हए ु है .? भीतर िसफJ अंधेरा है । भीतर िसफJ उदासी है .com .oshoworld. !वषाद है । बेकसO क# रात होगी मु"सर सुनते तो ह0 एक समा है हवस का यह YयO िनजामG दहर मG कोई दलवाला छुड़ाए उनको दःते जबर से हो गया सूरज का अगपा रात के एक सहर मG कह/ं ऐसा नहो आवाज कफन को तरसे ऊंची द/वारO से टकरा कर सदा खो जाए Page 67 of 256 http://www. जब तक Cजंदगी लपट न बने.य के साथ एक हो जाते ह0 । दरया आपा भेटकर िमले अिगन के रं ग और वह जो सदगु है . तुम गुजार दे ते Cजंदगी क# इस लंबी याऽा को। भीतर खाली के खाली। भीतर र" के र"। भीतर ना-कुछ। ऊपर से झंडे उठा लेते हो। बड़े डं डO मG झंडे लगा लेते हो। झंडा ऊंचा रहे हमारा. िचwलाते फरते हो। मगर भीतर.

मO-ज. तु]हारे भीतर अद]य साहस पड़ा है । तुम अC5न क# एक लपट हो। जगो उठो। तु]हारे भीतर परम चैत.oshoworld.य !वराजमान है । ह]मत करो। तुम ह]मत करोगे तो ह/ ू गा.com .dkuks lquh lks >wB lc मसलहर ज6त क# जंजीर िलए बैठW है जबर इतन न करो क दल पर बेहश हो जाए मुझे एहसास अपनी बेबसी का लेकर डू बेगा कह/ं सूराख एक दे खा है अब अपने सफ#ने मG कसी ने Cजंदगी मG खौफ वे बीज बो डाले है वे Cजनसे जहर के पौधे उगGगे मेरे सीने मG हमार/ Cजंदगी क# नाव मG एकाध छे द हो ऐसा भी नह/ं है . YयOक सुराख अकेले नह/ं होते. उनके भी समुदाय होते ह0 । और जो आदमी गौर से दे खेगा. तो फर कना मत. छे द ह/ छे द ह0 । हमार/ यह Cजंदगी क# नाव छे दO से जुड़कर बनी है । मुझे एकसास अपनी बेबसी का लेकर डू बेगा कह/ं सुराख एक दे खा है अब अपने सफ#ने मG हम दे खते नह/ं सुराख अपनी नाव मG। कभी एकाध दखता भी है तो जwद/ से हम उसे ढांक दे ते ह0 . क छोटा होगा। जैसे क सुराख न दे खा जाएगा तो सुराख भर जाएगा। Cजंदगी मG सुराख हो तो दे खना. और तु]हारे भीतर जो वृ[ िछपा है वह ूगट होगा। तु]हारे भीतर जो बीज है वह टटे भया उजाला गैब का दौड़े दे ख पतंग और कह/ं अगर तु]हG गैब का उजाला दखाई पड़े . दे खेगा यह पूर/ नाव ह/ सुराखO से भर/ है । इस नाव मG कभी कसी ने कोई भवसागर क# याऽा नह/ं क# है डू बा है िसफJ। इसिलए जो अपनी नाव को पूरा सूराखO से भरा दे ख लेता है .मO मG बार-बार िसफJ ौेय के बीज ह/ तु]हारे भीतर डाले गए ह0 । धमJगु तु]हG भयभीत करता है . गौर से दे खना और खोजना. कह/ं तु]हG मालूम पड़े क कोई dय!" िमट गया है और उसक# जगह परमाHमा बहना शुM हआ है ... वह नाव से कूद जाता है । इस कूदने का नाम सं.दौड़े दे ख पतंग। Page 68 of 256 http://www. और ज.यास है । वह तैरने पर भरोसा करता है । वह कहता है अपने से ह/ उतर जाएंगे हम. कह/ं अगर तु]हG शू. िसफJ डराता है । और भय से िसफJ जहर पैदा होता है । वाःत!वक सदगु तु]हG डराता नह/ं. कोई और न दे ख ले। जैसे क सुराख दे खने से कुछ बड़ा होगा. तु]हG जगाता है और तुमसे कहता है . फर हसाब-कताब मत लगाना। ु . यह नाव तो डू बने ह/ वाली है । नाव मG रहे तो हम भी डू बGगे। मुझे एहसास अपनी बेबसी का लेकर डू बेगा कह/ं सुराख एक दे खा है अब अपने सफ#ने मG कसी ने Cजंदगी मG खौफ के वे बीज डाले ह0 वे Cजनसे जहर के पौधे उगGगे मेरे सीने मG और Cजंदगी भर--बचपन से लेकर अब तक.य मG पूणJ दखाई पड़े .

. जैसा पतंगे का होता है gयोितिशखा से. अब आप और आ जाएं तो एक और झंझट। आप कृ पा करG । लाटर/ दलवाएं.com .oshoworld. वैसे ह/ दYकत मG हंू . ूेम। भयभीत आदमी ूेम नह/ं कर सकता। लोभी भी ूेम नह/ं कर सकता। लोभी क# नजर कसी और बात पर अटक# होती है . इस बार चूक न हो जाए। इतनी इतनी ूाथJना कर रहा हंू .dkuks lquh lks >wB lc तब तुम पतंगे हो जाना। तुम पतंग जैसे द/वाने हो जाना. बोध. रामनाम धन पाया ऐसे ूेम से ह/. परमाHमा को नह/ं मांगता। परमाHमा क# कसको पड़/ है ? परमाHमा का Yया करोगे? परमाHमा तो अगर यह भी कहे क चलो तू इतना मांगता है तो म0 आए जाता हंू तेरे पास। तो तुम कहोगे महाराज. यह सच है --तुम जो क झूठ हो। और तु]हारे भीतर जो सHय है वह तो जल नह/ं सकता। जब आग मG हम सोने को फGकते ह0 तो कचरा ह/ चलता है . दरया ूेमी आHमा-िसफJ ूेमी आHमाओं ने राम-नाम का धन पाया है । न भय. ताक तुम इस मौके से चुक न जाओ। यह Rार तु]हारे िलए Rार बन जाए। दरया आपा भGटकर िमले अC5न के रं ग अपने अहं कार को छोड़कर अC5न के रं ग मG डू ब जाना. भय जल जाएगा. लोभ जल जाएगा. अहं कार जल जाएगा। दरया ूेमी आHमा रामनाम धन पाया िनधJन था धनवंत हआ भूला घर आया ु दरया ूेमी आHमा.आप बड़े -बड़े महाHमाओं के पास जाएं। म0 तो छोटा-मोटा आदमी हंू । Page 69 of 256 http://www. ऐसे पागल ूेम से ह/ राम-नाम का धन िमलता है । ऐसे पागल ूेमी पर ह/ धन क# वषाJ होती है । छoपर तोड़कर धन बरसता है । राम नाम धन पाया. न लोभ. शुT होकर िनकल आता है । तो तु]हारे भीतर जो खोट है वह जल जाएगी। अहं कार जल जाएगा.. काम. खयाल रखना। इतना िसर फोड़ रहा हंू तु]हारे Rार पर दरवाजे पर। इतनी नाक घसीट रहा हंू . एक हो जाना। तो खोट ह/ जलेगी-याद रखना। तुम जलोगे. ूेम पर तो होती नह/ं। अगर लोभी जाकर भगवान से ूाथJना भी करता है तो वह कहता है क दे खो इस बार लाटर/ का नंबर दलवा। दे खो. इसका सब हसाब रखना। अब तो दया करो। लोभी परमाHमा के सामने खड़े होकर भी कुछ और मांगता है . सोना बच जाता है । सोना िनखर कर बचता है . ऐसे पागल ूेम से. मHसर जल जाएगा। तु]हारे भीतर शुT सोना बचेगा। उस शुT सोने का नाम ह/ परमाHमा है । आHमा बचेगी. इतना ह/ काफ# है । आप क_ न करG आने का। आप को लेकर और Yया करG ग? े बाल-बsचे ह/ तो पल नह/ं रहे ह0 । और सफेद हाथी घर के सामने बांधकर Yया करना है ? आप कृ पा करG । मुझ गर/ब से आपक# सेवा न हो सकेगी। मुझे तो िसफJ लाटर/ दलवा दG । म0 तो छोटे ह/ से राजी हंू । इतना बड़ा तो. कुंदन होकर बचता है .

फर भी कहां तृिm. उसी मG हमG जाना है । हम उसी क# तरं ग ह0 । हमG उसी मG लीन हो जाना है । हम उससे अपने को पृथक समझG तो हम दरि रहG गे। हम उसमG अपने को डु बा दG तो सागर का सारा धन हमारा धन है । बूंद डरती है सागर मG उतरने से क कह/ं खो न जाऊं! खो तो जाएगी सच। डर भी ठWक है । लेकन खोने से ह/ तो सागर बनेगी इसिलए डर ठWक भी नह/ं है । िमटने से ह/ तो कोई पाता है । िनधJन था धनव. न ूयोजन। वह कहता ह0 . भीतर क# िनधJनता जरा भी उससे नह/ं बदलती। भीतर क# िनधJनता तो तभी जाती है जब असली धन िमलता. ु और परमाHमा के िमलन मG ह/ भूला घर लौटता है । नह/ं तो भटके ह/ हए ु ह0 । लाख करो और सब कुछ उपाय. ु न ःवगJ का उसे आयोजन है . न नकJ का भय है मुझे। भ"O ने तो कहा है हमG मो[ भी नह/ं चाहए। Yया करG गे मो[ का? बस तु]हारे चरण िमल जाए तु]हारे चरणO मG लग जाए िचN. तुमसे लग जाए लगाव। बस तु]हार/ चाहत एक माऽ चाहत हो जाए. सब हो गया। वह कहता है न ःवगJ चाहए. बड़/ ूित`ा और भीतर? भीतर वैसे के वैसे दरि और िभखमंगे। धन बाहर पड़ा रहता है .dkuks lquh lks >wB lc परमाHमा तो कोई मांगता भी नह/ं. कहां संतोष! नह/ं. जहां भटकन िमटती है । YयO भूला घर आया? YयOक परमाHमा हमारा वाःत!वक घर है वह हमारा ःवMप है । उसी से हम आए ह0 . न भय है । न तो वह नकJ से डरा हआ है . सब हो जाता है --बड़े महल बड़ा धन.com . परम धन िमलता। उसका नाम ह/ परमाHमा है । िनधJन था धनवंत हआ भूला घर आया. पूछ ं मत हलाओ। सूर न जाने कायर/ सूरातन से हे त Page 70 of 256 http://www. भटकन ह/ बढ़ती रहे गी। िसफJ एक ह/ है . कमजोरयO से नह/ं। दरया बड़े पते क# बात कह रहे ह0 । सूर न जाने कायर/ सूरातन से हे त पुजाJ-पुजाJ हो पड़े तऊ छांड़े खेत ह]मत जगाओ। ह]मत का नाम धमJ है । साहस को जगाओ। साहस का नाम धमJ है । नकJ से डरकर कायर क# तरह मत कंपते रहो। और ःवगJ के लोभ से लोभी होकर िगड़िगड़ाओ मत. लोभी मांग भी नह/ं सकता। कुछ और मांगता है । ूेमी ह/ परमाHमा को मांगता है । उसका न कोई लोभ.त हआ भूला घर आया ु सूर न जाने कायर/ सूरातन से हे त साहस से जोड़ो अपनी गांठ. वह परमाHमा है । उसको छोड़कर हम और सब खोजते ह0 । इसिलए हम दरि ह/ बने रहते ह0 । इसिलए सब धन भी इकcठा हो जाता है .oshoworld. बड़/ ितजोड़/. बस इतना काफ# है । तु]हारे दशJन हो जाएं। िमले तो सब िमला। दरया ूेमी आHमा रामनाम धन पाया िनधJन था धनवंत हआ भूला घर आया ु एक ह/ धन है इस जगत मG.

dkuks lquh lks >wB lc
उसका तो साहस से और अिभयान से ह/ लगाव है । उसक# गांठ, उसका तो !ववाह अिभयान
से हआ
है । नए अिभयान पर जाना है । रोज नए अिभयान पर जाना है । रोज नए क# तलाश

करनी है । रोज अDात पर चरण रखना है । रोज नए िशखर छूने ह0 ऊंचाइयO के, गहराइयO
के, नई तलाशG करनी ह0 ।
सूरातन से हे त--साहस से ह/ Cजसका लगाव है , वह/ धािमJक हो पाता है ।
पुजाJ-पुजाJ हो पड़े तऊ न छांड़े खेत
सब िमट जाए तो भी वह मैदान नह/ं छोड़ता, हŽड/-हŽड/ िगर जाए, पुजाJ पुजाJ हो पड़े ,


टकड़ा
-टकड़ा
होकर िगर जाए, तो भी वह खेत नह/ं छोड़ता। भागता नह/ं। मैदान से हटता
नह/ं।
और यह परम घटना तभी घटती है जब सब पुजाJ हो-होकर िगर जाता है । जब तु]हारे पास
कुछ भी नह/ं बचता, सब िगर जाता है , तब अचानक तुम पाते हो क वह/ रहा है जो
तुमसे िगर नह/ं सकता; जो तु]हारा परम धन है ; Cजससे तुम अलग नह/ं हो सकते। सब
कटकर िगर जाता है तब तो शेष रह जाता है वह/ परमाHमा है ।
दरया सो सूरा नह/ं Cजन दे ह कर/ चकचूर
मन को जीत खड़ा रहे म0 बिलहार/ सूर
और दरया कहते ह0 उसक# हम बात नह/ं कर रहे ह0 --गलती मत समझ लेना।
दरया सो सूरा नह/ं Cजन दे ह कर/ चकचूर
यह कोई शर/र क# बहादर/
ु क# बातG नह/ं हो रह/ ह0 । तो दरया कहते ह0 भूल मत कर लेना,
हम यह नह/ं कह रहे ह0 क तुम जाकर युT के मैदान पर लड़ो, और तु]हारा शर/र कट-कट
के िगर जाए, तो तुम कुछ बहादरु हो गए। यह कोई बड़/ बात हई
ु नह/ं। यह तो फर
अहं कार मG, अहं कार क# ह/ सेवा है ।
दरया सो सूरा नह/ं Cजन दे ह कर/ चकचूर
मन को जीत खड़ा रहे म0 बिलहार/ सूर तो भीतर के शुT क#, भीतर के संमाम क# बात हो
रह/ है । मन को जीत खड़ा रहे --न तो लोभ मन को डगाएं, न भय मन को डगाएं। कोई
मन को न डगाएं। तूफान उठे क आंिधयां, मन अडग और अकंप, िनंकंप बना रहे । जैसे
िनवाJत घर मG जहां हवा को झOका न आता हो, द/ए क# लौ अकंप हो जाती, ऐसा तूफानO
के बीच मG भी जो अकंप बना रहे ; हारे तो रोए नह/ं; जीते तो हं से नह/ं; सफलता िमले तो
गवJ न उठे ; पराजय हो जाए तो द/नता न पकड़े ; न दन फकJ करे , न रात, सुख हो क
दख
ु , सब मG समभाव बना रहे ।
मन को जीता खड़ा रहे म0 बिलहार/ सूर
म0 उस सूरमा क# बात कर रहा हंू , दरया कहते ह0 । उस पर म0 बिलहार/ हंू ।
यह धमJ के राःते पर जो पहला गुण है , साहस है । धमJ के राःते पर न तो उपवास से कुछ
होता है , न ोत से कुछ होता है , न पूजा-पाठ से कुछ होता है । जो पहला गुण चाहए वह
साहस है । और Cजसके पास साहस है उसके पास सब गुण अपने आप आ जाते ह0 । साहस

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सभी गुणO का ज;मदाता है । और Cजसके पास साहस नह/ं है , भयभीत है जो, उसके भीतर
सब दगु
J आ जाते ह0 । भय दगु
J का ॐोत है । तुमने दे खा नह/ं? जब तुम झूठ बोलते हो,
ु ण
ु ण
तो झूठ YयO बोलते हो? भय के कारण। तुमने दे खा नह/ं? जब तुम चोर/ कर लेते हो तो
चोर/ YयO कर लेते हो? भय के कारण। भयभीत हो क पैसा पास मG नह/ं है , कैसे जीऊंगा?
और हजार पए पड़े दखाई पड़ गए, उठा लेते हो। झूठ बोल दे ते हो YयOक डरते हो, क
अगर सच बोला, पकड़ा गया, बेइgजती होगी। तो झूठ बोल दे ते हो।
खयाल करना तु]हारे जीवन के, सारे दगु
J O क# जड़ तुम भय मG पाओगे, या लोभ मG
ु ण
पाओगे। वे एक ह/ िसYके के दो पहलू ह0 ।
आज के सूऽO का सार इतना ह/ है क अगर लोभ और भय छूट जाए तो तु]हारे जीवन मG
परमाHमा को आने का Rार खुल जाता है । भय लोभ छोड़ो।
पंडत 5यानी बहु िमले वेद 5यान परवीन
दरया ऐसा न िमला राम नाम लवलीन
यह भय और लोभ छूट जाए तो तुम रामनाम मG लवलीन हो सकते हो। दरया ने बहत

खोजा--िमला, एक dय!" िमला, Cजसके चरणO मG बैठकर बांित घट/; Cजसके चरणO मG
बैठकर आकाश मG उड़ान हई
लेकन उसके
ु ; Cजसके चरणO मG बैठकर अनंत क# याऽा हई।

पहले बहत
ु लोगO के पास गए। तरहNरह के लोग िमले, उनक# बड़/ कुशलताएं थीं, उनके
बड़े गुण थे, लेकन असली बात नह/ं थी। भीतर का द/या बुझा था।
सदगु को खोजो। और जहां कह/ं तु]हG कसी dय!" के भीतर का द/या जलता हआ 
दखाई

पड़ जाए तो फर लाज-संकोच न करना; फर भय !वचार मG न पड़ना। फर तो पागल पतंग
क# भांित...। फर तो अद]य साहस करके उतर जाना उस अC5न मG; अC5नमय हो जाना।
यह/ सं;यास क# परभाषा है ।
और एक बार ऐसी घटना घट जाए, तो मौत से िमलती है परम जीवन क# कुंजी, हाथ
आती है । िमटने से होने का राज हाथ आता।
हमG अनुवाद करना आंसओ
ु ं का आ गया अब तो
कभी कुछ गीत ढल जाते कभी ढलती गजल कोई 
फर तो जीवन मG दख
ु रहता ह/ नह/ं। आंसू भी कभी कुछ गीत ढल जाते ह0 । कभी ढलती
गजल कोई। आंसू भी ढल-ढल कर गीत बन जाते ह0 , गजल बन जाती है । अभी तो
मुःकुराहट भी झूठW है , अभी तो मुःकुराहट से भी गीत नह/ं बनते और गजल नह/ं बनती,
अभी तो मुःकुराहट भी धुंआ-धुंआ है । फर आंसू भी, फर मृHयु भी परम जीवन क# तरफ
ले जाती है । फर तो िमटना भी होने के मागJ पर सीढ़यां बना दे ता है ।
भया उजाला गैब का दौड़े दे ख पतंग
दरया आपा मGटकर िमले अC5न के रं ग
दरया ूेमी आHमा रामनाम धन पाया
िनधJन था धनवंत हआ
भूला घर आया

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भूले हो अभी, घर आओ। िनधJन हो अभी, धनवान बनो। बाहर मत खोजो इस धन को।
इस धन का खजाना तु]हारे भीतर पड़ा है ।
म0ने सुना है , एक राजधानी मG एक िभखमंगा मरा। वह तीस साल तक एक ह/ जगह भीख
मांगता रहा। जब मर गया तो गांव के लोगO ने उसे जलाया। और फर गांव के लोगO ने
सोचा, तीस साल यह इसी जगह बैठा रहा चौरःते पर, यह जगह भी गंद/ हो गई है । गंदे
कपड़े , ठWकरे , बतJन-भांडे, सब वह/ं रखे बैठा रहा। िभखार/ तो िभखार/। तो उ;हOने कहा,
इसक# थोड़/ िमcट/ भी यहां से िनकालकर फGक दो। यह िमcट/ भी गंद/ कर डाली।
तो उ;हOने िमcट/ िनकाली। िमcट/ िनकाली तो चकत रह गए। वहां एक बड़ा खजाना गड़ा
था; बड़े हं डे गड़े थे। अशफJयां िनकलीं। सारे गांव मG एक ह/ चचाJ हो गई क यह भी खूब
रह/। यह िभखमंगा उसी जगह बैठा Cजंदगी भर भीख मांगता रहा, जहां इतना खजाना गड़ा
था।
और Iयान रखना, वह जो गांव मG Cजन लोगO ने चचाJ क# और इस िभखमंगे के दभाJ
ु 5य पर
रोए, उनमG से कसी ने यह न सोचा क जहां से खड़े ह0 , जहां वे ह0 , वहां भी बड़े खजाने
गड़े ह0 । उससे भी बड़े खजाने गड़े हज। अनंत खजाने गड़े ह0 ।
हम सब उस भूिम पर खड़े ह0 जहां अनंत खजाना गड़ा है । लेकन आंख बाहर भटकती है और
भीतर नह/ं आती, और खजाना भीतर है । पद भीतर, धन भीतर, ूित`ा भीतर और तुम
भटकते बाहर, इसिलए चूक हो जाती है । खूब भूले, खूब भटके, अब घर आओ।
आज इतना ह/।

सुख-दख
ु से कोई परे परम पद
ूवचन: ४ 
दनांक: १४.७. १९७७
ौी रजनीश आौम, पूना

ूƒ सार
Yया भ!" मागJ पर भी साहस क# जMरत होती है ?
Yया संूदाय से धमJ मG ूवेश नह/ं हो सकता?
सुख का समय अनंत होता है या दख
ु का?
काम, ूेम और भ!"।

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आपको समझना असंभव सा YयO लगता है ?
पहला ूƒ: दरया साहब के कल के सूऽ सूरता क# ूशCःत से सूऽ थे। केवल एक श6द-ूेमी
को Iयानी से बदलकर वे सूऽ बहत
ु मजे मG Cजनेtर महावीर के सूऽ कहे जा सकते ह0 । भ!"
भी Yया इतनी जुझाM होती है ? और Yया भ!" और Iयान मG इतना ह/ फकJ है ?
धमJ के मागJ पर चाहे कोई भी !विध चुनी जाए, साहस तो चाहए ह/ होगा। साहस के !बना
तो धमJ नह/ं है । भ!" हो या Iयान, कमजोर और भी के िलए कोई मागJ नह/ं। भी न तो 
हं मत कर पाता है Iयान क#। YयOक Iयान का अथJ है पूणJ होने का ूयास। Iयान का अथJ
है ःवयं को उपल6ध करने क# चे_ा। Iयान का अथJ है अपूवJ संकwप। साहस चाहए, संघषJ
चाहए।
ूेम के मागJ पर भी उतना ह/ साहस चाहए। कोई ऐसा न सोचे क ूेम या भ!" के मागJ
पर साहस क# Yया जMरत? शायद थोड़ा और gयादा ह/ साहस चाहए, YयOक भ!" है
समपJण। भ!" है !वसजJन। Iयान कहता है ःवयं हो जाओ। भ!" कहती है ःवयं को िमटा
दो। ःवयं को !बलकुल िमटा दो। िमटने के िलए तो और भी साहस चाहए। Iयानी को तो
थोड़/ आशा है क म0 बचूंगा। भ" उतनी आशा भी नह/ं रख सकता। Iयानी भी िमटता है ,
अंितम चरण मG िमटता है । भ" पहले चरण मG ह/ िमट जाता है ।
Iयानी भी समपJण करता है लेकन आCखर/ चरण मG। शुआत से तो अपने अहं कार को शुT
करता है । सारे जीवन के Cजतने भी दोष ह0 उ;हG दरू करता है । संघषJ करता है दोषO से। अंत
मG बचता है शुT अहं कार। वह अंितम घड़/ है । उसे भी छोड़ना होता है YयOक वह आCखर/
दोष है --म0 भाव। अब न चोर/ रह/ अब न बोध रहा, न लोभ रहा, न काम रहा, सब गए।
लेकन सब क# जगह बस एक अCःमता छूट गई--म0 हंू । अंततः उसे भी छोड़ता है Dानी। उस
आCखर/ घड़/ मG बांित घटती है ।
लेकन भ" और ूेमी तो पहले ह/ चरण मG छोड़ दे ता है उसको। फकJ इतना ह/ है , Iयानी
और बुराइयO को पहले छोड़ता है और उसी बुराई को छोड़ने के बाद अपने आप दसर/
बुराइयां

छुटती चली जाती ह0 । YयOक सभी बीमारयO क# जड़ अहं कार है । तुमने कभी बोध भी कया
है तो अहं कार के कारण ह/ कया है । और तुमने अगर कभी लोभ भी कया है तो भी अहं कार
के कारण ह/ कया है । तो भ" तो सीधा जड़ पर चोट करता ह0 । और भी साहस चाहए।
Dानी तो शाखाएं काटता है । धीरे -धीरे धीरे काटते काटते अब ऐसी घड़/ आती है , जब सारा
वृ[ कट जाता है , केवल जड़G रह जाती ह0 । तब अंततः जड़O को काट दे ता है । Dानी क#
ूबया तो बहत
ु बिमक है --कदम-कदम। लेकन भ" क# ूबया अबिमक है --एक ह/ छलांग
मG। तो भ" को तो साहस और भी चाहए।
तो ऐसा तो भूलकर भी मत सोचना क संकwप के मागJ पर साहस ठWक, लेकन यह दरया
तो ूेम क# बात करते ह0 , यह इतने जुझाM होने क# बात करते ह0 ? भ" को िमटना है ।
इससे बड़ा और साहस Yया होगा? भ" को ःवयं को खोना है । इससे बड़ा और दःसाहस

Yया होगा? इसिलए जो ूतीक दरया ने चुना है ठWक है , oयारा है । क जैसे पतंगा

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द/पिशखा पर आकर मर जाता है , ऐसे ह/ भ" सदगु क# िशखा पर आकर मर जाता है ,
िमट जाता है । सदगु मG मर कर ह/ परमाHमा मG ज;म होता है ।
दसरा
ूƒ: Yया संूदाय से धमJ ूवेश हो ह/ नह/ं सकता?

हो सकता है । जहां भी हो वह/ं से धमJ ूवेश हो सका है । YयOक ऐसी तो कोई जगह ह/ नह/ं
है जहां से परमाHमा क# तरफ जाने का मागJ न हो। ऐसी अगर कोई जगह हो तो उसका अथJ
हआ
ु , ऐसी भी कोई जगह है जहां परमाHमा नह/ं है । तो जहां भी तुम हो वह/ं से मागJ है ।
लेकन संूदाय मG अगर तुम हो तो मागJ का अथJ होगा, संूदाय को छोड़कर।
जैसे कोई कारागृह मG बंद है , तो Yया कारागृह से छुटकारे का कोई उपाय नह/ं है ? छुटकारे
का उपाय है : कारागृह क# द/वाल को फांदो और िनकलो; क कारागृह का दरवाजा तोड़ो; क
कारागृह के सींकचे काटो; क कोई उपाय करो क द/वाल तु]हG बाधा न बने, द/वाल मG सGध
लगाओ ताक बाहर िनकल जाओ। मागJ तो कारागृह से ह/ है ; खोजना पड़े गा। Cजसे नह/ं
जाना है वह तो ःवतंऽ भी बैठा हो खुले आकाश के नीचे तो नह/ं जाएगा। तो तो मागJ वहां
भी नह/ं है तुम खुले आकाश के नीचे बैठे हो, गंगा सामने बहती है और तु]हG पानी नह/ं
पीना है , या तु]हG oयास ह/ नह/ं लगी है , तो तुम उठोगे भी नह/ं। गंगा बहती रहे , बहती
रहे । या तो तु]हG oयास नह/ं है , या तुम सोचते हो oयास इस पानी से बुझेगी नह/ं। तुम 
कसी और पानी क# तलाश मG बैठे हो। तु]हार/ आंखG कह/ं और भटक रह/ ह0 तो जो खुला
बैठा है , वह भी जMर/ नह/ं क परमाHमा मG पहंु च जाए। जो संूदाय के कारागृह मG बंद है ,
वह भी बंद ह/ रह जाए। इस पर िनभJर करता है क परमाHमा को पाने क# कतनी ूबल
आकां[ा है । तो कोई बंधन न रोकेगा। जंजीर भी नह/ं रोकती। Cजसको कना ह/ नह/ं है उसे
कोई भी नह/ं रोकता। और Cजसे कना है , कुछ भी रोक लेता है ; कुछ भी छोट/-मोट/ बात
रोक लेती है ।
कारागृह से भी लोग छूटते ह0 । आCखर सभी लोगO का ज;म संूदाय मG होता है । बुT हं दू घर
मG पैदा हए
ु , नानक हं द ू घर मG पैदा हए
ु , दरया मुसलमान घर मG पैदा हए
ु , लेकन छूट
गए। खोज हो तो इस जगत मG काई चीज बांधती ह/ नह/ं। खोजी को कभी कसी ने नह/ं
बांधा है । खोज न हो तो जंजीरG न हO, तुम खुले आकाश के नीचे बैठे हो, मगर बैठे रहो,
इससे कुछ याऽा नह/ं होगी।
संूदाय का अथJ Yया होता है ? संूदाय का अथJ इतना ह/ होता है , सांप था कभी, िनकला
था कभी, अब सांप तो नह/ं है , धूल पर लक#र रह गई है । सांप गुजरा था कभी। कभी
महावीर थे, अब जैन संूदाय है । सांप गुजरा था कभी इस राह से, रे त दर छूंछा हआ
िचn

रह गया है । बुT गुजरे थे कभी, उनके चरणिचn रह गए ह0 समय क# रे त पर। उ;ह/ं चरण
िचnO का नाम संूदाय है ।
चरण िचnO मG चरण तो नह/ं है Iयान रखना, िचn ह/ ह0 ! तुम लाख इ;हG पूजो। अगर तुमने
बुT के जी!वत पैर पकड़ िलए होते तो उनक# गित के साथ तु]हार/ गित भी जुड़ जाती है । वे
गHयाHमक थे, ूवाह थे, तुम उनके साथ बहे होते। लेकन अगर तुमने चरणिचn पड़ता तो

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उसी से पूजा शुM हई ु थी। फर पूजा जार/ है । gयोित कब क# बुझ गई। Cज.हOने दे खी थी वे भी हजारO साल हए ु !वदा हो गए। फर उनके बेटO के बेटे. चेहरे पर भी पाउडर लगाया हो. पैर मG तु]हारे भी घूंघर बंधG। मीरा ने भजन गाए। िनCvत ह/ लता मंगेशकर उ. कताबO से न उठा हो। रं जी साःतर 5यान क#--शाU-Dान क# धूल से यह न हो सकेगा। यह तो कह/ं कोई Vदय धड़कता तो श6दO के पीछे .य !वराजमान हो श6दO के पीछे . उसमG कभी gयोित नह/ं थी. वह/ं के वह/ं पड़ा रहे गा. उसी शू.ह/ं भजनO को gयादा ढं ग से गाती है . !वदा कर आते हो। ऐसा ह/ है संूदाय। Cजस दन धमJगु जा चुके. लेकन लता मंगेशकर का भजन सुनकर तु]हारे जीवन मG भगवान का पदापJण नह/ं होगा। मीरा को शायद इतना ढं ग-ढोल न भी आता हो. बेटO के बेटे. इस आशा मG क उनके पूवज J O क# gयोित दखी Page 76 of 256 http://www. जwद/ ह/ बदबू उठे गी। मृत है । संूदाय मरे हए ु धमJ का नाम है । जैसे तुम अपनी मां को ूेम करते हो लेकन मां मर जाती है तो Yया करते हो? उसे घर मG तो नह/ं रख लेते। उसे मरघट ले जाते हो। रोते हो. सब होगा. मगर कुछ बात चूक#-चूक# रह जाएगी। जैसे लाश पड़/ हो. नह/ं तो तुम पूजते ह/ नह/ं। द/ए को भी नह/ं पूजते। तुमने कभी कसी ने gयोित दे खी थी. सुंदर वUO मG ढं क#. सजी-संवर/. छं द होगा. छाती पीटते हो. और तु]हG झकझोरG । कोई जीवंत श6द चाहए जो िसफJ ओठO से न उठा हो.oshoworld. Cजस दन जीवंत ूाण उड़ गए हO. लािलमा लगाई हो. पालक होगा. ओठO पर िलपCःटक हो और लाश पड़/ हो--ऐसा ह/ होगा गायक का गाना। लेकन जीवंत नह/ं। यह लाश उठ न सकेगी। यह लाश बोल न सकेगी। तुम पुकारोगे तो यह लाश जवाब दे गी। और इन गहनO और आभूषणO और इन वUO के भीतर िसफJ सड़ रह/ है लाश. कह/ं कोई शू. जो जीवंतता थी. लेकन जो मःती थी. संगीत के िनयमO का अनुसरण होगा. शायद संगीत क# पूर/ कला न भी आती हो. तो शायद तुम भी नाचने लगो.य से उठता हो श6द और तु]हारे अंत:ःथल मG जाता हो. gयोित !वलीन हो गई हो और िसफJ बुझा हआ दया रह जाए उस ु दन उसक# पूजा करते जाना.dkuks lquh lks >wB lc चरणिचn कह/ं भी नह/ं जाता. वह तो कसी गायक के ःवर मग नह/ं हो सकती। गायक के ःवर मG संगीत होगा.com . बेटO के बेटे. तो शायद उनके वे मधुर श6द तु]हारे जीवन को परमाHमा क# खोज क# अभीoसा से भर दे ते। लेकन गीता से यह बात न हो सकेगी। कोई जी!वत आंखG चाहए जो तु]हार/ आंखO मG झांकG. गहने पहनाए हए ु . तो शायद तु]हारे जीवन मG रोमांच हो जाए. माऽा होगी. यह म0 नह/ं कह रहा हंू । इसमG gयोित कभी थी. लाश को घर मG !वराजमान कर लेना है । इसिलए संूदाय से मु!" नह/ं होती। और म0 यह नह/ं कह रह/ हंू क संूदाय का जो दया है . सदा वह/ं पड़ा रहे गा। चरणिचn मG कोई गित नह/ं है । तुमने अगर बुT को पकड़ा हो तो तो वे तु]हG जगाते। तुमने अगर बुT क# मूितJ पकड़/ तो वह तु]हG कैसी जगाएगी? वह खुद ह/ जागी नह/ं है । तुमने अगर कृ ंण के पास बैठने का सौभा5य पाया होता.

पHथर हो जाओगे। तुम जो पूजोगे वह/ हो जाओगे। YयOक तुम पूज रहे हो उसका अथJ ह/ यह/ है क तुम अपने से ौे` वहां कुछ दे ख रहे । अगर लाश को पूजा तो तुम जीवन के भ" नह/ं हो.oshoworld.dkuks lquh lks >wB lc थी. तुम मृHयु के भ" हो। तुम जwद/ ह/ मर जाओगे। आप अपनी सरहदO मG खो गया है आदमी चीन क# द/वार जैसा हो गया है आदमी शीिशयO मG भर िलए ह0 इसने कुछ चेहरO के घोल Cजससे डर पहचान अपनी खो गया है आदमी सीं!पयO को !वष क# बूद ं G . सHय को समूह के Rारा खोजा जा सकता है । और सHय जब भी खोजा गया है तो dय!" के Rारा खोजा गया है . होगी जMर.com . अब भी बुझे द/ए को पूजे चले जाते ह0 । इस तरह वेद पुजता है इस तरह कुरान पूजती है . इस तरह बाइ!बल पूजती है । दरया कहते ह0 . मकबरे हो जाओगे। कॄO क# पूजा से सावधान। संूदाय अतीत क# पूजा है . बीत गए क#--जो कभी था और अब नह/ं है । संूदाय का अथJ होता है . जुwम को नैनO का नीर कौन सा मोती कहां पर पौ गया है आदमी ु एक टकड़ा छांव भी है हादसा Cजसके िलए धूप के पैबद ं पहने सो गया है आदमी रोज बनकर टटता ू है गदJ शO के चाक पर व" के हाथO Cखलौना हो गया है आदमी Cजःम से मन को अलग रखकर गए सदयां हई ु आज तक लौटा नह/ं है जो गया है आदमी कौन सी इsछा बनी थी मकबरा पहले पहल मकबरO का िसलिसला सा हो गया है आदमी कॄ जैसे हो गए हो. दरया अकेले। जब पाया तो अकेले मG पाया। जब भी कसी ने पाया है Page 77 of 256 http://www. मकबरे जैसे हो गया हो। मकबारे पूजोगे. दाद ू अकेले. समूह के Rारा नह/ं। िसंहO के नह/ं लेहड़े --िसंह तो अकेले होते ह0 । उनके लेहड़े नह/ं होते। कबीर अकेले. यह धूल बह जाए। खोजो कसी गु क# संगित क# उसके अंधड़ मG तु]हार/ धूल उड़ जाए. क तुम ःवsछ हो जाओ। शाU से ःवsछ हो जाओ। श6द से मु" हो जाओ। धारणा और िसTांतO का बोझ हट जाए तो तु]हारा िचN िनमJल हो। उसी िनमJल िचN मG परमाHमा क# छ!ब बनती है । लेकन लाशO को पूजते-पूजते तुम खुद ह/ लाश हो गए हो। ऐसा हो जाता है । तुम जो पूजोगे वह/ हो जाओगे। इसिलए अपनी पूजा बहत J चुनना। हर कुछ मत पूजने लगना। ु Iयानपूवक पHथर पूजोगे. जो अंग से िलपट/ है । खोजो कसी गु का झरना क उसमG डु बक# ले लो. नानक अकेले. रं जी साःतर 5यान क# अंग रह/ िलपटाए। यह सब धूल है .

बाइःट ने पाया. मुसलमान भी भीड़ है । भीड़ तो राजनीित है । इसिलए संूदाय राजनीित है .हा िचराग जलाए !बना कोई चारा नह/ं कोई चारा नह/ं क Cजस ूकाश के भुलावे मG Page 78 of 256 http://www. धमJ कम। यह धमJ के नाम पर बड़/ सूआम राजनीित है । अपना न.dkuks lquh lks >wB lc तो िनतांत अकेलेपन मG पाया है । जहां दसरे क# कोई छाया भी न पड़ती थी। महावीर ने ू पाया. अकेले मG पाया। मोह]मद पर जब पहली दफा कुरान उतर/ तो पहाड़ पर अकेले थे. YयOक बोलो तो दसरा आएगा कैसे? बुT को जब ू िमला तो एकांत मG अकेले बोिधवृ[ के नीचे बैठे थे। कोई दसरा न था। पांच संगी-साथी थे. फर इन पांच इं ियO के Hयाग मG खोजते थे लेकन यह पांच इं ियO का साथ बना रहा था। उस रात इन पांच का साथ छूट गया.नाटा नह/ं था. अकेले होने से सHय िमला है । हं द ू भी भीड़ है . मोह]मद ने पाया.हOने कहा. न मुसलमान होने से सHय िमलता है . चुपचाप। श6द भी ु छोड़ दए थे. वे ूतीकाHमक हो जाती ह0 । ये पांच संगी साथी थे। जो सदा उनके साथ रहे थे। पांचO को साथ लेकर वे सHय क# खोज पर िनकले थे। लेकन जब बुT ने दे खा क बहत ु तपvयाJ करके भी कुछ नह/ं िमलता। सब तरह से शर/र को सुखा िलया और कुछ भी नह/ं हआ तो उ.य नह/ं था। समािध बनना मुCँकल थी। जब भी सHय अवतरत हआ है तो िनतांत एकांत मG ु dय!" क# अंतराHमा मG अवतरत हआ है । ु संूदाय का अथJ होता है . उन पांच क# मौजूदगी बाधा बन रह/ थी। ऐसी ह/ मेर/ ूतीित है । उन पांच क# मौजूदगी बाधा बन रह/ थी। भीड़-भाड़ थी। जमात हो गई थी। बातचीत भी करते हOगे. शू. कोई भी न था। महावीर को जब अनुभव हआ तो वह बारह साल तक मौन जंगल मG खड़े रहे थे.com . तुम सोच रहे हो क भीड़-भाड़ मG खड़े होने से सHय िमल जाएगा। हं द ू होने से सHय िमल जाएगा क मुसलमान होने से सHय िमल जाएगा. वे पांचO नाराज हो गए। उ. YयOक ऐसे बुT पुषO के पास जो भी कथाएं बनती ह0 . अतींिय हो गए.oshoworld. ू वे भी छोड़कर चले गए थे। यह कथा भी oयार/ है । ूतीकाHमक भी हो सकती है . बोलना भी छोड़ दया था. न हं द ू होने से सHय िमलता है . यह गौतम तपvयाJ करता था और अब कुछ भी ले लेता है । िभ[ा भी ःवीकार कर लेता है । अब पुरानी कठोरता न रह/। वे छोड़कर चले गए। Cजस दन वे छोड़ कर चले गए. उसी रात घटना घट गई। मगर वे पांच िशंय थे उनके। वे छोड़कर चले गए क गौतम ॅ_ हो गया। Cजस दन वे छोड़कर गए उसी दन घटना घट गई। ऐसा भी हो सकता है . !ववाद भी करते हOगे। स. उसी रात बुT को Dान हआ। ु यह पांच का ूतीक पांच इं ियO का ूतीक भी हो सकता है --होना चाहए। यह पांच इं ियO को साथ लेकर जैसे बुT खोज रहे थे तब तक अड़चन रह/। पहले इन पांच इं ियO के भोग से खोजते थे. बुT ने पाया. नह/ं.हOने तपvयाJ Hयाग द/। संसार छोड़ दया था एक दन फर एक दन तपvयाJ भी ु छोड़ द/। Cजस दन तपvयाJ छोड़/.

हे िचराग सहषJ बुझाते झूठा िनकला वह !वtास जनपथ !बयाबान मG खो गया और ूकाश अंधेरे क# चादर ओढ़कर सो गया अपना न. अकेले हो जाते हो। भीतर तो एकदम अकेलापन है । वहां तुम कसी दसरे को ले भी न जा सकोगे। चाहो तो भी न ले जा सकोगे। अपने ूीतम ू को भी बुलाना चाहो तो न बुला सकोगे। वहां दसरे के पहंु चने क# संभावना ह/ नह/ं है । वहां ू बस तुम ह/ !वराजमान हो। उस परमसNा को खोज लेना है जहां तुम ह/ !वराजमान हो। उसी को Dानी आHमा कहते ह0 . अगर तुम सभी भी Iयान करने बैठे जाओ तो जैसे ह/ Iयान घटे गा. भ" परमाHमा कहते ह0 । वह तु]हारा ह/ िनज ःवMप है । लेकन उसे पाने के िलए भीड़-भाड़ तो छोड़नी होगी। भीड़-भाड़ से तो बचना होगा। भीड़-भाड़ के उपयोग है । और उपयोग है .हे न. बाक# सब लोग भूल जाएंगे। साथ भला बैठे हो. तु]हारे िन!बड़ शांित मG। छोटे -छोटे िचराग ह/ जलाने होते ह0 सHय के। समािध के द/ए होते ह0 . अगर बड़/ भीड़ के Page 79 of 256 http://www. दे ह ह/ साथ होती है । जैसे ह/ तुम भीतर गए. जीतने क# कोिशश मG बार-बार हारने क#? जब क नए सूरज क# करणO मG जगमगाता आसमान खुल गया है अंधेरा हमेशा-हमेशा के िलए धुल गया है कोट-कोट जन बढ़े जा रहे ह0 जयकार बुलाते और नारे लगाते और अपने न.dkuks lquh lks >wB lc हमने अपने िचराग बुझा द/ए सारे शक-शुबहा सायाम सुला द/ए वह झूठा िनकला झूठा िनकला यह !वtास क सूरज सबको राःता दखाएगा मूखJ होगा जो अपना अलग-अलग िचराग जलाएगा Yया है जMरत न. तु]हारे एकांत मG.हे िचराग िलए अंधेरे मG टाक-टोए मारने क#. धािमJक कोई उपयोग नह/ं है भीड़-भाड़ का। राजनैितक उपयोग है . सूरज नह/ं। यहां तुम इतने लोग हो.com .हा िचराग जलाए !बना कोई चारा नह/ं रोशनी सामूहक नह/ं है । सHय का सूरज नह/ं है । सHय का तो छोटा सा िचराग जलता है तु]हार/ अंतराHमा मG. अलग-अलग राःता खोजने क#. तुम अकेले रह जाओगे.oshoworld.

सब ने एकांत मG ु पाया। और सबके साथ यह दभाJ ु 5य घटता है क जब उनको िमल जाता है तो उनके द/ए क# रोशनी दे खकर हजारO लोग दौड़े आते ह0 . सC]मिलत हो जाओ। इस संूदाय मG सC]मिलत हो जाओ. तो फर तुम भीड़O मG रहो. चार-छह कदमO तक रोशनी तु]हG घेरे रहती है । रोशनी का एक वतुJल तु]हारे साथ चलता है । Cजसके भीतर का द/या जल रहा है उसके िलए अंधेरा है ह/ नह/ं। वह जहां भी जाएगा वह/ं रोशनी है । बाजार मG बैठे तो बाजार मG रोशनी है । पहाड़ पर बैठे तो पहाड़ पर रोशनी है । परवार मG रहे तो परवार मG रोशनी है । परोाजक हो जाए तो परोाजक होने मG रोशनी है । असली बात भीतर क# रोशनी का जल जाना है । लेकन यह संूदाय से नह/ं होता है. और यह भी नह/ं दे खते ह0 क द/या अब जल नह/ं रहा है । पतंगा पतंगा बना रहता है । द/ए पर िगरता जाता है . हमारा अपना ह/ द/या है . पतंगे आते ह0 । पतंगे मरते ह0 उनक# gयोित मG आकर. उनक# gयोित मG लीन होते ह0 । फर समय रहते उनक# gयोित बुझ जाती है । इस जगत मG कोई भी चीज शाtत नह/ं है । सदगु भी घटते ह0 और !वदा हो जाते ह0 । घड़/ भर को Rार खुलता है .नाटा है । और Cजसक# अपनी रोशनी जली है उसे कह/ं भी अंधेरा नह/ं है । तुमने दे खा न! छोटा सा द/या हाथ मG लेकर तुम चलो तो तुम जहां जाओ. तु]हG रोशनी घेरे रहती है । तु]हारा छोटा सा द/या पयाJm है । कम से कम कुछ कदमO तक. झूठे िसYके क# भांित है । यह ु ूलोभन दे दे ता है । यह कहता है दे खो. इसके िलए तो तु]हG ःवयं ह/ चे_ा करनी होगी। दिनया मG धमJ के नाम पर संूदाय खोटे िसYके क# भांित ह0 .oshoworld.न होता है क यह अsछO रह/। मरने से भी बचे और द/ए पर िगरने का साहस दखाने का भी मजा ले िलया। असली द/यO से बचता है । जहां gयोित जल रह/ है अब.हा सा िचराग जल जाए. कोई फकJ नह/ं पड़ता। Cजसका िचराग जला है उसके िलए बाजार कह/ं है ह/ नह/ं। उसके िलए सभी जगह परमाHमा का वास है । उसके िलए सी जगह हमालय फैल गया है । उसके िलए सभी जगह स. िसर पटक लेता है । बCwक और भी ूस. वहां नह/ं जाता। वह कहता है . हम उसी पर िगरते ह0 । हमारा अपना मंदर है .dkuks lquh lks >wB lc हःसेदार हो तो तुम ताकतवर हो। अगर छोट/ भीड़ के हःसेदार हो तो ताकत कम हो गई। तो ये ताकत क# बातG ह0 । लेकन अगर तुम अकेले हो तो धािमJक हो गए। और एक बार तुम उस अकेलेपन को जान लो. या उस संूदाय मG सC]मिलत हो जाओ। और पा लोगे. बाजारO मG रहो. जो तु]हG पाना है । लेकन कभी कसी ने पाया? जीसस पैदा हए ु थे यहद/ ू घर मG लेकन यहद/ ू संूदाय मG नह/ं िमला। खोजना पड़ा एकांत मG। आज तक दिनया मG Cजतने लोगO ने पाया है .com . अपनी मCःजद है . एक बार तु]हारा न. अपना गुRारा है . हम वह/ं जाते ह0 । हम YयO जाएं दसर/ जगह? मगर तुम यह तो दे खो क Cजस मंदर से तुम लौट आते हो वह ू मंदर न होगा। जो मCःजद तु]हG िमटाती नह/ं वह मCःजद नह/ं है अब। Cजस गुRारे से तुम Page 80 of 256 http://www. फर बंद हो जाता है । लेकन लोगO को पता नह/ं चलता। लोग तो पुरानी लक#र के फक#र। सुनते ह0 क उनके बाप-दादा फलां द/ए पर िगरकर और िनवाJण को पा गए थे तो वे भी उसी द/ए पर िगरते जाते ह0 .

ठं ड/. जी!वत आदमी क# शांित नह/ं। शांित शांित मG फकJ है . और तुम अपने कमरे मG समािध मG चले गए तो भी स.नाटे मG कुछ फकJ करोगे? समािधःथ dय!" का स.com . फर लौटे कैसे? असली द/ए पर िगरोगे तो गए। तो इस संूदाय के नाम पर एक झूठ ूबया चलनी शुM होती है । एक थोथा जाल फैलता है । अगर कभी कोई लोग इस संूदाय के नाम पर कसी तरह ठोक-पीट कर अपने को थोड़ा शांत भी कर लेते ह0 . वह गुRारा कहां रहा? वह गु का Rार अब कहां रहा? जब गु नह/ं रहा तो गु का Rार कहां रह जाएगा? गुRारे से तो जो गया सो गया. Iयान रखना। एक मरघट क# भी शांित होती है । एक शांत बैठे आदमी क# शांित होती है और एक मुदाJ लाश क# भी शांित होती है । ऊपर से दे खने मG दोनO शांितयां मालूम पड़ती ह0 । तुम अपने कमरे मG मर गए तो भी स. और यह/ अड़चन है । YयOक राख मG तो तुम पैदा होते हो.नाटा िसफJ स. राख क# नह/ं। राख क# भी शांित होती है --मुदाJ. जो दप-दप जलती है । ऐसी आग क#. ये दोनO शांितयां एक जैसी ह0 ? ये स. तो भी वह शांित मुदp क# शांित होती है . याऽा करनी पड़ती है । सदगु तीथJयाऽा से िमलते ह0 । Page 81 of 256 http://www. िसफJ शोरगुल का अभाव है .नाटा जीवंत है .नाटा है . संयोग क# बात थी। बचपन से एक संूदाय तु]हG िमल गया। बचपन से एक संूदाय का संःकार पड़ गया। लेकन अगर तु]हG सदगु खोजना है तो खोजना पड़े गा। सदगु ज.नाटा हो जाता है । लेकन Yया ये दोनO समािधयां.नाटे एक जैसे ह0 ? लाश का स.dkuks lquh lks >wB lc वैसे के वैसे लौट आते हो जैसे गए थे. परम ऊजाJ से आंदोिलत है । मुदr का स.नाटा हो जाता है . कभी वहां भी आग थी। संूदाय राख है । कभी वहां आग थी.म से नह/ं िमलते। सदगु के िलए तो आंखG खोलकर भटकना पड़ता है . कभी अंगारे थे. नकाराHमक है । उसमG कुछ !वधायकता नह/ं है । ऐसी आग भी होती है जो औरO को नह/ं जलाती है पर अपनी परिध मG क# अपनी मयाJदा मG बंधी दप-दप जलती है हमG राख क# शांित नह/ं चाहए ऐसी आग भी होती है जो िचटकती नह/ं शोर नह/ं मचाती अपनी गरमा से पु_ अपनी श!" से संतु_ अनवरत शांत मगन दहकती है हमG राख क# शांित नह/ं चाहए शांित चाहो ऐसी आग क#. परतु_. अंगारा तु]हG खोजना पड़ता है । हं दू घर मG पैदा हए ु इसके िलए तु]हG कुछ करना तो नह/ं पड़ा। यह तो संयोग क# बात थी। क जैन घर मG पैदा हए ु .अनवरत शांत और मगन दहकती है । आग क# शांित चाहो.नाटा और समािधःथ dय!" के स. जो अपने मG संतु_. जहां जीवन जा चुका। हां.oshoworld. अब नह/ं ह0 । धमJ क# खोज मG dय!" को हमेशा अंगारे खोजने पड़ते ह0 .

मोह]मद को छोड़ दया इस आदमी के साथ सगाई कर ली। इस आदमी के साथ !ववाह रचा िलया। यह खतरे का काम था। YयOक गीता क# पुरानी साथ थी-हजारO साल पुरानी। यह आदमी तो अभी-अभी हआ। पता नह/ं ठWक भी हो क न हो। इसके ु पीछे कोई पुरानी साख तो नह/ं है । बाजार मG इसक# कोई साख तो नह/ं है । इसको कोई जानता तो है नह/ं अभी। इस अनजान के साथ ूेम बांध िलया। हं मतवर लोग थे। उनको अगर नानक ने िशंय कहा--िसYख उसी से बना--तो ठWक कहा. वे िशंय थे। जो गु खोजता है . उनक# बात और थी। अब जो िसYख ह0 उनक# बात और है । Cज. खुद नह/ं कमाना होता। इस फकJ को समझ लेना। संूदाय मु”त िमलता है वसीयत क# तरह। धमJ कमाना पड़ता.हOने बड़/ अड़चन से चुना था. उधार है । तु]हG िमल जाता है मु”त--वसीयत क# तरह.हOने नानक को चुना--Cजंदा नानक को. उनमG लोग पैदा हए ु थे। फर नानक क# gयोित जली.हOने नानक को चुना था--Cजंदा नानक को. वह िशंय है । लेकन अब जो िसYख ह0 वे िसYख नह/ं ह0 । अब उ. हजार संूदाय थे. इस आदमी के मोह मG। कहा क छोड़ते ह0 गीता। YयOक कृ ंण ठWक थे या नह/ं यह सवाल नह/ं है । गीता मG अब कृ ंण कहां? राख बची है । महावीर को छोड़ दया. कोई और था. बुT को छोड़ दया. अपने अतीत को दांव पर लगाया। अतीत सुरC[त था। गीता दांव पर लगा द/ इस आदमी के ूेम मG. है भी या नह/ं! तो जुआर/ बनना पड़ता है । दांव लगाना पड़ता है । चूक भी हो सकती है । संूदाय मG भूल-चूक नह/ं होती। बाप-दादO से चला आता है .मे। तब तो Cज. पूर/ फौज मG कोई एकाध सूरमा होता है । फौज क# फौज धीरO क# नह/ं होती. धमJ खोजना पड़ता है . कोई जैन घर मG पैदा हआ ु ु था कोई गोरख पंथी था. !बरले हो सकते ह0 । इसिलए तो दरया कहते ह0 . इसिलए थोड़े से ह/ लोग धािमJक हो पाते ह0 । अब Cज. वह िसYख संूदाय के बाहर हो जाएगा। जो असली जैन है वह हं द ू संूदाय के बाहर हो जाएगा। Page 82 of 256 http://www. बड़े हं मतवर लोग रहे हOगे। बहत ु नह/ं हो सकते. उ. यह झंझट होगी। और तु]हG यह है रानी होगी बात जानकर क जो नानक को छोड़कर गु खोजGगे वह/ िसYख ह0 । YयOक िसYख का अथJ ह/ यह होता है क जो गु को खोजे। जी!वत गु को खोजे। अब तो जो असली िसYख है .हOने गु थोड़े ह/ खोजा। अब तो वे िसYख घर मG पैदा हए। अब तो उनको गु खोजना पड़े तो फर झंझट होगी। अब तो उ. कोई एकाध वीर पुष होता है । तो थोड़े से लोगO ने नानक का गीत सुना। थोड़े से लोगO ने पहचान बताई। थोड़े से लोगO ने हं मत क#. कोई और था. जोखम लेनी पड़ती है । YयOक कौन जाने.oshoworld. Cजसको तुमने सदगु माना.हG ु नानक को छोड़कर गु खोजना पड़े गा. यह अंगारा ूगटा। इस अंगारे के गीत ज.com . बड़/ मुCँकल से चुना था। YयOक कोई हं द ू घर मG पैदा हआ होगा। नानक का तो ु घर ह/ नह/ं था तब तक। कोई मुसलमान घर मG पैदा हआ था.dkuks lquh lks >wB lc खतरा उठाना पड़ता है .हOने चुना. धमJ पर दां व लगाना होता है .

उससे dयवसाय है । धमJगु धमJ का dयवसाय कर रहा है । म0ने सुना. जलाए जाओगे कड़ाहO मG. यह बताओ। मुwला ने कहा. मगर ये तो खा पीकर !वदा हो गए. और िमऽO ने िमलकर खा-पी भी िलया। अब मुझे यह पाप कचोटता है क िमऽO ने खाने-पीने मG तो हाथ बटाया लेकन फसूंगा तो म0 ह/ आCखर मG। िनणJय के दन.oshoworld. मुझे कुछ राःता बताओ क म0 िनकल आऊं। मुwला तो बहत एकदम। उसने पूरा का पूरा नरक का ^ँय खड़ा कर ु िचwलाया.मO तक दख ु पाओगे। खूब डराया उस आदमी को। वह बहत ु घबड़ा गया। उसने कहा क मुwला. वह तु]हG अड़चन दे ती है । यह अड़चन सHय के मागJ पर साहसी आदमी को उठानी ह/ पड़ती है । इसिलए दरया ठWक ह/ कहते ह0 क कुछ सूरमा ह/ होते ह0 .हG खुद भी कुछ पता नह/ं है । वे उतने ह/ अDान मG ह0 Cजतने तुम कभी-कभी तो ऐसा होता है . नगद नह/ं समझते? Page 83 of 256 http://www. उनको यह खयाल है क उ. सुर[ाएं. औपचारकताएं ह0 . जो धमJ के मागJ पर जाते ह0 । धमJगु सदगु नह/ं है . सु!वधाएं ह0 । फर संूदाय इसे [मा भी नह/ं करता। संूदाय इसका ठWक से बदला लेता है । जब तुम कसी संूदाय को छोड़ते हो तो तुम संूदाय के अहं कार को चोट पहंु चाते हो क तुमने समझा Yया? तुम अपने को अYलमंद समझ रहे हो? हम सब गलत ह0 ? हम हजारO साल से मान रहे ह0 और गलत ह0 ? और तुम एक अकेले समझदार हो गए हो? तो सारा संूदाय तु]हारे Cखलाफ खड़ा हो जाता है । भीड़ उनक# है .यःत ःवाथJ ह0 . अब और मत घबड़ाओ। म0 वैसे ह/ सात दन से सोया नह/ं.हG सब पता है और पता कुछ भी नह/ं। उनक# हालत तुम से बदतर है । फर धमJ के साथ उनका संबध ं Yया है ? धमJ के साथ उनका कोई संबंध नह/ं है । धमJ के पाखंड के साथ उनका संबध ं है YयOक उससे लाभ है . मौलवी है . क#ड़े -मकोड़े काटG गे. तुम तो ऐसी हालत कए दे रहे हो। म0 Yया कMं. मुwला नस‰/न के पास एक आदमी आया. ज. बचाओ। बड़/ भूल हो गई। आज सात दन से सोया भी नह/ं। एक बकरा चुरा िलया कसी का. dयवःथाएं ह0 .com .मO-ज. वे धोखे ह0 । उनके भीतर क# आग जलती नह/ं है । उ.dkuks lquh lks >wB lc YयOक संूदाय मG कहां असली? वह असली को खोजेगा। असली तो सदा कसी जी!वत गु के ूाणO मG होता है । मगर नुकसान तो उसे उठाने पड़ते ह0 । कसी संूदाय को छोड़ना इतना आसान तो नह/ं। फर संूदाय के साथ बहत ु से . तुमसे भी gयादा अDान है । YयOक तु]हG कम से कम इतनी समझ है क मुझे कुछ पता नह/ं है . इसमG ठWक है . पुरोहत है . धमJ गु सदगु का धोखा है । पंडत है . बड़ा डरा हआ था। मुwला मौलवी! ु उसने कहा क मुwला. नाराज हआ ु दया क दोजख मG सड़ोगे. कुछ नगद ूमाण चाहए। नगद ूमाण? उस आदमी ने कहा. फंस म0 गया। चोर/ म0ने क# थी। मुwला. कुछ करना है अगर तो केवल बातचीत से न होगा. तु]हारा मतलब Yया है ? मुwला ने कहा. कयामत के दन पुकारा तो म0 जाऊंगा। चुराया तो म0ने था बकरा। खा तो ये सब गए। मुझे थोड़ा बहत ु िमला है .

dkuks lquh lks >wB lc उसक# अकल मG आया. उसने पांच पए का नोट िनकालकर मुwला को दया क लो। मुwला ने उसे खीसे मG रखा और कहा घबड़ाओ मत. !वभूित कहो.com . जो भी कहना हो कहो. तुम भी यह/ पूजो। अपने बाप दादO को मत छोड़ो। अपनी िन`ा मत गंवाओ। भटक मत जाना। यह मागJ सुिनCvत है .न है । उस आदमी को भी बात जंच गई क यह बात ठWक है । Cजसको तुम धमJगु कहते हो वह dयवसाय कर रहा है । उसक# रोट/-रोजी है । उसे तुमसे कुछ मतलब नह/ं है . फर बेफब रहो। जब कोई गवाह ह/ नह/ं है तो कोई छोट/-मोट/ अदालत भी कुछ नह/ं कर सकती। तो उसक# तो बड़/ अदालत है । गवाह तो पूछेगा ह/ क कोई गवाह है . दे खो ऐसा है . जब भी कसी dय!" मG फर से अंगारा जलेगा. साफ मुकर जाना? मुwला ने कहा. कसी ने नह/ं दे खा। मुwला ने कहा. जलोगे। मुCँकल मG पड़ोगे। यह राख अsछW है . लेकन परमाHमा तो सभी !वराट श!"मान है . उससे पार िनकल आओ। और तुम संूदाय के भीतर बंधकर Cजसे खोज रहे थे उसे तुम संूदाय के बाहर रहकर कसी दन पा लोगे। Cजस दन तुम पा लोगे उस दन तुम जान Page 84 of 256 http://www. तु]हारे भ!वंय का Yया ूयोजन होगा? लेकन dयवसाय है . जो राख का धंधा कर रहे ह0 । उसको भभूत कहो. ठं ड/ है . शीतल है फर बाप-दादे भी यह/ पूजते रहे ह0 . न जाता हो। नई बातG खतरनाक हो सकती ह0 । पुरानी जांची-परखी गई बातG मG ह/ रहो। तुम पूछते हो. लेकन तुम समय पर आ गए। कयामत मG बुलाए तो जाओगे। ईtर पूछेगा क बकरा YयO चुराया? तो तुम साफ मुकर जाना। तुम कहना चुराया ह/ नह/ं। वह आदमी बोला. Cजसका चुराया है । कहना झंझट िमट/। बात ह/ खतम हो गई। लेना दे ना पूरा। अब कैसा मामला! वह आदमी भी खुश हआ ु . मुwला भी ूस. इस पर अनेक लोग गए ह0 । यह नए मागJ के झंझट मG मत पड़ो। Yया पता कोई जाता हो. Yया संूदाय से धमJ ूवेश हो ह/ नह/ं सकता? हो सकता है . Cजसने दे खा? वह आदमी बोला. कोई गवाह है ? कहा. न तु]हारे भ!वंय से कुछ ूयोजन है । उसे अपने ह/ भ!वंय का पता नह/ं है . बात तो ठWक है . अगर वह बकरे को बुलाए सामने तो जwद/ से बकरे को पकड़कर उस आदमी को दे दे ना. तो वे सब घबड़ा जाएंगे. लेकन जो भी राख का धंधा कर रहे ह0 वे सब घबड़ा जाएंगे। वे सब एकजुट !वरोध मG हो जाएंगे। वे कहG गे यह अंगारा खतरनाक है । जाना मत. उसके िलए Yया कमी है ? वह चाहे तो बकरे को ह/ बुला सकता है क यह बकरा खड़ा है । बकरे ने तो दे खा। मुwला ने कहा. यह अड़चन आ गई। नगद ूमाण फर से दो। तो उस आदमी ने फर पांच पए का नोट िनकाला। वह खीसे मG रखकर मुwला ने कहा. संूदाय है । जwद/ ह/ पंडत-पुरोहतO का dयवसाय बन जाता है । ःवभावतः पंडत-पुरोहत सदा ह/ सदगु के !वरोध मG खड़े रहते ह0 --खड़े ह/ रहG गे। YयOक जब भी सदगु पैदा होगा.oshoworld. गवाह कहां? कसी ने दे खा तु]हG चुराते? उस आदमी ने कहा. डर झंझट के बाहर मागJ है . संूदाय के बाहर आना उपाय है । संूदाय को भी सीढ़/ बना लो। उस पर चढ़ जाओ.

