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गुरुत्ल कामाारम द्राया प्रस्तुत भासवक ई-ऩत्रिका

NON PROFIT PUBLICATION

अक्टू फय- 2011

FREE
E CIRCULAR

गुरुत्ल ज्मोसतऴ ऩत्रिका अक्टू फय 2011
सिॊतन जोळी

वॊऩादक

गुरुत्ल ज्मोसतऴ त्रलबाग

गुरुत्ल कामाारम

वॊऩका

92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA,
BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA

पोन

91+9338213418, 91+9238328785,

ईभेर

gurutva.karyalay@gmail.com,
gurutva_karyalay@yahoo.in,

लेफ

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ऩत्रिका प्रस्तुसत

सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक.ऎन.जोळी

पोटो ग्राफपक्व

सिॊतन जोळी, स्लस्स्तक आटा

शभाये भुख्म वशमोगी स्लस्स्तक.ऎन.जोळी (स्लस्स्तक वोफ्टे क इस्डडमा सर)

ई- जडभ ऩत्रिका
अत्माधुसनक ज्मोसतऴ ऩद्धसत द्राया
उत्कृ द्श बत्रलष्मलाणी के वाथ
१००+ ऩेज भं प्रस्तुत

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100+ Pages

फशॊ दी/ English भं भूल्म भाि 750/GURUTVA KARYALAY
92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA,
BHUBNESWAR-751018, (ORISSA) INDIA
Call Us – 91 + 9338213418, 91 + 9238328785
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अनुक्रभ
नलयाि त्रलळेऴ

दीऩालरी

नलयाि भं भाॊ दग
ु ाा के नलरुऩं फक उऩावना कल्माणकायी शं

धन तेयव ळुब भुशूता (24 अक्तूफय, 2011)

6

भाॊ दग
ु ाा की उऩावना क्मं की जाती शं ?

दीऩालरी ऩूजन भुशूता (26-अक्तूफय-2011)

7

47
48

ळायदीम नलयाि व्रत वे वुख वौबाग्म की प्रासद्ऱ शोती शं

8

रक्ष्भी प्रासद्ऱ शे तु कयं यासळ भॊि का जऩ

53

कैवे कयं नलयाि व्रत?

9

रक्ष्भी प्रासद्ऱ के वयर उऩाम

54

दे ली आयाधना वे असबद्श कामो की सवत्रद्ध शे तु

11

रक्ष्भी भॊि

56

आस्द्वन नलयात्रि घट स्थाऩना भुशूता, त्रलसध-त्रलधान

12

दीऩ जराने का भशत्ल क्मा शं ?

63

वयर त्रलसध-त्रलधान वे ळायदीम नलयाि व्रत उऩावना

13

66

नलयाि स्ऩेळर घट स्थाऩना त्रलसध

धनिमोदळी ऩय मभ-दीऩदान अकारभृत्मु को दयू कयता शं

14

धनिमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं फकमा जाता शं ?

68

नलाणा भॊि वे शोती शं नलग्रश ळाॊसत

18

दीऩालरी के फदन कैवे कयं फशीखाता तुरा ऩूजन?

69

दग
ु ााद्शाषय भडि वाधना

22

दीऩालरी का भशत्ल औय रक्ष्भी ऩूजन त्रलसध

70

कुभायी ऩूजन वे वकर भनोयथ सवद्ध शोते शं ।

23

श्री धनलॊतरय व्रत कथा

71

भाता के 52 ळत्रक्त ऩीठ

26

वद्ऱ श्री का िभत्काय

74

नलाणा भडि वाधना

20

स्पफटक श्रीमॊि का ऩूजन

75

भॊि एलॊ स्तोि
दग
ु ाा िारीवा

32

बलाडमद्शकभ,्

श्रीकृ ष्ण कृ त दे ली स्तुसत,

33

षभा-प्राथाना,

ऋग्लेदोक्त दे ली वूक्तभ,्

33
34
34
35

दग
ु ााद्शोत्तय ळतनाभ स्तोिभ,्

वप्तश्र्लरोकी दग
ु ाा,
दग
ु ाा आयती,

सवद्धकुॊस्जकास्तोिभ,्

त्रलद्वॊबयी स्तुसत,

भफशऴावुयभफदा सनस्तोिभ,्
गुद्ऱ वद्ऱळती,

36
36
37
38
39
41

दग
ु ााद्शकभ,्

श्री कनकधाया स्तोि

35
77
78
79
80

श्री रक्ष्भी िारीवा

81

वला ऐद्वमा प्रद-रक्ष्भी-कलि
भशारक्ष्भी कलि
भशारक्ष्भी स्तुसत

श्री वूक्त

दे लकृ त रक्ष्भी स्तोिभ ्

82
82
83
83

धनरक्ष्भी स्तोि
अद्शरक्ष्भी स्तोि

शभाये उत्ऩाद
दग
ु ाा फीवा मॊि

6

ळादी वॊफॊसधत वभस्मा

37

अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलि

60

कनकधाया मॊि

80

भॊि सवद्ध दै ली मॊि वूसि

10 भॊि सवद्ध गणेळ मॊि

49

याळी यत्न एलॊ उऩयत्न

60

यासळ यत्न

88

भॊिसवद्ध रक्ष्भी मॊिवूसि

10 भॊगर मॊि वे ऋण भुत्रक्त

50

श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि/ कलि

61

भॊि सवद्ध वाभग्री

94

गणेळ रक्ष्भी मॊि

13 भॊि सवद्ध दर
ा वाभग्री
ु ब

55

याभ यषा मॊि

62

वला योगनाळक मॊि/

101

बाग्म रक्ष्भी फदब्फी

17 वला कामा सवत्रद्ध कलि

57

भॊि सवद्ध रूद्राष

65

भॊि सवद्ध कलि

103

द्रादळ भशा मॊि

21 जैन धभाके त्रलसळद्श मॊिो वूिी 58

भॊिसवद्ध स्पफटक श्री मॊि

67

YANTRA

104

रक्ष्भी मॊि

74

GEMS STONE

106

घॊटाकणा भशालीय वला सवत्रद्ध भशामॊि

59

स्थामी औय अडम रेख
वॊऩादकीम

4

अक्टू फय-2011 भासवक व्रत-ऩला-त्मौशाय

91

ऩसत-ऩत्नी भं करश सनलायण शे तु

22

अक्टू फय 2011 -त्रलळेऴ मोग

97

ळयद ऩूस्णाभा (11-अक्टू फय-2011)

दै सनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान तासरका

97

कोजागयी ऩूस्णाभा (11-अक्टू फय-2011)

44
45

फदन-यात के िौघफडमे

98

दल
ु ाा ऩूजनभं यखे वालधासनमाॊ

45

फदन-यात फक शोया - वूमोदम वे वूमाास्त तक

99

कयला िौथ व्रत (15-अक्टू फय-2011)

46

ग्रश िरन अक्टू फय -2011

100

नमे कऩडे औय ज्मोसतऴ

50

वूिना

108

भासवक यासळ पर

84

शभाया उद्दे श्म

110

अक्टू फय 2011 भासवक ऩॊिाॊग

89

. की ळयत्कारे भशाऩूजा फक्रमतेमा िलात्रऴक ा ी। तस्माॊभभैतडभाशात्म्मॊश्रत्ु लाबत्रक्तवभस्डलत:॥ वलााफाधात्रलसनभुक्त ा ोधनधाडमवुतास्डलत:। भनुष्मोभत्प्रवादे नबत्रलष्मसतन वॊळम:॥ अथाात् ळयद ऋतु के नलयािभं जफ भेयी लात्रऴाक भशाऩूजा शोती शं . बद्रकारी. सळला धािी औय स्लधा के नाभं वे प्रसवद्ध जगदम्फा दे ली। आऩको भेया नभस्काय शं । नभो दे व्मै भशादे व्मै सळलामै वततॊ नभ:। नभ: प्रकृ त्मै बद्रामै सनमता: प्रणता: स्भताभ ्॥ अथाात: दे ली को नभस्काय शं . षभा. दग ु ाा. कऩासरनी. लश भनुष्म भेये प्रवाद वे वफ फाधाओॊ वे भुक्त शोकय धन-धाडम एलॊ ऩुि वे वम्ऩडन ु ाावद्ऱळती) को बत्रक्तऩूलक शो जामेगा। . भॊगरा. कारी..वॊऩादकीम त्रप्रम आस्त्भम फॊध/ु फफशन जम गुरुदे ल फशडद ु ऩयॊ ऩया भं दे ली को त्रलसबडन रूऩं वे जाना औय ऩूजा जाता शं । ॐ जमॊती भॊगरा कारी बद्रकारी कऩासरनी। दग ु ाा षभा सळला धािी स्लाशा स्लधा नभोऽस्तुते॥ बालाथा: जमॊती. उव कार भं जो भनुष्म भेये भाशात्म्म (दग ा वुनेगा. भशादे ली को नभस्काय शं । भशादे ली सळला को वलादा नभस्काय शं । प्रकृ सत एलॊ बद्रा को भेया प्रणाभ शं । शभ रोग सनमभऩूलक ा दे ली जगदम्फा को नभस्काय कयते शं । ळास्त्रोक्त लणान शं की दे ली दग ु ाा के उक्त भॊि का स्भयण कय प्राथाना कयने भाि वे दे ली प्रवडन शोकय अऩने बक्तं की इच्छा ऩूणा कयती शं । वभस्त दे ल गण स्जनकी स्तुसत प्राथना कयते शं । भाॉ दग ु ाा अऩने बक्तो की यषा कय उन ऩय कृ ऩा द्रद्शी लऴााती शं औय उवको उडनती के सळखय ऩय जाने का भागा प्रवस्त कयती शं । इव सरमे ईद्वय भं श्रद्धा त्रलद्वाय यखने लारे वबी भनुष्म को दे ली की ळयण भं जाकय दे ली वे सनभार रृदम वे प्राथाना कयनी िाफशमे। भाॊ जगदम्फा की कृ ऩा प्रासद्ऱ शे तु नलयािी त्रलळेऴ राब प्रदान कयने लारी शं । क्मोफक नलयाि को आद्य् ळत्रक्त की उऩावना का भशाऩला भाना गमा शं । दे ली बागलत के आठलं स्कॊध भं दे ली उऩावना का त्रलस्ताय वे लणान फकमा गमा शै । भाकाण्डे मऩुयाण के अॊतगात दे ली भाशात्म्म भं उल्रेख शं की स्लमॊ भाॊ जगदम्फा का लिन शं .

भाॊ दग ु ाा की कृ ऩा प्रासद्ऱ शे तु त्रलसबडन ळास्त्र एलॊ ग्रॊथो भं त्रलसबडन भॊिं का उल्रेख फकमा गमा शं । ऩाठको के भागादळान एलॊ जानकायी शे तु ऩत्रिका के इव अॊक भं कुछ त्रलळेऴ प्राबाली भॊिो का वॊकरन कयने का प्रमाव फकमा गमा शं । इव अॊक भं करळ स्थाऩना वे वॊफॊसधत लणान बी फकमा गमा शं । स्जववे इच्छुक फॊधु/फशन त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय अऩने भनोयथो को सवद्ध कयने भं वभथा शं। दीऩालरी को फशडद ू धभा भं ऩॊिभशा ऩला के रुऩ भं भनामा जाता शं । ऩॊिभशा ऩला को वबी जगश ऩय त्रलळेऴ प्रकाय की ऩूजाएॊ की जाती शं । उव भं त्रलळेऴ रुऩ वे भाॊ रक्ष्भी की ऩूजा की जाती शं । क्मोकी. वभृत्रद्ध एलॊ ऐद्वमा प्राद्ऱ शोता शं । भाॊ रक्ष्भी िॊिर शं । अथाात रक्ष्भी जी लश एक जगश फटकती नशीॊ शै । फकव प्रकाय रक्ष्भी का आगभन आऩके घय भं शो औय स्जदॊ गी द्ु ख. कुफेय की ऩूजन कयने का त्रलधान शै । क्मोफक दे ली रक्ष्भी की उत्ऩत्ती दीऩालरी के फदन भानी जाती शं औय ळास्त्रोक्त लणा शं धन की दे ली रक्ष्भी शं औय धन के दे लता कुफेय शं . की उवे कभ वे कभ इतनी धन वॊऩत्रत्त प्राद्ऱ शो जामे की उवका जीलन वुखभम शो। फशडद ु ऩॊिाॊग के अनुळाय कासताक की अभालव को दीऩालरी भनाई जाती शं । इव फदन दे ली रक्ष्भी. ऩुयातन कार वे शी धन प्रासद्ऱ की इच्छा प्राम वबी व्मत्रक्तमं भं यशी शं । कुछ रोगो को धन. स्जनके प्रवडन शोने वे भनुष्म को धन. कद्शो वे छुट कय खुसळमं वे बय जाए उववे जुडे यशस्मो को बायतीम ऋत्रऴ भुसनमं ने खोज सनकारा शं । मश बी एक प्रभुख कायण शं की दीऩालरी का ऩला भनामा जाता शं औय रक्ष्भीजी का ऩूजन अिान फकमा जाता शं । क्मोफक लेद फशॊ दओ ु ॊ धभा के प्रािीनतभ धासभाक ग्रॊथ शं । लेदो को शभायी प्रािीन बायतीम वॊस्कृ सत के भूल्मलान बॊडाय भाने जाते शं । स्जवे शभाये त्रलद्रान ऋत्रऴ-भुसनमं ने लऴो तक सिॊतन-भनन अध्ममन कय इव वृत्रद्श के अद्भद ु यशस्मं की जानकायी इव लेद के रुऩ भं वॊग्रफशत की शं । स्जववे भनुष्म वभझ कय अऩने जीलन की शय वभस्माओॊ का शर सनकार वके। सिॊतन जोळी . गणेळ. दरयद्र. वयस्लती. वॊऩत्रत्त एलॊ बौसतक वुख-वाधन अऩनी मोग्मता औय भेशनत के अनुळाय प्राद्ऱ शो जाता शं । रेफकन फशोत वे रोग एवे शोते शं स्जडशं कफठन ऩरयश्रभ कयने औय सळस्षत शोने के उऩयाॊत बी त्रलळेऴ राब नशीॊ सभरता मा अऩने ऩरयश्रभ का उसित भूल्म बी नशीॊ प्राद्ऱ शो ऩाता शं । स्जन रोगो के ऩाव ऩमााद्ऱ धन-वॊऩत्रत्त शोती शं उडशं इच्छा शोती शं उनकी धन-वॊऩत्रत्त फदन दोगुनी यात िौगुनी फढती यशं ओय स्जके ऩाव ऩमााद्ऱ धन-वॊऩत्रत्त नशीॊ शं उवकी इच्छा शोती शं .

भशागौयी द्वेते लृऴे वभारुढा द्वेताम्फयधया ळुसि् । भशागौयी ळुबॊ दद्याडभशादे लप्रभोददा ॥ 9. स्कडदभाता सवॊशावनगता सनत्मॊ ऩद्भासश्रतकयद्रमा । ळुबदास्तु वदा दे ली स्कडदभाता मळस्स्लनी ॥ 6. भशागौयी ९. कूष्भाण्डा वुयावम्ऩूणक ा रळॊ रुसधयाप्रुतभेल ि । 5. ळैरऩुिी २. ब्रह्मिारयणी ३. लश व्मत्रक्त मफद नलयािं भं प्राण प्रसतत्रद्षत फकमा गमा दग ु ाा फीवा मॊि को स्थासद्ऱ कय रेता शं .8200 तक . िडद्रघण्टा ४. ब्रह्मिारयणी दधाना कयऩद्भाभ्माभषभाराकभण्डरू । दे ली प्रवीदतु भसम ब्रह्मिारयण्मनुत्तभा ॥ 3. व्मत्रक्त ळीघ्र शी अऩने व्माऩाय भं लृत्रद्ध एलॊ अऩनी आसथाक स्स्थती भं वुधाय शोता दे खंगे। वॊऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एलॊ ऩूणा िैतडम दग ु ाा फीवा मॊि को ळुब भुशूता भं अऩने घय-दक ु ान-ओफपव भं स्थात्रऩत कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म: Rs. कात्मामनी िडद्रशावोज्लरकया ळादा र ू लयलाशना । कात्मामनी ळुबॊ दद्याद्दे ली दानलघासतनी 7. योजगाय एलॊ व्मलवाम वे वॊफॊधी वबी वभस्मं का ळीघ्र शी अॊत शोने रगता शं । नलयाि के फदनो भं प्राण प्रसतत्रद्षत दग ु ाा फीवा मॊि को अऩने घय-दक ु ान-ओफपव-पैक्टयी भं स्थात्रऩत कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं . तो उवकी धन. िडद्रघण्टा त्रऩण्डजप्रलयारुढा िण्डकोऩास्त्रकैमुत ा ा। प्रवादॊ तनुते भह्याॊ िडद्रघण्टे सत त्रलश्रुता ॥ 4. कात्मामनी ७. प्रथभ फदन ळैरऩुिी की एलॊ क्रभळ् भाॊ दग ु ाा के नलरुऩं की उऩावना की जाती शै । १.अक्टू फय 2011 6 नलयाि भं भाॊ दग ु ाा के नलरुऩं फक उऩावना कल्माणकायी शं  सिॊतन जोळी भाॊ दग ु ाा के नलरुऩं की उऩावना सनम्न भॊिं के द्राया की जाती शै . कूष्भाण्डा ५. कारयात्रि ८.ळैरऩुिी लडदे लास्छछतराबाम िडद्राधाकृतळेखयाभ ् । लृऴारुढाॊ ळूरधयाॊ ळैरऩुिीॊ मळस्स्लनीभ ् ॥ 2.550 वे Rs. सवत्रद्धदािी सवद्धगडधलामषाद्यैयवुयैयभयै यत्रऩ । वेव्मभाना वदा बूमात ् सवत्रद्धदा सवत्रद्धदासमनी ॥ दधाना शस्तऩद्भाभ्माॊ कूष्भाण्डा ळुबदास्तु भे ॥ दग ु ाा फीवा मॊि ळास्त्रोक्त भत के अनुळाय दग ु ाा फीवा मॊि दब ु ााग्म को दयू कय व्मत्रक्त के वोमे शुले बाग्म को जगाने लारा भाना गमा शं । दग ु ाा फीवा मॊि द्राया व्मत्रक्त को जीलन भं धन वे वॊफॊसधत वॊस्माओॊ भं राब प्राद्ऱ शोता शं । जो व्मत्रक्त आसथाक वभस्मावे ऩये ळान शं. कारयात्रि एकलेणी जऩाकणाऩूया नग्ना खयास्स्थता । रम्फोद्षी कस्णाकाकणॉ तैराभ्मक्तळयीरयणी ॥ लाभऩादोल्रवल्रोशरताकण्टकबूऴणा । लधानभूधध् ा लजा कृ ष्णा कारयात्रिबामङ्कयी ॥ 8. सवत्रद्धदािी 1. स्कडदभाता ६.

अॊत औय भध्म शं । दे ली वे प्राथाना कयं – ळयणागत-दीनाता-ऩरयिाण-ऩयामणे वलास्मासतंशये दे त्रल नायामस्ण नभोऽस्तुते॥ अथाात: ळयण भं आए शुए दीनं एलॊ ऩीस्िडतं की यषा भं वॊरग्न यशने लारी तथा वफ फक ऩीड़ा दयू कयने लारी नायामणी दे ली आऩको नभस्काय शै । योगानळेऴानऩशॊ सव तुद्शा रूद्शा तु काभान वकरानबीद्शान ्। त्लाभासश्रतानाॊ न त्रलऩडनयाणाॊ त्लाभासश्रता शाश्रमताॊ प्रमास्डत। अथाात् दे ली आऩ प्रवडन शोने ऩय वफ योगं को नद्श कय दे ती शो औय कुत्रऩत शोने ऩय भनोलाॊसछत वबी काभनाओॊ का नाळ कय दे ती शो। जो रोग तुम्शायी ळयण भं जा िुके शै । उनको त्रलऩत्रत्त आती शी नशीॊ। तुम्शायी ळयण भं गए शुए भनुष्म दव ू यं को ळयण दे ने लारे शो जाते शं । वलाफाधाप्रळभनॊ िेरोक्मस्मास्खरेद्वयी। एलभेल त्लमा कामाभस्मध्दै रयत्रलनाळनभ ्। अथाात् शे वलेद्वयी आऩ तीनं रोकं फक वभस्त फाधाओॊ को ळाॊत कयो औय शभाये वबी ळिुओॊ का नाळ कयती यशो। ळाॊसतकभास्ण वलाि तथा द:ु स्लप्रदळाने। ग्रशऩीडावु िोग्रावु भशात्भमॊ ळणुमात्भभ। अथाात् वलाि ळाॊसत कभा भं. फुये स्लप्न फदखाई दे ने ऩय तथा ग्रश जसनत ऩीड़ा उऩस्स्थत शोने ऩय भाशात्म्म श्रलण कयना िाफशए। इववे वफ ऩीड़ाएॉ ळाॊत औय दयू शो जाती शं । मफश कायण शं वशस्त्रमुगं वे भाॊ बगलती जगतजननी दग ु ाा की उऩावना प्रसत लऴा लवॊत. आस्द्वन एलॊ गुद्ऱ नलयािी भं त्रलळेऴ रुऩ वे कयने का त्रलधान फशडद ु धभा ग्रॊथो भं शं । *** . आऩको नभस्काय शं । आऩ वृत्रद्श का ऩारन औय वॊशाय कयने लारी ळत्रक्तबूता वनातनी दे ली.अक्टू फय 2011 7 भाॊ दग ु ाा की उऩावना क्मं की जाती शं ?  सिॊतन जोळी नभो दे व्मै भशादे व्मै सळलामै वततॊ नभ:। नभ: प्रकृ त्मै बद्रामै सनमता: प्रणता: स्भताभ ्॥ अथाात: दे ली को नभस्काय शं . भशादे ली को नभस्काय शं । भशादे ली सळला को वलादा नभस्काय शं । प्रकृ सत एलॊ बद्रा को भेया प्रणाभ शं । शभ रोग सनमभऩूलक ा दे ली जगदम्फा को नभस्काय कयते शं । उऩयोक्त भॊि वे दे ली दग ु ाा का स्भयण कय प्राथाना कयने भाि वे दे ली प्रवडन शोकय अऩने बक्तं की इच्छा ऩूणा कयती शं । वभस्त दे ल गण स्जनकी स्तुसत प्राथना कयते शं । भाॉ दग ु ाा अऩने बक्तो की यषा कय उन ऩय कृ ऩा द्रद्शी लऴााती शं औय उवको उडनती के सळखय ऩय जाने का भागा प्रवस्त कयती शं । इव सरमे ईद्वय भं श्रद्धा त्रलद्वाय यखने लारे वबी भनुष्म को दे ली की ळयण भं जाकय दे ली वे सनभार रृदम वे प्राथाना कयनी िाफशमे। दे ली प्रऩडनासताशये प्रवीद प्रवीद भातजागतोsस्खरस्म। ऩवीद त्रलद्वेतरय ऩाफश त्रलद्वॊ त्लभीद्ळयी दे ली ियाियस्म। अथाात: ळयणागत फक ऩीड़ा दयू कयने लारी दे ली आऩ शभ ऩय प्रवडन शं। वॊऩूणा जगत भाता प्रवडन शं। त्रलद्वेद्वयी दे ली त्रलद्व फक यषा कयो। दे ली आऩ फश एक भाि ियािय जगत फक असधद्वयी शो। वलाभॊगर-भाॊगल्मे सळलेवलााथव ा ासधके । ळयण्मे िमम्फके गौरय नायामस्ण नभोऽस्तुते॥ वृत्रद्शस्स्थसत त्रलनाळानाॊ ळत्रक्तबूते वनातसन। गुणाश्रमे गुणभमे नायामस्ण नभोऽस्तुते॥ अथाात: शे दे ली नायामणी आऩ वफ प्रकाय का भॊगर प्रदान कयने लारी भॊगरभमी शो। कल्माण दासमनी सळला शो। वफ ऩुरूऴाथं को सवद्ध कयने लारी ळयणा गतलत्वरा तीन नेिं लारी गौयी शो. आऩ गुणं का आधाय तथा वलागुणभमी शो। नायामणी दे ली तुम्शं नभस्काय शै । इव भॊि के जऩ वे भाॉ फक ळयणागती प्राद्ऱ शोती शं । स्जस्वे भनुष्म के जडभ-जडभ के ऩाऩं का नाळ शोता शै । भाॊ जननी वृत्रद्श फक आफद.

दं यािी औय एक यािी का व्रत कयके बी त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । नलयाि भं नलदग ु ाा की उऩावना कयने वे नलग्रशं का प्रकोऩ स्लत् ळाॊत शो जाता शं । . लश भनुष्म भेये दे ली वे प्राथाना कयं - प्रवाद वे वफ फाधाओॊ वे भुक्त शोकय धन-धाडम एलॊ ऩुि वे त्रलधेफशदे त्रल कल्माणॊत्रलधेफशऩयभाॊ - वम्ऩडन शो जामेगा। सश्रमभ ्।रूऩॊदेफशजमॊदेफशमळोदे फशफद्र नलयाि भं दग ु ाावद्ऱळती को ऩढने मा ऴोजफश॥ वुनने वे दे ली अत्मडत प्रवडन शोती शं अथाात् एवा मळ कयने ऩय शी ऩूणा प्रबाली शोता शं । श्रीदग ु ाावद्ऱळती को बगलती दग ु ाा ऩॊिोऩिायऩूजन कयं - नभोदे व्मैभशादे व्मैसळलामैवततॊनभ:। नभ:प्रकृ त्मैबद्रामैसनमता:प्रणता:स्भताभ ्॥ दो औय भेये काभ-क्रोध इत्माफद ळिुओॊ का नाळ कयो। को ऩाठ कयने वे ऩूला श्रीदग ु ाावद्ऱळती फक ऩुस्तक का इव भॊि वे भेया प्रदान कयो। भुझे रूऩ दो.अक्टू फय 2011 8 ळायदीम नलयाि व्रत वे वुख वौबाग्म की प्रासद्ऱ शोती शं  सिॊतन जोळी नलयाि को ळत्रक्त की उऩावना का भशाऩला भाना गमा शं । भाकाण्डे मऩुयाण के अनुळाय दे ली भाशात्म्म भं स्लमॊ भाॊ जगदम्फा का लिन शं -। जो व्मत्रक्त दग ु ाावद्ऱळतीके भूर वॊस्कृ त भं ऩाठ कयने भं अवभथा शं तो उव व्मत्रक्त को वद्ऱद्ऴोकी दग ु ाा को ऩढने वे राब प्राद्ऱ शोता शं । क्मोफक वात द्ऴोकं लारे इव स्तोि भं ळयत्कारे भशाऩूजा फक्रमतेमा िलात्रऴक ा ी। तस्माॊभभैतडभाशात्म्मॊश्रत्ु लाबत्रक्तवभस्डलत:॥ वलााफाधात्रलसनभुक्त ा ोधनधाडमवुतास्डलत:। भनुष्मोभत्प्रवादे नबत्रलष्मसतन वॊळम:॥ श्रीदग ु ाावद्ऱळती का वाय वभामा शुला शं । जो व्मत्रक्त वद्ऱद्ऴोकी दग ु ाा का बी न कय वके लश केलर नलााण भॊि का असधकासधक जऩ कयं । दे ली के ऩूजन के वभम इव भॊि का जऩ कये । अथाात् ळयद ऋतु के नलयािभं जमडती भङ्गराकारी बद्रकारी शं . जम दो. उव कार भं जो भनुष्म भेये दग ु ाा षभा सळला धािी स्लाशा कऩासरनी। जफ भेयी लात्रऴाक भशाऩूजा शोती भाशात्म्म (दग ु ाावद्ऱळती) स्लधानभोऽस्तुते॥ को बत्रक्तऩूलक ा वुनेगा.ऩाॊि यािी. ऩाठ उवकी भूर बाऴा वॊस्कृ त भं का शी स्लरूऩ वभझना िाफशए। दे त्रल! आऩ कल्माण कयो। भुझे श्रेद्ष वम्ऩत्रत्त ळास्त्रोक्त लिन शं । वद्ऱळती का व्मत्रक्त शे त्रलद्रानो के भतानुळाय वम्ऩूणा नलयािव्रत का ऩारन कयने भं जो रोगं अवभथा शो लश नलयाि के वात यािी.

ा फीभाय. कब्ज.9 अक्टू फय 2011 कैवे कयं नलयाि व्रत?  स्लस्स्तक. गबालती भफशरा को नलयाि व्रत का नशीॊ यखना िाफशए। नलयाि व्रत वे वॊफॊसधत उऩमोगी वुझाल  व्रत के दौयान असधक वभम भौन धायण कयं ।  व्रत के ळुरुआत भं बूख कापी रगती शं । ऐवे भं नीॊफू ऩानी त्रऩमा जा वकता शै । इववे बूख को सनमॊत्रित यखने भं भदद सभरेगी।  जशा तक वॊबल शो सनजारा उऩलाव न यखं। इववे ळयीय भं ऩानी फक कभी शो जाती शं औय अऩसळद्श ऩदाथा ळयीय के फाशय नशीॊ आ ऩाते। इववे ऩेट भं जरन. फुजुग.ऎन. जो स्लास््म की दृत्रद्श वे कापी राबदामक शोता शं । व्रत कयने वे ळयीय भं िुस्ती-पुतॉ फनी यशती शं । योजाना कामा कयने लारे ऩािन तॊि को बी व्रत के फदन आयाभ सभरता शं । फच्िे. वॊक्रभण. कापी का वेलन कापी फढ़ जाता शै । इव ऩय सनमॊिण यखं। व्रत के दौयान कौनवे खाद्य ऩदाथा ग्रशण कयं ?  व्रत भं अडन का वेलन लस्जात शं । स्जव कायण ळयीय भं ऊजाा की कभी शो जाती शं ।  अनाज फक जगश परं ल वस्ब्जमं का वेलन फकमा जा वकता शं । इववे ळयीय को जरुयी ऊजाा सभरती शं ।  वुफश के वभम आरू को फ्राई कयके खामा जा वकता शं । आरू भं काफोशाइड्रे ट प्रिुय भािा भं शोता शै । इव सरए आरू खाने वे ळयीय को ताकत सभरती शै ।  वुफश एक सगराव दध ू त्रऩरं। दोऩशय के वभम पर मा जूव रं। ळाभ को िाम ऩी वकते शं ।  कई रोग व्रत भं एक फाय शी बोजन कयते शं । ऐवे भं एक सनस्द्ळत अॊतयार ऩय पर खा वकते शं । यात के खाने भं सवॊघाड़े के आटे वे फने ऩकलान खा वकते शं । . दं यािी औय एक यािी व्रत कयने का बी त्रलधान शं । नलयाि व्रत के धासभाक भशत्ल के अराला लैसासनक भशत्ल शं .जोळी नल फदनं तक िरने लारे इव ऩला ऩय शभ व्रत यखकय भाॊ के नौ अरग-अरग रूऩ की ऩूजा की जाती शं । इव दौयान घय भं फकमा जाने लारा त्रलसधलत शलन बी स्लास््म के सरए अत्मॊत राबप्रद शं । शलन वे आस्त्भक ळाॊसत औय लातालयण फक ळुत्रद्ध के अराला घय नकायात्भक ळत्रक्तमं का नाळ शो कय वकायात्भक ळत्रक्तमो का प्रलेळ शोता शं । नलयाि व्रत नलयाि भं नल याि वे रेकय वात यािी.ऩाॊि यािी. आॊलरा. ऩेळाफ भं जरन जैवी कई वभस्माएॊ ऩैदा शो वकती शं ।  एक वाथ खूफ वाया ऩानी ऩीने के फजाए फदन भं कई फाय नीॊफू ऩानी त्रऩएॊ।  ज्मादातय रोगो को उऩलाव भं अक्वय कब्ज की सळकामत शो जाती शं । इवसरए व्रत ळुरू कयने के ऩशरे त्रिपरा. ऩारक का वूऩ मा कये रे के यव इत्माफद ऩदाथो का वेलन कयं । इववे ऩेट वाप यशता शै ।  व्रत के दौयान िाम.

karyalay@gmail. 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.yolasite. gurutva_karyalay@yahoo.com.अक्टू फय 2011 10 भॊि सवद्ध त्रलळेऴ दै ली मॊि वूसि आद्य ळत्रक्त दग ु ाा फीवा मॊि (अॊफाजी फीवा मॊि) वयस्लती मॊि भशान ळत्रक्त दग ु ाा मॊि (अॊफाजी मॊि) वद्ऱवती भशामॊि(वॊऩूणा फीज भॊि वफशत) नल दग ु ाा मॊि कारी मॊि नलाणा मॊि (िाभुॊडा मॊि) श्भळान कारी ऩूजन मॊि नलाणा फीवा मॊि दस्षण कारी ऩूजन मॊि िाभुॊडा फीवा मॊि ( नलग्रश मुक्त) वॊकट भोसिनी कासरका सवत्रद्ध मॊि त्रिळूर फीवा मॊि खोफडमाय मॊि फगरा भुखी मॊि खोफडमाय फीवा मॊि फगरा भुखी ऩूजन मॊि अडनऩूणाा ऩूजा मॊि याज याजेद्वयी लाॊछा कल्ऩरता मॊि एकाॊषी श्रीपर मॊि भॊि सवद्ध त्रलळेऴ रक्ष्भी मॊि वूसि श्री मॊि (रक्ष्भी मॊि) भशारक्ष्भमै फीज मॊि श्री मॊि (भॊि यफशत) भशारक्ष्भी फीवा मॊि श्री मॊि (वॊऩूणा भॊि वफशत) रक्ष्भी दामक सवद्ध फीवा मॊि श्री मॊि (फीवा मॊि) रक्ष्भी दाता फीवा मॊि श्री मॊि श्री वूक्त मॊि रक्ष्भी गणेळ मॊि श्री मॊि (कुभा ऩृद्षीम) ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊि ऩूजन मॊि रक्ष्भी फीवा मॊि कनक धाया मॊि श्री श्री मॊि (श्री श्री रसरता भशात्रिऩुय वुडदमै श्री लैबल रक्ष्भी मॊि (भशान सवत्रद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊि) भशारक्ष्भमं श्री भशा मॊि) अॊकात्भक फीवा मॊि ताम्र ऩि ऩय वुलणा ऩोरीव (Gold Plated) वाईज 2” X 2” 3” X 3” 4” X 4” 6” X 6” 9” X 9” 12” X12” भूल्म 640 1250 1850 2700 4600 8200 ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीव (Silver Plated) वाईज 2” X 2” 3” X 3” 4” X 4” 6” X 6” 9” X 9” 12” X12” भूल्म 460 820 1250 2100 3700 6400 ताम्र ऩि ऩय (Copper) वाईज 2” X 2” 3” X 3” 4” X 4” 6” X 6” 9” X 9” 12” X12” मॊि के त्रलऴम भं असधक जानकायी शे तु वॊऩका कयं । GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418.com/ भूल्म 370 550 820 1450 2450 4600 . Our Website:.in.http://gk.blogspot.com/ and http://gurutvakaryalay.

त्रलष्णु त्रप्रमाम धीभफश तडनो रक्ष्भी:प्रिोदमात। याधा गामिी : ॐ लृऴ बानु: जामै त्रलधभशे . सळलत्रप्रमाम धीभफश तडनो दग ु ाा :प्रिोदमात। रक्ष्भी गामिी : ॐ भशाराक्ष्भमे त्रलधभशे .ऎन. त्रललेक का त्रलकाव शोता शं । व्मत्रक्त के ऩरयलायीकवुख वभृत्रद्ध भं लृत्रद्ध शोती शं ।  ऴद्षी सतसथ के फदन दे ली को भधु (ळशद. भशु.जोळी दे ली बागलत के आठलं स्कॊध भं दे ली उऩावना का त्रलस्ताय वे लणान शै । दे ली का ऩूजन-अिान-उऩावना-वाधना इत्माफद के ऩद्ळमात दान दे ने ऩय भनुष्म के सरमे रोक औय ऩयरोक दोनं वुख दे ने लारे शोते शं ।  प्रसतऩदा सतसथ के फदन दे ली का ऴोडळेऩिाय वे ऩूजन कयके नैलेद्य के रूऩ भं दे ली को गाम का घृत (घी) अऩाण कयना िाफशए। भाॊ को ियणं िढ़ामे गमे घृत को ब्राम्शणं भं फाॊटने वे योगं वे भुत्रक्त सभरती शै ।  फद्रतीमा सतसथ के फदन दे ली को िीनी का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। िीनी का बोग रागाने वे व्मत्रक्त दीघाजीली शोता शं ।  तृतीमा सतसथ के फदन दे ली को दध ू का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। दध ू का बोग रागाने वे व्मत्रक्त को दख ु ं वे भुत्रक्त सभरती शं ।  ितुथॉ सतसथ के फदन दे ली को भारऩुआ बोग रगाकय दान कयना िाफशए। भारऩुए का बोग रागाने वे व्मत्रक्त फक त्रलऩत्रत्त का नाळ शोता शं ।  ऩॊिभी सतसथ के फदन दे ली को केरे का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। केरे का बोग रागाने वे व्मत्रक्त फक फुत्रद्ध.अक्टू फय 2011 11 दे ली आयाधना वे असबद्श कामो की सवत्रद्ध शे तु  स्लस्स्तक. भशा शॊ वाम धीभफश तडनो शॊ व: प्रिोदमात। वयस्लती गामिी : ॐ लाग दे व्मै त्रलधभशे काभ याज्मा धीभफश तडनो वयस्लती :प्रिोदमात। ऩृ्ली गामिी : ॐ ऩृ्ली दे व्मै त्रलधभशे वशस्र भूयतमै धीभफश तडनो ऩृ्ली :प्रिोदमात। . त्रलद्लुत्रप्रमाम धीभफश तडनो लृॊदा: प्रिोदमात। वीता गामिी : ॐ जनक नॊफदडमे त्रलधभशे बुसभजाम धीभफश तडनो वीता :प्रिोदमात। शॊ वा गामिी : ॐ ऩयम्नडवाम त्रलधभशे . भध) का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। भधु का बोग रागाने वे व्मत्रक्त को वुॊदय स्लरूऩ फक प्रासद्ऱ शोती शं ।  वद्ऱभी सतसथ के फदन दे ली को गुड़ का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। गुड़ का बोग रागाने वे व्मत्रक्त के वभस्त ळोक दयू शोते शं ।  अद्शभी सतसथ के फदन दे ली को श्रीपर (नारयमर) का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। गुड़ का बोग रागाने वे व्मत्रक्त के वॊताऩ दयू शोते शं ।  नलभी सतसथ के फदन दे ली को धान के राले का बोग रगाकय दान कयना िाफशए। धान के राले का बोग रागाने वे व्मत्रक्त के रोक औय ऩयरोक का वुख प्राद्ऱ शोता शं । त्रलसबडन दे ली की प्रवडनता के सरमे गामिी भॊि दग ु ाा गामिी : ॐ सगरयजामे त्रलधभशे . फक्रस्रप्रमाम धीभफश तडनो याधा :प्रिोदमात। तुरवी गामिी : ॐ श्री तुल्स्मे त्रलधभशे .

इन नौ फदनं दे त्रल दग ु ाा की त्रलळेऴ आयाधना कयने का त्रलधान शभाये ळास्त्रो भं फतामा गमा शं । ऩयॊ तु इव लऴा तृसतमा सतथी का षम शोने के कायण नलयाि नौ फदन की जगश आठ फदनो के शंगे। ऩायॊ ऩरयक ऩद्धसत के अनुळाव नलयात्रि के ऩशरे फदन घट अथाात करळ की स्थाऩना कयने का त्रलधान शं । इव करळ भं ज्लाये (अथाात जौ औय गेशूॊ ) फोमा जाता शै । घट स्थाऩनकी ळास्त्रोक्त त्रलसध इव प्रकाय शं । घट स्थाऩना आस्द्वन प्रसतऩदा के फदन फक जाती शं । घट करळ स्थाऩना शे तु ळुब भुशूता    राब भुशूता वुफश 06:12 वे 07:42 तक अभृत भुशूता वुफश 07:42 वे 09:12 तक ळुब भुशूता वुफश 10:42 वे 12:12 तक के भुशूता घट स्थाऩना का श्रेद्ष भुशूता यशं गे। घट स्थाऩना शे तु वलाप्रथभ स्नान इत्माफद के ऩद्ळमात गाम के गोफय वे ऩूजा स्थर का रेऩन कयना िाफशए। घट स्थाऩना शे तु ळुद्ध सभट्टी वे लेदी का सनभााण कयना िाफशए. फपय उवभं जौ औय गेशूॊ फोएॊ तथा उव ऩय अऩनी इच्छा के अनुवाय सभट्टी.ऎन. िालर. ताॊफे. नलग्रश आफद दे लं का (सििा नषि 28 सवतॊफय 2011 को ऩूजन) तथा ऩुण्माशलािन (भॊिंच्िाय) दोऩशय 01:37:33 फजे वे रग यशा त्रलद्रान शं ।) घट स्थाऩना भं सििा नषि को अभथाता शो. ऴोडळभातृका. लैधसृ तमोग को लस्जात भाना गमा शं । वद्ऱघृतभातृका. िाॊदी मा वोने का करळ स्थात्रऩत कयना िाफशए। मफद ऩूणा त्रलसध-त्रलधान वे घट स्थाऩना कयना शो तो ऩॊिाॊग ऩूजन (अथाात गणेळस्थाऩना शे तु सििा नषि औय अॊत्रफका.ा त्रलसध-त्रलधान (28 सवतम्फय 2011)  स्लस्स्तक. तो घट स्थाऩना दोऩशय भं असबस्जत भुशूता मा अडम ळुब भुशूता भं कयना उत्तभ यशता शं । श्रीदग ु ाावद्ऱळती का वॊऩुट अथला वाधायण ऩाठ कयना िाफशए। ऩाठ की ऩूणााशुसत के फदन दळाॊळ शलन अथला दळाॊळ ऩाठ कयना िाफशए। घट स्थाऩना के वाथ दीऩक की स्थाऩना बी की जाती शै । ऩूजा के वभम घी का दीऩक जराएॊ तथा उवका गॊध. लरुण.अक्टू फय 2011 12 आस्द्वन नलयात्रि घट स्थाऩना भुशूत. तो स्लमॊ कयं । सनऴेध भाना गमा शं । अत् घट स्थाऩना इववे ऩूला कयना ळुब शोता शं । ब्राह्मण द्राया ऩद्ळमात स्थात्रऩत कयं कयाएॊ दे ली तथा की दे ली अथला भूसता प्रसतभाका ऴोडळोऩिायऩूलक ा ऩूजन कयं । इवके फाद त्रलद्रनो के भत वे इव लऴा ळुक्र प्रसतऩदा वे ळुरू शोने लारे ळायदीम नलयाि भं वूमोदमी नषि शस्त नषि यशे गा। शस्त नषि को ऩूजन शे तु उत्तभ भाना जाता शं । शं । इव सरमे वूमोदम वे 6.जोळी आस्द्वन ळुक्र प्रसतऩदा अथाात नलयािी का ऩशरा फदन। इवी फदन वे शी आस्द्वनी नलयाि का प्रायॊ ब शोता शं । जो अस्द्वन ळुक्र नलभी को वभाद्ऱ शोते शं . ल ऩुष्ऩ वे ऩूजन कयना िाफशए। ऩूजन के वभम इव भॊि का जऩ कयं - बो दीऩ ब्रह्मरूऩस्त्लॊ ह्यडधकायसनलायक। इभाॊ भमा कृ ताॊ ऩूजाॊ गृह्रॊस्तेज: प्रलधाम।। .12 फजे के फाद वे शी करळ (घट) की स्थाऩना कयना ळुबदामक यशे गा। मफद ऎवे मोग फन यशे शो.

उडशं नलयाि के एक फदन ऩूला वबी ऩूजन वाभग्री को एकत्रित कय रेना िाफशमे। स्जव स्थान ऩय भाॊ बगलती को स्थात्रऩत कयना शो कुरदे ली का ऩूजन कयना िाफशमे। उवके फाद भाता बगलती का ऩूजन अऩने कुर की ऩयॊ ऩया के अनुवाय कयना िाफशमे। नलयाि भं दग ु ाा वद्ऱळती का ऩाठ ऩूणा ऩाठ कयना असत उत्तभ शोता शं । लशाॊ भॊडऩ फनाने के सरमे उव स्थान को वभतर फनारे. स्थाऩना ल ऩूजन का वभम प्रात:कार शोता शं । इवके असतरयक्त िय रग्न के नलयाि का व्रत वबी लगा के बक्तो के सरए उत्तभ शोता शै । मफद िौघस्िडए अथला असबस्जत कार भं बी घट स्थाऩना की जा कयना उऩमुक्त शोता शं । वकती शै । ळायदीम नलयाि दे ली उऩावना के सरए असधक असत वयर ऩूजन त्रलसध: उत्तभ भाना गमा शै । वलाप्रथभ बक्त श्री गणेळजी का आह्लान कयने के फाद अऩनी जो बक्त नलयाि के दौयान दे त्रल का ळास्त्रोक्त त्रलसधत्रलधान वे ऩूजन कयना िाशं . फुधलाय. 28 सवतॊफय को ऩुष्ऩ। ळायदीम नलयाि आयॊ ब शो यशे शं । नलयाि भं भाॊ दग ु ाा दे ली का नलयाि व्रत: इवीसरए फद्रस्लबाल कडमा रग्न भं घट स्थाऩना का वभम कोई बक्त नौ फदन तक व्रत न यख वकं तो दो-यािी के व्रत प्रात: 7. अळोक. गल्रा मा अरभायी भं स्थात्रऩत कयने व्माऩाय भं त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । मॊि के प्रबाल वे बाग्म भं उडनसत.अक्टू फय 2011 13 वयर त्रलसध-त्रलधान वे ळायदीम नलयाि व्रत उऩावना  सिॊतन जोळी आस्द्वन ळुक्र प्रसतऩदा. वुगॊसधत प्राण-प्रसतत्रद्षत गणेळ रक्ष्भी मॊि को अऩने घय-दक ु ानओफपव-पैक्टयी भं ऩूजन स्थान.550 वे Rs.8200 तक . भान-प्रसतद्षा एलॊ व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती शं एलॊ आसथाक स्स्थभं वुधाय शोता शं । गणेळ रक्ष्भी मॊि को स्थात्रऩत कयने वे बगलान गणेळ औय दे ली रक्ष्भी का वॊमुक्त आळीलााद प्राद्ऱ शोता शं । Rs. कभर. अगरू. उव गणेळ रक्ष्भी मॊि स्थान मा बूसभको सभट्टी मा गाम के गोफय वे रीऩकय बूसभ का ळुत्रद्धकयण कय रं। त्रलद्रानो के भत अनुळाय प्रसतभा स्थात्रऩत कयने शे तु भॊडऩ नौ शाथ रॊफा औय वात शाथ िौड़ा फनाने का ळास्त्रोक्त त्रलधान शै । भॊडऩ फनाकय उवे त्रलसबडन ळृॊगाय वाभग्री वे वुवस्ज्जत कयं । भाॊ बगलती की प्रसतभा स्थात्रऩत कयने के सरए भॊडऩ के भध्मभ भं िाय शाथ रॊफी औय एक शाथ ऊॊिी लेदी फनारं। उव लेदी ऩय ये ळभी रार लस्त्र त्रफछारे। दे ली प्रसतभा शे तु भाॊ बगलती की प्रसतभा िाय बुजा लारी एलॊ सवॊश ऩय वलायी फकमे शुए शो लैवी शी प्रसतभा स्थात्रऩत कयना उत्तभ शोता शं । इव के ऩीछे का आध्मास्त्भक सवद्धाॊत शोता शं की बक्त की िायं फदळाओॊ वे वुयषा शो वके औय उवे वभस्त प्रकाय के वुख-वभृत्रद्ध ल ळाॊसत प्राद्ऱ शो। करळ स्थाऩीत कयने शे तु भॊि उच्िायण कयते शुए तीथा स्थरं के जर का आह्लान कय करळ की स्थाऩना कयनी िाफशमे।शलन लेदी त्रिकोण फनाएॊ औय उवऩय जुआये उगाएॊ। ऩूजन वाभग्री: िॊदन.39 तक वलाश्रद्ष े शै । अलश्म कयने िाफशमे अथाात ऩशरा औय अॊसतभ नलयाि का व्रत आह्लान. कऩूय.

भारा. ळनौ. वाफूत शल्दी.् आऩदाॊ शयते सनत्मभ ् रक्ष्भी सतद्षतु वलादा। ऩॊिोऩिाय ऩूजन कयने के ऩद्ळमात वॊकल्ऩ कयना िाफशएॊ। वॊकल्ऩ भं ऩुष्ऩ. जौ. वुलणा गणेळ ल दग ु ाा की प्रसतभा 2 (वुलणा उप्रब्ध न शो तो ऩीतर. द्ळेत िॊदन (श्रीखॊड िॊदन). सवॊदयू . बौभं. वगॊसधत उच्िायण कयं :- ॐ ऩृ्ली त्लमाधृता रोका दे त्रल त्मलॊ त्रलष्णुनाधृता। त्लॊ ि धायमभाॊ दे त्रल ऩत्रलिॊ कुरु िावनभ ्॥ पूर. शलन वाभग्री. श्रीपर (नारयमर). वसभधा.जोळी. अगयफत्ती.अभुक भावे 'अभुक ऩषे . योरी.ऎन. सतर.अक्टू फय 2011 14 नलयाि स्ऩेळर घट स्थाऩना त्रलसध  स्लस्स्तक. ऩॊिसभठाई. कुळा. भेला. सभठाई. शलन कुण्ड. दग ॊ ाय कयके ु ाा ऩूजन वे ऩूला िौकी को ळुद्ध कयके श्रृग िौकी वजारं। ळुत्रद्ध कयण औय आिभन के ऩद्ळमात िॊदन रगाना िाफशए। अनासभका उॊ गरी वे श्रीखॊड िॊदन रगाते शुए इव भॊि का उच्िायण कयं :- िडदनस्म भशत्ऩुण्मभ ् ऩत्रलिॊ ऩाऩनाळनभ. त्रलजम ठाकुय तत ऩद्ळमात शाथ धोकय. आबूऴण ल श्रृग ॊ ाय वाभग्री. दीऩक. ऩॊिाभृत ( दध ू . रार लस्त्र. केतौ एलॊ गुण त्रलसळद्शामा सतथौ 'अभुक' गोिोत्ऩडने 'अभुक 'नास्म्न ळभाा (लभाा इत्माफद ) वकरऩाऩषमऩूलक ा ॊ वलाारयद्श ळाॊसतसनसभत्तॊ वलाभॊगरकाभनमा श्रुसतस्भृत्मोक्तपरप्राप्त्मथं भनेस्प्वत कामा सवद्धमथं श्री दग ु ाा ऩूजनॊ ि अशॊ करयष्मे। तत्ऩूलाागॊत्लेन सनत्रलाघ्नताऩूलक ा कामा सभसरतोऩिाये गणऩसत ऩूजनॊ करयष्मे। सवद्धमथं मथा . करळ.अभुक मोग 'अभुक 'लावये 'अभुक यासळस्मे वूमे. रंग. कई रोग सभट्टी की प्रसतभा वे ऩूजन कयते शं ।). ळुक्रे. यषा वूि). पर. गुयौ. रकडीि की िौकी. सभठाई. िाॊदी का सवक्का. ऩुन: आवन ळुत्रद्ध भॊि का दग ु ाा ऩूजन वाभग्रीकराला (भौरी. ऊन का आवन. दशी. आयती की थारी. अषत (त्रफना टू टे िालर). आफद वबी वाभग्री थोड़ी-थोड़ी भािा भं रेकय वॊकल्ऩ भॊि का उच्िायण कयं :- तत ऩद्ळमात रार कऩडे का आवन त्रफछाकय गणऩसत एलॊ ॥ वॊकल्ऩ लाक्म॥ दग ु ाा भाता की प्रसतभाके वम्भुख फैठ जाए। शरय ॐ तत्वत l नभ् ऩयभात्भने श्री ऩुयाण ऩुरुऴोत्तभाम तत ऩद्ळमात आवन को इव भॊि वे ळुत्रद्ध कयण कयं : स्माद्य ब्राह्मणं फद्रतीम प्रशयाद्रे श्रीद्वेत्लायाश कारे लै ॐ अऩत्रलि : ऩत्रलिोला वलाालस्थाॊ गतोऽत्रऩला। म: स्भये त ् ऩुण्डयीकाषॊ व फाह्याभ्मडतय: ळुसि:॥ इन भॊिं का उच्िायण कयते शुए अऩने ऊऩय तथा आवन ऩय 3-3 फाय कुळा मा ऩुष्ऩाफद वे छीॊटं रगामं। तत ऩद्ळमात आिभन कयं : ॐ केळलाम नभ: ॐ नायामण नभ: ॐ भध्लामे नभ: ॐ गोत्रलडदाम नभ् श्री भद बगलते भशा ऩुरुऴस्म त्रलष्णो यासामा प्रलता भान -भडलडतये लस्तल अस्श्त्लस्श्तत्भे कल्मुगे कसर प्रथभ ियणे जम्फू द्रीऩे बयत खण्ड बायत लऴे आमाा लतांडतगात दे ळैक ऩुण्म षेि ऴत्रद्श वम्लस्तायाणाॊ भध्मे 'अभुक ' नासभन वॊलत्वये 'अभुक ' अमने 'अभुक 'िुतौ . याशौ. यक्त िॊदन. घी. ळशद. कभर गट्टे . करळ शे तु आभ के ऩल्रल. वुऩायी. ळकाया(िीनी) ). पर.अभुक सतथौ अभुक नषिे . फुधे. 5 वुऩायी. 5 ऩान के ऩत्ते . ऩान. घी. रूई इत्माफद. इि. ऩॊिभेला. १ श्रीपर (नारयमर).

7. तत ऩद्ळमात अघाा भं जर रेकय फोरं ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् अघ्मं वभऩामासभ.ळकाया शाथ भं ऩुष्ऩ रेकय बगलान गणेळ का ध्मान कयं । तलऩूजा कयोभद्य. अमन.3. नषि. िढ़ाएॊ ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् परॊ वभऩामासभ. रगाएॊ. मोग. ऩद्ळमात आिभनीम-स्नानीमॊ ॐ श्री नभ् इदॊ नानात्रलसध नैलेद्यासन खण्ड खाद्यासन दसध षीय घृतासन ि.शाथ भं अषत औय ऩुष्ऩ रेकय लरूण दे लता का करळ भं आलाशन कयं । . यखं. भुद्रा मसोऩलीतॊ वभऩामासभ.अक्टू फय 2011 15 त्रलळेऴ वुझाल: उक्त वॊकल्ऩ लाक्म भं जशाॉ-जशाॉ 'अभुक' तत ऩद्ळमात प्रकाय श्रीखॊड िॊदन फोरकय श्रीखॊड िॊदन ळब्द आमा शै . तत ऩद्ळमात त्रलऴभ वॊख्मा (1. ऩष.21 आफद) भं दीऩक जराकय सनयाजन अथाात आयसत कयं औय बगलान की आयती गामं। तत ऩद्ळमात शाथ भं पूर रेकय गणेळ जी को अत्रऩात कयं . अऩनी याळी एलॊ अऩने नाभ का उच्िायण श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्. कयना िाफशए। तत ऩद्ळमात दल ू ाा औय त्रलल्फऩि बी गणेळ जी को िढ़ाएॊ। गणऩसत ऩूजन:- ऩूजन के ऩद्ळमात गणेळ जी को बोग अत्रऩत ा कयं : बायतीम ळास्त्रोक्त ऩयॊ ऩया के अनुळाय फकवी बी ऩूजा भं वलाप्रथभ गणेळ जी की ऩूजा की जाती शं । गजाननम्बूतगणाफदवेत्रलतॊ कत्रऩत्थ जम्फू परिारुबषणभ ्। उभावुतॊ ळोक त्रलनाळकायकॊ नभासभ त्रलघ्नेद्वयऩादऩॊकजभ ्। तत ऩद्ळमात आलाशन कयं : आह्लान शे तु शाथ भं अषत रेकय इव भॊि का उच्िायण कयं :- श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् इशागच्छ इश सतद्ष सनम्न भॊिो का उच्िायण कयते शुले वॊफॊसधत लस्तु श्री गणेळ जी को अत्रऩत ा कयं । शाथ भं पूर रेकय ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् आवनॊ वभऩामासभ. सभद्शान अत्रऩात कयने के सरए भॊि.11. तत ऩद्ळमात पर रेकय गणऩसत ऩय उच्िायण कयते शुए अषत को गणेळ जी ऩय िढाि दं । तत त्रलनामकाम ऩान वुऩायी िढ़ामं. नारयमर ऩय लस्त्र रऩेट कय करळ ऩय स्थात्रऩत तत ऩद्ळमात ऩुनयािभनीमभ ्. सतसथ. लशाॉ क्रभळ: लताभान वॊलत्वय.9. दल ू ाा. अषत.5.ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् आगच्छ दे ल दे लेळ. तत ऩद्ळमात दस्षणा यखते शुले इव भॊि का उच्िायण कयं ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् द्रव्म दस्षणाॊ वभऩामासभ. तत ऩद्ळमात तीन प्रदस्षणा कयं । इवी प्रकाय वे अडम वबी दे लताओॊ का ऩूजन कयं । गणेळ के स्थान स्जव दे लता की ऩूजा कयनी शो ऩय उव दे लता के नाभ का उच्िायण कयं । तत ऩद्ळमात लस्त्र रेकय ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् करळ ऩूजन:- लस्त्रॊ वभऩामासभ. इदॊ आिभनीमॊ ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्. तत ऩद्ळमात ताम्फूरॊ वभऩामासभ. गौयीऩुि त्रलनामक। ॐ सवत्रद्ध वभऩामासभ. आशायो बक्ष्म बोज्मॊ गृह्यताॊ गणनामक। प्रवाद अत्रऩत ा कयने के ऩद्ळमात आिभन कयामं. ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् यक्त िॊदन रगाएॊ: इदभ यक्त िॊदनभ ् रेऩनभ ् ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ्. कयं . रुतु. वूमााफद की याळी तथा तत ऩद्ळमात सवडदयू िढ़ाएॊ "इदॊ सवडदयू ाबयणॊ रेऩनभ ् ॐ अऩने गोि. अिसतद्ष ऩयभेद्वय॥ श्री ॐ सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् आिभनीमॊ वभऩामासभ. घड़े अथला रोटे ऩय कराला (भौसर) फाॊधकय करळ के तत ऩद्ळमात मसोऩलीत-ॐ श्री सवत्रद्ध त्रलनामकाम नभ् ऊऩय आभ का ऩल्रल यखं। करळ भं वुऩायी. भॉव.

