प्रेमचंद

क्रभ

सिपफ एक आवाज

:

नेकी

:

ॉँ जभ ॊदाय
फ का

:

अनाथ रड़की

:

कभों का पर

:

2

3
11
21
31
40

सिर्फ एक आवाज
का वक्त था। ठाकुय दर्फनसिॊह के घय भें एक हॊ गाभा फयऩा था।
िफहआज
ु यात को चन्द्रग्रहण होने वारा था। ठाकुय िाहफ अऩन फढू ़ी
ठकुयाइन के िाथ गॊगाज जाते

थे इिसरए िाया घय उनकी ऩयु र्ोय तैमाय़ी

ॉँ यह़ी थ , दि
भें रगा हुआ था। एक फहू उनका पटा हुआ कुताफ ट क
ू य़ी फहू
उनकी ऩगड़ सरए िोचत थ , कक कैिे इिकी भयम्भत करॉंॊ दोनो रड़ककम ॉँ
नाश्ता तैमाय कयने भें तल्ऱीन थ ॊ। जो ज्मादा ददरचस्ऩ काभ था औय फच्चों

ने अऩन आदत के अनि
ु ाय एक कुहयाभ भचा यक्खा था क्मोंकक हय एक
आने-जाने के भौके ऩय उनका योने का जोर् उभॊग ऩय होत था। जाने के
वक्त िाथा जाने के सरए योते, आने के वक्त इिसरए योते ककर्य़ीन का

ॉँ
फ ट-फखया
भनोनक
ु ू र नह़ीॊ हुआ। फढ़ी ठकुयाइन फच्चों को पुिरात थ औय
फ च-फ च भें अऩन फहुओॊ को िभझात थ -दे खों खफयदाय ! जफ तक उग्रह
न हो जाम, घय िे फाहय न ननकरना। हॉसिमा, छुय़ी ,कुल्हाड़ , इन्द्हें हाथ िे

भत छुना। िभझामे दे त हूॉ, भानना चाहे न भानना। तम्
ु हें भेय़ी फात की
ऩयवाह है। भॊह
ु भें ऩान की फॊद
ू े न ऩड़ें। नायामण के घय ववऩत ऩड़ है। जो

िाध—
ु सबखाय़ी दयवाजे ऩय आ जाम उिे पेयना भत। फहुओॊ ने िन
ु ा औय
नह़ीॊ िन
ु ा। वे भना यह़ीॊ थ ॊ कक ककि तयह मह मह ॉँ िे टरें। पागन
ु का
भह़ीना है , गाने को तयि गमे। आज खूफ गाना-फजाना होगा।

ठाकुय िाहफ थे तो फढ
ू े , रेककन फढ
ू ाऩे का अिय ददर तक नह़ीॊ ऩहुॉचा
था। उन्द्हें इि फात का गवफ था कक कोई ग्रहण गॊगा-स्नान के फगैय नह़ीॊ
छूटा। उनका ज्ञान आश्चमफ जनक था। सिपफ ऩत्रों को दे खकय भह़ीनों ऩहरे

िम
ू -फ ग्रहण औय दि
ू ये ऩवो के ददन फता दे ते थे। इिसरए गाॉववारों की ननगाह
भें उनकी इज्जत अगय ऩण्डडतों िे ज्मादा न थ तो कभ ब न थ । जवान

भें कुछ ददनों पौज भें नौकय़ी ब की थ । उिकी गभी अफ तक फाकी थ ,
भजार न थ

कक कोई उनकी तयप ि ध

आॉख िे दे ख िके। िम्भन

रानेवारे एक चऩयाि को ऐि व्मावहारयक चेतावन द़ी थ ण्जिका उदाहयण

ॉँ ग वॉँ भें ब नह़ीॊ सभर िकता। दहम्भत औय हौिरे के
आि-ऩाि के दि-ऩ च
काभों भें अफ ब आगे-आगे यहते थे ककि काभ को भण्ु श्कर फता दे ना,
उनकी दहम्भत को प्रेरयत कय दे ना था। जह ॉँ िफकी जफानें फन्द्द हो जाएॉ,
3

वह ॉँ वे र्ेयों की तयह गयजते थे। जफ कब ग वॉँ भें दयोगा ज तर्य़ीप राते

तो ठाकुय िाहफ ह़ी का ददर-गद
ु ाफ था कक उनिे आॉखें सभराकय आभने-िाभने
फात कय िकें। ज्ञान की फातों को रेकय नछड़नेवाऱी फहिों के भैदान भें ब

उनके कायनाभे कुछ कभ र्ानदाय न थे। झगड़ा ऩण्डडत हभेर्ा उनिे भॉह

नछऩामा कयते। गयज, ठाकुय िाहफ का स्वबावगत गवफ औय आत्भ-ववश्वाि
उन्द्हें हय फयात भें दल्
ू हा फनने ऩय भजफयू कय दे ता था। ह ,ॉँ कभजोय़ी इतन
थ कक अऩना आल्हा ब आऩ ह़ी गा रेते औय भजे रे-रेकय क्मोंकक यचना
को यचनाकाय ह़ी खूफ फमान कयता है !

फ दोऩहय होते-होते ठाकुयाइन ग वॉँ िे चरे तो िैंकड़ों आदभ उनके
ॉँ रगा
िाथ थे औय ऩक्की िड़क ऩय ऩहुॉच,े तो मात्रत्रमों का ऐिा त ता

हुआ था कक जैिे कोई फाजाय है । ऐिे-ऐिे फढ
ु ें रादठम ॉँ टे कते मा डोसरमों ऩय
िवाय चरे जाते थे ण्जन्द्हें तकऱीप दे ने की मभयाज ने ब कोई जरयत न
िभझ थ । अन्द्धे दि
ू यों की रकड़ के िहाये कदभ फढामे आते थे। कुछ

आदसभमों ने अऩन फढ
ू ़ी भाताओॊ को ऩ ठ ऩय राद सरमा था। ककि के िय
ऩय कऩड़ों की ऩोटऱी, ककि के कन्द्धे ऩय रोटा-डोय, ककि के कन्द्धे ऩय
काॉवय। ककतने ह़ी आदसभमों ने ऩैयों ऩय च थड़े रऩेट सरमे थे, जूते कह ॉँ िे

रामें। भगय धासभफक उत्िाह का मह वयदान था कक भन ककि का भैरा न
था। िफके चेहये खखरे हुए, हॉ िते-हॉ िते फातें कयते चरे जा यहे थें कुछ औयतें
गा यह़ी थ :
च दॉँ ियू ज दन
ू ो रोक के भासरक
एक

ददना उनहूॉ ऩय
हभ जान हभह़ीॊ ऩय

फनत

फनत

ऐिा भारभ
ू होता था, मह आदसभमों की एक नद़ी थ , जो िैंकड़ों

छोटे -छोटे नारों औय धायों को रेत हुई िभर
ु िे सभरने के सरए जा यह़ी
थ।
जफ मह रोग गॊगा के ककनाये ऩहुॉचे तो त िये ऩहय का वक्त था

रेककन भ रों तक कह़ीॊ नतर यखने की जगह न थ । इि र्ानदाय दृश्म िे

ददरों ऩय ऐिा योफ औय बण्क्त का ऐिा बाव छा जाता था कक फयफि ‘गॊगा
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भाता की जम’ की िदामें फर
ु न्द्द हो जात थ ॊ। रोगों के ववश्वाि उि नद़ी

की तयह उभड़े हुए थे औय वह नद़ी! वह रहयाता हुआ न रा भैदान! वह
प्मािों की प्माि फझ
ु ानेवाऱी! वह ननयार्ों की आर्ा! वह वयदानों की दे व !
वह ऩववत्रता का स्त्रोत! वह भट्ठ
ु बय खाक को आश्रम

दे नेव ऱी गॊगा हॉ ित -

भस्
ु कयात थ औय उछरत थ । क्मा इिसरए कक आज वह अऩन चौतयपा

इज्जत ऩय पूऱी न िभात थ मा इिसरए कक वह उछर-उछरकय अऩने
प्रेसभमों के गरे सभरना चाहत थ जो उिके दर्फनों के सरए भॊण्जर तम

कयके आमे थे! औय उिके ऩरयधान की प्रर्ॊिा ककि जफान िे हो, ण्जि

ॉँ े थे औय ण्जिके ककनायों को उिकी ककयणों ने
ियू ज िे चभकते हुए ताये ट क
यॊ ग-त्रफयॊ गे, िन्द्
ु दय औय गनतर् र पूरों िे िजामा था।

अब ग्रहण रगने भें धडटे की दे य थ । रोग इधय-उधय टहर यहे थे।

कह़ीॊ भदारयमों के खेर थे, कह़ीॊ चयू नवारे की रच्छे दाय फातों के चभत्काय।

कुछ रोग भेढों की कुश्त दे खने के सरए जभा थे। ठाकुय िाहफ ब अऩने
कुछ बक्तों के िाथ िैय को ननकरे।

उनकी दहम्भत ने गवाया न ककमा कक

इन फाजार ददरचण्स्ऩमों भें र्य़ीक हों। मकामक उन्द्हें एक फड़ा-िा र्ासभमाना

तना हुआ नजय आमा, जह ॉँ ज्मादातय ऩढे -सरखे रोगों की ब ड़ थ । ठाकुय
िाहफ ने अऩने िाथथमों को एक ककनाये खड़ा कय ददमा औय खुद गवफ िे

ताकते हुए पर्फ ऩय जा फैठे क्मोंकक उन्द्हें ववश्वाि था कक मह ॉँ उन ऩय
दे हानतमों की ईर्षमाफ--दृण्र्षट ऩड़ेग औय िम्बव है कुछ ऐि फाय़ीक फातें ब
भारभ
ू हो जामॉ तो उनके बक्तों को उनकी िवफज्ञता का ववश्वाि ददराने भें
काभ दे िकें।

मह एक नैनतक अनर्षु ठान था। दो-ढाई हजाय आदभ फैठे हुए एक
भधयु बाष वक्ता का बाषणिन
ु यहे थे। पैर्नेफर
ु रोग ज्मादातय अगऱी

ऩॊण्क्त भें फैठे हुए थे ण्जन्द्हें कनफनतमों का इििे अच्छा भौका नह़ीॊ सभर
िकता था। ककतने ह़ी अच्छे कऩड़े ऩहने हुए रोग इिसरए दख
नजय आते

थे कक उनकी फगर भें ननम्न श्रेण के रोग फैठे हुए थे। बाषण ददरचस्त

भारभ
ू ऩड़ता था। वजन ज्मादा था औय चटखाये कभ, इिसरए तासरम ॉँ नह़ीॊ
फजत थ ।

क्ता ने अऩने बाषण भें कहा—

भेये प्माये दोस्तो, मह हभाया औय आऩका कतफव्म है । इििे ज्मादा
5

भहत्त्वऩण
ू ,फ ज्मादा ऩरयणाभदामक औय कौभ के सरए ज्मादा र्ब
ु औय कोई

कतफव्म नह़ीॊ है । हभ भानते हैं कक उनके आचाय-व्मवहाय की दर्ा अत्मॊत
करुण है । भगय ववश्वाि भाननमे मह िफ हभाय़ी कयन

है । उनकी इि

रज्जाजनक िाॊस्कृनतक ण्स्थनत का ण्जम्भेदाय हभाये सिवा औय कौन हो

िकता है ? अफ इिके सिवा औय कोई इराज नह़ीॊ हैं कक हभ उि घण
ृ ा औय

उऩेक्षा को; जो उनकी तयप िे हभाये ददरों भें फैठी हुई है, घोमें औय खूफ
भरकय धोमें। मह आिान काभ नह़ीॊ है। जो कासरख कई हजाय वषो िे जभ
हुई है , वह आिान िे नह़ीॊ सभट िकत । ण्जन रोगों की छामा िे हभ फचते
आमे हैं, ण्जन्द्हें हभने जानवयों िे ब जऱीर िभझ यक्खा है , उनिे गरे

सभरने भें हभको त्माग औय िाहि औय ऩयभाथफ िे काभ रेना ऩड़ेगा। उि
त्माग िे जो कृर्षण भें था, उि दहम्भत िे जो याभ भें थ , उि ऩयभाथफ िे

जो चैतन्द्म औय गोववन्द्द भें था। भैं मह नह़ीॊ कहता कक आऩ आज ह़ी उनिे
र्ाद़ी के रयश्ते जोडें मा उनके िाथ फैठकय खामें-वऩमें। भगय क्मा मह ब

भभ
ु ककन नह़ीॊ है कक आऩ उनके िाथ िाभान्द्म िहानब
ु नू त, िाभान्द्म
भनर्षु मता, िाभान्द्म िदाचाय िे ऩेर् आमें? क्मा मह िचभच
ु अिम्बव फात

है ? आऩने कब ईिाई सभर्नरयमों को दे खा है ? आह, जफ भैं एक उच्चकोदट

का िन्द्
ु दय, िक
ु ु भाय, गौयवणफ रेड को अऩन गोद भें एक कारा–करट
ू ा फच्च
सरमे हुए दे खता हूॉ ण्जिके फदन ऩय पोड़े हैं, खून है औय गन्द्दग है —वह
िन्द्
ु दय़ी उि फच्चे को चभ
ू त है , प्माय कयत है , छात िे रगात है —तो भेया

ज चाहता है उि दे व के कदभों ऩय सिय यख दॉ ।ू अऩन न चता, अऩना
कभ नाऩन, अऩन झठ
ू ी फड़ाई, अऩने ह्रदम की िॊकीणफता भझ
ु े कब इतन
िपाई िे नजय नह़ीॊ आत । इन दे ववमों के सरए ण्जन्द्दग

भें क्मा-क्मा

िॊऩदाएॉ, नह़ीॊ थ , खसु र्म ॉँ फ हेंॉँ ऩिाये हुए उनके इन्द्तजाय भें खड़ थ । उनके
सरए दौरत की िफ िख
ु -िवु वधाएॉ थ ।ॊ प्रेभ के आकषफण थे। अऩने आत्भ म
औय स्वजनों की िहानब
ु नू तम ॉँ थ ॊ औय अऩन प्माय़ी भातब
ृ सू भ का आकषफण

था। रेककन इन दे ववमों ने उन तभाभ नेभतों, उन िफ िाॊिारयक िॊऩदाओॊ को

िेवा, िच्च ननस्वाथफ िेवा ऩय फसरदान कय ददमा है ! वे ऐि फड़ कुफाफननम ॉँ
कय िकत हैं, तो हभ क्मा इतना ब नह़ीॊ कय िकते कक अऩने अछूत

बाइमों िे हभददी का िरक
ू कय िकें? क्मा हभ िचभच
ु ऐिे ऩस्त-दहम्भत,
ऐिे फोदे , ऐिे फेयहभ हैं? इिे खूफ िभझ ऱीण्जए कक आऩ उनके िाथ कोई

रयमामत, कोई भेहयफान नह़ीॊ कय यहें हैं। मह उन ऩय कोई एहिान नह़ीॊ है ।
6

मह आऩ ह़ी के सरए ण्जन्द्दग औय भौत का िवार है । इिसरए भेये बाइमों
औय दोस्तो, आइमे इि भौके ऩय र्ाभ के वक्त ऩववत्र गॊगा नद़ी के ककनाये

कार् के ऩववत्र स्थान भें हभ भजफत
ू ददर िे प्रनतज्ञा कयें कक आज िे हभ

अछूतों के िाथ बाई-चाये का िरक
ू कयें गे, उनके त ज-त्मोहायों भें र्य़ीक होंगे
औय अऩने त्मोहायों भें उन्द्हें फर
ु ामेंगे। उनके गरे सभरेंगे औय उन्द्हें अऩने गरे
रगामेंगे! उनकी खसु र्मों भें खुर् औय उनके ददों भे ददफ भन्द्द होंगे, औय चाहे

कुछ ह़ी क्मों न हो जाम, चाहे ताना-नतश्नों औय ण्जल्रत का िाभना ह़ी क्मों

न कयना ऩड़े, हभ इि प्रनतज्ञा ऩय कामभ यहें गे। आऩ भें िैंकड़ों जोर् रे

नौजवान हैं जो फात के धन औय इयादे के भजफत
ू हैं। कौन मह प्रनतज्ञा
कयता है ? कौन अऩने नैनतक िाहि का ऩरयचम दे ता है ? वह अऩन जगह

ऩय खड़ा हो जाम औय ररकायकय कहे कक भैं मह प्रनतज्ञा कयता हूॉ औय
भयते दभ तक इि ऩय दृढता िे कामभ यहूॉगा।

िू

यज गॊगा की गोद भें जा फैठा था औय भ ॉँ प्रेभ औय गवफ िे भतवाऱी

जोर् भें उभड़ हुई यॊ ग केिय को र्भाफत औय चभक भें िोने की रजात
थ । चाय तयप एक योफ ऱी खाभोर् छाम थ ॊ उि िन्द्नाटे भें िॊन्द्माि की

गभी औय जोर् िे बय़ी हुई फातें गॊगा की रहयों औय गगनचम्
ु फ भॊददयों भें
िभा गम ॊ। गॊगा एक गम्ब य भ ॉँ की ननयार्ा के िाथ हॉ ि औय दे वताओॊ ने
अपिोि िे सिय झक
ु ा सरमा, भगय भॉह
ु िे कुछ न फोरे।

िॊन्द्माि की जोर् ऱी ऩक
ु ाय कपजाॊ भें जाकय गामफ हो गई, भगय उि

भजभे भें ककि आदभ के ददर तक न ऩहुॉच । वह ॉँ कौभ ऩय जान दे ने वारों
की कभ न थ : स्टे जों ऩय कौभ तभार्े खेरनेवारे कारेजों के होनहाय
नौजवान, कौभ के नाभ ऩय सभटनेवारे ऩत्रकाय, कौभ िॊस्थाओॊ के भेम्फय,

