प्रेमचंद

क्रभ
त्रिमाचरयि

:

मभराऩ

:

भनावन

:

अॊधेय

:

मसपफ एक आवाज

:

2

3
20
27
38
44

त्रिया-चररि

से

ठ रगनदास जी के जीवन की फगगमा परहीन थी। कोई ऐसा
भानवीम, आध्मात्मभक मा गचककमसामभक प्रममन न था जो उन्होंने न

ककमा हो। मों शादी भें एक ऩमनीव्रत के कामर थे भगय जरुयत औय आग्रह

ॉँ शाददम ॉँ कीॊ, मह ॉँ तक कक उम्र के चारीस
से वववश होकय एक-दो नहीॊ ऩ च
सार गुजए गए औय अॉधेये घय भें उजारा न हुआ। फेचाये फहुत यॊ जीदा यहते।
मह धन-सॊऩत्मत, मह ठाट-फाट, मह वैबव औय मह ऐश्वमफ क्मा होंगे। भेये फाद
इनका क्मा होगा, कौन इनको बोगेगा। मह ख्मार फहुत अपसोसनाक था।
आखिय मह सराह हुई कक ककसी रड़के को गोद रेना चादहए। भगय मह
भसरा ऩारयवारयक झगड़ों के कायण के सारों तक स्थगगत यहा। जफ सेठ जी

ने दे िा कक फीववमों भें अफ तक फदस्तूय कशभकश हो यही है तो उन्होंने
नैततक साहस से काभ मरमा औय होनहाय अनाथ रड़के को गोद रे मरमा।

ॉँ
उसका नाभ यिा गमा भगनदास। उसकी उम्र ऩ च-छ:
सार से ज्मादा न थी।

फरा का जहीन औय तभीजदाय। भगय औयतें सफ कुछ कय सकती हैं, दस
ू ये के
ॉँ औयतों का साझा था।
फच्चे को अऩना नहीॊ सभझ सकतीॊ। मह ॉँ तो ऩ च
अगय एक उसे प्माय कयती तो फाकी चाय औयतों का पज्र था कक उससे

नपयत कयें । ह ,ॉँ सेठ जी उसके साथ त्रफरकुर अऩने रड़के की सी भह
ु ब्फत
कयते थे। ऩढाने को भास्टय यक्िें, सवायी के मरए घोड़े। यईसी ख्मार के

आदभी थे। याग-यॊ ग का साभान बी भह
ु ै मा था। गाना सीिने का रड़के ने
शौक ककमा तो उसका बी इॊतजाभ हो गमा। गयज जफ भगनदास जवानी ऩय

ऩहुॉचा तो यईसाना ददरचात्स्ऩमों भें उसे कभार हामसर था। उसका गाना

सन
ु कय उस्ताद रोग कानों ऩय हाथ यिते। शहसवाय ऐसा कक दौड़ते हुए घोड़े
ऩय सवाय हो जाता। डीर-डौर, शक्र सयू त भें उसका-सा अरफेरा जवान

ददल्री भें कभ होगा। शादी का भसरा ऩेश हुआ। नागऩयु के कयोड़ऩतत सेठ
भक्िनरार फहुत रहयामे हुए थे। उनकी रड़की से शादी हो गई। धभ
ू धाभ
का त्जक्र ककमा जाए तो ककस्सा ववमोग की यात से बी रम्फा हो जाए।

भक्िनरार का उसी शादी भें दीवारा तनकर गमा। इस वक्त भगनदास से

ज्मादा ईर्षमाफ के मोग्म आदभी औय कौन होगा? उसकी त्जन्दगी की फहाय

उभॊगों ऩय बी औय भयु ादों के पूर अऩनी शफनभी ताजगी भें खिर-खिरकय
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हुस्न औय ताजगी का सभाॉ ददिा यहे थे। भगय तकदीय की दे वी कुछ औय
ही साभान कय यही थी। वह सैय-सऩाटे के इयादे से जाऩान गमा हुआ था कक
ददल्री से िफय आई कक ईश्वय ने तम्
ु हें एक बाई ददमा है। भझ
ु े इतनी िश
ु ी

है कक ज्मादा असे तक त्जन्दा न यह सकॉू । तभ
ु फहुत जल्द रौट आओॊ।
भगनदास के हाथ से ताय का कागज छूट गमा औय सय भें ऐसा
चक्कय आमा कक जैसे ककसी ऊॉचाई से गगय ऩड़ा है ।


गनदास का ककताफी ऻान फहुत कभ था। भगय स्वबाव की सज्जनता
से वह िारी हाथ न था। हाथों की उदायता ने, जो सभवृ ि का वयदान

है , हृदम को बी उदाय फना ददमा था। उसे घटनाओॊ की इस कामाऩरट से

दि
ु तो जरुय हुआ, आखिय इन्सान ही था, भगय उसने धीयज से काभ मरमा
औय एक आशा औय बम की मभरी-जर
ु ी हारत भें दे श को यवाना हुआ।
यात का वक्त था। जफ अऩने दयवाजे ऩय ऩहुॉचा तो नाच-गाने की

भहकपर सजी दे िी। उसके कदभ आगे न फढे रौट ऩड़ा औय एक दक
ु ान के
चफत
ू ये ऩय फैठकय सोचने रगा कक अफ क्मा कयना चादहऐ। इतना तो उसे

मकीन था कक सेठ जी उसक साथ बी बरभनसी औय भह
ु ब्फत से ऩेश
आमेंगे फत्ल्क शामद अफ औय बी कृऩा कयने रगें । सेठातनम ॉँ बी अफ उसके
साथ गैयों का-सा वताफव न कयें गी। भभ
ु ककन है भझरी फहू जो इस फच्चे की
िुशनसीफ भ ॉँ थीॊ, उससे दयू -दयू यहें भगय फाकी चायों सेठातनमों की तयप से
सेवा-समकाय भें कोई शक नहीॊ था। उनकी डाह से वह पामदा उठा सकता

था। ताहभ उसके स्वामबभान ने गवाया न ककमा कक त्जस घय भें भामरक की
है मसमत से यहता था उसी घय भें अफ एक आगित की है मसमत से त्जन्दगी

फसय कये । उसने पैसरा कय मरमा कक सफ मह ॉँ यहना न भन
ु ामसफ है , न
भसरहत। भगय जाऊॉ कह ?ॊ न कोई ऐसा पन सीिा, न कोई ऐसा इल्भ

हामसर ककमा त्जससे योजी कभाने की सयू त ऩैदा होती। यईसाना ददरचत्स्ऩम ॉँ
उसी वक्त तक कद्र की तनगाह से दे िी जाती हैं जफ तक कक वे यईसों के
आबष
ू ण यहें । जीववका फन कय वे सम्भान के ऩद से गगय जाती है । अऩनी
योजी हामसर कयना तो उसके मरए कोई ऐसा भत्ु श्कर काभ न था। ककसी
सेठ-साहूकाय के मह ॉँ भन
ु ीभ फन सकता था, ककसी कायिाने की तयप से

एजेंट हो सकता था, भगय उसके कन्धे ऩय एक बायी जुआ यक्िा हुआ था,
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उसे क्मा कये । एक फड़े सेठ की रड़की त्जसने राड़-प्माय भे ऩरयवरयश ऩाई,

उससे मह कॊगारी की तकरीपें क्मोंकय झेरी जाऍगीॊ
ॊ क्मा भक्िनरार की
राड़री फेटी एक ऐसे आदभी के साथ यहना ऩसन्द कये गी त्जसे यात की योटी

का बी दठकाना नहीॊ ! भगय इस कपक्र भें अऩनी जान क्मों िऩाऊॉ। भैंने

अऩनी भजी से शादी नहीॊ की भैं फयाफय इनकाय कयता यहा। सेठ जी ने
जफदफ स्ती भेये ऩैयों भें फेड़ी डारी है । अफ वही इसके त्जम्भेदाय हैं। भझ
ु से
कोई वास्ता नहीॊ। रेककन जफ उसने दफ
ु ाया ठॊ डे ददर से इस भसरे ऩय गौय
ककमा तो वचाव की कोई सयू त नजय न आई। आखिकाय उसने मह पैसरा

ककमा कक ऩहरे नागऩयु चरॉ ,ू जया उन भहायानी के तौय-तयीके को दे ि,ूॉ

ॉँ करॉ। उस वक्त तम
फाहय-ही-फाहय उनके स्वबाव की, मभजाज की ज च
करॉगा कक भझ
ु े क्मा कयके चादहमे। अगय यईसी की फू उनके ददभाग से

तनकर गई है औय भेये साथ रिी योदटम ॉँ िाना उन्हें भॊजयू है, तो इससे

अच्छा कपय औय क्मा, रेककन अगय वह अभीयी ठाट-फाट के हाथों त्रफकी हुई
हैं तो भेये मरए यास्ता साप है । कपय भैं हूॉ औय दतु नमा का गभ। ऐसी जगह
जाऊॉ जह ॉँ ककसी ऩरयगचत की सयू त सऩने भें बी न ददिाई दे । गयीफी की

त्जल्रत नहीॊ यहती, अगय अजनत्रफमों भें त्जन्दगी फसया की जाए। मह
जानने-ऩहचानने वारों की कनखिमाॉ औय कनफततम ॉँ हैं जो गयीफी को

मन्िणा फना दे ती हैं। इस तयह ददर भें त्जन्दगी का नक्शा फनाकय

भगनदास अऩनी भदाफना दहम्भत के बयोसे ऩय नागऩयु की तयप चरा, उस

भल्राह की तयह जो ककश्ती औय ऩार के फगैय नदी की उभड़ती हुई रहयों
भें अऩने को डार दे ।

शा


भ के वक्त सेठ भक्िनरार के सॊद
ु य फगीचे भें सयू ज की ऩीरी

ककयणें भयु झामे हुए पूरों से गरे मभरकय ववदा हो यही थीॊ। फाग के
फीच भें एक ऩक्का कुऑ ॊ था औय एक भौरमसयी का ऩेड़। कॉु ए के भॉह
ु ऩय
अॊधेये की नीरी-सी नकाफ थी, ऩेड़ के मसय ऩय योशनी की सन
ु हयी चादय।
इसी ऩेड़ भें एक नौजवान थका-भाॊदा कुऍ ॊ ऩय आमा औय रोटे से ऩानी
बयकय ऩीने के फाद जगत ऩय फैठ गमा। भामरन ने ऩछ
ू ा- कह ॉँ जाओगे?
भगनदास ने जवाफ ददमा कक जाना तो था फहुत दयू , भगय महीॊ यात हो गई।
मह ॉँ कहीॊ ठहयने का दठकाना मभर जाएगा?
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भामरक- चरे जाओ सेठ जी की धभफशारा भें , फड़े आयाभ की जगह है।

भगनदास-धभफशारे भें तो भझ
ु े ठहयने का कबी सॊमोग नहीॊ हुआ। कोई
हजफ न हो तो महीॊ ऩड़ा यहूॉ। महाॉ कोई यात को यहता है?
भामरक- बाई, भैं मह ॉँ ठहयने को न कहूॉगी। मह फाई जी की फैठक है ।
झयोिे भें फैठकय सेय ककमा कयती हैं। कहीॊ दे ि-बार रें तो भेये मसय भें एक
फार बी न यहे ।

भगनदास- फाई जी कौन?

भामरक- मही सेठ जी की फेटी। इत्न्दया फाई।

भगनदास- मह गजये उन्हीॊ के मरए फना यही हो क्मा?

भामरन- ह ,ॉँ औय सेठ जी के मह ॉँ है ही कौन? पूरों के गहने फहुत
ऩसन्द कयती हैं।
भानदास- शौकीन औयत भारभ
ू होती हैं?

भामरक- बाई, मही तो फड़े आदमभमों की फातें है। वह शौक न कयें तो

हभाया-तुम्हाया तनफाह कैसे हो। औय धन है ककस मरए। अकेरी जान ऩय दस
रौंडडम ॉँ हैं। सन
ु ा कयती थी कक बगवान आदभी का हर बत
ू जोतता है वह

ऑ ॊिों दे िा। आऩ-ही-आऩ ऩॊिा चरने रगे। आऩ-ही-आऩ साये घय भें ददन
का-सा उजारा हो जाए। तुभ झठ
ू सभझते होगे, भगय भैं ऑ ॊिों दे िी फात
कहती हूॉ।

उस गवफ की चेतना के साथ जो ककसी नादान आदभी के साभने अऩनी

जानकायी के फमान कयने भें होता है, फढ
ू ी भामरन अऩनी सवफऻता का प्रदशफन
कयने रगी। भगनदास ने उकसामा- होगा बाई, फड़े आदभी की फातें तनयारी
होती हैं। रक्ष्भी के फस भें सफ कुछ है । भगय अकेरी जान ऩय दस रौंडडम ?ॉँ
सभझ भें नहीॊ आता।

भामरन ने फढ
ु ाऩे के गचड़गचड़ेऩन से जवाफ ददमा- तुम्हायी सभझ भोटी

हो तो कोई क्मा कये ! कोई ऩान रगाती है , कोई ऩॊिा झरती है, कोई कऩड़े
ऩहनाती है, दो हजाय रुऩमे भें तो सेजगाड़ी आमी थी, चाहो तो भॉह
ु दे ि रो,
उस ऩय हवा िाने जाती हैं। एक फॊगामरन गाना-फजाना मसिाती है , भेभ
ऩढाने आती है, शास्िी जी सॊस्कृत ऩढाते हैं, कागद ऩय ऐसी भयू त फनाती हैं

कक अफ फोरी औय अफ फोरी। ददर की यानी हैं, फेचायी के बाग पूट गए।
ददल्री के सेठ रगनदास के गोद मरमे हुए रड़के से ब्माह हुआ था। भगय
याभ जी की रीरा समतय फयस के भद
ु े को रड़का ददमा, कौन ऩततमामेगा।
6

जफ से मह सन
ु ावनी आई है, तफ से फहुत उदास यहती है । एक ददन योती
थीॊ। भेये साभने की फात है । फाऩ ने दे ि मरमा। सभझाने रगे। रड़की को

फहुत चाहते हैं। सन
ु ती हूॉ दाभाद को महीॊ फर
ु ाकय यक्िेंगे। नायामन कये , भेयी
यानी दध
ू ों नहाम ऩतों परे। भारी भय गमा था, उन्होंने आड़ न री होती तो
ॉँ
घय बय के टुकड़े भ गती।

ॉँ री। फेहतय है, अफ मह ॉँ से अऩनी
भगनदास ने एक ठण्डी स स

इज्जत-आफर मरमे हुए चर दो। मह ॉँ भेया तनफाह न होगा। इत्न्दया यईसजादी
है । तुभ इस कात्रफर नहीॊ हो कक उसके शौहय फन सको। भामरन से फोरा-ता
धभफशारे भें जाता हूॉ। जाने वह ॉँ िाट-वाट मभर जाती है कक नहीॊ, भगय यात
ही तो काटनी है ककसी तयह कट ही जाएगी यईसों के मरए भिभरी गद्दे

चादहए, हभ भजदयू ों के मरए ऩआ
ु र ही फहुत है ।
मह कहकय उसने रदु टमा उठाई, डण्डा सम्हारा औय ददफ बये ददर से
एक तयप चर ददमा।

उस वक्त इत्न्दया अऩने झयोिे ऩय फैठी हुई इन दोनों की फातें सन

यही थी। कैसा सॊमोग है कक स्िी को स्वगफ की सफ मसविम ॉँ प्राप्त हैं औय
उसका ऩतत आवयों की तयह भाया-भाया कपय यहा है । उसे यात काटने का
दठकाना नहीॊ।


गनदास तनयाश ववचायों भें डूफा हुआ शहय से फाहय तनकर आमा औय
एक सयाम भें ठहया जो मसपफ इसमरए भशहूय थी, कक वह ॉँ शयाफ की

एक दक
ु ान थी। मह ॉँ आस-ऩास से भजदयू रोग आ-आकय अऩने दि
ु को

बर
ु ामा कयते थे। जो बर
ू -े बटके भस
ु ाकपय मह ॉँ ठहयते, उन्हें होमशमायी औय

ॉँ ही, एक
चौकसी का व्मावहारयक ऩाठ मभर जाता था। भगनदास थका-भ दा
ऩेड़ के नीचे चादय त्रफछाकय सो यहा औय जफ सफ
ु ह को नीॊद िुरी तो उसे
ककसी ऩीय-औमरमा के ऻान की सजीव दीऺा का चभमकाय ददिाई ऩड़ा

त्जसकी ऩहरी भॊत्जर वैयाग्म है। उसकी छोटी-सी ऩोटरी, त्जसभें दो-एक
कऩड़े औय थोड़ा-सा यास्ते का िाना औय रदु टमा-डोय फॊधी हुई थी, गामफ हो
गई। उन कऩड़ों को छोड़कय जो उसके फदय ऩय थे अफ उसके ऩास कुछ बी
न था औय बि
ै कय यही
ू , जो कॊगारी भें औय बी तेज हो जाती है, उसे फेचन

थी। भगय दृढ स्वबाव का आदभी था, उसने ककस्भत का योना योमा ककसी
7

तयह गुजय कयने की तदफीयें सोचने रगा। मरिने औय गखणत भें उसे अच्छा

अभ्मास था भगय इस है मसमत भें उससे पामदा उठाना असम्बव था। उसने
सॊगीत का फहुत अभ्मास ककमा था। ककसी यमसक यईस के दयफाय भें उसकी
़द्र हो सकती थी। भगय उसके ऩरु
ु षोगचत अमबभान ने इस ऩेशे को

अत्ख्मताय कयने इजाजत न दी। ह ,ॉँ वह आरा दजे का घड़
ु सवाय था औय
मह पन भजे भें ऩयू ी शान के साथ उसकी योजी का साधन फन

सकता था

मह ऩक्का इयादा कयके उसने दहम्भत से कदभ आगे फढामे। ऊऩय से दे िने
ऩय मह फात मकीन के कात्रफर नही भारभ

होती भगय वह अऩना फोझ

हरका हो जाने से इस वक्त फहुत उदास नहीॊ था। भदाफना दहम्भत का
आदभी ऐसी भस
ु ीॊफतों को उसी तनगाह से दे िता है,त्जसभे एक होमशमाय
ववद्माथी ऩयीऺा के प्रश्नों को दे िता है उसे अऩनी दहम्भत आजभाने का,
एक भत्ु श्कर से जझ
ू ने का भौका मभर जाता है उसकी दहम्भत

अजनाने ही

भजफत
ू हो जाती है । अकसय ऐसे भाके भदाफना हौसरे के मरए प्रेयणा का
काभ

दे ते हैं। भगनदास इस जोश़ से कदभ फढाता चरा जाता था कक जैसे

कामभाफी की भॊत्जर साभने नजय आ यही है । भगय शामद वहाॉ के घोड़ो ने

शयायत औय त्रफगड़ैरऩन से तौफा कय री थी मा वे स्वाबाववक रुऩ फहुत भजे
भे धीभे- धीभे चरने वारे थे। वह त्जस गाॊव भें जाता तनयाशा को उकसाने
वारा जवाफ ऩाता आखियकाय शाभ के वक्त जफ सयू ज

अऩनी आखियी

भॊत्जर ऩय जा ऩहुॉचा था, उसकी कदठन भॊत्जर तभाभ हुई। नागयघाट के
ठाकुय अटरमसहॊ ने उसकी गचन्ता भो सभाप्त ककमा।

मह एक फड़ा गाॉव था। ऩक्के भकान फहुत थे। भगय उनभें प्रेतामभाऍ ॊ
आफाद थीॊ। कई सार ऩहरे प्रेग ने आफादी के फड़े दहस्से का इस ऺणबॊगुय
सॊसाय से उठाकय स्वगफ भें ऩहुच ददमा था। इस वक्त प्रेग के फचे-िुचे वे
रोग गाॊव के नौजवान औय शौकीन जभीॊदाय साहफ औय हल्के के कायगज
ु ाय
ओय योफीरे थानेदाय साहफ थे। उनकी मभरी-जुरी कोमशशों से ग वॉँ भे सतमग

का याज था। धन दौरत को रोग जान का अजाफ सभझते थे ।उसे
की

गुनाह

तयह छुऩाते थे। घय-घय भें रुऩमे यहते हुए रोग कजफ रे-रेकय िाते औय
पटे हारों यहते थे। इसी भें तनफाह था । काजर की कोठयी थी, सपेद कऩड़े
ऩहनना उन ऩय धब्फा रगाना था। हुकूभत औय जफयरफ दस्ती का फाजाय गभफ
था। अहीयों को महाॉ आॉजन के मरए बी दध
ू न था। थाने भें दध
ू की नदी
फहती थी।

भवेशीिाने के भह
ु रयफ य दध
ू की
8

कुत्ल्रमाॉ कयते थे। इसी

अॊधेयनगयी को भगनदास

ने अऩना घय फनामा। ठाकुय साहफ ने असाधायण

उदायता से काभ रेकय उसे यहने के मरए एक भाकन बी दे ददमा। जो केवर

फहुत व्माऩक अथो भें भकान कहा जा सकता था। इसी झोंऩड़ी भें वह एक
हफ्ते से त्जन्दगी के ददन काट यहा है। उसका चेहया जदफ है। औय कऩड़े
भैरे हो यहे है । भगय ऐसा भारभ

होता है कक उस

अफ इन फातों की

अनब
ु तू त ही नही यही। त्जन्दा है भगय त्जन्दगी रुिसत हो गई है । दहम्भत
औय हौसरा भत्ु श्कर को आसान कय सकते है ऑ ॊधी औय तुपान से फचा

सकते हैं भगय चेहये को खिरा सकना उनके साभर्थमफ से फाहय है टूटी हुई
नाव ऩय फैठकयी भल्हाय गाना दहम्भत काभ नही दहभाकत का काभ है ।
एक योज जफ शाभ के वक्त वह अॊधये भे िाट ऩय ऩड़ा हुआ था। एक
औयत उसके दयवायजे ऩय आकय बीि भाॊगने रगी। भगनदास का आवाज
वऩयगचत जान ऩडी। फहाय आकय दे िा तो वही चम्ऩा भामरन थी। कऩड़े ताय–

ताय, भस
ु ीफत की योती हुई तसफीय। फोरा-भामरन ? तुम्हायी मह क्मा हारत
है । भझ
ु े ऩहचानती हो।?