उस मांग क# तुलना मG जो सुख िमल रहा है वह इतना छोटा मालूम पड़ता है क यह गया. पता नह/ं चलता। ऐसा लगता है क घड़/ बड़/ तेजी से चल गई। कांटO ने बड़ा धोखा कया.oshoworld.. जwद/ कट जाए। अब कट ह/ जाए। कसी तरह सुबह हो जाए. कब सुबह हो गई. कह/ं जwद/ न कट जाए। दख ु मG तुम चाहते हो. उपजा था. लगता है कम घटा। !ूयजन से िमलना हो गया.। अभी आया िमऽ अभी जाने क# घड़/ आ गई। अभी सुख आया था.. घड़/ चल ह/ नह/ं रह/। अटका है कांटा। घूमता ह/ नह/ं कांटा। तु]हारा !ूयजन मर रहा है . कसी तरह सूरज िनकल आए। Page 85 of 256 http://www. जwद/-जwद/ घूम गए। कांटे तो अपने ह/ तरह से घूम रहे ह0 . जरा भी !वरोध नह/ं है । जब सुख घटता है . तुम कनारे बैठे हो खाट के उसके. सुख सदा घटता रहे इसिलए कतना ह/ घटे .यह गया.com . जब तुम सुख क# घड़/ मG होते हो तब ऐसा लगता है बड़/ जwद/ जा रहा है . रात ऐसे बीत जाती है बात मG. रात ऐसी लगती है क बीतेगी ह/ नह/ं। लगता है क लंबी होती जा रह/ है .. मृHयुशlया पर पड़ा है .dkuks lquh lks >wB lc लोगे--अगर तुम हं द ू थे तो तुम जान लोगे क अब म0 हं द ू हआ। अगर मुसलमान थे तो ु पाओगे क अब म0 मुसलमान हआ। अगर जैन थे तो पाओगे.. अब म0 जैन हआ। लेकन जैन ु ु रहते कोई जैन नह/ं होता न हं दू रहते कोई हं द ू होता है । यह !वरोधाभास है । छूटकर संूदाय से dय!" धािमJक बनता है । [ुि श6दO और शाUO क# सीमाओं से उठकर सHय का खुला आकाश उपल6ध होता है । तीसरा ूƒ: आप कहते ह0 क सुख का समय अनंत है आर मनोवैDािनक कहते ह0 क दख ु का समय अनंत है । कृ पा करके समझाएं अनंत के ूित यह दो !वपर/त ^!_कोण कस कारण है । नह/ं. तो [Cणक मालूम होता है । जब सुख घट रहा होता है उसी समय अगर दे खोगे तो सुख [Cणक मालूम होगा। YयO? YयOक मन चाहता है . जब घट रहा होता है . समय तो अपने ह/ गित से जा रहा है । कोई फकJ तु]हारे िलए नह/ं कया है । तु]हारे मन मG फकJ हो गया है YयOक इस िमऽ को पाकर तु]हG जो रस आ रहा ह0 उसे तुम चाहते हो सदा आता रहे आता ह/ रहे । तु]हार/ मांग इतनी बड़/ है. गपशप मG. यह चला। तो जब सुख बीत रहा होता है . Yया मामला Yया है ? Yया कयामत क# रात आ गई? आCखर/ रात आ गई? आज सुबह होती नह/ं दखाई पड़ती। आज सुबह होगी या नह/ं होगी? अब सूरज िनकलेगा क नह/ं िनकलेगा? कारण Yया है ? कोई फकJ नह/ं पड़ा। घड़/ अपने ढं ग से चल रह/ है । सुबह भी होगी। चाल समय क# वह/ है जो थी लेकन तु]हारा मन आज बड़ा दख ु मG भरा है । तुम चाहते हो जwद/ यह रात कट जाए। जwद/ कट जाए। सुख मG तुम चाहते हो. [णभंगुर है । ठWक इससे !वपर/त दशा दख ु क# होती है । जब तुम दख ु क# घड़/ मG होते हो तो लगता है .

एक दसरे ली थी. ःमृित मG कम कर लेते हो। इसिलए लोग ःमृित मG दख ु क# बातO को भूल जाते ह0 । खूब दख ु घटे है Cजंदगी मG लेकन उनको भूल जाते ह0 । और सुख को कभी नह/ं भूलते ह0 । सुख को खूब याद रखते ह0 . और साथ बैठकर चांद िनहारते रहे थे.ने फाड़ दए तुमने ःमृित के कताब से जो दख ु के थे. सो समय भागता मालूम पड़ता है । यह तु]हारे ह/ मन क# कwपना के कारण होता है । समय तो वैसा ह/ चलता है .dkuks lquh lks >wB lc जब तुम दख ु मG होते हो तो तुम जwद/ पार होना चाहते हो। तु]हार/ जwद/ के कारण दे र/ मालूम पड़ती है क दख ु क# घड़/ बड़/ धीरे -धीरे जा रह/ है । जा ह/ नह/ं रह/. फूट नोट रह गए। और सुख के जो प. वह गीत गया। कैसे oयारे दन! कैसे आनंद के दन! वे सब चले गए। वतJमान सदा दख ु मालूम होता है और अतीत सुख मालूम पड़ता है । YयOक अतीत से तुमने दख ु तो अलग कर दए. लेगा। हम चाहते ह0 जwद/ गुजर जाए. या उनको संC[m कर दया. तो लगता है . मगन हए मG डु बक# ू ु थे. जैसा तु]हG दे खना हो। इसिलए लोग पीछे लौट-लौटकर दे खते ह0 और कहते ह0 . तुम जो चाहो। करो। प. संजोकर रखते ह0 । उसक# ितजोड़/ बना लेते ह0 । और सुख को खूब लंबा-लंबा कर दे खते ह0 । वह तु]हार/ कwपना का बात. चल ह/ नह/ं रह/। समय ठहर गया है । सुख मG तुम चाहते हो समय ठहर जाए.oshoworld.. जैसा चलता है । न सुख क# फब है न दख ु क# फब है । तो यह पहली बात। फर जब तुम पीछे लौटकर दे खते हो सुख क# घड़/ को या दख ु क# घड़/ को. कैसे अsछे दन थे वे पुराने दन। अब बीत गए। बचपन कैसा oयारा था। इसी मनोवैDािनक आधार पर सार/ दिनया मG यह एक ूवृ!N है क अतीत मG ःवणJ-युग था.com . अIयाय बन गए। अIयाय जो थे. धीरे गुजर रहा है । हमार/ अपे[ा अड़चन डाल दे ती है । लेकन जब तुम लौटकर दे खते हो तब तो तुम मािलक हो गए। अब तुम चाहो Cजतने जwद/ कलGडर को फाड़ दो। एक [ण मG दन बीत जाए। एक [ण मG रात बीत जाए एक [ण मG वषJ बीत जाए। अब तु]हारे हाथ मG है । तो तुम दख ु को छोटा कर लेते हो। तुम सदा से छोटा करना चाहते थे। असिलयत मG तो न कर सके थे. जब तुम पीछे लौटकर दे खते हो तो वह सुख बड़/ लंबा मालूम पड़े गा। जब तुम सुख मG गुजरे थे तो बड़ा छोटा मालूम पड़ता था। जब तुम लौटकर दे खोगे तो सुख बहत ु लंबा मालूम पड़े गा। और जब तुम दख ु को लौटकर दे खोगे तो दख ु छोटा मालूम पड़े गा। जब दख ु मG से गुजरे थे तो बड़ा लंबा मालूम पड़ता था। YयO? YयOक हम कwपना मG भी दख ु को बड़ा नह/ं करना चाहते। हम कwपना मG तक दख ु को छोटा करना चाहते ह0 । असिलयत मG तो कर नह/ं सकते.. छांट दए। ःमृित तो तु]हार/ है . या !बलकुल छोटा कर दया. जब कोई !ूयजन आ गया था और तुम गीत गाते रहे थे. ु सतगु था.रात Cजस दन. नाचे थे साथ-साथ..ने थे उनको खूब बड़े कर दए। उनके अIयाय बना दए। फूट नोट जो थे. फूट नोट हो Page 86 of 256 http://www. तो फर एक फकJ हो जाता है । जब तुम पीछे लौटकर दे खते हो सुख क# कोई घड़/. कwपना मG तो कर सकते ह0 । असली दख ु जब सामने खड़ा है तब तो वह गुजरे गा तब गुजरे गा। Cजतना समय लेगा.

दख ु कम। अDान के तराजू के पलड़े कभी समतुल हो जाते ह0 । Dानी क# कोई अपे[ा नह/ं है । वह यह नह/ं कहता. स]यकHव को उपल6ध हो जाता है . जब दे खता है जैसा है वैसा है .न दे शO के। आज ु अमर/का मG जैसा दख ु है वैसा भारत मG नह/ं है . दसर/ तरफ दख ू ु बढ़ा। ऐसा ह/ समझो क Cजतना ऊंचा पहाड़ होगा उतनी ह/ गहर/ खाई होगी न उसके पास! पहाड़ बड़ा होने लगा तो खाई बड़/ होने लगी। अब हम एक उपिव क# आकां[ा करते रहते ह0 सदा. ऐसा हो। वह कहता है जैसा है . उससे वह राजी है । उसके मन मG तथाता का भाव है । सवJ ःवीकार है । कांटा गड़े तो ःवीकार है । फूल क# गंध नासापुटO मG भर जाए तो ःवीकार है । सुख बरसे तो ठWक. उतना ह/ सुख है । आधा-आधा है । संतुलन है । अDानी को यह कभी पता नह/ं चलता क दोनO बराबर ह0 । अDानी कहता है क जब बीत रहा है तब दख ु बहत ु gयादा है . CःथतूD हो जाता है. Cजतना है । और एक बड़/ चमHकार क# बात घटती है । तब आदमी को पहली दफा पता चलता है क Cजंदगी मG पचास-पचास ूितशत है दोनO। उतना ह/ दख ु है . वैसा है । इसमG होने क# कोई बात ह/ नह/ं है । जब कोई ऐसा Cःथर मित हो जाता है . Cजतना है । और सुख भी उतना ह/ मालूम होता है . हो नह/ं सकता। कारण? कारण एक बहत ु बहमू ु बढ़ जाता है . क खाई तो !बलकुल न हो. ऐसा शांत समिचत हो जाता है . सुख बहत ु कम। और जब बीत जाता है तो सुख बहत ु बहत ु gयादा हो जाता है . तो अचानक एक अपूवJ घटना घटती है --दख ु और सुख दोनO बराबर ह0 । अब यह बहु त है रानी क# बात है । इसे तु]हG समझने मG अड़चन होगी। इसिलए जैसे सुख बढ़ता है वैसे दख होता है ु भी बढ़ जाता है । अमीर आदमी gयादा दखी ु बजाय गर/ब आदमी के। संप. पहाड़ खूब ऊंचा हो। यह हो नह/ं सकता। अगर खाई नह/ं चाहए तो पहाड़ को भी िमटा दे ना होगा. YयOक दोनO सदा अनुपात मG ु wय िनयम है । जैसे सुख बढ़ता है वैसे दख होते ह0 । एक तरफ सुख बढ़ा. दख ु बढ़े गा। इससे तु]हG एक बात समझ मG आ जाएगी. तब समतल हो जाएगा। दिनया मG आदमी सुख बढ़ाने के उपाय करता है और साथ ह/ साथ दख ु ु बढ़ता जाता है .oshoworld. समःत महाDािनयO ने यह कहा है क Page 87 of 256 http://www.com . दख ु छोटा सा मालूम पड़ता है । लेकन ये दोनO ह/ Cःथितयां अDान क# ह0 । Dानी क# सुख-दख ु दोनO बराबर मालूम पड़ते ह0 .न दे श gयादा दखी होते ह0 बजाय !वप.dkuks lquh lks >wB lc गए। यह फर तुम मािलक हो पीछे । फर तु]हारे हाथ मG है । तुम अCःतHव को तो नह/ं बदल सकते लेकन ःमृित को बदल सकते हो। और हम सब ःमृित को बदलते रहते ह0 । तो ये दो बातG ह0 । जब सुख बीतता है . [णभंगुर मालूम पड़ता है । और जब बीत जाए तो तुम लौटकर याद करते हो तो हालत !बलकुल उलट/ हो जाती है । सुख खूब लंबा मालूम पड़ता है . दख ु बरसे तो ठWक। वह हर हालत मG राजी है । चूंक हर हालत मG राजी है इसिलए दख ु भी उतना ह/ मालूम होता है . न कोई लंबा. न कोई छोटा। YयOक Dानी क# कोई अपे[ा नह/ं है । उसक# कोई मांग नह/ं है । वह कहता नह/ं क यह रात बड़/ हो जाए. यह रात छोट/ हो जाए। वह कहता है जैसी है .

सफलता है तो !वफलता है । इसीिलए तो सारे Dानी कहते ह0 --समभाव। दोनO को बराबर मानो। दोनO बराबर ह0 । तुमने एक को बढ़ाया तो दसरा भी बढ़ जाएगा। तु]हार/ आकां[ा का कोई संबध ं नह/ं है । ू जीवन का िनयम यह है । जैसे कसी वृ[ को अगर आकाश मG ऊंचा उठना हो. नह/ं तो Cजंदगी !बखर जाए। अनुपात है । दन है तो रात है . उतने ह/ सुख. दख ु को घटा लGगे। सुख को बड़ा कर लGगे। पर तुमने दे खा? Cजतनी बड़/ सफलता होती है उतनी ह/ बड़/ !वफलता क# संभावना बढ़ जाता है । तुम Cजतनी ऊंचाई पर चलोगे उतने ह/ नीचे िगर जाने का डर भी साथ ह/ साथ बड़ा हो गया है । िगरोगे तो बहत ु नीचे िगरोगे। और िगरना पड़ता ह/ है । िगरना पड़े गा ह/। मगर आदमी सोचता है कुछ होता कुछ है । आदमी Cजंदगी के िनयम को दे खता ह/ नह/ं। यहां जीवन मG सब चीजG समतुल ह0 . इधर ितजोर/ मG पए बढ़G गे. दोनO चीजG समान ह0 . उसे अपनी जड़G नकJ तक पहंु चानी हOगी। !बना नकJ को छुए कोई ःवगJ को नह/ं छू सकता। इसिलए एक बड़ा अपूवJ जीवन का िनयम समझ मG आ जाए तो काम का होगा. सुख है तो दख ु है .म है तो मृHयु है . एक आंकड़ा सुख पर बढ़ जाता है । Page 88 of 256 http://www. सुख को बढ़ाने क# फब मत करो। सुख और दख ु को ःवीकार कर लो। तुम घटाने-बढ़ाने क# बात छोड़ दो। तुमने सुख बढ़ाया तो दख ु भी बढ़ जाएगा. वहां शर/र मG बीमारयां बढ़G गी। इधर !बःतर सुंदर हो जाएगा और नींद ितरोहत हो जाएगी। यह रोज हो रहा है । यह तुम जानते हो। यह तु]हार/ Cजंदगी मG हो रहा है । मगर यह सHय इतना कडु वा है क तुम इसे ःवीकार करना नह/ं चाहते। तुम इसको म‰े -नजर कए रहते हो। तुम इसको उपे[ा से टाले रहते हो। तुम कहते हो क नह/ं.dkuks lquh lks >wB lc दख ु को घटाने क# फब मत करो. वह दो और दो का ह/ है । इसमG कोई अंतर नह/ं पड़ता। तुम दख ु के ऊपर एक आंकड़ा बढ़ाओ.com . बहत ु काम का होगा। सुख को बढ़ाने क# फब मत करना. ज. तब तुम चमHकृ त हो जाओगे। तब आCखर/ हसाब मG िभखमंगा भी उतने ह/ दख ु पाता है . तो ह/ गाड़/ चल पाती है । तो फर आदमी Yया करे ? आदमी ःवीकार करे । जैसा है उसे वैसा ःवीकार कर ले। अपनी तरफ से चे_ा ह/ न करे । बजाय बदलाहट करने के दे खे क जीवन का रहःय Yया है । और Cजस दन तु]हG यह दख जाएगा. दख ु बढ़ जाएगा। दोनO साथ चलGगे। ये गाड़/ के दो चाक ू ह0 । एक को छोटा और एक को बड़ा तुम न कर सकोगे। नह/ं तो गाड़/ टटकर िगर जाएगी। यह साथ ह/ साथ बड़े -छोटे होते ह0 .oshoworld. तो उसको अपनी जड़G पाताल मG गहर/ भेजनी पड़G गी। अब वृ[ चाहे क जड़G तो गहर/ न जाएं और म0 ऊंचा उठ जाऊं तो यह नह/ं हो सकता। Cजतना ऊपर उठे गा उतना पाताल मG गहरा भी उतरे गा। नीHशे का बहत ु ूिसT वचन है : जो ःवगJ को छूना चाहता है . Cजतना सॆाट दख ु पाता है और सॆाट सुख। अनुपात बराबर होता है । अनुपात मG जरा भी फकJ नह/ं होता। अगर िभखमंगे के पास दो दख ु ह0 तो दो सुख ह0 । अगर सॆाट के पास दो करोड़ सुख ह0 तो दो करोड़ दख ु ह0 । अनुपात बराबर है . दख ु को घटाने क# फब करोगे तो सुख घट जाएगा। अगर तुम सुख को बढ़ाने क# कोिशश करोगे. सद है तो गमx है . ऐसे कैसे? सुख बढ़ जाएगा.

कभी सुख मG उलझे हो क जरा gयादा दे र रह जाए.dkuks lquh lks >wB lc यह तु]हG समझ मG आ जाए तो तुम बड़े चकत होओगे। तो यहां िभखमंगे और सॆाटO मG कोई बहत ु फकJ नह/ं है । माना क सॆाट के पास सोने के िलए बड़/ सेज है . मगर घोड़े बेचकर सो जाता है । सॆाट के पास घोड़े बहत ु ह0 लेकन घोड़े बेचकर नह/ं सो पाता। सो ह/ नह/ं पाता। सॆाट के पास भोजन तो सभी तरह के ह0 सुःवाद ु लेकन भूख खो गई है । भूख लगती ह/ नह/ं। िभखमंगे के पास भोजन तो !बलकुल नह/ं है । Mखा-सूखा िमल जाए तो बहत ु ध. दख ु आते. आनंद सदा से है । Cजस दन भी तुम समतुल हो जाओगे उसी दन आनंद का अनुभव शुM हो जाएगा। आनंद मौजूद ह/ है तु]हारे भीतर. सब ठहरा हआ है । सब Cःथर है . अनुपात बराबर है । जगत मG सभी कुछ संतिु लत है । इस संतुलन को दे ख लेना स]यकHव है । इस संतुलन को दे खने से आदमी समता मG Cःथर हो जाता है । तब एक अलग घटना घटती है --न तो सुख gयादा है . सब बराबर है । अचुनाव पैदा होता है । आदमी िन!वJकwप होने लगता है । चुनना ह/ Yया है .न है । आनंद को तुम यह मत समझाना क महासुख। क बहत ु -बहत ु सुख जोड़ दए तो आनंद बन जाएगा। आनंद का कोई संबध ं सुख से नह/ं है । आनंद उस िचNदशा का नाम है जहां तुमने सुख और दख ु दोनO क# सचाई पहचान ली और तुम दोनO से अलग हो गए। आनंद ःवभाव है । सुखदख ु आते ह0 . Cजसने दोनO को ठWक से दे ख िलया.oshoworld. मगर नींद कहां? और माना क िभखमंगे के पास सेज है ह/ नह/ं. हालांक घोड़े नह/ं ह0 . ऐसा िचN क# दशा शांत.न है Cजतना दख ु से िभ. ठWक है । जैसा है ठWक है . न कुछ वतJमान है . अचल है । Cजस दन ु अपने भीतर क# अचलता का अनुभव होता है उसी दन ठहर जाता है । तो Dानी को समय ह/ िमट जाता है । Page 89 of 256 http://www. लेकन म0 तो खड़ा दे खता रहता म0 सा[ी माऽ हंू । इस सा[ी मG आनंद का ज. [ण मG गया। दख ु लगता है खूब टकता है । बीत जाने पर अDानी को लगता है सुख खूब था. दख ु !बलकुल नह/ं था। Dानी को पता चलता है . जब सब बराबर है ! िमऽ बढ़ाओ. तो तुम भीतर लौटकर नह/ं दे ख पाते। और Cजसको यह दखाई पड़ गया क म0 आनंद हंू . न समय है । कालातीत समय शू. न तो सुख-दख ु है . न दख ु gयादा है . दख ु जाते. िसफJ तुम बाहर उलझे हो। कभी दख ु मG उलझे हो क दख ु न हो. सो जाएगा कह/ं पटर/ पर. िन!वJIन हो जाता है । िनधूम J जलने लगती है भीतर क# gयोितिशखा। तो Dानी को न तो सुख gयादा. न कुछ भ!वंय है . उसे एक तीसर/ बात दखाई पड़ती है क म0 सुख-दख ु के पार हंू । म0 अलग हंू । सुख आते. तो फायदा Yया है ? तो फर जैसा है . सुख जाते. उसके िलए समय िमट जाता है । सुख मG लगता है .यभाग। मगर जब िमल जाता है तो जो ःवाद उपल6ध होता है वह कसी सॆाट को उपल6ध नह/ं होता। साथ-साथ है .com .म होता है । आनंद सुख नह/ं है । आनंद सुख से उतना ह/ िभ. लेकन नींद है । सोएगा तो घोड़े बेचकर सो जाता है .य अवःथा उपल6ध होती है । न कुछ अतीत है . शऽु बढ़ जाते ह0 . न दख ु gयादा। और Cजसको यह दखाई पड़ गया क सुख-दख ु बराबर है . आनंद है । सुख-दख ु घटते ह0 .

उ. ूेम क# अनुभिू त भी नह/ं होती। ृायड तो कहता है क ूेम कुछ भी नह/ं है . अपने भोग को िसT करे । तो Cजसने मान रखा है क म0 शर/र हंू उसे तो ूेम क# भी अनुभूित नह/ं होती। म0 तु]हG इसिलए यह कह रहा हंू ताक तु]हG पता चल जाए क तु]हार/ मा. न कोई फल लेनेवाला बचेगा। ऋणं कृ Hवा घृतं !पवेत। अगर ऋण लेकर भी घी पीने को िमले तो छोड़े ना. भौितकवाद/ को. चावाJकवाद/ को. इसके भीतर कुछ है ह/ नह/ं उसे ूेम क# अनुभिू त भी कैसे होगी? बस काम ह/ क# अनुभिू त हो सकती है । चावाJक ने कहा है . न कोई पूछनेवाला है । ऋण लेकर भी घी पी ले। चोर/ करके भी अपनी कामवासना को तृm कर ले। कसी भी भांित हो. उसके पहले नह/ं होगी। ये तीन तल है --शर/र यानी काम. बहत gयादा नह/ं. और जरा भी िचंता न करे कमJफलO क#.oshoworld. ूेम क# भी नह/ं होती। थोड़े से लोगO को ूेम क# अनुभिू त होती है । और !वरले लोगO को भ!" क# अनुभूित होती है । भ!" कामवासना का आमूल Mपांतरण है । ूेम मG कामवासना थोड़/ सी बदलती है . काम क# अनुभूित होती है . कोई परमाHमा होगा। न कोई परमाHमा है . येन केन ूकारे ण। कसी भी !विध से हो. जरा भी फब न करे पाप क# या पु‡य क#. मन को भी ःवीकार करोगे तो फर ूेम क# करणG उठG गी। जब तुम मन के भी पार उठोगे और आHमा को ःवीकार करोगे तो--तो ह/ केवल भ!"रस का ःवाद आएगा। तु]हारा ूƒ ईमानदार/ का है । ऐसा ह/ हो रहा है । अिधक लोगO को काम क# ह/ अनुभूित होती है . ूेम क# अनुभिू त भी होती है लेकन भ!"रस क# अनुभूित कैसे होती है ? काम क# अनुभूित का अथJ होता है . उसके पार.यता से अंतर पड़ता है । तुमने पूछा है . पी ले। इसक# भी फब न करे मरने के बाद कोई कयामत होगी. YयOक आHमा तो है ह/ नह/ं। न तो कोई आएगा लौटकर. बस काम का ह/ !वकार है । ूेम क# भी कोई अनुभूित नह/ं है । जो मानता क मनुंय शर/र पर ह/ समाm है . मन यानी ूेम. आHमा यानी भ!"। तो जब तक तुम शर/र ह/ मानोगे तब तक काम ह/ काम रहे गा। जब तुम थोड़े शर/र से ऊपर उठोगे.हG ूेम क# अनुभूित भी नह/ं होती। नाCःतक को. और ूेम क# भी अनुभूित होती है । YयOक दो बातG तुम मानते हो। एक तो तुम मानते हो क म0 शर/र हंू और एक तुम मानते हो क म0 मन हंू । तो ूेम क# अनुभिू त होती है । अगर तु]हारे जीवन मG तीसर/ बात क# ूतीित भी उठ आए क म0 आHमा हंू तो भ!" क# अनुभूित होनी शुM होगी. तु]हारा तादाH]य अभी शर/र से है । तुम सोचते हो म0 शर/र हंू । तो काम क# अनुभूित होती है । म0 शर/र हंू तो दस ू रे का शर/र मुझे िमले। शर/र शर/र क# मांग करता है । तो काम क# अनुभूित होती है । जो लोग िसफJ इतना ह/ मानते ह0 क म0 शर/र हंू .com . थोड़/ ु थोड़/ सी बदलती है । बहत ु बदलाहट होती है । लेकन फर फर वा!पस कामवासना मG िगर जाती है ऊजाJ। लेकन थोड़/ बदलाहट होती है । भ!" मG आमूल बदलाहट हो जाती है । जड़O से बदलाहट हो जाती है । फर Page 90 of 256 http://www.dkuks lquh lks >wB lc चौथा ूƒ: काम क# अनुभूित होती है .

com . रtत दे ने क# बात क#. समझाया. या बेहोश हो गया. या Cखड़क# से जाएं। तो आग बुझान वालO को खबर क# वे आए। उनके ूधान ने आकर पूछा. म0 अभी दे खता हंू । वह जाकर अंदर पहंु चा। दरवाजा खटखटाया। और कहा. िचwलाई. दोनO को जोड़ता है । तो तुम घबड़ाना मत.. कौन कह रहा है मुझसे लड़क#? अभी तक बोला ह/ नह/ं था वह। जwद/ से दरवाजा खोलकर बाहर आ गया। उसने कहा कसने मुझसे लड़क# कहा? म0 लड़का हंू । Page 91 of 256 http://www.. कोई फब नह/ं.dkuks lquh lks >wB lc िगरने का उपाय नह/ं रह जाता है । जो भ!" मG पहंु च गया है फर उसके जीवन मG कामवासना नह/ं रह जाती। तो कामवासना मG है उसके जीवन मG भ!" नह/ं हो सकती। ूेम दोनO के बीच का सेतु है . अगर ूेम क# अनुभूित होती है तो तुम ठWक राःते पर हो। सेतु तक तो पहंु च गए हो। एक कनारे काम है । दसरे कनारे भ!" है । बीच मG यह सेतु है . मां से नाराज हो गया और अपने को जाकर बाथMम मG बंद कर िलया भीतर से। लाख मां ने िसर पटका.कसी बात पर नाराज हो गई। इतना !बगड़ जाएगा यह तो सोचा नह/ं। कोई उपाय न दे खकर कसी ने सलाह द/ क अब तो एक ह/ राःता है क आग बुझाने वालO को खबर करो। उनको पता रहता है कैसे दरवाजा तोड़G . मगर मामला यह है । यह बsचा अंदर हमG पता ह/ नह/ं चल रहा क जी!वत है . रोई..oshoworld. फुसलाया क#. कुछ खास dयवहार नह/ं कया। जैसा रोज का dयवहार है . आग कहां लगी है ? महला ने कहा. एक घर मG एक आठ साल के बsचे ने.नाटा बांधकर खड़ा हो गया। वह !बलकुल Iयानी हो गया। वे दरवाजा पीटG मगर वह बोले ह/ नह/ं। तो और घबड़ाहट बढ़ने लगी क सांस चल रह/ है इसक# क नह/ं! Cजंदा है क मर गया? हआ Yया? सब उसक# मां को ु डांटने लगे क ऐसा थोड़े dयवहार करना चाहए! उसने कहा. यह पुल ू है ूेम का। तुम इसमG मIय मG आकर खड़े हो गए हो। थोड़/ चे_ा करो तो भ!" क# धारा बहे गी। Yया चे_ा करो Cजससे भ!" क# धारा बहे ? तुमने दे खा? चौदह साल तक बsचा बड़ा होता है तब तक काम क# धारा नह/ं बहती। YयOक अभी उसका काम पु_ नह/ं है । अभी काम ऊजाJ तैयार नह/ं है । चौदह वषJ क# उॆ मG अचानक काम ऊजाJ पकेगी और एक !वःफोट होगा। चौदह वषJ तक लड़के लड़कयO के साथ खेलना भी पसंद नह/ं करते। कोई लड़का खेलता भी हो लड़कयO के साथ तो कहते ह0 क तू लड़क# है Yया? म0ने सुना. या ऊपर से उतरG या Yया करG ..जब दे खा लड़के ने क पड़ोसी भी आ गया तो उसको और मजा आया होगा। वह !बलकुल ह/ स. डांटा. मगर वह गुपचुप खड़ा ह/ रह गया अंदर। वह बोले ह/ नह/ं। तब तो मां घबड़ाई। पित परदे श गए। वह और मुCँकल मG पड़/। पड़ोिसयO को बुला िलया। पड़ोसी भी. न आवाज जवाब दे ता है । ु उसने कहा. आग कहां भी नह/ं लगी। आप [मा करG . या मूिछJ त हो गया या Yया हआ। बोलता ह/ नह/ं है . बुझाया. लड़क# बाहर िनकल। वह लड़का बोला.

यह इस तक पहंु चेगी नह/ं। अनुभव ह/ अनुभव को समझ पाता है । तुम उससे कहोगे.dkuks lquh lks >wB lc चौदह साल क# उॆ तक तो लड़के लड़कयO के साथ खेलने मG भी डरते ह0 . बाजार क# दोःती होगी.य क# भी थोड़/ तो झलक Page 92 of 256 http://www. लेकन भ!" क# ^!_ से तो बहत ु कम लोग ूौढ़ होते ह0 । पूर/ Cजंदगी िनकल जाती है । होना तो नह/ं चाहए। दभाJ ु 5य है । चौदह साल क# उॆ मG काम ऊजाJ परपYव होती है और पहली दफा कामवासना उठती है । लड़के लड़कयO मG उHसुक होने लगते ह0 लड़कयां लड़कO मG उHसुक होने लगती ह0 । अब उनक# पुरानी दरानी दोCःतयां ढ/ली पड़ने लगती ह0 --लड़कO से लड़कO क#. खुद ह/ जान लेगा। वह तो संयोग--सौभा5य है . Cजससे कल तक कोई रस नह/ं था. बन गई। उसके बाद फर दोCःतयां नह/ं बनतीं। बचपन क# दोःती टकती है । चौदह साल के बाद जो दोCःतयां बनती ह0 . Uी क# पुष से। ु पुष क# Uी से दोःती बनेगी। !वजातीत िलंग मG रस शुM हआ। अगर यह गित ठWक से ु बढ़ते रह तो एक दन ूेम का भी ज. चौदह साल मG सभी काम क# ^!_ से ूौढ़ हो जाते ह0 .oshoworld. अहं कार को चोट पहंु चाती है । लेकन चौदह साल के बाद फर दोःती नह/ं बनती। YयOक अब एक नई दिनया शुM हो गई। ु अब कामचलाऊ Yलब क# दोःती होगी. लड़कयO से ु लड़कयO क#। एक नया रस पैदा होता है !वपर/त मG। CजसमG कल तक कोई रस नह/ं था.म होता है --लेकन अगर ठWक से बढ़ती रहे । अYसर ऐसा हो नह/ं पाता। अगर तुम कसी Uी के ूेम मG बहत ु गहरे उतर गए. संकोच भी करते ह0 । और बात ह/ फजूल लगती है । लड़कO को लड़कO मG रस होता है । लड़कयO को लड़कयO मG रस होता है । अभी काम ऊजाJ पक# नह/ं। अगर आठ साल का बsचा तुमसे पूछे क काम का संबध ं कैसा होता है । तो तुम मुCँकल मG पड़ जाओगे। कैसे समझाओगे? तुम मुझसे पूछ रहे हो भ!" का रस कैसा होता है ? वैसा ह/ मुCँकल मG तुम मुझे डाल रहे हो। आठ साल के बsचे को कैसे समझाओगे क संभोग का रस कैसा होता है ? समझाओगे भी तो समझा न पाओगे। कहोगे भी तो खुद भी समझोगे साथ-साथ क यह बात बेकार कह रहा हंू. थोड़ा ठहर। जरा बड़ा हो जा. क. ु मगर कामचलाऊ। इसिलए तो तुम कहते हो बचपन क# दोःती फर YयO नह/ं बनती? अब एक नया ूयोग शुM हआ जीवन मG। अब Uी क# पुष से दोःती बनेगी. उसक# वासना मG बहत ु गहरे उतर गए तो आज नह/ं कल उसक# दे ह के साथ-साथ उसके भीतर के चैत. बस कामचलाऊ होती ह0 । बचपन क# दोःती बात ह/ और है । बचपन क# दोःती तो ऐसी भी होती है क अगर बचपन का दोःत तु]हारे घर आ जाए तो तु]हार/ प~ीर ् ईंया करती है YयOक वह उससे पहले तु]हारे जीवन मG आया था और उससे गहर/ उसक# जड़G गई ह0 । बचपन के दोःत पC~यां पसंद नह/ं करतीं। बचपन क# सहे िलयां को पित भी पसंद नह/ं करते। YयOक उनसे भी पहले कोई. दकान क# दोःती होगी.com . आज उसमG ह/ रस जगता है । आज उसमG ह/ सारे जीवन का सुख मालूम होता है । इसीिलए चौदह साल के पहले जो दोःती बन गई. Cजससे कल तक बचे थे. यह बात जरा क_ दे ती है .

बड़े वैDािनक पर/[ण। दांत टट ूेम खो गया है । अब िसफJ बातचीत रह गई है । ूेम के िलए जMर/ है क काम का संबध ं एक अविध तक गहरा हो। एक Uी. दो तीन साल मG पुष बदल िलया। तो ऐसे ह/ हो गया जैसे आदमी कार बदल लेता है । नया माडल आया तो कार बदल ली। तो ूेम का रोपा जम ह/ नह/ं पाएगा। ूेम के रोपे के जमने के िलए थोड़ा समय चाहए. ू गया है .com .dkuks lquh lks >wB lc िमलनी शुM होगी। तो धीरे -धीरे काम ूेम मG Mपांतरत होता है । इसिलए Cजन लोगO ने भी मनुंय को समझने क# कोिशश क# उन सब ने यह कहा है क अगर एक ह/ dय!" से काम के संबध ं gयादा दे र तक रह जाएं तो अsछा। नह/ं तो ूेम पैदा ह/ नह/ं हो पाएगा कभी। इसिलए पCvम मG ूेम खो रहा है । दोNीन साल मG Uी बदल ली. एक पुष का संबध ं खूब गहराई मG जाए। इतनी गहराई मG जो क धीरे -धीरे वह एक दसरे के शर/र को छूने ू क# बजाय एक-दसरे के मन को छूने लगG। मन गहरे मG है . प~ी को तु]हार/ दे ह ःमरण न रहे तो धीरे -धीरे ूेम क# झलकG. थोड़/ अविध चाहए। पCvम से ूेम खो रहा है हालांक ूेम क# बहत ु बातचीत हो रह/ है । अकसर ऐसा होता है क जो चीज खो जाती है उसक# खूब बातचीत होती है । फर बातचीत ह/ रह जाती है । बातचीत ह/ इसीिलए होती है क चीज खो गई। जब चीज होती है तो कौन बात ू करता है ? जब चीज खो जाती है तो लोग बात करते ह0 । ऐसे ह/ जैसे तु]हारा एक दांत टट जाए तो जीभ वह/ं-वह/ं जाती है । जब तक था तब तक कभी नह/ं जाती थी। अब नह/ं है .oshoworld. ूेम झलक मारना शुM करे गा। अगर ठWक से सब चलता रहे तो मेरे हसाब मG अcठाइस साल क# उॆ मG ूेम क# पहली झलक िमलती है । जैसे चौदह साल क# उॆ मG काम क# पहली झलक िमलती है । चौदह साल अगर कामवासना का संबध ं बड़/ िन`ा से. दे ह गौण हो गई। और अगर यह न हो जाए अcठाइस साल क# उॆ मG तो अcठाइस साल क# उॆ के कर/ब तलाक आना िनCvत है YयOक शर/र से तो चुक गए तुम। अगर ूेम का संबध ं जुड़ गया तो Page 93 of 256 http://www. जीभ वह/ं-वह/ं जाती है । बड़े !ववाद. छह सmाह मG फूल आ जाएंग. पीढ़यां लगती ह0 । समय बीतता। अविध चाहए। तो अगर काम का संबध ं गहरा हो जाए. तां!ऽक भाव से-िसफJ कामभोग से नह/ं बCwक एक गहन जीवन के ूयोग क# भांित चले तो अcठाइस वषJ के कर/ब कह/ं झलक िमलनी शुM होती है ूेम क#। पहली दफा ूेम का अवतरण होता है । पहली दफा तु]हG लगता है क दे ह मूwयवान नह/ं रह/. उतनी गहराई के िलए थोड़ा ू समय चाहए। ूेम मौसमी फूल नह/ं है । काम तो मौसमी फूल है । डाल दया. इतना गहरा हो जाए क तु]हG अपनी प~ी क# दे ह ःमरण ह/ न रहे . चांदNारO से बात करता हो तो छह सmाह मG नह/ं लगते ऐसे वृ[। वषr लगते ह0 . े मगर बाक# छह सmाह मG चले भी जाएंगे। तीन चार मह/ने क# Cजंदगी ह/ है । जwद/ Cखल आएंगे. जwद/ मुरझा भी जाएंगे। लेकन अगर तु]हG कोई वृ[ लगाना हो जो आकाश छूता हो. बड़ा !वचार. पूजा से. वह/ं-वह/ं जाती है --चौबीस घंटे। तुम हजार बार हटा लेते हो। इधर जरा भूले क जीभ वहां गई। खाली जगह खलती है । पCvम मG ूेम क# चचाJ हो रह/ है । बड़/ कताबG िलखी जाती ह0 .

तीन मह/ने हो गए.. एक बूढ़े आदमी ने न6बे साल क# उॆ मG शाद/ कर ली। पचासी साल क# Uी. खूब दबाया। फर दोनO बड़े मगन होकर सो गए। दसर/ रात उतना नह/ं दबाया। बूढ़े ह/. Cजसके शर/र के साथ तु]हारा शर/र हलिमल गया.! वह ूस. शाद/ कर ली। पहली रात सुहागरात! बूढ़े ने बुढ़या का हाथ पकड़ा. और करवट लेकर सो गई। न6बे साल क# उॆ मG काम-वासना होगी तो इसी तरफ क# मूढ़ता होगी। होनी ःवाभा!वक है YयOक अूाकृ ितक है यह घटना। अगर जीवन का !वकास ठWक से चले तो अcठाइस साल क# उॆ मG ूेम का ःवर पहली दफा सुनाई दे गा। Cजसके साथ चौदह साल तुम रहे हो. वहां खूब ूेम चलता है । बूढ़े अःसी साल के बूढ़े ूेम मG पड़ जाते ह0 । gयादा कुछ अब कर भी न सकGगे। म0ने सुना है . नया पित खोजोगे.न नह/ं थी यहां YयOक कोई पुष उसको ूेम नह/ं करता। पCvम मG उसे ूेम करनेवाले िमल जाएंगे। पूरब मG मुCँकल होगी। YयOक पCvम मG जो प0सठ साल के हो गए ह0 . उनक# भी मानिसक उॆ चौदह साल से ऊपर नह/ं गई है । वे िमल जाएंगे। पCvम मG बूढ़O के िलए जो ःथान बनाए जाते ह0 --वृTाौम जैसी चीजG. अूौढ़ लगता है । बूढ़ा भी हो जाए तो बचकाना लगता है .com . न6बे साल का बूढ़ा. मेरे िसर मG ददJ है .oshoworld. उसक# मुःकुराहट सब जगह उसके िलए सु!वधा बना ु दे ती है लेकन प~ी को वह मुःकुराएगा तो भी प~ी जानती है क आज तु]हार/ मुःकुराहट Page 94 of 256 http://www.! ू बस थोड़ा सा दबाया. एक हो गया. शर/र से तो चुक गए। अब यह शर/र तो दे ख िलया चौदह साल तक। अब तो इसमG कुछ रस नह/ं रहा। अगर नया संबध ं गहरे तल पर बन गया तो ह/ !ववाह टकेगा. सNर साल के हो गए ह0 . अ.हG समझ ू ू आनी शुM हो जाती है । पित कहता भी नह/ं और प~ी समझ लेती है क उसके मन मG Yया है । प~ी कहती भी नह/ं और पित समझ लेता है क उसके मन मG Yया है । ऐसी बात न आ जाए तो समझना क अभी तुम पित प~ी हए ु ह/ नह/ं। अभी असली बात नह/ं घट/। एकदसरे के भीतर बात उठती है । और दसरा समझ लेता है । एक तरह क# !विश_ टे लीपैथी शुM ू ू हो जाती है । !वचारO का संूेषण शुM हो जाता है । पित उदास है तो प~ी को धोखा नह/ं दे पाता। सार/ दिनया को धोखा दे ले. मन ू महHवपूणJ हो जाएगा। तो पित प~ी अगर सच मG एक दसरे के ूेम मG हO तो एक दसरे के मन क# उ. Cजसके शर/र क# वीणा तु]हारे शर/र क# वाणी से लयबT हो गई. दो दे हG अब दो दे हG जैसी नह/ं रह गई। अब दोनO दे हO के बीच एक सेतु बन गया है । अब पहली दफा समझ मG आएगा क दसरा एक ूाणवान मन है । दे ह गौण हो जाएगी. कुछ बात कल लगती है । जैसे कुछ बु!TमNा पैदा नह/ं होती। Yया कारण होगा? प0सठ साल क# एक Uी ने मुझे कुछ दन पहले पूछा क म0 यहां आई हई ु हंू . Cजससे फर शर/र का रस शुM हो। लेकन इसका मतलब यह हआ क तुम फर Cजस दन नई प~ी खोजी उस दन तुम फर चौदह ु साल क# उॆ मG िगर गए। इसिलए अमर/कन आदमी मG तुम पाओगे ूौढ़ता क# कमी। वह बचकाना लगता है . और कोई पुष यहां मुझसे ूेम करता ह/ नह/ं। तो म0 वा!पस चली। प0सठ साल...dkuks lquh lks >wB lc ठWक है .यथा तुम नई प~ी खोजोगे. सो गए। तीसर/ रात जब बूढ़ा दबाने लगा तो बुढ़या ने कहा..

यािसयO को कहता हंू . नह/ं तो चूक जाओगे। यह/ं है । यह/ं ठWक से समझो। दध ू से घबड़ा मत जाना. संबमण हो ह/ जाए... नह/ं तो नवनीत न िनकाल पाओगे। नवनीत िछपा है . इसक# सवाJगीणता मG Cजयो। इस ूेम मG बाधाएं खड़/ न करो। छोट/-छोट/ झंझटG . उस दन समझना क ूेम हआ। ू ु तो म0 नह/ं जानता Cज. छोटे -छोटे उपिव खड़े मत करो। सार/ बाधाएं हटा दो। अब इस ूेम को पूरा तरं िगत होने दो। यह/ तरं ग बड़/ होते-होते.com . उसे खोजना है । दो शर/र का संबध ं काम। Page 95 of 256 http://www. ु अड़तालीस हआ तो चलेगा। मरने के एक दन पहले भी अगर भ!" रस हो जाए तो भी ु चलेगा। मगर वह भी नह/ं हो पाता। अकसर लोग कामवासना मG ह/ उलझे रह जाते ह0 । कुछ लोग जो कामवासना से उठने मG बढ़या ह0 वे फर ूेम मG पड़े रह जाते ह0 । बहत ु कम लोगO के जीवन मG हरभ!" पैदा होती है । अब तुम मुझसे पूछते हो क भ!"रस क# अनुभूित कैसे होती है ? अगर तु]हG ूेम का अनुभव हआ है --तुम कहते हो म0 मान लेता हंू --तो अब इस ूेम के अनुभव मG गहरे उतरो। ु अब इस ूेम को Cजयो. दसरे तक बात पहंु च ह/ जाए.हOने ूेम को जाना है या नह/ं। उ.काम क# तरं ग बड़/ होकर ूेम बन जाती है .हOने कहा तो म0 मान लेता हंू क जाना होगा। लेकन ूेम का जानना भी दMह है --दMह हो गया है । और ु ु अगर ूेम फर चौदह साल तक साथ चल जाए तो कर/ब बयालीस साल क# उॆ के पास भ!"-रस पैदा होता है । चौदह साल कामवासना का गहरा संबध ं . ूेम क# तरं ग को उठाता है . छोट/-छोट/ बातG. भ!"रस शुM होता है । यह कुछ लक#र के फक#र मन बन जाना क म0 कहता हंू क बयालीस तो बयालीस। िसफJ काम के िलए कह रहा हंू ताक तु]हार/ समझ मG आ जाए। प0तालीस हआ तो चलेगा.हOने ूƒ पूछा है उ. ूेम क# तरं ग बड़/ होकर भ!" बन जाती है । इसिलए तो म0 कहता हंू . नह/ं तो दह/ नह/ं जमेगा। और दह/ को फGक मत दे ना क खcटा है . कसी को संसार छोड़कर भागने क# जMरत नह/ं है । इसी संसार मG परमाHमा िछपा है । जैसे दध ू को तुम दह/ बना लेते हो। दह/ दध ू मG िछपा था। फर दह/ से तुम मYखन िनकाल लेते। मYखन भी दह/ मG िछपा था। ऐसा ह/ मामला है । कामवासना यानी दध। इसे जमाया तो दह/ बनता है --ूेम। फर दह/ को मथा तो नवनीत--भ!"। ू ूेम को मथो। ूेम को खूब मथो। अहिनJश मथो। और भूलकर भी मत सोचना क परमाHमा तु]हार/ प~ी या पित के !वपर/त है । परमाHमा का आगमन तु]हारे ूेम के Rार से ह/ होगा। इसिलए म0 संसार के जरा भी !वरोध मG नह/ं। अपने सं. कह/ं भागकर मत जाना.oshoworld. चौदह साल का दो मनO के बीच गहरा संबंध आHमा क# तरं ग को उठाता है . तुम कहो। प~ी पित को धोखा भी चाहG और न िछपा पाएं.dkuks lquh lks >wB lc मG उदासी है । कुछ बात है .

पशुओं मG. लेकन मेर/ आHमा और तु]हार/ आHमा अलग-अलग नह/ं है । मेर/ शर/र और तु]हारा शर/र !बलकुल अलग-अलग. ऐसा नह/ं है । मेरा शर/र अलग. मेरा मन और तु]हारा मन खूब िमला-जुला. तो सब तरफ सावन दखाई पड़ने लगता है । आCखर/ ूƒ: आप मG असंभव संभव हआ है . कौन सी बात तकJ के ूितकूल। कौन सी बात मेरे शाU के अनुकूल.dkuks lquh lks >wB lc दो मनO का संबध ं ूेम। दो आHमाओं का संबध ं भ!"। ःवभावतः दो शर/र का संबध ं [णभंगुर होगा! दो शर/र इतने ःथूल ह0 .वह/ं तो अथJ था पुराने दनO मG. gयादा सुखदायी होगा.com . कौन सी बात ठWक नह/ं। कौन सी बात ठWक नह/ं। कौन सी बात तकJ के अनुकूल.. अघट घटत हआ है । और आपको समझना भी ु ु असंभव सा ह/ लगता है । ऐसा YयO? समझना चाहोगे तो असंभव हो जाएगा। समझने क# चाह मG ह/ दर/ ू पैदा हो जाती है । तुम ूेम से सुनो. YयOक दो आHमाएं वःतुतः दो नह/ं ह0 । आHमा तो एक ह/ है संसार मG। मेर/ आHमा अलग और तु]हार/ आHमा अलग. एक [ण को भी कर/ब आ जाते ह0 यह भी चमHकार है । दो मनO का संबध ं थोड़ा ःथाई होगा। शर/र से gयादा ःथाई होगा.. सब तरफ परमाHमा दखाई पड़े गा आंख जब जान लेती है एक दफा भ!" के रस को. न समझG तो ठWक। यह समझने का हसाब ह/ अलग रख दो। Page 96 of 256 http://www. तु]हारा शर/र अलग--सच. पहाड़O मG. जब हम कहते थे पित मG परमाHमा। चूक इतनी ह/ हो गई थी क वह अधूर/ बात थी। प~ी मG भी परमाHमा कहा जाना चाहए। Cजस दन तु]हG अपने !ूय मG परमाHमा दखाई पड़ जाए उस दन आंख खोलकर दे खोगे और तु]हG परमाHमा सब तरफ दखाई पड़े गा। पौधO मG. कौन सी बात मेरे शाU के ूितकूल। तुम इस सब उधेड़बुन मG पड़ जाते हो। वह शाU क# धूल तु]हारे भीतर अंधड़ होकर उठने लगती है । तुम मुझे तो भूल ह/ जाते हो। उस अंधड़ मG तु]हG कभी-कभी कुछ-कुछ सुनाई पड़ता है । कुछ का कुछ भी सुनाई पड़ता है । और फर तुम dया…या कर लेते हो। फर तुम अपने हाथ मG उलझन खड़/ कर लेते हो। ये बातG समझने क# नह/ं ह0 । ये बातG ूेम मG उतरने क# ह0 । तुम िसफJ सुनो। Yया फब समझने क#? समझG तो ठWक. समझने इHयाद क# फब छोड़ो। तुम िसफJ ूेम से सुनो और समझ जाओगे। समझने चले तो चूक जाओगे। YयO? YयOक जब तुम समझने बैठते हो तब तुम बु!T को बीच मG ले आते हो। तुम पूरे व" सजग होकर दे ख रहे हो क कौन सी बात ठWक. और मेर/ आHमा और तु]हार/ आHमा एक। तो अगर एक आHमा से भी तु]हारा पूरा भ!" का संबध ं बन जाए.oshoworld. gयादा तृिm लाएगा। लेकन फर भी दो मन अलग-अलग ह0 । दो आHमाएं जब िमलती ह0 तो बांित घटती है . gयादा रसपूणJ होगा. प~ी मG तु]हG परमाHमा दखाई पड़ जाए और पित मG तु]हG परमाHमा दखाई पड़ जाए. आंख पर जब सावन उतर आता है भ!" का. पC[यO मG.

बैठ तो गए लोग लेकन सब तैयार होकर बैठ गए। सबने अपने शर/र का अकड? िलया क कभी भूल-चूक मG भी हल जाओ.com .dkuks lquh lks >wB lc यह समझने क# दकानदार/ क# हटा दो। तुम िसफJ सुन लो। ऐसे सुन लो.. क यह नाहक क# हHया होगी। भले-अsछे लोग हल रहे ह0 । यह पागलO को हआ Yया है ? लेकन जैस-े जैसे लोग हलने लगे. फर बीस-पsचीस लोग हले. उसके दरबार मG एक संगीतD आया.oshoworld. मूितJयO क# तरह लोग बैठे रहे । फर पांच-सात लोग हलने लगे. लेकन कुछ समझ मG नह/ं आ रहा है । समझने को है Yया? झरना है कल कल है . नवाब तो घबड़ाने लगा। उसने यह नह/ं सोचा था क कटवाना ह/ पड़े गा। मगर अब तो मामला ऐसा है क कटवाना ह/ पड़े गा। अब तो अपने वचन दे दया है । नवाब तो सुन ह/ न पाए। वह तो बार-बार यह/ दे खता रहे क और मरे । कतने लोग गए! िसपाह/ भी डरने लगे. बड़ा रस आता है । जब कोई वीणा बजाता है तो तुम Yया समझते हो? लेकन डोलने लगते हो। ये बातG डोलने क# ह0 . लखनऊ का एक पागल नवाब.. तो यह पागल नवाब है । फर यह भी नह/ं तय करे गा क भूल-चूक से मYखी आ गई थी इसिलए शर/र हल गया था। यह तो पागल तो पागल। यह सुनेगा नह/ं। और उसने चारO तरफ नंगी तलवारG िलए िसपाह/ खड़े कर दए। वीणावादक ने वीणा बजाई। कोई दस-पंिह िमनट तक तो कोई नह/ं हला. लेकन मुCँकल से हजार एक लोग आए। YयOक यह बड़ा खतरनाक था। हजार मG भी ऐसे ह/ लोग आए हOगे. समझने क# नह/ं। म0ने सुना है . बड़ा वीणावादक। उस संगीतD ने कहा क बजाऊंगा तो वीणा लेकन मेर/ एक शतJ है । म0 इस !बना शतJ के कभी बजाता ह/ नह/ं। मुझे सुनते व" कोई िसर न हले। नवाब तो पागल था। शायद वाCजब अली हो या कोई और हो. इसमG डू बो। जब प[ी गुन-गुन करते तब तुम समझते तो नह/ं। मगर कहते हो. डोलने लगे. जैसे सांप बीन क# आवाज सुनकर डोलने लगे। Page 97 of 256 http://www. संगीतD डू बने लगा। फर तो कोई ु दोNीन सौ लोग डु बक# लगाने लगे. और Yया समझना है . वे सोचकर आएं। अगर िसर हला तो गरदन उतार द/ जाएगी। संगीतD का बड़ा नाम था और लखनऊ के रिसक लोग बड़े दन से ूती[ा करते थे क कब यह शुभ घड़/ आएगी क इसको सुनGगे। लेकन यह बड़/ झंझट खड़/ हो गई। लाखO लोग आए होते। दरू-दरू से लोग आए होते सुनने. फर कोई सौ लोग. फर दस-पंिह लोग हले. मगर पYका लखनवी था। उसने कहा. खड़े थे आसपास. जैसे कोई झरने ु का कल-कल नाद सुनता है । वहां तो तुम समझने के िलए नह/ं जाते। वहां तो तुम नह/ं कहते क यह झरना कुछ समझ मG नह/ं आ रहा। कल कल कल तो हो रह/ है . जो !बलकुल हर हालत मG अपने पर काबू रख सकG। Cजनको यम-िनयम आसन इHयाद का पता होगा क !बलकुल मारकर िसTासन बैठ जाएंगे आंख बंद करके। हलGगे ह/ नह/ं तो फर Yया होगा? आ गई. तुम फब मत करो। िसर हला क उसी व" उतरवा दG गे। तलवार तैयार रखGगे। डु ं ड/ !पटवा द/ लखनऊ मG क जो लोग सुनने आएं.

इनको रोक लG। बाक# चले गए। नवाब ने पूछा.com .. नह/ं. हम हले नह/ं। हमG तो पता नह/ं। जब तक हमG अपना पता था तब तक तो हम !बलकुल संभले बैठे रहे । कौन मरना चाहता है ? जब हम लापता हो गए.dkuks lquh lks >wB lc आधी रात संगीतD ने वीणा बंद क#। सॆाट ने कहा क पकड़ िलए जाएं वे लोग। कोई तीनसाढ़े तीन सौ लोग पकड़ िलए गए। संगीतD ने कहा.oshoworld. म0 इनसे पूछना चाहता हंू क पागलो. यह/ मेरे समझने वाले ह0 । यह/ म0 तुमसे कहता हंू । समझना हो तो बु!T को एक तरफ रखो और समझ जाओगे। लेकन अगर बु!T को बीच मG िलया और समझने क# बहत ु खींचातानी क# तो चूक जाओगे। ये कुछ बातG ऐसी ह0 क हलोगे तो समझोगे। ये बातG कुछ ऐसी ह0 क डोलोगे तो समझोगे? ये बातG कुछ ऐसी ह0 क नाचोगे तो समझोगे। ये बातG बु!T क# पकड़ मG आनेवाली बातG नह/ं ह0 । ये पागलO क#. समझ मG न आएंगी। हलने क# ह]मत रखी तो कोई तु]हG समझने से नह/ं रोक सकता। यह समझ मG आने ह/ वाली है । मगर यह समझ Vदय क# है .. जब वीणा ह/ रह गई. इसके पहले क तुम इ. ूाण क# है . हले YयO? तु]हG Cजंदगी का कोई लगाव नह/ं है ? तो उन लोगO ने कहा.हG सुनाओ कुछ और. भ!" क# है । रस िनंप. बु!T क# नह/ं. !वचार क# नह/ं. इनका Yया करना? इनको कटवा दG ? संगीतD ने कहा. बाक# को जाने दG . ये ठWक कहते ह0 । इसिलए इनको चुना है । यह/ मेरे सुननेवाले ह0 .न होती है । रस क# िनंप!N से आती है . भाव क# है . पर सॆाट ने कहा. यह/ तो मेरे सुननेवाले ह0 । अब इनको असली सुनाऊंगा। नकली गए। वे जो आसन इHयाद लगाकर बैठे थे उनको संगीत का कुछ पता नह/ं। यह/. जMर समझोगे। आज इतना ह/। Page 98 of 256 http://www. तकJ से नह/ं। डोलो। इस मन-मयूर को नाचने दो. द/वानO क# बातG ह0 । तुम मेर/ द/वानगी मG अगर मेरे पागलपन मG हाथ बटाओ तो तो जMर समझ मG आएगी। तो इस !वरोधाभास को म0 फर से दोहरा दं -ू -समझना चाहा. जब हम बचे ह/ नह/ं तो फर कौन रोके कौन संभाले? संभालनेवाला ह/ !वदा हो गया। तो हम यह नह/ं कहते ह0 क हम हले। हम तो नह/ं हले। हम तो जब तक थे तब तक नह/ं हले। ह जब हम रहे ह/ नह/ं तो फर हलना हआ। परमाHमा ने हलाया। संगीत ने हलाया। हम नह/ं ु हले। हमारा कोई कसूर नह/ं है । और संगीतD ने कहा.