िेक्रेटय़ी औय प्रेसिडेंट, याभ औय कृर्षण के िाभने सिय झक
ु ानेवारे िेठ औय
िाहूकाय, कौभ कासरजों के ऊॉचे हौंिरोंवारे प्रोपेिय औय अखफायों भें कौभ
तयण्क्कमों की खफयें ऩढकय खर्
ु होने वारे दफ्तयों के कभफचाय़ी हजायों की

तादाद भें भौजूद थे। आॉखों ऩय िन
ु हय़ी ऐनकें रगामे, भोटे -भोटे वकीरों क
एक ऩयू ़ी पौज जभा थ । भगय िॊन्द्माि के उि गभफ बाषण िे एक ददर ब
न वऩघरा क्मोंकक

वह ऩत्थय के ददर थे ण्जिभें ददफ औय घर
ु ावट न थ ,
7

ण्जिभें िददच्छा थ भगय कामफ-र्ण्क्त न थ , ण्जिभें फच्चों की ि इच्छा थ
भदो का–िा इयादा न था।

िाय़ी भजसरि ऩय िन्द्नाटा छामा हुआ था। हय आदभ सिय झक
ु ामे
कपक्र भें डूफा हुआ नजय आता था। र्सभिंदग ककि को िय उठाने न दे त थ
औय आॉखें झेंऩ भें भाये जभ न भें गड़ हुई थ । मह वह़ी िय हैं जो कौभ
चचों ऩय उछर ऩड़ते थे, मह वह़ी आॉखें हैं जो ककि वक्त यार्षऱीम गौयव की

राऱी िे बय जात थ । भगय कथन औय कयन भें आदद औय अन्द्त का

अन्द्तय है। एक व्मण्क्त को ब खड़े होने का िाहि न हुआ। कैंच की तयह
चरनेवाऱी जफान ब ऐिे भहान ् उत्तयदानमत्व के बम िे फन्द्द हो गम ॊ।

ठा

5

कुय दर्फनसिॊह अऩन जग ऩय फैठे हुए इि दृश्म को फहुत गौय औय
ददरचस्ऩ िे दे ख यहे थे। वह अऩने भासभफक ववश्वािो भें चाहे कट्टय

हो मा न हों, रेककन िाॊस्कृनतक भाभरों भें वे कब अगव
ु ाई कयने के दोष

नह़ीॊ हुए थे। इि ऩेच दा औय डयावने यास्ते भें उन्द्हें अऩन फवु ि औय वववेक
ऩय बयोिा नह़ीॊ होता था। मह ॊ तकफ औय मण्ु क्त को ब उनिे हाय भानन

ऩड़त थ । इि भैदान भें वह अऩने घय की ण्स्त्रमों की इच्छा ऩयू ़ी कयने ह़ी
अऩना कत्तफव्म िभझते थे औय चाहे उन्द्हें खुद ककि भाभरे भें कुछ एतयाज

ब हो रेककन मह औयतों का भाभरा था औय इिभें वे हस्तक्षेऩ नह़ीॊ कय
िकते थे क्मोंकक इििे ऩरयवाय की व्मवस्था भें हरचर औय गड़फड़ ऩैदा हो

जाने की जफयदस्त आर्ॊका यहत थ । अगय ककि वक्त उनके कुछ जोर् रे
नौजवान दोस्त इि कभजोय़ी ऩय उन्द्हें आड़े हाथों रेते तो वे फड़ फवु िभत्ता

िे कहा कयते थे—बाई, मह औयतों के भाभरे हैं, उनका जैिा ददर चाहता
है , कयत हैं, भैं फोरनेवारा कौन हूॉ। गयज मह ॉँ उनकी पौज गभफ-सभजाज
उनका िाथ छोड़ दे त थ । मह उनके सरए नतसरस्भ की घाट़ी थ जह ॉँ होर्हवाि त्रफगड़ जाते थे औय अन्द्धे अनक
ु यण का ऩैय फॉध हुई गदफ न ऩय िवाय
हो जाता था।

रेककन मह ररकाय िन
ु कय वे अऩने को काफू भें न यख िके। मह़ी

वह भौका था जफ उनकी दहम्भतें आिभान ऩय जा ऩहुॉचत थ ॊ। ण्जि फ ड़े
को कोई न उठामे उिे उठाना उनका काभ था। वजफनाओॊ िे उनको आण्त्भक

प्रेभ था। ऐिे भौके ऩय वे नत जे औय भिरहत िे फगावत कय जाते थे औय
8

उनके इि हौिरे भें मर् के रोब को उतना दखर नह़ीॊ था ण्जतना उनके

नैिथगफक स्वाबाव का। वनाफ मह अिम्बव था कक एक ऐिे जरिे भें जह ॉँ
ज्ञान औय िभ्मता की धभ
ू -धाभ थ , जह ॉँ िोने की ऐनकों िे योर्न औय

तयह-तयह के ऩरयधानों िे द़ीप्त थचन्द्तन की ककयणें ननकर यह़ी थ ॊ, जह ॉँ
कऩड़े-रत्ते की नपाित िे योफ औय भोटाऩे िे प्रनतर्षठा की झरक आत थ ,

वह ॉँ एक दे हात ककिान को जफान खोरने का हौिरा होता। ठाकुय ने इि
दृश्म को गौय औय ददरचस्ऩ

िे दे खा। उिके ऩहरू भें गद
ु गुद़ी-ि

हुई।
ण्जन्द्दाददऱी का जोर् यगों भें दौड़ा। वह अऩन जगह िे उठा औय भदाफना
रहजे भें ररकायकय फोरा-भैं मह प्रनतज्ञा कयता हूॉ औय भयते दभ तक उि
ऩय कामभ यहूॉगा।

तना िन
ु ना था कक दो हजाय आॉखें अचम्बे िे उिकी तयप ताकने रग ॊ।

िब
ु ानअल्राह, क्मा हुसरमा थ —गाढे की ढ़ीऱी सभजफई, घट
ु नों तक चढ़ी
हुई धोत , िय ऩय एक बाय़ी-िा उरझा हुआ िापा, कन्द्धे ऩय चन
ु ौट़ी औय
तम्फाकू का वजन फटुआ, भगय चेहये िे गम्ब यता औय दृढता स्ऩर्षट थ ।

गवफ आॉखों के तॊग घेये िे फाहय ननकरा ऩड़ता था। उिके ददर भें अफ इि
र्ानदाय भजभे की इज्जत फाकी न यह़ी थ । वह ऩयु ाने वक्तों का आदभ था
जो अगय ऩत्थय को ऩज
ू ता था तो उि ऩत्थय िे डयता ब

था, ण्जिके

सरए एकादर् का व्रत केवर स्वास््म-यक्षा की एक मण्ु क्त औय गॊगा केवर

स्वास््मप्रद ऩान की एक धाया न थ । उिके ववश्वािों भें जागनृ त न हो
रेककन दवु वधा नह़ीॊ थ । मान कक उिकी कथन औय कयन भें अन्द्तय न था
औय न उिकी फनु नमाद कुछ अनक
ु यण औय दे खादे ख

ऩय थ

भगय

अथधकाॊर्त: बम ऩय, जो ज्ञान के आरोक के फाद वनृ तमों के िॊस्काय की
िफिे फड़ र्ण्क्त है। गेरुए फाने का आदय औय बण्क्त कयना इिके धभफ

औय ववश्वाि का एक अॊग था। िॊन्द्माि भें उिकी आत्भा को अऩना अनच
ु य

फनाने की एक िज व र्ण्क्त नछऩ हुई थ औय उि ताकत ने अऩना अिय
ददखामा। रेककन भजभे की इि है यत ने फहुत जल्द भजाक की ियू त
अण्ततमाय की। भतरफबय़ी ननगाहें आऩि भें कहने रग —
ॊ आखखय गॊवाय ह़ी
तो ठहया!

दे हात है, ऐिे बाषण कब काहे को िन
ु े होंगे, फि उफर ऩड़ा।

उथरे गड्ढे भें इतना ऩान ब न िभा िका! कौन नह़ीॊ जानता कक ऐिे
9

बाषणों का उद्देश्म भनोयॊ जन होता है ! दि आदभ आमे, इकट्ठे फैठ, कुछ
िन
ु ा, कुछ गऩ-र्ऩ भाय़ी औय अऩने-अऩने घय रौटे , न मह कक कौर-कयाय
कयने फैठे, अभर कयने के सरए किभें खामे!

भगय ननयार् िॊन्द्माि िो यहा था—अपिोि, ण्जि भल्
ु क की योर्न

भें इतना अॊधेया है, वह ॉँ कब योर्न का उदम होना भण्ु श्कर नजय आता है ।
इि योर्न ऩय, इि अॊधेय़ी, भद
ु ाफ औय फेजान योर्न ऩय भैं जहारत को,

अज्ञान को ज्मादा ऊॉच जगह दे ता हूॉ। अज्ञान भें िपाई है औय दहम्भत है,
उिके ददर औय जफान भें ऩदाफ नह़ीॊ होता, न कथन औय कयन भें ववयोध।
क्मा मह अपिोि की फात नह़ीॊ है कक ज्ञान औय अज्ञान के आगे सिय

झक
ु ामे? इि िाये भजभें भें सिपफ एक आदभ है, ण्जिके ऩहरू भें भदों का

ददर है औय गो उिे फहुत िजग होने का दावा नह़ीॊ रेककन भैं उिके अज्ञान
ऩय ऐि हजायों जागनृ तमों को कुफाफन कय िकता हूॉ। तफ वह प्रेटपाभफ िे
न चे उतये औय दर्फनसिॊह को गरे िे रगाकय कहा—ईश्वय तुम्हें प्रनतज्ञा ऩय
कामभ यखे।

--जभाना, अगस्त-सितम्फय १९१३

10

नेकी

िा

वन का भह़ीना था। ये वत यान ने ऩाॊव भें भेहॊद़ी यचाम , भाॊग-चोट़ी
िॊवाय़ी औय तफ अऩन फढ
ू ़ी िाि ने जाकय फोऱी—अम्भाॊ ज , आज

ब भेरा दे खने जाऊॉग ।

ये वत ऩण्डडत थचन्द्ताभखण की ऩत्न थ । ऩण्डडत ज ने ियस्वत की

ऩज
ू ा भें ज्मादा राब न दे खकय रक्ष्भ दे व की ऩज
ू ा कयन र्र
ु की थ ।

रेन-दे न का काय-फाय कयते थे भगय औय भहाजनों के ववऩय़ीत खाि-खाि
हारतों के सिवा ऩच्च ि पीिद़ी िे ज्मादा िद
ू रेना उथचत न िभझते थे।

ये वत की िाि फच्चे को गोद भें सरमे खटोरे ऩय फैठी थ । फहू की
फात िन
ु कय फोऱी—ब ग जाओग तो फच्चे को जक
ु ाभ हो जामगा।
ये वत —नह़ीॊ अम्भाॊ, कुछ दे य न रगेग , अब चऱी आऊॉग ।

ये वत के दो फच्चे थे—एक रड़का, दि
ू य़ी रड़की। रड़की अब गोद भें

थ औय रड़का ह़ीयाभन िातवें िार भें था। ये वत ने उिे अच्छे -अच्छे कऩड़े
ऩहनामे। नजय रगने िे फचाने के सरए भाथे औय गारों ऩय काजर के ट़ीके
रगा ददमे, गडु ड़म ॉँ ऩ टने के सरए एक अच्छी यॊ ग न छड़ दे द़ी औय अऩन
िहे सरमाॊ के िाथ भेरा दे खने चऱी।

कीयत िागय के ककनाये औयतों का फड़ा जभघट था। न रगॊू घटाएॊ

छाम हुई थ ॊ। औयतें िोरह सिॊगाय ककए िागय के खुरे हुए हये -बये िन्द्
ु दय
भैदान भें िावन की रयभखझभ वषाफ की फहाय रट
ू यह़ी थ ॊ। र्ाखों भें झर
ू े ऩड़े
थे। कोई झर
ू ा झर
ू त कोई भल्हाय गात , कोई िागय के ककनाये फैठी रहयों

िे खेरत । ठॊ ड -ठॊ ड खुर्गवाय ऩान की हरकी-हरकी पुहाय ऩहाडड़मों की

ननखय़ी हुई हरयमावर, रहयों के ददरकर् झकोरे भौिभ को ऐिा फना यहे थे
कक उिभें िॊमभ दटक न ऩाता था।
आज गुडड़मों की ववदाई है । गडु ड़माॊ अऩन िियु ार जामेंग । कॊु आय़ी
रड़ककम ॉँ हाथ-ऩ वॉँ भें भें हद़ी यचामे गुडड़मों को गहने-कऩड़े िे िजामे उन्द्हें
ववदा कयने आम हैं। उन्द्हें ऩान भें फहात हैं औय छकछक-कय िावन के
ग त गात हैं। भगय िख
ु -चैन के आॊचर िे ननकरते ह़ी इन राड़-प्माय भें

ऩऱी हुई गुडड़मों ऩय चायों तयप िे छडड़मों औय रकडड़मों की फौछाय होने
रगत है ।
11

ये वत मह िैय दे ख यह़ी थ औय ह़ीयाभन िागय की ि दढमों ऩय औय

रड़ककमों के िाथ गडु ड़म ॉँ ऩ टने भें रगा हुआ था। ि दढमों ऩय काई रग हुई
थ ॊ अचानक उिका ऩाॊव कपिरा तो ऩान भें जा ऩड़ा। ये वत च ख भायकय
दौड़ औय िय ऩ टने रग । दभ के दभ भें वह ॉँ भदो औय औयतों का ठट रग
गमा भगय मह ककि की इन्द्िाननमत तकाजा न कयत थ कक ऩान भें

जाकय भभ
ु ककन हो तो फच्चे की जान फचामे। िॊवाये हुए फार न त्रफखय
जामेंगे! धर
ु ़ी हुई धोत न ब ॊग जाएग ! ककतने ह़ी भदो के ददरों भें मह
भदाफना खमार आ यहे थे। दि सभनट गज
ु ये गमें भगय कोई आदभ दहम्भत
कयता नजय न आमा। गय़ीफ ये वत ऩछाड़े खा यह़ी थ ॊ अचानक उधय िे एक

आदभ अऩने घोड़े ऩय िवाय चरा जाता था। मह ब ड़ दे खकय उतय ऩड़ा

औय एक तभार्ाई िे ऩछ
ू ा—मह कैि ब ड़ है ? तभार्ाई ने जवाफ ददमा—
एक रड़का डूफ गमा है ।
भि
ु ाकपय –कहाॊ?

तभार्ाई—जहाॊ वह औयत खड़ यो यह़ी है ।

भि
ु ाकपय ने पौयन अऩन गाढे की सभजफई उताय़ी औय धोत किकय

ऩान भें कूद ऩड़ा। चायो तयप िन्द्नाटा छा गमा। रोग हैयान थे कक मह
आदभ कौन हैं। उिने ऩहरा गोता रगामा, रड़के की टोऩ सभऱी। दि
ू या

गोता रगामा तो उिकी छड़ हाथ भें रग औय त िये गोते के फाद जफ

ऊऩय आमा तो रड़का उिकी गोद भें था। तभार्ाइमों ने जोय िे वाह-वाह का
नाया फर
ु न्द्द ककमा। भाॊ दौड़कय फच्चे िे सरऩट गम । इि फ च ऩण्डडत
थचन्द्ताभखण के औय कई सभत्र आ ऩहुॉचे औय रड़के को होर् भें राने की
कपक्र कयने रगे। आध घडटे भें रड़के ने आॉखें खोर द़ीॊ। रोगों की जान भें
जान आई। डाक्टय िाहफ ने कहा—अगय रड़का दो सभनट ऩान भें यहता तो
फचना अिम्बव था। भगय जफ रोग अऩने गुभनाभ बराई कयने वारे को

ढूॊढने रगे तो उिका कह़ीॊ ऩता न था। चायों तयप आदभ दौड़ामे, िाया भेरा
छान भाया, भगय वह नजय न आमा।

2

12

ि िार गज
ु य गए। ऩण्डडत थचन्द्ताभखण का कायोफाय योज फ योज

फढता गमा। इि फ च भें उिकी भाॊ ने िातों मात्राएॊ कीॊ औय भय़ीॊ तो

ठाकुयद्वाया तैमाय हुआ। ये वत फहू िे िाि फन , रेन-दे न, फह़ी-खाता
ह़ीयाभखण के िाथ भें आमा ह़ीयाभखण अफ एक हर्षट-ऩर्षु ट रम्फा-तगड़ा
नौजवान था। फहुत अच्छे स्वबाव का, नेक। कब -कब फाऩ िे नछऩाकय
गय़ीफ अिासभमों को मों ह़ी कजफ दे ददमा कयता। थचन्द्ताभखण ने कई फाय इि

अऩयाध के सरए फेटे को ऑ ॊखें ददखाई थ ॊ औय अरग कय दे ने की धभकी द़ी
थ । ह़ीयाभखण ने एक फाय एक िॊस्कृत ऩाठर्ारा के सरए ऩचाि रुऩमा चन्द्दा

ददमा। ऩण्डडत ज उि ऩय ऐिे क्रुि हुए कक दो ददन तक खाना नह़ीॊ खामा ।
ऐिे अवप्रम प्रिॊग आमे ददन होते यहते थे, इन्द्ह़ीॊ कायणों िे ह़ीयाभखण की

तफ मत फाऩ िे कुछ खखॊच यहत थ ।ॊ भगय उिकी मा िाय़ी र्यायतें हभेर्ा
ये वत की िाण्जर् िे हुआ कयत थ ॊ। जफ कस्फे की गय़ीफ ववधवामें मा
जभ ॊदाय के ितामे हुए अिासभमों की औयतें ये वत के ऩाि आकय ह़ीयाभखण
को आॊचर पैरा—पैराकय दआ
ु एॊ दे ने रगत तो उिे ऐिा भारभ
ू होता कक

भझ
ु िे ज्मादा बाग्मवान औय भेये फेटे िे ज्मादा नेक आदभ दनु नमा भें कोई
न होगा। तफ उिे फयफि वह ददन माद आ जाता तफ ह़ीयाभखण कीयत िागय
भें डूफ गमा था औय उि आदभ की तस्व य उिकी

आॉखों के िाभने खड़

हो जात ण्जिने उिके रार को डूफने िे फचामा था। उिके ददर की गहयाई
िे दआ
ननकरत औय ऐिा ज चाहता कक उिे दे ख ऩात तो उिके ऩाॊव ऩय

थगय ऩड़त । उिे अफ ऩक्का ववश्वाि हो गमा था कक वह भनर्षु म न था
फण्ल्क कोई दे वता था। वह अफ उि खटोरे ऩय फैठी हुई, ण्जि ऩय उिकी
िाि फैठत थ , अऩने दोनों ऩोतों को खखरामा कयत थ ।
आज ह़ीयाभखण की ित्ताईिव ॊ िारथगयह थ । ये वत के सरए मह ददन

िार के ददनों भें िफिे अथधक र्ब
ु था। आज उिका दमा का हाथ खूफ
उदायता ददखराता था औय मह़ी एक अनथु चत खचफ था ण्जिभें ऩण्डडत

थचन्द्ताभखण ब र्य़ीक हो जाते थे। आज के ददन वह फहुत खर्
ु होत औय
फहुत योत औय आज अऩने गभ
ु नाभ बराई कयनेवारे के सरए उिके ददर िे
जो दआ
ु एॉ ननकरत ॊ वह ददर औय ददभाग की अच्छी िे अच्छी बावनाओॊ भें

यॊ ग होत थ ॊ। उि ददन की फदौरत तो आज भझ
ु े मह ददन औय मह िख

दे खना नि फ हुआ है!


