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Hansate Jakhm

Hansate Jakhm

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Hindi novel Hanste Jakhma by Nandlal Bharti - नन्दलाल भारती का हिन्दी उपन्यास - हँसते जख़्म
Hindi novel Hanste Jakhma by Nandlal Bharti - नन्दलाल भारती का हिन्दी उपन्यास - हँसते जख़्म

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09/15/2013

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1

हं सते जC म
( कहानी सं0ह )


न7 दलाल भारती



9काशक
2
मनोरमा साÍहc य
सेवा


हं सते जC म
।कहानी सं0ह।

लेखक
न7 दलाल भारती

सवाÍधकार- -- -लेखकाधीन

इÞ टरनेट 9काशन वष -2009

तकनीक| सहयोग
3
आजाद कमार भारती

Îच³कार
शÎश भारती


9काशक
मनोरमा साÍहc य सेवा
आजाद द|प,15-एम-वीणा नगर
इंदौर ।म9।452010
दरभाष

-0731-4057553चÎलतवाता -9753081066

1 11 1- -- -अÍतÍथ
बड़ी ज~ द| आ गये । इतनी तेज धप म आने क| 4 या

जFरत थी । ल लग गयी तो । िजससे

Îमलने गये थे उनके घर म ताला लगा था 4 या ?वे कै से लोग है जो आग बरसती दोपहर म तÎनक
छांव म ठहरने को नह|ं कहा । 4 या वे अÎतÎथ दे वो भवः के महाम7 ³ को भल गये है

?
द|पेशबाब

-भागवान दो Îमनट चै न से सांस तो ले लेने दे ती । 1 क

टर खड़ा नह|ं कर पाया तम हो

Íक सवाल पर सवाल दागे◌े जा रह| हो ।
Í9या-गलती हो गयी । 1 क

टर खड़ा करने म मदद कFं 4 या ?
द|पेश-नह|ं । कपा करके एक Îगलास ठÞ डे

पानी और आधी कप चाय का इंतजाम कर गर|ब पर
मेहरबानी करो । ।
Í9या-आप बैठो म पांच Îमनट म चाय और ठÞ डा पानी लेकर आती हं तब

तक हाथ मंह धो लो ।

4
द|पेश-जैसे गह 9ब7 ध

क महोदया का आदे श ।
Í9या-बस अभी कछ

नह|ं चाय पीते -पीते बात करोगे तो और अ¯ छे लगोगे । म आती हं ।

द|पेश हाथ मंह धोकर बैठा भी

नह|ं क| । Í9या पानी औ◌ा चाय ले कर हािजर हो गयी ।द|पेश
बाथFम के ◌े बाहर Îनकलते ह| Í9या बोल| ल|िजये जनाब चाय पानी हािजर है ।
द|पेश-रख दो से7 टर टे बल पर ।
Í9या-बैठो तो सह| ।
द|पेश-बैठं गा

नह|ं तो इस दोपहर| म जाउ◌ू◌ंगा कहां ।
Í9या-हां एक जगह आने -जाने म सींक जो गये ।
द|पेश-जले पर नमक ना डालो । कहते हए पानी पीकर चाय पीने लगा ।

Í9या-इतनी खामोशी 4 य| ?
द|पेश-अनसना कर Íदया ।

Í9या-9ाणनाथ कौन सी ऐसी खता हो गयी Íक आपने मौनdत धारण कर Îलया ।
द|◌ेपेश-मझसे खता हो गयी ।

Í9या-नाराज 4 यो होते हो जी ।
द|पेश-4 या कFं नाचं गाउ◌ू◌ं ज° न

मनाउ◌ू◌ं ।
Í9या-वह| अ¯ छा रहे गा ।
द|पेश-4 या म ट¯ छा बरा भी

नह|ं समझता 4 या ?
Í9या-4 या खफा हो ।
द|पेश-खफा होकर भी 4 या कर सकता हं । लोग| को बदल तो

नह|ं सकता । जहां पर अÎतÎथ दे वा
भवः या स1 वा

गत Îलख होना चाÍहये वहां पर अब शभ लाभ Îलखा जाने लगा है । आने वाला चाहे

¯ यास से मर 4 यो नह|ं रहा हो । लोग पानी तक के Îलये नह|ं पछते 4 या

लोग हो गये ह । Íबना
¯ यि4 तगत लाभ के तो आज लोग पानी पीलाने को जहमत नह|ं उठा रहे ह ।
Í9या-मझसे ऐसी ग1 ता
ु ु
खी हो गयी 4 या ?
द|पेश-नह|ं पर त+ हा

रे सवाल| का जबाब तो है ।
Í9या-मेरे सवाल का जबाब भला ये कै से हो सकता है ?
द|पेश-भागवान यह| सह| है । अब तो घÞ टा भर का अÎतÎथ भी बोझ लगने लगा है । दाना-पानी तो
दर कछ लोग दौलत और Fतबे के अÎभमान म पानी तो दर ठ¹ क
ू ू ु
से बात करने म तौह|नी
समझने लगे है ।
Í9या-4 या हम जैसे पÍरवार म ऐसा
द|पेश-दे वी मीÍडल 4 लास के लोगो के बीच अभी भी अÎतÎथ दे व| भवः का भाव है पर
Í9या-पर का 4 या मतलब । बताओं ना कहां मर गया है अÎतÎथ दे वो भवः का भाव ।
द|पेश-दौलत और Fतबे के घमÞ ड म चर लोग| के Íदल| म और उनक| चौखटो पर भी ।

Í9या-अ¯ छा समझ गयी ।
द|◌ेपेश-कछ क

हा नह|ं लेÍकन तम सब समझ गयी ।

Í9या-नह|ं समझी । आप बता दो ।
द|पेश-4 यो बझनी बझा रह| हो ।
ु ु

5
ि◌◌्र9या-दे खो जी जो कहना है । कह दो घर का सब काम पड़ा है । ब¯ चो अभी ना° ता मांगेगे ।
आपके लाडले मैगी लाये है । उठते ह| उ7 हे चाÍहये । कोई अÎतÎथ आ गया तो उसक| आवभगत
भी तो करनी होगी । दे ख रहे हो घर म Íकतनी धल भर गयी है । Íदन रात सड़

क पर गाÍड़ या
दौड़ती रहती है । धल अपने घरो म भरती है । कालोनाइजर पैसा लेकर सड़

क भी नह|ं बनाया ।
पैसा वो डकार गया हम धल फांक रहे है ।

द|पेश- यह| तो है आज के यग म कर रहा है आ

दमी । अपना फायदा िजसम हो वह| कर रहा है
चाहे इसके Îलये लाश पर से 4 यो ना जाना पड़े ।
Í9या-अÎतÎथ दे वो भवः का 4 या हआ ।

द|पेश-Í9या का हाथ पकड़कर Îचरौर| करते हए बोला मझे एक वचन दो ।

Í9या-Íकतनी बार वचन लोगे ?
द|पेश- म मजाक नह|ं कर रहा हं । मझे


वचन दो Íक इस चौखट से कोई आदमी ¯ यासा नह|ं
जायेगा ।
Í9या-आज तक तो कोई गया नह|ं । मेरे जीते जी तो ऐसा अधम हो नह|ं सके गा । घर आया हआ

मेहमान तो भगवान होता है । भला भगवान का अनादर 4 य| । अपने ब¯ चे भी जानने समझने
लायक हो गये है । उनम भी अ¯ छे इंसान के सं1 कार है । वे अÎतÎथ और बड़े बढो का सc का


करना जानते है । आप तो असल| बात बताओ । अÎतÎथ भाव घायल कहां ि◌◌ो गया ?
द|◌ेपश-िजस आन7 दान7 द के घर उनके बलावे पर गया था । वे दौलत और Fतबे म बहत बड़े



आदमी है करोड़पÎत है पर उनक| चौखट से अÎतÎथ दे वो भवः का भाव उठ गया है । अरे इसी भाव
क| वजह से तो दÎनया म भारतीय पÍरवार

,पर+ परा और सं1 कार क| जयजयकार है पर लोग
मÍटयामेट कर रहे है ।
Í9या-ऐसा 4 यो कह रहे हो ।
द|पेश-ठ|क कह रहा हं और तमसे Íवनती भी कर रहा हं ।
ू ू

Í9या-Íवनती और मझसे

द|◌ेपेश-हां तमसे

। दे खना घर आये Íकसी ¯ यि4 त का जाने -अनजाने अनादर न होने पाये और ना
ह| Íकसी बड़े बढे का।

ि◌◌्र9या-4 यो इतने दखी हो । आप तो ये बताओ आन7 दा

न7 द साहब के चौखट पर आपको कै से
अÎतÎथ भाव के खन होने का एहसास हआ ।

द|पेश-वह| बता रहा हं ।

Í9या-बताओ ना ।
द|पेश-आन7 दान7 द साहब के चौखट पर अनादर गहरा घाव कर गया है आज ।
Í9या-आप तो आन7 दान7 द साहब क| बड़ी तार|फ करते हो । उनके घर Îगलास भर पानी नह|ं Îमला
। इसी जानलेवा गम| म । मेरे मना करने पर भी नह|ं माने । ठÞ डा होने पर चले गये होते तो यह
पीड़ा तो नह|ं झे लनी पड़ी होती ।
द|पेश-हां आन7 दान7 द है तार|फ के लायक पर उनक| बह आधÎनक जो है । पc थ


र| के वातानकÎलत
ु ू
शो-Fम म भी तो बैठती है ।
6
Í9या-4 या आधÎनक लोग पानी

नह|ं पीते ? खाना नह|ं खाते ? दरवाजे आये हए ¯ य

ि4 त को पानी
के पछना म आधÎनकता नंगी
ू ु
कै से हो जाती है । गये भी तो थे बढे आन7 दा

न7 द साहब के बलावे

पर ह| । करोड़पÎत आदमी है ,बेटे क| फै 4 टर| है । बह भी पc थ

र ¯ यवसाय क| मालÍकन है ।
नौकर-चाकर होने के बाद भी दरवाजे पर आये आदमी को पानी तक को नह|ं पछा जा रहा है ।

द|पेश-ठ|क कह रह| हो । सव स+ प7 न तो है पर सं1 कार चौखट से दर होता जा रहा है ।

आन7 दान7 द साहब के Íदये गये व4 त पर पहं च गया था । नौकर| ने कहा बड़े

साहब उपर है । इसी
बीच पc थर के शो-Fम के मेन-गेट से बोल| बड़े साहब नह|ं है । घÞ टे भर बाद Îमलेगे । काफ| दे र
तक खड़ा रहा पर बह ने बैठने तक को

नह|ं कह| । थक कर म शो Fम के सामने पडी कस| पर

बैठ गया इ7 तजार क| गरज से ।
Í9या-आप नीचे और वे उपर इ7 तजार कर रहे थे ।
द|पेश-हां । इसी बीच कछ 0ाहक आये । पc थ

र शो-Fम क| मालÍकन बह ने नौकरो से ठÞ डा

पानी
मंगवाया खद अपने हाथ से

पानी द| । म सखे कÞ ठ

बैठा रहा मेर| तरफ एक बार भी नह|ं दे खी ।
Í9या-बढे ससर से Îमलने म जो अड़
ू ु
चने पैदा कर रह| हो । वह भला पानी को कै से पछ सकती है ।

मझे तो लगता है बड़े

साहब उपेÍHत होगे अपने ह| Íकले म ।
द|पेश-सच आज बढे सास

-ससर

,मां-बाप के सामने यह सम1 या तो है ।
Í9या-बेटे -बहअ◌े◌ा◌ं से उपेÍHत होकर तो बढ अनाथ आ÷म म आ÷य ढढ रहे है ।

ू ू

द|◌ेपेश-हां मैने दौलत के ताड़क| छांव म सं1 कार मरते हए दे खा है । ऐसे लोग अÎतÎथ दे वो भवः

का भाव 4 या समझे गे ?
Í9या-दौलत का पहाड़खड़ा करने वाले और दसर| को दोयम दज का समझने वाले हमेशा दौलत को

ह| ललचाया आंख| से दे खते है ।आदमी क| तरफ नह|ं दे खते । दे खते भी है तो बस मतलब भर जे ब
कतरे क| तरह ।
द|पेश-सच आज आधÎनकता क| Îलबास म लोग नंगे होते और सामािजक दाÎयc व|

से दर होते जा

रहे है । उ7 हे लगता है सामािजक औपचाÍरकताये रसह|न है । दावे के साथ कह सकता हं

आन7 दान7 दसाहब भी ऐसी आहो-हवा म घट रहे होगे ।

Í9या-ठ|क कह रहे हो इसीÎलये उनका फोन भी आया था ना । बैठे -बैठे उब गया तब चला आया ।
द|पेश-म कछ कागज छोड़

कर आया था । कागज Îमलने पर फोन Íकये थे । कह रहे थे द|पेश बे टा
नीचे से 4 यो चलेगे । मै तो उपर इं7 तजार कर रहा था । ल+ बे इ7 तजार के बाद नीचे गया तो पता
चला Íक तम Íबना मझसे Îमले कागज छोड़
ु ु
कर चले गये हो ।
Í9या-कागज Íकसे सlप कर आये थे ।
द|पेश-उनक| बहरानी के सामने कागज दे ने क| बात कहा था तो उ7 हो

ने कहा था Íक भोला को दे दो
। बड़े साहब जब आयेगे तब दे दे गा ।
Í9या-भोला कौन है ।
द|पेश-Íफ~ म| म भे◌ाला कौन होता है ।
Í9या-नौकर ।
द|पेश-वह| नौकर था भोला।
Í9या-इतनी धप म बह ने Fकने को


नह|ं बोल| ।
7
द|पेश-जो बह पानी के Îलये

नह|ं पछ रह| है ।

एसीशोFम म बैठने को कहे गी 4 या ? वह भी
फटे -हाल मीÍडल 4 लास के आदमी को । पानी को पछ| ह| नह|ं बैठने को बोल सकती थी 4 या

?दो
0ाहको के Îलये दो Îगलास पानी का आड र नौकर को द| । म इतनी भयंकर गम| म सखे गले

आन7 दान7 द क| बांट जोहता रहा पर मझे पा

नी तक को नह|ं पछां । जब ¯ या

स बदा° त नह|ं हई तो

एक ¯ याउ◌ू पर जाकर पानी पीया ।
Í9या-आपको तो परा शहर जानता है । आन7 दा

न7 द साहब से Íकतनी बार तो Îमल चके है । उनके

घर भी जा चके हो इसके बाद भी पानी को

नह|ं पछ| ।

द|◌ेपेश-भागवान तÎनक पहचानती थी इसीÎलये तो कछ दे र तक Íबन बलाये मेहमान का तरह
ु ु
आन7 दा7 द साहब का इ7 तजार करने Íदया वरना भगा ने दे ती । रह| बात जानने Íक तो ब² द

जीवी
और मानवतावाद| लोग जानते पहचानते है 1 वाथ| और धं धेबाजे के बीच अपनी पहचान नह|ं ?ऐसी
जगह पहचान बनाना भी उसल के Íखलाफ है

। Íवष बोने वाले ,पद और दौलतपस7 द के बीच तो
अजनवी हं । मलाल तो इस बात का है Íक आन7 दा

न7 द साहब जैसे करोड़ो के माÎलक अपने ह|
लोग| के बीच उपेÍHत है । उनसे Îमलने वाले भी उपेHा क| Tि* ट से दे खे जा रहे है ।
Í9या-मां-बाप तो धरती के भगवान है । दरवाजे पर आया अÎतÎथ दे वता समान चाहे अमीर हो या
गर|ब ।
द|पेश-आधÎनकता और Íदखावे का Hम आज के आदमी को Íर° ते

-नाते से दर ले चा रहा

है ।आन7 दान7 द साहब भी घंट रहे होगे ।

Í9या-हां शायद । फोन पर बात तो हो गयी ना आपक| ?
द|◌ेपेश-हां हो तो गयी ।
Í9या-4 या कह ?
द|पेश-4 या कहे ग । हारे हए जआर| क| तरह खद को कोसेगे । कह रहे थे नीचे गया तो द|पेश बेटा

ु ु
आपका छोड़हआ कागज सरवेÞ ट

Íदया तब पता चला Íक घÞ टा भर इ7 तजार कर चले गये । सांर|
कहने के अलावा और कर भी 4 या सकते ह ?मैने कह Íदया साहब सांर| कहकर शÎम 7 दा न कर ।
आप तो मेरे Íपतात~ य

है ।
Í9या-कागज आप Íकसको सपद करके आये थे ।
ु ु

द|पेश-बह ने एक नौकर क| तरफ इशारा कर Íदया था उसी लड़

के को सlप कर चला आया था ।
खै र इस सब का अ7 दाजा आन7 दान7 द साहब को तो लग ह| गया होगा । कहते है आन7 दान7 द
साहब क| जब चलती थी तो उनक| चौखट पर आये हए ¯ य

ि4 त को समय के अनसार चाय ना° ता


और भोजन तक करवाया जाता था । आज बेटे बहओं के राज म अÎति³ स

को एक Îगलास पानी
तक मय् यसर नह|ं हो रहा है उसी चौखट पर ।
ि◌◌्र9या-बाप रे ऐसा वैभव Íकस काम का ?िजस चौखट पर आग7 त

क को पानी तक को नह|ं पछा

जा रहा है । भला उस घर म बड़े बजग| का 4 या
ु ु
बरा हाल होता होगा

?तभी तो हाई-फाई पÍरवार
के लोग व² दा

÷म| क| ओर Fख कर रहे है । कर भी 4 यो ना इससे तो उनके हाई-फाई 1 वाथ| बेटे -
बहओं क| 9ाइवेसी म खलल जो पडती होगी

?
द|पेश-ठ|क कह रह| हो । आन7 दान7 द साहब से म ने कहा साहब आधे घÞ टे से अÎधक दे र तक
इंतजार करके म चला आया । शो-Fम म बैठ| बडी बह मैडम जी को तो मालम था । उ7 हो


ने ह| तो
8
कहा था बड़े साहब घर म नह|ं है । तब वे बोले म ने तो नीचे सरवेÞ ट से बोल रखा था Íक आप
आने वाले है । आते ह| मेरे पास भेज दे ना बह को भी यह बात मालम थी पर बतायी 4 य|


नह|ं ?
इसके बाद उनक| आवाज टं ग गयी उनके मं ह से सांर| श« द

Îनकला और फोन का दम Îनकल गया

Í9या-सच आधÎनकता का मखौटा लगाये घर| म बस Íदखावा है । वहां न बड़
ु ु
◌़◌े -बजग|र का मन
ु ु ् -
स+ मान है ना अÎतÎथ का ह| । वहां तो सभी मतलब के तराज पर तौले जाते है ।

द|पेश-त+ हा

र| बात म स¯ चाई है । भगवान िजसको तर4 क| दे उसके अ7 दर अÎभमान न भरे ।
Í9या-आदमी के पास 7 यो -7 य| दौलत बढती है उसी अनपात म अÎभमान भी बढता है । हां कछ
ु ु
लोग अपवाद हो सकते है पर अÎधकतर लोग तो ऐसे ह| होते है । आन7 दान7 द साहब को दे खो आप
तो उनका गणगान करते

नह|ं थकते ।उनके घर म दे खो अÎतÎथ का कै सा अनादार हो रहा है । बड़े
बजग| को कौन सा मान
ु ु
-स+ मान Îमल रहा है ।
द|पेश-बड़ा आदमी तो सह| मायने म वह| है जो आदमी क| कg करना जानता हो िजसके (दय म
आदÎमयत,ममता,समाता और सq भावना ÍवराजÎत हो । आदमी धन-दौलत अथवा बड़े पद से बड़ा
नह|ं होता । आदमी का कद बड़ा होना चाÍहये । कद धन दौलत अथवा पद के अÎभमान म डबकर

नह|ं बड़ा होता । कद तो सदाचार बढाता है ,परमाथ का भाव बढाता है ,दबे कचले को उबारने क|

ललक आदमी को महान बनाती है । जो ¯ यि4 त qवार आये ¯ यि4 त को बोझ समझता है । खद

को पद और दौलत क| तला पर तौल कर बड़ा

साÍबत करता है । सचमव वह बहत नीच होता है ।

Í9या-आ² ु◌ाÎनक और पा° चाc य सं1 क

Îत के अनयाÎयय| के Îलये

बढे मां

-बाप भी बोझ हो गये होगे ।
आन7 दान7 द साहब को हं सते जE म का एहसास हआ होगा ।


द|पेश-1 क

ल| 1 तर पर नैÎतक ÎशHा का पाठ शF होना चाÍहये । िजससे ब¯ च|

म बढ| के 9Îत मान

-
स+ मान उपजे और अÎतÎथ दे व| भवः के भाव को उव रा Îमले ।
Í9या-ठ|क कह रहे हो । आधÎनकता और पा° चा

c य रं ग म रचे बसे मां-बाप अपने ब¯ च| को
नैÎतकता का पाठ पढाने से रहे । इससे ब¯ च| का दे श क| स¹ यता और सं 1 क

Îत से जड़ा

व होगा और
बड़े बजग| के 9Îत आदर का भाव भी ÍवकÎसत होगा । तभी अÎतÎथ दे व| भवः के भाव म
ु ु
अÎभवि² द

स+ भव है ।
द|◌ेपेश-ठ|क कह रह| हो यÍद सामािजक और नैÎतक म~ य|

को पतन हो गया तो न तो Íर° ते बचे गे
न आदÎमयत का स|धापन और न मांता-Íपता के 9Îत लगाव ।
Í9या-बड़े -बढ| के 9Îत आदर भाव

,मानवीय Íर° त| म समरसता,सq भावना,परमाथ के भाव के साथ
अÎतÎथ दे व| भवः का बीजारोपण आज क| पीढ| म करने क| िज+ मेदार| 1 क

ल,कालेज और पÍरवार
जैसी सं1 थाओं से साम7 ज1 य 1 थाÍपत कर उठानी होगी। तभी बड-बजग| को मान
ु ु
-स+ मान Îमल
पायेगा और अÎतÎथ दे वो भवः का भाव दे श क| मांट| से सदा 9वाÍहत होता रहे गा । दÎनया के

Îलये हमारा पÍरवार 9ेरणाPे◌ात बना रहे गा । इसक| रHा क| कसम यवा

-शि4 त को खानी पड़े गी ।
2 22 2- -- -Îबखरे मोती
पड़ोस म रहने वाल| पाव ती को आंचल म कटोर| Îछपाते हए दे खकर मध बोल|


-दाद| सास 4 या
Îछपा रह| हो ।
पाव ती-बेट| कब आयी ?
9
मध

- पाव ती का पावं छते ह


ए बोल| कल शाम को आयी दाद| । पता चला Íक आपक| तÍबयत
ठ|क नह|ं है तो चल| आयी आपसे Îमलने पर आप तो मझसे कछ Îछपा रह| हो ।
ु ु

पाव ती-खाने क| कटोर| को पनःआंचल से ढकते हए बोल| 4 या


Îछपाउ◌ू◌ंगी बहं मै भला तमसे ।

मध

-दाद| सास कछ तो जFर Îछपा रह| हो । लगता है आज ब

हओ◌े◌े◌े ◌े ने Îमलकर कछ खास


¯ यंजन बनायी है । यह| ना दाद|
पाव ती-नह|ं रे 4 या Îछपाउ◌ू◌ंगी । बहये 4 या

खास ¯ यंजन बनायेगी । आज कोई पंचईया तो है नह|ं
। सवाल करने को रहने दे आ पास म तो बैठ कछ दे र । बहये बाजार हाट गयी है । त+ हा



रे मायके
क| 4 या खबर है । मां -बाप भी नह|ं रहे त+ हा

रे । शहर भी जाना होगा ज~ द| ।
मध

-हां दाद| मां बाप जब तक है मायका तब तक आबाद है । अब तो मायका दर हो गया । मां

-
बाप के आंख मनते ह| सब पराये हो जाते है । भाई लोग अपनी गह1 ती
ु ृ
म म1 त है । म परदे सी हो
गयी । उनक| छटट| भी

खc म होने को आ गयी । ब¯ चे भी यहां क| गरमी बदा° त नह|ं कर पा रहे
है । सब बीमार पड़गये ह । बड़े बेटे को तो बोतल चढवानी पड़ी है । दाद| शहर तो जाना ह| होगा
ना । गांव म दादा-परदादा क| कहां जमींदार| है Íक रोजी-रोट| चलेगी । ब¯ चे पढे गे-Îलखेगे ।
पाव ती-कराहते हए बोल| हां मध बीÍटया ठ|क कह रह| हो ।

मध

-दाद| आप खाना खा रह| थी । खा ल|िजये म ÍपÞ ट

के घर से होकर आती हं । बेचार| ÍपÞ ट


क|
आजी जब तक िज7 द| थी हम लोग| के आने क| खबर सनते ह| दौड़ी

चल| आती थी । अब तो कोई
पछने वाला ह|

नह|ं बचा । आप भी बीमार रहने लगी बाक| कोई पराने म से बचा ह|

नह|ं । पहले
जैसी बात भी नह|ं रह| । अपने अलावा कोई अब तो दसरे को समझता ह|

नह|ं । अब तो गांव म
भी शहर जैसा हो गया है कोई पहचानता ह| नह|ं । हम लोग है Íक सब के घर-घर जाकर सलाम
¯ यवहार करते है । इसके बाद भी लोग मंह फे र लेते है ।

पाव ती -हां बह सब 1 वा

थ| हो गये है । काम पडने पर पहचानते है । Íबना मतलब के तो अब तन
से पैदा हए भी

नह|ं पहचानते । गैर| क| 4 या बात कर । थोड़ी दे र मेरे पास बै तो जा । म तो बै ठे
-बैठे खाती रहती हं । खाने के अलावा बढौती म और


काम भी 4 या है ? एक जगह बैठे -बैठे बेटा -
बह क| कमाई रोट| तोड़ो

। बैठ बह । मेरा 4 या

भरोसा इसके बाद तझे Îमल पाउ◌ू◌ंगी भी क|

नह|ं
। आंख-ठे हना भी धीरे

-धीरे काम करना ब7 द कर रहे है । अभी ना जाने कब तक फो4 ट क| रोट|
तोड़नी Íक1 मत म Îलखी है भगवान उठा लेता तो मेर| भी बन जाती । बढउ तो अपनी बना Îलये

मझे नरक म छोड़

गये । सब बहं सहाग उजड़


ने के बाद जीवन नरक हो गया है ।
मध

-दादा जीवन मरन तो भगवान के हाथ म है । दख

-तकल|फ भी उसी भगवान क| दे न है । दाद|
आंस ना बहाओं खाना खा लो ।

पाव ती-त कह रह| थी ना

Íक म Îछपा रह| हं कछ दे ख ले बेट| मेरा छ¯ प


न भे◌ाग ।
मध

-दाद| यह 4 या ?
पाव ती-मेरा खाना और 4 या ?कc ते

Íब~ ल| इससे अ¯ छा खाना खा लेते ह ।
मध

-हे भगवान ये खाना?
पाव ती-बंटवारे के बाद मेरा यह हाल हो गया है ।
मध

-बंटवारा ?
10
पाव ती-दोनो बेट| के बीच 15-15Íदन बंटवारा हो गया है । 15 Íदन बड़ा तो 15 Íदन छोटा बेटा
कc ते

जैसे रोट| दे रहा है । बढउ के मरते ह| मेरे उपर मसीबत का पहाड़
ु ु
Îगर पड़ा है । अब तो पे ट
भर रोट| भी नसीब नह|ं होती ।हं सते जE म सं ग जीना पड़रहा है खानदान क| मयादा के Îलये ।
मध

-सखी रोट| ना दाल ना तरकार| ऐ कौन सा छ¯ प

न भग आपक| बहओं परोस रह| है ।

पाव ती-यह| छपपन भेग है मेरे Îलये । बहय कहती है काम क| ना काज क| Îनकाम घोड़ी

घास क|
। बÍढया को बैठे बैठे तीनो टाइम बल|बरोबर ठसने को चाÍहये ।
ु ु

मध

-दाद| कै सो खाओगी ।
पाव ती-बेट| मसीबत माथे पड़ी

है तो मकाबला तो हम ह| करना होगा ना । रोट| को कछ दे र के
ु ु
Îलये पानी म भींगो रखगी गल जाने पर खा लंगी ।
ू ू

मध

-िजन बेट| क| तकद|र बनाने के Îलये आप और बाबा ने 4 या-4 या नह|ं Íकया । पढाया Îलखाया
। पैरो पर खड़ा Íकया वह| बेटे दो रोट| नह|ं दे रहे है । इस सखी रोट| को खाना आपके Îलये तो

लोहे चना चबाने जैसा होगा । मंह म दात भी तो

नह|ं बचे है ।
पाव ती-सखी रोट| पानी और नमक म भींगो कर पेट म उतार लेना यह| मेर| Íक1 म

त हो गयी है ।
मेर| Íक1 मत म भगवान ने यह| Îलख Íदया तो 4 या कFं । अ¯ छ| भल| खेती है । दोनो बेटे नौकर|
कर रहे है । इसके बाद मेर| हाल ऐसी है । अगर बढउ कछ छोडकर
ु ु
नह|ं गये होते तो भीख मांगनी
पड़ती मझे । वैसे भीखार| से मेर| दशा खराब है । बस कहने को बेटे बह


,पोते -पोती और भरा-परा

पÍरवार है । कभी कभी तो बहये इस बढ| काया


पर हाथ साफ कर लेती है । दाद| के आख| म बाढं
के पानी सर|खे आसं बह रहे थे ।

पाव ती के आसं दे खकर मध के ◌ा◌ी आंस बह Îनकले । वह पाव ती दाद| के आंस आंचल म पोछते
ू ु ू ू
हए बोल| दाद| अब ना रोओ Îसर दखने लगेगा । भगवान भी Íकतना Îनद यी है बढौती म इतना

ु ु
दख दे Íद

या । अपना खन पीकर पले बढे द° म
ू ु
न हो गये ।दाद| स7 तोष करो जो Íवधाता ने Îलख
Íदया है उसे टाला भी तो नह|ं जा सकता ।
पाव ती-हां बह अब तो आंस बहाना ह| तकद|र हो गयी है । आंसओ को बह जाने दो मन का भार

ू ू
तÎनक कम हो जायेगा । इस बढ| बेबस के पास बचा भी 4 या

है आंस के Îसवाय । भगवान ने बे ट|

भी नह|ं Íदया है Íक उसके पास भी दो चार Íदन के Îलये जा◌ाकर जी आन-मान कर आती । बढउ

के मरते ह| मेरे जबान पर भी बेटे बहओ ने पहरा लगा Íदया है । दोनो बहये हाट गयी है और
ु ु
ब¯ चे 1 क

ल । अब तक एक भी होती तो छाती पर चढ गयी होती । त

मसे बात भी नह|ं कर पाती ।
बेटे -बह सब एक जैसे हो गये है । उनको लगता है Íक मेरे पास मोहरो से भरा सोने का घड़ा

है ।
िजसे म उनसे Îछपाकर रखी हं । जबÍक मेरे पास चवनी

-अठनी तक नह|ं है । ना जाने कौन सी
रकम लेने के Îलये मझे 9ताÍड
ु ़ त कर रहे है । सब कछ तो बां

ट Îलये मेरे पास कछ बचा भी तो

नह|ं है । दोनो बेट Îमलकर मेर| हालत कc ते

Îल~ ल| जैसी कर Íदये है । रोट| के Îलये ललचायी
आख| से राह ताकना पड़रहा है । जबान खल| तो लात खाओ ।

मध

-दाद| म ने भी दे खा है । बाबा जब थे तो यह दरवाजा सना

नह|ं लगता था । दो चार लोग बैठे
रहते थे । िज7 दगी भर बाबा शहर परदे स Íकये । आप दोन| बेट| को लेकर गांव क| जमींदार|
स+ भाल| । बाबा जब Íरटायर होकर आये तब आपके बेटा लोग परदे स क| ओर Fख Íकये । बाबा
क| मेहनत से सफल भी रहे अ¯ छा कमा खा रहे है । आपको पेट म भख लेकर जीना पड़

रहा है ।
11
यह Íकसी Íवपिc त से कम तो नह|ं है । बाबा के मरते ह| बेटे -बह Íकतने बदल गये । धन लेने

क| सध तो है मां के पेट म रोट| गयी Íक

नह|ं इसक| Íकसी को सध

नह|ं । जब तक बेट| के हाथ
दौलत नह|ं लगी थी जमींदार| पर क« जा नह|ं हआ था तब तक आरती उतारत ◌े थे । अब तो उ7 ह|


बेटे बहओं के Îलये बोझ हो गयी हो ।

पाव ती-हां मध ठ|क कह रह| हो जब तक बढउं कमाये तब तक और जब तक जीÍवत रहे तब तक
ु ु
इन नालायक| के Îलये जोड़ते रहे । इ7 ह| नालायक| क| Îच7 ता म डबे रहते थे । मेरे पास भी जो

कछ था बढउ क| चोर| इ7 ह|
ु ु
नालायक| को दे Íदया करती थी ।वह| वजह है Íक आज कं गाल बैठ| हं

रोट| तक के Îलये तरस रह| हं । मेर| आंख| के आसं बेटे बहओं को Íदखायी पड़
ू ु

गया तो बोल|
बोलने से नह|ं चकते कहते है

-पाÍपन दरवाजे पर बैठ| कढती रहती है ना मर| न मरे के संग गयी

। अब ये हाल हो गया है बीÍटया । मै पाÍपन हो गयी हं । मेर| कोख से ज7 मे

ये मेरे नालायक बेटे
पÞ या

c मा हो गये है । म भखे मर रह| हं । ये ज° न


मना रहे है । मह|न| से बखार म तप रह| हं ।


मेर| दवाई के Îलये दोन| म से Íकसी के पास फट| कौड़ी

नह|ं ह । ससराल वाले आते है तो मगा के
ु ु
साथ दाF परोसी जाती है । बीÍटया त+ ह|

बताओं कोई मां बाप अपने बेटे -बहओं को ÷ाप दे गे 4 या


?म Íकतनी अभाÎगन हो गयी हं बढउ के मरते ह| Íक हमारे ह| बेटे बहं पाÍपन कहने लगे ह । मन
ू ू

तो करता ह इस पोखर| म डबकर जान दे दं पर जग हं साई से डरती हं । यह| बे
ू ू

टे -बह कहे ◌ेगे

पाÍपन जीते भी डं सती रह| मरने के बाद भी कलंक छोड़गयी ।
मध

-दाद| आc महc या क| कभी ना सोचना । जब तक सांस चल रह| है । भगवान म भरोसा रखो
वह| मि4 त

दे गा । डब कर जान दे ने से अगला ज7 म

खराब 4 यो करना । दाद| आप तो बहत नेक

आc मा हो । भगवान स¯ चे आदमी क| पर|Hा लेता है । द* ट|

को खला छोड़

ता है ताÍक वे पाप
करते करते एक Íदन असहाय होकर जमीन पर आ Îगरे और लोग थके । एक Íदन आपके बेटे

-
बहओं पर दÎनया वाले जFर थके गे । दे वी समान मां को भख| मार रहे है । मां बाप क| दौलत को

ु ू ू
तो बांट Îलये पर मां को ना पेट भर रोट| दे रहे है और ना ह| व1 ³ । दाद| पोते पोती तो दे ख रहे
है ना जो उनके मां बाप आपक| दद शा कर रहे है । आप तो

नह|ं रहोगी पर दÎनया वाले दे खेगे ।

जैसा आपके बेटा बह कर रहे है उससे बरा सलक उनके बेट

ु ू
-बह करे गे ।

पाव ती-मध बीÍटया मेरे बेटे

-बह चाहे िजतनी मेर| दद शा कर ले पर म इनका बरा कभी

ु ु
नह|ं चाहं गी

मां ह ना । लेÍकन जो ये मेरे साथ कर रहे है । म कभी सोच भी

नह|ं सकती थी Íक मेरे बेटे ऐसी
दद शा कर गे । िजनके Îलये सख
ु ु
-सÍवधा

,पढाई-Îलखाई के Îलये पÍरवार से Íवgोह कर बैठ| । कभी
बासी रोट| इन ब¯ च| को नह|ं द| । दे शी घी क| कभी कमी नह|ं पड़ने द| । आज दे खो म वह| हं

मे◌े◌ेरे बेटे बदल गये । म सखी रोट| से जझ रह| हं पापी पेट भरने के Îलये । वह भी मज| हई तो
ू ू
ू ु
दे Íदये कc ते

जैसे कवरा । नह|ं मज| हई तो

नह|ं Íदये । पानी पी -पीकर भख Îमटाती

रहने को
मजबर हो जाती हं ।

मध

-दाद| बहये तो दसरे घर से आयी है । बेटे तो सगे है । आपके तन से पैदा हए है ।वे भी
ु ु

ज~ लाद हो गये । बढ| मां के Îलये उनके पास पेट भर रोट|

नह|ं दे पा रहे है । आपके दोन| बेटे
पढे -Îलखे है । इनको तो कc ते

-Íब~ ले जैसे ¯ यवहार अपनी मां के साथ तो नह|ं करना चाÍहये था । ये
तो जोF के गलाम लगते है ।

12
पाव ती-बहये जैसा कहती है उससे ल|क भर भी

नह|ं हट सकते दो के दोन| । ऐसा लगता नह|ं
है Íक यह घर मेरा है । ये पÍरवार मेरा है । Íकसी को तÎनक भी मेर| Îच7 ता नह|ं है । दे खो दो
साल हए ब


ढउ के मरे उनके हाथ क| साड़ी है तन पर । वह भी जगह जगह से गलने लगी है ।
बहये दो साड़ी

मेरे पास छोडी बाक| सब आपस म बांट ल| । दो साल से दो साÍड़ या मेरे तन पर
गल रह| है । दे खो Íकस तरह से म अपना तन ढं क| हं । न बहओं को शरम है न बेट| को । बे ट|
ू ु
और बहओ को

लगता है Íक मोट| रकम उनसे Îछपा कर रखी हं । उनको दे

नह|ं रह| हं । बताओ

मेरे पास कछ होता तो अपना तन

नह|ं ढं कती ।सब कछ तो Îछन Îलया इन लोग| ने षणय7 ³


रचकर । पेट क| भख

नह|ं Îमट रह| है इन दो-दो बेटे के होते हए ।

मध

-ये तो बहत बरा हो रहा है दाद| आपके


साथ ।
पाव ती-कछ लोग प³ के न होने पर दखी है और म दो
ु ु ु
-दो सांड जैसे प³ो के होने के बाद भी बेसहारा

अनाथ जैसी िज7 दगी जी रह| हं । इन कपत| के Îलये धन


-धरती सब कछ बना Íदये पर उसी धन

और धरती क| रोट| सकन क|

नह|ं Îमल रह| है । ये नालायक अपनी कमाई का तो नह|ं दे ते कम
से कम हमार| हाड़ं -फोड़कमाई क| रोट| तो दे ते । सच मध बह इतना दख
ु ु

नह|ं होता िजतना हो रहा
है । हारे हए जआर| क| तरह अब हाथ मलते रहना है और बेटे बहओं के Íदये तकल|फ के जहर को
ु ु

पीकर जीवन Íबताना यह| अब तकद|र हो गयी है ।
मध

-मत रोओं दाद| भगवान सब दे ख रहा है ।
पाव ती-काश मझे इस नरक से ज~ द|

उठा लेता ।
मध

-दाद| िजतने Íदन क| उH होगी उतना Íदन तो धरती पर रहना ह| होगा चाहे रो कर जीओ या
हं स कर । यय बेटे बहओं क| 9ताड़

ना सहकर जीना तो पड़े गा । आके साथ बहत बरा सलक हो

ु ू
रहा है ।यह अ¯ छा नह|ं है । बताओं धरती के भगवान का ऐसा अनादर ऐसे बेटे -बहओं के Îलये

नरक का राह नह|ं सगम कर रहा है ◌े 4 या

?दाद| जो आदमी दसर| के साथ बरा बताव करता है
ू ु
उसे भी Îमलता है इसी धरती पर । अरे इनक| औलाद भी ऐसा करने लगी तो खपरै ल से आं सं

पोछे गे । जब इनक| औलादे ऐसे ह| घाव करे गी तो समझ मे◌े◌ं आयेगा Íक उनके हाथ अ7 याय हआ


पाव ती-मध बीÍटया म तो भगवान से 9ाथ ना करती हं Íक इन नालायको को सq


बि² द

दे । मां हाकर
कै से बq दआ दे सकती हं । मेरे साथ जो कछ हो रहा है ब1 ती



वाले भले ह| नह|ं दे ख पा रहे है पर
भगवान तो दे ख ह| रहा है । म अपनी जबान ग7 द| नह|ं कFं गी चाहे ये भखे मार डाले

,गाल| दे या
लात मारे मै बढउ क| आन पर मर जाउ◌ू◌ंगी इस चौखट को न तो छोडं गी और
ु ू
नह|ं बq दआ दं गी
ु ू

मध

-दाद| भले ह| मत बq दआ दो पर आपके पोते तो आने मां बाप क| करतते दे ख रहे है । वे भी
ु ू
एक Íदन ऐसा जFर करे गे । दाद| मत खाओं ये सखी रोट| दो म भ स को डल दे ती ह । आपका


खाना अपने घर से लाती हं ।

पाव ती-ना मध ना ऐसा ना कर ।

मध

-दाद| कम से कम आज तो भर पेट खा लो ।
पाव ती-बेट| त सदा सखी रह पर म अपने Íह1 से
ू ु
क| यह| सखी रोट| खाउ◌ू◌ंगी ।

मध

-4 यो दाद| ?
13
पाव ती-मयादा खाÎतर । बह

-बेट| को पता लग जायेगा तो घर से बाहर कर दे गे । कहे गे जो
भीख मांग कर खा । उनक| इ7 जत पर क|चड़ जो उछल जायेगा । रोट|म और पानी डाल दे ती हं

ज~ द| गल जायेगी । Íफर खा लंगी । बेट| त Îच7 ता
ू ू
ना कर मेरा तो रोज का यह| हाल है । आज
तक इस ब1 ती का Íकसी आदमी को भनक तक नह|ं लग पायी है मेर| दद शा क| । बेट| Íकसी से न

कहना मझसे वादा करो ।

मध

-दाद| ऐसा वादा 4 य| मांग रह| है ।
पाव ती-बेट| अपनी छाती पर खडे

इस घर क| दहल|ज से मेर| अथ| जो उठनी है । यÍद मेर| दद श

क| खबर ब1 ती वाल| के कानो तक पहं च गयी तो मेर| लाश भी कफन को तरस जायेगी ।

मध

-दाद| इतनी बड़ी ब1 ती तो है । ब1 ती वाले मÎनकÎनका पहं चा दे गे चनदा

-बेहर| करके । जीते जी
रोट| क| Îच7 ता नह|ं है मरने के बाद क| Îच7 ता म सलग रह| हो ।

पाव ती-बेट| िजसके कं धे पर चढकर 1 वग जाना था वह तो पहले ह| कच कर गये । बेट| के हाथ से

मÇ

ठ| भर माट| Îमल जायेगी तो ज7 म तो नह|ं Íबगडे गा ना ।
मध

-दाद| अगले ज7 म क| Îच7 ता है । जीवन नरक हो रहा है । इस नरक को सहने के Îलये तैयार
है ।
पाव ती-मध बेट| बेटे ◌ा◌ं से बंश सरÍHत रहता है ना ।बंश
ु ु
सख के Îलये हर दख सहने क| साम³ य
ु ु

रखती हं ।

मध

-दाद| जमाना बदल गया है । बेटे -बेट| दोन| एक समान है । बेट| का Íदया दखभोगने के बाद भी

आंख नह|ं खल रह| है ।

पाव ती-सब समझती हं पर जीवन के आÍखर मोड़

पर भटकना नह|ं चाहती हं ।

मध

-मतलब
पाव ती-अब यह| मेर| तकद|र है । जहां से बढउ क| अथ| उठ| वह| से मेर| भी उठे । अब तो जीवन