भामरन ने चौंकयक दे िा औय ऩहचान गई। योकय फोरी –फेटा, अफ

फताओ भेया कहाॉ दठकाना रगे? तुभने भेया फना फनामा घय उजाड़ ददमा न
उसे ददन

तभ
ु से फात कयती ने भझ
ु े ऩय मह त्रफऩत ऩड़ती। फाई ने तुम्हें

फैठे दे ि मरमा, फातें बी सन
ु ी

सफ
ु ह होते ही भझ
ु े फर
ु ामा औय फयस ऩड़ी

नाक कटवा रॉ ग
ॊु भें कामरि रगवा दॉ ग
ै , कुटनी, तू भेयी फात
ू ी, भह
ू ी, चड़
ु र
ककसी गैय आदभी से क्मों चरामे? तू दस
ू यों से

भेयी चचाफ

तेया दाभाद था, जो तू उससे भेया दि
ु ड़ा योती थी? जो
फकती यही

कुछ

कये ? वह क्मा
भॊह

भे आमा

भझ
ु से बी न सहा गमा। यानी रुठें गी अऩना सह
ु ाग रेंगी! फोरी-

फाई जी, भझ
ु से कसयू हुआ, रीत्जए अफ जाती हूॉ छीॊकते नाक कटती है तो
भेया तनफाह महाॉ न होगा। ईश्वय ने भॊह
ु ददमा हैं तो आहाय बी दे गा चाय
घय से

भाॉगॉग
ू ी

तो भेये ऩेट

को हो जाऐगा।। उस छोकयी ने

भझ
ु े िड़े

िड़े तनकरवा ददमा। फताओ भैने तुभसे उसकी कौन सी मशकामत की थी?
उसकी क्मा चचाफ की थी? भै तो उसका फिान कय
आदमभमों

का गस्
ु सा बी

यही थी। भगय फड़े

फड़ा होता है। अफ फताओ भै ककसकी होकय यहूॉ?
आठ ददन इसी ददन तयह टुकड़े भाॉगते हो गमे है । एक बतीजी उन्हीॊ के महाॉ
रौंडडमों भें नौकय थी, उसी

ददन

उसे बी तनकार ददमा। तुम्हायी फदौरत,

9

जो कबी न ककमा था, वह कयना ऩड़ा
भें जो कुछ मरिा था, दे िना ऩड़ा।

तुम्हें कहो का दोष रगाऊॊ ककस्भत

भगनदास सन्नाटे भें जो कुछ मरिा था। आह मभजाज का

मह हार है, मह

घभण्ड, मह शान! भामरन का इमभीनन ददरामा उसके ऩास अगय दौरत
होती तो उसे भाराभार कय दे ता

सेठ भक्िनरार की फेटी को

हो जाता कक योजी की कॊू जी उसी के हाथ भें नहीॊ

है।

बी भारभ

फोरा-तुभ कपक्र न

कयो, भेये घय भे आयाभ से यहो अकेरे भेया जी बी नहीॊ रगता। सच कहो

तो भझ
ु े तुम्हायी तयह एक औयत की तराशा थी, अच्छा हुआ तुभ आ गमीॊ।
भामरन ने आॊचर पैराकय असीभ ददमा– फेटा तभ
ु जग
ु -जुग त्जमों
फड़ी उम्र हो मह ॉँ कोई घय मभरे तो भझ
ु े ददरवा दो। भैं मही यहूॉगी तो भेयी
बतीजी कहाॉ जाएगी। वह फेचायी शहय भें ककसके आसये यहे गी।

भगनरार के िन
ू भें जोश आमा। उसके स्वामबभान को चोट रगी।

उन ऩय मह आपत भेयी रामी हुई है। उनकी इस आवायागदी को त्जम्भेदाय
भैं हूॉ। फोरा–कोई हजफ न हो तो उसे बी महीॊ रे आओ। भैं ददन को महाॉ
फहुत कभ यहता हूॉ। यात को फाहय चायऩाई डारकय ऩड़ यहा करुॉ गा। भेयी
वहज से तभ
ु रोगों को कोई तकरीप न होगी। महाॉ दस
ू या भकान मभरना
भत्ु श्कर है

मही झोऩड़ा फड़ी भत्ु श्करो से मभरा है। मह अॊधेयनगयी है जफ

तुम्हयी सब
ु ीता कहीॊ रग जाम तो चरी जाना।

भगनदास को क्मा भारभ
ू था कक हजयते इश्क उसकी जफान ऩय फैठे

हुए उससे मह फात कहरा यहे है। क्मा मह ठीक है कक इश्क ऩहरे भाशक
ू के
ददर भें ऩैदा होता है?

ना

गऩयु इस ग व से फीस


भीर की दयू ी ऩय था। चम्भा उसी ददन

चरी गई औय तीसये ददन यम्बा के साथ रौट आई। मह उसकी

बतीजी का नाभ था। उसक आने से झोंऩडें भें जान सी ऩड़ गई। भगनदास
के ददभाग भें भामरन की रड़की की जो तस्वीय थी

उसका यम्बा से कोई

भेर न था वह सौंदमफ नाभ की चीज का अनब
ु वी जौहयी था भगय ऐसी सयू त
त्जसऩय जवानी की ऐसी भस्ती औय ददर का चैन छीन रेनेवारा ऐसा

आकषफण हो उसने ऩहरे कबी नहीॊ दे िा था। उसकी जवानी का च दॉँ अऩनी
सन
ु हयी औय गम्बीय शान के साथ चभक यहा था। सफ
ु ह का वक्त था
10

भगनदास दयवाजे ऩय ऩड़ा ठण्डी–ठण्डी हवा का भजा उठा यहा था। यम्बा
मसय ऩय घड़ा यक्िे ऩानी बयने को तनकरी

भगनदास ने उसे दे िा औय एक

रम्फी साॉस िीॊचकय उठ फैठा। चेहया-भोहया फहुत ही भोहभ। ताजे पूर की
तयह खिरा हुआ चेहया आॊिों भें गम्बीय सयरता
भगनदास को उसने बी
दे िा। चेहये ऩय राज की रारी दौड़ गई। प्रेभ ने ऩहरा वाय ककमा।

भगनदास सोचने रगा-क्मा तकदीय महाॉ कोई औय गुर खिराने वारी

है ! क्मा ददर भझ
ु े महाॊ बी चैन न रेने दे गा। यम्बा, तू महाॉ नाहक आमी,
नाहक एक गयीफ का िून तेये

सय ऩय

होगा। भैं तो अफ तेये हाथों त्रफक

चक
ु ा, भगय क्मा तू बी भेयी हो सकती है ? रेककन नहीॊ, इतनी जल्दफाजी

ठीक नहीॊ ददर का सौदा सोच-सभझकय कयना चादहए। तुभको अबी जब्त
कयना होगा। यम्बा सन्
ु दयी है भगय झठ
ू े भोती की आफ औय ताफ उसे सच्चा

नहीॊ फना सकती। तम्
ु हें क्मा िफय कक उस बोरी रड़की के कान प्रेभ के
शब्द से ऩरयगचत नहीॊ हो चक
ु े है ? कौन कह सकता है कक उसके सौन्दमफ की

वादटका ऩय ककसी पूर चन
ु नेवारे के हाथ नही ऩड़ चक
ु े है ? अगय कुछ
ददनों की ददरफस्तगी के मरए कुछ चादहए

तो तुभ आजाद हो भगय मह

ऩड़नेवारा सौन्दमफ अकसय नैततक फन्धनों से

भक्
ु त होता है।

नाजक
े य जातों भे
ु भाभरा है , जया सम्हर के कदभ यिना। ऩेशव

ददिाई

तीन भहीने गज
ु य गमे। भगनदास यम्बा को ज्मों ज्मों फायीक से

फायीक तनगाहों से दे िता ममों–ममों उस ऩय प्रेभ का यॊ ग गाढा होता जाता
था। वह योज उसे कॉु ए से ऩानी
दे ती, योज िाना ऩकाती

तनकारते दे िता वह

योज

आह भगनदास को उन ज्वाय की

घय

भें झाडु

योदटमाॊ भें भजा

आता था, वह अच्छे से अच्छे व्मॊजनो भें , बी न आमा था। उसे अऩनी
कोठयी हभेशा साप सध
ु यी मभरती
क्मा मह यम्बा की

कृऩा थी? उसकी तनगाहें

अऩनी तयप चचॊर आॊिो स ताकते
हॊ सी की आवाज कबी उसके
भें

न जाने कौन उसके त्रफस्तय त्रफछा दे ता।
शभीरी थी उसने उसे कबी

नही दे िा। आवाज कैसी भीठी उसकी

कान भें नही आई। अगय भगनदास उसके प्रेभ

भतवारा हो यहा था तो कोई ताज्जफ
ु की फात नही थी। उसकी

बि
ू ी

तनगाहें फेचन
ै ी औय रारसा भें डुफी हुई हभेशा यम्बा को ढुढाॊ कयतीॊ। वह जफ
ककसी गाॉव को जाता तो भीरों तक उसकी त्जद्दी औय फेताफ ऑ ॊिे भड़
ु –
भड़
ू कय झोंऩड़े के दयवाजे की तयप आती। उसकी ख्मातत आस ऩास पैर गई

थी भगय उसके स्वबाव की भस
ु ीवत औय उदायहृमता से अकसय रोग
11

अनगु चत राब उठाते थे इन्सापऩसन्द रोग तो स्वागत समकाय से काभ
तनकार रेते औय जो
इन्तजाय कयते

रोग ज्मादा सभझदाय थे वे रगाताय तकाजों का

चकॊू क भगनदास इस पन को त्रफरकुर नहीॊ जानता था।

फावजद
ू ददन यात की दौड़ धऩ
ू के गयीफी से उसका गरा न छुटता। जफ वह
यम्बा को चक्की ऩीसते हुए दे िता तो गेहूॉ के साथ उसका ददर बी वऩस
जाता था ।वह कुऍ ॊ से ऩानी तनकारती तो उसका करेजा तनकर आता । जफ
वह ऩड़ोस की औयत के कऩड़े सीती तो कऩड़ो के साथ भगनदास का ददर
तछद जाता। भगय कुछ फस था न काफ।ू

भगनदास की हृदमबेदी दृत्र्षट को इसभें तो कोई सॊदेह
प्रेभ का

नहीॊ था कक उसके

आकषफण त्रफरकुर फेअसय नही है वनाफ यम्बा की उन वपा से बयी

हुई िाततयदरयमों की तक
ु कैसा त्रफठाता वपा ही वह जाद ू है रुऩ के गवफ का
मसय नीचा कय सकता है । भगय। प्रेमभका के ददर भें फैठने का भाद्दा उसभें

फहुत कभ था। कोई दस
ू या भनचरा प्रेभी अफ तक अऩने वशीकयण भें
काभामाफ हो चक
ु ा होता रेककन भगनदास ने ददर आशकक का ऩामा था औय
जफान भाशक
ू की।

एक योज शाभ के वक्त चम्ऩा ककसी काभ से फाजाय गई हुई थी औय
भगनदास हभेशा की तयह चायऩाई ऩय ऩड़ा सऩने दे ि यहा था। यम्बा अदबत

छटा के साथ आकय उसके सभने िडी हो गई। उसका बोरा चेहया कभर की

तयह खिरा हुआ था। औय आिों से सहानब
ु तू त का बाव झरक यहा था।
भगनदास ने उसकी तयप ऩहरे आश्चमफ औय कपय प्रेभ की तनगाहों से दे िा

औय ददर ऩय जोय डारकय फोरा-आओॊ यम्बा, तुम्हें दे िने को फहुत ददन से
आॉिें तयस यही थीॊ।

यम्बा ने बोरेऩन से कहा-भैं महाॊ न आती तो तुभ भझ
ु से कबी न

फोरेते।
आता।

भगनदास का हौसरा फढा, फोरा-त्रफना भजी ऩामे तो कुमता बी

नही

यम्बा भस्
ु कयाई, करी खिर गई–भै तो आऩ ही चरी आई।

भगनदास का करेजा उछर ऩड़ा। उसने दहम्भत कयके यम्बा का हाथ

ऩकड़ मरमा औय बावावेश से क ऩती हुई आवाज भे फोरा–नहीॊ यम्बा ऐसा
नही है। मह भेयी भहीनों की तऩस्मा का पर है।

12

भगनदास ने फेताफ होकय उसे गरे से रगा मरमा। जफ वह चरने

रगी तो अऩने प्रेभी की ओय प्रेभ बयी दृत्र्षट से
हभको तनबानी होगी।

दे िकय फोरी–अफ मह प्रीत

ऩौ पटने के वक्त जफ सम
ू फ दे वता के आगभन की तैमारयम ॉँ हो यही

थी भगनदास की आॉिे िुरी यम्बा आटा ऩीस यही थी। उस शाॊत्मतऩण
ू फ
सन्नाटे भें चक्की की घभ
ु य–घभ
ु य फहुत सह
ु ानी भारभ
ू होती थी औय उससे
सयू मभराकय आऩने प्माये ढॊ ग से गाती थी।
झर
ु तनमाॉ भोयी ऩानी भें गगयी
भैं जानॊू वऩमा भौको भनैहैं
उरटी भनावन भोको ऩड़ी

झर
ु तनमाॉ भोयी ऩानी भे गगयी

सार बय गज
ु य गमा। भगनदास की

भह
ु ब्फत औय यम्बा के सरीके न

मभरकय उस वीयान झोंऩड़े को कॊु ज फाग फना ददमा। अफ वहाॊ गामें थी।

पूरों की क्मारयमाॉ थीॊ औय कई दे हाती ढॊ ग के भोढे थे। सि
ु –सवु वधा की
अनेक चीजे ददिाई ऩड़ती थी।

एक योज सफ
ु ह के वक्त भगनदास कही जाने के मरए तैमाय हो यहा

था कक एक सम््ाॊत व्मत्क्त अॊग्रेजी ऩोशाक ऩहने उसे ढूढॊ ता हुआ आ ऩहुॊचा
औय उसे दे िते ही दौड़कय गरे से मरऩट गमा। भगनदास औय वह दोनो एक
साथ ऩढा कयते थे। वह अफ वकीर हो गमा। था। भगनदास ने बी अफ
ऩहचाना औय कुछ झेंऩता औय कुछ खझझकता

उससे गरे मरऩट गमा। फड़ी

दे य तक दोनों दोस्त फातें कयते यहे । फातें क्मा थीॊ घटनाओॊ औय सॊमोगो की

एक रम्फी कहानी थी। कई भहीने हुए सेठ रगन का छोटा फच्चा चेचक की
नजय हो गमा। सेठ जी ने दि
क भाये आमभहममा कय री औय अफ

भगनदास सायी जामदाद, कोठी इराके औय भकानों का एकछि स्वाभी था।

सेठातनमों भें आऩसी झगड़े हो यहे थे। कभफचारयमों न गफन को अऩना ढॊ ग

फना यक्िा था। फडी सेठानी उसे फर
ु ाने के मरए िुद आने को तैमाय थी,

भगय वकीर साहफ ने उन्हे योका था। जफ भदनदास न भस्
ु कायाकय ऩछ
ु ा–
तम्
ु हों क्मोंकय भारभ
ू हुआ कक भै। महाॉ हूॉ तो वकीर साहफ ने पयभामाभहीने बय से तम्
ु हायी टोह भें हूॉ। सेठ भक्ख्नरार ने अता-ऩता फतरामा।
तूभ ददल्री ऩहुॉचें औय भैंने अऩना भहीने बय का त्रफर ऩेश ककमा।

13

यम्बा अधीय हो यही थी। कक मह कौन है औय इनभे क्मा

फाते हो

यही है ? दस फजते-फजते वकीर साहफ भगनदास से एक हफ्ते के अन्दय

आने का वादा रेकय ववदा हुए उसी वक्त यम्बा आ ऩहुॉची औय ऩछ
ू ने रगीमह कौन थे। इनका तभ
ु से क्मा काभ था?
भगनदास ने जवाफ ददमा- मभयाज का दत
ू ।
यम्बा–क्मा असगुन फकते हो!

भगन-नहीॊ नहीॊ यम्बा, मह असगुन नही है, मह सचभच
ु भेयी भौत का

दत
ू था। भेयी िुमशमों के फाग को यौंदने वारा भेयी हयी-बयी िेती को उजाड़ने
वारा यम्बा भैने तुम्हाये साथ दगा की है , भैंने

तुम्हे अऩने पये फ क जार भें

पाॉसमा है , भझ
ु े भाप कयो। भह
ु ब्फत ने भझ
ु से मह सफ कयवामा भैं भगनमसहॊ
ठाकूय नहीॊ हूॉ। भैं सेठ रगनदास का फेटा औय सेठ भक्िनरार
हूॉ।
भगनदास को डय था कक

का दाभाद

यम्बा मह सन
ु ते ही चौक ऩड़ेगी ओय शामद

उसे जामरभ, दगाफाज कहने रगे। भगय उसका ख्मार गरत तनकरा! यम्बा
ने

आॊिो भें ऑ ॊसू बयकय मसपफ इतना कहा-तो क्मा तुभ भझ
ु े छोड़कय चरे

जाओगे?

भगनदास ने उसे गरे रगाकय कहा-ह ।ॉँ
यम्बा–क्मों?