13

क ददन ह़ीयाभखण ने आकय ये वत िे कहा—अम्भाॊ, श्र ऩयु न राभ ऩय
चढा हुआ है , कहो तो भैं ब दाभ रगाऊॊ।
ये वत —िोरहो आना है ?

ह़ीयाभखण—िोरहो आना। अच्छा गाॊव है। न फड़ा न छोटा। मह ॉँ िे

दि कोि है । फ ि हजाय तक फोऱी चढ चक
ु ी है। िौ-दौ िौ भें खत्भ हो
जामग ।

ये वत -अऩने दादा िे तो ऩछ
ू ो

है ।

ह़ीयाभखण—उनके िाथ दो घॊटे तक भाथाऩच्च कयने की ककिे पुयित
ह़ीयाभखण अफ घय का भासरक हो गमा था औय थचन्द्ताभखण की एक न

चरने ऩात । वह गय़ीफ अफ ऐनक रगामे एक गद्दे ऩय फैठे अऩना वक्त
खाॊिने भें खचफ कयते थे।

दि
ू ये ददन ह़ीयाभखण के नाभ ऩय श्र ऩयु खत्भ हो गमा। भहाजन िे

जभ ॊदाय हुए अऩने भन
ु भ औय दो चऩयासिमों को रेकय गाॊव की िैय कयने
चरे। श्र ऩयु वारों को खफय हुई। नमें जभ ॊदाय का ऩहरा आगभन था। घय-घय
नजयाने दे ने की तैमारयम ॉँ होने रग ॊ। ऩाॊचतें ददन र्ाभ के वक्त ह़ीयाभखण
गाॊव भें दाखखर हुए। दह़ी औय चावर का नतरक रगामा गमा औय त न िौ
अिाभ ऩहय यात तक हाथ फाॊधे हुए उनकी िेवा भें खड़े यहे । िवेये
भत
ककमा। जो अिाभ
ु ताये आभ ने अिासभमों का ऩरयचम कयाना र्र

जभ ॊदाय के िाभने आता वह अऩन त्रफिात के भत
ु ात्रफक एक मा दो रुऩमे

उनके ऩाॊव ऩय यख दे ता । दोऩहय होते-होते ऩाॊच िौ रुऩमों का ढे य रगा हुआ
था।
ह़ीयाभखण को ऩहऱी फाय जभ ॊदाय़ी का भजा सभरा, ऩहऱी फाय धन औय

फर का नर्ा भहिि
ू हुआ। िफ नर्ों िे ज्मादा तेज, ज्मादा घातक धन का
नर्ा है । जफ अिासभमों की पेहरयस्त खतभ हो गम तो भत
ु ताय िे फोरे—
औय कोई अिाभ तो फाकी नह़ीॊ है ?

भत
ु ताय—हाॊ भहायाज, अब एक अिाभ औय है , तखत सिॊह।
ह़ीयाभखण—वह क्मों नह़ीॊ आमा ?
भत
ु ताय—जया भस्त है ।

ह़ीयाभखण—भैं उिकी भस्त उताय दॉ ग
ू ा। जया कोई उिे फर
ु ा रामे।
14

थोड़ दे य भें एक फढ
ू ा आदभ राठी टे कता हुआ आमा औय दडडवत ्
कयके जभ न ऩय फैठ गमा, न नजय न ननमाज। उिकी मह गस्
ु ताख दे खकय
ह़ीयाभखण को फख
ु ाय चढ आमा। कड़ककय फोरे—अब ककि जभ ॊदाय िे ऩारा
नह़ी ऩड़ा हैं। एक-एक की हे कड़ बर
ु ा दॉ ग
ू ा!

तखत सिॊह ने ह़ीयाभखण की तयप गौय िे दे खकय जवाफ ददमा—भेये

िाभने फ ि जभ ॊदाय आमे औय चरे गमे। भगय कब ककि ने इि तयह
घड़
ु की नह़ीॊ द़ी।

मह कहकय उिने राठी उठाई औय अऩने घय चरा आमा।

फढ
ू ़ी ठकुयाइन ने ऩछ
ू ा—दे खा जभ ॊदाय को कैिे आदभ है ?
तखत सिॊह—अच्छे आदभ हैं। भैं उन्द्हें ऩहचान गमा।
ठकुयाइन—क्मा तभ
ु िे ऩहरे की भर
ु ाकात है ।

तखत सिॊह—भेय़ी उनकी फ ि फयि की जान-ऩदहचान है , गडु ड़मों के

भेरेवऱी फात माद है न?

उि ददन िे तखत सिॊह कपय ह़ीयाभखण के ऩाि न आमा।

छ:

भह़ीने के फाद ये वत को ब श्र ऩयु दे खने का र्ौक हुआ। वह औय
उिकी फहू औय फच्चे िफ श्र ऩयु आमे। ग वॉँ की िफ औयतें उििे

सभरने आम ॊ। उनभें फढ
ू ़ी ठकुयाइन ब थ । उिकी फातच त, िऱीका औय
तभ ज दे खकय ये वत दॊ ग यह गम । जफ वह चरने रग तो ये वत ने कहा—
ठकुयाइन, कब -कब आमा कयना, तभ
ु िे सभरकय तत्रफमत फहुत खर्
ु हुई।
इि तयह दोनों औयतों भें ध ये -ध ये भेर हो गमा। महाॉ तो मह

कैकपमत थ औय ह़ीयाभखण अऩने भत
ु ताये आभ के फहकाते भें आकय तखत
सिॊह को फेदखर कयने की तयकीफें िोच यहा था।

जेठ की ऩयू नभाि आम । ह़ीयाभखण की िारथगयह की तैमारयम ॉँ होने

रग ॊ। ये वत चरन भें भैदा छान यह़ी थ कक फढ
ू ़ी ठकुयाइन आम । ये वत ने
भस्
ु कयाकय कहा—ठकुयाइन, हभाये मह ॉँ कर तुम्हाया न्द्मोता है ।
ॉँ है ?
ठकुयाइन-तुम्हाया न्द्मोता सिय-आॉखों ऩय। कौन-ि फयिग ठ
ये वत उनत िव ।ॊ
हो।

ठकुयाइन—नयामन कये अब ऐिे-ऐिे िौ ददन तम्
ु हें औय दे खने नि फ
15

ये वत —ठकुयाइन, तुम्हाय़ी जफान भफ
ु ायक हो। फड़े-फड़े जन्द्तय-भन्द्तय

ककमे हैं तफ तभ
िे मह ददन दे खना नि फ हुआ है। मह तो
ु रोगों की दआ

िातवें ह़ी िार भें थे कक इिकी जान के रारे ऩड़ गमे। गडु ड़मों का भेरा
दे खने गम थ । मह ऩान भें थगय ऩड़े। फाये , एक भहात्भा ने इिकी जान

फचाम । इनकी जान उन्द्ह़ीॊ की द़ी हुई हैं फहुत तरार् कयवामा। उनका ऩता
न चरा। हय फयिग ठॉँ ऩय उनके नाभ िे िौ रुऩमे ननकार यखत हूॉ। दो
हजाय िे कुछ ऊऩय हो गमे हैं। फच्चे की न मत है कक उनके नाभ

िे श्र ऩयु

भें एक भॊददय फनवा दें । िच भानो ठकुयाइन, एक फाय उनके दर्फन हो जाते
तो ज वन िपर हो जाता, ज की हवि ननकार रेते।

ये वत जफ खाभोर् हुई तो ठकुयाइन की आॉखों िे आॉिू जाय़ी थे।
दि
ू ये ददन एक तयप ह़ीयाभखण की िारथगयह का उत्िव था औय दि
ू य़ी

तयप तखत सिॊह के खेत न राभ हो यहे थे।

ठकुयाइन फोऱी—भैं ये वत यान के ऩाि जाकय दहु ाई भचात हूॉ।
तखत सिॊह ने जवाफ ददमा—भेये ज ते-ज नह़ीॊ।


िाढ का भह़ीना आमा। भेघयाज ने अऩन प्राणदाम उदायता ददखाम ।
श्र ऩयु के ककिान अऩने-अऩने खेत जोतने चरे। तखतसिॊह की रारिा

बय़ी आॉखें उनके िाथ-िाथ जात ॊ, मह ॉँ तक कक जभ न उन्द्हें अऩने दाभन भें
नछऩा रेत ।

तखत सिॊह के ऩाि एक गाम थ । वह अफ ददन के ददन उिे चयामा

कयता। उिकी ण्जन्द्दग का अफ मह़ी एक िहाया था। उिके उऩरे औय दध

फेचकय गज
ु य-फिय कयता। कब -कब पाके कयने ऩड़ जाते। मह िफ भि
ु फतें

उिने झेंऱीॊ भगय अऩन कॊगाऱी का योना योने केसरए एक ददन ब ह़ीयाभखण
के ऩाि न गमा। ह़ीयाभखण ने उिे न चा ददखाना चाहा था भगय खुद उिे ह़ी

न चा दे खना ऩड़ा, ज तने ऩय ब उिे हाय हुई, ऩयु ाने रोहे को अऩने न च हठ
की आॉच िे न झक
ु ा िका।
ककमा।

एक ददन ये वत ने कहा—फेटा, तुभने गय़ीफ को ितामा, अच्छा न
ह़ीयाभखण ने तेज होकय जवाफ ददमा—वह गय़ीफ नह़ीॊ है । उिका घभडड

भैं तोड़ दॉ ग
ू ा।

16

दौरत के नर्े भें भतवारा जभ ॊदाय वह च ज तोड़ने की कपक्र भें था

जो कह़ीॊ थ ह़ी नह़ीॊ। जैिे नािभझ फच्चा अऩन ऩयछाईं िे रड़ने रगता है ।

िा


र बय तखतसिॊह ने ज्मों-त्मों कयके काटा। कपय फयिात आम ।
उिका घय छामा न गमा था। कई ददन तक भि
ू राधय भें ह फयिा

तो भकान का एक दहस्िा थगय ऩड़ा। गाम वह ॉँ फॉध हुई थ , दफकय भय गम ॊ
तखतसिॊह को ब ितत चोट आम । उि ददन िे फख
ु ाय आना र्र
ु हुआ।
दवा –दार कौन कयता, योज का िहाया था वह ब टूटा। जासरभ फेददफ

भि
ु फत ने कुचर डारा। िाया भकान ऩान िे बया हुआ, घय भें अनाज का
एक दाना नह़ीॊ, अॊधेये भें ऩड़ा हुआ कयाह यहा था कक ये वत उिके घय गम ।
तखतसिॊह ने आॉखें खोऱीॊ औय ऩछ
ू ा—कौन है ?
ठकुयाइन—ये वत यान हैं।

तखतसिॊह—भेये धन्द्मबाग, भझ
ु ऩय फड़ दमा की ।

ये वत ने रण्ज्जत होकय कहा—ठकुयाइन, ईश्वय जानता है , भैं अऩने

फेटे िे है यान हूॉ। तम्
ु हें जो तकऱीप हो भझ
ु िे कहो। तुम्हाये ऊऩय ऐि
आपत ऩड़ गम औय हभिे खफय तक न की?
मह कहकय ये वत

िाभने यख द़ी।

ने रुऩमों की एक छोट़ी-ि

ऩोटऱी ठकुयाइन के

रुऩमों की झनकाय िन
ु कय तखतसिॊह उठ फैठा औय फोरा—यान , हभ

इिके बख
ू े नह़ीॊ है । भयते दभ गन
ु ाहगाय न कयो

दि
ू ये ददन ह़ीयाभखण ब अऩने भि
ु ादहफों को सरमे उधय िे जा ननकरा।

थगया हुआ भकान दे खकय भस्
ु कयामा। उिके ददर ने कहा, आखखय भैंने उिका
घभडड तोड़ ददमा। भकान के अन्द्दय जाकय फोरा—ठाकुय, अफ क्मा हार है ?
ठाकुय ने ध ये िे कहा—िफ ईश्वय की दमा है , आऩ कैिे बर
ू ऩड़े?
ह़ीयाभखण को दि
ू य़ी फाय हाय खान

ऩड़ । उिकी मह आयजू कक

तखतसिॊह भेये ऩ वॉँ को आॉखों िे चभ
ू े, अफ ब ऩयू ़ी न हुई। उि यात को वह
गय़ीफ, आजाद, ईभानदाय औय फेगयज ठाकुय इि दनु नमा िे ववदा हो गमा।

17

फू

ढ़ी ठकुयाइन अफ दनु नमा भें अकेऱी थ । कोई उिके गभ का र्य़ीक औय

उिके भयने ऩय आॉिू फहानेवारा न था। कॊगाऱी ने गभ की आॉच औय

तेज कय द़ी थ ॊ जरयत की च जें भौत के घाव को चाहे न बय िकें भगय
भयहभ का काभ जरय कयत है।

योट़ी की थचन्द्ता फयु ़ी फरा है । ठकुयाइन अफ खेत औय चयागाह िे

गोफय चन
ु रात औय उऩरे फनाकय फेचत । उिे राठी टे कते हुए खेतों को
ॉँ
जाते औय गोफय का टोकया सिय ऩय यखकय फोझ भें ह पते
हुए आते दे खना
फहुत ह़ी ददफ नाक था। महाॉ तक कक ह़ीयाभखण को ब उि ऩय तयि आ गमा।
एक ददन उन्द्होंने आटा, दार, चावर, थासरमों भें यखकय उिके ऩाि बेजा।

ये वत खुद रेकय गम । भगय फढ
ू ़ी ठकुयाइन आॉखों भें आॉिू बयकय फोरा—
ये वत , जफ तक आॉखों िे िझ
ू ता है औय हाथ-ऩ वॉँ चरते हैं, भझ
ु े औय
भयनेवारे को गन
ु ाहगाय न कयो।

उि ददन िे ह़ीयाभखण को कपय उिके िाथ अभऱी हभददी ददखराने

का िाहि न हुआ।
एक ददन ये वत ने ठकुयाइन िे उऩरे भोर सरमे। ग वॉँ भे ऩैिे के त ि
उऩरे त्रफकते थे। उिने चाहा कक इििे फ ि ह़ी उऩरे रॉ ।ू उि ददन िे
ठकुयाइन ने उिके मह ॉँ उऩरे राना फन्द्द कय ददमा।
ऐि दे ववम ॉँ दनु नमा भें ककतन है ! क्मा वह इतना न जानत थ कक

एक गप्ु त यहस्म जफान ऩय राकय भैं अऩन इन तकऱीपों का खात्भा कय

िकत हूॉ! भगय कपय वह एहिान का फदरा न हो जाएगा! भिर भर्हूय है
नेकी कय औय दरयमा भें डार। र्ामद उिके ददर भें कब मह तमार ह़ी नह़ीॊ
आमा कक भैंने ये वत ऩय कोई एहिान ककमा।

मह वजादाय, आन ऩय भयनेवाऱी औयत ऩनत के भयने के फाद त न

िार तक ण्जन्द्दा यह़ी। मह जभाना उिने ण्जि तकऱीप िे काटा उिे माद

कयके योंगटे खड़े हो जाते हैं। कई-कई ददन ननयाहाय फ त जाते। कब गोफय

न सभरता, कब कोई उऩरे चयु ा रे जाता। ईश्वय की भजी! ककि की घय
बया हुआ है , खानेवार नह़ीॊ। कोई मो यो-योकय ण्जन्द्दग काटता है ।
फदु ढमा ने मह िफ दख
ु झेरा भगय ककि के िाभने हाथ नह़ीॊ पैरामा।

18

ह़ी

याभखण की त िव ॊ िारथगयह आम । ढोर की िह
ु ान आवाज िन
ु ाम

दे ने रग । एक तयप घ की ऩडू ड़माॊ ऩक यह़ी थ ॊ, दि
ू य़ी तयप तेर की।

घ की भोटे ब्राह्भणों के सरए, तेर की गय़ीफ-बख
ू े-न चों के सरए।

अचानक एक औयत ने ये वत िे आकय कहा—ठकुयाइन जाने कैि हुई
जात हैं। तुम्हें फर
ु ा यह़ी हैं।

ये वत ने ददर भें कहा—आज तो खैरयमत िे काटना, कह़ीॊ फदु ढमा भय

न यह़ी हो।

मह िोचकय वह फदु ढमा के ऩाि न गम । ह़ीयाभखण ने जफ दे खा,

अम्भ ॉँ नह़ीॊ जाना चाहत तो खुद चरा। ठकुयाइन ऩय उिे कुछ ददनों िे दमा
आने रग थ । भगय ये वत भकान के दयवाजे ते उिे भना कयने आम । मा
यहभददर, नेकसभजाज, र्य़ीप ये वत थ ।

ह़ीयाभखण ठकुयाइन के भकान ऩय ऩहुॉचा तो वह ॉँ त्रफल्कुर िन्द्नाटा
छामा हुआ था। फढ
ू ़ी औयत का चेहया ऩ रा था औय जान ननकरने की हारत

उि ऩय छाई हुई थ । ह़ीयाभखण ने जो िे कहा—ठकुयाइन, भैं हूॉ ह़ीयाभखण।
ठकुयाइन ने आॉखें खोऱी औय इर्ाये िे उिे अऩना सिय नजद़ीक राने

को कहा। कपय रुक-रुककय फोऱी—भेये सियहाने वऩटाय़ी भें ठाकुय की हड्डडम ॉँ
यख हुई हैं, भेये िह
ु ाग का िेंदयु ब वह़ीॊ है । मह दोनों प्रमागयाज बेज दे ना।
मह कहकय उिने आॉखें फन्द्द कय ऱी। ह़ीयाभखण ने वऩटाय़ी खोऱी तो
दोनों च जें दहपाजत के िाथ यक्ख हुई थ ॊ। एक ऩोटऱी भें दि रुऩमे ब
यक्खे हुए सभरे। मह र्ामद जानेवारे का िपयखचफ था!
यात को ठकुयाइन के कर्षटों का हभेर्ा के सरए अन्द्त हो गमा।

उि यात को ये वत ने िऩना दे खा—िावन का भेरा है , घटाएॉ छाई हुई
हैं, भैं कीयत िागय के ककनाये खड़ हूॉ। इतने भें ह़ीयाभखण ऩान भें कपिर
ऩड़ा। भै छात ऩ ट-ऩ टकय योने रग । अचानक एक फढ
ू ा आदभ ऩान भें

कूदा औय ह़ीयाभखण को ननकार रामा। ये वत उिके ऩ वॉँ ऩय थगय ऩड़ औय
फोऱी—आऩ कौन है ?