के मोती Íबखर ह| चके है । लावाÍरस

नह|ं मरना चाहती मध । गांव वाल| सामने अपना दखड़ा
ु ु
भी
नह|ं रोना चाहती िजनक| मदद करती थी उनके सामने आंस जीते जी मर जाउ◌ू◌ंगी । मेरा वादा

याद रखना मध । अब तम जाओ मेर| बहये हाट से आने वाल| है । तमको मेरे साथ दे ख ल| तो
ु ु ु

पीठ म सटा पेट आत| को चबा तो लेगा पर बढ| हÍq

डयां कराह उठे गी ।
मध

-दाद| मांफ करना । ये कछ पैसे है । रख लो काम आयेगा ।

पाव ती-सदा सहाÎगन और सखी रहो । त+ हा
ु ु ु
रा पÍरवार Íदन दनी

-रात चौगनी तर4 क|

कर । अब जा
मध । मझे भयावह सफर पर अके ला चला है । बहये आ गयी और तमको मेरे साथ दे ख ल| तो
ु ु ु

मझे तो जो कहे गी म सह लंगी पर Îनरापद तमको बरा
ु ू ु ु
-भला कह द| तो मझे बदा° त

नह|ं होगा ।
वैसे तो रोज मर रह| हं पर आज और मर जाउ◌ू◌ंगी शरम के सम

7 दर म डबकर ।

मध

-दाद| रोओ मत । रोट| गल गयी है । खाकर पानी पी लो । अब तो जीवन भर रोना है । ऐसे
बेटे बहओं के साHा7 य

म ।
पाव ती-हां मध सपन| के मोती तो Íबखर गये । Íवषधर| के बीच जीने क| Íववशता है ।

मध

-दाद| अब तो खा लो । म जा रह| हं ।

पाव ती-मध खाना तो पडे गा ह| पापी पेट क| आग बझाने के Îलये । आशा Îनराशा म बदल गयी है ।
ु ु
बढउ के मरते ह| मेर| दÎनया भयवाह हो गयी । रात के अं धेरे म ह|
ु ु
नह|ं Íदन के उजाले म भी डर
14
लगता है । दे खो इस बढ| काया को कब तक बेटे

बहओं के उc पी

ड़न का जहर पीना Îलखा है
।भगवान अब अपन| का Íदया हआ घाव बदा° त

नह|ं होता कहते हए नमक पानी म गील| रोट| का

Îनवाला पाव ती दाद| पेट म उतारने लगी । मध आख| म आंस Îलये डर|
ु ू
-सहमी अपने घर क|◌े ओर
दौड़पड़ी ।
3 33 3- -- -चF ल
ु ू
भर पानी
4 यो◌े◌ं जी Íबन मौसम क| बरसात 4 यो । अभी तो स

रज आग उगल रहा है । मौसम Íव7ानी
बता रहे है Íक मानसन जन के आÍखर| स¯ ता
ू ू
ह म आ सकता ह । ये अवारा बादल कहां से टट पडे

Íवशाल क| मां ।
गीता-4 या कह रहे हो Íवशाल के पापा मेर| तो समझ म ह| नह|ं कछ आ रहा ह ।

अशोक-बहाना नह|ं ।
गीता-कै सा बहाना जी ?
अशोक-त

+ हार| आंख| म आंस 4 य|

?
गीता-अ¯ छा ये आसं। ये तो च~ ल
ू ु ू
भर पानी म डब मरने क| बात है ।

अशोक-ये कै सी चHवाती बरसात है जो Íबना Íकसी बरसात और Íबना बाढ के डब मरने के Îलये

फफकार रह| है ।

गीता-थोडी दे र पहले आ गयी थी चHवाती बरसात एक ÎनराÎ÷त बढ| मां के साथ ।

अशोक-बढ| मां ।

गीता-हां बढ| मां के ह| साथ आयी थी चHवाती बरसात जो लोभी औलादो क| मंशा को तार तार

करने के Îलये काफ| थी ।
अशोक-कौन सी बढ| मां क| बात कर रह| हो । कोई ग+ भी

र मामला ह 4 या ।
गीता-हां । आने वाला समय बढे मां बाप के Îलये

तबाह| लेकर आना वाला है ।
अशोक-4 या कह रह| हो Íवशाल क| मां ।
गीता-ठ|क कह रह| हं ।एक अं धी बढ| लाचार मां शहर के चकाचौध भरे उजाले म पता ढढ रह| थी

ू ू
अपनी बेट| का । बेचार| बढ| मां Îन* का

Îसत थी ।
अशोक-Îन* काÎसत ।
गीता-हां Îन* काÎसत । एक नालायक बेटा अपनी अं धी मां को घर से Îनकाल Íदया था । वह बढ| मां

अपनी डयोढ| पर आ Îगर| थी । उनक| दा1 तान सनकर ये Íबन मौसम

हं सते जE म क| बरसात ।
अशोक-ग1 ता

खी के Îलये Hमा करना दे वी जी पर अब वो मां कहा है ?
गीता-बढ| मां को उसक| बेट| के घर छोड आयी ।

अशोक-बेट| के घर ।
गीता -हां बेट| के घर । बेटा घर से Îनकाल Íदया ह तो वह बढ| मां बेचार| जाती तो जाती कहां ।ना

थाह ना पता । बस इतना कालोनी का नाम मालम और ये भी Íक Îतकोने बगीचे के सामने घर

ह । इसी आधार पर बढ| मां क| बेट| के घर क| तलाश करनी पडी ह । काफ| म° क

त के बाद घर
Îमल गया ।
अशोक-आज औलाद इतनी 1 वाथ| हो गयी है Íक अं धी मां को रहने के Îलये जगह नह|ं है उसके ह|
बनाये आÎशयाने म ।बेटा मां को घर से बेदखल करने पर उतर आया है ।
15
गीता-हां बेचार| बढ| मां दर दर भटक रह| थी ना

जाने कब से ।आज बेट| के घर पहं च पायी ह ।

यÍद उस ब

ढ| मां क| मदद ना करते तो भटकती रहती ना जाने कहा कहां । थक हार कर Íकसी
गाडी के नीचे आ जाती । मरने के बाद लावाÍरस हो जाती । बेटा को कफन पर भी खच ना करना
पडता । मां को घर से बेदखल कर खद माÎलक बन बैठा ह नालायक बे टा ।मां भखी ¯ या
ु ू
सी ध4 के
खाने को मजबर

हो गयी ह । बेट| ना होता तो वह बंढ| अं धी लाचार मां कहा जाती । बढ| मां क|
ू ू
दशा दे खकर मन रो उठा Íवशाल के पापा । भगवान ऐसी सजा Íकसी मां बाप को ना द ।
अशोक-बढ| मां के साथ दादा ना थे 4 या


गीता-नह|ं । वे बेचारे मर गये ह ।उनके मरते ह| बेचार| पर मसीबत

का पहाड Îगर पडा है ।
अशोक-दौलत के Îलये मां पर बेटा ज~ म

कर रहा है ।वाह रे बेटा । मां के आसं का सख भोग रहा
ू ु
है ।
गीता-हां जब तक पर| दौलत पर क« जा

नह|ं हआ । बढ| मां को कc ते

ू ु
Íब~ ल| क| भांÎत Fखी सखी

रोट| Îमल जाती थी । चल अचल स+ पÎत पर पर| तरह क

« जा होते ह| बेटा बह ने एकदम से

दरवाजे ब7 द कर Îलये बेचार| लाचार मां सडक पर आ गयी ।
अशोक-बाप रे िजस घर को बनाने म और औलाद को पालने म जीवन के सारे सखो क| आहÎत दे द|


उसी घर से बेदखल कर द| गयी वह भी खद के बेटे के हाथो ।

गीता-हां ऐसा ह| हआ ह उस बढ|


मां के साथ ।
अशोक-वाह रे ममता के द° म

न ।आज मां बाप प³ मोह म पागल हो रहे ह । बीÍटया को ज7 म

से
पहले मार दे रहे ह । वह| बेटे बढे मां बाप को सडक पर ला फे क रहे ह ।

गीता-हां ऐसा ह| हआ ह उस बढ| मां के साथ । उसके पÎत सरकार नौकर| म थे गाडी बं


गला सब
कछ था । अ¯ छ|

कमाई थी । बेचारे क| अचानक मौत हो गयी । पÎत क| मौत के बाद लोभी बेटा
सब कछ अपने नाम करवा का बढ| मां के ◌ा सडक पर पटक Íदया भीख मांगने को ।
ु ू

अशोक-बाप रे अब बढे मां बापो को अनाथ आ÷म| म आ÷य लेना पडे गा ।

गीता-4 य| ।
अशोक-कहां जायेगे ।
गीता-बेÍटया है ना ।
अशोक-बेÍटयां ।
गीता-हां बेÍटया बेटो से Íकसी मायने म कम नह|ं है । बढ| मां क| बेट| मां को दे खकर Íबलख

Íबलख कर रोने लगी थी जैसे भरत राम रोये थे कभी ।इसी धरती पर कभी ÷वण थे जो अपने बढे

मां को बहं गी म Íबठाकर सारे तीथ dत करवाये ।आज दे खो बेटे रोट| दे ने को तैयार नह|ं है । मां बाप
को बोझ समझ रहे ह जबÍक सब कछ मां बाप| का ह| बनाया हआ है ।

अशोक-िजतनी तर4 क| हो रह| ह उतनी ह| तेजी से 1 वाथ परता के भाव म बि² द

हो रह| है । अं धगÎत
से आदमी का मानÎसक पतन भी हो रह| है ।
गीता-सच बहत बरा समय आ गया ह । बढ| मां क| दशा दे खकर पc थ

ु ू
र भी Íपघल जाये पर वो
नालायक बेटा नह|ं Íपघला । मां को घर से बेदखल ह| कर Íदया ।कहते हए गीता Îससकने लगी

अशोक-आसं पोछ| । डर लगने लगा है । कñ म पैर लटकाये बढे मां बाप व² दा
ू ू ृ
÷म| का पता पछने

लगे है । Íवशाल क| मां ये समाज के Îलये शभ संके त कतई

नह|ं है ।
16
गीता-आज क| औलादो को कै सा संHमण लग गया है Íक मां बाप बोझ लगने लगे है
।व² दा

÷मो क| शरण म जा रहे ह औलादो के होते हए भी । वाह रे 1 वा

थ| औलाद । भल रहे ह मां

बाप के c याग को ।
अशोक-मां बाप| को भी अपने म बदलाव करना पडे गा और प³ मोह से उबरकर बेट| बेटा को बराबर

का हक दे ना होगा ।प³ मोह के अं धÍव° वा

स को तोडना होगा ।
गीता-बंश का 4 या होगा ।
अशोक-बेÍटया बेटो से कम नह|ं ह ।दोनो को बराबर का हक होना चाÍहये । बेट| बेटा दोनो को मां
बाप क| परवÍरश के Îलये तैयार रहना होगा ।
गीता-बढे मां बाप बेट| के घर जाकर रहे गे । इ7 ज

त का 4 या होगा ।
अशोक-बेट| के साथ रहने म इ7 जत घटे गी नह|ं बढे गी। बेÍटया भी तो उसी मां बाप क| स7 तान ह
।प³ बंश चला◌ा ह गजरे जमाने क| बात हो गयी । यह| अं धÍव° वा
ु ु
स तो बढे मां बाप क| दद शा का
ू ु
कारण है । जीवन क| संझा म सख क| जगह मÇ
ु ु
ठ| भर भर कर आग दख परोस रहा है ।

गीता-आने वाला समय भयावह न हो । इससे पहले मां बापो को भी सतक हो जाना चाÍहये खासकर
यवा द+ प

Îतय| को ।ब¯ च| को नैÎतकता का बोध कराय । लोभी 9व

Îत Íवरासत म ना दे । मां बाप|
के कÎतc व

का 9भाव ब¯ च| पर अव° य ह| पडता ह । यवा द+ प

Îत अपने मां बाप के साथ जो बताव
करते ह । यक|नन उसका असर न7 हे ब¯ चो पर भी पडता ह । आगे चलकर यह| न7 हे ब¯ चे बडे होते
ह । अपने मां बाप qवारा खद के दा

दा दाद| के साथ Íकये गये बताव एवं बदसलÍकय| को दोहराते

ह । यवा द+ प

Îतय| को बचपन से ह| ब¯ च| को अ¯ छ| परवÍरश के साथ अ¯ दे सं1 कार भी दे ने होगे
िजससे आने वाले समय म उनके साथ कछ बरा ना हो सके । मां बाप धन दौलत के पीछे भाग रहे
ु ु
ह ब¯ चे झला

घरो म पल रहे ह अथवा नौकर| के हाथ| । वे मां क| ममता और बाप के ¯ यार से
बंÎचत हो जाते ह ।ऐसे ब¯ चे मां बाप को 4 या समझे गे ।मां बाप क| धन के पीछे न भागकर ब¯ चो
क| अ¯ छ| परवÍरश पर ² यान दे ना चाÍहये । आगे चलकर ये ब¯ चे उ0 Fप धारण कर लेते ह
।नतीजन मां बाप को दद शा झे लना पडता ह िजससे उनका सां² य

काल दखदायी हो जाता है ।रोट| के

Îलये तरसना पड जाता है ।
अशोक-ठ|क कह रह| हो । बढे मां बाप घर से बेघर ना हो । नवद+ प

Îतय| को गहराई से Íवचार
करना होगा । धन क| अं धी दौड से बचना होगा ।मां को अपने और बाप को अपने दाÎयc व पर
7 याय करना होगा । तभी बढे मां को घर से बेघर होने से बचाया जा सके गा ।

गीता-व² दा

÷म क| संE या म बढती बि² द

और बढे मां बाप का सडक पर आना औलाद| को च~ ल
ू ु ू

भर पानी म डब मरने वाल| बात होगी ।

मां बाप तो धरती के भगवान ह । मां बाप क| सेवा से बडी
कोई भी दौलत सख

नह|ं दे सकती ।
4 44 4- -- -फज
जोर जोर से गेट पीटने क| आवाज सनकर Îमसेज आरती बाहर आयी । गेट पीटने वाल| से बोल|

भइया गेट तोड रहे हो या बला रहे हो । आग बरसती गम| म 4 या

काम पड गया । कहां जाना ह
तमको । 4 यो

इतना पी लेते हो । घर म बीबी ब¯ च| का फांके का E याल आता है । बाल ब¯ चे घर
पÍरवार सब भल गये दाF क| मौज म । इतना भी पता

नह|ं है Íक कहां जाना है । अरे नह|ं
पचती तो 4 य| पी लेते हो। 4 य| गेट पीट रहे हो आगे बढो । अपने घर म भी चै न से नह|ं रह
17
सकते ।कै से कै से लोग है जमाने म अपनी अय् याशी के Îलये खद के घरपÍरवार को तबाह|

म तो झ|कते ह| ह दसर| का चै न भी Îछनते है ।जाओ भइया अपने घर जाओ । मझे त+ हा
ू ु ु
र| कछ

नह|ं सननी है ।

त+ हा

रे पडोस वाले सनील फÞ ड
ु ु
नीसा का Íबजल| का कने4 शन करने आया हं । मेर| बात त


मको
सनना पडे गा । म स4 से

ना हं नशे म धत आदमी बोला ।

Îमसेज आरती-सनील का पांच साल पराना मकान है ।Íबजल| का कने4 श
ु ु
न उनके यहां ह तो नया
कने4 शन 4 य| करवायेगे ।
स4 सेना लडखडाती हई जबान म बोला

-करना है तो करना है बस ।
Îमसेज आरती-सनील फÞ ड
ु ु
नीसा के घर जाओ ।
स4 सेना लडखडाती आवाज म बोला त+ हा

र| छत पर जाना है ।
Îमसेज आरती-हमार| छत पर 4 य| ।
स4 सेना-बहत सवाल करती हो । अरे कने4 श

न त+ हा

र| छत पर जाकर ह| तो कFं गा ।
Îमसेज आरती-मेर| छत पर नह|ं जाना है कहकर 7 योÍहं घर म आई Íफर स4 सेना गेट पीटने लगा
है ।
Îमसेज आरती बेटे रं जन से बोल| बेटा दे ख अब कौन आया । तेरे पापा सो रहे है । ट कर क|
इ7 तजार म रात भर जागते रहे ।रात को दो बजे तो ट कर का पानी आया था । पैसा भी Íदन रात
टकटक| लगाये रहो ये ट कर वाले भी पैसा लेने के बाद Fला दे ◌ेते है ।पानी क| सम1 या ने चैन
Îछन Îलया है दसरे ना जाने कहां कहां से Íबन बलाये आ जाते है । लोग ना जाने 4 यो
ू ु
तÎनक
आराम करने लेटे तभी आ धमकते है । जा बेटा रं जन दे ख ले ना ।
रं जन-दे खता हं म+ मी

कहकर बाहर गया । गेट पर बेसध खडे आदमी से पछा कौन हो अं कल पानी
ु ू
पीना है 4 या ।
नह|ं मझे त+ हा
ु ु
र| छत पर जाना है । फÞ ड

नीसा का कने4 शन करना ह । फÞ ड

नीसा ने भेजा है ।
रं जन-अं कल फÞ ड

नीसा के घर के सामने ह| तो Íबजल| का ख+ भा है वहां से 4 यो नह|ं कर दे ते
कने4 शन । हम तो आपको पहचानते भी नह|ं । कै से आपको अपनी छत पर जाने दं

। फÞ ड

नीसा
अं कल को आपके साथ आना था ।
स4 सेना-म चोर नह|ं Íबजल| Íवभाग से आया हं ।

रं जन-Íबजल| Íवभाग से आये हो तो अं कल के घर के सामने वाले पोल से कने4 सन 4 य| नह|ं कर
दे ते । हम लोगो को आग बरसती दोपहर| म 4 य| परे शान कर रहे हो ।
स4 सेना-त+ हा

र| पडोसी फÞ ड

नीसा कहता है । मेरे घर के सामने वाले पोल म Íबजल| कम आती है
और यहां 7 यादा रहती है । इसीÎलये Íफर से कने4 सन करवा रहा है । मझे 4 या

करना ह मझे तो

बस पैसा चाÍहये चाहे जहां से करवाये ।
रं जन-ठ|क है जाओ पर 7 यादा टाइम नह|ं लगाना ।
स4 सेना- टे म तो लगेगा कहते हए छत पर गया के बल छ7 जे

म अटकाया । छत से नीचे उतरा
और ख+ भे पर चढकर के बल खींचने लगा । के बल खीचने क| वजह से पौधे क| छोट| छोट| डाले
और पिc तयां टटने लगी । कछ ह| सेके Þ ड
ू ु
म बादाम क| मोट| डाल टटकर धडाम से Îगर| । पौध|

का न

कशान Îमसेज आरती से बदा° त नह|ं हआ । वे बोल| 4 यो

भाई आप कने4 शन कर रहे ह या
18
मेरे पौधे तोड रहे है । पीने को पानी नह|ं Îमल रहा है ऐसे हालात म भी म पौध| को सींच रह|
हं । मेरे आंगन क| हÍरयाल| आप 4 यो

उजाड रहे हो भइया ।
स4 सेना-दे ख बकबक ना कर जFरत पडी तो ये पे ड पौधे कट भी जायेगे ।
Îमसेज-आरती 4 या कहा तमने तेज आवाज म बोल|।

स4 सेना-हां ठ|क सनी हो । ये पेड पौधे काटे भी जा सकते है ।

Îमसेज आरती- वो भाई याद रख जो पौधे तोड रहे हो वे पौधे खै रात क| जमीन म नह|ं हमार|
अपनी जमीन म लगे है ।ये जमीन पसीने क| कमाई से खर|द| गया है । ।इन पौधे का E याल म
अपने पÍरवार सर|खे रखती हं । तम काटने क| बात कर रहे रहे हो ।दे खती हं कै से काटते हो ।
ू ू

इतना सनते ह| स4 से

ना तमतमाते हए नीचे उतरा । अपश« द

बकते हए Îच~ ला

चोट करने लगा ।
शोरगल सनकर Îम1 ट
ु ु
र लाल क| नींद खल गयी वे भी बाहर आ गये । उनको दे खकर Îमसेज आरती

बोल| दे खो जी ये आदमी पौधे तोड रहा है ,काटने क| बात कर रहा है उपर से Îच~ लाचोट भी कर
रहा है ।
Îम1 टर लाल 4 यो जनाब 4 य| आतंक मचा रहे है । कौन है आप। 4 य| त+ हा

र| नजर मेरे पौधे क|
हÍरयाल| पर लग रह| है । हमारा नकशान कर रहे हो । भर| दोपहर| म Îच~ ला

चोट कर रहे हो कै से
आदमी हो ।इंसान होकर इंसाÎनयत का धम भल रहे ह । अपने फज का कc ल

कर रहे है । हमारे
बगीचे को जानवर क| तरह चर रहे हो कै से आदमी हो भाई ।
स4 सेना-त+ हा

रे पडोसी फÞ ड

नीसा का कने4 सन कर रहा हं त+ हा


रा नकशान

नह|ं कर रहा हं ।

Îम1 टर लाल-ये पौघे कै से टटे है । 4 या

यह नकशान

नह|ं है ।
स4 सेना-तमको आ« जे

कसन है ।
Îम1 टर लाल- तम कने4 श

न करने के बहाने मेरा बगीचा उजाड रहे हो और उपर से पछ रहे हो

आ« जे4 शन है ।
स4 सेना-आ« जे4 सन है येलो Íकससे बात करनी है कर लो मोबाइल Íदखाते हए बोला ।

Îम1 टरलाल-होश म आओ । बताअ◌े◌ा Íकसक| परÎमशन से ख+ भे पर चढे हो । त+ हा

रे पास कोई
कागज है तो Íदखाओ ।
स4 सेना-तम कौन होते हो पछने वाले। वह Íफर मोबाइल Íदखाते हए Íफर बोला ये लो क
ु ू

र लो न
बात । दे खता हं Íकससे बात करते हो । दे खता हं मझे कौन रोकता है मझे कने4 श
ू ू
ु ु
न करने से। म
एक फोन कFं गा तो सीधे अ7 दर जाओगे ।
Îम1 टरलाल-नशे म हाथी भी चींट| Íदखायी पडती है ।फÞ ड

नीसा का कने4 सन कर रहा है
अनएथोराइज ढं ग से और मझे धमका रहा है ।

इतनी बडी दादागीर| । चोर कोतवाल को डांटे वाल|
कहावत तम चÍरताथ कर रहे हो स4 से

ना ।
स4 सेना-तम फÞ ड
ु ु
नीसा को नह|ं जानते 4 या ।
Îम1 टरलाल-अरे भाई ऐसे मदा सर|खे लोग| को जानने से बेहतर ना ह| जानो । ये◌े मतलबी लोग

है जब जFरत पडती ह तब पहचानते है । Íबना जFरत के तो मातम वाले घर क| तरफ नह|ं दे खते
। अब तम अपनी बकबक ब7 द

करो । याद रखो मेरे पौध| को नकशान

नह|ं पहं चाना ।

19
स4 सेना लालपीला हो रहा था Îम1 टरलाल उसे समझा◌ाने का 9यc न कर रहे थे इसी बीच
सनील फÞ ड
ु ु
नीसा आ गया ।वह स4 सेना को एक तरफ करते ह

ए बोला त अपना काम कर दे खता हं


कै से रोकता है ।
Îम1 टरलाल- भई फÞ ड

नीसा शराफत भी कोई◌्र चीज होती है ।एक पडोसी का दसरे के 9Îत कछ
ू ु
दाÎयc व होता है । पडोसी होने के आदमी का फज और अÎधक बढ जाता है । आप इतने बडे आदमी
है Íक एक दरोÍडय| को भर| दोपहर| म मेरे घर भेज Íदये । 4 या यह| अ¯ छे पडोसी का फज बनता
है ।
फÞ ड

नीसा -अ¯ छा तो त मझे शराफत सीखायेगा। फज पर चलना सीखायेगा । म4 का
ू ु ु
तानते हए

बोला चल हट नह|ं तो अभी दो दं गा तो सार| अकड Îनकल जायेगी ।चला है एथोराइज अनएथोराइज

क| बात करने ।
Îम1 टरलाल-अरे अपनी औकात म रह फÞ ड

नीसा । अपने बालब¯ चो को पाल ,पढा Îलखा गÞ ड


शराफत का गहना नह|ं है । बीयर बार म Îगलास धोकर तो पÍरवार चला रहा है । मालम है जब

शर|फ आदमी बदमाशी पर आता है तो त+ हा

रे जैसे गÞ डे

ने1 तानाबत हो जाते है ।

फÞ ड

नीसा -हां म तो गÞ डा

हं ने1 ता

नाबत करके दे ख लेना।

Îमसेज आरती- पडोसी भगवान क| तरह होते ह । यहां तो पडोस म शै तान बसते है । एक तरफ
¯ यÎभचार| तो दसर| तरफ गÞ डा
ू ु
कै से शर|फ लोग रह पायेगे ।गÞ डे

Íक1 म के लोग अभी तक तो
झ¹ गी

झोपडी का सहारा लेते थे । अब शर|फ| क| ब1 ती म घसपैठ करने लगे है ।

फÞ ड

नीसा -तम लोग Íकतना भी Îच~ ला

चोट कर लोग मेरा कने4 शन तो त+ हा

रे घर के सामने के
पोल से ह| हे ◌ागा ।
Îम1 टर लाल- फÞ ड

नीसा गÞ डा

जी अवैध कने4 शन करवाओगे । मेरे पेड पौध| को काटोगे या मेरा
कने4 शन काटोगे । मे रे दरवाजे पर मझे मारने आ रहे हो । नतीजा मालम है 4 या
ु ू
होगा। इतना बडा
गÞ डा

पडोस म बसता है थोडी खबर तो थी पर आज पर| जानकार| भी Îमल गयी ।

फÞ ड

नीसा -अब तो पता चल गया । मेरे रा1 ते म जो आयेगा सबको दे ख लंगा । इतनी म

फÞ ड

नीसा क| घरवाल| हाथ म सÍरया लेकर गाल| दे ते हए Îम1 ट

र लाल के दरवाजे तक चढ आयी ।
फÞ ड

नीसा और उसक| घरवाल| क| करतते दे खकर सामने वाले लाला के पÍरवार के लोग ताल|

बजाबजाकर खश हो रहे थे। यह उसी लालाजी का पÍरवार था िजनक| मौत से लेकर दसरे ÍHयाकम|
ु ू
तक फडनीस कभी नह|ं Íदखा था और ना ह| आसपास के और लोग । Îम1 टर लाल ना रात दे खे ना
Íदन सब काम| म खडे रहे और उनक| धम पc नी तो उनसे आगे थी चाय ना° ता खाना पानी तक का
इ7 तजाम क| थी । आज वह| लाला का पÍरवार Îम1 टर लाल के साथ पडोस वाले गÞ डे

फÞ ड

नीसा
क| करतत पर खश हो रहा था । उसक| ता
ू ु
कत बन रहा था ।
Îम1 टर लाल फÞ ड

नीसा के द¯ य

हार से दखी तो थे ह| लाला के पÍरवार के आग म घी डालने क|

करतत से Íख7 न

भी । फÞ ड

नीसा और उसक| घरवाल| अनाप शनाप बके जा रहे थे । Îम1 टर लाल
के ब¯ चे उ7 हे घर म ले गये । काफ| दे र तक गÞ डे

क| ललकार हवा म गंजती रह| । शोरगल
ू ु
सनकर पीछे वाल| गल| से Îमसेज मनवती और कई स¹ य

लोग Îम1 टर लाल के घर आ गये ।
Îमसेज मनवती -Îमसेज आरती से बोल| 4 या भाभी आप लोग पागल क◌ुतो को पचकारते हो । हर
ु ु
आदमी के दख सख म कद पडते हो ।दे खो आजकल के लोग नेक| के बदले 4 या
ु ु ू
दे ते ह । फÞ ड

नीसा
20
के भी तो आप लोग बहत काम आये हो । जब

इसका बन रहा था तब भी मदद करते थे ।
उसके गह9वेश के Íदन तो रात भर पानी भरवाते रहे अपनी बोÍरं ग चला कर । इस दगाबाज दोगले

फÞ ड

नीसा के घर म जब चोर| हई थी तो कोई आगे पीछे

नह|ं था आपके घर को छोडकर । ये लाला
का पÍरवार तो दरवाजा ह| नह|ं खोला था । पडोस वाला ¯ यÎभचार| जो आज कदकद कर कने4 श
ू ू

करवाया ह । यह भी तो नह|ं Íदखा था । िजनके संग दाल बांट| क| पाट| जमाता था वे लोग तो
इस अमानष के मंह पर मसीबत म भी मतने
ु ु ु ू
नह|ं आये । थाने से लेकर घर तक का काम आप
लोगो ने ह| दे खा था । इसके बाद भी फÞ ड

नीसा क| घरवाल| ने पडोÎसय| पर ह| इ~ जाम लगाया
थी । भला हो पÎलस वाल| का उसके मंह पर थक Íदये यह कह कर Íक अब तमको कै से पडोसी
ु ु ू ु
चाÍहये । पडोसी म नह|ं तमम दोष है । शर|फ सर|खे पडाि◌◌ेसय| पर इ~ जा

म लगा रहे हो । तब
फÞ ड

नीसा और उसक| घरवाल| का मंह दे खने लायक हो गया था ।

Îमसेज आरती-भाभीजी इंसान के काम तो इंसान ह| आत ह ना । हम लोगो से Íकसी का दख दद

बदा° त नह|ं होता । कहते है ना दद का Íरशता सभी Íरशत से बड7 हो◌ाता है । जहां तक स+ भव
होता ह हम Íकसी क| मदद करने से नह|ं चकते ।आदमी हमार| नेक| को भले भला दे पर भगवान
ू ू
तो नह|ं भलायेगा ।

Îमसेज मनवती- भाभी ऐसी भी नेक| Íकस काम क| । िजसके साथ नेक| करो वह खन का ¯ या

सा
बन जाये । ऐसे लोग तडपते रहे तो भी ऐसी हालत म उनके मंह पर पे शाब

नह|ं करना चाÍहये ।
बेशरम| म जरा भी मयादा शे ष नह|ं बची है । अगर ऐसे ह| होता रहा तो कोई Íकसी के दख सख
ु ु
म काम कै से आयेगा ।ऐसे ह| पडोÎसय| क| वजह से शहर बदनाम हो रहा है ।पडोस म कोई मर
जाता है पडोस को खबर न लगने का कारण ऐसे पडोसी है । फÞ ड

नीसा जै से मतलबी पडोसी,पडोसी
के फज पर कहां खरे उतर सकते है ।
Îम1 टर लाल-भाभीजी हम लो◌ागो से Íकसी का बरा

नह|ं दे खा जाता । कै से मंह मोड ले अपने फज

से ।
Îमसेज मनवती -आपक| क| गई भलाई का 4 या Îसला Íदया फÞ ड

नीसा और ये लाला का पÍरवार ।
उस पडोसी Íवमल भÞ डार वाले को दे खो Íकतना बÍढया आपक| ओर से स+ ब7 ध था पर सडी सी ñेड
को लेकर उसने पडोसी के पाक Íर° ते को नापाक कर Íदया । ñेड तो रख ह| Îलया पैसा भी नह|ं
Íदया । बरा भला कहा उपर से और भी ऐसे बहत लोग है । नालायक गÞ डे
ु ु

खद को खदा समझने
ु ु
लगे है । ठ|क हम ला◌ोगो लोगो के पास दो न+ बर क| कमाई नह|ं है तो 4 या पास मायादा तो है
।मान स+ मान ह शर|फ लोगो के बीच बैठक है । भाई साहब ऐसे लोगो के Îलये खडा होने से बेहतर
तो ये है Íक अपने कानो म Fई डाल लो । मरने दो साल| को । जब तक ये लोग हवा से जमीन
पर नह|ं Îगरे गे तब तक ऐसे ह| शर|फ| क| शराफत का मजाक उडाते रहे गे । आप तो अपने पÍरवार
के साथ छÇ

ट| मना रहे थे रं ग म भंग डाल Íदया फÞ ड

नीसा गÞ डे

ने । अमानष मारने क| धlस दे

गया ।
Îमसेज आरती-भाभीजी फÞ ड

नीसा ने अपनी जबान खराब क| है ।शर|फ लोग शराफत छोड दे गे तो
दÎनया का 4 या

होगा । आदमी से आदमी का नह|ं भगवान से Íव° वास उठने लगेगा । जैसी करनी
वैसी भरनी । आज तो हम चप रह गये कल कोई बडा वाला Îमल जायेगा । हÍq

डया चटका दे गा ।
भगवान के उपर छोड दो ।बरे काम का नतीजा कहां अ¯ छा

आता है भाभीजी ल|िजये पानी पीिजये ।
21
सभी आग7 त

क अपनी अपनी तरह से समझा रहे थे । ढाढस दे रहे थे । उधर फÞ ड

नीसा छाती
फलाकर अवैध तर|के से कने4 श

न करवा रहा था । फÞ ड

नीसा क| घरवाल| और लाला के घर क|
औरते Îम1 टर लाल के घर क| तरफ ताक ताककर ठसर भसर कर रह| थी । कछ दे र म Îम1 ट
ु ु ु ु ु

लाल के घर आये कालोनी के पीछे वाल| गल| के लोग अपने अपने घर चले गये । अवैध तर|के से
कने4 शन हो गया । दोपहर ढल चक| थी । नवतपा का आठवा Íदन था आग बरसा रहा था । इसी

बीच आकाश म अं वारा बादल उमडने लगे◌े थे । दे खते दे खते ह| आंधी ने जोर पकड Îलया ।आं धी
के जोर ने स4 सेना के नशे को कम कर Íदया । उसके मन म Íवरािजत इंसाÎनयत जाग उठ| । वह
एक बार Íफर Îम1 टर लाल के मेनगेट पर द1 तक Íदया । उसे दे खकर Îम1 टर लाल बोले अब 4 या
लेने आये हो भाई ।
स4 सेना-साहब माफ| मांगने आया हं ।

Îम1 टरलाल-म कौन होता हं माफ| दे ने वाला ।जाओ भगवान से माफ| मांगो◌े◌े । स¯ चे

और शर|फ
इंसान को दख दे कर कोई भी सखी
ु ु
नह|ं रह सकता चाहे तम रहो या त+ हा
ु ु
रा फÞ ड

नीसा ।
Îमसेज आरती-भइया स4 सेना आप तो कने4 शन करने आये थे पर7 त

आपने हमार| ह| नह|ं अपनी
भी मयादा का खन Íकया है । आदÎमयत का खन Íकया है । अपने फज को रlदा है ।आप कने4 श
ू ू

करने नह|ं फÞ ड

नीसा क| तरफ से मारपीट करने आये थे ।
स4 सेना-मैडमजी शÎम 7 दा हं नशे म था ।जानता हं पडोसी सगे से भी बडा होता है पर7 त
ू ू

फÞ ड

नीसा
तो पडोस म रहने फÞ ड

नीसा शराफत का चोला ओढे बदमाश है । मेरा नशा अब उतर गया है ।
फÞ ड

नीसा ने दाF Íपलाया था । मझे बडी गलती हो गयी अनजाने म Hमा करना । भगवान

फÞ ड

नीसा क| तरह के ◌े पडो◌ेसी मेरे द° म

न को भी न दे ।
Îम1 टर लाल-स4 सेना कोई Îनभाये चाहे न Îनभाये म तो अपना फज Îनभाउ◌ू◌ंगा ।
Îमसेज आरती-हां स4 सेना भइया ये ठ|क कह रहे है ।शर|फ इंसान शराफत को कै से छोड दे गा
स4 सेना-मैडमजी आप जैसे पडोसी तो Íकसी दे वता से कम नह|ं पर ये गÞ डे

¯ यÎभचार| 4 या जाने
पडोसी के धम को ये तो चील Îग² द कौवा◌े◌ं क| तरह अपना मतलब साधकर बस हं सते जE म दे ना
जानते है ।
Îम1 टरलाल-स4 सेना तम जाओ । मझे अपना फज याद रहे
ु ु
गा ।
स4 सेना-भाई साहब पडोस वाले फÞ ड

नीसा और ऐसे लोगो से सावधान रहनाऐसे लोग पडां◌ेस म
रहकर पडां◌ेसी के जीवन म मÇ

ठ| भर भर आग बोते है म नह|ं भलंगा अ¯ छे
ू ू
पड़ोसी का फज
कसम से
5-दहे ज क| आग

औरत जात को ले डबेगी ये दहे ज क| आग । कब बझे गी ये दहे ज क| आग । खदा खै र रखे अब ना
ू ु ु
जले और कोई लडक| दहे ज क| आगÎमसेज शोभा बडबडाते हए बरामदे म धडाम से Îगर पडी

। मां को Îगरता हआ दे खकर अवध दौडकर उठाकर बैठाया Íफर एक Îगलास पानी

लाया । मां को
Íपलाते हए बोला 4 या

हआ मां तÍबयत तो ठ|क है ।

Îमसेज शोभा -हां बेटा मेर| तÍबयत तो ठ|क है पर एक लडक| और जला द| गयी दहे ज क| आग म
। कब तक ऐसे ह| लडÍकया जलाती जाती रहे गी । कब तक मां बाप दहे ज दानव| क| मांग अपना
घर qवार ब चकर पर| करते रहे ◌े

ग ।
22
अवध मां का Îसर सहलाते हए बोला

-दहे ज लोÎभय| का नाश होगा एक Íदन । पापी काल
कोठर| म तडप तडप मौत क| भीख मांगेगे ।बह को दहे ज के Îलये जला दे ते है । पराई बेÍटय| को

अपनी बेट| 4 यो ◌ं नह|ं सोचते । दहे ज क| आग बझे Íबना औरत जात सरÍHत
ु ु
नह|ं रह पायेगी ।
दहे ज लेना और दे ना दोनो अपराध है । यह जानते हए भी लोÎभय| के हौशले प1 त

नह|ं हो रहे है ।
Îमसेज शोभा-दहे ज क| आग सनीता को ले डबी । बेचार| क| दद नाक मौत क| खबर सनकर च4 4 र
ु ू ु

आ गया । Íकतनी धमधाम से बीÍटया का « या

ह Íकया था सतीश बाब ने । कोई कोर कसर

नह|ं
छोडे थे।गह1 ती

क| एक एक चीज Íदये थे । मां बाप क| एक ह| बेट| थी वह भी जलाकर मार द|
गयी ।बेचारे राज क| कलाई पर अब तो राखी भी

नह|ं बंध पायेगी । जीवन भर क| कमाई बीÍटया
के « याह पर खच कर Íदये । इसके बाद भी लोÎभयो ने उ¯ च ÎशÍHत सव गण स+ प

7 न सनीता

को
आग म झ|क Íदया । बेचार| को िज7 दा जलते हए Íकतना रोयी Îच~ ला

यी होगी ।सोचकर मन रो
उठता है पर उन अमानष| को तÎनक भी रहम

नह|ं आयी। पेçोल Îछडकर जला डाला । ना जाने
कब तक लडÍकय| को जलाती रहे गी ये दहे ज क| आग ।
अवध-सतीश काका ने सचमच सनीता का « या
ु ु
ह बहत धमधम से Íकया था ।खब दान दहे ज भी

ू ू
Íदये थे । भार| भरकम दहे ज क| राÎश और सामान लेने के बाद भी सनीता के ससराले वाले
ु ु
अमानष| क| चाहत पर|
ु ू
नह|ं हई । बेचार| को दे हज क| आग म जला Íदया ।

Îमसेज शोभा -औरत जात पर तो अ7 याय बढता ह| जा रहा है ।सगे स+ ब7 धी ज~ म

ढाह रहे है ।
बेचारा बाप अपनी इ7 जत दे ता है ।धन दौलत दे ता है । इसके बाद भी बेट| का जीवन ल|ल रहे ह
दहे ज के ¯ यासे अमानष ।

अवध-मां दहे ज दानव स¹ य समाज के माथे का कलंक है । इसके बाद भी खब फलफल रहा है ।कछ
ू ू ु
लोग तो अÎधक दहे ज दे कर गव महसस करते है

। यह| गव उनक| बेÍटय| को डं स जाता है ।बेट|
जीवन भर दहे ज क| आग म Îससक Îससक कर बसर करती है या सनीता क| तरह कमरे म ब7 द


कर घासलेट या पेçोल डालकर जला द| जाती ह । लापरवाह| का इ~ जाम भी अबला मतका के उपर

ह| मढ Íदया जाता है ।
Îमसेज शोभा गश खाकर Îगर पडी यह खबर पडोस म रहने वाल| मैडम के कान| को खचलायी । वे

दौडकर आई और पसीने से तरबc तर Îमसेज शोभा से पछने लगी 4 या

हो गया द|द| कै से Îगर पडी

Îमसेज शोभा-सनीता को उसके ससराल वाल| ने जलाकर मार डाला । यह खबर बेचै न कर द|। बडी
ु ु
मि° क

ल से तो घर तक पहं ची

,बरामद म गश खाकर Îगर पडी ।
Íकरन मैडम-बाप रे एक और लडक| दहे ज क| बÎल चढ गयी ।
Îमसेज शोभा-हां Íकरन ।पहल| बार सनीता अपनी ससराल से आयी थी तो बहत खश थी । पÎत के
ु ु ु

तार|फ| का पल बांध बांध कर

नह|ं थक रह| थी ।हां ससर सास के नाम पर मौन हो जाती थी ।

बेचार| सनीता क| दाद| बयान कर कर रो रह| । मझे भी रोना आ गया था ।बेचार| को दसर| बार
ु ु ू
गये स¯ ताह भी नह|ं हआ Íक जलकर मरने क| खबर उडते उडते आ गयी ।

Íकरन मैडम-घर से लेकर संसद तक नार| सश4 तीकरण क| चचा आजकल जोरो पर है । पंचायती
चनाव| म मÍहलाअ◌े◌ं के Îलये 1 था

न आरÍHत है । Íवधान सभा और लोकसभा म मÍहलाओं के
Îलये 1 थान आरHण क| बात चल रह| है । स+ भवतः यह लाग भी हो जाये । अ¯ छ|

बात ह नार|
23
को उÎचत स+ मान Îमलना भी चाÍहये । नार| का सश4 तीकरण भी हआ है । नार| संरHण हे त


मÍहला आयेग काम कर रहा है । बडे बडे पदो पर मÍहलाये Íवराजमान है । संÍवधान भी मÍहलाओं
को समानता का अÎधकार दे ता है ।इतना सब कानन कायदा हो◌ेने के बाद भी Hण हc या
ू ू
और दहे ज
दानव के Îशकं जे के आगे सभी बौने नजर आ रहे है । सनीता क| मौत तो इस बात क| 7 व

ल7 त
गवाह है । खद जलकर मर गयी ऐसा सनीता
ु ु
के ससराल वाल| का कहना है पर इसम जरा भी

स¯ चई नह|ं ह अपराध Îछपाने का 9यास है । कानन से बचने का ढ|ग है । ऐसा तो हो ह|

नह|ं
सकता ।यह तो फासीं के फं दे से बचने का झठा 9लाप है ।

Îमसेज शोभा-हां Íकरन इ~ जाम तो ऐसा ह| लग रहा है पर वह जला कर मार| गयी है ।
Íकरनमैडम-कोई नवÍववाÍहता 4 य| जलकर मरे गी ।अ¯ छे घर और अ¯ छे पÎत के Îलये लडÍकयां dत
करती है । बेचार| 4 य| आग म कद कर मरे गी । लडÍकयां जलती

नह|ं दहे ज क| आग म जलायी
जाती है । ना जाने कब बझे गी ये दहे ज क| आग ।

Îमसेज शोभा-सनने म आ रहा है Íक स
ु ु
नीता क| सास कह रह| थी Íक 1 टोव भभकने से आग लगी
। सनीता Íकसी को कछ बतायी
ु ु
नह|ं कमरे म जाकर खद बझाने लगी थी ।आग बझने क| बजाय
ु ु ु
9चÞ ड Fप धर ल| । उसके साथ कमरे का सामान भी 1 वाहा हो गया ।
Íकरन मैडम-इतनी नासमझ तो नह|ं होगी । अ¯ छ| पढ| Îलखी और समझदार लडक| थी ।
Îमसेजशोभा-अरे कमरे म ब7 द कर जला Íदया गया है । वह 4 य| आग म जलकर मरे गी । मरना ह|
था तो ससराल जाकर 4 य|