भगन–इसमरए कक इत्न्दया फहुत होमशमाय सन्
ु दय औय धनी है ।
यम्बा–भैं तम्
ु हें न छोडूॉगी। कबी इत्न्दया की रौंडी थी, अफ उनकी सौत

फनॉग
ू ी। तुभ
क्मों?

त्जतनी भेयी भह
ु ब्फत कयोगे। उतनी इत्न्दया की तो न कयोगे,

भगनदास इस बोरेऩन ऩय भतवारा

हो गमा। भस्
ु कयाकय फोरा-अफ

इत्न्दया तुम्हायी रौंडी फनेगी, भगय सन
ु ता हूॉ वह फहुत सन्
ु दय है । कहीॊ भै
उसकी सयू त ऩय रब
ु ा न जाऊॉ। भदो का हार तभ
ु नही जानती भझ
ु े अऩने
ही से डय रगता है ।

यम्बा ने ववश्वासबयी आॊिो से दे िकय कहा-क्मा तभ
ु बी ऐसा कयोगे?

उॉ ह जो जी भें आमे कयना, भै तम्
ु हें न छोडूॉगी। इत्न्दया यानी फने, भै रौंडी
हूॉगी, क्मा इतने ऩय बी भझ
ु े छोड़ दोगें ?
भगनदास की ऑ ॊिे डफडफा गमीॊ, फोरा–प्मायी, भैने पैसरा

कय मरमा

है कक ददल्री न जाऊॉगा मह तो भै कहने ही न ऩामा कक सेठ जी का
14

स्वगफवास

हो गमा। फच्चा उनसे ऩहरे ही चर फसा था। अपसोस सेठ जी

के आखियी दशफन बी न कय सका। अऩना फाऩ

बी इतनी भह
ु ब्ब्त नही कय

सकता। उन्होने भझ
ु े अऩना वारयस फनामा हैं। वकीर साहफ कहते थे। कक

सेठारयमों भे अनफन है । नौकय चाकय रट
ू भाय-भचा यहे हैं। वह ॉँ का मह हार
है औय भेया ददर वह ॉँ जाने ऩय याजी
जाए।

नहीॊ होता ददर तो महाॉ है वह ॉँ कौन

यम्बा जया दे य तक सोचती यही, कपय फोरी-तो भै तुम्हें छोड़ दॉ ग
ू ीॊ

इतने ददन तुम्हाये साथ यही। त्जन्दगी का
इस सि
ू का ध्मान

सि
ु रट
ु ा अफ

जफ तक त्जऊॉगी

कयती यहूॉगी। भगय तभ
ु भझ
ु े बर
ू तो न जाओगे? सार

भें एक फाय दे ि मरमा कयना औय इसी झोऩड़े भें ।

भगनदास ने फहुत योका भगय ऑ ॊसू न रुक सके फोरे–यम्बा, मह फाते
ने कयो, करेजा फैठा जाता है । भै तम्
ु हे छोड़ नही सकता इसमरए नही कक
तुम्हाये उऩय कोई एहसान है । तुम्हायी िाततय नहीॊ, अऩनी िाततय वह शात्मत
वह प्रेभ, वह आनन्द जो भझ
ु े महाॉ मभरता है औय कहीॊ नही मभर सकता।
िुशी के साथ त्जन्दगी फसय हो, मही
ईश्वय ने मह िुशी महाॉ दे

भनर्षु म के जीवन का रक्ष्म है । भझ
ु े

यक्िी है तो भै उसे क्मो छोड़ूॉ? धन–दौरत को
भेया सराभ है भझ
ु े उसकी हवस नहीॊ है ।
यम्बा कपय गम्बीय स्वय भें फोरी-भै तुम्हाये ऩ व की फेड़ी न फनॉग
ू ी।

चाहे तभ
ु अबी
यहे गी।

भझ
ु े न छोड़ो रेककन थोड़े ददनों भें तम्
ु हायी मह भह
ु ब्फत न

भगनदास को

कोड़ा रगा। जोश

ददर भें अफ कोई औय जगह नहीॊ ऩा सकता।

यात ज्मादा आ गई थी। अर्षटभी का च दॉँ

से फोरा-तुम्हाये मसवा
सोने

इस

जा चक
ु ा था। दोऩहय

के कभर की तयह साप आसभन भें मसताये खिरे हुए थे। ककसी िेत के
यिवारे की फासयु ी की आवाज, त्जसे दयू ी ने तासीय, सन्नाटे न सयु ीराऩन
औय अॉधेये ने आत्मभकता का
थी

आकषफण दे ददमा। था। कानो

कक जैसे कोई ऩववि आमभा नदी

मा दस
ू ये ककनाये के

भें आ जा यही

के ककनाये फैठी हुई ऩानी की रहयों से
िाभोश औय अऩनी तयप िीचनेवारे ऩेड़ो से अऩनी

त्जन्दगी की गभ की कहानी सन
ु ा यही है ।

भगनदास सो गमा भगय यम्बा की आॊिों

15

भें नीद न आई।


फह हुई तो भगनदास उठा
सयम्बा
ु यात ही को अऩनी चाची

औय यम्बा

ऩक
ु ायने

रगा। भगय

के साथ वहाॊ से कही चरी गमी

भगनदास को उसे भकान के दयो दीवाय ऩय एक हसयत-सी छामी हुई भारभ

हुई कक जैसे घय की जान तनकर गई हो। वह घफयाकय उस कोठयी भें गमा
जहाॊ

यम्बा योज चक्की ऩीसती थी, भगय अपसोस आज चक्की एकदभ

तनश्चर थी। कपय वह कॉु ए की

तयह दौड़ा गमा रेककन ऐसा भारभ
ू हुआ कक
कॉु ए ने उसे तनगर जाने के मरए अऩना भॉह
ु िोर ददमा है । तफ वह फच्चो

की तयह चीि उठा योता हुआ कपय उसी झोऩड़ी भें आमा। जह ॉँ कर यात
तक प्रेभ का वास था। भगय आह, उस वक्त वह शोक का घय फना हुआ
था। जफ जया ऑसू थभे तो उसने घय भें चायों तयप तनगाह दौड़ाई। यम्बा

की साड़ी अयगनी ऩय ऩड़ी हुई थी। एक वऩटायी भें वह कॊगन यक्िा हुआ था।
जो भगनदास ने उसे ददमा था। फतफन सफ यक्िे हुए थे, साप औय सध
ु ये ।
भगनदास सोचने रगा-यम्बा तूने यात को कहा था-भै तुम्हे छोड़ दग
ु ीॊ। क्मा
तूने वह फात ददर से कही थी।? भैने तो सभझा था, तू

ददल्रगी कय यही

हैं। नहीॊ तो भझ
ु े करेजे भें तछऩा रेता। भैं तो तेये मरए सफ कुछ छोड़े फैठा

था। तेया प्रेभ भेये मरए सक कुछ था, आह, भै मों फेचन
ै हूॊ, क्मा तू फेचन

नही है? हाम तू यो यही है । भझ
ु े मकीन है कक तू अफ बी रौट आएगी। कपय

सजीव कल्ऩनाओॊ का एक जभघट उसक साभने आमा- वह नाजक
ु अदाएॉ वह

भतवारी ऑ ॊिें वह बोरी बारी फातें , वह अऩने को बर
ू ी हुई-सी भेहयफातनम ॉँ
वह जीवन दामी। भस्
ु कान वह आमशकों जैसी ददरजोइमाॉ वह प्रेभ का नाश,
वह हभेशा खिरा यहने वारा चेहया, वह रचक-रचककय कुएॉ से ऩानी राना,
वह इन्ताजाय की सयू त वह भस्ती से बयी हुई फेचन
ै ी-मह सफ तस्वीयें उसकी
तनगाहों के साभने हभयतनाक फेताफी के साथ कपयने रगी। भगनदास ने एक
ठण्डी स स
जब्त

री औय आसओ
ु ॊ

औय ददफ की उभड़ती हुई नदी को भदाफना
से योककय उठ िड़ा हुआ। नागऩयु जाने का ऩक्का पैसरा हो गमा।

तककमे के नीच से सन्दक

की कॉु जी उठामी तो कागज का एक टुकड़ा

तनकर आमा मह यम्बा की ववदा की गचट्टी थीप्माये ,

16

भै फहुत यो यही हूॉ भेये ऩैय नहीॊ उठते भगय भेया जाना जरयी है। तुम्हे
जागाऊॉगी। तो तभ
ु जाने न दोगे। आह कैसे जाऊॊ अऩने प्माये ऩतत को कैसे
छोडूॉ! ककस्भत भझ
ु से मह आनन्द का घय छुड़वा यही है । भझ
ु े फेवपा न

कहना, भै तभ
ु से कपय कबी मभरॉ ग
ू ी। भै जानती हूॉ। कक तभ
ु ने भेये मरए मह
सफ कुछ ममाग ददमा है । भगय तुम्हाये मरए त्जन्दगी भें । फहुत कुछ उम्भीदे
हैं भैं अऩनी भह
ु ब्फत की धन
ु भें तुम्हें उन उम्भीदो से क्मों

दयू यक्िूॉ! अफ

तुभसे जुदा होती हूॉ। भेयी सध
ु भत बर
ू ना। भैं तुम्हें हभेशा माद यिग
ू ीॊ। मह
आनन्द के मरए कबी न बर
ू ेंगे। क्मा तूभ भझ
ु े बर
ू सकोगें ?
तुम्हायी प्मायी
यम्बा


गनदास को ददल्री आए हुए तीन भहीने गज
ु य चक
ु े हैं। इस फीच उसे
सफसे फड़ा जो तनजी अनब
ु व हुआ वह मह था कक योजी की कपक्र

औय धन्धों की फहुतामत से उभड़ती हुई बावनाओॊ का जोय कभ ककमा। जा
सकता है । ड़ेढ सार ऩहरे का फकपक्र नौजवान अफ एक सभझदाय औय सझ
ू फझ
ू यिने वारा आदभी फन गमा था। सागय घाट

के उस कुछ

कारयन्दों औय भख्
ु तायो की सत्ख्तमों की फदौरत

उन्हे उठानी ऩड़ती है ।

यहने

से उसे रयआमा की

इन तकरीपो

उसने उसे रयमासत के

ददनों के

का तनजी ऻान हो गमा, था जो

इन्तजाभ भें फहुत भदद दी औय गो कभफचायी दफी
जफान से उसकी मशकामत कयते थे। औय अऩनी ककस्भतो औय जभाने क

उरट पेय को कोसने थे भगय रयआमा िश
ु ा थी। ह ,ॉँ जफ वह सफ धॊधों से
पुयसत ऩाता तो एक बोरी बारी सयू तवारी रड़की उसके िमार के ऩहरू भें
आ फैठती औय थोड़ी दे य के

मरए सागय घाट का वह हया बया झोऩड़ा औय

उसकी भत्स्तमा ऑिें के साभने आ जातीॊ। सायी फाते एक सह
ु ाने सऩने की
तयह माद आ आकय उसके ददर को

भसोसने रगती रेककन कबी कबी िूद

फिुद-उसका ख्मार इत्न्दया की तयप बी जा ऩहूॉचता गो उसके ददर भे
यम्बा की वही जगह थी भगय ककसी तयह उसभे इत्न्दया के मरए बी एक
कोना तनकर आमा था। त्जन हारातो औय आपतो ने उसे इत्न्दया से फेजाय

कय ददमा था वह अफ रुिसत हो गमी थीॊ। अफ उसे इत्न्दया से कुछ हभददी
हो गमी । अगय उसके मभजाज भें घभण्ड है , हुकूभत है तकल्रप
ू है शान है
17

तो मह उसका कसयू नहीॊ मह यईसजादो की आभ कभजोरयमाॊ है मही उनकी
मशऺा है । वे त्रफरकुर फेफस औय भजफयू है । इन फदते

हुए औय सॊतमु रत
बावो के साथ जहाॊ वह फेचन
ै ी के साथ यम्बा की माद को ताजा ककमा कयता

था वहा इत्न्दया का स्वागत कयने औय उसे अऩने ददर भें जगह दे ने के मरए
तैमाय था। वह ददन दयू नहीॊ था जफ उसे उस आजभाइश का साभना कयना
ऩड़ेगा। उसके कई आमभीम अभीयाना शान-शौकत के साथ इत्न्दया को ववदा

कयाने के मरए नागऩयु गए हुए थे। भगनदास की फततमत आज तयह तयह
के बावो के कायण, त्जनभें प्रतीऺा औय मभरन की उमकॊठा ववशेष थी, उचाट
सी हो यही थी। जफ कोई नौकय आता तो वह सम्हर फैठता कक शामद
इत्न्दया आ ऩहुॉची आखिय शाभ के वक्त जफ ददन औय यात गरे मभरे यहे

थे, जनानिाने भें जोय शाये के गाने की आवाजों ने फहू के ऩहुचने की सच
ू ना
दी।

सह
ु ाग की सह
ु ानी यात थी। दस फज गमे थे। िुरे हुए हवादाय सहन
ॉँ
ॉँ
भें च दनी
तछटकी हुई थी, वह च दनी
त्जसभें नशा है । आयजू है । औय
खिॊचाव है। गभरों भें खिरे हुए गुराफ औय चम्भा के पूर च दॉँ की सन
ु हयी
योशनी भें ज्मादा गम्बीय ओय िाभोश नजय आते थे। भगनदास इत्न्दया से
मभरने के मरए चरा। उसके ददर से रारसाऍ ॊ जरुय थी भगय एक ऩीड़ा बी

थी। दशफन की उमकण्ठा थी भगय प्मास से िोरी। भह
ु ब्फत नही प्राणों को

खिचाव था जो उसे िीचे मरए जाताथा। उसके ददर भें फैठी हुई यम्बा शामद
फाय-फाय फाहय तनकरने की कोमशश कय यही थी। इसीमरए ददर भें धड़कन

हो यही थी। वह सोने के कभये के दयवाजे ऩय ऩहुचा ये शभी ऩदाफ ऩड़ा हुआ
था। उसने ऩदाफ उठा ददमा अन्दय एक औयत सपेद साड़ी ऩहने िड़ी थी। हाथ
भें चन्द िूफसयू त चडू ड़मों के मसवा उसके

फदन ऩय एक जेवय बी न था।

ज्मोही ऩदाफ उठा औय भगनदास ने अन्दयी हभ यक्िा वह भस्
ु कायाती हुई
उसकी तयप फढी भगनदास ने उसे दे िा औय चककत होकय फोरा। ―यम्बा!―
औय दोनो प्रेभावेश से मरऩट गमे। ददर भें फैठी हुई यम्बा फाहय तनकर आई
थी।

सार बय गज
ु यने के वाद एक ददन इत्न्दया ने अऩने ऩतत से कहा। क्मा
यम्बा को त्रफरकुर बर
ू गमे? कैसे फेवपा हो! कुछ माद है, उसने चरते
वक्त तुभसे मा त्रफनती की थी?

18

भगनदास ने कहा- िफ
ू माद है । वह आवाज बी कानों भें गज
ू यही है ।

भैं यम्बा को बोरी –बारी

रड़की सभझता था। मह नहीॊ जानता था कक मह

त्रिमा चरयि का जाद ू है । भै अऩनी यम्बा का अफ बी इत्न्दया से ज्मादा प्माय
कयता हूॊ। तम्
ु हे डाह तो नहीॊ होती?
इत्न्दया ने हॊ सकय जवाफ ददमा डाह क्मों हो। तूम्हायी यम्बा है तो क्मा

भेया गनमसहॊ नहीॊ है। भैं अफ बी उस ऩय भयती हूॊ।
दस
ू ये ददन दोनों ददल्री से एक यार्षरीम सभायोह भें शयीक होने का

फहाना कयके यवाना हो गए औय सागय घाट जा ऩहुचें। वह झोऩड़ा वह
भह
ु ब्फत का भत्न्दय वह प्रेभ बवन पूर औय दहयमारी से रहया यहा था
चम्ऩा भामरन उन्हें वहाॉ मभरी। गाॊव के जभीॊदाय उनसे मभरने के मरए आमे।

कई ददन तक कपय भगनमसह को घोड़े तनकारना ऩडें । यम्बा कुए से ऩानी
राती िाना ऩकाती। कपय चक्की ऩीसती औय गाती। गाॉव की औयते कपय

उससे अऩने कुते औय फच्चो की रेसदाय टोवऩमाॊ मसराती है । हा, इतना जरुय

कहती कक उसका यॊ ग कैसा तनिय आमा है , हाथ ऩावॊ कैसे भर
ु ामभ मह ऩड़
गमे है ककसी फड़े घय की यानी भारभ
ू होती है। भगय स्वबाव वही है, वही
भीठी फोरी है। वही भयु ौवत, वही हॉ सभि
ु चेहया।

इस तयह एक हपते इस सयर औय ऩववि जीवन का आनन्द उठाने के

फाद दोनो ददल्री वाऩस आमे औय अफ दस सार गुजयने

ऩय बी सार भें

एक फाय उस झोऩड़े के नसीफ जागते हैं। वह भह
ु ब्फत की दीवाय अबी तक
उन दोनो

प्रेमभमों को अऩनी छामा भें आयाभ दे ने के मरए िड़ी है ।

-- जभाना , जनवयी 1913

19

ममऱाऩ

रा

रा ऻानचन्द फैठे हुए दहसाफ–ककताफ जाॉच यहे थे कक उनके सऩ
ु ि

फाफू नानकचन्द आमे औय फोरे- दादा, अफ महाॊ ऩड़े –ऩड़े जी उसता

गमा, आऩकी आऻा हो तो भौ सैय को तनकर जाऊॊ दो
आऊॉगा।

एक भहीने भें रौट

नानकचन्द फहुत सश
ु ीर औय नवमव
ु क था। यॊ ग ऩीरा आॊिो के गगदफ
हरके स्माह धब्फे कॊधे झक
ु े हुए। ऻानचन्द ने उसकी तयप तीिी तनगाह से

दे िा औय व्मॊगऩणफ स्वय भे फोरे –क्मो क्मा महाॊ तम्
ु हाये मरए कुछ कभ
ददरचत्स्ऩम ॉँ है?
ऻानचन्द ने फेटे को सीधे यास्ते ऩय रोने की फहुत कोमशश की थी
ॉँ
भगय सपर न हुए। उनकी ड ट-पटकाय
औय सभझाना-फझ
ु ाना फेकाय हुआ।

उसकी सॊगतत अच्छी न थी। ऩीने वऩराने औय याग-यॊ ग भें डूफा यहता था।
उन्हें मह नमा प्रस्ताव क्मों ऩसन्द आने रगा, रेककन नानकचन्द उसके
स्वबाव से ऩरयगचत था। फेधड़क फोरा- अफ मह ॉँ जी नहीॊ रगता। कश्भीय की
फहुत तायीप सन
ु ी है, अफ वहीॊ जाने की सोचना हूॉ।
ऻानचन्द- फेहयत है, तशयीप रे जाइए।

ॉँ सौ रुऩमे
नानकचन्द- (हॊ सकय) रुऩमे को ददरवाइए। इस वक्त ऩ च

की सख्त जरयत है ।

ऻानचन्द- ऐसी कपजर
ू फातों का भझसे त्जक्र न ककमा कयो, भैं तुभको

फाय-फाय सभझा चक
ु ा।

नानकचन्द ने हठ कयना शर
ु ककमा औय फढ
ू े रारा इनकाय कयते यहे ,

मह ॉँ तक कक नानकचन्द झॉझ
ू राकय फोरा- अच्छा कुछ भत दीत्जए, भैं मों
ही चरा जाऊॉगा।

ऻानचन्द ने करेजा भजफत
कयके कहा- फेशक, तभ
ऐसे ही

दहम्भतवय हो। वह ॉँ बी तम्
ु हाये बाई-फन्द फैठे हुए हैं न!
नानकचन्द- भझ
ु े ककसी की ऩयवाह नहीॊ। आऩका रुऩमा आऩको
भफ
ु ायक यहे ।