श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। दल ू ााकुॊयासन वभऩामासभ ॥ तत ऩद्ळमात आबूऴण अत्रऩत ा कयं .श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै दग ु ाा ऩूजन: ऩद्ळमात लस्त्रॊ वभऩामासभ। तत ऩद्ळमात स्जव प्रकाय गणेळ जी की ऩूजा की शै उवी तत नभ:। कयाएॊ- दग ु ाादेव्मै नभ:। गडधोदकस्नानॊ वभऩामासभ॥ तत ऩद्ळमात ळुद्धोदक स्नान कयाएॊ- दग ु ाादेव्मै नभ:। ळुद्धोदकस्नानॊ वभऩामासभ॥ श्रीजगदम्फामै श्रीजगदम्फामै श्रीजगदम्फामै तत ऩद्ळमात कज्जर अत्रऩत ा कयं .स्नानाडते ऩुनयािभनीमॊ जरॊ वभऩामासभ। कयाएॊ- दग ु ाादेव्मै नभ:। ऩॊिाभृतस्नानॊ वभऩामासभ॥ ऩद्ळमात गडधोदक-स्नान आिभनीमॊ जरॊ तत ऩद्ळमात वौबाग्म वूिि अत्रऩत ा कयं .श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। स्नानाथं जरॊ वभऩामासभ॥ तत ऩद्ळमात स्नानाॊग आिभन.श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै वळत्रक्तकभालाशमासभ.श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। स्नान ॥ नभ:। कुॊकुभ वभऩामासभ ॥ तत ऩद्ळमात आलाशन कयं : ऩॊिाभृत वभऩामासभ तत ऩद्ळमात िडदन अत्रऩत ा कयं .श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। दीऩॊ दळामासभ॥ तत ऩद्ळमात नैलेद्य अत्रऩत ा कयं नभ:। नैलेद्यॊ सनलेदमासभ॥ श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै तत ऩद्ळमात जर अत्रऩात कयं .नैलेद्याडते त्रिफायॊ आिभनीम जरॊ वभऩामासभ। तत ऩद्ळमात पर अत्रऩत ा कयं नभ:। परासन वभऩामासभ॥ श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै . ॐ बूबल ुा : स्ल: बो लरुण इशागच्छ इशसतद्ष। स्थाऩमासभ ऩूजमासभ। प्रकाय लरूण दे लता की त्रलसधलत ऩूजा कयं । दग ु ाा ऩूजन शे तु वफवे ऩशरे भाता दग ु ाा का ध्मान कयं : वला भॊगर भागॊल्मे सळले वलााथा वासधके । ळयण्मेिमस्म्फके गौयी नायामणी नभोस्तुते ॥ तत ऩद्ळमात पूर अत्रऩात कयते शुए उच्िायण कयं । श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। आवानाथे ऩुष्ऩास्ण वभऩामा सभ॥ तत ऩद्ळमात अघ्मा दं .श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। शस्तमो: अघ्मं वभऩामासभ॥ तत ऩद्ळमात आिभन अत्रऩत ा कयं .श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। आबूऴणासन वभऩामासभ ॥ तत ऩद्ळमात ऩुष्ऩभारा अत्रऩत ा कयं - श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। ऩुष्ऩभारा वभऩामासभ ॥ तत ऩद्ळमात धूऩ रगाएॊ.श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। धूऩभाघ्राऩमासभ॥ तत ऩद्ळमात दीऩ जराएॊ.श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। वौबाग्म वूिॊ वभऩामासभ ॥ नभ:। िडदनॊ वभऩामासभ ॥ तत ऩद्ळमात शरयद्रािूणा अत्रऩत ा कयं - श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। शरयद्राॊ वभऩामासभ ॥ तत ऩद्ळमात कुॊकुभ अत्रऩत ा कयं .ळुद्धोदकस्नानाडते आिभनीमॊ मजभानोशत्रलासब:। अशे डभानोलरुणेश फोध्मुरुळॊ वभानऽआमु: जरॊ वभऩामासभ। प्रभोऴी:। अस्स्भन करळे लरुणॊ वाॊगॊ वऩरयलायॊ वामुध तत ऩद्ळमात लस्त्र अत्रऩत ा कयं -.श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। कज्जरॊ वभऩामासभ ॥ तत ऩद्ळमात दल ू ााकुॊय अत्रऩात कयं .श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। आिभनॊ वभऩामासभ॥ तत ऩद्ळमात स्नान कयाएॊ.श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। सवडदयू ॊ वभऩामासभ ॥ दग ु ाादेलीभालाशमासभ॥ तत लस्त्राडते तत ऩद्ळमात सवडदयू अत्रऩात कयं .अक्टू फय 2011 16 ॐ त्तत्लामासभ ब्रह्मणा लडदभानस्तदाळास्ते तत ऩद्ळमात आिभन दं .

व्माऩाय लृत्रद्ध. त्रफस्ल्र नार. भायण.स्जस्वे धन प्रसद्ऱ. कोटा किेयी के कामा. शस्तजोडी (शाथा जोडी). बूतप्रेत फाधा. बाग्म रक्ष्भी फदब्फी भे रघु श्री फ़र.Rs. त्रललाश मोग. वम्भोशन. भाम जार. लळीकयण. ळिु बम. 91+ 9238328785 c . िोय बम जेवी अनेक ऩये ळासनमो वे यषा शोसत शै औय घय भे वुख वभृत्रद्ध फक प्रासद्ऱ शोसत शै . इडद्र जार. कारीवफ़ेद-रार गुॊजा. ऩातार तुभडी जेवी अनेक दर ा वाभग्री शोती शै । ु ब भूल्म:. 8200 तक उप्रब्द्ध गुरुत्ल कामाारम वॊऩका : 91+ 9338213418. ळॊख. सवमाय सवडगी. 910 वे Rs. तास्डिक फाधा.श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। द सनयारम्फो रम्फोदय जनसन कॊ मासभ ळयण ्॥5॥ तत ऩद्ळमात आयती कयं .अक्टू फय 2011 17 तत ऩद्ळमात ताम्फूर अत्रऩात कयं नभ:। ताम्फूरॊ वभऩामासभ॥ श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै भमा ऩॊिाळीतेयसधकभऩनीते तु लमसव । इदानीॊ िेडभातस्तल कृ ऩा नात्रऩ बत्रलता तत ऩद्ळमात दस्षणा दं .श्रीजगदम्फामै दग ु ाादेव्मै नभ:। सनयातॊको यॊ को त्रलशयसत सियॊ कोफटकनकै् । आयासताकॊ वभऩामासभ॥ तलाऩणे कणे त्रलळसत भनुलणे परसभदॊ ऩूजन भं शुई िुफट के सनलायण शे तु षभा प्राथना कयं । जन् को जानीते जनसन जऩनीमॊ जऩत्रलधौ ॥6॥ स्षणाॊ वभऩामासभ॥ षभा प्राथाना न िाह्लानॊ ध्मानॊ तदत्रऩ ि न जाने स्तुसतकथा्। न जाने भुद्रास्ते तदत्रऩ ि न जाने त्रलरऩनॊ अतस्त्लाॊ वॊमािे जनसन जननॊ मातु भभ लै त्रलधेमाळक्मत्लात्तल ियणमोमाा च्मुसतयबूत ् । भृडाणी रुद्राणी सळलसळल बलानीसत जऩत् ॥8॥ तदे तत्षतव्मॊ जनसन वकरोद्धारयस्ण सळले कुऩुिो जामेत क्लसिदत्रऩ कुभाता न बलसत ॥2॥ ऩृसथव्माॊ ऩुिास्ते जनसन फशल् वस्डत वयरा् फकॊ रूषसिॊतन ऩयै नक ा ृ तॊ लिोसब् । धत्वे कृ ऩाभुसितभम्फ ऩयॊ तलैल ॥9॥ भदीमोऽमॊत्माग् वभुसितसभदॊ नो तल सळले कुऩुिो जामेत ् क्लसिदत्रऩ कुभाता न बलसत ॥3॥ ऩरयत्मक्तादे ला त्रलत्रलधत्रलसधवेलाकुरतमा नायासधतासव त्रलसधना त्रलत्रलधोऩिायै ् श्माभे त्लभेल मफद फकॊिन भय्मनाथे ऩयॊ तेऴाॊ भध्मे त्रलयरतयरोऽशॊ तल वुत् । कुऩुिो जामेत क्लसिदऩ कुभाता न बलसत ॥4॥ बलासन त्लत्ऩास्णग्रशणऩरयऩाटीपरसभदभ ् ॥7॥ न त्रलसानाऩेषा ळसळभुस्ख वुखेच्छात्रऩ न ऩुन् । त्रलधेयसानेन द्रत्रलणत्रलयशे णारवतमा तथात्रऩत्लॊ स्नेशॊ भसम सनरुऩभॊ मत्प्रकुरुऴे कऩारी बूतेळो बजसत जगदीळैकऩदलीॊ न भोषस्माकाॊषा बलत्रलबल लाॊछात्रऩिनभे ऩयॊ जाने भातस्त्लदनुवयणॊ क्रेळशयणभ ्॥1॥ न ला दत्तॊ दे त्रल द्रत्रलणभत्रऩ बूमस्तल भमा । सिताबस्भारेऩो गयरभळनॊ फदक्ऩटधयो जटाधायी कण्ठे बुजगऩतशायी ऩळुऩसत् । न भॊिॊ नोमॊिॊ तदत्रऩ ि न जाने स्तुसतभशो जगडभातभाातस्तल ियणवेला न यसिता द्वऩाको जल्ऩाको बलसत भधुऩाकोऩभसगया आऩत्वु भग्न् स्भयणॊ त्लदीमॊ कयोसभ दग ु े करुणाणालेसळ । नैतच्छठत्लॊ भभ बालमेथा् षुधातृऴाताा जननीॊ स्भयस्डत॥10॥ जगदॊ फ त्रलसििभि फकॊ ऩरयऩूणा करुणास्स्त सिडभसम । अऩयाधऩयॊ ऩयालृतॊ नफश भातावभुऩेषते वुतभ ् ॥11 ॥ भत्वभ् ऩातकी नास्स्तऩाऩघ्नी त्लत्वभा नफश । एलॊ सात्ला भशादे त्रलमथामोग्मॊ तथा कुरु ॥12॥ बाग्म रक्ष्भी फदब्फी वुख-ळास्डत-वभृत्रद्ध की प्रासद्ऱ के सरमे बाग्म रक्ष्भी फदब्फी :.

अिाना. दरयद्र मोग. स्जववे ग्रशं वे प्राद्ऱ शोने लारे असनद्श प्रबाल वे यषा शोकय ग्रश जनीत ऩीडाएॊ ळाॊत शो जाती शं । . ग्रशण मोग. कारवऩा एलॊ भाॊगसरक दोऴ. बम. वाधना. डाफकनी. तो भाॊ दग ु ाा फक प्रभुख नौ ळत्रक्तमाॉ जाग्रत शो जाती शं . ऩय िरा आयशा शं । क्मोफक भाॊ दग ु ाा ने वबी दे ल-दानल- अवुय-भनुष्म वबी प्राणी भाि का उद्धाय फकमा शं । इवसरमे फकवी बी प्रकाय के जाद-ू टोना. बूत. स्जस्वे व्मत्रक्त जीलन बय अथक ऩरयश्रभ कयने के उऩयाॊत बी द्ु ख बोगता यशता शं । स्जवकी ळाॊसत वॊबलत् अडम फकवी ऩूजा. दानल. यत्न एलॊ अडम उऩामो वे वयरता वे नशीॊ शोती शं । अथला ऩूणा ग्रश ऩीडाए ळाॊत नशीॊ शो ऩाती शं । एवी स्स्थती भं आफद ळत्रक्त भाॊ बगलती दग ु ाा के नल रुऩो फक आयाधना वे व्मत्रक्त वयरता वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकता शं । बगलान याभ ने बी इवके प्रबाल वे प्रबात्रलत शोकय अऩनी दळ अथला आठ नशीॊ फस्ल्क नलधा बत्रक्त का शी उऩदे ळ फदमा शै । अनाफद कार वे फक दे लता. योग.अक्टू फय 2011 18 नलाणा भॊि वे शोती शं नलग्रश ळाॊसत  सिॊतन जोळी दग ु ाा ऩूजा ळत्रक्त उऩावना का भशाऩला शं । ळायदीम नलयाि के फदनो भं ग्रशं के दष्ु प्रबाल वे फिने के सरए भाॊ दग ु ाा की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शै । ळत्रक्त एलॊ बत्रक्त के वाथ वाॊवारयक वुखं को दे ने के सरए लताभान वभम भं मफद कोई दे लता शै । तो लश एक भाि दे ली दग ु ाा शी शं । वाभाडमतमा वभस्त दे ली-दे लता शी ऩूजा का अच्छा ऩरयणाभ दे ते शं । शभाये धभा ळास्त्रं के अनुळाय: 'करौ िण्डी त्रलनामकौ’ अथाात् कसरमुग भं दग ु ाा एलॊ गणेळ फश ऩूणा एलॊ तत्कार पर दे ने लारे शं । ताॊत्रिक ग्रडथं के अनुळाय: नौयत्निण्डीखेटाद्ळ जाता सनसधनानढलाद्ऱोनढलगुण्ठ दे व्मा। अथाात् नौ यत्न. एलॊ अडमाडम मोग अथला दोऴ एवे शं . स्जववे नलं ग्रशं को सनमॊत्रित कयती शं . नौ दग ु ाा के अनुद्षान वे वलाथा वम्बल शै । इवका तत्ऩमा शं फक नलदग ु ाा नलग्रशं के सरए शी प्रलसतात शुईं शं । अवुयं वे रेकय भनुष्मं भं फकवी बी प्रकायका वॊकट शोने दै ली आऩदाओॊ वे भुत्रक्त प्राद्ऱ कयने का वयर वाधन दे ली वभस्त रोक भं भाॊ दग ु ाा फक अयाधना कयने का प्रिरन ज्मोसतऴ फक द्रद्शी भं नलग्रश वॊफॊसधत ऩीड़ा एलॊ फक आयाधना शं । मफद जडभ कुॊडरी भं िॊडार मोग. त्रऩळाच्ि. त्रलऴ मोग. ळाफकनी आफद वे भुत्रक्त फक प्रासद्ऱ के सरमे भाॊ दग ु ाा फक त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजा-अिाना वलादा परदामक यशीॊ शै । दग ु ाा दख ु ं का नाळ कयने लारी शं । इवसरए नलयात्रि के फदनो भं जफ उनकी ऩूजा ऩूणा श्रद्धा औय त्रलद्वाव वे फक जाती शं . नौ सनसध फक प्रासद्ऱ. नौ ग्रशं फक ऩीड़ा वे भुत्रक्त.

मै वे वातलं नलयाि को दग ु ाा फक वद्ऱभ ळत्रक्त कारयात्रि फक उऩावना फक जाती शं । स्जव भं ळसन ग्रश को सनमॊत्रित ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुॊडामै त्रलच्िे नल अषयं लारे इव अद्भत ु नलाणा भॊि के शय अषय भं कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । दे ली दग ु ाा फक एक-एक ळत्रक्त वभामी शुई शं . नलाणा भॊि का ऩॊिभ फीज भॊि भुॊ शं . भुॊ वे ऩाॉिले उऩावना फक जाती शं । स्जव भं फृशस्ऩसत ग्रश को शोती शं । प्रसतफदन स्नान इत्माफदवे ळुद्ध शोकय नलाणा भॊि का जाऩ अलश्म कयना िाफशए। नलाणा भॊि के नौ अषयं भॊि के ऩशरे ॐ अषय जोड़कय वभान फश परदामक सवद्ध शोता शं । इवभं रेव भाि बी नलग्रशो के दष्ु प्रबालो वे यषा प्रासद्ऱ शे तु नलाणा भॊि का अऩनी रार फकताफ कुॊडरी वे उऩिाय जासनमे भाि RS:. नलाणा भॊि का अद्शभ फीज भॊि त्रल शं . नलाणा भॊि का नलभ फीज भॊि िै शं . कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । काभ औय भोष इन िाय फक प्रासद्ऱ भं बी वशामक सवद्ध नलयाि को दग ु ाा फक तृतीम ळत्रक्त िॊद्रघॊटा फक उऩावना जऩ त्रलधान लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । 108 दाने फक भारा वे कभ वे कभ तीन भारा जाऩ नलयाि को दग ु ाा फक ितुथा ळत्रक्त कूष्भाण्डा फक दग ु ाा वद्ऱळती के अनुळाय कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । बी कय वकते शं ॐ रगाने वे बी मश नलाणा भॊि के नलयाि को दग ु ाा फक ऩॊिभ ळत्रक्त स्कॊदभाता फक वॊदेश नशीॊ शं । अत् भाॊ बगलती दग ु ाा फक कृ ऩा प्रासद्ऱ एलॊ सनमॊत्रित कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । जाऩ ऩूणा सनद्षा एलॊ श्रद्धा वे कय वकते शं । 3. ह्रीॊ वे दव ू ये उऩावना फक जाती शं । स्जव भं केतु ग्रश को सनमॊत्रित उऩावना फक जाती शं । स्जव भं िॊद्र ग्रश को सनमॊत्रित इव नलाणा भॊि दग ु ाा फक नलो ळत्रक्तमाॉ व्मत्रक्त को धभा. स्जव का 8. नलाणा भॊि का ितुथा फीज भॊि िा शं . अथा. नलाणा भॊि का वद्ऱभ फीज भॊि मै शं . नलाणा भॊि का फद्रतीम फीज भॊि ह्रीॊ शं . त्रल वे आठलं 1. ऐॊ वे प्रथभ उऩावना फक जाती शं । स्जव भं याशु ग्रश को सनमॊत्रित उऩावना फक जाती शं । स्जव भं वूमा ग्रश को सनमॊत्रित 9.अक्टू फय 2011 19 दग ु ाा फक नल ळत्रक्त को जाग्रत कयने शे तु ळास्त्रं भं नलाणा 6. डा वे छठे नलयाि नल का अथाात नौ एलॊ अणा का अथाात अषय शोता शं । जाती शं । स्जव भं ळुक्र ग्रश को सनमॊत्रित कयने लारी भॊि का जाऩ कयने का त्रलधान शं । (नल+अणा= नलाणा) इवी कायण नलाणा नल अषयं लारा प्रबाली भॊि शं । नलाणा भॊि को दग ु ाा फक छठी ळत्रक्त कात्मामनी फक उऩावना फक ळत्रक्त वभाई शुई शं । 7. क्रीॊ वे तीवये फक जाती शं । स्जव भं भॊगर ग्रश को सनमॊत्रित कयने 4.450 . िा वे िौथे उऩावना फक जाती शं । स्जव भं फुध ग्रश को सनमॊत्रित 5. नलाणा भॊि का तृतीम फीज भॊि क्रीॊ शं . नलाणा भॊि का ऴद्ष फीज भॊि डा शं . नलाणा भॊि का प्रथभ फीज भॊि ऐॊ शं . िै वे नलभं वॊफॊध एक-एक ग्रशं वे शं । नलयाि को दग ु ाा फक प्रथभ ळत्रक्त ळैर ऩुिी फक नलयाि को दग ु ाा फक अद्शभ ळत्रक्त भशागौयी फक कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । नलयाि को दग ु ाा फक नलभ ळत्रक्त सवत्रद्धदािी फक नलयाि को दग ु ाा फक फद्रतीम ळत्रक्त ब्रह्मिारयणी फक कयने लारी ळत्रक्त वभाई शुई शं । 2.

भशाकारी भशारक्ष्भी भशावयस्लत्म् दे लता्. त्रलद्रान ब्राह्मण अथला जानकाय की वराश वे कयना िाफशए। नलाणा भोशन भडि: नलाणा भोशन भडि के फायश राख जऩ कयने का त्रलधान शं । इव प्रमोग को कयने शे तु वात कुओॊ मा नफदमं का जर ताम्रकरळ भं रेकय उवभं आभ के ऩत्ते डारकय सनत्म उवी ऩानी वे स्नान कयना िाफशए। रराट ऩय ऩीरे िडदन का सतरक कयना िाफशए औय ळयीय ऩय ऩीरे यॊ ग के लस्त्र शी धायण कयने िाफशए औय ऩीरे यॊ ग के आवन का प्रमोग कयना िाफशए। वाधक को ऩस्द्ळभ की तयप भुॊश नलाणा भोशन भडि: ॐ क्रीॊ क्रीॊ ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे (अभुकॊ) क्रीॊ क्रीॊ भोशनभ ् कुरु कुरु क्रीॊ क्रीॊ स्लाशा। नलाणा उच्िाटन भडि: *** नलाणा उच्िाटन भडि के िौफीव राख जऩ कयने का त्रलधान शं । इवभं तीन कुओॊ का जऩ ताम्रकरळ भं रेकय यखना िाफशए औय उवी जर वे सनत्म स्नान कयना िाफशए। इव प्रमोग को ऩूला फदळा की तयप भुशॊ कयके जऩ कयना िाफशए। जऩ के सरए रार लस्त्र का आवन त्रफछाना िाफशए ल वाधक को बी रार यॊ ग के लस्त्र धायण कयने िाफशए। इव प्रमोग को फीव फदनो भं वॊऩडन कयने का त्रलधान शं । िौफीव राख भडि जऩ कयने वे मश कामा सवद्ध शोता शं । नलाणा उच्िाटन भडि: ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे (अभुकॊ) पट् उच्िाटनॊ कुरु कुरु स्लाशा। नलाणा लळीकयण भडि: *** इव प्रमोग को फीव फदनो भं वॊऩडन कयने का त्रलधान शं । नदी. अस्ग्नलामु वूमाास्तत्लासन. गामत्र्मुस्ष्णगनुद्शुबश्छॊ दाॊसव. ह्रं कीरकभ ्. कामा सनदे ळ जऩे त्रलसनमोग। नलाणा भडि: ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे॥ नलाणा बेद भडि: ळास्त्रं भं नलाणा भडि को अऩने आऩ भं अत्मडत सवद्ध एलॊ प्रबालमुक्त भाना गमा शं । नलाणा भडि को भडि औय तडि दोनो भं वभान रुऩ वे प्रमोग फकमा जाता शं । नलाणा भडि के ळीघ्र प्रबात्रल प्रमोग आऩके भागादळान शे तु फदमे जायशे शं । िेतालनी: नलाणा भडि का प्रमोग असत वालधानी वे एलॊ मोग्म गुरु.अक्टू फय 2011 20 नलाणा भडि वाधना  सिॊतन जोळी कयके फैठना िाफशए। फायश राख भडि जऩने वे मश कामा नलाणा भडि वाधना सवद्ध शोता शं । त्रलसनमोग्ॐ अस्म श्री नलाणा भॊिस्म ब्रह्मा त्रलष्णु भशे द्वया ऋत्रऴ्. यक्तदॊ सतका दग ु ाा भ्राभमो फीजासन. नॊदजा ळाकुॊबयी बीभा् ळक्तम्. ताराफ मा कुएॊ के जर वे स्नान कयके वाधक को दस्षण फदळा की तयप भुॊश कयके फैठना िाफशए। तथा वपेद आवन त्रफछाना िाफशए औय वपेद लस्त्र धायण कयने िाफशए। फीव राख भडि जऩ कयने वे मश कामा सवद्ध शोता शं । नलाणा लळीकयण भडि: लऴट् ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे (अभुकॊ) लऴट् भे लश्मॊ कुरु कुरु स्लाशा। .

91+ 9238328785 Mail Us: gurutva. ु ब  वशस्त्राषी रक्ष्भी आफद्ध मॊि  भनोलाॊसछत कामा सवत्रद्ध मॊि  ऩूणा ऩौरुऴ प्रासद्ऱ काभदे ल मॊि  बाग्मोदम मॊि  याज्म फाधा सनलृत्रत्त मॊि  गृशस्थ वुख मॊि  ळीघ्र त्रललाश वॊऩडन गौयी अनॊग मॊि  आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ मॊि  योग सनलृत्रत्त मॊि  वाधना सवत्रद्ध मॊि  ळिु दभन मॊि उऩयोक्त वबी मॊिो को द्रादळ भशा मॊि के रुऩ भं ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे भॊि सवद्ध ऩूणा प्राणप्रसतत्रद्षत एलॊ िैतडम मुक्त फकमे जाते शं । स्जवे स्थाऩीत कय त्रफना फकवी ऩूजा अिाना-त्रलसध त्रलधान त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418. .in.com.अक्टू फय 2011 21 नलाणा त्रलद्रे ऴण भडि: नलाणा स्तॊबन भडि: इव प्रमोग भं वाधक को ऩूला फदळा की तयप भुॊश कयके फैठना िाफशए। तथा बूये यॊ ग का आवन त्रफछाना िाफशए। ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै (अभुकॊ) त्रलद्रे ऴणॊ कुरु कुरु स्लाशा। वोरश राख भडि जऩ कयने वे मश कामा सवद्ध शोता शं । नलाणा भशाभडि: नलाणा स्तॊबन भडि: इव भडि के उच्िायण भाि वे दे ली भाॊ प्रवडन शोती शं । ॐ ठॊ ठॊ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे (अभुकॊ) ह्रीॊ लािॊ भुखॊ ऩदॊ स्तॊबम ह्रीॊ स्जह्लाॊ कीरम ह्रीॊ फुत्रद्धॊ त्रलनाळम त्रलनाळम ह्रीॊ ॐ ठॊ ठॊ स्लाशा। मश वॊऩूणा नलाणा भशाभॊि शं । नलाणा भशाभडि: ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ भशादग ु े नलाषयी नलदग ु े नलास्त्भके *** नलिॊडी भशाभामे भशाभोशे भशामोग सनद्रे जमे भधुकैटब इव प्रमोग भं वाधक को उत्तय फदळा की तयप भुॊश कयके त्रलनासळनी यक्त फीजाॊतके सनळुॊब ध्लॊसवसन ळुॊब दऩास्घ्न नलाणा त्रलद्रे ऴण भडि: त्रलद्रात्रलस्ण भफशऴावुय भफदा सन धूम्र रोिन वॊशॊिी िॊडभुॊड फैठना िाफशए। तथा कारे यॊ ग का आवन त्रफछाना िाफशए। इव प्रमोग को फीव फदन भं वॊऩडन कयने का त्रलधान शं । तेयश राख भडि जऩ कयने वे मश कामा सवद्ध शोता शं । वाधना के दौयान जर भं सतर डारकय स्नान कयना िाफशए। दे त्रल अद्शादळ फाशुके कऩार खट्लाॊग ळूर खड्ग खेटक धारयस्ण सछडन भस्तक धारयस्ण रुसधय भाॊव बोस्जनी वभस्त बूत प्रेताफद मोग ध्लॊसवसन ब्रह्मेडद्राफद स्तुते दे त्रल भाॊ यष यष भभ ् ळिून ् नाळम ह्रीॊ पट् ह्रूॊ पट् ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे॥ द्रादळ भशा मॊि मॊि को असत प्रासिन एलॊ दर ा मॊिो के वॊकरन वे शभाये लऴो के अनुवॊधान द्राया फनामा गमा शं । ु ब  ऩयभ दर ा लळीकयण मॊि.karyalay@gmail. gurutva_karyalay@yahoo.

जोळी ळास्त्रं भं दग ु ााद्शाषय भडि को अत्मडत गोऩनीम औय सवत्रद्धदामक भाना गमा शं । दग ु ााद्शाषय भडि के फायं भं ळास्त्रोक्त लणान शं वाषात ् सवत्रद्धप्रदो भॊिो भॊि - दग ु ाामा् कसरनाळन्। धॊ सधॊ धुभ धुजत ा े ऩत्नी लाॊ लीॊ फूभ लास्ग्धद्वरय। क्रॊ क्रीॊ क्रॊू कासरका दे ली ळॊ ऴीभ ळूॊ भं ळुबभ कुरु॥ मफद ऩत्नी मश प्रमोग कय यशी शं तो ऩत्नी की जगश ऩसत ळब्द का उच्िायण कये प्रमोग त्रलसध –  अद्शाषयो अद्श सवत्रद्धळो गोऩनीमो फदगॊफयै ्। ॐ अस्म श्री दग ु ााद्शाषय भॊिस्म भशे द्वय ऋत्रऴ्.ह्रीॊ ळत्रक्त. ॐ कीरकाम नभ् इसत फदगफॊध्. तो सनम्न भॊि का जाऩ कयने वे ऩसत-ऩत्नी के त्रफिभं ळाॊसत का लातालयण फनेगा दग ु ााद्शाषय भडि वाधना  स्लस्स्तक. वॊतान प्रासद्ऱ. ऋण-योग आफद ऩीडाि वे भुत्रक्त प्राद्ऱ शोती शं औय व्मत्रक्त को जीलन भं वॊऩूणा वुखं की प्रासद्ऱ शो इव के सरमे मश भडि अिूक एलॊ सवत्रद्धदामक शं । . तो आऩ शभवे वॊऩका कय अडम उऩाम जान वकते शं । दग ु ााद्शाषय भडि : पर: ॐ ह्रीॊ दॊ ु दग ु ाामै नभ:॥ उक्त भडि के एक राख जऩ कयने वे मश भडि सवद्ध शोता शं । इव भडि भं अद्भत ु ळत्रक्त शं । लाक् सवत्रद्ध. दॊ ु फीजभ ्. ळिु ऩय त्रलजम.ऎन. धभााथा काभ भोषाथे जऩे त्रलसनमोग्। ध्मान: दल ू ाासनबाॊ त्रिनमनाॊ त्रलरवस्त्कयीटाॊ प्रात् स्नान इत्मादी वे सनलृत्त शो कय के दग ू ाा ळॊखाब्जख्डग ळय खेटक िाऩान ्। मा भाॊ कारी दे ली के सिि ऩय रार ऩुष्ऩ बेटा वॊतजानी ि दघतीॊ भफशऴावनस्थाॊ दग ु ाा नलायकुर ऩीठगताॊ बजेशभ ्। कय धूऩ-दीऩ जरा के सवद्ध स्पफटक भारा वे 21 फदन तक 108 फाय जाऩ कये राबा प्राद्ऱ शोता शं ।  ळीध्र राब प्रासद्ऱ शे तु प्रमोग कयने वे ऩूला भाॊ के भॊफदय भं अऩनी वभथाता के अनुळाय अथा मा लस्त्र बेट कयं ।  राब प्रासद्ऱ के ऩद्ळमात भारा को जर प्रलाश कय दं । मफद आऩ इव प्रमोग त्रलसध कयने भं अवभथा शं ?. श्री दग ु ााद्शाषयास्त्भका दे लता.अक्टू फय 2011 22 ऩसत-ऩत्नी भं करश सनलायण शे तु मफद ऩरयलायं भं वुख वुत्रलधा के वभस्त वाधान शोते शुए बी छोटी-छोटी फातो भं ऩसत-ऩत्नी के त्रफि भे करश शोता यशता शं .

स्लस्स्तक.ऎन. लस्त्र-नैलेद्य आफद वे िाफशए। माभर तडि भं उल्रेस्खत शै फक दो लऴा वे ऊऩय ऩूजा कये । फटु क की ऩूजा के सरए ‘ॐ लॊ लटु काम नभ्’ की कुभायी का ऩूजन धभा लैधासनक शं . छ् औय दव लऴा की कडमा के ऩूजन वे भध्मभ कल्ऩ शोता शं । रेकय प्राथाना कये । मथा-भडिाषय-भमीॊ रक्ष्भीॊ.जोळी कुभायी-ऩूजा वे भाॉ बगलती असत प्रवडन शोती शं औय वाधक के वकर भनोयथ सवद्ध कयती शं ।  अधभ कल्ऩ: एक. आठ औय नौ लऴा की कडमा के ऩूजन वे उत्तभ कल्ऩ शोता शं ।  भध्मभ कल्ऩ: ऩाॉि. तो उनको अद्शभी मा नलभी को कुभायी ऩूजन अलश्म लैश्म कुभायी: के ऩूजन वे वाधक को धन की कयना िाफशए। प्रासद्ऱ शोती शं ।  त्रलद्रानो के भत वे नलयाि भं कुभारय कडमाओॊ के कुभायी-ऩूजा भं बगलान श्री गणेळ औय फटु क के ळूद्र कुभायी: के ऩूजन वे वाधक की वॊतान को वाथ वात. अघ्मा. अघ्मा. भातृणाॊ रुऩ-धारयणीॊ। नल-दग ु ाास्त्भकाॊ वाषात ्. दो. ऩाॉि. षत्रिम. गडध. दीऩ. उवके फाद कुभायी ऩूजन कयना िाफशए। सळल कुभायी-ऩूजा भं शे म औय काभ-फुत्रद्ध असनद्श- गणेळजी की ऩूजा के सरए ‘ॐ गॊ गणेळाम नभ्’ कायक शोती शै । अत् वालधान शोकय कुभायी-पुजा कयनी भडि वे ऩाद्य. लैश्म ल ळुद्र इन िायं लणं की कुभारयमं की ऩूजा फकमा जावकता शं । िायं लणं की कुभारयमं की ऩूजा वे वाधक को सबडन-सबडन पर की प्रासद्ऱ शोती शं । भेरु तडि भं उल्रेस्खत शै फक  ब्राह्मण कुभायी: के ऩूजन वे वाधक को वला इद्श परो की प्रासद्ऱ शोती शं ।   ऩूजन का अत्मासधक भशत्त्ल शै । क्मोफक ळास्त्रोक्त त्रलधान वे कुभारय कडमाएॊ भाॉ का प्रत्मष स्लरुऩ शोती शं । इव सरए कुभारय कडमाओॊ का ऩूजन दे ली भाॉ के वभान कयना कल्माण कायी शोता शै । प्रसतऩदा वे नलभी तक कुभारय कडमाओॊ को दग ु ाा स्लरुऩ भानकय ऩूजन कयना अत्मासधक कल्माण कायी शोता शं । षत्रिम कुभायी: के ऩूजन वे वाधक को मळ की मफद कोई वाधक प्रसतफदन कुभायी ऩूजन नशीॊ कय वकता प्रासद्ऱ शोती शं । शो. कडमाभालाशमाम्भशॊ ॥ जगत ्-ऩूज्मे जगद्-लडद्ये. फपय फटु क. लस्त्र-नैलेद्य आफद वे वे कभ की कुभायी की गडध. गडध. क्मंफक एक-लऴा भडि वे ऩाद्य. वला-ळत्रक्त-स्लरुत्रऩस्ण। ऩूजाॊ गृशाण कौभारय जगडभातनाभोऽस्तु ते॥ उक्त प्राथाना कयके शाथ भं सरए ऩुष्ऩं को कुभायी के ियणं ऩय यखकय प्रणाभ कये । . तीन औय िाय लऴा की कडमा के ऩूजन वे अधभ कल्ऩ शोता शं । त्रलद्रानो के भत वे कुभायी ऩूजा भं फकवी बी प्रकाय का जासत बेद नशीॊ भाना जाता शै । ळास्त्रोक्त भत वे ब्राह्मण. दीऩ. लस्त्र औय नैलेद्य के ऩूजा कये । प्रसत रुसि नशीॊ शोती। कुभायी ऩूजन के सरए ऩशरे दोनं शाथं भं ऩुष्ऩ अडम धभा ग्रडथं भं एक लऴा वे ऴोडळ (वोरश) लऴा तक की कडमा कं सबडन-सबडन दे ली कशी गई शं । लाडलानरीम तडि: भं कुभायी ऩूजन  शे तु उल्रेस्खत शै फक उत्तभ कल्ऩ: वात.अक्टू फय 2011 23 कुभायी ऩूजन वे वकर भनोयथ सवद्ध शोते शं ।  सिॊतन जोळी. ऩुष्ऩ. तीन मा एक कुभायी की ऩूजा कयनी राब शोता शै । िाफशए। गणेळ औय फटु क की ऩूजा के सरए छोटे रड़कं स्कडद-ऩुयाण भं उल्रेस्खत शै फक त्रलऩत्रत्त-कार भं अडत्मजा-कुभायी का ऩूजन कयना िाफशए। को रेना िाफशए। आवन त्रफछाकय ऩशरे गणेळ.

अभुक-ऩषे. कसरमुगे. गणेळ-लटु काफद-वफशताॊ कुभायी-ऩूजाॊ करयष्मे। तत ऩद्ळमात गणेळ ऩूजन कयं : गॊ गणऩतमे नभ् भडि वे बगलान ् गणेळ का ऩूजन कये । मथा: गॊ गणऩतमे नभ् ऩादमो् ऩाद्यॊ वभऩामासभ। गॊ गणऩतमे नभ् सळयसव अघ्मं वभऩामासभ। गॊ गणऩतमे नभ् गडधाषतॊ वभऩामासभ। ॐ लॊ लटु काम नभ् दीऩॊ दळामासभ। ॐ लॊ लटु काम नभ् नैलेद्यॊ वभऩामासभ। ॐ लॊ लटु काम नभ् आिभनीमॊ वभऩामासभ। ॐ लॊ लटु काम नभ् ताम्फूरॊ वभऩामासभ। ॐ लॊ लटु काम नभ् दस्षणाॊ वभऩामासभ। लटु क का ऩूजन कयने के ऩद्ळमात कुभायी ऩूजन कयं । कुभायी ऩूजन: कुभायी के ऩैय धोकय उवे श्रद्धा ऩूलक ा अऩने वम्भुख आवन ऩय फैठाए। फपय दोनं शाथ जोड़कय बत्रक्त ऩूलक ा ध्मान कये । मथाफार-रुऩाॊ ि नानारॊकाय-नम्राॊगीॊ.अक्टू फय 2011 24 तत ऩद्ळमात ॐ कुभामै नभ् भडि वे ऩाद्य. प्रदे ळाडतगाते. अभुक- ऩुण्म-षेिे. श्री ॐ लॊ लटु काम नभ् धूऩॊ घ्राऩमासभ। द्वेत-लायाश-कल्ऩे. गॊ गणऩतमे नभ् ताम्फूरॊ वभऩामासभ। अघ्मा. अभुक-सतथौ. दावोऽशॊ ला). तफ उनका शाथ भुॉश धुराकय उनके शाथ भं दस्षणा प्रदान कयं औय उडशं प्रणाभ कयं । लटु क ऩूजन कयं : ॐ लॊ लटु काम नभ् भडि वे बगलान लटु क का ऩूजन कये । त्रलसधलत कुभायी ऩूजन मथा- कुभायी ऩूजन एक सवद्ध प्रमोग शै । वबी प्रकाय की ॐ लॊ लटु काम नभ् ऩादमो् ऩाद्यॊ वभऩामासभ। काभनाओॊ की ऩूणत ा ा इव ऩूजन द्राया वम्बल शै । ॐ लॊ लटु काम नभ् सळयसव अघ्मं वभऩामासभ। ऩूजन शे तु वला प्रथभ वॊकल्ऩ कये । ॐ लॊ लटु काम नभ् गडधाषतॊ वभऩामासभ। मथा: ॐ लॊ लटु काम नभ् ऩुष्ऩॊ वभऩामासभ। ॐ तत ् वत ्। अद्यैतस्म ब्रह्मणोऽफि फद्रतीम प्रशयाधे. अभुक-लावये . अभुक-नाभ-वम्लत्वये . गडध. ऩयभानडद वे मुक्त रृदमलारी कल्माणकारयणी कुभायी दे ली का भं ध्मान कयता शूॉ। . भशाऽऽनडद-रृदमाॊ िैरोक्म-वुडदयीॊ बद्र-त्रलद्या-प्रकासळनीभ ्।। सिडतमे लय-लस्णानीभ ्। िारु-शास्माॊ ळुबाभ ्।। गॊ गणऩतमे नभ् ऩुष्ऩॊ वभऩामासभ। अथाात ्: फार-स्लरुऩलारी. अभुक बयत-खण्डे . श्रेद्ष लणालारी. कसर-प्रथभ- ियणे. जम्फु-द्रीऩे. कल्माण-कारयणी त्रलद्या को प्रकट कयनेलारी. लस्त्र-नैलेद्य आफद वे त्रलसधलत ऩूजन गॊ गणऩतमे नभ् दस्षणाॊ वभऩामासभ। कये । बगलान श्रीगणेळ का ऩूजन कयने के ऩद्ळात ् लटु क का तत ऩद्ळमात वफ कडमाओॊ को ऩुष्ऩ भारा ऩूजन कयं । ऩशनाकय बोजन कयाए। जफ ले बरी प्रकाय वॊतुद्श शो जाएॉ. वलााऩत ् ळास्डत-ऩूलक ा भभाबीद्श-सवद्धमे. दीऩ. अभुक-गोिोत्ऩडनो. त्रिरोक-वुडदयी. अभुक-भावे. वुडदय शॉ वी शॉ वनेलारी. गॊ गणऩतमे नभ् धूऩॊ घ्राऩमासभ। त्रलत्रलध प्रकाय के आबूऴणं वे वुवस्ज्जत शोने वे त्रलनम्र गॊ गणऩतमे नभ् दीऩॊ दळामासभ। गॊ गणऩतमे नभ् नैलेद्यॊ वभऩामासभ। गॊ गणऩतमे नभ् आिभनीमॊ वभऩामासभ। ळयीयलारी. अभुकनाभ-ळभााऽशॊ (लभााऽशॊ .

वम्भुख उऩस्स्थत कुभायी का ऩाद्य. भेयी ऩूजा स्लीकय करयए। शे जगदम्फ. वाषात ् नल-दग ु ाा-स्लरुऩा कडमा दे ली का भं आलाशन कयता शूॉ। आलाशन कयने के फाद. शोनी िाफशए। . 3. भातङ्गी त्रलभरोत्कत्रऴण ा ी नल-दग ु ाास्त्भकाॊ वाषात.. ऩुष्ऩ.अक्टू फय 2011 25 ध्मान कयने के फाद इव भडि को श्रद्धाऩूलक ा ऩढ़कय आलाशन कये - ब्राह्मी अथाात ्: भडिाषयं वे वॊमुक्ता. नैलेद्य. गडधाषत ्. ताम्फूर एलॊ दस्षणा आफद उऩिायं वे ऩूजन कये । कुभायी का ऩूजन कयने के फाद सनम्न भडि ऩढ़ते शुए प्रणाभ कये - वला-ळत्रक्त-स्लरुऩे कौभारय दे त्रल. भातृणाॊ रुऩ-धारयणीभ ्। अथाात ्: लनदग ु ाा वलै् वुयलयै यत्रऩ सवडधूयकऩूया भधुिमेण । । त्रलसरख्ममडिॊ त्रलसधनात्रलसधसो बलेत्वदाधायमतेऩुयारय्॥२०॥ बौभालास्मासनळाभग्रे िडद्रे ळतसबऴाॊ गते । त्रलसरख्म प्रऩठे त ् स्तोिॊ व बलेत ् वॊऩदाॊ ऩदभ ् ॥२१॥ ॥इसत श्री त्रलद्ववायतडिे दग ु ााद्शोत्तयळतनाभस्तोिॊ वभाद्ऱभ ्॥ त्रलळेऴ्.् कडमाभालाशमाम्मशभ ्॥ शे ि िाभुण्डा ॐ भडिाषय भमीॊ रक्ष्भीॊ.. 5. वला-ळत्रक्त-स्लरुत्रऩस्ण। त्रलद्व-लडद्ये. धूऩ. रक्ष्भी-स्लरुऩा. भाशे द्वयी भशोदयी जगद्-लडद्ये. अघ्मा.. भातृकाओॊ का रुऩ धायण कयने लारी. जगत ्-ऩूज्मे. दीऩ. आिभन. आऩको नभस्काय। कुभायी-ऩूजा के फाद श्रीदग ु ाा अद्शोत्तय ळतनाभ स्तोि का ऩाठ कये । मस्म ॐ प्रवादभािेण वती वाध्ली आमाा दग ु ाा भनो फुत्रद्धयशॊ काया त्रऩनाकधारयणी अनडता ळाम्बली ऩट्टाम्फय अभेमत्रलक्रभा िाद्या त्रिनेिा वत्ता बलेत ् िण्डघण्टा ि दषकडमा ि ऩयीधाना वती बलभोिनी ॥३॥ । वदागसत् ॥४॥ वदा ऩाटरालती करभछजीययस्छजनी वुडदयी । सिसत् यत्नत्रप्रमा वुयवुडदयी । ॥२॥ भशातऩा् दषमसत्रलनासळनी ऩाटरा ॥१॥ स्लरूत्रऩणी बव्माबव्मा सिडता । ळूरधारयणी सिता वत्मानडद बाव्मा क्रुया कभरानने बलानी सित्तरूऩा दे लभाता अऩणाानेकलणाा प्रीता सििा बात्रलनी वलात्रलद्या दग ु ाा बलप्रीता जमा वलाभडिभमी ळृणुष्ल लैष्णली लायाशी रक्ष्भीद्ळ ऩुरुऴाकृ सत् फशुरा साना । ॥५॥ । ॥६॥ । भतङ्गभुसनऩूस्जता फक्रमा फशुरप्रेभा भधुकैटबशडिी कुभायी ि अप्रौढा कात्मामनी ि इदॊ वुतॊ ितुलग ा ं तथा कुभायीॊ ऩूजसमत्ला ऩयमा त्रिऴु सवत्रद्धबालेद् याजानो दावताॊ । ॥१३॥ ॥१५॥ ि । ऩालासत शस्स्तनभेल । ॥१६॥ ि । ळाद्वतीभ ् ॥१७॥ दे लीॊ वुयेद्वयीभ ् । ऩठे डनाभळताद्शकभ ् ॥१८॥ याज्मसश्रमभलाप्नुमात ् ॥१९॥ दे त्रल गोयोिनारक्तककुङ्कुभेल ॥१४॥ ऩयभेद्वयी रोकेऴु ध्मात्ला मास्डत । ब्रह्मलाफदनी शमॊ बक्त्मा तस्म ॥१२॥ दग ु ाानाभळताद्शकभ ् रबेडभुत्रक्तॊ तु । जरोदयी प्रत्मषा जामाॊ िाडते ॥११॥ फरप्रदा अनडता वात्रलिी दे त्रल । भशाफरा त्रलष्णुभामा प्रऩठे स्डनत्मॊ धाडमॊ ॥१०॥ कारयात्रिस्तऩस्स्लनी ि त्रलद्यते । मसत् लृद्धभाता । ॥९॥ धारयणी मुलती घोयरूऩा यौद्रभुखी कयारी ऩूजमेत ् ि भुक्तकेळी सळलदत ू ी म कैळोयी प्रौढा बद्रकारी फुत्रद्धदा तथा अनेकास्त्रस्म ि नायामणी ॥८॥ लाशना वलाास्त्रधारयणी ि िैल । वलादानलघासतनी वत्मा िैककडमा तथा िण्डभुण्डत्रलनासळनी वलाावुयत्रलनाळा अनेकळस्त्रशस्ता ि ॥७॥ भफशऴावुयभफदा नी ि वलाळास्त्रभमी सनत्मा वलालाशन सनळुम्बळुम्बशननी धनॊ ईद्वय उलाि: प्रलक्ष्मासभ कौभायी िैल नावाध्मॊ ॥दग ु ााद्शोत्तयळतनाभस्तोिॊ (त्रलद्ववायतडि )॥ ळतनाभ िैडद्री अस्ग्नज्लारा ऩूजाॊ गृशाण कौभारय जगडभातनाभोऽस्तु ते॥ वॊवाय-ऩूज्मे. 7.उऩमुक्त ा त्रलसध वे ‘कुभायी ऩूजा’ भाव भं एक फाय कयना त्रलळेऴ राबदामक शोता शं । कुभारयमाॉ त्रलऴभ-वॊख्मक 1.

उऩावना शोती शं । अनुयोध फकमा के ले अऩने त्रऩता के मशाॊ शोने लारे मस त्रलसबडन ळास्त्रो एलॊ ऩुयाणं भं ळत्रक्त ऩीठं फक वॊख्मा के के अलवय ऩय जाना िाशती शं । बगलान सळल के भना कयने के फाद बी वती जी के अनुयोध के कायण सळल ने उडशं ऩीशय जाने की अनुभसत दे दी। ऩीशय जाने ऩय घय भं वतीवे फकवी ने बी प्रेभऩूलक ा लातााराऩ नशीॊ फकमा। कुछ दे य औय दषने बाॊसत ऩीठ के लणान भं सबडनता शं । तॊििूड़ा भस्ण भं 52 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा शं । श्रीभद्दे लीबागलत भं 108 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा शं । बाॊसत वे सळलजी का अऩभान फकमा स्जस्वे दख ु ी शोकय दे ली गीता भं 72 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा शं । के कानं भं बी ऩड़ा। ले प्रिॊड आॊधी की बाॊसत कनखर  कासरकाऩुयाण भं 26 ळत्रक्तऩीठं का उल्रेख फकमा शं । वतीजी अस्ग्नकुॊड भं कूद गई मश वभािाय बगलान सळल जा ऩशुॊिे। वती के जरे शुए ळयीय को दे खकय बगलान सळल ने अऩने आऩको बूर गए। वती के प्रेभ औय उनकी बत्रक्त ने ळॊकय के भन को व्माकुर कय फदमा। उन ळॊकय के भन को व्माकुर कय फदमा स्जडशंने काभ ऩय बी त्रलजम प्राद्ऱ फक थी औय जो वायी वृत्रद्श को नद्श कयने की दे लीऩुयाण भं 51 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा शं ।  सळलिरयि भं 51 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा शं ।  दग ु ाा ळद्ऱवती भं 52 ळत्रक्त ऩीठं का उल्रेख फकमा गमा शं ।  दे ली के भुख्म अॊगं-प्रत्मॊगं फक गणना भं प्रभुख 51 ळत्रक्त ऩीठ भाने जाते शं । . फेवुध शो गए। अरौफकक थीॊ। इव सरमे वतीने फाल्म अलस्था भं शी कई ऐवे अरौफकक आद्ळमा िसरत कयने लारे कामा कय फदखाए थे. फकॊतु एक ऐवी घटना घटीत शोगई स्जवके धयती ऩय इक्मालन स्थानं भं वती के अॊग कट-कटकय कायण दष के ह्रदम भं बगलान सळल के प्रसत फैय औय सगये । जफ वती के वाये अॊग कट कय सगय गए.ऎन.जोळी दष प्रजाऩसत की कई ऩुत्रिमाॊ थी। वबी ऩुत्रिमाॊ गुणलती थीॊ ऩयॊ तु वती दष की वबी ऩुत्रिमं भं वफवे षभता यखते थे। ले वती के प्रेभ भं खो गए. तो वती का त्रललाश उऩस्स्थत दे खकय वृत्रद्श के ऩारक बगलान त्रलष्णु आगे बगलान सळल के वाथ कय फदमा। वती कैराळ भं जाकय फढ़े । उडशं ने बगलान सळल फक फेवुधी भं अऩने िक्र वे बगलान सळल के वाथ यशने रगीॊ। बगलान सळल के दष वती के एक-एक अॊग को काट-काट कय सगयाने रगे। के दाभाद थे. ले शी स्थान आज ळत्रक्त मस भं वस्म्भसरत शो यशे थे। रेफकन दष ने सळलजी औय स्थान भाने जाते शं । आज बी उन स्थानं भं वती का वती को नशीॊ फुरामा था। रेफकन दे ली वती ने सळलजी वे ऩूजन शोता शं . तो त्रलयोध बाल ऩैदा शो गमा। बगलान सळल के प्रसत फैय औय बगलान सळल ऩुन् अऩने आऩ भं लाऩव आए। फपय ऩुन् त्रलयोध बाल ऩैदा शो गमा। वृत्रद्श के वाये कामा िरने रगे। एक फाय वती के त्रऩता ने फशोत फडे मस का धयती ऩय स्जन इक्मालन स्थानं भं वती के अॊग आमोजन फकमा शं । वभस्त दे लता औय दे लाॊगनाएॊ उवी कट-कटकय सगये थे.अक्टू फय 2011 26 भाता के 52 ळत्रक्त ऩीठ  सिॊतन जोळी. स्लस्स्तक. स्जडशं दे खकय दष को बी आद्ळमा शोता था। बगलान सळल ने उडभत फक बाॊसत वती के जरे शुए ळयीय को कॊधे ऩय यख ले वबी फदळाओॊ भं भ्रभण कयने रगे। वृत्रद्श व्माकुर शो उठी बमानक वॊकट जफ वती त्रललाश मोग्म शोगई.

मशाॉ भाता का रृदम सगया था। इवकी 8.भशाभामा (नेऩार) नेऩार भं ऩळुऩसतनाथ भॊफदय के सनकट स्स्थत शै गुजये द्वयी भॊफदय जशाॉ स्स्थत शं भाॉ भशसळया ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता का तासरका। फामाॉ 1.अक्टू फय 2011 27 वाधायत: 6.भशाभामा (कश्भीय) बायत के कश्भीय भं ऩशरगाॉल के सनकट स्स्थत शं भाॉ भशाभामा ळत्रक्तऩीठ.ळकायये लष कशा जाता शं औय बैयल को त्रिवॊध्मेद्वय कशा जाता शं । 5. मशाॉ भाता का गरा सगया था। इवकी भशाभामा 7.दाषामणी (भानव) सतब्फत स्स्थत कैराळ भानवयोलय के भानवा के सनकट एक ऩाऴाण सळरा ऩय स्स्थत शं भाॉ दाषामणी ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता का भस्तक मा गॊडस्थर अथाात कनऩटी सगयी . मशाॉ भाता के दोनं घुटने (जानु) सगये थे। इवकी ळत्रक्त को भशसळया (भशाभामा) कशा जाता शं औय बैयल को कऩारी कशा 3. मशाॉ भाता की नासवका सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को वुनॊदा कशा जाता शं औय बैयल को त्र्मॊफक कशा जाता शं । जाता शं । 9.सवत्रद्धदा (अॊत्रफका) बायत के फशभािर प्रदे ळ के काॊगड़ा भं स्स्थत शं भाॉ ज्लाराभुखी ळत्रक्तऩीठ.त्रिऩुयभासरनी (जारॊधय) 51 ळत्रक्त ऩीठ भाने जाते शं । तॊििूड़ाभस्ण भं रगबग 52 ळत्रक्त ऩॊजाफ के जारॊधय भं छालनी के सनकट दे ली तराफ के ऩीठं के फाये भं फतामा गमा शै । प्रस्तुत शै तॊििूड़ाभस्ण की फकनाये स्स्थत शं भाॉ त्रिऩुयभासरनी ळत्रक्तऩीठ.वुगॊध.गॊडकी नेऩार भं गॊडकी नदी के तट ऩय ऩोखया नाभक स्थान ऩय स्स्थत भुत्रक्तनाथ भॊफदय भं स्स्थत शं भाॉ गॊडकी ळत्रक्तऩीठ.फशॊ गराज जाता शं । फशॊ गुरा मा फशॊ गराज ळत्रक्तऩीठ स्स्थत शं . मशाॉ भाता की आॉख सगयी थी। इवकी को सगया ळत्रक्त को जम दग ु ाा कशा जाता शं औय बैयल को लैद्यनाथ ऩाफकस्तान भं कयािी वुक्कय स्टे ळन के सनकट स्स्थत शं ळत्रक्त (स्तन) त्रिऩुयभासरनी कशा जाता शं औय बैयल को बीऴण कशा कयािी वे थोडी दयू उत्तय ऩूला भं 2.जमदग ु ाा (लैद्यनाथ) कशा जाता शं । (कयलीय) ळकायये ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ ऩय भाता की नासब सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को त्रलभरा कशा जाता शं औय बैयल को जगडनाथ कशा जाता शं । 11. मशाॉ भाता की जीब सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को सवत्रद्धदा (अॊत्रफका) कशा जाता शं औय बैयल को उडभत्त कशा जाता शं । दाषामनी कशा जाता शं औय बैयल अभय कशा जाता शं । 10. मशाॉ भाता का ब्रह्मयॊ ध (सवय) सगया था। इवकी ळत्रक्त को कोटयी मा कोट्टलीळा कशा जाता शं औय बैयल को बीभरोिन कशा जाता शं । था। इवकी ळत्रक्त को ळत्रक्त को भफशऴावुयभफदा नी कशा जाता शं औय बैयल को क्रोसधळ कशा जाता शं । झायखॊड के दे लघय भं स्स्थत लैद्यनाथधाभ भं स्स्थत शं भाॉ जमदग ु ाा ळत्रक्तऩीठ. त्रलयजा (उड़ीवा) बायतीम प्रदे ळ उड़ीवा के त्रलयाज भं उत्कर भं स्स्थत शं भाॉ त्रलयजा ळत्रक्तऩीठ.ज्लाराभुखी. फरयवर वे थोडी दयू वंध नदी के फकनाये स्स्थत शं भाॉ वुगॊध ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता का दामाॉ शाथ सगया था। इवकी ळत्रक्त को 4.वुनॊदा फाॊग्रादे ळ भं सळकायऩुय.