मरती । मायके म मरने के Îलये जगह कम थी । बाप का लाख| खच
करवाकर मरने क| कसम तो नह|ं खायी थी ।बाप से उसक| द° म

नी तो थी नह|ं । मां बाप को भाई
को जान से 7 यादा चाहती थी वैसे ह| ये लोग भी चाहते थे ।लडÍकय| क| असमय मौत अशभ

संके त है Íकरन ।ऐसा ह| रहा तो दहे ज लोभी अपने बेटो का « याह कै से करे गे ।
Íकरनमैडम-द|द| गैस रहने के बाद भी 1 टोव पर खाना 4 य| बना रह| थी सोचने वाल| बात है ।
Îमसेजशोभा-हां Íकरन सच कह रह| हो । जलने क| खबर भी तो नह|ं द| है वान| ने ।उडते उडते
सनीता के मरने क| खबर सतीशबाब के कान| तक पहं ची थी । वहां पहं चे तो सह| खबर Îनकल| ।
ु ू
ु ु
भला हो अनजान पडोसी का िजसने पÎलस को खबर कर द| थी ।दाह सं1 का

र होने से कछ Îमनट

पहले सतीशबाब पहं चे उनके पीछे पÎलस भी पहं च गयी ।लाश को पÎलस ने क« जे
ू ु ु
ु ु
म लेकर
पो1 टमाट म के Îलये भेज Íदया था। बेचारे सतीशबाब पागल| क| तरह घमते रहे अके ले । बेचारे कह|ं
ू ू
से फोन Íकये तब जाकर पता चला उनके घर । इसके के बाद कालोनी के कछ लोग गये तब

जाकर बेचारे सतीश बाब क| जान म जान आयी।

Íकरन मैडम-लडÍकय| के साथ तो बहत बरा हो रहा है । अपने इंदौर म Íपछले साल बेचार| भÎमका

ु ू
को उसक| सास ने टकडे टकडे करके कडे दान म डाल Íदया था ।आज का आदमी Íकतना Íहं सक हो
ु ु ू
गया है ।दहे ज के Îलये लडÍकय| को स« जी भांजी क| तरह काट| जा रह| है ।सखी बेकार घासफस
ू ू
क| तरह जलायी जा रह| है । कब तक लडÍकयां को आग के हवाले दहे ज लोभी करते रहे गे ।
अवध-राHस कै से जला दे ते है । अपने बेटे बेÍटयो को जलाकर 4 यो नह|ं दे खते ।
सान

-Íकसको कौन जला Íदया ।
Îमसेजशोभा-बेट| त जा कछ खा पी ले । थक| मांद|
ू ु
होगी । कालेज से आ रह| है ना ।
24
सान

-मां तम सनीता क| मौत क| खबर मझसे
ु ु ु
Îछपा रह| हो न । ठ|क है म नह|ं पछती हं पर


मझे पता चल गया है अखबार से सब कछ । खै र मां म आ तो कालेज से ह| रहं पर अब जा रह|
ु ु

हं सहे ल| के बथ डे म । कछ ह| Íदन| म उसका भी « या


ह होने वाला है । उसके साथ भी ऐसा हो गया
तो ।
Íकरन मैडम-बेट| ऐसा हादशा द° म

न क| बेट| के साथ न हो । सभी लडÍकयां दहे ज क| आग से दर

रहे ।
सान

-आÞ ट| « याह के बाद तो लडक| एकदम से परायी हो जाती है ना ।बे बस हो जाती है सास ससर

ननद और पÎत के कट+ ब
ु ु
का अc याचार सहने को । यह| तो सनीता के साथ भी हआ और ना जाने


Íकस Íकस के साथ होगा । Íकसी भी लडक| के साथ हो सकता है मेरे साथ भी
Îमसेजशोभा का कले जा मंह को आ गया । वे तडप उठ| । उनके मंह से Îनकल पडा भगवान रHा
ु ु
करना मेर| बीÍटया का। वह बोल| Íकरन अब तो मेरा डर बढता जा रहा है बीÍटया सयानी हो गयी
है । दहे ज दानव का Îघनौना Fप Íदन पर Íदन डरावना होता जा रहा है । बेÍटया क| असमय मौत
का कारण दहे ज ह| बन रहा है ।
Íकरनमैडम-हां द|द| रोज रोज जो कछ हो रहा है उससे डर तो बढ ह| रहा है ।बेÍटय| के भरण क|
ु ू्
हc या हो रह| है । कछ बच भी जाती है तो ससराल म जला द| जा रह| है । कछ ह| सौभा¹ य
ु ु ु
शाल|
है जो Îनि° च7 त जीवन बसर कर पा रह| है । अगर ऐसा ह| लडÍकय| के साथ अc याचार होता रहा
तो औरत जात बचे गी नह|ं ।
Îमसेजशोभा-दे खो औरत जात ह| औरत क| द° म

न बन गयी है । सनीता का पÎत तो

सरकार| दौर
पर था ।वह तो सनीता को बहत चाहता था । घर म सास ननद और ससर थे । ससर भी मारना
ु ु ु

नह|ं चाह रहा था पर घरवाल| के दबाव म वह भी आ गया । वह तो सनीता को सोने का अÞ डा

दे ने
वाल| मग| समझ रहा था । उसक| सास तो एक Íदन म ह| सारे सोना Îनकलवा लेना चा

ह रह| थी
। सनीता जब पहल| बार ससराल से मायके को रवाना हई थी तब बार| बार| से उसक| सास और
ु ु

ननद ने उसके कान म कहा था Íक पांच तोला सोना और कार खर|दने के Îलये Fपया लेकर आना
वरना
Íकरनमैडम-वरना का मतलब तो सनीता क| मौत से ह| था । बेचार| बेकसर दहे
ु ू
ज ह| आग म जला
द| गयी।
Îमसेजशोभा-सनीता क| मौत ने तो खन के आंस दे ह| Íदया सान क| बाते आc मा
ु ू ू ू
को झकझोर
Íदया ।
Íकरन मैडम-हां द|द| हर बेट| का मां बाप खौफनाक ि1 थÎत से गजर रहा है । बीÍटया को अ¯ छा

घर
वर Îमल जाये तो समझो गंगा नहा Îलये ।
Îमसेज शे ◌ाभा -नववधओं के रोज रोज क| जलाने क| खबर ने तो लडÍकय| को अ7 द

र से तोड
Íदया है । सना

नह|ं सान 4 या

कह कर गयी है । मझे तो बहत डर लग रहा है बीÍटया के « या


ह को
लेकर ।
Íकरन मैडम-सान के « या

ह म तो व4 त है मेर| रान तो « या

ह करने लायक हो गयी है । लडके वाले
तो ऐसे दाम लगा रहे है जैसे बकर कसाई । द~ हे

क| बाजार तो बहत गरम हो गयी है । बेट| के

Îलये घरqवार ब चकर द~ हा

खर|द भी ले ,इसके बाद भी तो बीÍटया के सलामती क| कोई गारÞ ट|
25
नह|ं है । बेट| के मां बाप है तो द~ हा

तो ढढना

ह| पडे गा पर द|द| दहे ज मांगने वाले के घर
अपनी बेट| नह|ं दं गी भले ह| दसर| जाÎत के गर|ब लडके का रान का हाथ दे दं गी पर अपनी जाÎत
ू ू ू ू
के दहे ज लोभी के घर « याह न करने क| कसम खाती हं । द|द| अब जा रह| हं रान कालेज से आ
ू ू

गयी होगी कहकर Íकरन मैडम घर चल| गयी ।
Îमसेज शोभा बैठे बैठे सान बीÍटया

के « याह और « याह के बाद क| Îच7 ता म इतनी दखी हो गयी

Íक उनक| आंखे सावन भादो हो गयी । अं धेरा पसरते पसरते सान भी आ गयी । मां को ऐसी

हालत म दे खकर वह परे शान हो गया । गाडी खडी क| और भागकर मां के पास गयी । सान मां के

आंस पोछते हए बोल| मां 4 या


हो गया 4 य| ऐसी हालत म बैठ| हो ।
Îमसेज शोभा-बेट| मझे 4 या

होगा । म ठ|क तो हं ।

सान

-मां आंख| से बहता तर तर आसं झठा तो
ू ू
नह|ं हो सकता ।
Îमसेजशोभा-नह|ं बेट| म रो नह|ं नह|ं रह| आंख म कछ चला गया है Îमच जैसा ।यह| बैठे बैठे

त+ हा

र| और अवध बेटवा क| राह दे ख रह| थी ।वह भी अभी तक टयशन से

नह|ं आया ।
सान

-अवध भी आजायेगा । आंस झठ बोलकर 4 यो
ू ू
Îछपा रह| हो मां । आसं छपाने से
ू ु
नह|ं छपते ।

मेरे « याह और « याह के बाद क| ÍफHर हो रह| है ।
Îमसेज शोभा-बेट| सब छोड । ये तो बता इतनी दे र कै से हो गयी ।
सान

-सतीश अं कल के घर जमा भीड को दे खकर मै भी चल| गयी ।अं कल आÞ ट| को तो होश ह|
नह|ं है । राज का भी रो रोकर बरा हाल हो गया है । अं कल के घर म मौजद सभी लोगो के आंखो
ू ु ू
से आंस बह रहा था ।मां एक बात अ¯ छ|

हई है ।

Îमसेजशोभा -वह 4 या बे ट| ?
सान

-पाÍपय| को सजा Îमल गयी ।
Îमसेजशोभा-इतना ज~ द| । अभी तो स¯ ताह भर भी नह|ं हए । के स का फै सला तो कई सालो म

होते है ।
सान

-हां मां यह| तो सकन दे ने वाल| बात है । पÎलस और 7 या
ू ु
यालय ने ऐÎतहाÎसक काम Íकया है ।
इससे लोगो म पÎलस और 7 या

यालय के 9Îत भरोसा और बढे गा ।
Îमसेज शोभा-पाÍपय| को फांसी तो हई

नह|ं होगी ।
सान

-मां हई है ना सनीता क| सास को।

Îमसेजशोभा-सनीता का पÎत तो बेचारा Îनद|ष था गह1 ती
ु ृ
बसने से पहले ह| उसके मां बाप और
बहन ने तोड Íदया वह तो Íकसी सजा का हकदार नह|ं था पर उसक| ननद और ससर का 4 या

हआ



सान

-आज7 म कारावास ।
Îमसेज-फै सला तो अ¯ छा हआ काश इस फै सले से दहे ज लोभी सबक पाते । बह पर अc या
ु ू
चार करने
से पहले हजार बार सोचते ।
सान

-जFर सोचे गे ।सबसे पहले तो नार| को आग म झोकने वाल| नार| को सोचना होगा । नार| ह|
नार| क| द° म

न साÍबत हो रह| है । तभी नार| संरHण के सारे कानन कायदे ताख पर रखे रह जाते

है ।
26
Îमसेजशोभा-आजकल क| ÎशÍHत लडÍकय| को आगे आना होगा । दहे ज दानव के बढते खनी

पंजे को रोकने के Îलये और लडÍकय| क| Íदन 9ÎतÍदन घटती जनसंE या के 9Îत औरतो को
जागFक करना होगा । समाज और शासन के सहयोग के साथ दहे ज लोÎभय| को कठघरे म लाने
का िज+ मा भी उठाना होगा । लडÍकय| को संगठन बनाकर दहे ज के Íखलाफ लडना होगा । संगठन
से हर अÍववाÍहत और ÍववाÍहत लडक| को जडना होगा तभी औरत जात सरÍHत रह पायेगी ।
ु ु

सान

-हां मां अब दे र नह|ं ऐसे भी संगठन बनेगे और दहे ज लोÎभय| क| नाक म नके ल कसेगे । काश
म दे श क| 9धानम7 ³ी या रा* çपÎत होती तो दहे ज दानव का रा1 ता हमेशा के Îलये ब7 द कर दे ती ।
Îमसेजशोभा-अ¯ छा बता 4 या करती ।
सान

-म Íववाह Íवभाग बनाती और सभी लडके लडÍकय| का रिज1 çे शन करवाती । « याह क| उH
और पांव पर खडा होने पर जाÎतवाद के मन-भेद से उपर उठकर सहधम| और यो¹ य लडके लडÍकय|
का « याह करवाती । बेटे बेÍटय| के पढाई Îलखाई से लेकर « याह तक पर| िज+ मे

दार| सरकार के उपर
डाल दे ती । सहधम| Íववाह को काननी मा7 य

ता 9दान करवाती । सामािजक और धाÎम क मा7 यता
Íदलाने हे त धाÎम क गFओं को भी राजी कर लेती
ु ु
ताÍक हर बट| का जीवन सरÍHत रहे और मां

-बाप
को हं सते जE म से बचे रहे ।
Îमसेजशोभा-काश ऐसा हो जाता,तब ना कोई दहे ज मांगता और ना कोई लडक| दहे ज क| आग म
जलती ,और ना ह| कोई मां बाप रोते हए कहता Íक

-कब बझे गी ये दहे ज क| आग ।

6 66 6- -- -सौदा
बंशीधर क| तेरहवीं तक उनके वाÍरस सñ रखे रहे पर7 त

तेरहवी Íबतते ह| सñ का बांध टट गया ।

बंशीधर क| दसर| Íवधवा पc नी

मंथरादे वी धन स+ पÎत समेटने म ज~ द| थी । का1 तकार|,ब कबैल स
से लेकर भ स,घास-भसा

,गोबर कÞ डा तक को अपने क« जे म करने को उतावल| थी । पÎत के मरने
का कोई गम न था । गम था तो ये Íक कह| कोई सामान सौतेले बेटा बह न रख ले। सौतेल| मां

के एकाÎधकार को दे खकर बंशीधर के तीन| लडके Íदले° वर,मने° वर और रते° वर ने पंचायत बलाना

उÎचत समझा◌ा । चौदहव Íदन पंचायत ब

ला ल| गयी ।
पंच| के सामने मंथरादे वी ने अपने नाम के ब क बैलेस और जमीन को छोडकर बाक| चल अचल
स+ पÎत पर आधे क| Íह1 सेदार| पेश कर द| । मंथरादे वी क| इस दावेदार| को दे खकर Íदले° वर ने
आपिc त ल| ।
मंथरादे वी पंच| से मखाÎतब होते हए बोल| पंच| अभी तो का1 त


कार| घरqवार और मेरे 1 वग|य पÎत
के नाम जमा रकम म आधा Íह1 सा चाÍहये । मेरे नाम जो रकम जमीन है वह तो मेर| ह| रहे गी ।
हां मेरे मरने के बाद ये तीन| लडके आपस म बांट सकते है । मेरे जीने का भी तो कछ सहारा होना

चाÍहये ।
मंथरादे वी के एकतरफा Íह1 सेदार| क| बात सनकर कानाफं सी शF हो गयी । इतने म Íदले° व
ु ु ु
र हाथ
जोड कर खडा हआ और बोला पंच| नई मां आधे क| Íह1 से

दार| पE ता

कर रह| है । मरने के बाद
हम तीन| भाइय| म बराबर बांटने क| बात कह रह| है ।यÍद नई मां ने मेरे बाप दादा क| चल अचल
स+ पÎत अपने भाई भतीज| के नाम कर द| तो । नई मां का तो कोई भरोसा नह|ं है पंचो।
मने° वर-पंच| भइया ठ|क कह रहे हो ,नई मां है Þ डपाइप से पीने का पानी नह|ं लेने दे ती । 4 या वह
हमारे Îलये दौलत छोडे गी ?
27
रते° वर-हां पंच| नई मां से उ+ मीद कोई उ+ मीद करना खद को धोखा दे ना है । बांप

के मरने के
पहले ह| बहत सार| धन दौलत

, खेत अपने नाम Îलखा ल| । नई मां ह| बाप क| मौत क|
िज+ मेदार है ।
मंथरादे वी-रते° वर,म नह|ं तम लोग काÎतल हो । इतना मोह था तो तेरे बापमझे 4 य|
ु ु
लाये । बाप
साठ साल क| उH म « याह क| 4 यो सझी। मझे लाये है तो उ
ू ु
नक| स+ पÎत पर मेरा Íह1 सा तो होगा
। कानन मझे अÎधकार दे ता है । म अपने अÎधकार से कोई सौदा
ू ु
नह|ं कFं गी ।
मने° वर-तम हमार| मां बनने

नह|ं आयी हो । दौलत पर क« जा करने आयी हो । बाप को हम लोगो
से Îछन ल| । धीरे धीरे जमीन,नगद| और जेवर पर क« जा कर ल| । हम तीन| भाईय| के Îलये कछ

तो छोडो मां । 4 यो सौते लेपन का जहर दे रह| हो । अब तो बाप भी नह|ं रहे । नई मां त+ हा

रे पÎत
से पहले वे हमारे बाप थे। तमको आये अभी दो साल भी

नह|ं हए सार| दौलत पर क« जा

कर ल| ।
बाप को तमने मार डाला भE े
ु ू
◌ा दाF Íपला Íपलाकर। मां त

म अपने मकसद म कामयाब हो गयी ।
अफसर बाप त+ हा

र| काले जाद को

नह|ं समझ पाये । िज7 दगी नौकर| म दसर| का के स हल करते

रहे । अपने ह| के स म तमसे हार गये नई मां ।

मंथरादे वी-म तो अपना धन धम सब कछ छोडकर आयी थी यह सोचकर क| तेरे बाप के साथ मेरे

जीवन क| सांझ चै न से Íबत जायेगी । वे तो मझे अधजल म छोड मरे । तम लोग उनक| मौत का
ु ु
Íठकरा मेरे Îसर फोड रहे हो । मझे ठÎगन कह रहे हो ।

Íदले° वर-म त+ हा

रे पास था 4 या ? न खाने का Íठकाना न पहनने का । एक झोपडी ह| तो थी ।
यहां आते ह| Îतजोर| क| ताल| लटकाने लगी । ब क क| पासबके Îछपाने लगी । बाप क| कमाई का

Íहसाब Íकताब रखने लगी । दो साल मे◌े तमने सब कछ पर क« जा
ु ु
जमा Îलया । िजस दौलत को
मेर| सगी मां ने नजर भर कभी नह|ं दे खा । वह| मां िजसने बाप को कामयाब बनाने के Îलये
मेहनत मजदर| करती थी Íपताजी पढने जाते थे । मेर| मां

क| कमाई पर तम नाग क| तरह फन

फै लाकर बैठ गयी हो । हम तीन| भाई ललचाई आंखे◌ा◌ं से दे ख रहे ह । अपना हक नह|ं पा रहे है
। नोना-नटो क| तरह झोपडी म रह रहे है इतनी बडी कोठ| रहते हए। यह| ह मां तेर| ममता ।

मंथरादे वी-ये कोठ| Íकसक| है ।तम लोग लोगो को Íदखाने के

Îलये झोपडी म रह रहे हो ।
रते° वर-नई मां तमने हम बेघर कर Íदया है । सब कछ तो त+ हा
ु ु ु
रा होकर रह गया है । हम तो चै न
से रहने भी नह|ं दे ती हो । चल अचल सभी स+ पÎत पर त+ हा

रा ह| तो क« जा है । हम तीन| भाई
तो अपने हक से बेदखल ह ।
मने° वर-नई मां बाप के जीते जी लाख| क| रकम अपने नाम करवा ल| । सोने के आभषण बनवा

Îलये । ढे र सार| रकम मायके पहं चा द| । बाक| पर आधा Íह1 सा

मां ग रह| हो ।हम भाई लोग
अपने बाप क| नाजायज औलाद तो नह|ं ?बाप क| स+ पÎत पर हमारा भी हक बनता है क| नह|ं ?
मंथरादे वी-तम लोग अपने बाप

क| नाजायज औलाद नह|ं हो तो म भी कोई रखै ल नह|ं हं । काननी


« याह क| हं Íद~ ल|

क| कचहर| म जाकर त+ हा

रे बाप से । आधे के Íह1 से का हक है मेरा भी।
Íदले° वर-नई मां तम इस पÍरवार म एक Íह1 से

दार क| है Îसयत से आयी हो हम भाईय| के अरमानां
का कc ल कर हं सते जE म दे ने आयी हो 4 या?
मंथरादे वी-हां ठ|क समझे
28
सेठ 9धान

-मंथरा भौजाई बंशीधर भइया ने त+ हा

र| मांग म Îस7 ध

र डालकर उपकार Íकया है । तम

उनके ब¯ चे ◌ा◌ं को अपना ब¯ चा नह|ं मान रह| हो । तम इन लडको क| मां हो । मां का फज

Îनभाना चाÍहये था । त

मने ऐसा नह|ं कर सौते ल| मां के चÍर³ को और भयावह बना Íदया है । ये
लडके तमको मÍण कÍण क ले जायेगे त+ हा
ु ु
र| मत दे ह। त+ हा
ृ ु
र| अथ| बंशीधर भइया के दरवाजे से
उठे गी तभी 1 वग म जगह Îमलेगी । मायके से डोल| उठना अ¯ छा होता है अथ| नह|ं । तम तो पढ|

Îलखी हो । इसÎलये त+ हा

रा फज और बढ जाता है पर तमको दौ◌ैलत से मोह से है । बंशीधर

भइया क| औलाद| से नह|ं ।
मंथरादे वी-9धान भइया तम भी इन लडको का पH ले रहे हो । म बढ| औरत कहां जाउ◌ू◌ंगी । अरे
ु ू
मेर| बाक| िज7 दगी का सहारा तो दौलत ह| है ना । ये लडको तो पहं

चा Íदये मÍणकÍण का । ये
लडके मेरा सहारा नह|ं बन सकते है तो मेर| सौत क| औलाद
सेठ9धान

- तम पÍरवार क| भखी
ु ू
नह|ं हो 4 य|Íक इन लडको को तमने पैदा

नह|ं Íकया है ना ।
बंशीधर भइया के पÍरवार का दख सख त+ हा
ु ु ु
रा दख सख
ु ु
नह|ं है । तमको बस बंशीधर भइया

क|
दौलत से मोह है । भइया ने तो उपकार Íकया था तम पर । वह| उपकार अपराध बन रहा है । अरे

गांवपर के सभी जानते है तम कै से दÍद न काट रह| थी । इस घर म आते ह| महरानी बन गयी ।
ु ु ु
पेट भर रोट| के Îलये न1 तवान थी । वो Íदन भल गयी । अरे बंशीधर भइया के जीते जी तो बह



ज~ म

क| इन लडको पर अब तो रहम खाती । उनका Íह1 सा उनको दे दे ती । त+ हा

रे पास तो तीन
बेटे है Íकसी के साथ रहकर जीवन के बाक| Íदन चै न से Íबता सकती हो ।तम दौलत के ढे र पर

बैठ| हो और त+ हा

र| सौत त+ हा

रे मतक पÎत बं शीधर भइया के बेटे छोट| मोट| चीज| के Îल

ये तरस
रहे है । भइया Íरटायर होकर आये थे तो प7 gह लाख Fपया Îमला था परा गांव जानता है । हर

मह|ने सात हजार प शन Îमल रह| थी । सना है Íक भइया के खाते म बस तीन लाख Fपया है । घीरे

घीरे सब Fपया झंस ल| । तीन लाख म से आधा और जमीन जायदाद म आधा मांग रह| हो । ये
कहां का 7 याय है । ये तीन लडके और उनका पÍरवार कै से जीवन बसर करे गा । 7 यादा होÎशयार|
अ¯ छ| बात नह|ं है । अरे Íपछले कम का फल भोग रह| हो दो दो पÎत खा गयी । कोई बाल
ब¯ चा भी नह|ं ह त+ हा

रे । इ7 ह| तीनो लडको को अपना लेती तो जीवन 1 वग बन जाता ।
राम÷ं गार

-हां 9धान भइया बात तो लाख टके क| कह रहे हो । भौजाई के पास बहत अ¯ छा

मौका
था अगला ज7 म सधारने का पर भौजाई ने बंशीधर भइया के साथ « या

ह नह|ं सौदा मान रह| है ।
अरे Íदले° वर मने° वर और रते° वर छोटे ब¯ चे होते तो जहर Íपलाकर सार| चल अचल स+ पÎत पर
क« जा कर लेती । अरे भौजाई बंशीधर भइया के तीन लडके और एक लडक| भी तो है । उसका भी
Íह1 सा बनता है ।
मंथरादे वी-कोई लडक| नह|ं है । Íदले° वर से पछो शपथ प³ पर सभी के द1 त

क है ।
राम÷ं गार

-अ¯ छा तो एक कांटा Îनकाल चक| हो ।

राम÷ं गार क| बात स
ृ ु
नकर मंथरादे वी के Íपताजी झनझनबाबा HोÎधत होकर बोले यहां तो पर|
ु ु ू
पंचायत अफ|म के नशे म मदहोश है । मंथरा बीÍटया तमको यहां 7 या

य नह|ं Îमलेगा ।
मंथरादे वी-Íपताजी मन छोटा ना करो म ने भी क¯ ची गोÎलयां नह|ं खेल| है । « याह नह|ं एक सौदा
था िजसका गवाह Íदले° वर भी तो है । फै सला तो मेर| मज| के माÍफक होगा ।नह|ं तो कोट कचहर|
तो है । म Íदले° वर के मतक बाप क| दसर| पc नी
ृ ू
हं रखै ल

नह|ं । मेरा आधे का Íह1 सा है । म
29
लेकर रहं गी । जमीन जायदाद और बै।क के सभी

कागजात मेरे पास है ।वह भी इन तीन| के बाप
Íदया है ।
सेठ9धान

-मंथरा भौजाई बंशीधर भइया कोई वसीयत Îलखकर मरे ह 4 या ?
मंथरादे वी-यह| तो गलती हो गयी । वसीयत नह|ं Îलखवायी गयी । वसीयत Îलखकर मरे होते तो
आज ये कौअ◌े नह|ं मडराते मेर| मांस को न|चने । सब कछ मेरा होता । पंचायत क| जFरत

नह|ं
पडती ।
राम÷ं गार

-स

न Îलये झनझनबाबा । भौजाई क| िजरह । बाबा ये आपक| सािजश तो
ु ु
नह|ं थी ,भइया
के ◌ा साठ साल क| उH म « याह के बंधन म बंधक बनाकर जमीन जायदाद हडपने क| । भईया के
बार बार मना करने पर बाबा अपने अपनी पगडी भईया के पांव पर रख Íदये थे । भईया ने आपक|
लाज रखी और आपने धोखा Íदया । भइया क| और उनके परख| क| जायदाद को हडपने का सौदा

समझ Îलया । मंथरा भौजाई एक मां का ¯ यार इन लडके ◌ा को दे ती तो ये लडके इतने नासमझ
नह|ं है । ये लडके तो ÷वण क| तरह है । तम हो इन लडको को जहर परोसने म जरा भी कोर

कसर नह|ं छोड रह| हो । झनझनबाबा
ु ु
तम भी वादे से मकर गये। बं शीधर भइया क| दौलत के
ु ु
लालच म ।
झनझनबाबा
ु ु
-इन लडको ने कौन सा फज Îनभाया ?
सेठ9धान

-बाबा ये तीनो लडके 4 या करते । अपने बाप दादा क| दौलत चांद| क| थाल| म रखकर
तमको पेश कर दे ते । बाबा तमने और त+ हा
ु ु ु
र| बेट| ने बंशीधर भइया के साथ छल Íकया है ।
Íरटायर होकर आने के बाद कभी चे न क| रोट| आपक| बेट| ने नह|ं द| बंशीधर भइया परा गां व

जानता है ।बंशीधर भइया िज7 दगी भर तो शहर म रहे Íरटायर होने के बाद उनको खेती करने का
च1 का लग गया था । बंजर जमीन से भी भरपर अनाज पैदा कर रहे थे । पर| को
ू ू
ठ| म जो अनाज
भरा है उनक| मेहनत का फल है । ये मंथरा भौजाई रोट| Íबना मार डाल| । दÎनया क| सार| सख
ु ु
सÍवधा बंशीधर मंथरा भौजाई तमको Íदये पर तमने दो जन क| भर पेट रोट|
ु ु ु ु
नह|ं द| । बेचारे मर
गये भखे । हां दस Fपये क| दे शी दाF मंगा कर जFर दे दे ती थी ताÍक मर

जाये ज~ द|। तम बंधन

से म4 त

हो जाओ । धन दौलत लेकर दसरा रा1 ता

नाप लो । बंशीधर भइया के खन पसीना से

सींचा पÍरवार सडक पर आ जाये । मंथरा भौजाई त+ हा

रे जैसा ह| गोरो ने Íकया था । पहले तो वे
एक साधारण ¯ यापार| बनकर आये थे Íफर धीरे धीरे दे श पर क« जा कर Îलये । वह| तमने Íकया ।

बंशीधर भइया से « याह के बहाने उनक| दौलत पर क« जा Íकया है । बहत Îघनौना सlदा Íकया है

तमने ।

राम÷गार

-बंशीधर भइया लगभग दो साल भर पहले Íरटायर हए थे तब उ7 हे

प7 gह लाख Fपये Îमले
थे बाक| और भी पैसे Îमलने वाले थे । हर मह|ने प शन Îमलती थी । ब क म मा³ तीन लाख है ।
बाक| Fपये कहां गये । Íहसाब तो तमको ह| दे ना होगा । लडको को तो तमने पास तक फटकने
ु ु
नह|ं Íदया । तीन लाख मकान और खेती क| जमीन म आधे क| दावेदार| पेश कर रह| हो ।
मंथरादे वी-आधे से कम पर तो सौदा नह|ं होगा । चाहे ब कबैलेश हो या जमीन जायदाद सब म आधा
चाÍहये ।
30
झनझनबाबा
ु ु
-मेर| बे◌ेट| क| अभी उH ह| 4 या है चाल|स साल क| है । पर| पहाड सी िज7 द

गी
बीÍटया के सामने है गजर बसर कै से होगा । झनझनबाबा क| बात काटते हए रमरिजया मंथरादे वी
ु ु ु

क| मां बोल| पंचो मेर| बेट| का Íह1 सा मत छ|नो । Íवधवा क| बq दआ खाल|

नह|ं जाती ।
रतिजयादे वी-4 या कह रह| हो बहन बंशीधर बेटवा के मरे आज चौदह Íदन हए इस बीच Îतजोर| का

मंह त+ हा
ु ु
रे घर क| तरफ मड गया । अनाज क| गोदाम का मंह त+ हा
ु ु ु
रे घर म अब खलता है । बीस

हजार क| भ स त+ हा

रे दरवाजे पर बंध गयी । बीÍटया का « याह क| थी Íक कोई सौदा । बंशीधर के
मरते ह| सब कछ लट लो । ऐसा तो न दे खी थी न सनी थी अपनी अ1 सी
ु ू ु
साल क| उH म ।
रघन7 द

न-सासजी दमाद क| दौलत से करोडपÎत बन रह| हो

?अरे नाÎतय| का हक 4 यो छ|नने पर
तल| हो

?
रमरिजया-कौन नाती । दमाद के जीते जी सब नाता था उनके मरते ह| सारे नाते टट गये ।

राम÷ं गार

-जमीन जायदाद और Fपये से नह|ं टटा है सासजी
ू ु

रमरिजया-बाब ये तो मेर| बेट| का अÎधकार है ।मेर| बेट| िजसे चाहे दे । मंथरा मेर| बीÍटया बंशीधर

बाब के स+ प

Îत क| असल| हकदार है ।
सेठ9

धान-दे खो व4 त मत गवाओं मझे दसर| पंचायत म जाना है । मq
ु ू ु
दे क| बात करो ।
झनझनबाबा
ु ु
-9धान जी यÍद फै सला आपके बस क| बात न हो तो ये लोग कचहर| चले जाये । वहां
दध का दध पानी का पानी हो जायेगा ।
ू ू

मंथरादे वी-मझे तो आधा Íह1 सा

चाÍहये ।
सेठ9धान

-आधा तो नह|ं Îमल सकता ।
मंथरादे वी-4 यो ?
से◌ेठ9धान

-मतक बंशीधर के तीन लडके एक लडक| और पांचवी तम वाÍरस हो । तमको आधा Íहसा
ृ ु ु
कै से Îमल सकता है ।
मंथरादे वी -पांच नह|ं चार है । बेट| काननन मर चक| है । इस बात क| पहले ह| िजH हो चक| है ।
ू ु ु
बेट| क| काननन मौत के गवाह Íद

ले° वर भी तो ह । एक बात का मÇ ठा बनाने से कोई मतलब नह|ं

सेठ9धान

- बेट| मर| तो नह|ं है । तीन ब¯ च| क| मां ह भरा परा पÍरवार है । अपने पÎत के साथ

खश ह । शहर म रहती है । आती जाती रहती है । भले ह| वह Íह1 सा

न मांगे पर है तो Íह1 सेदार ।
Íदले° वर-ठ|क है चार ह| Íह1 सा होगा पर नई मां आधा ले लेगी तो हम तीन भाइय| का घर पÍरवार
कै से चलेगा । ब क म तीन लाख बचे है । बारह लाख Fपये मां हजम कर चक| है । बीघा से अÎधक

खेत अपने नाम करा चक| है । पंचो चार बीघा खेत ये कोठ| िजस पर मां का ह| क« जा

है । हम
भाई लोग तो झोपडी म रह रहे ह परा गांव दे ख ह| रहा है । इसके बाद भी मां का पेट

नह|ं भर रहा
है तो पंच| आप लोग हम भाइयो को जैसे कहो वैसे राजी है । बाप भी नह|ं मेर| सगी मां स³ह साल
पहले मर चक| है । नई मां हम भाइय| क| कñ खोद रह| है । पंच| फै सला आपके

हाथ म ह । हम
भाई राजी ह पंच| के फै सले पर । पंच| नई मां से बारह लाख Fपय और बाक| जो स+ पÎत Îछपाकर
रखी है या मायके पहं चा द| है उसका भी खलासा कर द ।जानने को तो सभी जानते है पर नई मां


अपने मंह से कह तो दे ।

31
सेठ9धान

-मंथरादे वी Íदले ° वर ने जो कछ कहा ह

जायज है । Íहसाब तो Íहसाब है दे ना होगा ।
तभी बंटवारा होगा ।
मंथरादे वी-जो Íदले° वर के मतक बाप के नाम ह उसी का Íह1 सा

हो सकता है । मेरे नाम है या मेरे
पास जो कछ ह उसम Íह1 सा

कै से लगेगा । वह तो Íदले° वर के मतक बाप ने जीते जी मेरे नाम


कर Íदये है ◌े । उस पर तो बस मेरा हक है चाहे बारह लाख हो या बीस
सेठ9धान

-मंथरादे वी ² यान से सनो भले ह| बं शीधर भइया ने त+ हा
ु ु
रे नाम कर Íदया ह पर त+ हा

रे
बाद त+ हा

र| चल अचल स+ पÎत के माÎलक यह| तीनो होगे ।
मंथरादे वी-जो मेर| परवÍरश करे गा वह मेर| दौलत का वाÍरस होगा । म अपने नाम क| स+ पÎत का
उपयोग करने को 1 वत7 ³ हं । कानन भी मझे इजाजत दे ता ह । अपने Íह1 1 े

ू ु
◌ा क| दौलत चाहे
अपने बाप के नाम कFं या भाई के नाम या भतीजे के नाम कोई रोक नह|ं सकता ।
सेठ9धान

-यह तो अ7 याय है । धोखा है । 4 या इसीÎलये « याह क| थी चाल|स साल क| उH म साठ
साल क| उH वाले बंशीधर भइया से।
राम÷ं गार

-9धानजी « याह नह|ं यह एक सौदा ह । दौलत हडपने क| Îघनौनी सािजश है । आप तो
फै सला सनाओं । मानना होगी तो मंथरादे वी मान लेगी ।कचहर| जाना चाहे तो शौक से जाये

। परा

गांव तो हक|कत जान चका है ।

सेठ9धान

-ठ|क कह रहे हो राम÷ं गार । फै सला तो तैयार ह । 0ाम पंचायत के सद1 य|

क| द1 खत
करवाकर महर लगा कर फै सला पढकर सना दो ।
ु ु

राम÷ं गार

-9धान के कहे अनसार कार वाई पर| क| । इसके बाद फै सला सनाया मतक बंशीधर
ु ू ु ृ
क|
दौलत म Íदले° वर,मने° वर,रते° वर और उनक| सौतेल| मां मंथरादे वी के बराबर के Íह1 1 े◌ा का ।
फै सला सनकर मंथरादे वी उसके मां बाप के चे हरे Íखल उठे । वह| दसर| ओर Íदले° व
ु ू
र,मने° वर और
रते° वर क| आंख| म आं स माथे पर Îच7 ता

के बादल मडा रहे थे तीनो बेटो को रोता दे खकर बंशीधर
के बडे भाई कलधर उठे और तीन| को बांह म समेटते हए बोले बेटा झनझनबाबा

ु ु
,रमरिजया दे वी और
उनक| बेट| मंथरादे वी के चH¯ य

ह के रह1 य को त+ हा

रा अÎधकार| बाप नह|ं समझ पाया।बंशीधर को
ना जाने कै से बढौती म « या

ह क| सझी थी जबÍक दÎन
ू ु
या जानती है ◌ा Íक बढौती म « या

ह बबा द|
को 7 यौता दे ना है । इसका गवाह तो इÎतहास भी है । मंथरादे वी अपनी चाल म कामयाब हो गयी
और त+ हा

रे भा¹ य म मंथरादे वी ने भर Íदया मÇ

ठ| भर आग । यह « याह नह|ं मंथरादे वी क|
सािजश थी ।
7 77 7- -- - क÷ यादान
Îम1 टर रामअधार बाब डबते सरज को Îनहार Îनहारकर जैसे कोई स+ भा
ू ू ू
वना तलाश रहे थे । इसी
बीच उनके दरवाजे पर सफे द रं ग क| चमचमाती कार Fक| । रामअधार बाब बेखबर थे । कार म से

उनके पराने पÍरÎचत Îगरधर बाब अके ले Îनकले और कमरे म आ गये । इसके बाद भी रामअधार
ु ू
बाब के कान|

को भनक न पडी । Îम1 टर Îगरधर बाब Îम1 ट

र रामअधार बाब के पास खडे होकर

बोले 4 या भाई साहब जब दे खो तब सोच म डबे रहते हो । जागते हए सपना दे ख रहे हो। प* पा
ू ु


भाभी से मन भर गया 4 या ?
Îम1 टर रामअधार बाब चौक कर बोले कौन

?
Îम1 टर Îगरधर बाब

-म भाई साहब ?
32
रामअधार बाब

-आपबड़ भा¹ य हमारे आपके दश न तो हो गये ।
Îम1 टर Îगरधर बाब

-हां भाई साहब डबते सरज म 4 या
ू ू
तलाश रहे थे । कहते ह डबते सरज को
ू ू
नह|ं दे खना चाÍहये आप तो घर घर कर दे ख रहे थे । ये तो म था कह| चोर घर म घस गया होता
ु ु ु
तो
रामअधार-स+ भावना तलाश रहा था । हमारे घर म चोर को कागज के अलावा और 4 या Îमलेगा ।
Îगरधरबाब

-डबते सरज म स+ भा
ू ू
वना तलाश रहे थे ।
Îम1 टर रामअधार बाब

-हां भाई साहब खै र छोÍडये कहां से आ रहे ह वह भी अके ले ब¯ चे कहां ह ।
बरखा बीÍटया भी इंजीÎनयर हो गयी ह अपने पां व पर खडी हो गयी है । भाई साहब आपक| Îच7 ता
तो दर हो गयी। उसको भी लाना था ।

Îम1 टर Îगरधरबाब

-Îच7 ता तो क7 यादान के बाद खc म होगी ।
रामअधार-हां बडा बोझ तो उतरना बाक| है ।खै र ये भी उतर जायेगा । भाई साहब आप तो कह रहे
थे सपÍरवार आये है । कहां ह बाक| लोग ।
Îम1 टर Îगरधर बाब

-हां भाई साहबबरखा बीÍटया बेटा उदय,उनक| मां और पंÍडतजी कार म है ।
Îम1 टर रामअधार-पंÍडतजी को लेकर कह|ं जा रहे ह 4 या ?
Îम1 टर Îगरधरबाब

-यह|ं तक आये ह और कह|ं नह|ं जाना है ।
Îम1 टर रामअधार-कम काÞ ड म तो मेरा Íव° वास नह|ं है । हम तो बस भगवान को मानते है । खै र
आप लेकर आये है तो म बलाकर लाता हं । आप तो बैÍठये ।पंÍडतजी तो हमारे घर का पानी तो


पीयेगे नह|ं ।
Îम1 टर Îगरधरबाब

- 4 य| नह|ं पीयेगे जमाना बदल गया है । भाई साहब आपका बेटा Íवजय बडा
इंजीÎनयर बन गया है ,बेट| खशब भी नाम रोशन कर रह| है । सबसे छोटा बेटा 1 व
ु ू
त7 ³ भी उ◌ू◌ंची
पढाई कर रहा है । भाईसाहब अब तो अब बडे ह । आपके सामने तो हम छोटे है । भाई साहब
FÍढवाद| ¯ यव1 था ने तथाकÎथत जातीय छोटे लोग| क| िज7 दगी म मÇ

ठ| भर आग Fप बदल बदल
कर भर| है । जाÎत से आदमी बडा नह|ं बनता कम से बडा बनता है ।
Îम1 टर रामअधार-भाई साहब कथनी करनी म अ7 तर होता है ।
Îम1 टर Îगरधर बाब

-होता होगा पर म नह|ं मानता ।
Îमसेज प* पा

-4 य| बहस करने लगे Íवजय के पापा ।भाई साहब तो अÎतÎथ है । अÎतÎथ तो भगवान
होता है ।
Îम1 टर रामअधार-भागवान कहां बहस हो रह| है । कोई कोट कचहर| तो नह|ं ह यहां । बहस तो
वक|ल| के बीच जज साहब के सामने होती ह ।
Îमसेज प* पा

-जाÎतवाद क| बीमार| एक Íदन म तो खc म होने वाल| नह|ं ह । जातीय अÎभमान म
लोग खc म करने के Îलये जाÎत तोडो अÎभयान भी तो नह|ं छे ड रहे है ।
रामअधार-वाह रे भागवान तम तो उपदे श दे ने लगी ।

Îम1 टर Îगरधरबाब

-भाई साहब भाभीजी ठ|क कह रह| है । भाभीजी जाÎत तोडो आ7 दोलन Îछडे या
ना Îछडे पर जाÎतवाद क| बीमार| तो खc म होकर रहे गी धीरे धीरे । एक दो पीढ| के बाद जाÎत
Íबरादर| को नामोÎनशान नह|ं होगा । Íर° ते भी जाÎत के आधार पर नह|ं कम और शैHÍणक
यो¹ यताओं को दे खकर तय होग ।
33
Îमसेज प* पा

-भाई साहब आप बैÍठये म काÎमनी भाभी और ब¯ चे ◌ा को लेकर आती हं ।

Îम1 टर Îगरधर बाब

-पंÍडतजी भी साथ है । उ7 हे नह|ं भलना ।

Îमसेज प* पा

-पंÍडत जी 4 य|
Îम1 टर Îगरधरबाब

-काम है
Îमसेज प* पा

-Íवजय के पापा तो कभी हाथ नह|ं Íदखाये आज तक अब बढौती म 4 या

Íदखायेगे ?
Îम1 टर रामअधार-दे खो दÎनया भले बढा कह दे पर तम ना कहना ।
ु ु ु

Îम1 टर Îगरधरबाब

-भाई सीब को भले ह| पंÍडत का काम न हो पर मझे तो है ।

Îमसेज प* पा

-अ¯ छा तो आप कोई नया काम करने जा रहे ह ।
Îगरधरबाब

-वह| समझ ल|िजये ।
Îमसेज प* पा

-ठ|क ह पंÍडतजी को भी लेकर आती हं । प* पा


सभी को आदर के साथ लेकर अ7 दर
आयी और बैठने का आ0ह करते हए बीÍटया खशब को आवाज दे ने लगी