उिने जवाफ ददमा—भैं श्र ऩयु भें यहता हूॉ, भेया नाभ तखतसिॊह है ।
श्र ऩयु अफ ब ह़ीयाभखण के कब्जे भें है, भगय अफ यौनक दोफारा हो

गम है । वह ॉँ जाओ तो दयू िे सर्वारे का िन
ु हया करर् ददखाई दे ने रगता
है ; ण्जि जगह तखत सिॊह का भकान था, वह ॉँ मह सर्वारा फना हुआ है ।
उिके िाभने एक ऩक्का कुआॉ औय ऩक्की धभफर्ारा है । भि
ु ाकपय मह ॉँ ठहयते
19

हैं औय तखत सिॊह का गुन गाते हैं। मह सर्वारा औय धभफर्ारा दोनों उिके
नाभ िे भर्हूय हैं।

उदफ ू ‘प्रेभऩच ि ’ िे

20

बााँका जम ंदार

ठा

कुय प्रद्मम्
ु न सिॊह एक प्रनतण्र्षठत वकीर थे औय अऩने हौिरे औय

दहम्भत के सरए िाये र्हय भें भश्हूय। उनके दोस्त अकिय कहा
कयते कक अदारत की इजराि भें उनके भदाफना कभार ज्मादा िाप तय़ीके
ऩय जादहय हुआ कयते हैं। इि की फयकत थ कक फाफजूद इिके कक उन्द्हें
र्ामद ह़ी कब ककि भाभरे भें िख
फ ई हासिर होत थ , उनके भव
ु र
ु ण्क्करों

की बण्क्त-बावना भें जया बय ब पकफ नह़ीॊ आता था। इन्द्िाप की कुिी ऩय
फैठनेवारे फड़े रोगों की ननडय आजाद़ी ऩय ककि प्रकाय का िन्द्दे ह कयना

ऩाऩ ह़ी क्मों न हो, भगय र्हय के जानकाय रोग ऐराननमा कहते थे कक

ठाकुय िाहफ जफ ककि भाभरे भें ण्जद ऩकड़ रेते हैं तो उनका फदरा हुआ
तेवय औय तभतभामा हुआ चेहया इन्द्िाप को ब अऩने वर् भें कय रेता है ।
एक िे ज्मादा भौकों ऩय उनके ज वट औय ण्जगय ने वे चभत्काय कय ददखामे

थे जह ॉँ कक इन्द्िाप औय कानन
ू के जवाफ दे ददमा। इिके िाथ ह़ी ठाकुय

िाहफ भदाफना गुणों के िच्चे जौहय़ी थे। अगय भव
ु ण्क्कर को कुश्त भें कुछ
ऩैठ हो तो मह जरय़ी नह़ीॊ था कक वह उनकी िेवाएॉ प्राप्त कयने के सरए

रुऩमा-ऩैिा दे । इि सरए उनके मह ॉँ र्हय के ऩहरवानों औय पेकैतों का हभेर्ा
जभघट यहता था औय मह़ी वह जफदफ स्त प्रबावर्ाऱी औय व्मावहारयक कानन

फाय़ीकी थ ण्जिकी काट कयने भें इन्द्िाप को ब आगा-ऩ छा िोचना ऩड़ता।
वे गवफ औय िच्चे गवफ की ददर िे कदय कयते थे। उनके फेतकल्रप
ु घय की

ड्मोदढम ॉँ फहुत ऊॉच थ वह ॉँ झक
ु ने की जरुयत न थ । इन्द्िान खूफ सिय
उठाकय जा िकता था। मह एक ववश्वस्त कहान है कक एक फाय उन्द्होंने
ककि भक
ु दभें को फावजूद फहुत ववनत औय आग्रह के हाथ भें रेने िे
इनकाय ककमा। भव
ु ण्क्कर कोई अक्खड़ दे हात था। उिने जफ आयज-ू सभन्द्नत
िे काभ ननकरते न दे खा तो दहम्भत िे काभ सरमा। वकीर िाहफ कुिी िे
न चे थगय ऩड़े औय त्रफपये हुए दे हात को ि ने िे रगा सरमा।

2
न औय धयत

के फ च आददकार िे एक आकषफण है। धयत

भें

िाधायण गरु
ु त्वाकषफण के अरावा एक खाि ताकत होत है, जो हभेर्ा
21

धन को अऩन तयप ख ॊचत है । िद
ू औय तभस्िक
ु औय व्माऩाय, मह दौरत
की फ च की भॊण्जरें हैं, जभ न उिकी आखखय़ी भॊण्जर है । ठाकुय प्रद्मम्
ु न

सिॊह की ननगाहें फहुत अिे िे एक फहुत उऩजाऊ भौजे ऩय रग हुई थ ॊ।
रेककन फैंक का एकाउडट कब हौिरे को कदभ नह़ीॊ फढाने दे ता था। मह ॉँ
तक कक एक दपा उि भौजे का जभ ॊदाय एक कत्र के भाभरे भें ऩकड़ा

गमा। उिने सिपफ यस्भों-रयवाज के भाकपक एक आिाभ को ददन बय धऩ

औय जेठ की जरत हुई धऩ
ू भें खड़ा यखा था रेककन अगय ियू ज की गभी
मा ण्जस्भ की कभजोय़ी मा प्माि की तेज उिकी जानरेवा फन जाम तो
इिभें जभ ॊदाय की क्मा खता थ । मह र्हय के वकीरों की ज्मादत थ कक
कोई उिकी दहभामत ऩय आभदा न हुआ मा भभ
ु ककन है जभ ॊदाय के हाथ की
तॊग को ब उिभें कुछ दखर हो। फहयहार, उिने चायों तयप िे ठोकयें

खाकय ठाकुय िाहफ की र्यण ऱी। भक
ु दभा ननहामत कभजोय था। ऩसु रि ने
अऩन ऩयू ़ी ताकत िे धावा ककमा था औय उिकी कुभक के सरए र्ािन औय

अथधकाय के ताजे िे ताजे रयिारे तैमाय थे। ठाकुय िाहफ अनब
ु व िॉऩये ों की
तयह ि ऩॉँ के त्रफर भें हाथ नह़ीॊ डारते थे रेककन इि भौके ऩय उन्द्हें िख

भिरहत के भक
ु ाफरे भें अऩन भयु ादों का ऩल्रा झक
ु ता हुआ नजय आमा।
जभ ॊदाय को इत्भ नान ददरामा औय वकारतनाभा दाखखर कय ददमा औय
कपय इि तयह ज -जान िे भक
ु दभे की ऩैयव की, कुछ इि तयह जान रड़ाम

कक भैदान िे ज त का डॊका फजाते हुए ननकरे। जनता की जफान इि ज त
का िेहया उनकी कानन
ू ऩैठ के िय नह़ीॊ, उनके भदाफना गण
ु ों के िय यखत
है क्मोंकक उन ददनों वकीर िाहफ नज यों औय दपाओॊ की दहम्भततोड़

ऩेच दथगमों भें उरझने के फजाम दॊ गर की उत्िाहविफक ददरचण्स्ऩमों भें
ज्मादा रगे यहते थे रेककन मह फात जया ब

मकीन कयने के कात्रफर नह़ीॊ

भारभ
ू होत । ज्मादा जानकान रोग कहते हैं कक अनाय के फभगोरों औय
िेफ औय अॊगयू की गोसरमों ने ऩसु रि के, इि ऩयु र्ोय हभरे को तोड़कय

त्रफखेय ददमा गयज कक भैदान हभाये ठाकुय िाहफ के हाथ यहा। जभ ॊदाय की

जान फच । भौत के भॉह
ु िे ननकर आमा उनके ऩैयों ऩय थगय ऩड़ा औय
फोरा—ठाकुय िाहफ, भैं इि कात्रफर तो नह़ीॊ कक आऩकी खखदभत कय िकॉू ।

ईश्वय ने आऩको फहुत कुछ ददमा है रेककन कृर्षण बगवान ् ने गय़ीफ िद
ु ाभा
के िख
ू े चावर खुर् िे कफर
ू ककए थे। भेये ऩाि फज
ु ुगों की मादगाय छोटा-

िा व यान भौजा है उिे आऩकी बें ट कयता हूॉ। आऩके रामक तो नह़ीॊ रेककन
22

भेय़ी खानतय इिे कफर
ू कीण्जए। भैं आऩका जि कब न बर
ू ॉग
ू ा। वकीर
िाहफ पड़क उठे । दो-चाय फाय ननस्ऩह
ृ फैयाथगमों की तयह इन्द्काय कयने के
ॉँ भयु ाद सभऱी।
फाद इि बें ट को कफर
ू कय सरमा। भॊह
ु -भ ग
3

ि भौजे के रोग फेहद ियदर् औय झगड़ारू थे, ण्जन्द्हें इि फात का गवफ
था कक कब कोई जभ ॊदाय उन्द्हें फि भें नह़ीॊ कय िका। रेककन जफ

उन्द्होंने अऩन फागडोय प्रद्मम्
ु न सिॊह के हाथों भें जाते दे ख तो चौकडड़म ॉँ
बर
गमे, एक फदरगाभ घोड़े की तयह िवाय को कनखखमों िे दे खा,

कनौनतम ॉँ खड़ कीॊ, कुछ दहनदहनामे औय तफ गदफ नें झक
ु ा द़ीॊ। िभझ गमे कक
मह ण्जगय का भजफत
ू आिन का ऩक्का र्हिवाय है।

अिाढ का भह़ीना था। ककिान गहने औय फतफन फेच-फेचकय फैरों की

ॉँ की फढ
तरार् भें दय-फ-दय कपयते थे। ग वों
ू ़ी फननमाइन नवेऱी दर
ु हन फन

हुई थ औय पाका कयने वारा कुम्हाय फयात का दल्
ू हा था भजदयू भौके के
फादर्ाह फने हुए थे। टऩकत हुई छतें उनकी कृऩादृण्र्षट की याह दे ख यह़ी थ ।
घाि िे ढके हुए खेत उनके भभताऩण
ू फ हाथों के भह
ु ताज। ण्जिे चाहते थे
फिाते थे, ण्जि चाहते थे उजाड़ते थे। आभ औय जाभन
ु के ऩेड़ों ऩय आठों

ऩहय ननर्ानेफाज भनचरे रड़कों का धावा यहता था। फढ
ू े गदफनों भें झोसरम ॉँ
रटकामे ऩहय यात िे टऩके की खोज भें घभ
ू ते नजय आते थे जो फढ
ु ाऩे के
फावजद
ू बोजन औय जाऩ िे ज्मादा ददरचस्ऩ औय भजेदाय काभ था। नारे
ऩयु र्ोय, नददम ॉँ अथाह, चायों तयप हरयमाऱी औय खर्
ु हाऱी। इन्द्ह़ीॊ ददनों

ठाकुय िाहफ भौत की तयह, ण्जिके आने की ऩहरे िे कोई िच
ू ना नह़ीॊ
होत , ग वॉँ भें आमे। एक िज हुई फयात थ , हाथ औय घोड़े, औय िाजिाभान, रठै तों का एक रयिारा-िा था। ग वॉँ ने मह तूभतड़ाक औय आनफान दे ख

तो यहे -िहे होर् उड़ गमे। घोड़े खेतों भें ऐॊड़ने रगे औय गॊड
ु े

गसरमों भें। र्ाभ के वक्त ठाकुय िाहफ ने अऩने अिासभमों को फर
ु ामा औय
फर
ु न्द्द आवाज भें फोरे—भैंने िन
ु ा है कक तुभ रोग ियकर् हो औय भेय़ी

ियकर् का हार तुभको भारभ
ू ह़ी है । अफ ईंट औय ऩत्थय का िाभना है।
फोरो क्मा भॊजयू है ?

ॉँ
एक फढ
हुए जवाफ ददमा—
ू े ककिान ने फेद के ऩेड़ की तयह क ऩते
ियकाय, आऩ हभाये याजा हैं। हभ आऩिे ऐॊठकय कह ॉँ जामेंगे।
23

ठाकुय िाहफ तेवय फदरकय फोरे—तो तुभ रोग िफ के िफ कर िफ
ु ह

तक त न िार का ऩेर्ग रगान दाखखर कय दो औय खफ
ू ध्मान दे कय िन

रो कक भैं हुक्भ को दहु याना नह़ीॊ जानता वनाफ भैं ग वॉँ भें हर चरवा दॉ ग
ू ा
औय घयों को खेत फना दॉ ग
ू ा।

िाये ग वॉँ भें कोहयाभ भच गमा। त न िार का ऩेर्ग रगान औय

इतन जल्द़ी जुटाना अिम्बव था। यात इि है ि-फैि भें कट़ी। अब तक
आयज-ू सभन्द्नत के त्रफजऱी जैिे अिय की उम्भ द फाकी थ । िफ
ु ह फड़
इन्द्तजाय के फाद आई तो प्ररम फनकय आई। एक तयप तो जोय जफदफ स्त

औय अन्द्माम-अत्माचाय का फाजाय गभफ था, दि
ू य़ी तयप योत हुई आॉखों, िदफ
आहों औय च ख-ऩक
ु ाय का, ण्जन्द्हें िन
ु नेवारा कोई न था। गय़ीफ ककिान
अऩन -अऩन ऩोटसरम ॉँ रादे , फेकि अन्द्दाज िे ताकते, ऑ ॊखें भें माचना बये

फ व -फच्चों को िाथ सरमे योते-त्रफरखते ककि अज्ञात दे र् को चरे जाते थे।
र्ाभ हुई तो ग वॉँ उजड़ गमा।

ह खफय फहुत जल्द चायों तयप पैर गम । रोगों को ठाकुय िाहफ के
इन्द्िान होने ऩय िन्द्दे ह होने रगा। ग वॉँ व यान ऩड़ा हुआ था। कौन
उिे आफाद कये । ककिके फच्चे उिकी गसरमों भें खेरें। ककिकी औयतें कुओॊ

ऩय ऩान बयें । याह चरते भि
ु ाकपय तफाह़ी का मह दृश्म आॉखों िे दे खते औय
अपिोि कयते। नह़ीॊ भारभ
ू उन व याने दे र् भें ऩड़े हुए गय़ीफों ऩय क्मा
गज
ु य़ी। आह, जो भेहनत की कभाई खाते थे औय िय उठाकय चरते थे, अफ
दि
ू यों की गर
ु ाभ कय यहे हैं।

इि तयह ऩयू ा िार गज
ु य गमा। तफ ग वॉँ के नि फ जागे। जभ न

उऩजाऊ थ । भकान भौजूद। ध ये -ध ये जुल्भ की मह दास्तान पीकी ऩड़
गम । भनचरे ककिानों की रोब-दृण्र्षट उि ऩय ऩड़ने रग । फरा िे जभ ॊदाय

जासरभ हैं, फेयहभ हैं, िण्ततम ॉँ कयता है , हभ उिे भना रेंगे। त न िार की
ऩेर्ग रगान का क्मा ण्जक्र वह जैिे खुर् होगा, खुर् कयें गे। उिकी गासरमों

को दआ
िभझेंगे, उिके जत

ू े अऩने िय-आॉखों ऩय यक्खेंगे। वह याजा हैं, हभ
उनके चाकय हैं। ण्जन्द्दग की कर्भकर् औय रड़ाई भें आत्भिम्भान को
ननफाहना कैिा भण्ु श्कर काभ है! दि
ू या अषाढ आमा तो वह ग वॉँ कपय फग चा
फना हुआ था। फच्चे कपय अऩने दयवाजों ऩय घयौंदे फनाने रगे, भदों के
24