७. एक ह/ पहचान है उनक#. लेकन Page 99 of 256 http://www. पूना। रतन अमोलक परख कर रहा जौहर/ थाक। दरया तहां क#मत नह/ं उनमन भया अवाक।। धरती गगन पवन नह/ं पानी पावक चंद न सूर। रात दवस क# गम नह/ं जहां ॄŒ रहा भरपूर।। पाप पु‡य सुख दख ु नह/ं जहां कोई कमJ न काल। जन दरया जहां पड़त है ह/रO क# टकसाल।। जीव जात से बीछड़ा धर पंचतN को भेख। दरया िनज घर आइया पाया ॄŒ अलेख।। आंखO से द/खे नह/ं स6द न पावै जान। मन बु!T तहं पहंु चे नह/ं कौन कहै सेलान।। माया तहां न संचरौ जहां ॄŒ को खेल। जन दरया कैसे बने र!व-रजनी का मेल।। जात हमार/ ॄŒ है माता-!पता ह0 राम। िगरह हमारा सु.oshoworld.न मG अनहद मG !बसराम। इन मःत अखड़यO को कमल कह गया हंू म0 महसूस कर रहा हंू गजल कह गया हंू ूेम मG िस" श6द अनायास क# काdय बन जाते ह0 । जहां ूेम है वहां गीत का ज. डू बकर कहे गए श6द ह0 । सौ म0 िन. वह ूेम है । दरया के ये श6द बड़े गहन अनुभव से िनकले ह0 । इनके काdय-गुण पर मत जाना। इनक# अनुभूित मG डु बक# लगाना। जानकर.dkuks lquh lks >wB lc अनहद मG !बसराम ूवचन: ५ दनांक: १५.com .१९७७ ौी रजनीश आौम.म अिनवायJ है । एक तो ऐसा काdय है जो श6द. भाषा. धोखे ह0 । बsचO को उलझाए रखने के िलए ठWक.यानबे काdय तो कwपना ह/ होते ह0 । सुंदर हो तब भी कwपना ह/ होते ह0 । और कwपना मG कैसा सaदयJ? सaदयJ तो केवल सHय का ह/ अंग है । जहां सHय है वहां सaदयJ है । कwपना मG तो केवल Cखलौने ह0 . माऽा और छं द पर िनभJर होता है और एक ऐसा काdय है . जो केवल Vदय के ूेम पर िनभJर होता है । संतO का काdय Vदय का काdय है । हो सकता है माऽा मG ठWक न हO। माऽाओं क# िचंता क# भी नह/ं गई है । हो सकता है छं द के िनयमO का पालन न हआ हो। संत कसी भी िनयम का ु पालन करना जानते ह/ नह/ं। एक ह/ िनयम है उनका.

यथा इस फूल से चूक जाओगे। और अगर इस फूल Page 100 of 256 http://www. सुंदर है क असुद ं र.com . सHय क झूठ! मन का सारा काम ह/ िनणाJयक का काम है । अगर िनणJय न छूटा तो मन के पार गए नह/ं। इसिलए जीसस ने कहा है जज ई नाट। िनणJय ह/ मत करना। िनणJय कया क मन के क6जे मG आ गए। वह जौहर/! वह बैठा भीतर। वह कसता रहता है अपने कसने के पHथर पर हर चीज को. यह !बलकुल नया है । ऐसा फूल पहले कभी हआ नह/ं. जो उसने जाना है . थोपे। चला जाता है । कसी नए तय का आ!वंकार नह/ं हो पाता YयOक मन तो है अतीत। मन तो है तु]हारा !पछला अनुभव का जोड़Nोड़। मन तो है तुमने जो अब तक जाना. बेजोड़ है । अतुलनीय है । इसिलए तुम अपनी पुरानी जानकार/ को बीच मG न लाओ अ.हOने जाना नह/ं। जाना नह/ं उनको Cझझक का पता नह/ं। चीन मG एक कहावत है क केवल नासमझ ह/ !बना Cझझके बोल सकता है . सुना. समझा। उस सोचे.oshoworld. गंदगी. जो करो वह/ सुंदर हो जाता है । ू -फूटे ह0 । इनके श6दO पर मत जाना। श6दO मG गए तो चूक जाओगे। तो दरया के श6द तो टटे दरया तो तुतलाते से बोल रहे ह0 । YयOक वह बात इतनी बड़/ है . दे ख भी नह/ं पाए ठWक से क फौरन मन कह दे ता है --सुंदर! अभी दे खना भी पूरा नह/ं हआ क श6द बन जाता है । कह/ं गंदगी का ढे र लगा दे खा. उसे बड़/ बात को जो भी कहे गा वह/ तुतलाएगा। उस बड़/ बात को !बना Cझझक तो केवल वे ह/ कह सकते ह0 . अभी गंध. क सोना है क नह/ं है । ह/रा है क नह/ं है । मन तो एक तराजू है जो तोलता रहता. वे सुद ं र थे। उस पुराने अनुभव के आधार पर यह फूल भी सुंदर है । मगर तुम चूक गए। एक बड़/ बात से चूक गए। यह गुलाब का फूल तुमने कभी भी दे खा नह/ं था. Cज. शुभ है क अशुभ. तोलता रहता है । इसे तुम जांचो। गुलाब का फूल दे खा. समझदार तो बहत ु Cझझकेगा YयOक हर श6द उसके सHय को छोटा करता है । जो उसने दे खा है . तH[ण िनणJय करता है . यह तु]हG जीवन के सHय को दे खने ह/ नह/ं दे ती। मन अपनी पुरानी बातG ह/ दोहराए चला जाता है . बचो! मन के िनणJय करने क# यह जो आदत है . े समझे को ह/ मन नए तयO पर आरो!पत करता जाता है । जब तुम कसी गुलाब के फूल को दे खकर कहते हो सुंदर! तो तुम Yया कह रहे हो? तुम यह कह रहे हो म0ने जो गुलाब के फूल पहले दे खे थे. श6द उसे ूकट कर नह/ं पाते। इसिलए बड़/ Cझझक है जाननेवाले मG। ये दरया के श6द परम अनुभव के श6द ह0 । रतन अमोलक परख कर रहा जौहर/ थाक दरया तहं क#मत नह/ं उनमन भया अवाक मन हमारा जौहर/ है । जौहर/ इसिलए क हर चीज का मूwय आंकता रहता है । जो दे खता है . सुन. ु दगq ु ध नासापुटO तक पहंु ची ह/ थी क मन तH[ण कह दे ता है क कुMप.dkuks lquh lks >wB lc ूौढ़O के िलए वहां कोई संदेश नह/ं है । एक ह/ सaदयJ है और वह सaदयJ है --जब सHय आंखO मG झलकता है । तो फर जो बोलो वह/ सुंदर हो जाता है . करणीय क अकरणीय. ु फर कभी होगा नह/ं। हर फूल अRतीय है .

. सूझता नह/ं. समझना क आ गया ूभु का Rार। वह कसौट/ है । वह पहचान है । कैसे जानोगे क ूभु आ गया है ? ूभु को पहले तो कभी दे खा नह/ं. थके-मांदे !बःतर पर पड़े हो शर/र तो थक गया.oshoworld. रतन अमोलक परखकर रहा जौहर/ थाक। लेकन उस परमाHमा का अनुभव ऐसा अनुभव है क जौहर/ एकदम ठगकर खड़ा रह जाता है । कुछ कह नह/ं पाता. क सHय। मन क# सार/ कहानी एकदम बंद हो जाती है । मन गूंगा हो जाता है । गूंगे कैर/ सरकरा! उस ःवाद के सामने मन बोल ह/ नह/ं पाता। उसी ःवाद को खोजो जहां मन गूग ं ा हो जाता है तभी तृिm होगी। जहां तक मन बोलता चला जाता है .. मूwय क# त…ती टांग दे ता है इतने क#मत का है . थका रह जाए.म से लेकर मरने तक मन अनवरत चलता है । मन थकना जानता ह/ नह/ं। शर/र थकता है . बूझता नह/ं। रतन अमोलक. टटा जा रहा है . न कह पाता शुभ। इतना भी नह/ं कह पाता क परमाHमा. ूभु का Rार भी पहले कभी दे खा नह/ं। ूHयिभDा कैसे होगी? दाशJिनक पूछते रहे . Cजन-Cजन चीजO पर मन लेबल लगा दे ता है .। मन हारता ह/ नह/ं। शर/र हार जाता है.dkuks lquh lks >wB lc से चूकते हो तो इस बात का सबूत दे ते हो क पहले तुमने जो फूल दे खे हOगे उनसे भी चूके होगे और आगे तुम जो फूल दे खोगे उनसे भी चूकोगे। तुम चूकते ह/ चले जाओगे। तुम ू जाएगा। मन अतीत को बीच मG ले आओगे और वतJमान से िछ. अंग-अंग टट मगर मन है क चलता जाता है । मन है क सोचता जाता है । मन नए-नए !वचार के पNे उगाए चला जाता है । मन थकता ह/ नह/ं। ज. उस परम संपदा को मूwयातीत कहा है --अमोलक। मन उसका मूwय नह/ं आंक पाता। मन कह ह/ नह/ं पाता। कुछ। मन एकदम लड़खड़ा जाता है । न कह पाता है सुद ं र.. वहां तक जानना संसार है । Cजस [ण ऐसा कोई अनुभव तु]हारे भीतर उमगे. तु]हारा ताल टट िनणJय करता है । मन जौहर/ है । कहते ह0 दरया. हार के रह जाए. ऐसे लोग मG तु]हारे पंख तु]हG ले चलG क मन एकदम थाक के रह जाए.न-िभ. नींद क# भी जMरत पड़ती है .. ऐसी कोई सुगंध उठे .com .इसिलए उस रतन को. मन थकता ह/ नह/ं। मन सदा राजी है काम करने मG। मन लगा ह/ रहता है --सबय। मन कभी िनCंबय नह/ं होता। जहां मन िनCंबय हा जाए.न. ऐसा कोई कमल Cखले. ह0 सदयO से क समझ लो क ूभु को दे खा भी तो पहचानGगे क यह/ ूभु ह0 ? कैसे? YयOक पहले दे खा हो तो ह/ पहचान सकते हो। पहचान कैसे होगी? ूHयिभDा कैसी होगी? दरया सूऽ दे रहे ह0 क कैसे पहचान होगी! मन थक जाए! परमाHमा को तो नह/ं जानते हो लेकन एक बात जानते हो क मन कभी नह/ं थका। हर चीज पर िनणJय लगा दया था उसने। हर चीज को नाप िलया था। हर चीज तराजू के पलड़े मG आ गई थी। वजन तोल िलया था। मूwय तोल िलया था। हसाब-कताब लगा िलया था। जहां मन एकदम हसाब- Page 101 of 256 http://www. मन नह/ं हारता। तुम जानते रोज--दन भर के ू ू रहा है .

यह एक [ण को भी ठठक जाए. जहां मन का तराजू बड़ा छोटा पड़ जाए. ऐसे मन को परमाHमा के सामने नह/ं लाया जा सकता। मन और परमाHमा साथ-साथ नह/ं होते। यह/ पहचान है .य हो जाए। तुम सोचना भी चाहो और न सोच सको। सोचना तुम चाहोगे। डरोगे तुम तो। ूभु Rार पर खड़ा होगा.dkuks lquh lks >wB lc कताब न लगा पाए. अमोलक है .. जहां अचानक मन ठवक जाए.com . यह साधारण ह/रा. या मन ठठक जाए तो परमाHमा सामने आ जाता है । तो इसमG परभाषा भी हो गई क कैसे पहचानोगे और इसमG !विध भी आ गई क कैसे उस तक पहंु चोगे! रतन अमोलक परखकर रहा जौहर/ थाक दरया तहं क#मत नह/ं. यह/ परख है क पारखी थक जाए। जहां तक पारखी क# चलती है वहां तक संसार है । यह तो बड़/ अनूठW परभाषा हई। जहां तक मन चलता वहां तक संसार है । मन क# ु गित संसार है । जहां मन अगित मG पहंु च जाता वह/ं परमाHमा है । इससे दसर/ बात भी िनकलती है क अगर तुम कसी तरह मन को अगित मG पहंु चा दो तो ू परमाHमा के सामने खड़े हो जाओगे। यह केवल परभाषा ह/ नह/ं हुई. अवT हो जाए। यह मन का सतत पागलपन.. फर कैसे क#मत जानो? फर कैसे क#मत लगाओ? परमाHमा क# कोई क#मत नह/ं है इसिलए मन को क ह/ जाना पड़ता है । मन बाजार मG खूब चलता है । बाजार मG हर चीज क# क#मत है । जीवन मG जहां भी मन उसके पास आता है जो अमूwय है . और कौन से ह/रे मG थोड़/ खोट। तो परख हो सकती है । मगर एक ह/ है तो कोई परख का उपाय नह/ं। दरया तहं क#मत नह/ं. ठहर जाए। तो या तो परमाHमा सामने हो तो मन ठठकता है .oshoworld. अवT हो जाए मन क# सतत ूबया। जहां !वचार एकदम शू. पूरा आकाश तोलने क# बात आ जाए.. इससे !विध भी िनकल आती है । इसिलए समःत Iयान. तो एक ह/ क# क#मत तो नह/ं आंक# जा सकती। दो हO तो क#मत आंक# जा सकती है । दो ह/रे हO तो तुम कह सकते हो। यह बडा.. वह/ं मन लड़खड़ाता है । जहां तक क#मत है वहां तक मन ठWक Page 102 of 256 http://www. सHय तु]हG घेरेगा तो तुम बहत ु घबड़ा जाओगे। तु]हारा रोआं-रोआं कांप जाएगा क यह Yया हो रहा है ? इस घड़/ मन धोखा दे रहा है । इस घड़/ तो मन साथ दे । यह घड़/ न चूक जाए। यह अपूवJ घट रहा है और मन कुछ बोलता नह/ं। और मन एकदम कहां !वलीन हो गया पता नह/ं चलता। तुम तो मन को लाना चाहोगे। लेकन जैसे अंधेरे को ूकाश के सामने नह/ं लाया जा सकता. यह मन क# गंगा जो बहती ह/ चली जाती है . उनमन भया अवाक वहां क#मत ह/ नह/ं। क#मत Yया परमाHमा क#? कैसे उसक# क#मत आंको? एक ह/ है . रह कोहनूर। दो हO तो अंकन हो सकता। तुलना हो सकती है । तो अंकन हो सकता है छोटे -बड़े का। कौन सा ह/रा !बलकुल शुT ह/रा. कना जानती ह/ नह/ं.बहती ह/ चली जाती है . समःत भ!" है Yया? एक ह/ ूबया है । क िसक# तरह मन क जाए. यह छोटा.

. तो दो कौड़/ का। चपरासी को तो दे खता ह/ नह/ं। राšपित को भर दे खता है । राšपित भी कल राšपित नह/ं रह जाएंगे तो यह आदमी नह/ं दे खेगा। चपरासी कल राšपित हो जाएगा तो यह आदमी दे खेगा। यह आदमी आदमी को दे खता ह/ नह/ं। इसक# आंखO मG आदमी क# कोई परख ह/ नह/ं इस आदमी को तो िसफJ क#मत। हर बात मG क#मत। तो दखते हो ना! कसी आदमी से िमले.एक-आध दो बात तुम पहले पूछते हो. हजार पया. वैसा मंदर मG नह/ं होता। बैठते हो मंदर मG.com . हर चीज को क#मत से तोलते ह0 । म0 तो िचऽ दे खता था. कहां से आते ह0 ? मगर यह तो गौण है । एकदम से क#मत पूछो तो जरा बेहू दगी लगती है । पCvम मG लोग कसी से भी नह/ं पूछते क कतनी तन…वाह िमलती है । वह gयादा िश_ाचार है । क#मत क# बात ह/ पूछना अिश_ है । हो सकता है !वचारा आदमी ूायमर/ ःकूल मG माःटर हो और कहना पड़े क सौ पए िमलते ह0 । और इसको भी द/नता का अनुभव हो। और इसाके ह/ हो ऐसा नह/ं. Cजसका मूwय नह/ं होता। लेकन तब तुम उससे चूक जाते हो। YयOक तुम वह तो परख ह/ नह/ं तु]हारे मन मG। अगर Page 103 of 256 http://www.न होता है . शे न मG िमलना हो जगया कसी से. ःकूल मG माःटर हंू . वे िचऽO पर लगी हई ु क#मत दे खते थे। थोड़/ दे र मG मुझे लगा क वे िचऽ दे ख ह/ नह/ं रहे ह0 । पांच सौ पया.oshoworld. जैसे यह कहे गा क सौ पए िमलते ह0 . तु]हारे िलए यह आदमी बेमूwय हो गया। आगे अब इससे बात नह/ं चलेगी। बात ह/ खतम हो गई। यह भी कोई आदमी है ! ःकूल मG माःटर है । इससे तो कुछ भी होता! पुिलस इं ःपेYटर होता तो भी बेहतर था। कुछ तो जान होती! जैसे ह/ तुम पूछते हो कसी आदमी से क कतन तन…वाह िमलती है . फर जwद/ से असली बात पूछते हो-कतनी तन…वाह िमलती है ? कैसा धंधा चलता है ? असली बात! एक-आध दो इधर-उधर क# पूछWं क कहां रहते हो.dkuks lquh lks >wB lc से चलता है । क#मत पर मन का पूरा कबजा है । इसिलए बाजार मG मन जैसा ूस. दकान ु दार ह0 . मन सोचता बाजार क# है । YयO? आCखर मन का ऐसा बाजार से Yया लेना-दे ना? मन क# गित बाजार मG है । वहां उसे पूर/ सु!वधा है । हर चीज क# क#मत है । हर चीज पर लेबल लगा है । म0 एक बार एक बड़े िचऽकार क# िचऽ-ूदशJनी दे खने गया। मेरे साथ एक िमऽ थे. तुम जो बातG ु पूछते हो. चहां जरा ठठक कर दे ख लG। जहां पां च सौ िलखा हो वहां से आगे बढ़ जाएं। म0ने उनसे पूछा क तुम कर Yया रहे हो? तुम िचऽ दे खने आए क क#मत दे खने आए। तुम अपनी दकानदार/ कह/ं बंद करोगे क नह/ं बंद ु करोगे! तुम सब जगह दकानदार/ ह/ चलाओगे? उनके िलए एक ह/ बात का मूwय है । मूwय ु का ह/ बस मूwय है । आदमी को भी ऐसा आदमी दे खेगा तो यह दे खता है कसका कतना मूwय है । यह आदमी ूधानमंऽी है . वैसे ह/ तुम पूछ रहे हो क कतनी क#मत! कतना मूwय? इस Cजंदगी मG भी तुम कई बार ऐसी चीज के कर/ब आ जाते हो. पंदरह सौ पया! जहां पांच हजार. यह आदमी चपरासी है ..

म0ने कहा क तुम सुबह कभी सूरज को उगते दे खते? वहां तो कोई लेबल नह/ं लगा होता.com . अिभनेता क# होगी। पए के लोभ मG CखलCखला दे गा लेकन हOठ से गहर/ न होगी। हOठ पर रं गी होगी. दे खना Yया है ? म0ने उन िमऽ को कहा जो मेरे साथ िचऽ क# ूदशJनी दे खने गए थे. Vदय से न आएगी। ूाणO क# उHफुwलता न होगी। उसमG परमाHमा का वास न होगा। कसी क# आंख से एक आंसू टपकते दे खा? उस आंसू क# Yया क#मत? उस एक छोटे से आंसू को आदमी पैदा नह/ं कर सकता। बस एक छोटे से आंसू मG सारे महाकाdय िछपे ह0 । उस एक छोटे से आंसू मG मनुंय क# सार/ जीवन-dयथा िछपी हो सकती है । मनुंय के सारे जीवन का आनंद.dkuks lquh lks >wB lc तुम कसी संतपुष के पास आ जाओ तो तुम नह/ं परख पाओगे। YयOक वहां तु]हारा मूwय-िनधाJरक मन गित नह/ं करता। अगर सुबह सूरज उगता हो और एक सुंदर सुबह चारO तरफ फैलती जाती हो और ूाची पर लाली हो और आकाश बड़े गीत गाता हो. इसे मत भूल जाना। आदमी ने जो भी सफलता पाई है .. जो तुम क#मत आंक रहे हो? चार आने दे ने से तुम एक गुलाब का फूल पैदा कर पाओगे? चार करोड़ पए से भी तुम एक गुलाब का फूल पैदा नह/ं कर पाओगे। सार/ मनुंय जाित क# [मता लगाकर भी तुम एक गुलाब का फूल पैदा नह/ं कर पाओगे। आदमी चांद पर पहंु च गया है . तो अःयास करो थोड़ा अमोलक को दे खने का। यहां भी कोई क#मत नह/ं है । जब तुम गुलाब का फूल दे खते हो. इस CखलCखलाहट क# कोई क#मत हो सकती है ? करोड़ पए दे कर भी कसी बsचे को तुम CखलCखलाने के िलए राजी नह/ं कर सकते। वह अगर CखलCखला भी दे .oshoworld. तो यह CखलCखलाहट न होगी। वह िसफJ बाजार क# होगी. इसक# Yया कोई क#मत हो सकती है ? एक बsचा CखलCखला कर हं सा. तुम Yया दे खोगे? उ.. होगी भी कभी नह/ं। YयOक घास का एक ितनका भी पैदा नह/ं होगा। जीवन अमोलक है । गुलाब के फूल क# Yया क#मत? कैसी क#मत? कैसे आंकते हो? अगर गौर से दे खोगे तो पाओगे. तुम नह/ं दे खोगे। उसका कोई मूwय नह/ं है . कहते हो क चार आने मG िमल जाता है बाजार मG. अहोभाव िछपा हो सकता है । उस एक छोटे से आंसू मG आदमी क# सार/ बेबसी िछपी हो सकती है । उस एक छोटे से आंसू मG आदमी क# सार/ ूाथJना िछपी हो सकती Page 104 of 256 http://www. बड़े रं गO मG नाचता हो. वहां तु]हG बड़/ मुCँकल होगी। जब क#मत ह/ नह/ं तो Yया दे खना? कभी रात तारO टं क# आकाश के रहःयाग को दे खते हो? वहां कोई क#मत नह/ं लगी है . सब मुदाJ चीजO पर है । अभी जीवन पर उसक# एक भी सफलता नह/ं. यह एक बात है । अभी घास का एक ितनका भी पैदा नह/ं कर पाया है . क म0 दे खता ह/ उतनी चीज हंू । Cजसक# क#मत हो। दरया तहं क#मत नह/ं. तो तुम चूक गए। आदमी एक भी गुलाब का फूल पैदा कर पाया है . गुलाब के फूल मG अमोलक बैठा है । चांद िनकला.हOने मुझसे कहा-.ईमानदार आदमी ह0 --राःते मG लौटते व" कहा आप ठWक ह/ याद दलाया। म0 कभी सुबह नह/ं दे खा और म0ने कभी रात भी नह/ं दे खी। शायद यह/ कारण होगा.

हम दे खते ह/ नह/ं। हम सोचते ह0 . Iयान दे दो। कसी भी तरह Iयान दे दो। और जो तुम कहो. तो वह गया। उसने महावीर से कहा. सार/ मनुंयता क# ूस. यहां Yया रखा है ? कुछ मूwय तो होना चाहए। मेरे पास लोग आ जाते ह0 . सब चुकाने को राजी हंू । यह वजीर मेर/ छाती मG तीर छे दता रहता है । म0 उससे यह भी नह/ं पूछ सकता क Iयान Yया है ? YयOक म0 यह भी ःवीकार नह/ं कर सकता क मुझे पता नह/ं क Iयान Yया है ! मेरा अहं कार बड़ा है । अब आपसे िनवेदन करता हंू . हमार/ आदत खराब हो गई। हम हर चीज मG मूwय खोजते ह0 । और जहां हमG मूwय नह/ं दखता. मेरे पास तो राgय था. वह म0 छोड़ चुका। अब राgय क# मुझे कोई चाहत नह/ं है । तु]हारे ह/ नगर मG मेरा एक ौावक..dkuks lquh lks >wB lc है । एक आदमी क# ह/ नह/ं.हOने कहा ऐसा करो. शायद बेचने को राजी हो जाए। मेरे तो बेचने का कोई कारण नह/ं। तुम जो राgय दोगे वह तो म0 छोड़ ह/ चुका हंू . क जwद/ से नाम बता दG । अगर मेरे ह/ राgय मG Page 105 of 256 http://www. मेरा एक भ" है । वह Iयान को उपल6ध हो गया। तुम उससे मांग लो। वह गर/ब आदमी है ..com .हOने नह/ं कहा क यह बेचने क# बात ह/ नह/ं। इस आदमी को ठWक से िश[ा दे ना चाहते थे। ठWक जगह से िश[ा दे ना चाहते थे। तो उ.नता और ूाथJना और दख ु एक छोटे से आंसू मG छुपा हो सकता है । नह/ं. इसमG Yया रखा है ? Iयान? उसे बड़/ चोट लगती थी क Iयान Yया बला है ? फर उसने खबर सुनी क महावीर का आना हआ। परम Iयानी का आगमन हआ है .oshoworld. Iयान! धन तो पा िलया. ु ु महाराज. इतनी कृ पा करो Iयान दे दो। जो भी क#मत हो ले लो. पहले ह/ छोड़ चुका हंू । इसिलए म0 तो बेचने वाला नह/ं। महावीर ने खूब मजाक कया। म0 तो बेचूंगा नह/ं। इस आदमी से यह भी उ.हOने कहा. पाकर रहा। अब यह Iयान पाकर रहंू गा। सब लगाने को राजी हंू । महावीर हं से। इस पागल को कोई कैसे समझाए क कोई ऐसी चीजG भी ह0 जीवन मG जो खर/द/ नह/ं जा सकतीं। Cजनका कोई मूwय नह/ं होता। तुम सारा राgय भी दे दो तो भी Iयान का एक ितनका भी नह/ं खर/द सकते। Iयान क# एक बूद ं भी नह/ं खर/द सकते। मगर इस पर दया भी आई। उ.लाभ ु Yया होगा? तुम मंदर मG भी ब0क भी भाषा चलाना चाहते हो? तुम पूछते हो क Iयान तो करG गे लेकन इससे ब0क बैलGस बढ़े गा क नह/ं बढ़े गा? तुम पए मG Iयान को भी कूतना चाहते हो? एक सॆाट महावीर के पास पहंु च गया था। बड़ा सॆाट था। उसने सब पा िलया जो पाने यो5य था। लेकन एक बात उसे खटकती थी--Iयान। कभी-कभी उसका वजीर उसको बड़/ चोट पहंु चा दे ता था। वह कहता क महाराज और सब तो ठWक है . े लाभ Yया होगा? लाभ। Iयान से भी लाभ चाहते ह0 । तन…वाह मG बढ़ोतर/ हो जाएगी. वे पूछते ह0 Iयान तो करG ग. क दकान gयादा ठWक से चलेगी. सो ठWक है । धन तो कोई भी पा लेता है । ऐरे -गैरे नHथू-खैरे पा लेते ह0 . म0 दे ने को राजी हंू । पूरा राgय भी दे ने को राजी हंू । म0ने अपनी Cजंदगी मG हार मानी नह/ं। जो चीज पानी चाह/.

मेर/ राजधानी मG रहता है तब तो कोई बात नह/ं। अभी जाकर ले लूंगा। तH[ण उसने उस आदमी को बुलवाया और कहा. तुझे जो लेना हो ले ले. Iयान करना। अवाक श6द का अथJ है --ऐसा आvयJ क हठात तुम ठगे रह गए। अवाक! बोलती बंद हो गई। वाक खो गया. मनन करता जाता है .oshoworld. िछपा मत। चालबाCजयां मत कर. एक आधात मG. Iयान क#. उनमन भया अवाक। चूंक क#मत कोई भी नह/ं थी वहां. उनमन भया अवाक इस सूऽ मG दोनO ह/ बातG ह0 । परमाHमा सामने आ जाए तो ऐसा होता है । ऐसा हो जाए तो परमाHमा सामने आ जाता है । तो तुम थोड़ा आvयJ खोजना शुM करो। Page 106 of 256 http://www. उ. वाणी खो गई। बोलना चाहो तो बोल न सको। हलना चाहो तो हल न सको। ऐसा !वराट आvयJ सामने खड़ा हो गया। उस आvयJ के सामने खड़े होने से जैसे सांस तक बंद हो गई। अवाक! एक [ण को सब ःत6ध हो गया. धारा अवT हो गई. क#मत बोल। Cजतनी मांगग े ा उससे दोगुनी दं ग ू ा। मगर क#मत क# बात कर। कैसे कोई इन पागलO को समझाए क कुछ चीजG ह0 Cजनक# कोई क#मत नह/ं होती! ूेम क#. आप समझे नह/ं। म0 गर/ब हंू तो आप अगर चाहG तो मेर/ जान ले लG.dkuks lquh lks >wB lc रहता है .com . जीवन ले लG.हOने मजाक कया. लेकन यह Iयान दे दे । वह आदमी हं सने लगा और उसने कहा. कोई क#मत होती है ? इ. उस ूबया का नाम मन। उनमन भया अवाक--वह जो मन अब तक सोचता ह/ रहता था और Cजसको चे_ा करके भी रोका न जा सकता था क क जाए। जो कने को राजी न होता था. मन यानी सोच!वचार। मनन क# ूबया का नाम मन। जो सोचता जाता है . ूाण ले लG. जो खर/द/ जा सके। सॆाट ने कहा. मनन ठहर गया। मनन ठहर गया तो मन ठहर गया। जहां मनन र रहा वहां मन न रहा। उनमन भया अवाक। और हो गया अवाक! आvयJ-मु5ध पहली बार। अवाक श6द बहत ु बहमू ु wय है । उसे ठWक से उस पर िचंतन करना. मनन करना. रहा जौहर/ थाक दरया तहं क#मत नह/ं. दे ख! क#मत कुछ भी हो. मन कुछ भी न सोच पाया। उनमन भया अवाक! मन एकदम से एक [ण मG अपन हो गया। मन था अभी तक.हG कोई खर/द सकता है ? तुम अपने जीवन मG अगर अमोलक को दे खना शुM कर दो तो तुम तैयार/ करोगे परमाHमा के पास जाने क#। अमोलक क# सीढ़यां चढ़कर ह/ कोई परमाHमा के पास पहंु चता है । दरया तहं क#मत नह/ं. म0 तैयार हंू । लेकन Iयान? आप बात Yया कर रहे ह0 ? म0 दं ू भी कैसे? दे ना भी चाहंू तो दं ू कैसे? Iयान कोई चीज तो नह/ं. मन यानी मनन. एक [ण मG. मौन हो गया। रतन अमोलक परखकर. जो झेन फक#र Cजसको नो-माइं ड कहते ह0 । Cजसको कबीर ने अमनी-दशा कहा है । अनमन भया अवाक। एकदम. जो सदा मनन ह/ मG लगा रहता था। Cजसक# मनन क# धारा जागते-सोते चलती ह/ रहती थी। अनवरत जो धारा बहती थी। वह अचानक ठहर गई। उनमय भया अवाक। और मन अमन हो गया। यह उनमन श6द ठWक है .

वह कहते ह0 परमाHमा कैसे खोजG? मज कहता हंू तुम परमाHमा को तो छोड़ो। परमाHमा पर बड़/ कृ पा होगी तु]हार/। तुम परमाHमा को तो मत खोजो। YयOक तुम Cजस परमाHमा को खोज रहे हो. सब ढOग है । तु]हारे मन का ह/ जाल है । ऐसा हआ एक रामलीला मG क जो आदमी रावण का पाटJ कर रहा था. पागलो! Page 107 of 256 http://www. व" पर मजा चखा दG गे। व" पर उसने मजा चखा दया। जब सीता के वरण क# कहानी आई और धनुष रखा गया और लंका से दतO ू ने आकर िचwलाया क रावण! हे रावण! तू यहां Yया कर रहा है ! लंका मG आग लगी हई ु है । उसने कहा लगी रहने दो। इस बार लंका जले तो जले जाए. मगर सीता को लेकर जाएंगे। बड़/ घबड़ाहट फैल गई। YयOक उसे जाना चाहए िनयम से। और वह सीता ह/ ले जाए तो रामलीला खमत। और वह तो कसी क# सुने ह/ नह/ं और लोग तो ठगे ह/ रह गए क अब करना Yया है ? जनक जी भी बहत ु घबड़ाए। रामचंि जी भी इधर-उधर बगलG झांकने लगे। लआमण को भी पसीना आ गया क यह तो मुCँकल मामला हो गया। कसी को समझ मG न आए क Yया करG ! इस बीच वह उठा और उसने धनुषवाण तोड़ दया। अब धनुषबाण Yया था. म0नेजर नाराज हो ु गया। तो उसने कहा. वह है ह/ नह/ं। तु]हारा परमाHमा भी तु]हारे मन क# ह/ धारणा है । तु]हारा परमाHमा भी तु]हारे मन क# तःवीर है । तु]हारा परमाHमा भी तु]हारे मन का ह/ खेल और जाल और जंजाल है । तु]हारा परमाHमा तु]हारे मन क# ह/ धारा को अनवरत रखेगा। तु]हारा परमाHमा बहत ु परमाHमा नह/ं है । तु]हारा परमाHमा यानी हं दू का. तु]हारा परमाHमा यानी मुसलमान का। तु]हारा परमाHमा परमाHमा नह/ं है । तु]हारा परमाHमा परमाHमा हो भी कैसे सकता है ? अभी तुमने जाना ह/ नह/ं है । अभी अDान मG जो तुमने ूितमा अपने मन मG संजो ली है . अगर बहत ु ह/ शोरगुल मचाया तो तु]हारा मन तु]ह/ं को सांHवना दे ने के िलए धनुधाJर/ राम क# ूितमा को िनिमJत कर लेगा। वह तु]हार/ ह/ ू[ेपण है । यह राम कसी काम के नह/ं। इनको धYका दो तो िगर जाएंगे। इनका धनुषवाण इHयाद कसी काम का नह। रामलीला वाला धनुषबाण है । बस. कोई असली का तो था नह/ं! उसने तोड़ दया और कहा जनक से क िनकाल सीता कहां है ? उसने सार/ रामलीला खराब कर द/। वह तो जनक बूढ़ा आदमी था पुराना Cखलाड़/ था। बहत ु दनO से यह/ काम करता था। उसने कहा क ठहर। भृHयो! मालूम होता है तुम मेरे बsचO के खेलने का धनुष उठा लाए। असली धनुष लाओ.dkuks lquh lks >wB lc मेरे पास लोग आते ह0 .oshoworld. वो जो रामलीला का धनुषबाण था. दे खGगे. िसर फोड़ते रहे द/वालO से और िचwलाते रहे राम-राम-राम--और धनुधाJर/ राम क# कwपना करते रहे क अब ूगटो. धनुधाJर/ राम! तो तुम धनुधाJर/ राम को खोजते फरोगे। वो कह/ं तु]हG िमलGगे नह/ं। और अगर कभी िमल जाएं तो सावधान रहना। YयOक वह तु]हार/ कwपना का ह/ फैलाव होगा। अगर बैठे ह/ रहे . वह अDान क# ह/ ूबया है । जानोगे तो सार/ ूितमाएं िगर जाएंगी। तो तुम परमाHमा को तो छोड़ दो। तुम मुझसे कोई दसर/ बात पूछो। तुम यह पूछो क हम ू आvयJ-अवाक कैसे हO? यह बड़/ और बात है । परमाHमा को खोजने मG Yया करोगे? अगर राम तु]हार/ धारणा मG बैठे ह0 .com . बैठे ह/ रहे .

वह कहोग. बांसुर/ बजाएंगे। और अगर तुम बाइःट के भ" हो तो बाइःट सूली पर लटके खड़े हो जाएंगे। और उनके हाथO से तु]हG खून बहता हआ मालूम पड़े गा। कगर उस खून के ध6बे तु]हारे कपड़O पर भी नह/ं पड़G गे. उसका कैसे सा[ाHकार हो? वह जो है को नाम भी नह/ं दे गा--कृ ंण. यह जो !वराट. ं जो है . यह जो चारO तरफ !वःतीणJ है . कैसे जानू? ं जो है . जीवन अDात है । इस अDात जीवन मG म0 कैसे ूवेश कMं? कैसे जानू.. कुरान जानता. Vदय क# ु तो बात और। वह तो िसफJ कwपना मG ह/ रहे गा। परमाHमा का सsचा खोजी यह नह/ं पूछता क म0 परमाHमा को कैसे खोजू? ं YयOक वह यह कहे गा परमाHमा तो मुझे मालूम ह/ नह/ं है .कैसे हम संबध ं जोड़G इससे? आvयJ से संबध ं जुड़ता है । इसिलए आvयJ-!वमु5धता धािमJक आदमी का Rार है । आvयJ!वमु5धता! आvयJ क# आंखO से दे खो.. YयOक म0 वेद जानता.oshoworld. जो है । यह जो चारO तरफ !वराट फैला है . फर नकली रावण लाया गया। दसरा रावण पकड़ना पड़ा YयOक यह रावण तो ू काम न आए। तु]हार/ कwपना मG जो राम खड़े हOगे. खोजने क# बात कैसे उठाऊं? यह तो बात ह/ बेईमानी क# हो गई। परमाHमा ह/ मालूम होता तो खोजता YयO? परमाHमा मालूम नह/ं है इसिलए तो खोजना चाहता हंू । इसिलए म0 यह कैसे यह बात शुM कMं क परमाHमा को खोजना है ? वइ इतना ह/ कहे गा. बाइ!बल जानता.चारO तरफ से तु]हG घेरा है । बाहर और तु]हारे भीतर भी जो बैठा है . Cजतनी पुषO क# होती ह0 । पंडत के बजाय अDानी परमाHमा के gयादा िनकट होते ह0 । YयOक उनक# आंखG अभी भी रहःयपूरत होती ह0 । अभी भी सब रहःय समाm नह/ं हो गया। पंडत ने तो सब जान िलया। वह तो कहता है . वह तु]हारा ह/ खेल है । वे तु]हार/ ह/ धारणाएं ह0 । या तुम चाहो तो कृ ंण के भ" हो तो कृ ंण खड़े हो जाएंगे. इसको.com . मुझे सब मालूम है । Cजसे सब मालूम है उसे कुछ भी मालूम नह/ं होगा। इसिलए पांडHय से बड़ा पाप नह/ं है । YयOक पांडHय आvयJ को न_ कर दे ता है । और आvयJ Rार है । अगर यह ॅांित पैदा हो गई क मुझे सब मालूम है . कसी तरह रावण को धYका दे कर बाहर िनकाला। फर असली धनुष लाया गया. यह जो वृ[O क# शाखाओं मG.dkuks lquh lks >wB lc तब परदा िगराया. यह जो फूलO के रं ग मG...राम. तो तुम परमाHमा से चूकते जाओगे। वेद-कुरान रखे बैठे रहना। जैसे वेदकुरान मुदाJ ह0 वैसे तुम भी उनके पास बैठे-बैठे मुदाJ हो जाओगे। परमाHमा को खोजना हो तो यह जो जीवन तु]हारे चारO तरफ फैला है . यह जो सागर क# तरं गO मG. Dान क# आंखO से नह/ं। िनद}ष आvयJ से दे खा तो Page 108 of 256 http://www. यह जो पहाड़O क# ऊंचाइयO मG. यह जो पC[यO के कंठ मG. यह Yया है ? इसे म0 कैसे जानू? ं इसका Rार कहां है ? आvयJ Rार है । इसिलए छोटे बsचे परमाHमा के gयादा िनकट होते ह0 । YयOक उनक# आंखG अब भी आvयJ-!वमु5ध होती ह0 । CUयां पुषO के बजाय परमाHमा के gयादा िनकट होती ह0 । उनक# आंखG आvयJ से इतनी र" नह/ं होतीं. यह जो घाटयO क# गहराईयO मG. बाइःट। नह/ं.

इनके पंखO पर इतने रं ग YयO ह0 ? यह दे खा एक प[ी को उड़ता और पूछता है म0 YयO नह/ं उड़ सकता? आदमी YयO नह/ं उड़ सकता? बेबझ ू सवाल उठाता है । तुम घबड़ाते भी हो। तुम उसे चुप भी करना चाहते हो। तुम कहते हो.com .oshoworld. या पहाड़O मG? कतने ूƒ उठाता है छोटा बsचा! हर चीज--दे खा मोर. मुदाJ चीज कैसे जीवंत हो जाती है . यह भी पता नह/ं। एक छोटा बsचा मां के टे ट मG कैसे बढ़ता है यह भी पता नह/ं। एक छोटा सा !वचार तु]हारे भीतर कैसे तरं िगत होता है यह भी पता नह/ं। कुछ भी पता नह/ं है । DािनयO ने कहाहै . क मुझे पता है । अपने बेटO के सामने उसको भी अपनी ह]मत तो कायम रखनी पड़े गी। नह/ं तो छोटे बsचे खतरनाक ह0 । छोटे बsचO को परमाHमा खूब िसखा-पढ़ा कर भेजता है क Cजन-Cजन का Dान हो उनको डगमगाना। जो-जो अकड़ गए हO Dान मG. वैसे तुम अDानी! नाहक का ढOग बांधते हो. जानना क नह/ं जानता। जो नह/ं जानता. बड़ा हो जाएगा तुझे भी पता होगा। बड़े होने से कसी को पता नह/ं होता। बड़े होने से एक ह/ बात हो जाती है क बड़े होने पर आदमी अहं कार/ हो जाता है और नह/ं पता है यह कहने मG असमथJ हो जाता है बस! वह भी कहे गा हां. जो जानता है . यह भी पता नह/ं। रोट/ कैसे जाकर खून बन जाती है . वह है Yया? कुछ भी तो जाना नह/ं। एक छोटे से वृ[ के पNे का राज भी पता नह/ं। बीज कैसे अंकुर बनता है . ऐसे तु]हारे !पता ने तु]हG चुप कया था। और तु]हG बेचैनी YयO होती है छोटे बsचे के ूƒO से? बेचन ै ी इसिलए होती है क तु]हG भी उNर तो मालूम नह/ं। यह बsचा तु]हारे Dान को खंडत करता है । यह बsचा तु]हारे Dान पर शंका और संदेह उठाता है । यह बsचा तु]हारे Dान पर ूƒिचn लगाता है . क अरे !पताजी! आपको भी पता नह/ं क मोर के पंख पर इतने रं ग YयO ह0 ? आपको और पता नह/ं? यह आपके अहं कार को नीचे घसीट रहा है । यह कह रहा है अरे ! तुम भी फर मेरे ह/ जैसे हो! जैसा है अDानी. चुप हो जा। बड़ा होगा तो सब जान लेगा। तु]हG भी पता नह/ं बड़े होकर। तुम िसफJ उसे चुप कर रहे हो. तु]हG हर चीज पुलक से भर दे ती है । हर चीज आvयJ से भर दे ती है । कसी छोटे बsचे के साथ घूमने गए हो समुि के तट पर. अDान Rार है । YयO? उपिनषद कहते ह0 . जानता क जानता होगा। YयO? नह/ं जानने मG ऐसी Yया गुणवNा है ? नह/ं जानने क# गुणवNा है --आvयJ। YयOक जब तुम नह/ं जानते.dkuks lquh lks >wB lc तु]हG हर जगह चरण-िचnमालूम पड़G गे। छोट/-छोट/ चीजG रहःयपूणJ हो जाएंगी। रहःयपूणJ ह0 । िसफJ तुमने ह/ मान रखा है क रहःयपूणJ नह/ं। आदमी जानता Yया है ? एक भी बात तो जानते नह/ं हम। सार/ मनुंय जात के इितहास मG जो हमने जाना है . नाहक जोर-जबरदःती दखलाते हो क तु]हG पता है । इसिलए तुम बsचे से कहते हो. उनको जरा हलाना। कहते ह0 . बsचा जब तक नह/ं बोलता तब तक परमाHमा के बहत ु कर/ब होता है । कल म0 एक अनुभव कताब दे ख रहा था। आइं ःट/न के जीवन पर है । लेखक ने एक बड़/ महHवपूणJ बात कह/ है । आइं ःट/न तीन साल का हो गया तब तक बोला नह/ं। कई बsचे दे र Page 109 of 256 http://www.

न अC5न है . वह अब तु]हारे फल खा ले। वह जwद/ से तु]हार/ लाश मG से जो-जो पाने यो5य है . चूस लेगा। Yया अलग है ? यहां हम जुड़े ह0 । म0ने सांस ली. न चांद है . पावक चंद न सूर सारे भेद िगर गए। अब तय करना मुCँकल है क Yया अC5न है . जहां धरती और आकाश अलग होते ह0 ? कहां अलग होते ह0 ? आकाश मG समाया है . िनंकलूष. धरती आकाश मG है । अलग कहां है ? यहां अलग कुछ है ह/ नह/ं। सभी चीजG जुड़/ ह0 । अभी वृ[ पर एक फल लगा. िनद}ष बालक क# तरह पैदा हए। उसी िनद}षता मG जाना जाता है । तो जब जाना ु जाता है तब मन अवाक हो गया है । तुम अवाक होना सीख जाओ तो तुमने जानने क# कला सीख ली। धरती गगन पवन नह/ं पानी. न गगन है . बोला नह/ं। वह तीन साल तक आvयJ!वमु5ध रहा। वह आvयJ!वमु5धता ह/ उसके भीतर dय!"Hव बन गई. वह Hयाग दया। जब जानना Hयाग दया जाता है तो आvयJ का आ!वभाJव होता है । तो फर से बालक हो गए। नव ज.म हआ। Rज बने। मौन दज ु बनाता है । बारह वषJ अपूवJ आनंद िलया होगा महावीर ने। बारह वषJ लंबा समय है । बारह वषJ मG !बलकुल उ. वहां न तो धरती है . पड़ोसी क# हो गई। हम जुड़े ह0 । यह सारा अCःतHव एक साथ तरं िगत है । ू यह एक ह/ सागर है । धरती गगन पवन नह/ं पानी..dkuks lquh lks >wB lc से बोलते ह0 . और Yया वायु है और Yया धरती है और Yया आकाश! Page 110 of 256 http://www. पावक चंद न सूर रात दवस क# गम नह/ं जहां ॄŒ रहा भरपूर और कहते ह0 दरया. दसरे क# हो गई. राह दे ख रहा है क तुमने उसके फल खाए.न मG खो जाती ह0 । वहां सर/ सीमाएं जो हमने अलग-अलग कर रखी ह0 क यह रह/ धरती यह रहा आकाश. कहता था मेर/ सांस. यह कोई बड़/ बात नह/ं। लेकन लेखक ने यह बात उसमG उठाई है क शायद इसीिलए जीवन मG वह इतना बड़ा वैDािनक हो सका YयOक तीन साल तक चुप रहा. भाषा का Hयाग। भाषा मG सारा Dान है । जब भाषा गई तो Dान गया। इस तरह कसी जैन ने सोचा नह/ं क महावीर मौन YयO हो गए! मौन होने का मतलब है क भाषा Hयाग दो। भाषा Hयाग द/ मतलब जो भी जानते थे.com ..हOने सार/ धूल झाड़ द/। रं जी साःतर 5यान क#। एकदम िनंकपट. न सूरज है । वहां सब िभ.न बातG एक अिभ.न-िभ. कह भी नह/ं पाया क तु]हार/ हो गई। तुमने सांस ली. कल तुम उसका भोजन कर लोगे। अभी जो वृ[ मG था वह कल तुम मG हो जाएगा। फर एक दन तुम मरोगे। और तु]हार/ लाश जमीन मG दबा द/ जाएगी। और वृ[ खड़ा है . अभी तुम ले भीन पाए थे क बाहर िनकल गई. न पवन है . कसिलए मौन हो गए? मौन होने का मतलब Yया है ? मौन होने का अथJ है ? पांडHय का Hयाग। मौन होने का अथJ है . उसक# ूितमा बन गई। यह बात मुझे जंची। यह बात ठWक है । यह बात सच है । इसिलए तो महावीर बारह वषJ तक मौन हो गए जंगल मG जाकर। तुम Yया सोचते हो. न पानी है .। तुमने कह/ं दे खी जगह.oshoworld.

oshoworld. वहां इतनी भी जगह नह/ं है क रात और दन का Rै त भीतर ू!व_ हो जाए। दो क# वहां जगह नह/ं है । रात और दन ूतीक ह0 दो के. जहां ॄŒ रहा भरपूर और जहां ॄŒ भरपूर है . चाहे सुख-दख ु कहो. उनको िमलते दे खा है । Cजनको कभी िमलते नह/ं दे खा. Rं R के। चाहे जीवन और मृHयु कहो. जाम-ए-मय-ए-वःल !पला दे मुझको Page 111 of 256 http://www. चाहे रात-दन कहो. रानाई है नYश हर दल मG तेरे सूरते-ए-र"ाई है दे खता हंू Cजसे म0 वह तेरा सौदाई है एक आलम तेरे इस हःन का सेदाई है ु Cजसपे मोती से पसीने के चमकते दे खे मेरे दल मG िनहां आितश-ए-उwफत तेर/ मेरे रग-रग मG है पैबःता मुह6बत तेर/ म0 समझता हंू अदाएं है कमायत तेर/ मुझ पे रोशन है हक#कत तेर/. YयO न हमG याद रहे आंख से ल…ते Cजगर हमने टपकते दे खे तेरे हर रं ग मG एक नाच है . ताकत तेर/ दल हजारO तेर/ उwफत मG कसकते दे खे साकया. क जरा सी जगह पा जाएं और सरक जाएं भीतर। जहां ॄŒ रहा भरपूर। जहां ॄŒ क# पूर/ वषाJ होती है वहां दो क# कोई जगह नह/ं। वहां बस एक है । शबे फुरकत मG सदा. उनको िमलते दे खा है । जीवन मृHयु को साथ नाचते दे खा है । एक अंचभा म0ने दे खा नदया लागी आगी। धरती गगन पवन नह/ं पानी.com .dkuks lquh lks >wB lc कबीर ने कहा है . Cजनका अभी िमलन नह/ं होता है . बादल-ए-नाशाद रहे हालत-ए-रं जो अलम. उलटबांसी ह0 । एक अचंभा म0ने दे खा नदया लागी आगी! नदया मG आग लगी! अब नदया मG हमने आग लगी कभी नह/ं दे खी। कसी ने भी नह/ं दे खी। नदया मG कह/ं आग लगती है ? तो कबीर यह कह रहे ह0 . पावक चंद न सूर रात दवस क# गम नह/ं. चाहे सद-गमx कहो। दो क# वहां कोई गुंजाइश नह/ं है । इतनी भी जगह नह/ं है दो को. एक अचंभा म0ने दे खा नदया लागी आगी। यह/ बात कह/ है । कबीर अपने ढं ग से कहते ह0 । कबीर के ढं ग बड़े अनूठे ह0 . Rै त के. मायले बेदाद रहे मूरत-ए-जुwमो िसतम खःता औ बरबाद रहे इँक के गम मG सदा. जाम-ए-मयवःल !पला दे मुझको होश लेकर अभी द/वाना बना दे मुझको मय-ए-गुलरं ग के सागर वो !पला दे मुझको अँक ने जो तेर/ महहल मG छलकते दे खे साकया.

मुझे बेहोशी क# नास समझी दे दे । यह समझदार/ तू रख। यह तू ह/ संभाल। यह Dान तू संभाल। मुझे अDान दे दे । मुझे िनद}ष अDान दे दे । साकया जाम-ए-मय-ए-वःत !पता दे मुझको होश लेकर अभी द/वाना बना दे मुझको साज को छे ड़कर एक गीत सुना दे मुझको मय-ए. खतरा ह/ होगा.गुलरं ग के सागर को !पता दे मुझको रं गीन मदरा मG मुझे डु बा दे अँक ने जो तेर/ महफल मG छलकते दे खे अगर तुम परमाHमा क# महफल को गौर से दे खो तो सब तरफ तु]हG मदरा छलकती हई ु दखाई पड़े गी। िसफJ आदमी चूका जाता है । अँक ने जो तेर/ महफल मG छलकते दे खे फूल मG उसक# मदरा है । पC[यO मG कंठ मG उसक# मदरा है । आदमी को छोड़कर सारा जगत उसक# मदरा मG तwलीन है । सारा जगत उसके गीत को सुन रहा है . िमलन क# मदरा मुझे !पला दे । िमलाप क# मदरा मुझे !पला दे । जहां आिलंगन घटत हो जाए. ऐसी शराब मुझे !पला दे । साकया जाम-ए-मय-ए-वःल !पला दे मुझको जैसे दो ूेमी कसी ूेमक के गहन [ण मG एक हो जाते ह0 --वःल! ऐसा घट जाए। ऐसी बेहोशी मुझे !पला दे । YयOक मेरे होश मG तो न घटे गा। मेरे होश मG तो न घटे गा। मेरे होश मG तो म0 दर/ ू बचाए रखूंगा। साकया जाम-ए-मय-ए-वःल !पला दे मुझको होश लेकर अभी द/वाना बना दे मुझको यह होश तो महं गा है . लाभ नह/ं होनेवाला। ऐसी ह/ कुछ हालत आदमी के साथ है । अभी तक अदमी बु!T का ठWक उपयोग नह/ं सीख पाया। बु!T से िसफJ अहं कार को िनिमJत करता है । बु!T से िसफJ अकड़ को िनिमJत करता है । बु!T से और Page 112 of 256 http://www. यह तू ले ले। यह होश तो मेर/ मुCँकल है .dkuks lquh lks >wB lc ओ साक#.com . यह तू ले ले। यह होश क# समझदार/ मुझसे छWन ले। मुझे बेहोशी क# नास समझी दे दे । भ" ने यह/ मांगा है सदा. यह तु]हG काट भी सकती है । जैसे ु छोटे बsचे के हाथ मG कोई तलवार दे दे . यह तू ले ले। इस होश के कारण ह/ तो म0 अलग-अलग बना हंू . अगर यह तु]हG और आvयJ क# तरफ ले जाती। यह बु!T दभाJ ु 5य बन गई YयOक इसने सारे आvयJ को खंडत कर दया। यह बु!T तु]हG आvयJ के Rार से परमाHमा तक ले जाने का परम राज बन सकतीथी। मगर अिधक लोगO के िलए यह बु!T ह/ परमाHमा के और मनुंय के बीच द/वार बन गई। यह बु!T दधार/ तलवार है । यह तु]हG बचा भी सकती थी. आदक# को छोड़कर। आदमी क# Yया अड़चन है ? आदमी का YयO ऐसा दभाJ ु 5य है ? जो सौभा5य हो सकता था वह/ दभाJ ु 5य बन गया है । सौभा5य हो सक# थी यह बु!T.oshoworld. जहां हम िमलG और एक हो जाएं.

जहां ॄŒ रहा भरपूर। पाप-पु‡य सुख-दख ु नह/ं जहां कोई कमJ न काल जन दरया जहं पड़त है ह/रO क# टकसाल पाप-पु‡य सुख-दख ु नह/ं। अब कोई Rं R नह/ं बचा। न कुछ पाप है . दन गया. दख ु गए. पानी. इतना दान कया.com . मुझे एक ऐसी घटना नह/ं िमली CजसमG पु‡याHमा [णभर मG मु" हो गया हो. भयभीत भी होता है . अपने-पराए गए. अभी ु पूरा-पूरा धािमJक नह/ं है । पापी कसे कहते हो? Cजसने बुरा कया। पु‡याHमा कसे कहते हो? Cजसने भला कया। बुरे करने क# भी अकड़ होती है और भले करने क# भी अकड़ होती है । दोनO से अहं कार िनिमJत होता है । सच तो यह है . इतना मंदर मCःजद बनाए. इतने ोत कए. अब Yया अड़चन है उसको अहं कार क# घोषणा करने मG? उसका अहं कार तो िसंहासन पर !वराजमान होता है । उसके हाथ मG जंजीरG ह0 . खूनी. तुमने पढ़ा होगा। सारे मनुंय जाित के इितहास मG ऐसी घटनाएं और कहािनयO के उwलेख ह0 । जब कभी-कभी पापी [णभर मG मु" हो गया। लेकन म0ने बहत ु खोजा. लुटेरा और वाwया से एकदम ऋ!ष वाCwमक# हो ु गया। एक [ण मG हो गया? Page 113 of 256 http://www. सुख गए. न कुछ पु‡य है । यह वचन बांितकार/ है । YयOक साधारणतः हम सोचते ह0 क धािमJक आदमी पु‡याHमा! धािमJक आदमी पु‡याHमा नह/ं. डरता भी है . शांित-अशांित गई. क अकसर भला करने से gयादा अहं कार िनिमJत होता है । पापी तो थोड़ा संकोच भी करता है . जीवन मृHयु गई। अब वहां दो का कोई ूवेश नह/ं.oshoworld. अब एक ह/ बचा. उतनी बुर/ तरह लोहे क# जंजीरO मG नह/ं जकड़ते। तुमने सुना होगा. मगर सोने क#। पापी के हाथ मG जंजीरG ह0 लोहे क#। लोहे क# जंजीरे तो अखरती ह0 YयOक जंजीरG मालूम होती ह0 । सोने क# जंजीरG तो आभूषण मालूम होने लगती ह0 । इसिलए लोग सोने क# जंजीरO मG Cजस बुर/ तरह जकड़ते ह0 . धािमJक आदमी पु‡य के भी पार है । पु‡याHमा तो इसी जगत का हःसा है । पानी क# दिनया का ह/ हःसा है YयOक Rं R का हःसा है । पु‡याHमा. म0 बड़ा चकत हआ। म0 खोजता रहा हंू । सारे पुरान छान डाले क कभी तो ऐसा हआ हो जैसे ु ु क वाCwमक# हआ। हHयारा.dkuks lquh lks >wB lc दरू होता जाता है !वराट से। बु!T से धीरे -धीरे एक छोटा सा संक#णJ R/प बन जाता है । महाR/प हो सकता था. कह/ं कोई कांटा चुभता भी है । पु‡याHमा को तो कोई कांटा नह/ं चुभता। उसका अहं कार तो !बलकुल िशखर पर बैठा होता है । इतने उपवास कए. दभाJ ु 5य क# बात. मगर सच है . बस ॄŒ ह/ बचा है । रात गई. मगर वह महाR/प होना तो िसफJ !वराट के साथ ह/ घटता है । साकया जाम-ए-मय-ए-वःल !पला दे मुझको होश लेकर अभी द/वाना बना दे मुझको साज को छे ड़कर एक गीत सुना दे मुझको मय-ए-गुलरं ग के सागर को !पला दे मुझको अँक ने जो तेर/ महफल मG छलकते दे खे ॄŒरहा भरपूर। दरया कहते ह0 .

dkuks lquh lks >wB lc और अंगुिलमाल हआ बुT क# कथाओं मG। महा हHयारा! नौ सौ िन.oshoworld.यानबे आदमी मार डाले ु थे। और मार ह/ नह/ं डाले थे.com . तकJ तो वह/ है . गCणत तो वह/ है . जैसे तु]हारे महाHमा करते ह0 अपने पु‡य क# बढ़-चढ़कर बात। हसाब-कताब वे भी रखते ह0 और वह भी खूब बढ़ा-चढ़ाकर रखते ह0 । Yया कारण होगा? अपरािधयO के बीच बड़ा अपराधी होने का मजा है । जैसे महाHमाओं के बीच बड़ा महाHमा होने का मजा है । बात तो वह/ है . उनक# उं गिलयां अपने गले मG पहनता था इसिलए नाम अंगिु लमाल पड़ गया था। और एक हजार का ोत िलए बैठा था क एक को और मारना है । कोई उसके पास नह/ं जाता था। उसक# मां तक डरती थी उसके पास. पु‡याHमा एक [ण मG मु" हो नह/ं सकता। उसक# जंजीरG सोने क# ह0 । वह छोड़ना भी चाहे गा तो एक मन पकड़ना चाहे गा। वह छोड़ते-छोड़ते भी पकड़ता रहे गा। वह आCखर/ दम तक उनको बचाने क# कोिशश करे गा। कोई उपाय हो बचाने का तो बचाले उसका कारागृह महल का कारागृह है . तो तु]हG पता चले क वहां लोग अपने-अपने जुमr को बड़/ बढ़ चढ़कर बात करते ह0 । Cजतना नह/ं कया उतनी बढ़-चढ़कर बात करते ह0 । Cजसने एकाध चोर/ क# वह कहता है अरे . बहमू ु wय है । पापी तो छोड़ने को तैयार ह/ हो जाता है YयOक उसमG कुछ पा ह/ नह/ं रहा. वह कहता यह तो अपने बाएं हाथ का काम है । Cजसको कहो उसको [णभर मG उड़ा दG । अगर कभी तुम अपरािधयO के पास बैठो तो चकत होओगे। वे भी अपने अपराध क# बढ़-चढ़कर बात करते ह0 वैसे. जाने मG YयOक वह ऐसा आदमी था क अगर उसको एक क# कमी पड़ रह/ हो और दसरा कोई नह/ं िमले तो वह ू मां को मार डाले। यह अंगुिलमाल बुT के िमलन से एक [ण मG Mपांतरत हो गया। एक [ण मG! लेकन ऐसी कोई कथा मुझे पु‡याHमा क# न िमली। म0 बड़ा है रान होता रहा क# बात Yया है ? कथा िलखनेवा◌ालO ने पु‡याHमाओं के साथ बड़/ gयादती क#। मगर कारण है . यह/ परमाHमा से नह/ं िमलने दे ती। उससे तो वह/ िमलते ह0 . तराजू भी वह/ है . िसवाय दख ु के। लेकन गौर से दे खना. जो झुकते ह0 । जो अपने इस म0 को उतार कर रख दे ते ह0 । पाप पु‡य सुख-दख ु नह/ं जहां कोई कमJ न काल जन दरया जहं पड़त है ह/रO क# टकसाल Page 114 of 256 http://www. मन वह/ है । अगर यह/ होड़ लगी हो क कौन सबसे बुरा आदमी है तो तुम सबसे gयादा बुरा आदमी होना चाहोगे। अगर यह होड़ लग जाए क कौन सबसे भला आदमी है तो तुम सबसे भले आदमी होना चाहोगे। जो होड़ लग जाए उसी मG आदमी पड़ जाता है मगर एक बात हम जीवन भर चे_ा करते ह0 क म0 कुछ !विश_ हंू । म0 कुछ खास हंू . मेरे जैसा कोई और दसरा नह/ं। म0 अRतीय हंू । यह जो अहं कार क# धारणा है क म0 ू अRतीय हंू . हजारO कर चुके! Cजसने कसी एक-आध को मार डाला. पापी भी अकड़ रखता है अपनी। अगर तुम कभी जेलखाने जाओ.