ु ू

Îमसेज काÎमनी-भाभीजी Íवजय नह|ं Íदखायी पड रहा है ।
Îमसेज प* पा

-क+ ¯ य

टर पर कछ कर रहा होगा ।

Îमसेज काÎमनी-Íवजय बेटा बरखा के बचपन का दो1 त है । दे खो Íकतने ज~ द| सयाने हो गये ।
« याह गौने क| उH के हो गये ।
Îमसेजप* पा

-समय को नह|ं बांधा जा सकता भाभी जी
ÎमसेजकाÎमनी-ठ|क कह रह| हो भाभीजी । बरखा ओर उदय न7 हे न7 हे थे तो भाई साहब नहलाकर
खब तेल माÎलश करते थे दोनो क| धप म Íबठाकर ।
ू ू

ÎमसेजकाÎमनी-याद है ।वह| ब¯ चे अब Íकतने बडे हो गये । बरखा और Íवजय इंजीÎनयर बन गये ।
दोनो को साथ दे कर मन बहत ख


श हो जाता है ।
Îम1 टर रामअधार-अरे Íवजय दे खो अं कल आÞ ट| आये है साथ म बरखा और उदय भी ह । बाद म
काम कर लेना । सचमच कोई काम कर रहे हो या गेम खेल रहे हो । बाहर आ जाओ । अं कल

आÞ ट| का पैर तो छ लो

Îमसेजप* पा

-अपने बचपन म तो ऐसी कोई सÍवधा थी

ह| नह|ं । बेटा ब¯ चा तो है नह|ं । समझदार
है । बडा ़ ◌ा इंजीÎनयर है ।
Îम1 टर रामअधार-ब¯ चा Íकतना बड़ा 4 य| न बन जाये मां बाप के Îलये ब¯ चा ह| होता है । ब¯ चे
क| तर4 क| ह| तो हर मां बाप का सपना होता है ।
Íवजय और खशब भाई बहन साथ साथ आये सभी के पांव
ु ू
छये । Íवजय एक तरफ कस| लेकर
ु ु
बैठ गया । खशब Îम1 ट
ु ू
र Îगरधर से मखाÎतब होते हए बोल| 4 या


अं कल आप भी हम ब¯ च| को
भल जाते हो ।

Îम1 टर Îगरधर-कै से भल जाता हं । दे खो न परा कनबा लेकर तो आया हं । साथ म पंÍडतजी भी है
ू ू
ू ू


खशब
ु ू
-बरखा के भी दश न दल भ

हो गये है । बचपन ह| ठ|क था । ना कोई Îच7 ता ना Íफकर । मह|ने
म तो एकाध बार हम ब¯ चे भी Îमल जाते थे । अब तो सब अपनी अपनी िज+ मेदार| स+ भालने म
लगे है । बरखा भी इंजीÎनयर बन गयी । इयको भी फस त

नह|ं रह| अब
बरखा-हां द|द| ठ|क कह रह| हो । अब िज+ मेदार| का एहसास होने लगा है ।
34
Îमसेज काÎमनी - असल| िज+ + े◌ादर| तो अभी आनी बाक| है ।
बरखा-तम भी म+ मी

कहते हए म1 क


रा कर चे हरा घमा ल|

Îमसेजप* पा

-अरे अभी तो बरखा के साल दो साल म दश न भी हो जाते◌े ◌े◌े◌े◌े ह । « याह होने के
बाद Íवदे श बस गयी तो सपना हो जायेगी । काÎमनी भाभी बरखा का « याह ऐसी जगह करना क|
मलाकात तो आसानी से होती रहे ना वीजा का झंझट हो ना दसरे अ7 य
ु ू
खशब के Îलये भी ऐसे ह|
ु ू
सोच रह| हं ।

Îम1 टर Îगरधर-बरखा तो कभी सपना नह|ं होगी । इसक| तो गारÞ ट| म लेता हं ।

Îमसेजप* पा

-काफ| दे र हो गयी चाय ना° ता तो कछ बना ल

खशबं
ु ू
-म+ मी मै भी आपका हाथ बंटाती हं

बरखा-द|द| मै। आपका हाथ बंटाती हं

खशब
ु ू
- तम बैठो बरखा म कर लंगी । तम मेहमान हो । बडी इंजीÎनयर हो च~ ह
ु ू ु ू
चौके का काम
तमसे

नह|ं होगा ।
बरखा-द|द| मझे

भी तो कछ सीखाओं

Íवजय-अरे वाह इंजीÎनयर साÍहबा को अभी सीखना बाक| है । चार साल क| इंजीÎनयÍरं ग क| पढाई
दो साल क| प4 क| नौकर| इसके बाद भी सीखना है ।
ÎमसेजकाÎमनी-बेट| गह1 ती

के गण तो सीखने ह| पडते है । चाहे Íकतनी ह| पढाई कोई 4 यो

न कर
ले ।
बरखा-स

ने इंजीÎनयर साहब म+ भी 4 या कह रह| है कहते हए बरखा खशब के साथ म क|चन म

ु ू
चल| गयी ।
पंÍडतजी-Îगरधर बाब हम चाय ना° ता

नह|ं करने आये है ।
Îम1 टर Îगरधर-पंÍडतजी इस घर म अÎतÎथ दे वता होता है । यह पर+ परा अभी यहां तो कायम है ।
भले ह| आपको दसर| जगह

नह|ं दे खने को Îमलती हो ।
पंÍडतजी-हमे तो नह|पीना है ।
Îम1 टर Îगरधर-पीना होगा पंÍडतजी
पंÍडतजी-यजमान हम जाÎतपांÎत म अब Íव° वास नह|ं है । हम तो स+ मान के भखे हो गये है

।इÎतहास म कछ गलÎतयां हई ह उसी पारयि° च


् त कर रहा हं । परख| क| गलÎतय|


के Îलये Hमा
मांगता Íफरता हं । यजमान हम Íकसी काम से यहां आये हए है । काम क| बात 4 यो
ू ु
नह|ं करते ।
Îम1 टरÎगरधर-पंÍडतजी सब तो दे ख रहे है । 4 या ये सब काम नह|ं हो रहा है ।
पंÍडतजी-सब तो मंगल ह| मंगल है यहां दे खो बरखा के से घलÎमल गयी आÞ ट|

और अपनी खशब
ु ू
द|द| के साथ । Íवजय भी बरखा को अ¯ छ| तरह से जानता है । भाई साहब और हमारे पÍरवार क|
जान पहचान हए प¯ ची

स साल हो गये है ।
Îमसेज काÎमनी-दे खो बरखा क|चन स+ भालना अभी से सीखने लगी है ।
Îमसटररामअधार- 4 या? बरखा से काम करवा रह| हो खशब बीÍटया अÎतÎथ
ु ू
से कोई काम
करवाता है 4 या ?
Îम1 टरÎगरधर-भाई साहब अपने से 4 यो अलग करते हो ।
35
बरखा-अं कल मझे भी तो कछ समझना चाÍहये
ु ु
नालो अं कल मेरे हाथ क| चाय
पीओशकर बहत मामल| सी पड गयी है गलती से ।

Îम1 टर रामअधार-बरखा तम चाय बनाकर लायी हो

बरखा-हां अं कल कहते हए ओढनी से Îसर ढं कने लगी ।

Îम1 टरÎगरधर-बरखा अं कल नह|ं अं कल नह|ं डै डी कहो ।
बरखा-ठ¹ क है डै डी डै डी ह| कहं गी । बरखा Îम1 ट

ररामअधार को डै डी कहते हए उनका चरण 1 प


कर Îमसेज प* पा

का भी पैर छने को लटक|

,इतने म Îमसेज प* पा

ने बरखा को गले से लगाते हए

बोल| बेट| तत खब तर4 क|
ु ू
कर । अपने मां बाप का नाम रोशन कर िजस घर म जा उस घर को
मंÍदर बना दे ना । मेर| दआय त+ हा
ु ु
रे साथ है ।
खशब
ु ू
-अरे वाह 4 या बात है । बरखा तो Îसर ढं क कर है ।
बरखा-खशब क| तरफ दे खकर म1 क
ु ू ु
रा पडी ।
Îम1 टरÎगरघर-भाई साहब 1 वीकार करो ।
Îम1 टररामअधार-Íकसको
Îमसेजप* पा

-चाय और Íकसको ।चाय पीओ
Îम1 टर राअधार-चाय तो पीउ◌ू◌ंगा चाहे िजतनी मीठ| 4 य| न हो । बरखा बीÍटया ने जो बनायी ह
पहल| बार ।
पंÍडतजी-रामअधारबाब Îगरधर बाब बीÍटया को 1 वी
ू ू
कार करने क| बात कर रहे है ।
Îम1 टररामअधार-4 या?
Îम1 टरÎगरधर-हां भाई साहब मेर| बीÍटया को अपने घर क| बह बना ल|िजये ।

Îम1 टररामअधार-नह|ं यह नह|ं हो सकता
Îम1 टर Îगरधरमेरे पास धन दौलत क| कमी नह|ं है । िजतना धन चाहे मांग लो पर मेर| बरखा को
अपने घर क| बहं बना लो ।

Îम1 टररामअधार-जो « यव1 था समाज को जहर परोस रह| हो उसका पोषण म कै से कर सकता हं ।

मझे दहे ज एक Fपया भी

नह|ं चाÍहये । मझे तो Íवषमतावाद| समाज का डर है । Íपछले साल क|

ह| तो बात है हc या हो गयी थी लडके Íक अ7 त जातीय « याह को लेकर । जबÍक लडका लडक| दोनो
खश थे । लडक| पH के लोग ह| लडक| क| हc या

कर लडक| को Íवधवा बना Íदये नाÎगरधरबाब

नाये « याह तो नह|ं हो सकता ।
Îम1 टरÎगरधर-जाÎत और बढे समाज क| सार| द|वारे तोड दं गा । हम बेट| के मां बाप Íर° ता
ू ू
लेकर
आये है । पंÍडतजी गवाह है । हम क7 यादान करने के Îलये तैयार है । आप 4 य| Íवरोध कर रहे ह
भाई साहब
ÎमसेजकाÎमनी-मान जाइये भाईसाहब अब जाÎतपां Îत क| लडाई कहां रह| । 1 वधम| के घर Íर° ते नह|ं
होगे तो कहां होगे ।हमारा तो बस धम म Íव° वास है जाÎत म नह|ं । Íवजय से बÍढया दमाद हम
और कह|ं नह|ं Îमल सकता । ब¯ चे भी इस Íववाह से खश होगे । भाई साहब िजद ना कÍरये मान

जाइये । तभी तो जाÎत टटे गी । Íकसी न Íकसी को तो आगे आना होगा ।

36
Îमसेजप* पा

-भाभीजी अभी जाÎतवाद खc म तो नह|ं हआ ह । आपके समाज के लोग जीवन नरक

बना दे गे । यÍद ब¯ च| ने गलत कदम उठा Îलया या आपके समाज के Îलये ब¯ च| क| जान लेने पर
उतर आये तो हम बबाद हो जायेगे ।
ÎमसेजकाÎमनी- भाभीजी ऐसा नह|ं होगा । हम ब¯ च| क| शाद| कोç म करे गे और Íर° पेसन
आल|शान होटल म दे गे । आप तो तÎनक भी Îच7 ता मत करो । आप तो « याह क| हामी भर दो
बस
Îम1 टर Îगरधर-हां भाभी कछ

नह|ं होगा ।सभी अपनी बेट| योग लडके को सौपना चाहते ह । यÍद
म सlप रहा हं तो कोई गनाह तो


नह|ं कर रहा । मै बडी जाÎत का हं म आपके पास आया हं ।
ू ू
आपका बेटा मेर| बेट| को तो भगाकर नह|ं ले गया है ना Íक कोइ◌्र Íवरोध करे गा । यÍद कोइ◌्र
करता भी ह म हं ना मंहतोड जबाव दे ने के Îलये । छोट| बडी जाÎत के भेद को मन से Îनकाल


द|िजये । « याह पर अपनी हां क| मंहर लगाइये बसभाई साहब जानता हं वंÎचत| को बस मÇ
ु ु

ठ| भर
भर आग ह| Îमल| है िजससे उनका मान स+ मान और Íवकास सब कछ सलगा है
ु ु
। समय बदल
गया है । दÍरयां कम हो चक| है । आपक| हां के बाद ब¯ च|
ू ु
क| मज| जानेग अपने ब¯ चे
कसं1 का

Íरत नह|ं है Íक मां बाप का कहना नह|ं मानेगे ?हम तो उनके भले के Îलये सोच रहे है ।
Îम1 टररामअधार-पहले ब¯ च| क| राय जान लो ।
Îम1 टरÎगरधर-ठ|क है ।उनक| राय जान लेते ह ।
ÎमसेजकाÎमनी-बरखा बेट| इधर आओ ।कछ दे र हमारे पास बैठो ।

Îम1 टरÎगरधर-Íवजय को बलाने के Îलये खशब को भेजे ।
ु ु ू

Íवजय-खशब द|द| के साथ अपना काम रोक कर आ गया ।
ु ू

Îम1 टरÎगरधर-Íवजय बेटा आप बरखा के सामने बैठो
Íवजय-4 या?
Îम1 टरÎगरधर-बैठो तो सह|
Íवजय-अं कल थोडा ज~ द| बोÎलये 4 या बात है । म काम बीच म छोडकर आया हं । इ7 ट

रनेट चाल

है ।
Îम1 टरÎगरधर-िजस काम के Îलये मै आप ओर बरख को बैठाया हं उससे बड़ा

तो कोई काम हो ह|
नह|ं सकता ।
Íवजय-कौन सा काम है अं कल ऐसा ?
Îम1 टर Îगरधर-बरखा से « याह करोगे ना । बेटा नह|ं ना करना
Íवजय-बरखा से « याह के बारे म तो कभी सोचा ह| न था। खै र बरखा से पहले पछ ल|िजये । वह

4 या चाहती है ।
Îमसेज काÎमनी-Íवजय बेटा बरखा त+ हा

रे सामने है तम पछ लो ।
ु ू

Íवजय-इंजीÎनयर मैडम आर य ए0ी

ट मैर| Íवथ मी

बरखा-एस इंजीÎनयर सर ।
पंÍडतजी-सन Îलया यजमान| लडक| लडका दोनो राजी है ।अब तो समÎध

-समÎध और समधन-समधन
गले Îमल लो ।
37
सारे गण Îमल गये है बस एक गण छोडकर ।
ु ु
« याह बहत सफल होगा । वर

-बध जीवन म

बहत तर4 क|

करे गे । अब दे र Íकस बात क| चट मंगनी पट « याह कर दो ।ऐसे आ7ाकार| ब¯ चे तो
हमने दे खे ह| नह|ं थे । आज मेरा भी जीवन ध7 य होगा ।अभी फे रे Íदलवा दे ता हं पर दÍHणा परा


लंगा

Îम1 टररामअधार-लड़का -लड़क| दोनो राजी है तो मझे भी अब कोई आपिc त

नह|ं ह । बरखा बीÍटया
क| मज| जानना बहत जFर| था । ब¯ च|

को तो जीवन साथ साथ Íबताना है ।
पंÍडतजी-ये ब¯ चे िज7 दगी के हर सफर म सफल होगे । कÞ ड

ल| Îमलाने क| कोइ◌्र जFरत नह|ं है
अब । बहत अ¯ छा

मह त है चाहो तो अभी फे रे Íदलवा सकते है ।

Îम1 टरÎगरधर-पंÍडतजी फे रे तो बाद म होगे पहले Íरं ग सेरे मनी का काय Hम शभ मह त म स+ प
ु ु

7 न
करा द|िजये ।
ÎमसेजकाÎमनी-हां पंÍडतजी
Îम1 टरÎगरधर-दो अं गठ| Îनकाले और पंÍडतजी के हाथ पर रखते हए बोले पंÍडतजी इ7 ह


म7 ³ोचाÍरत
कर Íरं ग सेरे मनी का काय Hम ÍवÎधवत् स+ प7 न कराइये ।
पंÍडतजी के घÞ टे भर के म7 ³ोचारण के बाद पंÍडत Íवजय और बरखा को एक एक अ◌ू◌ंगठ| Íदये
और म7 ³ोचारण के साथ एक दसरे को पहनाने के Îलये बोले । Íवजय और बरखा एक दसरे को
ू ू
अ◌ू◌ंगठ| पहनाये ।

Îम1 टरÎगरधर-Íवजय बेटा अब ये बरखारानी त+ हा

र| महारानी बन गयी ह । मझे यक|न है

क| इनके
जीवन के साथ हमारा भी जीवन ध7 य हो गया तम जैसे दमाद पाकर । बेटा ये बरखारानी बहत


सयानी है । मÇ

ठ| म रखना । अपने बाप को बहत चकमा दे ती थी ।रोट| म अपने हाथ से Íखलाता

था । बेटा बडे लाड़¯ यार से पल| है । खै र आप लोग तो सब कछ जानते है । Íफर भी

बाप होने के
नाते इतना तो कहं गा ह| क| मेर| बरखा के आख| म आसं कभी न आने पाये । होठ पर हमेशा


म1 का

न बनी रहे ।
Îमसेजप* पा

-भाई साहब और भाभीजी बरखा क| तÎनक Îच7 ता ना करना ।हमारे पÍरवार का Îचराग
हो गयी है । Íवजय और बरखा दे खना दोनो पÍरवार के नाम को रोशन कर दे ग । सामािजक हं सते
जE म पर समानता का म~ हम लगेगा, दÎनया Îमशाल दे दे कर ना थके गी ।

Îम1 टर-हां समधनजी
बरखा-पापा अब बस करो ।4 य| Fलाना चाहते ह ।
Îम1 टरÎगरधर-बेट| त Íवजय क| अमानत थी । उसक| हो गयी । सच मेरा जीवन सफल हो गया

।अब तो म चै न से मर सकता हं । कहते हए आख मसलने लगे ।
ू ु

ÎमसेजकाÎमनी-हां बेट| मेर| बरसो क| तप1 या सफल हो गयी । त सदा खश रहे यह| दआ है । त
ू ु ु ू
तो परायी थी ह| तेरे पापा ठ|क कह रहे है । हर लड़क| परायी होती है । उसका बाप एक Íदन
क7 यादान करता ह । डोल| उठती है ।
Îम1 टरÎगरधर-क7 यादान और डोल| उठने म स¯ ताह भर अ◌ैर लगेगा। स¯ ताह भर के अ7 दर Íवजय
और बरखा का अ7 त जातीय Íववाह ÍवÎधवत् स+ प7 न हो गया । Îम1 टरÎगरधर बेट| का क7 यादान
कर समÎध Îमरामअधार और समधन Îमसेज प* पा

और खद पÎत

-पिc न चारो धाम क| या³ा पर
Îनकल पडे ।
38
8 88 8- -- -घरोह|
कतर|दे वी

-बेटा सत|लाल त+ हा
ु ु
र| घरोह| सांप Íब¯ छ

क| 1 थायी Îनवास हो गयी है । कछ लोग तो

भतहाघर कहने लगे है ।आसपास वाले का तो अÎतHमण भी शF हो गया है ।
ू ु

सत|लाल

-काक| Hगह क| तंगी क| वजह से बाप दादा क| घरे ◌ाह| छोड़कर दर आक

र बस गया रहले
लगा ताÍक भाईय| के Îलये घर बनाने क| जगह बनी रहे । Íपताजी ना जाने कौन से परदे स चले
गये Íक लौट कर आये । दं बगो ने छल बल के भरोसे सार| खेती क| जमीन हड़प Îलये ।बीसा भर
घरोह| थी उस पर भी नजर आ Íटक| है ।4 या कFं काक| ।
कतर|दे वी

-तेरा दg समझती हं

। तेरा बाप को दबंगो ने दे श Îनकाला दे Íदया। पखÞ डी लेखपाल ने
सार| जमीन Îलप पोत द| । पखÞ डी ने त+ हा

रे बाप का जीना मि° क

ल कर Íदया था ।बेचारे
अc याचाÍरय| के खै ◌ा◌ंफ से गांव छोड़Íदये Íफर कभी ना लौटे ।
सत|लाल

-काक| पराने घाव

uk खरच । घरोह| के बारे

म कछ कह रह| थी ।

कतर|दे वी

-बेटा त कहता तो त+ हा
ू ु
र| घरोह| क| खाल| जमीन पर गोबर पाथ Îलया करती । पÍरवार
क| जमीन पर दसरे क« जा

कर रहे है । दे खा नह|ं जाता । त+ हा

र| घरो◌ी क| Îच7 ता मझे सता रह|

है । बेटा म नह|ं चाहती क| कोई क« जा करे । अगर मेर| बात अ¯ छ| लगे तो मझे गोबर पाथने भर

क| जगह दे दो ।
सत|लाल

-काका घरोह| तो मां बाप क| Îनशानी है । ज7 मभÎम तो जान से ¯ या

र| होती है कै से दे दं ।

कतर|दे वी

-म एकदम से थोड़े ह| मांग रह| हं । बस गोबर पाथने भर को मांग रह| हं इससे त+ हा
ू ू

र|
घरोह| क| रखवाल| हो जायेगी । अगर ऐसा ह| रहा तो एक Íदन सब आसपास वाले क« जा कर लेगे
हाथ मलते रह जाओगे ।
सत|लाल

-कै से कोई हड़प लेगा चार नीम के पेड़मां बाप क| यादे है ।
कतर|दे वी

-बेटा दे ख तेरे भले क| सोच रह| हं घरोह| का तेरे पास कोई कागज तो

नह|ं है ।म पर|

दे खभाल कFं गी तÎनका Îच7 ता ना करना । Íकसी को भर आंख दे खने तक नह|ं दं गी ।बस मझे
ू ु
गोबर पाथने और गोF चउवा बांधने क| इजाजत दे दो बेटा सत|लाल । मान जा मेर| बात ।बाप

दादा क| इतनी बड़ी खेतीबार| चल| गयी बीसा भर घरोह| है वह भी कोई Íकसी Íदन हड़प लेगा ।
सत|लाल

-काका डर लग रह| है । मां बाप आc मा उसी घरोह| म बसी होगी । कै से तमको सlप दं ।
ु ू

कतर|दे वी

-बेटा तेर| घरोह| तेर| रहे गी । हम क« जा नह|ं करना है । म तो बस इतना चाहती हं Íक

त+ हा

रे बापदादा क| Îनशानी बची रहे ।
सत|लाल

-काक| गोबर पाथने म गोFचउवा बांधने म कोई Íद4 कत नह|ं है पर तेरे बेटो ◌ं क| ÎनयÎत
म खोट आ गयी तो ।काक| चार बीसा जीमन है घरोह| क| ।
कतर|दे वी

-uk बेटा uk मेरे बेटे मेर| जबान कभी नह|ं काटे गे ।
सत|लाल

-काक| खन के Íर° ते

क| हो दे खना Íव° वास नह|ं तोड़uk ।
कतर|दे वी

-यक|न कर बेटा ।खन के Íर° ते

क| छाती म भाला घोपकर 4 या चै न से मर सकगी ।बेटा

मझे नरक जाने का कोइ◌्रर इरादा
ु ् नह|ं है नह|ं त+ हा

र| घरोह| हड़पने को । पÍरवार को इसÎलये
तमसे अपने मन क| बात कह द| । दे ना ना दे ना त+ हा
ु ु
र| मज| घरोह| तो त+ हा

र| है ।
सत|लाल

-तेर| जबान का Íव° वास तो म कर लंगा पर तेरे बेटे तेर| जबान काट Íदये तो ।

कतर|दे वी

-बेट| ऐसी नौबत नह|ं आयेगी ।मै त+ हा

र| मÇ

ठ| म आग नह|ं भFं गी नेक| के बदले ।
39
सत|लाल

-पाथ ले गोबर बांध ले गोF चउवा पर काक| ÎनयÎत खराब नह|ं करना । अगर ÎनयÎत
खराब क| तो मेर| घरोह| पर कोई सख से

नह|ं रह सके गा । एक गर|ब का ñहम महत म कहा गया


वा4 य खाल| नह|ं जायेगा ।
कतर|दे वी

-हां बेटा जानती हं आजकल त+ हा


र| जबान पर ñहमा बैठते है । त+ हा

र| Íव° वास नह|ं
टटे गा ।

सत|लाल

-Íव° वास तोड़ने वाले हमेश तकल|फ म रहते है । यहां तक क| द|या बc ती करने वाले नह|ं
बचते काक| त तो जानती है इÎतहास भी गवाह है । जा तमको गोबर पाथने भर के Îलये घरोह| का
ू ु
उपयोग कर काक| ।
कतर|दे वी

-सखी रह बेटवा कहते हए घर गयी । आसपास वाल| को सनाते हए दर से आवाज लगाते
ु ु ू
ु ु
हए बोला ला धोख बेटा फरसा सत|लाल क| घरोह|

ू ु
के सामने का घासफस सांफ कर दे कल से यह|

गोबर पाथना है । गोFचउवा भी यह| बांधेगे ।
धोख

-4 या कह रह| हो माई सत|लाल भईया गोबर पाथने दे गे 4 या

?
कतर|दे वी

-हां 4 ये◌ा◌ं नह|ं घÞ टा भर से तो ÎसफाÍरस कर रह| थी सत|लाल क| । मानता

नह|ं तो
4 या करता ।ऐसी घÍड़ याल| आंस रोयी हं Íक उसका Íदल पसीज गया है ।एक Íदन ये घरोह| अपनी


होगी धोख ।◌ी◌ाले ह| खन बहाना पड़े
ू ू

धोख-माई भइया क| घरोह| अपनी कै से होगी ।
कतर|दे वी

-चपकर मरख कोइ◌्रर सन लेगा । घासफस काटकर साफ कर और कचरा सत|लाल क|
ु ू ु ू ु ्
बंसवार| म डाल दे । बंसवार| को भी क« जे म एक Íदन लेना है ।
धोख

-मां त तो अपनी मोहरे चलती रहना हमे तो झा◌ूला डालने के Îलये नीम का पेड़

Îमल गया ।
नागपंचमी के Íदन यह| झला डालंगा । सत|लाल भइया के ब¯ चे
ू ू ु
◌ा◌ं को भी लाकर झलाउ◌ू◌ंगा ।

कतर|दे वी

-जो करना Íदल खोलकर करना ।अब तो तमको करना बाक| है

। मझे जो करना था कर

द| ।अभी तो मेरा हाथ बंटाओ । फरसा से जमीन जमीन Îछल कर बरोबर कर दो । म खÍटया
डालने के Îलये गोबर डाल दे ती हं । दो घÞ टे

भर म तो कतर|दे वी ने Íब~ क
ु ु
ल साफ कर द| ।
मां का हाथ मशीन क| तरह चलता दे खकर धोख बोला सब काम आज कर डालोगी 4 या

माई । कछ

कल के Îलये भी तो छोड दे । म तो थक गया हं ।

कतर|दे वी

-कल सत|लाल बदल गया तो । साफ सफाई हो गयी चार खांची घर म से गोबर उठाकर
ु ू
ला बेटा आज कछ उपले बनाकर खड़ा

कर दे ती हं ।

धोख

-ठ|क है माई जैसा कहो वैसा कFं गा ।
कतर|दे वी ने शाम होते होते गोबर

पाथकर उपले भी खड़े कर Îलये ।दसरे Íदन से तो आसपास वाल|

का आनाजाना ब7 द करने लगी जैसे सती² ्र

लाल क| घरोह| उसने खर|द ल| हो ।आसपास वालो को
कतर|दे वी का ÎनयÎत म खामी Íदखी ।हर आदमी कतर|दे वी से पछता 4 या
ु ु ू
सत|लाल ने घरोह|

तमको दे द| ।

कतर|दे वी

-हं सहं सकर हां म जबाब दे ती ।
कतर|दे वी आसपास वाल| का सवालो से वह तंग आकर रात के अं Îधयारे म है रान परे शान का 1 वां


रचकर सत|लाल के पास पहं ची ।

सत|लाल बोला 4 या

हआ काक| Íकसी से झगड़ा

करके आ रह| हो ।
40
कतर|दे वी

-हां बेटा दे खो हरÍहया और उसके पÍरवार के लोग मारने के Îलये दौड़ा रहे है बीच घरोह|
से रा1 ता मांग रहे है ।
सत|लाल

-काक| बीच घरोह| से रा1 ता कै से दे सकते है ।बाप दादा क| Îनशानी Íकसी को कै से हड़पने
दं गा ।

कतर|दे वी

-बेटा त Îच7 ता

ना कर Íकसी क| दाल नह|ं गलने दं गी त तो बस चार छः बासं मझे दे दे
ू ू ु

बांस का पैसा भले ह| ले लेना । म दे दं गी फोकट म

नह|ं मांग रह| हं सत|लाल ।बाउÞ ड


र| बना
दे ती हं । हरमजादो का रा1 ता

ब7 द कर दे ती हं ।दे खती हं कौन 4 या
ू ू
करता है । अरे राहजनी तो नह|ं
मची है Íक कोइ◌्रर Íकसी क| घरोह| पर जब द1 ती ् क« जा कर लेगा ।
सत|लाल

-काक| ऐसे कै से हो सकता है Íक म बीच घरोह| म से रा1 ता दे दं ।

कतर|दे वी

-बेटा त Îच7 ता

uk कर तेर| घरोह| क| ओर कोइ◌्र आंख उठाकर मेरे जीते जी दे ख भी
नह|ं सकता है ।
सत|लाल

-चल दे खता हं कौन मेर| घरोह| के बीच से रा1 ता

मांगता है ।
कतर|दे वी

-uk बेटा त

uk चल त तो वेसे ह| मसीबत का मारा है । म दे ख लंगी । त तो बस कछ
ू ु ू ू ु
बांस दे दे ।
सत|लाल

-जा काक| बंसवार| से िजतना बांस लगे बाउÞ डर| म काट ले । काक| अके ला आदमी Íकस
Íकस से झगड़ा कFं गा ।
कतर|दे वी

-बेटा झगड़ा लड़ाई से कछ Îमला है । Íकसी के

बाप क| जमीन तो है नह|ं Íक जो मंह

उठाकर आये तम उसे दे दो ।

सत|लाल

-जा काक| मेर| बंसवार| से बांस काटकर कर लो बाउÞ डर| । कछ नीम के पौधे लगाकर

आया हं ◌े भी बंच जायेगे ।बकर|

नह|ं खायेगी बाउÞ डर| हो जाने से ।
कतर|दे वी

-बाउÞ डर| हो जाने से उपले भी उधमी ब¯ चे नह|ं तोडे

गे । ओसाई मड़ाई का काम भी कर
Îलया कFं गी ।
सत|लाल

-ठ|क है काक| कर लेना ।
धीरे धीरे दस साल Íबत गये । कतर|दे वी का बेटा धोख बालब¯ चे
ु ू
दार हो गया । कतर|दे वी के मन म

पाप घर कर गया वह एक Íदन गोधÎल बेला म रोनी सरत बनाकर सत|लाल के घर गयी
ू ू ु
और बोल|
बेटा एक मंड़ई डालने क| इजाजत दे दो जब तमको जFरत होगी तो हटा लंगी ।
ु ू

सत|लाल

-काक| मेरे भी बाल ब¯ चे है चार भाईय| का पÍरवार है आज बाहर हे कल आयेगे तो
उनको भी तो जFरत होगी घरqवार क| । कै से मंड़ई रखने दं । ना काक| ना मंड़

ई तो रखने क|
बात ना करो ।
कतर|दे वी गरज कर बोल| मंड़

ई तो डालकर रहं गी ।दे खती हं कै से रोकता है ।
ू ू

सत|लाल

-काक| त 4 या

कह रह| है मेरे बाप दादा क| Íवरासत तो यह| घरोह| बची है । उस पर भी
तम जबÍरया क« जा

करने क| कह रह| हो ।काक| घरोह| तो हमारे Îलये दे व1 थान के बराबर है । त


हड़पना चाह रह| हो । इसके Îलये तो मेर| लाश पर से तमको गजरना होगा ।
ु ु

कतर|दे वी

-सÎत या जFरत पड़ी

तो वह भी कर सकती हं ।घरोह| पर मेरा क« जा

है पर| ब1 ती

जानती
है जोर जोर से Îच~ ला Îच~ लाकर कहने लगी ।
41
सत|लाल

- काक| मेरे बाप दादा क| आÍखर| Îनशानी पर तेर| Îग² द नजर पड़ गयी ।काक|
मेर| यक|न को uk तोड़मैने तेरे उपर Íव° वास Íकया त धोखा दे रह| है ।

सत|लाल क| बात सनते ह| कतर|दे वी झठमठ म जोर जोर से रोरोकर कहने लगी दे खो ब1 ती
ु ु ू ू ु
वालो
सत|लाल मझे बेइ7 ज
ु ु
त कर रहा है । मेर| साड़ी फाड़ रहा है । झठमठ
ू ू
म बखेड़ा खड़ाकर रोते हये

अपने घर क| ओर भागने लगी ।ब1 ती वालो कतर|दे वी क| करतत पर थ
ु ू ू
-थ कर रहे थे । दसरे Íदन
ू ू
सबह अ¯ छे

,क¯ छे ,स7 पÎत,जीवा,Îघसन जैसे और कछ बदमाश Íक1 म
ु ु
को लेकर सत|लाल क| बांस क|

खं ट| से ढे र सारे बांस काट| और सत|लाल क| घरोह|
ू ु
पर मड़ई रखकर जबÍरया क« जे क| तैयार|
कर ल| ।कतर|दे वी क| करतत क| भनक सत|लाल को लगी वह घरोह| पर गया । कतर|दे वी उसे
ु ु ू ु
दे खते ह| हं Îसया लेकर मारने दौड़पडी । कतर|दे वी के आदमी लाठ| डÞ डा

लेकर मारने के Îलये दौड़
पड़े । बेचारा सत|लाल जान बचाकर भागने लगा

। इतने म एक बड़ा से (ट का टकड़ा

उसके Îसर
पर लगा और Îसर से खन क| धार फट पड़ी
ू ू
। वह बड़ी मि° क

ल से जानबचाकर घर पहं चा। खन म


लथपथ दे खकर सत|लाल क| घरवाल| और उसके ब¯ चे

रोने लगे ।उधर कतर|दे वी अपना « ला

उज
साड़ी फाड़कर थाने पहं च गयी । बेचारा स


त|लाल गांव के 9धान और अ7 य बाब लो◌ागे◌ा◌ं के

सामने अपने बापदादा क| आÍखर| Îनशानी पर कतर|दे वी के जबÍरया क« जा

हटवाने क| गहार

लगाया पर गर|ब क| Íकसी ने न सनी । कतर| दे वी सत|लाल के Íखलाफ छे ड़
ु ु ु
छाड़का के स कायम
करवा द| । पÎलस भी सH|य हो गयी । कतर|दे
ु ु
वी का क« जा हो गया । सत|लाल क| घरोह| पर

जबÍरया क« जा करके कतर|दे वी मददगार| और असामािजक तc व|

को भोज भी दे द| ।
सत|लाल के सारे 9यास Íवफल हो गये । 9धान और बड़े

लोग सत|लाल को डांटते कहते तम छोटे
ु ु
लोग तÎनक तÎनक बात| म लड़ने मरने लगते हो । भगते कौन भगते गा । सत|लाल कहता म ने तो
ु ु ु
कतर|काक| को खन के Íर° ते
ु ू
क| वजह से उसक| मदद Íकया था पर काक| ने तो मेर| घरोह|
Îछनकर बेईमान के Îचमटे से मझे मÇ
ु ु
ठ| भर आग Íदया है । 4 या यह| 7 याय है । बाब लोग कहते

जैसा Íकये हो भरो जब कतर|दे वी को गोबर पा

थने क| इजाजत Íदया था तो Íकसी से पछा था ।

आज फं सी है तो बाब लोग याद आये है । सत|लाल कतर|दे वी के बने जाल म एकदम फं स गया ।
ू ु ु ु
उसका टÇ ट| पेशाब के Îलये भी घर से बाहर Îनकलना मि° क

ल हो गया । कतर|दे वी जान से मारने

तक सािजश रच चक| थी । एक Íदन सत|ला
ु ु
ल हc थे चढ़गया । कतर|दे वी के गÞ डे
ु ु
पीछे पड़गये ।
वह आगे पीछे मौत को दे खकर Íह+ मत करके खड़ा हो गया । कतर|दे वी सादा कागज ले कर आयी

बोल| ले सत|लाल अं गठा लगा
ु ू
नह|ं तो जान से जायेगा या जेल म सडे

गा पÎलस भी आती होगी ।

सत|लाल बोला

-काक| कै से अपने प

रख| से गq दार| कर दं ।

कतर|दे वी

- पÎलस को आता दे खकर जोर से बोल| बदमाश एक तो बर| नजर डालता है दसरे काक|
ु ु ू
कहता है । दे खो कै से भींगी Íब~ ल| सर|खे बोल रहा है । इतने म पÎलस के दो जवान आ गये ।

कतर|दे वी बोल| लो हवलदारसाहब मजÍरम आ गया है पकड़
ु ु
म । यह| बलाc कार क| कोÎशश करने
वाला सत|लाल ।साहब मेरे साथ बहत बरा सलक Íकया मेरा « ला
ु ु ू

उज फाड़ Íदया म इ7 जत बचाकर
भागी थी ।
सत|लाल

-साहब ये काक| मेर| घरोह| हड़पने के Îलये सािजश रची है । मां समान काक| को बर|

नजर से दे ख सकता हं ।

हवलदार-4 य| बे त सह|

कह रहा है ।
42
सत|लाल

-हां साहब Íब~ क

ल सह| कह रहा हं ।

कतर|काक| मेर| ह| घरे ◌ाह| पर मेर| ह| बंसवार|

से बांस काटकर जबÍरया क« जा कर रह| है ।
हवलदार-4 या ?
सत|लाल

-हां साहब ।
कतर|दे वी

-साहब सÎत या झठ बोल रहा है । मै अपनी जमीन पर मड़
ु ू
ई डाल| हं । ये सा

रे लोग है पछ

लो साहब
हवलदार-वहां हािजर एक एक से पछे सभी ने कहां कतर|दे वी क| घरोह| है ।
ू ु

कतर|दे वी

-और गवाह| तो नह|ं चाÍहये साहब
हवलदार-दे खो सत|लाल सलहा कर लो । 4 यो
ु ु
जेल म सड़uk चाहते हो बलाc कार का के स है ।
कागज पर अं गठा लगा दो ।

सत|

लाल क| कोई सनना वाला न था वह आगे खाई पीछे मौत दे खकर रोते हए अं गठा लगाते हये
ु ू
ु ु
बोला कतर|काक| हमार| घरोह| तमको आंस के अलावा और कछ न दे गी । बाप दादा क| Íवरासत म
ु ु ु ू
छोड़ी गयी घरोह| पर कतर|दे वी का जबÍरया क« जा

हो गया । हवलदार बोला कतर|दे वी माÎलकाना

हक भी त+ हा

रे पास है । हमे साहब के सामने हािजर होना है । समझ गयी ।
कतर|दे वी न हवलदार को साहब के सामने हािजर होने क| शि4 त

जेब म भर मÇ

ठ| डाल द| ।
हवलदार लोग मछ पर हाथ फे रते हए थाने क| ओर चल पड़े


। तÎनक भर म भीड़छं ट गयी ।
कतर|दे वी के उपर दै वीय

9कोप शF हो गये । कतर|दे वी के बेटे धोख क| बढौती क| लाठ| टट गयी।
ु ू ु ू ु
बेटा धोख पागल सा हो गया । कतर|दे वी को जीते जी क|ड़े
ू ु
पड़ गये । बहत दख भोगकर मर| ।


सत|लाल भर भर अं जर| यश बटोर रहा था । कतर|दे वी क| सािजश म शाÎमल वह| लोग जो
ु ु ु
सत|लाल के उपर लां

छने लगवाये थे घरोह| पर कतर|दे वी का क« जा

करवाये थे वह| लोग यह कहते
नह|ं थक रहे थे Íक बेईमानी नरक के qवार खोलती है । दे खो सत|लाल का ñहममहत म कहा गया
ु ु
ñहम वा4 य खाल| नह|ं गया । नेक और स¯ चे आदमी क| मदद ई° वर करते है ,मतलबी आदमी भले
ह| बq ÎनयÎत के Îचमटे से 4 य| न ईमानदार,स¯ चे और कम ठ आदमी क| मÇ

ठ| म आग भरे उनक|
तकद|र तो हं सते जE म ह| बनते है ।
9 99 9- -- -लह के Íनशान


अरे च7 दा के पापा अखबार पढ रहे या अफसोस जाÍहर कर रहे हो। त+ हा

र| आंखे डबडबायी हई 4 य|


है । भा¹ यल+ मी चाय का ¯ याला पÎत ñहमदc त के सामने रखते हए बोल| ।

ñहमदc त-ठ|क कह रह| हो भागवान । आदमी Íकतना बदल गया है ।दौ1 त पर सगे Íर° तेदारो से
7 यादा यक|न लोग करते थे । आज दो1 ती के दामन पर लह के Îनशान छोड़

ने लगे है आजकल के
दो1 त । खद क| खशी का कै नवास दो1 त
ु ु
के लह

से सजाने लगे है ।
भा¹ यल+ मी-4 या कह रहे हो। सबेरे सबेर तो शभ शभ बोलो ।
ु ु

ñहमदc त अखबार सरकाते हए बोला लो खद क| आख| से दे ख लो । यक दÍर7 दा


दो1 त खद को

मत साÍबत करने के Îलये दो1 त

क| हc या कर द| मोटे मोटे अHर| म छपा है और साथ म बेचारे
च7 gशे खेर क| फोटो भी छपी है ।
भा¹ यल+ मी-ये 4 या हो गया । ये तो सतीश के Íर° ते का भाई है । दÍर7 द ने बेचारे को मार डाला ।
अ¯ छा Îच³कार था । भला इंसान था ।अपनी च7 दा को बहन मानता था सतीश क| तरह । हे
43
भगवान कसाईय| को बहत बर| मौत दे ना ।


दÍर7 द बेसारे के बढे मां बाप क| लाठ| तोड़

Íदये
उनके सपन| म आग भर Íदये ।
ñहमदc त-अ¯ छा Îच³कार था आगे चलकर दे श का नाम दÎनया म रोशन करता। दो1 त

क| नजर
लग गयी बेचारा बेमौत मारा गया ।
भा¹ यल+ मी-सजनकार तो सचमच जगत का भला चाहने वाले इंसान
ृ ु
होते है ।दल9पंच से इन लोग|
का कोई लेना दे ना नह|ं रहता । सq भावना म बह जाते है । खद का भला बरा तक
ु ु
नह|ं सोचते ।
ñहमदc त-भोलेपन का Îशकार हो गया । Íकसी के « याह म गया था । « याह के ज° न के बाद उसे
हा1 टल पहं चना था पर वह दो1 त

के यहां चला गया । दो1 त दÍर7 दा साÍबत हआ । कै सा घोर

कलयग आ गया है दो1 त

हc या करके जला Íदया । लाश क| जगह नरकं काल पÎलस को बरामद

हआ था । पÎलस क| मह|ने भर क| भागदौड़


के बाद तो मामले पर छाये घने कहरे छं ट पाये है ।

भा¹ यल+ मी-अखबार पढकर बताओ बेचारे Îनरपराध च7 gशे खर को Íकस वजह से मारकर जला Íदये

ñहमदc त-दÍर7 दे ये◌ागेश और संजय ने शराब म जहर Îमला Íदया था । इसके बाद पीट पीट कर
मारा था ।
भा¹ यल+ मी-भगवान दÍर7 द| को इससे भी बर| मौत दे ना । कोई दÍर7 दा