फर
ु न्द्द आवाज के गाने खेतों भें िन
ु ाई ददमे व औयतों के िह
ु ाने ग त
चण्क्कमों ऩय। ण्जन्द्दग के भोहक दृश्म ददखाईं दे ने रगे।

िार बय गज
ु या। जफ यफ की दि
ू य़ी पिर आम तो िन
ु हय़ी फारों को

खेतों भें रहयाते दे खकय ककिानों के ददर रहयाने रगते थे। िार बय ऩयत

जभ न ने िोना उगर ददमा थाॊ औयतें खुर् थ ॊ कक अफ के नमे-नमे गहने
फनवामेंगे, भदफ खुर् थे कक अच्छे -अच्छे फैर भोर रेंगे औय दायोगा ज की

खुर् का तो अन्द्त ह़ी न था। ठाकुय िाहफ ने मह खुर्खफय़ी िन
ु तो दे हात

की िैय को चरे। वह़ी र्ानर्ौकत, वह़ी रठै तों का रयिारा, वह़ी गॊड
ु ों की
ॉँ
पौज! ग ववारों
ने उनके आदय ित्काय की तैमारयम ॉँ कयन र्र
ु कीॊ। भोटे -

ताजे फकयों का एक ऩयू ा गरा चौऩार के दयवाज ऩय फाॉधाॊ रकड़ के अम्फाय
रगा ददमे, दध
ू के हौज बय ददमे। ठाकुय िाहफ ग वॉँ की भेड़ ऩय ऩहुॉचे तो
ॉँ खड़े थे। रेककन ऩहऱी
ऩयू े एक िौ आदभ उनकी अगवान के सरए हाथ फ धे

च ज ण्जिकी पयभाइर् हुई वह रेभनेड औय फपफ थ । अिासभमों के हाथों के
तोते उड़ गमे। मह ऩान की फोतर इि वक्त वह ॉँ अमत
ृ के दाभों त्रफक
िकत थ । भगय फेचाये दे हात अभ यों के चोचरे क्मा जानें। भज
ु रयभों की
तयह सिय झक
ु ामे बौंचक खड़े थे। चेहये ऩय झेंऩ औय र्भफ थ । ददरों भें
धड़कन औय बम। ईश्वय! फात त्रफगड़ गई है , अफ तुम्ह़ीॊ िम्हारो।,’

फपफ की ठडडक न सभऱी तो ठाकुय िाहफ की प्माि की आग औय ब

तेज हुई, गस्
ु िा बड़क उठा, कड़ककय फोरे—भैं र्ैतान नह़ीॊ हूॉ कक फकयों के
खन
ू िे प्माि फझ
ु ाऊॉ, भझ
ु े ठॊ डा फपफ चादहए औय मह प्माि तम्
ु हाये औय
तुम्हाय़ी औयतों के आॉिओ
े । एहिानपयाभोर्, न च भैंने तुम्हें
ु ॊ िे ह़ी फझ
ु ग

जभ न द़ी, भकान ददमे औय है सिमत द़ी औय इिके फदरे भें तुभ मे दे यहे

हो कक भैं खड़ा ऩान को तयिता हूॉ! तुभ इि कात्रफर नह़ीॊ हो कक तुम्हाये
िाथ कोई रयमामत की जाम। कर र्ाभ तक भैं तुभभें िे ककि आदभ की
ियू त इि ग वॉँ भें न दे खूॉ वनाफ प्ररम हो जामेगा। तुभ जानते हो कक भझ
ु े

अऩना हुक्भ दहु याने की आदत नह़ीॊ है। यात तुम्हाय़ी है , जो कुछ रे जा
िको, रे जाओ। रेककन र्ाभ को भैं ककि की भनहूि ियू त न दे ख।ॉू मह
योना औय च खना कपजू है, भेया ददर ऩत्थय का है औय करेजा रोहे का,
आॉिओ
ु ॊ िे नह़ीॊ ऩि जता।

औय ऐिा ह़ी हुआ। दि
ू य़ी यात को िाये ग वॉँ कोई ददमा जरानेवारा
तक न यहा। पूरता-परता ग वॉँ बत
ू का डेया फन गमा।
25


हुत ददनों तक मह घटना आि-ऩाि के भनचरे ककस्िागोमों के सरए
ददरचण्स्ऩमों का खजाना फन यह़ी। एक िाहफ ने उि ऩय अऩन

करभ। ब चराम । फेचाये ठाकुय िाहफ ऐिे फदनाभ हुए कक घय िे ननकरना
भण्ु श्कर हो गमा। फहुत कोसर्र् की ग वॉँ आफाद हो जाम रेककन ककिकी
जान बाय़ी थ कक इि अॊधये नगय़ी भें कदभ यखता जह ॉँ भोटाऩे की िजा

ॉँ थ । कुछ भजदयू -ऩेर्ा रोग ककस्भत का जआ
पि
खेरने आमे भगय कुछ

भह़ीनों िे ज्मादा न जभ िके। उजड़ा हुआ ग वॉँ खोमा हुआ एतफाय है जो

फहुत भण्ु श्कर िे जभता है । आखखय जफ कोई फि न चरा तो ठाकुय िाहफ
ने भजफयू होकय आयाज भाप कयने का काभ आभ ऐरान कय ददमा रेककन
इि रयमाित िे यह़ी-िह़ी िाख ब खो द़ी। इि तयह त न िार गज
ु य जाने
के फाद एक योज वह ॉँ फॊजायों का काकपरा आमा। र्ाभ हो गम थ औय ऩयू फ

तयप िे अॊधेये की रहय फढत चऱी आत थ । फॊजायों ने दे खा तो िाया ग वॉँ
व यान ऩड़ा हुआ है ।, जह ॉँ आदसभमों के घयों भें थगि औय ग दड़ यहते थे।
इि नतसरस्भ का बेद िभझ भें न आमा। भकान भौजूद हैं, जभ न उऩजाऊ

है , हरयमाऱी िे रहयाते हुए खेत हैं औय इन्द्िान का नाभ नह़ीॊ! कोई औय
ग वॉँ ऩाि न था वह़ीॊ ऩड़ाव डार ददमा। जफ िफ
ु ह हुई, फैरों के गरों की
घॊदटमों ने कपय अऩना यजत-िॊग त अराऩना र्र
ु ककमा औय काकपरा ग वॉँ िे
कुछ दयू ननकर गमा तो एक चयवाहे ने जोय-जफदफ स्त की मह रम्फ कहान

उन्द्हें िन
ु ाम । दनु नमा बय भें घभ
ू ते कपयने ने उन्द्हें भण्ु श्करों का आद़ी फना

ददमा था। आऩि भें कुद भर्ववया ककमा औय पैिरा हो गमा। ठाकुय िाहफ
की ड्मोढ़ी ऩय जा ऩहुॉचे औय नजयाने दाखखर कय ददमे। ग वॉँ कपय आफाद
हुआ।

मह फॊजाये फरा के च भड़, रोहे की-ि दहम्भत औय इयादे के रोग थे

ण्जनके आते ह़ी ग वॉँ भें रक्ष्भ का याज हो गमा। कपय घयों भें िे धए
ु ॊ के
फादर उठे , कोल्हाड़ों ने कपय धए
ु ॉ ओय बाऩ की चादयें ऩहन ॊ, तुरि के
चफत
ू ये ऩय कपय िे थचयाग जरे। यात को यॊ ग न तत्रफमत नौजवानों की अराऩें

िन
ु ाम दे ने रग ॊ। चयागाहों भें कपय भवेसर्मों के गल्रे ददखाई ददमे औय
ॉँ यु ़ी की भविभ औय यि ऱी आवाज
ककि ऩेड़ के न चे फैठे हुए चयवाहे की फ ि
26

ददफ औय अिय भें डूफ हुई इि प्राकृनतक दृश्म भें जाद ू का आकषफण ऩैदा
कयने रग ।
बादों का भह़ीना था। कऩाि के पूरों की िख
ु फ औय िपेद थचकनाई,

नतर की ऊद़ी फहाय औय िन का र्ोख ऩ राऩन अऩने रऩ का जरवा
ददखाता था। ककिानों की भड़ैमा औय छप्ऩयों ऩय ब पर-पूर की यॊ ग न

ददखाम दे त थ । उि ऩय ऩान की हरकी-हरकी पुहायें प्रकृनत के िौंदमफ के

सरए सिॊगाय कयनेवाऱी का कभा दे यह़ी थ ॊ। ण्जि तयह िाधओ
ु ॊ के ददर
ित्म की ज्मोनत िे बये होते हैं, उि तयह िागय औय ताराफ िाप-र्फ़्फाफ
ऩान िे बये थे। र्ामद याजा इन्द्र कैरार् की तयावट बय़ी ऊॉचाइमों िे

उतयकय अफ भैदानों भें आनेवारे थे। इि सरए प्रकृनत ने िौन्द्दमफ औय
सिविमों औय आर्ाओॊ के ब बडडाय खोर ददमे थे। वकीर िाहफ को ब िैय

की तभन्द्ना ने गद
ु गद
ु ामा। हभेर्ा की तयह अऩने यईंिाना ठाट-फाट के िाथ

ग वॉँ भें आ ऩहुॉच।े दे खा तो िॊतोष औय ननण्श्चन्द्तता के वयदान चायों तयप
स्ऩर्षट थे।

गाॉ

ववारों ने उनके र्ब
ु ागभन का िभाचाय िन
ु ा, िराभ को हाण्जय हुए।
वकीर िाहफ ने उन्द्हें अच्छे -अच्छे कऩड़े ऩहने, स्वासबभान के िाथ

कदभ सभराते हुए दे खा। उनिे फहुत भस्
ु कयाकय सभरे। पिर का हार-चार
ऩछ
ू ा। फढ
ू े हयदाि ने एक ऐिे रहजे भें ण्जििे ऩयू ़ी ण्जम्भेदाय़ी औय चौधयाऩे
की र्ान टऩकत थ , जवाफ ददमा—हुजयू के कदभों की फयकत िे िफ चैन
है । ककि तयह की तकऱीप नह़ीॊ आऩकी द़ी हुई नेभत खाते हैं औय आऩका
जि गाते हैं। हभाये याजा औय ियकाय जो कुछ हैं, आऩ हैं औय आऩके सरए
जान तक हाण्जय है ।

ठाकुय िाहफ ने तेफय फदरकय कहा—भैं अऩन खुर्ाभद िन
ु ने का आद़ी

नह़ीॊ हूॉ।

फढ
ू े हयदाि के भाथे ऩय फर ऩड़े, असबभान को चोट रग । फोरा—भझ
ु े

ब खुर्ाभद कयने की आदत नह़ीॊ है ।

ठाकुय िाहफ ने ऐॊठकय जवाफ ददमा—तम्
ु हें यईिों िे फात कयने की

तभ ज नह़ीॊ। ताकत की तयह तम्
ु हाय़ी अक्र ब फढ
ु ाऩे की बें ट चढ गई।

27

हयदाि ने अऩने िाथथमों की तयप दे खा। गुस्िे की गभी िे िफ की

आॉख पैऱी हुई औय ध यज की िदी िे भाथे सिकुड़े हुए थे। फोरा—हभ
आऩकी यै मत हैं रेककन हभको अऩन आफर प्माय़ी है औय चाहे आऩ
जभ ॊदाय को अऩना सिय दे दें आफर नह़ीॊ दे िकते।

हयदाि के कई भनचरे िाथथमों ने फर
ु न्द्द आवाज भें ताईद की—आफर

जान के ऩ छे है।

ठाकुय िाहफ के गुस्िे की आग बड़क उठी औय चेहया रार हो गमा,

औय जोय िे फोरे—तुभ रोग जफान िम्हारकय फातें कयो वनाफ ण्जि तयह
गरे भें झोसरम ॉँ रटकामे आमे थे उि

तयह ननकार ददमे जाओगे। भैं

प्रद्मम्
ु न सिॊह हूॉ, ण्जिने तुभ जैिे ककतने ह़ी हे कड़ों को इि जगह कुचरवा

डारा है । मह कहकय उन्द्होंने अऩने रयिारे के ियदाय अजन
ुफ सिॊह को फर
ु ाकय
कहा—ठाकुय, अफ इन च दटमों के ऩय ननकर आमे हैं, कर र्ाभ तक इन
रोगों िे भेया ग वॉँ िाप हो जाए।

हयदाि खड़ा हो गमा। गुस्िा अफ थचनगाय़ी फनकय आॉखों िे ननकर

यहा था। फोरा—हभने इि ग वॉँ को छोड़ने के सरए नह़ीॊ फिामा है । जफ तक
ण्जमेंगे इि ग वॉँ भें यहें गे, मह़ीॊ ऩैदा होंगे औय मह़ीॊ भयें गे। आऩ फड़े आदभ

हैं औय फड़ों की िभझ ब फड़ होत है। हभ रोग अक्खड़ गॊवाय हैं। नाहक
गय़ीफों की जान के ऩ छ भत ऩडड़ए। खून-खयाफा हो जामेगा। रेककन आऩको
मह़ी भॊजयू है तो हभाय़ी तयप िे आऩके सिऩादहमों को चन
ु ौत है , जफ चाहे
ददर के अयभान ननकार रें।

इतना कहकय ठाकुय िाहफ को िराभ ककमा औय चर ददमा। उिके

िाथ गवफ के िाथ अकड़ते हुए चरे। अजन
ुफ सिॊह ने उनके तेवय दे खे। िभझ
गमा कक मह रोहे के चने हैं रेककन र्ोहदों का ियदाय था, कुछ अऩने नाभ
की राज थ । दि
ू ये ददन र्ाभ के वक्त जफ यात औय ददन भें भठ
ु बेड़ हो यह़ी

थ , इन दोनों जभातों का िाभना हुआ। कपय वह धौर-धप्ऩा हुआ कक जभ न
थयाफ गम । जफानों ने भॊह
ु के अन्द्दय वह भाके ददखामे कक ियू ज डय के भाये
ऩण्श्छभ भें जा नछऩा। तफ रादठमों ने सिय उठामा रेककन इििे ऩहरे कक

वह डाक्टय िाहफ की दआ
औय र्कु क्रमे की भस्

ु तहक हों अजन
ुफ सिॊह ने

िभझदाय़ी िे काभ सरमा। ताहभ उनके चन्द्द आदसभमों के सरए गड़
ु औय
हल्द़ी ऩ ने का िाभान हो चक
ु ा था।

28

वकीर िाहफ ने अऩन पौज की मह फयु ़ी हारतें दे ख ॊ, ककि के कऩड़े

ॉँ -ह पते
ॉँ
पटे हुए, ककि के ण्जस्भ ऩय गदफ जभ हुई, कोई ह पते
फेदभ (खन

फहुत कभ नजय आमा क्मोंकक मह एक अनभोर च ज है औय इिे डॊडों की
भाय िे फचा सरमा गमा) तो उन्द्होंने अजन
ुफ सिॊह की ऩ ठ ठोकी औय उिकी
ॉँ
फहादयु ़ी औय ज फाज
की खूफ ताय़ीप की। यात को उनके िाभने रड्डू औय

इभयनतमों की ऐि वषाफ हुई कक मह िफ गदफ-गुफाय धर
ु गमा। िफ
ु ह को इि
रयिारे ने ठॊ डे-ठॊ डे घय की याह ऱी औय किभ खा गए कक अफ बर
ू कय ब
इि ग वॉँ का रख न कयें गे।

तफ ठाकुय िाहफ ने ग वॉँ के आदसभमों को चौऩार भें तरफ ककमा।

उनके इर्ाये की दे य थ । िफ रोग इकट्ठे हो गए। अण्ततमाय औय हुकूभत
अगय घभॊड की भिनद िे उतय आए तो दश्ु भनों को ब दोस्त फना िकत

है । जफ िफ आदभ आ गमे तो ठाकुय िाहफ एक-एक कयके उनिे फगरग य
हुए ओय फोरे—भैं ईश्वय का फहु ऋण हूॉ कक भझ
ु े ग वॉँ के सरए ण्जन
आदसभमों की तरार् थ , वह रोग सभर गमे। आऩको भारभ
ू है कक मह ग वॉँ
कई फाय उजड़ा औय कई फाय फिा। उिका कायण मह़ी था कक वे रोग भेय़ी

किौट़ी ऩय ऩयू े न उतयते थे। भैं उनका दश्ु भन नह़ीॊ था रेककन भेय़ी ददऱी

आयजू मह थ कक इि ग वॉँ भें वे रोग आफाद हों जो जुल्भ का भदों की

तयह िाभना कयें , जो अऩने अथधकायों औय रयआमतों की भदों की तयह
दहपाजत कयें , जो हुकूभत के गर
ु ाभ न हों, जो योफ औय अण्ततमाय की तेज
ननगाह दे खकय फच्चों की तयह डय िे िहभ न जाऍ।ॊ भझ
ु े इत्भ नान है कक
फहुत नक
ु िान औय र्सभिंदग औय फदनाभ के फाद भेय़ी तभन्द्नाएॉ ऩयू ़ी हो
गम ॊ। भझ
ु े इत्भ नान है कक आऩ उल्ट़ी हवाओॊ औय ऊॉच -ऊॉच उठनेवाऱी
रहयों का भक
ु ाफरा काभमाफ िे कयें गे। भैं आज इि ग वॉँ िे अऩना हाथ

ख ॊचता हूॉ। आज िे मह आऩकी सभण्ल्कमत है । आऩह़ी इिके जभ ॊदाय औय
भासरक हैं। ईश्वय िे भेय़ी मह़ी प्राथफना है कक आऩ परें-पूरें ओय ियिब्ज
हों।

इन र्ब्दों ने ददरों ऩय जाद ू का काभ ककमा। रोग स्वासभबण्क्त के

आवेर् िे भस्त हो-होकय ठाकुय िाहफ के ऩैयों िे सरऩट गमे औय कहने
रगे—हभ आऩके, कदभों िे ज ते-ज जद
ु ा न होंगे। आऩका-िा करदान औय

रयआमा-ऩयवय फज
ु ग
ु फ हभ कह ॉँ ऩामेंगे। व यों की बण्क्त औय िहनब
ु नू त,
वपादाय़ी औय एहिान का एक फड़ा ददफ नाक औय अिय ऩैदा कयने वारा दृश्म
29

आॉखों के िाभने ऩेर् हो गमा। रेककन ठाकुय िाहफ अऩने उदाय ननश्चम ऩय

दृढ यहे औय गो ऩचाि िार िे ज्मादा गज
ु य गमे हैं। रेककन उन्द्ह़ीॊ फॊजायों के
वारयि अब तक भौजा िाहषगॊज के भापीदाय हैं। औयतें अब तक ठाकुय

प्रद्मम्
ु न सिॊह की ऩज
ू ा औय भन्द्नतें कयत हैं औय गो अफ इि भौजे के कई
नौजवान दौरत औय हुकूभत की फर
ु ॊद़ी ऩय ऩहुॉच गमे हैं रेककन गूढे औय
अक्खड़ हयदाि के नाभ ऩय अफ ब गवफ कयते हैं। औय बादों िद
ु ़ी एकादर्
के ददन अब उि भफ
ु ायक पतेह की मादगाय भें जश्न भनामे जाते हैं।

—जभाना, अक्तूफय १९१३

30

अनाथ लड़की

िे

ठ ऩरु
ु षोत्तभदाि ऩन
ू ा की ियस्वत ऩाठर्ारा का भआ
ु मना कयने के
फाद फाहय ननकरे तो एक रड़की ने दौड़कय उनका दाभन ऩकड़ सरमा।

िेठ ज रुक गमे औय भह
ु ब्फत िे उिकी तयप दे खकय ऩछ
ू ा—क्मा नाभ है ?
रड़की ने जवाफ ददमा—योदहण ।

िेठ ज ने उिे गोद भें उठा सरमा औय फोरे—तुम्हें कुछ इनाभ सभरा?