20

नानकचन्द की मह चार कबी ऩट नहीॊ ऩड़ती थी। अकेरा रड़का था,

फढ
ू े रारा साहफ ढीरे ऩड़ गए। रुऩमा ददमा, िश
ु ाभद की औय उसी ददन
नानकचन्द कश्भीय की सैय के मरए यवाना हुआ।


गय नानकचन्द मह ॉँ से अकेरा न चरा। उसकी प्रेभ की फातें आज
सपर हो गमी थीॊ। ऩड़ोस भें फाफू याभदास यहते थे। फेचाये सीधे-सादे

आदभी थे, सफ
ु ह दफ्तय जाते औय शाभ को आते औय इस फीच नानकचन्द
अऩने कोठे ऩय फैठा हुआ उनकी फेवा रड़की से भह
ु ब्फत के इशाये ककमा
कयता। मह ॉँ तक कक अबागी रमरता उसके जार भें आ पॅंसी। बाग जाने के
भॊसफ
ू े हुए।
आधी यात का वक्त था, रमरता एक साड़ी ऩहने अऩनी चायऩाई ऩय

कयवटें फदर यही थी। जेवयों को उतायकय उसने एक सन्दक
ू चे भें यि ददमा
था। उसके ददर भें इस वक्त तयह-तयह के िमार दौड़ यहे थे औय करेजा

जोय-जोय से धड़क यहा था। भगय चाहे औय कुछ न हो, नानकचन्द की तयप

से उसे फेवपाई का जया बी गुभान न था। जवानी की सफसे फड़ी नेभत
भह
ु ब्फत है औय इस नेभत को ऩाकय रमरता अऩने को िुशनसीफ सभझ यही
थी। याभदास फेसध
ु सो यहे थे कक इतने भें कुण्डी िटकी। रमरता चौंककय

उठ िड़ी हुई। उसने जेवयों का सन्दक
ू चा उठा मरमाॊ एक फाय इधय-उधय
हसयत-बयी तनगाहों से दे िा औय दफे ऩ वॉँ चौंक-चौककय कदभ उठाती
दे हरीज भें आमी औय कुण्डी िोर दी। नानकचन्द ने उसे गरे से रगा
मरमा। फग्घी तैमाय थी, दोनों उस ऩय जा फैठे।

सफ
ु ह को फाफू याभदास उठे , रमरत न ददिामी दी। घफयामे, साया घय

छान भाया कुछ ऩता न चरा। फाहय की कुण्डी िुरी दे िी। फग्घी के तनशान
नजय आमे। सय ऩीटकय फैठ गमे। भगय अऩने ददर का द2दफ ककससे कहते।

हॉ सी औय फदनाभी का डय जफान ऩय भोहय हो गमा। भशहूय ककमा कक वह
अऩने नतनहार औय गमी भगय रारा ऻानचन्द सन
ु ते ही ब ऩॉँ गमे कक
कश्भीय की सैय के कुछ औय ही भाने थे। धीये -धीये मह फात साये भह
ु ल्रे भें
पैर गई। मह ॉँ तक कक फाफू याभदास ने शभफ के भाये आमभहममा कय री।

21

भु

हब्फत की सयगमभफमाॊ नतीजे की तयप से त्रफरकुर फेिफय होती हैं।
नानकचन्द त्जस वक्त फग्घी भें रमरत के साथ फैठा तो उसे इसके

मसवाम औय कोई िमार ने था कक एक मव
ु ती भेये फगर भें फैठी है , त्जसके

ददर का भैं भामरक हूॉ। उसी धन
ु भें वह भस्त थाॊ फदनाभी का ड़य, कानन

का िटका, जीववका के साधन, उन सभस्माओॊ ऩय ववचाय कयने की उसे उस
वक्त पुयसत न थी। ह ,ॉँ उसने कश्भीय का इयादा छोड़ ददमा। करकमते जा

ऩहुॉचा। ककपामतशायी का सफक न ऩढा था। जो कुछ जभा-जथा थी, दो
भहीनों भें िचफ हो गमी। रमरता के गहनों ऩय नौफत आमी। रेककन

नानकचन्द भें इतनी शयापत फाकी थी। ददर भजफत
ू कयके फाऩ को ित
मरिा, भह
ु ब्फत को गामरम ॉँ दीॊ औय ववश्वास ददरामा कक अफ आऩके ऩैय

चभ
ू ने के मरए जी फेकयाय है, कुछ िचफ बेत्जए। रारा साहफ ने ित ऩढा,
तसकीन हो गमी कक चरो त्जन्दा है िैरयमत से है । धभ
ू -धाभ से
सममनायामण की कथा सन
ु ी। रुऩमा यवाना कय ददमा, रेककन जवाफ भें

मरिा-िैय, जो कुछ तुम्हायी ककस्भत भें था वह हुआ। अबी इधय आने का
इयादा भत कयो। फहुत फदनाभ हो यहे हो। तुम्हायी वजह से भझ
ु े बी त्रफयादयी
से नाता तोड़ना ऩड़ेगा। इस तूपान को उतय जाने दो। तभ
ु हें िचफ की

तकरीप न होगी। भगय इस औयत की फाॊह ऩकड़ी है तो उसका तनफाह
कयना, उसे अऩनी ब्माहता स्िी सभझो।

नानकचन्द ददर ऩय से गचन्ता का फोझ उतय गमा। फनायस से

भाहवाय वजीपा मभरने रगा। इधय रमरता की कोमशश ने बी कुछ ददर को
िीॊचा औय गो शयाफ की रत न टूटी औय हफ्ते भें दो ददन जरय गथमेटय

दे िने जाता, तो बी तत्रफमत भें त्स्थयता औय कुछ सॊमभ आ चरा था। इस
तयह करकमते भें उसने तीन सार काटे । इसी फीच एक प्मायी रड़की के फाऩ
फनने का सौबाग्म हुआ, त्जसका नाभ उसने कभरा यक्िा।

ती

सया सार गुजया था कक नानकचन्द के उस शात्न्तभम जीवन भें

हरचर ऩैदा हुई। रारा ऻानचन्द का ऩचासव ॉँ सार था जो
दहन्दोस्तानी यईसों की प्राकृततक आमु है । उनका स्वगफवास हो गमा औय
22

ज्मोंही मह िफय नानकचन्द को मभरी वह रमरता के ऩास जाकय चीिें

भाय-भायकय योने रगा। त्जन्दगी के नमे-नमे भसरे अफ उसके साभने आए।

इस तीन सार की सॉबरी हुई त्जन्दगी ने उसके ददर शोहदे ऩन औय
नशेफाजी क िमार फहुत कुछ दयू कय ददमे थे। उसे अफ मह कपक्र सवाय

हुई कक चरकय फनायस भें अऩनी जामदाद का कुछ इन्तजाभ कयना चादहए,
वनाफ साया कायोफाय भें अऩनी जामदाद का कुछ इन्तजाभ कयना चादहए, वनाफ

साया कायोफाय धर
ू भें मभर जाएगा। रेककन रमरता को क्मा करॉ। अगय इसे
वह ॉँ मरमे चरता हूॉ तो तीन सार की ऩयु ानी घटनाएॊ ताजी हो जामेगी औय

हरचर ऩैदा होगी जो भझ
ु े हूक्काभ औय हभजोहरम ॉँ भें जरीर
कय दे गी। इसके अरावा उसे अफ कानन
ू ी औराद की जरुयत बी नजय आने
कपय एक

रगी मह हो सकता था कक वह रमरता को अऩनी ब्माहता स्िी भशहूय कय
दे ता रेककन इस आभ िमार को दयू कयना असम्बव था कक उसने उसे
बगामा हैं रमरता से नानकचन्द को अफ वह भह
ु ब्फत न थी त्जसभें ददफ
होता है औय फेचन
ै ी होती है । वह अफ एक साधायण ऩतत था जो

गरे भें ऩड़े

हुए ढोर को ऩीटना ही अऩना धभफ सभझता है, त्जसे फीफी की भह
ु ब्फत उसी
वक्त माद आती है , जफ वह फीभाय होती है । औय इसभे अचयज की कोई
फात नही

है अगय त्जॊदगीॊ की नमी नमी उभॊगों ने

ककमा। भसफ
ू े ऩैदा होने

उसे उकसाना शर

रेगे त्जनका दौरत औय फड़े रोगों के

भेर जोर

से सफॊध है भानव बावनाओॊ की मही साधायण दशा है । नानकचन्द अफ

भजफत
ू इयाई के साथ सोचने रगा कक महाॊ से क्मोंकय बागॉ।ू अगय रजाजत

रेकय जाता हूॊ। तो दो चाय ददन भें साया ऩदाफ पाश हो जाएगा। अगय हीरा
ककमे जाता हूॉ तो आज के तीसये ददन रमरता फनयस भें भेये सय ऩय सवाय
होगी कोई ऐसी तयकीफ तनकारॊू कक इन सम्बावनओॊ से भत्ु क्त मभरे।
सोचते-सोचते उसे आखिय एक तदफीय सझ
ु ी। वह

एक

ददन शाभ को

दरयमा की सैय का फाहाना कयके चरा औय यात को घय ऩय न अमा। दस
ू ये

ददन सफ
ु ह को एक चौकीदाय रमरता के ऩास आमा औय उसे थाने भें रे

गमा। रमरता हैयान थी कक क्मा भाजया है । ददर भें तयह-तयह की
दमु शचन्तामें ऩैदा हो यही थी

वह ॉँ जाकय जो कैकपमत दे िी तो दतू नमा आॊिों

भें अॊधयी हो गई नानकचन्द के कऩड़े िन
ू भें तय-फ-तय ऩड़े थे उसकी वही

सन
ु हयी घड़ी वही िूफसयू त छतयी, वही ये शभी सापा सफ वहाॉ भौजूद था। जेफ

भे उसके नाभ के छऩे हुए काडफ थे। कोई सॊदेश न यहा कक नानकचन्द को
23

ककसी ने कमर कय डारा

दो तीन हफ्ते तक थाने भें तककीकातें होती यही

औय, आखिय काय िन
ू ी का ऩता चर
इनाभ मभरे।इसको जासस
ू ी
की प्रततद्वन्द्ववता के

गमा ऩमु रस के अपसया को फड़े फड़े

का एक फड़ा आश्चमफ सभझा गमा। िन
ू ी नेप्रेभ

जोश भें मह काभ ककमा। भगय इधय तो गयीफ

फेगुनाह िूनी सर
ू ी ऩय चढा हुआ था। औय वहाॉ फनायस भें नानक चन्द की
शादी यचामी जा यही थी।
5

रा

रा नानकचन्द की शादी एक यईस घयाने भें हुई औय तफ धीये धीये
कपय वही ऩयु ाने उठने फैठनेवारे आने शरु
हुए कपय वही भजमरसे

जभीॊ औय कपय वही सागय-ओ-भीना के दौय चरने रगे। समॊभ

का कभजोय

अहाता इन ववषम –वासना के फटभायो को न योक सका। ह ,ॉँ अफ इस ऩीने
वऩराने भे कुछ

ऩयदा यिा जाता है। औय ऊऩय से थोडी सी गम्बीयता

फनामे यिी जाती है सार बय इसी फहाय भें गज
ु या नवेरी फहूघय भें कुढ
कुढकय भय गई। तऩेददक ने उसका काभ तभाभ कय ददमा। तफ दस
ू यी शादी
हुई। भगय इस स्िी भें नानकचन्द की सौन्दमफ प्रेभी आॊिो के मरए मरए कोई
आकषफण न था। इसका बी वही हार हुआ। कबी त्रफना योमे कौय भॊह
ु भें नही

ददमा। तीन सार भें चर फसी। तफ तीसयी शादी हुई। मह औयत फहुत सन्
ु दय
थी अचछी आबष
ू णों से सस
ु त्ज्जत उसने नानकचन्द के ददर भे जगह कय

री एक फच्चा बी ऩैदा हुआ था औय नानकचन्द गाहफत्स्र्थक आनॊदों से
ऩरयगचत होने रगा। दतु नमा के नाते रयशते अऩनी तयप िीॊचने रगे भगय
प्रेग के मरए ही साये भॊसफ
ू े धर
ू भें मभरा ददमे। ऩततप्राणा स्िी भयी, तीन
फयस

का प्माया रड़का हाथ से गमा। औय ददर ऩय ऐसा दाग छोड़ गमा

त्जसका कोई भयहभ न था। उच्छिि
ॊ ृ रता बी चरी गई ऐमाशी का बी
िामभा हुआ। ददर
गमी।

जी

ऩय यॊ जोगभ छागमा औय

तत्रफमत सॊसाय से ववयक्त हो

6
वन की दघ
फ नाओॊ भें अकसय फड़े भहमव के नैततक ऩहरू तछऩे हुआ
ु ट
कयते है । इन सइभों ने नानकचन्द के ददर भें भये हुए इन्सान को

बी जगा ददमा। जफ वह तनयाशा के मातनाऩण
ू फ

अकेरऩन भें ऩड़ा हुआ इन
घटनाओॊ को माद कयता तो उसका ददर योने रगता औय ऐसा भारभ
ू होता
24

कक ईश्वय ने भझ
ु े भेये ऩाऩों की सजा दी है धीये धीये मह ख्मार उसके ददर

भें भजफत
ू हो गमा। ऊप भैने उस भासभ
ू औयत ऩय कैसा जल्
ू भ ककमा कैसी

फेयहभी की! मह उसी का दण्ड है। मह सोचते-सोचते रमरता की भामस

तस्वीय उसकी आिों के साभने िड़ी हो जाती औय प्मायी भि
ु ड़ेवारी कभरा

अऩने भये हूए सौतेर बाई के साथ उसकी तयप प्माय से दौड़ती हुई ददिाई
दे ती। इस रम्फी अवगध भें नानकचन्द को रमरता की माद तो कई फाय
आमी थी भगय बोग ववरास ऩीने वऩराने की उन कैकपमातो ने कबी उस

िमार को जभने नहीॊ ददमा। एक धध
ु रा-सा सऩना ददिाई ददमा औय त्रफिय

गमा। भारभ
ू नहीदोनो भय गमी मा त्जन्दा है । अपसोस! ऐसी फेकसी की
हारत भें छोउ़कय भैंने उनकी
है त्जसके

मरए ऐसी

सध
ु तक न री। उस नेकनाभी ऩय गधक्काय

तनदफ मता की कीभत दे नी ऩड़े। मह िमार उसके ददर

ऩय इस फयु ी तयह फैठा कक एक योज वह करकमता के मरए यवाना

हो गमा।

सफ
ु ह का वक्त था। वह करकमते ऩहुॉचा औय अऩने उसी ऩयु ाने घय को
चरा। साया शहय कुछ हो गमा था। फहुत तराश के फाद उसे अऩना ऩयु ाना
घय नजय आमा। उसके ददर भें जोय से धड़कन होने रगी औय बावनाओॊ भें

हरचर ऩैदा हो गमी। उसने एक ऩड़ोसी से ऩछ
ू ा-इस भकान भें कौन यहता
है ?

फढ
ू ा फॊगारी था, फोरा-हाभ मह नहीॊ कह सकता, कौन है कौन नहीॊ है।

इतना फड़ा भर
ु क
ु भें कौन ककसको जानता है ? ह ,ॉँ एक रड़की औय उसका
फढ
ू ा भ ,ॉँ दो औयत यहता है । ववधवा हैं, कऩड़े की मसराई कयता है । जफ से
उसका आदभी भय गमा, तफ से मही काभ कयके अऩना ऩेट ऩारता है।

इतने भें दयवाजा िर
ु ा औय एक तेयह-चौदह सार की सन्
ु दय रड़की

ककताव मरमे हुए फाहय तनकरी। नानकचन्द ऩहचान गमा कक मह कभरा है ।
उसकी ऑ ॊिों भें ऑ ॊसू उभड़ आए, फेआत्ख्तमाय जी चाहा कक उस रड़की को

छाती से रगा रे। कुफेय की दौरत मभर गमी। आवाज को सम्हारकय फोराफेटी, जाकय अऩनी अम्भ ॉँ से कह दो कक फनायस से एक आदभी आमा है ।
रड़की अन्दय चरी गमी औय थोड़ी दे य भें रमरता दयवाजे ऩय आमी। उसके

चेहये ऩय घॉघ
ू ट था औय गो सौन्दमफ की ताजगी न थी भगय आकषफण अफ बी
ॉँ री। ऩततव्रत औय धैमफ औय
था। नानकचन्द ने उसे दे िा औय एक ठॊ डी स स

तनयाशा की सजीव भतू तफ साभने िड़ी थी। उसने फहुत जोय रगामा, भगय
जब्त न हो सका, फयफस योने रगा। रमरता ने घॊघ
ू ट की आउ़ से उसे दे िा
25

औय आश्चमफ के सागय भें डूफ गमी। वह गचि जो हृदम-ऩट ऩय अॊककत था,
औय जो जीवन के अल्ऩकामरक आनन्दों की माद ददराता यहता था, जो

सऩनों भें साभने आ-आकय कबी िश
ु ी के गीत सन
ु ाता था औय कबी यॊ ज के
तीय चब
ु ाता था, इस वक्त सजीव, सचर साभने िड़ा था। रमरता ऩय ऐ

फेहोशी छा गमी, कुछ वही हारत जो आदभी को सऩने भें होती है । वह व्मग्र
होकय नानकचन्द की तयप फढी औय योती हुई फोरी-भझ
ु े बी अऩने साथ रे
चरो। भझ
ु े अकेरे ककस ऩय छोड़ ददमा है; भझ
ु से अफ मह ॉँ नहीॊ यहा जाता।
रमरता को इस फात की जया बी चेतना न थी कक वह उस व्मत्क्त के

साभने िड़ी है जो एक जभाना हुआ भय चक
ु ा, वनाफ शामद वह चीिकय
बागती। उस ऩय एक सऩने की-सी हारत छामी हुई थी, भगय जफ
नानकचनद ने उसे सीने से रगाकय कहा ‘रमरता, अफ तभ
ु को अकेरे न
यहना ऩड़ेगा, तम्
ॉू ा। भैं इसीमरए तम्
ु हें इन ऑ ॊिों की ऩत
ु री फनाकय यिग
ु हाये

ऩास आमा हूॉ। भैं अफ तक नयक भें था, अफ तुम्हाये साथ स्वगफ को सि

बोगॉग
ू ा।’ तो रमरता चौंकी औय तछटककय अरग हटती हुई फोरी-ऑ ॊिों को
तो मकीन आ गमा भगय ददर को नहीॊ आता। ईश्वय कये मह सऩना न हो!