पकड़ाया क| नह|ं । इ7 ह
कड़ी से कड़ी सजा Îमलने चाÍहये । आजकल तो 7 याय के मंÍदर म भी जाने अनजाने अ7 याय होने
लगा है । पैसे वाले और शाÎतर बच Îनकलते है ।
ñहमदc त-दÍर7 द| कानन के हाथ से बंच तो

नह|ं पायेगे 4 य|Íक कानन के हाथ बहत ल+ बे


होते है ।
हां यह बात मायने रखते है Íक कानन के रखवाले अपने

फज पर Íकतने खरे उतरते है । दो दÍर7 द|
पÎलस के हc थे

तो चढ गये है तीसरा दÍर7 दा अभी पÎलस को चकम दे रहा है ।खै र बकरे क| मां

कब तक खै र मनायेग एक ना एक Íदन दÍर7 दा पकड़ा तो जायेगा । यह तीसरा दÍर7 दा खनी संजय

है जो मकान माÎनक का बेटा है िजस मकान म च7 gशे खर क| हc या कर जलाया गया था ।
भा¹ यल+ मी- बेचारे का दÍर7 दा 4 या मार डाला ? 4 या Íबगाड़ा था बेचारा च7 gशेखर । 4 य| मारा
बेचार| को दÍर7 द| ने रह1 य से पदा उठा Íक नह|ं अखबार पढकर बताओं ।
ñहमदc त-उठ गया है ।
भा¹ यल+ मी-पढकर सनाओ Íदल बैठा जा रहा है ।

ñहमदc त-4 या सनाउ◌ू

?
भा¹ यल+ मी-अरे Íकस कारण से दÍर7 द| ने च7 gशे खर क| हc या क| । बढे मां बाप क| लाठ| तोड़

द|
। जब हc या के रह1 य से पदा उठ गया है तो सब कछ तो छपा होगा क|

नह|ं ?
ñहमदc त-च7 gशे खर के कc ल के पीछे औरत है । एक औरत को पाने के Îलये यह कc ल हआ है ।

भा¹ यल+ मी-4 या?
ñहमदc त-ठ|क सनी है दे वीजी औरत के Îलये ।

भा¹ यल+ मी-पर| बात पढ़

कर बताओ ।
ñहमदc त-सनो दे वीजी । अखबार म छपी खबर के अनसार मE य
ु ु ु
आरोपी संजय का 9ेम स+ ब7 ध
एक लड़क| से है जो अब शाद|शदा है । उस लड़

क| को पाने के Îलये संजय ने यह खनी खेल खेला


44
भा¹ यल+ मी-4 या ?
ñहमदc त-हां संजय उस लड़क| के 9ेम म पागल हो गया था । उसे पाने के Îलये वह कछ भी करने

को तैयार था । वह खद को मरा हआ साÍबत कर


ने के Îलये च7 gशे खर को मार कर जला डला योगे
और दसरे साथी के साथ ।

भा¹ यल+ मी-बाप रे ऐसी सािजश ?
ñहमदc त-संजय क| योजना थी Íक जब वह लोग| क| नजर| म मरा हआ साÍबत हो जायेगा तो वह

उस लड़क| को कह| और बला लेगा Íकसी को पता भी

नह|ं चलेगा Íक संजय लेकर भाग गया ।
दभा¹ य

वस च7 gशेखर दो1 त के झांसे म आ गया दो1 त संजय ने शराब म जहर Îमलाकर हc या
करके पेçोल डालकर जला डाला ।
भा¹ यल+ मी-ऐसे दÍर7 द से च7 gशे ◌ेखर क| दो1 ती कै से हो गयी । दÍर7 द न पढ रहे थे और नह|ं
हा1 टल म रह रहे थे । कै से दो1 ती हो गयी । दो1 ती के नाम पर दÍर7 द| ने काÎलख पोत Íदया ।
दो1 ती जैसे पाक Íर° ते को नापाक कर Íदया ।
ñहमदc त-संजय और योगेश Íकसी मोबाईल क+ पनी म काम करते थे ।मोबाईल के काम के
ÎसलÎसले म च7 gशेखर को कई बार क+ पनी जाना पड़ा इसी दौरान दो1 ती हो गयी । दो1 त| ने
दो1 ती के कै नवास पर लह पोत Íदये ।

भा¹ यल+ मी-च7 gशेखर दÍर7 द| के झांसे म कै से आ गया Íक « याह से सीधे दÍर7 द| के जाल म जा
फं सा ।
ñहमदc त-फोन करके बलाया था ।

भा¹ यल+ मी-परा चH¯ य
ू ू
ह रच कर दÍर7 द| ने फाने Íकया होगा ।
ñहमदc त-23 जनवर| क| रात म संजय ने फोन Íकया था । रात के नौ बजे च7 gशे खर पहं च गया

।दाF म जहर Îमलाकर दÍर7 द| ने Íपला Íदया । दाF Íपलाने के बाद सÍरये से Îसर पीट डाले ।
इसके बाद तीसरे माले पर ले जाकर जला डाले । कं काल के पास संजय अपना जता छोड़

कर
फरार हो गया ।
भा¹ यल+ मी-ऐसा 4 य| Íकया खनी ।

ñहमदc त-ताÍक लोग समझे Íक संजय क| हc या हई है और नरकं काल उसी का है ।

भा¹ यल+ मी-Íदल दहला दे ने वाल| सािजश । बाप रे आदमी अपना Íहत साधने के Îलये कै सा है वान
हो जाता है यह तो संजय ने कर Íदखाया। इससे तो पÎलस भी HÎमत हो गयी होगी ।

ñहमदc त-पÎलस HÎमत तो हई पर कछ Íदन के Îलये । जब पÎलस को पता चला Íक
ु ु


23जनवर|
से संजय लापता है तब पÎलस का माथा ठनका और जांच का Fख बदल गया ।पÎलस च7 g
ु ु
शे खर के
Íर° तेदार| से जांच पडताल करने म जट गयी ।

भा¹ यल+ मी-आगे 4 या हआ बताओं

uk ।
ñहमदc त-च7 gशे खर के भाई ने कं काल के दांत को पहचान कर च7 gशेखर होने क| पि* ट

कर द| ।
भा¹ यल+ मी-एक Îच³कार के जीवन का अ7 त कर Íदया दÍर7 द| ने । बेचारा Îच³| म रं ग रं ग भरते
भरते बेरं ग हो गया सािजश म फं सकर वह भी दो1 ती के नाम । भगवान ऐसे दÍर7 द| को ऐसी जगह
मारना Íक ÍरÍरक-ÍरÍरक कर मर दो1 ती जैसे पÍव³ Íर° ते के कै नवास पर खन पोतने वाला संजय

और उसके कc ल| दो1 त ।
45
ñहमदc त-च7 gशे खर को गहरे रं ग| से बहत लगाव

था । वह इ7 ह| रं ग| से कै नवास पर खेलते
खेलते िज7 दगी को उके रता रहता था । बदÍक1 मत संजय के जीवन का सारा रं ग ढल गया ।

िज7 दगी खc म हो गयी बेचारे क| बची है तो बस यादे ओर बढे मां बाप क| चीखे । जब हc या

के
रह1 य से पदा उठा तो सहपाठ| भी रो उठे ।
भा¹ यल+ मी-एक Îनरपराध Îच³कार के लह से दो1 ती

के 4 ेनवास को रं गकर खÎनय| ने घोर अपराध

Íकया है वह भी एक शाद|शदा ओरत के Îलये ।दÍर7 दे

को इतना ह| ¯ यार था तो पहले ह| « याह कर
लेना था । भोले भाले मासम Îच³कार क| जान 4 य|

ले Îलये ?
ñहमदc त- Íवनाश काले Íवपर|त बि² द

। कबि² द
ु ु
ने हc यारा बना Íदया । दो1 ती के नाम पर ध« बा
लगा Íदया । बेचारा च7 gशे खर एक Íदन पहले ह| तो िज7 दगी को बेहतर|न ढं ग से कै नवास पर
उके रा था । ये दे खो च7 gशे खर क| ह| पेिÞ टं ग छपी है अखबार म । दो चार Íदन पहले ह| उसक|
अ¯ वल दज क| पेिÞ टं ग Íद~ ल| म बीची थी । बहत खश तो भर दÍर7 द|


ने उसक| िज7 दगी म आग
भर द| और मां को गम के सम7 दर म ढके ल Íदया ।
भा¹ यल+ मी-बहत होनहार लड़

का था । च7 दा बता रह| थी Íक पेिÞ टग बनाते समय अ4 सर -तड़प
तड़प के इस Íदल से आह Îनकलती रह| गाना गाता रहता था । यह| तड़प उसक| पेिÞ टग को जीवन
9दान करती थी ।
ñहमदc त-ले ल| दÍर7 द| ने एक जीवन । उजाड़ Íदया एक पÍरवार का सपना । Îछन Îलये बढे मा

बाप का सहारा । भर Íदया आÎ÷त| क| मÍÇ

ठय| म आग ।
भा¹ यल+ मी-खनी तो ल|ल गये च7 g

शे खर को पर दो1 त के चनाव के ज~ द|

बाजी न करने क|
नसीहत भी दे गये । 1 वाथ|,अपराधी एवं असामािजक लोग| से दो1 ती का 9Îतफल तो दखदायी ह|

होगा । 1 वाथ के (ट पर Íटक| दो1 ती क| नींव कभी भी भरभरा कर Îगर सकती है और इसके
पÍरणाम भयावह हो सकते है । दो1 त बनाने से पहले बहत सोच Íवचार करने क| जFरत अब आ

पड़ी है । यÍद असावधानी हई संजय जैसे दÍर7 द

मÇ

ठ| म आग भरने से तÎनक भी नह|ं चके गे ।

ñहमदc त-च7 दा क| मां आंस पोछो । दÍर7 द|

ने तो बहत बड़ा

गनाह Íकया है । इसक| सजा तो उ7 हे


जFर Îमलेगी । यवको को दो1 ती

के कै नवास च7 gशे खर के लह के Îनशान को ² या

न म रखते हए

सावधानी बरती होगी ताÍक Íफर कोई अमानष संजय दो1 ती

के पाक Íर° ते को नापाक न कर सके ।
भा¹ यल+ मी-भगवान च7 gशे E र क| आc मा शाि7 त बE शना । पÍरवार को आc मबल और िज7 दगी के
कै नवास पर सनहरा रं ग भरने क| शि4 त

दे ना । भगवान दÍर7 द| को ऐसी सजा दे ना Íक Íफर कभी
दो1 ती जैसा Íर° ता बदनाम न होने पाये ।
ñहमदc त-हां ठ|क कह रह| हो ऐ दÍर7 द कठोर से कठोर सजा के हकदार है । यवा पीढ़|

से भी
गजाÍरस है Íक दो1 ती

को 1 वाथ के तफान से बचा

य ताÍक दो1 ती के कै नवास पर Íफर कभी लह के

Îनशान न पड़े और न ह| हं सते खेलते पÍरवार क| छाती पर जE म डर बै ठने पाये ।
10 10 10 10- -- -दÎखया माई


का रे दÍखया अब तो ते रे करे जे को ठÞ ड

क Îमल| मेरा परा धान तेर| भैस चौपट कर द| । खाने को

अ7 न नह|ं रहने को घर नह|ं । पाल रह| हो भ स । तेर| भ स हांकर ले जाउ◌ू◌ं और अपने दरवाजे
पर बांध ल

कं वर बहादर गरज पड़े
ु ु

46
दÍखया के उपर तो जैसे Íबजल| Îगर पड़ी

भ स हांक ले जाने क| बात से । उसक| आख सावन-
भाद| हो गयी । वह आं चल से आसं पोछते हए बोल|


- बाब ना जाने कै से भ स खं टा से
ू ू
छड़ा

ल|
अ¯ छ| तरह से गांठ लगा कर बांधी थी। Íबरछवा क| भ स मेर| E ू◌ा◌ंटे से बंधी भ स से लड़ने लगी
थी । मेर| भ स क| सींग भी टट गयी है बाब । बरछवा क| भैस आक न मेर| भ स से लडती न
ू ू
खं टा टटता और
ू ू
नह|ं मेर| भ स बाब आपके धान के खेत मे◌े जाती । बाब नक
ू ू ु
शान तो हो गया है
जानबझ कर तो म ने

नह|ं Íकया है ना । भ स का सहारा था उसक| सींग भी टं ट गयी । सोची थी

भ स बेचकर जFरत क| कई चीज लाउ◌ू◌ंगी । जाड़ के Îलये एक रजाइ² ्र बनाउ◌ू◌ंगी बाब मेरा भी

तो बहत नकशान हो गया । भ स क| क|मत आधी रह गयी । टट| सीग वाल|

ु ू
भ स कौन खर|दे गा ।
कवर बहादर
ु ु
-अभी कल रोपाई हई तेर| भैस ने सारा खेत रlद डाल| । तमको अपने नकशान क| Íफक

ु ु
है हमारे नकशान क| भरपाई का² े

न करे गा ?
कवर बाब क| फटकार सनकर न7 द
ु ू ु ू
आ गये और बोले बाब दÍखया माई क| भ स तो एक Íकनारे से
ू ु
भागी थी ।
दÍखयामाई

-हां बाब । मेर| भ स कोने से Îनकल| थी और सड़

क पकड़ल| थी ।
न7 द

- हां बाब दÍखयामाई भ स को ललकारते हए उसके पीछे ¯ ी
ू ु

छे भाग रह| थी। दÍखयामाई भस

हांकने के Îलये अलग,बकर| हांकने के Îलये अलग डÞ डा रखती है पर बाब आज उसक| भ स आपके

खेत म पांव 4 या रख द| बेचार| अपराध बोध के सम7 दर म डब गयी और बकर| चराने वाले डÞ ड


को लेकर भैस के पीछे पीछे दौड़रह| थी । आज ना जाने दÍखयामाई क| भ स को ना जाने 4 या

हो
था Íक आवाज सनकर भाग रह| थी जबÍक कछ दे र पहले वह| भ स दÍखयामाइ² ्र
ु ु ु
क| एक आवाज
पर दौड़ी चल| आती थी ।धन क| फसल क| भांÎत दÍखयामाई क| भ स लहर लहर कर भाग रह| थी

शायद सींग टटने क| वजह से ।

कं वरबहादर
ु ु
-4 य| रे 4 या बात है न7 द

आ त तो बड़ी

तरफदार| कर रहा है दÍखया क| । 4 या

कल से
दÍखया क| जमीदार| जोतकर पेट पालेगा

?
न7 द

-बाब हम गर|ब| के पास जमीं

दार| होती तो गर|बी क| मटç

◌ी भर आग म 4 य| जलते मरते
रहते । बाब हम गर|ब िजस बर| हाल म जीवन Íबता रहे है उसके Îलये आप भी िज+ मे
ू ु
दार हो ।
कं वरबहादर
ु ु
-4 या बकवास कर रहा है । दो अHर त+ हा

रे लड़के पढने 4 या लगे Íक तम अपनी

औकात ह| भल गये । न7 द
ू ू
बराबर| करने म अभी शÍदयां लगेगी ।
दÍखयामाई

-बाब ग1 सा
ू ु
थक दो । मेर| भ स ने आपका धान

नह|ं रlदा है Íव° वास करो । ज~ द| क|
रोपाई है । तेज हवा क| वजह से धान के रोप से कछ धान के पौधे Îनकल गये है वह| Íकनारे लगे

है । ना मेर| और नह|ं Íकसी दसरे क| भ स

खेत म गयी है । खद सोच| बाब मेरे दरवाजा आपके
ु ू
खेत म खलता है । 4 या

म अपनी भ स से आपक| खेती चौपट करवाउ◌ु◌ंगी । आज तक कभा◌ी
ऐसा हआ है ।

न7 द

-हां बाब यक|न कर| दÍखयामाई ठ|क कह रह| है ।
ू ु

दÍखयामाई

-बाब म तो भ स यह| पकड़

लेती सड़क पर नह|ं जा पाती पगहा तो उसक| गद न म ह| था
। बाब डर के मारे

नह|ं पकड़ी Íक कह| और तेजी से खींचाकर भागने । मे र| दशा ठाकर जैसी न हो

जाये ।बेचारे ठाकर क| जान तो भ स का पगहा खींचाकर बंध जाने से हई थी ना । बेचारे ठाकर
ु ु

पहचानने लायक तक नह|ं बचे थे ।
47
कवरबहादर
ु ु
-तम मझे
ु ु
कहानी सनाकर बेवकफ
ु ू
नह|ं बना सकती हो दÍखया ।

न7 द

-हां बाब गर|ब लोग बेवकफ
ू ू
नह|ं बनाते ।
कं वर बाब
ु ू
-न7 द

आ त

नह|ं बोल तो ठ|क है ।
न7 द

-बाब गांव के जाÎत

-परजाÎत के बहत लोग| ने दे खा ह भ स आगे आगे दÍखया माई दौड़


रह| थी
। आवाज सनकर भ स घोड़े

क| रफतार से भाग रह| थी । बड़ी मि° क

ल से कई लोगो ने घेरकर
पकड़ा है । मालम है दÍखयामाई भ स लेकर आ रह| थी Íफर अचानक भस Íवदक गयी और पे◌ाखर|
ू ु
म चल| गयी दÍखयामाई का जान बच गयी है बाब।
ु ू

कं वरबाब
ु ू
-ब7 द कर अपनी बकवास न7 द

आ तम सब सािजश रच रहे हो ।

दÍखयामा

ई-कै सी सािजश बाब । भला हम पेट म भख Íदल म मरते सपने और बंटवारे म Îमल|
ू ू
मÇ

ठ| भर आग म सलगते लोग 4 या

सािजश रचे गे ?
न7 द

-माई दे ख तेरे पै र से खन बह रहा है गहर| घाव है । Íफटकर| हो तो घाव म भर लो । बाब◌ू
ू ू
सनो चाहे न सने म अपनी बात कह कर रहं
ु ु

गा । बाब दÍखयामाई क| हाल दे ख रहे हो आंख| म
ू ु
आसं भरा ह पैर म शीशा फाड़

Îलया भ स को पकड़ने के Îलये भागते समय । उसके तन के व1 ³ क|
हालत दे ख रहे है । जो भ स आपक| तरफ मंह करके चगाल| कर रह| है वह| कछ दे र पहले रणचÞ डी
ु ु ु

बनी हई थी। घÞ टा

भर से अÎधक पानी म ब ठ| रह| । दÍखयामाई पोखर| के Íकनारे बैठे बैठे भै।स

को गाÎलयां दे रह| थी । जब दÍखयामाई के गाÎलयां का खजाना खc म

हो गया तब भ स पानी से
Îनकल| है और दÍखयामाई के पीछे पीछे आकर दरवाजे पर खड़ी

हई है । बाब पश भी समझदार

ू ु
होते है । भ स क| सींग ट

ट गयी है वह भी ग1 से

म थी पोखर| के पानी म घÞ टे भर बैठ| रह| जब
उसका ग1 सा

ठÞ डा हआ है तो खद ब खद चलकर आयी है । भ स बांधकर दÍखयामाई ने बहत मारा
ु ु
ु ु ु
है । दÍखयामाई पीट रह| थी भ स टकर
ु ु ु
-टकर दे ख रह| थी । दे ख| भ स भी शम सार है जबÍक उसक|
ु ु
गलती नह|ं है । वह तो खटे म बंधी थी Íबरछवा क| भ स आकर हमला कर द| थी । वह तो

आc मरHा म भागी थी टट| सींग लेकर ।

कं वरबहादर
ु ु
-न7 द

आ ऐसी ह| ते◌ेर| जबान चलती रह| तो तेर| सींग तो नह|ं तेर| जबान जFर टटे गी ।

कवरबहादर दÍखयामाई क| ओर Fख करके बोले भ स पालने
ु ु ु
का शौक छोड़ दो सअर पालो त+ हा
ू ु
रे
फायदे का सोदा है गांव क| ग7 दगी भी साफ हो जाया करे गी ।
न7 द

-बाब एक भ स ने प र रख Íदया खेत म वह भी गलती से तो इतना लाल

-पीला हो रहे हो
प¯ चीस प¯ चास सअर खेत म चले जायेगे तब 4 या

होगा ?
कं वरबहादर
ु ु
-अपना मंह

ब7 द रख न7 द

आ । िजस Íदन गांव के जमीदार| को ग1 सा

आ गया न खड़ा
होने क| जगह नह|ं Îमले गी । हं गना मतना सब तो बाब लोग| क| जमीन म करते हो और जबान
ू ू
क| जगह तलवार चलाते हो । दे ख दÍखया अब कोई नकशान न होने पाये तेर| भ स ने बहत
ु ु

नकशान कर Íदया । अगर अब को

ई नकशान हआ तो मह|ने भर Íबना मजदर| के काम करना होगा
ु ू


दÍखयामाई कं वरबहा◌ुदर क| बात टकर
ु ु ु ु
-टकर सन रह| थी । उसके ह|ठ जैसे Îसल गये थे । आख| से
ु ु ु
आसं और पैर से खन बह रहा था ।
ू ू

कं वर बहादर क| Íबजल| क| तरह कड़
ु ु
कती आवाज सनकर Íबसन के पांव थम गये । वह दÍख
ु ु ु
यामाई
क| झोपड़ी क| ओर मड़

गया । दÍखयामाई क| दशा दे खकर पछ बैठा 4 या
ु ू
हो गया भौजाई 4 य|
48
आंख| से आंस और पैर से खन बह रहा है । कौन
ू ू
सी अनहोनी हो गयी क| कं वरबहादर गरज रहे
ु ु
है Íबजल| क| तरह ।
कं वरबहादर
ु ु
-Íबसनवा तमको अनहोनी का इ7 त
ु ु
जार है । दÍखया क| भ

स सारा धान चौपट कर द|
4 या Íकसी अनहोनी से कम है ।
Íबसन

-बाब ये भी कोई अनहोनी है । दो पंजा 4 या
ू ू
उखड़गये । आतंक मचा Íदया । गर|ब क| दशा
नह|ं दे ख रहे हो । Îच~ लाये जा रहे हो । दे खो दÍखया भौजाई के पांव म Íकतना बड़ा

घाव है । अरे
गर|ब क| आंस का कोई मोल

नह|ं आप जैसे बड़े लोग| क| Îनगाहो म । बाब आप का एक पैसे का

नकशान

नह|ं हआ है । हवा चलती है तो ताजे रोपे खेत म छटे Îछटके धान के पlधे Íकनारे तो


आते ह| है ।
कं वरबहादर
ु ु
-नेता हो गया है 4 या Íबसनवा त ब1 ती
ु ू
का ?
Íबसन

-बाब गर|ब के दद का एहसास आपको

तो होगा नह|ं 4 य|Íक गर|बी तो आपने दे खी नह|ं ह
।दद का एहसास तो उसे ह| होता है िजसने दg का अनभव Íकया हो । बाब आपको लगता है Íक म
ु ू
नेताÎगर| कर रहा हं तो यह| मान ल|िजये ।

Íबसन क| बात ने कं वरबहादर के गले म जैसे गरम कोयला डाल Íदया हो । वह बौखला
ु ु ु
गये और
दे ख लेने क| धमक| दे ते हए उलटे पांव भाग खडे


हए ।

भैसं कं वरबहादर के धान के खेत मे◌े◌ं चल| गयी थी और बाब कं वरबहादर बढ़|
ु ु ु ू ु ू
दÍखया को बहत


बर| बाते सना गये Íक खबर ल~ ल
ु ु ू
दादा को कामराज बाब क| हवेल| लग गयी थी । वह काम

छोड़कर आ नह|ं सका था मजदर कट

जाने क| वजह से । अं धेरा के पर| तरह पांव पसारते ह| वह

झोपड़ी वापस आया । आव दे ख ना ताव लाठ| लेकर भ स पर Íपल पड़ा । दÍखया ल~ ल
ु ू
को अपनी
कसम दे कर रोकने म कामयाब हो गयी ।
ल~ ल

दादा अपने ग1 से

पर Íवजय 9ा¯ त कर भ स को समझा◌ाते हए बोले तने आज बहत
ु ु

बड़ी
गलती कर द| ना । जमीदार कं वरबहादर के खेत म चल| गया । तमको पता है हम सामािजक
ु ु ु
आÎथ क गर|ब| के बारे म । ते रे दध दह| को भी ये बाब लोग अपÍवत मानते है 4 य|
ू ू
Íक त एक

सामािजक और आÎथ क Fप से गर|ब के खट पर बंधी है । बाजार म भी जगह

नह|ं है । Íकतना दख

सहकर तमको पाल रह| है ये बÍढया त है Íक तÎनक भी परवाह
ु ु ू
नह|ं करती। ये बाब लोग तो हम

गर|ब| क| परछाई पड़ने तक को अपराध मान लेते है । तम तो धान के खेत म पेर रख Íदया ।

पता है तमको कं वरबहादर बÍढया को Íकतनी गांÎलया दे गये है । अरे हम अपने पेट म
ु ु ु ु
Fखी सखी

डालने के पहले त+ हा

रा इ7 तजाम करते है त है Íक आंस दे रह| है । दे खा बÍढया के आंख का आंस
ू ू ू ू
दद तो त भी समझती है ना ।

दÍखया

- हां बढउ ये भ स भी समझती है दद । दे ख| उसक| आंख| से भी आसं भरभरा पड़ा
ु ू
है ।
दÍखया भ स के Îसर पर हाथ फे रने लगी

। भ स दÍखयामाई का पांव चाटने लगी ।

न7 द

और Íबसन एक 1 व

र म बोले जानवर भी समझते है पर उ7 माद म डबा आदमी कछ
ू ु
नह|ं
समझ रहा है । काश खद को बड़ा

समझने वाले बाब लोग शोÍषत दÍखय| के दद का एहसास कर
ू ु
पाते तो अc याचार क| आंधी थम जाती ।
ल~ ल

दादा-हां भइया पर बाब लोग| को अc या

चार से फ1 र
ु ् ◌ात नह|ं है । चल बÍढया बc ती

जार कर
ले । घाव गहर| है । ठ|क तो हो जायेगी पर कवर बहादर क| द| गयी घाव तो◌े कभी
ु ु
नह|ं ठ|क हो
49
सके गी Íकसी दवादाF से । 4 या तकद|र हो गयी है हम गर|बो क| Íक चहं ओर से मÇ


ठ| भर भर
आग ह| Îमलती है । Fढ|वाद| ¯ यव1 था qवारा परोसी आग म हम सलगते रहना है । त ठ|क कह
ु ू
रह| है जE म दे ने वाले बाब लोग| से तो अÎधक समझती है ये भ स हम दÍखय| के दद को ।
ू ु

11 11 11 11- -- -ए4 सीडे Þ ट
फोन क| घनघनाहट सनकर Îमसेज लाल चlककर फोन क| ओर दौड़

पड़ी । फोन क| घनघनाहट ना
जाने उ7 हे 4 य| अशभ सी लग रह| थी । वे हड़

बड़ायी सी कांपते हाथ से फोन का Íरसीवर उठायी
और लड़खड़ाती जबान से हे लो बोल| । दसर| तरफ क| हे लो क| आवाज Îमसेज लाल के कान को

जैसे चीर गयी । वे घबरायी सी हे लो हे लो Fध कÞ ठ से Íकये जा रह| थी । वे समझ गयी Íक दसर|

तरफ फोन पर कोई और नह|ं उनके पÎत Îमलाल है । Îमलाल क| घबराहट भरे हे लो श« द ने उ7 हे
Íकसी अनहोनी क| आशंका के घेरे म लाकर पटक Íदया । वे Íह+ मत करके बोल| 4 या हआ । 4 य|


घबराये हए हो । कछ तो बोलो पर7 त

ु ु
Îम लाल के कÞ ठ से आवाज नह|ं Îनकल रह| थी । बड़ी
मि° क

ल से Îमलाल बोले भागवान बहत बरा हो गया ।

Îमसेज लाल-4 या हआ अभी तो गये हो बीÍटया को लेकर 9ाइज लेने । 4 या

9ो0ाम क Îसल हो गया

Îमलाल-नह|ं ।
Îमसेज लाल-तब 4 या हआ

?मेर| जान Îनकल| जा रह| है । कछ बताओगे

?
Îमलाल-घबराओ नह|।
Îमसेज लाल-हआ 4 या

बताओ तो सह| ।
Îमलाल-ए4 सीडे Þ ट । ÷Îमक कालोनी के अ1 पताल म पहं च गया हं Íकसी तरह आटो करके । आटो ने
ु ू
दस Fपया क| जगह प¯ चास Fपये Íकराया वसल Íकया है । अ1 प

ताल वाले भी पÎलस का डर Íदखा

रहे है । कोई अननय Íवनय तक को

नह|ं सन रहा

है । म खड़ा नह|ं हो पा रहा हं । बीÍटया

लहलहान दद से तड़


प रह| है । Îस1 टर दरोगा क| तरह डांट रह| है ,कह रह| है । बडे

अ1 पताल
जाओ पÎलस के स करना है तो । फ1 ट

एड भी यहां नह|ं Îमल रहा है । पÎलस कार वाई न करने के

Îलये दबाव बना रहे है । ना जाने इसम अ1 पताल वाल| का कौन सा Íहत सध रहा है ।
Îमसेज लाल पÎलस के स का बाद म सोचे गे पहले तो बोलो इलाज शF कर । मै पहं च रह| हं । पै से
ु ु
ु ू
का इ7 तजाम करके ।
Îमलाल-ठ|क है । डा4 टर तो कई है पर नस सनडे का बहाना कर कह रह| है अभी डां4 टर है । नस
से पÎलस

के स नह|ं करने क| बात कहता हं दे खो मान जाये तो ठ|क है । तम आओ तो बडे


अ1 पताल ह| चलते है । ज~ द| आओ ।
Îमलाल पनः नस के पास गये । इलाज ° ु

◌ाF करने का अनरोध Íकये । नस अपने रवैया पर अड़ी


थी वह बोल| पÎलस के स है हम हाथ

नह|ं लगा सकते । हम तभी इलाज श

F करे गे जब तम पÎलस
ु ु
के स न करने का वचन दो और इस कागज पर द1 E त करो◌े ।
Îमलाल-ठ|क है । लाइये द1 खत कर दे ता हं । इलाज शF करो ।

इतने म डा4 टर हािजर हो गये । झटपट मआयना Íकये और बोले घबराने क| बात

नह|ं है । हq डी
नह|ं टट| है । खरे ◌ा◌ंच क| वजह से खन
ू ू
बहा है । नस हां म हां Îमलाती रह| । इतने म Îमसेज
लाल आ गयी बीÍटया को लहलहान दे खकर धड़ा


म से Îगर पड़ी ।
50
नस बोल|-4 य| इतना नाटक कर रह| हो मैडम । जरा सी चोट लगी है । मरहम पÇ ट| हो गयी है
। डा4 टर साहब ने दवा Îलख द| है Íखलाते रहना । दो चार Íदन म दौड़ने लगेगी त+ हा

र| बीÍटया ।
त+ हा

रे Îम1 टर को घाव तो नह|ं लगी है उ7 हे झठमठ क| बेचै नी है । यहां से घर ले जाओ । बÍढया
ू ू
चाय बनाकर अपने हाथ से पीलाओ ठ|क हो जायेगे । जहां घाव लगी हो वहां बरफ से सेकायी करते
रहना । सब ठ|क हो जायेगा । इंजेकशन लग गया है ,दवा दे द| है । घर ले जाओ और आराम
करने दो । नस ने पांच सौ Fपये रखवा Îलये िजसक| कोई रसीद भी अ1 पताल से नह|ं द| गयी और
न ह| डा4 टर का परचा Íदया गया ।
Íकसी तरह से Îमसेज लाल बेट| और पÎत को आटो Íर4 शे म लादकर घर ले गयी । बाप बेट| के
ए4 सीडे Þ ट क| खबर पर| कालोनी म फै ◌ेल गयी । श4 ला
ु ु
जी,चौहानजी,शमाजी और जैनजी बाप बेट|
क| हालत दे खकर तर7 त

आटो Íर4 शा बलाये और बाप बेट| को लेकर हq

डी रोग Íवशे ष7 के पास
पहं चे । बीÍटया को टे बल पर लेटर Íदया गया । डा4 ट

र पहले बीÍटया का चे क अप Íकये Íफर
Îमलाल का ।
श4 ला

जी डांसे पछे डां4 ट

र साहब फै 4 चर तो नह|ं है uk ।
डांÎम1 टर लाल को फै 4 चर नह|ं है पर घाव थोड़ी गहर| है । कछ अ7 द

Fनी चोट| भी है । प7 gह बीस
Íदन दवा लेनी पडे गी । बीÍटया को फै 4 चर तो है । ए4 सरे के बाद ि1 थÎत साफ हो जायेगी ।
ए4 सरे आÍद करने म चार बज गये दो घÞ टे के बाद Íरप|ट आयी । फै 4 चर है । मामला साफ हो
गया । डा4 टर तर7 त

क¯ चा ¯ ला1 टर करने म जट गये । घÞ टे

भर म ¯ ला1 टर हो गया । हाथ धोते
हए डा4 ट

र साहब बोले Îमलाल आप रे गलर दवा लेते रहना । बीÍटया का ¯ ला

1 टर तो हो गया है ।
बीÍटया को ठ|क होने म मह|ना से अÎधक समय लग सकता है । बीÍटया को कम¯ ल|ट बेडरे 1 ट क|
जFरत है । पÎलस के स बनता है एफ

आईआरजFर दज करवा दे ना । गाड़ी न+ बर तो नोट कर
Îलया होगा ।
Îम1 टरलाल -हां ।
सनील और जा7 स

न 1 क

टर न+ बर के आधार पर ए4 सीडे Þ ट कर भागने वाले अपराधी
डीस4 सेना,जनता 4 वाट र,न7 दानगर का पता लग Îलये पर पÎलस ने एफ

आईआरन दज करने क|
कसम खा ल| । Îमलाल अपने Hे³ के थाने म जाते तो वहा कहां जाता Íक िजस Hे³ म ए4 सीडे Þ ट
हआ वहां एफ

आईआरदज होगी इस थाने म नह|ं । इस तरह Îमलाल काफ| भागदौड़ Íकये पर
पÎलस इधर से उधर भगाती रह| । इसी बीच एक Íदन डी

स4 सेना Îमलाल के घर आया और बोला
पÎलस के स मत करो मेर| शान माट| म Îमल जायेगी । बीÍटया के इलाज के खच को खद वहन
ु ु
करने का वादा कर चला गया । दोगला डीस4 से ना अपनी चाल म कामयाब हो गया । मह|ने भर
तक पैतरे बाजी करता रहा । कल Fपये दे जाउ◌ू◌ंगा परस| दे जाउं गा Íफर अपनी बात से मकर गया

। बोला हमने कोई वादा नह|ं Íकया था । हम तो समाज सेवक है । सड़क पर चलते लोग| का खन

नह|ं बहाते । नगर सरHा सÎमÎत का सH|य सद1 य

हं

। हमारे Íखलाफ Íकसी थाने म
एफआईआरदज नह|ं हो सकती । यह तो पता चल गया होगा ।
Îमजैन-स4 सेना धमक| दे रहे हो । बीÍटया का पैर तोड़Íदये डे ढ मह|ने से खÍटया पर पड़ी है । तम

इलाज के खच को वहन करने का वादा Íकये थे । एक पैसा आज तक नह|ं Íदये कै से दगाबाज हो ।
51
बनते समाज सेवक हो 4 या त+ हा

रे जैसे ह| समाज सेवक होते है । ए4 सीडे Þ ट करके भाग
जाते है । जब पकड़म आते है तो पै तरे बाजी करते है । अरे कछ तो शरम करो ।

स4 सेना-मझ से ए4 सी

डे Þ ट तो हआ है । म रात म जागता ह◌ा◌ं समाज सेवा के Îलये । चलती राह
ु ू
मेर| आंख नीद क| वजह से ब7 द हो गयी । मेर| गाड़ी टकरा गयी । हो गया ए4 सीडे Þ ट तो म 4 या
कFं । जो तम लोग कर सकते थे कर Îलये ।

नह|ं Îलखा गया एफआईआर ना दे ख लो म
4 या कर सकता हं ।

Îमलाल-बडे

दोगले आदमी हो तम तो । आंख म धल छोकना त+ हे
ु ू ु
अ¯ छ| तरह से आता है ।खन

से खेलते हो होल| और बनते हो समाज सेवक । 4 य| समाज सेवक| का नाम खराब कर रहे हो
।समाज सेवा के नाम पर पाप कर रहे हो ।खन बहाते हो उपर से धमक| भी दे ते हो । दे खो पैसा

हाथ क| मैल है । मै इलाज म कोई कोतहाई नह|ं बरत रहा हं । जFरत पड़ी

तो बीÍटया को बड़े से
बड़े डा4 टर को दे श के Íकसी कोने म ले जाकर इलाज करवा सकता हं । स4 से

ना तमने खच वहन

का वचन Íदया था । अपनी जबान से मकर रहे हो । ऐसा तो दोगले Íक1 म

के लोग ह| कर सकते
है । अरे दÍर7 दे तमने अपनी गलती का 9ायि° च

त कर लेते इतना मेरे Îलये बहत था । तमने मझे

ु ु
धोखा 4 य| Íदया । मेरा के स रिज1 टड नह|ं होने Íदया । कै से घÍटया इंसान हो ।त+ हा

रे मंह पर

जमाना थके गा । समाज सेवा का ढकोसला ब7 द

कर दो ।
Îमस4 सेना दे खो इ7 जत मत उतारो ।
Îमशमा-त+ हा

र| कोई इ7 जत भी है । म त

मको अ¯ छ| तरह जानता हं ।तमने पÎलस के स से बचने

ु ु
के Îलये षणय7 ³ रचा था ।
स4 सेना-कामयाब भी हो गया । तम सब दे खते रह गये । चले जाना िजस अदालत म मरे Íखलाफ

जाना हो । त+ हा

रा अं गठा तो हमने काट Îलया । अब तो कह| एफ

आईआरदज तो करवा नह|ं
सकते । कहते हए दोगला अं गठा Íदखाकर भाग Îनकला । दोगले क| करतत दे E का

ू ू
र सभी अवाक्
रह गये । डीस4 सेना,जनता 4 वाटर वाले ने बाप बेट| को ट4 कर मारकर भाग गया । पकड़म आने
पर इलाज का खच वहन करने का वादा Íकया था पर ये तो उसका षÞ य7 ³ था । जब षणय7 ³ का
पता आसपास के लोगो को लगा तो सभी मशÍवरा दे ने के Îलये जैसे उमड़पड़े । कोई डीजीपीसे
कोई एसपी से कोई Íकसी और से Îशकायत करने क| मशÍवरा दे ता । कोई कहता 4 या थाने के
च4 कर म पड़ना जान बची करोड़ो पाये । कोई बीÍटया को दआये दे ता कहता भगवान करे मे र|

बीÍटया ज~ द| चलने लगे । कोई कहता भगवान के घर दे र है अंधेर नह|ं इसका फल डीस4 सेना को
जFर Îमलेगा । उसक| टांग कट जायेगी । कोई कहता उसक| कट| टांग म क|ड़े जFर पड़े गे ।
दे खना जE म दे ने वाले का जीवन हं सते जE म म Íबतेगा । दोगला बहत शाÎतर Îनकला

,भगवान दो
मंहे क|

खशी पर मÇ
ु ु
ठ| भर आग जFर डालेगे। स7 तोष करो लाल भईया भगवान त+ हा

रा सब दख

हर लेगा । वह| त+ हा

रा खजाना भरे गा । Îमलाल Íरसते जE म पर मलहम लगाने म मशगल थे

और लोग डीस4 सेना को बददआये दे ने म ।

1 11 12 22 2- -- -नेक|
द|द| दे खो ना । न7 हक| को न जाने 4 या हो गया ?आंख उपर नीचे कर रह| है । छÇ

ट| के Íदन भी
उनको फस त

नह|ं है । कह कर गये थे Íक ज~ द| आ जाउ◌ू◌ंगा पर अभी तक आये नह|ं । द|द|
कछ ज~ द|

करो ना ट|ल क| आख| से आसं टपके जा रहे थे ।
ू ू

52
प* पा

-ट|ल

,रो ना । अभी अ1 पताल लेकर चलते है ।4 यो परे शान हो रह| हो । बीÍटया रानी को
कछ

नह|ं होगा,कहते हए Îमसेज प* पा


आवाज लगान लगी । अरे सनो जी नहा Îलये 4 या

। दे खो
र|ता क| तÍबयत खराब हो गयी है । अ1 पताल लेकर जाना होगा अभी। वक|लभइया घर पर नह|ं है
। ज~ द| करो ।
Îमसेज प* पा

क| पकार पर द|नदयाल बाथFम से बाहर आ गये


प* पा

-अरे ये 4 या ?बÎनयाइन तो पहन Îलये होते ।
द|नदयाल-इतनी मोह~ लत तमने कहां Íदया । बÎनयाइन Îनकाल कर खट| पर टांगा ह| था Íक तमने
ु ू ु
आवाज दे ना शF कर Íदया । भला इतनी दे र म कोई नहा सकता है 4 या

Íक म नहा लंगा । कछ
ू ु
मोह~ ल तो दे Íदया करो,जब दे खो तब चढ| घोड़ी पर सवार रहती हो । खै र छोड़ो पहले तो बताओ
र|ता को 4 या हो गया ।
प* पा

-कता पायजामा पहन| । अब बाद म नहाना । पहले र|ता को अ1 प

ताल लेकर चलो । सनडे का
Íदन है अ1 पताल म कोई डा4 टर Îमलते है भी Íक नह|ं । दे खो दे र मत करो । ट|ल बहत रो र


ह| है
। र|ता क| आंख उपर नीचे हो रह| है । मझे बहत डर लग रह| है । इतने बरस| के बाद तो एक


लडक| पैदा हई थी वह भी पोÎलयो01 त

। वक|ल बाब और ट|ल बीÍटया को बहत ¯ या
ू ू

र करते है ।
बड़े लाड़¯ यार से पाल रहे है । पता नह|ं Íकसक| नजर लग गयी । कल तो चं गी भल| थी आज
अचानक न जाने 4 या हो गया ?
द|नदयाल- झट से पायजामा कता पहनता हं । पहले डा4 ट


र को र|ता को Íदखाते है । बाक| काम
बाद म होगा ।
प* पा

-4 या कर रहे हो । कब से पायजामा पहन रहे हो । ज~ द| नह|ं पहन सकते 4 या ?
द|नदयाल-भागवान कछ तो समय लगेगा । नाड़ा

तो बांध लेने दो ।
प* पा

-हे भगवान इतनी दे र पायजामा पहने म लग रहा है । उधर ट|ल जोर जोर से रो रह| रह| है

।लोग कहे गे कै से पड़ोसी है । Íदखाते तो सगे जैसे पर बीमार लड़क| को लेकर डा4 टर के पास तक
नह|ं ले जा रहे ।
द|नदयाल-4 य| परे शान हो रह| हो । चलो नीचे उतरो । 1 क

टर क| चाभी मेरे हाथ मे◌े◌ं है । पांच
Îमनट म अ1 पताल पहं च जायेगे । र|ता को कछ


नह|ं होगा ।
प* पा

-जब काम पड़ता है तब त+ हा

रा 1 क

टर जबाब दे जाता है । फे को 1 क

टर चलो भाग कर ।
समय बबाद हो रहा है । र|ता बेहोश हए जा रह| है ।

द|नदयाल-चलो 1 क

टर 1 टाट हो गया । तम र|ता को लेकर 1 क
ु ू
टर पर बैठो । अ1 पताल भत| करवा
कर ट|ल को ले जाउ◌ू◌ंगा ।

प* पा

-ट|ल को सा7 त

वना दे ते हए अ1 प

ताल क| ओर भागी । ट|ल मैडम Îच~ ला

Îच~ ला कर रोये जा
रह| थी । आनन फानन म द|नदयाल अ1 पताल पहं चे ।

डा4 टर साहब पड़ी फत| से आपरे शन Îथयेटर क| ओर इशारा करते हए भागे । इशारे से द|नदयाल के