. एक पया वह लाटर/ मG लगा दे ता। यह एक धािमJक कृ Hय हो गया उसके िलए क लगा दे ना एक। होगा तो होगा. मगर आदतन हर मह/ने जब उसको उसक# तन…वाह िमलती. अगर तुमको दस लाख िमल जाएं तो तुम Yया करोगे? तH[ण तु]हारे सामने पं!"बT !वचार खड़े हो जाएंगे। क फर ऐसा है .oshoworld. ःवाःय तक खराब हआ था..com . न उसे अब कोइ खयाल है क िमलेगी.. बहत ु सोने क# कोिशश क#. सब ु .हOने कहा. नह/ं होगा तो नह/ं होगा। जाता भी कुछ नह/ं। एक दन है रान हआ ु . तो दसर/ ू दफे मG हो जाएगा। म0ने सुना है . तो फर ये कर गुजरG । और तुम भी वह/ करोगे जो दजx ने कया। वह/. शराब पी। कभी बीमारयO से मिसत न हआ ु तरह क# बीमारयां आने लगीं। जुआ खेला। जो-जो उसको …याल मG था सुख. तु]हारा हाटJ फेल होगा। पहले तो डर यह/ क पहली दफा मG हो जाएगा। अगर बच गए कसी तरह. कोई बीस साल बीत गए। न कभी उसे िमली. न कोई पु‡य दे खा। न कोई सुख दे खा न दख ु दे खा। उसी अवःथा मG आनंद झरता है . ताला लगाकर ु उसने चाबी कुएं मG फGक द/ क अब करना ह/ Yया है ? बात खतम हो गए अब मजा करG गे। उसने खूब मजा कया। मजा करने क# जो धारणा है आदमी क# वह ह/ कया। वेँयाओं के घर गया. न सुख क# तरं गG। उठती ह0 । YयO? YयOक दख ु क# तरं गG भी दख ु दे ती ह0 और सुख क# तरं गG भी दख ु दे ती ह0 । तुम gयादा दे र सुखी भी नह/ं रह सकते YयOक सुख भी उNेजना है । तुम गौर से दे खो! आज तु]हG लाटर/ िमल जाए ठWक है .dkuks lquh lks >wB lc दरया कहते ह0 न तो वहां कोई पाप है न कोई पु‡य है । परमाHमा को दे खा.. न वहां कोई पाप दे खा. यह Yया मामला है ? उ.थोड़े हे र-फेर से। जुआ खेलोगे. बढ़या से बढ़या वU बना िलए। Page 115 of 256 सुख http://www. सांझ को Rार पर लोग आए. भेद गुण का है । आनंद बात ह/ और है । वहां सुख नह/ं है . बढ़या से बढ़या मकान खर/द िलया. तु]हG लाटर/ िमल गई। उसे दस लाख पए िमल गए। उस रात तो सो नह/ं सका। हर रात आराम से सोता था। उस रात तो करवट ले. महासुख. बहत ु सुख! मगर सुख और आनंद मG कोई ऐसा भेद नह/ं है क सुख छोटा सुख और आनंद बड़ा सुख। भेद परमाण का नह/ं है . खूब सुख. वहां सुख-दख ु नह/ं होते। तु]हारे श6दकोशO मG आनंद का अथJ िलखा है : सुख. लेकन हर मह/ने दो मह/ने मG लाटर/ िमलने लगे. जैसे दख नह/ं है । सुख-दख दोनO गए तब जो परम शांित ु ु !वराजमान हो जाती है । जहां न दख ु क# तरं गG उठती हज. एक Mसी कहानी है । एक दजx है . शराब !पओगे.। तुम भी सोचो. रथ का। हं डे भरे हए ु पए आए। वह तो घबड़ा गया। उसने कहा क महाराज. गर/ब आदमी। बस उसका एक ह/ शौक है क हर मह/ने एक पया वह लाटर/ मG लगा दे ता। ऐसा वषr से लगा रहा. वेँयओं के पास जाओगे। और करोगे Yया? और सुख है भी Yया? यह/ कुछ दो-चार बातG मालूम होती ह0 । बढ़या से बढ़या कार खर/द ली. न सो सका। दस लाख! पगलाने लगा। सुबह तो आकर उसने अपना दकान -दरवाजा बंद कर दया.

आज भी पाओगे। और छाती पीट रहा है और घबड़ा भी रहा है और लाटर/ दे नेवाले उससे पूछ रहे ह0 अगर तू इतना परे शान हो तो न ले। दान कर दे । उसने कहा.dkuks lquh lks >wB lc साल भर म0 दस लाख फूंक डाले। और साल भर मG अपना ःवाःय भी फूंक डाला और अपनी शांित भी फूंक डाला। साल भर के बाद कुंए मG उतरा अपनी चाबी खोजने YयOक अब फर दकान चलानी पड़े गी। कभी इतना दखी नह/ं था. फर कुएं मG फGक द/ और अब जानता है क gयादा साल भर से चलने का नह/ं है । और फर उतरना पड़े गा कुएं मG। यह/ तो हम सब कर रहे ह0 ! जो रोज-रोज कया है . भीतर तो ूाणO को काट जाता है । परमाHमा का अनुभव न तो सुख का अनुभव है .न है । वहां Rं R नह/ं है । वहां एक का वास है । Page 116 of 256 http://www. लेकन सुख ु क# तो हम जानते ह0 बात दखद ु क# कोई बहुत सुखद है ? सुख भी बड़ा दखदायी है । सुख ह/ अपनी पीड़ा है . ये तूने दन YयO दखाया? ऐसी आदमी क# दशा है । और साल भर मG वह मारा गया.oshoworld. रोज-रोज दख ु पाया है । फर भी करते ह0 । कल भी बोध कया था. यह साल भर मG जो दे खा--यह दख ु -ःवoन! कह/गे तो तुम इसको सुख-ःवoन लेकन है यह दख ु -ःवoन। जो साल भी मG दे खा यह उसक# Cजंदगी [ार-[ार कर गया। अब मन भी न लगे। अब तो उसने कसम खा ली क अब दबारा लाटर/ िमलेगी तो लूंगा ह/ नह/ं। मगर पुरानी ु आदत और पुराना रस! यह/ तो आदमी क# झंझट है । तुम कसम भी खा लो तो वह/ कए जाते हो जो तुम करते रहे हो। वह एक पया लगाता रहा हर मह/ने। और साल बीतते-बीतते जब कसी तरह फर से dयवCःथत हआ जा रहा था। काम-धंदा फर ठWक चलने लगा था। ु ःवाःय भी जरा ठWक हआ था सब। शांित बननी शुM हो रह/ थी। फर एक दन वह आकर ु रथ क गया Rार पर। उसने अपनी छाती पीट ली क मारे गए! आदमी क# अड़चन समझो-मारे गए. तब ठWक से चलता था. उपिव भी कोई gयादा नह/ं हो सकता। सामा.य Cजंदगी थी. कतनी ह/ मीठW ु लगे पीड़ा लेकन सुख भी जहर रखना है अपने मG। जहर कतना ह/ मीठा हो. साल भर मG वह मारा गया। साल भर मG बहत कुएं मG उतरा तो फर िनकला नह/ं। ु ु बुर/ हालत हो गई उसक#। और जब दबारा शर/र gयादा खराब हालत मG हो गया था। कुएं मG गए सो गए! सोचना इस पर. आज भी करोगे। कल भी लोभ कया था. यह साल भर मG जो नह/ं हो सकता। सामा. तब ठWक से चलता था. िमठास तो ऊपर-ऊपर होती है . न दख ु का अनुभव। परमाHमा का अनुभव शांित का अनुभव है । उस परम शांित का नाम है आनंद। वह गुणाHमक Mप से सुख-दख ु दोनO से िभ. फर दरजीिगर/ शुM हई। अब मन भी न लगे। पहले ु ु तो कभी अड़चन न आई थी। सीधा-साधा आदमी था. कहता है । क फर हे भगवान! फर! अब जानता भी है क जो हआ था उस साल ु मG वह फर से होगा। मगर इं कार भी नह/ं कर सकता है । लाटर/ फर ले ली। फर Rार पर ताली लगा द/. जैसा दखी हो गया। कसी तरह चाबी ु ु ु खोज कर लाया। अपनी दकान खोली.य Cजंदगी थी. gयादा कोई कमाई भी न थी. !वचारना इस पर। दख है . आज भी करोगे। कल भी क_ पाया था. अब यह भी नह/ं होता। मगर मारे गए! हे ूभु.com .

oshoworld.dkuks lquh lks >wB lc जहां कोई कमJ न काल। और वहां कोई कमJ भी नह/ं है . िघस-!पस जाते ह0 . हम सब क# जात ॄŒ है । हम सब ॄŒ ह0 । हम सब परमाHमा ह0 । वह हमार/ मूल जात है । न ॄाŒण. न वैँय.com . फर वा!पस लौट जाते ह0 फर टकसाल मG जाकर उनको !पघला िलया जाता है । फर नए िसYके ढाल दए जाते ह0 । टकसाल का अथJ है . न मुसलमान. जहां सारे िसYके ढलते ह0 और जहां सारे िसYके फर !बखर जाते ह0 । फर-फर ढाले जाते ह0 । परमाHमा परम ॐोत है । वहां से सब आता है और वह/ं सब वा!पस लौट जाता है । जीव जीत से बीछड़ा घर पंचतत का भेख दरया जन घर आइया पाया ॄŒ अलेख मनुंय !बछड़ा है परमाHमा से YयOक उसने इस पंचतHव के Mप का बहत ु gयादा अपने साथ तादाH]य कर िलया है । वह सोचता है . न ईसाई। हमार/ जात है . यह/ म0 हंू । इस अित आमह के कारण क म0 दे ह हंू . ॄŒ। जीव-जात से बीछड़ा घर पंचतN का भेख यह जो पांच तHवO का भेष रख िलया है और इस भेष को ह/ अपना सब कुछ समझ िलया है इसी के कारण हम अलग हो गए। ऐसा हआ ु . ऐसा अYसर हो जाता है । तुम जब नाटक मG कसी पाऽ का अिभनय करते हो तुम थोड़/ दे र को उसी पाऽ के साथ एक हो जाते हो। तुम यह/ सोचने लगते हो क म0 यह/ हंू । अsछा अिभनेता वह/ होता है जो !बलकुल डू ब जो और सोचने लगे क यह/ म0 हंू । तो Page 117 of 256 http://www.म भी नह/ं है । जो-जो हमने यहां जाना है . वहां कुछ भी नह/ं है । जो-जो हमने जाना है .. ू न शूि. न [!ऽय. म0 दे ह हंू । यह जो पांच तHवO से बनी हई ु दे ह है . फर जब पए खराब हो जाते ह0 .. जहां से सब आता है । जैसे टकसाल से ह/रे आते ह0 या टकसाल से िसYके आते ह0 । जहां से सब िसYके आते ह0 । जहां से सब िसYके ढाले जाते ह0 । और फर जहां सारे िसYके वा!पस !पघल जाते ह0 । तुमने दे खा टकसाल मG? पए ढाले जाते ह0 . वह उस परमतHव से अलग हो गया। अलग हआ नह/ं है एक [ण को भी। हो नह/ं सकता है । अलग होकर जाएगा कहां? अलग ु होने का कोई उपाय नह/ं है िसफJ ॅांित पैदा होती है क म0 अलग हंू । िसफJ एक खयाल है क म0 अलग हंू । जीव-जात से बीछड़ा. सब शांत हो जाता है । और !बलकुल अनजान का अनुभव होता है इसिलए तो मन अवाक हो जाता है । दरया तहं क#मत नह/ं उनमन भया अवाक रतन अमोलक परखकर रहा जौहर/ थाक जन दरया जहां पड़त है ह/रO क# टकसाल तो फर यह परमाHमा Yया है? यह टकसाल है . न हं द. कोई कताJ भी नह/ं है । वहां कोई कमJ नह/ं है कोई समय भी नह/ं है । कोई मृHयु भी नह/ं है । वहां कोई जीवन और ज. दरया कहते ह0 . वहां कुछ भी नह/ं है । जो-जो हमने जाना है .

भेष को छोड़ोगे उस दन तुम पाओगे-दरया िनजघर आइया पाया ॄG अलेख Cजसक# कोई सीमा नह/ं है उस असीम को पाया। अपने घर मG बैठे पाया. यह तो कपड़O जैसा है । कभी सुद ं र कपड़े पहन िलए. बsचे थे। आज अगर तु]हारा बचपन तु]हारे सामने खड़ा हो जाए. तुम कहोगे. तुम इनके साथ एक नह/ं हो सकते। अगर तुम बsचे ह/ होते तो जवान नह/ं हो सकते थे फर। अगर जवान ह/ होते तो बूढ़े कैसे हए ु ? और अगर Cजंदगी ह/ तुम होते तो मरोगे कैसे? और यह सब बहा जाता है । यह पंचतN का भेख. तुम पहचान भी न सकोगे क यह म0 हंू । मगर उस व" तुम वह/ थे। मां के पेट मG थे। मांस का बस एक !पंड माऽ थे। आज तु]हारे सामने वैसा मांस का !पंड रख दया जाए. अपने भीतर बैठे पाया। अपना ःवMप पाया। आंखO से द/खै नह/ं श6द न पावे जान मन बुिघ तहं पहंु चे नह/ं कौन कहे सैलान अलेख इसिलए कहते ह0 क उसका िनशान कौन बताए? आंखO से द/खै नह/ं Page 118 of 256 http://www.न होओगे. Cजस दन तHवO को दे खोगे. समझे क सुंदर हो गए। और कभी बेढंग कपड़े पहन िलए तो समझे क बेढंग हो गए। कपड़O के साथ इतना लगाव बन जाता है क तुम भूल ह/ जाते हो म0 कौन हंू ? मगर तुम जो हो वह/ हो! तु]हार/ जात तो ॄG है । दरया िनजघर आइया पाया ॄG अलेख Cजस दन कपड़O से नजर हटे गी और अपने को दे खोगे. तुमसे कहा जाए यह तुम हो. पागल हो गए? मगर ऐ दन मां के पेट मG तुमने यह/ अपने को माना था क यह/ म0 हंू । फर एक दन जबान थे तब तुमने समझा क म0 जवान हंू । फर एक दन बूढ़े हो गए और तुमने समझा क म0 बूढ़ा हंू । और कभी तुम सफल हए ु और तुमने समझा क म0 सफल हंू । कभी !वफल हए ु और तुमने समझा क म0 !वफल हंू । और कभी लोगO ने स]मान दया.oshoworld.dkuks lquh lks >wB lc ऐसी Uी के ूित ूेम दखलाता है Cजसके ूित कोई ूेम नह/ं है । घृणा भी हो सकती है . िसरपर उठाया तो तुम स]मािनत हो गए थे। और कभी अपमान दया और तु]हारे ऊपर सड़े टमाटर और िछलके फGके और तब तुम समझे क म0 अपमािनत हंू । और ऐसे तुम कतने अिभनय कर चुके! फर भी एक बात तु]हG समझ मG नह/ं आती क ये अिभनय तो बदलते जाते ह0 । तुम जMर इनसे िभ.com . मगर ूेम दखलाता है । आंख से हषJ के आंसू बहे जाते ह0 --हषJ के! आनंदमगन होकर उस Uी क# तरफ आंखG उठाता है । ूेम के वचन बोलता है । रोआं-रोआं उसका ूेम से पुलकत मालूम होता है । यह बस अिभनय है । यह सब ऊपर-ऊपर है । लेकन इसमG भरोसा न करे तो अsछा अिभनेता िसT नह/ं होता। इसको पूर/ तरह भरोसा कर लेता है । ऐसे ह/ हमने भरोसा कर िलया है । और कतनी दफा हमारा अिभनय बदला है । फर भी हम चूकते नह/ं। तुम छोटे थे.

जो भीतर है उसे कैसे छुओगे? गंध तु]हG दसरे क# आ सकती है .dkuks lquh lks >wB lc आंखG जो बाहर है उसे दे खती ह0 . सोच-!वचार। बु!T का अथJ होता--इस सोच!वचार क# ूबया को जो जागकर दे खता है । अवेयरनेस। बु!T का अथJ होता है सा[ी। अब यह बड़ा अनूठा सूऽ है । साधारणतः यह/ कहा जाता है . बाहर काम आती है । वहां कोई काम नह/ं आतीं। वहां तो जाते समय यह सारा उपिव छोड़ दे ना पड़ता है । यह सारा बोझ उतारकर रख दे ना पड़ता है । वहां तो िनभाJर होता है जो. वह/ पहंु चता है । मन बुिध तहं पहंु चे नह/ं कौन कहे सैलान मन और बु!T का भेद समझ लेना। मन का अथJ होता है --मनन क# ूबया. भीतर क# आवाज नह/ं सुन सकते। हाथ से तुम जो बाहर है उसे छू सकते हो.oshoworld. अंतरतम क#. नाक सूंघती नह/ं. सा[ी बनो! बनने से यह घटना घटती है क तुम मन के पार हो जाते हो। फर सा[ी के भी पार होना पड़ता है YयOक तुम ःवयं के सा[ी नह/ं हो सकते। वहां कैसे दो हOगे? सा[ी का तो Page 119 of 256 http://www. कैसे तु]हG गंध आएगी? नाक वहां dयथJ ू है । इं ियां सब बाहर के िलए ह0 । बाहर के Rार ह0 । भीतर क# तरफ कोई इं िय नह/ं जाती। वहां तो वह/ जाता है जो सार/ इं ियO को छोड़कर शांत हो जाता है । आंख बंद कर लेता. सब तरह के जंजाल को छोड़कर--बु!T के. कान सुनता नह/ं. हाथ छूते नह/ं। सब तरह अपने भीतर िसकुड़ जाता है --जैसे कछुआ अपने अंगO को भीतर िसकोड़ लेता है । यह जो कछुए क# Cःथित है ऐसी ह/ Cःथित समािधःथ क# हो जाती है । आंखO से द/खै नह/ं श6द न पावे जान मन बुिघ तहं पहंु चे नह/ं कौन कहे सैलान इं ियां नह/ं पहंु चती वहां। मन भी नह/ं पहंु चता वहां। YयOक मन एकदम अवाक होकर क जाता है । और बु!TमNा भी वहां नह/ं चलती। होिशयार/ भी वहां काम नह/ं आती। समझदार/ भी कान नह/ं आती। वहां समझदार/ भी नासमझी हो जाती है । वहां तो आदमी को !बलकुल िनद}ष होकर पहंु चना पड़ता है . कान बंद कर लेता. मन के. भीतर को तो कैसे दे खGगी? आंखO का तो सारा उपाय बाहर है । तुम जो भी आंखO से दे खोगे वह तु]हारा ःवMप नह/ं हो सकता। तुम तो आंख के भीतर िछपे हो। वैसे ह/ समझो जैसे अपने घर क# Cखड़क# पर खड़े हो और Cखड़क# के बाहर झांककर दे ख रहे हो तो Cखड़क# से तुम बाहर दे ख रहे हो। तुम तो Cखड़क# के पीछे खड़े हो। ऐसे ह/ आंख के पीछे तुम खड़े हो। आंख तुमको न दे ख सकेगी। तुम अपनी आंख पर चँमा लगाते. तकJ के। तु]हार/ जो-जो बातG समझदार/ क# ह0 . सोच!वचार के. तो चँमे से तुम सार/ दिनया को दे ख लेते। अब तुम ु चँमे को िनकाल कर और चँमे से अपने को दे खने क# कोिशश करो तो तुम नह/ं दे ख पाओगे। चँमा मुदाJ है ऐसे ह/ आंख भी मुदाJ है । आंख पीछे लौटकर नह/ं दे ख सकती। आंख बाहर ह/ दे ख सकती है । कान बाहर क# आवाज सुन सकते ह0 .com . ःवयं क#. नाक बंद कर लेता--इसको ह/ तो DािनयO ने गुिm कहा है । इस अवःथा को ह/ संयम कहा है । आंख दे खती नह/ं.

यह सब माया का ह/ खेल है । माया तहां न संचरै जहां ॄG का खेल और जहां ॄG का खेल शुM हआ ु . G कान. यह बता दे ता है । कहां-कहां से गुजरना पड़ा यह बता दे ता है । लेकन लआय! लआय क# बात छूट जाती है । नह/ं कह/ जा सकती। कौन कहे सैलान! उसक# ल[णा कौन करे ? उसका िनशान और Mप कौन बताए? माया तहां न संचरै जहां ॄG का खेल यह सब तो माया का ह/ हःसा है --इं ियां.dkuks lquh lks >wB lc मतलब होता है तुम और कसी के सा[ी बन रहे हो। तो यह सूऽ Cजसको कृ ंणमूितJ अवेयरनेस कहते ह0 . बु!T. मन तो वहां चलता ह/ नह/ं. अंधेर नह/ं। लेकन Page 120 of 256 http://www. परमाHमा के ल[ण के संबध ं मG नह/ं। कैसे पहंु चा यह बता दे ता है । कस-कस मील के पHथर को राह पर िमलना हआ था.oshoworld. एक बार अंधेरे मG जाकर परमाHमा को कहा क तुम अपने सूरज को कहो.याय हो रहा है । और म0ने बहत ु ूती[ा कर ली। और म0ने सुनी थी कहावत क चाहे दे र हो वहां. म0ने कभी इसका कोई नुकसान नह/ं कया और मेरे पीछे हाथ धोकर पड़ा है । दनभर मुझे भगाता है । रात मG कसी तरह लेट भी नह/ं पाता क फर सुबह हाCजर हो जाता है । फर भगाता है । यह मामला Yया है ? यह अ. Cजसक# DािनयO ने सा[ीभाव कहा है . ु यह बता दे ता है । कैसा-कैसा मागJ बीता. यह बात सच है । मन तो जा नह/ं सकता। सोच-!वचार का धुवां वहां रहे गा. आंख. मन. अनुभव कर लेता है और एकदम गूंगा हो जाता है । और तुम उससे पूछो तो एकदम गुमसुम बैठ जाता है . े सूरज का दशJन न होगा। यह तो बात ठWक है । यह तो सभी ने कह/ है लेकन एक कदम और ऊपर उठाते ह0 । वे कहते ह0 . बोलता ह/ नह/ं और अगर बोलता है तो बोलता है केवल !विध के संबध ं मG.com . !वटनेस उसके भी पार जाता है । दरया कहते ह0 . तो तुम दे ख ह/ न पाओगे। बादल िघरे रहG ग. वहां सा[ी भी नह/ं जाता। सा[ी ह/ रह जाता है तो फर सा[ी कैसे बनोगे? माऽ सा[ी बचता है तो कसके सा[ी? अब तो दो नह/ं बचे। Dाता और Dेय का भेद नह/ं रहा। ि_ा और ^ँय का भेद नह/ं रहा। अब तो एक ह/ बचा तो कसके सा[ी? कौन सा[ी? और कसका? तो सा[ी भी गया। मन बुिध तहं पहंु चे नह/ं कौन कहे सैलान तो अब खबर कैसे लG उसक# क उसका Mप Yया? उसका रं ग Yया? उसका ःवाद Yया? उसका ल[ण कैसे बताएं? उसक# खबर कैसे लाएं? इसीिलए तो आदमी गूंगा हो जाता है । गूंगे का गुड़ हो जाता है । जान लेता है . मेरे पीछे YयO पड़ता है ? मुझे YयO परे शान करता है ? म0ने इसका कुछ कभी !बगाड़ा नह/ं। जहां तक मुझे याद पड़ता है . वहां माया नह/ं ूवेश कर पाती। जन दरया कैसे बनG र!व-रजनी का मेल बड़/ oयार/ बात कह/ है । जन दरया कैसे बने र!व-रजनी का मेल सूरज िनकले और रात से मेल कैसे बने? म0ने सुना है . पहचान लेता है .

जब तक दोनO वाद/-ूितवाद/ अदालत मG खड़े न हO तब तक िनणJय भी कैसे हो? कहते ह0 ईtर परम श!"वान है . वह/ हमारा !पता है । बाक# सब माता-!पता औपचारक ह0 । बाक# सब जाितयां dयावहारक ह0 । असलो जात ॄG असली माता-!पता परमाHमा। िगरह हमारा सु.य यानी--जहां !वचार थक कर िगर गए. सब dयथJ जाएंगे। जब तक शू.य मG है । बाक# तुम Cजसने घर बना रहे हो. शू.नाटा रह गया िसफJ। सब. जहां बु!T भी गई. अनुपCःथित हो गया। सब हट गया। एक कोरा आकाश रह गया। असीम आकाश। Page 121 of 256 http://www. जो तुम जानते थे.न मG। हमारा शू.य मG असली घर। शू.न मG अनहद मG !बसराम अपूवJ वचन है । गांठ बांधकर रख लेना। इससे बहमू ु wय ह/रा न पाओगे। जात हमार/ ॄG है माता-!पता है राम हमारा होना ॄG से आया। हम उससे उपजे ह0 इसिलए वह/ हमार/ जात है । हम उससे उपजे इसिलए वह/ हमार/ मां है . जहां कुछ भी न बचा. वह अवाक कर दे ता है । रतन अमोलक परखकर रहा जौहर/ थाक दरया तहं क#मत नह/ं उनमन भया अवाक जात हमार/ ॄG है माता-!पता है राम िगरह हमारा सु. हाथ-धोकर पड़ा है । आप इसे रोको। बात तो परमाHमा को भी जंची क इस बेचारे अंधेरे से सूरज का !बगाड़ा Yय है ? यह अ. अंधेरे को मेरे सामने बुला दG । तो म0 दे ख तो लूं कौन अंधेरा है ? पहचान तो लूं क कौन अंधेरा है ? कसका म0 पीछा कर राह हंू यह तो म0 पहचान लूं। अभी तो पीछा कैसे कMंगा? मेर/ मुलाकात ह/ नह/ं हई। और कहते ह0 क तब से ईtर भी परे शान है । ु फाइल वह/ं क# वह/ं पड़/ है । वह अंधेरे को ला नह/ं सकता सामने। और जब तक अंधेरे को सामने नह/ं लाएं.य कोन खोज लो तब तक असली घर न िमलेगा। िगरह हमारा सु.oshoworld. वह माऽ अंधेरा था। वह उसके सामने टकेगा नह/ं। तु]हार/ सब धारणाएं !पघलकर बह जाएंगी। तु]हारे सारे !वचार बह जाएंगे। तुम बह जाओगे। तुमने जो कल तक जाना था.com .न मG--और हमारा घर शू. वह कोई भी काम न आएगा। आमूल-चूल तुम बह जाओगे। और जो शेष रह जाता है . तब तु]हारे बाहर Cजसको तुमने अब तक जीवन जाना था. सवJ श!"वान है . लेकन वह भी यह नह/ं कर पा रहा क अंधेरे को सूरज के सामने ले जाए। जन दरया कैसे बने र!व-रजनी का मेल कैसे हो मुलाकात? यह नह/ं होनेवाली। तो जब तु]हारे भीतर का सूरज ूकट होगा.य स.dkuks lquh lks >wB lc दे र भी हो गई और अंधेर भी हो रहा है । कतनी सदयां बीत गई और यह सूरज मेरे पीछे पड़ा ह/ है .याय हो रहा है । सूरज को बुलाया। सूरज से पूछा क तू अंधेरे के पीछे YयO पड़ा है ? उसने कहा कैसा अंधेरा! मेर/ कोई पहचान ह/ नह/ं। पीछे कैसे पडू ं गा? दोःती ह/ नह/ं तो दँमनी कैसी बनेगी? अभी तक मेर/ मुलाकात भी नह/ं हई। तो नाराजगी कैसे होगी? आप ु ु एक कृ पा करG . जहां मन उनमन हो गया.

मO से ऐसे हो. अचानक घप गया। तो इतना घबड़ा गया है .य का अनुभव हो गया है । अनायास तो कुछ होता नह/ं। !पछले ज. पद-ूित`ा. दसरा ू ु मोल ले िलया। जब मोल लेते हो। तब वह सुख का आtासन दे ता है । थोड़/ दे र मG ह/ पहचान होती है । फर दख ु ूगट हो जाता है । कतने ज.य के घर को खोजोगे? शू.य घर को पा लो. ऐसे दख ु तुम बदलते रहे । कब तुम जागोगे? कब तुम शू. परवार बसाओ. जब चीजG !बखरने लगती ह0 फर उसका क_। ऐसे तुम रोते ह/ रोते गुजारते हो। एक रोने से दसरे रोने मG चले जाते हो बस. थोड़/ ू दे र के िलए आंसू थम जाते ह0 .य मG ह/ पहंु चकर आदमी अपने घर आता है । और उस घर को बनाने क# जMरत नह/ं है .com . मगर थोड़/ दे र मG दसरा कंधा थक जाता है फर इस कंधे पर ू रख िलया। ऐसे ह/ Cजंदगी है तु]हार/ जैसे मरघट ले जाते व" अथx को कंधा बदलते ह0 । बस. बीच मG राहत िमलती है । कहते ह0 क जब लोग आदमी को मरघट ले जाते ह0 .dkuks lquh lks >wB lc िगरह हमारा सु.मO-ज. ूेमी-!ूयजन.मO मG इस शू.य को खोजा होगा। बात पूर/ नह/ं हो पाई होगी.य मG पहंु चकर ह/ परम !वौाम उपल6ध होता है । उसके पहले तुम लाख उपाय करो--घन कमाओ. वह घर बना ह/ हआ ु है । वह तु]हारे भीतर मौजूद है । एक [ण को तुमने उसको खोया नह/ं। जरा ^!_ बदले तो तुम अपने शू. फर िमटने क# तकलीफ झेलनी पड़े गी। दोहर/ तरह क# तकलीफ है । पहले बनाने का क_. मगर वह घर शू.य आकCःमक तो घबड़ाहट तो ु हो ह/ जाएगी। न खोजते थे.मO क# कमाई होगी। ज. अथx उठाते ह0 तो राःते मG कंधा बदल लेते ह0 । इस कंधे पर रखे थे. न आकां[ा थी. तुम कंधा बदल रहे हो। एक दख दख ु से घबड़ा गए. लाख संबध ं बनाओ.oshoworld. कल िमट जाएगा। बनाने मG तकलीफ झेलोगे और बन भी न पाएगा. कोई ॄG कहता है .न मG अनहद मG !बसराम और वहां कोई सीमा नह/ं असीम है । अनहद। उसक# कोई हद नह/ं है । वह/ं !वौाम है । उसके पहले तकलीफ है । उसके पहले बेचैनी है । उसके पहले तनाव है । शू. उस परम घर को पा लो Cजसको कोई िनवाJण कहता है . जMर िमलती है । एक रोने से तुम दसरे रोने मG जाते हो. समािध है । कब तुम अनहद मG !वौाम करोगे? या क तु]हG ौम ह/ करते रहना है ? या क तु]हG घर बनाने और िमटाने ह0 ? या क तु]हG रे त के घर ह/ बनाने मG रस है ? या क तु]हG ताश के घर बनाने मG रस है ? तुम कम तक ये कागज क# नावG तैराते रहोगे और डु बाते रहोगे? जागो। शू.य का है । समझकर जाओगे तो अsछा होगा। कल रात एक युवक आया जमJनी से। वह बहत है । सऽह साल क# उमर मG ु डरा हआ ु अनायास उसे शू. ू और कुछ फकJ नह/ं पड़ता। थोड़/ दे र राहत िमलती है . बनाने क# झंझटG और फर जब उखड़ने लगती ह0 . सब उजड़ जाएगा। आज बनाओगे. Page 122 of 256 http://www. इस कंधे पर अभी थकान नह/ं. वह सब नाम के भेद ह0 .य के धर को खोजना ह/ Iयान है . अटक# रह गई होगी। बीज पड़ गया होगा। इस जीवन मG फसल आई। तो इस जीवन मG तो !बलकुल अनायास हई। सऽह साल के युवक को घट जाए शू. कोई मो[ कहता है .

य दे खता तो नाच ू उठता.य दे खता तो कहता.य होने का मतलब शैतान। शू.य उसे परम ःवाःय दे जाएगा। अब क# बार शू.न मG अनहद मG !बसराम Page 123 of 256 http://www.oshoworld.यासी बना िलया है । उसे फुसला कर Iयान मG ले जाएंगे। अबक# बार आशा क# जाती है क जब फर दबारा ु शू. एक दफा शू.य ना-कुछ नह/ं है । लेकन उस युवक का डर म0 समझता हंू । उसकाके कसी तरह फुसलाकर सं. अगर बुT क# ु घबड़ा गया। अगर पूवJ मG पैदा हआ ु हवा उसके आसपास रह/ होती तो उसके पास दसर/ dया…या होती। शू.य है ॄGभाव। शू. बहता ह/ चला जाता। लेकन चूक गया। dया…या ने अड़चन डाल द/। dया…या ने डरवा दया। पCvम मG तो लोग समझते ह0 शू.यास लेने मG डर रहा था। YयOक उसे लग रहा है .com .य यानी शैतान से पयाJयवाची है । शू. ईसाइयत के खयाल उसके मन मG रहे हOगे और जब उसने यह शू.य का अथJ ह/ समझतG ह0 नकाराHमक.य क# ह/ बात हो रह/ है तो वह डर रहा है । जा भी नह/ं सकता YयOक यu!प वह शू.य ह/ सब कुछ है । तो वह घबड़ा भी गया है । रस भी आया.dkuks lquh lks >wB lc उसक# बात करते हए ु भी हाथ-पैर उसके कंप रहे थे। उसक# बात करते हए ु िसर घूमने लगा। होश जाने लगा। उसक# बात करते-करते उसक# आंख बंद होने लगी। घबड़ा गया है । वह चाहता नह/ं क फर कभी वैसा हो जाए। अब एक अपूवJ घटना थी लेकन एक घबड़ाहट आ गई। अब घबड़ाहट आ गई तो वह Iयान करने मG डरता है । अब वह सं. मगर हो जाता। शू. वह इतनी घबड़ा गई और यहां तो सार/ शू.य मG उसे सHय का भी दशJन हआ। यह भी वह कहता है --जो म0ने जाना है वह/ परम सHय है । मगर वह परम सHय ु म0 फर नह/ं जानना चाहता। कोई अथJ नह/ं है जीवन मG फर। फर महHवाकां[ा मG कोई सार नह/ं है । फर यह करने और वह करने मG कोई ूयोजन नह/ं है। शू.य उसे पगलाएगा नह/ं। अबक# बार शू.य क# कोई चचाJ ह/ नह/ं करता। ईसाइयत शू. रतन अमोलक परख कर रहा जौहर/ थाक दरया तहं क#मत नह/ं उनमन भया अवाक फर तो नाच बंद ह/ न होता। फर तो जो गीत का झरना बहता.य है सब कुछ। शू.य घटे गा तो उसके पहले वह तैयार हो जाएगा। अब क# बार शू.य दे खा तो वह बहत होता.य से घबड़ा गया लेकन उस शू.य का अथJ ह/ नह/ं समझे है । शू. कुछ भी नह/ं। शू.य को बड़ा बल दया है । अब dया…या क# बात है । पCvम मG शू. घबड़ा भी गया। dया…या भी उसने बड़े डर के कर ली। कल उसक# तरफ दे खते हए क जMर वह कसी अतीत मG कसी ु मुझे दखाई पड़ना शुM हआ ु बौT परं परा का हःसा रहा होगा। बौTO ने शू.य से उसक# ऐसी ह/ पहचान हो जाएगी-जात हमार/ ॄG है माता-!पता है राम िगरह हमारा सु.य क# छोट/ सी झलक उसको िमली है .य से बहत ु डरती है । इःलाम भी डरता है । पCvम मG पैदा हआ ु .

com .dkuks lquh lks >wB lc और एकबार अनहद मG !वौाम आ गया फर तुम कह/ं भी रहो. पुनः पहचान हो जाए। पुनख}ज है ॄG। YयOक खोया तो कभी नह/ं। मौजूद तो है ह/। तु]हार/ ूती[ा करता है । तुम जब चाहो. िनद}ष अDान मG उतरना। एकेक श6द के साथ तादा]य शर/र से.न मG अनहद मG !बसराम आज इतना ह/। शू. फर हजार संसार तु]हारे चारO तरफ शोर-गुल मचाता रहे . घर लौट आओ। तुम उसे वहां घर मG बैठा हआ पाओगे। ु िगरह हमारा सु.१९७७ ौी रजनीश आौम. Iयान करने के ह0 । एक-एक श6द पर ठठकना। एक-एक श6द का ःवाद लेना। आंख बंद करके डु बक# लगाना। एक-एक श6द के साथ मगन होना। एक-एक श6द के साथ थोड़ा-थोड़ा मन छोड़ना। थोड़े -थोड़े उनमन होना। एकेक श6द के साथ आvयJ क# पुलक भरना. कृ ंणमूितJ और बोिधधमJ के दशJन का नामकरण Yया करG ग? े शू.य-िशखर मG गैब का चांदना ूवचन : ६ दनांक: १६. पूना ूƒ सार हर से लगे रहो रे भाई अ_ावब.oshoworld. बनत-बनत बिन जाई Yया ऐसा ह/ है ? Page 124 of 256 http://www.७.य के िशखर मG गैब का चांदना Iयान से उदभूत नशे को कैसे स]हालG? पहला ूƒ: एक ूचिलत पद है -हर से लगे रहो रे भाई. इं ियO से छोड़ना ताक धीरे -धीरे तु]हारे भीतर के ॄG से पहचान फर से बन जाए. तु]हारे भीतर कोई तरं ग नह/ं पहंु चती। तुम िनःतरं ग बने रहते हो। तुम अपने घर आ गए। तुमने शाtत से सगाई कर ली। इन सूऽO पर Iयान करना । ये सूऽ !वचार करने के नह/ं ह0 . रोमांिचत होना। एकेक श6द के साथ Dान छोड़ना.

कतना ह/ समय बीते. अधैयJ मG दख ु है .dkuks lquh lks >wB lc ूाथJना के दो अंग ह0 : एक ूाथJना और दसरा ूती[ा। और दसरा अंग पहले अंग से भी ू ू gयादा महHवपूणJ है । ूाथJना तो बहत ु लोग कर लेते ह0 . ूाथJना मG सHयामह भी नह/ं है । YयOक सHयामह भी दरामह का ह/ अsछा ु ु नाम है । ूाथJना मG आमह ह/ नह/ं है . बनत-बनत बिन जाई। तुम अपनी तरफ से लगे रहो। तुम अपनी तरफ से हर का पीछा करते रहो। तुम अपनी तरफ से िनमंऽण भेजते ह/ रहो अथक। तुम अपनी तरफ से पुकारते ह/ रहो। तु]हार/ आंखG ूेम के आंसू िगराती रहG । और तु]हारे पैर घुंघM बांधकर ूेम के नाचते रहG । तुम अपनी तरफ से सब पूरा कर दो। तुम अपनी तरफ से कुछ कमी न करो। तुम अपनी तरफ से रNी भर भूल-चूक न करो। Cजस घड़/ भी मौसम पक जाएगा और तुम तैयार हो जाओगे उसी घड़/ घटना घट जाती है । अगर नह/ं घट रह/ है अभी तो उसका केवल एक ह/ अथJ है । िशकायत मत करना. समय पकने दो. िचंता है । अधैयJ मG बेचैनी है .याय नह/ं। वह भी मेर/ पाऽता के बनने के िलए समय है । बीज खो दया. होगा क नह/ं होगा Rं R है । धैयJ का अथJ ह/ यह/ होता है क होगा। िनCvत होगा। दे र कतनी ह/ हो। और जो दे र हो वह भी अ. म0ने ूाथJना कर ली। लेकन मेर/ ूाथJना इसी [ण पूर/ हो ऐसी आकां[ा नह/ं है । पूर/ हो ऐसी आशा तो है लेकन अपे[ा नह/ं। तैयार/ हो. अधैयJ है . धैयJ हो क अनंत भी ूती[ा करनी होगी तो करG गे। आज न हो. जwदबाजी है . वृ[ बनेगा। बीज बो दे ने के बाद पानी सींचते रहो और राह दे खो। जwदबाजी मG सब !बगड़ जाए। इस पद का यह/ अथJ है : हर से लगे रहो रे भाई. परसO न हो. न कोई दरामह है । ु ु दरामह तो दरू . हठ है . अधैयJ मG तनाव है . अभी होना चाहए। मांग मG बचकानापन है । जैसे छोटे बsचे कहते ह0 . अभी. इस ज.oshoworld. बीज फूटे गा. दरामह है । ूाथJना मG कोई हठ नह/ं है . केवल िनमंऽण है । तुमने पाती भेज द/ अपनी तरफ से.म मG न हो. तु]हारे Vदय के Rार बंद न हOगे। तु]हारा Vदय-मंदर खुला होगा। तुम ूती[ा करोगे। और ूती[ा मG बड़ा सुख है । YयOक ूती[ा मG बड़/ शांित है . ूभु को जब आना हो आए। तु]हार/ पाती इतनी ह/ खबर दे ती है क जब भी ूभु आए. धैयJ न चुका दG गे। ऐसे अनंत धैयJ से जो ूाथJना करता है उसक# इसी [ण भी पूर/ हो सकती है । और Cजसने अधैयJ कया हो उसक# कभी पूर/ न होगी। YयOक धैयJ ूाथJना का ूाण है । जब तुमने ूाथJना क# और धीरज न रखा तो ूाथJना न रह/. ूाथJना मG केवल िनवेदन है . ूती[ा थोड़े लोग कर पाते ह0 । और जो ूती[ा कर पाते ह0 । उनक# ह/ ूाथJना पूर/ होती है । ूती[ा का अथJ है . अगले ज.म मG न हो. तु]हारा दरवाजा खुला होगा। जब भी ूभु आए. फूटे गा। ठWक ऋतु आने दो. न कोई मांग है .com . मांग हो गई। चूक गए। मांग मG वासना है . कल न हो. मत कहना क परमाHमा नाराज है । मत कहना क मेरे साथ नाराज है । मत कहना क औरO के Page 125 of 256 http://www. इसी व"। आधी रात मG Cखलौना चाहए। मांग मG ूौढ़ता नह/ं है । मांग मG Cजद है .

उससे गलती नह/ं होती। यह ठWक दशा हो गई। जब तक तुम करोगे तब तक भूल-चूक हो सकती है । तुमसे भूल-चूक ह/ होगी। तुमसे और होने क# आशा भी कहां है ? इस अंधेरे मन को लेकर ठWक कैसे करोगे? इस बुझे दए को लेकर राह कैसे खोजोगे? संभावना भटक जाने क# है .मN होकर चीखो। थोड़े और द/वाने बनो। गीत और थोड़ा गुनगुनाओ! आता ह/ होगा। हर से लगे रहो रे भाई. और बुहारो. समपJण। ूाथJना का अथJ होता है. बस केवल एक ह/ अथJ है क तुम अभी तैयार नह/ं हो। तो तैयार/ मG लग जाओ। अगर आज तु]हारे Rार परमाHमा नह/ं आया तो तैयार/ मG लग जाओ। कल घर-Rार को और झाड़ो. बनत-बनत बिन जाई। बनत-बनत.dkuks lquh lks >wB lc साथ घट रहा है . तेज चले तो और भी gयादा भटकोगे। अगर बहत ु ह/ भागने वाले हए ु तब तो बहत ु िनकल जाओगे। दशा भर ठWक हो। तो ूाथJना दशा को ठWक कर दे ती है । ूाथJना का अथJ होता है . घटना ऐसे घटती है . होते-होते होता है । होता िनCvत है । जो भी उसक# तरफ गए. धूप जलाओ. तेज धावक भी पहंु च जाते ह0 । दशा भर ठWक हो। और ूाथJना ठWक दशा है । गलत हो तो खतरा है । तुम धीमे चलो तो भटकोगे. पहंु च जाते ह0 । दे र-अबेर। तु]हारे कदमO क# ताकत पर िनभJर है । कैसे तुम चलते हो! दशा ठWक हो बस इतना ह/ याद रहे . जwद/ चलनेवाले भी पहंु च जाते ह0 . कौन है तू? और उसने कहा. मेरे साथ YयO नह/ं घट रहा? मत कहना क अ.com . फर धीमे चलनेवाले भी पहंु च जाते ह0 . तुम तू। जलालु‰/न क# ूिसT क!वता है : ूेमी ने ूेयसी के Rार पर दःतक द/ और भीतर से आवाज आई.oshoworld. जैसे सौ डमी पर पानी भाप बन जाता है । अगर िन. मेरे कए कुछ न होगा. तू कर। तुमसे गलती हो सकती है . म0 तो उतार कर रखता हंू । कहता हंू . म0 अरे ! पहचानी नह/ं? Page 126 of 256 http://www.याय हो रहा है । अगर परमाHमा तु]हारे साथ नह/ं घट रहा तो िसफJ एक ह/ अथJ है .यानबे डमी तक भाप नह/ं बना है तो इसका यह मतलब नह/ं है क परमाHमा नाराज है । इसका इतना ह/ मतलब है क सौ डमी पानी जब तक गमJ न हो तब तक भाप नह/ं बनता। थोड़/ और लकड़यां लगाओ चूwहे मG और थोड़ा Xधन जलाओ। थोड़े और जोर से पुकारो. मेरे कए तो जो हो जाता है गलत हो जाता है । जहां म0 आया वहां गलती हो जाती है । मेर/ मौजूदगी गलती क# सबूत है । मेरा भाव क म0 मेर/ सबसे बड़/ गलती है । ूाथJना का अथJ है . फूल लगाओ। कल फर ूती[ा करो। अगर न आए तो इतना ह/ समझो क अभी कह/ं थोड़/ भूल-चूक और है । Cजस [ण भी भूल-चूक पूर/ हो जाती है . और साफ करो. संभावना पहंु चने क# नह/ं है । ूाथJना का अथJ होता है . थोड़े और पागल होकर उ. दया जलाओ.

यहां दो न समा सकGगे। ूेमी समझा। तीर लग गया है Vदय पर। चला गया वनO मG। कई चांद आए और गए। कई सूरज उगे और िमटे । वषJ पर वषJ बीते। उसने अपना म0 गलाया िमटाया.नाटा हो गया. Rार पर दःतक द/। फर वह/ ूƒ: कौन है ? अब ूेमी ने कहा. Cजस दन नाम माऽ भी न रहा. तु]हारे म0 का ताला िगर जाए तो Rार खुला है । कभी बंद नह/ं था। तु]हार/ आंख पर ह/ पदाJ है . चुoपी मG भी हो जाएगी ूाथJना। मगर एक मूल बात है क म0 को उतारकर रखो। फर न भी पुकारे तो पुकार पहंु च जाती है । और म0 के रहते लाख पुकारते रहो तो भी पुकार पुकार नह/ं पहंु चती। और जब तुम रहे ह/ नह/ं तो जwदबाजी कैसी? जwदबाजी कसक#? फर कौन अधैयJ करे गा? और कौन कहे गा क जwद/ हो जाए? यह भी म0 भी अपे[ा है क जwद/ हो जाए। म0 डरा Page 127 of 256 http://www. भ" क# सार/ भावदशा है । अगर तु]हार/ ूाथJना मG म0 का ःवर है तो Rार-दरवाजे बंद रहG गे परमाHमा के। लाख िसर पटको. अब ऊब गया हंू इस म0 से और मेरे करने से। अब कहता हंू . पीड़ा और पागल पन पैदा हए। ु ूाथJना का अथJ है .oshoworld. तुम ह/ खोल सकोगे और तु]हारा म0 हट जाए. म0 के िलए Rार न कभी खुला है . Cजस दन उसने भीतर झांककर दे ख िलया और परम शू. परमाHमा पर कोई पदाJ नह/ं। लोग सोचते ह0 परमाHमा कह/ं िछपा है । तुम आंख बंद कए खड़े हो। यह तु]हारा म0 तु]हारे चारO तरफ एक काली द/वार बन गया है । ूाथJना का अथJ है .com . इस घर मG दो न समा सकGगे। यह ूेम का घर है . !पघलाया। Cजस दन उसका म0 !बलकुल !पघल गया. म0 िगर जाए.dkuks lquh lks >wB lc मेर/ आवाज नह/ं पहचानी? लेकन फर भीतर स. सब गलत हआ है । मेरे कए ु ु तो संसार हआ। मेरे कए तो दे ह बनी। मेरे कए तो जाल फैले। मेरे कए तो वासना उठW। ु मेरे कए तो कमJ का बहत मेरे कए सार/ ु जंजाल फैला। मेरे कए जो भी हआ ु . CजसमG क कोई धुन न उठती थी। आया. गलत हआ। ु िचंता और संताप. कोई उNर न आया। बहत ु Rार पर उसने िसर पीटा लेकन फर पीछे से कोई ूƒ भी नह/ं पूछा गया। घर मG जैसे कोई हो ह/ न। जब बहत ु चीखा-िचwलाया तो भीतर से इतनी ह/ आवाज आई. यह भाव िमट जाए क मेरे कए कुछ हो सकेगा। मेरे कए तो जो हआ है . अब कौन? तू ह/ है । और Rार खुल गए। यह Mमी क# छोट/ सी क!वता. तू कर-ूाथJना का सारभूत। ूाथJना काम मतलब नह/ं क तुम अwलाह-अwलाह पुकारो क राम-राम पुकारो। वे तो गौण बातG ह0 । न भी पुकारG .य को !वराजमान पाया. न कभी खुलेगा। म0 ह/ तो ताला है उस Rार पर। तु]हारा म0 उसके Rार पर ताला है । और परमाHमा तु]हारे म0 को नह/ं खोल सकता। ताला तुम लगाते हो.

बोिधधमJ और कृ ंणमूितJ के दशJन को Yया कहG ग. म0 क# मौत तो !बलकुल ःवाभा!वक है । म0 को कैसे संभाले हो यह/ चमHकार है . वह जो घबड़ाहट है क समय बीता जा रहा है . ु समय के बोध से भरा हआ ु वह शाtत है । फर कोई जwद/ नह/ं है । आज हो.oshoworld. सब बराबर है । अनंत काल मG कभी भी हो. gवार भरे . तह/ है बहकते हओं का इशारा ु तू ह/ है िससकते हओं का सहारा ु तू ह/ भटके-भूलO का है ीुव का तारा जरा सींकचO मG समा दखा जा म0 सध खो चुकूं उससे कुछ पहले आजा आओ तुम अिभनव उwलास भरे नेह भरे . oयास भरे अंजली के फूल िगर जाते ह0 आए आवेश फरे जाते ह0 जरा सींकचO मG समा दखा जा म0 सुध खो चुकूं उससे कुछ पहले आ जा म0 को बड़/ जwद/ है । म0 तो डर यह/ है क मौत आई जाती है। और म0 क# मौत िनCvत है । म0 का होना चमHकार है . कल हो. एक दन िगर ह/ जाता है । मौत इसी को होती है । म0 क# चूंक मौत होनेवाली है इसिलए म0 समय से बहत है । म0 को समय का ु घबड़ाया हआ ु बड़ा बोध है । जwद/ हो जाए. म0 क# मौत तो !बलकुल ःवाभा!वक है । म0 को कैसे संभाले हो यह/ चमHकार ू है । म0 िगरा-िगरा.। कल म0 एक क!वता पढ़ रहा था. इसी [ण हो जाए। तु]हG Yया डर है ? म0 को जरा हटाकर जरा अपनी शYल तो पहचानो। म0 को जरा हटाकर अपना Mप तो दे खो। तुम शाtत हो। तो कभी िमले. ु ु [णभंगुर है । इसिलए म0 बहत है । म0 हटा क फर तो जो बचा. बनत-बनत बिन जाई। दसरा ूƒ: आपने कहा क दो ह/ मागJ ह0 .dkuks lquh lks >wB lc हआ है क समय न िनकल जाए। YयOक म0 का समय बंधा हआ है । म0 शाtत नह/ं है . Iयान और भ!"। Iयान मG ूय~ िनहत है और ू भ!" मG ूसाद। इस संदभJ मG अ_ावब.. अभी िगरा। कसी भी [ण िगर जाएगा। यह तो कभी भी टटने को तHपर है । इसे संभालने के िलए सारा जीवन लगाना पड़ता है फर भी यह संभल तो पाता नह/ं. े जो कोई भी अनु`ान नह/ं बताते? Page 128 of 256 http://www..com . सब बराबर है । फर जो समय क# आपा-धापी है . अभी हो जाए. कह/ं ऐसा न हो क म0 मर ह/ जाऊं और यह घटना न घटे . अनंत काल मG िमले तो भी अभी िमला। दे र होती ह/ नह/ं फर। इसिलए ूाथJना का अिनवायJ अंग है । ूती[ा। अनंत धैयJ से भर/ ूती[ा। हर से लगे रहो रे भाई.

सHय मG जागने के दो ह/ मागJ ह0 : भ!" और ूेम। फर ःवभावतः ूƒ उठता है क अ_ावब तो कहते ह0 कोई मागJ नह/ं। बोिधधमJ भी कहता है . उसी [ण िमल जाता है । िमलता तो उसी [ण है . नह/ं हो जाओगे। या फर इतनी समझदार/ हो Cजसको कृ ंणमूितJ अंडरःटG डJ ग कहते ह0 . दसरे क# खोज। अपने को तो हम ू खोज नह/ं सकते। कहां खोजGग? े कहां जाएंगे खोजने? ःवयं तो हम ह0 ह/। इसमG यह भी एक संभावना है . जो ु दरू है । खोजते हम पर को। खोज का मतलब ह/ होता है . मगर यह दMहतम संभावना है । ूेम और भ!" से सुगमता से बात हल होती ु है । Iयान थोड़ा उससे कठन है . Cजन खोजा ितन खोया। YयOक खोजने का मतलब है . न Iयान क# जMरत हो। िसफJ बोध मG यह बात िसफJ समझ ली जाए और घटना घट जाए। कठन हो गई बात। बोध इतना होता तो घट ह/ गई होती। इसीिलए तो कृ ंणमूितJ को बैठे लोग सुनते रहते ह0 .dkuks lquh lks >wB lc सHय को जानने. वचन ूिसT है . कह/ं पहंु चते इHयाद नह/ं। और बात कृ ंणमूितJ ठWक ह/ कहते ह0 .com . Cजन खोजा ितन पाइयां। Cजसने खोजा उसने पाया। अगर पूछोगे बोिधधमJ से बोिधधमJ कहे गा. अमागJ है । उसक# िगनती मागJ मG नह/ं हो सकती। अमागJ से भी पहंु चा जाता है । मगर वह अमागJ है । मागJ तो दो ह0 : भ!" और Iयान। अमागJ एक है । अमागJ को भी समझ लेना चाहए। वह भी बात तो बड़/ गहर/ है . या तुम Iयान मG !बखर जाओ. सरल को हल करना बहत ु मुCँकल हो जाता है । बात सच है क तुम जहां हो वह/ं परमाHमा है । तुम जैसे हो वैसा ह/ परमाHमा है । इसिलए अब कह/ं जाना नह/ं है । हम सुनते ह0 . इससे चूक मG न पड़ना। सरल दखाई ह/ इसीिलए पड़ता है क बहत ु कठन है । Cजतना सरल हो उतना ह/ कठन है । कठन को हल कया जा सकता है . अहं कार Cजतनी दौड़ ले सकता था ले ली हो और फर थका-हारा िगर पड़ा. जब तुम नह/ं होते। अब तुम कैसे नह/ं होओगे. इतनी ूDा हो क न ूेम क# जMरत हो. क कोई मागJ नह/ं। जो वे ूःता!वक करते ह0 . सो टका ठWक कहते ह0 । शायद सौ टका ठWक है इसिलए चूक हो जाती है । लोग अभी वहां है जहां एक टका बात समझ मG मुCँकल से आया। तुम सौ टका बात कहे चले जाते हो। लोगO पर Iयान दो। वहां से बात करो जहां लोग खड़े ह0 । तुम वहां से Page 129 of 256 http://www. कोई मागJ नह/ं। कृ ंणमूितJ भी कहते ह0 . नह/ं हो जाओगे.oshoworld. बड़े काम क# है । बोिधधमJ. कह/ं गए। कह/ं गए तो दरू गए। दोनO सच ह0 । लेकन बोिधधमJ क# बात समझना तभी संभव है जब खूब-खूब खोजा हो और न पाया हो। जब खोज-खोज कर थक गए हो और न पाया हो। जब खोज आCखर/ कर ली हो Cजतनी कर सकते थे. अ_ावब और कृ ंणमूितJ का जोर यह है क तुम परमाHमा से कभी !बछड़े नह/ं। तुम कभी दरू गए नह/ं। इसिलए उसे तुम कसी मागJ से खोजने चलोगे तो कैसे पाओगे? तुम तो वहां हो ह/। इसिलए तुम अगर सब खोज छोड़ दो तो पहंु च गए। खोज के कारण भटक रहे हो। YयOक खोज का मतलब ह/ हआ क कह/ं दरू है । खोजते हम उसी को ह0 . इसक# ये दो !विधयां ह0 । या तो तुम ूेम मG गल जाओ. अमागJ और भी कठन। सरल दखाई पड़ता है .

वहां से शुM करो। वह/ं से उसक# याऽा होगी। अ_ावब को इसक# फब नह/ं है । तो कोई जनक समझ िलया बात. एक पोःटकाडJ पर िलखी जा सकती है । YयOक जो अ_ावब कह रहे ह0 . जहां से बहत ु राःते िनकलते ह0 । सभी राःते इसको समझाते ह0 । यह नह/ं जंचा दसरा समझाते ह0 । कसी भी राःते से आ जाए। कृ ंण को इसक# कोई ू िचंता नह/ं क कस राःते से आता है । कृ ंण का कसी मागJ से कोई मोह नह/ं है । और Page 130 of 256 http://www. अजुJन जहां खड़ा है । इसिलए अ_ावब क# गीता मG पुन!" है । पुन!" ह/ पुन!" है YयOक वह एक ह/ बात है । बोलने को। एक ह/ डमी का मामला है । वह एक ह/ बात बोले चले जाते ह0 । फर-फर दोहराते ह0 . उपयोगी नह/ं। कृ ंण अजुन ह0 .oshoworld.नयाबे डमी पर उबल रहा है आदमी। वह तो ह/ तो समझ सकेगा सौ डमी के पार क# बात। उसके िलए कर/ब एक कदम बात हो जानेवाली। शायद एक कदम भी नह/ं. कतने लोग? कृ ंण क# गीता gयादा लोगO तक पहंु ची। करोड़O जनO तक पहंु ची। अ_ावब क# गीता YयO नह/ं पहंु ची? कृ ंण क# गीता से सुनने वाले क# Cःथित का …याल है । आदमी कहां खड़ा है . वह/ जनक दोहराते ह0 । फर जनक दोहराते ह0 . फर म0 तु]हारे कसी काम का नह/ं। फर मेरे तु]हारे बीच इतना फासला हो जाएगा क तुम सीढ़/ न लगा सकोगे। अनंत दर/ ू हो जाएगी। मुझे वहां से बोलना है जहां तुम हो। धीरे -धीरे तु]हG सरकाना है . ठWक है । लेकन जनक कतने ह0 ? एक आदमी िमल गया यह भी चमHकार है । कृ ंणमूितJ को अभी तक एक भी जनक नह/ं िमला। िमल सकता नह/ं। उसके कारण ह0 । अ_ावब को भी कैसे िमला. जरा सी गित.dkuks lquh lks >wB lc बात कर रहे हो जहां तुम हो। बोिधधमJ वहां से बोलता है जहां ःवयं है । अ_ावब वहां से बोलते ह0 जहां ःवयं है । सुननेवाले क# िचंता नह/ं करते। अगर मG वहां से बोलूं जहां म0 हंू . भ!" क#. वह !बना अ_ावब के पहंु च जाएगा। जनक होने क# [मता का अथJ ह/ यह है क िन. फुसलाना है । कसी दन वहां ले आना है । जहां म0 हंू । लेकन अगर म0 वह/ कहंू जहां म0 हंू तो तु]हारे िलए बेबझ ू हो जाएगा। कतने लोग अ_ावब को समझ पाए. यह भी जरा संद5ध है । िमला क िसफJ कहानी है । YयOक जो जनक होने क# [मता रखता हो. फर अ_ावब दोहराते ह0 । वह िसफJ दोहराना है । बार-बार दोहराना है । YयOक कुछ और तो कहने को है नह/ं। एक ह/ सHय है वहां। उसी एक सHय को बार-बार कहना है । कृ ंण बहत ु सी बातG कहते ह0 --Dान क#. जरा सी चहलकदमी. कमJ क#। कृ ंण सारे मागr क# बात कहते ह0 । YयOक अजुन J ऐसे !बबूचन मG पड़ा है । इसको पYका पता नह/ं क यह कहां खड़ा है ? यह बीच बाजार मG खड़ा है . फर-फर दोहराते ह0 । खुद भी वह/ दोहराते ह0 िशंय भी वह/ दोहराता है । अ_ावब क# पूर/ गीता एक पृ` मG िलखी जा सकती है.com . खाई-खŽड के !बलकुल कनारे पर खड़ा है . जरा सा धYका! वह कनारे पर खड़ा है . जरा सा हवा का झOका काफ# है । न भी आता हवा का झOका तो वह खुद भी कूद जाता। सामने ह/ खड़ा था परमाHमा। परमाHमा सामने ह/ फैला था। अ_ावब न भी िमलते तो जनक पहंु च जाते। अ_ावब उसके काम के ह0 Cजसको न भी िमलता तो पहंु च जाता। तो बड़े काम के नह/ं ह0 । व"dय बहत J क# बात बोल रहे ु महान है । लेकन काम का नह/ं.