-जभाना, जून १९१३

26

मनावन

फा

फू दमाशॊकय उन रोगों भें थे त्जन्हें उस वक्त तक सोहफत का भजा
नहीॊ मभरता जफ तक कक वह प्रेमभका की जफान की तेजी का भजा

न उठामें। रठे हुए को भनाने भें उन्हें फड़ा आनन्द मभरता कपयी हुई तनगाहें
कबी-कबी भह
ु ब्फत के नशे की भतवारी ऑ ॊिें से बी ज्मादा भोहक जान
ऩड़तीॊ। आकषफक रगती। झगड़ों भें मभराऩ से ज्मादा भजा आता। ऩानी भें

हरके-हरके झकोरे कैसा सभ ॉँ ददिा जाते हैं। जफ तक दरयमा भें धीभी-धीभी
हरचर न हो सैय का रमु प नहीॊ।

अगय फाफू दमाशॊकय को इन ददरचत्स्ऩमों के कभ भौके मभरते थे तो

मह उनका कसयू न था। गगरयजा स्वबाव से फहुत नेक औय गम्बीय थी, तो
बी चॊकू क उनका कसयू न था। गगरयजा स्वबाव से फहुत नेक औय गम्बीय थी,
तो बी चकॊू क उसे अऩने ऩतत की रुगच का अनब
ु व हो चक
ु ा था इसमरए वह
कबी-कबी अऩनी तत्रफमत के खिराप मसपफ उनकी िाततय से उनसे रठ
जाती थी भगय मह फे-नीॊव की दीवाय हवा का एक झोंका बी न सम्हार

सकती। उसकी ऑ ॊिे, उसके होंठ उसका ददर मह फहुरवऩमे का िेर ज्मादा
दे य तक न चरा सकते। आसभान ऩय घटामें आतीॊ भगय सावन की नहीॊ,
कुआय की। वह ड़यती, कहीॊ ऐसा न हो कक हॉ सी-हॉ सी से योना आ जाम।
आऩस की फदभजगी के ख्मार से उसकी जान तनकर जाती थी। भगय इन

भौकों ऩय फाफू साहफ को जैसी-जैसी रयझाने वारी फातें सझ
ू तीॊ वह काश
ववद्माथी जीवन भें सझ
ू ी होतीॊ तो वह कई सार तक कानन
ू से मसय भायने
के फाद बी भाभर
ू ी क्रकफ न यहते।

माशॊकय को कौभी जरसों से फहुत ददरचस्ऩी थी। इस ददरचस्ऩी की
फतु नमाद उसी जभाने भें ऩड़ी जफ वह कानन
ू की दयगाह के भज
ु ाववय थे

औय वह अक तक कामभ थी। रुऩमों की थैरी गामफ हो गई थी भगय कॊधों

भें ददफ भौजद
ू था। इस सार काॊफ्रेंस का जरसा सताया भें होने वारा था।
तनमत तायीि से एक योज ऩहरे फाफू साहफ सताया को यवाना हुए। सपय की
तैमारयमों भें इतने व्मस्त थे कक गगरयजा से फातचीत कयने की बी पुसफत न
27

मभरी थी। आनेवारी िुमशमों की उम्भीद उस ऺखणक ववमोग के िमार के
ऊऩय बायी थी।

कैसा शहय होगा! फड़ी तायीप सन
ु ते हैं। दकन सौन्दमफ औय सॊऩदा की

िान है । िफ
ू सैय यहे गी। हजयत तो इन ददर को िश
ु कयनेवारे ख्मारों भें

भस्त थे औय गगरयजा ऑ ॊिों भें आॊसू बये अऩने दयवाजे ऩय िड़ी मह

कैकपमर दे ि यही थी औय ईश्वय से प्राथफना कय यही थी कक इन्हें िैरयतम से
राना। वह िुद एक हफ्ता कैसे काटे गी, मह ख्मार फहुत ही कर्षट दे नेवारा
था।

गगरयजा इन ववचायों भें व्मस्त थी दमाशॊकय सपय की तैमारयमों भें ।

मह ॉँ तक कक सफ तैमारयम ॉँ ऩयू ी हो गई। इक्का दयवाजे ऩय आ गमा। त्रफसतय

औय रॊ क उस ऩय यि ददमे औय तफ ववदाई बें ट की फातें होने रगीॊ।
दमाशॊकय गगरयजा के साभने आए औय भस्
ु कयाकय फोरे-अफ जाता हूॉ।
गगरयजा के करेजे भें एक फछी-सी रगी। फयफस जी चाहा कक उनके

सीने से मरऩटकय योऊॉ। ऑ ॊसओ
ु ॊ की एक फाढ-सी ऑ ॊिें भें आती हुई भारभ

हुई भगय जब्त कयके फोरी-जाने को कैसे कहूॉ, क्मा वक्त आ गमा?
इमाशॊकय-ह ,ॉँ फत्ल्क दे य हो यही है ।

गगरयजा-भॊगर की शाभ को गाड़ी से आओगे न?

दमाशॊकय-जरय, ककसी तयह नहीॊ रक सकता। तुभ मसपफ उसी ददन

भेया इॊतजाय कयना।

गगरयजा-ऐसा न हो बर
ू जाओ। सताया फहुत अच्छा शहय है ।
दमाशॊकय-(हॉ सकय) वह स्वगफ ही क्मों न हो, भॊगर को मह ॉँ जरय आ

जाऊॉगा। ददर फयाफय महीॊ यहे गा। तुभ जया बी न घफयाना।

मह कहकय गगरयजा को गरे रगा मरमा औय भस्
ु कयाते हुए फाहय
तनकर आए। इक्का यवाना हो गमा। गगरयजा ऩरॊग ऩय फैठ गई औय िूफ

योमी। भगय इस ववमोग के दि
ु , ऑ ॊसओ
ु ॊ की फाढ, अकेरेऩन के ददफ औय
तयह-तयह के बावों की बीड़ के साथ एक औय ख्मार ददर भें फैठा हुआ था
त्जसे वह फाय-फाय हटाने की कोमशश कयती थी-क्मा इनके ऩहरू भें ददर नहीॊ
है ! मा है तो उस ऩय उन्हें ऩयू ा-ऩयू ा अगधकाय है ? वह भस्
ु कयाहट जो ववदा

होते वक्त दमाशॊकय के चेहये य रग यही थी, गगरयजा की सभझ भें नहीॊ
आती थी।

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ताया भें फड़ी धध
ू भ थी। दमाशॊकय गाड़ी से उतये तो वदीऩोश
वारॊदटमयों ने उनका स्वागात ककमा। एक कपटन उनके मरए तैमाय

िड़ी थी। उस ऩय फैठकय वह काॊफ्रेंस ऩॊड़ार की तयप चरें दोनों तयप

झॊडडम ॉँ रहया यही थीॊ। दयवाजे ऩय फन्दवायें रटक यही थी। औयतें अऩने

झयोिों से औय भदफ फयाभदों भें िड़े हो-होकय िुशी से तामरम ॉँ फाजते थे।
इस शान-शौकत के साथ वह ऩॊड़ार भें ऩहुॉचे औय एक िूफसयू त िेभे भें
उतये । मह ॉँ सफ तयह की सवु वधाऍ ॊ एकि थीॊ, दस फजे काॊफ्रेंस शर
ु हुई।
वक्ता अऩनी-अऩनी बाषा के जरवे ददिाने रगे। ककसी के हॉसी-ददल्रगी से

बये हुए चट
ु कुरों ऩय वाह-वाह की धभ
ू भच गई, ककसी की आग फयसानेवारे
तकयीय ने ददरों भें जोश की एक तहय-सी ऩेछा कय दी। ववद्वमताऩण
ू फ बाषणों

के भक
ु ाफरे भें हॉ सी-ददल्रगी औय फात कहने की िफ
ु ी को रोगों ने ज्मादा
ऩसन्द ककमा। िोताओॊ को उन बाषणों भें गथमेटय के गीतों का-सा आनन्द
आता था।

कई ददन तक मही हारत यही औय बाषणों की दृत्श्ट से काॊफ्रेंस को

शानदाय काभमाफी हामसर हुई। आखियकाय भॊगर का ददन आमा। फाफू साहफ
वाऩसी की तैमारयम ॉँ कयने रगे। भगय कुछ ऐसा सॊमोग हुआ कक आज उन्हें

भजफयू न ठहयना ऩड़ा। फम्फई औय म.ू ऩी. के ड़ेरीगेटों भें एक हाकी भैच ठहय
गई। फाफू दमाशॊकय हाकी के फहुत अच्छे खिराड़ी थे। वह बी टीभ भें
दाखिर कय मरमे गमे थे। उन्होंने फहुत कोमशश की कक अऩना गरा छुड़ा रॉ ू
भगय दोस्तों ने इनकी आनाकानी ऩय त्रफरकुर ध्मान न ददमा। साहफ, जो

ज्मादा फेतकल्रप
थे, फोर-आखिय तुम्हें इतनी जल्दी क्मों है ? तुम्हाया

दफ्तय अबी हफ्ता बय फॊद है । फीवी साहफा की जायाजगी के मसवा भझ
ु े इस
जल्दफाजी का कोई कायण नहीॊ ददिामी ऩड़ता। दमाशॊकय ने जफ दे िा कक

जल्द ही भझ
ु ऩय फीवी का गुराभ होने की पफततम ॉँ कसी जाने वारी हैं,
त्जससे ज्मादा अऩभानजनक फात भदफ की शान भें कोई दस
ू यी नहीॊ कही जा

सकती, तो उन्होंने फचाव की कोई सयू त न दे िकय वाऩसी भल्
ु तवी कय दी।
औय हाकी भें शयीक हो गए। भगय ददर भें मह ऩक्का इयादा कय मरमा कक

शाभ की गाड़ी से जरय चरे जामेंगे, कपय चाहे कोई फीवी का गर
ु ाभ नहीॊ,
फीवी के गुराभ का फाऩ कहे , एक न भानेंगे।
29

िैय, ऩाॊच फजे िेर शन
ु ू हुआ। दोनों तयप के खिराड़ी फहुत तेज थे
त्जन्होने हाकी िेरने के मसवा त्जन्दगी भें औय कोई काभ ही नहीॊ ककमा।
िेर फड़े जोश औय सयगभी से होने रगा। कई हजाय तभाशाई जभा थे।

उनकी तामरम ॉँ औय फढावे खिराडड़मों ऩय भार फाजे का काभ कय यहे थे औय

गें द ककसी अबागे की ककस्भत की तयह इधय-उधय ठोकयें िाती कपयती थी।
दमाशॊकय के हाथों की तेजी औय सपाई, उनकी ऩकड़ औय फेऐफ तनशानेफाजी

ऩय रोग है यान थे, मह ॉँ तक कक जफ वक्त िमभ होने भें मसपफ ए़ मभनट
फाकी यह गमा था औय दोनों तयप के

रोग दहम्भतें हाय चक
ु े थे तो

दमाशॊकय ने गें द मरमा औय त्रफजरी की तयह ववयोधी ऩऺ के गोर ऩय ऩहुॉच

गमे। एक ऩटािें की आवाज हुई, चायों तयप से गोर का नाया फर
ु न्द हुआ!
इराहाफाद की जीत हुई औय इस जीत का सेहया दमाशॊकय के मसय थात्जसका नतीजा मह हुआ कक फेचाये दमाशॊकय को उस वक्त बी रुकना ऩड़ा
औय मसपफ इतना ही नहीॊ, सताया अभेचय क्रफ की तयप से इस जीत की

फधाई भें एक नाटक िेरने का कोई प्रस्ताव हुआ त्जसे फध
ु के योज बी
यवाना होने की कोई उम्भीद फाकी न यही। दमाशॊकय ने ददर भें फहुत
ऩेचोताफ िामा भगय जफान से क्मा कहते! फीवी का गूराभ कहराने का ड़य
ॉँ उनका ददर कह यहा था कक अफ की दे वी
जफान फन्द ककमे हुए था। हार कक
रठें गी तो मसपफ िुशाभदों से न भानेंगी।

फा

फू दमाशॊकय वादे के योज के तीन ददन फाद भकान ऩय ऩहुॉच।े सताया
से गगरयजा के मरए कई अनठ
ू े तोहपे रामे थे। भगय उसने इन चीजों

को कुछ इस तयह दे िा कक जैसे उनसे उसका जी बय गमा है। उसका चेहया

उतया हुआ था औय होंठ सि
ू े थे। दो ददन से उसने कुछ नहीॊ िामा था।
अगय चरते वक्त दमाशॊकय की आॊि से आॉसू की चन्द फॊद
ू ें टऩक ऩड़ी होतीॊ
मा कभ से कभ चेहया कुछ उदास औय आवाज कुछ बायी हो गमी होती तो

शामद गगरयजा उनसे न रठती। आॉसओ
ु ॊ की चन्द फॉद
ू ें उसके ददर भें इस
िमार को तयो-ताजा यितीॊ कक उनके न आने का कायण चाहे ओय कुछ हो
तनर्षठुयता हयगगज नहीॊ है। शामद हार ऩछ
ू ने के मरए उसने ताय ददमा होता
औय अऩने ऩतत को अऩने साभने िैरयमत से दे िकय वह फयफस उनके सीने

भें जा गचभटती औय दे वताओॊ की कृतऻ होती। भगय आॉिों की वह फेभौका
30

कॊजूसी औय चेहये की वह तनर्षठुय भस
ु कान इस वक्त उसके ऩहरू भें िटक

यही थी। ददर भें िमार जभ गमा था कक भैं चाहे इनके मरए भय ही मभटूॉ
भगय इन्हें भेयी ऩयवाह नहीॊ है । दोस्तों का आग्रह औय त्जद केवर फहाना है।

कोई जफयदस्ती ककसी को योक नहीॊ सकता। िफ
ू ! भैं तो यात की यात फैठकय
काटूॉ औय वह ॉँ भजे उड़ामे जाऍ!ॊ

फाफू दमाशॊकय को रठों के भनाने भें ववषेश दऺता थी औय इस भौके

ऩय उन्होंने कोई फात, कोई कोमशश उठा नहीॊ यिी। तोहपे तो राए थे भगय

उनका जाद ू न चरा। तफ हाथ जोड़कय एक ऩैय से िड़े हुए, गुदगुदामा, तरव
ु े
सहरामे, कुछ शोिी औय शयायत की। दस फजे तक इन्हीॊ सफ फातों भें रगे
यहे । इसके फाद िाने का वक्त आमा। आज उन्होंने रिी योदटम ॉँ फड़ें शौक

से औय भाभर
ू ी से कुछ ज्मादा िामीॊ-गगरयजा के हाथ से आज हफ्ते बय फाद
योदटम ॉँ नसीफ हुई हैं, सताये भें योदटमों को तयस गमें ऩडू डम ॉँ िाते-िाते आॉतों

भें फामगोरे ऩड़ गमे। मकीन भानो गगरयजन, वह ॉँ कोई आयाभ न था, न

कोई सैय, न कोई रमु प। सैय औय रमु प तो भहज अऩने ददर की कैकपमत
ऩय भन
ु हसय है । फेकपक्री हो तो चदटमर भैदान भें फाग का भजा आता है

औय तत्रफमत को कोई कपक्र हो तो फाग वीयाने से बी ज्मादा उजाड़ भारभ

होता है । कम्फख्त ददर तो हयदभ महीॊ धया यहता था, वह ॉँ भजा क्मा िाक
आता। तुभ चाहे इन फातों को केवर फनावट सभझ रो, क्मोंकक भैं तुम्हाये

साभने दोषी हूॉ औय तम्
ु हें अगधकाय है कक भझ
ु े झठ
ू ा, भक्काय, दगाफाज,
वेवपा, फात फनानेवारा जो चाहे सभझ रो, भगय सच्चाई मही है जो भैं कह

यहा हूॉ। भैं जो अऩना वादा ऩयू ा नहीॊ कय सका, उसका कायण दोस्तों की
त्जद थी।
दमाशॊकय ने योदटमों की िूफ तायीप की क्मोंकक ऩहरे कई फाय मह

तयकीफ पामदे भन्द सात्रफत हुई थी, भगय आज मह भन्ि बी कायगय न
हुआ। गगरयजा के तेवय फदरे ही यहे ।

तीसये ऩहय दमाशॊकय गगरयजा के कभये भें गमे औय ऩॊिा झरने रगे;

मह ॉँ तक कक गगरयजा झॉझ
ु राकय फोर उठी-अऩनी नाजफयदारयम ॉँ अऩने ही

ऩास यखिमे। भैंने हुजयू से बय ऩामा। भैं तम्
ु हें ऩहचान गमी, अफ धोिा नही
िाने की। भझ
ु े न भारभ
ू था कक भझ
ु से आऩ मों दगा कयें गे। गयज त्जन

शब्दों भें फेवपाइमों औय तनर्षठुयताओॊ की मशकामतें हुआ कयती हैं वह सफ
इस वक्त गगरयजा ने िचफ कय डारे।
31

शा


भ हुई। शहय की गमरमों भें भोततमे औय फेरे की रऩटें आने रगीॊ।
सड़कों ऩय तछड़काव होने रगा औय मभट्टी की सोंधी िश
ु फू उड़ने

रगी। गगरयजा िाना ऩकाने जा यही थी कक इतने भें उसके दयवाजे ऩय इक्का

आकय रका औय उसभें से एक औयत उतय ऩड़ी। उसके साथ एक भहयी थी
उसने ऊऩय आकय गगरयजा से कहा—फहू जी, आऩकी सिी आ यही हैं।
मह सिी ऩड़ोस भें यहनेवारी अहरभद साहफ की फीवी थीॊ। अहरभद

ॉँ
साहफ फढ
ू े आदभी थे। उनकी ऩहरी शादी उस वक्त हुई थी, जफ दध
ू के द त
ॉँ बी
न टूटे थे। दस
ू यी शादी सॊमोग से उस जभाने भें हुई जफ भॉह
ु भें एक द त

फाकी न था। रोगों ने फहुत सभझामा कक अफ आऩ फढ
ू े हुए, शादी न
कीत्जए, ईश्वय ने रड़के ददमे हैं, फहुएॉ हैं, आऩको ककसी फात की तकरीप
नहीॊ हो सकती। भगय अहरभद साहफ िद
ु फढ्
ु डे औय दतु नमा दे िे हुए
आदभी थे, इन शब
ु गचॊतकों की सराहों का जवाफ व्मावहारयक उदाहयणों से

ददमा कयते थे—क्मों, क्मा भौत को फढ
ू ों से कोई दश्ु भनी है? फढ
ू े गयीफ
उसका क्मा त्रफगाड़ते हैं? हभ फाग भें जाते हैं तो भयु झामे हुए पूर नहीॊ
तोड़ते, हभायी आॉिें तयो-ताजा, हये -बये िफ
ू सयू त पूरों ऩय ऩड़ती हैं। कबी-

कबी गजये वगैयह फनाने के मरए कमरम ॉँ बी तोड़ री जाती हैं। मही हारत
भौत की है । क्मा मभयाज को इतनी सभझ बी नहीॊ है । भैं दावे के साथ कह
सकता हूॉ कक जवान औय फच्चे फढ
ू ों से ज्मादा भयते हैं। भैं अबी ज्मों का

ॉँ फहनें, फहनों के ऩतत, तीनों बावजें, चाय
ममो हूॉ, भेये तीन जवान बाई, ऩ च
ॉँ फेदटम ,ॉँ कई बतीजे, सफ भेयी आॉिों के साभने इस दतु नमा से चर
फेटे, ऩ च
ॉँ न कय सकी। मह गरत,
फसे। भौत सफको तनगर गई भगय भेया फार फ का
त्रफरकुर गरत है कक फढ
ू े आदभी जल्द भय जाते हैं। औय असर फात तो

मह है कक जफान फीवी की जरयत फढ
ु ाऩे भें ही होती है । फहुएॉ भेये साभने
तनकरना चाहें औय न तनकर सकती हैं, बावजें िुद फढ
ू ी हुईं, छोटे बाई की
फीवी भेयी ऩयछाईं बी नही दे ि सकती है, फहनें अऩने-अऩने घय हैं, रड़के
सीधे भॊह
ु फात नहीॊ कयते। भैं ठहया फढ
ू ा, फीभाय ऩडूॉ तो ऩास कौन पटके,

एक रोटा ऩानी कौन दे , दे िॉू ककसकी आॉि से, जी कैसे फहराऊॉ? क्मा

आमभहममा कय रॉ ।ू मा कहीॊ डूफ भरॉ? इन दरीरों के भक
ु ात्रफरे भें ककसी की
जफान न िुरती थी।

32

गयज इस नमी अहरभददन औय गगरयजा भें कुछ फहनाऩा सा हो गमा

था, कबी-कबी उससे मभरने आ जामा कयती थी। अऩने बाग्म ऩय सन्तोष
कयने वारी स्िी थी, कबी मशकामत मा यॊ ज की एक फात जफान से न

तनकारती। एक फाय गगरयजा ने भजाक भें कहा था कक फढ
ू े औय जवान का
भेर अच्छा नहीॊ होता। इस ऩय वह नायाज हो गमी औय कई ददन तक न