हाथपांव फल गये । डा4 ट

र साहब तÎनक भर म कई मशीने लगा Íदये पर सब बेकार। आ4 सीजन
लगा Íदये Íफर माथा पकड़कर बैठ गये । द|नदयाल बेसध पड़ी

र|ता को Îनहारे जा रहे थे Íक कब
रो पड़े ।
डा4 टर-द|नदयालजी आप मर|ज को ले जा सकते है । कछ

नह|ं हो सकता अब ।
53
द|नदयाल-4 या ?
डा4 टर-हां । बेबी मर चक| है ।

अ1 पताल पास म होने क| वजह से पडो ़ ◌़Îसय| क| भीड़लग गयी । द|नदयाल शव लेकर चल पड़े ।
द|नदयाल के पीछे भीड़,रोती Íबलखती ट|ल म डम और

उ7 हे स+ भालते आंस बहाते हए प* पा
ू ु

। ट|ल

मैडम तो पागल सी हो गयी । इकलौती स7 तान काफ| मान मनौती के बाद पैदा हई थी शाद| के

काफ| वष◌ा के बाद पोÎलयो01 त । वह भी वल बसी । र|ता क| परवÍरश ट|ल और वक|ल भइया

बड़े लाड़¯ यार से कर रहे थे ।उ7 हे इस अपंग बीÍटया पर बड़ा नाज था । र|ता गद न तो उठा नह|ं
पाती थी पर आसपास के लोग| को अ¯ छ| तरह से पहचानती थी । Îमसेज प* पा

को दे खकर वह
करवटे बदलने लगती थी । हाथ पांव पटकने लगती थी । उसके भाव को दे खकर Îमसेज प* पा


समझ जाती थी Íक वह गोद म उठाने को कह रह| है । गोद म उठाते ह| वह मंह पर एकटक

दे खती रहती थी । Îमसेज प* पा

के भी आंस

नह|ं ब7 द हो रहे थे । उनक| आंख के सामने र|ता का
चे हरा बार बार उभर रहा था । Îमसेज प* पा

छाती पर पc थर रखकर ट|ल को समझाने का अथक

9यc न कर रह| थी । ट|ल थी क| बयान कर

-कर दहाड़मार-मार कर रोये जा रह| थी । Îमसेज प* पा


ट|ल क| दे खरे ख म लगी हई थी और द|नदयाल ÍHयाकम करने क| तैयार| म । द|नदयाल वक|ल


भइया के पÍरÎचत| को अपने ब¯ च| को भेजकर बलवाया दर के पÍरÎचत| को Íकसी दसरे ◌ा◌ं का
ु ू ू
हाथ जोड़जोड़कर बलवाये । वक|ल भइया को बला
ु ु
ने के Îलये एक आदमी को दौड़ाये ।खद अि7 त


सं1 कार का इ7 तजाम करने के Îलये एक दो को साथ ले कर करने म जट गये । कछ दे र म काफ|
ु ु
लोग जट गये पर वक|ल भइया के दर के पÍरÎचत ]ाइवर 9साद ने तो सार| हदे पार कर द| ।
ु ू
द|नदयाल क| बीÍटया काजल को डांटकर भगा Íदये । काजल से बोले ते रा बाप Íकतना बे वकफ है

ना जान ना पहचान त मेरा मेहमान हर ऐरे गैरे के काम के Îलये बलावा भेज दे ता है । अरे उसक|
ू ु
अपाÍहज बीÍटया मर गयी तो कौन सी दÎनया उजड़

गयी । अ¯ छा हआ । दÎनया म ना जाने Íकतने


रोज मरते है । वक|ल क| अपाÍहज बेट| मर गयी तो कौन सा पहाड़ टट गया । मेर| कोई जान

पहचान वक|ल से नह|ं है । मेरे और भी काम है । जा कह दे ना अपने बेवकफ बाप से । अरे खद
ू ु
मसीबत म डब रहा है । दसर| क| मसीबत म 4 या
ु ू ू ु
जFरत है कदने क| । बड़ा

भला मानष बनता है

। घर म खाने का इ7 तजाम नह|ं चला है नेक| करने । खद क| घरवाल| का दख दद ठ|क से दे ख
ु ु
नह|ं पा रहा है । समाज को बदलने का जैसे ठे का ले Îलया है । भाड़म जाये ऐसी जनसेवा । बेचार|
काजल रोते हए वापस आ गयी । वक|ल भइया क| बीÍटया र|ता क| मय

् यत म ]ाइवर 9साद नह|ं
सर|ख हआ । कह| घमने चला गय


। खै र 9साद नह|ं आया । वक|ल भइया क| मत बेट| को

दफना Íदया गया ।
द|नदयाल वैसे ह| Îमसेज प* पा

क| असा² य बीमार|,खद क| बीमार| और आÎथ क तंगी से ³1 त

थे।
दवा का इ7 तजाम भी बडी मि° क

ल से हो रहा था । ब¯ चे कपड़े लते को रतस रहे थे ।गांव म
पÍरवार के लोग नाराज थे 4 य|Íक मÎनआड र नह|ं कर पा रहे थे । सार कमाई दवाई पर 1 वाहा हो
रह| थी । द|नदयाल के Íपताजी पर| ब1 ती

वाल| के सामने कहते बेटवा ससरा शहर म मजा कर

रहा है । गांव म हम सत| बीड़ी

के Îलये न1 तवान हो रहे है । बीबी ब¯ च| को साथ म रखा है भला
इस गांव म उसका कौन है । 4 य| करे गा मÎनआड र । जबÍक द|नदयाल जो कछ हो जाता जFर

भेजते थे । द|नदयाल अपनी दयनीय दशा को वैसे ह| उजागर नह|ं होने दे ते थे जैसे नवयौवना
54
अपने तन के तार-तार व1 ³ से अपने अं ग को ढकती हो । द|नदयाल खद के पÍरवार का खच

उठाने म Íद4 कत महसस कर रहे थे । इसी बीच वक|लभइया के पÍरवार का भार आ गया । आने

जाने वाले◌ा◌ं के चाय ना° ता,भोजन तक क| इ7 तजाम करना पड़ता । वक|ल भइया के मसीबत को

अपनी मसीबत मानकर द|नदयाल और प* पा
ु ु
सारा भार वहन कर रहे थे । बीÍटया के मरते ह| ट|ल

तो पागल जैसी हो गयी थी । पड़ोस म एक लड़क| पैछा हआ उसे अपनी बीÍटया का पन ज7 म



मानकर उसे लेने दौड पड़ती । तं गी के बोझ तले दबे द|नदयाल Íह+ मत नह|ं हारे पर| तरह से मदद

Íकये । वक|ल के पÍरवार का खाना द|नदयाल के घर ह| बनता । प* पा

और द|नदयाल ने सग| से
बढकर वक|लभइया के बरे व4 त

काम आये । द|न दयाल खद इतने दखी थे Íक दसर| के दख म
ु ु ू ु
काम आना उनक| कमर टटने जैसा था । द|नदयाल क| इनकम अÎधक न थी । वे एक क+ प

नी म
मामल| से मलािजम थे । छोट| सी तनE वा
ू ु
ह थी। पc नी के चार चार आपरे शन का दद भोग चके थे।

इसी बीच बाप का आपरे शन,इसके बाद वक|ल भइया क| मसीबत द|नदयाल के Îलये Íकसी सनामी
ु ु
से कम न थी । घर म खाने के Îलये अ7 न क| कमी उपर से एक और पÍरवार का खच पर अपनी
Íद4 कत| का एहसास तÎनक भी वक|लभइया को नह|ं होने Íदया । वक|ल भइया मानÎसक Fप से
परे शान रहने लगे वे शहर छोड़ने का फै सला कर Îलये । पड़ोÎसयो के ,द|नदयाल और प* पा

के लाख
समझाने के बाद भी मानने को तैयार न थे । द|नदयाल और वक|लभइया म दर दर तक कोई
ू ू
Íर° ता नह|ं था । द|नदयाल और प* पा

को दे वदत कहते वक|लभइया और ट|ल न थकते थे ।
ू ू
वक|लभइया और द|नदयाल जाÎत Íबरादर| से भी एक ना थे । द|दयाल इंसाÎनयत के पजार| थे ।

इंसाÎनयत का धम Îनभाना द|नदयाल को अ¯ छ| तरह से आता था । वक|ल साहब दसरे शहर चले

तो गये पर उ7 हे नया शहर रास नह|ं आया । वे वापस आ गये कछ मह|न| के । द|नदयाल खद
ु ु
Íकराये के घर म रहते थे । घर बहत छोटा

था इसके बाद भी आ÷य Íदये । दो Íदन म वक|लभइया
के Îलये Íकराये का घर ढढ Îलये । वक|ल भइया ट|ल के साथ अपने Íकराये के घर म रहने लगे ।
ू ू
यह घर वक|ल भइया के Îलये भा¹ यशाल| साÍबत हआ । उनका काम चल पड़ा

। वे तर4 क| क| राह
पर दौड़ पड़े । कामयाबी पर ट|ल मैडम को

गमान होने लगा । द|नदयाल और उनका पÍरवार जो

साल भर पहले उनके के Îलये दे वता समान था । अब उ7 हे उनम खोट लगाने लगी । वे ट|ल मैडम

क| नजर म छोटे हो गये । द|नदयाल क| नेक| का ट|ल मैडम के Îलये कोई मोल न रहा ।

ट|ल मैडम के Îलये ]ाइवर 9साद उनका पÍरवार

,ढकोसलबाज तेगवहादर और उसक| घरवाल| मंथरा

Í9य हो गये । ये वह| 9साद थे जो ट|ल मैडम क| बेट| र|ता के जनाजे म शाÎमल होने से मना कर

Íदये थे । ट|ल मैडम 9साद क| घरवाल| लÎलता क| बात| पर कछ अÎधक Íव° वा
ू ु
स करने लगी ।
9साद और लÎलता दसरे ◌ा◌ं के अ¯ छे

Íर° ते उ7 हे पस7 द नह|ं थे । वे हर हाल म Íबगाड़ने का
षणय7 ³ रचते अ7 ततः कामयाब भी हो जाते । हां बाद म भले ह| लोग उनके मंह पर थक दे उसक|
ु ू
तÎनक परवाह न करते । लÎलता जब वे दसर| के अ¯ छे

स+ ब7 ध म दरार डालने म कामयाब नह|ं
हो पाती तो राखी बांधकर Fर Íबलगाव पैदा कर दे ती । खद अ¯ छ|

और दो पÍरवार को एक दसरे

का द° म

न बना दे ती । उसके ¯ यवहार म Íदखावा कटकट कर भरा हआ था । लÎलता के षणय7 ³
ू ू


का Îशकार होकर ट|ल मैडम द|नदयाल के नेक| को Íबसार कर नेक| म खोट खोजने लगी । जहां दो

चार औरते इ4 Ç ठा होती दे वता समान द|नदयाल और उनक| पc नी प* पा

क| बराई करने म तÎनक

भी न चकती । वक|ल भइया ने भी आना जाना ब7 द

कर Íदया । प* पा

मह|ने भर अ1 पताल म
55
मौत से संघष रत् थी पर ट|ल मैडम

, न वक|ल भइया ,न लÎलता और न 9साद दे खने भर को
तो न हए । हां Íवपिc त

के Íदन| म भी द|नदयाल क| राह म मÇ

ठ| भर-भर आग Íबछाने से न चके

। एक Íदन राह चलते ट|ल मैडम से Îमसेज क~ या

नी क| मलाकात हो गयी । ट|ल मैडम Îमसेज
ु ू
क~ यानी को दे खकर बोल| कहां से आ रह| हो भाभी बड़ी ज~ द| ज~ द| । 4 या बात है बहत ज~ द|


हो ?
Îमसेज क~ यानी - अ1 पताल से आ रह| हं प* पा


को दे खकर मह|ने भर से अ1 पताल म पड़ी है ।
द|नदयाल भइया बड़ी मसीबत म ह ।

ट|ल मैडम

-मर तो नह|ं रह| है uk?
Îमसेज-क~ यानी 4 या कह रह| हो ट|ल

?
ट|ल मैडम

-ठ|क कह रह| हं । मेरे उपर उसका बहत एहसान है
ू ु
uk?
Îमसेज क~ यानी-एहसान है तो बेचार| मह|ने से अ1 पताल म पड़ी है । ब¯ चे भखे ¯ या

स Íदन काट
रहे है । जाकर अ1 पताल दे ख आती । ब¯ चे ◌ा◌ं क| दे खभाल कर लेती । अगर इतनी एहसानम7 द है
तो ।
ट|ल मैडम

-भाभी ये सब मझे

नह|ं करना है ।
Îमसेज क~ यानी-मसीबत म तो अपने

ह| काम आते है । त+ हा

र| मसीबत म तो द|नदयाल भइया

और उनका पÍरवार जी जान लगा Íदया था ।तम तो कभी अ1 प

ताल म नह|ं Íदखी।
ट|लमैडम

-भाभी हमे तो इ7 तजार है उस Íदन का ।
Îमसेजक~ यानी-कौन से Íदन का इ7 तजार कर रह| हो ।
ट|लमैडम

- िजस Íदन उसका बेटा मरे और मै उसके काम आउ◌ू◌ं । पर| कालोनी जान गयी है ना

उसने मेरे साथ बहत एहसान Íकये है । एहसान चकाने का मौका तो Îमले । मेर| बीÍटया मर| थी


तो एहसान क| थी ना । म एहसान कर परे शहर को बता दे ना चाहतीहं । पहले वो ना उसका


बेटा मरे ताÍक दे ख तो ले मेरे एहसान को ।
Îमसेज क~ यानी-ट|ल होश म तो हो । तम नेक| पर बदनेक| क| आग डाल रह| हो । अरे भगवान
ू ु
से तो डरो । म जानती हं द|नदयाल भइया ने त+ हा


रे Îलये 4 या Íकया है । म भी पड़ोस म ह| रहती
हं । कोई दर


नह|ं रहती । खद तकल|फ उठाये पर तमको तकल|फ
ु ु
नह|ं पड़ने Íदये अपने ब¯ च| का
Îनवाला त+ हे

Íदया । असा² य रोग से पीÍड़ त प* पा

बहन ने रात Íदन एक कर Íदया । त+ हा

रे खन

के Íर° तेदार तो एक Íदन भी नह|ं Íदखे,मह|ने भर परा पÍरवार एक पांव पर खड़ा

था । बेचारे
द|नदयाल भइया क| नेक| भल कर बरे क| सोच रह| हो । प* पा
ू ु ु
के बेटे क| मौत क| कामना म जट|

हो । जो दसरे का बरा सोचते है उनका बरा पहले होता है । तमको पता है Íक
ू ु ु ु
नह|ं ट|ल

?
ट|लमैडम

-4 या ?
Îमसेज क~ यानी-सc य कभी नह|ं हारता भले ह| परे शान हो जाये । त+ हा

र| मसीबत म जो कछ
ु ु
द|नदयाल भइया और प* पा

भाभी ने Íकया है । उसके बदले तमसे उ7 हे

कोई चाह न थी । वे तो
हर Íकसी के दख को अपना दख मानकर आगे आ जाते है । उनके Íखलाफ जो जहर तम बो रह| हं
ु ु ु

वह त+ हा

रे Îलये घातक होगा । इसके Îलये त+ हे

भगवान भी माफ नह|ं करे गा । हां द|नदयाल
भइया जFर माफ कर दे गे । मेर| बात गÍठया लो । एक Íदन तम जFर द|नदयाल भइया के चौखट

पर माथा पटकोगी । अरे Íकसी क| नेक| के बदले नेक| नह|ं कर सकती तो बराई क| मÇ
ु ु
ठ| भर
56
भर आग 4 य| । नेक| के बदले ऐसा Îसला 4 यं

ट|ल

? द|नदयाल भइया तो कहते है नेक| करो
पर नेक| के बदले को चाह न रखो । आज के जमाने म जब लोगो को आग बोने से फस त

नह|ं है
,द|नदयाल भइया जैसा कोई आदमी तो है नेक| क| राह पर चलने वाला । दसर| के दख म काम
ू ु
आने वाला ।
ट|ल मैडम

-4 या ?
Îमसेजक~ यानी- हां । मानवता क| राह पर चलने वाल| क| राहो म फल Íबछाने चाÍहये मÇ
ू ु
ठ| भर
भर आग नह|ं । Íकसी क| नेक| Íबसारना महापाप है ।
ट|ल मैडम

-मै लÎलता और मंथरा भाभी के बहकावे म आ गयी थी ।वे कहती थी ठोटे लोग| क|
सोह« बत से दर रहना चाÍहये ।

Îमसेजक~ यानी-4 या ?द|नदयाल भइया इतना बड़ा आदमी तो त+ हे

इस ज7 म म तो नह|ं Îमलेगा ।
अरे आदमी पद दौलत और जाÎत से बड़ा नह|ं होता ।आदमी तो सq कम और नेक हौशले से बड़ा
होता है । द|नदयाल भइया भले ह| जाÎत से छोटे हो पद और दौलत से छोटे हो पर वे बहत बड़े


आदमी है ट|ल । आदमी को समझना सीखो ।

नेक| क बदले हं सते जE म दे ना अगला ज7 म
Íबगाड़ना है ।
ट|लमैडम

- गलती का एहसास हो गया है मझे द|द| । म 9ायि° च

त कFं गी । भइया और भाभी का
पांव पकड़कर माफ| मांगगी कहते हए अ1 प


ताल क| ओर भागीं जहां प* पा

मौत से य² द

रत् थी।
1 11 13 33 3- -- -समाचार
साल भर क| कमरतोड़,आंखफोड़पढाई का फल छा³| नतीजे के Fप म Îमलता है । यÍद इन भि* य
के वै7ाÎनक|,Íवqवान|,उqयोगपÎतय|,राजनेताओं , सैÎनक| एंव समाज सधारक| के भÍव* य

के साथ
Íखलवाड़लाभबस होता है तो यह Íखलवाड़भÍव* य म सामािजक,आÎथ क,एवं रा* ç|य Íहत पर सनामी

के कहर से कम न होगा । सबह पर|Hा थी

, राम पर| रात तैयार| म जटा रहा । Íक
ू ू ु
शन के
माÎन ग वाक बाहर Îनकलते ह| Íकरायेदार 9काशबाब का बेटा राम बाहर आ गया । राम को दे खकर
ू ू ू
Íकशन बोले राम अखबार का इ7 त

जार कर रहे हो 4 या ?
राम

-नह|ं अं कल । कल पेपर है । अखबार पढने का समय का है । पर|Hा क| तैयार| कर रहा हं ।

Íकशन-तैयार| अ¯ छ| चल रह| है uk ।
राम

-हां अं कल । अ¯ वल आना है तभी uk पापा साइÍकल Íदलवायेगे ।
Íकशन-जFर अ¯ वल आओगे । पढाई करो ।नतीजा अ¯ छा आयेगा बेटा ।
राम

-अं कल परे साल से कर रहा हं ।

Íकशन-के 7 g कहां है ।
राम

-अपनी ह| कालोनी म । आने जाने म परे शानी नह|ं होगी ।
Íकशन-ये भी अ¯ छ| बात है । तमको 7 या

दा दे र तक पढने का समय Îमल जायेगा । बेटा तम पढो◌े

। म माÎन ग वाक् कर लं ।

राम

-जी अं कल ।
Íकशन-बे1 ट आफ लक बेटा ।
राम

-थ क य अं कल।

57
राम माÎन ग वाक
ू ् से ज~ द| लौट आये और वे भी अपनी बीÍटया को पर|Hा के 7 g छोडने चले गये
जो दर था ।बीÍटया उषा दसवीं क| छा³ा थी । उषा को पर|Hा के 7 g

छोड़कर Íकशन घर भी नह|ं
पहं च पाये । कालोनी पÎलस छावनी बन चक| थी । पc थ

ु ु
रबाजी दे खकर Íदल दहल गया । बचते
बचाते Íकशन घर तक तो पहं चा पर पÎलस क| ललकार सनकर आगे बढ गया । Íकशन का बे

ु ु
टा
कमार बाट जोह रहा था । पापा को घर के सामने से जाता हआ दे खकर पापा


पापा Îच~ लाते
पीछे पीछे दौड़लगा Íदया । आगे बढकर पÎलस के एक जवान ने Íकशन को रोका ।

पÎलस के रोकने पर Íकशन Fक गया । वह Íह+ म

त करके बोला 4 या हं गामा है ये । अपने घर म
भी नह|ं घसने Íदया जा रहा है । 4 या

आफत है । 4 या हो गया कालोनी म आधा घÞ टा पहले तो
ऐसा कछ

नह|ं था ।
पÎलस जवान

-दे ख नह|ं रहे हो दं गा हो गया है ।
Íकशन-दं गा 4 यो हो गया ?
जवान-ऐन व4 त पर पर|Hा के 7 g बदल गया है । इसÎलये
तब तक हांफते हए कमार पहं
ु ु

च गया और Íकशन से बोला पापा घर चल| म+ मी परे शान हो रहा है
। कमार डरा सहमा थर

-थर कांप रहा था ।दं गे का खौफ उसक| नजर| के सामने घम रहा था । वह

न7 हा सब कछ अपनी आंख| से दे ख चका था । उसे डर था Íक कह|ं कोई पc थ
ु ु
र उसके Îसर न फोड़
दे । वह Íकशन का हाथ पकड़कर घर चलने क| िजद पर अड़गया ।
Íकशन-बेटा 1 क

टर पर बैठो । अं कल से बात कर लं । घर ह| चलंगा ।
ू ू

कमार

-पापा कोई पc थर मार दे गा।
Íकशन-नह|ं बेटा ये अं कल है uk । पc थर मारने वाल| को पकडने के Îलये ।
कमार

-अं कल जैसे तो बहत लोग थे । दे खो न बस को कं च डाले।

Íकशन-कछ

नह|ं होगा अब । पÎलस अं कल लोग आ गये है

uk ।
इतने म तेज धमाका हआ । कमार रोते हए बोला पापा अब घर चलो । दे खो बस पर पc थ
ु ु

रबाजी
शF हो गयी । सभी लोग अपने अपने घरो के अ7 द

र है । कमार क| िजद के आगे Íकशन को

झकना पड़ा

। वे अपने घर वापस आ गये । 1 क

टर धड़ा कर दं गा1 थल ओर जाने लगी । इतने म
उनक| धम पc नी गीता डपटकर बोल| कहां जा रहे हो जी । दे ख रहे हो चारो ओर से पc थरबाजी हो
रह| है । 4 यो Îसर फोड़वाने जा रहे हो । इतने म कछ लड़

Íकयां द|वार क| ओट म रोती हई Íदखाई

पड़गयी। Íकशन लड़Íकय| के पास गये पछे बेट| 4 या

हआ ।

एक लड़क| आस पोछते हए बोल| पर|Hा के 7 g


बदल गया हम तो पर|Hा दे ने आये थे । यहां तो
Îसर फट गया । कई लड़

के लड़Íकया अ1 पताल जा चक| है । पर|Hा के 7 g

कहां है ।
Íकशन-पर|Hा के 7 g बदलने क| सचना तो पहले Îमल गया होगी ।

लड़क| -नह|ं अं कल अभी पता चला है । कोई कह रहा है न7 दाकालोनी म है तो कोई कह|ं और बता
रहा है ।
कछ सरकार| अफसर भी आ गये । कछ पर|Hाथ| जा चके थे । कछ अÎधकाÍरय| को उ+ मी
ु ु ु ु
द भर|
Îनगाह| से दे ख रहे ताÍक पर|Hा टल जाये । दस Îमनट के बाद ÎशHा अÎधकार| भी आ गये ।
पालक और पर|Hाथ| 9° न| क| झड़ी लगा Íदये । एक आदमी 1 प* ट श« द| म बोला साहब 4 या यह
H* टाचार का के स नह|ं है । ले दे कर पर|Hा के 7 g बदला गया हो ।
58
ÎशHा अÎधकार| महोदय अनc त

र हो गये ।इतने म अपर कले4 टर साहब आ गये । 1 क

ल के
संचालक को बलवाये । आपस म कछ बातचीत Íकये । थाने चलो कह कर अपर कले4 ट
ु ु
र साहब
आग बढे Íफर 4 या गाÍड़ य| का काÍफल चल पड़ा अपर कले4 टर साहब के पीछे पीछे । बच गये कछ

घायल पर|Hाथ| और टट| बस । Íकशन भीड़

के छं टते ह| बस के पास Îससकती लड़Íकय| से बात
करने लगे ।इतने म पड़ोस वाला ओमजी आ गये बोले भाई साहब 4 या एकटक Îनहार रहे है ।
Íकशन-कराहता हआ भÍव* य


ओमजी-भाई साहब जब तक H* टाचार है तब तक सार| कराहे जवां रहे गी । आओ घर चले । इनते
म एक प³कार महोदय आ गये । प³कार महोदय आHोश का Îशकार हई बस का

फोटो कई ऐंगल
से खीचने लगे । कछ दे र म प³कार महोदय भी अपनी िज+ मे

दार| पर| कर चले गये । 1 क
ू ू
ल के
पास कछ पÎलस जवान| के साथ कोई नहा था । कछ घÞ टे
ु ु ु
पहले जहां दं गा हो रहा था । लोग| का
तांता लगा हआ था । अब वहां पर| शाि7 त


थी । Íकशन अपने काम पर चले गये । कछ ह| दे र म

Íकशन के पÍरÎचत| ने ने फोन लगाना ऐस शF Íकया क| फोन क| घंट| ब7 द

होने का नाम ह|
नह|ं ले रह| थी । गीता जबाब दे दे कर परे शान हो गयी । सब एक ह| बात कहते भाई साहब को
फोटो अखबार म दे खा है इसÎलये फोन Íकया है । भाई साहब आये तो जFर बताना हमारा फोन
आया था । ÷ीमती गीता फोन क| घÞ ट| से परे शान तो थी पर मन म खशी भी थी पÎतदे व का बड़ा


फोटो अखबार म जो छपा था । वे उधेड़बन म थी Íक कह|ं बड़े

साहब तो नह|ं हो गये पर दसरे पल

उनक| खशी पर वHपात हो जाता सोचती उनक| Íक1 म

त म कहां । यÍद Íक1 मत म होती तो कब
के बड़े अÎधकार| हो गये होते पर कछ लोग| क| कागदि* ट
ु ु
उन पर ऐसी पड़ी क| बड़ी-बड़ी Íड0ी के
बाद भी 4 लक क| नौकर| भी चै न से नह|ं कर पा रहे है । भेद क| द|वार खड़ी करने वाले Íरसते
जE म खरचते रहते है । भला अÎधकार| कै से बनने दे गे । अप

ने पास कोई बड़ी पहं च भी तो

नह|ं है
।दसरे पल कोई अनहोनी का डर सताने लगता । काफ| माथा प¯ ची

के बाद दफतर म फोन लगा द|
। संयोगबस Íकशन ने ह| फोन उठाया ÷ीमती गीता आवाज पहचन कर बोल| 4 य| जी तर4 क| हो
गयी 4 या ?
Íकशन-कहां से समाचार Îमला ।
÷ीमतीगीता-सच आप साहब बन गये आप । आज म बहत खश हं ।
ु ू

Íकशन-कहां से समाचार आप तक पहं च गया । मझे तो कछ पता नह|ं ।

ु ु

÷ीमतीगीता-दÎनया जान गयी । आपको पता

नह|ं ।आपके जाते ह| सभी जानने वाल| के फोन आने
का ÎसलÎसला अभी तक जार| है ।
Íकशन-4 या ?
÷ीमतीगीता-हां । सभी आपक| फोटो छपने का समाचार बता रहे थे ।
Íकशन-सबह वाले अखबार म तो कछ
ु ु
नह|ं छपा है ।
÷ीमतीगीता-अरे दोपहर का कोई बड़ा अखबार है । दे खो अखबार घर ले कर आना और कम से कम
पाव भर रसमलाई जFर लाना ।
Íकशन-ठ|क है । अब फोन रखो । Íबल बढ रहा है ।
÷ीमतीगीता-चहकते हए बोल| बा

य बड़े साहब ।
59
Íकशन Íकसी अनहोनी के डर म भयभीत होने लगा । बड़ी मि° क

ल से दफतर से सरज डबने
ू ू
के बाद Îनकल पाया । अखबार क| दकान पर पहं चा । सभी लोग Íकशन को घर
ु ू

-घर कर दे ख रहे थे

। वह समझ ह| नह|ं पा रहा था Íक असल माजरा 4 या है ?
दकान वाला मोड़

कर अखबार Íकशन क| ओर बढाते हए बोला लो साहब आप इसे खोज रहे है ना ।

Íकतनी बड़ी फोटो छापी है अखबार वाले ने आपक| । साहब द|िजये एक Fपया ।
Íकशन पाके ट से एक Fपया Îनकाला अखबार वाले के हाथ पर रखा । अखबार Îलया अखबार का
पहला प7 ना खोलते ह| होश उड़◌़गये। खड़े Íकशन और और जाते हए ओमजी क| फोटो अखबार

नवीस ने बड़ी बार|क| से खींची थी । फोटो दे खने पर ऐसा लग रहा था Íक असल| दं गाई Íकशन ह|
हो और ओमजी कछ दर भागते नजर आ रहे थे । िज+ मे
ु ू
दार प³कार असल| बराई से कोसो दर थे ।
ु ू
त1 वीर के नीचे छपा था H² द

भीड़और 1 क

ल क| HÎत01 त बस । उखड़े पांव Íकशन घर पहं चे ।

÷ीमतीगीता होठो पर म1 का

न Îलये दरवाजे पर खड़ी Îमल| । Íकशन अखबार हाथ पर रखते हए

बोले ये हं सते जE म ।
÷ीमतीगीता-बाप रे समाचार ने तो मेर| खशी पर मÇ
ु ु
ठ| भर आग डाल Íदया ।

1 11 14 44 4- -- -नेक| बना अÍभशाप
अÎतÍपछडे

छोटे से गांव म दरÍgता के दलदल म धं सा माधव रहता था । वह अपने भाई भतीज| को
खशहाल बनाने के Îलये गांव के जमीदार कं सबाब का बंधआ मजदर बन गया था । माधव का c या
ु ू ु ू

सफल हो गया,उसका बड़ा भाई के शव कलकते म नौकर| करने लगा । सबसे बड़ा भाई राघव के शव
क| ससराल म वाÍरस न हो

ने क| वजह से चारो भाईय| के नाम रिज1 ç| हई पांच बीघा जमीन पर

खेती करने लगा था। माधव का सबसे छोटा भाई उधम तो बचपन से कछ अं वारा Íक1 म

का था वह
भी गांव से शहर जा बसा । माधव अपने और पÍरवार के 1 वÍण म कल के सपने खल| आंख| से

दे खने लगा । कछ बरस म ह|

के शव और उसक| घरवाल| कजर| क| ÎनयÎत म खोट आ गयी ।
कजर| पांच बीघे खेत से उपजे कÞ ट

ल| अनाज से एक दाना और के शव क| कमाई से पैसा भी न
दे ने क| कसम खा ल| । अब 4 या माधव पर वHपात हो गया । राघव अपने सगे भाई के शव का
मजदर होकर रह गया । के शव और उसक| पc नी

कजर| पर लोभ का भत सवार हो गया जबÍक

औलाद के नाम पर बस एक क7 या थी । के शव वह| भाई था िजसके गणगान करते राघव और

माधव नह|ं थकते थे । राघव ने तो के शव के गणगान म बना डाला था । जहां चार छः लोग

इ4 Ç ठा हये Íक राघव गाने लगता था ।

भइया हो तो बस अनपे के शव जैसा
अपना के शव तो चांद जैसा ।
uk आये आंच कभी Íर° ते पर अपने
बना रहे ¯ यार सदा सच होवे सपने ।
भईया का ¯ यार करे खशहाल

के शव क| खशी पर पÍरवार Îनहाल ।

भईया के शव भय् यपन का सरताज,
1 वाथ के यग म ऐसा भाई कहां Îमले आज ।

60
राघव और माधव का गमान के शव क| दगाबाजी

के सामने नह|ं Íटक सका । के शव और उसका
दमाद 9भ जो कचहर| म मलािजम था सािजश रचकर स³ह साल परानी रिज1 ç|
ु ु ु
नोट के बÞ डल
परोस कर रq द करवा Îलया । चपके चपके के शव सार| जमीन अपनी इकलौती बेट| के नाम करवा
ु ु
Îलया । Íकसी को भनक तक न लगने द| । कई बरस| के बाद राघव को दाल म कछ काला लगा

वह छानÍबन करने लगा । इसक| भनक 9भ को लगी वह सािजश से परदा हटता दे खकर राघव को

रा1 ते से हटा Íदया और इ~ जाम राघव के माथे मढ Íदया गया आc महc या का ।
राघव क| घरवाल| बहत बरस पहले उससे नाता तोड़

कर मायके जा बसी थी नवजात Îशश उ

जाला
को माधव क| चौखट पर फ क कर। । माधव क| नवÍववाÍहता घरवाल| धनर| ने भेड़ बकर| और
E ु◌ाद तक क| छाती चटाकर उजाला को पाल पोष ल| । राघव के मरते ह| बंधवा मजदर माधव क|
ु ू
जैसे भजाय कट गयी । वह बेसहारा हो गया । मि° क
ु ु
ल| के समय म कोई सहारा दे ने वाला न रहा
। पैतक घर पर पÍरवार वाल| का क« जा

हो गया । माधव और उसके ब¯ च| के ◌ा Îसर Îछपाने क|
जगह न बची। जमींदार का हाथपांव जोड़कर वह ब1 ती से कछ दर गांव समाज क| जमीन पर मड़
ु ू

डालकर बसर करने लगा ।
गर|बी के दलदल म फं से माधव को उबरने का कोई रा1 ता दर दर तक नजर
ू ू
नह|ं आ रहा था ।
बेचारे माधव के पास तंगी,भÎमह|नता

,रोजी रोट| का कोई पE ता

इ7 तजाम नह|ं । Íदन भर जमीदार
के खेत और चौखट पर हाड़फोड़ने क| दो सेर मजदर| इसके बाद भी माधव ने हार

नह|ं माना ।
उजाला को अपने बड़ा बेटा माना उसे पढाने Îलखाने म जट गया जबÍक वह ख
ु ु
द लाख दख भे◌ाग

रहा था । माधव के c याग से उजाला आठवीं जमात का इ+ तहान भी पास कर Îलया । माधव उसे
आगे पढाना चाहता था पर ना जाने 4 यं

उजाला माधव और उसके पÍरवार को सांप क| तरह
फफकारता रहता था । धनर| इतनी स7 तो

षी औरत थी Íक उजाला क| हर गलती माफ कर दे ती
कहती बेटा पढाई पर ² यान दो आगे बढो । अपने ब¯ च| क| तरफ इशारा करते कहती अपने भाई
बहनो को त+ हे

हा आगे ले जानस है । बेटा हम तो अपनी औकात के अनसार तमको कोई तकल|फ
ु ु
नह|ं पड़ने दे रहे है । अगर कोई दख तकल|फ पड़

रहा है तो बेटा इसम हमार| कोई गलती नह|ं है ।


म तो अपने काका क| कमाई दे ख ह| रहे हो । हमारा सपना है Íक तम पढ Îलखकर साहे ब बनो ।

बेटा हम गर|ब का मान रख लेना । उजाला माधव और धनर| के c याग को कभी भी नह|ं माना ।
वह ब1 ती वालो से कहता मेर| मां छः Íदन का छोड़कर भाग गयी तो काका काक| को मझे

नह|ं
पालना था फे क दे ना था । कc ते

Íब~ ल| खा गये होते । धनर| के कान तक ये बाते पहं चती को तो

वह घÞ टो रोती पर माधव से कछ ना कहती । माधव तो भोर म जमीदार क| चौखट पर हािजर|

लगाकर काम म लग जाता । पर| ब1 ती

सो जाती तब वापस आ पाता । आठवीं का Íरज~ ट आया
ह| नह|ं उसके पहले उजाला शहर भाग गया । शहर म एक क+ पनी म नौकर| करने लगा और बाक|
समय म डाई-मेÍकग का काम सीखने लगा। कछ मह|न| म उजाला एक कामयाब Îम1 ³ी ं

बन गया ।
अ¯ छा पैसा कमाने लगा । बड़ा Îम1 ³ी बन गया ।उसक| कामयाबी के चच परे शहर म होने लगे थे ू
। उजाला अपनी कामयाबी क| खबर से माधव को कोसो दर रखा । माधव को जब कभी ÎचÇ

ठ|
उजाला Îलखता तो बस यह| Îलखता Íक कामधाम नह|ं चल रहा है म बीमार हं । उजाला के बीमार|

क| खबर सनकर माधव और धनर| रो उठते । बड़ी

मि° क

ल से अ7 त दे शीय खर|दते उजाला को
ÎचÇ ठ| Îलखवाते बेटा कछ Íदन के Îलये घर आ हवा पानी बदल जायेगा तो त+ हा
ु ु
र| सेहद सधर

61
जायेगी । उजाला के Íदल म तो Íव° वासघात था उसे ÎगरÎगट क| तरह रं ग बदलने भÎलभांÎत
आता था । मां बाप क| है Îसयत से माधव और धनर| Îचि7 तत रहते । शहर गये उजाला को कई
बरस Íबत गये पर वह कभी गर|ब माधव क| ओर नह|ं दे खा एकाध बार गांव गया भी तो आ° वासन
के अलावा और कछ

नह|ं Íदया ।
उजाला के ससराल वाले गौने दे ने के Îलये माधव पर जोर दे ने लगे । माधव ने उजाला का « या


तीन चार साल क| उH म ह| कर Íदया था । माधव उजाला के गौना क| Íदन तार|ख प4 क| कर
ÎचÇ ठ| Îलखवा Íदया । गौना चार Íदन पहले उजाला आ गया । इस बार काका काक| और छोटे भाई
बहन| को कपड़े भी लाया और माधव के हाथ पर सौ Fपया भी रख Íदया । माधव को तो जैसे
दÎनया क| दौलत Îमल गयी । वह इस खशी के आगे गौने के खान खच के Îलये जमीदार से उधार
ु ु
को एकदम से भल गया

। 4 यो न भलता उजाला ने जो कहा था काका तम Îच7 ता
ू ु
ना करो सब
दख दर हो जायेगा । भतीजे के इस श« द
ु ू
ने तो और अÎधक दख सहने क| शि4 त

जैसे दे द| ।
माधव बोला बेटा तम खश रह यह| हमार| सबसे बड़ी
ु ु
दौलत है । तमको दे खकर खश रह लंगा ।
ु ु ू

बड़ी हं सी खशी उजाला का गौ

ना आया । गौना कराकर मह|ने भर बाद उजाला शहर चला गया । दो
मह|ने के बाद ससराल से सीधे अपनी पc नी

उÎम ला को अपने ससर को खत Îलखकर शहर बलवा
ु ु
Îलया । उÎम ला के शहर पहं चते ह| बचाखं चा नाता भी उजाला ने माधव से खc म


कर उसक| नेक|
पर मÇ

ठ| भर आग डाल Íदया ।
कई साल पहले राघव मर गया या या मार Íदया गया । राघव के जीते जी उजाला ने उसे कभी बाप
का दजा नह|ं Íदया । उसके जीवन और मौत से उजाला को कोई फक नह|ं पड़ा यÍद Íकसी को फक
पड़ा तो माधव को । राघव क| मौत को 9भ के शव और के शव के समधी दधई ने सदा के Îलये
ू ु
अबझ पहे

ल| बना Íदया पर लोग दबी जबान हc या

रा इ7 ह| तीन| को कहते । उजाला के मंहमोड़

लेने
से माधव एकदम अके ला होकर रह गया । बे चारा कभी काल कम से कम ÎचÇ ठ| Îलखवा कर
अपनी पीड़ा पर मरहम तो लगा लेता था । वह भी सहारा खc म हो गया ।
उजाला का गौना आये कई साल Íबत गये । वह एक लड़क| दो लड़के का बाप बन गया । लड़क|
« याह लायक हो गयी । प7 gह साल के बाद Íफर उजाला क| ÎचÇ ठ| आयी परानी ÎचÇ

ठ| क| तरह ह|
रोना काका म बीमार हं । पÍरवार को शहर म रखना बहत महं गा पड़
ू ु
रहा है । काका मझे रहने का

Íठकाना दे दे तो म ब¯ च| को गांव म छोड़दे ता । अब 4 या हर मह|ने उजाला क| ÎचÇ ठ| आने लगी
। उजाला क| ÎचÇ ठ| पढवाकर माधव और धनर| रो उठते । एक Íदन अचानक उजाला पÍरवार
सÍहत आ धमका ।
धनर| उजाला के ब¯ च| को छाती से लगाकर Íबलख Íबलख रोने लगी ।
उजाला-काक| uk रो। ये ब¯ चे तेरे पास ह| रहे गे । काक| मेरा खोया हक दे दे ना बस ।
सीधी साधी धनर| बोल| -हां बेटा । दाना पानी कर बहत थक गया होगा । तेरे काका तो जमींदार

क| बीÍटया के « याह म लगे है । Íदन रात गांव गांव से खÍटया ढो-ढोकर ला रहे है । म भी वह|
गोबर डालकर आ रह| हं । सबह से लटके लटके क


मर टट गयी । जमींदार के बेट| का « या

ह है
Íदन रात एक हमार| हो रह| है । अपनी बीÍटया के « याह म हम इतना परे शान नह|ं हए थे ।

62
उजाला-काक| मेर| भी बीÍटया « याह करने लायक हो गयी है । काक| तमको हवेल| जाना है तो

चल| जा उÎम ला रोट| बना लेगी ।उजाला पÍरवार सÍहत गांव आया है Íक खबर माधव को लगी वह
भी दौड़ता हांफता आया ।
उजाला-माधव का पांव छते हए बोला काका अपने चरण| म जगह दे दो ।

माधव-4 या कह रहे हो उजाला । शहर क| कोठ| छोड़कर यहां रहोगे । मेरे चरण| म भला त+ हा

रे
जैसा बड़ा सेठ कै से रहे गा । बेटा जब तक रहना हो रह ले । जो Fखा सखा मझ गर|ब क| झोपड़ी
ू ु

म बनेगा खा लेना । पोता पोती को कछ Íदन खेलाने का सख भोग लंगा ।अभी तक तो गर|बी और
ु ु ू
अपने ने बहत Fलाया है । कछ Íदन ब¯ च|


के साथ हं स खेल लंगा Íकसी बडे


सख से कम

नह|ं होग
हमारे Îलय ।
उजाला-काका म अब तमको

दख

नह|ं दं गा । खब ब¯ च|
ू ू
को Íखलाओ । ब¯ च| के रहने के Îलये
Íपछवाड क| मड़ई दे दे ◌ा । जब तक हम रहे ◌ेगे बना खा लेगे । हां खान खच का भार त+ हा

रे उपर
नह|ं डालंगा ।

माधव-4 या?
उजाला-हां काका । अलग रहं गा बस क◌ुछ Íदन रहने का Íठकाना दे दो ।

माधव-qवाÍरका क| मां सन रह| हो । Íकतनी आसानी से Íदल पर आरा चला Íदया है इस उजाला ने

। बीस साल के बाद भी नह|ं बदला उजाला । सांप क| तरह अभी भी फफकारता है ।

धनर|-ठ|क है । पढा Îलखा है समझदार है । कछ सोच समझकर ह| कहा होगा । हम तो ठहरे

गंवार । 4 या समझे शहर क| भाषा ? ठ|क है बेटा रह ले जब तक चाहे । qवाÍरका,हÍरqवार,
गंगा,जमना

,गोमती और सर1 वती बीÍटया क| तरह तमने भी तो मेर| छाती चाटकर पले बढे हो। हां

तब इन ब¯ च| का ज7 म नह|ं हआ था । अपनो पर Íव° वा

स नह|ं करे गे तो जमाने म Íफर Íकस पर
Íव° वास करे गे ,जेठ दे वर,खानदान तक के लोग| ने धोखा Íदया है । बेटा अब और Íदल ना दखाना


