जब़ु ैदा, करिश्मा, किीना, नतिमा

चलो आज सबको तदखा दूं तसतनमा
मेिी उमि क्या है ये क्यों पचहति हो
कहीं इश़् का जोश होिा है धीमा
कि गयी घि मेिा खाली
मेिे सो जाने के बाद
मझ़ु को लगा था तक क़ुछ होगा
िेिे आने के बाद
मैने दोनो बाि थाने में तलखाई थी रिपोर्ट
एक िेिे आने से पहले, एक िेिे जाने के बाद
याद आने लगे चाचा घातलब
या एलाही! ये माजिा क्या है?
िाकिा हूँ हि एक लड़की को
विना इन आूँखों का फायदा क्या है
कपड़ो की आबो िाब तदखाने में िह गया
क़ुछ खबसििो को लभ़ु ाने में िह गया
मग़ु े की र्ाूँग खा गये शादी में सािे लोग
मैं दोस्िों से हाथ तमलने में िह गया…

[मश
़ु ायिों में पोलीस वालों की 'ि्यर्ी' लगिी है
औि वो घि जािे जािे खद़ु शायि बन जािे हैं. इस मौजउ पि एक शेि]

िफ़्िा िफ़्िा हि पोलीस वाले को शायि कि तदया
महतफल-ए-शेि-ओ-स़ुहहन में भेज कि सिकाि ने
एक ़ै दी सब़ु ह को फातसस लगा कि मि गया
िाि भि ग़जलें सऩु ाई उस को थानेदाि ने
एक शाम तकसी बाजम में जिे जो खो गये,
हम ने कहा बिाइए घि कै से जाएूँगे
कहने लगे के शेि सऩु ािे िहो यूँ ही
तगनिे नहीं बनेंगे अभी इिने आएूँगे
बोला दक
़ु ानदाि के क्या चातहए िम़्ु हें?
जो भी कहोगे मेिी दक
़ु ान पि वो पाओगे
मैंने कहा के क़ुत्ते के खाने का 'के क' है?
बोला यहीं पे खाओगे या घि लेके जाओगे?

आतश़ी भी दोस्िो क्या क्लॅतसकल सूंगीि थी
िाग िो ओही जाने क्या था, जाने क्या गािे िहे
तजदूं गी भि इश़् का इजहाि किने के तलए
वो भी ह़लािे िहे औि हम भी ह़लािे िहे…

Nikhat Iftikhar Poetry

महबब वादा कि के भी आया ना दोस्िो
क्या क्या तकया ना हम ने यहाूँ उस के प्याि में ,
मघ़ु े चि़ु ा के लाए थे जो चाि हम
"दो आिज मे कर् गये, दो इिूं जाि मे"

चाहे नजिें हों आसमानों पि
पावूं लेतकन जमीन पि ितखए

मच्छि ने जो कर्ा,
तदल में मेिे जानूं था,
खज़ु ली इिनी हुई के , तदल बेसक
़ु न था,
पकड़ा िो छ्चोड़ तदया, यह सोचकि,
सेयेल की िागो में,
अपना ही खन था…
िे ल के तिब्बे में ये त़स्सा हुआ
एक बच्चा जोि से िोने लगा
माूँ ने समझाने की कोतशश की बहि
उस को बहलाने की कोतशश की बहि
थक के आतहहि लोरियाूँ गाने लगी
तबजतलयाूँ कानो पि बिसाने लगी
दस तमतनर् िक लोरियाूँ जब वो गा चक
़ु ी
तिल-तमला कि बोल उठा एक आदमी
"बहनजीई, इिना किम अब तकतजीए
आप इस बच्चे को िोने दीजीये!"

शोख को आतजम ए सफि ितखए
बे खबि बन के सब खबि ितखए

मझ़ु को तदल में अगि बसाना है
ऐक सेहिा को अपने घि ितखए
कोई नशा हो र्र् जािा है
कब िला़ खद़ु को बेख़बि ितखए
जेनी तकस वक्त कच किना हो
अपना समान मख़़्ु र्ासीि ितखए
तदल को खद़ु तदल से िाह होिी है
तकस तलए नाम-आ-बि ितखए
बाि है क्या यह कोन पिखेगा
आप लहजे को पि-असि ितखए
ऐक ऱ्ुक मझ़ु को देखे जािी हैं
अपनी नजिों पे क़ुछ नजि ितखए