फशुरा 17.जमॊती 14. मशाॉ भाता के दाएॉ ऩैय का अॉगूठा सगया था। िशर) ऩय स्स्थत शं भाॉ बलानी ळत्रक्तऩीठ.बलानी (िट्टर) ऩस्द्ळभ फॊगार के लधाभान स्जरे के खीयग्राभ स्स्थत फाॊग्रादे ळ भं सिट्टागंग (िटगाॉल) स्जरा के वीताकुॊड जुगाड्मा (मुगाद्या) स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ बूतधािी स्टे ळन के सनकट िॊद्रनाथ ऩलात सळखय छिार (िट्टर मा ळत्रक्तऩीठ.भ्राभयी (त्रिस्रोता) कोरकाता बायतीम प्रदे ळ ऩस्द्ळभ फॊगार के जरऩाइगुड़ी के फोडा ळत्रक्तऩीठ.भाॊगल्म िॊफद्रका 18. मशाॉ भाता के फाएॉ ऩैय का अॉगूठा सगया था। भॊडर के वारफाढ़ी ग्राभ स्स्थत त्रिस्रोत स्थान ऩय स्स्थत इवकी ळत्रक्त को कासरका कशा जाता शं औय बैयल को शं भाॉ नकुळीर कशा जाता शं । भ्राभयी ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता शं भाॉ कशा जाता शं औय बैयल को बीरुक कशा जाता शं । बैयल को उभानॊद कशा जाता शं । 13. मशाॉ भाता का दामाॉ ऩैय सगया था। इवकी इवकी ळत्रक्त को जमॊती कशा जाता शं औय बैयल को ळत्रक्त को त्रिऩुय वुॊदयी कशा जाता शं औय बैयल को त्रिऩुयेळ क्रभदीद्वय कशा जाता शं । कशा जाता शं । 20.मुगाद्या (बूतधािी) 15. मशाॉ भाता की फामीॊ जॊघा सगयी थी। वुॊदयी ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता की दामीॊ कराई सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को भॊगर िॊफद्रका कशा जाता शं औय बैयल को कत्रऩराॊफय कशा जाता शं । काभाख्मा ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता का फामाॉ ऩैय सगया के कारीघाट ऩय स्स्थत शं भाॉ कासरका . मशाॉ इवकी ळत्रक्त को बूतधािी कशा जाता शं औय बैयल को भाता की दामीॊ बुजा सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को बलानी कशा जाता शं औय बैयल को िॊद्रळेखय कशा जाता शं । षीय खॊडक कशा जाता शं । 21. मशाॉ भाता का मोसन बाग वॊगभ तट ऩय स्स्थत शं भाॉ रसरता ळत्रक्तऩीठ.अक्टू फय 2011 28 थी। इवकी ळत्रक्त को गण्डकी िण्डी कशा जाता शं औय था। इवकी ळत्रक्त को भ्राभयी कशा जाता शं औय बैयल को बैयल िक्रऩास्ण कशा जाता शं । अॊफय औय बैयलेद्वय कशा जाता शं । 12.कासरका (कारीऩीठ) 16. मशाॉ भाता कशा जाता शं औय बैयल को बल कशा जाता शं । 19.रसरता (प्रमाग) बायतीम प्रदे ळ ऩस्द्ळभ फॊगार भं लधाभान स्जरे के सनकट बायतीम याज्म उत्तयप्रदे ळ के इराशफाद ळशय (प्रमाग) के भाॉ भॊगर िॊफद्रका की शाथ की अॉगुरी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को रसरता गुस्कुय स्टे ळन वे उज्जमनी नाभक स्थान ऩय स्स्थत शं ळत्रक्तऩीठ.काभाख्मा (काभसगरय) बायतीम प्रदे ळ ऩस्द्ळभ फॊगार वे लधाभान स्जरा वे थोडी बायतीम प्रदे ळ अवभ के गुलाशाटी स्जरे के काभसगरय षेि दयू कटु आ केतुग्राभ के सनकट अजेम नदी तट ऩय स्स्थत भं स्स्थत नीराॊिर ऩलात के काभाख्मा स्थान ऩय स्स्थत का फामाॉ शाथ सगया था। इवकी ळत्रक्त को दे ली फाशुरा सगया था। इवकी ळत्रक्त को काभाख्मा कशा जाता शं औय फाशुर स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ फशुरा ळत्रक्तऩीठ.त्रिऩुय वुॊदयी (त्रिऩुया) फाॊग्रादे ळ के सवल्शै ट स्जरे के जमॊतीमा ऩयगना के बायत प्रदे ळ त्रिऩुया के उदयऩुय के सनकट याधाफकळोयऩुय बोयबोग गाॉल काराजोय के खावी ऩलात ऩय स्स्थत शं भाॉ गाॉल के भाताफाढ़ी ऩलात सळखय ऩय स्स्थत शं भाॉ त्रिऩुय जमॊती ळत्रक्तऩीठ.

नभादा (ळोणदे ळ-ळोणाषी) भध्मप्रदे ळ के अभयकॊटक स्स्थत नभादा के उद्गभ ऩय ळोणदे ळ स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ नभादा ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता का भुकुट सगया था। इवकी ळत्रक्त को त्रलभरा कशा जाता शं औय बैयल को वॊलत्ता कशा जाता शं । 28.भशारक्ष्भी (श्री ळैर) कशा जाता शं औय बैयल को बूतेळ कशा जाता शं । जाता शं औय िूड़ाभस्ण सगये थे। इवकी ळत्रक्त को उभा फाॊग्रादे ळ के सवल्शै ट स्जरे के उत्तय-ऩूला भं जैनऩुय गाॉल के ऩाव ळैर नाभक स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ भशारक्ष्भी ळत्रक्तऩीठ.वलााणी (कडमाश्रभ) तसभर नाडु के कडमाश्रभ भं बद्रकारी भॊफदय (कुभायी भॊफदय) भं स्स्थत शं भाॉ वलााणी ळत्रक्तऩीठ. 91+ 9238328785 .उभा (लृॊदालन) उत्तयप्रदे ळ के भथुया के सनकट लृॊदालन के बूतेद्वय स्थान औय बैयल को वलाानॊद कशा जाता शं । ऩय स्स्थत शं भाॉ उभा ळत्रक्तऩीठ. 26.सळलानी (याभसगरय) उत्तयप्रदे ळ के झाॉवी-भस्णकऩुय ये रले स्टे ळन सििकूट के वात्रलिी कशा जाता शं औय बैयल को स्थाणु कशा जाता शं । ऩाव याभसगरय स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ सळलानी ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता के दो भस्णफॊध सगये थे। इवकी ळत्रक्त को गामिी कशा जाता शं मशाॉ भाता का दामाॉ लष सगया था। इवकी ळत्रक्त को 32. मशाॉ भाता का ऩीठ अथाात ऩृद्ष बाग सगया था। इवकी ळत्रक्त को वलााणी कशा जाता शं औय बैयल को सनसभऴ कशा जाता शं । 25.त्रलळाराषी (लायाणवी) उत्तयप्रदे ळ के काळी भं भस्णकस्णाक घाट ऩय स्स्थत शं भाॉ त्रलळाराषी ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता का गरा (ग्रीला) सगया था। इवकी ळत्रक्त को भशारक्ष्भी कशा जाता शं ळम्फयानॊद कशा जाता शं । औय बैयल को फकवी बी प्रकाय की वभस्मा के वभाधान शे तु वॊऩका कयं । GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418.अक्टू फय 2011 29 22.त्रलभरा. मशाॉ भाता का फामाॉ सनतॊफ सगया था जशाॉ एक गुपा शै । इवकी ळत्रक्त को कारी कशा जाता शं औय बैयल को असवताॊग कशा जाता शं । 30. मशाॉ भाता का दामाॉ सनतॊफ सगया था। इवकी ळत्रक्त को नभादा कशा जाता शं औय बैयल को बद्रवेन कशा जाता शं । 31.दे ली कारी (कारभाधल) 23. मशाॉ भाता की अस्स्थ सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को दे लगबाा कशा जाता शं औय बैयल को रुरु कशा जाता शं । 29.फकयीट (बुलनेळी) ऩस्द्ळभ फॊगार के भुळॉदाफाद स्जरा के रारफाग कोटा योड स्टे ळन के फकयीटकोण ग्राभ के सनकट स्स्थत शं भाॉ त्रलभरा ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता के कान के भस्णजड़ीत कुॊडर सगये थे। इवकी ळत्रक्त को त्रलळाराषी भस्णकणॉ कशा जाता शं औय बैयल को कार बैयल कशा जाता शं । 24. मशाॉ भाता के गुच्छ कशा 27.वात्रलिी (कुरुषेि) शरयमाणा के कुरुषेि भं स्स्थत शं भाॉ वात्रलिी ळत्रक्तऩीठ.दे लगबाा (काॊिी) ऩस्द्ळभ फॊगार के फीयबुभ स्जरा के फोरायऩुय स्टे ळन के उत्तय ऩूला स्स्थत कोऩई नदी तट ऩय स्स्थत शं भाॉ दे लगबाा ळत्रक्तऩीठ. गामिी (भस्णदे त्रलक) सळलानी कशा जाता शं औय बैयल को िॊड कशा जाता शं । अजभेय के सनकट ऩुष्कय के भस्णफडध स्थान के गामिी ऩलात ऩय स्स्थत शं भाॉ गामिी ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता की एड़ी (गुल्प) सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को भध्मप्रदे ळ के अभयकॊटक के कारभाधल स्स्थत ळोन नदी तट के ऩाव स्स्थत शं भाॉ कारी ळत्रक्तऩीठ.

मशाॉ भाता का उदय सगया था। इवकी ळत्रक्त को िॊद्रबागा कशा जाता शं औय बैयल को लक्रतुॊड कशा जाता शं । 39. मशाॉ भाता की ऊऩयी दॊ त (ऊध्लादॊत) सगये थे। इवकी ळत्रक्त को नायामणी कशा जाता शं औय बैयल को वॊशाय कशा जाता शं । 34.अलॊसत (बैयलऩलात) भध्मप्रदे ळ के उज्जैन नगय भं सळप्रा नदी के तट के ऩाव बैयल ऩलात ऩय स्स्थत शं भाॉ अलॊसत ळत्रक्तऩीठ.िॊद्रबागा गुजयात के जूनागढ़ स्जरे भं स्स्थत वोभनाथ भॊफदय के सनकट लेयालर स्टे ळन के सनकट प्रबाव षेि भं स्स्थत शं भाॉ िॊद्रबागा ळत्रक्तऩीठ.अक्टू फय 2011 30 कऩासरनी (बीभरूऩ) कशा जाता शं औय बैयल को ळलाानॊद 33.अऩणाा (कयतोमातट) फाॊग्रादे ळ के ळेयऩुय फागुया स्टे ळन वे थोडी दयू बलानीऩुय गाॉल के ऩाय कयतोमा तट स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ अऩणाा ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता की फामीॊ एड़ी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को कशा जाता शं । 38.भ्राभयी (जनस्थान) भशायाद्स के नासवक नगय स्स्थत गोदालयी नदी घाटी स्स्थत जनस्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ भ्राभयी ळत्रक्तऩीठ.कऩासरनी (त्रलबाऴ) ऩस्द्ळभ फॊगार के स्जरा ऩूलॉ भेफदनीऩुय के ऩाव ताभरुक स्स्थत त्रलबाऴ स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ कऩासरनी ळत्रक्तऩीठ.नायामणी (ळुसि) तसभरनाडु के कडमाकुभायी-सतरुलनॊतऩुयभ भागा ऩय ळुसितीथाभ सळल भॊफदय शै . मशाॉ भाता के दाएॉ ऩैय की ऩामर सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को श्रीवुॊदयी कशा जाता शं औय बैयल को वुॊदयानॊद कशा जाता शं । (नोट: दव ू यी भाडमता अनुवाय आॊध्रप्रदे ळ के कुनूर ा स्जरे के श्रीळैरभ स्थान ऩय दस्षण गुल्प अथाात दाएॉ ऩैय की एड़ी सगयी थी। ) 37.त्रलद्वभात्रिका (वलाळैर स्थान) आॊध्रप्रदे ळ के याजाभुॊद्री षेि स्स्थत कोफटसरॊगेद्वय भॊफदय के ऩाव वलाळैर स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ यफकनी ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता के ओद्ष सगये थे। इवकी ळत्रक्त को अलॊसत कशा जाता शं औय बैयल को रम्फकणा कशा जाता शं । 40. मशाॉ मशाॉ भाता के दस्षण गॊड सगये थे। इवकी ळत्रक्त को त्रलद्वेद्वयी कशा जाता शं औय बैयल को दॊ डऩास्ण कशा जाता शं । यासळ यत्न एलॊ उऩयत्न धायण कयने शे तु वॊऩका कयं । GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418. 91+ 9238328785 . जशाॉ ऩय स्स्थत शं भाॉ नायामणी ळत्रक्तऩीठ.श्रीवुॊदयी (श्रीऩलात) कश्भीय के रद्दाख षेि के ऩलात ऩय स्स्थत शं भाॉ श्री वुॊदयी ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता की ठोड़ी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को भ्राभयी कशा जाता शं औय बैयल शै त्रलकृ ताष। 41.प्रबाव.त्रलद्वेद्वयी (गोदालयीतीय) गोदालयी नदी के तट ऩय कुब्फुयरा कोफट सतथा के सनकट स्थर ऩय स्स्थत शं भाॉ त्रलद्वेद्वयी ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता की सनिरे दॊ त (अधोदॊ त) सगये थे। इवकी ळत्रक्त को लयाशी कशा जाता शं औय बैयल को भशारुद्र कशा जाता शं । (नोट: फशभािर प्रदे ळ के काॊगड़ा भं बी दे ली को लायाशी ळत्रक्तऩीठ के रुऩ भं ऩूजा जाता शं ।) 35. मशाॉ भाता के लाभ गॊड (गार) सगये थे। इवकी ळत्रक्त को याफकनी कशा जाता शं औय बैयल को लत्वनाबभ कशते शं ' 42. मशाॉ भाता की ऩामर (तल्ऩ) सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को अऩाण कशा जाता शं औय बैयल को लाभन कशा जाता शं । 36.लायाशी (ऩॊिवागय) शरयद्राय के वभीऩ ऩॊिकुॊड भशावागय ऩय स्स्थत शं भाॉ लायाशी ळत्रक्तऩीठ.

31 अक्टू फय 2011 43.उभा-भशादे ली (सभसथरा) मशाॉ 48.जमदग ु ाा (कणााट) कनााट भं जमदग ु ाा नाभ वे प्रसवद्ध स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ जमदग ु ाा ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता के शाथ कशा जाता शं औय बैयल को िण्ड कशा जाता शं । बायत-नेऩार वीभा ऩय जनकऩुय ये रले स्टे ळन के सनकट सभसथरा भं स्स्थत शं भाॉ उभा ळत्रक्तऩीठ.कासरका तायाऩीठ (नरशाटी) ऩस्द्ळभ फॊगार के लीयबूभ स्जरे के नरशाफट स्टे ळन के सनकट नरशाटी भं स्स्थत शं भाॉ कासरका दे ली ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता का दामाॉ स्कॊध सगया था। इवकी ळत्रक्त को कुभायी कशा जाता शं औय बैयल को सळल कशा जाता शं । ऩय स्स्थत शं भाॉ मळोये द्वयी ळत्रक्तऩीठ. भाता के ऩैय की शड्डी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को कासरका दे ली कशा जाता शं औय बैयल को मोगेळ कशा जाता शं । 50. मशाॉ फाॊग्रादे ळ के खुरना स्जरा के ईद्वयीऩुय के मळोय स्थान औय ऩैय सगये (ऩास्णऩद्म) थे। इवकी ळत्रक्त को मळोये द्वयी 44.इॊ द्राषी (श्रीरॊका) श्रीरॊका भं त्रिॊकोभारी भं स्स्थत शं भाॉ इॊ द्राषी ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता का भ्रूभध्म स्स्थत शं भाॉ अॊत्रफका ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता के ओद्ष सगये थे। इवकी ळत्रक्त को पुल्रया कशा जाता शं औय बैयल को त्रलद्वेळ कशा जाता शं । 45.नॊफदनी (नॊदीऩूय) ऩस्द्ळभ फॊगार के लीयबूभ स्जरे के वंसथमा ये रले स्टे ळन नॊदीऩुय स्स्थत िायदीलायी भं फयगद के लृष के वभीऩ स्स्थत शं भाॉ नॊफदनी ळत्रक्तऩीठ.अॊत्रफका ऩस्द्ळभ फॊगार के लीयबूभ स्जरे के दफ ु याजऩुय स्टे ळन वे याजस्थान भं जमऩुय वे थोडी दयू उत्तय भं लैयाट गाॊल भं वात फकभी दयू लक्रेद्वय भं ऩाऩशय नदी के तट ऩय स्स्थत शं भाॉ भफशऴभफदा नी ळत्रक्तऩीठ. मशाॉ भाता की ऩामर सगयी थी (त्रिॊकोभारी भं प्रसवद्ध त्रिकोणेद्वय भॊफदय के सनकट)। इवकी ळत्रक्त को इॊ द्राषी कशा जाता शं औय बैयल को याषवेद्वय कशा जाता शं । 47. मशाॉ भाता के ऩैय की अॉगुरी सगयी थी। इवकी ळत्रक्त को अॊत्रफका कशा जाता शं औय बैयल को अभृत कशा जाता शं । .मळोये द्वयी (मळोय) भाता के दोनं कान सगये थे। इवकी ळत्रक्त को जमदग ु ाा कशा जाता शं औय बैयल को असबरु कशा जाता शं । 51.पुल्रया (अट्टाशाव) ऩस्द्ळभ फॊगरा के राबऩुय स्टे ळन वे दो फकभी दयू अट्टशाव स्थान ऩय स्स्थत शं भाॉ पुल्रया ळत्रक्तऩीठ.भफशऴभफदा नी (लक्रेद्वय) 52. मशाॉ भाता का गरे का शाय सगया था। इवकी ळत्रक्त को नॊफदनी कशा जाता शं औय बैयल को नॊफदकेद्वय कशा जाता शं । 46. मशाॉ भाता का फामाॉ स्कॊध सगया था। इवकी ळत्रक्त को उभा कशा जाता शं औय बैयल को भशोदय कशा जाता शं । 49.त्रलयाट.कुभायी (यत्नालरी) (भन:) सगया था। इवकी ळत्रक्त को भफशऴभफदा नी कशा फॊगार के शुगरी स्जरे के खानाकुर कृ ष्णानगय भागा ऩय जाता शं औय बैयल को लक्रनाथ कशा जाता शं । यत्नालरी स्स्थत यत्नाकय नदी के तट ऩय स्स्थत शं भाॉ कुभायी ळत्रक्तऩीठ.

32 ॥दग ु ाा िारीवा॥ अक्टू फय 2011 नभो नभो दग ु े वुख कयनी। भफशभा असभत नजात फखानी॥१४॥ ध्माले तुम्शं जो नय भन राई। नभो नभो दग ु े द्ु ख शयनी ॥१॥ भातॊगी अरु धूभालसत भाता। जडभ-भयण ताकौ छुफट जाई॥२८॥ सनयॊ काय शै ज्मोसत तुम्शायी। बुलनेद्वयी फगरा वुख दाता॥१५॥ जोगी वुय भुसन कशत ऩुकायी। सतशूॉ रोक पैरी उस्जमायी ॥२॥ ळसळ रराट भुख भशात्रलळारा। नेि रार बृकुफट त्रलकयारा ॥३॥ रूऩ भातु को असधक वुशाले। श्री बैयल ताया जग तारयणी। सछडनबारबल द्ु खसनलारयणी॥१६॥ केशरय लाशन वोश बलानी। मोगन शो त्रफन ळत्रक्त तुम्शायी॥२९॥ ळॊकय आिायज तऩ कीनो। काभअरु क्रोधजीसत वफ रीनो॥३०॥ राॊगुय लीय िरत अगलानी॥१७॥ सनसळफदन ध्मान धयो ळॊकय को। कय भं खप्ऩय खड्ग त्रलयाजै। काशुकार नफशॊ वुसभयो तुभको॥३१॥ जाको दे ख कार डय बाजै॥१८॥ ळत्रक्त रूऩ का भयभ न ऩामो। वोशै अस्त्र औय त्रिळूरा। ळत्रक्त गई तफ भन ऩसछतामो॥३२॥ अडनऩूणाा शुई जग ऩारा। जाते उठत ळिु फशम ळूरा॥१९॥ ळयणागत शुई कीसता फखानी। तुभ शी आफद वुडदयी फारा ॥६॥ नगयकोट भं तुम्शीॊ त्रलयाजत। जम जम जम जगदम्फबलानी॥३३॥ प्ररमकार वफ नाळन शायी। सतशुॉरोक भं डॊ का फाजत॥२०॥ बई प्रवडन आफद जगदम्फा। दयळकयत जन असत वुखऩाले ॥४॥ तुभ वॊवाय ळत्रक्त रै कीना। ऩारन शे तु अडन धन दीना ॥५॥ तुभ गौयी सळलळॊकय प्मायी ॥७॥ सळल मोगी तुम्शये गुण गालं। ब्रह्मा त्रलष्णु तुम्शं सनत ध्मालं ॥८॥ रूऩ वयस्लती को तुभ धाया। दे वुफुत्रद्ध ऋत्रऴ भुसनन उफाया ॥९॥ धयमो रूऩ नयसवॊश को अम्फा। ऩयगट बई पाड़कय खम्फा ॥१०॥ ळुम्ब सनळुम्ब दानल तुभ भाये । यक्तफीज ळॊखन वॊशाये ॥२१॥ भफशऴावुय नृऩ असत असबभानी। जेफश अघ बाय भशी अकुरानी॥२२॥ रूऩ कयार कासरका धाया। वेन वफशत तुभ सतफश वॊशाया॥२३॥ ऩयी गाढ़ वडतन ऩय जफ जफ। यषा करय प्रह्ऱाद फिामो। बईवशाम भातु तुभ तफ तफ॥२४॥ फशयण्माष को स्लगा ऩठामो॥११॥ अभयऩुयी अरु फावल रोका। रक्ष्भी रूऩ धयो जग भाशीॊ। तफ भफशभा वफ यशं अळोका॥२५॥ श्री नायामण अॊग वभाशीॊ॥१२॥ षीयसवडधु भं कयत त्रलरावा। दमासवडधु दीजै भन आवा॥१३॥ फशॊ गराज भं तुम्शीॊ बलानी। दई ळत्रक्त नफशॊ कीन त्रलरम्फा॥३४॥ भोको भातु कद्श असत घेयो। तुभ त्रफन कौन शयै द्ु ख भेयो॥३५॥ आळा तृष्णा सनऩट वतालं। भोश भदाफदक वफ त्रफनळालं॥३६॥ ळिु नाळ कीजै भशायानी। वुसभयं इकसित तुम्शं बलानी॥३७॥ कयो कृ ऩा शे भातु दमारा। ऋत्रद्ध-सवत्रद्ध दै कयशु सनशारा।३८॥ जफ रसग स्जऊॉ दमा पर ऩाऊॉ। तुम्शयो मळ भं वदा वुनाऊॉ॥३९॥ ज्लारा भं शै ज्मोसत तुम्शायी। श्री दग ु ाा िारीवा जो कोई गालै। तुम्शं वदा ऩूजं नय-नायी॥२६॥ वफ वुख बोग ऩयभऩद ऩालै॥४०॥ प्रेभ बत्रक्त वे जो मळ गालं। दोशा: दे लीदाव ळयण सनज जानी। द्ु ख दारयद्र सनकट नफशॊ आलं॥२७॥ कयशु कृ ऩा जगदम्फ बलानी॥ .

सनत्म एलॊ वनातनी शो। ऩयभ तेजस्लरूऩ औय बक्तं ऩय अनुग्रश कयने आऩ ळयीय धायण कयती शं। आऩ वलास्लरूऩा. वत्म. फद्रतीमामा ऋिो जगती. वलाऩूज्मा एलॊ आश्रमयफशत शो। आऩ वलास. वलेद्वयी. दे लीभाशात्म्म ऩाठे त्रलसनमोग्। ध्मानभ ् सवॊशस्था ळसळळेखया भयकतप्रख्मैद्ळतुसबाबज ुा ै: ळङ्खॊ िक्रधनु:ळयाॊद्ळ दधती नेिस्ै स्त्रसब: ळोसबता। आभुक्ताङ्गदशायकङ्कणयणत्काछिीयणडनूऩुया दग ु ाा दग ु सा तशारयणी बलतु नो यत्नोल्रवत्कुण्डरा॥ दे लीवूक्तभ ् अशॊ रुद्रे सबलावुसबद्ळयाम्मशभाफदत्मैरुत त्रलद्वदे लै्। अशॊ सभिालरुणोबा त्रफबम्माशसभडद्राग्नी अशभसश्र ्लनोबा॥१॥ अशॊ वोभभाशनवॊ त्रफबम्माशॊ त्लद्शायभुत ऩूऴणॊ बगभ ्। अशॊ दधासभ द्रत्रलणॊ शत्रलष्भते वुप्राव्मे मजभानाम वुडलते॥२॥ अशॊ याद्सी वॊगभनी लवूनाॊ सिफकतुऴी प्रथभा मस्समानाभ ्। ताॊ भा दे ला व्मदधु: ऩुरुिा बूरयस्थािाॊ बूय्र्मालेळमडतीभ ्॥३॥ भमावो अडनभत्रत्त मोत्रलऩश्मसत म: प्रास्णसत मईश्रृणोत्मुक्त भ ्। अभडतलो भाॊ तउऩ स्षमस्डत श्रुसधश्रुत श्रत्रद्धलॊ ते लदासभ॥४॥ अशभेल स्लमसभदॊ लदासभ जुद्शॊ दे लेसबरुत भानुऴेसब्। मॊ काभमे तॊ तभुग्रॊ कृ णोसभ तॊ ब्रह्माणॊ तभृत्रऴॊ तॊ वुभेधाभ ्॥५॥ अशॊ रुद्राम धनुया तनोसभ ब्रह्मफद्रऴे ळयले शडतला उ। अशॊ जनाम वभदॊ कृ णोम्मशॊ द्यालाऩृसथलीआत्रललेळ॥६॥ अशॊ वुले त्रऩतयभस्म भूधड ा भभ मोसनयप्स्लडत: वभुद्रे। ततो त्रल सतद्षे बुलनानु त्रलद्वोताभूॊ द्याॊ लष्भाणोऩ स्ऩळसभ॥७॥ अशभेल लात इल प्रलाम्मायबभाणा बुलनासन त्रलद्वा। ऩयो फदला ऩय एना ऩृसथव्मैतालती भफशना वॊफबूल॥८॥ . त्रलष्णु औय भशे ळ रूऩ वे उत्ऩत्रत्त.33 अक्टू फय 2011 श्रीकृ ष्ण कृ त दे ली स्तुसत नलयाि भं श्रद्धा औय प्रेभऩूलक ा भशाळत्रक्त बगलती दे ली की ऩूजा-उऩावना कयने वे मश सनगुण ा स्लरूऩा दे ली ऩृ्ली के वभस्त जीलं ऩय दमा कयके स्लमॊ शी वगुणबाल को प्राद्ऱ शोकय ब्रह्मा. ऩारन औय वॊशाय कामा कयती शं । श्रीकृ ष्ण उलाि त्लभेल वलाजननी भूरप्रकृ सतयीद्वयी। त्लभेलाद्या वृत्रद्शत्रलधौ स्लेच्छमा त्रिगुणास्त्भका॥१॥ कामााथे वगुणा त्लॊ ि लस्तुतो सनगुण ा ा स्लमभ ्। ऩयब्रह्मास्लरूऩा त्लॊ वत्मा सनत्मा वनातनी॥२॥ तेज्स्लरूऩा ऩयभा बक्तानुग्रशत्रलग्रशा। वलास्लरूऩा वलेळा वलााधाया ऩयात्ऩय॥३॥ वलाफीजस्लरूऩा ि वलाऩूज्मा सनयाश्रमा। वलासा वलातोबद्रा वलाभॊगरभॊगरा॥४॥ अथाात् आऩ त्रलद्वजननी भूर प्रकृ सत ईद्वयी शो. वलाप्रकाय वे भॊगर कयने लारी एलॊ वला भॊगरं फक बी भॊगर शो। ऋग्लेदोक्त दे ली वूक्तभ ् अशसभत्मद्शिास्म वूक्त स्म लागाम्बृणी ऋत्रऴ: वस्च्ित्वुखात्भक: वलागत: ऩयभात्भा दे लता. आऩ वृत्रद्श की उत्ऩत्रत्त के वभम आद्याळत्रक्त के रूऩ भं त्रलयाजभान यशती शो औय स्लेच्छा वे त्रिगुणास्त्भका फन जाती शो। मद्यत्रऩ लस्तुत् आऩ स्लमॊ सनगुण ा शो तथात्रऩ प्रमोजनलळ वगुण शो जाती शो। आऩ ऩयब्रह्म स्लरूऩ. सळद्शानाॊ त्रिद्शु ऩ ् छडद:. वलााधाय एलॊ ऩयात्ऩय शो। आऩ वलााफीजस्लरूऩ.

34 वप्तश्र्लरोकी दग ु ाा दे त्रल त्लॊ बक्तवुरबे वलाकामात्रलधासमनी। करौ फश कामासवद्धमथाभुऩामॊ ब्रूफश मित्॥ दे ल उलाि: श्रृणु दे ल प्रलक्ष्मासभ करौ वलेद्शवाधनभ।् भमा तलैल स्नेशेनाप्मम्फास्तुसत् प्रकाश्मते॥ त्रलसनमोग् ॐ अस्म श्री दग ु ाावद्ऱद्ऴोकीस्तोिभडिस्म नायामण ऋत्रऴ् अनुद्शऩछडद्. ् श्रीभह्मकारी भशारक्ष्भी भशावयस्लत्मो दे लता्. अक्टू फय 2011 दग ु ाा आयती जम अम्फे गौयी भैमा जम श्माभा गौयी। तुभको सनवफदन ध्मालत शरय ब्रम्शा सळलयी॥१॥ भाॊग सवॊदयू त्रलयाजत टीको भृगभदको। उज्जलर वे दोऊ नैना िडद्रलदन नीको॥२॥ कनक वभान करेलय यक्ताम्फय याजे। यक्त ऩुष्ऩ गर भारा कण्ठन ऩय वाजे॥३॥ केशरय लाशन याजत खड्ग खप्ऩय धायी। वुय नय भुसन जन वेलत सतनके द्ु ख शायी॥४॥ श्रीदग ु ााप्रीत्मथं वद्ऱद्ऴोकीदग ु ााऩाठे त्रलसनमोग्। कानन कुॊडर ळोसबत नावाग्रे भोती। ॐ सासननाभत्रऩ िेताॊसव दे ली बगलती फशवा। कोफटक िॊद्र फदलाकय याजत वभ ज्मोसत॥५॥ फरादाकृ ष्म भोशाम भशाभामा प्रमच्छसत॥ दग ु े स्भृता शयसव बीसतभळेऴजडतो् स्लस्थै् स्भृता भसतभतील ळुबाॊ ददासव। दारयद्रमद्ु खबमशारयस्ण त्लदडमा वलोऩकायकयणाम वदाद्रा सित्ता॥ वलाभॊगरभॊगल्मे सळले वलााथव ा ासधके। ळुॊब सनळॊबु त्रलदाये भफशऴावुयधाती। धूम्रत्रलरोिन नैना सनळफदन भदभाती॥६॥ िण्ड भुण्ड वॊशाये ळोस्णत फीज शये । भधु कैटब दोउ भाये वुय बमशीन कये ॥७॥ ब्रम्शाणी रुद्राणी तुभ कभरायानी। आगभ सनगभ फखानी तुभ सळल ऩटयानी॥८॥ ळयण्मे त्र्मम्फके गौरय नायामस्ण नभोऽस्तुते॥ िौवॊठ मोसगनी गालत नृत्म कयत बैरुॉ। ळयणागतदीनाताऩरयिाणऩयामणे। फाजत तार भृदॊगा अरु डभरुॉ ॥९॥ वलास्मासताशये दे त्रल नायामस्ण नभोऽस्तुते॥ तुभ शी जग की भाता तुभ शी शो बयता। वलास्लरूऩे वलेळे वलाळत्रक्तवभस्डलते। बक्तन की द्ु खशताा वुख वम्ऩत्रत्त कताा॥१०॥ बमेभ्मस्त्राफश नो दे त्रल दग ु े दे त्रल नभोऽस्तुते॥ योगानळोऴानऩशॊ सव तुद्शा रूद्शा तु काभान ् वकरानबीद्शान।् त्लाभासश्रतानाॊ न त्रलऩडनयाणाॊ त्लाभासश्रता ह्माश्रमताॊ प्रमास्डत॥ वलााफाधाप्रळभनॊ िैरोक्मस्मास्खरेश्र्ललरय। एलभेल त्लमा कामाभस्मद्रै रयत्रलनाळनभ॥् ॥ इसत श्रीवद्ऱद्ऴोकी दग ा ्॥ ु ाा वॊऩूणभ बुजा िाय असत ळोसबत लय भुद्रा धायी। भनलाॊस्च्छत पर ऩाले वेलत नय नायी॥११॥ कॊिन थार त्रलयाजत अगय कऩुय फात्ती। श्री भार केतु भं याजत कोफट यतन ज्मोती॥१२॥ भाॉ अम्फे जी की आयती जो कोई नय गामे। कशत सळलानॊद स्लाभी वुख वॊऩत्रत्त ऩामे॥१३॥ .

अक्टू फय 2011 35 ॥ सवद्धकुॊस्जकास्तोिभ ् ॥ सळल उलाि ऐॊकायी वृत्रद्शरूऩामै ह्रीॊकायी प्रसतऩासरका। मेन भडिप्रबालेण िण्डीजाऩ् ळुबो बलेत॥१॥ ् िाभुण्डा िण्डघाती ि मैकायी लयदासमनी॥४॥ ळृणु दे त्रल प्रलक्ष्मासभ कुॊस्जकास्तोिभुत्तभभ।् क्रीॊकायी काभरूत्रऩण्मै फीजरूऩे नभोऽस्तु ते॥३॥ न कलिॊ नागारास्तोिॊ कीरकॊ न यशस्मकभ।् त्रलच्िे िाबमदा सनत्मॊ नभस्ते भॊिरूत्रऩस्ण। न वूक्तॊ नात्रऩ ध्मानॊ ि न डमावो न ि लािानभ॥२॥ ् धाॊ धीॊ धूॊ धूजट ा े ् ऩत्नी लाॊ लीॊ लूॊ लागधीद्वयी॥५॥ कुॊस्जकाऩाठभािेण दग ु ााऩाठपरॊ रबेत।् क्राॊ क्रीॊ क्रूॊ कासरका दे त्रल ळाॊ ळीॊ ळूॊ भे ळुबॊ कुरु॥६॥ असत गुह्यतयॊ दे त्रल दे लानाभत्रऩ दर ा भ॥३॥ ् ु ब शुॊ शुॊ शुॊकायरूत्रऩण्मै जॊ जॊ जॊ जम्बनाफदनी। गोऩनीमॊ प्रमत्नेन स्लमोसनरयल ऩालासत। भ्राॊ भ्रीॊ भ्रूॊ बैयली बद्रे बलाडमै ते नभो नभ् भायणॊ भोशनॊ लश्मॊ स्तम्बनोच्िाटनाफदकभ।् अॊ कॊ िॊ टॊ तॊ ऩॊ मॊ ळॊ लीॊ दॊ ु ऐॊ लीॊ शॊ षॊ॥७॥ ऩाठभािेण वॊसवद्धमेत ् कुॊस्जकास्तोिभुत्तभभ॥४॥ ् सधजाग्रॊ सधजाग्रॊ िोटम िोटम दीद्ऱॊ कुरु कुरु स्लाशा॥ अथ भॊि ॐ ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे। ॐ ग्रं शुॊ क्रीॊ जूॊ व् ज्लारम ज्लारम ज्लर ज्लर प्रज्लर प्रज्लर ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊ िाभुण्डामै त्रलच्िे ज्लर शॊ वॊ रॊ षॊ पट् स्लाशा इसत भॊि् नभस्ते रुद्ररूत्रऩण्मै नभस्ते भधुभफदासन। नभ् कैटबशारयण्मै नभस्ते भफशऴाफदा सन॥१॥ नभस्ते ळुम्बशडत्र्मै ि सनळुम्बावुयघासतसन। ऩाॊ ऩीॊ ऩूॊ ऩालाती ऩूणाा खाॊ खीॊ खूॊ खेियी तथा ॥८॥ वाॊ वीॊ वूॊ वद्ऱळती दे व्मा भॊिसवत्रद्धॊ कुरुष्ल भे॥ इदॊ तु कुॊस्जकास्तोिॊ भॊिजागसताशेतले। अबक्ते नैल दातव्मॊ गोत्रऩतॊ यष ऩालासत॥ मस्तु कुॊस्जकमा दे त्रल शीनाॊ वद्ऱळतीॊ ऩठे त।् न तस्म जामते सवत्रद्धययण्मे योदनॊ मथा॥ । इसत श्री कुॊस्जकास्तोिभ ् वॊऩण ू भ ा ्। जाग्रतॊ फश भशादे त्रल जऩॊ सवद्धॊ कुरुष्ल भे॥२॥ दग ु ााद्शकभ ् दग ु े ऩये सळ ळुबदे सळ ऩयात्ऩये सळ। ऩूज्मे भशालृऴबलाफशसन भॊगरेसळ। भोषेऽस्स्थये त्रिऩुयवुडदरयऩाटरेसळ। स्तुत्मे स्लधे वकरताऩशये वुयेसळ। यम्मेधये वकरदे लनुते गमेसळ। तृष्णे तयॊ सगस्ण फरे गसतदे ध्रुलेसळ। लडद्ये भशे ळदसमतेकरुणाणालसे ळ। कृ ष्णस्तुते कुरु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥१॥ फदव्मे नुते श्रुसतळतैत्रलाभरे बलेसळ। कडदऩादायळतमुडदरय भाधलेसळ। भेधे सगयीळतनमे सनमते सळलेसळ। कृ ष्णस्तुते कुरु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥२॥ यावेद्वरय प्रणतताऩशये कुरेसळ। धभात्रप्रमे बमशये लयदाग्रगेसळ। लाग्दे लते त्रलसधनुते कभरावनेसळ। कृ ष्णस्तुतेकुरु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥३॥ ऩद्मे फदगम्फरय भशे द्वरय काननेसळ। कृ ष्णस्तुते कुरु कृ ऩा रसरतेऽस्खरेसळ॥४॥ श्रद्धे वुयाऽवुयनुते वकरे जरेसळ। गॊगे सगयीळदसमते गणनामकेसळ। दषे स्भळानसनरमे वुयनामकेसळ। कृ ष्णस्तुते कुरु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥५॥ ताये कृ ऩाद्रा नमने भधुकैटबेसळ। त्रलद्येद्वये द्वरय मभे सनखराषये सळ। ऊजे ितु्स्तसन वनातसन भुक्तकेसळ। कृ ष्णस्तुते कुरु कृ ऩाॊ रसरतऽस्खरेसळ॥६॥ भाशे द्वरय त्रिनमने प्रफरे भखेसळ। कृ ष्णस्तुते कुरु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥७॥ त्रलद्वम्बये वकरदे त्रलफदते जमेसळ। त्रलडध्मस्स्थते ळसळभुस्ख षणदे दमेसळ। भात् वयोजनमने यसवके स्भये सळ। कृ ष्णस्तुते कुरु कृ ऩाॊ रसरतेऽस्खरेसळ॥८॥ दग ु ााद्शकॊ ऩठसत म् प्रमत् प्रबाते वलााथद ा ॊ शरयशयाफदनुताॊ लये ण्माभ।् दग ू म भफशताॊ त्रलत्रलधोऩिायै ् ु ां वुऩज् प्राप्नोसत लाॊसछतपरॊ न सियाडभनुष्म्॥९॥ ॥ इसत श्री दग ा ्॥ ु ााद्शकॊ वम्ऩूणभ .

36 अक्टू फय 2011 ॥ बलाडमद्शकभ ् ॥ न तातो न भाता न फडधुना दाता कुकभॉ कुवॊगी कुफुत्रद्ध कुदाव् न ऩुिो न ऩुिी न बृत्मो न बताा। कुरािायशीन् कदािायरीन्। न जामा न त्रलद्या न लृत्रत्तभाभैल कुदृत्रद्श् कुलाक्मप्रफॊध् वदाऽश गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥१॥ गसतस्त्ल गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥५॥ बलाब्धालऩाये भशाद्ु खबीरु् प्रजेळॊ यभेळॊ भशे ळॊ वुयेळॊ कुवॊवाय-ऩाळ-प्रफद्ध् वदाऽशॊ न जानासभ िाऽडमत ् वदाऽशॊ ळयण्मे ऩऩात प्रकाभी प्ररोबी प्रभत्त्। गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥२॥ फदनेळॊ सनळीथेद्वयॊ ला कदासित।् गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥६॥ न जानासभ दानॊ न ि ध्मान-मोगॊ त्रललादे त्रलऴादे प्रभादे प्रलावे न जानासभ तॊि न ि स्तोि-भडिभ।् जरे िाऽनरे ऩलाते ळिुभध्मे। न जानासभ ऩूजाॊ न ि डमावमोगॊ अयण्मे ळयण्मे वदा भाॊ प्रऩाफश गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥३॥ गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥७॥ न जानासभ ऩुण्मॊ न जानासन तीथं अनाथो दरयद्रो जया-योगमुक्तो न जानासभ भुत्रक्तॊ रमॊ ला कदासित।् भशाषीणदीन् वदा जाड्मलक्ि्। न जानासभ बत्रक्त व्रतॊ लाऽत्रऩ भात- त्रलऩत्तौ प्रत्रलद्श् प्रणद्श् वदाऽशॊ गासतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥४॥ गसतस्त्लॊ गसतस्त्लॊ त्लभेका बलासन॥८॥ ॥ इसत श्रीबलाडमद्शकॊ वॊऩूणभ ा ्॥ षभा-प्राथाना अऩयाधवशस्त्रास्ण फक्रमडतेऽशसनाळॊ भमा। दावोऽमसभसत भाॊ भत्ला षभस्ल ऩयभेद्वरय॥१॥ आलाशनॊ न जानासभ न जानासभ त्रलवजानभ ्। ऩूजाॊ िैल न जानासभ षम्मताॊ ऩयभेद्वरय॥२॥ भडिशीनॊ फक्रमाशीनॊ बत्रक्तशीनॊ वुयेद्वरय। मत्ऩूस्जतॊ भमा दे त्रल ऩरयऩूणा तदस्तु भे॥३॥ अऩयाधळतॊ कृ त्ला जगदम्फेसत िोच्िये त ्। माॊ गसतॊ वभलाऩनेसत न ताॊ ब्रह्मादम: वुया्॥४॥ वाऩयाधोऽस्स्भ ळयणॊ प्राद्ऱस्त्लाॊ जगदस्म्फके। इदानीभनुकम्प्मोऽशॊ मथेच्छसव तथा कुरु॥५॥ असानाफद्रस्भृतेभ्रराडत्मा मडडमूनभसधकॊ कृ तभ ्। तत्वला षम्मताॊ दे त्रल प्रवीद ऩयभेद्वरय॥६॥ काभेद्वरय जगडभात: वस्च्िदानडदत्रलग्रशे । गृशाणािाासभभाॊ प्रीत्मा प्रवीद ऩयभेद्वरय॥७॥ गुह्यासतगुह्यगोप्िी त्लॊ गृशाणास्भत्कृ तॊ जऩभ ्। सवत्रद्धबालतु भे दे त्रल त्लत्प्रवादात्वुयेद्वरय॥८॥ .

91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com. . gurutva_karyalay@yahoo.in.37 अक्टू फय 2011 दग ु ााद्शोत्तय ळतनाभ स्तोिभ ् ळतनाभ प्रलक्ष्मासभ ळृणुष्ल कभरानने। अनेकळस्त्रशस्ता ि अनेकास्त्रस्म धारयणी। मस्म प्रवादभािेण दग ु ाा प्रीता बलेत ् वती॥१॥ कुभायी िैककडमा ि कैळोयी मुलती मसत्॥१२॥ वती वाध्ली बलप्रीता बलानी बलभोिनी। अप्रौढा िैल प्रौढा ि लृद्धभाता फरप्रदा। आमाा दग ु ाा जमा िाद्या त्रिनेिा ळूरधारयणी॥२॥ भशोदयी भुक्त केळी घोयरूऩा भशाफरा॥१३॥ त्रऩनाकधारयणी सििा िण्डघण्टा भशातऩा्। अस्ग्नज्लारा यौद्रभुखी कारयात्रिस्तऩस्स्लनी। भनो फुत्रद्धयशॊ काया सित्तरूऩा सिता सिसत्॥३॥ नायामणी बद्रकारी त्रलष्णुभामा जरोदयी॥१४॥ वलाभडिभमी वत्ता वत्मानडदस्लरूत्रऩणी। सळलदत ू ी कयारी ि अनडता ऩयभेद्वयी। अनडता बात्रलनी बाव्मा बव्माबव्मा वदागसत्॥४॥ ळाम्बली दे लभाता ि सिडता यत्नत्रप्रमा वदा। कात्मामनी ि वात्रलिी प्रत्मषा ब्रह्मलाफदनी॥१५॥ म इदॊ प्रऩठे स्डनत्मॊ दग ु ाानाभळताद्शकभ ्। वलात्रलद्या दषकडमा दषमसत्रलनासळनी॥५॥ नावाध्मॊ त्रलद्यते दे त्रल त्रिऴु रोकेऴु ऩालासत॥१६॥ अऩणाानेकलणाा ि ऩाटरा ऩाटरालती। धनॊ धाडमॊ वुतॊ जामाॊ शमॊ शस्स्तनभेल ि। ऩट्टाम्फयऩयीधाना करभछजीययस्छजनी॥६॥ ितुलग ा ा तथा िाडते रबेडभुत्रक्तॊ ि ळाद्वतीभ ्॥१७॥ अभेमत्रलक्रभा क्रूया वुडदयी वुयवुडदयी। कुभायीॊ ऩूजसमत्ला तु ध्मात्ला दे लीॊ वुयेद्वयीभ ्। लनदग ु ाा ि भातङ्गी भतङ्गभुसनऩूस्जता॥७॥ ऩूजमेत ् ऩयमा बक्त्मा ऩठे डनाभळताद्शकभ ्॥१८॥ ब्राह्मी भाशे द्वयी िैडद्री कौभायी लैष्णली तथा। तस्म सवत्रद्धबालेद् दे त्रल वलै: वुयलयै यत्रऩ। िाभुण्डा िैल लायाशी रक्ष्भीद्ळ ऩुरुऴाकृ सत्॥८॥ त्रलभरोत्कत्रऴण ा ी साना फक्रमा सनत्मा ि फुत्रद्धदा। फशुरा फशुरप्रेभा वलालाशनलाशना॥९॥ याजानो दावताॊ मास्डत याज्मसश्रमभलाऩनुमात ्॥१९॥ गोयोिनारक्त ककुङ्कुभेन सवडदयू कऩूया भधुिमेण। त्रलसरख्म मडिॊ त्रलसधना त्रलसधसो बलेत ् वदा धायमते सनळुम्बळुम्बशननी भफशऴावुयभफदा नी। ऩुयारय्॥२०॥ भधुकैटबशडिी ि िण्डभुण्डत्रलनासळनी॥१०॥ बौभालास्मासनळाभग्रे िडद्रे ळतसबऴाॊ गते। वलाावुयत्रलनाळा ि वलादानलघासतनी। त्रलसरख्म प्रऩठे त ् स्तोिॊ व बलेत ् वम्ऩदाॊ ऩदभ ्॥२१॥ वलाळास्त्रभमी वत्मा वलाास्त्रधारयणी तथा॥११॥ ळादी वॊफॊसधत वभस्मा क्मा आऩके रडके-रडकी फक आऩकी ळादी भं अनालश्मक रूऩ वे त्रलरम्फ शो यशा शं मा उनके लैलाफशक जीलन भं खुसळमाॊ कभ शोती जायशी शं औय वभस्मा असधक फढती जायशी शं । एवी स्स्थती शोने ऩय अऩने रडके-रडकी फक कुॊडरी का अध्ममन अलश्म कयलारे औय उनके लैलाफशक वुख को कभ कयने लारे दोऴं के सनलायण के उऩामो के फाय भं त्रलस्ताय वे जनकायी प्राद्ऱ कयं । GURUTVA KARYALAY Call us: 91 + 9338213418.

ऎन.जोळी त्रलद्वॊबयी अस्खर त्रलद्वतणी जनेता। ये ये बलानी फशु बूर थई ज भायी। त्रलद्या धयी लदनभाॊ लवजो त्रलधाता॥ आ स्जॊदगी थई भने असतळे अकायी॥ दफ ु त्रुा द्ध दयु कयी वद्दफुत्रद्ध आऩो। दोऴो प्रजासऱ वधऱा तल छाऩ छाऩो। भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ु ख काऩो ॥१॥ भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ु ख काऩो ॥७॥ बूरो ऩफड बलयने बटकुॊ बलानी। खारी न कोइ स्थऱ छे त्रलण आऩ धायो। वुझे नफश रगीय कोइ फदळा जलानी॥ ब्रह्माॊडभाॊ अणु-अणु भशीॊ लाव तायो॥ बावे बमॊकय लऱी भनना उताऩो। ळत्रक्त न भाऩ गणला अगस्णत भाऩो। भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ु ख काऩो ॥२॥ भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ु ख काऩो ॥८॥ आ यॊ कने उगयला नथी कोइ आयो। ऩाऩो प्रऩॊि कयला फधी यीते ऩूयो। जडभाॊध छु जननी शु ग्रशी शाथ तायो॥ खोटो खयो बगलती ऩण शुॊ तभायो॥ ना ळुॊ वुणो बगलती सळळुना त्रलराऩो। जाडमाॊधकाय कयी दयू वुफुत्रद्ध स्थाऩो। भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ु ख काऩो ॥३॥ भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ु ख काऩो ॥९॥ भा कभा जडभ कथनी कयताॊ त्रलिारु। ळीखे वुणे यसवक छॊ द ज एक सित्ते। आ वृत्रद्शभाॊ तुज त्रलना नथी कोइ भारु॥ तेना थकी त्रित्रलध ताऩ टऱे खसिते॥ कोने कशुॊ कठण काऱ तणो फऱाऩो। फुत्रद्ध त्रलळेऴ जगदॊ फ तणा प्रताऩो। भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ु ख काऩो ॥४॥ भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ु ख काऩो ॥१०॥ शुॊ काभ क्रोध भध भोश थकी बये रो। श्री वदगुरु ळयनभाॊ यशीने मजुॊ छुॊ। आडॊ फये असत धणो भद्थी छकेरो॥ यात्रि फदने बगलती तुजने बजुॊ छु॥ दोऴो फधा दयू कयी भाप ऩाऩो। वदबक्त वेलक तणा ऩरयताऩ िाऩो। भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ु ख काऩो ॥५॥ भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ु ख काऩो ॥११॥ ना ळास्त्रना श्रलणनु ऩम्ऩान ऩीधु। अॊतय त्रलऴे असधक उसभा थताॊ बलानी। ना भॊि के स्तुसत कथा नथी काइ कीधु॥ गाऊ स्तुसत तल फऱे नभीने भृडानी॥ श्रद्धा धयी नथी कमाा तल नाभ जाऩो। वॊवायना वकऱ योग वभूऱ काऩो। भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ु ख काऩो ॥६॥ भाभ ् ऩाफश ॐ बगलती बल द्ु ख काऩो ॥१२॥ .38 अक्टू फय 2011 त्रलद्वॊबयी स्तुसत त्रलद्वॊबयी स्तुसत भूर रुऩवे गुजयाती भं लल्रब बट्ट द्राया सरखी गई शं । स्लस्स्तक.

अक्टू फय 2011 39 भफशऴावुयभफदा सनस्तोिभ ् ||बगलतीऩद्यऩुष्ऩाॊजसरस्तोि भफशऴावुयभफदा सनस्तोिभ ् || लासवसन शावयते सळखरय सळयोभस्ण तुङ्ग फशभारम ळृॊग श्री त्रिऩुयवुडदमै नभ् || बगलती सनजारम भध्मगते | भधु भधुये भधु कैटब गॊस्जसन कैटब बगलत्ऩदऩङ्कजॊ भ्रभयबूतवुयावुयवेत्रलतभ ् | बॊस्जसन यावयते जम जम भफशऴावुयभफदा सन वुजनभानवशॊ वऩरयस्तुतॊ कभरमाऽभरमा सनबृतॊ बजे ||१|| यम्मकऩफदा सन ते उबे असबलडदे ऽशॊ त्रलघ्नेळकुरदै लते | नयनागाननस्त्लेको त्रलखस्ण्डत रुण्ड त्रलतुस्ण्डत ळुण्ड गजासधऩते रयऩु गज गण्ड नयसवॊश नभोऽस्तुते ||२|| शरयगुरुऩदऩद्मॊ ळुद्धऩद्येऽनुयागाद् त्रलदायण िण्ड ऩयाक्रभ ळुण्ड भृगासधऩते | सनज बुज दण्ड त्रलगतऩयभबागे वस्डनधामादये ण | तदनुिरय कयोसभ प्रीतमे सनऩासतत खण्ड त्रलऩासतत भुण्ड बटासधऩते जम जम शे बत्रक्तबाजाॊ बगलसत ऩदऩद्मे ऩद्यऩुष्ऩाछजसरॊ ते ||३|| केनैते भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||४||||१०|| असम यसिता् कुतो न सनफशता् ळुम्बादमो दभ ा ा् केनैते तल ु द यण दभ ा ळिु लधोफदत दध ु द ु या सनजाय ळत्रक्तबृते ितुय त्रलिाय ऩासरता इसत फश तत ् प्रद्ले फकभािक्ष्भशे | ब्रह्माद्या अत्रऩ धुयीण भशासळल ळॊफकता् दयु ाळम दभ ु सा त स्लत्रलऴमे मस्मा् प्रवादालसध भफशऴावुयप्रभसथनीच््द्यादलद्यासन भे प्रीता ||४|| ऩातु वा श्रीस्तु ळैरवुते शे ||३||||९|| दत ू कृ त असम प्रभथासधऩते दानलदत ू कृ ताॊतभते | ळतखण्ड दरु यत जम दयु ीश जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||५||||११|| असम ितुबज ुा ा फकभु ितुफााशोभाशौजाडबुजान ् धत्तेऽद्शादळधा फश ळयणागत कायणगुणाडकामे वत्मॊ भस्तक ळूर त्रलयोसध सळयोसध कृ ताभर ळूरकये | दसु भदसु भ स्लमॊ ताभय दॊ द ु सु बनाद भशो भुखयीकृ त सतग्भकये जम जम शे ||५|| भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||६||||१२|| असम प्रीत्माऽद्शादळवॊसभतेऴु मुगऩद्द्रीऩेऴु दातुॊ लयान ् िातुॊ ला सनज शुॉकृसत भाि सनयाकृ त धूम्र त्रलरोिन धूम्र ळते वभय गुणायम्बका् फदक्ऩसतदस्डतवॊख्मबुजबृच्छम्बु् धाभैकप्रसतऩत्तमे फकभथला | स्लय्म्बू् ऩातुॊ दळाद्शौ फदळ् बमतो त्रफबत्रऴा बगलत्मद्शादळैतान ् बुजान ् | मद्राऽद्शादळधा लैरय लधूलय लीय लयाबम दामकये त्रिबुलन त्रलळोत्रऴत ळोस्णत फीज वभुद्भल ळोस्णत फीज रते | सळल बुजाॊस्तु त्रफबृत् कारी वयस्लत्मुबे भीसरत्लैकसभशानमो् सळल ळुॊब सनळुॊब भशाशल तत्रऩात बूत त्रऩळाियते जम जम प्रथसमतुॊ वा त्लॊ यभे यषभाभ ् ||६|| असम सगरयनॊफदसन शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||७||||१३|| नॊफदतभेफदसन त्रलॊध्म धनुयनु वॊग यणषणवॊग ऩरयस्पुय दॊ ग नटत्कटके कनक सळयोसधसनलासवसन त्रलष्णुत्रलरासवसन स्जष्णुनुते | बगलसत शे त्रऩळॊग ऩृऴत्क सनऴॊग यवद्भट ळृॊग शतालटु के | कृ त सळसतकण्ठकुटु ॊ त्रफसन बूरय कुटु ॊ त्रफसन बूरय कृ ते जम जम शे ितुयङ्ग फरस्षसत यङ्ग घटद्बशुयङ्ग यटद्बटु के जम जम शे त्रलद्वत्रलनोफदसन भफशऴावुयभफदा सन वुयलयलत्रऴास्ण यम्मकऩफदा सन दध ु या धत्रऴास्ण नॊदनुते सगरयलय ळैरवुते दभ ुा भत्रऴास्ण ु ख ||१||||७|| शऴायते त्रिबुलनऩोत्रऴस्ण ळॊकयतोत्रऴस्ण फकस्ल्फऴभोत्रऴस्ण घोऴयते | दनुज सनयोत्रऴस्ण फदसतवुत सवडधुवुते जम जम शे योत्रऴस्ण दभ ा ु द ळोत्रऴस्ण भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||२||||८|| असम जगदॊ फ भदॊ फ कदॊ फ लनत्रप्रम भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१४|| वुयररनाततथेसमतथेसमतथासबनमोत्तयनृत्मयते शावत्रलरावशुरावभसम प्रणताताजनेऽसभतप्रेभबये | सधसभफकटसधक्कटसधकटसधसभध्लसनघोयभृदॊगसननादयते जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन जम ळैरवुते ||८||||१५|| जम जम जप्म जमेजम ळब्द ऩयस्तुसत .

अक्टू फय 2011 40 तत्ऩय त्रलद्वनुते झण झण स्झस्छजसभ स्झॊकृत नूऩुय सवॊस्जत वशस्रकयै कनुते कृ त वुयतायक वङ्गयतायक वङ्गयतायक भोफशत बूतऩते | नफटत नटाधा नटीनट नामक नाफटत वूनुवुते | वुयथ वभासध वभानवभासध वभासधवभासध नाट्म वुजातयते जम जम शे वुगानयते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||९||||१६|| असम वुभन् वुभन् ळैरवुते ||१६||||२३|| ऩदकभरॊ करुणासनरमे लरयलस्मसत वुभन् वुभन् वुभनोशय काॊसतमुते सश्रत यजनी यजनी मोऽनुफदनॊ यजनी यजनी यजनीकय लक्िलृते | वुनमन त्रलभ्रभय भ्रभय कभरासनरम् भ्रभय भ्रभय भ्रभयासधऩते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन ऩयॊ ऩदसभत्मनुळीरमतो भभ फकॊ न सळले जम जम शे यम्मकऩफदा सन भफशऴावुयभफदा सन व असम कथॊ कभरे न बलेत ् | तल त्रलयसित कनकरवत्कर सवडधु जरैयनु सवस्छिनुते गुण यङ्गबुलॊ लस्ल्रक ऩस्ल्रक भस्ल्रक स्झस्ल्रक सबस्ल्रक लगा लृते | बजसत व फकॊ न ळिीकुि कुॊब तटी ऩरययॊ ब वुखानुबलभ ् सवतकृ त | तल ियणॊ ळयणॊ कयलास्ण नताभयलास्ण सनलासव सळलॊ पुस्ल्रवभुल्र यल्रक सवतारुण तल्रज ऩल्रल जम ळैरवुते ||११||||१८|| अत्रलयर गण्ड गरडभद भेदयु भत्त ||१८||||२५|| तल त्रलभरेडदक ु ु रॊ लदनेडदभ ु रॊ वकरॊ ननु भतङ्गज याजऩते त्रिबुलन बूऴण बूत करासनसध रूऩ कूरमते ऩमोसनसध याजवुते | असम वुद तीजन रारवभानव भोशन त्रलभुखीफक्रमते | भभ तु भतॊ सळलनाभधने बलती कृ ऩमा भडभथ भफशऴावुयभफदा सन फकभुत फक्रमते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१२||||१९|| कभर दराभर कोभर ळैरवुते ||१९||||२६|| असम भसम दीनदमारुतमा कृ ऩमैल काॊसत त्लमा बत्रलतव्मभुभे असम जगतो जननी कृ ऩमासव मथासव जम कराकसरताभर जम शे बाररते वकर त्रलराव शे भफशऴावुयभफदा सन ||१७||||२४|| वल्रसरते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन याजवुते जम ळैरवुते ऩदभेल भल्रयते भस्ल्रत यम्मकऩफदा सन कभरासनरमे भशाशल तस्ल्रक ||१०||||१७|| सळले वफशत भल्रभ ळैरवुते व फकभु ऩुरुशूत यम्मकऩफदा सन ऩुयीडदभ ु ुखी ळैरवुते वुभुखीसबयवौ करासनरमक्रभ केसर िरत्कर शॊ व कुरे | असरकुर तथाऽनुसभतासवयते | मदसु ितभि वङ्कुर कुलरम भण्डर भौसरसभरद्भकुरासर कुरे जम जम कुरुतादरु ु ताऩभऩाकुरुते जम जम शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१३||||२०|| यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||२०||||२७|| स्तुसतसभतस्स्तसभत् कय भुयरी यल लीस्जत कूस्जत रस्ज्जत कोफकर भछजुभते वुवभासधना सभसरत ऩुसरडद भनोशय गुस्छजत यॊ स्जतळैर सनकुछजगते | यभमात्रऩ सनजगुण बूत भशाळफयीगण वद्गण ृ केसरतरे जम ु वॊबत ||२८|| यभमसत फकर कऴास्तेऴु सित्तॊ नयाणाभलयजलय जम मस्भाद्राभकृ ष्ण् शे भफशऴावुयभफदा सन यम्मकऩफदा सन ळैरवुते सनमभतोऽमभतोऽनुफदनॊ सनऴेव्मते शे बलत्मुयरय भफशऴावुयभफदा सन ऩठे त ् ऩरयजनोऽरयजनोऽत्रऩ कलीनाभ ् | अकृ त ि | तॊ ऩयभमा बजेत ् वुकृसतगम्मॊ ||१४||||२१|| कफटतट ऩीत दक ु ू र त्रलसिि भमूखसतयस्कृ त यम्मऩद्दै कशम्मं स्तलनभलनशे तुॊ प्रीतमे त्रलद्वभातु् ||२९|| िॊद्र रुिे प्रणत वुयावुय भौसरभस्णस्पुय दॊ ळुर वडनख िॊद्र इडदयु म्मो भुशुत्रफाडदयु म्मो भुशुत्रफाडदयु म्मो मत् वोऽनलद्य् रुिे | स्जत कुॊबकुिे जम कनकािर जम शे भौसरऩदोस्जात भफशऴावुयभफदा सन सनबाय कुॊजय यम्मकऩफदा सन ळैरवुते ||१५||||२२|| त्रलस्जत वशस्रकयै क वशस्रकयै क स्भृत् | श्रीऩते् वूनूना कारयतो मोऽधुना त्रलद्वभातु् ऩदे ऩद्यऩुष्ऩाछजसर् ||३०|| || इसत श्रीबगलतीऩद्यऩुष्ऩाछजसरस्तोिभ ् || .