उजाला-काक| 4 या कह रह| हो ?
माधव-बेटा एक मां के आंस का मोल रखना । मां क| ममता पर मÇ
ू ु
ठ| भर आग मत डालना । कोई
एतराज नह|ं है । अलग रहो या एक म । पोते पोती को भर आंख दे खकर 1 वग का स

ख Îमल गया

उजाला-काका कोई दगाबाजी नह|ं कFं गा ।
माधव काम पर चला गया । धनर| दाना पानी का इ7 तजाम झटपट कर Íपछवाड़े क| मड़ईनमा

क¯ चे घर को ल|पपोत कर साफ सथर| कर द| । उजाला का पÍरवार मड़

ईनमा क¯ चे

घर म रहने
लगा । हफते भर म उजाला शहर गया Íफर आ गया । दो बीघा जमीन Îलखवा कर और मड़ईनमा

क¯ चे घर क| जगह पर प4 का मकान बनवाने क| शFवात कर शहर चला गया । माधव ने खशी
ु ु
खशी मड़

ई क| जमीन दे Íदया। माधव उजाला के षणय7 ³ को तÎनक नह|ं समझ सका । चार
मह|ने म प4 का मकान बन गया । अपने झा◌ोपड़ीनमा घर के पास भती

जे के प4 के मकान को
दे खकर माधव बहत खश था । साल भर के अ7 द


र उजाला क| बीÍटयाका « याह तय हो गया ।
बीÍटया के « याह म माधव ने भी जी जान लगा Íदया । खानदान क| नाक का सवाल जो था ।
« याह Íबताकर उजाला शहर चला गया । कछ मह|ने के बाद Íफर सबह सबह शहर से आ
ु ु ु
गया ।
63
रात म माधव जमीदार के काम से आया । माधव के आने क| खबर लगते ह| वह माधव से
Îमलने गया । माधव का पांव छआ ।

माधव -उजाला को जी भर कर आशीश Íदया और बोला बेटा बहत ठÞ डी

है ओलाव सेको । qवाÍरका
शाम को ह| जला दे ता है । मड़ई गरमा जाती है सब पआल म दबक क
ु ु
र सो जाते है ।
उजाला-हां काका ठÞ ड तो है । काका म तम से आ7ा लेने आया था ।

माधव-कै सी आ7ा बेटवा ।
उजाला-काका तमने मझे मड़
ु ु
ई क| जगह दे कर मेरे उपर बड़ा उपकार Íकया है ।
माधव-बेटा उजाला उपकार कै सा । म ने तमको तब अपनी छाती से लगाया था जब त Îसफ छः Íद
ु ू

का था । तेर| मां तमको भइया को और घरबार छोड़

कर मायके जा बसी थी । म और तेर| काक|
रात रात भर जागे है । पास म रहे गा तो हम भी बहत खशी होगी । इसÎलये qवाÍरका और


हÍरqवार का हक मारकर तमको घर बनाने क| जगह दे Íदया । बेटा त सखी रह । तेर| सरत म
ु ू ू ू
मझे

राघव भइया नजर आते है । मेरे Íव° वास को बनाये रखना ।
धनर|-qवाÍरका के बाप रोट| ओलाव के पास बैठकर खा लो ।

माधव-आज कोई नयी बात है । रोज तो ओलाव तापते तापते खाकर यह| पआल म सो जाता हं ।

उजाला-काका रजाई 4 यो नह|ं बनवा लेते । आठ 9ाणी हो कम से कम चार रजाई तो होनी चाÍहये ।
माधव-सोचता तो हर साल हं पर बन

नह|ं पाती है । जब qवाÍरका कछ कमाने धमाने लगेगा तो

रजाई भी बनेगी गq दा और तÍकया भी ।
उजाला-जFर qवाÍरका कमायेगा काका । काका ये लो ।
माधव-4 या है ।
उजाला-काका ÎमरचÍहया गांजा है ।
माधव-जरा स7 त

को आवाज दे दो ।
धनर|-दो Îचलम पहले ह| पी चके हो । अब ÎमरचÍहया पीओगे तो सबह उठ
ु ु
नह|ं पाओगे । जमीदार
दरवाजे पर आकर उलटा सलटा बोलने लगेगे । कल पी लेना ÎमरचÍहया अभी तो रोट| खाओ और

सो जाओ । Íदन भर हाड़फोड़ हो अराम करो ।
माधव-ठ|क है लाओ ।
धनर|-ÎलÇ ट| और गड़

है थाल| म । थाल| के बाहर हाथ नह|ं करना । नह|ं तो ओलाव क| आग
मÇ

ठ| म आ जायेगी ।
माधव-हां भागवान मझे भी मालम है । इतना नशा अभी
ु ू
नह|ं चढा है । उजाला खायेगा गड़

रोट| ।
लो तÎनक खा लो ।
उजाला-तम खाओ । मै खा चका हं । उÎम ला मगा बनायी
ु ु ु

थी,दरपन का दो1 त आया था । उसके
साथ मैने खा Îलया है । काका एक बात करने आया था तमसे कहो तो कहं ।

माधव-कौन सी बात है बोल,रोट| खाते समय दांत काम करे गे कान थोड़े ह| ।
उजाला-मेरे प4 के मकान के सामने वाल| जमीन दे दो ।
इतना सनते ह| माधव के गले म रोट| अटक गयी

। वह Îगलास भर पानी के सहारे रोट| का
Îनवाला पेट म ढके लते हए बोला 4 या

?
उजाला-हां काका । मड़ई वाल| जगह तो मझे चाÍहये ।

64
माधव- मझे लोग पहले आगाह कर रहे थे Íक

माधव भतीजे पर Íव° वास न करो । भतीजा
और भेड़ा पर Íव° वास करने वाला जFर मंह के बल Îगरता है ।

काश म पहले सोच Îलया होता ।
मड़ई क| जगह दे कर गलती कर Íदया 4 या ? त मेरे ब¯ च|

का Íठकाना Îछनना चाहता है अं गल|

पकड़कर त मेरा हाथ उखाड़

ना चाहता है 4 या?
उजाला-नह|ं म तो कह रहा हं Íक मेरे घर के सामने से मड़

ई अ¯ छ| नह|ं लग रह| है । हटा लो बस

माधव-मड़ई लेकर जाउ◌ू◌ंगा कहां ।
उजाला-Íकनारे हो जाओ । अभी पि° चम क| तरफ तो जमीन है ।
माधव-दो खÍटया क| जगह म मेरे दो बेटे कै से रहे गे । उजाला अब म तेर| चाल समझ गया ।
उजाला-काका म जो चाह रहा हं वह| होगा ।

माधव-4 या हमे बेघर कर दे गा ? िज7 दगी भर के Îलये जE म दे गा ।
उजाला-घर म रहो या बेघर हो जाओ । मेरे घर के सामने वाल| जमीन तो मेर| होकर रहे गी अब ।
जE म नह|ं हं सते जE म म जीना होगा काका त+ ह


माधव-धमक| दे रहा है ।
उजाला-धमक| तो नह|ं अपनी राह का कांटा हटाने को जFर कह रहा हं ।

माधव-हम त+ हा

र| राह के कांटे हो गये है । भल गये वो Íदन जब तमको सखे म सलाते थे। गीले म
ू ु ु ु
बार| बार| से हम और त+ हा

र| काक| तमको लेकर सोते थे । Íकतनी बार तम मेर| जांघ पर टÇ
ु ु
ट|
कर Íदया करते थे । सब ¯ यथ हो गया Íकया कराया । बेटा नेक| को बदनाम ना कर।
उजाला-काका जमीन तो लेकर रहं गा । चलता हं । तम रोट| खाओ और सो जाओ ।
ू ू

माधव-4 या मेर| नेक| मेरे Îलये अÎभशाप बन गयी है ।
उजाला-नेक| 4 य| Íकया ?हमने कहा था 4 या Íक मझे पालो

?अरे मेर| मां छोड़कर भाग गयी थी
तो तमको पालने क| 4 या

जFरत थी ?फ क दे ते कc ते

Íबि~ लय| के आगे मेरे मां बाप क| तरह ।
झगड़े वाल| जमीन को लेकर फै सला कल दे दे ना ।
उजाला धनर| और माधव का चै न Îछन कर चला गया । धनर| और माधव रात भर ओलाव के पास
बैठे Îच7 ता क| Îचता म सलगते रहे । एक दसरे का मंह ताकते रहे बे बस सा । मगा बोलना शF
ु ू ु ु ु
Íकये । माधवा क

~ ला-फराकत करने चला गया । Îनत-कम से Îनपट कर आया । भ स क| हौद|
धोया । पानी चारा डाला । भ स को हौद| लगा कर जमींदार क| मजदर| पर चला । धनर| भी अपने

काम म लग गयी । उधर उजाला भी रात भर जमीन हड़पने क| उधेड़-बन म

नह|ं सो पाया था ।
वह सरज Îनकलते ह| दरवा

जे पर हािजर हो गया काकाकाकाक| आवाज लगाने लगा ।
धनर|-वो तो काम पर चले गये 4 यो बला रहे हो

?
उजाला-4 या फै सला Íकया काका ने ?
धनर|-कै सा फै सला । अरे अपने ब¯ च| को Íठकाना तमको कै से सौप दे गे । हमारा जो फज था ।

िज+ + ेदार| के साथ Îनभाया । अब बेघर तो नह|ं हो सकते uk ।
उजाला-घर -बेघर से मझे 4 या

लेना । मझे तो बस अपनी हवेल| के सामने से मड़

ई हटवाना है ।
धनर|-4 या ?
उजाला-हां ।
65
धनर|-त+ हा

र| हवेल| क| नींव हमार| छाती पर पड़ी है ।
उजाला-हवेल| है तो हमार| uk । दे खता हं कब तक काका आंख Îमचौल| खेलते

है । आंख Îमचौल|
का जबाब मेरे पास है ।
धनर|-4 या करोगे। थाना पÎलस लाओगे । Fपया और ताकत के भरोसे हमे बेघर कर दोगे ।

उजाला- उजाला नाम मेरा तमने ना जाने 4 या

सोच कर रखा है पर म सांप का ब¯ चा हं मेर| मां

नाÎगन थी। जानती हो दध पीलाने वाले को भी सांप

डं सने से परहे ज नह|ं करता । आज और काका
के फै सले का इ7 तजार कर लेता हं । आये तो कह दे ना बस

धनर|-4 य| दध के बदले जहर दे ने पर तले हो । अरे त+ हा
ू ू ु
र| मां ने तमको फ क Íदया तो 4 या

हमने
तमको अपनी छाती से

नह|ं लगाया ?मेरे दध का यह| कज चका रहे हो
ू ु
। अरे त+ हा

रे पास तो पद
और दौलत दोन| है तम चाहते तो और भी कह|ं जगह लेकर महल खड़ी

कर सकते थे । त+ हा

र|
नजर हमार| मड़ई पर ह| 4 यो Íटक| है ?मेर| माट| क| द|वाल अब त+ हे

भा नह|ं आ रह| है । तम

मेरे माट| क| द|वाल ढहाकर प4 क| हवेल| क| शान म ह|रे जोड़ना चाहते हो । मै ऐसा नह|ं होने
दं गी । दÍHण तरफ लकडी के सहारे खड़ी

मड़ई को माट| के द|वाल खड़ी करने के उपHम म ब¯ च|
के साथ लग गयी। उजाला-काक| त Íकतन| भी माट| क| द|वल खड़ी

कर ले ये जमीन मेर| होकर
रहे गी । मेरा भी हक बनता है । चार Íह1 सेदार| क| जमीन तम अके ले ले लोगी 4 या

? दे खता हं

त+ हा

र| मड़ई कै से खड़ी रहती है मेरे प4 के मकान के सामने ।
धनर|-तम मेर| मड़

ई Îगरा दोगे 4 या? म भी दे खती हं कै से जब द1 ती

क« जा कर लेते हो । क« जा
करने के Îलये त+ हे

हमार| लाश पर से जाना होगा ।
काक| ऐसी बात है तो वह भी कर सकता हं कहकर उजाला के शव के दमाद 9भ से Îमला जो उसके


बाप का काÎतल था । उसी के साथ साठगांठ Íकया माधव क| जमीन हड़पने के Îलये । कछ

बदमाश| को दाF मगा दे कर माधव और उसके पÍरवार को डराने धमकाने के Îलये लगा Íदया । 9भ
ु ु
को इसी Íदन का जैसे इ7 तजार था । उजाला को अपने जाल म फं सता दे खकर चारा डाल Íदया ।
वह तो कचहर| म काम करता ह| था इधर उधर करके हफते भर 1 टे आड र जार| करवा Íदया ।
उजाला चारो ओर से दबाव तो बनाये हए था । माधव और उसका पÍरवार डरा सहमा रहने लगा था

। कोई उसक| मदद के Îलये आगे नह|ं आ रहा था । माधव गांव के मÍखया 9धान सबके आगे

माथा पटका पर कह|ं सनवाई

नह|ं हई । आÍखरकार एक Íदन सबह सबह ह| परा थाना ले कर

ु ु ू
उजाला आ धमका। पÎलस वाले माधव माधव क| आवाज दे ने लगे और उजाला के गÞ डा
ु ु
मड़ई
Îगराने म जट गये। माधव घबराया आंख| म आस
ु ू
Îलये हािजर हआ दरोगाजी को सारा वता7 त
ु ृ

सनाया । माधव के आसं स¯ चा
ु ू
ई उगल गये ।
दरोगाजी बोले -4 यो नेक| को अÎभशाÍपत कर रहे हो उजाला ।
दरोगा जी क| बात को सनकर ब1 ती

के दो चार लोग| का जमीर जागा । वे माधव के पH म दबी
जबान बोलने लगे ।

अब 4 या घ

रह 9धान भी आगे आ गये और बोले दरोगा जी अब अ7 या

य होगा इस गांव म । ने क|
अÎभशाप नह|ं बनेगी । हमार| आंख खल गयी है ।

दरोगाजी कोरा कागज मंगवाये। सलहनामा तै यार हआ । उजाला को बलाये दरोगाजी ।
ु ु

66
उजाला हाथ जोड़कर खड़ा हआ । दरोगा जी ने

कहां उजाला सबके सामने हक|कत आ चक| है

Íक तम Íकतना दगगाबाज है पर तमको कछ कहना हो तो कह सकते हो ।
ु ु ु

उजाला-पंच| काका ने मझे जो Íदया है वह बहत है ।काका काक| के एहसान तले इस ज7 म


4 या
कई और ज7 म भी नह|ं उबर सकता हं । मेरे मन म खोट आ गयी थी इसी वजह से गलती हो

गयी । काका क| जमीन पर अब मेर| बर| नजर नह|ं पडे


गी । म बहते शÎम 7 दा

हं । हो सके तो

मझे माफ कर दे ना ।

दरोगाजी-सलहनाम पर दसE त

करो । गांव वाल| से ह| नह|ं माफ| माधव से माग| । माधव ने माफ
कर Íदया तो समझो भगवान ने माफ कर Íदया । तमने तो गर|ब क| नेक| पर मÇ
ु ु
ठ| भर आग डाल
ह| Íदया है । नेक| के बदले बq नेक| तो महापाप है । माधव का पैर पकड़कर माफ| मांगो । खद

दÍरgता के दलदल म धंसा रहकर भी तमको उपर उठा Íदया । तमने ने क| को अÎभशाप बना Íदया
ु ु
। माधव त+ हा

रे Îलये भगवान से कम नह|ं है उजाला ।
उजाला-माधव का पैर पकड़Îलया ।
माधव क| आंख| से तर-तर आंस बह Îनकले वह उजाला को झट से गले लगा Îलया ।

1 11 15 55 5- -- -चोरनी
सरज डब चका था । अं Îधयारा पसरने को उतावला था । पंÍHयां अपने अपने घ|सल| क| ओर भाग
ू ू ु
रहे थे ।घर| से Îनकलने वाला धआं अभी साफ साफ नजर आ रहा था । खेत म काम करने वाले


मजदर घर लौट रहे थे या खेत माÎलक| क| हवेल| सलाम ठोकने भागे जा रहे थे । राम दादा भी
ू ू
खेत म काम कर हवेल| गये । वे फावड़ा वहां रखे दो चार टहल माÎलक क| बजाये और घर वापस
आ गये । घर पहं चे ह|

नह|ं बाहर से आवाज लगाने लगे अरे द|न क| मां घर म हो 4 या

? या
Íकसी के घर Îचलम गड़

गड़ा

ने म लगी है । काम पर से आओ तो कभी डयोढ| पर Îमलती नह|ं ।
शाि7 तदे वी -तनतनाते हए बाहर आयी और बोल| तम खेत म काम करके आ रहे हो तो 4 या


म घर
म खाल| बैठ| रहती हं । रोट| तोड़

ती रहती हं । म भी Íदन रात एक कर रह| हं । इधर उध
ू ू

Îचलम क| जआड़

म नह|ं भटकती रहती ।ऐसी होती तो आज तम ऐसे बात ना करते । त+ हा
ु ु
रा एक
पैसा Íफजल खच

नह|ं करती । पाई पाई जोड़ती हं । ये माट| का घर Îसफ त+ हा


र| कमाई से नह|ं
खड़ा है । दे खो मेरे Îसर के बाल झड़गये । इस घर को बनाने म माट| ढो-ढो कर। जब दे खो तब
आग उगलते रहते है । अरे अभी तक तो अके ले Îचलम नह|ं गड़

गड़ा

यी आज कहां से सरज पÎछम

से उग गया Íक Îचलम लेकर बैठ गयी । न7 हक| को चप करा रह| थी । प* पा
ु ु
च~ ह

चौके म लगी
है ।
राम

-भागवान 4 य| नाराज हो रह| है । चार बार बलाया एक बार भी

नह|ं बोल| । घर म तम हो या

नह|ं कोई आहट नह|ं ।
शाि7 तदे वी - हां मेर| आहट अब तमको

नह|ं लगेगी । वो Íदन भल गये जब मेर| आहट त+ हा
ू ु
रे
नथन| को लग जाती थी । म भी वह| हं तम भी । दे खो समय Íकतना बदल गया Íक त+ हे
ू ु ु

मेर|
आहट नह|ं लग रह| है ।ये तो होना ह| था । लो खÍटया डाल द| बैठो । म पानी लाती हं ।

शाि7 तदे वी झटपट गड़

पानी दे कर Îचलम चढा लायी और राम को थमाते हए बोल| लो तम भी जी
ू ु

भर कर ह4 का

गड़

गडा लो Íदन भर

नह|ं Îमला है ना । कहते हए वह खÍटया पकड़

कर चपचाप बैठ

गयी ।
67
शाि7 तदे वी को मौन दे खकर राम बोला

-द|न

क| मां 4 य| गमसम हो गयी ।बेटवा क| कोई ÎचÇ
ु ु
ठ|
आयी है 4 या ?थोड़ी दे र पहले बहत ताना महना मार रह| थी । एकदम से 4 या

हो गया ।
शाि7 तदे वी-4 या कFं । झगड़ा कFं ।
राम

- दे वी Hोध uk करो◌े । हमने तो Hोध करने लायक कछ

नह|ं कहा । 4 य| उखड़ी उखड़ी बात
कर रह| हो । 4 या बात है ?
शाि7 तदे वी-कोई बात नह|ं है ।
राम

-कोई ना कोई बात तो है । बताओ ना 4 यो दखी हो रह| हो अके ले । तकल|फ बांटने से कम

होती है । दे ह दख रह| है 4 या

?बताओ ना 4 या बात है ?4 य| रोनी सरत बनाये बैठ| हो ।

शाि7 तदे वी-4 या बताउ◌ू◌ं । कई Íदन से दे ख रह| हं ।

राम

-4 या दे ख रह| हो ?
शाि7 तदे वी-बोलने दो तब uk बताउ◌ू◌ं ।
राम

-बीच म ट|क कर गलती कर Íदया 4 ैया ?बोलो 4 या बताने वाल| थी ?
शाि7 तदे वी-सनो ।

राम

-4 या सना रह| हो

?
शाि7 तदे वी-सामने के घर से सनाई दे रह| गाल| ।

राम

-अपने घर म कोई कछ करे हम 4 या

लेना ?
शाि7 तदे वी-मझे तो कछ शंका हो रह| है ।
ु ु

राम

-4 य| ?
शाि7 तदे वी-घमÞ डीदे वी मझे दे खकर गाल| दे ती है । द|न के बाब तम कहो तो म पंछ Íक ऐसा 4 यो
ु ू ू ु ू ू

करती है ।
राम

-4 या पछोगी उस झगड़ा

ल से । गांव के ◌ी कई लोग| को

पीट चक| है । अपने मद को भी बर|
ु ु
बर| गाल| दे ती है कई बार मार भी चक| है । गाल| तो उसक| छठ| पर चढायी होगी उसक| मां ने
ु ु

शाि7 तदे वी-गोधÎल बेला म गाल| दे ना अ¯ छ|

बात तो नह|ं है ।
राम

-द|न क| मां तम उसको मना भी तो
ू ु
नह|ं कर सकती । अगर कछ बोल| तो अप

ने गले पड़
जायेगी । आ बैल मझे मार वाल| बात होगी । छोड़ो

जाने दो । ये थाम| ह4 का

त+ बाक जल गयी


शाि7 तदे वी-बाप रे इतना ज~ द| एक Îचलम त+ बाक जल गयी ।इतना ह4 का


पीओगे तो कहां से
आयेगा। म इ7 तजार म बैठ| थी Íक तम पीकर मझे दोगे ।
ु ु

राम

-एक और Îचलम चढा लो ।
शाि7 तदे वी-नह|ं रात हो गयी । दसरे काम भी तो करने है । प* पा
ू ु
रोट| बना चक| है । रोट| खाओ

। त+ बाक पीकर पेट थोड़े

ह| भरे गा । चलो खÍटया घर म डाल दे ती हं । यहां म¯ छ

र बहत लगने

लगे ह । रोÍहत ने अ7 दर धआं कर Íदया है । म¯ छ

र नह|ं लगेगा । अ¯ छा बैठो म Îचलम चढाकर
लाती हं । तम बैठकर गड़

ु ु
गड़ा

ओ म तÎनक घमÞ डीदे वी से पछकर आती हं । कौन सी तकल|फ आ


गयी है ।
राम

-uk त

uk जा खामखाह झगड़ा हो जायेगा ।
68
शाि7 तदे वी-अरे म झगड़ा नह|ं करने जा रह| हं

हालचाल पछने जा रह| हं ।

राम

-बहत दया

आ रह| है । नह|ं मान रह| हो तो जाओ Íफर आकर आंस

नह|ं बहाना ।
शाि7 तदे वी-म पछकर आती हं । तम ह4 का
ू ु
ू ु
गड़

गडाओ ।

राम

-ठ|क है जाओ ।
शाि7 तदे वी भागी भागी घमÞ डीदे वी के घर गयी ।बाहर से घमÞ डी बहन घमÞ डी बहन क| आवाज दे ने
लगी ।
घमÞ डीदे वी भखी शे रनी क|

तरह बाहर आयी और बोल| अ¯ छा त है ।

शाि7 तदे वी-हां बहन म हं । 4 या

बात है त आजकल परे शान रहती है । बहन गाल| दे ने से परे शानी

खc म तो नह|ं होगी । गाल| कह| जाती नह|ं है । लौटकर अपने को ह| लगती है । गाल| दे ने से
आc मा भी अश² द

होती है ।
घमÞ डीदे वी-अ¯ छा तो त समझाने आयी है चोरनी कह|ं क| ।

शाि7 तदे वी-4 या कह रह| हो ?होश म तो हो ?मझे चारे नी कहते हये तमको शरम भी
ु ु

नह|ं आयी ।
भला म और चोरनी ।
घमÞ डीदे वी-हां हां त चोरनी

नह|ं तो और कौन ?मेर| हं सल| चराकर सराह|दार गद न सजा रह| है ।
ु ु ु
चोरनी मझे समझा रह| है ।

शाि7 तदे वी को काटो तो खन

नह|ं । वह बेसध सी घमÞ डी

दे वी क| फटकार सनकर अपने घर क| ओर

दौड पड़ी , बरदौल तक आते आते गश खाकर Îगर पड़ी । कई घÞ टे वह| पड़ी रह| Íकसी को पता
नह|ं चला । काफ| दे र तक वापस न आने पर राम दादा लालटे न लेकर ढढने Îन
ू ू
कले । बरदौल के
Íपछवाड़े शाि7 तदे वी को बेसध पड़ी

दे खकर Îच~ ला उठे । राम क| Îच~ ला

हट सनकर छोटा बेटा रोÍहत

बड़ी बह प* पा


रोते ह दौड़

पड । रोने क| आवाज सनकर दस

-बीस लोग इ4 Ç ठा हो गये । शाि7 तदे वी
को उठाकर लाये और दालान म खÍटया पर लेटा Íदये । कछ दे र म पर| ब1 ती
ु ू
इ4 Ç ठा हो गयी ।
काफ| दे र के बाद शाि7 तदे वी को होश आया ।
सभी उस हादशे को जानने के उc स

क थे िजसके कारण शाि7 तदे वी बेसध हई थी । शाि7 त


दे वी क|
आंखे पथरा गयी थी । उनके कÞ ठ से आवाज ह| नह|ं Îनकल पा रह| थी । बड़ी कोÎशश के बाद
अटक अटक कर घमÞ डीदे वी का अपने माथे मढा इ~ जाम बयान कर पायी ।
रामदादा को जैसे सांप संघ गया शाि7 त
ू ू
दे वी क| बात सनकर । उसके मंह से Îनकल पड़ा
ु ु

घमÞ डीदे वी ने ऐसा कै से कह Íदया ?
मिजयादाद| बोल|-राम दादा और शाि7 त

दे वी को समझाते हए बोल| तम लोग घमÞ डी


दे वी क| बात से
इतने दखी हो । अरे परा गांव जानता है । वह औरत Íकतनी शर|फ और ईमानदार है । Îनरापद पर
ु ू
इ~ जाम लगाते हए उसक| जबान झर कर 4 य|

नह|ं Îगर गयी । दे वी समान औरत के उपर इ~ जाम
लगाकर पाप का भागी बनी है । चोर क| घरवाल| चोरनी तो खद घमÞ डी

दे वी है । दÎनया

जान गयी
है मंधार| बहन क| मनौती का ख1 सी उसका आदमी बाहबÎलय| के साथ Îमलकर काटकर खा गया ।

Íकतनी ओझाई सोखाई हई तो जान बची है ।

इतना कहना था Íक दखौतीकाक| का भे◌ा◌ंप चाल हो गया वह बोल| शाि7 त
ू ू
बहन त Îच7 ता

ना कर
दÎनया चड़ै
ु ु
ल के बारे म जानती है । एक Íदन जFर हं सल| के चोर| से पदा हटे गा । दे खना यह|

घमÞ डी खद अपना Îसर पc थ

र से क¯ े

◌ागी । दÎनया इस मरदमFई के मंह पर थके गी । घमÞ डी
ु ु ू
तो
69
घमÞ डी उसके लड़को ने भी उपgव मचा रखा है । दे खा नह|ं अपने लड़के ◌ा◌ं से रोÍहत को पानी म
पटवाकर Íकतना मरवायी थी । राम

घर पर थे दे ख Îलये नह|ं तो रोÍहत को मार डालते सब
Îमलकर ।शाि7 त बहन त अपनी आदत म बदलाव कर हर Íकसी के दख तकल|फ म कद जाती है ।
ू ु ू
अरे तो इतनी भलमनसत ना Íदखाती तो आज तेरे उपर क|चड़नह|ं फ क पाती ना घमÞ डी । कारे ध ्
पाप है । त+ हा

रे उपर फट पड़ा

घमÞ डी का Hोध ।
राम

-अरे आदमी होने के नाते फज बनता है Íक आदमी के दख म तो काम आये ।

स7 द

र|दे वी-बबआ ठ|क तो कह रहे हो पर आदमी भी तो उस लायक हो । यहां तो आदमी के वेष म

शैतान मौजद है । ईमानदार और नेक इंसान के मंह पर मÇ
ू ु ु
ठ| भर आग मार रहे ह ।
राम

-परा

गांव जानता है इस घमÞ डी का घर बनवाने म हमने 4 या नह|ं Íकया । गांव के बाहबÎलय|

से द° म

नी तक ले Îलया पर घर बनवा कर सांस Îलया । वह| घमÞ डी हमार| बÍढया को आज चोरनी

कह रह| है ।
स7 द

र|दे वी-नेक| का फल जFर Îमलेगा भइया । भगवान के घर भले ह| दे र हो पर अं धेर नह|ं हो
सकती । बबआ एक बात कहं बरा तो
ु ु

नह|ं मानोगे uk?
रामदादा

-घमÞ डीदे वी कह रह| है तो तम भी कह दो जो जी म आये ।

स7 द

र|दे वी-बबआ हम Íदल दखाने के Îलये
ु ु
नह|ं कह रह| हं

uk ।
रामदादा

-कह दे भौजाई । तेर| भी सन लंगा । सबक| तो सन ह| रहा हं
ु ू ु

uk कब से ।
स7 द

र|दे वी-बबआ हर Íकसी के दख तकल|फ म अब मत खड़ा
ु ु
हआ करना । आज से कान पकड़

लो।
रामदादा

-भौजाई आज के जमाने को दे खते हए कह तो सह| रह| हो पर ना मझसे और ना ह| द|न

ु ू
क| महतार| से ह| Íकसी क| तकल|फ दे खा जाती है । बरा तो Íकसी का

नह|ं कर रहे है ना ।
आदमी नेक| नह|ं मानेगा तो 4 या भगवान तो मानेगा ?
स7 द

र|दे वी-दे वरजी त+ हा

र| यह| सोच तो परे गांव म तमको सबसे उपर उठाती है । नासमझ लोग है
ू ु
Íक समझते नह|।
स7 द

र|दे वी शाि7 तदे वी को भर अं कवार उठाते हए बोल| चलो बहन उठो हाथपांव धो लो मन थोड़ा


ठौÍरक हो जायेगा । एकाध रोट| खाकर सो जाओ । घमÞ डीदे वी का अÎभमान जFर चर होकर रहे गा

। स¯ चे इंसान के उपर उगल| उठायी है भ1 म हो जायेगी । घमÞ डी दे वी ने बहत बड़ा

इ~ जाम माथे
मढ Íदया है ।
शाि7 तदे वी क| बह प* पा


लोटे म पानी लेकर आयी सास से बोल| अ+ माजी उठो मं

ह हाथ धो लो
कछ खाकर दवाई खाओ◌े । घमÞ डी

दे वी एक uk हजार इ~ जाम लगाये कर uk तो डर कै सी ?
शाि7 तदे वी-बीÍटया कछ मन

नह|ं कर रहा है ।
प* पा

लोटे से पानी ल| और शाि7 तदे वी का मंह धोकर अपने आंचल से मंह पोछकर मंह म रोट|
ु ु ु
तरकार| ठसने लगी ।

शाि7 तदे वी-बीÍटया तमने तो अपनी कर ल| । अब त भी जा खा ले और आराम कर रात काफ| हो
ु ू
गयी है ।
प* पा

-अ+ मा दवाई तो खा लो ।
70
शाि7 तदे वी-ठ|क है लाओ वह भी जब द1 ती ठस दो

। दे ख न7 हक| रो रह| है जा उसके ◌ा सला ।

मेर| ÍफH ना कर म मरने वाल| नह|ं हं जब तक घमÞ डी

क| हं सल| क| चोर| से पदा नह|ं उठता है

। माथे से इ~ जाम हटते ह| सदा के Îलये सो जाउ◌ू◌ं भगवान ।
प* पा

- अ+ मा कै सी मनौती कर रह| हो । ऐसा ना कहो अ+ मा◌ा कहते हए प* पा


न7 हक| को चप

कराने । वह न7 हक| को चप कराते कराते खद भी सो गयी । उधर शाि7 त
ु ु
दे वी क| आंख से नींद
गायब । राम दादा भी करवटे बदल बदल कर थक गये पर उनसे भी नींद कोसे◌ा◌ं दर । बार बार
ू ू
रामदादा को करवट बदलता दे खकर शाि7 त

दे वी बोल| द|न के बाब नींद
ू ू
नह|ं आ रह| है ।
राम

-कै से नींद आयेगी । चोर| का इतना बड़ा इ~ जाम Îसर पर जो है ।
शाि7 तदे वी-4 य| घबरा रहे हो । चोर| तो हमने Íकया नह|ं है ।
राम

-Íकस Íकस का मंह पकड़े

गे । कल आसपास के गांव| म बात फै ल जायेगी ।
शाि7 तदे वी घमÞ डीदे वी क| हं सल| चोर| हई है तो Íकसी ने जFर चराया है । लेÍकन वह इ~ जा
ु ु

म मे रे
माथे 4 यो मढ द| ?
राम

-राज एक Íदन खल जायेगा

। तम थोड़ी

दे र आंख ब7 द कर सोने क| कोÎशश करो । नींद नह|ं
आयी तो Íदन भर Îसर दखेगा । प* पा
ु ु
4 या 4 या करे गी ? न7 हक| भी तो रोती रहती है आजकल
बहत िजद| हो गयी है । शहर म द|न बेटवा भी दखी होगा यह सब सनकर ।

ू ु ु

शाि7 तदे वी-इ~ जाम माथे आ ह| गया है । जब तक रह1 य से पदा नह|ं हटता है तब तक तो इ~ जाम
क| मÇ

ठ| भर आग म सलगना ह| है ।

घमÞ डीदे वी के हं सल| क| चोर| क| खबर जंगल क| आग क| तरह फै ल गयी । शाि7 त

दे वी ने चोर|
क| है इस बात को कोई मानने को तैयार ना था । धीरे घीरे छः मह|ना Íबत गया पर घमÞ डीदे वी
क| हं सल| क| चोर| का पता

नह|ं चला । एक Íदन है रान परे शान हर| बाब आये रोÍहत से बोले

रोÍहत बाब सोनार क| दकान तक चलो बहत जFर| काम है । रोÍहत
ू ु

-अरे कौन सा इतना जFर|
काम आ धमका हर| बाब ।

हर|बाब

-हं सल| Îगरवी रखना है । Fपये क| सE त

जFरत है ।
रोÍहत हर|बाब के साथ बाजार सोनार क| दकान चले गये । रोÍहत बाब को दे खकर सोनार बोला कै से
ू ु ू
आना हआ डा4 ट

र बाब ।

रोÍहत -हं सल| Îगरवी रखने आया हं ।

से◌ानी- रोÍहत बाब 4 या

बात है आपके गांव का कोई आदमी हं सल| Îगरवी रखता है तो कोई

छड़

वाता है ।
रोÍहत -कौन छड़

वाकर ले गया ?
सोनी-गभF । वह| गभF जो पहले ई4 का हांकते थे ।
हर|बाब

-अ¯ छा तो घमÞ डी काक| क| हं सल| Îगरवी रखी गयी थी । चोर| के इ~ जा

म क| मÇ

ठ| भर
आग काक| के Îसर पर दहक रह| थी अब तक ।
हर|बाब क| हं सल| Îगरवी सोनी ने रखकर Fपये दे Íदये । Fपया लेकर हर|बाब रोÍहत
ू ु ू
बाब को साथ

लेकर Íर° तेदार| म चले गये । इधर रात म गभF सोये हये बड़

बड़ाया हं सल| पआल म 4 य|
ु ु
फ क
रह| है । Îमल गयी हं सल| । चोरनी फ क गयी ।

घमÞ डीदे वी-गभF को जगाते हए बोल| 4 य|

बड़बडा रहे हो। हं सल| तो चोरनी पचा गयी ।

71
गभF-नह|ं पचा सकती । घर क| दे वी सपने ने मझे बतायी है Íक हं सल| पआल के ढे र म ह ।
ु ु ु
चलो दे खते है स¯ चाई 4 या है ?
घमÞ डीदे वी और गभF दोनो पआल के ढे र के पास गये । गभF के पहल| बार म ह| अं कवार म

पआल उठाते हं सल| हाथ म आ गयी । घमÞ डी
ु ु
दे वी झटपट हं सल| को गले म सजा

यी और रात भर
गभF से हं सी Íठठोल| करती रह| । खशी के मारे उसक| आंखे◌ा◌ं से नीद उड़

गयी थी । भोर हो
गयी मगा बोलने लगे । कछ दे र म उजाला हो गया अब 4 या
ु ु
घमÞ डीदे वी शाि7 तदे वी के घर क| ओर
मंह कर गाल| दे ना शF कर द| ।
ु ु

सरज क| पहल| Íकरण के साथ हर|बाब और
ू ू
रोÍहत भी आ गये । घमÞ डीदे वी को गाल| दे ते दे खकर
रोÍहत बोला 4 य| गाल| दे रह| हो काक| ।
घमÞ डीदे वी-4 य| गाल| गोल| जैसे लग रह| है । अपनी चोरनी मां से पछ । भत
ू ू
-मेलान के डर से
हं सल| पआल के ढे र म फे क गयी । वाह रे चोरनी ।
ु ु

रोÍहत -पंचायत म फै सला हो जायेगा । पंचायत बलाने जा रहा हं ।

गांव के 9धान को बलाने के Îलये खद दौड़
ु ु
पड़ा और ब1 ती वाल| को रामदादा बलाने म जट गये ।
ू ु ु
कछ ह| दे र म पंचायत इ4 Ç

ठा हो गयी ।
9धान-घमÞ डी दे वी Îमल गयी त+ हा

र| हं सल| ।

घमÞ डी दे वी-हां बाब चोरनी पआल म फ
ू ु
क गयी थी तो Îमलनी ह| थी। कछ Íदन और रखती तो

मेर| कलदे वी चोरनी शाि7 त

दे वी के पत को ना खा जाती । सc या

नाश क| डर से पआल म रख गयी

। रात म कलदे वी ने सपने म रं जीते के बाब को सपने म बतायी थी। रं जीते के बाब के पआल
ु ू ू ु
उठाते ह| हं सल| नीचे Îगर पड़ी

थी।
9धान-4 या यह| सच है गभF बेटा ।
गभF शाि7 तदे वी का पांव पकड़कर रो◌ेते हए बोला माफ कर दो भौजाई चोरनी त


नह|ं चोर मै हं


मैने शाि7 तदे वी को जीवन भर के Îलये हं सते जE म के सम7 दर म झ|क Íदया ।घरवाल| क| चोर| से
बाप के इलाज के Îलये Îगरवी रख Íदया था । इ4 Ç ठा लोग शाि7 तदे वी क| जय जयकार करने लगे ।
गांव वाल| क| ÷² दा दे खकर शाि7 तदे वी क| आंख| से झराझर मोती झरने लगे ।
1 11 16 66 6- -- -Îरt ता
दÎनया म सबसे बडा कोई Íर° ता

है तो वह है दद का Íर° ता । जानते हए भी आज का आदमी

मतलब के पीछे भागने लगा है । आज के इस यग म परमाथ| लोग तो कम है पर आदÎमयत को

िज7 दा रखे हए है । सेवाराम को Íवचार मंथन म दे खकर ² या

नबाब उनक| तरफ मड़
ू ु
गये और
उनके सामने खड़े हो गये पर सेवाराम बेखबर थे । सेवाराम को बेखबर दे खकर वह जरा उ◌ुची
आवाज म बोले 4 या बात है सेवाराम 4 यो नजरअं दाज कर रहे हो ।
सेवाराम हड़बड़ा कर बोले अरे ² यानबाब आप

?
² यानबाब

-हां मै। कहां खो हए थे ।

सेवाराम-कह| नह|ं बाब । सोच रहा था आज का आदमी िजस तरह से Íर° ते

को रौद रहा है । अगर
ऐसा ह| होता रहा तो आदमी आदमी का ह| नह|ं होगा । आदÎमयत का Íर° ता भी लहलहान हो रहा


है ।
² यानबाब

-आज का आदमी तो बस अपने 1 वाथ म जी रहा है ।
72
सेवाराम-1 वाथ क| बाढ म कह|ं Íर° ते न बह जाय ।
² यानबाब

-सच Îच7 ता का म
ु ् q दा बन गया है Íर° ते का कc ल ।
सेवाराम-ठ|क कह रहे हो आज का आदमी एक दसरे को टोपी पहनाने म

लगा हआ है । Íर° ता

भी
1 वाथ Îसि² द के ◌े Îलये बनाने लगे है ।
² यानबाब

-ऐसे Íर° तेदार तो आदÎमयत का कc ल ह| करे गे ।
सेवाराम-ऐसा ह| हो रहा है । दो साल भर पहले टे कच7 द साहकार Îगड़

Îगड़ाते हए बोले सेवाराम मेर|

मदद कर दो पांच हजार Fपया दे दो बस हफ् ता भर के Îलये । टे कच7 द क| Îगड़Îगड़ाहट के आगे म
मना नह|ं कर पाया नेकच7 द से उधार लेकर Íदया था । टे कच7 द ने दो साल म कभी सौ कभी
प¯ चास ऐसे रो रोकर Íदया Íक पता ह| नह|ं चला । जबÍक मझे नेकच7 द

को एकम° त

हफ् ते भर
के अ7 दर दे ना पड़ा था । टे कच7 द को एक अखबार वाले को प¯ चास सौ Fपया दे ना है । एक
Íव7ापन छपवा Îलये है ◌े अपनी दकान का । अखबार वाला मेरे साथी आज पांच साल से अÎध हो

गया पैसा नह|ं Íदये । जब मांगो तो टाल जाते ह टे कच7 द आजकल क| कहकर । अखबार वाले से
मेरा Íर° ता पैसे क| वजह से खराब कर Íदये ।
² यानबाब

-टे कच7 द साहकार तो इनक| टोपी उनको उनक| उनको पहनाने म माÍहर है । उसे Íर° ते

से
4 या लेना । वो बस सौदागर है ।सेवाराम 4 य| झांसे म आ जाते है 1 वाÎथ य| के ।
सेवाराम-बाब हम तो Íर° ते

के सोधेपन के भख है । आदमी म आदÎमयत का भाव ढढते र
ू ू
हते है ।
परमाथ म असीम आन7 द है पर मतलबी लोग है Íक घाव दे जाते है । सभी टे कच7 द साहकार जैसे

नह|ं होते ² यानबाब।

² यानबाब

-वो समीर भी तो तमको ठग गया । उसे तम भाई मानते थे । कई साल| तक अपने घर
ु ु
म रखे । त+ हा

र| वजह से कामयाब आदमी बना है पर त+ हे

एहसान के बदले 4 या Íदया बदनामी
और Íर° ते को मÇ

ठ| भर आग का दहकता घाव ना ।
सेवाराम-समीर खश है अपने कामयाबी पर । भले ह| मझे Íर° ता
ु ु
घाव दे गया पर आपको हक|कत
मालम है ना । आप मे र| नेक| को हवा दे रहे हो ना 4 या

यह कम है ?दÎनया म अभी Íर° ते

का
मान रखने वाले लखन और बलदे व दे वता Íक1 म के लोग है ² यान बाब ।

² यानबाब

-कहां ऐसे लोग Îमल गये सेवाराम ?
सेवाराम- Íद~ ल| म जब साला कौशल जब डे ग क| चपेट म था । मौत के मंह म से Îनकला है
ू ु
लखन भईया क| वजह से । प7 gह साल पहले मां क सर से जझ कर मर| औ

र Íपता साल भर
पहले फे फडा गल जाने क| वजह से ।
² यानबाब

-ये लखन दे व कौन है ?
सेवाराम-बलदे व इंजीÎनयर है पर तकद|र ठगी जा जक| है Íकसी शाप पर काम करता है और लखन

क| नौकर| छट गयी है जो अब चौक|दार क| नौकर करके पÍरवार पाल रहे है । यह| तो है वे◌े◌े ◌े

फÍर° ते जो झोपड़पÇ ट| म और तकल|फ के सम7 दर म डबकर भी Íर° ते

पर मर Îमटने को तै यार
रहते है ।
² यानबाब

-वो कै से ?
सेवाराम-बाब कौशल क| जान लखन भईया क| वजह से बची है । जब पास के नÎस गहोम वालो ने