आमी। गगरयजा भहयी को दे िते ही पौयन ऑ ॊगन भें तनकर आमी औय गो
उस इस वक्त भेहभान का आना नागवाया गुजया भगय भहयी से फोरी-फहन,
अच्छी आमीॊ, दो घड़ी ददर फहरेगा।

जया दे य भें अहरभददन साहफ गहने से रदी हुई, घॊघ
ू ट तनकारे,
छभछभ कयती हुई आॉगन भे आकय िड़ी हो गईं। गगरयजा ने कयीफ आकय
कहा-वाह सिी, आज तो तभ
ु दर
ु दहन फनी हो। भझ
ु से ऩदाफ कयने रगी हो
क्मा? मह कहकय उसने घॊघ
ू ट हटा ददमा औय सिी का भॊह
ु दे िते ही
चौंककय एक कदभ ऩीछे हट गई। दमाशॊकय ने जोय से कहकहा रगामा औय

गगरयजा को सीने से मरऩटा मरमा औय ववनती के स्वय भें फोरे-गगरयजन, अफ
भान जाओ, ऐसी िता कपय कबी न होगी। भगय गगरयजन अरग हट गई

औय रुिाई से फोरी-तुम्हाया फहुरऩ फहुत दे ि चक
ु ी, अफ तुम्हाया असरी रऩ
दे िना चाहती हूॉ।

माशॊकय प्रेभ-नदी की हरकी-हरकी रहयों का आनन्द तो जरय उठाना

चाहते थे भगय तप
ू ान से उनकी तत्रफमत बी उतना ही घफयाती थी

त्जतना गगरयजा की, फत्ल्क शामद उससे बी ज्मादा। हृदम-ऩववतफन के त्जतने
भॊि उन्हें माद थे वह सफ उन्होंने ऩढे औय उन्हें कायगय न होते दे िकय
आखिय उनकी तत्रफमत को बी उरझन होने रगी। मह वे भानते थे कक

फेशक भझ
ु से िता हुई है भगय िता उनके िमार भें ऐसी ददर जरानेवारी
सजाओॊ के कात्रफर न थी। भनाने की करा भें वह जरय मसिहस्त थे भगय

इस भौके ऩय उनकी अक्र ने कुछ काभ न ददमा। उन्हें ऐसा कोई जाद ू
नजय नहीॊ आता

था जो उठती हुई कारी घटाओॊ औय जोय ऩकड़ते हुए
झोंकों को योक दे । कुछ दे य तक वह उन्हीॊ ख्मारों भें िाभोश िड़े यहे औय
कपय फोरे-आखिय गगरयजन, अफ तभ
ु क्मा चाहती हो।

33

गगरयजा ने अममन्त सहानब
ु तू त शन्
ू म फेऩयवाही से भॉह
ु पेयकय कहा-

कुछ नहीॊ।

दमाशॊकय-नहीॊ, कुछ तो जरय चाहती हो वनाफ चाय ददन तक त्रफना

दाना-ऩानी के यहने का क्मा भतरफ! क्मा भझ
ु ऩय जान दे ने की ठानी है ?
अगय मही पैसरा है तो फेहतय है तुभ मों जान दो औय भैं कमर के जुभफ भें

ॉँ ऩाऊॉ, ककस्सा तभाभ हो जामे। अच्छा होगा, फहुत अच्छा होगा, दतु नमा
प सी
की ऩये शातनमों से छुटकाया हो जाएगा।

मह भन्तय त्रफरकुर फेअसय न यहा। गगरयजा आॉिों भें आॉसू बयकय

फोरी-तुभ िाभिाह भझ
ु से झगड़ना चाहते हो औय भझ
ु े झगड़े से नपयत है ।

भैं तुभसे न फोरती हूॉ औय न चाहती हूॉ कक तुभ भझ
ु से फोरने की तकरीप
गवाया कयो। क्मा आज शहय भें कहीॊ नाच नहीॊ होता, कहीॊ हाकी भैच नहीॊ

है , कहीॊ शतयॊ ज नहीॊ त्रफछी हुई है। वहीॊ तम्
ु हायी तत्रफमत जभती है , आऩ वहीॊ
जाइए, भझ
ु े अऩने हार ऩय यहने दीत्जए भैं फहुत अच्छी तयह हूॉ।
दमाशॊकय करुण स्वय भें फोरे-क्मा तुभने भझ
ु े ऐसा फेवपा सभझ मरमा
है ?

गगरयजा-जी ह ,ॉँ भेया तो मही तजुफाफ है।

दमाशॊकय-तो तुभ सख्त गरती ऩय हो। अगय तुम्हाया मही ख्मार है

तो भैं कह सकता हूॉ कक औयतों की अन्तदृफत्र्षट के फाये भें त्जतनी फातें सन
ु ी
हैं वह सफ गरत हैं। गगयजन, भेये बी ददर है ...

गगरयजा ने फात काटकय कहा-सच, आऩके बी ददर है मह आज नमी

फात भारभ
ू हुईं।
दमाशॊकय कुछ झेंऩकय फोरे-िैय जैसा तुभ सभझों। भेये ददर न सही,
भेय त्जगय न सही, ददभाग तो साप जादहय है कक ईश्वय ने भझ
ु े नहीॊ ददमा
वनाफ वकारत भें पेर क्मों होता? गोमा भेये शयीय भें मसपफ ऩेट है , भैं मसपफ

िाना जानता हूॉ औय सचभच
ु है बी ऐसा ही, तुभने भझ
ु े कबी पाका कयते
नहीॊ दे िा। तुभने कई फाय ददन-ददन बय कुछ नहीॊ िामा है , भैं ऩेट बयने से

कबी फाज नहीॊ आमा। रेककन कई फाय ऐसा बी हुआ है कक ददर औय त्जगय
त्जस कोमशश भें असपर यहे वह इसी ऩेट ने ऩयू ी कय ददिाई मा मों कहों
कक कई फाय इसी ऩेट ने ददर औय ददभाग औय त्जगय का काभ कय ददिामा

है औय भझ
ु े अऩने इस अजीफ ऩेट ऩय कुछ गवफ होने रगा था भगय अफ
भारभ
ू हुआ कक भेये ऩेट की अजीफ ऩेट ऩय कुछ गवफ होने रगा
34

था भगय

अफ भारभ
ू हुआ कक भेये ऩेट की फेहमाइम ॉँ रोगों को फयु ी भारभ
ू होती
है ...इस वक्त भेया िाना न फने। भैं कुछ न िाऊॊगा।

गगरयजा ने ऩतत की तयप दे िा, चेहये ऩय हरकी-सी भस्
ु कयाहट थी,

वह मह कय यही थी कक मह आखियी फात तम्
ु हें ज्मादा सम्हरकय कहनी
चादहए थी। गगरयजा औय औयतों की तयह मह बर
ू जाती थी कक भदों की

आमभा को बी कर्षट हो सकता है । उसके िमार भें कर्षट का भतरफ
शायीरयक कर्षट था। उसने दमाशॊकय के साथ औय चाहे जो रयमामत की हो,

खिराने-वऩराने भें उसने कबी बी रयमामत नहीॊ की औय जफ तक िाने की

दै तनक भािा उनके ऩेट भें ऩहुॉचती जाम उसे उनकी तयप से ज्मादा अन्दे शा

नहीॊ होता था। हजभ कयना दमाशॊकय का काभ था। सच ऩतू छमे तो गगरयजा
ही की सत्ख्मतों ने उन्हें हाकी का शौक ददरामा वनाफ अऩने औय सैकड़ों

बाइमों की तयह उन्हें दफ्तय से आकय हुक्के औय शतयॊ ज से ज्मादा
भनोयॊ जन होता था। गगरयजा ने मह धभकी सन
ु ी तो ममोरयमाॊ चढाकय फोरीअच्छी फात है , न फनेगा।

दमाशॊकय ददर भें कुछ झेंऩ-से गमे। उन्हें इस फेयहभ जवाफ की

उम्भीद न थी। अऩने कभये भे जाकय अिफाय ऩढने रगे। इधय गगरयजा
हभेशा की तयह िाना ऩकाने भें रग गई। दमाशॊकय का ददर इतना टूट गमा
था कक उन्हें िमार बी न था कक गगरयजा िाना ऩका यही होगी। इसमरए
जफ नौ फजे के कयीफ उसने आकय कहा कक चरो िाना िा रो तो वह

ताज्जफ
ु से चौंक ऩड़े भगय मह मकीन आ गमा कक भैंने फाजी भाय री। जी

हया हुआ, कपय बी ऊऩय से रुिाई से कहा-भैंने तो तुभसे कह ददमा था कक
आज कुछ न िाऊॉगा।
गगरयजा-चरो थोड़ा-सा िा रो।

दमाशॊकय-भझ
ु े जया बी बि
ू नहीॊ है ।

गगरयजा-क्मों? आज बि
ू नहीॊ रगी?

दमाशॊकय-तुम्हें तीन ददन से बि
ू क्मों नहीॊ रगी?

गगरयजा-भझ
ु े तो इस वजह से नहीॊ रगी कक तभ
ु ने भेये ददर को चोट

ऩहुॉचाई थी।
दमाशॊकय-भझ
ु े बी इस वजह से नहीॊ रगी कक तभ
ु ने भझ
ु े तकरीप दी
है ।

35

दमाशॊकय ने रुिाई के साथ मह फातें कहीॊ औय अफ गगरयजा उन्हें

ॉँ ऩरट गमा। अबी एक ही ऺण ऩहरे वह उसकी
भनाने रगी। पौयन ऩ सा

ॉँ िड़े, गगड़गगड़ा
िश
ु ाभदें कय यहे थे, भज
ु रयभ की तयह उसके साभने हाथ फ धे
यहे थे, मभन्नतें कयते थे औय अफ फाजी ऩरटी हुई थी, भज
ु रयभ इन्साप की
भसनद ऩय फैठा हुआ था। भह
ु ब्फत की याहें भकड़ी के जारों से बी ऩेचीदा हैं।

दमाशॊकय ने ददन भें प्रततऻा की थी कक भैं बी इसे इतना ही हैयान

करॉगा त्जतना इसने भझ
ु े ककमा है औय थोड़ी दे य तक वह मोगगमों की तयह

त्स्थयता के साथ फैठे यहे । गगरयजा न उन्हें गुदगुदामा, तरव
ु े िज
ु रामे, उनके
फारो भें कॊघी की, ककतनी ही रब
ु ाने वारी अदाएॉ िचफ कीॊ भगय असय न
हुआ। तफ उसने अऩनी दोनों फ हेंॉँ उनकी गदफ न भें ड़ार दीॊ औय माचना औय
प्रेभ से बयी हुई आॉिें उठाकय फोरी-चरो, भेयी कसभ, िा रो।
ॉँ फह गई। दमाशॊकय ने गगरयजा को गरे से रगा मरमा। उसके
पूस की फ ध
बोरेऩन औय बावों की सयरता ने उनके ददर ऩय एक अजीफ ददफ नाक असय

ऩेदा ककमा। उनकी आॉिे बी गीरी हो गमीॊ। आह, भैं कैसा जामरभ हूॉ, भेयी
फेवपाइमों ने इसे ककतना रुरामा है , तीन ददन तक उसके आॉसू नहीॊ थभे,
आॉिे नहीॊ झऩकीॊ, तीन ददन तक इसने दाने की सयू त नहीॊ दे िी भगय भेये

एक जया-से इनकाय ने, झठ
ू े नकरी इनकाय ने, चभमकाय कय ददिामा। कैसा
कोभर हृदम है ! गुराफ की ऩॊिुड़ी की तयह, जो भयु झा जाती है भगय भैरी

नहीॊ होती। कह ॉँ भेया ओछाऩन, िद
ु गजी औय कह ॉँ मह फेिद
ु ी, मह ममागा,
मह साहस।

दमाशॊकय के सीने से मरऩटी हुई गगरयजा उस वक्त अऩने प्रफर
आकषफण से अनके ददर को िीॊचे रेती थी। उसने जीती हुई फाजी हायकय
आज अऩने ऩतत के ददर ऩय कब्जा ऩा मरमा। इतनी जफदफस्त जीत उसे

कबी न हुई थी। आज दमाशॊकय को भह
ु ब्फत औय बोरेऩन की इस भयू त ऩय
त्जतना गवफ था उसका अनभ
ु ान रगाना कदठन है । जया दे य भें वह उठ िड़े
हुए औय फोरे-एक शतफ ऩय चरॉ ग
ू ा।
गगरयजा-क्मा?

दमाशॊकय-अफ कबी भत रठना।

गगरयजा-मह तो टे ढी शतफ है भगय...भॊजयू है।

दो-तीन कदभ चरने के फाद गगरयजा ने उनका हाथ ऩकड़ मरमा औय

फोरी-तुम्हें बी भेयी एक शतफ भाननी ऩड़ेगी।
36

दमाशॊकय-भैं सभझ गमा। तुभसे सच कहता हूॉ, अफ ऐसा न होगा।

दमाशॊकय ने आज गगरयजा को बी अऩने साथ खिरामा। वह फहुत
रजामी, फहुत हीरे ककमे, कोई सन
े ा तो क्मा कहे गा, मह तम्
ु ग
ु हें क्मा हो
गमा है। भगय दमाशॊकय ने एक न भानी औय कई कौय गगरयजा को अऩने

हाथ से खिरामे औय हय फाय अऩनी भह
ु ब्फत का फेददी के साथ भआ
ु वजा
मरमा।

िाते-िाते उन्होंने हॉसकय गगरयजा से कहा-भझ
ु े न भारभ
ू था कक तुम्हें

भनाना इतना आसान है ।
फोरी।

गगरयजा ने नीची तनगाहों से दे िा औय भस्
ु कयामी, भगय भॉह
ु से कुछ न
--उदफ ू ‘प्रेभ ऩचीसी’ से

37

अँधेर

ना

ॉँ
गऩॊचभी आई। साठे के त्जन्दाददर नौजवानों ने यॊ ग-त्रफयॊ गे ज तघमे

फनवामे। अिाड़े भें ढोर की भदाफना सदामें गॉज
ू ने रगीॊ। आसऩास के

ऩहरवान इकट्ठे हुए औय अिाड़े ऩय तम्फोमरमों ने अऩनी दक
ु ानें सजामीॊ
क्मोंकक आज कुश्ती औय दोस्ताना भक
ु ाफरे का ददन है । औयतों ने गोफय से
अऩने आॉगन रीऩे औय गाती-फजाती कटोयों भें दध
ू -चावर मरए नाग ऩज
ू ने
चरीॊ।

साठे औय ऩाठे दो रगे हुए भौजे थे। दोनों गॊगा के ककनाये । िेती भें
ज्मादा भशक्कत नहीॊ कयनी ऩड़ती थी इसीमरए आऩस भें पौजदारयम ॉँ िफ

होती थीॊ। आददकार से उनके फीच होड़ चरी आती थी। साठे वारों को मह
घभण्ड था कक उन्होंने ऩाठे वारों को कबी मसय न उठाने ददमा। उसी तयह

ऩाठे वारे अऩने प्रततद्वॊद्ववमों को नीचा ददिराना ही त्जन्दगी का सफसे फड़ा

काभ सभझते थे। उनका इततहास ववजमों की कहातनमों से बया हुआ था।
ऩाठे के चयवाहे मह गीत गाते हुए चरते थे:
साठे वारे कामय सगये ऩाठे वारे हैं सयदाय
औय साठे के धोफी गाते:
साठे वारे

साठ हाथ

के त्जनके

हाथ सदा

तयवाय।

उन रोगन के जनभ नसामे त्जन ऩाठे भान रीन अवताय।।

गयज आऩसी होड़ का मह जोश फच्चों भें भ ॉँ दध
ू के साथ दाखिर होता था
औय उसके प्रदशफन का सफसे अच्छा औय ऐततहामसक भौका मही नागऩॊचभी

का ददन था। इस ददन के मरए सार बय तैमारयम ॉँ होती यहती थीॊ। आज

उनभें भाके की कुश्ती होने वारी थी। साठे को गोऩार ऩय नाज था, ऩाठे को

फरदे व का गयाफ। दोनों सयू भा अऩने-अऩने पयीक की दआ
ु एॉ औय आयजुएॉ
मरए हुए अिाड़े भें उतये । तभाशाइमों ऩय चम्
ु फक का-सा असय हुआ। भौजें
के चौकीदायों ने रट्ठ औय डण्डों का मह जभघट दे िा औय भदों की अॊगाये की

तयह रार आॉिें तो वऩछरे अनब
ु व के आधाय ऩय फेऩता हो गमे। इधय
ॉँ च होते यहे । फरदे व उरझता था, गोऩार ऩैंतये फदरता था।
अिाड़े भें द व-ऩें
38

उसे अऩनी ताकत का जोभ था, इसे अऩने कयतफ का बयोसा। कुछ दे य तक

अिाड़े से तार ठोंकने की आवाजें आती यहीॊ, तफ मकामक फहुत-से आदभी
िश
ु ी के नाये भाय-भाय उछरने रगे, कऩड़े औय फतफन औय ऩैसे औय फताशे
रट
ु ामे जाने रगे। ककसी ने अऩना ऩयु ाना सापा पेंका, ककसी ने अऩनी

फोसीदा टोऩी हवा भें उड़ा दी साठे के भनचरे जवान अिाड़े भें वऩर ऩड़े।
औय गोऩार को गोद भें उठा रामे। फरदे व औय उसके सागथमों ने गोऩार को
ॉँ ऩीसकय यह गमे।
रहू की आॉिों से दे िा औय द त


स फजे यात का वक्त औय सावन का भहीना। आसभान ऩय

कारी

घटाएॉ छाई थीॊ। अॊधेये का मह हार था कक जैसे योशनी का अत्स्तमव ही

नहीॊ यहा। कबी-कबी त्रफजरी चभकती थी भगय अॉधेये को औय ज्मादा अॊधेया

कयने के मरए। भें ढकों की आवाजें त्जन्दगी का ऩता दे ती थीॊ वनाफ औय चायों
तयप भौत थी। िाभोश, डयावने औय गम्बीय साठे के झोंऩड़े औय भकान इस

अॊधेये भें फहुत गौय से दे िने ऩय कारी-कारी बेड़ों की तयह नजय आते थे।
न फच्चे योते थे, न औयतें गाती थीॊ। ऩावविामभा फड्
ु ढे याभ नाभ न जऩते थे।

भगय आफादी से फहुत दयू कई ऩयु शोय नारों औय ढाक के जॊगरों से
गुजयकय ज्वाय औय फाजये के िेत थे औय उनकी भें ड़ों ऩय साठे के ककसान
जगह-जगह भड़ैमा ड़ारे िेतों की यिवारी कय यहे थे। तरे जभीन, ऊऩय

अॊधेया, भीरों तक सन्नाटा छामा हुआ। कहीॊ जॊगरी सअ
ु यों के गोर, कहीॊ
नीरगामों के ये वड़, गचरभ के मसवा कोई साथी नहीॊ, आग के मसवा कोई

भददगाय नहीॊ। जया िटका हुआ औय चौंके ऩड़े। अॊधेया बम का दस
ू या नाभ
है , जफ मभट्टी का एक ढे य, एक ठूॉठा ऩेड़ औय घास का ढे य बी जानदाय चीजें
फन जाती हैं। अॊधेया उनभें जान ड़ार दे ता है। रेककन मह भजफत
ू हाथोंवारे,

भजफत
ू त्जगयवारे, भजफत
ू इयादे वारे ककसान हैं कक मह सफ सत्ख्तम ।
झेरते हैं ताकक अऩने ज्मादा बाग्मशारी बाइमों के मरए बोग-ववरास के