दे त्रल गोऩमेत ् मस्तु वलादा वद्ऱळतीॊ न तस्म जामते सवत्रद्धॊ . िोटम-िोटम दीद्ऱॊ कुरु कुरु स्लाशा॥ कुस्छजकाभडिभुत्तभभ ्॥४॥ ऩाॊ ॐ द्ऴं दॉ ु क्रीॊ क्रं जुॊ व् ज्लरमोज्ज्लर ज्लर प्रज्लर- वाॊ वीॊ वद्ऱळती-सवत्रद्धॊ . ऐॊ ॐ ऐॊ यष वलादा।। ॐ ॐ ॐ-काय-रुऩामै. नभस्ते भफशऴावसन॥ नभस्ते ळुम्बशॊ िेसत. कुरुष्ल इदॊ तु कुस्छजका-स्तोिॊ भॊि-जार-ग्रशाॊ इसत भडि: अबक्ते ऩाठ-भािेण अथ भडि: वॊसवत्रद्ध् प्रज्लर प्रफर-प्रफर शॊ वॊ रॊ षॊ पट् स्लाशा इव कुस्छजका भडि का दव फाय जऩ कयना िाफशए। इवी प्रकाय स्तल-ऩाठ के अडत भं ऩुन् इव भडि का दव फाय जऩ कय कुस्छजका स्तोि का ऩाठ कयना िाफशए। ऩीॊ ऩूॊ ऩालाती ऩूणाा. सनळुम्बावुय-घासतसन। जाग्रतॊ फश भशा-दे त्रल जऩ-सवत्रद्धॊ कुरुष्ल भे॥ क्रीॊ-कायी काभरूत्रऩण्मै फीजरूऩा नभोऽस्तु ते। िाभुण्डा िण्ड-घाती ि मं-कायी लय-दासमनी॥ धाॊ धीॊ धूॊ धूजट ा े ऩात्नी लाॊ लीॊ लागेद्वयी तथा। ऩूल-ा ऩीफठका-ईद्वय उलाि: दे त्रल. शॊ वॊ रॊ षॊ भसम जाग्रम-जाग्रम. आरोक ळभाा ळुबभ ् न बलेत ्॥१॥ यशस्मकभ ्। क्राॊ क्रीॊ श्रीॊ भे ळुबॊ कुरु.ऎन. कुस्छजकामै नभो नभ्॥ ि कुॊस्जका-त्रलफशतॊ न दातव्मॊ. ज्राॊ-ज्राॊ ज्रम्बार-नाफदनी। क्राॊ क्रीॊ क्रूॊ कासरका दे त्रल. आत्रलबाल.जोळी. लैवा शी कल्माणकायी पर प्रदान कयने लारा गुद्ऱ वद्ऱळती के भॊिो का ऩाठ शं । गुद्ऱ वद्ऱळती भं असधकतय भॊि फीजं के शोने वे मश वाधकं के सरए अभोघ पर प्रदान कयने भं वभथा शं । भं कुस्छजका स्तोि उवके फाद गुद्ऱ वद्ऱळती उवके ऩद्ळमात स्तलन का ऩाठ कये । मेन न प्रलक्ष्मासभ भडिप्रबालेन लभा िण्डीजाऩॊ नागारा-स्तोिॊ कुस्छजका-भडिभुत्तभभ ्। कीरकॊ नभस्ते कैटबायी ि. खाॊ खीॊ खूॊ खेियी तथा॥ म्राॊ म्रीॊ म्रूॊ दीव्मती ऩूणाा. अयण्मे रुदनॊ मथा॥ ॥इसत श्रीरुद्रमाभरे गौयीतॊिे सळलऩालातीवॊलादे कुॊस्जकास्तोिॊ वॊऩूणभ ा ्॥ जऩ-भाित्॥ त्रप्रमे। श्रृणु॥ ऩठे त ्। . ळाॊ ळीॊ ळूॊ भे ळुबॊ कुरु॥ न वूक्तभ ् नात्रऩ ध्मानभ ् ि न डमावभ ् ि न िािानभ ्॥२॥ ह्रूॊ ह्रूॊ ह्रूॊ-कायरूत्रऩण्मै ज्रॊ ज्रॊ ज्रम्बार-नाफदनी। असत भडि: कुस्छजका-ऩाठ-भािेण गुह्यतभभ ् गोऩनीमभ ् भायणभ ् दे त्रल प्रमत्नेन भोशनभ ् दग ु ाा-ऩाठ-परॊ दे लानाभत्रऩ स्ल-मोसन-लच्ि लश्मभ ् रबेत ्। दर ु ाबभ ्॥३॥ ऩालासत। स्तम्बनोच्िाटनाफदकभ ्। भ्राॊ भ्रीॊ भ्रूॊ बैयली बद्रे बलासन ते नभो नभ्॥7॥ अॊ कॊ िॊ टॊ तॊ ऩॊ मॊ ळॊ त्रफडदयु ात्रलबाल. नभस्ते भधु-भफदा सन। त्रलच्िे नोऽबमदा सनत्मॊ नभस्ते भॊिरूत्रऩस्ण॥ कुस्छजका-स्तोि श्रृणु कुस्छजका स्तोि भूर-ऩाठ ऐॊ-कायी वृत्रद्शरूऩामै ह्रीॊकायी प्रसत-ऩासरका॥ गुद्ऱ वद्ऱळती के ऩाठ का क्रभ इव प्रकाय शं । प्रायम्ब स्लस्स्तक. नभस्ते रुद्र-रूऩामै.अक्टू फय 2011 41 गुद्ऱ वद्ऱळती  वॊऩूणा श्री दग ु ाा वद्ऱळती के भॊिो का ऩाठ कयने वे वाधक को जो पर प्राद्ऱ शोता शै .

दशन-ऩुय-गते रुस्क्भ-रुऩेण िक्रे। स्तलन त्रि्-ळक्तमा. सान-फदव्म-प्रफोधा। ॐ घ्राॊ-घ्रीॊ-घ्रूॊ घोय-तुण्डे . वला-बषे प्रिण्डे ॥ जूॊ व् वं ळास्डत-कभेऽभृत-भृत-शये . याषवान ् शडमभाने। ब्रह्माणी लैष्णली त्लॊ. त्लॊ कुभायी भशे डद्री॥ काक-जॊघे. यय-यय-यसभते. त्लभसव ि जननी. स्लत्रऩत-ऩळु-जने. लृऴ लृऴब-ध्लजे. त्लभसव फशुिया. गगन-बुत्रल-तरे. कय-नसभते. कोसळसन कोळ-ऩिे। श्माभाॊगी ळुक्र-ऩाळास्ब्द जगण-गस्णता. बद्र-कारी नभस्ते॥८॥ ऐॊ रोके कीतामडती. त्र्मषये सनभांवे घोय-रुऩे. भन-ऩलन-िरे. ति काडते नभस्ते॥४॥ शाॊ शूॊ गाॊ गीॊ गणेळी. ळल-गभन-गसतबॉऴणे बीभ-लक्िे। क्राॊ क्रीॊ क्रूॊ क्रोध-भूसतात्रलाकृत-स्तन-भुखे. रर-रर-रसरते. वुय-ऩसत-लयदे . िण्ड-भुण्डौ प्रिण्डे । खाॊ-खाॊ-खाॊ खड्ग-ऩाणे. फदव्म-भूसताप्रद ा शतु दरु यतॊ. धूम्र-नेिे त्रि-नेिे। ऐॊ ह्रीॊ क्रीॊकाय-बूते. वला-साने प्रधाने॥ द्रीॊ तीथेऴु ि ज्मेद्षे. कि-रुसि-त्रलऩुरे. गज-भुख-जननी. छे फदते ऩाळ-जारे। फकण्डल्माकाय-रुऩे. त्लॊ वाधकानाॊ. ठठ-ठठ-ठठठ्. कोफकरेनानुयागे। शॊ रॊ षॊ ळौस्ण्ड-रुऩे. शरय-शय-बुलने. व्मात्रऩनी व्मोभ-रुऩे। शॊ -शॊ शॊ काय-नादे . सवद्ध-दे ली वभस्ता। शीॊ-शीॊ-शीॊ सवद्ध-रोके. लज्र-शस्ते. कुरु-कुरु वततॊ. ळसभत बल-बमे. भभ शयतु बमॊ. त्रलऴभलळ-कये . लज्र-दण्डे नभस्ते॥६॥ ॐ क्राॊ क्रीॊ क्रूॊ लाभ-नसभते. मुक्त-लणााफदक. सवद्ध-शस्ते नभस्ते॥३॥ ऩातारे ळैर-श्रृग ॊ े. सन्वभेवॊ वभुद्रे। दे त्रल. उग्र-रुऩे स्लरुऩे॥ शुॉ-शुॉ शुॉकाॊय-नादे . बू-तरे स्लगा-भागे। शस्ताब्जे ळूर-भुण्डे . ज्लर-ज्लर ज्लसरते. िण्ड-रुऩे नभस्ते॥२॥ यक्त-धाया-भथन-कय-लये . स्तुत-वुय-फटु कैशां गणेळस्म भाता। स्लानडदे नडद-रुऩे. घघ-घघ-घफटते. श्री भशा-भारय गुह्ये॥ गाॊ गीॊ गूॊ गं ऴडॊ गे. भुण्ड-िण्डे प्रिण्डे ॥१॥ ॐ शाॊ शीॊ शूॊ लभा-मुक्ते. गुह्य-भुण्डे नभस्ते॥५॥ सानानाॊ वाधमडती. ळुद्ध-दे शे. ध्रक-ध्रक ध्रफकते.अक्टू फय 2011 42 गुद्ऱ-वद्ऱळती वलांगे ॐ ब्रीॊ-ब्रीॊ-ब्रीॊ लेणु-शस्ते. मष-लैतार-नाथे। वु-सवद्धमथे वु-सवद्धै ्. त्लाॊ भशे ळीॊ नभासभ॥१०॥ ॐ व्राॊ-व्रीॊ-व्रूॊ व्रं कत्रलत्ले. गगन-गसत-गते. घघ-घघ घघघे घघायाडमाफ्घ्र-घोऴे। ह्रीॊ क्रीॊ द्रॊ ू द्रोछि-िक्रे. वकर-जन-ऩदा. लीय-बद्रे नभस्ते॥१॥ ॐ शीॊकायोच्िायमडती. त्रलतर-तर-तरे. बल-बल लयदे . दाफदलॊ ऩूल-ा लणे॥ मा दे ली खड्ग-शस्ता. घसवत-नख-नखा. सतसभय-त्रलयफशता. कुश-कुश-भस्खरे. नैल आसा-सनधाने। नवं सननादे । ऐॊकाये यात्रि-भध्मे. सवद्ध-िण्डी नभस्ते॥९॥ ॐ क्रीॊ-क्रीॊ-क्रीॊ ऐॊ कुभायी. यौद्र-दॊ द्सा-कयारे॥ . व्मात्रऩनी त्रलळऽल-दग ु ाा। ह्रीॊ-स्थाने काभ-याजे. घघाये सवत्रद्ध-नाथे. त्लॊ लयाश-स्लरुऩा। घ्राॊ-घ्राॊ-घ्राॊ घोय-याले॥ त्लॊ ऐडद्री त्लॊ कुफेयी. सवत्रद्धदे सवद्ध-वाध्मे॥ तेजाॊगे लॊ क्रॊ भुद्रा फशभाॊळोप्राशवसत-लदने. भभ शयसत बमॊ. अनशत-सनयते. जुग-जुग जजुगे म्रीॊ ऩदे कार-भुण्डे । वा दे ली. गगन गड-गडे गुह्य-मोसन-स्लरुऩे। लज्राॊगे. ब्रह्म-दे शाधा-लावा॥ स्लच्छडदे कद्श-नाळे. वुय-लय-लऩुऴे. भुत्रक्तदे भुत्रक्त-भागे॥ शॊ व् वोशॊ त्रलळारे. वुय-गण-नसभते. वला-त्रलघ्नाडत-त्रलघ्ने। भुद्रा-वॊस-त्रि-ये खा. भत्त-भातॊग-रुढे ॥ स्लस्तेजे. कुर-कुर ककुरे. लरम-गसत-शवे. ऐस्डद्र भातनाभस्ते॥७॥ ॐ शुॉ शुॉ शुॊकाय-नादे .

लय-कनक-सनबे वूम-ा कास्डत-स्लतेजा। त्रलद्युज्ज्लारालरीनाॊ. शरय-शय-नसभते. ळसळ-भुकुट-सळयो लेत्रद्षताॊ केतु-भाराभ ्॥ स्त्रक् -वला-िोयगेडद्रा ळसळ-कयण-सनबा तायका् शाय-कण्ठे । वा दे ली फदव्म-भूसता्. भशा-कत्रिक ा ा दस्षणेन॥ लय-त्रलभर-वुया-ऩूरयतॊ धायमडती। वा दे ली फदव्म-भूसता् प्रदशतु दरु यतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥६॥ दण्ड-प्रिण्डा डभरु-फडसभ-फडभा. ऩाळ-शस्ते त्रि-नेिे। याॊ यीॊ रुॊ यॊ गे फकरे फकसरत यला. खय-खरयता यला िासिासन प्रेत-भारा। उच्िैस्तैद्ळाट्टशावै. ळूर-शस्ते प्रिण्डे ॥ राॊ रीॊ रूॊ रम्फ-स्जह्ले शवसत. वकर-बुत्रल-तरे. कश-कशा ळुद्ध-घोयाट्ट-शावै्। कॊकारी कार-यात्रि् प्रदशतु दरु यतॊ. प्रदशतु दरु यतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥८॥ शुॊकायोच्िायमडती लडदे प्रदशतु दरु यतॊ. बल-सनसळत लाभे शस्ते कऩारॊ. िभा-भुण्डा प्रिण्डे ॥९॥ ॐ त्लॊ ब्राह्मी त्लॊ ि यौद्री व ि सळस्ख-गभना त्लॊ ि दे ली कुभायी। त्लॊ िक्री िक्र-शावा घुय-घुरयत यला. प्रदशतु दरु यतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥५॥ ॐ खॊ-खॊ-खॊ खड्ग-शस्ते. त्लॊ लयाश-स्लरुऩा॥ यौद्रे त्लॊ िभा-भुण्डा वकर-बुत्रल-तरे वॊस्स्थते स्लगा-भागे। ऩातारे ळैर-श्रृग ॊ े शरय-शय-नसभते दे त्रल िण्डी नभस्ते॥१०॥ यष त्लॊ भुण्ड-धायी सगरय-गुश-त्रललये सनझाये ऩलाते ला। वॊग्राभे ळिु-भध्मे त्रलळ त्रलऴभ-त्रलऴे वॊकटे कुस्त्वते ला॥ व्माघ्रे िौये ि वऩेऽप्मुदसध-बुत्रल-तरे लफि-भध्मे ि दग ु ।े यषेत ् वा फदव्म-भूसता् प्रदशतु दरु यतॊ भुण्ड-िण्डे प्रिण्डे ॥११॥ इत्मेलॊ फीज-भडिै् स्तलनभसत-सळलॊ ऩातक-व्मासध-नाळनभ ्। प्रत्मषॊ फदव्म-रुऩॊ इत्मेलॊ लेद-लेद्यॊ ग्रश-गण-भथनॊ वकर-बम-शयॊ भदा नॊ ळाफकनीनाभ ्॥ भडि-ळत्रक्तद्ळ सनत्मभ ्। भॊिाणाॊ स्तोिकॊ म् ऩठसत व रबते प्रासथाताॊ भडि-सवत्रद्धभ ्॥१२॥ ॐ शुॉ शुॉ पट् कार-यािीॊ ऩुय-वुय-भथनीॊ धूम्र-भायी कुभायी। िॊ-िॊ-िॊ िडद्र-शावा ििभ िभ-िभा िातुयी सित्त-केळी। ह्राॊ ह्रीॊ ह्रूॊ शस्डत दद्श ु ान ् कसरत फकर-फकरा ळब्द अट्टाट्टशावे॥ मॊ-मॊ-मॊ मोग-भामा जनसन जग-फशता मोसगनी मोग-रुऩा॥ शा-शा बूत-प्रबूते. फकर-फकसरत-भुखा. कार-कायी त्रलकायी। ऩत्रिका वे वॊफॊसधत आऩक े वुझाल एलॊ प्रसतफक्रमा शभं *** अलश्म बेजने का कद्श कयं ।स्जववे ऩत्रिका को औय फेशतय फनामा जावके एलॊ अडम फॊधु/फशनो को असधक वे असधक राब प्राद्ऱ शो वके। वॊऩादक . रुद्र-भूते त्रलकणे। िडद्राफदत्मौ ि कणौ. घण्ट टॊ काय-नादे । नृत्मडती ताण्डलैऴा थथ-थइ त्रलबलैसनाभर ा ा भडि-भारा॥ रुषौ कुषौ लशडती. शश शसवत यला. मष-गडधला-नागान ्। षाॊ षीॊ षूॊ षोबमडती प्रदशतु दरु यतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥४॥ ॐ भ्राॊ भ्रीॊ भ्रूॊ बद्र-कारी. जगफददॊ बषमडती ग्रवडती- त्र्मैरोक्मॊ लश्म-कायी. भुण्ड-िण्डे प्रिण्डे ॥३॥ ॐ घ्राॊ घ्रीॊ घ्रूॊ घोय-रुऩे घघ-घघ-घफटते घघायायाल घोये । सनभाॉवे ळुष्क-जॊघे त्रऩफसत नय-लवा धूम्र-धूम्रामभाने॥ ॐ द्राॊ द्रीॊ द्रॊ ू द्रालमडती. कीरमडती ग्रवडती। डॊ -डॊ -डॊ डाफकनीनाॊ डभरुक-वफशता दोर फशण्डोर फडम्बा। शुॊकायोच्िायमडती यॊ -यॊ -यॊ यक्त-लस्त्रा वयसवज-नमना ऩातु भाॊ दे त्रल दग ु ाा॥१३॥ प्रदशतु दरु यतॊ िण्ड-भुण्डे प्रिण्डे ॥७॥ ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ कऩारीॊ ऩरयजन-वफशता िस्ण्ड िाभुण्डा-सनत्मे। यॊ -यॊ यॊ काय-ळब्दे ळसळ-कय-धलरे कार-कूटे दयु डते॥ शुॉ शुॉ शुॊकाय-कारय वुय-गण-नसभते. भुण्ड-िण्डे प्रिण्डे ॥२॥ ॐ ह्राॊ ह्रीॊ शूॊ रुद्र-रुऩे.अक्टू फय 2011 43 कॊ कॊ कॊकार-धायी भ्रभसद्ऱ. त्रिबुलन-नसभते.

फच्िा घाघया छुते शी योने रगा। फडी फशन फोरी औऴधीम भशत्ल का लणान सभरता शै । यखकय दध ू वे फनी जाता तफ छोटी फशन फोरी मश तो ऩशरे वे भया शुआ जाती शै । ऩुण्म वे शी मश अबी जीत्रलत शुआ शं । उवके फाद वे ळयद जाती शं । आमुलद े के ग्रॊथं भं बी इवकी िाॊदनी के खीय को िाॊदनी के भं अवाध्म योगं की दलाएॊ स्खराई ळयद ऩूस्णाभा की कथा: तुभ भुझे कॊरक रगाना िाशती थी। भेये फैठने वे मश भय था। तेये शी बाग्म वे मश ऩुन् जीत्रलत शो गमा शं । तेये ऩुस्णाभा का ऩूया व्रत कयने का प्रिरन िर सनकरा। .अक्टू फय 2011 44 ळयद ऩूस्णाभा (11-अक्टू फय-2011)  सिॊतन जोळी फशॊ द ू ऩॊिाॊग के अनुवाय ऩूये लऴा भं फायश ऩूस्णाभा आती शं । ऩूस्णाभा के फदन िॊद्रभा अऩने ऩूणा आकाय भं शोता शै । ऩूस्णाभा ऩय िॊद्रभा का अतुल्म वंदमा दे खते शी फनता शै । त्रलद्रानो के अनुवाय ऩूस्णाभा के फदन िॊद्रभा ऩूणा आकाय भं शोने के कायण लऴा भं आने लारी वबी ऩूस्णाभा ऩला के वभान शं । रेफकन इन वबी ऩूस्णाभा भं आस्द्वन भाव फक ऩूस्णाभा वफवे श्रेद्ष भानी गई शै । मश ऩूस्णाभा ळयद ऋतु भं आने के कायण इवे ळयद ऩूस्णाभा बी कशते शं । ळयद ऋतु की इव ऩूस्णाभा को ऩूणा िॊद्र का अस्द्वनी नषि वे वॊमोग शोता शै । अस्द्वनी जो नषि क्रभ भं प्रथभ नषि शं . इव सरमे भाडमता मश शै फक ऐवा कयने वे िॊद्रभा की अभृत की फूॊदं बोजन भं आ जाती शं स्जवका भय गमा । उवने रडके को रकडी के ऩट्टे ऩय सरटाकय राई औय फैठने के सरए लशी ऩट्टा दे फदमा। फडी फशन जफ ऩीढे ऩय फैठने रगी जो उवका घाघया फच्िे का छू वेलन कयने वे वबी प्रकाय की फीभारयमाॊ आफद दयू शो गमा. स्जवके स्लाभी अस्द्वनीकुभाय शै । कथा के अनुळाय च्मलन ऋत्रऴ को आयोग्म का ऩाठ औय औऴसध का सान अस्द्वनीकुभायं ने शी फदमा था। मशी सान आज शजायं लऴा फाद बी शभाये ऩाव अनभोर धयोशय के रूऩ भं वॊसित शै । अस्द्वनीकुभाय आयोग्म के स्लाभी शं औय ऩूणा िॊद्रभा अभृत का स्रोत। मशी कायण शै फक ऐवा भाना जाता शै फक इव ऩूस्णाभा को ब्रह्माॊड वे अभृत की लऴाा शोती शै । खीय का बोग एक वाशुकाय के दो ऩुत्रिमाॉ थी। दोनो ऩुत्रिमाॉ ळयद ऩुस्णाभा का व्रत यखती थी। ऩयडतु फडी ऩुिी ऩूया व्रत कयती थी औय छोटी ऩुिी अधुया व्रत कयती थी। ऩरयणाभ मश शुआ फक छोटी ऩुिी की वडतान ऩैदा शोते शी भय जाती थी। उवने ऩॊफडतो वे इवका कायण ऩूछा तो उडशोने फतामा की तुभ ऩूस्णाभा का अधूया व्रत कयती थी स्जवके कायण तुम्शायी वडतान ऩैदा शोते शी भय जाती शं । ऩूस्णाभा का ऩुया त्रलसधऩुलाक कयने वे तुम्शायी वडतान जीत्रलत यश वकती शं । उवने ऩॊसतडतो फक वराश ऩय ऩूस्णाभा का ऩूया ळयद ऩूस्णाभा की यात भं गाम के दध ू वे फनी व्रत त्रलसधऩूलक ा फकमा। उवके रडका शुआ ऩयडतु ळीघ्र शी ग्रशण फकमा जाता शै । ऩूस्णाभा की िाॊदनी भं 'अभृत' का ऊऩय वे कऩडा ढक फदमा। फपय फडी फशन को फुराकय खीय को िॊद्रभा फक िाॊदनी भं यखकय उवे प्रवाद-स्लरूऩ अॊळ शोता शै .

45 अक्टू फय 2011 कोजागयी ऩूस्णाभा (11-अक्टू फय-2011)  सिॊतन जोळी आस्द्वन भाव की ऩूस्णाभा को 'कोजागय व्रत' यखा जाता शं । इव सरमे इव ऩूस्णाभा को कोजागयी ऩूस्णाभा बी कशा जाता शै । इव फदन व्मत्रक्त त्रलसधऩूलाक स्नान कयके व्रत-उऩलाव यखने का त्रलधान शं । इव फदन श्रद्धा बाल वे ताॉफे मा सभट्टी के करळ ऩय लस्त्र वे ढॉ की शुई स्लणाभमी रक्ष्भी की प्रसतभा को स्थात्रऩत फकमा जाता शं । फपय रक्ष्भी जी फक सबडनसबडन उऩिायं वे ऩूज-अिाना कयने का त्रलधान शं । वामॊकार भं िडद्रोदम शोने ऩय वोने . त्रफल्ल ळाखा मा त्रिळूर ऩय शी फकमा जाना िाफशए।  दे ली दग ु ाा को केलर रार कनेय औय वुगॊसधत ऩुष्ऩ असत त्रप्रम शं । इव सरमे आयाधना भं वुगॊसधत ऩुष्ऩ शी रं।  नलयाि भं करळ की स्थाऩना केलर फदन भं कयनी िाफशए।  भाॊ बगलती की प्रसतभा शभेळा रार लस्त्र वे त्रफयाजीत यशे ।  दे ली को बी रार यॊ ग की िुनयी िढाएॊ। नलयाि भं नलाणा भॊि जऩ दे ली भाॊ के वाभने रार आवन ऩय फैठकय रार िॊदन की भारा वे कयना राब प्रद शोता शं । . िाॉदी अथला सभट्टी के घी वे बये शुए दीऩक जराने फक ऩयॊ ऩया शं । इव फदन घी सभसश्रत खीय को ऩािं भं डारकय उवे िडद्रभा की िाॉदनी भं यखा जाता शं । एक प्रशय (३ घॊटे) खीय को िाॉदनी भं यखनेके फाद भं उवे रक्ष्भीजी को वायी खीय अऩाण फक जाती शं । तत्ऩद्ळात बत्रक्तऩूलक ा वास्त्लक ब्राह्मणं को खीय का बोजन कयाएॉ औय उनके वाथ शी भाॊगसरक गीत गाकय तथा भॊगरभम कामा कयते शुए यात्रि जागयण फकमा जाता शं । भाडमता शं फक ऩूस्णाभा फक भध्मयात्रि भं दे ली भशारक्ष्भी अऩने शाथो भं लय औय अबम लयदान सरए बूरोक भं त्रलियती शं । इव फदन जो बक्तजन जाग यशा शोता शं उवे भाता रक्ष्भी धन-वॊऩत्रत्त प्रदान कयती शं । दल ु ाा ऩूजन भं यखे वालधासनमाॊ  भाता दग ु ाा की ऩूजा कयने लारे वाधकं को उऩावना वॊफॊधी इन फातं का ध्मान यखना राबदामक यशता शं । त्रलद्रानो के भत भं ळास्त्रोक्त त्रलधान वे एक शी घय भं तीन ळत्रक्तमं की ऩूजा कयना लस्जात शं ।  दे लीऩीठ ऩय लाद्य-ळशनाई का लादन नशीॊ कयं ।  बगलती दग ु ाा का आह्लान त्रफल्ल ऩि.

वभऩाण के बाल वे यशे औय ऩसत बी अऩने वभस्त कताव्म एलॊ धभा का ऩारन वुिारु रुऩ वे ऩारन कयं . उवके वाये ऩाऩ नद्श शो जाते शं . तो एवे दॊ ऩत्रत्त के जीलन भं वबी वुख-वभृत्रद्ध वे बया जाता शं । कथा : एवी भाडमता शं . त्रलनम्रता वे. वाव-ववुय औय फुजुगो के ियणस्ऩळा इवी बाल के वाथ कयं फक इव वार मे गरसतमाॊ फपय नशीॊ शं। . उवे जीलन भं फकवी प्रकाय का कद्श नशीॊ शोता। उवे रॊफी औय ऩूणा आमु फक प्रासद्ऱ शोती शं । ज्मोसतऴ दृत्रद्श वे िॊद्रभा भन का कायक दे लता शं । अत् िॊद्रभा िॊद्रभा फक ऩूजा कयने वे भन की िॊिरता ऩय सनमॊत्रित यशता शं । िॊद्रभा के ळुब शोने ऩय वे भन प्रवडनता यशता शं औय भन वे अळुद्ध त्रलिाय दयू शोकय भन भं ळुब त्रलिाय उत्ऩडन शोते शं । क्मोफक ळुब त्रलिाय शी भनुष्म को अच्छे कभा कयने शे तु प्रेरयत कयते शं । स्लमॊ के द्राया फकमे गई गरती मा एलॊ अऩने दोऴं का स्भयण कय ऩसत.अक्टू फय 2011 46 कयला िौथ व्रत (15-अक्टू फय-2011)  सिॊतन जोळी कासताक भाव फक ितुथॉ के फदन त्रललाफशत भफशराओॊ प्रकट कय फदमा। तफ श्रीकृ ष्ण ने द्रोऩदी को कयलािौथ व्रत द्राया कयला िौथ का व्रत फकमा जाता शै । कयला का अथाात कयने का त्रलधान फतामा। द्रोऩदी ने श्रीकृ ष्ण वे व्रत का सभट्टी के जर-ऩाि फक ऩूजा कय िॊद्रभा को अध्मा दे ने का त्रलसध-त्रलधान जान कय व्रत फकम औय उवे व्रत का पर भशत्ल शं । इवीसरए मश व्रत कयला िौथ नाभ वे जाना जाता सभरा. उवके फाद ऩसत के ियण स्ऩळा कय उनवे आळीलााद प्राद्ऱ कयती शं । ऐवी भाडमता शै फक इव व्रत को कयने वे भफशराएॊ अखॊड वौबाग्मलती शोती शं . फक बगलान श्रीकृ ष्ण ने द्रोऩदी को मश व्रत का भशत्ल फतामा था। ऩाॊडलं के लनलाव के दौयान अजुन ा तऩ कयने के सरए इॊ द्रनीर ऩलात ऩय िरे गए। फशुत फदन फीत जाने के फाद बी जफ अजुन ा नशीॊ रौटे तो द्रोऩदी को सिॊता शोने रगी। जफ श्रीकृ ष्ण ने द्रोऩदी को सिॊसतत दे खा तो पौयन सिॊता का कायण वभझ गए। फपय बी श्रीकृ ष्ण ने द्रोऩदी वे कायण ऩूछा तो उवने मश सिॊता का कायण श्रीकृ ष्ण के वाभने ऩूजन-त्रलसध: कयला िौथ के फदन ब्रह्म भुशूता भं उठ कय स्नान के स्लच्छ कऩडे ऩशन कय कयला की ऩूजा-आयाधना कय उवके वाथ सळल-ऩालाती फक ऩूजा का त्रलधान शं । क्मोफक भाता ऩालाती नं कफठन तऩस्मा कय के सळलजी को प्राद्ऱ कय अखॊड वौबाग्म प्राद्ऱ फकमा था। इव सरमे सळलऩालाती फक ऩूजा फक जाती शं । कयला िौथ के फदन िॊद्रभा फक ऩूजा का धासभाक औय ज्मोसतऴ दोनं शी द्रत्रद्श वे भशत्ल शै । छाॊदोग्म उऩसनऴद् के अनुळाय जो िॊद्रभा भं ऩुरुऴरूऩी ब्रह्मा फक उऩावना कयता शै . उवका ऩसत दीघाामु शोता शं । मफद इव व्रत को ऩारन कयने लारी ऩत्नी अऩने ऩसत के प्रसत भमाादा वे. अजुन ा वकुळर ऩलात ऩय तऩस्मा ऩूयी कय ळीघ्र रौट शं । आए। इव फदन ऩत्नी अऩने ऩसत की दीघाामु के सरमे भॊगरकाभना औय स्लमॊ के अखॊड वौबाग्म यशने फक काभना कयती शं । कयला िौथ के ऩूये फदन ऩत्नी द्राया उऩलाव यखा जाता शं । इव फदन यात्रि को जफ आकाळ भं िॊद्रम उदम वे ऩूला वोरश वृॊगाय कय िॊद्र सनकरने फक प्रसतषा कयती शं । व्रत का वभाऩन िॊद्रभा को अध्मा दे ने के वाथ शी उवे छरनी वे दे खा जाता शं .

2011 को प्रदोऴ कार भं बी स्स्थय रग्न भाना जाता शं । धन तेयव के फदन प्रदोऴ कार ल स्स्थय 08:49:46 फजे तक का वभम यशे गा। प्रदोऴ कार के दौयान वॊध्मा 05:49 फजे वे 07:22 फजे तक िर िौघफडमा शोने वे भुशुता की ळुबता भं लृत्रद्ध शोती शं । िौघाफडमा भुशूता  अभृत भुशूता वुफश 06:10 वे 07:37 तक  ळुब भुशूता वुफश 09. स्लास्थम ल आमु के असधऩसत दे लता शं । 44 सभसनट वे आयम्ब शोकय यात के 08 फजकय 06 सभनट नाभक दे लता अभृत करळ के वाथ वागय भॊथन वे उत्ऩडन शुए धनलॊतयी को दे लं के लैध ल सिफकत्वक के रुऩ भं जाना जाता शं । अनुळाय नई फदल्री भं वॊध्मा वूमाास्त के फाद 05 फज कय तक का वभम प्रदोऴ कार यशे गा। इव वभमा अलसध भं स्स्थय रग्न (लृऴब) बी भुशुता वभम भं शोने के कायण धन तेयव के फदन िाॊदी के फतान-सवक्के खयीदना त्रलळेऴ ळुब घय-ऩरयलाय भं स्थामी रक्ष्भी की प्रासद्ऱ शोती शै । भाना गमा शं । धन तेयव के धनलॊतयी के ऩूजन वे भानसवक (लृऴब यासळ) शो यशा शं . 2011)  सिॊतन जोळी एवी ऩौयास्णक भाडमता शं फक धन तेयव के फदन धनलॊतयी इव लऴा 24 अक्तूफय.  जाती शं । इव फदन स्टीर के फतान. 2011 (धनतेयव) को बायतीम वभम थे। धनलॊतयी धन.अरग ळशयं भं प्रदोऴ कार के सनधाायण का आधाय के अषाॊळ ये खाॊळ के अनुळाय आधुसनक ऩद्धसत वे फकमा गमा के फदन प्रदोऴकार भं दीऩदान ल रक्ष्भी ऩूजन कयना ळुब तयीका सबडन शोने के कायण वूमाास्त वभम का सनयधायण फढ़जाती शं । यशे गा। राब भुशूता ऩूजन कयने वे प्राद्ऱ शोने लारे राबं भं लृत्रद्ध प्रदोऴ कार 2 घण्टे एलॊ 24 सभनट का शोता शं । अऩने लृत्रद्ध शोती शं । वफवे असधक ळुब अभृत कार भं ऩूजा कयने का सभनट फक वभम अलसध को प्रदोऴ कार भाना जाता शं । नोट: उऩयोक्त लस्णात वूमाास्त का वभम सनयधायण नई फदल्री वूमोस्त वभम के अनुळाय सनधाायीत कयना िाफशमे। धनतेयव शं । इव त्रलऴम भं त्रलसबडन भत एलॊ वूमाास्त सात कयने का यशता शै । सबडन शो वकता शं । वूमाास्त वभम का सनयधायण स्थासनम वूमाास्त के अनुळाय फश कयना उसित शोगा। . वुख ल धन फक त्रलळेऴ प्रासद्ऱ शोती शं । स्जन व्मत्रक्तमं के उत्तभ स्लास्थम भं कभी तथा वेशत खयाफ शोने फक आळॊकाएॊ फनी यशती शं उडशं त्रलळेऴ रुऩ वे इव ळुब फदन भं ऩूजा आयाधना कयनी िाफशए। धनतेयव भं खयीदायी ळुब भानी जाती शं । रक्ष्भी जी एलॊ गणेळ जी फक िाॊदी फक प्रसतभा-सवक्को को इव फदन खरयदना धन प्रासद्ऱ एलॊ आसथाक उडनसत शे तु श्रेद्ष शोता शं । धनतेयव के फदन 24 अक्तूफय. स्लास्थम.अक्टू फय 2011 47 धन तेयव ळुब भुशूता (24 अक्तूफय. भन भं वॊतोऴ एल स्लबाल भं वौम्मता का बाल आता शं । उडशं धनलॊतयी दे ल फक प्रसतफदन आयाधना कयनी िाफशए। धनतेयव ऩय ऩूजा कयने वे व्मत्रक्त भं वॊतोऴ. िाॊदी के फतान खयीदने वे  इवसरमे धनतेयव के फदन खाव तौय वे फतानं फक खयीदायी फक िर भुशूता दोऩशय 01:34 वे 02:58 तक राब भुशूता दोऩशय 02:58 वे 04:24 तक अभृत भुशूता दोऩशय 04:24 वे 05:49 तक  िर भुशूता वॊध्मा 05:49 वे 07:22 तक राब भुशूता यािी 10:27 वे 12:00 तक प्राद्ऱ शोने लारे ळुब परो भं कई गुणा लृत्रद्ध शोने फक वॊबालना ळुब भशूता का वभम धन तेयव की ऩूजा के सरमे त्रलळेऴ ळुब धन तेयव ऩूजा भुशूता शोती शं । ळुब कार भुशूता फक ळुबता वे धन.04 वे 10:32 तक   बगलान धनलडतयी वभुद्र वे अभृत करळ रेकय प्रकट शुए थे. स्लास्थम ल आमु भं ळशय के वूमाास्त वभम अलसध वे रेकय अगरे 2 घण्टे 24 शोता शं । अरग. स्स्थय रग्न का वभम वफवे उतभ जो रोग असधक वे असधक धन एकि कयने फक काभना कयते शं रग्न दोनं का वॊमोग वॊध्मा 06:54:31 फजे वे रेकय यािी शोता शं । क्मोफक ळास्त्रं भं धनलॊतयी दे ल को िॊद्रभा के वभान ळास्डत.

इव फदन वूमोदमी मोग त्रलष्कुॊब वॊध्मा 06:29:37 फजे फाद प्रीसत मोग यशे गा। वूमोदमी कयण ितुष्ऩाद दोऩशय 03:19:36 फजे ऩद्ळमात नाग कयण यशे गा। वूमोदम के वभम िडद्रभा कडमा यासळ भं दोऩशय 11:16:00 फजे तुरा यासळ भं भ्रभण कये गा। प्रदोऴ कार 2 घण्टे एलॊ 24 सभनट का शोता शं । अऩने ळशय के वूमाास्त वभम अलसध वे रेकय अगरे 2 घण्टे 24 सभनट फक वभम अलसध को प्रदोऴ कार भाना जाता शं । अरग. ळुब रग्न ल िौघािफडमा भुशूता त्रलळेऴ का अत्मासधक भशत्ल शोता शं । 26 अक्तूफय. श्री भशारक्ष्भी ऩूजन. 2011 के फदन वूमोदमी नषि सििा.48 अक्टू फय 2011 दीऩालरी ऩूजन भुशूता (26-अक्तूफय-2011)  सिॊतन जोळी भाॊ रक्ष्भी फक कृ ऩा प्राद्ऱ कयने शे तु एलॊ उनका स्थामी सनलाव शो वके इव उद्दे श्म वे घय-दक ु ान-व्मलवासमक कामाारम भं दीऩालरी के फदन रक्ष्भी ऩूजन शे तु फदन के वफवे ळुब भुशूता को सरमा जाता शं . 2011 को प्रदोऴ कार भं बी स्स्थय रग्न (लृऴब यासळ) शो यशा शं . 2011 (दीऩालरी) को बायतीम वभम अनुळाय नई फदल्री भं वूमाास्त वॊध्मा 05 फज कय 42 सभसनट ऩय शोगा। वॊध्मा 05 फज कय 42 सभसनट वे आयम्ब शोकय यात के 08 फजकय 06 सभनट तक का वभम प्रदोऴ कार यशे गा। 26 अक्तूफय.अरग ळशयं भं प्रदोऴ कार के सनधाायण का आधाय वूमोस्त वभम के अनुळाय सनधाायीत कयना िाफशमे। दीऩालरी प्रदोऴ कार भुशूता अऩने ळशय के वूमाास्त वभम वे 2 घडटे 24 सभनट तक का वभम ळुब भुशूता वभम के सरमे प्रमोग फकमा जाता शं . श्रीभशारक्ष्भी ऩूजन एलॊ दीऩालरी का भशाऩला कासताक कृ ष्ण अभालस्मा भं प्रदोऴ कार एलॊ यात्रि वभम भं स्स्थय रग्न वभम भं कयना ळुब शोता शै रक्ष्भी ऩूजन. . प्रदोऴ कार. दीऩ प्रजलस्ल्रत कयने के सरमे प्रदोऴकार भुशूता वभम शी त्रलळेऴतमा ळुब भाना गमा शै . दीऩालरी िौघफडमाॊ भुशूता दीऩालरी िौघ़फडमा भुशूता वभम को घय ल ऩरयलाय भं रक्ष्भी ऩूजन कयने के सरमे ळुब भाना जाता शै . लस्त्र ल उऩशाय आफद दे ना बी ळुब यशता शं । त्रलद्रानो के भत वे इव भुशूता भं ऩरयलाय के फडे वदस्मं एलॊ सभि लगा वे प्राद्ऱ शोने लारा आळीलााद ळुब परप्रद सवद्ध शोता शं । इव भुशूता वभम भं भॊफदय इत्माफद धभास्थरो ऩय दान इत्माफद कयना बी त्रलळेऴ राब दामश एलॊ कल्माणकायी शोता शं । . व्माऩारयक खातं का ऩूजन. दीऩदान एलॊ इव वभम के अॊतगात अऩने वेलकं को उऩशाय दे ना ळुब यशता शं । इव भुशूता वभम भं अऩने ऩरयलाय के फडे वदस्मं एलॊ सभि लगा वे आळीलााद रेना एलॊ उडशं सभठाईमाॊ. सििा एलॊ स्लासत नषि भं. प्रीती मोग भं भनामा जामेगा. कुफेय ऩूजन. इव लऴा दीऩालरी का ऩला फुधलाय . 2011 भं कासताक भाव फक अभालस्मा. रेफकन यािी 09:43:33 फजे फाद स्लाती नषि यशे गा. दीऩालरी के फदन अभालस्मा सतसथ. 26 अक्तूफय. स्स्थय रग्न का वभम वफवे उतभ भाना जाता शं । फदऩालरी के फदन प्रदोऴ कार ल स्स्थय रग्न दोनं का वॊमोग वॊध्मा 06:46:37 फजे वे रेकय यािी 08:42:04 फजे तक का वभम यशे गा। प्रदोऴ कार के दौयान वॊध्मा 07:20 फजे वे 08:58 फजे तक ळुब िौघफडमा शोने वे भुशुता की ळुबता भं लृत्रद्ध शोती शं । स्जवभं त्रलळेऴ रूऩ वे श्री गणेळऩूजन. इवे प्रदोऴ कार वभम कशा जाता शं । इव लऴा 26 अक्तूफय.

yolasite. BHUBNESWAR-751018.karyalay@gmail.com/ भूल्म 370 550 820 1450 2450 4600 .http://gk. BANK COLONY.com/ and http://gurutvakaryalay.अक्टू फय 2011 49 रक्ष्भी ऩूजा भुशूता दीऩालारी के फदन           राब भुशूता वुफश भं  वे  तक अभृत भुशूता वुफश भं  वे  तक ळुब भुशूता दोऩशय भं  वे  तक  िय भुशूता दोऩशय भं  वे  तक राब भुशूता दोऩशय भं  वे वॊध्मा  ळुब भुशूता वॊध्मा भं  ळुब भुशूता वॊध्मा भं  वे  तक वे  तक अभृत भुशूता यात भं  वे  तक  िय भुशूता यात भं वे यात तक नोट: उऩयोक्त लस्णात वूमाास्त का वभम सनयधायण नई फदल्री के अषाॊळ ये खाॊळ के अनुळाय आधुसनक ऩद्धसत वे फकमा गमा शं । इव त्रलऴम भं त्रलसबडन भत एलॊ वूमाास्त सात कयने का तयीका सबडन शोने के कायण वूमाास्त वभम का सनयधायण सबडन शो वकता शं । वूमाास्त वभम का सनयधायण स्थासनम वूमाास्त के अनुळाय फश कयना उसित शोगा। भॊि सवद्ध गणेळ मॊि गणेळ मॊि गणेळ मॊि रक्ष्भी गणेळ मॊि एकाषय (वॊऩूणा फीज भॊि वफशत) गणेळ सवद्ध मॊि ताम्र ऩि ऩय वुलणा ऩोरीव (Gold Plated) वाईज 2” X 2” 3” X 3” 4” X 4” 6” X 6” 9” X 9” 12” X12” भूल्म 640 1250 1850 2700 4600 8200 गणऩसत मॊि शरयद्रा गणेळ मॊि ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीव (Silver Plated) वाईज 2” X 2” 3” X 3” 4” X 4” 6” X 6” 9” X 9” 12” X12” भूल्म 460 820 1250 2100 3700 6400 ताम्र ऩि ऩय (Copper) वाईज 2” X 2” 3” X 3” 4” X 4” 6” X 6” 9” X 9” 12” X12” GURUTVA KARYALAY 92/3. gurutva.blogspot.in.gurutva_karyalay@yahoo. (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418. BRAHMESHWAR PATNA.com Our Website:. 91 + 9238328785 Email Us:.

त्रलळाखा.550 वे Rs. ये लसत. सििा. एलॊ कुछ योफशणी नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फकवी बी स्त्रोत वे नषिो भं नए कऩड़े ऩशनने वे स्लास््म.50 अक्टू फय 2011 नमे कऩडे औय ज्मोसतऴ  सिॊतन जोळी ज्मोसतऴ के अनुळाय कुछ त्रलळेऴ नषिो भं नए योफशणी (स्लाभी-िॊद्रभा): कऩड़े ऩशने वे इवका ळुब पर प्राद्ऱ शोता शं . ऩूनलावु. अनुयाधा. उत्तय बाद्रऩद. उत्तय पाल्गुसन. आसथाक ऩये ळासन अत्मासधक धनराब के मोग फनता शं । इत्माफद वभस्माए उत्ऩडन शोती शं । नमे कऩड़े धायण कयने शे तु अस्द्वनी. ळुब भाने गमे शं । अस्द्वनी (स्लाभी-केतु): अस्द्वनी नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फकवी बी दोस्त मा रयश्तेदाय के द्राया उऩशाय प्राद्ऱ शोता शं । बयणी (स्लाभी-ळुक्र): बयणी नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे इव नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फदनाभी शोने की आळॊका असधक ये शती शं । भृगसळया नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे उन कऩडो के जल्द खयाफ शोने की वॊबालना ये शती शं । आद्रा (स्लाभी-याशू): आद्रा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे धन नाळ की आळॊका ये शती शं । ऩूनलावु (स्लाभी-गुरू ): ऩूनलावु नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे अस्लीकृ सत मा भानसवक िावदी जेसव कफठनाई का वाभना कयना ऩडता शं । कृ सतका (स्लाभी-वूम)ा : कृ सतका नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे इव नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे घय मा व्मलाम के स्थान ऩय अस्ग्न बम फना यशता शं । शं । भॊगर मॊि वे ऋण भुत्रक्त ऋण भुत्रक्त शे तु भॊगर वाधना का प्रमोग असत राब प्रद शोता शं । भृगसळया (स्लाभी-भॊगर): कजा के दरदर भं पवे व्मत्रक्तमं के सरमे कजा वे भुत्रक्त प्राद्ऱ कयने शे तु ळास्त्रोक्त त्रलधान वे उत्तभ उऩाम शोता शं भॊगर वाधना का प्रमोग जो त्रलळेऴ राब प्रदान कयने लारा शोता शं । भॊगर वाधना का प्रमोग कोई बी व्मत्रक्त वयरता कय वकता वे कयके ळीघ्र राब प्राद्ऱ कय वकता शं । Rs. उत्तयऴाढ. ऩुष्म. योफशणी.8200 तक ऩुष्म (स्लाभी-ळसन ): ऩुष्म नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फकवी बी स्रोत द्राया उच्ि स्तय का धन राब शोने का मोग फनता शं । आळरेऴा (स्लाभी-फुध): आळरेऴा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिे इव नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे कऩड़े के नाळ शोने की वॊबालना शोती शं । भघा (स्लाभी-केतु): भघा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे इव नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे जीलन भी उडनसत शे तु कफठनाई उतऩडन शोती शं । . धसनद्षा. शस्त.

51 अक्टू फय 2011 ऩूलाा पारगुसन (स्लाभी-ळुक्र): ऩूलााऴाढ़ा (स्लाभी-ळुक्र): ऩूलाा पारगुसन नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे ऩूलााऴाढ़ा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे इव इव नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फशोत वायी ऩये ळासनमं नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे स्लास््म वभस्मा शोकय योग वे वम्भुखीन शोना ऩडता शं । उत्ऩडन शोते शं । उत्तय पाल्गुसन (स्लाभी-वूम)ा : उत्तयाऴाढ़ा (स्लाभी-वूम)ा : उत्तय पाल्गुसन नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे आभदनी भं उत्तयाऴाढ़ा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे वफके वाथ भे लृत्रद्ध शोकय जीलन भं उडनसत प्राद्ऱ शोती शं । अच्छे वम्फडध त्रलकसवत शोते शं । शस्त (स्लाभी-िॊद्रभा): श्रलण (स्लाभी-िॊद्रभा): शस्त नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे बाग्म एलॊ धन की श्रलण नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिे इव नषि भं नए लृत्रद्ध शोकय वबी प्रकाय की वुख वुत्रलधा प्राद्ऱ शोती शं । कऩड़े ऩशने वे आॊखो वे वॊफॊसधत वभस्मा उत्ऩडन शोती सििा (स्लाभी-भॊगर): शं । सििा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे रयश्तेदाय मा सभि लगा धसनद्षा (स्लाभी-भॊगर): वे अडम कऩड़े उऩशाय भं सभरते शं । धसनद्षा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे नौकयी व्मलवाम भं स्लाती (स्लाभी-याशू): स्लाती नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे सभि लगा द्राया उत्तभ उऩशाय की प्रासद्ऱ शोती शं । त्रलळाखा (स्लाभी-गुरू): त्रलळाखा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे रयश्तेदाय एलॊ सभि लगा द्राया प्रसवत्रद्ध के मोग प्रफर शोते शं । अनुयाधा (स्लाभी-ळसन): अनुयाधा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे नमे दोस्त एलॊ वशकभॉ वं राब प्राद्ऱ शोता शं । ज्मेद्षा (स्लाभी-फुध): ज्मेद्षा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फकवी बी स्त्रोत वे उत्तभ धन की प्रासद्ऱ शोती शं । भूरा (स्लाभी-केतु): भूरा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिे िाफशमे इव नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे कऩड़ो का त्रलनाळ ळीघ्र शो जाता शं । नमे आम के स्त्रोत का मोग फनते शं । ळतसबऴा (स्लाभी-याशू): ळतसबऴा नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिे क्मोफक इस्व नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे त्रलऴ मा फकवी स्जल जॊतु के काटने का बम ये शता शं । ऩूलाा बाद्रऩद (स्लाभी-गुरू): ऩूलाा बाद्रऩद नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे फिना िाफशमे मे इव नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे स्लमॊ के सरमे शासनकायक शोता शं । उत्तय बाद्रऩद (स्लाभी-ळसन): उत्तय बाद्रऩद भे मफद आऩका जडभ शुला शं तो आऩकी वॊतान को इव नषि भं नए कऩड़े नशीॊ ऩशना ने िाफशमे नशीॊ तो उनके सरमे शासनकायक शं । ये लती (स्लाभी-फुध): यलती नषि भं नए कऩड़े ऩशने वे एकासधक स्त्रोत वे धन राब प्राद्ऱ शोता शं । .

ऩुष्ऩ. उवे अतुर रक्ष्भी. गौ. शे स्लगा लासवनी दे ली. घय के लृद्धजनं फक आयती उतायने ितुदाळी. वौबाग्म औय वॊऩत्रत्त कयने का त्रलधान शं । वुयसब त्लॊ जगडभातदे ली त्रलष्णुऩदे स्स्थता। वलादेलभमे ग्रावॊ भमा दत्तसभभॊ ग्रव।। तत् वलाभमे दे त्रल वलादेलैयरङ्कृ ते। भातभाभासबरात्रऴतॊ वपरॊ कुरु नस्डदनी।। अथाात: शे जगदम्फे. अषत. भेये द्राया अत्रऩत ा इव अडन को ग्रशण कयो। शे वभस्त दे लताओॊ द्राया अरॊकृत भाता नॊफदनी भेया भनोयथ ऩूणा कयो। फक प्रासद्ऱ शोती शं । इवके फाद याि के वभम इद्श. उवके वीॊग भॉढ़ाना. दे ली श्माभावफशत भुझ ऩय प्रवडन शं। . दे लत्रऴा नायदजी के अनुवाय दीऩालरी ऩला द्रादळी. ब्राह्मण. िॊदन का सतरक कयना तथा ताॉफे के ऩाि भं वुगडध. शे वला दे लभमी. रूऩ. िमोदळी. सतर औय जर का सभश्रण कय सनम्न भॊि वे गौ के ियणं का प्रषारन कयना िाफशए। षीयोदाणालवम्बूते वुयावुयनभस्कृ ते। वलादेलभमे भातगृश ा ाणाघ्मं नभो नभ्।। िमोदळी (धनतेयव) कासताक कृ ष्ण िमोदळी को धनतेयव के रुऩ भं भनामा जाता शं । ळास्त्रो भं उल्रेख सभरता शं फक बगलान धडलॊतयी ने वभुद्र-भॊथन के दौयान प्रकट शोकय द्ु खी जनं के योगसनलायणाथा आमुलद े का प्राकट्म फकमा था। धनतेयव के फदन वॊध्मा के वभम घय औय आॊगन भं शाथ भं जरता शुआ दीऩ रेकय सनिे फदमे भॊि वे बगलान मभयाज फक प्रवडनता शे तु इव भॊि के वाथ दीऩदान कयने का त्रलधान शं । भृत्मुना ऩाळदण्डाभ्माॊ कारेन श्माभमा वश। िमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज ा ् प्रीमताॊ भभ।। अथाात: िमोदळी के फदन दीऩदान वे ऩाळ औय दॊ डधायी भृत्मु तथा कार के असधऩसत दे ल बगलान मभ.अक्टू फय 2011 52 ळास्त्रोक्त त्रलधान वे दीऩालरी ऩूजन  आरोक ळभाा शभाये धभाळास्त्रो भं कासताक भाव भं दीऩ दान का त्रलळेऴ भशत्ल फतामा गमा शै । दीऩालरी भं दीऩदान का त्रलळेऴ भशत्ल फतामा शं । दे लताओॊ तथा दानलं द्राया नभस्काय फक गई वला दे लस्लरूत्रऩणी भाता। आऩको फाय-फाय नभस्काय शं । आऩ भेये द्राया फदमे शुए इव अघ्मा को स्लीकाय कयो। श्रीऩुष्कयऩुयाण के अनुळाय: इव फदन ऩूजन के फाद गाम को उड़द के फड़े स्खरा कय प्राथाना तुरामाभ ् सतरतैरेन वामॊकारे वभागते। आकाळदीऩभ ् मो दद्याडभावभेकभ ् शरयभ ् प्रसत। भशतीभ ् सश्रमभाप्नोसत रूऩवौबाग्मवम्ऩदभ ्।। अथाात: जो व्मत्रक्त कासताक भाव भं वॊध्मा अथाात: वभुद्र-भॊथन के वभम षीय वागय वे उत्ऩडन वभम बगलान श्री शरय(त्रलष्णु) के नाभ वे सतर के तेर का दीऩ जराता शं . का त्रलधान शं । अभालस्मा औय प्रसतऩदा तक 5 फदन भनाना िाफशए। दीऩालरी ऩला प्रत्मेक फदन अरग-अरग प्रकाय फक ऩूजा का त्रलधान शं । गोलत्व द्रादळी कासताक भाव फक द्रादळी को गोलत्व द्रादळी के फदन दध ू दे ने लारी गाम को उवके फछड़े वफशत स्नान कयाकय लस्त्र ओढ़ा कय गरे भं ऩुष्ऩभारा ऩशनाना.