आकाश मG उड़ने जैसा है । जमीन पर तो मागJ बनता है । तुम चलोगे तो मागJ बनता है . अनंत काल मG तो भ!" का एक मागJ बन गया है । इतने Iयानी हए ु ह0 अनंत काल मG क Iयान का एक मागJ बन गया है । लेकन ये अ_ावब. इनके संबंध मG Yया? चल भी नह/ं रहे ह0 . पगंŽड/ बनती है । कई लोग गुजरG गे तो मागJ और सघन हो जाता है । मागJ बनता है । इतने भ" गुजरे ह0 . मगर आकाश मG उड़ने वालO के िलए ठWक है । जो अभी जमीन पर चल रहे ह0 . इनके संबंध मG Yया? इनको बहत ु दरू आकाश दखाई दे भी जाए तो भी िसफJ ये तड़फGगे.हG पता ह/ नह/ं इनके पास पंख ह0 । इनके पंखO को धीरे -धीरे जगाना होगा। सोए पंखO को धीरे -धीरे जगाना होगा। इनके सोए पंखO को धीरे -धीरे उकसाना होगा। इ. इनक# ह]मत बढ़ जाए। पंख इनके पास ह0 . जो कृ ंणमूितJ जैसे बूढ़े हो गए ह0 । उनको सुनते-सुनते बूढ़े हो गए ह0 । और फर भी कुछ बांित नह/ं घट/। पचास साल मG बड़/ याऽा हो सकती थी। लेकन बात वहां से शुM होनी चाहए. वह/ तो झंझट है । आंख तो भींचे हए ु बैठे ह0 । इ. बोिधधमJ.हG धीरे -धीरे राजी करना होगा। बमशः धीरे -धीरे .oshoworld. लाओHसे क# हं सी क# आवाज गूज ं ती ह/ रह/ सदयO मG। कं”यूिशयस कुछ जवाब भी नह/ं दे सका था। लाओHसे के िलए तो जो भी वाःत!वक मागJ है --अमागJ कहG --वह ऐसा है . लाओHसे. उड़ न सकGगे। इ. तु]हारे सारे ूवचन वःतुओं से संबT ह0 जो धूल मG छोड़े गए चरण-िचnO से gयादा नह/ं। और जानते ह0 क चरण-िचn जूतO से बनते ह0 लेकन वे जूते ह/ नह/ं होते? कहते ह0 . जो जमीन पर घिसट रहे ह0 . जहां आदमी खड़ा हो। तो अमागJ का मागJ तो करोड़ मG एक-आधा के िलए ह0 । इसिलए उसको मागJ भी Yया कहना? चीनी कथा है क लाओHसे ने एक बार अतीत साहHय और समृ!T क# बहत ु चचाJ करने के िलए कन”यूिशयस का मजाक उड़ाया था। कं”यूिशयस उसे िमलने आया था। लाओHसे ने उससे कहा था.dkuks lquh lks >wB lc कृ ंण को यह फब नह/ं है क म0 जहां खड़ा हंू वह बात इसे आज समझ मG आ जाए। यह अपे[ा जरा gयादा है । इसिलए कृ ंणमूितJ को तुम पाओगे. बड़े बेचैनी मG ह0 । समझाते-समझाते थक गए ह0 । पचास साल से समझा रहे ह0 । बोलते-बोलते िसर पीट लेते ह0 । YयOक दखाई ह/ नह/ं पड़ता क कसी को समझ मG आ रहा है क नह/ं आ रहा। यह/ लोग बैठे सुन रहे ह0 । उनमG कई पचास साल से सुनने वाले भी ह0 . परमाHमा इनके पास है . कोई रे खा नह/ं छूट जाती। कोई मागJ नह/ं बनता है । जमीन पर चलने जैसा नह/ं है सHय.हOने जमीन के अितर" कुछ भी नह/ं जाना. इनके संबध ं मG Yया? Cजनको अपने पंखO का पता ह/ नह/ं है . अगर ये आंख खोल सके तो अभी पास ह0 । मगर आंख ह/ नह/ं खोलते.हG धीरे -धीरे राजी करना होगा। आहःता-आहःता ये आंख खोलG। Page 131 of 256 http://www. कोई चरण-िचn नह/ं छोड़ते। प[ी उड़ जाता है . जैसा आकाश मG प[ी उड़ते ह0 .com . कृ ंणमूितJ. इनके संबंध मG Yया? Cज. इनका कोई मागJ नह/ं। वे कहते ह0 आकाश मG उड़ने जैसा है सHय। ठWक है .

तुम पसीने से तरबतर हो। तुमने होश खो दया है एक पHथर से चोट खा गए.com . कोई दर/ ू न थी। अभी तो दर/ ू है । अभी तो बड़/ दर/ ू है । अभी तो अनंत दर/ ू है । माना क अनंत दर/ ू झूठ है . जागो। होश जगा लो। जहां हो वह/ं दया जला लो। और सब हो जाएगा। लेकन यह बात तु]हारे कानO पर ऐसे पड़े गी. अभी है । तुम अगर डरे हए ु हो तो तुम भला झूठे भूत से डरे हए ु हो. टू हयर ऑफ ए फश इन ए वाटर एथःटJ । मागJ का मतलब ह/ है क दर। ू मागJ दर/ ू को ूःता!वत करता है । अगर पास ह/ पास ह/ है तो कैसा मागJ? और अगर तुम ह/ हो तो इं च भर फासला नह/ं. कबीर ने इतना ह/ कहा. पर वह यद िनकट हो तो कोई भी मागJ आवँयक नह/ं। सच. यह पसीना बहना और छाती क# धड़कन और यह होश खो दे ना. इधर भूत ह0 . नो पाथ बीडे थ दाउ एप आल बेरली इट मेकेथ मी ःमाइल. जैसे बहने कानO पर पड़/। यह बात कुछ अथJ न रखेगी। सुन भी लोगे. समझा क गए! िगर पड़े क बेहोश ह/ हो गए। भूत झूठ है . मुझे बहत ु हं सना आता है क मछली सागर मG ह/ oयासी है । पाथ !ूसपोजेज डःटG स. अब तुम डरे हए ु हो। अब जरा पNा खड़कता है तो तु]हG लगा क आया भूत। जरा कुNा िनकल जाता है . यह तो सब सच है । भूत झूठ हो क सच इससे Yया फकJ पड़ता है ? जो घट रहा है वह तो सच है । इसिलए असली सवाल यह नह/ं क भूत है या नह/ं। अब कोई आदमी वहां तु]हG समझाए क तुम dयथJ ह/ परे शान हो रहे हो. इफ ह/ बी िनयर. लेकन तु]हG खयाल आ गया. या कसी ने मजाक कर दया है क जरा संभल कर िनकलना. तु]हG लगा आ गया। तुम भागने लगे। तु]हार/ छाती धड़क रह/ है . तो मागJ कहां बनाओगे? जो Cजतना तुम चलोगे उतने भटक जाओगे। बात !बलकुल तकJयु" है क Cजतना चलोगे उतना भटक जाओगे। चलो मत. राःते मG मरघट है . लेकन यह जो तु]हG घट रहा है . िसफJ तु]हG खयाल है .oshoworld. तु]हारे हाथ-पैर कांप रहे ह0 . भूत है ह/ Page 132 of 256 http://www.dkuks lquh lks >wB lc कहते ह0 कबीर जब युवा थे तब भी घटना है । कुछ लोग उनसे ईtर तक पहंु चने का मागJ पूछने आए थे। वे बौ!Tक Mप से उसके रहःयमय पथ के संबध ं मG मागJ-िनदp श चाहते थे। रवींिनाथ ने इस पर टoपणी क# है । रवींिनाथ ने िलखा है . तो भाषा समझते हो तो समझ भी लोगे. सच. प[ी फड़फड़ाता है . इससे Yया फकJ पड़ता है ? भय तो सsचा है । एक अंधेर/ रात मG तुम एक मरघट से गुजरते हो। तुम डरे हए ु हो क भूत-ूेत सताएंगे। भूत-ूेत कोई भी नह/ं है । हो सकता है मरघट मरघट ह/ न हो. मगर फर इससे कुछ Rार न खुलेगा। भ" कहता है अभी तो दर/ ू है । जब जागोगे तो पाओगे. मागJ दसर/ को ूःता!वत करता है । समझना। मागJ दर/ ू ू को ूःता!वत करता है . लेकन अभी है । झूठ ह/ सह/.

वहां से खड़े होकर िचwला दे ता है क घाट/ के लोगO. वहां तक न तो आवाज पहंु चती है . जो पहाड़ के िशखर पर पहंु च गया. उसको छोड़ा जा सकता है । उसका हसाब रखने क# कोई जMरत नह/ं। और जो उससे पहंु चता है वह ऐसा !बरला dय!" है क उसको हम अपवाद मान ले सकते ह0 । िनयम बनाने क# जMरत नह/ं। Page 133 of 256 http://www.हG !वरस कए दे रहा है । वे चाहते थे क घर-गृहःथी बना लG और वह सब उजाड़े दे रहा है । अभी तो उनको यह ऐसा लगेगा क यह दँमन है । ु िशंयO को गु दँमन जैसा मालूम होगा। और गु है क लौट-लौट कर आएगा और उ.हG ु वा!पस ले चलने लगेगा। एक आदमी वह भी है . भूत भी नह/ं है । म0 dयथJ ह/ घबड़ा रहा था। घबड़ाने क# कोई जMरत नह/ं है । तब तुम भी हं सोगे। तुम भी राजी हो जाओगे क बात तो ठWक थी. और आवाज भी पहंु च जाए तो अथJ नह/ं पहंु चता। और अथJ तो पहंु च ह/ कैसे सकता? YयOक वे तो तु]हारे श6दO का जो अथJ करG गे वह उनका ह/ होगा. वह जगा रहा है । वे संसार मG थोड़ा और रस ले लेना चाहते ह0 और वह उ. सुन लो बात ऐसी है .हG वा!पस पहाड़ के िशखर क# तरफ ले चलने लगे राःता कठन होगा। और िशंय इं कार करG गे ऊपर चढ़ने से। हर तरह क# बाधाएं डालGगे। बार-बार वा!पस खाई खŽड मG भाग जाना चाहG गे। बार-बार उसे लौटकर आना होगा। बार-बार उनका हाथ पकड़ना होगा। िशंय उसे कभी [मा नह/ं करG गे। YयOक उनके वह नाहक पीछे पड़ा है । वे मजे से सो जाना चाहते ह0 .oshoworld.ह/ं अंधेरे राःतO पर पहंु च जाए जहां उसके िशंय भटक रहे ह0 । उनका हाथ पकड?. दया नह/ं है । बड़/ कठोर है । इसिलए कृ ंणमूितJ कठोर मालूम हOगे। इसिलए कृ ंणमूितJ गु नह/ं हो सके। इतनी कठोरता से गु नह/ं हआ जा ु सकता। गु के िलए अपार कणा चाहए। इतनी कणा चाहए क वह उन घाटयO मG चला जाए जहां उसके िशंय भटक रहे ह0 । इतनी कणा चाहए क उ.dkuks lquh lks >wB lc नह/ं। तो तुम इस बात को सुन भी लो तो समझ न पाओगे। तु]हारे िलए कोई उपाय चाहए। तु]हारे िलए कोई उपाय चाहए जो झूठे भूतO से तु]हG मु" करा दे । माना क उपाय भी झूठा होगा। YयOक झूठ केवल झूठ से कटता है । झूठ को काटने के िलए क# जMरत नह/ं होती। झूठ केवल झूठ से कट जाता है । लेकन अभी काटने के िलए कोई उपाय चाहए होगा। और एक बार कट जाए झूठ तो तुम भी समझ लोगे क मरघट भी नह/ं है . सब झूठ का ह/ जाल था। भ!" और Iयान मनुंय के ूित gयादा कणापूणJ ह0 । अमागJ क# बात कणापूणJ नह/ं है । सHय तो है लेकन कणा नह/ं है . सHय ऐसा है । मगर घाट/ के लोग बहत ु दरू ह0 .com .हOने िशखर कभी दे खा नह/ं। िशखर क# भाषा से वे परिचत नह/ं ह0 । इसिलए मागJ तो दो ह/ ह0 : भ!" और Iयान। अमागJ एक और है । अगर तुम अमागJ को भी मागJ मG िगनना चाहो तो तीन मागJ िगन लो। मगर वह चूंक अमागJ है इसिलए म0 उसक# िगनती नह/ं करता। और चूंक कभी कोई उससे पहंु चता है . वह िशखर का नह/ं हो सकता। उ. उ. वह अथJ घाट/ का होगा.

दोनO एक से ह/ अंधकार मG खड़े ह0 । मगर Cजसने तैयार/ क# है वह Page 134 of 256 http://www.dkuks lquh lks >wB lc अमागJ के मागJ पर गु नह/ं होता। अमागJ के मागJ पर कोई !विध नह/ं होती। अमागJ के मागJ पर यह पूछना क कैसे करG . कभी ज. वह बड़/ कुशलता का काम करती है । वह Yया करती.य है । जरा भी भाव-भीनी नह/ं है । Mखी-सूखी है --मःथल जैसी। भ!" भी वह/ं पहंु चती है लेकन तुम पर दशा करती है । धीरे -धीरे । म0ने सुना है क जंगल मG लोमड़यां एक तरह का ूयोग करती ह0 । वह/ भ!" और वह/ Iयान का ूयोग है । लोमड़/ के ऊपर कभी-कभी मधुमYखी बैठ जाती है . पूछ ं पकड़ लेती ह0 । पूछ ं हलाती है तो िसर पर बैठ जाती है । िसर और पूछ ं दोनO हलाए तो बीच मG बैठ जाती ह0 । भागे तो भी कोई फकJ नह/ं पड़ता। वे मCYखयां बैठW रहती ह0 । उसके ऊपर उड़ती ह0 । वे उसे बड़े क_ मG डाल दे ती ह0 । तो लोमड़/ Yया करती है ? Cजन लोगO ने लोमड़यO का अIययन कया है वे कहते ह0 .. धीरे -धीरे एक-एक कदम। घटना तो एक ह/ [ण मG घटती है यह सच है । YयOक जब तक मCYखयां उसक# नाक पर बैठW ह0 तब तक सब मCYखयां बैठW ह0 । पूछ ं पर नह/ं ह0 . नद/ मG या तालाब मG उतर जाती। उलट/ उतरती--पूछ ं क# तरफ से पहले। पहले पूछ ं डू ब जाती पानी मG तो मCYखयां उसक# पूछ ं छोड़ दे ती। फर उसक# पीठ डू ब जाती तो मCYखयां उसक# गदJ न भी छोड़ दे ती। और भी लोमड़/ बड़ा होिशयार/ का काम करती है . घटना तो आकCःमक ह/ है । घटना तो अनायास ह/ है । घटना तो एक [ण मG ह/ घटती है । मगर घटना क# तैयार/ बिमक होगी। इस भेद को ठWक से समझ लेना। अमागJ के मागx कहते ह0 क एक [ण मG घटती है । ठWक कहते ह0 .म भी लग जाते ह0 । और यह Iयान रखना क जब तक घट/ नह/ं है तब तक Cजसने तैयार/ क# है और Cजसने तैयार/ नह/ं क# है . एक पNा मुंह मG पकड़ लेती है । फर वह और !बलकुल डु बने लगी तो उसका िसर भी डू बने लगा। तो वे सार/ मCYखयां उसक# नाक पर आ जातीं। फर आCखर/ झपके मG वह अपनी नाक को भी डु बक# मार दे ती है । तो सार/ मCYखयां पNे पर आ जाती ह0 । वह पNे को छोड़ दे ती है । पNा नद/ मG बह जाता है । बमशः.. एक [ण मG पNे पर सार/ मCYखयां हो जाती ह0 और पNा बह जाता है . गलत ूƒ पूछना है । अमागJ के मागJ पर ूƒ ह/ पूछना गलत है । YयOक अमागJ का मागJ तो यह मानकर चलता है क तुम वहां हो ह/। बस आंख खोलो और दे ख लो। और बात सच है । बात जरा भी गलत नह/ं है । मगर कणा शू. एक ह/ [ण मG घटती है । मगर तैयार/.oshoworld. या मCYखयां बैठ जाती ह0 । उनसे कैसे छुटकारा पाए? मुंह हलाती है तो वे पीछे बैठ जाती ह0 . पीठ पर नह/ं ह0 मगर लोमड़/ पर तो है ह/। अभी नाक पर बैठW है । अभी मYखी एक भी गई नह/ं है । आCखर/ [ण तक भी सब मCYखयां उस पर बैठW ह0 । जाती तो एक ह/ [ण मG ह0 । जब वह आCखर/ डु बक# मारती है . मCYखयO को ले जाता है । बमशः नह/ं घटती बात। यह याद रखना। यह मत सोचन क भ" बमशः भगवान के कर/ब आता है । और यह मत सोचना क Iयानी बमशः समािध के कर/ब आता है । नह/ं.com .तैयार/ मG कभी वषr लगते ह0 .

य के िशखर पर उठना पड़े । धीरे -धीरे िमटना है । जो िमटना है वह/ परमाHमा को पाने का अिधकार/ होता है । शू.य के िशखर पर चढ़ना पड़े । अहं कार क# घाट/ छोड़नी पड़े । यह अहं कार के अंधेरे. एक [ण मG मु"। मCYखयO से छुटकारा हो जाए। तीसरा ूƒ: शू.नयानबे डमी के पास आ गया है वह भाप बनने के कर/ब है । भाप तो एक [ण मG बनेगी। सौ डमी--और छलांग। भ" भी जानते ह0 क छलांग ह/ लगती है । मगर छलांग क# वे बात नह/ं करते। वे कहते ह0 वह तो जब लगनी है .य के िशखर मG गैब का चांदना वेद कतेब के गम नाह/ं खुले जब चँम.य के िशखर मG गैब का चांदना। वह जो रहःय का चांद है --गैब का चांदना। वह जो परम रहःय क# gयोित है . जैसे ह/ वे पNे पर छलांग लगा जाएं. हःन सब पँम ह0 ु दन और दनी ू से कम नाह/ं श6द को कोट मG चोट लागत नाह/ं तHव झंकार ॄŒांड माह/ कहत कमाल कबीर जी को बालका योग सब भोग !ऽलोक नाह/ं पूछा है नानक दे व ने। oयारे वचन ह0 । अथJपण ू J वचन ह0 । समझो। शू.य क# ह/ गित है शू.य के िशखर मG गैब का चांदना वेद कतेब के गम नाह/ं वहां न वेद जाते ह0 .oshoworld. वह शू.य मG। परमाHमा के पास वह/ पहंु चता है जो सब भांित िमट गया। Cजसने अपने को बचाया ह/ नह/ं। Cजसने बचाने के सारे आयोजन छोड़ दए। सुर[ा के सारे उपाय छोड़ दए। परमाHमा मG पहंु चना एक तरह आHमघात है । असली आHमघात! Cजसको तुम आHमघात कहते हो वह तो शर/र-घात है । उसमG तो आदमी का शर/र मर जाता है । दसरा शर/र हो जाएगा। आHमघात ू Page 135 of 256 http://www.य हो जाते हो तब जाते हो। शू.य के िशखर मG। शू. लग जाएगी। उसक# Yया बात करनी! तुम तैयार/ तो करो। तुम मCYखयO को धीरे -धीरे धीरे -धीरे नाक तक तो ले आओ क फर पNा ह/ बचे उनको बचने के िलए। फर पNे को छोड़ दे ना. खाई खŽड छोड़ने पड़G । शू.नयानबे डमी पर उबल रहा हो.य मG जल रह/ है । अगर उस परम रहःय मG उतरना है तो शू. वह हो सकता है चालीस डमी उबल रहा हो. क तीस डमी पर. और Cजसने तैयार/ नह/ं क# है . क कुनकुना माऽ हो क अभी ठं डा ह/ हो अभी बफJ ह/ हो। कोई भी नह/ं अभी भाप बना है । लेकन जो िन. न कताब जाती है । वहां इनक# गित नह/ं है । वह तो अगम है । वहां कसी क# गित नह/ं है । वहां तुम भी नह/ं जा सकते। वहां कोई नह/ं जा सकता। वहां तो जब शू.com .dkuks lquh lks >wB lc िन.य ह/ जाता है शू.य मG उतरना पड़े । शू.

िनकट से भी िनकट है . कोई आवाज. जरा मुझे चखाओ.य के िशखर मG गैब का चांदना वेद कतेब के गम नाह/ं वहां श6द नह/ं जाते। वहां िसTांत नह/ं जाते। वहां शाU नह/ं जाते। वहां हं द-ू मुसलमान ईसाई क# तरह तुम न जा सकोगे। वहां हं दःतानी -चीनी-जापानी क# तरह तुम न जा सकोगे। वहां ु गोरे और काले क# तरह तुम न जा सकोगे। वहां Uी-पुष क# भांित तुम न जा सकोगे। वहां जवान बूढ़े क# तरह तुम न जा सकोगे। वहां Dानी-अDानी क# भांित तुम न जा सकोगे। जब तक तुमने कोई भी अपनी परभाषा पकड़ रखी है . ऐसा शू.य तु]हारे भीतर जगमगाएगा. मेरे हाथ मG रख दो.हOने दया वे सब अDानी ह/ ह0 । परमाHमा के िलए ूमाण दया ह/ नह/ं जा सकता। वह तो ऐसा ह/ होगा जैसे अंधे आदमी को तुम ूकाश का ूमाण दो क ूकाश है । Yया ूमाण दोगे? बुT के पास एक अंधे को लाया गया था। बड़ा ताकJक था अंधा। गांव भर को पराःत कर चुका था। गांव के पंडतO को हरा दया था। सभी उसको बुT के पास ले आए थे क हम तो हार गए। आप आए ह0 . वे अंधO से भी गए-बीते ह0 । कसी Dानी ने परमाHमा के िलए ूमाण दया है ? Cज. म0 जरा उसक# गंध ले लूं। अब न तो ूकाश मG कोई गंध होती. थर-थराएगा जब तुम जा सकोगे। खुले जब चँम हःन सब पँम ह0 ु और असली बात आंख के खुलने क# है । जब आंख खुल जाए तो सब दखाई पड़ जाता है । खुले जब चँम हःन सब पँम ह0 ु फर उसका सaदयJ सब तरह दखाई पड़ता है । दरू नह/ं है . अगर ूकाश हो तो लाओ. झनकार पैदा क# जा Page 136 of 256 http://www.dkuks lquh lks >wB lc नह/ं है वह। उसको आHमघात नह/ं कहना चाहए। आHमघात तो समािध मG घटता है । जब तुम !बलकुल ह/ िमट गए। बचे ह/ नह/ं। Mपरे खा भी नह/ं रह/। शू. न उसे छुआ जा सकता और न उसको चोट मारकर कोई संगीत पैदा कया जा सकता. म0 छू कर दे ख लूं। अगर ूकाश हो. म0 उसक# आवाज सुन लू।ं अगर आवाज भी न होती हो. तुम जानोगे ह/ नह/ं क म0 हंू . कोई भी तुमने सीमा बांध रखी है . कृ पया करके इसे थोड़ा समझा दG । यह कहता है क ूकाश होता ह/ नह/ं। और हम इसे तकJ के Rारा नह/ं समझा पाते। यह बड़ा ताकJक है । ऐसा ताकJक हमने दे खा नह/ं। यह कहता है . म0 उसका ःवाद ले लूं। अगर ःवाद भी न होता हो तो मेरे नासापुटO मG कर/ब ले आओ. न कोई ःवाद होता. पास से भी पास है । हर घड़/ मौजूद है । पर बात इतनी है क आंख बंद है । अंधे ह0 हम और सूरज Rार पर खड़ा है । और हम पूछ रहे ह0 क सूरज कहां? हम पूछते ह0 क रोशनी कहां? अंधे ह0 हम.com . तुम कहते हो क छुआ नह/ं जा सकता तो जरा उसे बजाओ.oshoworld. असली बात तो नह/ं पूछते क आंख कैसे खुले? पूछते ह0 क सूरज है या नह/ं? सूरज होता है या नह/ं? ूमाण Yया है सूरज के होने का? और जो हमG ूमाण दे ते ह0 .

और सब आंखवाले? इस अहं कार को बचाने का एक ह/ उपाय था क म0 िसT कMं क ूकाश नह/ं है । इसिलए म0 ूकाश नह/ं है . कहो Yया खयाल है ूमाण के संबध ं मG? उस आदमी ने कहा. मनुंयO मG भी वह/ है । चारO तरफ वह/ है । एक का ह/ !वःतार है । एक के ह/ अनंत Mप ह0 । एक का ह/ खेल है । Page 137 of 256 http://www. मुझे [मा करG । और मेरे गांव वालO से भी म0 [मा मांगता हंू क मुझे [मा करG । म0 अंधा था लेकन म0 यह मानने को राजी नह/ं था क म0 अंधा हंू । वह मेरे अहं कार के !वपर/त जाता था क म0 अंधा. खूब रह/। तो तुम मुझे बुTू बनाने चले हो? तुम भी अंधे हो पागलO। और ूकाश इHयाद कह/ं होता नह/ं। अफवाहG ह0 .com . इससे Yया फकJ पड़ता है ? बंद. तो नह/ं है । तो तुम जाओ। वह आदमी भेजा गया। बुT के वैu ने बड़/ मेहनत क#। छह मह/नO मG उस आदमी क# आंखO का जाला कट गया। वह अंधा तो था नह/ं। अंधा कोई भी नह/ं है । जाला है आंख पर. पशु-पC[यO मG भी वह/ है . वे अपने अहं कार को बचाने क# कोिशश मG लगे ह0 । ईtर है तो अहं कार िमटे गा। तो यह/ उिचत है क कह दो क ईtर नह/ं है । कहां का ईtर! कैसा ईtर! ूमाण Yया है ?और ईtर के िलए कोई ूमाण नह/ं होता। अनुभव ह/ ूमाण है । खुले जब चँम हःन सब पँम है ु आंख खुल जाए तो उसका सaदयJ सब तरफ जाहर है । हर तरफ से उसी के इशारे ह0 । हर तरफ से वह/ झांकता हआ पाओगे तुम। हर तरफ से वह/ बुलाता है । कोयल के कंठ मG भी ु वह/ है । मोर के नाच मG भी वह/ है । बादल जब िघर आते ह0 आकाश मG वह/ िघरता है । रातचांदNारO मG भी वह/ है .मO का जाला है .मO-ज. म0 इन पागलो जैसा पागल नह/ं हंू । तुझे ूमाण क# जMरत ह/ नह/ं। म0 एक वैu को जानता हंू --बुT का खुद का वैu था--जीवक के पास जाओ। जीवक उस वैu का नाम था। वह अपूवJ कुशल वैu है । वह कुछ करे गा। तु]हG ूमाण क# जMरत नह/ं.oshoworld. झूठे लोगO ने उड़ा रखी है । और इन सबका एक ह/ ूयोजन है क तुम यह िसT करना चाहते हो क म0 अंधा हंू .dkuks lquh lks >wB lc सकती। तो यह अंधा हं सता है । यह कहता है . कट गया। आंख खोली उसने तो दे खा. ज. सारा जगत ूकाश से भरा है । एकक पNे पर ूकाश नाच रहा है । एकक कंकड़ ूकाश से नहा रहा है । सारा जगत आलोकमंडत है । वह नाचता बुT के चरणO मG आया। उसक# आंखO मG आनंद के आंसू बह रहे ह0 । वह रोमांिचत हो उठा। वह बुT के चरणO मG िगर पड़ा। बुT ने कहा . हालांक तुम सब अंधे हो। आंख कसी के भी पास नह/ं है । कहां है ूकाश? मुझे ूमाण दो। बुT ने सुनी सार/ बात। वह तो बड़ा अकड़कर बैठा था। उसने कहा क आपके पास कोई ूमाण हो तो बताइए. औषिध क# जMरत है । तु]हारे आंख खुलनी चाहए। ूकाश का ूमाण और कुछ होता नह/ं है । हो लाख. म0 एकक ूमाण को खंडन कMंगा। बुT ने कहा. ूकाश नह/ं है इसक# धुन लगाए रहता था। Cजतने लोग जगत मG कहते ह0 ईtर नह/ं है .

और तु]हG सब सुनाई पड़ता है । कामवासना क# आवाज सुनाई पड़ती है . बस एक आवाज नह/ं सुनाई पड़ती उस परम तHव क#. तुमने जो कला बना रखा है उसको तोड़े गा। वह टटे िछपे हए ु परमाHमा का आ!वभाJव हो। श6द को कोट मG चोट लागत नाह/ं वह श6द तु]हारे भीतर पड़ा है । वह oयारा तु]हारे भीतर बैठा है । वह अनाहत नाद तु]हारे भीतर अभी भी गूंज रहा है मगर तुम कले मG िछपे हो। और कले के कारण वह ूगट हो पा रहा है । और तुमने कतने कले बना रखे ह0 --धन के.यासी को भी है और गृहःथ को भी है । फर ऐसा नह/ं होता क सं. फर बेशतJ है । श6द को कोट मG चोट लागत नाह/ं लेकन तुम बड़ा िछपाए हए ु हो उसको अपने भीतर और चोट नह/ं लगने दे ते। चोट से तुम ितलिमलाते हो। जहां चोट लगती हो वहां तुम जाते नह/ं। तुम तो वहां जाते हो जहां तु]हार/ द/वाल को और फुसलाया जाता हो और समझाया जाता हो क और जरा द/वाल उठा लो। जहां तु]हG सांHवना द/ जाता है . मगर तुम ऐसी द/वालG बनाकर बैठे हो क न तु]हG भीतर सुनाई पड़ती है उसक# आवाज. जहां तु]हG संतोष दया जाता है । वहां तुम जाते हो। सHय जहां हो वहां तुम जाते नह/ं। वहां से तुम दरू भागते हो YयOक सHय क# तो चोट होती है । सदगु से तो तुम बचते हो। सब तरह आंख चुराते हो YयOक वह तु]हार/ द/वाल को. न बाहर सुनाई पड़ती उसक# आवाज। तु]हG िसफJ ईtर क# आवाज नह/ं सुनाई पड़ती. पद के. लोभ क# आवाज सुनाई पड़ती है . हर हालत मG है । फर कोई शतJ क# जMरत नह/ं होती। फर सं. ूित`ा के। इन झूठे कलO मG तुम िछपे हो श6द को कोट मG चोट लागत नाह/ं तHव झंकार ॄŒांड माह/ और मजा यह है क उसी क# झंकार हो रह/ है सारे ॄŒांड मG.यासी को ह/ है और गृहःथ को नह/ं है । फर बु!Tमान को भी है और बुTू को भी है । फर बsचO को भी है और बूढ़O को भी। सुद ं र-असुंदर सभी को। Uी-पुष को सभी को। फर कोई शतJ नह/ं है . रात मG भी है । ूकाश मG भी है और अंधेरे मG भी। आंख खुली हो तो सब हालत मG है . मोह क# आवाज सुनाई पड़ती है । सब तरह क# आवाजG सुनने मG तुम कुशल हो. ू तो ह/ तु]हारे भीतर तु]हारे कोट को.oshoworld. और उसक# झनकार सब तरफ है । कहत कमाल कबीर जी को बालका योग सब भोग !ऽलोक नाह/ं Page 138 of 256 http://www.dkuks lquh lks >wB lc खुले जब चँम हःन सब पशम है ु दन और दनी ू से कम नाह/ं और फर कोई फकJ नह/ं पड़ता। आंख खुली हो तो दन मG भी है .com .

इससे कुछ होनेवाला नह/ं। हां. होगा मुCँकल से कोई तीस साल क# उमर का--लड़का ह/ था। महाHमा के हाथ पैर दबाना और भोजन वगैरह बना दे ना यह उसका काम था। उसको उसने िमलाया-जलाया. आसन-िस!T हो गई। तो कह/ं पहंु च गए। शर/र क# िस!T आHमिस!T तो नह/ं बन सकती। शर/र का खूब आड़ा-ितरछा करो. वह समझा रहा था लोगO को क उसक# उॆ सात सौ साल है । एक अंमेज भी पहंु च गया. उससे यह बेहतर है क भीतर रोशनी ूगट हो रह/ है . रात एकांत मG उससे िमला। बोला.dkuks lquh lks >wB lc और Cजसको तुम योग समझ बैठे हो वह भी भोग माऽ है । वह भी !ऽलोक नह/ं है । Cजसको तुम योग समझ बैठे हो. म0 कुछ भी नह/ं कह सकता। म0 केवल तीन साल से इनके पास हंू । सात सौ साल क# म0 कैसे कहंू ?ये बातG हमG खूब ूभा!वत करती ह0 । YयO? तुम भी जीना चाहते हो। अगर सात सौ साल जीने क# कोई तरक#ब िमल जाए तो आहा! तुम गदगद हो जाओ। तो अगर कोई सात सौ साल जी रहा है तो तु]हारे भीतर आशा बलवती होती है क अगर यह आदमी जी रहा है तो हम भी इससे जड़/-बूट/ ले लGगे क कोई िस!T ले लGगे। मगर यह तो भोग क# भाषा है । योग शाtत क# बात करता है . भाई तू पास रहता है । तू तो बता इनक# उॆ Yया? उसने कहा. याऽी था। वह भी सुन रहा था भीड़ मG खड़े होकर। सात सौ साल उसे जंची नह/ं। सNर साल से gयादा यह आदमी मालूम होता नह/ं था। सात सौ साल! वह जरा घूमा-फरा. तुम सौ साल जीओगे क डे ढ़ सौ साल भी जीओगे। इससे Yया होगा? बड़/ इस बात क# महमा होती है . तीसरा नेऽ खुल रहा है क कमल Page 139 of 256 http://www.लोग कस बात को योग समझ बैठे ह0 ? कोई शर/र के आसन लगा रहा है और सोचता है .. कमल Cखल रहे ह0 .com . भई हमG तो कुछ पता नह/ं। वे कहते ह0 सात सौ साल तो ठWक ह/ कहते हOगे। महाHमा पुष ह0 । यह तो सदा ह/ से योगी ऐसा चमHकार करते रहे । तो फर उसने उस महाHमा के िशंय से पूछा। एक िशंय था. इससे अsछा ःवाःय हो जाएगा। वह तो भोग ह/ है । अsछा ःवाःय. हमालय मG एक योगी था. उससे यह कwपना बेहतर है क कुंडिलनी चढ़ रह/ है । खूब धन लेने क# कwपना और पए ह/ पए इकcठे होते जा रहे ह0 . मगर ये सब भी मन के ह/ खेल ह0 । यह भी कुछ असली बात नह/ं। फर कोई दे ख रहा है क भीतर िसर मG रोशनी हो गई है .oshoworld. कोई महाHमा आ जाएं गांव मG क डे ढ़ सौ साल उमर है । बड़े तुम ूभा!वत होते हो। मगर यह सब भोग क# ह/ भाषा है । तुम भी डे ढ़ सौ साल जीना चाहते हो इसिलए ूभा!वत होते हो। म0ने सुना है . मगर ये सब कwपनाएं ह0 । अsछW कwपनाएं ह0 । कसी क# हHया करने क# कwपना. उसका योग से Yया लेना-दे ना? थोड़े लंबे जीओगे। दस ू रे अःसी साल मG मर जाएंगे. सकJस के कतJब सीखो. कुंडिलनी जग रह/ है और र/ढ़ पर कुंडिलनी चढ़ रह/ है . समय क# बात नह/ं। वह असली योग तो न हआ जो सात ु सौ साल जीने क# बात करता हो। योग सब भोग !ऽलोक नाह/ फर कोई बैठे ह0 और भीतर दे ख रहे ह0 .. पता लगाया। लोगO ने कहा.

माऽ ि_ा बचा है । फर से दोहरा दं ।ू कोई ^ँय नह/ं बचा. माऽ ि_ा बचा है । कोई अनुभव नह/ं बचा.एकाध कृ ंण ठWक.य के िशखर मG गैब का चांदना न कोई ऊजाJ उठ रह/ है . उसके बड़े गलत अथJ लगाए जाते ह0 । लोग समझते ह0 क कबीर कमाल पर नाराज थे। नाराज नह/ं थे। नाराज हो ह/ नह/ं सकते। कहानी है । YयOक कमाल ऐसे काम कर दे ता था जो साधारण dयवःथा के अनुकूल नह/ं होते। वह कमाल ह/ था। वह कुछ साधारण मयाJदा का आदमी नह/ं था। तो कबीर को थोड़/ अड़चन होती होगी। कबीर उसे समझते थे क कमाल कहां है . राम को ु अंशावतार। वहां मयाJदा ह/ बाधा है । मगर मयाJदा लोगO को तो चाहए। लोग तो ऐसी अंधेर/ गली मG जी रहे ह0 . dयवःथा चाहए.य भाव है । शू. न सहUदल पैदा हो रहा है . ठWक जगह है । लेकन फर भी कबीर मानते थे क मयाJदा मG ह/ जीना चाहए YयOक लोग दYकत मG पड़ जाएंगे। अगर सभी संत मयाJदा के बाहर जीने लगे. धािमJक कwपनाएं ह0 मगर ह0 तो कwपनाएं.dkuks lquh lks >wB lc Cखल रहा है । कwपनाएं बेहतर ह0 । सुद ं र कwपनाएं ह0 . माऽ अनुभव करने क# शुT [मता बची। अनुभव माऽ समाm हो गए। अनुभव संसार है । इसिलए परमाHमा का कोई अनुभव नह/ं होता. मयाJदा चाहए। कमाल कृ ंण जैसा आदमी था। वह कोई मयाJदा इHयाद मानता नह/ं था। मयाJदा क# उसे कोई िचंता भी न थी। वह भी एक अिभdय!" है संतHव क#। वह आCखर/ अिभdय!" है । मगर कबीर dयवःथा मG थोड़ा अथJ दे खते थे। अंधO के िलए हाथ मG लकड़/ चाहए। तुम Page 140 of 256 http://www.य है । सब भांित Cःथित सम हो गई। कोई ^ँय नह/ं बचा. परम शू. न कोई कमल Cखल रहे ह0 . आचरण राम के जैसा करते ह0 । लेकन हं दओं ने हं मत क# बात तो क कृ ंण को पूणाJवतार कहा है . जब सब अनुभव से छुटकारा होता है तो जो शेष रह जाता है उसको ह/ हम परमाHमा का अनुभव कहते ह0 । कहत कमाल कबीर जी को बालका कबीर का बेटा हआ कमाल। कबीर ने उसे नाम दया कमाल। वह कमाल का बेटा था। ु आदमी कमाल का था। कभी-कभी कबीर से बाजी मार ले जाता था। कबीर का ह/ बेटा था इसीिलए कमाल नाम दया था। तुमने एक ूिसT वचन सुना होगा. मानते राम को ह0 । पूजा इHयाद करनी हो तो कृ ंण क# कर लेते ह0 । मगर कृ ंण को मानते इHयाद नह/ं। कृ ंण क# मानकर कौन झंझट मG पड़े गा? gयादा दे र न लगेगी.com . न कोई अंधकार है .. पुिलस पकड़ ले जाएगी। मानते राम क# है . न कोई रोशनी है . राम भी चाहए। मयाJदा पुषोNम भी चाहए नह/ं तो लोग बड़/ मुCँकल मG पड़ जाएंगे। इसिलए लोग पूजते तो कृ ंण को ह0 .oshoworld. लेकन इन लोगO के िलए तो कुछ िनयम चाहए. न कोई कुंडिलनी जग रह/ है . क वहां तो टमटमाती रोशनी भी बहत ु रोशनी है । जो सूरज के िशखर पर जीते ह0 उनक# वे जानG. है तो सब मन का जाल। योग Yया है ? योग शू..

इसके बेटे भी नह/ं होने वाले इसिलए कबीर ने कहा है । लेकन यह पूत dयंग मG नह/ं कहा है . अदम के बेटे हए ु .ह/ं के पास रहता। कबीर कुछ कहते. यह बड़े आदर मG कहा है . औषिध भी गई. बेटO के बेटे हए ु .हG और अड़चन मG डाल दया। अंधे तो थे. बूढ़ा वंश कबीर का उपजा पूत कमाल। लोग समझते ह0 क यह नाराजगी मG कहा है क मेरा वंश न_ कर दया है इस कमाल ने पैदा होकर। नाराजगी मG नह/ं कहा है । इस वचनO को समझो। बूढ़ा वंश कबीर का उपजा पूत कमाल। लोग समझते ह0 . कुछ कह दे ता। कबीर के िशंयO को बातG बता दे ता ऐसी क वे गड़बड़ा जाते। मगर कबीर नाराज नह/ं थे। वचन तुमने सुना होगा. तो तुमने उ. डु बा द/. सब मयाJदा डु बा द/। नाव डु बा द/। इन सपूत के कारण सब वंश न_ हो गया। ऐसा मतलब नह/ं है । मतलब ऐसा है जैसा क पुरानी बाइबल मG। पुरानी बाइबल शुM होती है . धमJ पहले आ जाना चाहए। मगर नीित छWन लो लोगO से और धमJ आए न.हOने कहा. शायद पूत dयंग मG कहा है । जैसा हम कहते ह0 न. इतना ह/ कबीर का कहना था। माना क लकड़/ क# कोई जMरत नह/ं है मगर आंख पहले होनी चाहए. कबीर का वचन ूिसT हो गया है । लोग यह/ सोचते ह0 . हाथ क# लकड़/ भी गई। बीमार तो थे. अब और कहां गित? यह/ मतलब है कबीर का--बूढ़ा वंश कबीर का। यह बेटा ऐसा कमाल का पदा हआ क अब ु यह वंश तो बसाएगा नह/ं। अब यह संसार तो चलाएगा नह/ं। अब तो यह !ववाह भी नह/ं करनेवाला.oshoworld. ईtर ने अदम को बनाया. वंशावली है --जेनेिसस। ऐसी लंबी फहरःत है । फर जोसेफ पैदा हआ और जोसेफ ने मरयम ु से !ववाह कया और मरयम का बेटा जीसस हआ। और वहां जाकर वंशावली समाm हो गई ु YयOक जीसस का फर कोई बेटा नह/ं हआ। लंबी वंशावली जीसस पर आकर समाm हो जाती ु है । जीसस आCखर/ िशखर आ गया। बूढ़ा वंश कबीर का उपजा पूत कमाल। आCखर/ बात हो गई। अब इसका कहां बेटा? यह तो आCखर/ फूल Cखल गया। अब इसमG से और शाखाएं ूशाखाएं नह/ं िनकलतीं। जीसस पर आकर पुरानी बाइबल क# वंशावली समाm हो गई। िशखर आ गया. मगर इसे समझा नह/ं जा सका। Page 141 of 256 http://www.dkuks lquh lks >wB lc आंखवाले हो गए तो भी अंधO क# लकड़/ मत छWन लो. ःवाःय का तो कुछ पता नह/ं। इसिलए कबीर कभी-कभी कमाल को डांटते-डपटते रहे हOगे। फर आCखर मG तो ऐसी हालत आ गई क कबीर ने कह दया क तू अलग ह/ रहने का इं तजाम कर ले YयOक वह उ.com . कसी कपूत को कहते ह0 सपूत। क ये सपूत चले आ रहे ह0 । क ये सपूत Yया पैदा हो गए. कबीर पंथी भी यह/ सोचते ह0 क कबीर ने नाराजगी मG कहा। कबीर नाराज तो हो ह/ नह/ं सकते। उनको लोगO पर भी दया है । वे लोगO को समझते ह0 इसिलए मयाJदा क# भी बात करते ह0 । वे कमाल को भी समझते ह0 YयOक वे खुद भी उसी शू. तब लकड़/ क# कोई जMरत नह/ं है । नीित चली जाती है . उनके नाम ह0 .य के िशखर पर खड़े हज। वे कमाल को नाराज तो हो ह/ नह/ं सकते। उ.

तुम YयO बोलते होने क# जMरत Yया है . रख दो। नाहक इधर तक ढोया. तेरा काम जान। YयOक मेरे पास रोज िशकायतG आती ह0 क हम िलए जा रहे थे.अब तुम थोड़ा समझना. बहत ु ऊंचा है । पैसे-लNे से ऊपर उठ गया। जwद/ से अपना नोट स]हाल कर खीसे मG रख लेते हो क चलो पैसा भी बचा. और इस पैसे के बचने Page 142 of 256 http://www. कबीर को भGट करते ह0 तो कबीर ु तो कह दे ते थे पए-पैसे का हम Yया करG ग-े -जैसा साधु-संत को कहन चाहए--क हम Yया करG ग? े चले जाओ। उधर बाहर बैठा रहता कमाल। वह कहता.oshoworld. कबीर तो महाHमा ह0 . अब नाहक फर घर तक ढोओगे। छोड़ो भी। कहां बोझ िलए फरते हो! तो लोगO को शक होता। लोग कहते. रख लो। छोड़ जाने दो। तु]हारा Yया !बगड़े गा? कुछ है तो नह/ं। हवा उड़ा ले जाएगा या कोई उठा ले जाएगा.न होते हो। महाHमा और थोड़ा बड़ा हो जाता है । तुम पैसे से ह/ महाHमा को भी तौलते हो। तो कमाल लोगO को समझ मG आता होगा। वह आदमी ह/ कमाल का था। वह असली बात तो वह/ कह रहा है । कबीर से gयादा असली बात कह रहा है । कबीर कहते ह0 .. अगर कुछ रखा ह/ नह/ं है तो आप इं कार ह/ YयO करते ह0 ? जब कुछ रखा ह/ नह/ं है . फर म0 YयO ले जाऊं? फर म0 न ले जाऊंगा। लेकन समझ मG तो तु]हG कुछ आता नह/ं। तुम होिशयार हो। तुम चालाक हो। तुम कहते. आपने इं कार न कया। आज नोट लाया हंू तो आप इं कार करते ह0 । अगर कुछ रहा ह/ नह/ं तो कागज ह/ है । चलो.YयOक पहले कभी म0 फूल लाया था. मगर यह. अब ले ह/ आए हो तो कहां ले जाते हो? चलो.. पैसे मG Yया रखा है ? यह बात तु]हG जंच गई क पैसे मG Yया रखा है । और कमाल तो यह/ कह रहा है क पैसे मG Yया रखा है ? कहां िलए जा रहे हो? अब नह/ं जंचती। अब तु]हG लगता है . मेरा भाव. तुम बड़े ूस. लोग भी जब पैसे दे ते ह0 कसी महाHमा को तो सोचते यह/ है क महाHमा इं कार करे गा। अब यह बड़े मजे क# बात है । तो दे ने ह/ काहे को गए थे? सोचते तो यह/ ह0 क अगर असली महाHमा होगा तो इं कार करे गा। इं कार ह/ नह/ं करे गा.dkuks lquh lks >wB lc ऐसा हआ क काशी नरे श को पता चला क लोग जाते ह0 . Yया रखा है । चलो महाHमा बड़े ह0 । अपने पैसे बचे। पैसे मG तु]हG कुछ रखा तो है ह/। अगर तुम कबीर क# बात ह/ समझ गए थे तो वह/ं छोड़ दे ते पैसे। तुम कहते. और कुछ इसके पास होगा तो िमलाकर दे गा क भई पैसे-लNे का हम Yया करG ग? े तो तुम दे ने कसिलए गए थे? और जब महाHमा इं कार कर दे ता है ... तुम कुछ न बोले। कागज चढ़ाता हंू . मेरा खेल. जब कुछ रखा ह/ नह/ं? अगर तु]हG समझ मG आ जाए तो तुम कहोगे.com ... जब कुछ रखा ह/ नह/ं तो म0 भी YयO ले जाऊं? अगर तुम कबीर क# बात समझ गए थे तो तुम कहते. आपने तो कह दया. या कुछ होगा। तुम YयO िचंितत? फूल चढ़ाए. बढ़या! आदमी बहत ु बड़ा है .यह तो लोभी दखता है । यह तरक#ब क# बातG करता है क कहां ले जाते हो। रखवा लेता है । तो कबीर ने कहा क तू भाई अलग ह/ एक कोठर/ बना ले। तू अलग ह/ एक झोपड़/ बना ले। तू जान. आपके चरणO मG रखे. यह बात नह/ं है । क# बात जंच गई YयOक पैसे वा!पस िमल गए। कबीर को कहने दो.

लोग सोचते ह0 क यह कबीर क# ह/ जालसाजी है । बेटे को !बठा रखा है बाहर. िमठाई लाते तो भी ठWक था। पHथर ले आए। उॆ हो गई.com .हOने ह/रा िनकाला और कमाल को दया। कमाल ने कहा. चलो भाई अब ले ह/ आए. इतनी दरू ढोया. वह सब रखवा लेता है । तो यह तो कुछ जालसाजी है । लोग सोचते ह0 . ऐसी कबीर ने कहा नह/ं। कबीर कैसे कह सकते ह0 ? अगर कबीर कहG क गलती है तो फर कौन कहे गा क ठWक है ? कबीर को तो दखाई पड़ता है । काशी नरे श एक दन िमलने आए. Yया रखा? और बेटा ले लेता है । यह तो बड़/ तरक#ब हो गई। बेटा छोड़ता नह/ं और बाप कहता है क Yया रखा! अब बेटा बाहर बैठा रहता है . अब कहां रखने क# पूछते हो क फर ले ह/ जाओ। YयOक कहां रखने का Page 143 of 256 http://www. पैसा भी बचा। दोनO हाथ लूटए। यह तो लूट ह/ लूट है । इसमG तो कुछ नुकसान ह/ नह/ं। परमाHमा को व" जब आएगा तो कह दG गे क हम तो गए थे साहब। और हमने तो दए थे। अब कबीर साहब ने न िलए तो हम Yया करG ? हमने तो दान कया था तो दान भी हआ ु और पैसे भी बचे। लेकन कमाल क# बात लोगO को नह/ं जंचती थी। कमाल कहता. जालसाजी है । तू अलग ह/ कर ले। गलती है तेर/. लाए भी तो पHथर! खाने का. तू भाई अलग झोपड़ा कर ले। वहां कोई तुझे दे जाए. बेकार का सामान ढोते फरते हो। अब छोड़ दो यह/ं। रखा Yया है ? तब तु]हG अड़चन होती है । बात तो यह भी वह/ कह रहा है लेकन यह उस जगह से कह रहा है . अरे .dkuks lquh lks >wB lc क# वजह से महाHमा बड़ा हो गया। अब तु]हG डर भी न रहा। अब दबारा तुम दगु ु ु ने नोट भी ला सकते हो और तुम पYका भरोसा रख सकते हो क महाHमा तो लGगे नह/ं। दे ने का मजा भी ले लGगे और पैसा भी बच जाएगा। घर भी लौट आएंगे। पु‡य का भी लाभ िमला.oshoworld. जहां तु]हारे लोभ के !वपर/त पड़ती है । बात तो ठWक वह/ है जो कबीर क# है । और अगर तुम मुझसे समझो तो कबीर से gयादा गहर/ है । YयOक कबीर के कारण तु]हारा लोभ नह/ं िमटा। यह तु]हारे लोभ को ह/ िमटा डालेगा। यह तु]हG ठWक चोट कर रहा। िशकायतG पहंु चने लगी हOगी तो कबीर ने कहा. होश नह/ं आया? तो सॆाट ने सोचा. वहां रहता है । तो सॆाट उससे िमलने गए। खबरG सुनी थी बहत ु . खुद कहते ह0 . लोग तो कहते ह0 क पैसे रखवा लेता है और यह इतनी गजब क# बात कह रहा है । तो वह अपना ह/रा खीसे मG रखने लगा। कमाल ने कहा. उनको भी खबर लग गई थी क कबीर ने कमाल को अलग कर दया। तो एक बड़ा ह/रा लेकर आए थे। कबीर से पूछा क कमाल दखाई नह/ं पड़ता तो कबीर ने कहा. अब वह बड़ा भी हो गया. न पीने का। Yया कMंगा इसका? कुछ फल लाते. अब कोई साथ रहने क# जMरत भी नह/ं है । पास ह/ एक झोपड़ा बना दया है . तो उ. तू ले ले। यहां तो ऐसा लगता है . अब काहे के िलए खीसे मG रख रहे हो? Cजंदगी भर पHथर ह/ ढोते रहोगे? तब सॆाट ने समझा क लोग ठWक ह/ कहते ह0 । यह आदमी होिशयार है ! यह आदमी चालबाज है । महाHमा भी बने रहे और ह/रा भी नह/ं छोड़ता। तो सॆाट ने पूछा--वह तो पर/[ा ह/ लेने आया था--क कहां रख दं ? ू कमाल ने कहा.

उसका हआ Yया? कमाल ने कहा.यता ूगट कर द/। ये थोड़/ सी पं!"यां उसी कमाल क# ह0 : कहत कमाल कबीर जी को बालका योग सब भोग !ऽलोक नाह/ शू. कहां रख दं ? ू अरे .य यानी समािध। चौथा ूƒ: ूित दन के ूवचन के बाद घंटे डे ढ़ घंटे तक कुछ नशा सा छा जाता है । उस बीच बात करना तो दरू. उस ह/रे का Yया हआ ु ? कमाल क# बात है । तुम ह/रा ह/ ह/रा लगाए हए ु हो? तुम अंधे हो. ताक उसे खयाल रहे । आठ दन बाद सॆाट वापस आय. उसे तो पYका पता था क म0 इधर बाहर िनकला क ह/रा इसने िनकाल िलया होगा। अब तक !बक भी गया होगा बाजार मG। आठ दन बाद आया. उसमG वह ह/रा सनोिलयO मG घOप दया--उसको दखाकर. इधर-उधर क# बात क#.oshoworld.य क# आंख को जगाकर दे खो। शू. कसी को दे खने क# …वाहस भी नह/ं होती। और अजीब मुःकुराहट Page 144 of 256 http://www. तुम जरा सूनी आंख से दे खो। तुम भर/ आंखO से दे ख रहे हो इसिलए चूक रहे हो। शू. ु अगर कोई न िनकाल ले गया हो। तो िनकाल तो इसने िलया होगा। उठा. आपने ठWक नह/ं कया. जहां रख गए थे. उनके काम पड़ जाएगा। अब इसमG पूछना Yया है क कहां रख दं ? ू रख दो कह/ं भी। पHथर ह/ है । तो सॆाट पूर/ पर/[ा ह/ लेना चाहता था तो उसने कमाल को दखाकर उसके झोपड़े का जो छoपर था सनोिलयO का बना हआ ु . छोड़ो Dान क# बातG। म0 यह पूछता हंू . तो तु]हG अभी ह/रा दखाई पड़ रहा है । पHथर को कोई पूछता है . इस वचन को बोलकर परम ध. बूढ़ा वंश कबीर का उपजा पूत कमाल। यह िनंदा मG नह/ं कहा है .dkuks lquh lks >wB lc मतलब है . कह/ं भी डाल दो। यह झोपड़/ बड़/ है । इसमG कह/ं भी पड़ा रहे गा। कभी-कभी मोहwले पड़ोस के बsचे आ जाते ह0 । खेलGगे या कोई उठा ले जाएगा। कभी-कभी चोर इHयाद भी आ जाते ह0 .com . ठWक ह/ कहता है --क अगर कोई न िनकाल ले गया हो। तब चरणO पर िगरा। फर जाकर कबीर को कहा. मगर कबीरपंथी समझते ह0 क अःवीकार कर दया बेटे को इस वचन को बोलकर। नह/ं. ह/रे क# बात कर रहे हो?. तु]हG कब दखाई पड़े गा? पHथर लाए थे. आया तो मतलब और से था। फर असली बात पूछW. इस बेटे को अलग कया। तब कबीर ने यह वचन कहा.य के िशखर मG गैब का चांदना वेद कतेब के गम नाह/ खुले जब चँम हःन सब पँम है ु दन और दनी ू से कम नाह/ श6द को कोट मG चोट लागत नाह/ तHव झंकार ॄŒांड माह/ सब तरफ मौजूद है . सनोिलयO मG खोजा ह/रा वहां के वहां था। तब उसक# आंखG खुलीं। यह आदमी जो कहता है .

कसी मंदर मG जाकर बैठो जहां कोई नह/ं जाता। कौन जाता मंदर-मCःजदO मG अब? गुRारे मG कह/ं बैठ जाना एक कोने मG या िनकल जाना गांव से दरू नद/ के कनारे । या अपने ह/ घर मG कोठर/ बंद करके रह जाना। जब नशा चढ़े तो उस नशे का स]मान करो। उस समय बात करनी. बात चीत मG समय गंवाना एक िचड़िचड़ाहट पैदा करे गा। िचड़िचड़ाहट ह/ नह/ं. ूवाह आया तो फर बह जाओ। फर सब भूल-भालकर डु बक# लगा लो। एक [ण को भी अगर भीतर तक पहंु च गए तो परम सौभा5य है । यह संबमण काल क# ह/ बात है । धीरे -धीरे जब नशा िथर हो जाएगा। यह िसYखड़O के िलए कह रहा हंू . आंखG जब भार/ होने लगG. ख0चतान होगी. धीरे -धीरे और बढ़े गा। घबड़ाओ मत। डरो मत। डरोगे तो चूकोगे। नशा जब छाए. यह मधुशाला है । यहां अगर नशा न आया तो कुछ भी न आया। यहां अगर मःत न हए ु तो चूक ह/ गए। यहां कोई शाUO पर ूवचन चल रहा है । यहां तो शराब ढाली जा रह/ है । यहां तो !पयYकड़O का काम है । यहां तो कमजोरO क# गित नह/ं है । यहां तुम मुझे पीयो। और यहां तुम इस तरह डू बो क तु]हारे सब होश खो जाएं। बेहोश हो गए तो भ" हो गए। और अंगूरO क# शराब तो पीयो तो एक दन उतर जाती है । आज पीयो.com . क फर सारा संसार मौजूद रहा है तो कोई फकJ नह/ं पड़ता। पर नशा उस सीमा तक पहंु च जाने दो। तब तक बीच के समय कभी-कभी जब नशा चढ़ा हो तो एकांत खोज लेना। पड़े रहना। बैठ जाना कसी मCःजद मG. तनाव पैदा होगा. सुबह उतर जाएगी. इसिलए िचड़िचड़ाहट पैदा होगी: यह शुM-शुM मG होता है । एक ऐसी घड़/ आ जाती है बाद मG नशे क#. सांझ उतर जाएगी। यह असली शराब है .dkuks lquh lks >wB lc ूगट होती है । और कभी-कभी रोना भी आता है और फर अकेला रहना चाहता हंू । उस समय कसी के छे ड़ने पर िचड़िचड़ाहट महसूस होती है । आप कुछ कहG । ठWक हो रहा है । ऐसा ह/ होना चाहए। यह कोई मंदर नह/ं है .oshoworld. तुम ू भीतर जा रहे हो. मन जब मगन लगे. चढ़/ तो फर उतरती नह/ं। धीरे -धीरे इसमG डु बक# लो। ठWक हो रहा है । घंटे-डे ढ़ घंटे नशा रहता है अभी. Cज. कल उतर जाएगी. जब अयःत हो जाएगी फर कोई अड़चन न आएगी। फर भीतर भी बहते रहोगे और कसी से बात भी कर लोगे। ऐसा ह/ समझो न क तुम कार साइव करना सीखते हो तो शुM-शुM मG बड़/ अड़चन होती है । बड़/ झंझट आती है । ःटे यरं ग पर नजर रखो तो एCYसलेटर से पांव Cखसक जाता है । एCYसलेटर पर नजर रखो तो ॄेक लगाना भूल जाते। ॄेक पर पैर रखो तो Yलच ःमरण मG Page 145 of 256 http://www. एक भीतर Rं R भी पैदा करे गा। भीतर ऊजाJ जा रह/ है आHमा क# तरफ और बाहर क# बातचीत बाहर खींच रह/ है । तो तुम दो दशाओं मG गितमान हो जाओगे. गीत जब भीतर अंकुरत होने लगे तो ःवभावतः अकेलापन चाहा जाएगा। YयOक दसरे क# ू मौजूदगी तु]हार/ इस तरं गाियत दशा मG बाधा बनेगी। दसरे क# मौजूदगी तु]हG खींचेगी. क_ पैदा होगा। और जो लाभ होना था वह चूक जाएगा। जब भीतर गित हो रह/ हो.हOने अभी शराब पीनी शुM-शुM ह/ क# है .