साभान तैमाय कयें । इन्हीॊ यिवारों भें आज का हीयो, साठे का गौयव गोऩार
बी है जो अऩनी भड़ैमा भें फैठा हुआ है औय नीॊद को बगाने के मरए धीभें
सयु ों भें मह गीत गा यहा है :
भैं तो तोसे नैना रगाम ऩछतामी ये
39

अचाकन उसे ककसी के ऩ वॉँ की आहट भारभ
ू हुई। जैसे दहयन कुमतों
की आवाजों को कान रगाकय सन
ु ता है उसी तयह गोऩर ने बी कान
रगाकय सन
ु ा। नीॊद की औॊघाई दयू हो गई। रट्ठ कॊधे ऩय यक्िा औय भड़ैमा

से फाहय तनकर आमा। चायों तयप कामरभा छाई हुई थी औय हरकी-हरकी
फॊद
ू ें ऩड़ यही थीॊ। वह फाहय तनकरा ही था कक उसके सय ऩय राठी का बयऩयू

हाथ ऩड़ा। वह ममोयाकय गगया औय यात बय वहीॊ फेसध
ु ऩड़ा यहा। भारभ
ू नहीॊ

उस ऩय ककतनी चोटें ऩड़ीॊ। हभरा कयनेवारों ने तो अऩनी सभझ भें उसका
काभ तभाभ कय ड़ारा। रेककन त्जन्दगी फाकी थी। मह ऩाठे के गैयतभन्द
रोग थे त्जन्होंने अॊधेये की आड़ भें अऩनी हाय का फदरा मरमा था।

गो

ऩार जातत का अहीय था, न ऩढा न मरिा, त्रफरकुर अक्िड़।

ददभागा यौशन ही नहीॊ हुआ तो शयीय का दीऩक क्मों घर
ु ता। ऩयू े छ:
पुट का कद, गठा हुआ फदन, ररकान कय गाता तो सन
ु नेवारे भीर बय ऩय
फैठे हुए उसकी तानों का भजा रेत।े गाने-फजाने का आमशक, होरी के ददनों
भें भहीने बय तक गाता, सावन भें भल्हाय औय बजन तो योज का शगर

था। तनड़य ऐसा कक बत
ू औय वऩशाच के अत्स्तमव ऩय उसे ववद्वानों जैसे

सॊदेह थे। रेककन त्जस तयह शेय औय चीते बी रार रऩटों से डयते हैं उसी
तयह रार ऩगड़ी से उसकी रह असाधायण फात थी रेककन उसका कुछ फस
न था। मसऩाही की वह डयावनी तस्वीय जो फचऩन भें उसके ददर ऩय िीॊची

गई थी, ऩमथय की रकीय फन गई थी। शयायतें गमीॊ, फचऩन गमा, मभठाई

की बि
ू गई रेककन मसऩाही की तस्वीय अबी तक कामभ थी। आज उसके
दयवाजे ऩय रार ऩगड़ीवारों की एक पौज जभा थी रेककन गोऩार जख्भों से

चयू , ददफ से फेचन
ै होने ऩय बी अऩने भकान के अॊधेये कोने भें तछऩा हुआ
फैठा था। नम्फयदाय औय भखु िमा, ऩटवायी औय चौकीदाय योफ िामे हुए ढॊ ग
से िड़े दायोगा की िश
ु ाभद कय यहे थे। कहीॊ अहीय की परयमाद सन
ु ाई दे ती

थी, कहीॊ भोदी योना-धोना, कहीॊ तेरी की चीि-ऩक
ु ाय, कहीॊ कभाई की आॉिों
से रहू जायी। करवाय िड़ा अऩनी ककस्भत को यो यहा था। पोहश औय
गन्दी फातों की गभफफाजायी थी। दायोगा जी तनहामत कायगज
ु ाय अपसय थे,
गामरमों भें फात कयते थे। सफ
ु ह को चायऩाई से उठते ही गामरमों का वजीपा

ऩढते थे। भेहतय ने आकय परयमाद की-हुजूय, अण्डे नहीॊ हैं, दायोगाजी हण्टय
40

रेकय दौड़े औि उस गयीफ का बयु कुस तनकार ददमा। साये ग वॉँ भें हरचर
ऩड़ी हुई थी। काॊमसटे फर औय चौकीदाय यास्तों ऩय मों अकड़ते चरते थे गोमा
अऩनी ससयु ार भें आमे हैं। जफ ग वॉँ के साये आदभी आ गमे तो वायदात हुई
औय इस कम्फख्त गोरार ने यऩट तक न की।
जाम।

ॉँ
भखु िमा साहफ फेंत की तयह क ऩते
हुए फोरे-हुजूय, अफ भापी दी
दायोगाजी ने गाजफनाक तनगाहों से उसकी तयप दे िकय कहा-मह

इसकी शयायत है । दतु नमा जानती है कक जुभफ को छुऩाना जुभफ कयने के

फयाफय है। भैं इस फदकाश को इसका भजा चिा दॉ ग
ू ा। वह अऩनी ताकत के
जोभ भें बर
ू ा हुआ है , औय कोई फात नहीॊ। रातों के बत
ू फातों से नहीॊ
भानते।
भखु िमा साहफ ने मसय झक
ु ाकय कहा-हुजयू , अफ भापी दी जाम।
दायोगाजी की ममोरयम ॉँ चढ गमीॊ औय झॊझ
ु राकय फोरे-अये हजूय के

फच्चे, कुछ सदठमा तो नहीॊ गमा है । अगय इसी तयह भापी दे नी होती तो
भझ
ु े क्मा कुमते ने काटा था कक मह ॉँ तक दौड़ा आता। न कोई भाभरा, न
भभारे की फात, फस भापी की यट रगा यक्िी है। भझ
ु े ज्मादा पुयसत नहीॊ

है । नभाज ऩढता हूॉ, तफ तक तुभ अऩना सराह भशववया कय रो औय भझ
ु े

हॉ सी-िुशी रुिसत कयो वनाफ गौसि ॉँ को जानते हो, उसका भाया ऩानी बी
ॉँ
नही भ गता!

ॉँ वक्त की नभाज ऩढते
दायोगा तकवे व तहायत के फड़े ऩाफन्द थे ऩ चों

औय तीसों योजे यिते, ईदों भें धभ
ू धाभ से कुफाफतनम ॉँ होतीॊ। इससे अच्छा
आचयण ककसी आदभी भें औय क्मा हो सकता है !

भु

खिमा साहफ दफे ऩ वॉँ गुऩचऩ
ु ढॊ ग से गौया के ऩास औय फोरे-मह दायोगा
फड़ा काकपय है , ऩचास से नीचे तो फात ही नहीॊ कयता। अब्फर दजे का

थानेदाय है । भैंने फहुत कहा, हुजूय, गयीफ आदभी है , घय भें कुछ सब
ु ीता
नहीॊ, भगय वह एक नहीॊ सन
ु ता।
गौया ने घॉघ
ू ट भें भॉह
ु तछऩाकय कहा-दादा, उनकी जान फच जाए, कोई

तयह की आॊच न आने ऩाए, रऩमे-ऩैसे की कौन फात है , इसी ददन के मरए
तो कभामा जाता है ।

41

गोऩार िाट ऩय ऩड़ा सफ फातें सन
ु यहा था। अफ उससे न यहा गमा।

ॉँ ही ऩय टूटती है । जो गन
रकड़ी ग ठ
ु ाह ककमा नहीॊ गमा वह दफता है भगय
कुचरा नहीॊ जा सकता। वह जोश से उठ फैठा औय फोरा-ऩचास रुऩमे की
कौन कहे , भैं ऩचास कौडड़म ॉँ बी न दॉ ग
ू ा। कोई गदय है, भैंने कसयू क्मा
ककमा है ?

भखु िमा का चेहया पक हो गमा। फड़प्ऩन के स्वय भें फोरे-धीये फोरो,

कहीॊ सन
ु रे तो गजफ हो जाए।

रेककन गोऩार त्रफपया हुआ था, अकड़कय फोरा-भैं एक कौड़ी बी न
ॉँ रगा दे ता है ।
दॉ ग
ू ा। दे िें कौन भेये प सी
गौया ने फहराने के स्वय भें कहा-अच्छा, जफ भैं तुभसे रऩमे भाॉगॉत
ू ो

भत दे ना। मह कहकय गौया ने, जो इस वक्त रौड़ी के फजाम यानी फनी हुई
थी, छप्ऩय के एक कोने भें से रुऩमों की एक ऩोटरी तनकारी औय भखु िमा
ॉँ ऩीसकय उठा, रेककन
के हाथ भें यि दी। गोऩार द त

भखु िमा साहफ पौयन

से ऩहरे सयक गमे। दायोगा जी ने गोऩार की फातें सन
ु री थीॊ औय दआ

कय यहे थे कक ऐ िद
ु ा, इस भयदद
ू के ददर को ऩरट। इतने भें भखु िमा ने

फाहय आकय ऩचीस रऩमे की ऩोटरी ददिाई। ऩचीस यास्ते ही भें गामफ हो
गमे थे। दायोगा जी ने िुदा का शक्र
सन
ु ककमा। दआ

ु ी गमी। रुऩमा जेफ भें

यक्िा औय यसद ऩहुॉचाने वारों की बीड़ को योते औय त्रफरत्रफराते छोड़कय

हवा हो गमे। भोदी का गरा घॊट
ु गमा। कसाई के गरे ऩय छुयी कपय गमी।
तेरी वऩस गमा। भखु िमा साहफ ने गोऩार की गदफ न ऩय एहसान यक्िा गोमा

यसद के दाभ गगयह से ददए। ग वॉँ भें सि
फ हो गमा, प्रततर्षठा फढ गई। इधय
ु र
गोऩार ने गौया की िूफ िफय री। गाॉव भें यात बय मही चचाफ यही। गोऩार
फहुत फचा औय इसका सेहया भखु िमा के मसय था। फड़ी ववऩत्मत आई थी। वह
टर गमी। वऩतयों ने, दीवान हयदौर ने, नीभ तरेवारी दे वी ने, ताराफ के
ककनाये वारी सती ने, गोऩार की यऺा की। मह उन्हीॊ का प्रताऩ था। दे वी की
ऩज
ू ा होनी जरयी थी। सममनायामण की कथा बी रात्जभी हो गमी।

कप

य सफ
ु ह हुई रेककन गोऩार के दयवाजे ऩय आज रार ऩगडड़मों के
फजाम रार साडड़मों का जभघट था। गौया आज दे वी की ऩज
ू ा कयने
42

जाती

थी औय ग वॉँ की औयतें उसका साथ दे ने आई थीॊ। उसका घय सोंधी-

सोंधी मभट्टी की िश
ु फू से भहक यहा था जो िस औय गर
ु ाफ से कभ भोहक
न थी। औयतें सह
ु ाने गीत गा यही थीॊ। फच्चे िश
ु हो-होकय दौड़ते थे। दे वी के

ॉँ भें सेंदयु डारा।
चफत
ू ये ऩय उसने मभटटी का हाथी चढामा। सती की भ ग

दीवान साहफ को फताशे औय हरआ
खिरामा। हनभ

ु ान जी को रड्डू से
ज्मादा प्रेभ है, उन्हें रड्डू चढामे तफ गाती फजाती घय को आमी औय

सममनायामण की कथा की तैमारयम ॉँ होने रगीॊ । भामरन पूर के हाय, केरे
ॉँ
की शािें औय फन्दनवायें रामीॊ। कुम्हाय नमे-नमे ददमे औय ह डडमाॉ
दे गमा।
फायी हये ढाक के ऩमतर औय दोने यि गमा। कहाय ने आकय भटकों भें ऩानी

बया। फढई ने आकय गोऩार औय गौया के मरए दो नमी-नमी ऩीदढम ॉँ फनामीॊ।
नाइन ने ऑ ॊगन रीऩा औय चौक फनामी। दयवाजे ऩय फन्दनवायें फॉध गमीॊ।

ऑ ॊगन भें केरे की शािें गड़ गमीॊ। ऩत्ण्डत जी के मरए मसॊहासन सज गमा।
आऩस के काभों की व्मवस्था िुद-फ-िुद अऩने तनत्श्चत दामये ऩय चरने

रगी । मही व्मवस्था सॊस्कृतत है त्जसने दे हात की त्जन्दगी को आडम्फय की
ओय से उदासीन फना यक्िा है । रेककन अपसोस है कक अफ ऊॉच-नीच की
फेभतरफ औय फेहूदा कैदों ने इन आऩसी कतफव्मों को सौहाद्रफ सहमोग के ऩद
से हटा कय उन ऩय अऩभान औय नीचता का दागारगा ददमा है।

शाभ हुई। ऩत्ण्डत भोटे याभजी ने कन्धे ऩय झोरी डारी, हाथ भें शॊि
मरमा औय िड़ाऊॉ ऩय िटऩट कयते गोऩार के घय आ ऩहुॉच।े ऑ ॊगन भें टाट

त्रफछा हुआ था। ग वॉँ के प्रततत्र्षठत रोग कथा सन
ु ने के मरए आ फैठे। घण्टी
फजी, शॊि पॊु का गमा औय कथा शर
ु हुईं। गोऩार बी गाढे की चादय ओढे
एक कोने भें पॊू का गमा औय कथा शर
ु हुई। गोजार बी गाढे की चादय ओढे
एक कोने भें दीवाय के सहाये फैठा हुआ था। भखु िमा, नम्फयदाय औय ऩटवायी

ने भाये हभददी के उससे कहा—सममनायामण क भदहभा थी कक तुभ ऩय कोई
ऑ ॊच न आई।

गोऩार ने अॉगड़ाई रेकय कहा—सममनायामण की भदहभा नहीॊ, मह

अॊधेय है ।

--जभाना, जर
ु ाई १९१३

43

मिपफ एक आवाज
का वक्त था। ठाकुय दशफनमसॊह के घय भें एक हॊ गाभा फयऩा था।
सफहआज
ु यात को चन्द्रग्रहण होने वारा था। ठाकुय साहफ अऩनी फढू ी
ठकुयाइन के साथ गॊगाजी जाते

थे इसमरए साया घय उनकी ऩयु शोय तैमायी

ॉँ यही थी, दस
भें रगा हुआ था। एक फहू उनका पटा हुआ कुताफ ट क
ू यी फहू
उनकी ऩगड़ी मरए सोचती थी, कक कैसे इसकी भयम्भत करॉंॊ दोनो रड़ककम ॉँ
नाश्ता तैमाय कयने भें तल्रीन थीॊ। जो ज्मादा ददरचस्ऩ काभ था औय फच्चों

ने अऩनी आदत के अनस
ु ाय एक कुहयाभ भचा यक्िा था क्मोंकक हय एक

आने-जाने के भौके ऩय उनका योने का जोश उभॊग ऩय होत था। जाने के
वक्त साथा जाने के मरए योते, आने के वक्त इसमरए योते ककशयीनी का

ॉँ
फ ट-फिया
भनोनक
ु ू र नहीॊ हुआ। फढी ठकुयाइन फच्चों को पुसराती थी औय
फीच-फीच भें अऩनी फहुओॊ को सभझाती थी-दे िों िफयदाय ! जफ तक उग्रह
न हो जाम, घय से फाहय न तनकरना। हॉमसमा, छुयी ,कुल्हाड़ी , इन्हें हाथ से
भत छुना। सभझामे दे ती हूॉ, भानना चाहे न भानना। तम्
ु हें भेयी फात की
ऩयवाह है। भॊह
ु भें ऩानी की फॊद
ू े न ऩड़ें। नायामण के घय ववऩत ऩड़ी है। जो

साध—
ु मबिायी दयवाजे ऩय आ जाम उसे पेयना भत। फहुओॊ ने सन
ु ा औय
नहीॊ सन
ु ा। वे भना यहीॊ थीॊ कक ककसी तयह मह मह ॉँ से टरें। पागन
ु का
भहीना है , गाने को तयस गमे। आज िूफ गाना-फजाना होगा।

ठाकुय साहफ थे तो फढ
ू े , रेककन फढ
ू ाऩे का असय ददर तक नहीॊ ऩहुॉचा
था। उन्हें इस फात का गवफ था कक कोई ग्रहण गॊगा-स्नान के फगैय नहीॊ
छूटा। उनका ऻान आश्चमफ जनक था। मसपफ ऩिों को दे िकय भहीनों ऩहरे
सम
ू -फ ग्रहण औय दस
ू ये ऩवो के ददन फता दे ते थे। इसमरए गाॉववारों की तनगाह

भें उनकी इज्जत अगय ऩत्ण्डतों से ज्मादा न थी तो कभ बी न थी। जवानी
भें कुछ ददनों पौज भें नौकयी बी की थी। उसकी गभी अफ तक फाकी थी,

भजार न थी कक कोई उनकी तयप सीधी आॉि से दे ि सके। सम्भन
रानेवारे एक चऩयासी को ऐसी व्मावहारयक चेतावनी दी थी त्जसका उदाहयण

ॉँ ग वॉँ भें बी नहीॊ मभर सकता। दहम्भत औय हौसरे के
आस-ऩास के दस-ऩ च
काभों भें अफ बी आगे-आगे यहते थे ककसी काभ को भत्ु श्कर फता दे ना,

उनकी दहम्भत को प्रेरयत कय दे ना था। जह ॉँ सफकी जफानें फन्द हो जाएॉ,
44

वह ॉँ वे शेयों की तयह गयजते थे। जफ कबी ग वॉँ भें दयोगा जी तशयीप राते

तो ठाकुय साहफ ही का ददर-गद
ु ाफ था कक उनसे आॉिें मभराकय आभने-साभने
फात कय सकें। ऻान की फातों को रेकय तछड़नेवारी फहसों के भैदान भें बी

उनके कायनाभे कुछ कभ शानदाय न थे। झगड़ा ऩत्ण्डत हभेशा उनसे भॉह

तछऩामा कयते। गयज, ठाकुय साहफ का स्वबावगत गवफ औय आमभ-ववश्वास
उन्हें हय फयात भें दल्
ू हा फनने ऩय भजफयू कय दे ता था। ह ,ॉँ कभजोयी इतनी
थी कक अऩना आल्हा बी आऩ ही गा रेते औय भजे रे-रेकय क्मोंकक यचना
को यचनाकाय ही िूफ फमान कयता है !