रड़की ने उनकी तयप फच्चों जैि गॊब यता िे दे खकय कहा—तभ
ु चरे

जाते हो, भझ
ु े योना आता है, भझ
ु े ब िाथ रेते चरो।

िेठज ने हॉ िकय कहा—भझ
ु े फड़ दयू जाना है , तभ
ु कैिे चारोग ?

योदहण ने प्माय िे उनकी गदफ न भें हाथ डार ददमे औय फोऱी—जह ॉँ

तुभ जाओगे वह़ीॊ भैं ब चरॉ ग
ू । भैं तुम्हाय़ी फेट़ी हूॉग ।
भदयिे के अपिय ने आगे फढकय कहा—इिका फाऩ िार बय हुआ
नह़ी यहा। भ ॉँ कऩड़े ि त है, फड़ भण्ु श्कर िे गुजय होत है ।
िेठ ज के स्वबाव भें करुणा फहुत थ । मह िन
ु कय उनकी आॉखें बय
आम ॊ। उि बोऱी प्राथफना भें वह ददफ था जो ऩत्थय-िे ददर को वऩघरा िकता
है । फेकि

औय मत भ

को इििे ज्मादा ददफ नाक ढॊ ग िे जादहय कना

नाभभ
ु ककन था। उन्द्होंने िोचा—इि नन्द्हें -िे ददर भें न जाने क्मा अयभान

होंगे। औय रड़ककम ॉँ अऩने खखरौने ददखाकय कहत होंग , मह भेये फाऩ ने
ददमा है । वह अऩने फाऩ के िाथ भदयिे आत होंग , उिके िाथ भेरों भें
जात होंग औय उनकी ददरचण्स्ऩमों का ण्जक्र कयत होंग । मह िफ फातें

िन
ु -िन
ु कय इि बोऱी रड़की को ब तवादहर् होत होग कक भेये फाऩ होता।

भ ॉँ की भह
ु ब्फत भें गहयाई औय आण्त्भकता होत है ण्जिे फच्चे िभझ नह़ीॊ
िकते। फाऩ की भह
ु ब्फत भें खुर् औय चाव होता है ण्जिे फच्चे खूफ िभझते
हैं।

िेठ ज ने योदहण को प्माय िे गरे रगा सरमा औय फोरे—अच्छा, भैं

तुम्हें अऩन फेट़ी फनाऊॉगा। रेककन खूफ ज रगाकय ऩढना। अफ छुट्ट का
वक्त आ गमा है, भेये िाथ आओ, तुम्हाये घय ऩहुॉचा दॉ ।ू
मह कहकय उन्द्होंने योदहण को अऩन भोटयकाय भें त्रफठा सरमा।
योदहण ने फड़े इत्भ नान औय गवफ िे अऩन िहे सरमों की तयप दे खा। उिकी
31

ॉँ
फड़ -फड़ आॉखें खुर् िे चभक यह़ी थ ॊ औय चेहया च दन
यात की तयह खखरा
हुआ था।

िे

ठ ने योदहण को फाजाय की खफ
ू िैय कयाम औय कुछ उिकी ऩिन्द्द
िे, कुछ अऩन ऩिन्द्द िे फहुत-ि च जें खय़ीद़ीॊ, मह ॉँ तक कक योदहण

फातें कयते-कयते कुछ थक-ि गम औय खाभोर् हो गई। उिने इतन च जें
दे ख ॊ औय इतन फातें िन
ु ॊ कक उिका ज बय गमा। र्ाभ होते-होते योदहण

के घय ऩहुॉचे औय भोटयकाय िे उतयकय योदहण को अफ कुछ आयाभ सभरा।
दयवाजा फन्द्द था। उिकी भ ॉँ ककि ग्राहक के घय कऩड़े दे ने गम थ ।

योदहण ने अऩने तोहपों को उरटना-ऩरटना र्र
ु ककमा—खूफियू त यफड़ के

खखरौने, च न की गडु ड़मा जया दफाने िे चॉ -ू चॉ ू कयने रगत ॊ औय योदहण मह
प्माया िॊग त िन
ु कय पूऱी न िभात

थ । ये र्भ

कऩड़े औय यॊ ग-त्रफयॊ ग

िाडड़मों की कई फडडर थे रेककन भखभऱी फट
ू े की गर
ु कारयमों ने उिे खफ

रब
ु ामा था। उिे उन च जों के ऩाने की ण्जतन खुर् थ , उििे ज्मादा उन्द्हें
अऩन

िहे सरमों को ददखाने की फेचन

थ । िन्द्
ु दय़ी के जत
ू े अच्छे िह़ी

रेककन उनभें ऐिे पूर कह ॉँ हैं। ऐि गडु ड़मा उिने कब दे ख ब न होंग ।
इन खमारों िे उिके ददर भें उभॊग बय आम औय वह अऩन भोदहन

आवाज भें एक ग त गाने रग । िेठ ज दयवाजे ऩय खड़े इन ऩववत्र दृश्म का
हाददफक आनन्द्द उठा यहे थे। इतने भें योदहण की भ ॉँ रुण्क्भण कऩड़ों की एक

ऩोटऱी सरमे हुए आत ददखाम द़ी। योदहण ने खर्
िे ऩागर होकय एक

ॉँ बय़ी औय उिके ऩैयों िे सरऩट गम । रुण्क्भण का चेहया ऩ रा था,
छर ग

आॉखों भें हियत औय फेकि नछऩ हुई थ , गुप्त थचॊता का िज व थचत्र
भारभ
ू होत थ , ण्जिके सरए ण्जॊदग भें कोई िहाया नह़ीॊ।
भगय योदहण को जफ उिने गोद भें उठाकय प्माय िे चभ
ू ा भो जया दे य

के सरए उिकी ऑ ॊखों भें उन्द्भ द औय ण्जॊदग

की झरक ददखाम

द़ी।

भयु झामा हुआ पूर खखर गमा। फोऱी—आज तू इतन दे य तक कह ॉँ यह़ी, भैं
तुझे ढूॉढने ऩाठर्ारा गम थ ।
योदहण ने हुभककय कहा—भैं भोटयकाय ऩय फैठकय फाजाय गम थ ।
वह ॉँ िे फहुत अच्छी-अच्छी च जें राम हूॉ। वह दे खो कौन खड़ा है ?
भ ॉँ ने िेठ ज की तयप ताका औय रजाकय सिय झक
ु ा सरमा।
32

फयाभदे भें ऩहुॉचते ह़ी योदहण भ ॉँ की गोद िे उतयकय िेठज के ऩाि

गम औय अऩन भ ॉँ को मकीन ददराने के सरए बोरेऩन िे फोऱी—क्मों, तभ

भेये फाऩ हो न?

िेठ ज ने उिे प्माय कयके कहा—ह ,ॉँ तभ
ु भेय़ी प्माय़ी फेट़ी हो।

योदहण ने उनिे भॊह
ु की तयप माचना-बय़ी आॉखों िे दे खकय कहा—अफ

तुभ योज मह़ीॊ यहा कयोगे?

िेठ ज ने उिके फार िर
ु झाकय जवाफ ददमा—भैं मह ॉँ यहूॉगा तो काभ
कौन कये गा? भैं कब -कब तुम्हें दे खने आमा करॉगा, रेककन वह ॉँ िे तुम्हाये
सरए अच्छी-अच्छी च जें बेजॉग
ू ा।

योदहण कुछ उदाि-ि हो गम । इतने भें उिकी भ ॉँ ने भकान का

दयवाजा खोरा ओय फड़ पुती िे भैरे त्रफछावन औय पटे हुए कऩड़े िभेट कय
कोने भें डार ददमे कक कह़ीॊ िेठ ज की ननगाह उन ऩय न ऩड़ जाए। मह
स्वासबभान ण्स्त्रमों की खाि अऩन च ज है।

रुण्क्भण अफ इि िोच भें ऩड़ थ कक भैं इनकी क्मा खानतय-तवाजो

करॉ। उिने िेठ ज का नाभ िन
ु ा था, उिका ऩनत हभेर्ा उनकी फड़ाई ककमा
कयता था। वह उनकी दमा औय उदायता की चचाफएॉ अनेकों फाय िन
ु चक
ु ी
थ । वह उन्द्हें अऩने भन का दे वता िभझा कतय़ी थ , उिे क्मा उभ द थ कक

कब उिका घय ब उिके कदभों िे योर्न होगा। रेककन आज जफ वह र्ब

ददन िॊमोग िे आमा तो वह इि कात्रफर ब नह़ीॊ कक उन्द्हें फैठने के सरए
एक भोढा दे िके। घय भें ऩान औय इरामच ब नह़ीॊ। वह अऩने आॉिओ
ु ॊ को
ककि तयह न योक िकी।

आखखय जफ अॊधये ा हो गमा औय ऩाि के ठाकुयद्वाये िे घडटों औय

नगाड़ों की आवाजें आने रग ॊ तो उन्द्होंने जया ऊॉच आवाज भें कहा—फाईज ,
अफ भैं जाता हूॉ। भझ
ु े अब मह ॉँ फहुत काभ कयना है। भेय़ी योदहण को कोई
तकऱीप न हो। भझ
ु े जफ भौका सभरेगा, उिे दे खने आऊॉगा। उिके ऩारनेऩोिने का काभ भेया है औय भैं उिे फहुत खुर् िे ऩयू ा करॉगा। उिके सरए
ॉँ ददमा है औय मह
अफ तभ
ु कोई कपक्र भत कयो। भैंने उिका वज पा फ ध
उिकी ऩहऱी ककस्त है ।

मह कहकय उन्द्होंने अऩना खफ
ू ियू त फटुआ ननकारा औय रुण्क्भण के

िाभने यख ददमा। गय़ीफ औयत की आॉखें भें आॉिू जाय़ी थे। उिका ज फयफि

33

चाहता था कक उिके ऩैयों को ऩकड़कय खूफ योमे। आज फहुत ददनों के फाद
एक िच्चे हभददफ की आवाज उिके भन भें आम थ ।
जफ िेठ ज चरे तो उिने दोनों हाथों िे प्रणाभ ककमा। उिके हृदम

की गहयाइमों िे प्राथफना ननकऱी—आऩने एक फेफि ऩय दमा की है, ईश्वय
आऩको इिका फदरा दे ।
खुफ

ॉँ
दि
िज-धज आॉखों भें
ू ये ददन योदहण ऩाठर्ारा गई तो उिकी फ की

जात

थ । उस्ताननमों ने उिे फाय़ी-फाय़ी प्माय ककमा औय उिकी

िहे सरम ॉँ उिकी एक-एक च ज को आश्चमफ िे दे खत औय ररचात थ ।

अच्छे कऩड़ों िे कुछ स्वासबभान का अनब
ु व होता है । आज योदहण वह
गय़ीफ रड़की न यह़ी जो दि
ू यों की तयप वववर् नेत्रों िे दे खा कयत थ ।
आज उिकी एक-एक कक्रमा िे र्ैर्वोथचत गवफ औय चॊचरता टऩकत थ औय
उिकी जफान एक दभ के सरए ब न रुकत थ । कब भोटय की तेज का

ण्जक्र था कब फाजाय की ददरचण्स्ऩमों का फमान, कब अऩन गडु ड़मों के

कुर्र-भॊगर की चचाफ थ औय कब अऩने फाऩ की भह
ु ब्फत की दास्तान।

ददर था कक उभॊगों िे बया हुआ था।
एक भह़ीने फाद िेठ ऩरु
ु षोत्तभदाि ने योदहण के सरए कपय तोहपे

औय रुऩमे यवाना ककमे। फेचाय़ी ववधवा को उनकी कृऩा िे ज ववका की थचन्द्ता
ॉँ दटम ॉँ
िे छुट्ट सभऱी। वह ब योदहण के िाथ ऩाठर्ारा आत औय दोनों भ -फे
एक ह़ी दयजे के िाथ-िाथ ऩढत ॊ, रेककन योदहण का नम्फय हभेर्ा भ ॉँ िे
अव्वर यहा िेठ ज जफ ऩन
ू ा की तयप िे ननकरते तो योदहण को दे खने
जरय आते औय उनका आगभन उिकी प्रिन्द्नता औय भनोयॊ जन के सरए
भह़ीनों का िाभान इकट्ठा कय दे ता।

इि तयह कई िार गुजय गमे औय योदहण ने जवान के िह
ु ाने हये -

बये भैदान भें ऩैय यक्खा, जफकक फचऩन की बोऱी-बाऱी अदाओॊ भें एक खाि
भतरफ औय इयादों का दखर हो जाता है ।

योदहण अफ आन्द्तरयक औय फाह्म िौन्द्दमफ भें अऩन ऩाठर्ारा की

नाक थ । हाव-बाव भें आकषफक गम्ब यता, फातों भें ग त का-िा खखॊचाव औय

ग त का-िा आण्त्भक यि था। कऩड़ों भें यॊ ग न िादग , आॉखों भें राजिॊकोच, ववचायों भें ऩववत्रता। जवान

भगय घभडड औय फनावट औय

चॊचरता िे भक्
ु त। उिभें एक एकाग्रता थ ऊॉचे इयादों िे ऩैदा होत है।

34

ण्स्त्रमोथचत उत्कषफ की भॊण्जरें वह ध ये -ध ये तम कयत चऱी जात थ ।

िे


ठ ज के फड़े फेटे नयोत्तभदाि कई िार तक अभेरयका औय जभफन की

मनु नवसिफदटमों की खाक छानने के फाद इॊज ननमरयॊग ववबाग भें कभार

हासिर कयके वाऩि आए थे। अभेरयका के िफिे प्रनतण्र्षठत कारेज भें उन्द्होंने
िम्भान का ऩद प्राप्त ककमा था। अभेरयका के अखफाय एक दहन्द्दोस्तान

नौजवान की इि र्ानदाय काभमाफ ऩय चककत थे। उन्द्ह़ीॊ का स्वागत कयने

के सरए फम्फई भें एक फड़ा जरिा ककमा गमा था। इि उत्िव भें र्य़ीक
होने के सरए रोग दयू -दयू िे आए थे। ियस्वत ऩाठर्ारा को ब ननभॊत्रण
सभरा औय योदहण

को िेठान

ने ववर्ेष रऩ िे आभॊत्रत्रत ककमा।

ऩाठर्ारा भें हफ्तों तैमारयम ॉँ हुई। योदहण को एक दभ के सरए ब चैन न
था। मह ऩहरा भौका था कक उिने अऩने सरए फहुत अच्छे -अच्छे कऩड़े
फनवामे। यॊ गों के चन
ु ाव भें वह सभठाि थ , काट-छ टॉँ भें वह पफन ण्जििे
उिकी िन्द्
ु दयता चभक उठी। िेठान कौर्ल्मा दे व उिे रेने के सरए ये रवे
स्टे र्न ऩय भौजूद थ ।ॊ योदहण गाड़ िे उतयते ह़ी उनके ऩैयों की तयप झक
ु ी
रेककन उन्द्होंने उिे छात िे रगा सरमा औय इि तयह प्माय ककमा कक जैिे

वह उनकी फेट़ी है । वह उिे फाय-फाय दे खत थ ॊ औय आॉखों िे गवफ औय प्रेभ
टऩक ऩड़ता था।

इि जरिे के सरए ठीक िभन्द्
ु दय के ककनाये एक हये -बये िह
ु ाने भैदान

भें एक रम्फा-चौड़ा र्ासभमाना रगामा गमा था। एक तयप आदसभमों का

िभर
ु उभड़ा हुआ था दि
ू य़ी तयप िभर
ु की रहयें उभड़ यह़ी थ ॊ, गोमा वह
ब इि खुर् भें र्य़ीक थ ॊ।
जफ उऩण्स्थत रोगों ने योदहण फाई के आने की खफय िन
ु तो हजायों