िचड़िचड़ाहट होगी। बचना। इस िचड़िचड़ाहट को लाने क# जMरत नह/ं है । जब ऐसी मःती छाए तो थोड़/ दे र डु बक# लगा लो। पूर/ तरह हो जाने दो। और कभी-कभी तो एक [ण मG घटना हो जाएगी। एक [ण मG तुम डु बक# खा जाओगे. यम-िनयम बम रच सकेगा बेखुद/ मG डू ब तू भी gयोHःना क# बांह गह ले ^ग गगन मG तैरते ह0 Mप के बादल पहले चांदनी ने िचटक तोड़े लाज के बंधन िनगोड़े िनवJसन अंबर दगंबर से गांठ जोड़े इस धुले वातावरण मG Cझलिमलाते मधु र[ण मG एक पल को ह/ सह/ पर अमी-सर/ मG मु" बह ले ^ग गगन मG तैरते ह0 Mप के बादल पहले Page 146 of 256 http://www. बाहर आ जाओगे. ताजे हो जाओगे.com . फलानी फwम बड़/ अsछW चल रह/ है । अब तु]हG िचड़िचड़ाहट न पैदा हो तो Yया बड़ा आनंद आए? या वह कहने लगा क सुना. बड़े पसीने-पसीने हो जाते हो। फर एक दफा साइ!वंग आ गई तो इनक# कुछ याद ह/ रखना पड़ती? यह सब अपने आप यंऽवत होने लगता है । पैर फकर कर लेते ह0 Yलच और एCYसलेटर और ॄेक क#। और हाथ-एक ह/ हाथ. एक मःती. वह कहने लगे. दो हाथ क# भी जMरत नह/ं रह जाती--एक ह/ हाथ ःटे यरं ग dह/ल को स]हाल लेता है । और तुम गीत गा सकते हो या रे डओ सुन सकते हो. तरोताजा हो जाओगे। और फर दन भर तुम पाओगे एक ताजगी.oshoworld. क मुरार जी दे साई क# तरफ खींच रहा है ! तो अड़चन होगी.dkuks lquh lks >wB lc नह/ं रहता। और इन सबक# कैसे इकcठW याद रखो? बड़/ बेचैनी होती. सपने दे ख सकते हो। बहमत कुशल ु साइवरO के संबध ं मG तो कहा जाता है . तो अभी िचड़िचड़ाहट पैदा होगी। यह अsछा ल[ण है । इससे इतना ह/ पता चलता है क एक नई बात पैदा हो रह/ है और कोई उखाड़ने आ गए। अब तुम भीतर जा रहे हो कोई बाहर क# बात करने लगे. एक गुनगुनाहट। ^ग गगन मG तैरते ह0 Mप के बादल सुनहले ^ग गूगल मG तैरते ह0 Mप के बादल पहले मधुबनO ने सुरा पी ली सुरिभ वेणी हई ु ढ/ली ूःतरO को बेधती ह0 रे शमी करणG नुक#ली अब न कोई बच सकेगा. कwपना कर सकते हो. वे झपक# भी ले लेते ह0 । एकाध िमनट को अगर आंख भी झपक गई तो कुछ खास फकJ नह/ं पड़ता--अगर शर/र !बलकुल कुशल हो गया है तो। ठWक ऐसा ह/ इस नशे के बाबत भी सच है । सीख रहे हो अभी. या तुम हजार तरह के !वचार सोच सकते हो.

जब मेरा इनके साथ !ववाह हआ। वह तो एक दन ये !बना पीए घर आ गए. प~ी-बsचे भी स]हाल लोगे। कसी को पता भी नह/ं चलेगा। लेकन अभी शुM-शुM मG तो अयास क# बात है । अभी डू बो। शुभ घड़/ आई है . तकJयु"। जरा भी तुम हसाब ले लगा सकोगे क ये नशे मG ह0 । कई दनO तक मेरे पास रहे . मुझे पता ह/ नह/ं था क ये नशे मG ह0 । उनक# प~ी ने मुझसे कहा. कुछ पता नह/ं चला। उनको प~ी ने कहा. आज नह/ं आ रह/। मामला Yया है ? तब उसे पता चला। तब उ. आपको पता है क ये चौबीस घंटे पीए रहते ह0 ? म0ने कहा. फर नह/ं रहे गी। एक शराबी मेरे पास रहते थे। बड़े अयःत शराबी ह0 । पता लगाना ह/ मुCँकल है क वे शराब पीए ह0 .यथा बातचीत मG !बलकुल कुशल. ऐसा अयास है । जो जानता है वह/ जानता है क काफ# पीए ह0 अ. बाजार भी चला लोगे. पर अमी-सर/ मG मु" बह ले। यह जो अमृत क# थोड़/ सी धारा. म0 जरा पीने का आद/ हंू । और खूब पीने का आद/ हंू । ऐसा ह/ होगा। जब तुम पीने के खूब आद/ हो जाओगे तक कसी को पता भी नह/ं चलेगा. तुम भीतर !वराजमान हो। तुम बाहर दकान भी चला लोगे.com . यह झरना पैदा होता है इसमG एक [ण को ह/ सह/. तीन साल तक.ह/ं दनO ओठO और नैनO का फूल दया तुमने Page 147 of 256 http://www. डु बक# लगा लो। उस [ण Rार-दरवाजे बंद कर दो बाहर के। उस [ण अंतयाJऽा मG पूरे-पूरे संल5न हो जाओ। इसी क# तो हम यहां कोिशश करते ह0 क कसी तरह तुम भीतर चलने लगो। और रोज-रोज तुम अगर भीतर गए और रोज-रोज तुमने अपने बाहर से िचड़िचड़ाहट पाई तो नुकसान हो जाएगा। िचड़िचड़ाहट का अयास न हो जाए कह/ं. मुझे भी पता नह/ं चला. मामला Yया है ? आज तुम कुछ उखड़े -उखड़े लगते हो। आज जमे-जमे नह/ं मालूम होते। आज बात कुछ बेतुक# सी करते हो। आज िचN कुछ तु]हारा उदास लगता है । बात Yया है ? और तु]हारे पास जो एक खास तरह क# गंध आती थी.oshoworld.ह/ं दनO बढ़ आई नदया को कूल दया तुमने इ. द”तर भी हो आओगे. तब चला। ऐसा अयास हो जाता है क ु एक दन !बना पीए गए तक पता चला क कुछ गड़बड़ है । तब पता चला क बाक# दन ये पीए थे। तब उसने पूछताछ क#. सामान ु खर/द लोगे-बचे दोगे.हOने जाहर कया. उसे खो मत दे ना। रं गO पर रं ग केवल रं ग उड़ती हई ु हवा मG रं गO के रं ग आंखO मG आज तु]हG फर/ संग-संग रं गO के िलए हए ु रं ग इ.dkuks lquh lks >wB lc एक [ण को ह/ सह/. एक पल को ह/ सह/. यह डर है । और यह केवल संबमण क# बात है । यह सदा नह/ं रहे गी। एक दफा अयःत हो गए. एक पल को ह/ सह/. पर अभी-सर/ मG मु" बह ले। ^ग गगन मG तैरते ह0 Mप के बादल पहले तब उस समय dयथJ बातO मG न पड़ो। तब उस समय अपने मG डू ब जाओ.

जो ु कसी खतरे मG ले जाए? कोई झंझट तो िसर पर नह/ं आ जाएगी? ऐसे भाव उठने !बलकुल ःवाभा!वक है । YयOक तुम एक ढं ग का जीवन जीए हो. कहां-कहां कतने युगO मG बार-बार जीए हम संग-संग घड़/ oयार/ आ रह/ है .म हो सकता है । तु]हारे भीतर बड़े नाच क# संभावना िछपी है । हंमत करना। जरा साहस रखना। घबड़ाना मत। एक अपूवJ अवसर बहत ु कर/ब है । हं मत क# तो घट जाएगी। भटक# हवाएं जो गाती ह0 रात क# िसहरती प!NयO से अनमनी झरती वार-बूंदG Cजसे टे रती ह0 फूलO क# पीली oयािलयां Cजसक# मुसकान छलकाती ह0 Page 148 of 256 http://www. भ!" उसका मागJ है . नाचता हआ जाता। ु पूछा है ःवामी वेदांत भारती ने। तु]हारे भीतर उठते हए ु नशे से बड़/ साफ खबर िमलती है क भ" िछपा बैठा है । तु]हारे भीतर मीरा का ज.य का ज. म0 तु]हG पकड़ लूंगा। Cजस घड़/ तुम इस शराब मG मदमःत हो जाओगे. Yया हआ जा रहा है ? कुछ अःवाभा!वक तो नह/ं हो रहा है ? कुछ ऐसा तो नह/ं हो रहा. नए से घबड़ाता है । मगर परमाHमा नया है .ह/ं दनO भींजी मG बार-बार यहां-वहां. जहांNहां. वह खयाल मG रख लो। Cजसको भी नशे मG डु बक# लग रह/ हो. जहां तु]हारा मुझसे संग बैठ जाएगा। सHसंग क# घड़/ आ रह/ है । कतने युगO मG बार-बार यहां-वहां.com . भ" गुनगुनाता जाता। Iयानी का एकक कदम सावधान होता। भ" को िचंता ह/ नह/ं होती। भ" को सावधानी इHयाद नह/ं लगती। भ" शराबी क# तरह झूमता. जहांNहां. भ" बेहोशी से जाता है । Iयानी चुप जाता. अब यह उसमG एक नई मःती आने लगी। कुछ नया होना शुM हआ तो मन डरता है । मन पुराने से ु राजी रहता है .dkuks lquh lks >wB lc इ. तुम मेरे कर/ब आ जाओगे। डरना मत। डरना !बलकुल ःवाभा!वक है । ऐसी घड़यO मG डरना उठता है । लगता है .oshoworld.म हो सकता है या चैत. तुम इस दे ह मG न रहो तो भी फकJ न पड़े गा। Cजस घड़/ यह शराब तु]हG पकड़ लेगी. भ!" उसका मागJ है । Iयानी होश से जाता परमाHमा क# तरफ. !बलकुल नया है । तुम नए से धीरे -धीरे राजा होओगे तो ह/ एक दन परमाHमा के िलए मागJ बनेगा। और यह मःती उसी क# मःती है । Cजसने पूछा है . कहां-कहां जीए हम संग-संग एक बार इस मधुरस मG पूरे उतर जाओ तो संग साथ पूरा हो गया। फर तुम हजारO मील मुझसे दरू रहो तो भी फकJ न पड़े गा। म0 इस दे ह मG न रहंू .

रaद.dkuks lquh lks >wB lc ओट िमcट/ क# असं…य रसातुरा िशराएं Cजस माऽ को हरती ह0 वसंत जो लाता है . शरद संजोता है अगहन पकाता और फागुन लहराता और चैत काट. खड़े -खड़े बेहोश हो गया. िनदाघ तापता है वषाJ Cजसे धोती है . कभी िमगx हई ु नह/ं। अचानक हो गई? कल वह रात पूछने आया था क Yया यह िमगx थी? नह/ं. िगर गया। दो घंटे बाद वह होश मG आया। दो घंटे उसे पता नह/ं क कहां चला गया। ःवभावतः घबड़ा गया। जो लोग आसपास थे.हOने कहा. ए!पलेCoटक फट नह/ं आया. हमालय क# अचानक हक ू उठW। म0ने उसे कहा. बहत ु गहर/ नह/ं जाती। और एक िलहाज से डाYटर भी ठWक ह/ कहता है YयOक बाहर से भाव-समािध और ए!पलेCoटक के ल[ण !बलकुल एक जैसे होते ह0 । यह/ अड़चन है । डाYटर भी Yया करे ? भाव समािध तो कभी करोड़ मG एकाध को लगती है .यासी ने आकर कहा. जो हवा पीता हंू उसमG हर बार हर बार..com . या बेहोशी आ जाए तो समझ जाए। होश क# बात तो बु!T के पकड़ मG भी आ जाती है । बेहोशी क# बात बड़/ कठन हो जाती है । कल संIया एक सं. िमगx नह/ं थी। उसे पहली दफा भाव-समािध हई। उसे पहले दफा भ" क# घड़/ आई उसके जीवन मG। ु रामकृ ंण को ऐसा रोज होता था। डाYटर तब भी कहते थे िमगx क# बीमार/ है । डाYटर अब भी कहते ह0 क रामकृ ंण को ए!पलेCoटक फट आते थे। रामकृ ंण को हःटे रया था। डाYटर क# अपनी पकड़ है . तू जा. फर एक मह/ने आDा लेकर हमालय चला गया था। Iयान मG रस आने लगे तो फर हमालय मG भी रस आता है । और जैसी हवा हमालय पर है वैसी कह/ं भी नह/ं है । और जैसी प!वऽता हमालय पर है वैसी कह/ं भी नह/ं। और अभी भी स. अ!वराम. बांध.oshoworld. अYलान. उ. अनoयायत तु]हG ह/ जीता हंू हर घड़/ परमाHमा को ह/ हम जी रहे ह0 । या तो होश आ जाए तो बात समझ मG आ जाए. भरकर ले जाता है नैसिगJक संबमण सारा. Page 149 of 256 http://www.नाटा हमालय पर वैसा है जैसा सदयO पहले सार/ पृवी पर था। हमालय अकेला ह/ बचा है जहां शाtत और सनातन का अब भी राज है । तो उसके मन मG बड़/ हक ू उठW. मालूम होता है तु]हG िमगx क# बीमार/ है । ए!पलेCYटक फट आ गया। उसे भी बात जंची क और Yया हो सकता है ? दो घंटे बेहोशी! मगर थोड़/ शंका भी मन मG रह/ YयOक उसे कभी Cजंदगी हो गई. वहां Iयान कर। वहां से लौटा। Rार पर दो-चार दन पहले सुबह के ूवचन मG आता होगा. पर दरू YयO? म0 ह/ जो सांस लेता हंू .वह घबड़ाया हआ था। यहां तीन मह/ने से Iयान ु करता था.

हाथ-पैर अकड़ जाते ह0 । तो Cजतनी दे र बेहोशी रह/ उसका कुछ पता नह/ं रहता है क Yया हआ ु . ध. ूयोजन Yया? आज इतना ह/। दरया लsछन साध का ूवचन: ७ दनांक: १७. अथJ Yया. यहां कहां भेजता है ? इधर भ" रो रहे ह0 क अsछे लौट आए। बड़े ूस.oshoworld.यासी को घट/। मगर पहली दफा घट/ तो अभी उसे कुछ समझ नह/ं है । यहां समािध के बहत को घटने वाले ह0 । कसी क# Iयानु Mप घटने वाले ह0 .. उ. नासमझO! तु]हG कुछ पता ह/ नह/ं क म0 Yया चूका जा रहा हंू । मुझे फर वह/ं बुला लो. यह तो कोमा है । यह तो अब शायद ह/ लौटG । मह/नO भी रह सकते ह0 कोमा मG। लौटG गे क नह/ं कहा नह/ं जा सकता। छह दन के बाद रामकृ ंण लौटे । और लौटते ह/ Yया कहा पता? लौटते ह/ छाती पीटने लगे और रोने लगे और कहने लगे क वह/ं बुला ले वा!पस. जैसे सब !बलकुल अंधकार हो गया। चैत.कभी छह घंटे भी बेहोश हो जाते थे। एक बार तो छह दन बेहोश रहे । छह दन लंबा व" है । भ" तो घबड़ा गए। रोना-पीटना शुM हो गया. भ" तो सोचे क अब लौटना नह/ं होगा। डाYटरO से पूछा. बहतO ु समािध लगेगी. यहां मन नह/ं लगता। ऐसी ह/ घटना इस सं.य !बलकुल खो गया। तो रामकृ ंण तक को वे कहते रहे क इनको िमगx क# बीमार/ है । रामकृ ंण हं सते थे। वे कहते थे.य भा5य मेरे क मुझे िमगx क# बीमार/ है । और सबको भी हो जाए। जब बेहोश हो जाते थे तो घंटO.dkuks lquh lks >wB lc ए!पलेCoटक फट बहतO को आते ह0 । और ल[ण दोनO के !बलकुल एक ह0 । मुंह से फसूकर ु िगरने लगता है . पूना। दरया लsछन साध का Yया िगरह/ Yया भेख। िनहकपट/ िनरसंक रह बाहर भीतर एक। सत स6द सत गुमुखी मत गजंद-मुखदं त। Page 150 of 256 http://www.१९७७ ौी रजनीश आौम.हOने कहा.न हो रहे ह0 क बड़/ कृ पा क# क लौट आए. हमार/ याद रखी। और रामकृ ंण कह रहे ह0 .७. कसी को भाव-समािध लगेगी। इसिलए सावधान रहो। वेदांत को भाव समािध लग सकती है । अगर यह नशे को बढ़ने दया तो एक न एक दन क ए!पलCoपक फट। एक न एक दन वह अपूवJ िमगx घटे गी Cजसके घट जाने के बाद ह/ पता चलता है क जीवन का सार Yया. जwद/ करो.com .

Cज.यास क# dया…या हो नह/ं सकती। ऐसे तो सं.com . उनके िलए वे उं गिलयां भी सह/ं है यu!प कोई भूल से भी यह न समझे क चांद क# तरफ उठाई गई उं गली चांद है । उं गली मG कहां चांद? उं गली मG कैसे चांद? लेकन फर भी दरू आकाश के चांद क# तरफ इशारा हो सकता है । आज के सूऽ बड़े इशारे के सूऽ ह0 । मील के पHथरO क# भांित ह0 । अगर ठWक से समझG तो ये पड़ाव बन जाएंगे तु]हार/ अनंत याऽा के। पहला सूऽ। Page 151 of 256 http://www.oshoworld.हOने उस अगम मG गित नह/ं क# उनके िलए कुछ श6द का सहारा चाहए. उ.यास बस अनुभव क# बात है । फर भी जो उस अ^ँय मG नह/ं गए.हG कुछ इशारे चाहए। चांद को बताती हई ु उं गिलयां चांद तो नह/ं है लेकन फर भी चांद क# तरफ इशारा तो है । और Cज.यास क# dया…या। ऐसे तो सं.dkuks lquh lks >wB lc यह तो तोड़ै पौलगढ़ वह तोड़ै करम अनंत। ू कोए। दांत रहै हCःत !बना पौल न टटे कै कर थारै कािमनी कै खेलारां होए। मतवाद/ जाने नह/ं ततवाद/ क# बात। सूरज ऊगा उwलुआ िगन अंधार/ रात।। सीखत 5यानी 5यान गम करै ॄŒ क# बात। दरया बाहर चांदनी भीतर काली रात। दरया बहु बकवाद तज कर अनहद से नेह। औध ं ा कलसा ऊपरे कहा बरसावै मेह।। जन दरया उपदे स दे भीतर ूेम सधीर। गाहक हो कोई ह/ंग का कहां दखावै ह/र।। दरया गैला जगत को Yया क#जै सुलझाय।। सुलझाया सुलझै नह/ं सुलझ-सुलझ उलझाय।। दरया गैला जगत को Yया क#जै समझाय। रोग नीसरै दे ह मG पHथर पूजन जाय। कंचन कंचन ह/ सदा कांच कांच सो कांच। दरया झूठ सो झूठ है सांच सांच सो सांच।। कानO सुनी सो झूठ सब आंखO दे खी सांच। दरया दे खे जािनए यह कांचन यह कांच।। दरया ल[ण साध का Yया िगरह/ Yया भेख िनहकपट/ िनरसंग रह बाहर भीतर एक साधुता क# परभाषा। सं.हOने कभी आंखG चांद क# तरफ उठाई न हो.

com . जो कहता है कोई तो संगी हो. मगर कोई दसरा मौजूद रहे गा। और जहां तक दसरे क# मौजूदगी ू ू जMर/ है . वह बड़/ मूढ़ता मG पड़ गया। घर Rार छोड़कर भाग जाओगे. बsचे भी हO और अगर तुम अकेले होने को राजी हो गए तो संसार िमट गया। प~ी पास बैठW रहे . कोई साथी हो. अकेले होने का साहस नह/ं है इसिलए संसार है । इसिलए प~ी भी हो. जो अकेला नह/ं होना चाहता. इसमG संसार है । दसरे से मुझे सुख िमल ु मG पड़ जाऊंगा। मेरा सुख दसरे ू ू सकता है । म0 अकेला कैसे सुखी होऊंगा? फर यह दसरा कौन है इससे फकJ नह/ं पड़ता। अ ू को बदलोगे तो ब होगा.यासी हो. न तो घर-Rार छोड़ने से भेद पड़ता. जीवन क# राह पर अकेला कैसे चलूं? अकेले चलने क# हं मत नह/ं है । संसार के कारण संसार नह/ं है . कैसा बोध है ? तो न तो कपड़O से भेद पड़ता. इससे भेद नह/ं पड़ता। बाजार मG हो क हमालय पर हो. संसार/ हो क सं. इससे कुछ भेद नह/ं पड़ता। घर मG हो क मंदर मG हो. जो अकेला नह/ं होना चाहता. वहां तक संसार है । दरया ल[ण साध का-साधु क# Yया ल[णा? दरया कहते ह0 : Yया िगरह/ Yया भेख। घर मG हो क घर के बाहर हो. इससे कुछ फकJ नह/ं पड़ता। Page 152 of 256 http://www. जीवन क# राह पर अकेला नह/ं होना चाहता.यासी हो. कोई साथी चाहए। इस दबJ ु लता मG है क म0 अकेला काफ# नह/ं हंू । म0 अकेला दख पर िनभJर है . प~ी न रह/। पित पास बैठा रहे . Yया है इससे भेद पड़ता है । कैसे कपड़े पहने है . न पित के कारण संसार मG हो। तु]हारा मन अकेला नह/ं रह सकता इसिलए तुम संसार मG हो। अकेले मG भयभीत होते हो। अकेले मG डरते हो। अकेले मG अंधेरा घेर लेता है । कसी का संग-साथ चाहए। इसिलए संसार मG हो। तो प~ी को छोड़कर जाओगे इससे Yया फकJ पड़े गा? कोई और संग-साथ खोज लोगे। संग-साथ तु]हG खोजना ह/ पड़े गा। वह जो मन तु]हारे भीतर बैठा. मन कहां छोड़G गे. न बsचे परवार छोड़ने से भेद पड़ता। ये तो धोखे ह0 । इनसे Cजसने भेद डाल लेना चाहा. इससे भेद नह/ं पड़ता। कहां है इससे भेद नह/ं पड़ता. पित का रहना तु]हार/ आकां[ा मG है क कोई संगी चाहए. जो घर-Rार को पकड़ता था? मन तु]हारे साथ चला जाएगा। और साथ रहा तो तुम कह/ं फर घर Rार बसा लोगे। मन साथ रहा तो तुम फर कह/ं कुछ पकड़ने लगोगे। पकड़ने क# मूल िभ!N तो तु]हारे भीतर है । प~ी के कारण तुम संसार मG नह/ं हो. कैसी चेतना का ूवाह है . इससे भेद नह/ं पड़ता--Yया िगरह/ Yया भेख। सं.dkuks lquh lks >wB lc दरया ल[ण साध का Yया िगरह/ Yया भेख साधु का ल[ण Yया है ? घर मG हो क घर के बाहर. जो मन तु]हारे भीतर बैठा. न बाजार-दकान छोड़ने ु से भेद पड़ता. जो अकेले मG डरता है . कोई साथी हो. जो कहता है कोई तो संगी हो. इससे कैसे भेद पड़ सकता है ?कैसी अंतराHमा है . पित न रहा। पित का रहना पित के होने मG नह/ं है .oshoworld. जो अकेले मG डरता है .यासी हो क गैरक वUO मG सं.

जब वह बोध मG था तो पूरे बोध मG था। और जब अब ूेम मG है तो पूरे ूेम मG है । छोटा बsचा जहां भी होता है पूरा होता है . बाहर मुःकराते ह0 । तो कपट हो गया। भीतर मुःकुराहट है . जैसे सारे संसार को न_ कर दे गा। और [ण भर बाद बोध आया भी और गया भी। बादल आए और बरस गए। और वह तु]हार/ गोद मG बैठा है और ूस. तो कपट हो गया। और कपट बड़ा दख ु झेलता है । और आvयJ यह है .dkuks lquh lks >wB lc हकपट/ िनरसंक रह/ बाहर भीतर एक फर कस बार से फकJ पड़ता है ? िनंकपट/। कपट का अथJ होता है . कुछ दखाते ह0 बाहर। भीतर और बाहर मG भेद ह/ नह/ं है . द/वार से िसर मार लेगा। उस छोटे से [ण मG.oshoworld. अखंड नह/ं है . मुखौटO पर मुखौटे लगाए हए ु ह0 । एकाध चेहरा तुमने ओढ़ा है ऐसा भी नह/ं है . वैसा ह/ बाहर है । तुमने उसे बाहर से पढ़ िलया तो उसक# अंतराHमा को पढ़ िलया। रNीभर भेद न पाओगे उसके बाहर भीतर मG। छोटे बsचO मG ऐसी सहजता होती है । इसिलए तो संतO का एक ल[ण सदा कहा गया है क वे फर वे छोटे बालकO क# भांित हो जाते ह0 । बsचा नाराज हो गया है तो फर वह नाराजगी ूगट करे गा। पैर पटकेगा. !वरोध है । भीतर दख ु है . कुछ है . Cखलौना तोड़ दे गा.com . बाहर आंसू िगराते ह0 तो कपट हो गया। कपट का अथJ है . कुछ दखाते ह0 बाहर। भीतर कुछ और िछपा है । मुख मG राम--मुंह पर तो राम है । मुंह मG तो राम का ःमरण चल रहा है । बगल मG छुर/। कुछ है भीतर. भीतर और बाहर मG Rं R है . बहत ु चेहरे ह0 . उस छोटे बालक मG ऐसा बोध लपटO क# तरह उठे गा. जो बड़O के चेहरO पर खो जाता है । बड़O के चेहरे पर सaदयJ खो जाता है । YयOक बड़O को एक चेहरा नह/ं है । बड़O के बड़े चेहरे ह0 . कैसी जMरत पड़ जाए। दन मG हजार बार तु]हG चेहरे बदलने पड़ते ह0 । जब तुम अपने मािलक से िमलते हो द”तर मG तो एक चेहरा रखते हो। जब तुम अपने नौकर क# तरफ दे खते हो तब दसरा चेहरा। और यह भी हो सकता है क नौकर एक तरफ ू Page 153 of 256 http://www. भीतर. और दख ु का सार-सूऽ है कपट। सहज का अथJ होता है . इस आशा मG दख ु झेलता क कपट से शायद सुख िमले। लेकन झूठ से कभी सुख िमलता नह/ं। झूठ से ह/ दख ु िमल जाए तो फर तो रे त से भी िनचोड़ो तो तेल िनकल आए। झूठ से सुख नह/ं िमलता। सुख तो सHय क# छाया है । सुख तो सहजता मG फलता है । और जो आदमी कपट/ है . Rै त है । भीतर और बाहर दो अलग खंडO मG बंटे ह0 . चेहरO पर चेहरे ह0 .न है । और बड़े oयार क# बातG कर रहा है । तुम जानते हो. यह उसक# सहजता है । इसिलए छोटे बsचO के चेहरे पर एक सaदयJ है . बाहर भीतर एक। जैसा भीतर है . कैसे सहज होगा? वह सार/ दिनया को ूवंचना मG रखना चाहता है । ु अंततः ःवयं ूवंचना मG पड़ जाता है । जो गŠढे तुमने दसरO के िलए खोदे ह0 उनमG तुम ू िगरोगे। दख ु पाओगे बहत। ु दख ु है ह/ इसीिलए जगत मG. YयOक हमने सुख का सार-सूऽ नह/ं समझा। सुख का सारसूऽ है सहजता. तुम न मालूम कतने चेहरे साथ िलए चलते हो। ःपेयर चेहरे तुम अपने पास रखते हो। कब कहां.

पाखंड। कपट का अथJ है . परायO के ूित दसरा चेहरा है । ू राःते पर चलते हए ु कसी दन तुम अपने चेहरO क# सं…या तो करना। कतनी बार तुम बदल लेते हो। Cजस आदमी से तु]हG काम है . नौकर क# तरफ ू एक उदासीनता होती है . तु]हार/ भी यह/ बात है । सबक# यह/ बात है । कपट का अथJ है . और मािलक एक तरफ खड़ा हो। तो तुम एक तरफ एक चेहरा दखाते हो. मां के गभJ मG तु]हारे पास था। तब तो कोई पाखंड नह/ं हो सकता YयOक मां के गभJ मG न कोई लेना न दे ना. तुम अखबार पढ़ते हो तो पढ़ते ह/ रहते हो. वोट लेने आता है . जो परमाHमा ने तु]हG दया। झेन फक#र कहते ह0 अपने साधकO को: मौिलक चेहरा खोजो। उस चेहरे को खोजो. ऐसा खून मG िमल गया है . राजनेता तुमसे मत लेने आता है .म के पहले तु]हारे पास था. न कोई मािलक न कोई नौकर। जीवन का !वःतार वहां नह/ं.dkuks lquh lks >wB lc खड़ा हो. जंजाल वहां नह/ं। तो मां के पेट मG नौ मह/ने जो Page 154 of 256 http://www. फर तु]हार/ तरफ आंख भी न उठाएगा। तुमसे कोई मतलब न रहा। तुमसे कोई ूयोजन न रहा। और ऐसा मत समझना यह राजनेता क# ह/ बात है . जैसे बस तु]हार/ सेवा करने के िलए ह/ इस आदमी का जीवन बना है । एक बार यह सNा मG पहंु च गया फर तु]हG पहचानेगा भी नह/ं. कहां भटक गया। उसे तुम. पहचान भी न पाओगे। उसे तुम खुद भी नह/ं जानते क तु]हारा असली चेहरा कौन सा है । दपJण के सामने भी जब तुम खड़े होते हो तब तुम दसरO को धोखा दे ते हो ऐसा नह/ं है . न कोई गया। प~ी क# तरफ एक चेहरा है तु]हारा। ूेयसी क# तरफ दसरा चेहरा है ू तु]हारा। बsचO क# तरफ एक चेहरा है. जो ज. दसर/ ू तरफ दसरा चेहरा दखाते हो। मािलक क# तरफ एक मुःकुराहट होती है . नौकर क# कोई िगनती आदमी मG थोड़े ह/ आHमा मG थोड़े ह/! तुम ऐसे उदासीन बैठे रहते हो जैसे कमरे मG कोई न आया. ऐसा हŽड/-मांस-मgजा मG ू!व_ हो गया है . ऐसा हŽड/-मांस-मgजा मG ू!व_ हो गया है . क दपJण के सामने भी तुम वह/ नह/ं होते जो तुम हो। िनंकपट/! कोई चेहरा न हो। या बस एक ह/ चेहरा हो. उससे तुम कैसे िमलते हो। कैसे ूेम भाव से िमलते हो! और यह वह/ आदमी है Cजसक# तरफ कल तुमने आंख भी न उठाई थी। कल कोई काम ह/ न था। और यह वह/ आदमी है . ू अपने को भी धोखा दे लेते हो। दपJण के सामने खड़े होकर तुम अपने को भी धोखा दे लेते हो। धोखा ऐसा गहरा हो गया है . जैसे कोई नह/ं आया। जैसे कोई भी नह/ं गया। नौकर है . जब काम न रह जाएगा। दे खते ना. कल फर तुम आंख न उठाओगे. उसका तो कुछ पता ह/ नह/ं चलता इस भीड़-भाड़ मG चेहरे क#--कहां खो गया.oshoworld. बहत ु चेहरे । और इन बहत ु चेहरO मG तु]हारा मौिलक चेहरा तो खो ह/ गया। परमाHमा ने जो चेहरा बनाया था तु]हारा. तो कैसा चरणO का सेवक हो जाता है ! तु]हG लगता है ऐसा. Cजस आदमी से तु]हG मतलब है .com . न िमलना न जुलना. उपे[ा होती है । नौकर मG तुमने आHमा थोड़े ह/ कभी मानी है । इसिलए नौकर जब तु]हारे कमरे मG ूवेश करता है . ऐसा खून मG िमल गया है . बड़O के ूित दसरा चेहरा है । अपनO के ूित एक ू चेहरा है .

जो तु]हारा बनाया हआ नह/ं है . संकोच नह/ं खाते? Yया कर रहे हो? मत करो। तुम यह मत सोचना क यह मन चोर/ करते व" ऐसा कहता है तो हमारा साथी है । इस मन क# तो यह आदत है । तुम जो कहोगे.। तुम दान दे ने लगोगे तो यह मन कहता है . Yया िगरह/ Yया भेख. यह Yया कर रहे हो? कैसी मूढ़ता कर रहे हो। अरे वे जमाने गए दे नेवालO के। और यह धोखेबाज खड़ा है । Cजसको तुम दे रहे हो। धोखा मत खाओ। ऐसे चालबाजO क# बातG मG मत आओ। इससे दिनया मG िभखमंगी बढ़ती है । इससे आदमी !बना मेहनत कए खाने क# तरक#बG ु खोजने लगता है । तुम जैसा बु!Tमान आदमी और दान दे रहा है ? तुम यह मत सोचना क मन जब बुरा करते हो तभी रोता है .oshoworld.dkuks lquh lks >wB lc तु]हारा चेहरा था उसमG कोई भी रे खा न रह/ होगी धोखे क#। कोई था ह/ नह/ं Cजसको धोखा दे ना हो। उस चेहरे को खोजो। मुखौटे उतारना Iयान क# अिनवायJ शतJ है । Iयान क# घड़/ मG Cजस तारत]य बैठ जाता है उस दन अचानक एक झलक िमलती है तु]हारे चेहरे क#। वह अपूवJ है । उसके सaदयJ क# कोई तुलना नह/ं। वह चेहरा तु]हारा नह/ं है .. शंका बनी ह/ रहती है । करते भी जाते ह0 और शंका भीतर बनी भी रहती है । इसिलए कोई भी बात कभी तन मन से नह/ं कर पाते। कोई भी बात कभी सममता से नह/ं कर पाते। शंका के कारण समम कैसे होओगे? करते भी हो तो एक मन तो कहे ह/ चला जाता है क गलत कर रहे हो। और ऐसा नह/ं क गलत मG ह/ यह मन कहता हो. वह/ असली है । कहो. मन क# शंका करने क# वृ!N है । तुम जो भी करोगे. मन को तुमने हटाकर अलग कर दया। तुमने कहा. ऐसे मन मG शंकाएं लगती ह0 । मन शंकालु है । ौTा मन का हःसा ह/ नह/ं। ौTा का अथJ होता है . !वभाCजत रहता है । तुम चोर/ करने जाओ तो मन कहता है अरे ! चोर/ कर रहे . मन शंका करे गा। जैसी वृ[O मG पNे लगते ह0 . परमाHमा का ह/ चेहरा है । तु]हारे चेहरे तो वे ह0 जो तुमने बनाए ह0 । एक ऐसा भी चेहरा तु]हारे पास है .. तभी शंका खड़/ करता है । नह/ं. तू Rं R मत खड़ा कर। मुझे िनर Rं R रहने दे । कुछ तो मुझे जीवन मG ऐसा करने दे CजसमG म0 पूरा-पूरा हंू । CजसमG कोई हां और ना नह/ं। CजसमG कुछ !ववाद नह/ं िन!वJवाद कुछ तो मुझे करने दे । ूेम करने दे िन!वJवाद। कम से कम ूाथJना करने दे िन!वJवाद। कम से कम कसी के चरणO मG तो मुझे िन!वJवाद बैठने दे । कसी मंदर मG Page 155 of 256 http://www. जो ौTा को उपल6ध हआ है वह/ साधु। ु ौTा को समझो। हम तो जो भी करते ह0 जीवन मG.com . शमJ नह/ं आती. यह ठWक मG भी मन यह/ कहता है । मन क# यह आदत है । मन का यह ःवभाव है क यह कभी भी अ!वभाCजत नह/ं होता. वह/ असली मG ु तु]हारा है । तु]हारे बनाए तो तु]हारे नह/ं ह0 । तो दरया कहते ह0 -दरया ल[ण साध का. िनहकपट/ िनरसंक रह/-Cजसक# शंका ितरोहत हो गई.

. वह/ं ौTा का आ!वभाJव होता है । ौTा अखंड चेतना क# सुवास है । कभी-कभी हो जाता है । और जब भी हो जाता है तब तुम परमाHमा के अित िनकट होते हो। तब तुम साधु होते हो। अगर तुम मुझसे पूछो तो कभी-कभी सामा. पC[यO क# चहचहा सुनकर. इसी ौTा के कारण खोजा था.com . YयOक अखंड होते हो कोई बांटनेवाला नह/ं बचा वह राजनीितD मन जो सदा बांटता था और बांट-बांटकर ु तुम पर हक मG तोड़ दे ता और उसी के कारण तु]हारा मािलक ु ू मत करता था. Cजतनी रात सोते समय गए !बःतर पर तब थे.oshoworld.YयOक जब गहर/ नींद होती है और ःवoन भी खो गए होते ह0 तब तुम वह/ं पहंु च जाते हो जहां साधु समािध मग पहंु चता है । YयOक फर अखंड हो। गहर/ नींद मG जहां ःवoन बंद गए.. दोनO टकड़O को लड़ाता था और तु]हG कमजोर कर दे ता था. ु -टकड़े ु !वभाCजत मत कर। कह/ं तो मुझे अनकटा छोड़ दे . इसी ौTा के कारण खोजा था। सुबह के सूरज को दे खकर जो ौTा उठW थी.हG सुषिु m Page 156 of 256 http://www. तो नमःकार न करते तो Yया करते? ॄŒ-मुहू तJ क# ूशंसा मG गीत गाएं ह0 .मती है । उसी ौTा मG परमाHमा के तुम कर/ब होते हो। तो Cज. यह तरोNाजगी। और एक [ण को तु]हारे भीतर कोई हां ना नह/ं होती। कोई शंका नह/ं होती। यह सaदयJ अूितम Mप से तु]हG घेर लेता है । एक [ण को तुम ौTा से भर जाते हो. हांलाक तुमने इसे कभी ौTा नह/ं कहा है --समझना इसीिलए तुम चुकते जा रहे हो। एक [ण को ौTा ज. समािध मG तुम जागMक हो। मगर एक बात समान है क दोनO मG ह/ मन नह/ं रह जाता। गहर/ सुषिु m मG जब ःवoन क# तरं गG भी नह/ं ह0 . इसी कारण गाए ह0 । रात भर के !वौाम के बाद रात भर क# गहर/ िनिा मG डु बक# लग जाने के बाद.हOने सूयJ नमःकार खोजा था. तुम कहां होते हो? तुम ौTा मG होते हो. काट मत। टकड़े मत कर वे जो ु -टकड़े ु थोड़े से [ण तु]हारे मुझे अनकटा छोड़ दे .dkuks lquh lks >wB lc कसी मCःजद मG. काट मत। टकड़े मत कर वे जो थोड़े से [ण तु]हारे जीवन मG अनकटे होते ह0 अखंड होते ह0 .. कसी गुRारे मG कह/ं तो मुझे थोड़/ दे र को अ!वभाCजत छोड़ दे . ये सागर क# लहरG . तु]हG दो टकड़े ु हो जाता था. ूाची के लाली को दे खकर उगते सूरज को उठता दे खकर.. वह राजनीितD गया। गहर/ िनिा मG तुम अखंड हो जाते हो। इसिलए अभागे ह0 वे लोग जो सुषुिm मG नह/ं उतर पाते ह0 । रात भर जो करवटG लेते ह0 और सपनO मG ह/ डू बे रहते ह0 । सुबह उठकर पाते ह0 क वे और भी थके-मांदे ह0 --उससे भी gयादा.य जीवन मG भी ऐसी बात घट जाती है । तुम उस पर Iयान नह/ं दे ते। अगर Iयान दो तो बड़े रहःय खुल जाएं। तु]हारे हाथ कुंजी आ जाए। कभी कसी सुबह ूभात क# बेला मG. समािध और सुषुिm मG एक बात समान है क दोनO मG मन नह/ं रह जाता। फकJ Yया है ! फकJ इतना है क सुषिु m मG तुम बेहोश होते हो. यह सुबह का संगीत. उससे भी gयादा थके-मांदे ह0 । उ.सुबह क# ताजी हवा! रातभर का !वौाम! तु]हार/ आंखG नई-नई खुली ह0 । फर से तुमने जीवन को दे खा। यह करणO का जाल. मन भी समाm हो गया। इसिलए पतंजिल ने कहा है .

लेकन गहर/ रात. धोखे-धड़यां. िभखमंगे सुबह आते ह0 . कसी को तुमने धोखा दया उसक# भी चुभन. बांट भी सके कुछ। सांझ तो कठन है । सांझ तो हर आदमी डाकू हो जाता है । यह आvयJ क# बात नह/ं है क सांझ जब तुम घर लौटते हो तो अिनवायJ Mप से प~ी से झगड़ पड़ते हो। दन भर थके-मांदे. कसी को धोखा नह/ं दे पाए उसक# भी चुभन। हजार तरह के कांटे िछद गए। इसिलए तुम दे खते हो. भोर मG कर लेना। सांझ तक तो तुम संसार मG रह-रहकर इतने !वभाCजत हो जाते हो। संसार के धोखे खाखाकर और धोखे दे -दे कर. ूाथJना सुबह. सांझ नह/ं आते। YयOक जानते ह0 सांझ कौन दे गा? सांझ तो िभखमंगा डरता है क कसी से मांगा तो झपcटा मारकर जो मरे पास है . कहां अखंडता! कोई तु]हG धोखा दे गया उसक# भी चुभन. दन भर क# परे शािनयO से भरे हए ु . दन भर मG प~ी भी परे शान हो गई है . सांझ होते-होते तो तुम इतने थक जाते हो क कैसे ूाथJना करना। दन भर क# बेईमािनयां. तुमने थोड़/ सी ौTा होती है । इसिलए सारे धमr ने कहा है . सभी ौTा के अंग ह0 । इधर प~ी भी दन भर बैठW-बैठW परे शान हो गई है । इधर प~ी भी दन भर मG थक गई है । बsचे ह0 और नौकर है .हG जो अचेतना मG थोड़/ दे र के िलए परमाHमा का साC.oshoworld. कारगुजारयां. दन भर के बाजार से परे शान जब तुम सांझ लौटते हो तो तुम होश मG नह/ं होते। तु]हारे भीतर कोई ौTा नह/ं होती। और ूेम हो क ूाथJना हो. अचेतना मG भी ू गया है । इसिलए अिनिा से पीड़त आदमी बड़ा दयनीय आदमी है । उतनी तो संबध ं टट ूकृ ित ने ह/ सु!वधा द/ क चौबीस घंटे अगर तुम परमाHमा के पास न जा सको कोई हजJ नह/ं. दन भर मG प~ी का परमाHमा भी खंडत हो गया है । जैसे तु]हारा परमाHमा खंडत हो गया। ये दो खंडत dय!" जब सांझ को िमलते ह0 तो एक दसरे पर बोध ू से भर जाते ह0 । पCvम मG एक नई हवा पैदा हो रह/ है .dkuks lquh lks >wB lc नह/ं िमली। उ.नIय िमल जाता था वह भी न िमला। चेतना मG तो परमाHमा से कोई संबध ं जुड़ ह/ नह/ं रहा है . उसमG बड़ा सार है । उसे अभी लोगO ने इस तरह से दे खा नह/ं है । शायद जो कुछ लोग इस हवा मG उतरे ह0 उनको भी इस बात का पता नह/ं है । Page 157 of 256 http://www. कहां िनशंका भाव. तु]हG इतना तोड़ जाएगी क सांझ तुम !बलकुल !बखर गए। कहां ौTा. तुम इतने !वषाद से भर जाते हो. !बजली काम नह/ं करती और फोन !बगड़ा है । दन भर मG प~ी भी थक गई है . गहर/ नींद मG तो थोड़/ दे र को पहंु च जाना। होश तो नह/ं रहे गा. वह/ न छWन ले। सांझ तक तो हालत लोगO क# पागलपन क# हो जाती है । सुबह िभखमंगे आते ह0 । सुबह थोड़ा भरोसा कया जा सकता है क आदमी झपcटा नह/ं मारे गा। और सुबह थोड़ा शायद दया उमगे। सुबह शायद थोड़/ कणा हो। सुबह शायद थोड़ा ौTा भाव हो तो दे भी सके कुछ. लेकन उसके पास पहंु चने से उस परम ॐोत मG डु बक# लगाने से जो लाभ होना है वह तो हो ह/ जाएगा। इसिलए सुषिु m के बाद सुबह तुममG एक अलग बात होती है । जब पहली दफा तुम आंख खोलते हो गहर/ नींद के बाद.com .

मौन क#. ना कहने का मन कम होता है । तुम जरा जांचना. मत गजंद मुखदं त यह तो तोड़ पौलगढ़ वह तोड़े करम अनंत Page 158 of 256 http://www. सुबह तुम बहत ु सी बातO मG हां कह दोगे. सुख क# तो ह/ तो कसी दसरे को ूेम दे सकता है या दसरे से ूेम ले ू ू सकता है । तभी तो थोड़/ सी दे र के िलए हम एक दसरे मG डू ब सकते ह0 । एक दसरे मG डू बना ू ू भी परमाHमा मG ह/ डू बना है । वह भी उलट/ तरफ से कान पकड़ना है . और उसके जीवन मG कोई शंका न हो। ौTा अखंड हो। उसका भीतर dय!"Hव अ!वभाCजत हो--बाहर भीतर एक। ऐसा ह/ dय!" बाहर भीतर एक होता है । तो खंड दो तरह के होते ह0 .ह/ं बातO मG सांझ शायद तुम हां न कह पाओ। और सांझ Cजन बातO मG तुम ना कह दोगे. भीतर कुछ. अपना ह/ जीवन जांचना.com . उ. जब अपने भीतर रस-!वमु5ध होता है . भीतर अलग। यह एक ूकार का खंड हआ। इसको हम कहते ह0 पाखंड। एक तरह ु ु का खंड है । बाहर कुछ. जब अपने भीतर तरं ग उठती होती है शांित क#. भीतर कुछ। यह एक दशा मG दो टकड़े हो गए। यह एक तरह का खंड है । दसर/ तरह का खंड यह है क बाहर कुछ. इसिलए दो ल[ण बताए। एक तो खंड होता है क बाहर अलग.dkuks lquh lks >wB lc सार/ दिनया मG मनुंय जाित के इितहास मG Uी और पुष रात को ूेम करते रहे ह0 । लेकन ु अमर/का मG एक नई हवा पैदा हो रह/ है । सुबह ूेम करने क#। अभी तो अमर/का के मनोवैDािनकO को भी साफ नह/ं है क बात Yया है । लेकन सांझ ूेम क# संभावना ह/ कम होती गई है । अब तो सुबह ह/ ूेम कया जा सकता है । वह/ं थोड़/ सी ौTा रहती है । वह/ं थोड़ा एक-दसरे के संग-साथ होने क# संभावना रहती है YयOक अपने संग-साथ जब कोई ू होता है .. मगर है तो कान का ह/ पकड़ना। दसरे मG डू बकर भी डू बते तो हम अपने मG ह/ ह0 । सुबह का मूwय है YयOक सुबह ू थोड़/ शंका कम होती है । सुबह हां कहने का मन gयादा होता है . तुम तो एक भीड़ हो गए। तु]हारे भीतर एक कोलाहल हो गया। इसी कोलाहल मG हम जीते ह0 । हम कोलाहल से मु" हो जाने का नाम साधु। यह अपूवJ dया…या हई। साधु क# तरफ यह गहर/ ल[णा हई। ु ु सत श6द सत गुमुखी. सोचना क अगर कसी ने सुबह पूछा होता तो. भीतर भी एक ू नह/ं है । भीतर भी अनेक। तब तो और भी खंड हो गए। तब तो तु]हारे भीतर एक भीड़ हो गई। तुम dय!" न रहे अ!वभाCजत.तो शायद तुम हां कह दे ते। सांझ होते-होते सभी लोग नाCःतक हो जाते ह0 । ना पैदा होने लगती है । ना यानी नाCःतक। नह/ं कहने क# Cज‰ आ जाती है । सांझ होते-होते! सुबह सभी आCःतक होते ह0 । आCःतक यानी हां कहना सहज मालूम होता है । कोई अड़चन नह/ं मालूम होती। दरया लsछन साध का Yया िगरह/ Yया भेख िनहकपट/ िनरसंक रह/ बाहर भीतर एक तो ल[ण बताते ह0 । क उसके जीवन मG कोई कपट न हो..oshoworld. यह तो ठWक ह/ है .

अलग-अलग सोच रहे . मुझे मेर/ र[ा करनी है । पता नह/ं यह आदमी कहां ले जाए. उसमG हसाब नह/ं रखना पड़ता क यह दवा म0 लूग ं ा और यह म0 नह/ं लूंगा। और यह म0 इतनी माऽा मG लूंगा और यह म0 इतनी माऽा मG नह/ं लूंगा। एक बार गु को चुना तो फर तुमने समपJण कया। अगर ऐसा समपJण न हो तो गु के वचनO का कोई परणाम नह/ं होगा। सत श6द सत गुमुखी--गु के मुख से जो िनकल रहा है वह तो सHय है । वह तो परम सHय है । वह बड़ा श!"शाली है । Page 159 of 256 http://www. वहां गु से संबध ं न हो सकेगा। जहां गु क# तरं ग और तु]हार/ तरं ग एक साथ हो गई.dkuks lquh lks >wB lc सत श6द सत गुमुखी. जरा भी शऽुता का भाव न रखा। !ववाद मG शऽुता है । !ववाद का मतलब है . अगर ऐसी ौTा मG बैठकर कसी ने साधुभाव से गु का वचन सुना हो. फर उसके साथ अपनी तरं ग जोड़नी पड़ती है । फर तो वह जो कहे . कस के पास। तुम बुT को पकड़ो क मोह]मद को क नानक को क कबीर को क दरया को. गु का श6द सुना हो. अकड़ा हआ खड़ा है । िसर के साथ असली िसर भी झुक ु जाए. मान लूंगा। जो नह/ं जंचेगी. शर/र तो झुक रहा है मगर अहं कार मन तो खड़ा है . ःमरण रहे । शंका मG तो गु का श6द सुना नह/ं जा सकता। शंका से तो गु का कोई संबध ं ह/ नह/ं बनता। शंकालु के पास तो सेतु ह/ होता क गु से जुड़ जाए। शंकालु ने तो अपनी शंका के कारण सब सेतु िसकोड़ िलया। गु से तो जुड़ता वह/ है जो िनःशंक है । जो बाहर भीतर अलग-अलग है वह तो गु से कैसे जुड़ेगा? तुम जाकर गु के चरणO मG िसर भी झुका दे ते हो मगर तु]हारा अहं कार पीछे अकड़ा खड़ा रहता है --यह बाहर भीतर अलग-अलग हो तुम। खोपड़/ तो झुक रह/ है . जहां गु और तु]हारा Vदय एक साथ धड़के। जहां तुम अलग-अलग धड़क रहे . ऐसी ौTा मG--तो ह/ सुना जा सकता है . िचकHसकO मG चुन लो तु]हG जो िचकHसक चुनना हो। चुनने के पहले तु]हG ःवतंऽता है क तुम अ के पास जाओ क ब के पास. Yया करे । मुझे मेरा अपना खुद हसाब रखना है । जो जंचेगी बात. अहं कार भी झुक जाए तो संबध ं जुड़ता है । उसी [ण मG संबध ं जुड़ जाता है । गु के साथ होना कसी !ववाद क# घड़/ मG नह/ं हो सकता। संवाद क# घड़/ चाहए.. जहां तुमने गु के साथ जरा भी अमैऽी भाव न रखा.oshoworld.. नह/ं मानूग ं ा। यह साधारणतः हमार/ मनोदशा होती है क जो मुझे जंचेगी वह म0 मानूग ं ा। तु]हG सHय का पता है ? पता ह/ हो तो कसी क# तु]हG मानने क# जMरत ह/ Yया है? यह तो ऐसा हआ क ु तुम बीमार हो और िचकHसक के पास गए हो और तुम कहो क जो औषिध मुझे जंचेगी वह म0 लूंगा। तु]हG चुनाव क# ःवतंऽता है . तु]हG ःवतंऽता है । िचकHसक बहत ह0 दिनया मG। कोई िचकHसकO क# कमी नह/ं है । ु ु िचकHसक तुम चुन लो लेकन एक बार तुमने चुन िलया. अलग-अलग नाच रहे .com .

हOने हसाब कताब छोड़ दया है . Cज. िगरा दे ता है । गु के सHय वचन उस मतवाले हाथी से भी gयादा श!"शाली है । तु]हारे अंधकार को िगरा दे ने क# [मता है लेकन--यह तो तोड़े पोलगढ़ वह तोड़े कमJ अनंत। तुम पर िनभJर है । तुम उसे अंगीकार करो तो ह/ यह बांित घट सकती है । तुम ःवीकार करो तो ह/ बांित घट सकती है । हाथी केवल कले का Rार तोड़ सकता है . कहां क# झंझट मG पड़ता! तु]हारा कला पड़ा है YयOक ज. शंका उठे गी.oshoworld.मO के कमr से तुमने उसे िनिमJत कया है । यह तो तोड़े पोलगढ़ वह तोड़े करम अनंत गु जूझ जाता है । मगर जूझता तभी है जब उसके पास सHय हो। ू कोए दांत रहै हCःत !बना पौल न टटे Page 160 of 256 http://www. अ. जो धYके मारकर बड़े से बड़े कले के Rार को तोड़ दे ता है । जो अपने दांतO से बड़े से बड़े कले के Rार को हला दे ता है . वह/ तुमसे टकराएंगे.dkuks lquh lks >wB lc मत गजंद मुखदं त--gयादा श!"शाली है उस हाथी से भी.यथा तुम िनकलने वाले नह/ं हो। होिशयार आदमी तो तुमसे बचकर चलGगे। चालबाज आदमी तो कहे गा. वह जूझ जाता है । सदगु परमाHमा क# शराब पीए है . !वचार करे गा। और फर ऐसा ह/ थोड़े ह/ होता है कले का दरवाजा। कले के दरवाजे पर भाले लगे होते ह0 । उसमG िसर मारना--भालO से चुभने क# तैयार/ चाहए। हाथी डरे गा। उसे पहले शराब !पला दे ते ह0 ।शराब पीकर मःत हो जाता है तो फर वह फब नह/ं करता--न भालO क#. मःत हाथी तो केवल कले का Rार तोड़ सकेगा लेकन गु क# मःती और भी गहर/ है । वह परमाHमा के रस को पीकर मःत हआ है । ु हाथी को तो शराब !पला दे ते ह0 । जब हाथी से कोई दरवाजा तुड़वाना हो कले का तो उसको शराब !पलानी पड़ती है । !बना शराब पीए तो वह भीजाकर कले के दरवाजे पर चोट नह/ं करे गा। यह तो पागल मःती मG ह/ कर पाएगा वह। नह/ं तो सोचेगा हजार बार. न खतरO क#. CजसमG तुम खुद ह/ फंस गए हो और दखी हो रहे हो और पीड़त हो रहे हो.मO ज. तकJ छोड़ दया है । ऐसी मःती मG जो डू बे ह0 . वह/ तु]हG तोड़ पाएंगे। कसी मःत का साC.मO मG बनाई गई तु]हार/ जो अपनी ह/ िनिमJत dयवःथा है . तड़फ रहे हो। ु जो जाल तुमने अपने चारO तरफ रच िलया है और खुद ह/ CजसमG तुम उलझ गए हो--हाथी.मO ज.com . इसिलए तुमसे जूझता है . मृHयु से भी बदतर है । और Cजसे तुम अपना घर कहते हो--जो तु]हारा घर तो नह/ं है महा कारागृह है । जो कला तुमने अपने चारO तरफ खड़ा कर िलया है . नह/ं तो तुमसे जूझेगा भी नह/ं YयOक तु]हारा कला खूब ूाचीन है और बड़े भाले लगे ह0 । और तुमसे टकराना िसफJ मःतO के िलए संभव है । Cजनका गCणत ह/ छूट गया है .नIय िमल जाए तो सौभा5य। YयOक मःत क# ह/ सहायता से तुम बाहर िनकल पाओगे. लेकन गु के वचन तु]हारे ज. Cजसको तुम जीवन कहते हो--जो जीवन तो नह/ं है.

अकेले दांत से या तो CUयां आभूषण बना लGगी और हाथी मG पहन लGगी। कै खैलारा होए-ू । या बsचे Cखलौना बना लGगे और खेलGगे। उससे फर कले नह/ं टटते ू दरया यह कह रहे ह0 क सदगु के वचन से कला तभी टटता है जब उसके पीछे ू गा। पंडत वे ह/ आHमानुभव हो। हाथी हो पीछे . हाथी नह/ं है । सदगु के पीछे हाथी है । वह मतवाला परमाHमा उसके साथ जुड़ा है । उसने अपने को परमाHमा से जोड़ िलया है । अब वह अकेला नह/ं है । म0ने सुना है . तु]हG ु दो पैसे ह/ दखाई पड़ते ह0 .. लेकन इससे यह मत सोचना दे खते हो ना? हाथी दांत से टट क अकेले हाथी दांत को लेकर गए तो कले का दरवाजा खोल लोगे। हाथी चाहए पीछे .हOने कहा. एक ईसाई फक#र औरत थेरेसा चचJ बनाना चाहती थी। उसने सारे गांव को इकcठा कया। उसने कहा. उसक# कतनी संप!N? उसे जोड़ लो। चचJ बनेगा। कहते ह0 . वह Yया होगी-कै कर घारे कािमनी. एक चचJ बनाना है । जीसस का बड़े से बड़ा चचJ इस गांव मG बनाना है । लोग हं सने लगे. हां. उससे कुछ खुलेगा नह/ं। ू कोए दांत रहै हCःत !बना पौल न टटे ू गी। अकेले दांत क# तो जो Cःथित फर कोई दरवाजा न खुलेगा. परमाHमा हो पीछे तभी। पंडत से नह/ं टटे वचन बोलता है जो सदगु बोलता है । वचनO मG कोई भेद नह/ं। पंडत के पास िसफJ दांत है . मोह]मद बड़े शांित से बैठे ह0 । आCखर उसने कहा. आप शांत YयO बैठे ह0 ? आCखर/ Page 161 of 256 http://www.हOने कहा. हम गर/ब आदमी ह0 . तु]हG मेरे भीतर जो परमाHमा खड़ा है वह दखाई नह/ं पड़ता। म0 उस खजाने क# बात कर रह/ हंू । यह तो थेरेसा का संबध ं हआ ु --दो पैसे। यह तो थेरेसा क# संप!N-दो पैसे। और फर परमाHमा. बड़/ oयार/ कह/। क तु]हG िसफJ दो पैसे दखाई पड़ते है . यह चचJ कैसे बनेगा? तुझे कोई खजाना िमल गया है थेरेसा.dkuks lquh lks >wB lc ू जाता है कले का दरवाजा. न कोई कले क# द/वाल टटे होगी. और पीछे परमाHमा जो मेरे साथ है वह तु]हG दखाई नह/ं पड़ता। दो पैसे शुM करने के िलए काफ# ह0 । फर बाक# परमाHमा तो है ह/. खजाना मुझे िमल गया है । यह दे खो। उसने खीसे से पैसे िनकाले--दो पैसे। लोग हं सने लगे। उ. वह फब लेगा। लोग तो हं से लेकन चचJ बना। और दिनया का बड़े से बड़ा चचJ आज वहां खड़ा है । दो पैसे ु के बल बना। लेकन थेरेसा ने जो बात कह/. अबू बकर ने मोह]मद के संःमरणO मG िलखा है क दोनO भागते हए से ु ु दँमन बचने के िलए एक गुफा मG चले गए। दँमन पीछे आ रहे ह0 . नह/ं तो हाथी दांत लेकर पहंु च गए कले के दरवाजे को ठकठोरने से.oshoworld. उ.com . जो चचJ बनाएगी?उसने कहा. अबू बकर बहत ु ु घबड़ाया हआ ु है । घोड़O क# टाप सुनाई पड़ने लगी। टाप कर/ब आती जाती है । अबू बकर पसीना-पसीना हो रहा है .. हमG सदा से ह/ शक था क तेरा दमाग खराब है । अब तू !बलकुल पागल हो गई। दो पैसे से दिनया का सब से बड़ा चचJ बनाना है ? उसने कहा.