फ दोऩहय होते-होते ठाकुयाइन ग वॉँ से चरे तो सैंकड़ों आदभी उनके
ॉँ रगा
साथ थे औय ऩक्की सड़क ऩय ऩहुॉच,े तो मात्रिमों का ऐसा त ता

हुआ था कक जैसे कोई फाजाय है । ऐसे-ऐसे फढ
ु ें रादठम ॉँ टे कते मा डोमरमों ऩय
सवाय चरे जाते थे त्जन्हें तकरीप दे ने की मभयाज ने बी कोई जरयत न
सभझी थी। अन्धे दस
ू यों की रकड़ी के सहाये कदभ फढामे आते थे। कुछ

आदमभमों ने अऩनी फढ
ू ी भाताओॊ को ऩीठ ऩय राद मरमा था। ककसी के सय
ऩय कऩड़ों की ऩोटरी, ककसी के कन्धे ऩय रोटा-डोय, ककसी के कन्धे ऩय
काॉवय। ककतने ही आदमभमों ने ऩैयों ऩय चीथड़े रऩेट मरमे थे, जूते कह ॉँ से

रामें। भगय धामभफक उमसाह का मह वयदान था कक भन ककसी का भैरा न
था। सफके चेहये खिरे हुए, हॉ सते-हॉ सते फातें कयते चरे जा यहे थें कुछ औयतें
गा यही थी:
च दॉँ सयू ज दन
ू ो रोक के भामरक
एक

ददना उनहूॉ ऩय
हभ जानी हभहीॊ ऩय

फनती

फनती

ऐसा भारभ
ू होता था, मह आदमभमों की एक नदी थी, जो सैंकड़ों

छोटे -छोटे नारों औय धायों को रेती हुई सभद्र
ु से मभरने के मरए जा यही
थी।
जफ मह रोग गॊगा के ककनाये ऩहुॉचे तो तीसये ऩहय का वक्त था

रेककन भीरों तक कहीॊ ततर यिने की जगह न थी। इस शानदाय दृश्म से

ददरों ऩय ऐसा योफ औय बत्क्त का ऐसा बाव छा जाता था कक फयफस ‘गॊगा
45

भाता की जम’ की सदामें फर
ु न्द हो जाती थीॊ। रोगों के ववश्वास उसी नदी

की तयह उभड़े हुए थे औय वह नदी! वह रहयाता हुआ नीरा भैदान! वह
प्मासों की प्मास फझ
ु ानेवारी! वह तनयाशों की आशा! वह वयदानों की दे वी!
वह ऩवविता का स्िोत! वह भट्ठ
ु ी बय िाक को आिम

दे नेवीरी गॊगा हॉ सती-

भस्
ु कयाती थी औय उछरती थी। क्मा इसमरए कक आज वह अऩनी चौतयपा

इज्जत ऩय पूरी न सभाती थी मा इसमरए कक वह उछर-उछरकय अऩने
प्रेमभमों के गरे मभरना चाहती थी जो उसके दशफनों के मरए भॊत्जर तम

कयके आमे थे! औय उसके ऩरयधान की प्रशॊसा ककस जफान से हो, त्जस

ॉँ े थे औय त्जसके ककनायों को उसकी ककयणों ने
सयू ज से चभकते हुए ताये ट क
यॊ ग-त्रफयॊ गे, सन्
ु दय औय गततशीर पूरों से सजामा था।

अबी ग्रहण रगने भें धण्टे की दे य थी। रोग इधय-उधय टहर यहे थे।

कहीॊ भदारयमों के िेर थे, कहीॊ चयू नवारे की रच्छे दाय फातों के चभमकाय।

कुछ रोग भेढों की कुश्ती दे िने के मरए जभा थे। ठाकुय साहफ बी अऩने
कुछ बक्तों के साथ सैय को तनकरे।

उनकी दहम्भत ने गवाया न ककमा कक

इन फाजार ददरचत्स्ऩमों भें शयीक हों। मकामक उन्हें एक फड़ा-सा शामभमाना

तना हुआ नजय आमा, जह ॉँ ज्मादातय ऩढे -मरिे रोगों की बीड़ थी। ठाकुय
साहफ ने अऩने सागथमों को एक ककनाये िड़ा कय ददमा औय िुद गवफ से
ताकते हुए पशफ ऩय जा फैठे क्मोंकक उन्हें ववश्वास था कक मह ॉँ उन ऩय
दे हाततमों की ईर्षमाफ--दृत्र्षट ऩड़ेगी औय सम्बव है कुछ ऐसी फायीक फातें बी
भारभ
ू हो जामॉ तो उनके बक्तों को उनकी सवफऻता का ववश्वास ददराने भें
काभ दे सकें।

मह एक नैततक अनर्षु ठान था। दो-ढाई हजाय आदभी फैठे हुए एक
भधयु बाषी वक्ता का बाषणसन
ु यहे थे। पैशनेफर
ु रोग ज्मादातय अगरी

ऩॊत्क्त भें फैठे हुए थे त्जन्हें कनफततमों का इससे अच्छा भौका नहीॊ मभर
सकता था। ककतने ही अच्छे कऩड़े ऩहने हुए रोग इसमरए दि
ु ी नजय आते
थे कक उनकी फगर भें तनम्न िेणी के रोग फैठे हुए थे। बाषण ददरचस्त
भारभ
ू ऩड़ता था। वजन ज्मादा था औय चटिाये कभ, इसमरए तामरम ॉँ नहीॊ
फजती थी।

क्ता ने अऩने बाषण भें कहा—

भेये प्माये दोस्तो, मह हभाया औय आऩका कतफव्म है । इससे ज्मादा
46

भहममवऩण
ू ,फ ज्मादा ऩरयणाभदामक औय कौभ के मरए ज्मादा शब
ु औय कोई
कतफव्म नहीॊ है । हभ भानते हैं कक उनके आचाय-व्मवहाय की दशा अममॊत
करुण है । भगय ववश्वास भातनमे मह सफ हभायी कयनी है । उनकी इस

रज्जाजनक साॊस्कृततक त्स्थतत का त्जम्भेदाय हभाये मसवा औय कौन हो

सकता है ? अफ इसके मसवा औय कोई इराज नहीॊ हैं कक हभ उस घण
ृ ा औय

उऩेऺा को; जो उनकी तयप से हभाये ददरों भें फैठी हुई है, घोमें औय िूफ
भरकय धोमें। मह आसान काभ नहीॊ है। जो कामरि कई हजाय वषो से जभी
हुई है , वह आसानी से नहीॊ मभट सकती। त्जन रोगों की छामा से हभ फचते
आमे हैं, त्जन्हें हभने जानवयों से बी जरीर सभझ यक्िा है , उनसे गरे

मभरने भें हभको ममाग औय साहस औय ऩयभाथफ से काभ रेना ऩड़ेगा। उस
ममाग से जो कृर्षण भें था, उस दहम्भत से जो याभ भें थी, उस ऩयभाथफ से
जो चैतन्म औय गोववन्द भें था। भैं मह नहीॊ कहता कक आऩ आज ही उनसे

शादी के रयश्ते जोडें मा उनके साथ फैठकय िामें-वऩमें। भगय क्मा मह बी
भभ
ु ककन नहीॊ है कक आऩ उनके साथ साभान्म सहानब
ु तू त, साभान्म
भनर्षु मता, साभान्म सदाचाय से ऩेश आमें? क्मा मह सचभच
ु असम्बव फात

है ? आऩने कबी ईसाई मभशनरयमों को दे िा है ? आह, जफ भैं एक उच्चकोदट

का सन्
ु दय, सक
ु ु भाय, गौयवणफ रेडी को अऩनी गोद भें एक कारा–करट
ू ा फच्च
मरमे हुए दे िता हूॉ त्जसके फदन ऩय पोड़े हैं, िून है औय गन्दगी है —वह
सन्
ु दयी उस फच्चे को चभ
ू ती है , प्माय कयती है , छाती से रगाती है —तो भेया

जी चाहता है उस दे वी के कदभों ऩय मसय यि दॉ ।ू अऩनी नीचता, अऩना

कभीनाऩन, अऩनी झठ
ू ी फड़ाई, अऩने ह्रदम की सॊकीणफता भझ
ु े कबी इतनी
सपाई से नजय नहीॊ आती। इन दे ववमों के मरए त्जन्दगी भें क्मा-क्मा

सॊऩदाएॉ, नहीॊ थी, िमु शम ॉँ फ हेंॉँ ऩसाये हुए उनके इन्तजाय भें िड़ी थी। उनके
मरए दौरत की सफ सि
ु -सवु वधाएॉ थीॊ। प्रेभ के आकषफण थे। अऩने आमभीम
औय स्वजनों की सहानब
ु तू तम ॉँ थीॊ औय अऩनी प्मायी भातब
ृ मू भ का आकषफण
था। रेककन इन दे ववमों ने उन तभाभ नेभतों, उन सफ साॊसारयक सॊऩदाओॊ को

सेवा, सच्ची तनस्वाथफ सेवा ऩय फमरदान कय ददमा है ! वे ऐसी फड़ी कुफाफतनम ॉँ
कय सकती हैं, तो हभ क्मा इतना बी नहीॊ कय सकते कक अऩने अछूत

बाइमों से हभददी का सरक
ू कय सकें? क्मा हभ सचभच
ु ऐसे ऩस्त-दहम्भत,
ऐसे फोदे , ऐसे फेयहभ हैं? इसे िूफ सभझ रीत्जए कक आऩ उनके साथ कोई
रयमामत, कोई भेहयफानी नहीॊ कय यहें हैं। मह उन ऩय कोई एहसान नहीॊ है ।
47

मह आऩ ही के मरए त्जन्दगी औय भौत का सवार है । इसमरए भेये बाइमों
औय दोस्तो, आइमे इस भौके ऩय शाभ के वक्त ऩववि गॊगा नदी के ककनाये

काशी के ऩववि स्थान भें हभ भजफत
ू ददर से प्रततऻा कयें कक आज से हभ

अछूतों के साथ बाई-चाये का सरक
ू कयें गे, उनके तीज-ममोहायों भें शयीक होंगे
औय अऩने ममोहायों भें उन्हें फर
ु ामेंगे। उनके गरे मभरेंगे औय उन्हें अऩने गरे
रगामेंगे! उनकी िमु शमों भें िुश औय उनके ददों भे ददफ भन्द होंगे, औय चाहे

कुछ ही क्मों न हो जाम, चाहे ताना-ततश्नों औय त्जल्रत का साभना ही क्मों

न कयना ऩड़े, हभ इस प्रततऻा ऩय कामभ यहें गे। आऩ भें सैंकड़ों जोशीरे

नौजवान हैं जो फात के धनी औय इयादे के भजफत
ू हैं। कौन मह प्रततऻा
कयता है ? कौन अऩने नैततक साहस का ऩरयचम दे ता है ? वह अऩनी जगह

ऩय िड़ा हो जाम औय ररकायकय कहे कक भैं मह प्रततऻा कयता हूॉ औय
भयते दभ तक इस ऩय दृढता से कामभ यहूॉगा।

सू

यज गॊगा की गोद भें जा फैठा था औय भ ॉँ प्रेभ औय गवफ से भतवारी

जोश भें उभड़ी हुई यॊ ग केसय को शभाफती औय चभक भें सोने की रजाती
थी। चाय तयप एक योफीरी िाभोशी छामी थीॊ उस सन्नाटे भें सॊन्मासी की

गभी औय जोश से बयी हुई फातें गॊगा की रहयों औय गगनचम्
ु फी भॊददयों भें
सभा गमीॊ। गॊगा एक गम्बीय भ ॉँ की तनयाशा के साथ हॉ सी औय दे वताओॊ ने
अपसोस से मसय झक
ु ा मरमा, भगय भॉह
ु से कुछ न फोरे।

सॊन्मासी की जोशीरी ऩक
ु ाय कपजाॊ भें जाकय गामफ हो गई, भगय उस

भजभे भें ककसी आदभी के ददर तक न ऩहुॉची। वह ॉँ कौभ ऩय जान दे ने वारों
की कभी न थी: स्टे जों ऩय कौभी तभाशे िेरनेवारे कारेजों के होनहाय
नौजवान, कौभ के नाभ ऩय मभटनेवारे ऩिकाय, कौभी सॊस्थाओॊ के भेम्फय,

सेक्रेटयी औय प्रेमसडेंट, याभ औय कृर्षण के साभने मसय झक
ु ानेवारे सेठ औय

साहूकाय, कौभी कामरजों के ऊॉचे हौंसरोंवारे प्रोपेसय औय अिफायों भें कौभी
तयत्क्कमों की िफयें ऩढकय िश
ु होने वारे दफ्तयों के कभफचायी हजायों की
तादाद भें भौजूद थे। आॉिों ऩय सन
ु हयी ऐनकें रगामे, भोटे -भोटे वकीरों क

एक ऩयू ी पौज जभा थी। भगय सॊन्मासी के उस गभफ बाषण से एक ददर बी
न वऩघरा क्मोंकक

वह ऩमथय के ददर थे त्जसभें ददफ औय घर
ु ावट न थी,
48

त्जसभें सददच्छा थी भगय कामफ-शत्क्त न थी, त्जसभें फच्चों की सी इच्छा थी
भदो का–सा इयादा न था।

सायी भजमरस ऩय सन्नाटा छामा हुआ था। हय आदभी मसय झक
ु ामे
कपक्र भें डूफा हुआ नजय आता था। शमभिंदगी ककसी को सय उठाने न दे ती थी

औय आॉिें झेंऩ भें भाये जभीन भें गड़ी हुई थी। मह वही सय हैं जो कौभी
चचों ऩय उछर ऩड़ते थे, मह वही आॉिें हैं जो ककसी वक्त यार्षरीम गौयव की
रारी से बय जाती थी। भगय कथनी औय कयनी भें आदद औय अन्त का

अन्तय है। एक व्मत्क्त को बी िड़े होने का साहस न हुआ। कैंची की तयह
चरनेवारी जफान बी ऐसे भहान र उमतयदातममव के बम से फन्द हो गमीॊ।

ठा

5

कुय दशफनमसॊह अऩनी जगी ऩय फैठे हुए इस दृश्म को फहुत गौय औय
ददरचस्ऩी से दे ि यहे थे। वह अऩने भामभफक ववश्वासो भें चाहे कट्टय

हो मा न हों, रेककन साॊस्कृततक भाभरों भें वे कबी अगव
ु ाई कयने के दोषी

नहीॊ हुए थे। इस ऩेचीदा औय डयावने यास्ते भें उन्हें अऩनी फवु ि औय वववेक
ऩय बयोसा नहीॊ होता था। मह ॊ तकफ औय मत्ु क्त को बी उनसे हाय भाननी

ऩड़ती थी। इस भैदान भें वह अऩने घय की त्स्िमों की इच्छा ऩयू ी कयने ही
अऩना कमतफव्म सभझते थे औय चाहे उन्हें िुद ककसी भाभरे भें कुछ एतयाज

बी हो रेककन मह औयतों का भाभरा था औय इसभें वे हस्तऺेऩ नहीॊ कय
सकते थे क्मोंकक इससे ऩरयवाय की व्मवस्था भें हरचर औय गड़फड़ी ऩैदा हो

जाने की जफयदस्त आशॊका यहती थी। अगय ककसी वक्त उनके कुछ जोशीरे
नौजवान दोस्त इस कभजोयी ऩय उन्हें आड़े हाथों रेते तो वे फड़ी फवु िभमता

से कहा कयते थे—बाई, मह औयतों के भाभरे हैं, उनका जैसा ददर चाहता
है , कयती हैं, भैं फोरनेवारा कौन हूॉ। गयज मह ॉँ उनकी पौजी गभफ-मभजाजी
उनका साथ छोड़ दे ती थी। मह उनके मरए ततमरस्भ की घाटी थी जह ॉँ होशहवास त्रफगड़ जाते थे औय अन्धे अनक
ु यण का ऩैय फॉधी हुई गदफ न ऩय सवाय
हो जाता था।
रेककन मह ररकाय सन
ु कय वे अऩने को काफू भें न यि सके। मही

वह भौका था जफ उनकी दहम्भतें आसभान ऩय जा ऩहुॉचती थीॊ। त्जस फीड़े
को कोई न उठामे उसे उठाना उनका काभ था। वजफनाओॊ से उनको आत्मभक

प्रेभ था। ऐसे भौके ऩय वे नतीजे औय भसरहत से फगावत कय जाते थे औय
49

उनके इस हौसरे भें मश के रोब को उतना दिर नहीॊ था त्जतना उनके

नैसगगफक स्वाबाव का। वनाफ मह असम्बव था कक एक ऐसे जरसे भें जह ॉँ
ऻान औय सभ्मता की धभ
ू -धाभ थी, जह ॉँ सोने की ऐनकों से योशनी औय

तयह-तयह के ऩरयधानों से दीप्त गचन्तन की ककयणें तनकर यही थीॊ, जह ॉँ
कऩड़े-रमते की नपासत से योफ औय भोटाऩे से प्रततर्षठा की झरक आती थी,

वह ॉँ एक दे हाती ककसान को जफान िोरने का हौसरा होता। ठाकुय ने इस

दृश्म को गौय औय ददरचस्ऩी से दे िा। उसके ऩहरू भें गद
ु गुदी-सी हुई।
त्जन्दाददरी का जोश यगों भें दौड़ा। वह अऩनी जगह से उठा औय भदाफना
रहजे भें ररकायकय फोरा-भैं मह प्रततऻा कयता हूॉ औय भयते दभ तक उस
ऩय कामभ यहूॉगा।

तना सन
ु ना था कक दो हजाय आॉिें अचम्बे से उसकी तयप ताकने रगीॊ।

सब
ु ानअल्राह, क्मा हुमरमा थी—गाढे की ढीरी मभजफई, घट
ु नों तक चढी
हुई धोती, सय ऩय एक बायी-सा उरझा हुआ सापा, कन्धे ऩय चन
ु ौटी औय
तम्फाकू का वजनी फटुआ, भगय चेहये से गम्बीयता औय दृढता स्ऩर्षट थी।

गवफ आॉिों के तॊग घेये से फाहय तनकरा ऩड़ता था। उसके ददर भें अफ इस

शानदाय भजभे की इज्जत फाकी न यही थी। वह ऩयु ाने वक्तों का आदभी था
जो अगय ऩमथय को ऩज
ू ता था तो उसी ऩमथय से डयता बी

था, त्जसके

मरए एकादशी का व्रत केवर स्वास्र्थम-यऺा की एक मत्ु क्त औय गॊगा केवर
स्वास्र्थमप्रद ऩानी की एक धाया न थी। उसके ववश्वासों भें जागतृ त न हो
रेककन दवु वधा नहीॊ थी। मानी कक उसकी कथनी औय कयनी भें अन्तय न था

औय न उसकी फतु नमाद कुछ अनक
ु यण औय दे िादे िी ऩय थी भगय
अगधकाॊशत: बम ऩय, जो ऻान के आरोक के फाद वतृ तमों के सॊस्काय की
सफसे फड़ी शत्क्त है। गेरुए फाने का आदय औय बत्क्त कयना इसके धभफ

औय ववश्वास का एक अॊग था। सॊन्मास भें उसकी आमभा को अऩना अनच
ु य

फनाने की एक सजीव शत्क्त तछऩी हुई थी औय उस ताकत ने अऩना असय
ददिामा। रेककन भजभे की इस है यत ने फहुत जल्द भजाक की सयू त
अत्ख्तमाय की। भतरफबयी तनगाहें आऩस भें कहने रगीॊ—आखिय गॊवाय ही
तो ठहया!

दे हाती है, ऐसे बाषण कबी काहे को सन
ु े होंगे, फस उफर ऩड़ा।

उथरे गड्ढे भें इतना ऩानी बी न सभा सका! कौन नहीॊ जानता कक ऐसे
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बाषणों का उद्देश्म भनोयॊ जन होता है ! दस आदभी आमे, इकट्ठे फैठ, कुछ
सन
ु ा, कुछ गऩ-शऩ भायी औय अऩने-अऩने घय रौटे , न मह कक कौर-कयाय
कयने फैठे, अभर कयने के मरए कसभें िामे!

भगय तनयाश सॊन्मासी सो यहा था—अपसोस, त्जस भल्
ु क की योशनी

भें इतना अॊधेया है, वह ॉँ कबी योशनी का उदम होना भत्ु श्कर नजय आता है ।
इस योशनी ऩय, इस अॊधेयी, भद
ु ाफ औय फेजान योशनी ऩय भैं जहारत को,

अऻान को ज्मादा ऊॉची जगह दे ता हूॉ। अऻान भें सपाई है औय दहम्भत है,
उसके ददर औय जफान भें ऩदाफ नहीॊ होता, न कथनी औय कयनी भें ववयोध।
क्मा मह अपसोस की फात नहीॊ है कक ऻान औय अऻान के आगे मसय

झक
ु ामे? इस साये भजभें भें मसपफ एक आदभी है, त्जसके ऩहरू भें भदों का
ददर है औय गो उसे फहुत सजग होने का दावा नहीॊ रेककन भैं उसके अऻान
ऩय ऐसी हजायों जागतृ तमों को कुफाफन कय सकता हूॉ। तफ वह प्रेटपाभफ से
नीचे उतये औय दशफनमसॊह को गरे से रगाकय कहा—ईश्वय तुम्हें प्रततऻा ऩय
कामभ यिे।

--जभाना, अगस्त-मसतम्फय १९१३

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