लश गाम भाता भेये ऩाऩं का नाळ कये । रक्ष्भी प्रासद्ऱ शे तु कयं यासळ भॊि का जऩ भेऴ : ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्भीनायामण नभ्। लृऴब : ॐ गौऩारामै उत्तय ध्लजाम नभ्। सभथुन : ॐ क्रीॊ कृ ष्णामै नभ्। कका : ॐ फशयण्मगबाामै अव्मक्त रूत्रऩणे नभ्। सवॊश : ॐ क्रीॊ ब्रह्मणे जगदाधायामै नभ्। कडमा : ॐ नभो प्रीॊ ऩीताम्फयामै नभ्। तुरा : ॐ तत्ल सनयॊ जनाम तायक याभामै नभ्। लृस्द्ळक : ॐ नायामणाम वुयसवॊशामै नभ्। धनु : ॐ श्रीॊ दे लकीकृ ष्णाम ऊध्लाऴॊतामै नभ्। भकय : ॐ श्रीॊ लत्वरामै नभ्। कॊु ब : श्रीॊ उऩेडद्रामै अच्मुताम नभ्। भीन : ॐ क्रीॊ उद्‍धत ृ ाम उद्धारयणे नभ्। यासळ भॊि के जाऩ कयने वे वबी प्रकाय के कामा भं ळीघ्र वपरता प्राद्ऱ शोती शं । यासळ भॊि के जाऩ वे व्मत्रक्त शय प्रकाय के वॊकट वे वुयस्षत यशता शं । व्मत्रक्त आसथाक रूऩ वे ऩूणा वॊऩडन शो जाता शं । . उनकी ऩूजा कयके सनिे के सरए एलॊ वभस्त ऩाऩं के त्रलनाळ के सरए भं िाय भुख रक्ष्भीमाा रोकऩारानाॊ धेनुरूऩेण वॊस्स्थता। दत्तो दीऩद्ळतुदाश्माॊ नयकप्रीतमे भमा। कासताक ळुक्र प्रसतऩदा को अडनकूट फदलव के रुऩ भं भनामा आज ितुदाळी के फदन नयक के असबभानी दे लता फक प्रवडनता फदमे भॊि उच्िायण कयने का त्रलधान शं । लारा िौभुखा दीऩ अत्रऩत ा कयता शूॉ। दीऩालरी कासताक अभालस्मा को दीऩालरी के रुऩ भं भनामा जाता शं । इव फदन प्रात् उठकय स्नानाफद वे सनलृत्त शोकय जऩ-तऩ घृतॊ लशसत मसाथे भभ ऩाऩॊ व्मऩोशतु।। अथाात: धेनुरूऩ भं स्स्थत जो रोकऩारं फक वाषात रक्ष्भी शं तथा जो मस के सरए घी दे ती शं .53 नयक ितुदाळी अक्टू फय 2011 कयने वे अडम फदनं की अऩेषा कई गुना असधक राब प्राद्ऱ कासताक कृ ष्ण ितुदाळी को नयक ितुदाळी के रुऩ भं भनामा जाता शं । इव फदन ितुभख ुा ी दीऩ का दान कयने का त्रलधान शं । भाडमता शं . दीऩ दान वे नयक बम वे भुत्रक्त सभरती शं ! नयक ितुदाळी फक यात को एक िाय भुख (िाय फत्ती) लारा दीऩ शोता शं । दीऩालरी के फदन ऩशरे वे शी स्लच्छ फकमे गृश को वुवस्ज्जत कय बगलान नायामण के वाथ भाॊ रक्ष्भी फक भूसता मा सिि फक स्थाऩना कय उनका त्रलसधलत ऩूजन कयने का त्रलधान शं । जराकय सनिे फदमे भॊि वे दीऩदान कयने का त्रलधान शं । प्रसतऩदा ितुलसा तावभामुक्त् वलाऩाऩाऩनुत्तमे।। जाता शं । इव फदन गाम को वजाकय.

54 अक्टू फय 2011 रक्ष्भी प्रासद्ऱ के वयर उऩाम  सिॊतन जोळी जो रोग बौसतक वुख भृत्रद्ध के कायक श्रीमॊि. िैक फुक-ऩावफुक. किया इत्माफद यवोई भं नशीॊ यखे।  प्रसतफदन वॊध्मा वभम घय ऩय ऩूजा सनमत वभम ऩय कये ।  सनमसभत रुऩ वे ळसनलाय के फदन घय फक वाफ़-वपाई कयं ।  रुऩमा ऩैवा धन को थूक रगाकय सगनने वे दरयद्रता आती शं ।  फुधलाय को धन का वॊिम कयं । फंक भं धन जभा कयलाते वभम रक्ष्भी भॊि जऩा कये ।  घय भं फकवी बी दे ली दे लता फक एक वे ज्मादा तस्लीय. ळसनलाय को फार-नाखून नशीॊ काटने िाफशमे।  स्स्थय रक्ष्भी फक काभना शे तु रुऩमा-ऩैवा-शीये जलाशयात ऩीरा कऩडा त्रफछाकय मा ऩीरे कऩडे भं रऩेटकय यखं। . स्टीर.भूसता ऩूजा स्थान नशीॊ यखे।  जरुयत भॊद व्मत्रक्त. ऩैवे के रेन-दे न वे वॊफॊसधत. अवपरता प्राद्ऱ शोती शं ।  भॊगरलाय. ऩूॊजी सनलेळ वे वॊफॊसधत कागजात इत्माफद श्री मॊि के वाथ भं यखं।  प्रसतफदन बोजन के सरए फनी ऩशरी योटी गाम को स्खरामे।  ळुक्रलाय को वपेद लस्तुओॊ का दान कयने वे धन मोग फनता शं ।  प्रात : कार नाळता कयने वे ऩूला झाडू अलश्म रगामे।  यात को झूठे फतान. रोशा इत्माफद उऩशाय भं नशीॊ रेनी िाफशमे।  फकवी कमा के सरमे जाते वभम खारी ऩेट कबी बी घय वे ना सनकरे । कामा भं फाधा त्रलघ्न आते शं . दस्षणा लसता ळॊख इत्मा आफद घय भं स्थात्रऩत कय ऩूज नशी कय ऩाते अथला इन लस्तुओॊ को खरयदने भं अवभथा शो लश उऩामोको को अऩनाकय जीलन भं वुख-वभृत्रद्ध एलॊ ऎद्वमा प्राद्ऱ कय वकते शं ।  प्रात् उठते शी शस्तदळान (प्रात् कय दळानभ ्) कय दोनं शथेसरमं को 2-3 फाय भुॊश ऩय पेयना िाफशमे।  जफ बी फकवी कामा वे फाशय सनकरे तो घय ऩय आते वभम कुछ ना कुछ वाथ रेकय शी आए खारी शाथ नशीॊ आए िाशे ऩेड का ऩत्ता-अखफाय मा जीलन जरुयत फक लस्तुएॊ रेकय आमं। (वूमाास्त के फाद भं ऩेड के ऩत्ते तोडना शानी कायक शोता शं ।)  धन मा व्माऩाय वे वॊफॊधीत रेन-दे न के खाते ऩय मा ऩि व्मलशाय कयते वभम शल्दी मा केळय रगामं।  गल्रे भं. यद्दी बॊगाय इत्माफद ळसनलाय के फदन घय वे फाशय सनकार दे नी िाफशमे।  ळसनलाय के फदन कारे यॊ ग फक लस्तु. गरयफो को मथावत्रक्त भदद कय उडशं दान इत्माफद वभम-वभम ऩय दे ते यशं ।  ऩुयानी. गुरुलाय.

गल्रे भं मा धन यखने के फक्वे भं यखने वे धन फृत्रद्ध शोती शं ।  अळोक के भूर की जड़ का एक टु कड़ा ऩूजा घय भं यखने औय योजाना धूऩ-दीऩ वे ऩूजन कयने वे धन फक कभी नशीॊ खोती।  सतजोयी के रॉकय भं शभेळा दो फॉक्व यखं। एक भं योजाना कुछ रूऩमे यख कय फॊद कय दं .251 सवमाय सवॊगी.550 इडद्र जार.अक्टू फय 2011 55  लऴा भं कभ वे कभ एक फाय ऩरयलाय के वाथ तीथा मािा अलश्म कयं । ऩरयलाय के वाथ फकवी दे ली भंफदय भफशने भं कभ वे कभ एक फाय भं अलश्म जामे।  वूमोदम के वभम मफद घय की छत ऩय कारे सतर त्रफखेयने वे घय भं वुख वभृत्रद्ध शोती शं ।  अळोक का ऩेड़ रगाकय उवको वीॊिने वे धन भं लृत्रद्ध शोती शं ।  वुफश भुख्म दयलाजे के फाशय वे झाडू वे वपाई कयके थोडा ऩानी सछड़क ने वे घय भं धन फक लृत्रद्ध शोती शं ।  प्रसत वोभलाय. . ळुक्रलाय अळोक लृष के अखॊफडत ऩत्ते घयभं राकय ळुद्ध जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩडे वे ऩोछकय घय भं मा व्मलवामीक स्थान ऩय यखने वे धनराब शोता शं ।  प्रसत वोभलाय के फदन अळोक लृष के अखॊफडत ऩत्ते राकय ळुद्ध जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩडे वे ऩोछकय दक ु ान भं मा व्मलवामीक स्थर ऩय भार वाभान यखने फक जगश ऩय यखने वे व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती शं ।  प्रसत फुधलाय के फदन अळोक लृष के अखॊफडत ऩत्ते राकय ळुद्ध जर मा गॊगाजर वे धोकय रार कऩडे वे ऩोछकय अरभायी.in.370 भॊि सवद्ध दर ा वाभग्री ु ब घोडे की नार. फुधलाय. उवभं वे रूऩमे नशीॊ सनकारं मा अत्मासधक आलश्मकता शोने ऩय सनकारे। दव ू ये फॉक्व भं वे काभ के रेन-दे न के सरए रूऩए सनकारं।  प्रसतफदन आभदनी का करेक्ळन दव ू ये फदन स्लमॊ के खिे के सरमे मा फकवी व्माऩायी को िुकाने शे तु सनकारे। आभदनी मा करेक्ळन को कभ वे कभ 24 घॊटे के फाद शी खिा के सरमे सनकारने वे अत्मासधक धन राब शोता शं ।  जो रोग नौकयी रयते शं लश बी अऩना ऩैवा फंक भं आने के मा घय भं राने के 24 घॊटे के फाद शी खिा के सरमे सनकारने वे अत्मासधक धन राब शोता शं । शत्था जोडी.370 दस्षणालतॉ ळॊख. 91+ 9238328785.Rs.Rs.Rs.370 भोसत ळॊख.com.Rs.251 त्रफल्री नार.Rs.Rs. gurutva_karyalay@yahoo.karyalay@gmail.Rs.gurutva.Rs.351 भामा जार.550 धन लृत्रद्ध शकीक वेट Rs-251 गुरुत्ल कामाारम: Call Us : 91+ 9338213418. E-mail Us:.

११ भारा जाऩ ऩूणा कय अऩने कामा उद्दे श्म फक ऩूसता शे तु भाॊ रक्ष्भी वे प्राथना कयं । असधकस्म असधकॊ परभ ्। जऩ स्जतना असधक शो वके उतना अच्छा शै । मफद भॊि असधक फाय जाऩ कय वकं तो श्रेद्ष। प्रसतफदन स्नान इत्माफदवे ळुद्ध शोकय उऩयोक्त फकवी एक रक्ष्भी भॊि का जाऩ 108 दाने फक भारा वे कभ वे कभ एक भारा जाऩ अलश्म कयना िाफशए। उऩयोक्त भॊि के त्रलसध-त्रलधान के अनुवाय जाऩ कयने वे भाॊ रक्ष्भी फक कृ ऩा वे व्मत्रक्त को धन की प्रासद्ऱ शोती शै औय सनधानता का सनलायण शोता शै । . धन राब एलॊ वभृत्रद्ध भॊि ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ त्रिबुलन भशारक्ष्म्मै अस्भाॊक दारयद्र्म नाळम प्रिुय धन दे फश दे फश क्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ ॐ । 8.७. श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ऐॊ कभरलासवडमै स्लाशा । 4. ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै नभ्। 5.56 अक्टू फय 2011 रक्ष्भी भॊि  सिॊतन जोळी भॊि : 1.५. श्रीॊ ह्रीॊ श्रीॊ कभरे कभरारमे। 3. ॐ श्री भशारक्ष्म्मै नभ्। 2. ॐ ह्री श्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ क्रीॊ श्रीॊ भशारक्ष्भी भभ गृशे धनॊ ऩूयम ऩूयम सिॊतामै दयू म दयू म स्लाशा । 7. ॐ श्रीॊ सश्रमै नभ्। 6. अषम धन प्रासद्ऱ भॊि ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ ऐॊ वं ॐ ह्रीॊ क ए ई र ह्रीॊ श व क श र ह्रीॊ वकर ह्रीॊ वं ऐॊ क्रीॊ ह्रीॊ श्री ॐ । कैवे कयं भॊि जाऩ :धनतेयव मा दीऩालरी के फदन वॊकल्ऩ रेकय प्रात्कार स्नान कयके ऩूला मा उत्तय फदळा फक औय भुख कयके रक्ष्भी फक भूसता मा सिि की ऩॊिोऩिाय मा दषोऩिाय मा ऴोड्ऴोऩिाय वे ऩूजा कयं । ळुद्ध-ऩत्रलि आवन ग्रशण कय स्पफटक फक भारा वे भॊि का जाऩ १.

उव व्मत्रक्त को वला कामा सवत्रद्ध कलि अलश्म धायण कयना िाफशमे। कलि के प्रभुख राब: वला कामा सवत्रद्ध कलि के द्राया वुख वभृत्रद्ध औय नल ग्रशं के नकायात्भक प्रबाल को ळाॊत कय धायण कयता व्मत्रक्त के जीलन वे वला प्रकाय के द:ु ख-दारयद्र का नाळ शो कय वुख-वौबाग्म एलॊ उडनसत प्रासद्ऱ शोकय जीलन भे वसब प्रकाय के ळुब कामा सवद्ध शोते शं । स्जवे धायण कयने वे व्मत्रक्त मफद व्मलवाम कयता शोतो कायोफाय भे लृत्रद्ध शोसत शं औय मफद नौकयी कयता शोतो उवभे उडनसत शोती शं ।  वला कामा सवत्रद्ध कलि के वाथ भं वलाजन लळीकयण कलि के सभरे शोने की लजश वे धायण कयता की फात का दव ू ये व्मत्रक्तओ ऩय प्रबाल फना यशता शं ।  वला कामा सवत्रद्ध कलि के वाथ भं अद्श रक्ष्भी कलि के सभरे शोने की लजश वे व्मत्रक्त ऩय भाॊ भशा वदा रक्ष्भी की कृ ऩा एलॊ आळीलााद फना यशता शं । स्जस्वे भाॊ रक्ष्भी के अद्श रुऩ (१)-आफद रक्ष्भी. (३)-धैयीम रक्ष्भी. (५)-वॊतान रक्ष्भी.yolasite.9338213418. BANK COLONY.blogspot. BHUBNESWAR-751018. (६)-त्रलजम रक्ष्भी.com/ Email Us:. BRAHMESHWAR PATNA.karyalay@gmail. gurutva.57 अक्टू फय 2011 वला कामा सवत्रद्ध कलि स्जव व्मत्रक्त को राख प्रमत्न औय ऩरयश्रभ कयने के फादबी उवे भनोलाॊसछत वपरतामे एलॊ फकमे गमे कामा भं सवत्रद्ध (राब) प्राद्ऱ नशीॊ शोती. वाथ शी नकायत्भन ळत्रक्तमो का कोइ कुप्रबाल धायण कताा व्मत्रक्त ऩय नशीॊ शोता। इव कलि के प्रबाल वे इऴाा-द्रे ऴ यखने लारे व्मत्रक्तओ द्राया शोने लारे दद्श ु प्रबालो वे यषाशोती शं ।  वला कामा सवत्रद्ध कलि के वाथ भं ळिु त्रलजम कलि के सभरे शोने की लजश वे ळिु वे वॊफॊसधत वभस्त ऩये ळासनओ वे स्लत् शी छुटकाया सभर जाता शं । कलि के प्रबाल वे ळिु धायण कताा व्मत्रक्त का िाशकय कुछ नशी त्रफगड वकते। अडम कलि के फाये भे असधक जानकायी के सरमे कामाारम भं वॊऩका कये : फकवी व्मत्रक्त त्रलळेऴ को वला कामा सवत्रद्ध कलि दे ने नशी दे ना का अॊसतभ सनणाम शभाये ऩाव वुयस्षत शं । GURUTVA KARYALAY 92/3.com/ and http://gurutvakaryalay. (ORISSA) Call Us . (२)-धाडम रक्ष्भी.in. (४)-गज रक्ष्भी. 9238328785 Our Website:. (७)-त्रलद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो का अळीलााद प्राद्ऱ शोता शं ।  वला कामा सवत्रद्ध कलि के वाथ भं तॊि यषा कलि के सभरे शोने की लजश वे ताॊत्रिक फाधाए दयू शोती शं .com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) .http://gk.gurutva_karyalay@yahoo.

(ORISSA) Call us: 91 + 9338213418. ळाफकनी. बम सनलायक मॊि त्रलजम ऩतका मॊि बूताफद सनग्रश कय मॊि त्रलजम मॊि ज्लय सनग्रश कय मॊि सवद्धिक्र भशामॊि ळाफकनी सनग्रश कय मॊि दस्षण भुखाम ळॊख मॊि आऩत्रत्त सनलायण मॊि दस्षण भुखाम मॊि ळिुभख ु स्तॊबन मॊि (अनुबल सवद्ध वॊऩण ू ा श्री घॊटाकणा भशालीय ऩतका मॊि) मॊि के त्रलऴम भं असधक जानकायी शे तु वॊऩका कयं । GURUTVA KARYALAY 92/3.karyalay@gmail.in. BHUBNESWAR-751018. BANK COLONY. BRAHMESHWAR PATNA.com. . 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.58 अक्टू फय 2011 जैन धभाके त्रलसळद्श मॊिो की वूिी श्री िौफीव तीथंकयका भशान प्रबात्रलत िभत्कायी मॊि श्री एकाषी नारयमेय मॊि श्री िोफीव तीथंकय मॊि वलातो बद्र मॊि कल्ऩलृष मॊि वला वॊऩत्रत्तकय मॊि सिॊताभणी ऩाद्वानाथ मॊि वलाकामा-वला भनोकाभना सवत्रद्धअ मॊि (१३० वलातोबद्र मॊि) सिॊताभणी मॊि (ऩंवफठमा मॊि) ऋत्रऴ भॊडर मॊि सिॊताभणी िक्र मॊि जगदलल्रब कय मॊि श्री िक्रेद्वयी मॊि ऋत्रद्ध सवत्रद्ध भनोकाभना भान वम्भान प्रासद्ऱ मॊि श्री घॊटाकणा भशालीय मॊि ऋत्रद्ध सवत्रद्ध वभृत्रद्ध दामक श्री भशारक्ष्भी मॊि श्री घॊटाकणा भशालीय वला सवत्रद्ध भशामॊि त्रलऴभ त्रलऴ सनग्रश कय मॊि श्री ऩद्मालती मॊि षुद्रो ऩद्रल सननााळन मॊि श्री ऩद्मालती फीवा मॊि फृशच्िक्र मॊि श्री ऩाद्वाऩद्मालती ह्रंकाय मॊि लॊध्मा ळब्दाऩश मॊि ऩद्मालती व्माऩाय लृत्रद्ध मॊि भृतलत्वा दोऴ सनलायण मॊि श्री धयणेडद्र ऩद्मालती मॊि काॊक लॊध्मादोऴ सनलायण मॊि श्री ऩाद्वानाथ ध्मान मॊि फारग्रश ऩीडा सनलायण मॊि श्री ऩाद्वानाथ प्रबुका मॊि रधुदेल कुर मॊि बक्ताभय मॊि (गाथा नॊफय १ वे ४४ तक) नलगाथात्भक उलवग्गशयॊ स्तोिका त्रलसळद्श मॊि भस्णबद्र मॊि उलवग्गशयॊ मॊि श्री मॊि श्री ऩॊि भॊगर भशाश्रृत स्कॊध मॊि श्री रक्ष्भी प्रासद्ऱ औय व्माऩाय लधाक मॊि ह्रीॊकाय भम फीज भॊि श्री रक्ष्भीकय मॊि लधाभान त्रलद्या ऩट्ट मॊि रक्ष्भी प्रासद्ऱ मॊि त्रलद्या मॊि भशात्रलजम मॊि वौबाग्मकय मॊि त्रलजमयाज मॊि डाफकनी. gurutva_karyalay@yahoo.

com Our Website:. ऎद्वमा. 1450 वे Rs.Rs. 91 + 9238328785 92/3. 8200 तक उप्रब्द्ध वॊऩका कयं । GURUTVA KARYALAY Call Us – 91 + 9338213418. BHUBNESWAR-751018. भोश मा ळिुतालळ मफद अनुसित कभा कयके फकवी बी उद्दे श्म वे वाधक को ऩये ळान कयने का प्रमाव कयता शं तो मॊि के प्रबाल वे वॊऩण ू ा ऩरयलाय का यषण तो शोता शी शं .karyalay@gmail.http://gk. भायण. िोयबम आफद दयू शोते शं । दद्श ु ल अवुयी ळत्रक्तमं वे उत्ऩडन शोने लारे बम वे मॊि के प्रबाल वे दयू शो जाते शं । मॊि के ऩूजन वे वाधक को धन. कबी-कबी ळिु के द्राया फकमा गमा अनुसित कभा ळिु ऩय शी उऩय उरट लाय शोते दे खा शं । भूल्म:. BRAHMESHWAR PATNA.gurutva_karyalay@yahoo.com/ .in. रोब.अक्टू फय 2011 59 घॊटाकणा भशालीय वला सवत्रद्ध भशामॊि को स्थाऩीत कयने वे वाधक की वला भनोकाभनाएॊ ऩूणा शोती शं । वला प्रकाय के योग बूत-प्रेत आफद उऩद्रल वे यषण शोता शं । जशयीरे औय फशॊ वक प्राणीॊ वे वॊफसॊ धत बम दयू शोते शं । अस्ग्न बम. BANK COLONY.blogspot. वुख.yolasite. (ORISSA) Email Us:. वभृत्रद्ध. gurutva. वॊतत्रत्त-वॊऩत्रत्त आफद की प्रासद्ऱ शोती शं । वाधक की वबी प्रकाय की वास्त्लक इच्छाओॊ की ऩूसता शोती शं । मफद फकवी ऩरयलाय मा ऩरयलाय के वदस्मो ऩय लळीकयण. उच्िाटन इत्माफद जाद-ू टोने लारे प्रमोग फकमे गमं शोतो इव मॊि के प्रबाल वे स्लत् नद्श शो जाते शं औय बत्रलष्म भं मफद कोई प्रमोग कयता शं तो यषण शोता शं । कुछ जानकायो के श्री घॊटाकणा भशालीय ऩतका मॊि वे जुडे अद्द्भत ु अनुबल यशे शं । मफद घय भं श्री घॊटाकणा भशालीय ऩतका मॊि स्थात्रऩत फकमा शं औय मफद कोई इऴाा.com/ and http://gurutvakaryalay.

BRAHMESHWAR PATNA.अक्टू फय 2011 60 अभोद्य भशाभृत्मुॊजम कलि अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलि ल उल्रेस्खत अडम वाभग्रीमं को ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे त्रलद्रान ब्राह्मणो द्राया वला राख भशाभृत्मुज ॊ म भॊि जऩ एलॊ दळाॊळ शलन द्राया सनसभात कलि अत्मॊत प्रबालळारी शोता शं । अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलि कलि फनलाने शे तु: अऩना नाभ. . (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418. त्रऩता-भाता का नाभ. 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.com. gurutva_karyalay@yahoo. गोि. BHUBNESWAR-751018.karyalay@gmail.in. एक नमा पोटो बेजे अभोद्य् भशाभृत्मुॊजम कलि दस्षणा भाि: 10900 याळी यत्न एलॊ उऩयत्न त्रलळेऴ मॊि शभायं मशाॊ वबी प्रकाय के मॊि वोने-िाॊफदताम्फे भं आऩकी आलश्मक्ता के अनुळाय फकवी बी बाऴा/धभा के मॊिो को आऩकी आलश्मक फडजाईन के अनुळाय २२ गेज वबी वाईज एलॊ भूल्म ल क्लासरफट के अवरी नलयत्न एलॊ उऩयत्न बी उऩरब्ध शै । ळुद्ध ताम्फे भं अखॊफडत फनाने की त्रलळेऴ वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं । शभाये मशाॊ वबी प्रकाय के यत्न एलॊ उऩयत्न व्माऩायी भूल्म ऩय उऩरब्ध शं । ज्मोसतऴ कामा वे जुडेि फधु/फशन ल यत्न व्मलवाम वे जुडे रोगो के सरमे त्रलळेऴ भूल्म ऩय यत्न ल अडम वाभग्रीमा ल अडम वुत्रलधाएॊ उऩरब्ध शं । GURUTVA KARYALAY 92/3. BANK COLONY.

8200 तक उप्रब्द्ध GURUTVA KARYALAY Call Us – 91 + 9338213418.Rs. श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि। क्मोफक बगलान श्री कृ ष्ण एक अरौफकल एलॊ फदलम िुॊफकीम व्मत्रक्तत्ल के धनी थे। इवी कायण वे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि के ऩूजन एलॊ दळान वे आकऴाक व्मत्रक्तत्ल प्राद्ऱ शोता शं । श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि के वाथ व्मत्रक्तको दृढ़ इच्छा ळत्रक्त एलॊ उजाा प्राद्ऱ शोती शं . gurutva. अऩने सभिो ल ऩरयलायजनो के त्रफि भं रयश्तो भं वुधाय कयने की ईच्छा शोती शं उनके सरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि का ऩूजन एक वयर ल वुरब भाध्मभ वात्रफत शो वकता शं । श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि ऩय अॊफकत ळत्रक्तळारी त्रलळेऴ ये खाएॊ.gurutva_karyalay@yahoo.karyalay@gmail.in. वपरता. जो एक प्राकृ त्रत्त भाध्मभ वे व्मत्रक्त के बीतय वद्दबालना. तफ रोग उवकी वशामता एलॊ वेला शे तु तत्ऩय शोते शै औय उवके प्राम् वबी कामा त्रफना असधक कद्श ल ऩये ळानी वे वॊऩडन शो जाते शं । आज के बौसतकता लाफद मुग भं शय व्मत्रक्त के सरमे दव ॊ कत्ल को कामभ ू यो को अऩनी औय खीिने शे तु एक प्रबालळासर िुफ यखना असत आलश्मक शो जाता शं । आऩका आकऴाण औय व्मत्रक्तत्ल आऩके िायो ओय वे रोगं को आकत्रऴात कये इव सरमे वयर उऩाम शं . वभृत्रद्ध. मोग औय ध्मान के सरमे एक ळत्रक्तळारी भाध्मभ शं !  श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि के ऩूजन वे व्मत्रक्त के वाभास्जक भान-वम्भान ल ऩद-प्रसतद्षा भं लृत्रद्ध शोती शं ।  त्रलद्रानो के भतानुळाय श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि के भध्मबाग ऩय ध्मान मोग कंफद्रत कयने वे व्मत्रक्त फक िेतना ळत्रक्त जाग्रत शोकय ळीघ्र उच्ि स्तय द्राया सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम स्जव के पर स्लरुऩ धायण कयता व्मत्रक्त को ळीघ्र ऩूणा राब प्राद्ऱ शोता शं । कलि को गरे भं धायण कयने वे लशॊ अत्मॊत प्रबाल ळारी शोता शं । गरे भं धायण कयने वे कलि शभेळा रृदम के ऩाव यशता शं स्जस्वे व्मत्रक्त ऩय उवका राब असत तीव्र एलॊ ळीघ्र सात शोने रगता शं । को प्राद्ऱशोती शं ।  भूरम भाि: 1900 जो ऩुरुऴं औय भफशरा अऩने वाथी ऩय अऩना प्रबाल डारना िाशते शं औय उडशं अऩनी औय आकत्रऴात कयना िाशते शं । उनके सरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि उत्तभ उऩाम सवद्ध शो वकता शं ।  ऩसत-ऩत्नी भं आऩवी प्रभ की लृत्रद्ध औय वुखी दाम्ऩत्म जीलन के सरमे श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि राबदामी शोता शं । भूल्म:. स्जस्वे व्मत्रक्त शभेळा एक बीड भं शभेळा आकऴाण का कंद्र यशता शं । मफद फकवी व्मत्रक्त को अऩनी प्रसतबा ल आत्भत्रलद्वाव के स्तय भं लृत्रद्ध. फीज भॊि एलॊ श्रीकृ ष्ण फीवा कलि श्रीकृ ष्ण फीवा कलि को केलर त्रलळेऴ ळुब भुशुता भं सनभााण फकमा जाता शं । कलि को त्रलद्रान कभाकाॊडी ब्राशभणं द्राया ळुब भुशुता भं ळास्त्रोक्त अॊको वे व्मत्रक्त को अद्द्भत ु आॊतरयक ळत्रक्तमाॊ प्राद्ऱ शोती शं जो व्मत्रक्त को त्रलसध-त्रलधान वे त्रलसळद्श तेजस्ली भॊिो श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि के ऩूजन ल सनमसभत दळान के भाध्मभ वे बगलान मुक्त कयके सनभााण फकमा जाता शं । वफवे आगे एलॊ वबी षेिो भं अग्रस्णम फनाने भं वशामक सवद्ध शोती शं । श्रीकृ ष्ण का आळीलााद प्राद्ऱ कय वभाज भं स्लमॊ का अफद्रतीम स्थान स्थात्रऩत कयं । श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि अरौफकक ब्रह्माॊडीम उजाा का वॊिाय कयता शं . उत्तभ स्लास््म.com . 91 + 9238328785 Email Us:.अक्टू फय 2011 61 श्रीकृ ष्ण फीवा मॊि फकवी बी व्मत्रक्त का जीलन तफ आवान फन जाता शं जफ उवके िायं औय का भाशोर उवके अनुरुऩ उवके लळ भं शं। जफ कोई व्मत्रक्त का आकऴाण दव ु यो के उऩय एक िुम्फकीम प्रबाल डारता शं . 550 वे Rs.

(ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418. BHUBNESWAR-751018.in. फाधाओॊ वे भुत्रक्त ल कामो भं वपरता प्रासद्ऱ शे तु उत्तभ मॊि शं । स्जवके प्रमोग वे धन राब शोता शं ल व्मत्रक्त का वलांगी त्रलकाय शोकय उवे वुख-वभृत्रद्ध. भानवम्भान की प्रासद्ऱ शोती शं । याभ यषा मॊि वबी प्रकाय के अळुब प्रबाल को दयू कय व्मत्रक्त को जीलन की वबी प्रकाय की कफठनाइमं वे यषा कयता शं । त्रलद्रानो के भत वे जो व्मत्रक्त बगलान याभ के बक्त शं मा श्री शनुभानजी के बक्त शं उडशं अऩने सनलाव स्थान.com/ and http://gurutvakaryalay. gurutva.अक्टू फय 2011 62 याभ यषा मॊि याभ यषा मॊि वबी बम.blogspot.yolasite. व्मलवामीक स्थान ऩय याभ यषा मॊि को अलश्म स्थाऩीत कयना िाफशमे स्जववे आने लारे वॊकटो वे यषा शो उनका जीलन वुखभम व्मतीत शो वके एलॊ उनकी वभस्त आफद बौसतक ल आध्मास्त्भक भनोकाभनाएॊ ऩूणा शो वके। ताम्र ऩि ऩय वुलणा ऩोरीव ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीव ताम्र ऩि ऩय (Gold Plated) (Silver Plated) (Copper) वाईज भूल्म वाईज भूल्म वाईज भूल्म 2” X 2” 640 2” X 2” 460 2” X 2” 370 3” X 3” 1250 3” X 3” 820 3” X 3” 550 4” X 4” 1850 4” X 4” 1250 4” X 4” 820 6” X 6” 2700 6” X 6” 2100 6” X 6” 1450 9” X 9” 4600 9” X 9” 3700 9” X 9” 2450 12” X12” 8200 12” X12” 6400 12” X12” 4600 GURUTVA KARYALAY 92/3.http://gk.com/ . BANK COLONY. 91 + 9238328785 Email Us:.com Our Website:.karyalay@gmail. BRAHMESHWAR PATNA.gurutva_karyalay@yahoo.

इव भशत्ल यत्नधातभभ ्॥ ऩुयोफशतॊ शोतायॊ कयने लारे.अक्टू फय 2011 63 दीऩ जराने का भशत्ल क्मा शं ?  सिॊतन जोळी. त्रललाश. तेज ऊजाा के कुदयसत स्त्रोत शं । ऊजाा के त्रफना भानल जीलन का कोई अस्स्तत्ल नशीॊ शं । वभग्र ब्रह्माॊड भं प्रकाळ ऊजाा का प्रभुख स्त्रोत एक भाि वूमा शं . शलन. स्जवके फर के कायण फश ऊजाा उत्ऩडन शोती शं । इस्वे उत्ऩडन शोने लारी उजाा को फश प्रकाळ कशा जाता शं । प्रकाळ का शभाये जीलन भं फशुत भशत्ल शं . फक मफद अस्ग्न दे ल क्रोसधत शोजामे तो फड़े -फड़े भशरं ल ऊॊिे-ऊॊिे बलनं को धूरभं उडादे औय याख फनादे । इव सरमे प्रकाळ का ऩूजन कय उडशं ळाॊत यखने का प्रमाव फकमा जाता शं । शभाये प्रभुख धभा ग्रॊथो भं एक ऋग्लेद का वला प्रथभ भॊि शी प्रकाळ वे ळुरू शोता शै । भॊि: प्रकाळभीरे प्रकाळ. उव के अराला कोई औय प्रभुख स्त्रोत का अस्स्तत्ल नशीॊ शं । मशी कायण शं फक आज वूमा के तेज वे शी शभाया जीलन वुिारु रुऩ वे प्रकाळभान शं । लामु भॊडर भं व्माद्ऱ लामुकण (धूर) औय फादर इत्माफद वबी भं अऩनी िुम्फकीम ळत्रक्त शोती शं स्जवके कायण वफ एक दव ू ये की ओय आकत्रऴात शोते यशते शं । इवी आकत्रऴात शोने के कायण कण एक दव ू ये वे ऩाव आते औय दयू शोते यशते शं . दे लताओॊ का आह्लान कयने लारे तथा धन प्रदान कयने लारं भं वलाश्रद्ष े अस्ग्न दे लता की भं स्तुसत कयता शूॊ। अनाफदकार वे भनुष्म का वफवे फड़ा ळिु अॊधकाय रुऩी असानता यशी शं । इव सरमे ऩुयातन कारवे फश अॊधकाय को दयू कयने लारा प्रकाळ भनुष्म का वफवे फड़ा सभि यशा शै । क्मोफक प्रकाळ शभं दे खने की ळत्रक्त दे ता शं । लामुभॊडर भं लस्तु फक वशी ऩशिान कयने के सरमे प्रकाळ आलश्मक शै । उऩसनऴद भं इवी सरमे अॊधकाय वे ज्मोसत की ओय जाने की काभना की गई शै । अस्ग्न प्रकाळ का प्रसतक शं जो मस.ऎन.वलाप्रथभ आयाधन फकए जाने लारे. मस को प्रकासळत वे शय व्मत्रक्त बरी बासत लाफकप शं । शभायी बायसतम वॊस्कृ सत के धासभाक कामाक्रभ भं बी अस्ग्न का त्रलळेऴ भशत्ल शं । एलॊ मसस्म अवतो भा वद्गभम भृत्मोभाा अभृतॊ गभम . ऋतुओॊ के अनुवाय मस वम्ऩाफदत कयने लारे.जोळी शोना अवॊबल वा प्रसतत शोता शं । इवी कायण बायसतम वभ्मताओॊ भं अस्ग्न को दे ल कशा गमा शं । अस्ग्न को दे लता भनकय उवका ऩूजन फकमा जाता शं । क्मोफक एवा भाना जाता शं . वॊस्काय तभवो भाॊ ज्मोसतगाभम जेवे अडम धासभाक कभाकाॊडो भं त्रफना अस्ग्न के त्रफना वॊऩडन दे लभृस्त्लजभ ्। बालाथा:. स्लस्स्तक.

अवुयी ळत्रक्त को डयाता. वुडदय औय कल्माणकायी. प्रकाळ का आह्लान कयता. स्जव भं उजाा के प्रसतक के रुऩ भं दीऩक जराने फक ऩयॊ ऩया शं । शभाये ळास्त्रं भं दीऩज्मोसत फक भफशभा का त्रलस्तृत लणान फकमा गमा शं । ळास्त्रं भं दीऩज्मोसत को ऩाऩनाळक. कीभती यत्नं. जो ऩत्थय. शभाये ळिं फक फुत्रद्ध के त्रलनाळ के सरए शभ तुम्शं नभस्काय कयते शं । ऩूयातन कार भं दीऩ का ऩाि स्पफटक. आयोग्म औय वॊऩदा को दे ने लारे शे दीऩक फक ज्मोसत. अिाना औय आळीलााद स्लरुऩ भाना जाता शं । वूमा के अॊळ वे उत्ऩडन ऩृ्ली की अस्ग्न को स्जव ऩाि भं स्थात्रऩत फकमा गमा उवे आज दीऩक के रूऩ भं शभाये घयं भं ऩूजा जाता शै । ळुबभ कयोसत करमाणभ ् आयोग्मभ ् धन वम्ऩदा ळिुफुस्ध्द त्रलनाळाम दीऩज्मोसत नभस्तुते ।। अथाात: शभे ळुब. ळिुओॊ फक लृत्रद्ध योकने लारी. ऩाऴाण मा वीऩ का शोता था। काराडतय भं सभट्टी को गढने औय याभामण भं उल्रेख सभरता शं फक जफ शनुभान रॊका ऩशुॉिे तो उडशं वुनशये दीऩं को दे ख कय भ्रभ शुआ फक कशीॊ ले स्लगा भं तो नशीॊ आ गए। उडशं लशाॊ ऩीरे औय जरते शुए स्लणादीऩ फदखाई फदए। बायतीम ळास्त्रो भे उल्रेख सभरता शै . वोने औय िाॊदी के शोते थे। मे छोटे फड़े वबी आकायं के थे। वभम के वाथ वाथ दीऩ स्तॊब बी प्रिरन भं आए। ऋग्लेद इॊ द्र ज्मोसत् अभृतॊ भतेऴु वूमांळ वॊबलो दीऩ् अथाात: वूमा के अॊळ वे दीऩ की उत्ऩत्रत्त शुई। दीऩ जीलन की ऩत्रलिता. सिय मुला औय प्रािीन ऩुयोफशत शै । ऋग्लेद के अनुळाय भशात्रऴा बृगु ऋत्रऴ ने अस्ग्न की खोज की। अस्ग्न के सरमे ऋग्लेद भं कशा गमा शं । अस्ग्नभीऱे ऩुयोफशतॊ (ऋग्लेद) ऩकाने के आत्रलष्काय के वाथ दीऩ सभट्टी का फनने रगा। प्रािीन कार वे धसनकं द्राया फड़े करात्भक फदमं का प्रमोग फकमा जाता था.अक्टू फय 2011 64 ळास्त्रो भं अस्ग्न के तीन रूऩं लणान फकमा गमा शं । ऩृ्ली ऩय अस्ग्न. फक अस्ग्न का वॊफॊध भनुष्म के जडभ वे रेकय भयण तक शोता शं । मशी कायण शं शभायी वॊस्कृ सत भं त्रलसबडन व्रत-त्मोशाय इत्माफद भं दीऩ क भशत्ल शं । दीऩलरी बी शभाये प्रभुख त्मौशायो भं वे एक शै . आमु एलॊ आयोग्म प्रदान कयने लारी शं । दीऩो ज्मोसत् ऩयभ ् ब्रह्म दीऩो ज्मोसतजानादा न्। दीऩो शयतु भं ऩाऩभ ् वाध्मदीऩ नभोऽस्तु ते।। ळुबभ ् कयोतु कल्माणभ ् आयोग्मभ ् वुखवम्ऩदभ ्। ळिुफुत्रद्धत्रलनाळभ ् ि दीऩज्मोसतनाभोऽस्तु ते।। . अडतरयष भं त्रलद्युत औय आकाळ भं वूम।ा प्रकाळ के उद्दगभ के त्रलऴम भं कशा गमा शै फक कार के वॊघऴा-भॊथन वे उवका जडभ शुआ। वूमा फक अस्ग्न अॊधकाय को सभटाता शै . धातु. बत्रक्त.

91+9238328785 . तो स्लास््म औय प्रवडनता फक लृत्रद्ध कयती शं ।  दीऩक की रौ दस्षण फदळा की ओय शो. तो आमु फक लृत्रद्ध कयती शं ।  दीऩक की रौ ऩस्द्ळभ फदळा की ओय शो.1250. तीन भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 450.1050. िाय भुखी रूद्राष (नेऩार) 50. फायश भुखी रूद्राष (नेऩार) 1900. ऩॊि भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 225. Call us: 91 +9338213418. याभेद्वय) 30. िौदश भुखी रूद्राष (नेऩार) 10500 छश भुखी रूद्राष (नेऩार) 50.1250 एकभुखी रूद्राष (नेऩार) 750. तो शासन कयती शं । मफद घय भं आऩ दीऩक जरामं तो उवे आऩके घयके उत्तय अथला ऩूला कोने भं शोना िाफशए। दीऩज्मोसत के प्रबाल वे ऩाऩ-ताऩ का शयण शोता शै .75 नौ भुखी रूद्राष (नेऩार) 910. तो द्ु ख की लृत्रद्ध कयती शं ।  दीऩक की रौ उत्तय फदळा की ओय शो. याभेद्वय) 25. िाय भुखी रूद्राष (शरयद्राय.100.55. 550. िौदश भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 14500 वात भुखी रूद्राष (शरयद्राय. 5500 आठ भुखी रूद्राष (नेऩार) 820. वुखभम जीलन की लृत्रद्ध शोती शै । ऩुरूऴोत्तभ भशात्त्म्म भं दीऩक फक ज्मोसत के सरमे कशा गमा शं । रूषैरक्ष् ा भी त्रलनाळ्स्मात द्वैतेयडनषमो बलेत ् असत यक्तेऴु मुध्दासन भृत्मु्कृ ष्ण सळखीऴु ि।। अथाात: कोयी ळुष्क (रूखी) ज्मोसत रक्ष्भी का नाळ. द्वेतज्मोसत अडनषम.50. आठ भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 1900 दो भुखी रूद्राष (शरयद्राय. फायश भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 2750. 1250. गणेळ रुद्राष (नेऩार) 550 वात भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 1250 गणेळ रूद्राष (इडडोनेसळमा) 750 रुद्राष के त्रलऴम भं असधक जानकायी शे तु वॊऩका कयं । GURUTVA KARYALAY.75.100. असत रार ज्मोसत मुद्ध औय कारी ज्मोसत भृत्मु की द्योतक शोती शं । भॊि सवद्ध रूद्राष Rate In Indian Rupee Rudraksh List Rudraksh List Rate In Indian Rupee एकभुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 2800.100. याभेद्वय) 75.75. छश भुखी रूद्राष (शरयद्राय.50.अक्टू फय 2011 65  भाडमता शं फक मफद घय भं दीऩक की रौ ऩूला फदळा की ओय शो. 4500. याभेद्वय) 30.100.1250 तीन भुखी रूद्राष (शरयद्राय.1250 दव भुखी रूद्राष (नेऩार) 1050. ऩॊि भुखी रूद्राष (नेऩार) 25. तेयश भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 6400. ळिुफुत्रद्ध का ळभन शोता शै औय ऩुण्मभम. दव भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 2100 तीन भुखी रूद्राष (नेऩार) 50. नौ भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 2050 दो भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 450.1250 दो भुखी रूद्राष (नेऩार) 50. ग्मायश भुखी रूद्राष (नेऩार) 1250. ग्मायश भुखी रूद्राष (इडडोनेसळमा) 2750.55.55. 155.75. तेयश भुखी रूद्राष (नेऩार) 3500. याभेद्वय) 25. गौयीळॊकय रूद्राष 1450 वात भुखी रूद्राष (नेऩार) 225. 450.

स्जवे उनके नाभ वे शी मभरोक कशा जाता शं । ऋग्लेद भं उल्रेख शै फक मभरोक भं सनयडतय अनद्वय अथाात ् स्जवका नाळ न शो ऐवी ज्मोसत जगभगाती यशती शं । मभरोक अनद्वय शं औय मभरोक भं कोई भयता नशीॊ शं । मभदे लताके स्लरुऩ का लणान कयते शुले ग्रॊथकायो ने सरखा शं । मभ की आॉखं रार शं . उनके शाथ भं ऩाळ यशता शं । इनका ळयीय नीरा शै औय मे दे खने भं उग्र शं । बंवा इनकी वलायी शं । मे वाषात ् कार शं । मभदीऩदान: मभदीऩदान के त्रलऴम भं स्कडदऩुयाण भं कशा गमा शै फक कासताक के कृ ष्णऩष भं िमोदळी के प्रदोऴकार भं मभयाज के सनसभत्त दीऩ औय नैलेद्य वभत्रऩात कयने ऩय अकार भृत्मु का नाळ शोता शं । मश स्लमॊ मभयाज का कथन था। मभदीऩदान केलर प्रदोऴकार भं कयने का त्रलधान शं । मभदीऩदान के सरए सभट्टी का एक फड़ा दीऩक रेकय उवे उवे स्लच्छ जर वे धो रेना िाफशए। फपय स्लच्छ रुई रेकय दो रम्फी फत्रत्तमॉॊ फना रं। फत्रत्तमाॊ इतनी रम्फी फनामे की दीऩक वे उवके दोनं औय के छोय सनकरे शुए शो। फत्रत्तमॉॊ को दीऩक भं एक-दव ू ये ऩय इव प्रकाय यखं फक दीऩक के फाशय फत्रत्तमं के िाय भुॉश फदखाई दं । अफ दीऩक को सतर के तेर वे बय दं औय वाथ शी उवभं एक छुटकी कारे सतर बी डार दं । प्रदोऴकार भं इव प्रकाय त्रलसध वे तैमाय फकए गए दीऩक का योरी. तऩती. वालस्णा भनु आफद 10 वौतेरे बाई -फशन बी शं । ऩौयास्णक भाडमता के अनुळाय मभ ळसन ग्रश के असधदे लता शं । मभदे लता प्रत्मेक प्राणी के ळुब-अळुब कभं के अनुवाय पर दे ने का कामा कयते शं । इवी कायण उडशं मभदे लता को धभायाज कशा गमा शं । क्मोफक अऩने कताव्म के प्रसत मभदे ल िुफट यफशत कामा व्मलस्था की स्थाऩना कयते शं । मभदे ल का अऩना अरग वे एक रोक शं . अषत एलॊ ऩुष्ऩ वे ऩूजन कयना िाफशए। . त्रलत्रद्श. अस्द्वनीकुभाय एलॊ यै लॊत उनके बाई शं तथा मभुना उनकी फशन शै । मभदे ल की वौतेरी भाॉ छामा वे ळसन.अक्टू फय 2011 66 धनिमोदळी ऩय मभ-दीऩदान अकारभृत्मु को दयू कयता शं ?  सिॊतन जोळी धनिमोदळी के फदन फकमे जाने लारे कभा भं एक भशत्त्लऩूणा कभा मभ के सनसभत्त फकमा जाने लारा दीऩदान शं । फशडद ू धभा ळास्त्र भं सनणामसवडधु के अॊतगात सनणामाभृत औय स्कडदऩुयाण उल्रेख शं फक कासताक कृ ष्ण िमोदळी की वॊध्मा प्रदोऴ कार के वभाम घय वे फाशय मभ के सनसभत्त दीऩदान कयने वे ऩरयलाय भं अकारभृत्मु का बम दयू शोता शं । ळास्त्रंक्त भत के अनुळाय मभदे लता बगलान वूमा औय भाता वॊसा के ऩुि शं । लैलस्लत भनु.

अक्टू फय 2011 67 तत ऩद्ळात ् घय के भुख्म द्राय ऩय फाशय थोड़ी वी खीर.20 वे Rs. गेशूॉ आफद की ढे यी के ऊऩय यख दं । ॐ मभदे लाम नभ्। नैलेद्यॊ सनलेदमासभ॥ इव भडि का उच्िायण कयते शुए िायभुॉश के दीऩक को दं । भृत्मुना ऩाळदण्डाभ्माॊ कारेन ि भमा वश। तत ऩद्ळमात शाथ भं थोड़ा वा जर रेकय आिभन के िमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज ा ् प्रीमतासभसत॥ सनसभत्त सनम्नसरस्खत भडि का उच्िायण कयते शुए दीऩक अथाात ्: िमोदळी को दीऩदान कयने वे भृत्मु. ऩाळ. BHUBNESWAR-751018. कामाारम भे "श्री मॊि" 12 ग्राभ वे 75 ग्राभ तक फक वाइज भे उप्रब्ध शै भूल्म:.karyalay@gmail. दण्ड. कार औय रक्ष्भी के वाथ वूमन ा ॊदन मभ प्रवडन शं। उक्त भडि के उच्िायण के ऩद्ळात ् शाथ भं ऩुष्ऩ रेकय सनम्नसरस्खत भडि का उच्िायण कयते शुए मभदे ल को दस्षण फदळा भं नभस्काय कयं । के वभीऩ जर को छोड़े । ॐ मभदे लाम नभ्। आिभनाथे जरॊ वभऩामासभ॥ तत ऩद्ळमात ऩुन् मभदे ल को ॐ मभदे लाम नभ्। भडि का उिायण कयते शुए दस्षण फदळा भं नभस्काय कयं । भॊि सवद्ध स्पफटक श्री मॊि "श्री मॊि" वफवे भशत्लऩूणा एलॊ ळत्रक्तळारी मॊि शै । "श्री मॊि" को मॊि याज कशा जाता शै क्मोफक मश अत्मडत ळुब फ़रदमी मॊि शै । जो न केलर दव ू ये मडिो वे असधक वे असधक राब दे ने भे वभथा शै एलॊ वॊवाय के शय व्मत्रक्त के सरए पामदे भॊद वात्रफत शोता शै । ऩूणा प्राण-प्रसतत्रद्षत एलॊ ऩूणा िैतडम मुक्त "श्री मॊि" स्जव व्मत्रक्त के घय भे शोता शै उवके सरमे "श्री मॊि" अत्मडत फ़रदामी सवद्ध शोता शै उवके दळान भाि वे अन-सगनत राब एलॊ वुख की प्रासद्ऱ शोसत शै । "श्री मॊि" भे वभाई अफद्रसतम एलॊ अद्रश्म ळत्रक्त भनुष्म की वभस्त ळुब इच्छाओॊ को ऩूया कयने भे वभथा शोसत शै । स्जस्वे उवका जीलन वे शताळा औय सनयाळा दयू शोकय लश भनुष्म अवफ़रता वे वफ़रता फक औय सनयडतय गसत कयने रगता शै एलॊ उवे जीलन भे वभस्त बौसतक वुखो फक प्रासद्ऱ शोसत शै । "श्री मॊि" भनुष्म जीलन भं उत्ऩडन शोने लारी वभस्मा-फाधा एलॊ नकायात्भक उजाा को दयू कय वकायत्भक उजाा का सनभााण कयने भे वभथा शै । "श्री मॊि" की स्थाऩन वे घय मा व्माऩाय के स्थान ऩय स्थात्रऩत कयने वे लास्तु दोऴ म लास्तु वे वम्फस्डधत ऩये ळासन भे डमुनता आसत शै ल वुख-वभृत्रद्ध.com. ॐ मभदे लाम नभ्। नभस्कायॊ वभऩामासभ॥ यखना िाफशए। तत ऩद्ळमात ऩुष्ऩ दीऩक के ऩाव यख दं औय ऩुन् शाथ िालर अथला गेशूॉ वे ढे यी फनाकय उवके ऊऩय दीऩक को दीऩक को ढे यी ऩय स्थात्रऩत कयने वे ऩूला उवे भं नैलेद्यॊ के रुऩ भं एक फताळा रं तथा सनम्नसरस्खत प्रज्लसरत कय रं औय दस्षण फदळा की ओय दे खते शुए भडि का उच्िायण कयते शुए उवे दीऩक के वभीऩ शी यख खीर.28. BANK COLONY.00 GURUTVA KARYALAY 92/3. (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418. gurutva_karyalay@yahoo.in.प्रसत ग्राभ Rs. ळाॊसत एलॊ ऐद्वमा फक प्रसद्ऱ शोती शै । गुरुत्ल . . BRAHMESHWAR PATNA. िालर. 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva. 8.

न फुढ़ाऩा शै . ऩुरु. उन फारक एलॊ मुलाओॊ के प्राण शयते वभम शभं भानसवक क्रेळ शोता शं । उवका कायण मश शै फक उनके ऩरयजन अत्मासधक त्रलराऩ कयते शं औय स्जववे शभं फशुत असधक द्ु ख शोता शं । क्मा फारक एलॊ मुलाओॊ को अवाभसमक भृत्मु वे छुटकाया नशीॊ सभर वकता शै ? मभदत ू के भुख वे इतना वुनकय धभायाज फोरे दत ू गण तुभने फशुत अच्छा प्रद्ल फकमा शं । इववे भृत्मु फिने के उऩाम के रूऩ भं धनिमोदळी ऩय मभ के सनसभत्त जाता शं । मभयाज की वबा: मभयाज की वबा का लणान कयते शुए ग्रॊथ कायं ने सरखा शं फक दे लरोक की िाय प्रभुख वबाओॊ भं वे एक शै मभवबा । इव वबा का सनभााण त्रलद्वकभाा जी ने फकमा था। मभवबा अत्मडत त्रलळार वबा शै . फारक एलॊ मुला व्मत्रक्तमं के प्राण शयकय राते शं . वॊडमावी तथा अऩने ऩुण्मकभा वे ळुध्द एलॊ ऩत्रलि भशाऩुरुऴं का शी मभवबा भं प्रलेळ शोता शं । . प्रसतलऴा प्रदोऴकार भं जो अऩने घय के दयलाजे ऩय ऩय बी मशॉॊ रे आने के मोग्म नशीॊ शै । भृत्मुना ऩाश्दण्डाभ्माॊ कारेन ि भमा वश। िमोदश्माॊ दीऩदानात ् वूमज ा ् प्रीमतासभसत॥ उत्वल. भाडधाता. सनसभ. न बूख शै . थकालट अथला प्रसतकूरता नाभभाि को बी नशी शै । मभवबा भं वदै ल ऩत्रित वुगडध लारी ऩुष्ऩ भाराएॉ एलॊ अडम कई यम्म लस्तुएॉ त्रलद्यभान यशती शं । मभवबा भं अनेक याजा. प्रतदान. न प्माव शै औय न शी मभवबा भं कोई अत्रप्रम लस्तु शं । इव प्रकाय मभवबा द्ु ख. इत्माफद के ऩीछे कोई न कोई उवके फाद वे शी अऩभृत्मु अथाात ् अवाभसमक भृत्मु वे धनिमोदळी ऩय मभदीऩदान कयना बी इवी प्रकाय ऩौयास्णक दीऩदान एलॊ नैलेद्य वभत्रऩात कयने का कभा प्रसतलऴा फकमा ऩौयास्णक कथा अलश्म जुड़ी शोती शं । इवी प्रकाय कथा वे जुड़ा शुआ शं । स्कडदऩुयाण भं लैष्णलखण्ड के अडतगात कासताक भाव भशात्म्म भं इववे ऩौयास्णक कथा का वॊस्षद्ऱ उल्रेख फकमा गमा शं । वम्फस्डधत ऩौयास्णक कथा के अनुळाय एक फाय मभदत ू फारकं एलॊ मुलाओॊ के प्राण शयते वभम ऩये ळान शो उठे । मभदत ू को फड़ा द्ु ख शुआ फक ले फारकं एलॊ मुलाओॊ के प्राण शयने का कामा कयते शं . उत्तभ व्रत का ऩारन कयने लारे वत्मलादी. ळाडत. ऩूजन त्रलसध-त्रलधान. ऩयडतु मभदत ू कयते बी क्मा? उनका कामा शी प्राण शयना शी शं । मभदत ू अऩने कताव्म वे ले कैवे त्रलभुख शोते? मभदत ू के सरए एक औय कताव्मसनद्षा का प्रद्ल था. ऩयडतु जो अऩभृत्मु के सळकाय शोते शं . अरयद्शनेभी. दव ु यी ओय स्जन फारक एलॊ मुलाओॊ का प्राण शयकय राते थे. कृ सत. कातालीमा. लश अऩभृत्मु शोने लारे कभो भं मभदीऩदान को त्रलळेऴ प्रभुखता दी जाती शं । रेफकन इव के ऩीछे छुऩी धासभाक भाडमता वे कभ रोग शी ऩयीसित शंगे! फशडद ू धभा भं फकमे जाने लारी प्रत्मेक व्रत-तमोशाय. सळत्रल आफद याजा भृत्मु के उयाडत मशाॊ फैठकय धभायाज की उऩावना कयते शं । कठोय तऩस्मा कयने लारे. नशुळ. कद्श एलॊ ऩीड़ा के कयणं का अबाल यशता शं । मभवबा भं दीनता.अक्टू फय 2011 68 धनिमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं फकमा जाता शं ?  सिॊतन जोळी ळास्त्रंक्त भत के अनुळाय धनिमोदळी के फकमे जाने रोकलासवमं का कल्माण शोगा। कासताक कृ ष्ण िमोदळी को धनिमोदळी ऩय मभदीऩदान क्मं फकमा जाता शं सनम्नसरस्खत भडि वे उत्तभ दीऩ दे ता शं . उनके ऩरयजनं के द्ु ख एलॊ त्रलराऩ को दे खकय स्लमॊ को शोने लारे भानसवक क्रेळ का प्रद्ल था। ऐवी स्स्थसत भं जफ मभदत ू फशुत फदन तक यशने रगे. इवकी 100 मोजन रम्फाई एलॊ 100 मोजन िौड़ाई शै । इव प्रकाय मश लगााकाय शै । मभवबा का ताऩक्रभ अत्मडत वुशालना अथाात ् न तो असधक ळीतर शै औय न शी असधक गभा शै । मभवबा वबी के भन को अत्मडत आनडद दे ने लारी शै । मभवबा भं न ळोक. ऋत्रऴा औय ब्रह्मत्रऴा मभदे ल की उऩावना कयते यशते शं । ममासत. तो त्रललळ शोकय ले अऩने स्लाभी मभयाज के ऩाव ऩशुॉिे औय कशा फक भशायाज आऩके आदे ळ के अनुवाय शभ प्रसतफदन लृद्ध.