िगनती ठWक से कर। अबू बकर ने गौर से दे खा क कह/ं म0 घबड़ाहट मG िगनती तो नह/ं भूल गया। दे खा तो दो ह/ ह0 । छोट/ सी गुफा मG दो बैठे ह0 । अबू बकर ने कहा.oshoworld.. कोई फकJ न होगा। Page 162 of 256 http://www. तुम परमाHमा को िगनते नह/ं. और समािध क# शाUीय dया…या करते रहते ह0 । जो कभी ूाथJना मG नह/ं उतरे और ूाथJना पर शाU िलखते रहते ह0 . आप होश मG ह0 हजरत? डर के मारे कह/ं आप घबड़ा तो नह/ं गए ह0 ? तीन िगन रहे ह0 दो को? मोह]मद ने कहा. मःत चाहए. हम तीन ह0 . पीछे हाथी चाहए। हाथी भी साधारण नह/ं चाहए. आज नह/ं कल कसी Uी के हाथ मG या तो आभूषण बन जाएगा। कै खेलारा होए-या Cखलौना बन जाएगा। कोई बsचा उससे खेलेगा। इससे gयादा मूwय नह/ं है । कोरे श6दO का कोई भी मूwय नह/ं है । और खयाल रखना क कोरे श6द भी ठWक वैसे ह/ दखाई पड़ते ह0 जैसे भरे श6द। श6दO मG कोई फकJ नह/ं है । हाथी दांत तो वे ह/ ह0 .com . वह जो हाथी दांत िलए ह0 . मतवाला चाहए शराब मG डू बा चाहए। नहाया हआ चाहए शराब मG। ु ू रोआं-रोआं शराबी का हो तो टटता है । कै कर धारे कािमनी-अकेले हाथी दांत िलए घूमना। यह/ तो लोग करते ह0 जो शाU िलए घूम रहे ह0 --अकेले हाथी दांत। यह/ तो लोग करते ह0 जो िसTांतO क# चचाJ करते रहते ह0 --!बना कसी ःवानुभव के. कोई फब न कर। उस एक क# मौजूदगी काफ# है । और जब मोह]मद ु यह बात कर रहे थे तभी आवाज घोड़O के टाप क# कम होने लगी। ठWक उसी [ण वे कसी और राःते पर मुड़ गए। थोड़/ ह/ दे र मG टापो क# आवाज बंद हो गई। दँमन कह/ं दरू िनकल ु गए। ू कोए दांत रहै हCःत !बना पौल न टटे ू अकेले दांत से नह/ं टटता है कले का दरवाजा. पीछे हाथी हो क न हो। अगर तुम हाथी दांत को ह/ दे खते हो तो Yया फकJ करोगे? दोनO हालत मG हाथी दांत हाथी दांत है । अगर तुम हाथी दांत को ह/ काटकर रसायिनक पर/[ण करवाओगे तो दोनO मG एक सा ह/ रसायिनक पर/[ण िमलेगा. उनसे सावधान रहना। कै कर धारे कािमनी.हOने समािध का जरा भी रस नह/ं चखा.dkuks lquh lks >wB lc घड़/ आई जा रह/। कुछ परमाHमा से ूाथJना वगैरह करनी हो तो कर लो। अब gयादा दे र नह/ं है । यह tास थोड़/ दे र क# और है । घोड़O क# टाप बढ़ती जा रह/ है । दँमन कर/ब आ ु रहा है । और हम केवल दो ह0 और दँमन हजारO ह0 । ु मोह]मद ने कहा. !बना परमाHमा से आंख िमलाए जो परमाHमा क# बात करते रहते ह0 । Cज. वहां तू गलती करता है । हम दो नह/ं ह0 .. जो हमारे सदा साथ है । हम तीन ह0 --दो हम और एक परमाHमा। दँमन हजारO हO. !बना कसी आHम-सा[ाHकार के.

oshoworld.com . े राम-राम हरे राम। तो तोता राम-राम हरे राम कहने लगता। इससे यह मत समझना क तोता हं द ू हो गया। मुसलमान घर मG होता तो अwलाह-अwलाह कहता। ईसाई घर मG होता तो कुछ और कहता। जैन घर मG होता तो नमोकार मंऽ पढ़ता। यह तोता यह/ होता। यह तोते को कुछ लेना-दे ना नह/ं है । और दख ु क# बात तो यह है क आदिमयO मG बहत ु लोग तोतO क# भांित ह0 पंडत तो !बलकुल पोपट. हालांक एक जैसे ह/ श6दO का उपयोग हो रहा है । बात बड़/ फकJ है । बात बड़/ िभ. वे कभी धािमJक नह/ं हो पाते। जो छलांग लगाने को राजी है । जो कहते ह0 ठWक है .ह/ं राहO क# बरसO म0ने व" आया तो गदागर से भी बदतर िनकले तमकन दे खी थी Cजन साहO क# बरसO म0ने बन के जंजीर गला घOट रह/ है मेरा राह दे खी थी इ.ह/ं बाहO क# बरसO म0ने इनक# गरमी से पसीजे न पसीजे वह मगर आग तापी है इ.ह/ं आहO क# बरसO म0ने बन के जंजीर गला घOट रह/ है मेरा राह दे खी थी इ. जहां श6दO मG रसधार बह रह/ हो. कोई धड़कता हआ Vदय चाहए। ु Page 163 of 256 http://www. कोई पंडत बोलता हो. तोता। दांत ह/ भर उसके पास ह0 । उसके दांतO से धोखे मG मत आ जाना। दरया कहते ह0 . दोनO क# भाषा का अगर जाकर भाषाशाUी से !वjेषण करवाओगे तो वह कहे गा क दोनO क# भाषा एक ह/ जैसी है । दोनO एक ह/ बात कह रहे ह0 । एक ह/ बात नह/ं कह रहे ह0 . सदगु खोजो जहां मःती हो. दकानदार का नह/ं है । जो दो-दो ु कौड़/ का हसाब लगाते रहते ह0 .ह/ं बाहO क# बरसO म0ने जागो थोड़े । थोड़े समझना शुM करो। मुदाJ मंदरO से राह नह/ं जाती. कोई Cजंदा गु चाहए। कताबO से मागJ नह/ं िमलता. या तो इस पार या उस पार. जहां श6दO के पीछे िनश6द खड़ा हो। और ऐसा गु िमल जाए तो िनःशंक भाव से उससे जुड़ जाना। तो फर िनंकपट भाव से उसके साथ एक हो जाना। फर हं मत कर लेना। फर दःसाहस कर लेना। फर जोखम उठा लेना। जोखिमयO का धंधा है धमJ। जुआरयO का धंधा ु है धमJ। यह कमजोरO का.न है । तुम तोते को रटवा दो तो तोता भी बोल दे ता है । मगर तोता जब कुछ बोलता है तो िसफJ दांत। भीतर कोई हाथी नह/ं है । तोते को पता ह/ नह/ं है क अथJ भी Yया है । तोता िसफJ पुन" कर दे ता है । तोता िसफJ नकल कर रहा है । तोते को हं द ू के घर मG होता है तो लोग िसखा दे त.dkuks lquh lks >wB lc दरया बोलते ह0 . हसाब-कताब लगाने वालO का. केवल उनका है । मेरे पैरO के िनशां अब भी परे शां है यहां खाक छानी है इ.ह/ं बाहO क# बरसO म0ने राह दे खी थी इ.

तब म0 तेरे हाथ मG हंू । जब तू मेरे पास आता है तो तू मेरे पास मG है और अड़चन है । इसिलए मुदाJ गुओं क# ूित`ा चलती है . बदल नह/ं सकती। वह/ सुर[ा है ।रखे बैठे ह0 कुरान क गुमंथ क वेद क बाइबल। Yया करे गी बाइबल तु]हारा? दो फूल चढ़ा दए. पूजा चलती है । Cजंदा गु का ितरःकार. इधर-उधर ली. तब तुमने इनके साथ भी यह/ं dयवहार कया। मतवाद/ जाने नह/ं ततवाद/ क# बात सूरज ऊगा उwलुआ िगने अंधेर/ रात Page 164 of 256 http://www. घबड़ाहट होगी। तो म0ने उससे कहा क यह तो बड़ा सूचक है .dkuks lquh lks >wB lc लेकन कुछ कारण है क हम मुदाJ कताबO से gयादा आसानी से संबध ं जोड़ लेते ह0 । उसका कारण साफ है । मुदाJ कताब तु]हG बदलती नह/ं. !वरोध। मुदाJ गु का स]मान। और ये सब मुदाJ गु कसी दन Cजंदा थे. बना लो। जैसा रं ग डालना चाहो उस तःवीर मG डाल दो। आग क# तःवीर तु]हG जलाएगी नह/ं। आग क# तःवीर के पास जाने से कौन डरता है ? आग क# तःवीर को तो लोग अपने Vदय मG लगा सकते ह0 । लेकन आग के पास जाने से तो डर लगेगा. वह भी तु]हार/ मःती। कभी चढ़ा दए. भय लगने लगता है । आपके पास आने से घबड़ाने लगता हंू । हजार-हजार !वचार बाधाएं डालने लगते ह0 । तो उसने कहा. म0 बड़े पसोपेश मG हंू । यह बात Yया है ? और ऐसा दो चार बार हो गया है । जमJनी लौट जाता हंू.com . तो चढ?◌ा दए. पहंु चते ह/ जमJनी सब ठWक हो जाता है । यहां आया नह/ं क फर गड़बड़ शुM हो जाता है । उसके पसोपेश को समझो। उसका पसोपेश अिधक लोगO का पसोपेश है । उसक# उलझन अिधक लोगO क# उलझन है । जब वह जमJनी मG है तब कोई अड़चन नह/ं है । तब आग से तुम इतने दरू हो क अब आग क# तःवीर ह/ रह गई है तु]हारे मन मG। तःवीर तु]हार/ है । तुम जैसी चाहो. राख मG बड़/ सुर[ा है । कल ह/ एक युवक ने मुझे आकर कहा क म0 जब दरू जमJनी मG होता हंू तो आपक# बड़/ याद आती है और आप बड़े oयारे लगते ह0 । और चौबीस घंटे आपके ह/ रस मG रहता हंू । और जब यहां आता हंू तो डर लगने लगता है .oshoworld. िनंदा. राख क# पूजा करते ह0 । राख मG खतरा नह/ं है . अब पूजा चलती है । बुT जब Cजंदा थे तो यह/ लोक उनसे बचकर भागते थे। YयOक Cजंदा बुT आग ह0 । Cजंदा बुT के पास जाओगे तो जलोगे। और जलोगे तो ह/ िनखरोगे भी। जलोगे तो ह/ तु]हारा कचरा जलेगा और तु]हारा सोना कुंदन बनेगा. फर जो मतलब िनकालना चाहा वह मतलब िनकाल िलया। तो कताब तो तु]हार/ गुलाम हो जाती है । कताब तु]हG Yया बदलेगी! तु]ह/ं कताब तो बदल दे ते हो। इसिलए कताब क# तो पूजा लोग करते ह0 । मर गए गु क# हजारO साल तक पूजा होती है । बुT को गए ढाई हजार साल हो गए. शुT होगा। इसिलए लोग राख पूजा क# करते ह0 । आग से बचते ह0 . यह तो बात साफ है । जब तू दरू होता है तो मेरे वचनO का जो तुझे अथJ करना है कर लेता होगा. नह/ं चढ़ाए तो नह/ं चढ़ाए। Yया करे गी बाइबल तु]हारा? फर कभी पढ़ ली.

वहां अटका रह जाएगा। वहां अचानक पाएगा क सब उHसाह खो गया। वहां झुकने क# इsछा नह/ं होती। यह तु]हार/ इsछा है या तु]हार/ जंजीरO क# इsछा है ? यह तुम ःवतंऽ हो. मगर जंजीरG जंजीरG ह/ ह0 । अगर तुम हं द ू हो तो मुसलमान क# मCःजद मG जाने मG तु]हG पता चलेगा क जंजीर है पैर मG। अगर जंजीर क# परख करनी हो. जो बड़/ अ^ँय है । मुसलमान फक#र के सामने तुम जाकर उसके चरणO मG िसर न रख सकोगे। मुसलमान--और उसके चरणO से रखG? और तुम ॄाŒण या तुम जैन। और तुम शुT शाकाहार/ और यह मांसाहार/! इसके चरणO मG िसर रखG! यह ]लेsछ.oshoworld. िसYख. िसर झुकने ह/ इsछा पैदा नह/ं होगी। अकड़े रह जाओगे। पीठ झुकेगी नह/ं. मदार/ के चरणO मG िसर झुका दे गा. तुम शुT--इसके चरणO मG िसर रखG? कोई चीज रोक लेगी। और यह सामने जो आदमी खड़ा है . िसर झुकेगा नह/ं। कौन रोक रहा है ? एक जंजीर पड़/ है . ू मुसलमान. हो सकता है एक जामत पुष तु]हG दखाई नह/ं पड़ सकता YयOक तु]हG और चीजO का िनणJय करना है पहले। अगर तुम जैन हो तो एक पाखंड/ जैन मुिन के चरणO मG भी तुम िसर झुका दोगे और एक असली मुसलमान फक#र के चरणO मG भी िसर झुका न पाओगे। इससे पता चलता है जंजीर का। और यह/ हालत मुसलमान क# है । वह पाखंड/ फक#र के पैरO मG िसर झुका दे गा. तुम सोचते हो तुम मु" हो? तो अगर तुम मु" होते हो जो था. ईसाई. हं दओं ने नह/ं दे खा। हं दओं ु ु ु क# कताबO मG महावीर का उwलेख भी नह/ं है । इतना अपूवJ पुष हआ उसका उwलेख भी ु नह/ं हं दओं क# कताबO मG.com . बात Yया है ? ऐसी उपे[ा क#? ऐसी पीठ कर ली इसक# तरफ. बौT सब जंजीरO मG मिसत ह0 । अलग अलग नाम ह0 जंजीरO के. !बना अनुभव के श6दO का आमह--मेर/ कुरान ठWक क मेर/ गीता ठWक। और तु]हG ठWक का कुछ पता नह/ं है । ठWक का तु]हG कभी दशJन नह/ं हआ। ठWक का दशJन ु हो सके इसके िलए तुमने कभी आंख ह/ नह/ं खोली। ठWक से संबध ं जुड़ सके इतनी तुमने कभी हं मत ह/ नह/ं क#। और मेर/ कुरान ठWक. जैन. वह मCःजद मG नह/ं जाने दे ती है । मंदर मG खींच लेती है . जहां जलती आग हो. हं द ू हो. ु इस आदमी तरफ! Page 165 of 256 http://www. िसTांत क# पकड़। मतवाद का अथJ होता है . और तुम लड़ रहे हो और !ववाद कर रहे हो--मतवाद/! मतवाद से सावधान रहना। जंजीर बन जाएगी तु]हार/। हं द. और मेर/ गीता ठWक. पैर कते ह0 . तुम अचानक पाओगे. उसे दे खते। महावीर को हं दओं ने नह/ं दे खा। महावीर चले इसी जमीन पर. और कसी जैन मुिन के.dkuks lquh lks >wB lc oयारा वचन है । मतवाद/ जाने नह/ं ततवाद/ क# बात मतवाद का अथJ होता है . जहां जीवन क# सचमुच तपvयाJ ूगट हई ु हो. जरा मुसलमान क# मCःजद मG जाने क# कोिशश करना. मCःजद मG रोकती है । अगर कसी तरह हं मत करके चले भी गए तो मCःजद मG हाथ झुकने. कोई चीज पीछे रोकती है । यह कौन चीज रोकती होगी? दखाई तो नह/ं पड़ती है । पैर मG एक सूआम जंजीर पड़/ है .

dkuks lquh lks >wB lc
जैनO के कृ ंण को नरक मG डाल रखा है अपनी कताबO मG। YयOक जैनO के हसाब से इसी
आदमी ने युT करवा दया महाभारत का। अजुन
J तो सं;यासी हआ
जा रहा था। अजुन
J तो

जैन मुिन होने क# तैयार/ कर रहा था। वह तो कहता था चला म0 छोड़कर। यह हं सा करने
क#, यह मारना अपने लोगO को, यह मुझसे न हो सकेगा। तो कृ ंण ने उसको समझाबुझाकर घOट-घOट कर गीता !पला द/। और वह बेचारा बहत
ु भागा, बहत
ु भागा, मगर ये
भागने नह/ं दए और कसी तरह उसको हं सा मG उतार दया। लाखO लोग मारे गए, हं सा
हई।
उसका Cज]मा कस पर है ? तो जैनO ने कृ ंण को सातवG नकJ मG डाला है । उससे नीचे

कोई नरक नह/ं है तो सातवG मG डाल दया। और

थोड़े -बहत
ु दन के िलए नह/ं डाला, काफ#

लंबे काल के िलए डाला है । जब यह सृ!_ न_ होगी तब छूटG गे। तब तक तो उनको नकJ मG
रहना पड़े गा।
मतवाद/ तो कृ ंण जैसी चेतना को भी न दे ख पाएगा, महावीर जैसी चेतना को भी न दे ख
पाएगा। बाइःट को यहदयO
ने सूली पर चढ़ा दया। यहद/

ू बेटा था, यहद/
ू घर मG पैदा हआ

था, लेकन कुछ ऐसी अनूठW बातG कहने लगा जो क पंडतO को न जमीं। जो रबाई थे
उनको न जमीं। उनके आसन डावांडोल होने लगे। इसको फांसी दे नी पड़/। इसको सूली लगानी
पड़/। यहद/
ू बेटे को यहद/
ू बापO ने मारा। यह बेटे क# हHया क#। इसक# कोई gयादा उॆ भी
न थी, त0तीस साल क# उॆ मG जीसस को सूली पर लटका दया। आग बड़/ ूचंड रह/ होगी।
घबड़ा गई होगी सार/ क# सार/ dयवःथा, ःथा!पत िनहत ःवाथJ।
मतवाद/ जाने नह/ं ततवाद/ क# बात
दरया कहते ह0 , मतवाद/ मत बन जाना; नह/ं तो तुम तHव Cजसने जाना है , उसक# बात
न समझ पाओगे। तHव को जाननेवाला िसTांतO क# बात नह/ं करता।

तHव को जाननेवाला

अनुभव को बात करता है , सा[ाHकार क# बात करता है । तHव को जाननेवाले को छोट/-छोट/
भाषाओं के झगड़O मG रस नह/ं होता। मा;यताओं, िसTांतO, शाUO मG रस नह/ं होता।
तHववाद/ को तो िसफJ एक बात मG रस होता है : जो है , उनको तुम जान लो। जो है , जैसा
है , वैसा ह/ उसको जान लो। आदमी के Rारा बनाए गए दशJनशाU कसी मूwय के नह/ं है ।
तु]हार/ आंख सभी दशJनशाUO से मु" होनी चाहए।
रं जी साःतर 5यान क# अंग रह/ िलपटाए
दरया कहते ह0 , अंग पर बड़/ धूल जम गई है शाU क#, Dान क#--साःतर 5यान क#। कोई
गु खोजो क उसे धो दे । कोई गु खोजो क उसक# अमृत वषाJ मG तु]हार/ धूल बह जाए।
सदगु गहो, जो तु]हG शाUO क# धूल से मु" करा दे ; श6दO के आमह से मु" करा दे ;
तु]हार/ आंखO को िनमJल कर दे , दपJण क# तरह िनमJल--क जो है , उसी का ूित!बंब बनने
लगे।
मतवाद/ जाने नह/ं ततवाद/ क# बात

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तो अगर तुम मतवाद लेकर गु के पास गए तो तुम समझ ह/ न पाओगे, YयOक वह/ं से
झंझट शुM हो गई। वह है तHव को जाननेवाला और तुम हो केवल िसTांत को बकवास मG
लगे हए।

म0 एक गांव मG गया, दो बूढ़े मेरे पास आए। दोनO पड़ोसी ह0 । एक जैन है , एक ॄाŒण है ।
दोनO ने मुझसे कहा क आप आ गए, तो अsछा हआ।
एक बात हमG पूछनी है । हम दोनO

बचपन के साथी ह0 । उनक# उॆ होगी कोई सNर पचहNर साल अब तो। और बचपन से ह/
हममG !ववाद है और हम पड़ोसी भी ह0 । हम िसर लड़ा-लड़ाकर हार गए। म0 जैन हंू और यह
ॄाŒण। ये कहते ह0 दिनया
को परमाHमा ने बनाया, और म0 कहता हंू कसी ने नह/ं बनाया।

कोई ॐ_ा नह/ं है । यह तो अनाद काल से चली आ रह/ है । इसका बनानेवाला कोई है ह/
नह/ं। हम थक गए ह0 इसमG !ववाद कर-करके, और पास ह/ रहते ह0 । फर सुबह िमल जाते
ह0 , फर सांझ िमल जाते ह0 । अ तो दोनO रटायर भी हो गए ह0 तो कोई काम ह/ नह/ं है । तो
हम बहत
ु परे शान हो गए ह0 । और इसमG कुछ हल भी नह/ं होता। यह भी तकJ करने मG बहत

कुशल है , म0 भी बहत
ु कुशल हंू । म0 भी शाUO का उwलेख दे ता हंू , यह भी उwलेख दे ता है ।
हमारे घरवाले भी परे शान हो गए ह0 । जैसे ह/ हम दोनO बैठते ह0 क सब लोग हट जाते ह0
वहां से, क अब इनक# फर बकवास शुM हई।
और हम बैठे नह/ं पास क वह झंझट खड़/

हो जाती है । आपके पास हम आए ह0 , तय करने क इन दोनO मG कौन ठWक है ?
म0ने उनसे कहा, अगर तुम मेर/ सुनो तो तुम दोनO गलत हो। कहने लगे, यह कैसे हो
सकता है ? दो म0 से कोई एक तो ठWक होगा ह/। सीधी बात है --या तो कसी ने बनाया, या
नह/ं बनाया। अब इसमG दोनO कैसे गलत हो सकते ह0 ? म0ने कहा, तुम मेर/ बात समझो।
तुम दोनO गलत हो, YयOक तुम दोनO मतवाद/ हो। म0 यह नह/ं कहा रहा क तु]हारा
िसTांत ठWक, उनका िसTांत ठWक। तु]हारा िसTांत गलत, या उनका िसTांत गलत। यह म0
कह ह/ नह/ं रहा। िसTांत से मुझे कुछ लेना-दे ना ह/ नह/ं है , मतवाद गलत। तुम दोनO गलत
हो। YयOक न तुमने तHव का दशJन कया है , न उ;हOने तHव का दशJन कया। तुम !ववाद 
कस बात का कर रहे हो? तुमने दे खा? पहले ने कहा, दे खा तो नह/ं। दसरे
से पूछा, तुमने

दे खा? उ;हOने कहा, यह तो नह/ं कह सकता क दे खा, अब आपके सामने झूठ कैसे
बोलना? दे खा तो नह/ं। म0ने कहा, दो अंधे !ववाद कर रहे ह0 क ूकाश कैसा होता है ।
रामकृ ंण कहते थे एक कहानी, वह म0ने उनसे कह/। क एक अंधे आदमी को िमऽO ने घर
बुलाया, िनमंऽण दया और खीर बनाई। उसे खीर खूब पसंद आई। पहली दफा खीर उसने
खाई। गर/ब अंधा था, कभी खीर खाई न थी। वह पूछने लगा, यह खीर कैसी! बड़/ oयासी
लगती है ,

इसके संबध
ं मG मुझे कुछ समझाओ। तो पास मG बैठे एक पंडत ने--गांव का ह/

पंडत था--उसने कहा, खीर कैसी? खीर !बलकुल सफेद है , शुॅ tेत वU जैसी। उसने
कहा, अब उलझन मत बनाओ। म0 अंधा हंू । सफेद यानी Yया? पंडत तो पंडत। पंडत कोई
ऐसे हारते तो नह/ं। पंडत ने कहा, सफेद यानी Yया? अरे , बगुला दे खा कभी? !बलकुल
बगुले क# जैसी सफेद। अब यह पंडत इस अंधे से भी gयादा अंधा है । तुम अंधे आदमी को

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समझाने चले क खीर सफेद, सफेद कपड़O जैसी। अब सफेद क# झंझट उठW तो बगुले जैसी
सफेद। उस अंधे ने कहा क आप तो मुझे और उलझाए जा रहे ह0 । एक ूƒ तो वह/ खड़ा
है , और दो खड़े कर दए। यह सफेद Yया? यह बगुला Yया? यह बगुला कैसा होता है ?
मगर पंडत भी पंडत था। मतवाद/ हारने नह/ं, एक मत से दसरा
मत िनकालते जाते ह0 ।

उसने कहा, बगुला कैसा, यह भी एक झंझट है । उसने कहा, अsछा दे ख। यह मेरा हाथ,
इस पर हाथ रख। उसने बगुले क# तरह का हाथ अपना मोड़ िलया, जैसे बगुले क# गरदन
मुड़/ हो। कहा, इसमG हाथ फेर। ऐसी बगुले क# गरदन होती है । अंधा बड़ा ूस;न हो गया।
उसने कहा क म0 समझ गया, खीर मुड़े हए
ु हाथ जैसी होती है । अब समझ आई बात।
मतवाद ऐसा ह/ है ; Cजसका हमG कोई अनुभव नह/ं है , Cजसका हमG अनुभव हो नह/ं सकता
YयOक हमारे अनुभव के Rार अवT ह0 ।
उन दोनO को समझाने मG मुझे बड़/ कठनाई पड़/ क तुम दोनO गलत हो। वे बार-बार यह/
कहने लगे लौटकर क एक होगा गलत, मगर दोनO? वे कहने लगे, आपने और झंझट कर
द/। अभी तक तो हम लोगO को एक ह/ झंझट थी, क एक गलत होगा, एक तो सह/
होगा। कभी न कभी िनणJय हो जाएगा। आप कहते ह0 , दोनO गलत।
मतवाद गलत है । अगर तुम ईसाई हो मतवाद/ क# तरह तो तुम गलत। अगर हं द ू हो
मतवाद/ क# तरह, तुम गलत। अगर मुसलमान हो मतवाद/ क# तरह, तुम गलत। तHववाद/
बनो। दरया बड़/ ऊंची बात कह रहे ह0 । दरया कह रहे ह0 , जो है उसको दे खो; उसको
अनुभव करो, उसक# ूतीित करो।
आरजू ए जां िनसार/ वो हमारे दल मG है
Yया करG लेकन क खंजर, कबजा-ए-काितल मG है
अब न बहलेगा चमन मG तेरे द/वाने का दल 
फर हवस आवारगी क# आज इसके दल मG है
इससे Yया मतलब क म0 गुलशन मG हंू या सहरा मG हंू
आप Cजस महफल मG ह0 दल मेरा उस महफल मG है
तह मG है दबहरे मुह6बत क वह गोहर और तू
यह समझाता है क शायद दामने साहल मG है
सादगी कहए इसे या होिशयार/ जािनए
उनसे कह दे ते ह0 जो कुछ हमारे दल मG है
जुःतजू मG Cजसक# हरे क राह रो है रान है
अँक क# मंCजल है वह और अँक उस मंCजल मG है
फGक दे चाहे हवादश राह से हर बार दरू
जाएगी मंCजल कहां जब Cजंदगी मंCजल मG है
समझो। सHय दरू नह/ं है । सHय !बलकुल आंख के सामने है । सामने ह/ YयO, सHय आंख मG
है । आंख मG ह/ YयO, सHय आंख के पीछे भी है । सHय ह/ है । जो है उसी का नाम सHय है ।

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फGक दे चाहे हवादश राह से हर बार दरू
दघJ
ु टनाएं घट जाएं और हम राह से भटक जाएं, फर भी कोई फकJ नह/ं पड़ता। हम कतने
ह/ सHय को भूल जाएं, कुछ अंतर नह/ं पड़ता।
फGक दे चाहे हवादश राह से हर बार दरू
जाएगी मंCजल कहां जब Cजंदगी मंCजल मG है
परमाHमा दरू नह/ं है । दरू जा भी नह/ं सकते हम उससे। जरा आंख खोलकर दे ख लेने क#
बात है ।
जाएगी मंCजल कहां जब Cजंदगी मंCजल मG है
भटक रहे ह0 हम तो भी परमाHमा मG ह/ भटक रहे ह0 । आंख बंद कए खड़े ह0 तो भी सHय के
सामने ह/ आंख बंद कए खड़े ह0 । लेकन सHय से हम दरू नह/ं हो सकते।
मतवाद आंख को बंद रखने मG सहायता पहंु चाता है । मतवाद से एक ॅांित पैदा होती है क
मुझे तो पता है । बस यह/ सबसे बड़/ ॅांित है , जो मतवाद पैदा करता है । पढ़ ली कताब,
पढ़ा शाU, िसTांत समझे, तकJ सीखा और तु]हG एक ॅांित पैदा होती है क मुझे पता है ।
और पता जरा भी नह/ं। और ऐसा भी नह/ं है क Cजसका तुम पता बताने क# बात कर रहे
हो, वह दरू है । ऐसा भी नह/ं है , वह तु]हारे सामने खड़ा है । लेकन अगर तु]हार/ आंखG
िसTांत और श6दO से दबी ह0 , तो तुम न दे ख पाओगे।
तह मG है दबहरे मुह6बत क वह गोहर और तू
यह समझता है क शायद दामने साहल मG है
मन यह/ समझाए चला जाता है क कनारे पर ह/ िमलन हो जाएगा, तट पर ह/ िमलना हो
जाएगा। श6दO और िसTांतO के तट पर ह/ िमलना हो जाएगा। ऊपर-ऊपर क# खोज, सतहसतह पर तैरना इससे ह/ िमलना हो जाएगा।
तह मG है दबहरे मुह6बत क# वह गोहर और तू
लेकन Cजनको ह/रे खोजने ह0 , Cज;हG मोती खोजने ह0 उ;हG सागर क# गहराई मG उतरना
पड़ता है । और मतवाद कनारे से अटका रहा जाता है ।
मतवाद/ क# हालत ऐसी है , जैसे एक रात कुछ शरा!बयO क# हो गई थी। रात खूब शराब पी
मधुशाला मG। चांदनी रात थी, पूरा चांद आकाश मG था, फर उनको धन आई, मःती आई 
क चलो नद/ पर चलG, नौका-!वहार करG । गए नद/ पर। मछुए जा चुके थे अपनी नौकाएं,
बांधकर। एक नौका मG उतर गए, और चले। पटवार/ मार/, खूब पतवार मार/, खूब मार/।
रातभर पतवार चलाते रहे । सुबह-सुबह जब ठं ड/ हवाएं आने लगीं और जब थोड़ा होश लौटा,
थोड़ा नशा उतरा तो उनमG से एक शराबी ने कहा, भाई, जरा नीचे उतरकर दे ख लो। हम
कहां चले आए, पता नह/ं। उतर क दC[ण, ऊपर के नीचे, कहां याऽा हो गई? जरा 
कनारे पर उतरकर तो दे ख लो, कतनी दरू िनकल आए हो। अब घर लौटG । सुबह होने
लगी। पC~यां बsचे राह दे खते हOगे।

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तो उनमG से एक कनारे पर उतरा और खूब हं सने लगा। पागल क# तरह हं सने लगा। तो
बाक# ने कहा, YयO हं सते हो, बात Yया है ? उसने कहा, हम वह/ं के वह/ं खड़े ह0 । YयOक
हम जंजीर तो खोलना भूल ह/ गए, जो कनारे से बंधी है । पतवार चलाने से ह/ थोड़े ह/
कह/ं कोई जाता है ! जंजीर भी तो खुलनी चाहए। उसने कहा, मत घबड़ाओ, उतर जाओ,
घर चलG। रात भर नाहक ह/ मेहनत हई।
बड़/ पतवार मार/।

ऐसा ह/ मतवाद/ बड़ा !वचार करता है , बड़/ पतवार मारता है , लेकन जब आंख खुलेगी तो
तुम पाओगे क जंजीर तो खोलना भूल ह/ गए। जंजीर ह/ तो !वचार क# है । जब तक !वचार
है तु]हारे भीतर तब तक तHव का दशJन न होगा। िन!वJचार िचN मG तHव का दशJन होता है ।
इससे Yया मतलब क म0 गुलशन मG हंू या सहरा मG हंू
आप Cजस महफल मG ह0 दल मेरा उस महफल मG है
तो हं द,
ू मुसलमान, ईसाई, जैन, बौT, िसYख होने क# चे_ा छोड़ो। यह पूर/ महफल
उसक# है । यह सारा अCःतHव उसका है । तुम उसके ह/ हो रहो।
आप Cजस महफल मG ह0 दल मेरा उस महफल मG है
परमाHमा जहां जीता और जागता है --वृ[O मG हरा है , फलO मG लाल है , बादलO मG बादल है ,
पC[यO मG प[ी है , पHथरO मG पHथर है , नदयO मG नद/, यह उसक# महफल है । आदिमयO
मG आदमी, CUयO मG Uी, बsचO मG बsचा, यह उसक# महफल है । ये सार/ लहरG उसक# ह0 ।
तुम इसमG अपनी सी सीमाएं न बांधो। सीमाएं बांधीं तो अनहद तक कैसे जाओगे? हद बना
ली तो अनहद तक कैसे जाओगे? हद बना ली तो नौका बंधी रह गई कनारे से।
मतवाद/ जाने नह/ं ततवाद/ क# बात
सूरज ऊगा उwलुआ िगने अंधेर/ रात
सूरज उग आता है तब उwलू को लगता है , अंधेर/ रात आ गई। ऐसी हालत मतवाद/ क# है ।
ऐसा हआ
एक दन। यह पास के गुलमोहर पर म0ने एक उwलू को सुबह-सुबह आकर बैठे

दे खा। सुबह होने के कर/ब है , उwलू आकर बैठ ह/ रहा है और एक िगलहर/ भी वहां बैठW है ।
िगलहर/ बड़/ ूस;न है , ताजगी से भर/ है सुबह क#। उwलू ने उससे पूछ क बेट/, रात हई

जाती है , !वौाम करने के िलए यह ःथान ठWक रहे गा? िगलहर/ ने कहा, चाचा, आप भी
Yया बातG कर रहे ह0 । रात? अरे सूरज िनकल रहा है । उwलू नाराज हो गया। उwलू ने कहा,
छोटे मुह
ं और बड़/ बात! रात है । कौन कहता है सूरज िनकल रहा है ? सूरज तो ढल गया।
उwलू को तो रात मG दखाई पड़ता है । जब उसे दखाई पड़ता है तो ःवभावतः उसका तकJ है 
क तभी दन। जब दखाई पड़े तक दन। जब दखाई न पड़े तो रात।
मतवाद/ को श6द और !वचार और िसTांत मG ह/ दखाई पड़ता है ; उसे इसी मG रस है । वेद
Yया कहते ह0 , कुरान Yया कहती है , बाइबल Yया कहती है । वह इ;ह/ं क# उधेड़बुन मG लगा
रहता है । यह उसका दन है । मतवाद/ का जो दन है वह तHववाद/ क# रात है । और
तHववाद/ का जो दन है वह मतवाद/ क# रात है ।
सूरज ऊगा उwलुआ िगने अंधेर/ रात

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.com . पंडत कभी नह/ं पहंु च पाता है । पंडत को अDानी होना पड़े गा। उतार दे ना होगा सारा बोझ। दरया बहु बकवाद तज कर अनहद से नेह ये हदO क# बातG छोड़ो। हं द ू मुसलमानO क# बातG छोड़ो। दरया बहु बकवाद तज.. जो शाtत सनातन है .. उससे जुड़ो। कताबG पैदा होती ह0 . कहा बरसावे मेह Page 171 of 256 http://www. खो जाती ह0 । िसTांत बनते..कर अनहद से नेह जो असीम है .dkuks lquh lks >wB lc इसीिलए संतO से अगर पंडत नाराज रहे तो कुछ आvयJ नह/ं YयOक पंडत को संत कहते ह0 उwलुआ। सूरज ऊगा उwलुआ िगने अंधेर/ रात अगर उwलू िमलकर फर फांसी लगा दG तो राजी रहना चाहए। उwलू िमलकर नह/ं लगाएंगे तो करG गे Yया? सब उwलू एथGस के इकcठे हो गए और उ. जो अनंत है .. जो सदा है । औध ं ा कलसा उपरे . लेकन उwलुओं क# जमात। िगलहर/ अकेली पड़ गई। और उwलुओं क# जमात. !बखर जाते ह0 । तुम उसे खोजो जो न कभी बनता.! सीखत 5यानी 5यान गम करे ॄŒ क# बात दरया बाहर चांदनी भीतर काली रात सीखत 5यानी गम--तु]हारे िसTांतO क# सीमा है : गम. यह dयथJ क# बातG छोड़ो। . और पता जरा भी नह/ं। पंडत क# हालत अDानी से भी बदतर है । अDानी तो कभी-कभी पहंु च भी जाए. न कभी !बखरता. उनक# परभाषा है । सीखत 5यानी 5यान गम--तुम Cजस Dानी का चचाJ कर रहे हो.oshoworld. मुझे पता नह/ं। और पंडत को पता है क मुझे पता है . पीछे छोड़े दे ने पड़ते ह0 । सीखत 5यानी 5यान गम करे ॄŒ क# बात िसTांत तो सीिमत ह0 और असीम क# बातG करते ह0 ? दरया बाहर चांदनी भीतर काली रात तो फर बात ह/ बात रह जाती है । ऊपर-ऊपर चांदनी और भीतर अंधेर/ रात। पंडत के भीतर तुम अमावस पाओगे। गहन अमावस। गहन अंधेरा। कभी-कभी तो अDानी से भी gयादा अंधेरा। पंडत के भीतर होता है । YयOक अDानी को कम से कम एक बात तो रहती है क उसे पता होता है क मुझे पता नह/ं। इतना तो सHय होता है उसके संबध ं मG। इतनी बात तो सच है उसके संबध ं मG क उसे पता है .हOने सुकरात को जहर !पला दया। ऐसा तHववाद/ कभी-कभी पैदा होता है । सुकरात जैसा. अगम नह/ं ह0 वे. Cजन मतवादO क# बात कर रहे हो वह सब सीिमत है । अगम मG उनक# कोई गित नह/ं है । उस !वराट मG उन िसTांतO के सहारे तुम न जा सकोगे। उस !वराट मG तो जाना ह/ Cजसको हो उसे सब िसTांत छोड़ दे ने पड़ते ह0 ..

क म0 सच मG जानता Yया हंू ? कलम हाथ मG कंपने लगी। िलखने बैठता है लेकन कुछ िलखा नह/ं जाता। Yया कहंू क Yया जानता हंू ? और तब धीरे धीरे बात उसे साफ हई ु क जानता तो म0 कुछ भी नह/ं। िलखा तो म0ने बहत ु . कहा बरसाबे मेह इसिलए सदगु पंडतO को जरा भी Iयान नह/ं दे ते। गुरCजएफ के पास आःपGःक# गया. बाहर बफJ िगर रह/ थी. अपना घड़ा उलटा रखे बैठे हो. गुरCजएफ ने आवाज द/ क भई. और एक तरफ जो तू नह/ं जानता है । जो तू जानता उसक# हम फर कभी चचाJ न करG गे। बात ह/ खतम हो गई। तू जानता ह/ है । जो तू नह/ं जानता उसक# चचाJ करG गे YयOक जो तू नह/ं जानता वह तुझे िसखाने जैसा है । जो पास के कमरे मG. ईमानदार आदमी था। सोचने लगा. मगर एक बार पहले ह/ साफ कर ले। यह कागज ले. गु बरसे भी तो dयथJ चला जाएगा। औध ं ा कलसा ऊपरे .dkuks lquh lks >wB lc और गु भी Yया करे ! गु भी गया. बरसने को तैयार है । लेकन गु भी Yया करे ? अगर तुम अपना कलसा उलटा रखे बैठे हो. ठWक. !बखर-!बखर जाती है । सHय तो ऐसा है जैसे क पाया-.com . कहा. जैसे आषाढ़ ु मG बादल उठते ह0 . इस पर िलख एक तरफ जो तू जानता है . बगल के कमरे मG चले जाओ। मगर आःपGःक# भी िन`ावान आदमी था. उसका नाम है नोदन आरगानम: नया ू िसTांत। और तीसर/ कताब है आःपGःक# क#. उसे पसीना आने लगा। पहली दफा उसक# Cजंदगी मG यह सवाल उठा. चरणO पर िगर पड़ा। कोरा Page 172 of 256 http://www.oshoworld. जगत-जाहर था। गुरCजएफ को कोई जानता ह/ नह/ं था। गुरCजएफ को लोगO ने जाना आःपGःक# के आने के बाद। गुरCजएफ तो अनजान फक#र था। लेकन गुरCजएफ ने आःपGःक# को दYकत मG डाल दया। मतवाद/ को तHववाद/ ने बड़/ दYकत मG डाल दया। वह कागज दे दया.पकड़ो क !बखर-!बखर जाता है . िलख लो। आःपGःक# बड़/ ूिसT कताबO का लेखक था। उसक# एक कताब तो मनुंय जाित के इितहास मG अपूवJ कताबO मG िगनी जाती है : तितJयम आरगानम। कहते ह0 . !बना जाने िलखा है । न मुझे ईtर का पता है और ईtर क# म0ने खूब चचाJ क#। न मुझे आHमा का पता है और आHमा क# म0ने खूब चचाJ क#। सच तो यह है क चचाJ करना आसान है . जैसे क मेह से भरा हआ बादल होता है . राजी होते ह0 बरसने को। तो गु तो मेह से भर गया तHव के. आःपGःक# बड़ा पंडत था। गुरCजएफ ने कहा तू आया. तितJयम आरगानम: तीसरा िसTांत। आःपGःक# यह कताब िलख चुका था. िलखकर ला। आःपGःक# आया. छूट-छूट जाता है . असंभव है । बांधे नह/ं बंधती. दो घड़/ बीती. पारे जैसा है । घड़/ बीती. उसका नाम है ु आरगानम: िसTांत। दसर/ कताब है बेकन क#. Yया म0 जानता हंू । ठं ड/ रात थी. इतनी दे र कर रहा है तू। इतना बड़ा Dानी! जwद/ कर. जब तु]हG पता न हो। पता हो तब चचाJ करना मुCँकल हो जाता है । YयOक जब पता होता है तब यह भी पता होता है क श6द मG उसक# चचाJ बड़/ मुCँकल है . दिनया मG तीन बड़/ कताबG ह0 । एक कताब है अरःतू क#.

dkuks lquh lks >wB lc
कागज रख दया और कहा क दोनO तरफ कोरा है । कुछ भी नह/ं जानता हंू । आप अ, ब,
स, से शुM करG ।
ऐसा जब गु िमलता है , और ऐसे गु को जब ऐसे िशंय िमलता है , जो अपना कलसा
सीधा करके रख दे ता है । कहता है , अ, ब, स से शुM करG । कुछ जानता हंू अगर यह दं भ
होता तो यह कलसा अभी भी उलटा रहता। दं भ का कलसा उलटा रहता है ।
औध
ं ा कलसा ऊपरे कहा बरसावे मेह
तो गु भी िमल जाए तो बेकार चली जाएगी बात। एक तो िमलना कठन, िमल भी जाए
तो बेकार चली जाएगी, अगर तुम मतवाद/ हो तो।
जन दरया उपदे श दे भीतर ूेम सुधीर
सदगु तो उसी को उपदे श दे ता है जो भीतर ूेम से लेने को तैयार हो।
जन दरया उपदे श दे भीतर ूेम सुधीर
जहां अनंत ूेम भीतर लेने को, महण करने को राजी हो; जहां माहकता हो, जहां पी जाने
क# तHपरता हो। िशंय तो ऐसा चाहए जैसे ःपंज। इधर गु से बहे क वह पी जाए, सीख
लो। जैसे ःयाह/ सीख। इधर बूद
ं टपके नह/ं क वहां पी जाए।
िशंय तो Uैण होता, Uैण ह/ हो सकता है । जैसे Uी गभJ को महण कर लेती है , फर
उसके जीवन, एक नए जीवन का ज;म उसके भीतर होता है ।
जन दरया उपदे श दे भीतर ूेम सुधीर
माहक हो कोई ह/ंग का कहा दखावे ह/र
और ह/ंग खर/दने जो आए हो, उनको ह/रे बताओ इससे तो कुछ सार नह/ं; इसमG तो कुछ
अथJ नह/ं। जो ह/ंग खर/दने आया हो उसे ह/रा बताओ तो नाराज हो जाएगा। उसे ह/ंग
चाहए, उसे ह/रा नह/ं चाहए।
तो सदगु तो तभी तु]हG दे सकता है , जब तुम लेने आए हो। जब तुम ह/रा खर/दने ह/
आओ तभी ह/रा दया जा सकता है ।
मुझसे लोग पूछते ह0 क यहां सभी YयO नह/ं आने दया जाता? यहां कावट YयO है ? यहां
ह/ंग नह/ं बेची जाती। जो ह/रा लेने आया हो और जो

कसौट/ दे ता हो क ह/रा ले सकता

है , उसके िलए जगह है । यहां कुछ भीड़-भड़Yका नह/ं करना है । कोई बाजार नह/ं भरना है ।
बहत
ु दन तक म0 हजारO लोगO मG बोलता था, लाखO लोगO मG बोलता था। फर म0ने दे खा 
क वे सब ह/रे लेने वाले लोग नह/ं ह0 , ह/ंग खर/दने वाले लोग ह0 । उनसे म0 ह/रे क# बातG 
कए जा रहा हंू । िसर मारा-मार/ होती, कुछ अथJ नह/ं है । सुन भी लेते ह0 तो gयादा से
gयादा मनोरं जन है । जीवन को दांव पर लगाने क# साहस और हं मत है ह/ नह/ं। कुतूहल से
आ गए ह0 । न CजDासा है , मुम[
ु ा तो बहत
ु दरू , कुतूहलवश आ गए ह0 क दे खG Yया कहते
ह0 । क शायद मतलब क# बात िमल जाए। ऐसे ह/ चले आए ह0 । नह/ं गए िसनेमा, यहां आ
गए। क बैठकर गपशप करते, क शतरं ज खेलते, चलो सोचा क आज वह/ं बैठGगे। चलो

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आज वह/ं सुनGगे। लाखO लोगO के बीच रहकर मुझे यह पता चला क शायद थोड़े से ह/ लोग
ह/रे क# तलाश मG ह0 । इसिलए उनके िलए ह/ िनमंऽण है , जो ह/रे क# खोज को तैयार हO।
जन जरया उपदे श दे भीतर ूेम सुधीर
माहक हो कोई ह/ंग का कहां दखावे ह/र
दरया गैल जगत को Yया क#जै सुलझाए
और यह पागल दिनया
को, पूर/ पागल दिनया
को समझा-सुलझाने से भी Yया होनेवाला है ?


यह कोई सुलझनेवाली भी नह/ं, समझनेवाली भी नह/ं।
दरया गैला जगत को--पागल जगत को--Yया क#जै सुलझाए
सुलझाए सुलझे नह/ं सुलझ सुलझ उलझाए
इसको Cजतना सुलझाने क# कोिशश करो, यह और उलझ जाता है । इसको सुलझाने के िलए
जो बातG बताओ उनमG ह/ उलझ जाता है । इससे कहो, यह बात तु]हG बाहर ले आएगी; वह
बाहर तो नह/ं लाती, यह उसी बात को !वचार करने लगता है , मतवाद बना लेता है ।
इसी तरह तो उलझा। मोह]मत ने तो बात मतलब क# कह/ थी; मुसलमान बनाने को न
कह/ थी। महावीर ने तो बात सुलझने को कह/ थी; जैन बनाने को न कह/ थी। बुT ने तो
बात बाहर िनकल आने को कह/ थी, संूदाय खड़ा कर लेने को न कह/ थी। लेकन हुआ
यह। बुT ने कहा है , मेर/ मूितJ मत बनाना और बुT क# सब से gयादा मूितJयां बनी ह0
दिनया
मG। अब यह बड़े मजे बात है । इतनी मूितJयां बनीं क# क उदJ ू पिशJयन और अरबी मG

तो बुत श6द जो है , वह बुT का ह/ Mप है । इतनी मूितJयां बनीं क अरबी मुwकO मG पहली
दफा उ;हOने जब मूितJ दे खी तो बुT क# ह/ दे खी। तो बुT को उ;हOने बुत...वह/ मूितJ का
पयाJयवाची हो गया। बुत परःती का मतलब होता है बुTपरःती। और बुT Cजंदगी भर कहते
रहे , मेर/ मूितJ मत बनाना; मगर मूितJ बनी।
तो दरया ठWक कहते ह0 । दरया काफ# अनुभव क# बात कहते ह0 ।
दरया गैला जगत को Yया क#जै सुलझाए
सुलझाया सुलझे नह/ं, सुलझ-सुलझ उलझाए
यहां Cजतने सुलझाने वाले आए, उ;हOने Cजतनी बातG सुलझाने को कह/ं वे सब उलझाने का
कारण बन गX। बsचO के हाथ मG तलवार पड़ गई। खुद को भी काट िलया, दसरO
को भी

अंग-भंग कर िलया।
दरया गैला जगत को Yया क#जै समझाए
रोग नीसरे दे ह मG पHथर पूजन जाए
ये ऐसे पागल ह0 , इनको कायJ-कारण तक का होश नह/ं है । चेचक का रोग िनकल आता है
शर/र मG और जाते ह0 कसी पHथर को पूजने। काली माता को पूजने चले। इनको इतना भी
होश नह/ं है क कारण कायJ तो दे खो। शर/र मG बीमार/ है तो शर/र क# िचकHसा करो; तो
शर/र के िचकHसक के पास जाओ। पHथर को पूजने चले।
दरया गैला जगत को Yया क#जै समझाए

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इन पागलO को Yया समझाने से होगा!
रोग नीसरे दे ह मG पHथर पूजन जाए
इनको कायJ-कारण का संबध
ं तक होश मG नह/ं है । तो इनको परमतHव क# बात कहने से कुछ
अथJ नह/ं है । ये सुन भी लG तो सुनGगे नह/ं। सुन लG, समझGगे नह/ं। समझ लG, कुछ का कुछ
समझ लGगे।
कंचन कंचन ह/ सदा कांच कांच सो कांच
बड़े अपूवJ वचन ह0 । Vदय मG संभालकर रख लेना।
कंचन कंचन ह/ सदा कांच-कांच सो कांच
दरया झूठ सो झूठ है , सांच सांच सो सांच
झूठ को लाख िसT करो, िसT नह/ं होता।
मतवादO को कतना ह/ िसT करो, कुछ िसT नह/ं होता। इसिलए तो कोई मतवाद/ जीत
नह/ं पाता। सदयां बीत गई हं द ू मुसलमान से !ववाद कर रहे ह0 , कौन जीता, कौन हारा?
नाCःतक आCःतकO से !ववाद कर रहे ह0 , कौन जीता, कौन हारा? कब तक !ववाद करोगे?
िनणJय होता ह/ नह/ं।
कंचन कंचन ह/ सदा कांच कांच सो कांच
अनुभव ले जाएगा ःवणJ पर। यह कांचO को बैठे और !ववाद करते रहने से कुछ भी न होगा।
सोना सोना है , कांच कांच है ।
दरया झूठ सो झूठ है , सांच सांच सो सांच
और जो सHय है वह सHय है । सHय को िसT नह/ं करना होता, सHय को जानना होता है ,
दे खना होता है , दशJन करना होता है । सHय का दशJनशाU नह/ं बनाना होता। सHय का दशJन
होता है , आंख खोलनी होती है ।
कानO सुनी सो झूठ सब आंखO दे खी सांच
िसTांत तो कान से सुने जाते ह0 ; हं द ू तुम कैसे बने? अब सुनो। दरया कहते ह0 , कानO
सुनी सो झूठ सब। कान मत फंकवाना कसी से। कान फुंकवा िलया, हं द ू बन गए। कान
फुंकवा िलया, मुसलमान बन गए। िसTांत तो कान से सुने जाते ह0 । तुम कैसे हं द ू बने? मां
बाप से कान फूंके। मंदर मG भेजा, गीता पढ़वाई, रामायण सुनवाई, सHयनारायण क# कथा
करवाई। तुम कैसे बने हं द?
ू कान से बने। और कान से भी कह/ं कोई सHय का अनुभव
होता है ?
कानO सुनी सो झूठ सब आंखO दे खी सांच
अपनी ह/ आंख पर भरोसा करना, कसी और पर भरोसा मत कर लेना। कसी और ने दे खा
होगा, दे खा होगा। तुम जब तक न दे ख लो, तब तक क मत जाना। अपना दे खा ह/ काम
पड़े गा। oयास लगी हो तो ह/ बुझेगी। दसरे
ने कतना पानी पीया है इससे Yया होगा?

मेरे पास लोग आते ह0 , वे कहते ह0 क महावीर ःवामी ने ऐसा अनुभव कया। कया होगा,
जMर कया होगा। उनक# oयास बुझ गई इससे तु]हार/ oयास बुझती? अब तुम काहे के िलए

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शोरगुल मचा रहे हो? तुम कस बात क# डु ं ड/ पीट रहे हो? तुम ह/ पीयो। कृ ंण ने पीया
होगा तो नाचे। तु]हारे जीवन मG कह/ं नाच नह/ं दखाई पड़ता। कृ ंण क# मूितJ क# पूजा कर
रहे हो। नाचो! तु]हारे जीवन मG कुछ घटे । आंख तु]हार/ दे ख।े
कानO सुनो सो झूठ सब आंखO दे खी सांच
दरया दे खे जािनए यह कंचन यह कांच
और जब दे खोगे तभी जानोगे क Yया कंचन है और Yया कांच है । Yया असली ःवणJ और
Yया केवल पीतल। पीतल भी सोने जैसा चमकता है । लेकन सभी चमकनेवाली चीजG सोना
नह/ं होतीं। और कभी-कभी तो पीतल भी इस तरह चमकाया जा सकता है क सोने को भी
मात करता मालूम पड़े । ऐसा पािलश कया जा सकता है क दरू से धोखा दे जाए। लेकन
कर/ब आकर अनुभव से ह/ पता चलता है Yया असली, Yया नकली। आंख ह/ िनणाJयक है ।
कान िनणाJयक नह/ं हो सकता। आंख से अथJ है : अपना ह/ सा[ाHकार अपनी ह/ अनुभूित।
समःत सHपुषO ने एक बात पर ह/ जोर दया है क तुम ःवयं परमाHमा को जान सकते
हो। इसिलए YयO उधार बातO मG पड़े हो? कसी ने जाना इससे Yया होगा?
म0ने सुना है एक अंधा आदमी था, बूढ़ा हो गया था। बुढ़ापे मG ह/ अंधा हआ।
कोई अःसी

साल उसक# उॆ थी। िचकHसकO ने कहा, आंख ठWक हो सकती है । जाला है , इलाज से
ठWक हो जाएगा। आपरे शन कर दG , कट जाएगा।
लेकन बूढ़ा जो पंडत था, उसने कहा, Yया सार! अब इस बुढ़ापे मG Yया सार! साल दो
साल जीऊं या न जीऊं, Yया पता? अब इसमG कौन झंझट मG पड़े ? फर मेरे घर आंखO क#
कोई कमी नह/ं है । पंडत था, तकJवाद/ था, मतवाद/ था। डाYटर ने पूछा, Yया मतलब?
उसने कहा, मतलब साफ है । मेर/ प~ी, उसक# दो आंख, मेरे आठ लड़के ह0 , उसक# सोलह
आंख,
G आठ लड़कO क# आठ बहएं
ु ह0 उनक# सोलह आंखG। चaतीस आंखG मेर/ सेवा मG रत ह0 ।
मुझे और दो आंख हई
ु न हई
ु , Yया फकJ पड़ता है ?
डाYटर भी रह गया, YयOक Yया कहे ? बात तो ठWक ह/ कह रहा है । चaतीस आंख है क
छNीस, कतना फकJ पड़ता है ! दो आंख कम हई
ु , चaतीस आंखG सेवा मG लगी है । मगर
संयोग क# बात, कोई पंिह दन बाद घर मG आग लग गई। चaतीस आंखG बाहर िनकल गई,
बूढ़ा भीतर रह गया। तब छाती पीटकर िचwलाने लगा, लगी लपटO मG भागने लगा--इस
दरवाजे, उस दरवाजे। उसे कुछ सूझे नह/ं। भयंकर आग लगी। तब उसे याद आया क आंख
अपनी ह/ हो तो ह/ काम आती है । जो चaतीस आंखG बाहर िनकल गX, बाहर आकर उनको
याद आया क बूढ़ा पीछे छूट गया। अब Yया करG ?
मगर जब घर मG आग लगा हो तो तु]हार/ आंखG तु]हार/ पैरO को दौड़ाती है , दसरे
को पैरO

को नह/ं दौड़ा सकतीं। तु]हारे पैर तु]हार/ आंखO को लेकर बाहर हो जाते ह0 । अब आग लगी
हो तो अपनी िचंता ःवभावतः पहले होती है । जब बाहर िनकल गए--खतरे के बाहर तब उ;हG
जMर याद आई; नह/ं याद आई ऐसा भी नह/ं, याद आई क बूढ़ा तो घर मG रह गया

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dkuks lquh lks >wB lc
लेकन अब Yया करG ? अब रोने-िचwलाने लगे। बूढ़ा मरते व" जब आग मG भुना जा रहा था
तब उसे समझ मG आई। मगर यह बहत
ु दे र हो चुक# थी।
इतनी दे र तु]हG न हो, इतनी ह/ मेर/ ूाथJना है ।
कंचन कंचन ह/ सदा कांच कांच सो कांच
दरया झूठ सा झूठ है सांच सांच सो सांच
कानO सुनी सो झूठ सब आंखO दे खी सांच
दरया दे खे जािनए यह कंचन यह कांच

िनहकपट/ िनरसंक रह
ूवचन:८ 
दनांक: १८.७.१९७७
ौी रजनीश आौम, पूना

ूƒ-सार
अगर कान से सुना सब झूठ है तो फर सदगु के उपदे श का ूयोजन Yया?
समझ जीवन मG ूामाCणकता कैसे लाए?
आपसे मुलाकात होने का अनुभव--सपना है या सच?
पहला ूƒ: अगर कान से सुना सब झूठ है तो फर सदगु के उपदे श का महHव Yया रह
जाता है ?
तुम पर िनभJर है । अगर कान से ह/ सुना, बस कान से ह/ सुना तो कोई भी अथJ नह/ं है
लेकन आंख से भी सुनने का ढं ग है । सदगु को सुनो ह/ मत, दे खो।
सHसंग का अथJ होता है , सदगु क# सC;निध अनुभव करो। सदगु का ःवाद लो। जो कहा
जाता है वह तो कुछ भी नह/ं। सागर क# सतह पर उठW लहरO क# भांित है । जो नह/ं कहा
जाता, जो नह/ं कहा जा सकता है वह/ असली मोती है सागर क# गहराई मG। श6द

ह/ सुने

तो चूक गए। श6द के पीछे मौजूद है उसे दे खो तो पा िलया। श6द जहां से आते ह0 वहां सीढ़/
लगाओ। सदगु के शू;य मG उतरो। उसक# वाणी से खेलो। ूारं भ ठWक है , CखलौनO क# तरह
है । फर धीरे -धीरे Cखलौने छोड़ो। असली बात...असली बात तो सदगु क# उपCःथित है ।
असली बात तो उसका अCःतHव है उसक# सNा है । उसक# सNा के रं ग मG रं गो। असली बात
तो संगीत है उसका। जैसे बोला जाता वह तो बड़े दरू क# खबर है , ूित!बंबO का ूित!बंब है ।
जो नह/ं बोला जाता, सHय वहां !वराजमान है ।

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oshoworld.यभाग. तो बांित घट जाए। सदगु का अथJ है . कसी dय!" मG तुमने ऐसा कुछ दे खा क वहां तुम अपने को बचाना न चाहोगे। कसी dय!" के पास तुमने ऐसा कुछ दे खा क वहां तुम अपने को लुटाना चाहोगे। कसी dय!" के पास ऐसा कुछ दे खा क अगर वह लूट ले तो तु]हारा ध. सुर[ा मत करो। हम सब सुर[ा मG लगे रहते ह0 । और मजा है क बचाने को कुछ भी नह/ं और बड़/ सुर[ा मG लगे रहते ह0 । कल दरया ने कहा क हाथी तोड़ दे ता कले के Rार को। जैसा कले का Rार है . जो महण करता है . संग होना। सदगु के साथ चलो। सदगु के साथ डोलो। सदगु के िलए Vदय खोलो क उसक# करणG तु]हारे अंधकार मG ूवेश कर जाएं। यह/ मेरा अथJ है . सुना जा सकता है । सदगु को पीयो। उसके अMप को उतरने दो तु]हारे भीतर। उसके िनराकार को झनकार लेने दो तु]हारे भीतर। अवसर दो क उसका हाथ तु]हार/ वीणा पर पड़े । संकोच न करो.com . ऐसा ह/ आदमी भी है । जैसे कले के Rार पर भाले लगे होते ह0 . तुम कह/ं चल रहे हो. वह सा[ाHकार होता है । सHय और झूठ मG बहत ु फकJ नह/ं है . जब म0 कहता हंू आंखO से सुनो। बेबूझ लगेगी बात। आंखO से कह/ं सुना जाता है ? आंखO से सुना जाता है . इसिलए तो झूठ धोखा दे पाता है । अगर बहत ु फकJ होता तो सभी लोग चौक जाते। फकJ चार अंगुल का है । झूठ सच के बहत ु कर/ब है । ऐसे ह/. होना Yया है वहां? कोई अCःतHव नह/ं है छाया का। लेकन तु]हारे पैरO से सट/-सट/ चलती है । एक इं च का भी फासला नह/ं छोड़ती। ऐसा ह/ सच के साथ झूठ चलता है । Page 178 of 256 http://www. तु]हार/ छाया कह/ं चल रह/ है । तु]हार/ छाया !बलकुल झूठ है । छाया ह/ है . कानO सुनी सो झूठ सब. सHसंग का अथJ होता है साथ होना. चार अंगुल का--आंख और कान के बीच Cजतना फासला है । बस चार अंगुल का फासला है । कान लो लेता है . जैसे जब तुम धूप मG चलते हो तो तु]हार/ छाया तु]हारे बहत ु कर/ब होती है । ऐसा थोड़/ है क तु]हार/ छाया मीलO दरू चल रह/ है . Rार के पास भी न आ सके। ऐसे ह/ आदमी ने भी बड़े अ^ँय बरछे अपने चारO तरफ लगा रखे ह0 । कोई तु]हारे पास न आ सके। कोई तु]हारा Rार-दरवाजा न खोल ले। तुम बड़े भयभीत हो। तुम चौबीस घंटे अपनी सुर[ा मG लगे हो। यह/ सुर[ा छोड़ दो सदगु के पास. Cझझको मत. वह ूित!बंब होता है । आंख जो दे खती है और लेती और महण करती है .dkuks lquh lks >wB lc सHसंग का अथJ सुनना नह/ं होता. संदेह न करो. अगर तुम बचा लो तो तुम अभागे। ूƒ साथJक है . आंखO दे खी सांच। तो फर सदगु के उपदे श का Yया अथJ? फर तो दरया के इस वचन का भी Yया अथJ है ? यह भी तो सुना ह/ होगा कसी दन। नह/ं. बरछे लगे होते ह0 क कोई तोड़ न सके। तोड़ना दरू. कई के मन मG उठा होगा। दरया कहते ह0 . अथJ है । यह तु]हG चेताने क# बात है । सच और झूठ मG बहत ु फासला नह/ं है । फासला बहत ु हो भी नह/ं सकता। कसी ने इमरसन को पूछा क सच और झूठ मG कतना फासला है ? तो उसने कहा.