आदभ उिे दे खने के सरए खड़े हो गए। मह़ी तो वह रड़की है । ण्जिने
अफकी र्ास्त्र की ऩय़ीक्षा ऩाि की है । जया उिके दर्फन कयने चादहमे। अफ

ब इि दे र् की ण्स्त्रमों भें ऐिे यतन भौजद
ू हैं। बोरे-बारे दे र्प्रेसभमों भें इि
तयह की फातें होने रग ।ॊ र्हय की कई प्रनतण्र्षठत भदहराओॊ ने आकय योदहण

को गरे रगामा औय आऩि भें उिके िौन्द्दमफ औय उिके कऩड़ों की चचाफ
होने रग ।

35

ॉँ
आखखय सभस्टय ऩरु
वह फड़ा सर्र्षट
ु षोत्तभदाि तर्य़ीप राए। हार कक

औय गम्ब य उत्िव था रेककन उि वक्त दर्फन की उत्कॊठा ऩागरऩन की हद

तक जा ऩहुॉच थ । एक बगदड़-ि भच गई। कुसिफमों की कताये गड़फड़ हो
गईं। कोई कुिी ऩय खड़ा हुआ, कोई उिके हत्थों ऩय। कुछ भनचरे रोगों ने
र्ासभमाने की यण्स्िम ॉँ ऩकड़ ॊ औय उन ऩय जा रटके कई सभनट तक मह़ी
तूपान भचा यहा। कह़ीॊ कुसिफमाॊ टूट़ीॊ, कह़ीॊ कुसिफम ॉँ उरट़ीॊ, कोई ककि के
ऊऩय थगया, कोई न चे। ज्मादा तेज रोगों भें धौर-धप्ऩा होने रगा।

तफ फ न की िह
ु ान आवाजें आने रग ॊ। योदहण ने अऩन भडडऱी के

िाथ दे र्प्रेभ भें डूफा हुआ ग त र्र
ु ककमा। िाये उऩण्स्थत रोग त्रफरकुर
र्ान्द्त थे औय उि िभम वह ियु ़ीरा याग, उिकी कोभरता औय स्वच्छता,
उिकी प्रबावर्ाऱी भधयु ता, उिकी उत्िाह बय़ी वाण ददरों ऩय वह नर्ा-िा

ऩैदा कय यह़ी थ ण्जििे प्रेभ की रहयें उठत हैं, जो ददर िे फयु ाइमों को
सभटाता है औय उििे ण्जन्द्दग की हभेर्ा माद यहने वाऱी मादगायें ऩैदा हो

जात हैं। ग त फन्द्द होने ऩय ताय़ीप की एक आवाज न आई। वह़ीॊ ताने
कानों भें अफ तक गॉज
ू यह़ी थ ।ॊ

गाने के फाद ववसबन्द्न िॊस्थाओॊ की तयप िे असबनन्द्दन ऩेर् हुए औय
तफ नयोत्तभदाि रोगों को धन्द्मवाद दे ने के सरए खड़े हुए। रेककन उनके

बाषाण िे रोगों को थोड़ ननयार्ा हुई। मों दोस्तो की भडडऱी भें उनकी
वक्तत
ृ ा के आवेग औय प्रवाह की कोई ि भा न थ रेककन िावफजननक िबा

के िाभने खड़े होते ह़ी र्ब्द औय ववचाय दोनों ह़ी उनिे फेवपाई कय जाते
थे। उन्द्होंने फड़ -फड़ भण्ु श्कर िे धन्द्मवाद के कुछ र्ब्द कहे औय तफ अऩन

मोग्मता की रण्ज्जत स्व कृनत के िाथ अऩन जगह ऩय आ फैठे। ककतने ह़ी
रोग उनकी मोग्मता ऩय ज्ञाननमों की तयह सिय दहराने रगे।

अफ जरिा खत्भ होने का वक्त आमा। वह ये र्भ हाय जो ियस्वत

ऩाठर्ारा की ओय िे बेजा गमा था, भेज ऩय यखा हुआ था। उिे ह़ीयो के
गरे भें कौन डारे? प्रेसिडेडट ने भदहराओॊ की ऩॊण्क्त की ओय नजय दौड़ाई।
चन
ु ने वाऱी आॉख योदहण ऩय ऩड़ औय ठहय गई। उिकी छात धड़कने
रग । रेककन उत्िव के िबाऩनत के आदे र् का ऩारन आवश्मक था। वह िय

ॉँ
झक
हाथों िे हाय को उठा सरमा। एक
ु ामे हुए भेज के ऩाि आम औय क ऩते
क्षण के सरए दोनों की आॉखें सभऱीॊ औय योदहण ने नयोत्तभदाि के गरे भें
हाय डार ददमा।

36

दि
ू ये ददन ियस्वत ऩाठर्ारा के भेहभान ववदा हुए रेककन कौर्ल्मा
दे व ने योदहण को न जाने ददमा। फोऱी—अब तम्
ु हें दे खने िे ज नह़ीॊ बया,

तम्
ु हें मह ॉँ एक हफ्ता यहना होगा। आखखय भैं ब तो तम्
ु हाय़ी भ ॉँ हूॉ। एक भ ॉँ
िे इतना प्माय औय दि
ू य़ी भ ॉँ िे इतना अरगाव!
योदहण कुछ जवाफ न दे िकी।

मह िाया हफ्ता कौर्ल्मा दे व ने उिकी ववदाई की तैमारयमों भें खचफ

ककमा। िातवें ददन उिे ववदा कयने के सरए स्टे र्न तक आम ।ॊ चरते वक्त

उििे गरे सभऱीॊ औय फहुत कोसर्र् कयने ऩय ब आॉिओ
ु ॊ को न योक िकीॊ।
नयोत्तभदाि ब आमे थे। उनका चेहया उदाि था। कौर्ल्मा ने उनकी तयप
िहानब
ु नू तऩण
ू फ आॉखों िे दे खकय कहा—भझ
ु े मह तो तमार ह़ी न यहा, योदहण

क्मा मह ॉँ िे ऩन
ू ा तक अकेऱी जामेग ? क्मा हजफ है, तम्
ु ह़ीॊ चरे जाओ, र्ाभ
की गाड़ िे रौट आना।

नयोत्तभदाि के चेहये ऩय खुर् की रहय दौड़ गम , जो इन र्ब्दों भें

न नछऩ िकी—अच्छा, भैं ह़ी चरा जाऊॉगा। वह इि कपक्र भें थे कक दे खें
त्रफदाई की फातच त का भौका ब सभरता है मा नह़ीॊ। अफ वह खूफ ज

बयकय अऩना ददे ददर िन
ु ामेंगे औय भभ
ु ककन हुआ तो उि राज-िॊकोच को,
जो उदाि नता के ऩयदे भें नछऩ हुई है , सभटा दें गे।

रु


ण्क्भण को अफ योदहण की र्ाद़ी की कपक्र ऩैदा हुई। ऩड़ोि की औयतों
भें इिकी चचाफ होने रग थ । रड़की इतन िमान हो गम है , अफ

क्मा फढ
ु ाऩे भें ब्माह होगा? कई जगह िे फात आम , उनभें कुछ फड़े
प्रनतण्र्षठत घयाने थे। रेककन जफ रुण्क्भण उन ऩैभानों को िेठज के ऩाि

बेजत तो वे मह़ी जवाफ दे ते कक भैं खुद कपक्र भें हूॉ। रुण्क्भण को उनकी
मह टार-भटोर फयु ़ी भारभ
ू होत थ ।
योदहण को फम्फई िे रौटे भह़ीना बय हो चक
ु ा था। एक ददन वह

ऩाठर्ारा िे रौट़ी तो उिे अम्भा की चायऩाई ऩय एक खत ऩड़ा हुआ सभरा।
योदहण ऩढने रग , सरखा था—फहन, जफ िे भैंने तुम्हाय़ी रड़की को फम्फई

भें दे खा है, भैं उि ऩय य़ीझ गई हूॉ। अफ उिके फगैय भझ
ु े चैन नह़ीॊ है । क्मा
भेया ऐिा बाग्म होगा कक वह भेय़ी फहू फन िके? भैं गय़ीफ हूॉ रेककन भैंने
िेठ ज को याज कय सरमा है । तुभ ब भेय़ी मह ववनत कफर
ू कयो। भैं
37

तुम्हाय़ी रड़की को चाहे पूरों की िेज ऩय न िर
ु ा िकॉू , रेककन इि घय का

एक-एक आदभ उिे आॉखों की ऩत
ु ऱी फनाकय यखेगा। अफ यहा रड़का। भ ॉँ
के भॉह
ु िे रड़के का फखान कुछ अच्छा नह़ीॊ भारभ
ू होता। रेककन मह कह
िकत

हूॉ कक ऩयभात्भा ने मह जोड़ अऩन हाथों फनाम है । ियू त भें ,
स्वबाव भें, ववद्मा भें , हय दृण्र्षट िे वह योदहण के मोग्म है । तभ
ु जैिे चाहे

अऩना इत्भ नान कय िकत हो। जवाफ जल्द दे ना औय ज्मादा क्मा सरखूॉ।
न चे थोड़े-िे र्ब्दों भें िेठज ने उि ऩैगाभ की सिपारयर् की थ ।

योदहण गारों ऩय हाथ यखकय िोचने रग । नयोत्तभदाि की तस्व य

उिकी आॉखों के िाभने आ खड़ हुई। उनकी वह प्रेभ की फातें , ण्जनका
सिरसिरा फम्फई िे ऩन
ू ा तक नह़ीॊ टूटा था, कानों भें गॊज
ू ने रग ।ॊ उिने एक
ॉँ ऱी औय उदाि होकय चायऩाई ऩय रेट गई।
ठडड ि ि

ि

5

यस्वत

ऩाठर्ारा भें एक फाय कपय िजावट औय िपाई के दृश्म

ददखाई दे यहे हैं। आज योदहण की र्ाद़ी का र्ब
ु ददन। र्ाभ का

वक्त, फिन्द्त का िह
ु ाना भौिभ। ऩाठर्ारा के दायो-द़ीवाय भस्
ु कया यहे हैं औय
हया-बया फग चा पूरा नह़ीॊ िभाता।

चन्द्रभा अऩन फायात रेकय ऩयू फ की तयप िे ननकरा। उि वक्त

ॉँ
भॊगराचयण का िह
औय हल्के-हल्के हवा के
ु ाना याग उि रऩहऱी च दन

झोकों भें रहयें भायने रगा। दल्
ू हा आमा, उिे दे खते ह़ी रोग है यत भें आ
गए। मह नयोत्तभदाि थे।

दल्
ू हा भडडऩ के न चे गमा। योदहण की भ ॉँ अऩने को योक न िकी,

उि वक्त जाकय िेठ ज के ऩैय ऩय थगय ऩड़ । योदहण की आॉखों िे प्रेभ
औय आन्द्दद के आॉिू फहने रगे।

भडडऩ के न चे हवन-कुडड फना था। हवन र्र
ु हुआ, खुर्फू की रऩेटें
हवा भें उठीॊ औय िाया भैदान भहक गमा। रोगों के ददरो-ददभाग भें ताजग
की उभॊग ऩैदा हुई।
कपय िॊस्काय की फाय़ी आई। दल्
ू हा औय दल्
ु हन ने आऩि भें हभददी;
ण्जम्भेदाय़ी औय वपादाय़ी के ऩववत्र र्ब्द अऩन जफानों िे कहे । वववाह की

वह भफ
ु ायक जॊज य गरे भें ऩड़ ण्जिभें वजन है , ितत है , ऩाफण्न्द्दम ॉँ हैं
38

रेककन वजन के िाथ िख
ु औय ऩाफण्न्द्दमों के िाथ ववश्वाि है। दोनों ददरों
भें उि वक्त एक नम , फरवान, आण्त्भक र्ण्क्त की अनब
ु नू त हो यह़ी थ ।

जफ र्ाद़ी की यस्भें खत्भ हो गम ॊ तो नाच-गाने की भजसरि का दौय

आमा। भोहक ग त गॉज
ू ने रगे। िेठ ज थककय चयू हो गए थे। जया दभ

रेने के सरए फाग चे भें जाकय एक फेंच ऩय फैठ गमे। ठडड -ठडड हवा आ
यह़ी आ यह़ी थ । एक नर्ा-िा ऩैदा कयने वाऱी र्ाण्न्द्त चायों तयप छाम हुई
थ । उि वक्त योदहण उनके ऩाि आम औय उनके ऩैयों िे सरऩट गम । िेठ

ज ने उिे उठाकय गरे िे रगा सरमा औय हॉ िकय फोरे—क्मों, अफ तो तुभ
भेय़ी अऩन फेट़ी हो गम ॊ?

--जभाना, जून १९१४

39

कमों का र्ल
आदसभमों के ऩयखने की िनक यह़ी है औय अनब
ु व के आधाय
भझेऩयु हभेकहर्ािकता
हूॉ कक मह अध्ममन ण्जतना भनोयॊ जक, सर्क्षाप्रद औय
उदधाटनों िे बया हुआ है , उतना र्ामद औय कोई अध्ममन न होगा। रेककन
अऩने दोस्त रारा िाईंदमार िे फहुत अिे तक दोस्त औय फेतकल्रप
ु ी के
िम्फन्द्ध यहने ऩय ब भझ
फ र्य़ीय भें
ु े उनकी थाह न सभऱी। भझ
ु े ऐिे दफ
ु र
ज्ञाननमों की-ि र्ाण्न्द्त औय िॊतोष दे खकय आश्चमफ होता था जो एक़ नाजक

ऩौधे की तयह भि
ु फतों के झोंकों भें ब अचर औय अटर यहता था। ज्मों

वह फहुत ह़ी भाभर
ू ़ी दयजे का आदभ था ण्जिभें भानव कभजोरयमों की कभ
न थ । वह वादे फहुत कयता था रेककन उन्द्हें ऩयू ा कयने की जरयत नह़ीॊ
िभझता था। वह सभ्माबाष न हो रेककन िच्चा ब न था। फेभयु ौवत न हो

रेककन उिकी भयु ौवत नछऩ यहत थ । उिे अऩने कत्तफव्म ऩय ऩाफन्द्द यखने
के सरए दफाव ओय ननगयान की जरुयत थ , ककपामतर्ाय़ी के उिर
ू ों िे
फेखफय, भेहनत िे ज

चयु ाने वारा, उिर
ू ों का कभजोय, एक ढ़ीरा-ढारा

भाभर
ू ़ी आदभ था। रेककन जफ कोई भि
ु फत सिय ऩय आ ऩड़त तो उिके

ददर भें िाहि औय दृढता की वह जफदफ स्त ताकत ऩैदा हो जात थ ण्जिे
र्ह़ीदों का गण
ु कह िकते हैं। उिके ऩाि न दौरत थ न धासभफक ववश्वाि,

जो ईश्वय ऩय बयोिा कयने औय उिकी इच्छाओॊ के आगे सिय झक
ु ा दे ने का

स्त्रोत है । एक छोट़ी-ि कऩड़े की दक
ु ान के सिवाम कोई ज ववका न थ ।

ऐि हारतों भें उिकी दहम्भत औय दृढता का िोता कह ॉँ नछऩा हुआ है, वह ॉँ
तक भेय़ी अन्द्वेषण-दृण्र्षट नह़ीॊ ऩहुॉचत थ ।

फा

ऩ के भयते ह़ी भि
ु फतों ने उि ऩय छाऩा भाया कुछ थोड़ा-िा कजफ
ववयाित भें सभरा ण्जिभें फयाफय फढते यहने की आश्चमफजनक र्ण्क्त

नछऩ हुई थ । फेचाये ने अब फयि िे छुटकाया नह़ीॊ ऩामा था कक भहाजन
ने नासरर् की औय अदारत के नतरस्भ अहाते भें ऩहुॉचते ह़ी मह छोट़ी-ि
हस्त इि तयह पूऱी ण्जि तयह भर्क परत है। डडग्र हुई। जो कुछ जभा-

जथा थ ; फतफन-ब ड़ेंॉँ , ह डॉँ -तवा, उिके गहये ऩेट भें िभा गमे। भकान ब न
40

फचा। फेचाये भि
ु फतों के भाये िाईंदमार का अफ कह़ीॊ दठकाना न था। कौड़ -

कौड़ को भह
ु ताज, न कह़ीॊ घय, न फाय। कई-कई ददन पाके िे गज
ु य जाते।

अऩन तो खैय उन्द्हें जया ब कपक्र न थ रेककन फ व थ , दो-त न फच्चे थे,

उनके सरए तो कोई-न-कोई कपक्र कयन ऩड़त थ । कुनफे का िाथ औय मह
फेियोिाभान , फड़ा ददफ नाक दृश्म था। र्हय िे फाहय एक ऩेड़ की छ हॉँ भें मह
आदभ अऩन भि
ु फत के ददन काट यहा था। िाये ददन फाजायों की खाक
छानता। आह, भैंने एक फाय उि ये रवे स्टे र्न ऩय दे खा। उिके सिय ऩय एक

बाय़ी फोझ था। उिका नाजग
ु , िख
ु -िवु वधा भें ऩरा हुआ र्य़ीय, ऩि नाऩि ना हो यहा था। ऩैय भण्ु श्कर िे उठते थे। दभ पूर यहा था रेककन चेहये

िे भदाफना दहम्भत औय भजफत
ू इयादे की योर्न टऩकत थ । चेहये िे ऩण
ू फ
िॊतोष झरक यहा था। उिके चेहये ऩय ऐिा इत्भ नान था कक जैिे मह़ी