रक्ष्भी ऩूजन. रेखनी (करभ) आफदका ऩूजन बी कयते शं । वलाप्रथभ व्मलवामीक स्थान के भुख्मद्राय के दोनं ओय की फदलाय ऩय सवडदयू वे ळुब-राब औय ॐ औय स्लस्स्तक के सिि अॊफकत कयं । ऩद्ळमात इन ळुब सििं का योरी. कुफेय ऩूजन. ऩुष्ऩ आफद वे तयाजू का ऩूजन कयं । . ऩुष्ऩ आफद वे त्रलसधलत ऩूजन कयते शुए ऩूजन कयं । ऩूजन के ऩद्ळमात इव प्रकाय प्राथाना कये । कासरके त्लॊ जगडभातभासवरूऩेण लतावे। उत्ऩडना त्लॊ ि रोकानाॊ व्मलशायप्रसवद्धमे॥ रेखनी ऩूजन् दीऩालरी के फदन नमी रेखनी मा ऩेन को ळुद्ध जर वे कयना िाफशए। ऩूजन के वभम ॐ श्रीवयस्लत्मै नभ् भडि का उच्िायण कयं । तुरा का ऩूजन् वलाप्रथभ तयाजू को ळुद्ध कय रेना िाफशए। तदऩ ु याडत उव ऩय योरी वे स्लस्स्तक का सिि फनाएॉ। उव ऩय भौरी धोकय तथा उव ऩय भौरी फॉॊधकय रक्ष्भीऩूजन की िौकी फॉॊध दं तथा ॐ तुरासधद्षातृदेलतामै नभ्। उच्िायण कयते ऩय कुछ अषत एलॊ ऩुष्ऩ डारकय स्थात्रऩत कय दं । शुए योरी. उवके फाद उवके भुख ऩय भौरी फॉॊध दं । दलात को िौकी ऩय थोड़े वे ऩुष्ऩ औय अषत सरखा जाए तो बी आने लारे लऴा बय के सरमे आसथाक द्रत्रद्श वे राबदामक यशता शं । (वद्ऱ श्री सरखने की त्रलसध गुरुत्ल ज्मोसतऴ डारकय स्थात्रऩत कय दं । दलात का योरी. प्रथभ ऩृद्ष ऩय वलाप्रथभ उऩय रार फशीखाता. आफद ऩूजनो के वाथ-वाथ अऩने व्मलवाम वे जुडे फशवाफ-फकताफ यखने शे तु शय लऴा दीऩालरी ऩय फशी-खाता. तुरा (तयाजू) आफद का करभ मा ऩेन वे श्री गणेळाम नभ्। ऩूजन कयना िाफशए। सरखे ऩद्ळमात स्लस्स्तक का सिि दलात का ऩूजन: दलात को िॊदन अथला योरी वे फनाएॉ। ऩद्ळमात भशाकारी का रूऩ भाना जाता शं । अऩने इद्श दे ली-दे लता का नाभ सरख वलाप्रथभ नई स्माशीमुक्त दलात को वकते शं । मफद फशी खातो ऩय वद्ऱ श्री ळुद्ध जर के छीटं दे कय ऩत्रलि कय रे. ऩुष्ऩ आफद वे भासवक ऩत्रिका भं ऩृद्ष वॊख्मा ऩय दी गई शं । भशाकारी के भडि ॐ श्रीभशारक्ष्भै नभ्। का उच्िायण ऩद्ळमात फशीखाते का योरी.अक्टू फय 2011 69 दीऩालरी के फदन कैवे कयं फशीखाता तुरा ऩूजन?  सिॊतन जोळी फशडद ू धभा भं ऩॊिभशा ऩला दीऩालरी ऩय व्मलवाम कामा वे जुडे रोग गणेळ ऩूजन. तुरा (तयाजू). ऩुष्ऩ आफद वे ॐ रेखनीस्थामै दे व्मै नभ्। का उच्िायण कयते शुए ऩूजन कयं । भडि फोरते शुए ऩूजन कयं । ऩूजन के ऩद्ळमात सनम्नसरस्खत भडि वे शाथ जोड़कय प्राथाना कये । ळास्त्राणाॊ व्मलशायाणाॊ त्रलद्यानाभाप्नुमाद्यत्। अतस्त्लाॊ ऩूजसमष्मासभ भभ शस्ते स्स्थया बल॥ फशीखाता ऩूजन् दीऩालरी के फदन व्मलवाम वे जुडे रोग नए फशीखातं का ळुबायम्ब कयते शं । ऩूजन शे तु नए फशीखाते रेकय उडशं ळुद्ध जर के छीॊटे दे कय ऩत्रलि कय रं। फशीखातं को रार लस्त्र त्रफछाकय तथा उव ऩय अषत एलॊ उच्िायण कयं । ऩुष्ऩ डारकय स्थात्रऩत कयं । फशीखाते के अफ क्रभळ दलात अथाात (Inkstand). ऩुष्ऩ आफद वे ऩूजन कयं । ऩूजन के वभम ॐ दे शरीत्रलनामकाम नभ्। भॊि जा तदऩ ु याडत योरी.

दशी. आरोक ळभाा प्रासिन कार वे फश बायतीम वॊस्कृ सत भं अनेक ऩला-त्मौशाय भनाए जाते शं । इन त्मौशायं भं कासताक भाव दल ू ाा.ऎन. रुई. भशारक्ष्भी. ऩुष्ऩ. िालर. वुऩायी. धूऩ. कुफेय आफद दे लीदे लताओॊ के त्रलसधलत ऩूजन का वॊकल्ऩ कयं । वलाप्रथभ फक अभालस्मा को दीऩालरी का त्रलळेऴ भशत्ल शं । क्मोफक गणेळ दीऩालरी खुसळमं का त्मौशाय शं । दीऩालरी के फदन ऴोडळभातृका ऩूजन ल नलग्रश ऩूजन कय अडम दे ली- बगलान गणेळ ल रक्ष्भी के ऩूजन का त्रलळेऴ भशत्ल शं । दे लताओॊ का ऩूजन कयं । इव फदन गणेळ जी फक ऩूजा वे ऋत्रद्ध-सवत्रद्ध फक प्रासद्ऱ दीऩक ऩूजन : दीऩक जीलन वे असान रुऩी अॊधकाय को शोती शं एलॊ रक्ष्भी जी के ऩूजन वे धन. वुऩायी. गोभती िक्र इत्माफद को ळास्त्रं भं रक्ष्भी के वशोदय बाई भाना गमा शं । इन दर ा लस्तुओॊ फक ु ब स्थाऩना कयने वे रक्ष्भी जी प्रवडन शोती शं । . दध ू . दीऩक.जोळी. सवॊदयू .अक्टू फय 2011 70 दीऩालरी का भशत्ल औय रक्ष्भी ऩूजन त्रलसध  स्लस्स्तक. भेले. लैबल. पर. कूभकूभ. इक्कीव अथला इनवे असधक दीऩक प्रज्लसरत कयके एक थारी भं यखकय कय ऩूजन कयने का त्रलधान शं । ऩूजन वाभग्री : भशारक्ष्भी ऩूजन भं केवय. अषत अत्रऩत ा कयके पर-पूर आफद अत्रऩत ा कयं औय प्रसतभा के दाफशनी ओय ळुद्ध घी का एक दीऩक एलॊ फाई औय तेर (सभठे तेर) का एक दीऩक जराएॊ। ऩत्रलि आवन ऩय फैठकय स्लस्स्त लािन कयं । गणेळ जी का स्भयण कय अऩने दाफशने शाथ भं गॊध. अगयफत्रत्तमाॊ. वॊऩत्रत्त फक प्रासद्ऱ शोती शं । दीऩालरी के फदन फकमे जाने लारे भॊिमॊि-तॊि का प्रमोग अत्मसधक प्रबाली भाना जाता शं । दीऩालरी अथाात् दीऩकं फक भारा। दीऩालरी के फदन प्रत्मेक व्मलवाम-नौकयी वे जुडे व्मत्रक्त अऩने व्मलामीक स्थान एलॊ घय ऩय भाॊ रक्ष्भी का त्रलसधलत ऩूजन कय धन फक दे ली रक्ष्भी वे वुख-वभृत्रद्ध फक काभना कयते शं । सभठाइमाॊ. भोती ळॊख. द्रव्म आफद रेकय गणेळ. दशी. नारयमर औय ताॊफे का करळ। रक्ष्भी का ऩूजन कयं । उवके ऩद्ळमात दयू कय जीलन भं सान के प्रकाळ का प्रतीक शं । दीऩक को इद्वय का तेजस्ली रूऩ भान कय इवकी ऩूजा कयनी िाफशए। ऩूजा कयते वभम अॊत्कयण भं ऩूणा श्रद्धा एलॊ ळुद्ध बालना यखनी िाफशए। दीऩालरी के फदन ऩारयलारयक ऩयॊ ऩयाओॊ के अनुवाय सतर के तेर के वात. दीऩालरी ऩूजन के वभम गणेळ एलॊ रक्ष्भी के वाथ त्रलष्णु जी का ऩूजन अलश्म कयं स्जस्वे घयभं स्स्थय रक्ष्भी का सनलाव शो वके। रक्ष्भी जी के दाफशनी ओय त्रलष्णु जी औय फाईं ओय गणेळ जी फक स्थाऩना कयनी िाफशए। स्स्थय रक्ष्भी फक काभना शे तु दस्षणालतॉ ळॊख. गॊगाजर. रंग आफद डारकय करळ कृ ऩा वदा फनी यशती शै । जीलन भं वपरता एलॊ आसथाक को रार कऩड़े वे ढककय एक जटा मुक्त नारयमर भौरी स्स्थसत भं उडनसत के सरए सवॊश रग्न अथला स्स्थय रग्न वे फाॊधकय यख दं । नलग्रश मॊि के ऩाव िाॊदी का सवक्का का िुनाल कय श्रीवूक्त. अषत. दध ू . ऩान. फताळे. औय उऩयोक्त ऩूजन के ऩद्ळमात घय फक भफशराएॊ अऩने शाथ वे वोने-िाॊदी के आबूऴण इत्माफद वुशाग फक वॊऩूणा वाभग्रीमाॊ रेकय भाॊ रक्ष्भी को अत्रऩत ा कयदं । अगरे फदन स्नान इत्माफद के ऩद्ळमात त्रलसध-त्रलधान वे ऩूजन के फाद ऩूजन त्रलसध : बूसभ को गॊगाजर इत्मादी वे ळुद्ध कयके आबूऴण एलॊ वुशाग फक वाभग्री को भाॊ रक्ष्भी का प्रवाद नलग्रश मॊि फनाएॊ। मॊि के वाथ शी ताॊफे के करळ भं वभजकय स्लमॊ प्रमोग कयं । एवा कयने वे भाॊ रक्ष्भी फक गॊगाजर. वुख. ग्मायश. ळशद. कराला(भौरी). कनकधाया स्तोि का ऩाठ कयं । औय रक्ष्भी गणेळ फक प्रसतभा स्थात्रऩत कय ऩॊिाभृत वे स्नान कयाकय स्लच्छ रार कऩड़े वे ऩोछ कय रक्ष्भी गणेळ को िॊदन. ळशद. पूर.

बू (ऩृ्ली) औय नीरा दे ली उनकी ियण वेला कय यशी थी। ऐवे भशात्भा धनलॊतरय रुऩी श्री त्रलष्णु को नायद जी ने बत्रक्त ऩूलक ा प्रणाभ फकमा औय शाथ जोड़कय उनकी स्तुसत कयने रगे। श्री नायद जी फोरे-शे दे लं के दे ल जगडनाथ बक्तं ऩुन् अलताय रेकय वबी रोकं को नीयोग करुॉ गा। भं वभम अलताय रेकय ‘आमुलद े ’ का उद्धाय करुॉ गा। इवभं वडदे श न कयो। फद्रतीम अध्माम: बगलान ् त्रलष्णु के उक्त लिनं को वुनकय नायद भुसन असत प्रवडन शुए औय शऴा वे फोरे-शे बगलन ् आऩ ‘धनलॊतरय ऩूजा’ की त्रलसध फताइए। ‘धनलॊतरय ऩूजा भं ऩय दमा कयने लारे दीनफडधु दमावागय जगत ् की यषा भं कौन वा ध्मान मा त्रलधान फकमा जाए ? उवका सनमभ शे बगलन ् भंने ऩृ्ली आफद वबी रोकं भं ऩमाटन ऩूजा को फकमा शं ? ऩूजा भं क्मा क्मा िीजं िाफशए ? शे तत्ऩय आऩ भुझे ळयणागत जानकय वडतुद्श कीस्जए। फकमा औय लशाॉ के सनलावी जनं को नाना योगं वे द्ु खी ऩामा। फकवी को ज्लय ने सगयामा शं . फकवने उव दे ल दे लेद्वय रोकं ऩय अनुग्रश कयने की इच्छा वे कृ ऩा ऩूलक ा मश वफ भुझे फताइए। श्री बगलान ् ने कशा. प्रेग आफद वे मुक्त वस्डनऩात योग औय प्रभेशाफद योगं वे घेये गमे शं । इव प्रकाय रोग अनेक योगं वे ग्रस्त औय द्ु खी शं । उडशं दे खकय भुझे फड़ा द्ु ख शुआ औय फायम्फाय भंने सिडता की। भंने वोिा फक मे रोग कैवे नीयोग शंगे औय प्रवडन शंगे ? इवी सिडता वे भन भं व्माकुर शोकय भं आऩकी ळयण भं आमा शूॉ। शे त्रलद्वात्भन ् ळयणागत बूम्माफद रोकं की आऩ यषा कीस्जमे। िैरोक्म भं आऩके असतरयक्त इनका कोई यषक नशीॊ शं । बगलान ् श्री त्रलष्णु नायद जी के उक्त लिनं को वुनकय गम्बीय लाणी वे फोरे-शे भुने आऩ बम न द्ु खी दे खा। मश दे खकय नायद जी सिस्डतत शुए औय लशाॉ कीस्जमे। भं ‘आफद धनलॊतरय’ इडद्र वे आमुलद े प्राद्ऱ कय शो यशे थे। मश दे खकय नायद जी की सिडता औय फढ़ कासताक भाव. शस्त नषि के वे स्लगा जा ऩशुॉि।े स्लगा भं इडद्र आफद दे लता बी योगी गई। सिडता कयते शुए ले लैकुण्ठ भं ऩशुॉिे। लैकुण्ठ भं नायद जी ने ळॊख िक्र अभृत करळ धायी औय अबम शस्त धनलॊतरय त्रलष्णु को दे खा। श्री (रक्ष्भी). कृ ष्ण ऩष. फकडतु इवे वुनने ऩय बी शभं तृसद्ऱ नशीॊ शुई। अत् श्री धनलॊतरय का भाशात्म्म असधक त्रलस्ताय वे फताइए। भुसनश्रेद्ष वुत जी ने कशा-शे भुसनमं! आऩ ऩाऩत्रलनासळनी कथा को वुसनए। इव कथा को वुनने वे वबी योगं का नाळ शोता शं : एक वभम नायद जी वबी रोगं के कल्माण की इच्छा वे वभुद्र द्रीऩ ऩलात वफशत वम्ऩूणा ऩृ्ली का भ्रभण कय यशे थे। लशाॉ उडशंने वबी रोगं को त्रलत्रलध योगं वे सिॊतन जोळी.ऎन.वॊग्रशणी औय ऩाण्डु योगाफद वे ऩीफड़त शं । कोई लातयोगं वे ऩीफड़त क्मा शं ? उवका पर क्मा शं ? फकव वभम.अक्टू फय 2011 71 श्री धनलॊतरय व्रत कथा  प्रथभ अध्माम वनकाफदक भुसनमं ने वूत जी वे कशा-शे वूत भशाभुने! आऩने बगलान ् धनलॊतरय की ऩूजा-त्रलसध का त्रलस्ताय ऩूलक ा लणान फकमा. तो फकवी को याज मक्ष्भा ने धय दफामा। कोई असतवाय. स्लस्स्तक. िमोदळी.जोळी शं । कोई पोड़े . योगनासळनी कथा’ कशता शूॉ। . गुरुलाय. सगल्टी.शे भुने तुभने रोकोऩकाय की इच्छा वे ऩूछा शं । अतएल तुभवे ‘ऩाऩनासळनी. द्वाव. खाॉवी.

कुद्ष.ऩशरे अलडतीऩुय (उज्जैन) भं ‘धनगुद्ऱ’ नाभक याजा धभाभागा वे प्रजा का ऩारन कयने लारा शुआ था। लश वबी रोगं का प्माया. आऩ भं सित्त रगाकय आऩका व्रत करुॉ गा। आऩ भुझे रक्ष्भी दीस्जए. प्रात् कार उठकय ळौि-भुख भाजान आफद वे सनलृत्त शोकय स्नान कये । ळुद्ध लस्त्र आफद धायण कय गुरु वे प्राद्ऱ उऩदे ळानुवाय बगलान ् धनलॊतरय का ध्मान कये । सनम्न भडि ऩढ़कय व्रत का प्रायम्ब कये : करयष्मासभ व्रतॊ दे ल त्लद् बक्तस्त्लत ् ऩयामण्। सश्रमॊ दे फश जमॊ दे फश. वालधान सित्त वे वुसनए। कासताक कृ ष्ण िमोदळी के ळुब फदन. आयोग्मॊ दे फश भे प्रबो अथाात ् शे दे ल भं आऩका बक्त शूॉ. खाॉवी औय द्वाव वे ऩीफड़त शुए। उनको बी योग वे छुटकाया न सभरा। याजा औय यानी अऩने ऩुिं को योगाता दे खकय अत्मडत द्ु खी शुए। स्त्री-ऩुिं को योग के वागय वे भुक्त कयाने की इच्छा वे सिस्डतत याजा घोय लन को िरा गमा। लन भं याजा ने भशाभुसन ‘बयद्राज’ को फैठे दे खा। याजा ने उडशं बत्रक्तऩूलक ा प्रणाभ फकमा औय अऩना द्ु ख फतामा। भशाभुसन बयद्राज वे याजा ने योग-कद्श सनलायण शे तु उऩाम ऩूछा। योगं वे भुक्त शो जाता शं । याजा ने बयद्राज भुसन वे उक्त फात वुनकय उनवे ऩूछा-शे भशात्भन ् आऩ कृ ऩा कय उनकी आयाधना त्रलसध भुझे बरी-बाॉसत फताइए। ऋत्रऴ बयद्राज ने कशा-शे भशाबाग याजन ् उव त्रलसध को भं कशता शूॉ. आयोग्म दीस्जए। दे ल धनलॊतरय वे उक्त प्राथाना कय. वदािारयणी थी। उवने बी ऩसत के भॊगर की आकाॊषा वे अनेक सनमभ. जया (फुढाऩा) तथा भृत्मु के बम वे िस्त शो यशा शूॉ। शे दे ल-दे ल ळयण भं आए शुए भेयी अफ आऩ यषा कयं । वूि फडधन के फाद . ऩसतव्रता. प्रीशा.शे बगलन ् कृ ऩमा त्रलस्ताय ऩूलक ा फताइए फक फड़ फागी धनगुद्ऱ कशाॉ शुआ औय आऩके दळान की प्रासद्ऱ के सरए उवने कौनवा व्रत फकमा था औय शे दमावागय नायामण उवने आऩका ऩूजन क्मं फकमा था? श्री बगलान ् ने कशा. उदायसित्त था। उवे षमयोग शो गमा। उववे लश फदन-यात ऩीफड़त शोने रगा। ऩीड़ा की सनलृत्रत्त के सरए उवने जऩ.अक्टू फय 2011 72 धनगुद्ऱ याजा के सनसभत्त कासताक कृ ष्ण िमोदळी बयद्राज भुसन ने कशा-शे याजन ् तुम्शाया लृत्ताडत गुरुलाय शस्त नषि के वभम भं यात्रि के प्रथभ प्रशय भं भंने जान सरमा। तुभ असत ळीघ्र भशात्रलष्णु धनलॊतरय की गुद्ऱ धन के वभान ‘धनलॊतरय’ नाभ वे अलतीणा शोता शूॉ। ळयण भं जाओ। भनुष्म उनके दळान भाि वे घोय दस् ु तय अतएल लश फदन वॊवाय भं ‘धनिमोदळी’ (धनतेयव) नाभ वे प्रसवद्ध शोगा। मश सतसथ वबी काभनाओॊ को दे ने लारी शं । नायद जी ने ऩूछा. वकुटु म्फॊ दमासनधे॥ आसधव्मासधजया भृत्मु बमादस्भादशसनाळभ ्। ऩीड्मभानॊ दे लदे ल यष भाॊ ळयणागतभ ्॥ अथाात ्-शे धडलडतये शे भशाबाग आऩ जया (फुढाऩा) औय योग के सभटाने लारे शं । इवसरए शे दमासनधे आऩ इव वूिरुऩ वे वकुटु म्फ भेयी यषा कीस्जमे। भं फदन-यात आसध (भानसवक द्ु ख) औय व्मासध (योग). ऩय इववे बी याजा नीयोग न शुआ औय अडत भं लश स्त्री बी अतीवाय योग वे योसगणी शो गई। शे भुने उव याजा वे उव ऩसतव्रता स्त्री के ऩाॉि ऩुि शुए। ले क्रभळ् आभलात. उनकी ऴोडळोऩिाय वे ऩूजा कये । ऩूजा कयने के फाद तेयश धागं का वूि रेकय तेयश गाॉठ लारा ‘दोयक’ फनाए। इव ‘दोयक’ की बत्रक्तऩूलक ा ऩूजा कये औय सनम्न भडि ऩढ़कय ऩुरुऴं के दाफशने शाथ भं तथा स्स्त्रमं के फाॉएॉ शाथ भं फाॉधे: धडलडतये भशाबाग जयायोगसनलायक। दोयरुऩेण भाॊ ऩाफश. शोभ. ऩयडतु नीयोग न शुआ। तफ लश स्खडन शोकय त्रलराऩ कयने रगा। याजा की स्त्री त्रिरोक भं प्रसवद्ध. नाना प्रकाय की औऴसधमाॉ की. त्रलजम दीस्जए. उऩलाव आफद फकए.

जात्त धडलडतये प्रबो। गृशाणाघ्मं भमा दत्तॊ. भानलानाॊ फशताम ि॥ दद्श ु ानाॊ सनधनामाम. लश ऩूणा शोगी। इवके असतरयक्त बी भं लय दे ता शूॉ। उवे वालधान शोकय वुनो : तुभने स्जव प्रकाय मश व्रत फकमा शं । इवी तयश जो व्रत कयं गे. तो वफवे ऩशरे स्त्री ऩुिं वफशत भुझे आयोग्म दीस्जए। मश प्राथाना वुनकय बगलान ् ने कशा-याजन ् तुभने जो प्राथाना की शं . जात्रलिी डारकय इव सवद्ध नैलेद्य को बगलान ् को अत्रऩत ा कये । आधा प्रवाद लेदस ब्राह्मण को अत्रऩात कये औय आधा स्त्री ऩुिाफद वफशत स्लमॊ प्रवाद स्लरुऩ ग्रशण कये । शे याजन ् इव त्रलसध वे व्रत कयने वे वाषात ् धनलॊतरय स्लमॊ प्रकट शोकय तुम्शाया अबीद्श सवद्ध कयं गे। इतनी कथा वुनाकय बयद्राज भुसन ने त्रलश्राभ सरमा। तृतीम अध्माम: वूत जी फोरे-शे भुसन लयं याजा धनगुद्ऱ ने भुसन की आसा ऩाकय उनके कशे अनुवाय तेयश लऴा ऩमाडत बत्रक्त ऩूलक ा व्रत फकमा। जडभ भृत्मु जया आफद योगं वे ऩीफड़त शूॉ। गजान के वभान गम्बीय लाणी वे भुस्कुयाते शुए कशा-शे भशा याज ठीक शं . भं तुम्शायी स्तुसत वे प्रवडन शूॉ। अफ शभवे लय भाॉग रो। याजा फोरे-शे दे ल मफद आऩ प्रवडन शं . आमुलद े ासबलृद्धमे। जया भयण नाळाम. आमुलद े की असबलृत्रद्ध के सनसभत्त. नभस्ते जगदात्भने॥१॥ प्रऩडनॊ ऩाफश दे लेळ जगदानडद दामक। दमा सनधे भशा दे ल िाफश भाभऩयासधनभ ्। जडभ भृत्मु जयायोगै्. ऩीफड़तॊ वकुटु स्म्फनभ ्॥२॥ अथाात ्. भशा दे ल आऩ शुए शं । भं आऩको अघ्मा प्रदान कयता शूॉ। इवे स्लीकाय भुझ ळयणागत अऩयाधी की यषा कयं । भं कुटु म्फ वफशत अघ्मा प्रदान कयने के फाद ब्राह्मण को फामन दान बगलान ् धनलॊतरय ने मश स्तुसत वुनकय भेघ कीस्जए। कये । फामन दान के सरए गेशूॉ के आटे भं दध ू . उनको आयोग्म प्रदान कय भं उडशं अऩनी स्स्थय बत्रक्त दॉ ग ू ा। वूत जी फोरे-बगलान ् धनलॊतरय मश कशकय एक फदन व्रत वभासद्ऱ के अलवय ऩय वाषात ् अडतधाान शो गए औय याजा धनगुद्ऱ अऩनी ऩुयी भं रौट धनलॊतरय प्रकट शुए। याजा ने वाद्शाॊग प्रणाभ कय उनकी गमा। याजा सनत्म स्त्री-ऩुिं वफशत अभृत ऩास्ण धनलॊतरय स्तुसत की। बत्रक्त ऩूलक ा की गई स्तुसत स्लीकाय कय की स्तुसत कयने रगा। उवने ऩृ्ली रोक भं नाना प्रकाय बगलान ् धनलॊतरय ने कशा-शे याजन ् अफ तुभ डयो भत. कऩूय. दे ल दे ल कृ ऩा कय॥ अथाात ्. नभो ब्रह्माण्ड नामक। वुयावुयायासधताॊघ्रे. रंग.शे दे ल दे ल. के वुख बोगे औय अडत भं बगलान ् धनलॊतरय की कृ ऩा वे तुम्शाया भॊगर शोगा। तुभ शभवे लय भाॉगो। याजा ने मश भोष ऩद प्राद्ऱ फकमा। इव प्रकाय भंने तुभ रोगं को वुनकय उडशं ऩुन् वाद्शाॊग प्रणाभ फकमा औय उनकी स्तुसत की : बगलान ् धनलॊतरय की जडभोत्वल कथा वुनाई। इवके वुनने वे वबी ऩाऩं का नाळ शोता शं । . नभो लेदैक गोिय । आमुलद े स्लरुऩाम. भनुष्मं के फशत तथा जया भयण का नाळ कयने के सरए अलतरयत धडलडतये नभस्तुभ्मॊ. ठीक शं . घी डारकय ऩकाए। ऩकने ऩय ळक्कय डारे। केवय. दमा कायी धनलॊतरय! आऩ रोकाऩकाय के सरए. इरामिी.अक्टू फय 2011 73 ‘दे ल दे ल धनलॊतरय’ को बत्रक्त ऩूलक ा ‘अघ्मा’ सनलेदन कये । अघ्मा प्रदान कयने का भडि इव प्रकाय शं : जातो रोक फशताथााम.शे धडलडतये ब्रह्माण्ड नामक आऩको नभस्काय! आमुलद े स्लरुऩ जगत ् के अडतमााभी आऩको नभस्काय। शे जगत ् के वुखदामी दे ल दे ल दमा वागय.

91+ 9238328785 . फपय तीन फाय श्री श्री श्री. फपय दो फाय श्री श्री सरखे. गल्रा (कैळ फोक्ळ) मा धन यखने के स्थान ऩय कुभकुभ मा अद्शगॊध वे अऩने दाशीने श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री ॐ श्रीॊ रक्ष्भी दै व्मे नभ् शाथ की अनासभका उॊ गरी वे सरखने ऩय बी मश अत्मासधक राबप्रद यशता शं ।  उक्त तयीके वे वद्ऱ श्री को िाॊफद मा वोने के ऩत्तय ऩय मॊि स्लरुऩ बी फनामा वकता शं । ताॊफे िाॊदी के ऩत्तय भं फनाते वभम ध्मान यखे की ऩत्तय की वतश ऩय श्री उऩय की ओय उबयी शुई शो. गल्रा (कैळ फोक्ळ) आफद धन यखने के स्थान ऩय अनाभीका उॊ गरी वे वद्ऱ त्रफॊदी फनाते शं । कई दक ु ानदाय मा व्मलवामीक स्थानो ऩय बी उक्त तयीके वे वद्ऱ त्रफॊदी फनाते शं । वद्ऱ श्री वे भाॊ रक्ष्भीजी प्रवडन शोती शं । क्मोकी श्री का वयर अथा शं वुख वभृत्रद्ध-वॊऩडनता। रक्ष्भी मॊि श्री मॊि (रक्ष्भी मॊि) भशारक्ष्भमै फीज मॊि लैबल रक्ष्भी मॊि श्री मॊि (भॊि यफशत) भशारक्ष्भी फीवा मॊि कनक धाया मॊि श्री मॊि (वॊऩण ू ा भॊि वफशत) रक्ष्भी दामक सवद्ध फीवा मॊि श्री श्री मॊि (रसरता भशात्रिऩुय वुडदमै श्री मॊि (फीवा मॊि) रक्ष्भी दाता फीवा मॊि श्री भशारक्ष्भमं श्री भशामॊि) श्री मॊि श्री वूक्त मॊि रक्ष्भी फीवा मॊि अॊकात्भक फीवा मॊि श्री मॊि (कुभा ऩृद्षीम) रक्ष्भी गणेळ मॊि ज्मेद्षा रक्ष्भी भॊि ऩूजन मॊि मॊि के त्रलऴम भं असधक शे तु वॊऩका कयं । GURUTVA KARYALAY. वद्ऱश्री के नीिे अऩने ईद्श का नाभ सरखे मा ॐ श्रीॊ रक्ष्भी दै व्मे नभ् सरखे। फपय धुऩदीऩ.अक्टू फय 2011 74 वद्ऱ श्री का िभत्काय  सिॊतन जोळी दीऩालरी के फदन फशी-खाते के ऩूजन के वभम फशी-खाते भं उऩयोक्त क्रभभं रार यॊ ग की करभ म ऩेन वे श्री सरखे। ऩशरे एक फाय श्री सरखे. Call us: 91+ 9338213418. इव प्रकाय क्रभ को फढाते जाए आखीय भं वात फाय श्री श्री श्री श्री श्री श्री श्री सरखे. नीिे की ओय खुदी शुई न शं।  वद्ऱ श्री की जगश ऩय अनेक रोग श्री मा रक्ष्भी भॊि का उच्िायण कयते शुए. अऩनी अरभायी. ऩुष्ऩ आफद वे उवका ऩूजन कयं । उक्त प्रमोग कयने वे आनेलारा नमा लऴा व्मलवाम भं आसथाक द्रत्रद्श वे वुख. वभृत्रद्ध रेकय आमेगा औय अत्मासधक राबदामक यशे गा। स्जन रोगो के ऩाव रक्ष्भी (धन) स्स्थय नशीॊ यशता। रक्ष्भी आने वे ऩूला जाने को तत्ऩय शोती शं । उडशं अऩनी जेफ भं मा भनीऩवा भं एक स्पेद कागज ऩय उऩयोक्त तयीके वे श्री सरख कय यखना िाफशए। वद्ऱ श्री सरखने वे रक्ष्भी रम्फे वभम तक स्स्थय यशने के मोग फनते शं लश नमे स्रोत वे धन राब के बी प्रफर मोग फनते शं । (अद्शगॊध की स्माशी फनाकय अनाय की करभ वे सरखना असत उत्तभ यशता शं ।)  उक्त तयीके वे वद्ऱ श्री को अऩनी अरभायी.

ऩरयश्रभ कयने के उऩयाॊत अऩनी आसथाक स्स्थभं उडनसत एलॊ रक्ष्भी को स्स्थय कयने शे त. दशी. तनाल. ऩरयश्रभ वे काभामे शुले धन वे स्लमॊ का आत्भत्रलद्वाव फढता शं एलॊ वभाज भं प्रसतद्षा औय भान वम्भान बी वयरता वे प्राद्ऱ शो जाता शं । जो व्मत्रक्त धासभाक त्रलिाय धायाओॊ वे जुडे शो लश इद्वय भं त्रलद्वाय यखते शुले स्लमॊ फक भेशनत. ऩरयश्रभ के फर ऩय कभामे शुले धन को फश वच्िा वुख भानते शं । धभा भं आस्था एलॊ त्रलद्वाव यखने लारे व्मत्रक्त के सरमे भेशनत.75 अक्टू फय 2011 स्पफटक श्रीमॊि का ऩूजन  सिॊतन जोळी आज के बौसतक मुग भं अथा (धन) जीलन फक भुख्म आलश्मक्ताओॊ भं वे एक शै । धनाढ्म व्मत्रक्तओॊ जीलनळैरी को दे खकय प्रबात्रलत शोते शुले वाधायण व्मफक फक बी काभना शोती शं . ऩरयश्रभ वे कभाई कयके धन अस्जात कयने के फजाम कुछ रोग अल्ऩ वभम भं ज्मादा कभाने फक भानसवकता के कायण कबी-कबी गरत तयीकं अऩनाते शं । स्जवके पर स्लरुऩ एवे रोग धन का लास्तत्रलक वुख बोगने वे लॊसित यश जाते शं औय योग.ु श्री मॊि के ऩूजन का उऩाम अऩनाकय जीलन भं फकवी बी वुख वे लॊसित नशीॊ यश वकते. ळशद. भानसवक अळाॊसत जेवी अडम वभस्माओॊ वे ग्रस्त शो जाते शं । जशाॊ गरत तयीकं वे कभामे शुले धन के कायण वभाज एवे रोगो को शीन बाल वे दे खते शं । जफफक भेशनत.10 रुऩमे का सवक्का नशीॊ)  श्री मॊि स्थात्रऩत कयने लारी प्रेट भं श्रीमॊि ऩय स्पफटक फक भारा को िायं ओय घुभाते शुले स्थात्रऩत कयं ।   श्री मॊि के उऩय भौरी का टु कडा 3-5 फाय घुभाते शुले अत्रऩत ा कयं । श्री मॊि के उऩय वुखा अद्श गॊध सछडकं। . फक उवके ऩाव बी इतना धन शो फक लश अऩने जीलन भं वभस्त बौसतक वुखो को बोग ने भं वभथा शं। एवी स्स्थभं भेशनत. घी औय ळक्कय (गुड़) अथाात ऩॊिाभृत फनाकय स्नान कयामे।  स्नान के ऩद्ळमात उवे रार कऩडे वे ऩोछ दं ।  श्री मॊि को फकवी िाॊदी मा ताॊफे फक प्रेट भं स्थाऩीत कयं ।  श्री मॊि के नीिे 5 रुऩमे मा 10 रुऩमे का नोट यखदं । (5. उडशं अऩने जीलन भं कबी धन का अबाल नशीॊ यशता। उनके वभस्त कामा वुिारु रुऩ वे िरते शं । रक्ष्भी कृ ऩा प्रासद्ऱ के सरए श्रीमॊि का वयर ऩूजन त्रलधान स्जवे अऩना कय वाधायण व्मत्रक्त त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । इव भं जया बी वॊळम नशीॊ शं । श्रीमॊि का ऩूजन यॊ क वे याजा फनाने लारा एलॊ व्मत्रक्त फक दरयद्रता को दयू कयने लारा शं ।  अऩने ऩूजा स्थान भं प्राण-प्रसतत्रद्षत श्रीमॊि को ऩूजन के सरमे स्थात्रऩत कयं । (प्राण-प्रसतत्रद्षत श्रीमॊि फकवी बी मोग्म त्रलद्रान ब्राह्मण मा मोग्म जानकाय वे सवद्ध कयलारे)  श्री मॊि को प्रत्मेक ळुक्रलाय को दध ु .

वौबाग्म औय वभृत्रद्ध फक काभना कयं ।  प्रसत ळुक्रलाय उऩयोक्त ऩूजन कयने वे जीलन भं फकवी बी प्रकाय का आसथाक वॊकट नशीॊ आता।  मदी आसथाक वॊकट वे ऩये ळान शं तो श्री मॊि के ऩूजन वे वभस्त प्रकाय के आसथाक वॊकट धीये -धीये दयू शो जाते शं । नोट: श्री मॊि के के नीिे यखा शुला नोट प्रसत एक-दो भाव भं एक फाय फकवी दे ली भॊदीय भं बेट कय दं । (राब प्राद्ऱ शोने ऩय फदरे)  प्रथन फाय यखा शुला नोट श्री मॊि के ऩूजन वे राब शोने के फाद शी फदरे। राब प्राद्ऱ शोना ळुरु शोने तक नोट को यखे यशं ।  राब प्राद्ऱ शोना ळुरु शोने के ऩद्ळमात प्रसत भाश भं एक फाये प्रसतऩदा(एकभ) को ऩुयाना नोट फदर कय नमे नोट यखं।  जेवे-जेवे राब प्राद्ऱ शोने रगे आऩ के अनुकूर कामा शो ने रगे तो नोट फक यकभ फढाते यशं । असधक राब प्राद्ऱ शोता शं । उदाशण: मफद ऩशरे 5 रुऩमे का नोट यखा शं तो उस्वे राब शोने के ऩद्ळमात नोट फदरते शुले 10 रुऩमे का नोट यखे। 10 रुऩमे का नोट यखने वे राब शोने के ऩद्ळमात नोट फदरते शुले 20 रुऩमे का नोट यखे। इवी प्रकाय नोट को फदते यशं इस्वे असधक राब प्राद्ऱ शोता शं । असधक राब प्रासद्ऱ शे तु वाभाडम सनमभ: ऩूजन के फदन ब्रह्मिमा का ऩारन कयं । ऩूजन के फदन वुगॊसधत तेर. .एन.com.in. 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva. अद्श रक्ष्भी इत्मादी स्तोि फक केवेट वीडी सभरती शं उवका श्रलण कयं ।  ऩूजा भं जाने-अनजाने शुई गरती के सरए रक्ष्भीजी का स्भयण कयते शुले षभा भाॊगकय वुख. इि का प्रमोग कयने वे फिे। त्रफना प्माज-रशवून का ळाकाशायी बोजन ग्रशण कयं । ळुक्रलाय वपेद सभद्षान बोजन भं ग्रशण कयं ।  क्मा आऩके फच्िे कुवॊगती के सळकाय शं ?  क्मा आऩके फच्िे आऩका कशना नशीॊ भान यशे शं ?  क्मा आऩके फच्िे घय भं अळाॊसत ऩैदा कय यशे शं ? घय ऩरयलाय भं ळाॊसत एलॊ फच्िे को कुवॊगती वे छुडाने शे तु फच्िे के नाभ वे गुरुत्ल कामाारत द्राया ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त लळीकयण कलि एलॊ एव. तो वॊऩका इव कय वकते शं । GURUTVA KARYALAY 92/3.76 अक्टू फय 2011  मफद वॊबल शो तो रार ऩुष्ऩ अत्रऩत ा कयं । (कभर. gurutva_karyalay@yahoo. BANK COLONY. अद्श रक्ष्भी स्तोि इत्मादी का ऩाठ कयं मफद ऩाठ कयने भं आऩ अवभथा शोतो फाजाय भं श्रीवूक्त. (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418. भॊदाय(जावूद) मा गुराफ शो तो उत्तभ)  धूऩ-दीऩ इत्मादी वे त्रलसधलत ऩूजन कयं ।  उऩयोक्त त्रलधन प्रसत ळुक्रलाय कयं एलॊ अडम फदन केलर धूऩ-दीऩ कयं ।  फकवी एक रक्ष्भी भॊि का एक भारा भॊि जऩ कयं । श्रीवूक्त.एन.फडब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय भं स्थात्रऩत कय अल्ऩ ऩूजा. BRAHMESHWAR PATNA. ऩयफ्मूभ.karyalay@gmail. त्रलसध-त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मफद आऩ तो आऩ भॊि सवद्ध लळीकयण कलि एलॊ एव.फडब्फी फनलाना िाशते शं . BHUBNESWAR-751018.

भधुवूदन जी फोरे शं इडद्र ! (रक्ष्भी प्रासद्ऱ के सरमे) तुभ मश रक्ष्भीकलि ग्रशण कयो। मश वभस्त द्ु खं का त्रलनाळक. इव वलैद्वमाप्रद कलि के ब्रह्मा ऋत्रऴ शं .वफ ओय वे वदा भेया ऩारन कयो। लत्व. ऩद्मालती दे ली भेये भस्तक की यषा कयो। शरयत्रप्रमा कण्ठ की यषा कयो। रक्ष्भी नासवका की यषा कयो। कभरा नेि की यषा कयो। केळलकाडता केळं की. उवे‍ एक‍ कयोड़‍ जऩ‍ कयने‍ ऩय‍ बी‍ भडि‍सवत्रद्धदामक‍नशीॊ शोता। . फस्ल्क‍प्रत्मेक‍जडभ भं‍छामा‍की‍बाॉसत‍वदा‍ उवके‍वाथ‍रगी‍यशती‍शं ।‍जो‍भडदफुत्रद्ध‍इव‍कलि‍को‍त्रफना‍जाने‍ शी रक्ष्भी‍ की‍ बत्रक्त‍ कयता‍ शं . उव वभम भैनं इवे ब्रह्मा को फदमा था। स्जवे धायण कयके ब्रह्मा त्रिरोकी भं श्रेद्ष औय वम्ऩूणा ऐद्वमं के बागी शुए थे। दे लयाज.भेये वलांग की वदा यषा कयो। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा.77 अक्टू फय 2011 वला ऐद्वमा प्रद-रक्ष्भी-कलि श्री भधुवूदन उलाि:- गृशाण कलिभ ् ळक्र वलाद्ु खत्रलनाळनभ ्। ऩयभैद्वमाजनकॊ वलाळिुत्रलभदा नभ ्।। ब्रह्मणे ि ऩुया दत्तभ ् वॊवाये ि जरप्रुते। मद् धृत्ला जगताॊ श्रेद्ष् वलैद्वमामुतो त्रलसध्।। फबूलुभन ा ल् वले वलैद्वमामत ु ो मत्। वलैद्वमाप्रदस्मास्म कलिस्म ऋत्रऴत्रलासध।। ऩस्ङ्क्तश्छडदद्ळ वा दे ली स्लम ऩद्मारमा वुय। सवद्धै द्वमाजऩेष्लेल त्रलसनमोग् प्रकीसतात।। मद् धृत्ला कलिॊ रोक् वलाि त्रलजमी बलेत ्।। भूर कलि ऩाठ: भस्तकभ ् ऩातु भे ऩद्मा कण्ठॊ ऩातु शरयत्रप्रमा। नासवकाभ ् ऩातु भे रक्ष्भी् कभरा ऩातु रोिनभ ्।। केळान ् केळलकाडता ि कऩारभ ् कभरारमा। जगत्प्रवूगण् ा डमुग्भॊ स्कडधॊ वम्ऩत्प्रदा वदा।। ॐ श्रीॊ कभरलासवडमै स्लाशा ऩृद्षॊ वदालतु। ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै स्लाशा लष् वदालतु।। ऩातु श्रीभाभ कॊकारॊ फाशुमुग्भॊ ि ते नभ्।। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्म्मै नभ् ऩादौ ऩातु भे वॊततभ ् सियभ ्। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ नभ् ऩद्मामै स्लाशा ऩातु सनतम्फकभ ्।। ॐ श्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा वलांगॊ ऩातु भे वदा। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा भाॊ ऩातु वलात्।। इव भॊि के ऩाठ वे भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा प्राद्ऱ शोती शै । परश्रुसत: इसत ते कसथतभ ् लत्व वलावम्ऩत्कयभ ् ऩयभ ्। वलैद्वमाप्रदभ ् नाभ कलिभ ् ऩयभाद्भत ु भ ्।। गुरुभभ्मच्मा त्रलसधलत ् कलिभ ् ळयमेत्तु म्। कण्ठे ला दस्षणे फाॊशौ व वलात्रलजमी बलेत ्।। भशारक्ष्भीगृश ा भ ् तस्म न जशासत कदािन। तस्म छामेल वततभ ् वा ि जडभसन जडभसन।। इदभ ् कलिभसात्ला बजेल्रक्ष्भीॊ वुभडदधी्। ळतरषप्रजद्ऱोऽत्रऩ न भडि् सवत्रद्धदामक्।। ।।इसत श्रीब्रह्मलैलते इडद्रभ ् प्रसत शरयणोऩफदद्शभ ् रक्ष्भीकलिभ ्।। (गणऩसतखण्ड २२।५-१७) बालाथा्. जगज्जननी दोनं कऩोरं की औय वम्ऩत्प्रदा वदा स्कडध की यषा कयो। ॐ श्रीॊ कभरलासवडमै स्लाशा भेये ऩृद्षॊ बाग का वदा ऩारन कयो। ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै स्लाशा: लष्स्थर को वदा वुयस्षत यखे। श्री दे ली को नभस्काय शं :आऩ भेये कॊकारॊ तथा दोनं बुजाओॊ को फिामे। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ रक्ष्म्मै नभ् सियकार तक भेये ऩैयं का ऩारन कयो। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ नभ् ऩद्मामै स्लाशा. स्लमॊ ऩद्मारमा रक्ष्भी दे ली शं औय सवद्धै द्वमा के जऩं भं इवका त्रलसनमोग कशा गमा शं । इव कलि के धायण कयने वे रोग वलाि त्रलजमी शोते शं । . कभरारमा कऩार की. ऩयभ ऐद्वमा का उत्ऩादक औय वम्ऩूणा ळिुओॊ का भदान कयने लारा शं । ऩूलक ा ार भं जफ वाया वॊवाय जरभग्न शो गमा था. ऩस्ङ्क्त छडद शं . इव प्रकाय‍ भंने‍ तुभवे‍ इव‍ वलैद्वमाप्रद‍ नाभक‍ ऩयभोत्कृ द्श‍ कलि‍ का‍ लणान‍ कय‍ फदमा।‍ मश ऩयभ‍ अद्भत ु ‍ कलि‍ वम्ऩूण‍ा वम्ऩत्रत्तमं‍को‍दे ने‍ लारा‍शं ।‍जो‍भनुष्म‍त्रलसधऩूलक ा ‍गुरु फक अिाना‍ कयके‍इव‍कलि‍को‍गरे‍ भं‍ अथला‍दाफशनी‍बुजा‍ऩय‍धायण‍कयता‍ शं . लश‍वफको‍जीतने लारा‍शो‍जाता‍शं ।‍भशारक्ष्भी‍कबी‍उवके‍घय‍ का‍त्माग‍नशीॊ‍कयती.सनतम्फ बाग की यषा कयो। ॐ श्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा.

in.com. E-mail Us:. .Vedic astrologi.karyalay@gmail.751 018.gurutva. Snalysis Report Includeing with Popular Treatises Of Astrology We are Creat analysis Report Includeing with Different Types of Popular Astrology Treatises and Systems. varahamihira GURUTVA KARYALAY Bhubaneswar. gurutva_karyalay@yahoo. Call Us : 91+ 9338213418. bhrigu shastra. Lalkitab.अक्टू फय 2011 78 भशारक्ष्भी कलि नायामण उलाि ऩद्मा भाॊ दस्षणे ऩातु नैऋात्माॊ श्रीशरयत्रप्रमा॥१०॥ वला वम्ऩत्प्रदस्मास्म कलिस्म प्रजाऩसत्। ऩद्मारमा ऩस्द्ळभे भाॊ लामव्माॊ ऩातु श्री् स्लमभ ्। ऋत्रऴश्छडदद्ळ फृशती दे ली ऩद्मारमा स्लमभ ्॥१॥ उत्तये कभरा ऩातु ऐळाडमाॊ सवडधुकडमका॥११॥ धभााथक ा ाभभोषेऴु त्रलसनमोग् प्रकीसतात्। नायामणेळी ऩातूध्लाभधो त्रलष्णुत्रप्रमालतु। ऩुण्मफीजॊ ि भशताॊ कलिॊ ऩयभाद्भत ु भ ्॥२॥ वॊततॊ वलात् ऩातु त्रलष्णुप्राणासधका भभ॥१२॥ श्रीॊ भे ऩातु कऩारॊ ि रोिने श्रीॊ सश्रमै नभ्॥३॥ वलैद्वमाप्रदॊ नाभ कलिॊ ऩयभाद्भत ु भ ्॥१३॥ ॐ ह्रीॊ कभरलासवडमै स्लाशा भे ऩातु भस्तकभ ्। इसत ते कसथतॊ लत्व वलाभडिौघत्रलग्रशभ ्। ॐ श्रीॊ सश्रमै स्लाशे सत ि कणामुग्भॊ वदालतु। वुलणाऩलातॊ दत्त्ला भेरुतुल्मॊ फद्रजातमे। ॐ श्रीॊ ह्रीॊ क्रीॊ भशारक्ष्म्मै स्लाशा भे ऩातु नासवकाभ ्॥४॥ मत ् परॊ रबते धभॉ कलिेन ततोऽसधकभ ्॥१४॥ ॐ श्रीॊ कृ ष्णत्रप्रमामै ि दडतयडध्रॊ वदालतु॥५॥ कण्ठे ला दस्षणे लाशौ व श्रीभान ् प्रसतजडभसन॥१५॥ ॐ श्रीॊ ऩद्मारमामै ि स्लाशा दडतॊ वदालतु। ॐ श्रीॊ नायामणेळामै भभ कण्ठॊ वदालतु। ॐ श्रीॊ केळलकाडतामै भभ स्कडधॊ वदालतु॥६॥ ॐ श्रीॊ ऩद्मसनलासवडमै स्लाशा नासबॊ वदालतु। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ वॊवायभािे भभ लष् वदालतु॥७॥ गुरुभभ्मच्मा त्रलसधलत ् कलिॊ धायमेत ् तु म्। अस्स्त रक्ष्भीगृश ा े तस्म सनद्ळरा ळतऩूरुऴभ ्। दे लेडद्रै द्ळावुयेडद्रै द्ळ वोऽिध्मो सनस्द्ळतॊ बलेत ्॥१६॥ व वलाऩुण्मलान ् धीभान ् वलामसेऴु दीस्षत्। व स्नात् वलातीथेऴु मस्मेदॊ कलिॊ गरे॥१७॥ ॐ श्रीॊ श्रीॊ कृ ष्णकाडतामै स्लाशा ऩृद्षॊ वदालतु। मस्भै कस्भै न दातव्मॊ रोबभोशबमैयत्रऩ। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ सश्रमै स्लाशा भभ शस्तौ वदालतु॥८॥ गुरुबक्ताम सळष्माम ळयणाम प्रकाळमेत ्॥१८॥ ॐ श्रीॊ सनलावकाडतामै भभ ऩादौ वदालतु। ॐ ह्रीॊ श्रीॊ क्रीॊ सश्रमै स्लाशा वलांगॊ भे वदालतु॥९॥ प्राच्माॊ ऩातु भशारक्ष्भीयाग्नेय्माॊ कभरारमा। इदॊ कलिभसात्ला जऩेल्रक्ष्भीॊ जगत्प्वूभ ्। कोफटवॊख्मॊ प्रजद्ऱोऽत्रऩ न भडि् वोत्रद्धदामक्॥१९॥ (गणऩसतखण्ड ३८।६४-८२) Full Astrological Analysis Report (With Easy Remedy) Rs-3700     This report for a full astrological analysis of your Birth chart. (ORISSA) INDIA. We are also Includeing in analysis Report . 91+ 9238328785.

उवके फडे - फद्रकारॊ म: ऩठे स्डनत्मभ ् धनधाडमवभस्डलत॥१०॥ शं . शे दे त्रल भशारक्ष्भी तुम्शं नभस्ते गरुडारूढे कोरावुय बमङ्करय। नभस्काय शं ॥3॥ सवत्रद्ध.इडद्र फोरे. लश धन-धाडम वे वम्ऩडन शोता शं ॥10॥ जो प्रसतफदन भशारक्ष्भीबालेस्डनत्भ ् प्रवडना लयदा ळुबा ॥११॥ शो जाता शं औय उवके ऊऩय कल्माणकारयणी लयदासमनी एककारे ऩठे स्डनत्मभ ् भशाऩाऩत्रलनाळनभ ्। फडे ऩाऩं का नाळ शो जाता शं । जो दो वभम ऩाठ कयता त्रिकारॊ म: ऩठे स्डनत्मभ ् भशाळिुत्रलनाळनभ ्। तीन कार ऩाठ कयता शं उवके फडे -फडे ळिुओॊ का नाळ || इसत भशारक्ष्भी स्तुसत वम्ऩूणा || भशारक्ष्भी वदा शी प्रवडन शोती शं ॥11॥ बालाथा:. िक्र औय गदा धायण कयने लारी शे भशारक्ष्भी तुम्शं प्रणाभ शं ॥1॥ गरुडऩय आरूढ शो कोरावुय को बम दे ने लारी औय वभस्त ऩाऩं को शयने लारी शे बगलसत रक्ष्भी जी के इव स्तोि की यिना कयने लारे दे लयाज इडद्र शं । उऩयोक्त स्तुसत का प्रसतफदन तीन कार ऩाठ कयता शै . फुत्रद्ध.1050 . भशोदया शो औय फडे -फडे ऩाऩं का नाळ आद्यडतयफशते दे त्रल आद्यळत्रक्त भशे द्वरय। कयने लारी शो। शे दे त्रल भशारक्ष्भी तुम्शं नभस्काय शं ॥6॥ स्थूरवूक्ष्भभशायौद्रे भशाळत्रक्त भशोदये । शे ऩयभेद्वरय! शे जगदम्फ! शे भशारक्ष्भी तुम्शं भेया प्रणाभ भशाऩाऩशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥६॥ शं ॥7॥ शे दे त्रल तुभ द्वेत लस्त्र धायण कयने लारी औय ऩद्मावनस्स्थते दे त्रल ऩयब्रह्म स्लरूत्रऩस्ण। नाना प्रकाय के आबूऴणं वे त्रलबूत्रऴता शो। वम्ऩूणा जगत ् मोगजे मोगवम्बूते भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥५॥ ऩयभेसळ जगडभत ् भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥७॥ शे कभर के आवन ऩय त्रलयाजभान ऩयब्रह्मस्लरूत्रऩणी दे त्रल! भं व्माद्ऱ एलॊ अस्खर रोक को जडभ दे ने लारी शो। शे द्वेताम्फयधये दे त्रल नानारङ्कायबूत्रऴते। भशारक्ष्भी तुम्शं भेया प्रणाभ शं ॥8॥ जो भनुष्म बत्रक्त जगस्त्व ्थते जगडभत ् भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥८॥ मुक्त शोकय इव भशारक्ष्म्मद्शक स्तोि का वदा ऩाठ कयता भशारक्ष्म्मद्शकॊ स्तोिॊ म: ऩठे द्भत्रक्त भाडनय्॥ शं . वूक्ष्भ एलॊ भशायौद्ररूत्रऩणी शो. ळिुओॊ का नाळ शोता शं एलॊ उवे जीलन भे वबी प्रकाय के वुखो की प्रासद्ऱ शोती शे । भशारक्ष्भी तुम्शं प्रणाभ शं ॥2॥ वफ कुछ जानने लारी. बोग औय भोष दे ने लारी शे वलाऩाऩशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥२॥ भॊिऩूत बगलसत भशारक्ष्भी तुम्शं वदा प्राभ शं ॥4॥ शे वलासे वलालयदे वलादद्श ु बमङ्करय। दे त्रल! शे आफद-अडत-यफशत आफदळत्रक्त ! शे भशे द्वरय! शे सवत्रद्धफुत्रद्धप्रदे दे त्रल बुत्रक्त भुत्रक्त प्रदासमसन। शं ॥5॥ शे दे त्रल! तुभ स्थूर. लश वायी सवत्रद्धमं औय याज्मलैबल को प्राद्ऱ कय वकता वलासवत्रद्धभलाऩनेसत याज्मभ ् प्राऩनेसत वलादा॥९॥ शं ॥9॥ जो प्रसतफदन एक वभम ऩाठ कयता शं . वलाद:ु खशये दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥३॥ मोग वे प्रकट शुई बगलसत भशारक्ष्भी तुम्शं नभस्काय भडिऩूते वदा दे त्रल भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥४॥ भशाळत्रक्त शो.श्रीऩीठऩय स्स्थत औय दे लताओॊ वे ऩूस्जत शोने लारी शे भशाभामे। तुम्शं नभस्काय शं । शाथ भं ळङ्ख. वभस्त दद्श ु ं को बम दे ने लारी एलॊ ळङ्खिक्रगदाशस्ते भशारक्ष्भी नभोस्तु ते॥१॥ वफके द:ु खं को दयू कयने लारी.अक्टू फय 2011 79 भशारक्ष्भी स्तुसत नभस्तेस्तु भशाभामे श्री ऩीठे वुयऩूस्जते। वफको लय दे ने लारी. वलाजन लळीकयण कलि भूल्म भाि: Rs.