तुम तुम हो। फकJ Yया है ? फकJ इतना ह/ है क तु]हारे भीतर ूाण ह0 और तःवीर के भीतर ूाण नह/ं ह0 । तःवीर तु]हारे जैसी लगती है लेकन कैसे तु]हारे जैसी हो सकती है ? झूठ सच क# तःवीर है । तुमने अकसर ऐसा ह/ सोचा होगा क झूठ सच से !बलकुल !वपर/त है । !बलकुल !वपर/त होता तो झूठ धोखा ह/ न दे पाता। झूठ सच से !वपर/त नह/ं है . तुमने श6द हटाकर दे खा। तुमने अपने और संत के बीच मG श6दO क# द/वार न रखी. लगता तो है । !बलकुल सsचे िसYके जैसा लगता है । झूठ सच जैसा लगता है . झूठ मG ूाण नह/ं होते। तु]हार/ छाया का ढं ग तु]हारे जैसा ह/ होता है । Mपरे खा तु]हारे जैसे ह/ होती है । तु]हार/ तःवीर इसीिलए तो तु]हार/ कहलाती है । सब ढं ग तुम जैसा होता है । लेकन तःवीर तःवीर है . तःवीर है । आकृ ित !बलकुल सच जैसी है । सच से !बलकुल ताल-मेल खाती है । ऐसा ह/ समझो क रात चांद को दे खा झील मG. िशंय नह/ं। वह अभी ःकूली दिनया मG है । जैसे कह/ं कोई ु पर/[ा होनेवाली हो। Cजंदगी को कह/ं कोई पर/[ा होती है ? Cजंदगी तो पूर/ पर/[ा है । यहां िश[ण और पर/[ा अलग-अलग नह/ं होते। यहां तो हर घड़/ पर/[ा है । हर घड़/ िश[ण है । Page 179 of 256 http://www. बस लगता है । Mपरे खा !बलकुल सच क# ह/ होती है झूठ मG भी। एक ह/ बात क# कमी होती है . िनश6द मG दे खा. हो या न हो. कसी ने अनुभव कया. कोई जागा.dkuks lquh lks >wB lc झूठ सच क# छाया है । अगर तुम ठWक समझ पाओ तो झूठ सच क# छाया है । इसिलए तो धोखा दे पाता है नह/ं तो धोखा भी कैसे दे गा? अगर झूठ !बलकुल ह/ सच जैसा न हो.com . तुमने सीधा दे खा. झूठ है । असली चांद जैसा है । और कभी-कभी तो असली चांद से भी gयादा सुंदर मालूम होता है । झूठ खूब अपने को सजाता है । झूठ खूब आभूषण पहनता है । झूठ ह/रे -जवाहरातO मG अपने को िछपाता है । झूठ अपने आसपास ूमाण जुटाता है । झूठ सब उपाय करता है क पता न चल जाए क म0 झूठ हंू । आकाश मG चांद है वह तो सच है । झील मG जो ूित!बंब बन रहा है वह झूठ है । लेकन है वह सच का ह/ ूित!बंब। जो तुमने कान से सुना है वह भी सच का ह/ ूित!बंब है । कसी ने दे खा. वह जो झील का चांद है . अपने अनुभव को वाणी मG गुनगुनाया। तुमने वाणी कान से सुनी। यह चांद का ूित!बंब बना। तुमने कसी संत मG सीधा दे खा। उसके श6दO के माIयम से नह/ं. उसमG िलखता जाता है । उसका जोर श6द पर है । वह !वuाथx है . कुछ ह0 जो मेरे श6द को ले जाएंगे.oshoworld. संभालकर ले जाएंगे। कोई-कोई कभी आ जाता है वह अपनी कताब भी ले आता है . तब तुम चांद को दे ख पाओगे। इसिलए म0 कहता हंू . तुमने श6दO को सेतु न बनाया. उसी को हम सHसंग कहते ह0 । तुम इधर मेरे पास बैठे. तुमने श6द हटा ह/ दए. जरा भी सच जैसा भी न हो तो कौन धोखे मG पड़े गा? झूठे िसYके से तुम धोखे मG आ जाते हो YयOक वह सsचे िसYके जैसा लगता है कम से कम. सच मG ूाण होते ह0 . सच कहते ह0 दरया-कानO सुनी सो झूठ सब आंखO दे खी सांच-आंख से सुनने का ढं ग है . आड़ न रखी.

!वuाथx तरह नह/ं। कोई नाटस नह/ं लेने है । मेरे श6द को कोई कंठःथ नह/ं कर लेना है । मेरे श6द तो याद रहG न रहG . क तुम जwद/ तHपर होकर जो तुम बोझ ले आए हो.dkuks lquh lks >wB lc हर िश[ण मG पर/[ा है . तो तुम तो समझाओगे ू कैसे? तुम तो अभी खुद भी नह/ं समझे हो। मगर अsछा लगेगा। Page 180 of 256 http://www. उनका कोई मूwय नह/ं है । जब तुम दसरे को ू समझाने मG उसे िनकाल दे ते हो तब बस मलमूऽ क# तरह बाहर िनकल गया. श6द तो भूल जाएं। श6द तो ऐसा समझो. उससे तुम हwके ह/ जाओगे। इसे समझो। मुझे सुनकर तुमने श6द इकcठे कए.oshoworld. तो दसरे को Yया समझाओगे! जो ःवयं ू समझ गए ह0 वे भी बड़/ मुCँकल पाते ह0 दसरे को समझाने मG. वह तुम पचा लेते हो और जो असार है वह मलमूऽ मG बाहर िनकल जाता है । श6द तो असार ह0 . वह श6द संभालकर ले जाता है । उसक# ःमृित मG थोड़/ बढ़ती हो जाती है । उसक# जानकार/ थोड़/ बढ़ जाती है । वह थोड़/ और इ.com . े क बाजार मG छुपी हई ु कुंCजयां खर/द लोगे। ये कुरान और वेद और गुमंथ और बाइबल कुंCजयां ह0 . रटे -रटाए उNर काम आ जाएंग. उसका कोई ूयोजन ह/ नह/ं है । श6दO के भीतर जो रस डाल रहा हंू उस रस क# बूंद तु]हारे कंठ मG उतर जाए. क वहां उNर दे ने पड़G गे. इनसे काम न चलेगा। तुमने अगर नानक के श6द दोहराए तो तुम झूठ हो गए। तुम अगर नानक हो गए तो सच हो गए। तुमने अगर कबीर के श6द दोहराए. हर पर/[ा मG िश[ण है । यहां तो सब िमला-जुला है । ऐसा थोड़े ह/ है क एक दन जब तुम अःसी साल के हो जाओगे तो कोई पर/[ा मG बैठोगे क अब जीवन क# पर/[ा हो रह/ है . उसमG उं डे ल दोगे। उड़े लकर तु]हG अsछा भी लगेगा लेकन अsछा इसिलए नह/ं लग रहा है क तुम दसरे को समझाने मG ू सफल हो गए। समझे तो तुम खुद ह/ नह/ं हो. !बलकुल अ[रशः दोहराए तो झूठ हो गए। तुम कबीर हो गए तो सच हो गए। फर तुमसे भी वैसे ह/ श6द िनकलने लगGगे जैसे कबीर से िनकले। मगर फकJ बड़ा होगा। अब यह तु]हारे अपने अनुभव से िनकलते हOगे। अब तु]हारा अपना झरना खुल गया है । अब ये तु]हारे हOगे। ूामाCणक Mप से तु]हारा ूाण इनके भीतर धड़कता होगा। ये मुदाJ नह/ं हOगे। तो कोई यहां आता है !वuाथx क# तरह. मन भार/ हो गया YयOक वे श6द इकcठे हो गए। अब तुम जwद/ तलाश मG रहोगे क कोई िमल जाए अDानी तो उसमG उं डे ल दं ।ू अब तुम जwद/ खोज करोगे। कोई भी बहाना िमल जाए। कोई कसी बात को कह/ं उठा दे .फमpशन इकcठW कर लेता है । वह थोड़ा और पंडत हो जाता है । वह दसरO को समझाने मG थोड़ा और ू कुशल हो जाएगा। दसरO को समझाने मG--याद रखना। खुद तो चूक ह/ गया। ू और अकसर ऐसा होता है क जब तुम दसरे को समझाने मG कुशल हो जाते हो तो तुम ू समझते हो क म0 समझ गया। बात ठWक उलट/ है । दसरO को समझाने मG कुशल हो जाने से ू तु]हारे समझने का कोई संबध ं नह/ं है । तु]हार/ समझ और ह/ बात है । तु]हG अगर समझना है तो िशंय क# तरह. खोल है । असली बात भीतर है । खोल को तो फGक दे ना। असली को आHमसात कर लेना। भोजन करते ह0 ना! तो जो सार-सार है .

उसमG तुम लाख उपाय करो तो न डू ब सकोगे। िनश6द मG डू बता है कोई। तो एक तो है जो अपनी ःमृित को थोड़ा सा बढ़ाकर. दसरा अDानी। इन दो बातO के कारण मजा आ जाता है । उस मजे को तुम समझ ू मत समझ लेना। और उसे मजे से तु]हारे जीवन मG कोई बांित घटत न होगी. उसमG सार है । !वराट को बांधोगे भी कैसे श6दO मG? श6द बड़े छोटे ह0 । यह तो चमचO मG सागर को समाने क# कोिशश है । सागर च]मचO मG नह/ं समाता। और जो च]मच मG समा जाता है उसका ःवाद अगर सागर का भी हो.oshoworld. आनंद के Rार न खुलGगे। !वuाथx होकर जो आया है . उसका बोझ बढ़ता जाता है । इसिलए लोग बात को गुm नह/ं रख पाते। बड़ा मुCँकल है बात को गुm रखना। मन उसे फGक दे ना चाहता है । ये फGकने क# तरक#बG ह0 । अब तुम दसरे से बात करते हो. इससे मन का कचरा थोड़ा कम हआ। ू ु दसरे का बढ़ा. कृ पा करके कसी और को मत कहना। तब बड़/ मुCँकल हो जाती है । वह िनकल िनकल आती है . वह/ सागर है । श6द मG कैसे डू बोगे? वह तो चुwलूभर पानी मG डू ब मरने जैसा है । श6द मG कभी कोई डू बा है ? श6द इतना छोटा है . जबान पर आ-आ जाती है बात। अब उसे संभालो. िनश6द सार है । शू. नह/ं बोला जा सकता जो. वह कचरा बीनकर ले जाएगा। सार-सार छोड़ दे गा. वे कोई भी वहां नह/ं ह0 । और सबसे बड़/ बात तो यह थी क CजसमG तुम डू ब जाओ वह/ सHय है . तुम नह/ं जानते। म0 Dानी. तब तु]हारे अहं कार को बड़/ तृिm िमलती है । तो कोई भी बात के Rारा तुम सदा िसT करने क# कोिशश मG लगे रहते हो--म0 Dानी. और दसरा अsछा लगता है Dानी होने का अहं कार ू क दे खो. ःवाद से धोखा मत खा जाना। सागर के और भी गुण ह0 ःवाद के अितर". वह जाने। वह कसी और पर फGकेगा। तु]हारा तो कम हआ। तुम तो िनभाJर ू ु हए। ु तो एक तो अsछा लगता है िनभाJर होना. यह कह तो रहे ह0 आपसे. उनका ःवाद तो नमक का है . तो भी वह सागर नह/ं है । उसमG तूफान नह/ं उठा। उसमG बड़/ तरं गG नह/ं आएंगी। उसमG जहाज नह/ं चलGगे। उसमG मछिलयां नह/ं उठG गी। उसमG तुम डू ब न सकोगे। तो माना क च]मच मG जो भर आया है --दो चार दस बूद ं सागर क#.य सार है .dkuks lquh lks >wB lc अsछा दो कारण से लगेगा--एक तो बोझ हwका हआ। इसीिलए तो लोग कसी बात को गुm ु नह/ं रख पाते। गुm रखने मG बड़ा बोझ हो जाता है । कसी ने तुमसे कह दया. फर संभालकर भीतर रखो. वह चूक गया। जो यहां से पंडत होकर गया वह चूक गया। लाभ क# जगह हािन हो गई। उसने और थोड़ा उपिव अपने जीवन मG बढ़ा िलया. मौन सार है । नह/ं बोला गया. नमक#न भी हो.com . असार-असार पकड़ लेगा। श6द असार है . तुम अDानी। जब भी तुम कसी आदमी को अDानी िसT कर पाते हो कसी भी कुशलता से. कम न कया। Page 181 of 256 http://www. म0 जानता. अपने Dान को थोड़ा बढ़ाकर. इससे हwकापन आता है . पांडHय के तराजू पर थोड़/ और गरमा रखकर चला जाएगा.

फकJ नह/ं है बहत। मुझे सुनकर तुम दसरे को समझा पाओगे ू ु इससे कुछ हल न होगा। तुम नाहक ह/ पोःटमैन बन गए। इसे तो भूल ह/ जाओ। असली बात तो ःवयं समझना है । और ःवयं समझने का ूमाण Yया है । ूामाCणकता का पैदा हो Page 182 of 256 http://www.निध मG डू बो। दसरा ूƒ: आपको ूेमपूवक J समझ पाता हंू . जो कानO से मुझसे नह/ं जुड़ रहा है . तुम पोःटमैन बन गए। िचCcठयां संभालीं और दे आए दसरO को। पोःटमैन के हाथ तो कुछ भी नह/ं पड़ता। पोःटमैन को यहां से वहां ू िचCcठयां ले जाता रहता है । इन िचCcठयO मG कई बहमू ु wय होती ह0 । इसमG मनीआडJ र भी होते ह0 . बांट आता है । पोःटमैन के हाथ कुछ भी नह/ं पड़ता। न तो ूेम पऽO का ूेम पड़ता है . इनमG धन भी िछपा होता है . फर वह/ समझ ू जीवन मG ूामाCणकता आथे. अपने झोले मG। एक जगह से लाद लेता है . औरO को समझ भी पाता हंू . कानO सुनी सो झूठ सब आंखO दे खी सांच। Cजस दन तुम गु को ठWक से दे खने लगोगे उस दन तुम दो बातG जानोगे: जीना भी आ गया मुझे और मरना भी आ गया पहचानने लगा हंू अब तु]हार/ नजर को म0 गु के साथ होने का अथJ है .ट/िसट/ लाने मG सहायक YयO नह/ं हो पाती है ? क Cजसके न होने क# वजह से सतत अंदर और बाहर !वघटन बना रहता है । कहां भूल हई ु जा रह/ है ? कृ पा कर ^!_ दG । पहली तो बात दसरO को समझा पाते हो. वह/ कुछ पा सकेगा--केवल वह/। इसके िलए कहता हंू कान से सुनना बस सुनना माऽ है । आंख से सुनना असली बात है । गु को पीओ। गु पर आंखG टकाओ। गु क# रोशनी तु]हार/ आंख क# रोशनी बने। गु का ूेम तु]हार/ आंख से उतरे और तु]हारे Vदय को भरे । तो दरया ठWक ह/ कहते ह0 .oshoworld.dkuks lquh lks >wB lc जो यहां िशंय क# तरह आया है . राख कर डाला। नकली को तो सूली पर चढ़ा दया। असली को िसंहासन पर !बठा दया। जीवन भी आ गया मुझे और मरना भी आ गया पहचानने लगा हंू अब तु]हार/ नजर को म0 नजर को पहचानो। आंख को पहचानो। गु के अCःतHव से जुड़ो। गु क# सC. इसमG ूेम भी िछपा होता है । मगर पोःटमैन तो लादता अपने बःते मG. न धन का एक कण पड़ता है . कुछ भी नह/ं पड़ता। तो पोःटमैन बनो क ूोफेसर.com . इसे समझने का सूऽ मत समझ लेना। यह काफ# ू नह/ं है । इससे तृm मन को जाना। यह दसरO को समझाना तो ऐसे ह/ है जैसे क पोःटमैन ू लाकर िचCcठयां दे जाता है । मुझे सुना. आंखO से जुड़ रहा है . जो दे खने आया है . जो अनुभव करने आया है . Cजसे श6दO मG अब कोई रस नह/ं है . जो मेरे साथ अDान क# याऽा पर जाने को तैयार है . जीना भी आ गया और मरना भी। अहं कार के तल पर िमटने क# कला आ गई और आHमा के तल पर जीने क# कला आ गई। असली मG जीने का सूऽ पकड़ मG आ गया और नकलो मG मरने का सूऽ पकड़ मG आ गया। नकली क# तो िचता बना ली। नकली को तो जला दया. दसर/ जगह जाकर उतार दे ता ू है .

तु]हारा पित है . न कोई प~ी है । अब अगर इसको समझकर तुम आए और बोले क समझ मG तो आ गया.dkuks lquh lks >wB lc जाना ह/ ूमाण है । अगर तुमने मुझे ठWक से सुना तो सुनते-सुनते ह/ तु]हारे भीतर बांित हो जाएगी। इसे अलग से करने क# जMरत पड़े तो समझना क सुना नह/ं. दो और दो चार होते ह0 । तुमने सुना। Yया तुम अब यह पूछोगे क अभी म0 Yया कMं क दो और दो चार हो जाएं? YयOक म0 तो दो और दो पांच जोड़ता रहा हंू । तुम यह पूछोगे ह/ नह/ं। तुमने सुना. सHय मु" करता है । सHय को सुन लेने से ह/ मु!" हो जाती है । तुम दो और दो पांच जोड़ रहे थे अब तक. सदगु को सुनकर तुमने समझा क कौन प~ी.oshoworld. समझा क दो और दो चार होते ह0 . आटा पीसकर लोगO के बतJन मांजकर बsचO Page 183 of 256 http://www.शYट. दो और दो चार होते ह0 . कौन पित? यहां कौन कसका? फर तुम थोड़/ पूछने आते हो क अब म0 कैसे प~ी को छोडू ं ? अगर पूछने आओगे क कैसे प~ी को छोडू ं और कैसे इसे जीवन मG लाऊं तो तुम समझे ह/ नह/ं। सदगु ने तो िसफJ इतना कहा था. समझ क# भूल है । ऐसा समझो. आज हो गए? कल तलाक ले सकते ह0 .com . तुम Cजसको प~ी कह रहे हो. इससे कुछ फकJ पड़ता नह/ं। तु]हारे मानने से कुछ फकJ नह/ं पड़ता। न कोई पित है . CUयां भी आतीं। एक दन रामतीथJ क# प~ी िमलने आ गई दरू पंजाब से। वषr उसे छोड़े हो गए। रामतीथJ छोड़कर चले गए तो प~ी को बड़/ तकलीफ थी। बsचे. ःवामी रामतीथJ अमर/का से लौटे । उनके िशंय थे सरदार पूणिJ संह। तो दोनO हमालय मG कुछ दन के िलए रहने के िलए गए। टहर/ गढ़वाल का नरे श उनका भ" था और उसने उनके िलए दरू पहाड़ पर इं तजाम कर दया। सरदार पूणिJ संह उनके सिचव का काम भी कर दे ते थे। कोई आता तो िमला-जुला दे ते. िचcठW-पऽी िलख दे ते। अनेक लोग आते। पुष भी आते. फर म0ने तु]हG कहा. िसफJ तु]हार/ भूल थी। संसार माऽ गCणत क# भूल है . अब कैसे प~ी से छुटकारा हो? तो समझ मG आया ह/ नह/ं। YयOक अब कससे छुटकारा मांग रहे हो? जो तु]हार/ कभी थी ह/ नह/ं उससे छुटकारा कैसे मांगोगे? जानने मG छुटकारा हो गया। अब भागना थोड़े ह/ पड़े गा क यह मेर/ प~ी नह/ं है तो भागू!ं सुना है म0ने. दो और दो पां च नह/ं होते. फर नह/ं हो सकते ह0 । तो यह होना तो केवल एक तरह का एमीमGट. एक तरह का का. एक तरह का समझौता है . बेपढ़/-िलखी Uी! कसी तरफ चYक# चलाकर. दो और दो पांच नह/ं होते। तुम लाख मानो क यह तु]हार/ प~ी है . एक तरह क# कानूनी बात है । अCःतHव मG इसका कोई अथJ नह/ं है । अCःतHव मG न कोई पित है . चूक गए। सHय क# यह/ तो गरमा है क अगर तुम समझ लो तो समझते ह/ मु" हो जाते हो। जीसस ने कहा है . बस दो और दो चार हो गए। दो और दो चार होते ह/ थे। तुम जब दो और दो पांच कर रहे थे तब भी दो और दो चार ह/ होते थे। तु]हारे कए से पांच नह/ं हो रहे थे। इसिलए अब कुछ करना थोड़े ह/ है ! वह तो चार थे ह/. न कोई प~ी है । सुनते ह/ समझ मG नह/ं आती बात क कौन प~ी कौन पित? धारणा है । सात फेरे लगा िलए तो पित प~ी हो गए? एक दन तो पित प~ी नह/ं थे.

कोई बेटा नह/ं. नमःकार हो गई। कोई ःटे शन चला गया.com . ू पड़ोसी भी िनकला. शायद अभी म0 असली सं.हOने गैरक वU छोड़ दए। सरदार पूणिJ संह ने पूछा.हG इतनी पीड़ा हई ु .. दोनO राःते पर िमल गए। पड़ोसी को बाजार जाना है . े अपनी अपनी याऽा पर फर िनकल जाएंगे। दो घड़/ के िलए साथ हो िलए ह0 । दो घड़/ के िलए संगी हो गए ह0 । दो घड़/ सुख-दख ु मG मैऽी बना ली है । लेकन भूल जाने क# कोई जMरत नह/ं है क जwद/ ह/ राःते अलग हो जाएंगे। प~ी मरे गी तो पित नह/ं मरे गा। पित मरे गा तो प~ी नह/ं मरे गी। जwद/ से राःते अलग हो जाएंगे। तो हमार/ याऽा तो dय!"गत है .. ऐसी खबरG उसके गांव तक आती होगी तो वह उनका दशJन करने आई। दशJन करने आने के िलए पैसा भी नह/ं था. क सरदार पूणिJ संह ने िलखा है क वे बहत ु रोए। प~ी को बुलाया. फर !बछड़ जाएंगे। अलग-अलग राःते आ जाएंग. कसी से आपने कभी नह/ं िमलना चाहता हंू ऐसा नह/ं कहा। आपक# प~ी का Yया कसूर है ? Yया आप उसे अब भी अपनी प~ी मानते ह0 ? तब रामतीथJ को समझ आई। तो गCणत के ूोफेसर थे रामतीथJ.हOने कहा. इतने पुष आते ह0 .dkuks lquh lks >wB lc का पालन-पोषण कर रह/ थी। सुना क रामतीथJ वा!पस लौट आए है तो दशJन करने आई। लोग बड़/ ूशंसा करते ह0 . इतनी पीड़ा हई ु . म0 तो यह/ समझ बैठा था क सब पा िलया। इस छोट/-सी घटना ने सब उघाड़ दया। Page 184 of 256 http://www. यह आपने Yया कया? आप सफेद कपड़े YयO पहनने लगे? तो उ.रोकने क# चे_ा कर रहा हंू वह तो बड़/ ॅांित क# है । इसका अथJ है म0 अभी तक समझा नह/ं। उ.हOने तो कहा तो फर िनणJय हो जाए। अगर आप अपनी प~ी से नह/ं िमलना चाहते तो मुझे भी छुcट/ दG । म0 भी चला। बात ह/ खतम हो गई। इतनी CUयां आती ह0 . लोग बड़/ खबर लाते ह0 । अमर/का मG बड़ा ूभाव पड़ा है . कोई मां नह/ं। यहां सब संबंध नद/-नाव संयोग ह0 । राःते पर िमल गए ह0 . दरवाजा बंद कर दो। और इसको कसी तरह समझा-बुझाकर भेज दे ना। म0 िमलना नह/ं चाहता। सरदार पूणिJ संह को तो बड़/ चोट लगी। उ.oshoworld. तु]हG ःटे शन जाना है । थोड़/ दरू तक साथ रहा। चौराहा आया. कोई बाजार चला गया। बात खतम हो गई। बस ऐसा ह/ है जीवन क# इस अनंत याऽा पर। जब सरदार पूणिJ संह ने यह कह कहा तो रामतीथJ को बड़/ चोट लगी और होश भी आया क बात तो सच है । जब म0ने यह समझ ह/ िलया क मेर/ कोई प~ी नह/ं तो आज म0 उसे रोककर जो. िनजी है । दसरे से संग-साथ तो राःते पर िमल गए। तुम घर से िनकले. वह भी उसने आसपास के लोगO से उधार मांगा क चुका दं ग ू ी धीरे -धीरे करके। जब वह िमलने आई और रामतीथJ ने दे खा क प~ी आ रह/ है अपनी कोठW पर से.यासी नह/ं। शायद म0 अभी यो5य पाऽ नह/ं गैरक वUO का। तुमने मुझे चेताया। तुमने मुझे ठWक चेताया। अsछा कया तुमने चोट क#। तुमने मेरे दं भ को खूब िगराया. कोई पित नह/ं.हOने सरदार पूणिJ संह को कहा क मेर/ प~ी आ रह/ है . उनको बात समझ मG आ गई क दो और दो जब चार हो गए तो अब म0 पांच कस हसाब से मान रहा हंू ? जब एक दफा समझ िलया क कोई प~ी नह/ं. तो उ. िमले। बड़े भाव से िमले। और उसी दन से उ.

Cजनके Vदय मG कोई ूेम क# तरं ग नह/ं। वे चूक जाते ह0 । फर कुछ लोग ह0 जो ूेम से सुनते ह0 लेकन समझ का अभाव है । बोध नह/ं है । मगन हारक सुनते ह0 . उसक# झनक. बड़/ ौTा चाहए। अपूवJ ौTा हो तो ह/ यह संपदा तु]हार/ हो सकेगी। तो कुछ लोग ह0 जो बु!T से सुनते ह0 . तभी साथJक ह0 । ऐसी !वनॆता साधु का ल[ण है । तो सवाल यह नह/ं है क तुम दसरे को समझा सको। सवाल यह है क तुम ःवयं समझ ू सको। और ःवयं अगर समझ लो तो फर यह ूƒ नह/ं उठता क अब म0 ूामाCणक कैसे होऊं? समझ अगर ठWक-ठWक बैठ गई तो ूामाCणक तुम हो गए। ूामाCणक होना परणाम मG हो जाएगा। पूछा तुमने.com . डू ब जाते ह0 मगर CजसमG डू ब रहे ह0 वह Yया है. उस दन से गैरक वU न पहने। उस दन से सफेद वU ह/ पहनने लगे। YयO? क म0 इनके शायद अभी यो5य नह/ं। ये वU तो अC5न के रं ग के वU ह0 । ये वU तो जब सार/ नासमझी चली जाए. आपको-ूेमपूवक J समझा पाता हंू । अब दो बातG ह0 । कुछ लोग ह0 जो यहां आते ह0 . ःवीकार कर िलया। न केवल ःवीकार कर िलया. उसक# भनक अंकत होती चली जाए तु]हार/ बु!T मG भी। तो ह/ तुम दसरे को समझाने मG सफल हो ू पाओगे। इसिलए बहत ु लोग Dान को उपल6ध हो जाते ह0 लेकन सभी लोग सदगु नह/ं हो पाते ह0 । Dान को उपल6ध हो जाना एक बात है । तुमने जान िलया. तुमने अनुभव कर िलया तुम डु बक# मार गए। मगर तुम चुप हो जाओगे। तुम मौन हो जाओगे। तुम बोल भी न पाओगे YयOक जब तुमने डु बक# मार/ तब तुमने िसफJ Vदय से मार ली। और Vदय बोलता नह/ं। Vदय तो चुप है । Vदय समझा नह/ं सकता। Vदय समझ तो लेता है लेकन समझाने मG असमथJ है । अब एक फकJ को खयाल मG लेना। बु!T न भी समझे तो भी समझाने मG समथJ है और Vदय समझ भी ले तो समझाने मG समथJ नह/ं है । और सदगु तो वह/ बन सकता है Cजसका Vदय Page 185 of 256 http://www. इसका सा[ीभाव नह/ं है । तो उनके जीवन मG बांित तो हो जाएगी डू बने से लेकन वे कसी दसरे को समझाने मG कभी ू सफल नह/ं हो पाएंगे। उनके भीतर Mपांतरण तो हो जाएगा। वे परम िशंय तो बन जाएंगे लेकन कभी गु न बन पाएंगे। गु होने के िलए दो बातG जMर/ ह0 । िशंय जब तुम थे तब ूेम से सुना हो और समझ और सा[ी से भी। इधर Vदयपूवक J सुना हो और उधर पूर/ ूितभा को.oshoworld.dkuks lquh lks >wB lc वे आदमी बड़े सरल थे। दं भी होते तो सरदार पूणJिसंह को िनकालकर बाहर करते क तू िशंय होकर गु को चेताने चला? पहले खुद तो चेत! दं भी होते तो जो कर रहे थे उसको िसT करने के िलए सब तरह का तकJजाल खड़ा करते। नह/ं. नह/ं तो नह/ं समझ आएंगी। इन बातG को समझने के िलए बड़/ सहानुभूित. उनका मुझसे कोई ूेम नह/ं है । समझदार लोग ह0 । समझने क# चे_ा करते ह0 लेकन ूेम न होने क# वजह से चूक जाते ह0 । ये बातG ऐसी ह0 क ूेम मG पगे होकर सुनोगे तो ह/ समझ मG आएंगी. बु!T को जगाकर रखा हो तो जो तु]हारे Vदय मG घटता हो वह िसफJ Vदय मG ह/ न घटे .

वय घटत हो. औरO को समझा पाता हंू .dkuks lquh lks >wB lc और Cजसक# बु!T एक संतुलन मG आ जाए। Cजसके भीतर यह परम सम. समझ नह/ं। यह जानकार/ है . फर वह/ समझ जीवन मG ूामाCणकता लाने मG सहायक YयO नह/ं हो पाती है ? यह समझ समझ नह/ं है । यह समझ का धोखा है । यह समझदार/ है . जो तु]हारे जीवन मG नह/ं उमगा? जो फूल तु]हारे जीवन मG नह/ं Cखला उसक# सुगंध क# चचाJ करके कसको समझाओगे? बात मG से बात िनकलती जाएगी। न सुगंध तु]हारे पास थी. समझ समझकर और उलझ जाता है । Cजतना सुलझाओ उतना सुलझ जाता Page 186 of 256 http://www. लेकन बोध नह/ं है .com . इसी [ण से दो और दो चार होने लगे। फर दो और दो पांच दबारा ु न हOगे। आपको ूेमपूवक J समझ पाता हंू .यीिसस घटत हो। Cजसक# ूितभा और Cजसका ूेम समतोल हो। तुम कहते हो. बड़ा हताश होगा। लेकन म0 जाकर ह/ ये बातG कह रहा हंू । तु]हG हताश और उदास करना जMर/ है ताक तु]हG झटका लगे। नह/ं तो तुम इसी रO मG बहते चले गए तो तुम मुझसे चूक ह/ जाओगे। तुम पहले इस ह/रे को अपने भीतर डु बा लो। तुम पहले इस करण को अपने भीतर उतार लो। जwद/ न करो। कसको समझाना है ? कससे Yया लेना-दे ना है ? जब तु]हारे फूल CखलGगे तो सुगंध दसरO तक पहंु च जाएगी। पहंु ची तो ठWक.इसिलए समझ नह/ं हो सकती। और तु]हारा ूेम भी तु]हार/ धारणा है । अगर यह ूेम वःतुतः हो तो कम से कम तु]हारे काम आ जाए। अभी तु]हारे काम बात नह/ं आ रह/ तुम दसरO को समझा पाते हो। तुम कुशल हो गCणत मG. न सुननेवाले को िमलेगी। और सुननेवाला कसी और को समझाएगा। ऐसे सदयO तक रोग के क#टाणु फैलते चले जाते ह0 । इसे रोको। दसरे को समझाने क# तब तक चे_ा ह/ मत करना. जब तक तु]हG समझ मG नह/ं आ गया। ू और तु]हG समझ आने का ूमाण Yया है ? तु]हG समझ मG आने का ूमाण यह/ है क जब तुम मुझे सुन रहे हो. सुनते ह/ तH[ण कोई बात क# चोट पड़G और तु]हG दख जाए। !बजली कaधे और तु]हG दख जाए क हां. ऐसा है । ऐसा ह/ है । और उस ऐसे ह/ है के अनुभव मG तु]हारा जीवन कल से दसरा हो जाएगा। फर कल से दो और दो चार होने लगे। ू कल से YयO. आपको ूेमपूवक J समझ पाता हंू । तु]हार/ समझ तु]हारे काम नह/ं आ रह/. न पहंु ची तो ठWक। यह तु]हारा कुछ कतJdय नह/ं ू है क पहंु चनी ह/ चाहए। सुना नह/ं? दरया कहते ह0 क इस पागल संसार को समझाने से Yया होगा? यह तो कतना ह/ समझाओ. बुTHव नह/ं है । तु]हG मेर/ बातG चोट करG गी। तुम थोड़े बेचैन होओगे। YयOक म0 यह कह रहा हंू क तु]हारे भीतर अभी जो ूेम है वह भी मन क# धारणा है । और तुम Cजसे समझ समझ रहे हो वह केवल श6दO का खेल है । िनCvत तु]हारा मन बड़ा उदास होगा. यह िस.oshoworld. अभी से. !वRता होगी. तकJ मG। तुम िनंणात हो भाषा मG। तो ू तुम दसरे को समझा पाते हो। मगर दसरे को समझाने से Yया होगा? और कैसे तुम दसरे ू ू ू को समझाओगे जो तु]हारे जीवन मG नह/ं जला. Dान नह/ं। इसमG बोध नह/ं है । बु!T होगी बहत ु .

तो असली कैसे लगाऊं! मगर तुम लगाने क# बात पकड़े ह/ हए ु हो। तुम कहते हो लगाऊंगा तो ह/। चलो. म0 असली चेहरा कैसे लगाऊं? असली चेहरा लगाया नह/ं जाता। असली चेहरा तो है ह/। नकली चेहरे लगाए जाते ह0 । तो तुम जो भी लगाओगे वह नकली होगा। जो लगाया जा सकता है वह नकली होगा। तो यह तो पूछो मत क ठWक. ठWक। लेकन पहले पYका पता कर लो क मुझे िमला। अपनी सार/ श!" िनयोCजत कर दो समझने मG। ूामाCणकता सुनकर पैदा नह/ं होती। कान से सुनकर पैदा नह/ं होती। ूामाCणकता का अथJ होता है .dkuks lquh lks >wB lc है । यह संसार पागल है । तुम पागलO को समझाने मG िसर न फोड़ो। तुम इतना ह/ करो क अपने पागलपन के बाहर आ जाओ। तु]हारा पागलपन के बाहर आ जाना ह/ तु]हारे Rारा होनेवाली बड़/ से बड़/ सेवा है । फर जो भी तु]हारे पास पड़ जाएगा. तु]हारा संगीत िमलेगा। उसके भीतर क# वीणा कं!पत होगी। उसके नासापुट भी कसी अिनवJचनीय सुगंध से भरG गे। वह भी शायद अनंत क# याऽा पर िनकलने को CजDासु हो जाए। पर समझाने का गोरखधंधा मत करो। तुम पहले खुद ह/ पा लो। उस पाने से अगर कुछ कसी को समझाना िनकलता हो. Cजसके पास मौिलक चेहरा है --वह/ जो परमाHमा ने उसे दया. अलग भी करना चाहो तो न अलग कर सकोगे वह/ असली है । Cजसको हम कभी नह/ं चूकते और Cजसको हम कभी नह/ं खोते और Cजससे हम कभी नह/ं अलग होते वह/ असली है . और Cजसके चेहरे पर कोई मुखौटे नह/ं ह0 . वह/ जो उसका अपना है । बस. फर हाथ क जाएंगे नकली को लगाने से। कृ ंणमूितJ कहते ह0 . Cजसने नकली को नकली क# तरह दे ख िलया उनको असली उपल6ध हो जाता है । असार को असार क# तरह दे ख लेना सार को पा लेना है । अंधेरे को अंधेरे क# तरह पहचान लेना बस पयाJm है रोशनी क# तरफ जाने के िलए। Page 187 of 256 http://www. अनेक-अनेक खंडO मG बंट/ हई ु धारा नह/ं है . साधु का ल[ण बताया क बाहर-भीतर एक। जैसा भीतर. िनज पर ह/ Cजसका भरोसा है । यह ूामाCणकता है । लेकन यह ूामाCणकता कैसे पैदा हो? तुमने अगर इसको कैसे से जोड़ा तो अड़चन मG पड़ जाओगे। YयOक ूामाCणकता तु]हारे पैदा करने क# बात ह/ नह/ं। तुम जो भी पैदा करोगे वह अूामाCणक होगा। अब इसे खूब संभालकर Vदय मG रख लो। तुम जो भी पैदा करोगे वह अूामाCणक होगा। तुम पैदा करोगे वह ूामाCणक कैसे हो सकता है ? ूामाCणक तो परमाHमा पैदा कर चुका है । तुम पूछते हो. वैसा बाहर। Cजसके भीतर बहत ु -बहत ु परत नह/ं. असली लगाएंगे। मगर असली लगाया जाता है ? असली तो वह/ है जो तु]हारे !बना लगाए लगा हआ है । तुम Cजसे ु िनकालना भी चाहो.oshoworld. Cजसके भीतर एक ह/ धारा है .com . अब नकली चेहरा लगाऊंगा नह/ं. बाहर-भीतर एक। जैसा दरया ने कहा. Cजसके भीतर बहत ु मन नह/ं. वह/ ूामाCणक है । तो करना Yया है ? िसफJ नकली को दे ख लेना है क नकली है । बस. नकली न लगाएंगे. Cजसके भीतर बहत ु ःवर नह/ं है . जो भी कभी जानेअनजाने तु]हारे पास से गुजर जाएगा उसको तु]हार/ सुगध ं िमलेगी. भीड़ नह/ं है .

नकली के साथ ू जाए। और कैसे नकली के साथ आस!" टटे ू गी? आस!" है तु]हार/ जो आस!" है वह टट ू जाए। और कैसे नकली के साथ आस!" टटे ू गी? आस!" YयO है ? YयOक तुम वह टट नकली को असली मानते हो। ू Cजस दन नकली नकली दख जाए उसी दन आस!" टट जाती है । ु तुम एक पHथर का टकड़ा ह/रा मानकर अपनी ितजोर/ मG संभालकर रखे थे। सोचते थे ह/रा है । परख तो थी नह/ं ह/रे ह/। पारखी तो तुम थे नह/ं. सांच Yया है । फर एक दन आए. कसका है . क चोर/ इHयाद क# झंझट खड़/ हो क कहां से लाए. तो तुम पहचानने लगे क कांच Yया है . ु अपनी ितजोड़/ खोली. जो तु]हारा है वह उभरकर ऊपर आ गया। नकली क#. चे_ा माऽ अूामाCणकता मG ले जाती है । ूामाCणकता साधी नह/ं जाती। ूामाCणकता तो तुम जब सब साधना छोड़ दे ते हो तब जो बच रहती है . छोड़ोगे कैसे? अगर कांच का टकड़ा दखाई पड़ गया तो बात खतम हो गई। अब पूछना Yया है ? कससे पूछना है ? तुम एक [ण भी यहां वहां न जाओगे। बsचO को दे दोगे क खेलो। ितजोड़/ बंद करके सोचोगे. कोई !विध-!वधान नह/ं होता। वह तो हो ह/ चुका है । वह तो तुम लेकर ह/ आए हो। असली चेहरा तो तुम मां के पेट से लेकर आए थे। उसके िलए कसी ःकूल कसी !वuालय. कोई शोभायाऽा िनकालनी पड़े गी? डु ं ड/ !पटवाओगे. कहां इतने दन तक कचरे को ितजोड़/ मG रखG रहG ! बात खतम हो ह/ गई। Cजस दन तु]हG कांच-कांच क तरह दख गया उस दन बात खतम हो गई। Page 188 of 256 http://www.dkuks lquh lks >wB lc तो तुम ूामाCणक होने क# चे_ा मत करना. गांव को िनमंऽण करना होगा? इसके Hयाग के िलए कोई जुलस ू . वह/ं ह0 । ूामाCणकता घटती है . बात खतम हो गई। अब तुम कससे पूछने जाओगे क ह/रे को कैसे छोड़G ? अगर तुम पूछते हो ह/रे को कैसे छोड़G तो अभी ितजोड़/ मG संभालकर रख ु लो। अभी ह/रा है . जौहर/ तो तुम थे नह/ं। राःते पर पड़ा िमल गया था. अखबार मG खबरG छपवाओगे क एक ह/रे का Hयाग कर रहे ह0 ? यह कांच का टकड़ा ु है . चमकता था तो तुमने सोचा ह/रा है । तो तुमने संभालकर रख िलया। डर के मारे कसी को बताया भी नह/ं क कह/ं पता चल जाए. कसी !वuापीठ क# कोई जMरत नह/ं है । तुमने जो सीख िलया उसे अनसीखा हो जाने दो। और तुम अचानक पाओगे. दे खा उठाकर वह कांच का टकड़ा था। अब इसका Hयाग करने के िलए कुछ आयोजन करना होगा? इसको छोड़ने के िलए कोई जलसा. कैसे परखता है ह/रे को! असली ह/रे क# परख Yया है ! धीरे -धीरे जौहर/ क# दकान पर ु ु बैठते-बैठते तुमको भी समझ मG आने लगा क असली Yया.com .oshoworld. नकली Yया. कांच के टकड़े Yया ह0 । तुमको भी समझ मG आने लगा। जो दरया कहते ह0 कांच-कांच सो कांच. सांच सांच सो सांच... घटाई नह/ं जाती। उसक# काई dयवःथा नह/ं होती. कैसे िमला? तो कसी को बताया भी नह/ं। जwद/ से ितजोड़/ मG संभालकर रख दए। अब तुमने इसक# फब करनी शुM क# क असली है या नकली। तुम कसी जौहर/ से दोःती कर िलए। सHसंग कर लगे। जौहर/ के दकान पर बैठने लगे। दे खने ु लगे.

हG साधG? बस.हOने फर संकोच भी छोड़ दया। फर तो वे बेधड़क मेरे सामने उठाकर ले आते थे सड़क पर। पैसेवाले आदमी थे.oshoworld. मगर अब जरा हट हो गई। यह साइकल का ह0 डल Yया करोगे? उ. वहां चूक हो रह/ है । तुम मेर/ बातO को ठWक से सुन लो। आंख से सुन लो। ठWक से परख लो. ऐसे तो म0 उनका करायेदार था लेकन वह कभी मुझे घर मG नह/ं बुलाते थे। घर मG वे कसी को नह/ं बुलाते थे। जब पहचान बढ़ गई तो कभी उ. Cजसक# तुम तलाश कर रहे हो। खोजनेवाले मG ह/ खोज का अंितम लआय िछपा है । साधक मG ह/ िसT बैठा है । तु]हारे भीतर परमाHमा का वास है । पर तुमने अपनी ितजोड़/ मG इतना कूड़ा-करकट इकcठा कर िलया है । जो िमला सो उठा लाए. इस शानदार बंगले मG रह सकते थे। इस कचरे मG रह रहे हो। वे हं से। वे इस तरह हं से जैसे समझदार नासमझO क# बातO पर हं सा है । उसने कहा. ु वह उठाकर उसको साफ करते चले आ रहे ह0 । म0ने उनसे पूछा क मुझे पूछना तो नह/ं चाहए. बड़ा उनका बंगला था. फर नकली ह/रा तुम फGक दोगे। और जब सब नकली ह/रे फGक दए जाते ह0 तब तु]हारे भीतर जो असली है ह/. YयO कहा जा रहा है । उसक# सब भाव-भंिगमाएं पहचान लो। यह तो जौहर/ क# दकान है । इस पर बैठे-बैठे. Yया कहा जा रहा है . अरे कुछ मत पूछो। पैडल मG पहले ह/ रखे हंू और ह0 डल भी आ गया। इसी तरह धीरे -धीरे करके पूर/ साइकल आ जाएगी। पैडल वे पहले ह/ कभी के उठा लाए ह0 . जो िमला सो उठा लाए.com . आप Yया समझो! अdयावहारक आदमी हो आप.हOने मुझे घर मG बुलाया। घर मG दे खा तो म0 है रान हो गया। वह तो कबाड़खाना था। वहां तो ऐसी-ऐसी चीजG दे खी Cजनका कोई भरोसा ह/ नह/ं करे क कसिलए आदमी रखे होगा। घर मG जगह ह/ नह/ं थी। सब तरह का कूड़ाकरकट भरा हआ था। अब अगर तुम सड़कO से उठा-उठा लाओगे इस तरह क# चीजG--इस ु आशा मG क पैडल भी िमल गया. तुम ऐसे ूƒ अपने मन मG कभी मत उठाओ क कैसे इ. फर कसी दन कैरयर िमल जाएगा। ऐसी आशा मG इकcठा करते जा रहे ह0 । धीरे -धीरे जब उनसे मेर/ पहचान भी बढ़ गई. अब ह0 डल भी िमल गया.dkuks lquh lks >wB lc मेर/ बातG सुनते-सुनते. आते-जाते. सHसंग करते-करते तु]हG ु समझ आ जाएगी क असली ह/रा Yया. मगर कोई भी चीज उठा लाते। ू एक दन म0ने दे खा क साइकल का टटा हआ ह0 डल कचरे घर मG कसी ने फGक दया होगा. अब इसी तरह एक दन साइकल भी बन जाएगी। इस आशा मG साइकल बनाओगे तो तु]हारे घर क# हालत तुम समझ सकते हो। म0ने उनसे पूछा क इस कूड़े -कबाड़ मG रह रहे हो. नकली ह/रा Yया.हOने कहा. कह रहे ह0 । आज ह0 डल भी हाथ आ गया। कसी दन ृेम भी िमल जाएगा. यह dयवहार क# बात है । Page 189 of 256 http://www. जहां िमला सो उठा लाए। म0 एक सgजन के घर मG कुछ वषr तक रहा। उनका ढं ग यह था क उनको कोई भी चीज कह/ं पड़/ िमल जाए तो उठा लाएं। नया-नया था तब तो म0 दे खता रहा क बात Yया है । वह थोड़ा संकोच भी करते थे फर जब म0 कई मह/ने वहां रहा तो उ. वह ूगट हो जाता है । नकली के ढे र मG खो गया है असली। असली लाना नह/ं है । असली लाया नह/ं जा सकता। असली तो तुम हो। असली ह/रा तो तुम हो। तुम ह/ हो.

बाजार मG राःते पर कोई िमल गया उससे कुछ बोले। अब सब हसाब रखो। शताबधनी होना चाहए। सबका हसाब रखो.dkuks lquh lks >wB lc आप दे खना धीरे -धीरे . बेटे से कुछ बोले. कससे Yया बोले। और फर कस-कससे Yया-Yया झूठ और बोलनी है आगे और। एक क# झूठ दसरे से पकड़ मG न आ जाए। और ू दसरा तीसरे से न कह दे । और कोई जाल न खड़ा हो जाए। तो आदमी इस जाल से बचने के ू िलए जाल को बड़ा करता चला जाता है । धीरे -धीरे तुम झूठ के पहाड़ मG दब जाते हो। तु]हार/ छाती पर म0 झूठ का हमालय रखा हुआ दे खता हंू । उस हमालय के नीचे तु]हार/ छोट/ सी जो धारा थी कल-कल झरने क#. असली तो िमला ह/ हआ है । िसफJ नकली से छूट जाना है । अब नकली से छूटने के िलए Yया करना होता है ? ु नकली नकली है ऐसी समझ भर आ जाए. बात खतम हो गई। फर अगर कोई दस वषJ बाद भी पूछेगा तो भी तुम सHय ह/ तो कहे हो तो फर सHय कह दोगे। लेकन अगर झूठ कहा तो याद रखना पड़ता है । कह/ं भूल न जाओ। झूठ बोलनेवाले को याद रखना पड़ता है क यह झूठ बोला। फर एक झूठ बोलने के िलए दस झूठ बोलने पड़ते ह0 । YयOक उसे िछपाने के िलए दस का इं तजाम करना पड़ता है । दस के िलए सौ बोलने पड़ते ह0 .. िनरं तर कलह होगी. इनमG एक-एक चीज काम मG आ जाएगी। वे उसी कचरे मG रहते-रहते मर गए। उनके मरने के बाद जब उनक# प~ी ने सफाई क# उस घर क# तो उसमG कुछ भी बचाने यो5य नह/ं था। वह भी म0ने अपनी आंख से दे खा क एक ठे ला भरके कूड़ा-कबाड़ सब तरह का िनकालना पड़ा। उसमG कुछ भी बचाने यो5य न था। तुम अगर अपनी Cजंदगी मG गौर से दे खोगे तो तुमने बहत ु सा कूड़ा-करकट इकcठा कर िलया है । भीतर तुम कचरा ह/ कचरा इकcठा कए बैठे हो। इस कचरे के कारण जो असली है वह दखाई नह/ं पड़ रहा। असली दब गया कचरे मG। असली को पाना नह/ं है .. िनरं तर झंझट होगी। कुछ कहोगे. पयाJm। इतनी ह/ समझ सदगु के पास आ जाती है । सHसंग का इतना ह/ सार है । तुम यह तो पूछो मत क ूामाCणकता कैसे लाऊं? अगर तु]हG अूामाCणकता क# बात समझ मG आ गई क अूामाCणक होने मG दख ु है . बाहर कुछ. नौकर से कुछ बोले. द”तर मG कुछ बोले. वह जो तु]हार/ जीवंत धारा थी चेतना क#. भीतर कुछ--तो तुम दो आदमी हो गए। और इन दोनO आदिमयO मG िनरं तर संघषJ होगा.com .। Mस मG एक कहावत है क झूठ बोलनेवाले क# ःमृित बहत ु अsछW होती है । होनी ह/ चाहए। सच बोलनेवाले को ःमृित से Yया लेना-दे ना! न भी हई ु तो चलेगा। झूठ बोलनेवाले के पास तो अsछW याददाँत चाहए ह/। प~ी से कुछ बोले. सHय को याद नह/ं रखना पड़ता। कह दया. अवT हो गई है । Page 190 of 256 http://www. कुछ करोगे। तु]हारा सारा जीवन झूठ का एक dयवसाय हो जाएगा। फर तु]हG याद रखनी पड़े गी क कससे Yया कहा। सHय के साथ एक सु!वधा है .oshoworld. वह दब गई है . सौ के िलए हजार। और ऐसे झूठ क# भीड़ बढ?ती चली जाती है । और फर सब याददाँत. तु]हG समझ मG आ गया क अूामाCणकता आदमी को !वC[mता क# तरफ ले जाती है .

द!वधा .यभाग? समझोगे तो बड़/ बहमू ु wय बात है । YयOक जो !बलकुल िनराश हो गया.यास क# परभाषा इतनी ह/ है क तु]हG दखाई पड़ गया क कैसे तुम नकJ बनाते हो। अब नकJ नह/ं बनाएंगे। और जो बना िलया है उसक# घोषणा कर दG गे क भई अब उससे हमG [मा कर दो। जो कहा-सुना था.oshoworld.यभागी ह0 वे.यभागी है जो परपूणJ Mप से िनराश हो जाते ह0 । YयO? िनराशा मG ध. आता नकJ है । आता दख ु है । आता !वषाद. बाहर हो गए। अब आज से हम सीधा और सरल रखा बुT जीवन जीएंगे। आज से हम वह/ कहG गे जो सच है । और वह/ जीएंगे जो सच है --चाहे जो परणाम हो। YयOक झूठ का परणाम दे ख िलया। झूठ बड़/ आशाएं दलाता है । झूठ बड़ा अदभुत सेwसमैन है । वह बड़/ आशाएं दलाता है । झूठ बड़ा राजनीितD है । वह बड़े भरोसे दलाता है क यह करG ग. े वह करG ग. बात खतम हो गई। फर तुम YयO नकJ बनाओगे? तुम तो इसी आशा मG बना रहे हो क यह ःवगJ है । दखाई पड़ जाए क नकJ है . अूामाCणक होने मG दख ु दखाई पड़ जाए। अूामाCणक होने मG क_. अब तुझे मेरे िलए और घर न बनाने पड़G गे? अब म0 मु" हो गया। अब म0 ःवतंऽ हो गया। अब मेरे िलए और दे ह न बनानी पड़े गी। और मेरे िलए नकJ न बनाने पड़G गे। और मेरे िलए कारागृह न बनाने पड़G गे और मेरे िलए ज. हे मेरे घर बनानेवाले.यास कहता हंू । मेरे सं. !वC[mता दखाई पड़ जाए। अूामाCणक होने मG ु नकJ बन रहा है यह दखाई पड़ जाए। बस.हOने जो पहले वचन बोले वे बड़े बहमू ं उठाकर कहा क हे मेरे गृह कारक! ु wय ह0 । उ. उलझन. Cजनक# आशा मर जाती है । बड़/ अजीब सी बात है । ध.हOने आकाश क# तरफ मुह मेरे घर बनानेवाले! अब तुझे मेरे िलए और घर न बनाने पड़G गे। अब म0 मु" हो गया। कससे कह रहे ह0 वे क हे गृह कारक.. े वैसा करG गे। एक बार मुझे वोट भर दे दो। एक बार मेरे साथ खड़े हो जाओ। झूठ बड़े आtासन दे ता है लेकन कभी पूरे नह/ं करता। एक भी आtासन झूठ पूरा नह/ं कर सकता। झूठ ने कभी कोई आtासन पूरा नह/ं कया है । िसफJ लटकाए रहता है आtासनO के आधार पर। झूठ तो ऐसा है जैसे मछली को पकड़ते ह0 कांटे पर आटा लगाकर। तो झूठ तो कांटा है और आtासन आटा है । झूठ कहता है .com . े ऐसा करG ग.dkuks lquh lks >wB lc ूामाCणक होने का अथJ है . ध. उसे दे ख िलया। अब म0 तेरे आtासनO मG.. बेचन ै ी.इतना ह/ यहां तु]हG घट जाए क इतना ह/ तु]हG दखाई पड़ने लगे क अब और झूठ के घर नह/ं बनाने ह0 । बुT को जब पहली दफा Iयान हआ ु .तेर/ आशाओं मG न पडू ं गा। बुT ने कहा. Cजसने दे ख िलया क आशा Page 191 of 256 http://www. सब झूठा था। अब हम उस झंझट मG नह/ं रहे . तनाव. तुम बनाना बंद कर दोगे। दखाई पड़ जाए क नकJ है . बहँत बनाएंगे तेरे िलए। इतना ऊंचा जीवन ला दG गे। जरा हमारे साथ चल। वह ःवगJ कभी आता नह/ं. तुम तH[ण इसके बाहर आ जाओगे। इसको ह/ म0 सं.म नह/ं है अब। अब बात खतम हो गई। म0ने दे ख िलया। जैसा है . संताप है । इसमG जागकर जो दे ख िलया. ऐसे-ऐसे सुख के स6ज-बाग दखाता है । ःवगJ बनाएंगे. समािध पहली दफा लगी तो उ.

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यहां पूर/ होती ह/ नह/ं, उसको फर झूठ धोखा नह/ं दे पाएगा। फर कोई आtासन झूठ
दे कर उसे फुसला न पाएगा। फर झूठ कोई !बब# न कर पाएगा, कुछ बेच न पाएगा उसे।
उसक# आशा ह/ छूट गई। आशा को ह/ हम फासला लेते ह0 । आशा के ह/ साथ झूठ का संबध

जुड़ जाता है । जो परम िनराश हो गया--चाहे इसे तुम !वराग कहो, चाहे नैराँय कहो, चाहे
उदासीनता कहो, कुछ फकJ नह/ं पड़ता। बात एक ह/ है । Cजसने दे ख िलया क यहां कुछ भी
िमलता नह/ं। बस बातG ह0 ।
म0ने सुनी है एक कहानी। एक आदमी ने बहत
ु दन तक िशव क# भ!" क#। वषr क# तपvयाJ
के बाद िशव ूगट हए
ु और पूछा, तू चाहता Yया है ? वह आदमी अपना शंख बाजा रहा था।
वषr से बजा रहा था भगवान के समाने बैठ-बैठकर। तू चाहता Yया है ? तो उसने कहा क
मुझे कोई वरदान दे दG । Yया वरदान चाहता है ? तो उसने कहा क यह मेरा शंख रहा, यह/
मुझे वरदान दे दG क शंख से जो भी म0 मांगूं वह मुझे िमल जाए। िशव ने कहा, तथाःतु।
वे तो ितरोहत हो गए।
वह आदमी अपने शंख से जो भी मांगता उसे िमल जाता। लाख पए चाहए और छoपर
फूटता और लाख पए िगर जाते। बड़ा मकान चाहए और सुबह आंख खोलता और मकान
खड़ा हआ।
वह बड़ा ूस;न रहने लगा।उसक# बड़/ क#ितJ फैल गई दरू -दरू तक। दरू -दरू से

लोग उसके दशJन करने आने लगे क यह बड़ा चमHकार/ पुष है । कैसा यह घट रहा है ?
ू खजाना िमल गया है ।
इसको कौन सा अटट
एक सं;यासी भी आया। सं;यासी रात का। रात जब सं;यासी अपने कमरे मG अकेला था,
उसने अपने झोले से एक शंख िनकाला-बड़ा शंका। वह गृहःथी भी बगल के कमरे मG था,
उसके पास छोटा शंख था। उस सं;यासी ने अपने शंख से कहा, लाख पए चाहए। उसके
शंख ने कहा, लाख मG Yया होगा, दो लाख ला दं ?
ू गृहःथ चaका क यह तो गजब हो
गया। म0 मांगता हंू , लाख ह/ दे ता है मेरा शंख। यह असली चीज तो इसके पास है । लाख
मांगो, दो लाख बताता है । कहता है , दो लाख ला दं ?
ू उसने सुबह सं;यासी के चरण छुए।
कहा महाराज, आप सं;यासी, वीतरागी पुष! आप यह कसिलए रखे हए
ु ह0 ? मुझ गर/ब
को दे दG । हम तो लोभी, कामी। और ऐसा भी नह/ं क म0 आपको कुछ न दं ग
ू ा। म0 आपको
अपना शंख दे दे ता हंू । यह मेरा शंख है । मगर आपके पास महाशंख है , बदल लG। सं;यासी
ने कहा, जैसी तु]हार/ मजx। हम तो सं;यासी आदमी। चलो छोटा ह/ शंख ले लGगे।
छोटा शंख लेकर सं;यासी नदारद हो गए। रात हई
ु , गृहःथ ने अपना महाशंख िनकाला,
उससे कहा क लाख पए। महाशंख बोला लाख मG Yया होता, दो लाख ले ले। उसने कहा
चलो दो लाख। महाशंख बोला, चार ले लेना। उसने कहा, चलो चार। उसने कहा, अरे आठ!
मगर वह शंख आगे ह/ बढ़ता जाए, दे

इHयाद कुछ भी नह/ं। तब वह घबड़ाया। उसने

कहा, भई कुछ दे गा भी? उसने कहा लेना-दे ना कसक#? तू Cजतना मांगेगा, दगु
ु ना हम
दG गे। लेना-दे ना !बलकुल नह/ं, बस दगु
ु ना हम दG गे। तू मांग, Cजतना तुझे मांगना हो। तब
उसने छाती पीट ली।

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झूठ महाशंख है । झूठ बड़े आtासन दे ता है । अूामाCणकता के बड़े आtासन ह0 । तु]हG यह
समझ मG आ जाए तुम अूामाCणकता से िनराश हो जाओ, बस पयाJm। कुछ करने का नह/ं
है । धीरे -धीरे अूामाCणकता तु]हारे हाथ से छूटकर िगर जाएगी। वह जाल फर सबय न रह
जाएगा। फर जो बचेगी जीवंत धारा वह/ ूामाCणकता है ।
तीसरा ूƒ: कभी-कभी रात मG आपसे मुलाकात हो जाती है । Yया यह सपना है ? और कभीकभी ऐसा ःवाद अनुभव होता है जैसा कभी नह/ं जाना था। तो यह Yया है ?
पहली बात, जीवन Cजतना तुम जानते हो उससे बहत
gयादा है । जीवन Cजतना तुम

पहचानते हो, उससे बहत
ु बड़ा है । इसिलए अगर इसी जीवन को तुमने सच मान िलया तो 
फर और कोई भी नई घटना घटे गी तो तु]हG लगेगी सपना है । तुमने बड़/ सीिमत परभाषा
कर ली जीवन क#। तुमने अगर यह मान िलया क जीवन मG बस कंकड़-पHथर ह/ होते ह0 तो 
कसी दन अगर कोहनूर िमल जाएगा तो तुम कहोगे, सपना है । हो कैसे सकता है ? तुमने
अगर दख
ु ह/ दख
ु को जीवन मान िलया तो सुख ह/ करण उतरे गी तो तु]हG लगेगा स