उिका फाऩ-दादों का ऩेर्ा है । भैं हैयत िे उिका भॊह
ु ताकता यह गमा। दख

भें हभददी ददखराने की दहम्भत न हुई। कई भह़ीने तक मह़ी कैकपमत यह़ी।
आखखयकाय उिकी दहम्भत औय िहनर्ण्क्त उिे इि कदठन दग
फ घाट़ी िे
ु भ
फाहय ननकर राम ।

थो


ड़े ह़ी ददनों के फाद भि
ु फतों ने कपय उि ऩय हभरा ककमा। ईश्वय
ऐिा ददन दश्ु भन को ब न ददखरामे। भैं एक भह़ीने के सरए फम्फई

चरा गमा था, वह ॉँ िे रौटकय उििे सभरने गमा। आह, वह दृश्म माद
कयके आज ब योंगटे खड़े हो जाते हैं। ओय ददर डय िे क ऩॉँ उठता है । िफ
ु ह
का वक्त था। भैंने दयवाजे ऩय आवाज द़ी औय हभेर्ा की तयह फेतकल्रप

अन्द्दय चरा गमा, भगय वह ॉँ िाईंदमार का वह हॉ िभख
चेहया, ण्जि ऩय

भदाफना दहम्भत की ताजग झरकत थ , नजय न आमा। भैं एक भह़ीने के

फाद उनके घय जाऊॉ औय वह आॉखों िे योते रेककन होंठों िे हॉ िते दौड़कय
भेये गरे सरऩट न जाम! जरय कोई आपत है । उिकी फ व सिय झक
ु ामे

आम औय भझ
ु े उिके कभये भें रे गम । भेया ददर फैठ गमा। िाईंदमार एक

चायऩाई ऩय भैरे-कुचैरे कऩड़े रऩेटे, आॉखें फन्द्द ककमे, ऩड़ा ददफ िे कयाह यहा

था। ण्जस्भ औय त्रफछौने ऩय भण्क्खमों के गच्
ु छे फैठे हुए थे। आहट ऩाते ह़ी
ॉँ यह
उिने भेय़ी तयप दे खा। भेये ण्जगय के टुकड़े हो गमे। हड्डडमों का ढ चा
गमा था। दफ
फ ता की इििे ज्मादा िच्च
ु र
41

औय करुणा तस्व य नह़ीॊ हो

िकत । उिकी फ व ने भेय़ी तयप ननयार्ाबय़ी आॉखों िे दे खा। भेय़ी आॉिू बय
ॉँ भें फ भाय़ी को ब भण्ु श्कर िे जगह सभरत
आमे। उि सिभटे हुए ढ चे
होग , ण्जन्द्दग का क्मा ण्जक्र! आखखय भैंने ध ये ऩक
ु ाया। आवाज िन
ु ते ह़ी
वह फड़ -फड़ आॉखें खर
ु गम ॊ रेककन उनभें ऩ ड़ा औय र्ोक के आॉिू न थे,
िन्द्तोष औय ईश्वय ऩय बयोिे की योर्न थ औय वह ऩ रा चेहया! आह, वह

गम्ब य िॊतोष का भौन थचत्र, वह िॊतोषभम िॊकल्ऩ की िज व स्भनृ त। उिके
ऩ रेऩन भें भदाफना दहम्भत की राऱी झरकत थ । भैं उिकी ियू त दे खकय

घफया गमा। क्मा मह फझ
ु ते हुए थचयाग की आखखय़ी झरक तो नह़ीॊ है ?
भेय़ी िहभ हुई ियू त दे खकय वह भस्
ु कयामा औय फहुत ध भ आवाज
भें फोरा—तुभ ऐिे उदाि क्मों हो, मह िफ भेये कभों का पर है ।


गय कुछ अजफ फदककस्भत आदभ था। भि
ु फतों को उििे कुछ खाि

भह
ु ब्फत थ । ककिे उम्भ द थ कक वह उि प्राणघातक योग िे भण्ु क्त

ऩामेगा। डाक्टयों ने ब जवाफ दे ददमा था। भौत के भॊह
ु िे ननकर आमा।

अगय बववर्षम का जया ब ज्ञान होता तो िफिे ऩहरे भैं उिे जहय दे दे ता।

आह, उि र्ोकऩण
ू फ घटना को माद कयके करेजा भॊह
ु को आता है । थधककाय
है इि ण्जन्द्दग ऩय कक फाऩ अऩन आॉखों िे अऩन इकरौते फेटे का र्ोक
दे खे।

कैिा हॉ िभख
ु , कैिा खूफियू त, होनहाय रड़का था, कैिा िर्
ु र, कैिा

भधयु बाष , जासरभ भौत ने उिे छ टॉँ सरमा। प्रेग की दहु ाई भच हुई थ ।
र्ाभ को थगल्ट़ी ननकऱी औय िफ
ु ह को—कैि भनहूि, अर्ब
ु िफ
ु ह थ —वह

ण्जन्द्दग िफेये के थचयाग की तयह फझ
ु गम । भैं उि वक्त उि फच्चे के ऩाि
फैठा हुआ था औय िाईंदमार द़ीवाय का िहाया सरए हुए खाभोर्ा आिभान
की तयप दे खता था। भेय़ी औय उिकी आॉखों के िाभने जासरभ औय फेयहभ
भौत ने उि फचे को हभाय़ी गोद िे छीन सरमा। भैं योते हुए िाईंदमार के
गरे िे सरऩट गमा। िाये घय भें कुहयाभ भचा हुआ था। फेचाय़ी भ ॉँ ऩछाड़ें खा
यह़ी थ , फहनें दौड-दौड़कय बाई की रार् िे सरऩटत थ ॊ। औय जया दे य के

सरए ईर्षमाफ ने ब िभवेदना के आगे सिय झक
ु ा ददमा था—भह
ु ल्रे की औयतों
को आॉि फहाने के सरए ददर ऩय जोय डारने की जरयत न थ ।
42

जफ भेये आॉिू थभे तो भैंने िाईंदमार की तयप दे खा। आॉखों भें तो

आॉिू बये हुए थे—आह, िॊतोष का आॉखों ऩय कोई फि नह़ीॊ, रेककन चेहये ऩय
भदाफना दृढता औय िभऩफण का यॊ ग स्ऩर्षट था। इि दख
ु की फाढ औय तप
ू ानों
भे ब र्ाण्न्द्त की नैमा उिके ददर को डूफने िे फचामे हुए थ ।
इि दृश्म ने भझ
ु े चककत नह़ीॊ स्तण्म्बत कय ददमा। िम्बावनाओॊ की
ि भाएॉ ककतन ह़ी व्माऩक हों ऐि हृदम-रावक ण्स्थनत भें होर्-हवाि औय
इत्भ नान को कामभ यखना उन ि भाओॊ िे ऩये है । रेककन इि दृण्र्षट िे

िाईंदमार भानव नह़ीॊ, अनत-भानव था। भैंने योते हुए कहा—बाईिाहफ, अफ
िॊतोष की ऩय़ीक्षा का अविय है। उिने दृढता िे उत्तय ददमा—ह ,ॉँ मह कभों
का पर है।

भैं एक फाय कपय बौंचक होकय उिका भॊह
ु ताकने रगा।

रे


ककन िाईंदमार का मह तऩण्स्वमों जैिा धैमफ औय ईश्वये च्छा ऩय बयोिा

अऩन आॉखों िे दे खने ऩय ब भेये ददर भें िॊदेह फाकी थे। भभ
ु ककन है ,

जफ तक चोट ताज है िब्र का फाॉध कामभ यहे । रेककन उिकी फनु नमादें दहर
गम हैं, उिभें दयायें ऩड़ गई हैं। वह अफ ज्मादा दे य तक दख
ु औय र्ोक की
जहयों का भक
ु ाफरा नह़ीॊ कय िकता।

क्मा िॊिाय की कोई दघ
फ ना इतन हृदमरावक, इतन ननभफभ, इतन
ु ट

कठोय हो िकता है ! िॊतोष औय दृढता औय धैमफ औय ईश्वय ऩय बयोिा मह
िफ उि आॉध के िभान घाि-पूि िे ज्मादा नह़ीॊ। धासभफक ववश्वाि तो
क्मा, अध्मात्भ तक उिके िाभने सिय झक
ु ा दे ता है । उिके झोंके आस्था
औय ननर्षठा की जड़ें दहरा दे ते हैं।

रेककन भेया अनभ
ु ान गरत ननकरा। िाईंदमार ने ध यज को हाथ िे

न जाने ददमा। वह फदस्तूय ण्जन्द्दग के काभों भें रग गमा। दोस्तों की

भर
ु ाकातें औय नद़ी के ककनाये की िैय औय तपय़ीह औय भेरों की चहरऩहर, इन ददरचण्स्ऩमों भें उिके ददर को ख ॊचने की ताकत अफ ब फाकी

थ । भैं उिकी एक-एक कक्रमा को, एक-एक फात को गौय िे दे खता औय

ऩढता। भैंने दोस्त के ननमभ-कामदों को बर
ु ाकय उिे उि हारत भें दे खा
जह ॉँ उिके ववचायों के सिवा औय कोई न था। रेककन उि हारत भें ब
43

उिके चेहये ऩय वह़ी ऩर
ु षोथचत धैमफ था औय सर्कवे-सर्कामत का एक र्ब्द
ब उिकी जफान ऩय नह़ीॊ आमा।

ि फ च भेय़ी छोट़ी रड़की चन्द्रभख
ननभोननमा की बें ट चढ गम । ददन

के धॊधे िे पुयित ऩाकय जफ भैं घय ऩय आता औय उिे प्माय िे गोद भें

उठा

रेता तो भेये हृदम को जो आनन्द्द औय आण्त्भक र्ण्क्त सभरत थ ,

उिे र्ब्दों भें नह़ीॊ व्मक्त कय िकता। उिकी अदाएॉ सिपफ ददर को
रब
ु ानेवाऱी नह़ीॊ गभ को बर
ु ानेवाऱी हैं। ण्जि वक्त वह हुभककय भेय़ी गोद
भें आत तो भझ
ु े त नों रोक की िॊऩण्त्त सभर जात थ । उिकी र्यायतें
ककतन

भनभोहक थ ॊ। अफ हुक्के भें भजा नह़ीॊ यहा, कोई थचरभ को
थगयानेवारा नह़ीॊ! खाने भें भजा नह़ीॊ आता, कोई थाऱी के ऩाि फैठा हुआ
उि ऩय हभरा कयनेवारा नह़ीॊ! भैं उिकी रार् को गोद भें सरमे त्रफरखत्रफरखकय यो यहा था। मह़ी ज चाहता था कक अऩन ण्जन्द्दग का खात्भा

कय दॉ ।ू मकामक भैंने िाईंदमार को आते दे खा। भैंने पौयन आॉिू ऩोंछ डारे
औय उि नन्द्ह़ीॊ-ि जान को जभ न ऩय सरटाकय फाहय ननकर आमा। उि
धैमफ औय िॊतोष के दे वता ने भेय़ी तयप िॊवेदनर् र की आॉखों िे दे खा औय

भेये गरे िे सरऩटकय योने रगा। भैंने कब उिे इि तयह च खें भायकय योते

नह़ीॊ दे खा। योते-योते उि दहचककम ॉँ फॊध गम ,ॊ फेचन
ै िे फेिध
ु औय फेहाय हो
गमा। मह वह़ी आदभ है ण्जिका इकरौता फेटा भया औय भाथे ऩय फर नह़ीॊ
आमा। मह कामाऩरट क्मों?

ि र्ोक ऩण
ददर िम्हरने रगा,
ू फ घटना के कई ददन फाद जफकक दख

एक योज हभ दोनों नद़ी की िैय को गमे। र्ाभ का वक्त था। नद़ी कह़ीॊ

िन
ु हय़ी, कह़ीॊ न ऱी, कह़ीॊ काऱी, ककि थके हुए भि
ु ाकपय की तयह ध ये -ध ये
फह यह़ी थ । हभ दयू जाकय एक ट़ीरे ऩय फैठ गमे रेककन फातच त कयने को
ज न चाहता था। नद़ी के भौन प्रवाह ने हभको ब अऩने ववचायों भें डुफो
ददमा। नद़ी की रहयें ववचायों की रहयों को ऩैदा कय दे त हैं। भझ
ु े ऐिा

भारभ
रहयों की गोद भें फैठी भस्
ू हुआ कक प्माय़ी चन्द्रभख

ु कया यह़ी है । भैं
चौंक ऩड़ा ओय अऩने आॉिओ
ु ॊ को नछऩाने के सरए नद़ी भें भॊह
ु धोने रगा।
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िाईंदमार ने कहा—बाईिाहफ, ददर को भजफत
ू कयो। इि तयह कुढोगे तो
जरय फ भाय हो जाओगे।

भैंने जवाफ ददमा—ईश्वय ने ण्जतना िॊमभ तम्
ु हें ददमा है , उिभें िे

थोड़ा-िा भझ
ु े ब दे दो, भेये ददर भें इतन ताकत कह ।ॉँ
िाईंदमार भस्
ु कयाकय भेय़ी तयप ताकने रगे।

भैंने उि सिरसिरे भें कहा—ककताफों भें तो दृढता औय िॊतोष की

फहुत-ि कहाननम ॉँ ऩढ़ी हैं भगय िच भानों कक तुभ जैिा दृढ, कदठनाइमों भें
ि धा खड़ा यहने वारा आदभ आज तक भेय़ी नजय िे नह़ीॊ गुजया। तुभ
जानते हो कक भझ
ु े भानव स्वबाव के अध्ममन का हभेर्ा िे र्ौक है रेककन

भेये अनब
ु व भें तुभ अऩन तयह के अकेरे आदभ हो। भैं मह न भानॉग
ू ा कक

तम्
ु हाये ददर भें ददफ औय घर
ु ावट नह़ीॊ है । उिे भैं अऩन आॉखों िे दे ख चक
ु ा

हूॉ। कपय इि ज्ञाननमों जैिे िॊतोष औय र्ाण्न्द्त का यहस्म तभ
ु ने कह ॉँ नछऩा
यक्खा है ? तुम्हें इि िभम मह यहस्म भझ
ु िे कहना ऩड़ेगा।
िाईंदमार कुछ िोच-ववचाय भें ऩड़ गमा औय जभ न की तयप ताकते

हुए फोरा—मह कोई यहस्म नह़ीॊ, भेये कभों का पर है।
मह वाक्म भैंने चौथ फाय उिकी जफान िे िन
ु ा औय फोरा—ण्जन,

कभों का पर ऐिा र्ण्क्तदामक है, उन कभों की भझ
ु े ब कुछ द़ीक्षा दो। भैं
ऐिे परों िे क्मों वॊथचत यहूॉ।

िाईंदमार ने व्माथाऩण
ू फ स्वय भें कहा—ईश्वय न कये कक तभ
ु ऐिा कभफ

कयो औय तम्
ु हाय़ी ण्जन्द्दग ऩय उिका कारा दाग रगे। भैंने जो कुछ ककमा

है , व भझ
ु े ऐिा रज्जाजनक औय ऐिा घखृ णत भारभ
ू होता है कक उिकी

भझ
ु े जो कुछ िजा सभरे, भैं उिे खुर् के िाथ झेरने को तैमाय हूॉ। आह!
भैंने एक ऐिे ऩववत्र खानदान को, जह ॉँ भेया ववश्वाि औय भेय़ी प्रनतर्षठा थ ,
अऩन वािनाओॊ की गन्द्दग भें सरथेड़ा औय एक ऐिे ऩववत्र हृदम को ण्जिभें

भह
ु ब्फत का ददफ था, जो िौन्द्दमफ-वादटका की एक अनोख -नम खखऱी हुई
कऱी थ , औय िच्चाई थ , उि ऩववत्र हृदम भें भैंने ऩाऩ औय ववश्वािघात
का फ ज हभेर्ा के सरएफो ददमा। मह ऩाऩ है जो भझ
ु िे हुआ है औय उिका
ऩल्रा उन भि
ु फतों िे फहुत बाय़ी है जो भेये ऊऩय अफ तक ऩड़ हैं मा आगे

चरकय ऩडेंग । कोई िजा, कोई दख
ु , कोई क्षनत उिका प्रामण्श्चत नह़ीॊ कय
िकत ।

45

भैंने िऩने भें ब न िोचा था कक िाईंदमार अऩने ववश्वािों भें इतना

दृढ है । ऩाऩ हय आदभ िे होते हैं, हभाया भानव ज वन ऩाऩों की एक रम्फ

िच
ू है, वह कौन-िा दाभन है ण्जि ऩय मह कारे दाग न हों। रेककन ककतने
ऐिे आदभ

हैं जो अऩने कभों की िजाओॊ को इि तयह उदायताऩव

ू क

भस्
ु कयाते हुए झेरने के सरए तैमाय हों। हभ आग भें कूदते हैं रेककन जरने
के सरए तैमाय नह़ीॊ होते।
भैं िाईंदमार को हभेर्ा इज्जत की ननगाह िे दे खता हूॉ, इन फातों को
िन
ु कय भेय़ी नजयों भें उिकी इज्जत नतगुन हो गम । एक भाभर
ू ़ी

दनु नमादाय आदभ के ि ने भें एक पकीय का ददर नछऩा हुआ था ण्जिभें
ज्ञान की ज्मोनत चभकत थ । भैंने उिकी तयप श्रिाऩण
ू फ आॉखों िे दे खा औय

उिके गरे िे सरऩटकय फोरा—िाईंदमार, अफ तक भैं तम्
ु हें एक दृढ स्वबाव
का आदभ

िभझता था, रेककन आज भारभ
ू हुआ कक तभ
ु उन ऩववत्र
आत्भाओॊ भें हो, ण्जनका अण्स्तत्व िॊिाय के सरए वयदान है । तुभ ईश्वय के
िच्चे बक्त हो औय भैं तुम्हाये ऩैयों ऩय सिय झक
ु ाता हूॉ।

46

—उदफ ू ‘प्रेभ ऩच ि ’ िे

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