अक्टू फय 2011 80 श्री कनकधाया स्तोि अॊगशये ऩुरकबूऴण भाश्रमडती भॊगरदे लतामा:॥1॥ सश्रमॊ फदळतु वागय वम्बलामा:॥2॥ बृगाॊगनैल भुकुराबयणॊ तभारभ। अॊगीकृ तास्खर त्रलबूसतयऩाॊगरीरा भाॊगल्मदास्तु भभ भुग्ध्मा भुशुत्रलादधती लदनै भुयायै : प्रेभिऩाप्रस्णफशतासन गतागतासन। भारा दृळोभाधुकय त्रलभशोत्ऩरे मा वा भै त्रलद्वाभये डद्रऩदत्रलभ्रभदानदषभानडद शे तु यसधकॊ भधुत्रलफद्रऴोत्रऩ। षणभीषणाद्धा सभडदोलयोदय वशोदयसभस्डदयाम:॥3॥ ईऴस्डनऴीदतु भसम आभीसरताषभसधगम्म भुदा भुकुडदभानडदकडदभ सनभेऴभनॊगतडिभ ्। आकेकय स्स्थत कनी सनकऩक्ष्भ नेिॊ बूत्मै बलेडभभ बुजॊगयामाॊगनामा:॥4॥ फाह्यडतये भधुस्जत: सश्रतकौस्तुबै मा शायालरील शरयनीरभमी त्रलबासत। काभप्रदा बगलतो त्रऩ कटाषभारा कल्माण बालशतु भे कभरारमामा:॥5॥ काराम्फुदासररसरतोयसव कैटबाये धाायाधये स्पुयसत मा तफडदॊ गनेल ्। भातु: वभस्त जगताॊ भशनीम भूसताबद्रास्ण भे फदळतु बागालनडदनामा:॥6॥ भडथय भीषणाद्धा भडदारवॊ ि प्राद्ऱॊ ऩदॊ प्रथभत: फकर मत्प्रबालाडभाॊगल्म बास्ज: भधुभामसन भडभथेन। भध्माऩतेत फदश भकयारमकडमकामा:॥7॥ दद्याद दष्ु कभाधभाभऩनीम सियाम दयू ॊ नायामण प्रणसमनी नमनाम्फुलाश:॥8॥ प्रशूद्शकभरोदय दीसद्ऱ रयद्शाॊ ऩुत्रद्श कृ ऴीद्श भभ ऩुष्कय त्रलद्शयामा:॥9॥ प्ररम केसरऴु वॊस्स्थतामै तस्मै दमानुऩलनो द्रत्रलणाम्फुधायाभ स्स्भबफकॊिन त्रलशॊ ग सळळौ त्रलऴण्ण। इद्शा त्रलसळद्शभतमो त्रऩ मथा ममाद्रा दृद्शमा त्रित्रलद्शऩऩदॊ वुरबॊ रबॊते। दृत्रद्श: गीदे लतैसत गरुड़ध्लज बासभनीसत ळाकम्बयीसत ळसळळेखय लल्रबेसत। वृत्रद्श स्स्थसत नभस्स्त्र बुलनैक गुयोस्तरूण्मै ॥10॥ श्रुत्मै नभोस्तु ळुबकभापर प्रवूत्मै यत्मै नभोस्तु यभणीम गुणाणालामै। ळक्तमै नभोस्तु ळतऩाि सनकेतानामै ऩुद्शमै नभोस्तु ऩुरूऴोत्तभ लल्रबामै ॥11॥ नभोस्तु नारीक सनबाननामै नभोस्तु दग्ु धौदसध जडभ बूत्मै । नभोस्तु वोभाभृत वोदयामै नभोस्तु नायामण लल्रबामै ॥12॥ दरु यता शयणाद्यतासन भाभेल लिनाॊगभानवॊवत्लाॊ भातय सनळॊ करमडतु भुयारयरृदमेद्वयीॊ बजे ॥14॥ वम्ऩतकयास्ण वकरेस्डद्रम नडदासन वाम्राज्मदान त्रलबलासन वयोरूशास्ष। त्ल द्रॊ दनासन नाडमभ ् ॥13॥ वयसवजसनरमे मत्कटाषवभुऩावना वयोज शस्ते त्रलसध: वेलकस्म धलरभाॊळुकगडधभाल्मळोबे। कराथा बगलसत वम्ऩद:। वॊतनोसत शरयलल्रबे भनोसे त्रिबुलनबूसतकरय प्रवीद भह्यभ ् ॥15॥ दस्ग्धस्स्तसभ:कनकुॊबभुखा ल वृत्रद्शस्ललााफशनी त्रलभरिारू जर प्रुताॊगीभ। प्रातनाभासभ जगताॊ जननीभळेऴ रोकासधनाथ गृफशणी भभृतास्ब्धऩुिीभ ् ॥16॥ कभरे कभराषलल्रबे त्लॊ करुणाऩूयतयाॊ गतैयऩाड़ॊ गै:। अलरोकम भाभ फकॊिनानाॊ प्रथभॊ ऩािभकृ त्रिभॊ दमामा : ॥17॥ स्तुलस्डत मे स्तुसतसबय बूसभयडलशॊ िमीभमीॊ त्रिबुलनभातयॊ यभाभ ्। गुणासधका गुरुतयबाग्मबासगनो बलस्डत ते फुधबात्रलतामा: ॥18॥इसत श्री कनकधाया स्तोिॊ वम्ऩूणभ ा कनकधाया मॊि आज के मुग भं शय व्मत्रक्त असतळीघ्र वभृद्ध फनना िाशता शं । धन प्रासद्ऱ शे तु प्राण-प्रसतत्रद्षत कनकधाया मॊि के वाभने फैठकय कनकधाया स्तोि का ऩाठ कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । इव कनकधाया मॊि फक ऩूजा अिाना कयने वे ऋण औय दरयद्रता वे ळीघ्र भुत्रक्त सभरती शं । व्माऩाय भं उडनसत शोती शं .karyalay@gmail.com. . gurutva_karyalay@yahoo.8200 तक गुरुत्ल कामाारम वॊऩका : 91+ 9338213418.in. स्जवके श्रलण एलॊ ऩठन कयने वे आव-ऩाव के लामुभॊडर भं त्रलळेऴ अरौफकक फदव्म उजाा उत्ऩडन शोती शं । फठक उवी प्रकाय वे कनकधाया मॊि अत्मॊत दर ा मॊिो भं वे ु ब एक मॊि शं स्जवे भाॊ रक्ष्भी फक प्रासद्ऱ शे तु अिूक प्रबाला ळारी भाना गमा शं । कनकधाया मॊि को त्रलद्रानो ने स्लमॊसवद्ध तथा वबी प्रकाय के ऐद्वमा प्रदान कयने भं वभथा भाना शं । जगद्गरु ु ळॊकयािामा ने दरयद्र ब्राह्मण के घय कनकधाया स्तोि के ऩाठ वे स्लणा लऴाा कयाने का उल्रेख ग्रॊथ ळॊकय फदस्ग्लजम भं सभरता शं । कनकधाया भॊि:.550 वे Rs.ॐ लॊ श्रीॊ लॊ ऐॊ ह्रीॊ-श्रीॊ क्रीॊ कनक धायमै स्लाशा' भूल्म: Rs. फेयोजगाय को योजगाय प्रासद्ऱ शोती शं ।श्री आफद ळॊकयािामा द्राया कनकधाया स्तोि फक यिना कुछ इव प्रकाय फक शं . 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.

अक्टू फय 2011 81 श्री रक्ष्भी िारीवा ॥ दोशा ॥ रुऩ फदर तशॊ वेला कीडशा ॥ प्रसतफदन ऩाठ कयै भन भाशीॊ । भातु रक्ष्भी करय कृ ऩ.शाथ जोड त्रलनती त्रलद्व त्रलफदत त्रिबुलन की स्लाभी ॥ जम जम जम रक्ष्भी बालानी । कॊरु । तुभ वभ प्रफर ळत्रक्त नफशॊ आनी । वफ भं व्मात्रऩत शो गुण खानी ॥ वफत्रलसध कयौ वुलाव. कयो ह्र्दम भं स्लॊम त्रलष्णु जफ नय तनु धाया । लाव ॥ रीडशे उ अलधऩुयी अलताया ॥ उन वभ कोई जग भं कशुॊ नाशी ॥ भनोकाभना सवद्ध करय. कयशु दमा की जगदॊ त्रफका ॥ जगजननी जम सवॊधु कुभायी । िौदश यत्न भं तुभ वुखदावी । वेला फकमो प्रबु फसन दावी ॥ जफ जफ जडभ जशाॊ प्रबु रीडशा । भन क्रभ लिन कयै वेलकाई । कभी नशीॊ काशू की आलै ॥ फायश भाव कयं जो ऩूजा । तेफश वभ धडम औय नफशॊ दज ू ा ॥ फशुत्रलसध क्मा भं कयं फडाई । रेम ऩयीषा ध्मान रगाई ॥ तुभ वभ कोउ दमारु कशुॊ नाफशॊ ॥ नफशॊ भोफशॊ सान फुत्रद्ध शै तन भं । केफश प्रकाय भं कयं फडाई । िाव। कोय ॥ *** . कयो सान फुत्रद्ध जम वुख की दाता । ळॊका फदर भं कबी न रालै ॥ ळिु का नाळ ॥ वॊकट शयो शभायी भाता ॥ ऩाठ कयालै फदन िारीवा । याभदाव धरय ध्मान सनत. त्रलनम षीयसवॊधु जफ त्रलष्णु भथामो । ता ऩय कृ ऩा कयं जो गौयीवा ॥ कयत कय जोय । िौदश यत्न सवॊधु भं ऩामो ॥ वुख वम्ऩसत फशुत वी ऩालै । भातु रक्ष्भी दाव ऩय. जम जनसन कशॊ तक भफशभा कशौ फखानी ॥ तुम्शयो तेज प्रफर जग भाशी । सवॊधु वुता भं वुसभयं तोशी । भन इस्च्छत लाॊसछत पर ऩाई ॥ भोफश अनाथ की वुसध अफ रीजै । सान फुत्रद्ध त्रलद्या दो भोशी ॥ तस्ज ्र कऩट औय ितुयाई । वॊकट काफट बत्रक्त भोफश दीजै ॥ तुभ वभान नफशॊ कोई उऩकायी । ऩूजफशॊ त्रलत्रलध बाॊसत भन राई ॥ बूर िूक करय षभा शभायी । वफ त्रलसध ऩुयलशु आव शभायी ॥ औय शार भं कशं फुझाई । दळान दीजै दळा सनशायी ॥ जम जम जगत जनसन जगदम्फा । जो मश ऩाठ कयै भन राई ॥ त्रफन दळान व्माकुर असधकायी । वफकी तुभ शी शो अलरम्फा ॥ ताको कोई कद्श न शोई । तुभ शी शो घट घट की लावी । भन इस्च्छत ऩालै पर वोई ॥ तुभफश अषत द्ु ख वशते बायी ॥ त्रलनती मशी शभायी खावी ॥ िाफश िाफश जम द्ु ख सनलारयस्ण । वफ जानत शो अऩने भन भं ॥ त्रित्रलध ताऩ बल फॊधन शारयस्ण ॥ रुऩ ितुबज ुा कयके धायण । दीनन की तुभ शो फशतकायी ॥ जो मश िारीवा ऩढै ऩढालै । त्रलनलं सनत्म तुभफशॊ भशायानी । ध्मान रगाकय वुनै वुनालै ॥ कद्श भोय अफ कयशु सनलायण ॥ कृ ऩा कयौ जग जनसन बलानी ॥ ताको कोई न योग वतालै । सान फुत्रद्ध भोफश नफशॊ असधकाई ॥ केफश त्रलसध स्तुसत कयं सतशायी । ऩुि आफद धन वम्ऩसत ऩालै ॥ ॥ दोशा ॥ वुसध रीजै अऩयाध त्रफवायी ॥ ऩुिशीन अरु वॊऩसत शीना । कृ ऩा दृत्रद्श सितलो भभ ओयी । अॊध फसधय कोढी असत दीना । िाफश िाफश दख ु शारयणी. ऩुयलशु भेयी तफ तुभ प्रगट जनकऩुय भाशीॊ । आव ॥ वेला फकमो ह्र्दम ऩुरकाशीॊ ॥ करय त्रलद्वाव कयं व्रत नेभा । ॥वोयठा ॥ अऩनामा तोफश अडतमााभी । शोम सवद्ध उऩजै उय प्रेभा ॥ मशी भोय अयदाव.शयो लेसग वफ जगजननी त्रलनती वुन भोयी ॥ त्रलप्र फोराम कै ऩाठ कयालै । जमसत जमसत जम रक्ष्भी .

गज रक्ष्भी. रक्ष्भीभनऩ-गासभनीभ ्। मस्माॊ फशयण्मॊ त्रलडदे मॊ. जुशुमादाज्मभडलशभ ्। सश्रम् ऩॊि-दळिं ि. सनत्म-ऩुद्शाॊ कयीत्रऴणीभ ्। ईद्वयीॊ वला-बूतानाॊ. वुलणां शे भ-भासरनीभ ्। वूमां फशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ. श्रीभाा दे ली जुऴताभ ्॥ काॊवोऽस्स्भ ताॊ फशयण्म-प्राकायाभाद्राा ज्लरडतीॊ तृद्ऱाॊ तऩामडतीॊ। ऩद्मे स्स्थताॊ ऩद्म-लणां तासभशोऩह्लमे सश्रमभ ्॥ िडद्राॊ प्रबावाॊ मळवा ज्लरडतीॊ सश्रमॊ रोके दे ल-जुद्शाभुदायाभ ्। ताॊ ऩद्म-नेसभॊ ळयणभशॊ प्रऩद्ये अरक्ष्भीभे नश्मताॊ त्लाॊ लृणोसभ॥ आफदत्म-लणे तऩवोऽसधजातो लनस्ऩसतस्तल लृषोऽष त्रफल्ल्। तस्म परासन तऩवा नुदडतु भामाडतयामाद्ळ फाह्या अरक्ष्भी्॥ उऩैतु भाॊ दै ल-वख्. कीसतं लृत्रद्धॊ ददातु भे॥ ु त षुत ्-त्रऩऩावाऽभरा ज्मेद्षा. वलाान ् सनणुद ा भे गृशात ्॥ गडध-द्रायाॊ दयु ाधऴां. जातलेदो भभालश॥ आद्रां म् करयणीॊ मत्रद्शॊ.अक्टू फय 2011 82 ॥श्री वूक्त॥ ॐ फशयण्म-लणां शरयणीॊ. जातलेदो भ आलश॥ ताॊ भ आलश जात-लेदो. तासभशोऩह्लमे सश्रमभ ्॥ भनव् काभभाकूसतॊ. भसम वम्भ्रभ-कदा भ। सश्रमॊ लावम भे कुरे. वुलणा-यजत-स्त्रजाभ ्। िडद्राॊ फशयण्मभमीॊ रक्ष्भीॊ. वॊतान रक्ष्भी. सिक्रीत लव भे गृशे। सनि-दे ली भातयॊ सश्रमॊ लावम भे कुरे॥ आद्रां ऩुष्करयणीॊ ऩुत्रद्शॊ. अरक्ष्भीनााळमाम्मशभ ्। अबूसतभवभृत्रद्धॊ ि. धैयीम रक्ष्भी. भसम श्री् श्रमताॊ मळ्॥ कदा भेन प्रजा-बूता. जातलेदो भभालश॥ ताॊ भ आलश जात-लेदो रक्ष्भीभनऩ-गासभनीभ ्। मस्माॊ फशयण्मॊ प्रबूतॊ गालो दास्मोऽद्वान ् त्रलडदे मॊ ऩुरूऴानशभ ्॥ म् ळुसि् प्रमतो बूत्ला. गाभद्वॊ ऩुरूऴानशभ ्॥ अद्वऩूलां यथ-भध्माॊ.Rs: 1050 . त्रलजम रक्ष्भी. कीसताद्ळ भस्णना वश। प्रादब ूा ोऽस्स्भ याद्सेऽस्स्भन ्. भातयॊ ऩद्म-भासरनीभ ्॥ आऩ् वृजडतु स्स्नग्धासन. श्री-काभ् वततॊ जऩेत ्॥ धनरक्ष्भी स्तोि नभो कल्माणदासमके । भशावम्ऩत्प्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥ भशाबोगप्रदे दे त्रल भशाकाभप्रऩूरयते । वुखभोषप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥ ब्रह्मरूऩे वदानडदे वस्च्िदानडदरूत्रऩणी । धृतसवत्रद्धप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥ उद्यत्वूमप्र ा काळाबे उद्यदाफदत्मभण्डरे । सळलतत्लप्रदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥ सळलरूऩे सळलानडदे कायणानडदत्रलग्रशे । त्रलद्ववॊशायरूऩे ि धनदामै नभोऽस्तुते॥ ऩछितत्लस्लरूऩे ि ऩछिािायवदायते । वाधकाबीद्शदे दे त्रल धनदामै नभोऽस्तुते॥ श्रीॊ ॐ॥ ॐ श्री रसरता भशात्रिऩुयवुडदयी ऩयाबट्टारयका । वभेताम श्री िडद्रभौऱीद्वय ऩयब्रह्मणे नभ्॥जम जम ळङ्कय शय शय ळङ्कय॥ अद्श रक्ष्भी कलि भाॊ भशारक्ष्भी की कृ ऩा प्राद्ऱ कयने शे तु उऩमोगी सवद्ध शोता शं । स्जस्वे भाॊ के आफद रक्ष्भी. लाि् वत्मभळीभफश। ऩळूनाॊ रूऩभडनस्म. धाडम रक्ष्भी. शस्स्त-नाद-प्रभोफदनीभ ्। सश्रमॊ दे लीभुऩह्लमे. त्रलद्या रक्ष्भी औय धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो का अळीलााद प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म. त्रऩॊगराॊ ऩद्म-भासरनीभ ्। िडद्राॊ फशयण्भमीॊ रक्ष्भीॊ.

83 अद्शरक्ष्भी स्तोि अक्टू फय 2011 दे लकृ त रक्ष्भी स्तोिभ ् वुभनवलॊफदत वुॊदरय भाधत्रल िॊद्र वशोदरय शे भभमे । षभस्ल बगलॊत्मल षभाळीरे ऩयात्ऩये । भुसनगण लॊफदत भोषप्रदासमसन भॊजुऱबात्रऴस्ण लेदनुते ॥ ळुद्धवत्त्लस्लरूऩे ि कोऩाफदऩरयलस्जाते॥ ऩॊकजलासवसन दे लवुऩूस्जत वदगुणलत्रऴास्ण ळाॊसतमुते । उऩभे वलावाध्लीनाॊ दे लीनाॊ दे लऩूस्जते। जम जम शे भधुवूदन कासभसन आफदरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥1॥ त्लमा त्रलना जगत्वलं भृततुल्मॊ ि सनष्परभ ्॥ षीयवभुदबल भॊगररूत्रऩस्ण भॊिसनलासवसन भॊिनुते ॥ यावेद्वमासध दे ली त्लॊ त्लत्करा् वलामोत्रऴत्॥ भॊगरदासमसन अॊफुजलासवसन दे लगणासश्रत ऩादमुते । कैरावे ऩालाती त्लॊ ि षीयोदे सवडधुकडमका। जम जम शे भधुवूदन कासभसन धाडमरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥2॥ स्लगे ि स्लगारक्ष्भीस्त्लॊ भत्मारक्ष्भीद्ळ बूतरे॥ वुयगण ऩूस्जत ळीघ्र परप्रद सानत्रलकासवसन ळास्त्रनुते ॥ गॊगा ि तुरवी त्लॊ ि वात्रलिी ब्रह्मारोकत्॥ असमकसर कल्भऴनासळसन कासभसन लैफदकरूत्रऩस्ण लेदभमे । वलावॊऩत्स्लरूऩा त्लॊ वलेऴाॊ वलारूत्रऩणी। जमलय लस्णासन लैष्णत्रलबागात्रल भॊिस्लरूत्रऩस्ण भॊिभमे । लैकुॊठे ि भशारक्ष्भीदे लदे ली वयस्लती। बलबमशारयस्ण ऩाऩत्रलभोिसन वाधुजनासश्रत ऩादमुते । कृ ष्णप्राणासधदे ली त्लॊ गोरोके यासधका स्लमभ ्। जम जम शे भधुवूदन कासभसन धैमर ा स्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥3॥ यावे यावेद्वयी त्लॊ ि लृॊदालन लने.लने॥ जम जम दग ु सा तनासळसन कासभसन वलापरप्रद ळास्त्रभमे । कृ ष्णा त्रप्रमा त्लॊ बाॊडीये िॊद्रा िॊदनकानने। यथगज तुयग ऩदाफदवभानुत ऩरयजनभॊफडत रोकनुते ॥ त्रलयजा िॊऩकलने ळतळृॊगे ि वुॊदयी॥ शरय-शय ब्रह्म वुऩूस्जत वेत्रलत ताऩसनलारयस्ण ऩादमुते । ऩद्मालती ऩद्मलने भारती भारतीलने। जम जम शे भधुवूदन कासभसन श्री गजरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥4॥ कुॊददॊ ती कुॊदलने वुळीरा केतकीलने॥ गुणगणलारयसध रोकफशतैत्रऴस्ण वद्ऱस्लयलय गाननुते ॥ याजरक्ष्भी याजगेशे गृशरक्ष्भीगृशे गृशे॥ असम खगलाफशसन भोफशसन िफक्रस्ण याग त्रललसधासन सानभमे । वकर वुयावुय दे ल भुनीद्वय भानललॊफदत ऩादमुते । कदॊ फभारा त्लॊ दे ली कदॊ फकाननेऽत्रऩ ि। इत्मुक्त्ला दे लता् वलाा भुनमो भनलस्तथा। जम जम शे भधुवूदन कासभसन वॊतानरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥5॥ रूरूदन ा लदना् ळुष्ककॊठोद्ष तारुका्॥ ु म्र अनुफदनभसिात कुकुॊभधूवय बूत्रऴतलासवत लाद्यनुते ॥ म् ऩठे त्प्रातरूत्थाम व लै वलै रबेद् ध्रुलभ ्॥ जम कभरावसन वदगसतदासमसन सान त्रलकासवसन गानभमे । कनक धया स्तुसत लैबल लॊफदत ळॊकय दे सळक भाडम ऩते। इसत रक्ष्भीस्तलॊ ऩुण्मॊ वलादेलै् कृ तॊ ळुबभ ्। अबामो रबते बामां त्रलनीताॊ वुवुताॊ वतीभ ्। जम जम शे भधुवूदन कासभसन त्रलजमरस्क्ष्भ जम ऩारम भाभ ् ॥6॥ वुळीराॊ वुॊदयीॊ यम्माभसतवुत्रप्रमलाफदनीभ ्॥ भस्णभम बूत्रऴत कणात्रलबूऴण ळाॊसतवभालृत शास्मभुखे ॥ अऩुिो रबते ऩुिॊ लैष्णलॊ सियजीत्रलनभ ्॥ प्रणत वुयेद्वरय बायसत बागात्रल ळोकत्रलनासळसन यत्नभमे । नलसनसध दासमसन कसरभरशारयस्ण काम्म परप्रद शस्तमुते । ऩुिऩौिलतीॊ ळुद्धाॊ कुरजाॊ कोभराॊ लयाभ ्। ऩयभैद्वमामुक्तॊ ि त्रलद्यालॊतॊ मळस्स्लनभ ्। जम जम शे भधुवूदन कासभसन त्रलद्यारस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥7॥ भ्रद्शयाज्मो रबेद्राज्मॊ भ्रद्शश्रीराबते सश्रमभ ्॥ घुभघुभ घुॊघुभ घुॊघुभ घुॊघुभ ळॊखसननाद वुलाद्यनुते ॥ कीसताशीनो रबेत्कीसतं प्रसतद्षाॊ ि रबेद् ध्रुलभ ्॥ सधसभ सधसभ सधभ ् सधसभ सधॊसधसभ सधॊसधसभ दॊ द ा मे । ु सु ब ्नाद वुऩूणभ शतफॊधर ु ब ा ेद्बॊधुॊ धनभ्रद्शो धनॊ रबेत ्। लेदऩुयाणेसत शाव वुऩूस्जत लैफदकभागा प्रदळामुते । वलाभॊगरदॊ स्तोिॊ ळोकवॊताऩनाळनभ ्। जम जम शे भधुवूदन कासभसन श्री धनरस्क्ष्भ ऩारम भाभ ् ॥8॥ शऴाानॊदकयॊ ळद्वद्धभा भोषवुरृत्प्रदभ ्॥ ॥ इसत श्रीदे लकृ त रक्ष्भीस्तोिॊ वॊऩूणभ ा ्॥ .

अत्मासधक बाग-दौड के कायण आऩको थका वकती शं । .ऩीने का त्रलळेऴ ध्मान यखना फशतकायी यशे गा। 16 वे 31 अक्टू फय 2011: एक वे असधक स्त्रोि वे धन राब प्रासद्ऱ के सरमे आऩको नमा व्मलवाम/नौकयी प्राद्ऱ शो वकती शं । भशत्ल के कामो के सरमे आऩको कजा रेना ऩड वकता शं जो राब प्रद सवद्ध शो वकता शं । अत्मासधक ऩरयश्रभ औय भेशनत वे आऩ वपरता प्राद्ऱ कय वकते शं । कामा फक व्मस्तता.अक्टू फय 2011 84 भासवक यासळ पर  सिॊतन जोळी भेऴ: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: व्मलवासमक मािा राबदामक सवद्ध शोगी। आरस्म के कायण आऩके भशत्ल ऩूणा कामा प्राबात्रलत शोव अकते शं वालधानी लते। एक वे असधक आम के स्त्रोत फन वकते शं । आऩकी भानसवक सिडताओॊ भं फढोतयी शोगी। आऩके स्लबाल भं दमा. भृदत ु ा ल त्रलनम्रता की कभी शो वकती शं । इद्श सभिं के वशमोग वे नमे सभि फन वकते शं । जीलन वाथी वे लादत्रललाद कयने वे फिे। 16 वे 31 अक्टू फय 2011 : कुछ रुकालटो के फाद भं व्मलवाम भं धन राब प्राद्ऱ शोगा। भशत्ल के कामो के सरमे आऩको कजा रेना ऩड वकता शं जो राब प्रद सवद्ध शो वकता शं । प्रसतमोसगता के कामो भं फुत्रद्धभानी ल ितुयता वे ळीघ्र राब औय वपरता प्राद्ऱ कयं गे। ऩारयलारयक भतबेद शो वकते शं औय आऩके स्लास््म भं सगयालट शो वकती शं । सभि एलॊ इद्श लगा के रोगो ऩय आऩका व्मम फढे गा। लृऴब: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : नौकयी-व्मलवाम भं ऩरयलतान कयने वे फिने का प्रमाव कयं । आऩकी इच्छाओॊ के त्रलऩयीत फकमे गमे कामो वे राब प्रासद्ऱ के मोग फन यशे शं । स्लास््म फक द्रद्शी वे वभम उत्तभ यश वकता शं । सभिं के वशमोग वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं । भशत्लऩूणा कामो को गोऩसनम यखने का प्रमाव कयं । बूसभ-बलन वॊफॊसधत क्रम-त्रलक्रम वे राब प्राद्ऱ शोगा। 15 वे 31 अक्टू फय 2011 : आसथाक स्स्थती भं उताय-िढाल शोने के मोग फन यशं शं । अऩने वबी कामो को ऩूयी भशे नत एलॊ ईभानदायी वे ऩूया कयने वे राब प्राद्ऱ शोगा। आऩका भन प्रवडन यशे गा औय आऩकी इच्छा यशे गी फक आऩ ज्मादा वभम अऩने ऩरयलाय मा इद्श सभि के वाथ भं त्रफताएॊ। दाॊऩत्म जीलन भं गरतपसभमं वे फिना िाफशमे। सभि एलॊ सनकट वॊऩफकाम वे भतबेद एलॊ धोखा सभर वकता शं । सभथुन: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: ऩूणा ऩरयश्रभ एलॊ कड़ी भेशनत वे आऩके भशत्लऩूणा कामा एलॊ मोजनाएॊ ऩूणा शो वकती शं । वयकाय वे वॊफॊसधत कामा भं राब प्राद्ऱ शो वकता शं । नौकयी-व्मलवाम भं उनासत शोगी। ऩरयलाय भं खुसळमो का भाशोर यशे गा औय ऩरयलाय भं फकवी अत्रललाफशत के त्रललाश का मोग फनने रगंगे शं । स्लास््म वुख भं लृत्रद्ध शोगी फपय बी खाने.

भृदत ु ा ल त्रलनम्रता की कभी शो वकती शं । सवॊश: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: व्मलवाम औय नौकयी भं राब औय ऩदोडनसत के अलवय प्राद्ऱ शंगे। अनालश्मक भानसवक सिडताओॊ भं फढोतयी शोगी। स्लबाल भं सिड़सिड़ा ऩन आवकता शं । अऩने क्रोध ऩय सनमॊिण यखे। अशॊ बाल के कायण आऩके इद्श सभि-ऩारयलायीक वदस्म आऩवे दयू ी फना वकते शं । ळिु ऩष वे वालधान यशं आऩ ऩय झूठे आयोऩ रग वकते शं स्जव कायण आऩका ऩद एलॊ प्रसतद्षा खॊफडत शो वकती शं । 16 वे 31 अक्टू फय 2011: भशत्ल के कामो भं त्रलध्न उत्ऩडन शो वकते शै । त्रलध्नफाधाओॊ वे घफयाएॊ नशीॊ। इव अलसध भं आऩको भानसवक कद्श शै तो ऩमााद्ऱ आयाभ कय रेना िाफशमे। अनािश्मक खिा शोने के कायण ऩये ळानी शो वकती शं । नौकयी-व्मलवाम भं उडनसत शो वकती शं । लाशन वालधानी वे िरामे मा लाशन वे वालधान यशे आकस्स्भक दघ ा ना शो वकती शं । अऩने ु ट स्लास््म का ध्मान यस्खए। कडमा: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: इव अलसध भं आऩको अनुकूर ऩरयणाभ प्राद्ऱ शोगं। बूसभ.बलन-लाशन के क्रम-त्रलक्रम वे भध्मभ राब प्राद्ऱ शो वकता शं । आऩकी वाभास्जक प्रसतद्षा औय व्मत्रक्तत्ल के कायण रोग आऩकी प्रळॊवा कय वकते शं । ळिु ऩष इव अलसधभं दफे यशे गं। आऩको नौकयी एलॊ आऩके त्रलयोसध एलॊ व्माऩाय के षेि भं वपरता प्राद्ऱ शोगी। जीलन वाथी वे आऩको प्रवडना सभरेगी। 16 वे 31 अक्टू फय 2011: भशत्लऩूणा मोजनाओॊ को ळुरू कयने औय सनणाम रेने के सरमे वभम उत्तभ वात्रफत शो वकता शं । आऩकी मोजना एलॊ उद्दे श्म वपर शोते दे ख ऩामेगं। धन वे वॊफॊसधत रेन-दे न शे तु वभम राबप्रद यशे गा। सभि-ऩारयलायीक वदस्मो का वशमोग प्राद्ऱ शोगा। स्लास््म वुख भं लृत्रद्ध शोगी फपय बी खाने.ऩीने का त्रलळेऴ ध्मान यखना फशतकायी यशे गा। ऩूॊस्ज सनलेळ कय वकते शं । . स्जस्वे आसथाक स्स्थती भं वुधाय शोगा। नमा व्मलवाम मा नौकयी प्राद्ऱ शो वकती शं मा आऩके कामा षेि भं नमे फदराल शो वकते शं । कुछ रुकालटो के फाद भं व्मलवाम भं धन राब प्राद्ऱ शोगा। ळिु ऩष ऩय आऩका दफदफा यशे गा। आऩकी भानसवक सिडताओॊ भं फढोतयी शोगी। आऩके स्लबाल भं दमा.अक्टू फय 2011 85 कका: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : आऩके आम के स्त्रोत भं अस्स्थयता यश वकती शं । भशत्ल ऩूणाा कामो को स्स्थगीत कयना मा फकवी औय को दे ना नुक्ळान दे श शो वकता शं । गुद्ऱ त्रलयोसध-ळिुओॊ के कायण धन शासन शो वकती शै । ऩारयलायीकी एलॊ सभिो वे रयश्तो भं वूझ-फूझ वे लाणी का प्रमोग कये अडमथा आऩके फने फनामे रयश्ते त्रफगड वकते शं । नमे रोगो की सभिता वे राब प्राद्ऱ कय वकते शं । 16 वे 31 अक्टू फय 2011 : आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ शोने के मोग शं .

ऩेट औय ऩैय भं गॊबीय िोट रग वकती शं वालधानी फते। ऋण के रेन-दे न वे वॊफॊसधत भानसवक सिॊता शो वकती शं । 16 वे 31 अक्टू फय 2011 : कामो भं वालधानी फते आऩकी राऩयलाशी आऩको रॊफे वभम का नुक्ळान दे वकती शं । आऩको कोई कामा अऩनी इच्छाओॊ के त्रलरुद्ध कयना ऩड वकता शं । ळिु एलॊ त्रलयोसध ऩष आऩकी ऩये ळासनमाॊ फढा वकते शै । शताळा औय सनयाळा लारे त्रलिायो को फकनाया कय वभम का राब उठाते शुले आगे फढने का प्रमाव कयं । दाॊम्ऩत्म जीलन के वुख भं कभी यश वकती शं । .बलन-लाशन के क्रम-त्रलक्रम वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं । आऩकी भानसवक अस्स्थताय भशत्लऩूणा सनणाम रेने भं त्रलरॊफ कय वकती शं । अनािश्मक खिा कयने वे फिे अडमथा फडा नुकवान वॊबल शं । 16 वे 31 अक्टू फय 2011: कामा भं आनेलारी रुकालटो भं बी कभी शोगी औय दयु स्थ स्थानं वे धन राब प्राद्ऱ शो वकता शै । कुछ रुकालटो के फाद भं व्मलवाम भं धन राब प्राद्ऱ शोगा। फकमे गमे ऩूॊस्ज सनलेळ द्राया आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ के मोग फन यशे शै । आलश्मकता वे असधक वॊघऴा कयना ऩड वकता शै । भानसवक सिडताओॊ भं कभी आमेगी। ऋण रेने वे फिे औय ऩुयाने ऋणं का बुगतान कयने का प्रमाव कये । धनु: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : इव अलसध के दौयान फकवी नमी ऩरयमोजना को रेकय भशत्लऩूणा सनणाम रेना आऩकी ऩये ळानी फढा वकता शं । थोडे वभम के सरमे नौकयी व्मलवाम भं ऩरयलतान के सनणामो को स्स्थगीत कयने का प्रमाव कये । आऩकी आॊख.86 अक्टू फय 2011 तुरा: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: आकस्स्भक धन राब प्राद्ऱ शोव अकता शं । इव अलसध के दौयान अऩने स्लबाल भं सिड़सिड़ा ऩन आवकता शं । अऩने क्रोध ऩय सनमॊिण यखे। आलश्मकता वे असधक बोजन आऩके स्लास््म को कभजोय कय वकता शं । ऩरयलाय के वदस्मं के त्रफि त्रलिायं भं भतबेद शो वकते शं । जीलन वाथी वे वॊफडध कद्शकायी शो वकते शं वालधान यशे । 16 वे 31 अक्टू फय 2011: ऩूला कार भं फकमे गमे कामा एलॊ रुके शुले कामा वे आकस्स्भक धन राब प्राद्ऱ शोगा। छोटी-छोटी वभस्माए आने के उऩयाॊत बी काभमाफी प्राद्ऱ शोगी। आऩ अऩने कामा का अच्छा प्रदळान कयने भं वभथा शंगे। आऩकी भानसवक सिडताओॊ भं फढोतयी शोगी। आऩके स्लबाल भं दमा. भृदत ु ा ल त्रलनम्रता की कभी शो वकती शं । गरत सनणामो के कायण आसथाक ऩष कभजोय शो वकता शं । लृस्द्ळक: 1 वे 15 अक्टू फय 2011: इव भाश आऩके अॊदय यिनात्भक कामा वपर शो वकते शं । नमा व्मलवाम मा नौकयी प्राद्ऱ शो वकती शं मा आऩके कामा षेि भं नमे फदराल शो वकते शं । बूसभ.

अत्मासधक बाग-दौड के कायण आऩको थकालट शो वकती शं । अनािश्मक खिा कयने वे फिे अडमथा फडा नुकवान वॊबल शं । 16 वे 31 अक्टू फय 2011 : इव दौयान आऩको असधकाॊळत् राबदामक औय वकायात्भक ऩरयणाभ प्राद्ऱ शंगे। मािाएॊ के दौयान कद्श प्रद शो वकती शं । बूसभ.बलन-लाशन के क्रमत्रलक्रम वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं । ऩरयलाय एलॊ सभिलगा का ऩूणा वशमोग प्राद्ऱ शोगा औय वभम आनॊद ऩूलक ा त्रफता वकते शं । आऩके वाभास्जक कामो के सरमे रोग आऩकी तायीप कयं गे। प्रेभ वम्फडधं भं वपर यशं गे। भीन: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : नई ऩरयमोजना वे वॊफॊसध सनणाम रेना राबप्रद शो वकता शं । ळिु एलॊ त्रलयोसध ऩष वे त्रललाद वॊबल शं । आऩके द्राया फकमे गमे धासभाक औय आध्मास्त्भक कामा सनस्द्ळत फश उज्लर बत्रलष्म का वॊकेत शै । वाॊस्कारयक वुखं फक प्रासद्ऱ शोगी। अऩने फुत्रद्ध औय त्रललेक वे अऩने दोऴो को दयू कयने का प्रमाव कयं । जीलन वाथी वे वशमोग प्राद्ऱ शोगा। 16 वे 31 अक्टू फय 2011 : व्माऩारयक वाझेदाय औय सभिो वे रेन-दे न भं वालधानी फते धन शानी शो वकती शं । ऩरयलाय औय रयश्तेदायं वे वॊफॊधो भं वुधाय शोगा। त्रलयोसध ऩष को ऩयास्त कय धन राब प्राद्ऱ कय वकते शं ऩय अनालश्मक करश भं ऩडने वे फिना असधक राबप्रद शो वकता शं । अऩनी गरसतओॊ का अलरोकन कय बत्रलष्म फक मोजनाओॊ भं उवे दयू कयने का प्रमाव कयं । .अक्टू फय 2011 87 भकय: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : इव अलसध भं वालधानी वे फकमे गमे कामो भं आऩको ळुब ऩरयणाभ प्राद्ऱ शंगे स्जस्वे आऩको शय तयप वे राब शी राब सभरेगा। आऩके जोळ एलॊ उत्वाश भं एकाएक लृत्रद्ध नजय आवकती शं । सभि एलॊ वॊफॊसधओॊ वे फशुभूल्म लस्तु उऩशाय भं प्राद्ऱ कय वकते शं । व्मलवामीक मािाएॊ राबप्रद शो वकती शं उसिर राब प्राद्ऱ शोगे औय ऩूयाने बूगतान प्राद्ऱ शो वकते शं । 16 वे 31 अक्टू फय 2011: आऩके भशत्लऩूणा कामा एलॊ मोजनाएॊ ऩूणा शोने वे धन राब फक प्रफर वॊबालना शं । स्लास््म फक द्रद्शी वे वभम वाभाडम वे फेशतय वात्रफत शो वकता शं । सभि एलॊ रयश्ते दायं के वाथ अच्छा वभम व्मतीत कय वकते शं । भाता के स्लास््म वे वॊफॊसधत सिॊता शो वकती शं । जीलन वाथी का वशमोग प्राद्ऱ शोगा औय आऩवी प्माय फढे गा। कॊु ब: 1 वे 15 अक्टू फय 2011 : ऩूला के अच्छे औय फुये कभा का अलरोकन कय उवभे वुधाय कयने का प्रमाव कयं । वाभास्जक प्रसतद्षा औय भान-वम्भान भं लृत्रद्ध शो वकती शं । नमे रोगो वे सभिता शो वकती शं । आऩके कामा षेि की रुकालटं थोफड फशुत दयू शंगी। कामा फक व्मस्तता.

अक्टू फय 2011

88

यासळ यत्न
भेऴ यासळ:

लृऴ यासळ:

सभथुन यासळ:

कका यासळ:

सवॊश यासळ:

कडमा यासळ:

भूॊगा

शीया

ऩडना

भोती

भाणेक

ऩडना

Red Coral

Diamond
(Special)

Green Emerald

Naturel Pearl
(Special)

Ruby

Green Emerald

(Old Berma)

(Special)
5.25" Rs. 1050
6.25" Rs. 1250
7.25" Rs. 1450
8.25" Rs. 1800
9.25" Rs. 2100
10.25" Rs. 2800

10 cent
20 cent
30 cent
40 cent
50 cent

Rs. 4100
Rs. 8200
Rs. 12500
Rs. 18500
Rs. 23500

(Special)
5.25" Rs. 9100
6.25" Rs. 12500
7.25" Rs. 14500
8.25" Rs. 19000
9.25" Rs. 23000
10.25" Rs. 28000

5.25"
6.25"
7.25"
8.25"
9.25"
10.25"

Rs. 910
Rs. 1250
Rs. 1450
Rs. 1900
Rs. 2300
Rs. 2800

(Special)
2.25" Rs. 12500
3.25" Rs. 15500
4.25" Rs. 28000
5.25" Rs. 46000
6.25" Rs. 82000

(Special)
5.25" Rs. 9100
6.25" Rs. 12500
7.25" Rs. 14500
8.25" Rs. 19000
9.25" Rs. 23000
10.25" Rs. 28000

** All Weight In Rati

All Diamond are Full
White Colour.

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

तुरा यासळ:

लृस्द्ळक यासळ:

धनु यासळ:

भकय यासळ:

कुॊब यासळ:

भीन यासळ:

शीया

भूॊगा

ऩुखयाज

नीरभ

नीरभ

ऩुखयाज

Diamond
(Special)

Red Coral

Y.Sapphire

B.Sapphire

B.Sapphire

Y.Sapphire

(Special)

(Special)

(Special)

(Special)

(Special)

10 cent
20 cent
30 cent
40 cent
50 cent

Rs. 4100
Rs. 8200
Rs. 12500
Rs. 18500
Rs. 23500

All Diamond are Full
White Colour.

5.25" Rs. 1050
6.25" Rs. 1250
7.25" Rs. 1450
8.25" Rs. 1800
9.25" Rs. 2100
10.25" Rs. 2800
** All Weight In Rati

5.25" Rs. 30000
6.25" Rs. 37000
7.25" Rs. 55000
8.25" Rs. 73000
9.25" Rs. 91000
10.25" Rs.108000

5.25" Rs. 30000
6.25" Rs. 37000
7.25" Rs. 55000
8.25" Rs. 73000
9.25" Rs. 91000
10.25" Rs.108000

5.25" Rs. 30000
6.25" Rs. 37000
7.25" Rs. 55000
8.25" Rs. 73000
9.25" Rs. 91000
10.25" Rs.108000

5.25" Rs. 30000
6.25" Rs. 37000
7.25" Rs. 55000
8.25" Rs. 73000
9.25" Rs. 91000
10.25" Rs.108000

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

** All Weight In Rati

* उऩमोक्त लजन औय भूल्म वे असधक औय कभ लजन औय भूल्म के यत्न एलॊ उऩयत्न बी शभाये मशा व्माऩायी भूल्म ऩय
उप्रब्ध शं ।

GURUTVA KARYALAY
92/3. BANK COLONY, BRAHMESHWAR PATNA, BHUBNESWAR-751018, (ORISSA)
Call us: 91 + 9338213418, 91+ 9238328785
Mail Us: gurutva.karyalay@gmail.com, gurutva_karyalay@yahoo.in,

अक्टू फय 2011

89

अक्टू फय 2011 भासवक ऩॊिाॊग
फद

लाय

भाश

ऩष

1

ळसन

आस्द्वन

ळुक्र

2

यत्रल

आस्द्वन

ळुक्र

3

वोभ

आस्द्वन

4

सतसथ
ितुथॉ-

वभासद्ऱ

नषि

वभासद्ऱ

मोग

24:01:34

अनुयाधा

28:10:57

प्रीसत

ऴद्षी

22:10:32

जेद्षा

27:12:25

ळुक्र

वद्ऱभी

21:03:34

भूर

भॊगर आस्द्वन

ळुक्र

अद्शभी

20:37:51

5

फुध

आस्द्वन

ळुक्र

नलभी

6

गुरु

आस्द्वन

ळुक्र

7

ळुक्र

आस्द्वन

8

ळसन

9

वभासद्ऱ

कयण

िॊद्र

यासळ

वभासद्ऱ

13:10:57

लृस्द्ळक -

आमुष्भान 18:33:59 कौरल

11:01:10

लृस्द्ळक 27:13:00

26:57:00

वौबाग्म

16:25:08

गय

09:31:42

धनु

-

ऩूलााऴाढ़

27:22:51

ळोबन

14:51:55

त्रलत्रद्श

08:45:21

धनु

-

20:53:23

उत्तयाऴाढ़

28:26:12

असतगॊड

13:50:35

फारल

08:41:12

धनु

09:35:00

दळभी

21:43:37

श्रलण

30:01:26

वुकभाा

13:18:19

तैसतर

09:14:34

भकय

-

ळुक्र

एकादळी

23:05:44

धसनद्षा

32:05:44

धृसत

13:09:29

लस्णज

10:21:40

भकय

19:01:00

आस्द्वन

ळुक्र

द्रादळी

24:50:21

धसनद्षा

08:05:21

ळूर

13:21:17

फल

11:55:02

कुॊब

-

यत्रल

आस्द्वन

ळुक्र

िमोदळी

26:52:47

ळतसबऴा

10:29:20

गॊड

13:47:09

कौरल

13:49:58

कुॊब

-

10

वोभ

आस्द्वन

ळुक्र

ितुदाळी

29:10:13

ऩूलााबाद्रऩद

13:09:17

लृत्रद्ध

14:27:05

गय

15:59:54

कुॊब

06:28:00

11

भॊगर आस्द्वन

ळुक्र

ऩूस्णाभा

31:36:06

उत्तयाबाद्रऩद

16:00:28

ध्रुल

15:14:32

त्रलत्रद्श

18:22:02

भीन

-

12

फुध

आस्द्वन

ळुक्र

07:36:40

ये लसत

18:59:10

व्माघात

16:09:29

फल

07:36:40

भीन

18:59:00

13

गुरु

कासताक

कृ ष्ण

प्रसतऩदा

10:08:11

अस्द्वनी

22:00:41

शऴाण

17:04:26

कौरल

10:08:11

भेऴ

-

14

ळुक्र

कासताक

कृ ष्ण

फद्रतीमा

12:39:43

बयणी

24:59:24

लज्र

18:00:20

गय

12:39:43

भेऴ

-

15

ळसन

कासताक

कृ ष्ण

तृतीमा

15:05:37

कृ सतका

27:49:41

सवत्रद्ध

18:50:37

त्रलत्रद्श

15:05:37

भेऴ

07:43:00

16

यत्रल

कासताक

कृ ष्ण

ितुथॉ

17:17:28

योफशस्ण

30:22:09

व्मसतऩात 19:28:43 फारल

17:17:28

लृऴ

-

17

वोभ

कासताक

कृ ष्ण

ऩॊिभी

19:06:49

भृगसळया

32:29:19

लरयमान

19:49:01

तैसतर

19:06:49

लृऴ

19:30:00

18

भॊगर कासताक

कृ ष्ण

ऴद्षी

20:23:22

भृगसळया

08:29:00

ऩरयग्रश

19:44:00

गय

07:49:37

सभथुन -

ऩॊिभी

ऩूस्णाभा/

प्रसतऩदा

21:15:38

फल

वभासद्ऱ

अक्टू फय 2011

90

19

फुध

कासताक

कृ ष्ण

वद्ऱभी

20:59:37

आद्रा

09:59:37

सळल

19:08:03

त्रलत्रद्श

08:47:26

सभथुन 28:39:00

20

गुरु

कासताक

कृ ष्ण

अद्शभी

20:49:56

ऩुनलावु

10:47:07

सवत्रद्ध

17:57:26

फारल

09:01:11

कका

-

21

ळुक्र

कासताक

कृ ष्ण

नलभी

19:50:34

ऩुष्म

10:47:45

वाध्म

16:06:30

तैसतर

08:27:08

कका

-

22

ळसन

कासताक

कृ ष्ण

दळभी

18:05:16

अद्ऴेऴा

10:01:31

ळुब

13:38:05

लस्णज

07:03:24

कका

10:01:00

23

यत्रल

कासताक

कृ ष्ण

एकादळी

15:35:55

भघा

08:31:14

ळुक्र

10:34:59

फारल

15:35:55

सवॊश

-

24

वोभ

कासताक

कृ ष्ण

द्रादळी

12:32:50

उत्तयापाल्गुनी 27:45:01 ब्रह्म

07:00:57

तैसतर

12:32:50

सवॊश

11:45:00

25

भॊगर कासताक

कृ ष्ण

09:02:33

शस्त

24:48:30

लैधसृ त

22:49:26

लस्णज

09:02:33

कडमा -

26

फुध

कासताक

कृ ष्ण

अभालस्मा 25:25:44 सििा

21:43:32

त्रलऴकुॊब

18:28:32

ितुष्ऩाद 15:21:02 कडमा 11:16:00

27

गुरु

कासताक

ळुक्र

प्रसतऩदा

21:41:24

स्लाती

18:44:13

प्रीसत

14:10:28

फकस्तुघ्न 11:32:58 तुरा

28

ळुक्र

कासताक

ळुक्र

फद्रतीमा

18:13:58

त्रलळाखा

15:59:54

आमुष्भान 10:02:43 फारल

07:55:13

तुरा

29

ळसन

कासताक

ळुक्र

तृतीमा

15:12:47

अनुयाधा

13:41:51

ळोबन

26:51:13

गय

15:12:47

लृस्द्ळक -

30

यत्रल

कासताक

ळुक्र

ितुथॉ

12:48:10

जेद्षा

11:57:33

असतगॊड

23:59:25

त्रलत्रद्श

12:48:10

लृस्द्ळक 11:58:00

31

वोभ

कासताक

ळुक्र

ऩॊिभी

11:03:53

भूर

10:54:30

वुकभाा

21:43:15

फारल

11:03:53

धनु

िमोदळीितुदाळी

-

10:39:00

-

 क्मा आऩको उच्ि असधकायी वे ऩये ळानी शं ?
 क्मा आऩकी अऩने वशकभािायी वे अनफन शोती शं ?
 क्मा आऩके असधनस्थ कभािायी आऩकी फात नशी भानते?
मफद आऩको अऩने उच्ि असधकायी, वशकभािायी, असधनस्थ कभािायी वे ऩये ळानी शं । आऩके अनूकुर कामा नशीॊ कयते मा आऩको

कयने नशीॊ दे त?े लश आऩकी फात नशीॊ भानतं? त्रफना लजश आऩको ऩये ळान कयते शं ? अन आलश्मक कामा आऩवे कयलाते शं । आऩका

प्रभोळन रुकलादे ते शं । उसित कामा कयने ऩय बी आऩके कामा भं नुक्ळ सनकारते शं ? मफद आऩ इवी तयश फक फकवी वभस्मा वे ग्रस्त
शं तो आऩ उन असधकायी, वशकभॉ, असधनस्थकभॉ मा अडम फकवी व्मत्रक्त त्रलळेऴ के नाभ वे गुरुत्ल कामाारत द्राया ळास्त्रोक्त त्रलसधत्रलधान वे भॊि सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त लळीकयण कलि एलॊ एव.एन.फडब्फी फनलारे एलॊ उवे अऩने घय-ओफपव भं
स्थात्रऩत कय अल्ऩ ऩूजा, त्रलसध-त्रलधान वे आऩ त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ कय वकते शं । मफद आऩ भॊि सवद्ध लळीकयण कलि एलॊ
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ियखा फदलव 8 रारफशादयु वद्ऱभ नलयाि.. भुळ ॊ ी प्रेभिॊद स्भृसत फदलव. उऩाॊग रसरता ऩॊिभी व्रत. नलभ नलयाि. बद्रकारी अद्शभी. कुभाय ऩूस्णाभा (उड़ीवा). त्रलद्यावागय जडभ. ऩषलसधानी भशाद्रादळी व्रत. श्माभफाफा ळसन आस्द्वन ळुक्र द्रादळी 24:50:21 9 यत्रल आस्द्वन ळुक्र िमोदळी 26:52:47 प्रदोऴ व्रत. रक्ष्भी एलॊ इडद्र ऩूजन. श्रीवत्मनायामण अग्र व्रत-कथा. भशात्भा गाॊधी ळास्त्री जमॊती. अफशॊ वा फदलव. नलाडन ऩूस्णाभा 12 फुध आस्द्वन ळुक्र ऩूस्णाभा/ 07:36:40 स्नान-दान शे तु उत्तभ आस्द्वनीऩूस्णाभा. दग ु ाा अद्शभी व्रत. त्रिळूरनी ऩूजन (सभसथराॊिर). भशाकुम्ब जमप्रकाळ (अग्रोशा). दग ु ाा भशानलभी व्रत. वूमसा वद्धाडतानुवाय भशासनळा ऩूजन. 10 वोभ आस्द्वन ळुक्र ितुदाळी 29:10:13 लायाश ितुदाळी. भशाद्शभी व्रत. द्रादळी. वाईंफाफा भशावभासध फदलव. नलयाि. 3 4 5 6 7 वोभ भॊगर फुध आस्द्वन आस्द्वन आस्द्वन ळुक्र ळुक्र ळुक्र वद्ऱभी अद्शभी नलभी 21:03:34 (फॊ). ळायदीम दग ू ा ु ााऩज अद्शभ 20:37:51 जमॊती. भाधलािामा जमॊती. ळभी एलॊ अऩास्जता-ऩूजा. नलयाि व्रत ऩूण. दळशया. ळयद ऩूस्णाभा.ा त्रलजमा दळभी.अक्टू फय 2011 91 अक्टू फय-2011 भासवक व्रत-ऩला-त्मौशाय फद लाय भाश ऩष सतसथ वभासद्ऱ प्रभुख व्रत-त्मोशाय 1 ळसन आस्द्वन ळुक्र ितुथॉ-ऩॊिभी 24:01:34 ऩॊिभ नलयाि. भाॉ वयस्लती आह्लान. . 11 भॊगर आस्द्वन ळुक्र ऩूस्णाभा कोजासगयी रक्ष्भी ऩूजा. नायामण जमॊती. 2 यत्रल आस्द्वन ळुक्र ऴद्षी छठा नलयाि. वयस्लती ऩूजन. ऩद्मनाब द्रादळी. भशासनळा ऩूजा. दग ु ाा नलभी. भशत्रऴा 31:36:06 लाल्भीफक जमॊती. गुरु आस्द्वन ळुक्र दळभी 21:43:37 ळुक्र आस्द्वन ळुक्र एकादळी 23:05:44 वीभोल्रॊघन. 20:53:23 वयस्लती त्रलवजान. गजगौयी व्रत. 22:10:32 तऩऴद्षी (उ). व्मसतऩात भशाऩात प्रात: 10:16 वे फदन 3:19 फजे तक. फौद्धालताय दळभी. भशायाव ऩूस्णाभा. ऩत्रिका-प्रलेळ. भशावद्ऱभी व्रत. बयत सभराऩ. स्कडद (कुभाय) ऴद्षी व्रत. ळस्त्र ऩूजन. अडनऩूणााद्शभी व्रत. शे भडत ऋतु . एकलीया ऩूजा. ऩाऩाॊकुळा एकादळी व्रत.

नयक कारी ितुदाळी. धनिमोदळी (धनतेयव). कृ त्रऴ-बूसभ ऩूजन. सळलयात्रि व्रत. ऩुष्म नषि (प्रात: 6:25). रूऩ ितुदाळी. श्रीभशालीय स्लाभी . 22 ळसन कासताक कृ ष्ण दळभी 18:05:16 - 23 यत्रल कासताक कृ ष्ण एकादळी 15:35:55 17 24 25 वोभ भॊगर कासताक कासताक कृ ष्ण कृ ष्ण द्रादळी िमोदळीितुदाळी का ऩुण्मकार दोऩशय 12:22 वे वूमाास्त तक.अक्टू फय 2011 92 प्रसतऩदा प्रायॊ ब. मभऩॊिक ळुरू.उ. कयाद्शभी (भशायाद्स) 21 ळुक्र कासताक कृ ष्ण नलभी 19:50:34 लैधसृ त भशाऩात यात्रि 10:35 वे 3:37 तक. कौभुदी दीऩभ ् (द. धडलडतरय 12:32:50 जमॊती. श्रीशरय गुरु कासताक कृ ष्ण प्रसतऩदा 10:08:11 14 ळुक्र कासताक कृ ष्ण फद्रतीमा 12:39:43 15 ळसन कासताक कृ ष्ण तृतीमा 15:05:37 16 यत्रल कासताक कृ ष्ण ितुथॉ 17:17:28 13 वॊऩण ू ा कासताक भाव ऩूजन. स्नान-दान- श्राद्ध शे तु उत्तभ कासताकी अभालस्मा. गौयी-केदाय व्रत (द. ऩत्रलि कासताक भाव प्रायॊ ब.). श्रीगणेळ. यात्रि 7:46) त्रलद्व खाद्य फदलव. कयलािौथ. श्रीशनुभान जमॊती. कासताक स्नान.बा. वूमा वामन लृस्द्ळक भं यात्रि 12:01 फजे. आकाळ दीऩ-दान ळुरू. गोलत्व द्रादळी व्रत (गौ-फछड़ा) गोत्रियाि प्रायॊ ब. वॊक्रास्डत वोभ कासताक कृ ष्ण ऩॊिभी 19:06:49 18 भॊगर कासताक कृ ष्ण ऴद्षी 20:23:22 19 फुध कासताक कृ ष्ण वद्ऱभी 20:59:37 20 गुरु कासताक कृ ष्ण अद्शभी 20:49:56 काराद्शभी व्रत. यभा (यम्बा) एकादळी व्रत. त्मागं. धूभालती जमॊती (ताॊत्रिक ऩॊिाॊग).भशारक्ष्भी -कुफेय ऩूजन.). कोफकरा ऩॊिभी व्रत (जैन) श्री याधा अद्शभी. (िॊ. कारयात्रि. अद्र्धयात्रि भं 25:25:44 कारी (श्माभा) ऩूजा. वुखयात्रि-जागयण.46 फजे. काराद्शभी व्रत. काभेद्वयी जमॊती. भासवक 09:02:33 ितुदाळी. ब्रजऩरयक्रभा प्रायॊ ब. फशुराद्शभी. 26 फुध कासताक कृ ष्ण अभालस्मा कभरा भशात्रलद्या जमॊती.बा. वोभ-प्रदोऴ व्रत. तुरा-वॊक्रास्डत यात्रि 11. मभ-तऩाण दीऩालरी भशोत्वल. कासताक भाव भं दार वॊकद्शी गणेळ ितुथॉ व्रत. दाम्ऩत्माद्शभी. नयकशया ितुदाळी. कृ ष्णत्रऩॊगाष ितुथॉ. अशोई अद्शभी. अळूडम ळमन व्रत.

द्यूत-क्रीड़ा. त्रलनामकी ितुथॉ व्रत. भ्रातृ फद्रतीमा (बइमादज ू ). गौतभ स्लाभी केलर सान.in. छठ ऩूजा ळुरू-नशाम खाम (त्रफशाय-झायखण्ड). मभ ऩॊिक वभाद्ऱ. गुजयाती वॊलत्वय 2068 प्रायॊ ब.57). दल ू ाा 30 यत्रल कासताक ळुक्र ितुथॉ 12:48:10 गणऩसत व्रत (िॊद्रो. ऩाण्डल ऩॊिभी. gurutva_karyalay@yahoo. 91+ 9238328785. लयदत्रलनामक ितुथॉ व्रत.अक्टू फय 2011 93 सनलााणोत्वल-भोष कल्माणक (जैन).कलि एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩके घय तक ऩशोिाने का शै । GURUTVA KARYALAY Bhubaneswar. छठ ऩूजा का दव ू या फदन-खयना (त्रफशाय-झायखण्ड). वामॊ 27 गुरु कासताक ळुक्र प्रसतऩदा 21:41:24 कार गो क्रीड़ा. (ORISSA) INDIA. स्लाभी याभतीथा की ऩुण्मसतसथ. फसर-ऩूजन.gurutva. त्रिफदलवीम वूमऴ ा द्षी व्रत प्रायॊ ब (सभसथराॊिर). मभ 28 ळुक्र कासताक ळुक्र फद्रतीमा 18:13:58 फद्रतीमा सििगुद्ऱ ऩूजन. Call Us : 91+ 9338213418.या. वयदाय ऩटे र जमॊती. दलात ऩूजा. Visit Us: http://gk. 8. नलीन िडद्र-दळान.http://www. स्कडद (कुभाय) ऴद्षी व्रत. भशालीयस्लाभी सनलााण वम्लत ् 2538 प्रायॊ ब.gurutvakaryalay. त्रलद्वकभाा-ऩूजन. गो-वॊलधान वद्ऱाश प्रायॊ ब.yolasite. उल्का दळान. स्लाभी दमानॊद स्भृसत फदलव. जडभ एलॊ अडनकूट भशोत्वल. वाधना.karyalay@gmail. 29 ळसन कासताक ळुक्र तृतीमा 15:12:47 त्रलद्वासभि जमॊती. गोलद्धा न ऩूजा.751 018. भॊि जाऩ इत्माफद कयने का वभम नशीॊ शं ? अफ आऩ अऩनी वभस्माओॊ वे फीना फकवी त्रलळेऴ ऩूजा-अिाना. वौबाग्म ऩॊिभी.com/ . नेऩारी वम्लत ् 1132 प्रायॊ ब.blogspot. त्रलसध-त्रलधान के आऩको अऩने कामा भं वपरता प्राद्ऱ कय वके एलॊ आऩको अऩने जीलन के वभस्त वुखो को प्राद्ऱ कयने का भागा प्राद्ऱ शो वके इव सरमे गुरुत्ल कामाारत द्राया शभाया उद्दे श्म ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे त्रलसळद्श तेजस्ली भॊिो द्राया सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त त्रलसबडन प्रकाय के मडि. अभ्मॊग स्नान. फग्लारी. इॊ फदया स्भृसत फदलव क्मा आऩ फकवी वभस्मा वे ग्रस्त शं ? आऩके ऩाव अऩनी वभस्माओॊ वे छुटकाया ऩाने शे तु ऩूजा-अिाना. सान 31 वोभ कासताक ळुक्र ऩॊिभी 11:03:53 ऩॊिभी (जैन).com/ . राब ऩॊिभी. E-mail Us:.com.

550 वे Rs.550 बूत-प्रेत बम. फुखाय.com भूल्म 370 550 820 1450 2450 4600 . शभरा. BRAHMESHWAR PATNA. BHUBNESWAR-751018. भूल्म भाि Rs.in. ऩागरऩन.अक्टू फय 2011 94 गणेळ रक्ष्भी मॊि प्राण-प्रसतत्रद्षत गणेळ रक्ष्भी मॊि को अऩने घय-दक ु ान-ओफपव-पैक्टयी भं ऩूजन स्थान. ळयीय भं खून की कभी. BANK COLONY. मौन ळत्रक्त भं लृत्रद्ध. यत्न राब. लाशन दघ ा नाओॊ. वूजन औय घाल.gurutva_karyalay@yahoo. िेिक.8200 तक वॊमुक्त आळीलााद प्राद्ऱ शोता शं । भॊगर मॊि वे ऋण भुत्रक्त भॊगर मॊि को जभीन-जामदाद के त्रललादो को शर कयने के काभ भं राब दे ता शं . 91 + 9238328785 Email Us:. गल्रा मा अरभायी भं स्थात्रऩत कयने व्माऩाय भं त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । मॊि के प्रबाल वे बाग्म भं उडनसत. गबाऩात वे फिाल. इव के असतरयक्त व्मत्रक्त को ऋण भुत्रक्त शे तु भॊगर वाधना वे असत ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं । त्रललाश आफद भं भॊगरी जातकं के कल्माण के सरए भॊगर मॊि की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । प्राण प्रसतत्रद्षत भॊगर मॊि के ऩूजन वे बाग्मोदम. भान-प्रसतद्षा एलॊ व्माऩय भं लृत्रद्ध शोती शं एलॊ आसथाक स्स्थभं वुधाय शोता शं । गणेळ रक्ष्भी मॊि को स्थात्रऩत कयने वे बगलान गणेळ औय दे ली रक्ष्भी का Rs.karyalay@gmail. (ORISSA) Call Us – 91 + 9338213418. ळिु त्रलजम. तॊि भॊि के दद्श ु प्रबा. िोयी इत्मादी वे फिाल शोता शं । ु ट कुफेय मॊि कुफेय मॊि के ऩूजन वे स्लणा राब. gurutva. ऩैतक ृ वम्ऩत्ती एलॊ गड़े शुए धन वे राब प्रासद्ऱ फक काभना कयने लारे व्मत्रक्त के सरमे कुफेय मॊि अत्मडत वपरता दामक शोता शं । एवा ळास्त्रोक्त लिन शं । कुफेय मॊि के ऩूजन वे एकासधक स्त्रोि वे धन का प्राद्ऱ शोकय धन वॊिम शोता शं । ताम्र ऩि ऩय वुलणा ऩोरीव ताम्र ऩि ऩय यजत ऩोरीव ताम्र ऩि ऩय (Gold Plated) (Silver Plated) (Copper) वाईज 2” X 2” 3” X 3” 4” X 4” 6” X 6” 9” X 9” 12” X12” भूल्म 640 1250 1850 2700 4600 8200 वाईज 2” X 2” 3” X 3” 4” X 4” 6” X 6” 9” X 9” 12” X12” भूल्म 460 820 1250 2100 3700 6400 वाईज 2” X 2” 3” X 3” 4” X 4” 6” X 6” 9” X 9” 12” X12” GURUTVA KARYALAY 92/3.

blogspot. (३)-धैयीम रक्ष्भी. BHUBNESWAR-751018.com. Our Website:. लश गॊगा जर के वभान ऩत्रलि शोता शं । इव सरमे इवे वफवे तेजस्ली एलॊ परदासम कशजाता शं । जैवे अभृत वे उत्तभ कोई औऴसध नशीॊ. BANK COLONY. (७)-त्रलद्या रक्ष्भी औय (८)-धन रक्ष्भी इन वबी रुऩो का स्लत् अळीलााद प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म भाि: Rs-1050 भॊि सवद्ध व्माऩाय लृत्रद्ध कलि व्माऩाय लृत्रद्ध कलि व्माऩाय के ळीघ्र उडनसत के सरए उत्तभ शं । िाशं कोई बी व्माऩाय शो अगय उवभं राब के स्थान ऩय फाय-फाय शासन शो यशी शं । फकवी प्रकाय वे व्माऩाय भं फाय-फाय फाॊधा उत्ऩडन शो यशी शो! तो वॊऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत भॊि सवद्ध ऩूणा िैतडम मुक्त व्माऩात लृत्रद्ध मॊि को व्मऩाय स्थान मा घय भं स्थात्रऩत कयने वे ळीघ्र शी व्माऩाय लृत्रद्ध एलॊ भूल्म भाि: Rs. BRAHMESHWAR PATNA. (६)-त्रलजम रक्ष्भी. (४)गज रक्ष्भी.com/ . (२)-धाडम रक्ष्भी.karyalay@gmail. 91+ 9238328785 Mail Us: gurutva.yolasite.95 अक्टू फय 2011 नलयत्न जफड़त श्री मॊि ळास्त्र लिन के अनुवाय ळुद्ध वुलणा मा यजत भं सनसभात श्री मॊि के िायं औय मफद नलयत्न जड़ला ने ऩय मश नलयत्न जफड़त श्री मॊि कशराता शं । वबी यत्नो को उवके सनस्द्ळत स्थान ऩय जड़ कय रॉकेट के रूऩ भं धायण कयने वे व्मत्रक्त को अनॊत एद्वमा एलॊ रक्ष्भी की प्रासद्ऱ शोती शं । व्मत्रक्त को एवा आबाव शोता शं जैवे भाॊ रक्ष्भी उवके वाथ शं । नलग्रश को श्री मॊि के वाथ रगाने वे ग्रशं की अळुब दळा का धायण कयने लारे व्मत्रक्त ऩय प्रबाल नशीॊ शोता शं । गरे भं शोने के कायण मॊि ऩत्रलि यशता शं एलॊ स्नान कयते वभम इव मॊि ऩय स्ऩळा कय जो जर त्रफॊद ु ळयीय को रगते शं .in.370 & 730 सनतडतय राब प्राद्ऱ शोता शं । भॊगर मॊि (त्रिकोण) भॊगर मॊि को जभीन-जामदाद के त्रललादो को शर कयने के काभ भं राब दे ता शं . उवी प्रकाय रक्ष्भी प्रासद्ऱ के सरमे श्री मॊि वे उत्तभ कोई मॊि वॊवाय भं नशीॊ शं एवा ळास्त्रोक्त लिन शं । इव प्रकाय के नलयत्न जफड़त श्री मॊि गुरूत्ल कामाारम द्राया ळुब भुशूता भं प्राण प्रसतत्रद्षत कयके फनालाए जाते शं । अद्श रक्ष्भी कलि अद्श रक्ष्भी कलि को धायण कयने वे व्मत्रक्त ऩय वदा भाॊ भशा रक्ष्भी की कृ ऩा एलॊ आळीलााद फना यशता शं । स्जस्वे भाॊ रक्ष्भी के अद्श रुऩ (१)-आफद रक्ष्भी.550 GURUTVA KARYALAY 92/3. gurutva_karyalay@yahoo. इव के असतरयक्त व्मत्रक्त को ऋण भुत्रक्त शे तु भॊगर वाधना वे असत ळीध्र राब प्राद्ऱ शोता शं । त्रललाश आफद भं भॊगरी जातकं के कल्माण के सरए भॊगर मॊि की ऩूजा कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं । भूल्म भाि Rs. (५)-वॊतान रक्ष्भी.http://gk.com/ and http://gurutvakaryalay. (ORISSA) Call us: 91 + 9338213418.

gurutva_karyalay@yahoo. BRAHMESHWAR PATNA. BANK COLONY. 9238328785 Email Us:. gurutva.in. लास्तु एलॊ आध्मास्त्भक सान वं वॊफॊसधत त्रलऴमं भं शभाये 30 लऴो वे असधक लऴा के अनुबलं के वाथ ज्मोसतव वे जुडे नमे-नमे वॊळोधन के आधाय ऩय आऩ अऩनी शय वभस्मा के वयर वभाधान प्राद्ऱ कय वकते शं । GURUTVA KARYALAY 92/3.9338213418. वाधना. भॊि जाऩ इत्माफद कयने का वभम नशीॊ शं ? अफ आऩ अऩनी वभस्माओॊ वे फीना फकवी त्रलळेऴ ऩूजा-अिाना. (ORISSA) Call Us .कलि एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩके घय तक ऩशोिाने का शै । ज्मोसतऴ वॊफॊसधत त्रलळेऴ ऩयाभळा ज्मोसत त्रलसान.com ओनेक्व जो व्मत्रक्त ऩडना धायण कयने भे अवभथा शो उडशं फुध ग्रश के उऩयत्न ओनेक्व को धायण कयना िाफशए। उच्ि सळषा प्रासद्ऱ शे तु औय स्भयण ळत्रक्त के त्रलकाव शे तु ओनेक्व यत्न की अॊगूठी को दामं शाथ की वफवे छोटी उॊ गरी मा रॉकेट फनला कय गरे भं धायण कयं । ओनेक्व यत्न धायण कयने वे त्रलद्या-फुत्रद्ध की प्रासद्ऱ शो शोकय स्भयण ळत्रक्त का त्रलकाव शोता शं । . त्रलसध-त्रलधान के आऩको अऩने कामा भं वपरता प्राद्ऱ कय वके एलॊ आऩको अऩने जीलन के वभस्त वुखो को प्राद्ऱ कयने का भागा प्राद्ऱ शो वके इव सरमे गुरुत्ल कामाारत द्राया शभाया उद्दे श्म ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे त्रलसळद्श तेजस्ली भॊिो द्राया सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त त्रलसबडन प्रकाय के मडि. अॊक ज्मोसतऴ.96 अक्टू फय 2011 त्रललाश वॊफॊसधत वभस्मा क्मा आऩके रडके-रडकी फक आऩकी ळादी भं अनालश्मक रूऩ वे त्रलरम्फ शो यशा शं मा उनके लैलाफशक जीलन भं खुसळमाॊ कभ शोती जायशी शं औय वभस्मा असधक फढती जायशी शं । एवी स्स्थती शोने ऩय अऩने रडके-रडकी फक कुॊडरी का अध्ममन अलश्म कयलारे औय उनके लैलाफशक वुख को कभ कयने लारे दोऴं के सनलायण के उऩामो के फाय भं त्रलस्ताय वे जनकायी प्राद्ऱ कयं । सळषा वे वॊफॊसधत वभस्मा क्मा आऩके रडके-रडकी की ऩढाई भं अनालश्मक रूऩ वे फाधा-त्रलघ्न मा रुकालटे शो यशी शं ? फच्िो को अऩने ऩूणा ऩरयश्रभ एलॊ भेशनत का उसित पर नशीॊ सभर यशा? अऩने रडके-रडकी की कुॊडरी का त्रलस्तृत अध्ममन अलश्म कयलारे औय उनके त्रलद्या अध्ममन भं आनेलारी रुकालट एलॊ दोऴो के कायण एलॊ उन दोऴं के सनलायण के उऩामो के फाय भं त्रलस्ताय वे जनकायी प्राद्ऱ कयं । क्मा आऩ फकवी वभस्मा वे ग्रस्त शं ? आऩके ऩाव अऩनी वभस्माओॊ वे छुटकाया ऩाने शे तु ऩूजा-अिाना. BHUBNESWAR-751018.karyalay@gmail.

एवा ळास्त्रोक्त लिन शं ।  फद्रऩुष्कय मोग भं फकमे गमे ळुब कामो का राब दोगुना शोता शं । एवा ळास्त्रोक्त लिन शं ।  गुरु ऩुष्माभृत मोग भं फकमे गमे फकमे गमे ळुब कामा भे ळुब परो की प्रासद्ऱ शोती शं . एवा ळास्त्रोक्त लिन शं । दै सनक ळुब एलॊ अळुब वभम सान तासरका गुसरक कार मभ कार (ळुब) (अळुब) वभम अलसध वभम अलसध वभम अलसध यत्रललाय 03:00 वे 04:30 12:00 वे 01:30 04:30 वे 06:00 वोभलाय 01:30 वे 03:00 10:30 वे 12:00 07:30 वे 09:00 भॊगरलाय 12:00 वे 01:30 09:00 वे 10:30 03:00 वे 04:30 फुधलाय 10:30 वे 12:00 07:30 वे 09:00 12:00 वे 01:30 गुरुलाय 09:00 वे 10:30 06:00 वे 07:30 01:30 वे 03:00 ळुक्रलाय 07:30 वे 09:00 03:00 वे 04:30 10:30 वे 12:00 ळसनलाय 06:00 वे 07:30 01:30 वे 03:00 09:00 वे 10:30 लाय याशु कार (अळुब) .अक्टू फय 2011 97 अक्टू फय 2011 -त्रलळेऴ मोग कामा सवत्रद्ध मोग 2/3 यात्रि 3:12 वे वूमोदम तक 17 वूमोदम वे फदन-यात 11 वूमोदम वे फदन 3:59 तक 20 वूमोदम वे फदन-यात 13 वूमोदम वे यात्रि 9:59 तक 28 फदन 3:59 वे यातबय 15/16 यात्रि 3:49 वे वूमोदम तक 30 फदन 11:56 वे यातबय अभृत मोग 15/16 यात्रि 3:49 वे वूमोदम तक 17 वूमोदम वे फदन-यात 20 प्रात: 10:46 वे फदन-यात फद्रऩुष्कय (दोगुना पर) मोग 8 वूमोदम वे प्रात: 8:04 तक गुरु-ऩुष्माभृत मोग 20 प्रात: 10:46 वे फदन-यात मोग‍पर‍:  कामा सवत्रद्ध मोग भे फकमे गमे ळुब कामा भे सनस्द्ळत वपरता प्राद्ऱ शोती शं .

भध्मभ औय अळुब शं । * शय कामा के सरमे ळुब/अभृत/राब का िौघफडमे के स्लाभी ग्रश ळुब िौघफडमा भध्मभ िौघफडमा अळुब िौघफड़मा िौघफडमा स्लाभी ग्रश िौघफडमा स्लाभी ग्रश िौघफडमा स्लाभी ग्रश ळुब गुरु िय उद्बे ग वूमा अभृत िॊद्रभा कार ळसन राब फुध योग भॊगर ळुक्र िौघफड़मा उत्तभ भाना जाता शं । * शय कामा के सरमे िर/कार/योग/उद्रे ग का िौघफड़मा उसित नशीॊ भाना जाता। .अक्टू फय 2011 98 फदन के िौघफडमे वभम यत्रललाय वोभलाय भॊगरलाय फुधलाय गुरुलाय ळुक्रलाय ळसनलाय 06:00 वे 07:30 उद्रे ग अभृत योग राब ळुब िर कार 07:30 वे 09:00 िर कार उद्रे ग अभृत योग राब ळुब 09:00 वे 10:30 राब ळुब िर कार उद्रे ग अभृत योग 10:30 वे 12:00 अभृत योग राब ळुब िर कार उद्रे ग 12:00 वे 01:30 कार उद्रे ग अभृत योग राब ळुब िर 01:30 वे 03:00 ळुब िर कार उद्रे ग अभृत योग राब 03:00 वे 04:30 योग राब ळुब िर कार उद्रे ग अभृत 04:30 वे 06:00 उद्रे ग अभृत योग राब ळुब िर कार यात के िौघफडमे वभम यत्रललाय वोभलाय भॊगरलाय फुधलाय गुरुलाय ळुक्रलाय ळसनलाय 06:00 वे 07:30 ळुब िर कार उद्रे ग अभृत योग राब 07:30 वे 09:00 अभृत योग राब ळुब िर कार उद्रे ग 09:00 वे 10:30 िर कार उद्रे ग अभृत योग राब ळुब 10:30 वे 12:00 योग राब ळुब िर कार उद्रे ग अभृत 01:30 वे 03:00 राब ळुब िर कार उद्रे ग अभृत योग 03:00 वे 04:30 उद्रे ग अभृत योग राब ळुब िर कार 04:30 वे 06:00 ळुब िर कार उद्रे ग अभृत योग राब 12:00 वे 01:30 कार उद्रे ग अभृत योग राब ळुब िर ळास्त्रोक्त भत के अनुळाय मफद फकवी बी कामा का प्रायॊ ब ळुब भुशूता मा ळुब वभम ऩय फकमा जामे तो कामा भं वपरता प्राद्ऱ शोने फक वॊबालना ज्मादा प्रफर शो जाती शं । इव सरमे दै सनक ळुब वभम िौघफड़मा दे खकय प्राद्ऱ फकमा जा वकता शं । नोट: प्राम् फदन औय यात्रि के िौघफड़मे फक सगनती क्रभळ् वूमोदम औय वूमाास्त वे फक जाती शं । प्रत्मेक िौघफड़मे फक अलसध 1 घॊटा 30 सभसनट अथाात डे ढ़ घॊटा शोती शं । वभम के अनुवाय िौघफड़मे को ळुबाळुब तीन बागं भं फाॊटा जाता शं . जो क्रभळ् ळुब.

फदन-यात के २४ घॊटं भं ळुब-अळुब वभम को वभम वे ऩूला सात कय अऩने कामा सवत्रद्ध के सरए प्रमोग कयना िाफशमे। त्रलद्रानो के भत वे इस्च्छत कामा सवत्रद्ध के सरए ग्रश वे वॊफॊसधत शोया का िुनाल कयने वे त्रलळेऴ राब प्राद्ऱ शोता शं ।  वूमा फक शोया वयकायी कामो के सरमे उत्तभ शोती शं ।  िॊद्रभा फक शोया वबी कामं के सरमे उत्तभ शोती शं ।  भॊगर फक शोया कोटा -किेयी के कामं के सरमे उत्तभ शोती शं ।  फुध फक शोया त्रलद्या-फुत्रद्ध अथाात ऩढाई के सरमे उत्तभ शोती शं ।  गुरु फक शोया धासभाक कामा एलॊ त्रललाश के सरमे उत्तभ शोती शं ।  ळुक्र फक शोया मािा के सरमे उत्तभ शोती शं ।  ळसन फक शोया धन-द्रव्म वॊफॊसधत कामा के सरमे उत्तभ शोती शं । .घॊ यत्रललाय वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन वोभलाय िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा भॊगरलाय भॊगर वूमा ळुक्र फुध ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र फुधलाय फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर गुरुलाय गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध ळुक्रलाय ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु ळसनलाय ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र िॊद्र िॊद्र फुध 10.घॊ 3.घॊ 4.घॊ 2.वूमोदम वे वूमाास्त तक लाय 1.घॊ 6.घॊ 12.घॊ यात फक शोया – वूमाास्त वे वूमोदम तक यत्रललाय गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध वोभलाय ळुक्र फुध िॊद्र ळसन भॊगरलाय ळसन गुरु भॊगर फुधलाय वूमा ळुक्र फुध गुरुलाय िॊद्र ळसन गुरु ळुक्रलाय भॊगर वूमा ळुक्र फुध ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसनलाय फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर वूमा ळुक्र फुध िॊद्र ळसन गुरु भॊगर िॊद्र िॊद्र शोया भुशूता को कामा सवत्रद्ध के सरए ऩूणा परदामक एलॊ अिूक भाना जाता शं .घॊ 7.घॊ 9.घॊ 8.अक्टू फय 2011 99 फदन फक शोया .घॊ 5.घॊ 11.

अक्टू फय 2011 100 ग्रश िरन अक्टू फय -2011 Day 1 Sun Mon Ma 05:13:27 07:03:08 03:13:10 2 05:14:26 07:17:26 3 05:15:25 4 Me Jup Ven Sat Rah Ket Ua Nep Plu 05:15:09 00:14:42 05:25:43 05:24:35 07:22:48 01:22:48 11:08:21 10:04:31 08:10:54 03:13:45 05:16:54 00:14:36 05:26:58 05:24:42 07:22:46 01:22:46 11:08:18 10:04:30 08:10:55 08:01:18 03:14:21 05:18:38 00:14:30 05:28:12 05:24:49 07:22:46 01:22:46 11:08:16 10:04:29 08:10:55 05:16:24 08:14:44 03:14:56 05:20:21 00:14:24 05:29:27 05:24:57 07:22:47 01:22:47 11:08:13 10:04:28 08:10:56 5 05:17:23 08:27:48 03:15:32 05:22:04 00:14:18 06:00:41 05:25:04 07:22:46 01:22:46 11:08:11 10:04:27 08:10:56 6 05:18:22 09:10:33 03:16:07 05:23:45 00:14:11 06:01:56 05:25:11 07:22:44 01:22:44 11:08:09 10:04:26 08:10:57 7 05:19:21 09:23:03 03:16:42 05:25:26 00:14:04 06:03:11 05:25:19 07:22:39 01:22:39 11:08:06 10:04:25 08:10:58 8 05:20:20 10:05:21 03:17:17 05:27:06 00:13:58 06:04:25 05:25:26 07:22:32 01:22:32 11:08:04 10:04:24 08:10:58 9 05:21:19 10:17:29 03:17:52 05:28:45 00:13:51 06:05:40 05:25:33 07:22:22 01:22:22 11:08:02 10:04:23 08:10:59 10 05:22:19 10:29:31 03:18:26 06:00:24 00:13:44 06:06:54 05:25:41 07:22:11 01:22:11 11:07:59 10:04:22 08:11:00 11 05:23:18 11:11:27 03:19:01 06:02:02 00:13:37 06:08:09 05:25:48 07:21:59 01:21:59 11:07:57 10:04:21 08:11:00 12 05:24:17 11:23:20 03:19:36 06:03:38 00:13:29 06:09:24 05:25:55 07:21:48 01:21:48 11:07:55 10:04:20 08:11:01 13 05:25:16 00:05:11 03:20:10 06:05:15 00:13:22 06:10:38 05:26:02 07:21:38 01:21:38 11:07:52 10:04:19 08:11:02 14 05:26:16 00:17:02 03:20:44 06:06:50 00:13:15 06:11:53 05:26:10 07:21:31 01:21:31 11:07:50 10:04:18 08:11:03 15 05:27:15 00:28:54 03:21:19 06:08:25 00:13:07 06:13:07 05:26:17 07:21:26 01:21:26 11:07:48 10:04:17 08:11:04 16 05:28:15 01:10:50 03:21:53 06:09:59 00:12:59 06:14:22 05:26:24 07:21:23 01:21:23 11:07:46 10:04:16 08:11:05 17 05:29:14 01:22:53 03:22:27 06:11:32 00:12:52 06:15:37 05:26:32 07:21:22 01:21:22 11:07:44 10:04:15 08:11:05 18 06:00:14 02:05:08 03:23:01 06:13:05 00:12:44 06:16:51 05:26:39 07:21:23 01:21:23 11:07:41 10:04:15 08:11:06 19 06:01:13 02:17:37 03:23:34 06:14:37 00:12:36 06:18:06 05:26:46 07:21:24 01:21:24 11:07:39 10:04:14 08:11:07 20 06:02:13 03:00:27 03:24:08 06:16:09 00:12:28 06:19:20 05:26:54 07:21:25 01:21:25 11:07:37 10:04:13 08:11:08 21 06:03:12 03:13:41 03:24:42 06:17:40 00:12:20 06:20:35 05:27:01 07:21:24 01:21:24 11:07:35 10:04:13 08:11:09 22 06:04:12 03:27:22 03:25:15 06:19:10 00:12:12 06:21:50 05:27:08 07:21:22 01:21:22 11:07:33 10:04:12 08:11:10 23 06:05:12 04:11:31 03:25:48 06:20:40 00:12:04 06:23:04 05:27:16 07:21:18 01:21:18 11:07:31 10:04:11 08:11:12 24 06:06:12 04:26:08 03:26:21 06:22:09 00:11:56 06:24:19 05:27:23 07:21:12 01:21:12 11:07:29 10:04:11 08:11:13 25 06:07:11 05:11:06 03:26:54 06:23:37 00:11:48 06:25:34 05:27:30 07:21:05 01:21:05 11:07:27 10:04:10 08:11:14 26 06:08:11 05:26:19 03:27:27 06:25:05 00:11:40 06:26:48 05:27:37 07:20:58 01:20:58 11:07:25 10:04:10 08:11:15 27 06:09:11 06:11:36 03:28:00 06:26:32 00:11:32 06:28:03 05:27:45 07:20:53 01:20:53 11:07:23 10:04:09 08:11:16 28 06:10:11 06:26:46 03:28:33 06:27:59 00:11:24 06:29:17 05:27:52 07:20:49 01:20:49 11:07:21 10:04:09 08:11:17 29 06:11:11 07:11:40 03:29:05 06:29:25 00:11:16 07:00:32 05:27:59 07:20:47 01:20:47 11:07:19 10:04:08 08:11:19 30 06:12:11 07:26:10 03:29:37 07:00:50 00:11:07 07:01:47 05:28:06 07:20:46 01:20:46 11:07:17 10:04:08 08:11:20 31 06:13:11 08:10:13 04:00:09 07:02:14 00:10:59 07:03:01 05:28:14 07:20:47 01:20:47 11:07:15 10:04:08 08:11:21 .

भॊि एलॊ तॊि उल्रेख अऩने ग्रॊथो भं कय भानल जीलन को राब प्रदान कयने का वाथाक प्रमाव शजायो लऴा ऩूला फकमा था। फुत्रद्धजीलो के भत वे जो व्मत्रक्त जीलनबय अऩनी फदनिमाा ऩय सनमभ.101 अक्टू फय 2011 वला योगनाळक मॊि/कलि भनुष्म अऩने जीलन के त्रलसबडन वभम ऩय फकवी ना फकवी वाध्म मा अवाध्म योग वे ग्रस्त शोता शं । उसित उऩिाय वे ज्मादातय वाध्म योगो वे तो भुत्रक्त सभर जाती शं . स्जवका सनमभीत त्रलकाव क्रभ फद्ध तयीके वे शोता यशता शं । जफ इन कोसळकाओ के क्रभ भं ऩरयलतान शोता शै मा त्रलखॊफडन शोता शं तफ व्मत्रक्त के ळयीय भं स्लास््म वॊफॊधी त्रलकायो उत्ऩडन शोते शं । एलॊ इन कोसळकाओ का वॊफॊध नल ग्रशो के वाथ शोता शं । स्जस्वे योगो के शोने के कायणा व्मत्रक्तके जडभाॊग वे दळा-भशादळा एलॊ ग्रशो फक गोिय भं स्स्थती वे प्राद्ऱ शोता शं । वला योग सनलायण कलि एलॊ भशाभृत्मुॊजम मॊि के भाध्मभ वे व्मत्रक्त के जडभाॊग भं स्स्थत कभजोय एलॊ ऩीफडत ग्रशो के अळुब प्रबाल को कभ कयने का कामा वयरता ऩूलक ा फकमा जावकता शं । जेवे शय व्मत्रक्त को ब्रह्माॊड फक उजाा एलॊ ऩृ्ली का गुरुत्लाकऴाण फर प्रबालीत कताा शं फठक उवी प्रकाय कलि एलॊ मॊि के भाध्मभ वे ब्रह्माॊड फक उजाा के वकायात्भक प्रबाल वे व्मत्रक्त को वकायात्भक उजाा प्राद्ऱ शोती शं स्जस्वे योग के प्रबाल को कभ कय योग भुक्त कयने शे तु वशामता सभरती शं । योग सनलायण शे तु भशाभृत्मुॊजम भॊि एलॊ मॊि का फडा भशत्ल शं । स्जस्वे फशडद ू वॊस्कृ सत का प्राम् शय व्मत्रक्त भशाभृत्मुॊजम भॊि वे ऩरयसित शं । . जशा आधुसनक सिफकत्वा ळास्त्र अषभ शोजाता शं लशा ज्मोसतऴ ळास्त्र द्राया योग के भूर(जड़) को ऩकड कय उवका सनदान कयना राबदामक एलॊ उऩामोगी सवद्ध शोता शं । शय व्मत्रक्त भं रार यॊ गकी कोसळकाए ऩाइ जाती शं . रेफकन कबी-कबी वाध्म योग शोकय बी अवाध्मा शोजाते शं . एवे व्मत्रक्त को त्रलसबडन योग वे ग्रसवत शोने की वॊबालना कभ शोती शं । रेफकन आज के फदरते मुग भं एवे व्मत्रक्त बी बमॊकय योग वे ग्रस्त शोते फदख जाते शं । क्मोफक वभग्र वॊवाय कार के अधीन शं । एलॊ भृत्मु सनस्द्ळत शं स्जवे त्रलधाता के अराला औय कोई टार नशीॊ वकता. रेफकन योग शोने फक स्स्थती भं व्मत्रक्त योग दयू कयने का प्रमाव तो अलश्म कय वकता शं । इव सरमे मॊि भॊि एलॊ तॊि के कुळर जानकाय वे मोग्म भागादळान रेकय व्मत्रक्त योगो वे भुत्रक्त ऩाने का मा उवके प्रबालो को कभ कयने का प्रमाव बी अलश्म कय वकता शं । ज्मोसतऴ त्रलद्या के कुळर जानकय बी कार ऩुरुऴकी गणना कय अनेक योगो के अनेको यशस्म को उजागय कय वकते शं । ज्मोसतऴ ळास्त्र के भाध्मभ वे योग के भूरको ऩकडने भे वशमोग सभरता शं . एसव स्स्थती भं राबा प्रासद्ऱ के सरमे व्मत्रक्त एक डॉक्टय वे दव ू ये डॉक्टय के िक्कय रगाने को फाध्म शो जाता शं । बायतीम ऋऴीमोने अऩने मोग वाधना के प्रताऩ वे योग ळाॊसत शे तु त्रलसबडन आमुलये औऴधो के असतरयक्त मॊि. वॊमभ यख कय आशाय ग्रशण कयता शं . मा कोइ अवाध्म योग वे ग्रसवत शोजाते शं । शजायो राखो रुऩमे खिा कयने ऩय बी असधक राब प्राद्ऱ नशीॊ शो ऩाता। डॉक्टय द्राया फदजाने लारी दलाईमा अल्ऩ वभम के सरमे कायगय वात्रफत शोती शं .

Kavach. loss of profit. We honour our clients' rights to privacy and will release no information about our any other clients' transactions with us. our Article dose not produce any bad energy. preciouse and semi preciouse Gems stone deliver on your door step. स्लास््म राब औय ळायीरयक यषण प्राद्ऱ कयने शे तु वला योगनाळक कलि एलॊ मॊि वला उऩमोगी शोता शं ।  आज के बौसतकता लादी आधुसनक मुगभे अनेक एवे योग शोते शं .  Our skill lies in communicating clearly and honestly with each client. मा दो बाई एक फश नषिभे जडभ रेते शं . We are keepers of secrets. We will not be liable for your any indirect consequential loss. yantra and any other article are prepared on the Principle of Positiv energy. स्जवका उऩिाय ओऩये ळन औय दलावे बी कफठन शो जाता शं । कुछ योग एवे शोते शं स्जवे फताने भं रोग फशिफकिाते शं ळयभ अनुबल कयते शं एवे योगो को योकने शे तु एलॊ उवके उऩिाय शे तु वला योगनाळक कलि एलॊ मॊि राबादासम सवद्ध शोता शं ।  प्रत्मेक व्मत्रक्त फक जेवे-जेवे आमु फढती शं लैवे-लवै उवके ळयीय फक ऊजाा शोती जाती शं । स्जवके वाथ अनेक प्रकाय के त्रलकाय ऩैदा शोने रगते शं एवी स्स्थती भं उऩिाय शे तु वलायोगनाळक कलि एलॊ मॊि परप्रद शोता शं ।  स्जव घय भं त्रऩता-ऩुि. mantra and promptings of the natural and spiritual world. . तफ उवकी भाता के सरमे असधक कद्शदामक स्स्थती शोती शं । उऩिाय शे तु भशाभृत्मुॊजम मॊि परप्रद शोता शं ।  स्जव व्मत्रक्त का जडभ ऩरयसध मोगभे शोता शं उडशे शोने लारे भृत्मु तुल्म कद्श एलॊ शोने लारे योग. सिॊता भं उऩिाय शे तु वला योगनाळक कलि एलॊ मॊि ळुब परप्रद शोता शं । नोट:.ऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एलॊ ऩूणा िैतडम मुक्त वला योग सनलायण कलि एलॊ मॊि के फाये भं असधक जानकायी शे तु शभ वे वॊऩका कयं । Declaration Notice     We do not accept liability for any out of date or incorrect information.  Our ability lies in having learned to read the subtle spiritual energy. भाता-ऩुिी.102 अक्टू फय 2011 कलि के राब :  एवा ळास्त्रोक्त लिन शं स्जव घय भं भशाभृत्मुॊजम मॊि स्थात्रऩत शोता शं लशा सनलाव कताा शो नाना प्रकाय फक आसध-व्मासध-उऩासध वे यषा शोती शं ।  ऩूणा प्राण प्रसतत्रद्षत एलॊ ऩूणा िैतडम मुक्त वला योग सनलायण कलि फकवी बी उम्र एलॊ जासत धभा के रोग िाशे स्त्री शो मा ऩुरुऴ धायण कय वकते शं ।  जडभाॊगभं अनेक प्रकायके खयाफ मोगो औय खयाफ ग्रशो फक प्रसतकूरता वे योग उतऩडन शोते शं ।  कुछ योग वॊक्रभण वे शोते शं एलॊ कुछ योग खान-ऩान फक असनमसभतता औय अळुद्धतावे उत्ऩडन शोते शं । कलि एलॊ मॊि द्राया एवे अनेक प्रकाय के खयाफ मोगो को नद्श कय. Yantra. Rudraksh. Our Goal  Here Our goal has The classical Method-Legislation with Proved by specific with fiery chants prestigious full consciousness (Puarn Praan Pratisthit) Give miraculous powers & Good effect All types of Yantra. If you will cancel your order for any article we can not any amount will be refunded or Exchange.  Our all kawach. भाता-ऩुि.

460/- बूसभ राब कलि .  क्मं िुने भॊि सवद्ध कलि?  उऩमोग भं आवान कोई प्रसतफडध नशीॊ  कोई त्रलळेऴ सनसत-सनमभ नशीॊ  कोई फुया प्रबाल नशीॊ  कलि के फाये भं असधक जानकायी शे तु कलि वूसि वला कामा सवत्रद्ध कलि .640/- काभ दे ल कलि .280/.640/- व्माऩय लृत्रद्ध कलि .730/- लळीकयण कलि.in.कषा 10 तक के सरए लळीकयण कलि .gurutva_karyalay@yahoo.370/-* कामा सवत्रद्ध कलि .yolasite.अक्टू फय 2011 103 भॊि सवद्ध कलि भॊि सवद्ध कलि को त्रलळेऴ प्रमोजन भं उऩमोग के सरए औय ळीघ्र प्रबाल ळारी फनाने के सरए तेजस्ली भॊिो द्राया ळुब भशूता भं ळुब फदन को तैमाय फकमे जाते शै .730/- अद्श रक्ष्भी कलि . 9238328785 Our Website:.640/- ऩसत लळीकयण कलि .* नज़य यषा कलि .550/-* (2-3 व्मत्रक्तके सरए) आकस्स्भक धन प्रासद्ऱ कलि-910/- ळिु त्रलजम कलि .370/.460/-* वयस्लती कलक .1050/-* नलग्रश ळाॊसत कलि. BHUBNESWAR-751018.910/- ऩदं उडनसत कलि. gurutva.9338213418.910/- त्रललाश फाधा सनलायण कलि.820/- भस्स्तष्क ऩृत्रद्श लधाक कलि.550/- वलाजन लळीकयण कलि . BANK COLONY.blogspot.karyalay@gmail.कषा+ 10 के सरए वयस्लती कलक.com/ Email Us:.640/.730/- त्रलघ्न फाधा सनलायण कलि.com/ and http://gurutvakaryalay.910/- धन प्रासद्ऱ कलि.550/- स्ऩे -व्माऩाय लृत्रद्ध कलि .730/- त्रलयोध नाळक कलिा.3700/- ऋण भुत्रक्त कलि .http://gk.1050/- तॊि यषा कलि. BRAHMESHWAR PATNA.370/- वॊतान प्रासद्ऱ कलि .550/- ऩत्नी लळीकयण कलि .com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) .280/-* 1 व्मत्रक्त के सरए *कलि भाि ळुब कामा मा उद्दे श्म के सरमे GURUTVA KARYALAY 92/3.640/- दब ु ााग्म नाळक कलि . अरग-अरग कलि तैमाय कयने केसरए अरग-अरग तयश के भॊिो का प्रमोग फकमा जाता शै . (ORISSA) Call Us .370/- जगत भोशन कलि -730/-* काभना ऩूसता कलि.

अक्टू फय 2011 104 YANTRA LIST Our Splecial Yantra 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 12 – YANTRA SET VYAPAR VRUDDHI YANTRA BHOOMI LABHA YANTRA TANTRA RAKSHA YANTRA AAKASMIK DHAN PRAPTI YANTRA PADOUNNATI YANTRA RATNE SHWARI YANTRA BHUMI PRAPTI YANTRA GRUH PRAPTI YANTRA KAILASH DHAN RAKSHA YANTRA EFFECTS For all Family Troubles For Business Development For Farming Benefits For Protection Evil Sprite For Unexpected Wealth Benefits For Getting Promotion For Benefits of Gems & Jewellery For Land Obtained For Ready Made House - Shastrokt Yantra 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 AADHYA SHAKTI AMBAJEE(DURGA) YANTRA BAGALA MUKHI YANTRA (PITTAL) BAGALA MUKHI POOJAN YANTRA (PITTAL) BHAGYA VARDHAK YANTRA BHAY NASHAK YANTRA CHAMUNDA BISHA YANTRA (Navgraha Yukta) CHHINNAMASTA POOJAN YANTRA DARIDRA VINASHAK YANTRA DHANDA POOJAN YANTRA DHANDA YAKSHANI YANTRA GANESH YANTRA (Sampurna Beej Mantra) GARBHA STAMBHAN YANTRA GAYATRI BISHA YANTRA HANUMAN YANTRA JWAR NIVARAN YANTRA JYOTISH TANTRA GYAN VIGYAN PRAD SHIDDHA BISHA YANTRA KALI YANTRA KALPVRUKSHA YANTRA KALSARP YANTRA (NAGPASH YANTRA) KANAK DHARA YANTRA KARTVIRYAJUN POOJAN YANTRA KARYA SHIDDHI YANTRA  SARVA KARYA SHIDDHI YANTRA KRISHNA BISHA YANTRA KUBER YANTRA LAGNA BADHA NIVARAN YANTRA LAKSHAMI GANESH YANTRA MAHA MRUTYUNJAY YANTRA MAHA MRUTYUNJAY POOJAN YANTRA MANGAL YANTRA ( TRIKON 21 BEEJ MANTRA) MANO VANCHHIT KANYA PRAPTI YANTRA NAVDURGA YANTRA Blessing of Durga Win over Enemies Blessing of Bagala Mukhi For Good Luck For Fear Ending Blessing of Chamunda & Navgraha Blessing of Chhinnamasta For Poverty Ending For Good Wealth For Good Wealth Blessing of Lord Ganesh For Pregnancy Protection Blessing of Gayatri Blessing of Lord Hanuman For Fewer Ending For Astrology & Spritual Knowlage Blessing of Kali For Fullfill your all Ambition Destroyed negative effect of Kalsarp Yoga Blessing of Maha Lakshami For Successes in work For Successes in all work Blessing of Lord Krishna Blessing of Kuber (Good wealth) For Obstaele Of marriage Blessing of Lakshami & Ganesh For Good Health Blessing of Shiva For Fullfill your all Ambition For Marriage with choice able Girl Blessing of Durga .

BANK COLONY.chintan_n_joshi@yahoo.Pain. 280.. 460. BRAHMESHWAR PATNA.190. GURUTVA KARYALAY 92/3.in. 2300.yolasite.com/ Email Us:. 550. 1850. 820.Rs.karyalay@gmail.in.state Award Winning 71 VIDHYA YASH VIBHUTI RAJ SAMMAN PRAD BISHA YANTRA VISHNU BISHA YANTRA Blessing of Lord Vishnu (Narayan) 72 Attraction For office Purpose 73 VASI KARAN YANTRA Attraction For Female  MOHINI VASI KARAN YANTRA 74 Attraction For Husband  PATI VASI KARAN YANTRA 75 Attraction For Wife  PATNI VASI KARAN YANTRA 76 Attraction For Marriage Purpose  VIVAH VASHI KARAN YANTRA 77 Yantra Available @:.com/ and http://gurutvakaryalay. 370.Poverty Ending For Trouble Ending Blessing Lorg Krishana For child acquisition For child acquisition Blessing of Sawaswati (For Study & Education) Blessing of Shiv Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & 65 SHREE YANTRA (SAMPURNA BEEJ MANTRA) Peace SHREE YANTRA SHREE SUKTA YANTRA Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth 66 For Bad Dreams Ending 67 SWAPNA BHAY NIVARAN YANTRA VAHAN DURGHATNA NASHAK YANTRA For Vehicle Accident Ending 68 VAIBHAV LAKSHMI YANTRA (MAHA SHIDDHI DAYAK SHREE Blessing of Maa Lakshami for Good Wealth & All 69 MAHALAKSHAMI YANTRA) Successes For Bulding Defect Ending 70 VASTU YANTRA For Education.Fame. 640. 09238328785 Our Website:.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) . (ORISSA) Call Us . gurutva_karyalay@yahoo. 1250.http://gk. 910. gurutva. 2800 and Above….blogspot.अक्टू फय 2011 105 YANTRA LIST 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 EFFECTS NAVGRAHA SHANTI YANTRA NAVGRAHA YUKTA BISHA YANTRA  SURYA YANTRA  CHANDRA YANTRA  MANGAL YANTRA  BUDHA YANTRA  GURU YANTRA (BRUHASPATI YANTRA)  SUKRA YANTRA  SHANI YANTRA (COPER & STEEL)  RAHU YANTRA  KETU YANTRA PITRU DOSH NIVARAN YANTRA PRASAW KASHT NIVARAN YANTRA RAJ RAJESHWARI VANCHA KALPLATA YANTRA RAM YANTRA RIDDHI SHIDDHI DATA YANTRA ROG-KASHT DARIDRATA NASHAK YANTRA SANKAT MOCHAN YANTRA SANTAN GOPAL YANTRA SANTAN PRAPTI YANTRA SARASWATI YANTRA SHIV YANTRA For good effect of 9 Planets For good effect of 9 Planets Good effect of Sun Good effect of Moon Good effect of Mars Good effect of Mercury Good effect of Jyupiter Good effect of Venus Good effect of Saturn Good effect of Rahu Good effect of Ketu For Ancestor Fault Ending For Pregnancy Pain Ending For Benefits of State & Central Gov Blessing of Ram Blessing of Riddhi-Siddhi For Disease.co. BHUBNESWAR-751018.09338213418. 730.

00 370.00 19.00 & above 2800.00 23.00 21. Blue Topaz not Sapphire This Color of Sky Blue.00 30.00 & above 180.00 3700.00 4500.00 300.00 & above 1900.00 03.00 & above 2800.00 100. For Venus *** Super fine & Special Quality Not Available Easily.00 75.00 20.00 & above 1000.00 280.00 190.00 90.00 1500.00 30.00 410.00 390.00 60.00 120.00 120.00 90.00 & above 190.00 24.00 2400. not good in looking but mor effective.00 10000.00 410.00 25.00 & above 410.00 15.00 90.00 (PerCent ) SPECIAL 2800.00 60.00 45.00 & above 21.00 19.00 120.00 1500.00 15.00 200.00 50.00 90.00 280.00 150.00 1800.00 30.00 180.00 12.00 370.00 & above 45.00 640.00 & above 51.00 23.00 45.00 90.00 730.00 12.00 200.00 120.00 75.00 15.00 15.00 55.00 330.00 & above 55.00 27.00 & above (Per Cent) (Per Cent ) Note : Bangkok (Black) Blue for Shani.00 19.00 20.00 20.00 12.00 09.00 & above 280.00 45.00 42. We can try only after getting order fortunately one or two pieces may be available if possible you can tack corres pondence about .00 1900.00 30.00 45.00 900.00 1800.00 & above 550.00 & above 100.00 & above 21000.00 & above 25.00 09.00 140.00 120.00 240.20 Cent ) GENERAL MEDIUM FINE 100.00 370.00 120.00 & above 280.00 & above 190.00 15.00& above 55.00 500.00 600.00 11.00 50.00 15.00 & above 730.00 190.00 90.00 230.00 60.00 2100.00 120.05 to .00 370.00 190.00 19.00 & above 21.00 & above 4600.00 300.00 & above 55.00 190.00 2800.00 15.00 10.00 90.00 500.00 & above 4600.00 20.00 18.00 & above 45.00 & above 460.00 & above 50.00 150.00 280.00 27.00 09.00 120.00 120.00 27.00 & above 4600.00 45.00 90.00 120.00 & above 460.00 & above 190.00 30.00 90.00 (Per Cent ) (Per Cent ) FINE SUPER FINE 1200.00 80.00 640.00 30.00 & above 460.00 10.00 90.00 & above 120.00 900.00 30.00 60.00 140.00 12.00 & above 3200.00 60.00 30.00 300.00 & above 730.00 33.00 1200.00 230.00 12.00 90.00 120.00 45.00 & above 55.00 1500.00 & above 45.00 370.00 15.00 90.00 370.अक्टू फय 2011 106 GURUTVA KARYALAY NAME OF GEM STONE Emerald (ऩडना) Yellow Sapphire (ऩुखयाज) Blue Sapphire (नीरभ) White Sapphire (वफ़ेद ऩुखयाज) Bangkok Black Blue(फंकोक नीरभ) Ruby (भास्णक) Ruby Berma (फभाा भास्णक) Speenal (नयभ भास्णक/रारडी) Pearl (भोसत) Red Coral (4 jrh rd) (रार भूॊगा) Red Coral (4 jrh ls mij) (रार भूॊगा) White Coral (वफ़ेद भूॊगा) Cat’s Eye (रशवुसनमा) Cat’s Eye Orissa (उफडवा रशवुसनमा) Gomed (गोभेद) Gomed CLN (सवरोनी गोभेद) Zarakan (जयकन) Aquamarine (फेरुज) Lolite (नीरी) Turquoise (फफ़योजा) Golden Topaz (वुनशरा) Real Topaz (उफडवा ऩुखयाज/टोऩज) Blue Topaz (नीरा टोऩज) White Topaz (वफ़ेद टोऩज) Amethyst (कटे रा) Opal (उऩर) Garnet (गायनेट) Tourmaline (तुभर ा ीन) Star Ruby (वुमक ा ाडत भस्ण) Black Star (कारा स्टाय) Green Onyx (ओनेक्व) Real Onyx (ओनेक्व) Lapis (राजलात) Moon Stone (िडद्रकाडत भस्ण) Rock Crystal (स्फ़फटक) Kidney Stone (दाना फफ़यॊ गी) Tiger Eye (टाइगय स्टोन) Jade (भयगि) Sun Stone (वन सवताया) Diamond (शीया) (.00 120.00 30.00 2800.00 210.00 05.00 27.00 900.00 & above 500.00 50.00 60.00 30.00 2800.00 410.00 40.00 550.00 15.00 & above 120.00 45.00 45.00 & above 280.00 15.00 55.

gurutva.in. chintan_n_joshi@yahoo.: Consultation 60 Min. Please choose from : PHONE/ CHAT CONSULTATION Consultation 30 Min. Email Us:. Many clients prefer the chat so that many questions that come up during a personal discussion can be answered right away.T. exhaustive guide lines exhibited in the original Sanskrit texts BOOK APPOINTMENT PHONE/ CHAT CONSULTATION Please book an appointment with Our expert Astrologers for an internet chart . . We would require your birth details and basic area of questions so that our expert can be ready and give you rapid replied.  Once the chat is initiated you can commence asking your questions and clarifications  We recommend 25 minutes when you need to consult for one persona Only and usually the time is sufficient for 3-5 questions depending on the timing questions that are put. across the world.107 अक्टू फय 2011 BOOK PHONE/ CHAT CONSULTATION We are mostly engaged in spreading the ancient knowledge of Astrology.in.M.gurutva_karyalay@yahoo. All the time mentioned is Indian Standard Time which is + 5. You can indicate the area of question in the special comments box. 1900/-* RS. 2500/-* *While booking the appointment in Addvance How Does it work Phone/Chat Consultation This is a unique service of GURUATVA KARYALAY where we offer you the option of having a personalized discussion with our expert astrologers.91+9338213418. Vastu and Spiritual Science in the modern context. We shall confirm before we set the appointment. Our research and experiments on the basic principals of various ancient sciences for the use of common man.  We send you a Phone Number at the designated time of the appointment  We send you a Chat URL / ID to visit at the designated time of the appointment  You would need to refer your Booking number before the chat is initiated  Please remember it takes about 1-2 minutes before the chat process is initiated. 91+9238328785.30 hr ahead of G. 1250/-* RS.: Consultation 45 Min.: RS.karyalay@gmail. with a suggestion as to your convenient time we get back with a confirmation whether the time is available for consultation or not.co. Once you request for the consultation. There is no limit on the number of question although time is of consideration. BOOKING FOR PHONE/ CHAT CONSULTATION PLEASE CONTECT GURUTVA KARYALAY Call Us:. Numerology. In case you want more than one person reading.  For more than these questions or one birth charts we would recommend 60/45 minutes Phone/chat is recommended  Our expert is assisted by our technician and so chatting & typing is not a bottle neck In special cases we don't have the time available about your Specific Questions We will taken some time for properly Analysis your birth chart and we get back with an alternate or ask you for an alternate. then please mention in the special comment box .com.

मॊि. आध्मास्त्भक सान ऩय आधारयत शोने के कायण मफद फकवी के रेख. तॊि. फकवी बी नाभ. स्थान मा घटना का उल्रेख मशाॊ फकवी बी व्मत्रक्त त्रलळेऴ मा फकवी बी स्थान मा घटना वे कोई वॊफॊध नशीॊ शं ।  प्रकासळत रेख ज्मोसतऴ.108 अक्टू फय 2011 वूिना  ऩत्रिका भं प्रकासळत वबी रेख ऩत्रिका के असधकायं के वाथ शी आयस्षत शं ।  रेख प्रकासळत शोना का भतरफ मश कतई नशीॊ फक कामाारम मा वॊऩादक बी इन त्रलिायो वे वशभत शं।  नास्स्तक/ अत्रलद्वावु व्मत्रक्त भाि ऩठन वाभग्री वभझ वकते शं ।  ऩत्रिका भं प्रकासळत फकवी बी नाभ. आध्मास्त्भक सान ऩय आधारयत रेखो भं ऩाठक का अऩना त्रलद्वाव शोना आलश्मक शं । फकवी बी व्मत्रक्त त्रलळेऴ को फकवी बी प्रकाय वे इन त्रलऴमो भं त्रलद्वाव कयने ना कयने का अॊसतभ सनणाम स्लमॊ का शोगा।  ऩाठक द्राया फकवी बी प्रकाय फक आऩत्ती स्लीकामा नशीॊ शोगी।  शभाये द्राया ऩोस्ट फकमे गमे वबी रेख शभाये लऴो के अनुबल एलॊ अनुळॊधान के आधाय ऩय सरखे शोते शं । शभ फकवी बी व्मत्रक्त त्रलळेऴ द्राया प्रमोग फकमे जाने लारे भॊि. अॊक ज्मोसतऴ. भॊि. कानूनी सनमभं के स्खराप कोई व्मत्रक्त मफद नीजी स्लाथा ऩूसता शे तु प्रमोग कताा शं अथला प्रमोग के कयने भे िुफट शोने ऩय प्रसतकूर ऩरयणाभ वॊबल शं ।  शभाये द्राया ऩोस्ट फकमे गमे वबी भॊि-मॊि मा उऩाम शभने वैकडोफाय स्लमॊ ऩय एलॊ अडम शभाये फॊधग ु ण ऩय प्रमोग फकमे शं स्जस्वे शभे शय प्रमोग मा भॊि-मॊि मा उऩामो द्राया सनस्द्ळत वपरता प्राद्ऱ शुई शं ।  ऩाठकं फक भाॊग ऩय एक फश रेखका ऩून् प्रकाळन कयने का असधकाय यखता शं । ऩाठकं को एक रेख के ऩून् प्रकाळन वे राब प्राद्ऱ शो वकता शं ।  असधक जानकायी शे तु आऩ कामाारम भं वॊऩका कय वकते शं । (वबी त्रललादो केसरमे केलर बुलनेद्वय डमामारम शी भाडम शोगा।) . लास्तु. मॊि. स्थान मा घटना का फकवी के लास्तत्रलक जीलन वे भेर शोता शं तो मश भाि एक वॊमोग शं ।  प्रकासळत वबी रेख बायसतम आध्मास्त्भक ळास्त्रं वे प्रेरयत शोकय सरमे जाते शं । इव कायण इन त्रलऴमो फक वत्मता अथला प्राभास्णकता ऩय फकवी बी प्रकाय फक स्जडभेदायी कामाारम मा वॊऩादक फक नशीॊ शं ।  अडम रेखको द्राया प्रदान फकमे गमे रेख/प्रमोग फक प्राभास्णकता एलॊ प्रबाल फक स्जडभेदायी कामाारम मा वॊऩादक फक नशीॊ शं । औय नाशीॊ रेखक के ऩते फठकाने के फाये भं जानकायी दे ने शे तु कामाारम मा वॊऩादक फकवी बी प्रकाय वे फाध्म शं ।  ज्मोसतऴ. तॊि.मॊि मा अडम प्रमोग मा उऩामोकी स्जडभेदायी नफशॊ रेते शं ।  मश स्जडभेदायी भॊि-मॊि मा अडम प्रमोग मा उऩामोको कयने लारे व्मत्रक्त फक स्लमॊ फक शोगी। क्मोफक इन त्रलऴमो भं नैसतक भानदॊ डं . वाभास्जक . अॊक ज्मोसतऴ. भॊि. लास्तु.

blogspot. BHUBNESWAR-751018.karyalay@gmail.com/ http://www.com. 91+9238328785 ईभेर gurutva. gurutva_karyalay@yahoo.com/ .gurutvakaryalay.yolasite.in. (ORISSA) INDIA पोन 91+9338213418. BRAHMESHWAR PATNA. BANK COLONY.109 अक्टू फय 2011 FREE E CIRCULAR गुरुत्ल ज्मोसतऴ ऩत्रिका अक्टू फय -2011 वॊऩादक सिॊतन जोळी वॊऩका गुरुत्ल ज्मोसतऴ त्रलबाग गुरुत्ल कामाारम 92/3. लेफ http://gk.

कलि एलॊ ळुब परदामी ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न आऩके घय तक ऩशोिाने का शै । वूमा की फकयणे उव घय भं प्रलेळ कयाऩाती शै । जीव घय के स्खड़की दयलाजे खुरे शं। GURUTVA KARYALAY 92/3. 9238328785 Our Website:.http://gk. ग्रश यत्न एलॊ उऩयत्न औय दर ा भॊि ळत्रक्त वे ऩूणा प्राण-प्रसतत्रद्षत सिज लस्तु का शभंळा ु ब प्रमोग कये जो १००% परदामक शो। ईवी सरमे शभाया उद्दे श्म मशीॊ शे की ळास्त्रोक्त त्रलसध-त्रलधान वे त्रलसळद्श तेजस्ली भॊिो द्राया सवद्ध प्राण-प्रसतत्रद्षत ऩूणा िैतडम मुक्त वबी प्रकाय के मडि. बौसतकता का आलयण ओढे व्मत्रक्त जीलन भं शताळा औय सनयाळा भं फॊध जाता शै . BANK COLONY.110 अक्टू फय 2011 शभाया उद्दे श्म त्रप्रम आस्त्भम फॊध/ु फफशन जम गुरुदे ल जशाॉ आधुसनक त्रलसान वभाद्ऱ शो जाता शै । लशाॊ आध्मास्त्भक सान प्रायॊ ब शो जाता शै . gurutva. (ORISSA) Call Us .9338213418. स्जवभे भनुष्म की वपरता औय अवपरता सनफशत शै । उवे ऩाने औय वभजने का वाथाक प्रमाव शी श्रेद्षकय वपरता शै । वपरता को प्राद्ऱ कयना आऩ का बाग्म शी नशीॊ असधकाय शै । ईवी सरमे शभायी ळुब काभना वदै ल आऩ के वाथ शै । आऩ अऩने कामा-उद्दे श्म एलॊ अनुकूरता शे तु मॊि. BRAHMESHWAR PATNA. BHUBNESWAR-751018. औय उवे अऩने जीलन भं गसतळीर शोने के सरए भागा प्राद्ऱ नशीॊ शो ऩाता क्मोफक बालनाए फश बलवागय शै .karyalay@gmail.blogspot.in.yolasite.com/ and http://gurutvakaryalay.com/ Email Us:.com (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) (ALL DISPUTES SUBJECT TO BHUBANESWAR JURISDICTION) .gurutva_karyalay@yahoo.

111 OCT 2011 अक्टू फय 2011 .

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