हाथ खड़ा कर Îलये तो लखनभईया Íद~ ल| के एक बडे

नÎस गं होम म कौशल को मरणास7 न
73
ि1 थÎत म ले गये । वहां डा4 टर ने प¯ चास हजार Fपये जमा करवाने को और दस बोतल खन

तर7 त

दे ने को कहा गया।
लखन-डां4 टर साहब म प¯ चास नह|ं साठ हजार अभी जमा कर दं गा भले मझे बाद म अपना क¯ चा
ू ु

घर बेचना पडे । खन भी दे दं गा अपने तन को
ू ू
Îनचोड़कर पर गारÞ ट| दो Íक मेरे भाई को कछ

नह|ं
होगा ।
डा4 टर-कोई गरÞ ट| नह|ं । बचे गा तो अपनी Íक1 मत से या मरे गा तो अपनी मौत से ।
लखन-डा4 टर साहब आप कसाई है 4 या ?
बलदे व-भईया सब ध7 धा है । चलो अब सरकार| अ1 पताल ले चले Íक1 मत पर ह| भरोसा करना है ।
लखन और बलदे व कौशल को लोÍहया अ1 पताल म ले गये बड़ी नाजक ि1 थ

Îत थी पर डा4 टर| और
1 टाफ ने बहत सहानभÎत Íदखायी कौशल को आपातकाल|न कH म रखा गया जबÍक एक पलंग पर

ु ू
तीन तीन डे ग पीÍड
ू ़ त थे और Íद~ ल| डे ग महामार| बन हआ था । लखन और बलदे व ने अपना


-
अपना खन Íदया। रे डHास सोसाइट| से खन म खद ले कर आया था ।
ू ू ु

² यानबाब

-जब डे ग का आतंक था तब Íद~ ल|

म थे 4 या ?
सेवाराम-कौशल के लोÍहया अ1 पताल म भत| होने के बाद खबर लगी थी । पÎत-पc नी तर7 त


Îनकल गये थे । दसरे Íदन दोपहर म अ1 प

ताल पहं चे थे।

अ1 पताल तो मरघट बना हआ था ।

दे खकर हम घबरा गये हमार| मैडम को तो रो रोकर वैसे ह| बरा हाल था ।

² यानबाब

-सच डे गं ने तो Íद~ ल|

पर कहर बरसा Íदया । हम तो अखबार म पढकर रो पड़े थे । िजन
लोगो ने यह हादशा दे खा होगा तो उनका हाल सोच कर कं पकपी छट जाती है ।

सेवाराम-कौशल क| जान बच गयी । लखन और बलदे व दे वदत साÍबत हए कौशल के Îलये ।

² यानबाब

-सच लखन और बलदे व ने आदमी होने का फज बडी ़ ईमानदार| से Îनभाया । इंसाÎनयत के
Íर° ते को अपने लह से सींचा । बहत बड़ा
ू ु
काम Íकये दोनो । एक पÍरवार Íबखरने से बच गया ।
सेवाराम-छोटे छोटे दो ब¯ चे है बीबी है । कछ हो जाता सब अनाथ हो जाते । आज के जमाने म तो

सगे भी दर होते जा रहे है । कौन Íकसका पेट

-परदा चलायेगा ? कछ लोग तो मीठ| मीठ| बाते

करते है Îसफ मतलब के Îलये । जहां मतलब Îनकला खं जर कर मार कर मÇ

ठ| भर आग और
डाल Íदये ताÍक तडपते रहो ।
² यानबाब

-लोग बहत मतलबी हो गये है जबÍक सब जानते है आदमी मÇ


ठ| बांधकर आया है हाथ
फै लाये जायेगा ,इसके बाद भी छल,धोखा,जालसाजी,अc याचार,शोFण,दोहन यहां तक दे ह ¯ यासपार
अं ग ¯ यार तक करने लगा है आजका आदमी । आज आदमी 1 वाथ म गले तक डब गया

है ।
सेवाराम-अब तो मान मयादा पर भी 1 वाथ ने दहकता Îनशान छोड़ना शF कर Íदया है । पÎत

-पc नी
का च|च लड़ी मामला कोट म । तलाक तक हो जा रहे है ।दहे ज दानव क| फफकार तो आज के यग
ु ु
म और डराने लगी है । कभी लोग Íर° ते पर मर Îमटते थे आज 1 वाथ के Îलये गला काटने के Îलये
तैयार है । अरे मां -बाप िजसे धरती का भगवान कहते है वे जीवन क| सां² य बेला म व² दा

÷म /
अनाथ आ^रम का पता पछते सड़

क पर भटक रहे है । Íर° ते क| बÎगया म जैसे पतझड आ गया है
। Íर° ते क| बÎगया के फल कब ÍखलÍखलायेगे

?
74
² यानबाब

- पा° चाc य सं1 क

Îत का जहर हमार| सं1 क

Îत को ले डबेगा । हमारे दे श म अÎतÎथ

दे वो भवः मांता-Íपता धरती के भगवान है आÍद ऐसे अनेक Íर° ते के सोधेपन ÍखलÍखलाते थे पर
आज पा° चाc य सं1 क

Îत ने 1 वाथ क| आग म झोक Íदया है जैसे ।
सेवाराम-वै° वीकरण के जमाने म आदमी Îसफ अपने Îलये जी रहा है । Íबरले ह| लखन,बलदे व,अÎनल
और उसक| घरवाल| जैसे लोग है ।
² यानबाब

-अÎनल और उसक| घरवाल| बीच म कहां से आ गये ।
सेवाराम-अÎनल और उसक| घरवल|,बलदे वक| घरवाल| और लखन भईया क| घरवाल| सभी ने कौशल
क| बीमार| म रात Íदन एक कर Íदया था ।ऐसे लोग इंसाÎनयत को िज7 दा रख सकते है ।
इंसाÎनयत का Íर° ता कभी नह|ं मरे गा जब तक Îगने चने लोग बचे है आदमी के आसं का मोल
ु ू
समझने वाले ।
² यानबाब

- धनी-गर|ब का, माÎलक-मजदर का

, अफसर- कम चार| का जाÎत-Íबरादर| का आÍद ऐसे
बहत कांटे आदÎमयत क| छाती म छे द क

र रहे है । सामािजक बराईयां तो और ह| मानवीय Íर° ते


को तार तार कर रह| है ।
सेवाराम-सामािजक बराईयां मानवीय संवदे ना का नाश कर रह| है । आदमी

-आदमी के बीच नफरत
क| खाई खोदती है ,िजससे अब आदमी आदमी को नह|ं होता है । पद दौलत और जाÎत क| ÷े* ठता
का खलेआम 9दश

न होने लगा है । ये सब तो आदÎमयत के Íर° ते के Îलये Íकसी घातक जहर से
कम नह|ं ।
² यानबाब

-ठ|क कह रहे सेवाराम पर नाउ+ मीद होने क| जFरत नह|ं है । दे खो Íद~ ल| म कछ लोग

पHी और आदमी के बीच Íर° ता जोड़रहे है । Íद~ ल| का पHी अ1 पताल दÎनया म Îमशा

ल है ।
सेवाराम-बाब ऐसी उ◌ू◌ंची सोच हो जाये तो Íफर ये लटखसोट
ू ू
,Íर° वतखोर|,भदे भाव सब खc म हो
जाये।मझ जैसे को हर पल हं सते जE म

न Îमले पर 4 या यहां तो जE म के साथ जीना है ।
अमा◌ुनष और 1 वाथ| Íक1 म के लोग मÇ

ठ| भर आग बोते रहे गे। दे खो त+ हा

रे पड़ोसी मकान न+ बर
चौदह म रहने वाला य

एनककरकाटव पड़ो
ु ू
Îसय| के घर म ताकझाक करता Íफरता है ।दसर| क|

बीन बेÍटय| को बर| नजर से दे खता है । बर| ÎनयÎत से पड़ो
ु ु
सी के घर तक म घस रहा था ।

पड़ोसी क| इ7 जत बच गयी । राह चलती मÍहलाओं तक को छे ड़ता है । कहते है पड़ोसी भगवान
होता है । य

एनककरकाटव पÍरवार तो शैतान से कम
ु ू
नह|ं है । ऐसे लोग Íर° ते का खन ह| करते है


² यानबाब

-ऐसे लोग मानवता के Îलये कोढ क| खाझ है । ऐसे लोग Íर° ता क| गÍरमा 4 या समझे गे
? इनका सामÍहक

-सामािजक बÍह¯ कार होना चाÍहये । Íर° ते क| आन तो रामलखन,बलदे व,अÎनल
और ऐसे लोग होते है जो Íर° ते को सq भावना,संवेदना का अमतपान कराते है ।

से◌ेवाराम-ठ|क कह रहे हो बाब ऐसे लोगो ने इं साÎनयत को िज7 दा

रखा है । य

एनककरकाटव
ु ू
पÍरवार जैसे लोग तो मानवता और पड़ोसी के Íर° ते के Îलये नासर है ।

² यानबाब

-हां सच है । सना है त+ हा
ु ु
रे एक Íर° ते पर दै वीय पहाड़◌़ टट गया है ।

सेवाराम-बाबराम फफाजी मर गये । बाब Íर° ता
ू ू ू
टटा

नह|ं है । मेरे फफाजी मरे है । दÎनया भर के
ू ु
नह|ं ।
² यानबाब

-ठ|क कह रहे हो । ये Íर° ते तो अमर है िजस पर पÍरवार और समाज जीवन पाता है ।
75
सेवाराम-बाब हमारे यहां तो फफाजी का Íर° ता
ू ू
बहत स+ मा

Îनत होता है ।
² यानबाब

- फफा और मामा का Íर° ता

बहत नजद|क| का और पÍव³ Íर° ता

होता है । जीवन मरण
तो 9भ के हाथ म है । Íर° ते

का सोधापन तो सदा हवा म समाया रहता है । अपनेपन और
मानवता को जीÍवत रखता है । कछ लोग तो बस खद के Îलये Íर° ते
ु ु
जोड़ते है । मतलब Îनकलते
ह| Íदल के टकड़े

कर दे ते है ।कछ लोग Íर° ते

को उ◌ू◌ंचाई दे कर अमर हो जाते है । हम िजस क|
पजा करते है । वे भी तो हमारे जैसे थे । िजनके साथ आज आदमी और भगवान अथवा दे वता का

Íर° ता कायम हो गया है 4 य|Íक वे आदÎमयत के Íर° ते का इÎतहास रचा है ।
सेवाराम-ठ|क कह रहे हो बाब आदÎमयत का Íर° ता

तो सव ÷े* ठ और महान है ।
² यानबाब

-आदमी को धमवाद,जाÎतवाद,छोटे -बडे

के भेद,अमीर-गर|ब क| खाई को पाटकर ,आदमी के
सख

-दख म काम आकर आदÎमयत के Íर° ते

को अÎधक 9गाढ बनाने का बीड़ा उठाना चाÍहये ।
Íर° ते का सोधापन समय के आरपार 9वाÍहत होता है सेवाराम ।
सेवाराम-आओ हम सब आदÎमयत के Íर° ते को धम बनाने क| कसम खाये 4 य|Íक आदÎमयत ह|
सबसे बडा धम और सबसे बड़ा कोई Íरशत जगत म है तो दद का। इस यथाशि4 त Îनवाह करने
वाले लोग स¯ चे आदमी कहलाने के हकदार होते है ।
सेवाराम क| ललकार सनते ² या

नबाब सÍहत

सभी लोग एक 1 वर म बोले आदÎमयत के Íर° ते के
हं सते जE म पीना कोई गनाह

नह|ं ।
1 11 17 77 7- -- -जलसा
क+ पनी क| आधारÎशला रखने के साथ 1 थापना Íदवस मनाने का 9चलन शF हो

गया था । ज° न
दे श के हर छोट बड़े दफतरो म मनाया जाने लगा था बकायदा क+ पनी इसके Îलये बजट दे ती थी ।
एक Íवशे षता तो यह भी थी Íक क+ पनी म कम चाÍरय| और अÎधकाÍरय| म Íबना भेद के 9Îत
¯ यि4 त बजट का 9ावधान होता था। इस ज° न म कम चार| ,अÎधकार| और उनका पÍरवार बढ-चढ
कर भाग लेता था । यह ज° न तो क+ पनी के सभी कम चाÍरय| के Îलये एक c यौहार हो गया था ।
ब¯ चे तो जलसे के मह|ने भर पहले से ह| तैयार| म लग जाते थे । छोटे कम चाÍरय| के ब¯ च| के
Îलये तो यह जलसे जैसा होता था । परा पाÍरवाÍरक माहौल बन जा

ता था । सभी लोग Íबना Íकसी
भेदभाव के आन7 द उठाते◌े थे । कम चार| और उनके पÍरवार के लोग सां1 क

Îतक म बढ-चढकर भाग
लेते थे । इस उc सव म ऐसा लगता था Íक मानो साल भर क| भागमभाग के फार|क होकर सभी
कम चार| पाÍरवाÍरक माहौल म छÇ

ट| मना रहे हो । क+ पनी का यह जलसा Íकसी 9Îस² द ÍपकÎनक
1 पांट अथवा अ¯ छे होटल म आयोिजत होता था । इस जलसे को Íवभाग 9मख हं समख साहब और
ु ु
अÎधक पाÍरवाÍरक बना दे ते थे । जब तक वे क+ पनी के शाखा 9मख रहे तब तक छोटे कमचाÍरय|

के पÍरवार को घर से लाने और जलसा क| समा◌ाि¯ त के बाद घर तक छोड़ने का िज+ मा बड़ी
िज+ मेदार| के साथ Îनभाते थे । कई बरसो बाद हं समख साहब का 1 था

ना7 तरण हो गया । उनक|
जगह पर लाभच7 द साहब आ गये । लाभच7 द साहब के 7 वाइन करते ह| क+ पनी के 1 थापना Íदवस
आ गया । लाभच7 द साहब गमचप जलसे क| घोषणा शHवार को
ु ु ु
शाम को दे र से कर तो कर द|
पर छोटे कम चाÍरय| को भनक तक नह|ं पड़ने द| ।यह खबर Íकसी तरह चपरासी बहकद|न तक

पहं च गयी । वह स7 तो

षबाब

से बोला-बडे

बाब आज के बाद दो Íदन क| छÇ
ू ु
ट| पड़रह| है ।
76
स7 तोषबाब

- हां शÎनवार रÍववार क| छÇ

ट| तो पहले से होती आ रह| है ।इसम नई बात 4 या
है ।
बहकद|न

-है uk
स7 तोष-तम इंसीडे Þ ट

ल क| बात कर रहे हो । अरे भाई इंसीडे Þ टल और ओवर टाइम तो खास लोग|
के Îलये होता है । हं समख साहब ने काम तो खब करवाये पर इंसीडे Þ ट
ु ू
ल और ओवर टाइम चहे तो
को Íदये । हम तो पहले से पेट पर पÇ ट| बांधे हए है । आंख म आंस भरे हए है और मेर| यो¹ य
ु ु

ता
पर वHपात हो रहा है । म नये साहब से भी कोई उ+ मीद नह|ं करता । बस अपना काम ईमानदार|
से करता रहं गा ।

बहद|न

- सोमवार को क+ पनी का वाÍषक जलसा मनने वाला है । आप तो जानते ह| हो Íक साहब
लोग इकc तीस माच के पहले कभी भी मना सकते है । बजट को उपभोग करना जो होता है ।
स7 तोष-सब बात तमको कै से मालम पड़
ु ू
जाती है ।
बहकद|न

- ]ाइवर,चपरासी और घर म काम करने वाल| बाई से कछ

नह|ं Îछप सकता लाख कोई
Îछपाये बड़े बाब।

स7 तोष-वाÍष क जलसे म Îछपाने जैसी 4 या बात है ।
बहकद|न

-है तभी तो Íकसी छोटे कम चार| को मालम

नह|ं है । ÎचÇ ठ| भी नह|ं जायेगी सभी फ|~ उ
अफसर| को फोन पर खबर पहं चे गी । छोटे कम चाÍरय| को दर रखे जाने क| सािजश रची जा रह|


है ।
स7 तोष-तमको कोई गलतफहमी हो गयी है बहकद|न ।
ु ु

बहकद|न

-नह|ं बड़े बाब । कोई गलतफहमी

नह|ं है । लाभच7 दसाहब Îसफ अफसर| को बलाना चाहते

है । छोटे कम चाÍरय| को दर रखना चाहते है । गै प मेनटे न जो करना है ।

स7 तोष-4 या ?कह रहे हो मेर| तो कछ भी समझ म

नह|ं आ रहा है ।
बहकद|न

-सोमवार को समझ म आ जायेगा आÍफस आने पर
स7 तोष-4 या मालम पड़

जायेगा?
बहकद|न

-स¯ चाई
स7 तोष-यार साहब ने मझे बताया तो है नह|ं । ऐसे कै से जलसा आयोिजत हो जायेगा । ब¯ चे

तो
सबह 1 क
ु ू
ल चले जायेगे । पc नी क| तÍबयत खराब है तम सभी जानते हो चलना Íफरना बड़ी


मि° क

ल से हो पाता है । कै से ब¯ चे आयेगे ।
बहकद|न

-लाभच7 द साहब और उनके चममचे यह| चाहते है Íक छोटे कमचार| और न उनके ब¯ चे
जलसे म शाÎमल हो पाये । सोमवार को आÍफस खलने पर सÎचत तो करे गे ताÍक छोटे कम चार|
ु ू
अछत| क| तरह जलसे से दर रहे
ू ू
,जानते है uk बड़े बाब

?
स7 तोष-4 या?
बहकद|न

-इ~ जाम भी आपके Îसर आने वाला है ।
स7 तोष-यार तम मझे 4 य|
ु ु
भड़का रहा है ।
बहकद|न

-भड़का नह|ं सह| कह रहा हं अपने जाससी कान| क| कसम । गाज तो बड़े


बाब तम पर
ू ु
Îगरने वाल| है । सावधान रहना ।
77
स7 तोष-4 या गाज Îगरे गी । हम ओवर टाइम और इंसीडे Þ टल से कोई लगाव नह|ं है । जFरत
पड़े गी तो आकर काम कर दं गा क+ प

नी के Îलये बस ।
बहकद|न

-यह| वफादर| तो गाज का कारण बनने वाल| है ।वैसे भी ये साहब अपने वाल| को 7 यादा
तव7 जो दे ते है । जब से आये है तब से दाF के कये म कद
ु ू
-कद कर ज° न

ह| तो मना रहे है ।यह
ज° न Fतबेदार तभी होगा जब छोटे लोग जी हजर| करे च+ म

च| क| तरह । जो कछ कह रहा हं


सनी सनाई ह|
ु ु
नह|ं खं जांचीबाब भी ÍवHय अÎधकार| से बÎतया रहे थे इसी बारे म । सोमवार को

आÍफÎसयल| छोटे लोगो को सÎचत Íकया जायेगा ताÍक छोटे लोग सपÍरवार

नह|ं पहं च पाये । दे ख

ना
सोमवार को यह| होगा ।
स7 तोष-अरे नह|ं बहकद|न इतने बड़े

बड़े साहब लोग भला ऐसा सोच सकते है 4 या ? तमको कोई

गलतफहमी हई है ।

बहकद|न

-4 य| इतने भोले बन रहे हो बडे बाब सबसे 7 या

दा तो आपके साथ भेदभाव होता है ।
दे खना म जो कह रहा हं वह| होने वाला है ।

हमारे और आपके ब¯ चे जलसे म नह|ं जा पाये गे
।दफतर क| गाड़ी म तो साहब और उनका पÍरवार जायेगा । दफतर क| गाडी साहब के Îलये चौबीस
घÞ टे के Îलये Íरजव है । हम जैसे छोटे लोग तो भर आंख दे ख भी नह|ं सकते । बाक| लोग| का
इ7 टाइटलमेÞ ट है çवेल से कार बला लेगे

हम और आप साइÍकल से जायेगे 4 या ? परा पÍरवार

लेकर वह भी शहर से प¯ चीस Íकलोमीटर दर ।

स7 तोष-Îच7 ता मत करो साहब सबके Îलये ¯ यव1 था कर गे । ऐसा भेदभाव नह|ं करे ग । अरे हमारे
नाम का भी पैसा तो क+ पनी ने Íदया है Îसफ साहब लोगे◌ा◌ं के Îलये थोडे ह| 1 थापना Íदवस का
जलसा आयोिजत होता है ।
बहकद|न

- मझे जहां तक जानकार| है लाभच7 द

साहब Îसफ अÎधकार| वग को जलसे म शाÎमल
करना चाहते है । हं समखसाहब जैसे छोटे बड़े

सबको साथ म लेकर नये साहब नह|ं लेकर चलने
वाले । पराने E या

लात के लगते है । पराने E या

लात के लोग Íकतने खतरनाक होते है वंÎचत| के
Îलये।बड़े बाब ये 4 यो

भल जाते हो आप भी उसी वंÎचत समाज से आते हो । आपके Íखलाफ Íकतने

षणय7 ³ रचे गये और रचे जा रहे है Îनर7 तर यहां 4 या आप भल गये ।

स7 तोष-ऐसी बाते मत करो बहकद|न । पढे Îलखे हो उ¯ च

Íवचार रखो । कांटे बोने वाल| के Îलये
फल बोओ बाक| सब भल जाओ। अ¯ छा
ू ू
ई के बारे म सोचे बर| c या

गो बहकद|न । अभी जलसे क|

कोई चचा नह|ं है । सोमवार को ज° न कै से मन पायेगा । मझे तो

नह|ं लगता । बहकद|न जब भी

जलसा आयोिजत होगा हमारे त+ हा

रे और सभी के ब¯ चे शाÎमल होगे क+ पनी के जलसे म । यÍद
त+ हा

र| बात सह| हई तो सचमच म छोटे कम चाÍरय| के साथ अ7 या


य होगा ।
बहकद|न

-अ7 याय तो होकर रहे गी 4 योÍक हवा लाभच7 द साहब के 7 वाइन करते ह| Íवपर|त चलने
लगी है खासकर छोटे और शोÍषत कम चाÍरय| के स7 तोषबाब । आप मेर| बा

त मान भी तो नह|ं
सकते 4 य|Íक आपका दजा मझसे थोड़ा

उ◌ु◌ंचा जो है ।
स7 तोष-बहकद|न तम भी कम चार| हो म भी । ठ|क है म बाब हं तम चपरासी हो बस इतना सा
ु ु ू ु

फक है ।
बहकद|न

- साहब लोग तो इससे उपर सोच रहे है ना ।कम चाÍरय| और अÎधकाÍरय| म गैप मे7 टे न
करना चाहते है । शFआत तो बहत पहले से हो गयी है । आप तो भेद क| तलवार हर चहरे पर


78
तनी Íदखने लगी है । खै र बहत बात हो गयी ।

इस बारे म Íकसी से कछ कहना

नह|ं । नह|ं तो
म तारगेट हो जाउ◌ू◌ंगा ।ज° न तो सोमवार को ह| मनेगा यह भी नोट कर लेना ।
स7 तोष-इतना अ7 याय तो नह|ं होगा बहकद|न ।

बहकद|न

-होगा मेर| बात 4 ये◌ा◌ं नह|ं मानते । पराने सारे अ7 या

य भल गये 4 या

?
स7 तोष-हां । कल का सरज खशी लेकर आयेगा ।
ू ु

बहकद|न

-सोचने और हक|कत म अ7 तर है ।अपने दफतर म यह अ7 तर Îसर चढ़क बोलने लगा है ।
स7 तोष-दे खते है सोमवार को 4 या होता है ?अब मझे काम कर लेने दो ।बहत काम है । दे खो इतनी


सार| Íरप|ट बनानी है और टाइप भी करनी होगी ।
बहकद|न

-करो बाब अरमान| क| बÎल चढाकर । इन लोग| को खश नह|ं कर पाओगे Íकतन| रात
ू ु
Íदन एक कर दो । शÎनवार और रÍव◌ार क| छटट| है । असÎलयत से तो सोमवा

र को FबF हो
पाओगे स7 तोष बाब ।

स7 तोष-इ7 तजार कFं गा और भगवान से 9ाथ ना भी Íक सब कछ अ¯ छा

हो ।
शÎनवार और रÍववार क| छÍÇ

टयां खc म हो गयी । सोमवार के Íदन स7 तोष दफतर पहं चा दोपहर के

खाने क| ÍटÍफन लेकर । ¹ यारह बजे तक स7 तोष को भनक तक नह|ं लगने पायी पर अ7 दर -
अ7 दर सार| तैयाÍरयां चल रह| थी । शÎनवार और रÍव◌ार क| छÍÇ

टय| मे◌े◌ं ब¯ च| के खेल Íखलौने
एवं ÎगफÇ आÍद के नाम पर अ¯ छ| खर|दार| और कमाई भी लाभच7 दसाहब के च+ मच| ने क| । दो
Íदन क| छÇ

ट| का इंसीडे Þ टल भी Îलये । खै र ओवरटाइम और दसरे

अ7 य फायद| से स7 त|ष को
पहले से ह| दर रखे जाने का षणय7 ³

था पर काम तो करना ह| पड़ता था आंख| म आस Îछपा कर

। स7 तोष काम म लगा हआ था इतने म बहकद|न पानी का Îगलास टे बल पर पटकते हए बोला लो
ु ु

बड़े बाब पानी पी लो ।

स7 तोष-पानी Íपला रहे हो या टे बल तोड़रहे हो ।
बहकद|न

-बडे

बाब Íदमाग बहत खराब है अभी ।

स7 तोष-4 य| ।
बहकद|न

-क+ पनी क| 1 थापना के जलसे का आयोजन आज हो रहा है uk । मेरे ब¯ चे कै से जायेगे ।
सब 1 क

ल गये है । म खद ÍटÍफन लेकर आया हं ।होटल चांद शहर से बीस Íकलोमीटर दर है ।
ु ू

कै से पहं च सकता हं ।
ु ू

स7 तोष-4 या? म भी ÍटÍफन लेकर आया हं ।मेरे ब¯ चे

भी 1 क

ल गये है । ये कै सा जलसा है ।
इतने म लाभच7 द साहब कालबेल पर जैसे बैठ गये बहकद|न भागा भागा गया ।

साहब-बहकद|न होटल चांद म आ जाना कछ दे र म । टाइÍप1 ट
ु ु
4 या नाम है उसका ?
बहकद|न

-बड़े बाब का नाम ।

साहब-हां वह| त+ हा

रे बड़े बाब ।

बहकद|न

-स7 तोष बाब

साहब-हां । स7 तोषउसको भी बोल दे ना । लंच तम लोग वह| कर लेना ।

बहकद|न

-कोई 9ो0ाम है होटल चांद म साहब ?
साहब-हां क+ पनी के 1 थापना Íदवस का जलसा मन रहा है uk आज ।
बहकद|न

-4 या ?
79
साहब-मंह 4 य|

फाड़ रहे हो । जाओ बड़े बाब को

बलाकर लाओ ।

बहकद|न

-साहब के ह4 म

का ताÎमल Íकया ।
स7 तोष साहब के सामने हािजर हआ । साहब उसको दे खकर बोले 4 य|

स7 तोषबाब जलसे म

नह|ं
चल रहे हो 4 या ?
स7 तोष-कै सा जलसा सर
साहब-4 य| खं जाची साहब ने तमको

नह|ं बताया था ? 4 या तमको ये भी पता

नह|ं सभी कम चार|
सपÍरवार इस जलसे म शाÎमल होते है ।
स7 तोष-सभी सपÍरवार शाÎमल होते है यह तो मालम है पर ये तो

नह|ं मालम था Íक अभी ¹ या

रह
बजे जलसे का आयोजन हो रहा है । वह भी शहर बीस Íकलोमीटर दर पहाड़ो

के बीच म ।
साहब-अब तो मालम हो गया ना

? आने का मन बने तो जाना नह|ं तो दफतर का काम दे खो
कहते हए लाभच7 द

साहब ससि7 ज

त कार म बैठ गये कार पहाड़| के बीच ि1 थत चांद होटल क|
और दौड़पड़ी और उसके पीछे दसरे अफसर| के कार| का

काÍफला भी । अब स7 तोष बाब के सामने

Îसर धनने के Îसवाय और कोई रा1 ता

न था ।
बहकद|न

- बड़े बाब 4 य|

Îसर पर हाथ रखकर बै ठे हो। शाम छः बजे तक काम Îनपटाओ और घर
जाओ साहब यह| कहकर गये है ना । वाह रे साहब छोटे कमचाÍरय| का हक मार कर बोतले
तोड़े गे,ठमका लगा

येगे । ये कै से साहब लोग है जो H* टाचार को पोष रहे है ?कमजोर कम चाÍरय| के
Íहत दबोच रहे है । शे ◌ाÍषत / कमजोर कम चाÍरय| के Íहत| क| रHा साम7 तवाद| सोच के साहब
लोग कै से होने दे गे ? दे खो स7 तोष बाब म तो अब जा रहा हं । लंच करने का मन


नह|ं हो रहा
है ,मझे Îनकाह म जाना है । चाभी रख| । ब7 द

कर दे ना । तकल|फ तो होगी पर सबह थोड़ा

ज~ द|
आ जाना । झाड वाल| नौ बजे आती है ना ।

स7 तोष-ठ|क है । मझे तो बैठना ह| होगा वरना कोई इ~ जा

म Îसर आ जाये गा ।
बेचारे स7 तोषबाब सायं साढे छः बजे तक दफतर म काम करते

रहे । साढे सात बजे घर पहं चे ।

पापा के आने क| आहट से बडी बीÍटया बाहर आयी । स7 तोषबाब के हाथ से ÍटÍफन थामते हए


बोल| पापा आपक| क+ पनी का सालाना जलसा कब होगा ? स7 तोषबाब क| जीभ तलवे से Îचपक

गयी इतना बोल पाया Íक कब तक जलना होगा मÇ

ठ| भर आग म और अचे त होकर खÍटया पर
Îगर पड़े धड़ाम से ।
1 11 18 88 8- -- -पथराव
Îमसेज दयावती-शहर क| Fह तो छलनी कर Íदया उपgÍवय| ने ।चार मर गये परे शहर म कफ
ू ् य

लग गया । उपgÍवय| ने परे शहर को Îसर पर उठा Îलया है ।ये दे खो अखबार भी लहलहान हो रहा
ू ु

है । अखबार म छपी त1 वीर म कै से लोग आमने सामने से एक दसरे पर पc थ

र फे क रहे ह । गोल|
चल रह| है । बम फ के जा रहे है । ये कै सा पथराव है एक दसरे क| जान लेने के Îलये धम के नाम

पर ।
Îम1 टर दे वान7 द-त1 वीर से Fह का◌ा◌ंप रह| है । कल उपgव और पथराव क| वजह से तो दफ् तर
ज~ द| ब7 द हआ था

। Íकसी तरह से जान बचाकर आया था परे शहर म भगदड मची हई थी ।


एक समदाय दसरे पर टट रहा था जैसे कc ते
ु ू ू ु
टटते है एक दसरे पर । शहर जल रहा है । लोग| के
ू ू
घर जल रहे ह । ब¯ चे भख से Íबलख रहे ह । शहर क| गÎलयां खन म नहायी हई ह ।उपgÍवय|
ू ू

80
का कोई धम नह|ं होता । ये लोग नंगे लोग होते ह । धम के नाम खन बहाते है । अपना

मतलब साधते है । ये मौकापर1 त लोग लह पी कर पलते है । Íवष बीज बोते है । आग से सींचते

है । ये लोग दे श और समाज के अि1 मता से खेलते ह । र7 ज

क| म+ मी उपgÍवय| का कोई मजहब
नह|ं होता। कोई मजहब आपस म लडना नह|ं सीखाता। अपयश मजहब के माथे 4 य| ?
Îमसेज दयावती◌ा-ये लो चाय पी लो । गैस भी खc म होने वाल| है । दध भी अब

नह|ं है ।अगर
ऐसे ह| शहर आतंक के साये म रहा तो आंस पीकर Íदन गजारने पडे गे । बडी मि° क
ू ु ु
ल से तो साHी
बीÍटया ने चाय बनायी है पी लो
Îम1 टर दे वान7 द-चाय का ¯ याला उठाते हए बोलो आज तो चाय Îमल रह| है कल दे खो 4 या

होता है
?
इतने म Îमसेजदयावती Îच~ लाकर बोल| अरे साHी के पापा वो दे खो पÎलस क| गाडी सायरन बजाते

हए अपने घर क| ओर आ रह| है । लोग भेड बकर| क| तरह भाग

रहे ह ।
साHी-म+ मी वो सामने क| दध क| दकान भी ब7 द
ू ु
हो गयी दस Îमनट पहले ह| तो खल| थी ।

Îमसेज दयावती -बेट| दध तो Îमल जायेगा । पहले िज7 द

गी सह| सलामत तो बची रहे ।
न7 हा 9तीक घबराकर बोला म+ मी-आतंकवाद| लोग अपने घर पर तो हमला नह|ं करे गे ।
संखी-भइया तम घर म हो घर म कोई कै से घसेगा ।हम अ7 द
ु ु
र बाहर ताला लगा लेगे ।
Îमसेज दयावती-बेट| साHी 9तीक को अ7 दर ले जाओ । कोइ◌्रर काट न Íफ~ म ् ू
लगा दो दे खता
रहे गा ।
साHी-ठ|क है म+ मी
Îम1 टर दे वान7 दा-रं ज क| म+ मी

सावधान रहना । उपgÍवय| का कोई भरोसा नह|ं कब 4 या कर बैठे
।धमा7 ध उपgÍवय| को कोई चीख पकार अथवा मदद के 1 व

र नह|ं सनाई पडते ।उनको बस मारो

काटो के 1 वर सनाई पडते ह 4 य|

Íक उनक| आंख म सपने नह|ं खन खौलता है ।

Îमसेज दयावती-चाय पीये नह|ं उठाकर रख Íदये । कफ् य क|

घोषणा बेमq

दत क| है । चाय पी लो
कल Îमल पायेगी क| नह|ं। गेहं पीसाना रह गया। आटा भी बहत कम बचा है । दाल
ू ु
-तेवन भी घर
म नह|ं है । स« जी वाले भी नह|ं आ पा रहे है । अचार से दो Íदन Îनकाल लेगे । अपनी तो बस
इतनी ह| तम7 ना है Íक शहर म शाि7 त हो जाये । साHी के पापा चाय पीओ
Îम1 टर दे वान7 द-चाय तो गले से नीचे उतर ह| नह|ं रह| है । ये दे खो कै सी भयावह त1 वीर छपी है
।उदापरा म हए पथराव म घायल आदमी के Îसर से कै से खन के फववार फट रहे ह । परा शहर
ु ू ू ू

Íहं सा क| चपेट म आ गया है । Íकतने दभा¹ य

क| बात है Íक एक दे श एक शहर एक ब1 ती म
रहने वाले लोग एक दसरे के उपर पc थ

र बम और ब7 द

क से हमला कर रहे है । कछ ह| धÞ टो


तीन çक से अÎधक पc थर एक दसरे के उपर फ के गये है । इस पथराव म बेचारे गर|ब मजदर और
ू ू
Îनद|ष हताहत हए है तीस से अÎधक लो

ग घायल ह । मरने वाले कोई Íकसी संगठन का पदाÎधकार|
नह|ं है । सब गर|ब मजदर लोग मरे ह । परे शहर म कफ
ू ू ् य के साथ ह| धारा

144क| चपेट म है
। परा शहर भोल| भाल| Îनद|ष जनता के खन से लथपथ है । मां अÍह~ या
ू ू
बाई क| आc मा रो रह|
होगी शहर क| यह भयावह दद

शा दे खकर । साHी क| म+ मी गले से नीचे चाय उतर नह|ं रह| है ।
Îमसेज दयावती-बाप रे बेमq

दत कफ् य

कै से जFर| चीजे Îमलेगी । काश ज~ द| शहर क|
रं गत लौट जाती । सब सामा7 य हो जाता ।घर म ह| डर लगने लगा है ।कब 4 या बरा हो जाये

सोचकर
81
Îम1 टर दे वान7 द-शहर म जंगल क| ,परदे शीपरा

हर कह|ं पc थर बरस रहे ह तो कह| गोल| ।
परा शहर उ0वाद क| चपेट म ह । एक समदाय के लोग दसरे का खन पीने के Îलये कटार ले कर
ू ु ू ू
दौड रहे है । ऐसे म तो भगवान भी कोई गारÞ ट| नह|ं दे सकता ।
साHी-पापा धम के नाम पर लोग ऐसा 4 य| करते है । Íकसी क| हc या कर दे ते है । Íकसी को जला
दे ते है । Íकसी का घर जला दे ते है । ऐसा तो कोई धम नह|ं कहता ।
Îमसेज दयावती-ऐसे मौकापर1 त लोग होते है । इनका कोई धम नह|ं होता है । ये तो आदमी का
खन पीकर पलते है । इनका धम होता

है आतंक।
9तीक-खलनायक कहो ना म+ मी
साHी-अरे वाह रे 9तीक त तो बडा उ1 ता

द Îनकला ।
9तीक-कसाई को दे खकर बकरा भी तो डरता है । अनहोनी का डर सभी को होता है ।
अ◌ातंकवाद|/उ0वाद| भी तो कसाई ह| ह ।
Îमसेज दयावती-ठ|क कह रहे हो 9तीक। कसाई ह| तो है तभी तो आदमी का खन बहाने म स¹ य


समाज के ÍवरोÎधय| को तÎनक भी डर नह|ं लगता ।
Îम1 टर दे वान7 द-ठ|क कह रह| हो । उपgÍवय| ने तीन जलाई से शहर क| अि1 म

ता के साथ खेलना
शF Íकया था । छः तार|ख हो गयी पर शह

र वैसे ह| धं धं कर जल रहा है ।
ू ू

Îमसेज दयावती- छोटे छोटे ब¯ चे डर सहमे रह रहे है । ये दे खो अखबार म छपी त1 वीर न7 ह|ं सी
ब¯ चा कै से शटर को नीचे से उचका कर बाहर दे ख रह| है । आंख ऐसे लग रह| है Íक अभी रो पडे गी
। Íकतना भयावह मंजर हो गया है ।
Îम1 टर दे वान7 द-उपgव तो ब7 द नह|ं हआ । राजनैÎतक पथराव शF हो गया । राजने ता लोग अपनी


अपनी कस| के ढ|ले जोड को जE म

क| क|ल| ◌ो दF1 त

करने म जट गये ह ।

Îमसेज दयावती-बहत बह गया खन ।बहत हो गया उपgव अब तो शाि7 त
ु ु

चाÍहये शहर को । शाि7 त
Íपरय शहर दÎनया ् ु
म बदनाम हो रहा है । स¹ य समाज के द° म

न| क| वजह से
Îम1 टर दे वान7 द-बेचारे रोज कआं खोद कर पानी पीने वाले तो भखे मर रहे है । दर दर से शहर म
ु ू ू ू
ÎशHा लेने आये ब¯ चे भखे Íदन रात Íबता रहे है । दवा दाF के Íबना लोग परे शान हो रहे है ।

उपgÍवय| ने हवा म Íफजां म जहर और जीवन क| राह म बाFद Íबछा Íदया है ।
Îमसेज दयावती-धम के नाम पर बवाल मचा हआ है । वह| दसर| ओर दोन| समदाय| के लोग एक
ू ु
दसरे क| मदद कर रहे है । सब क| खाÍहश है Íक शहर म ज~ द|

रौनक लौटे । ये उपgवी धाÎमक
उ7 माद फै लाकर 4 य| धम क| महc ता के साथ अ° ल|ल ¯ यवहार कर रहे ह ।
Îम1 टर दे वान7 द-ठ|क कह रह| हो । शहर म तरफ उ7 माद| आतंक फे ला रहे है तो वह| दसर| ओर

रÍव वमा ,सशील गायेल

,अजय काकाणी जैसे कई लोग जान क| बाजी लगा शाि7 त और सq भाव
कायम करने के 9यासरत् है । सेवाभारती तथा जैनसं1 कार जैसी सं1 थाये भी अमन क| इबारत
Îलखने म जट| हई ह । अमन तो शहर म ज~ द|


होगा Íवघटनकार| शि4 तयां और कछ धमा7 ध


मतलबी लोग सq भावना क| राह म रोडे डाल रहे है । यक|नन ऐसी Íवघटनकार| सं1 थाय और
उपgवी मतलÍबय| के नाम पर थके गी ।

साHी-काश शहर म सq भाव और शाि7 त ज~ द| 1 थाÍपत हो जाती ।
82
Îमसेज दयावती- जFर होगा । जनता तो सब समझ गयी है । उ7 माÍदय| को धम से कोई
लेना दे ना नह|ं है । वे तो अपने 1 वाथ Îसि² द के Îलये इंसाÎनयत क| बÎल चढा रहे है ।
Îम1 टर दे वान7 द-जनता के पैर म भले ह| कफ् य क| बेÍडया पडी है । जर
ू -जर पर स7 ना टा है । पग
पग पर उपgÍवय| का खौफ ह ।इसके बाद भी जीवन गाडी का पÍहया कहां थमा है ।कफ् य म ढ|ल

Îमलते है । आवाम गले Îमलने को आतर हो उठता है । राजवाडा

,छपपन दकान और साव जÎनक

जगह| पर आतंक के खौफ के बाद भी लोग| क| भीड उमड रह| है । अपने वीणानगर म ह| दे खो
बडे भले ह| घर| म दबके हए है पर ब¯ चे


खेल म मशगल है । हां ये बात अलग है Íक सायरन क|

आवाज सनकर जां जगह पाते है वह Îछपने लगते है । बहत भयानक आग लगी है । बझना
ु ु

चाÍहये
Îमसेज दयावती-आग तो बझे गी पर िजस मां का बेटा मारा गया । िजसका पÎत मारा गया जो ब¯ चे


अनाथ हो गये । 4 या उनके धम के नाम पर खनी खेल खेलने वाले वापस कर पायेगे ।या उनके

पÍरजन| का सहारा बनेगे । जीवन म दद भरने वाल| का सc यानाश हो
Îम1 टर दे वान7 द- अखबार म छपी सचना के मताÍबक कल बारह बजे से राͳ के दस बजे तक
ू ु
कफ् य म ढ|ल रहे गी ।

Îमसेज दयावती-दफ् तर जाओगे ?
Îमसेज दे वान7 द-हां कब तक घर म कै द रहे गे । हो सकता है कल Íदन ठ|क ठाक रहे तो परस| से
कफ् य उठ जाये । वैसे कफ
ू ् य

तो आम जनता क| जान माल क| रHा के Îलये ह| लगता है । इसम
अपराधी Íक1 म के लोगो क| धरपकड होती है । यह जFर| भी है । इसी से तो उपgÍवय| क| नाक
म नके ल पडती है ।
Îमसेज दयावती-महं गाई तो वैसे ह| कमर तोड रह| थी । शहर म फै ले उपgव ने तो जीना ह| हराम
कर Íदया । क|मते पहं च से दर होने लगी है । काश Íफर कभी शहर और दे श म उपgव का


7 वालामखी

नह|ं फटता ।

Îमसेज दयावती-सरकार और स¹ य समाज को Îमलकर उपgÍवय| का दमन करना होगा तभी Íवgोह
का 7 वालामखी

नह|ं फटे गा ।

Îम1 टर दे वान7 द-ठ|क तो कह रह| हो पर ऐसा हो तब ना । इसके Îलये पE ता

इ7 तजाम करना होगा
। मानवतावाÍदय| को धम ,स+ 9दाय और जाÎत से उपर उठकर उपgÍवय| और अपने बीच द|वार
खींच दे नी चाÍहये । ताÍक ना बहे Íफर कभी खन क| धारा । आदÎमयत

,अमन-शाि7 त के Íवरोधी
अपनी अपनी Íबल| म कै द रहे । जब कभी Îनकले तो इनका Íदल पसीज गया हो । मानवता,समता
सq भावना और शाि7 त के दत बनकर Îनकले ताÍक कभी ना हो सके पथराव । दे श 9गÎत क| राह

पर सरपट दौडता रहे ।
Îमसेज दयावती-एक बात कहं ।

Îम1 टर दे वान7 द-अरे घर म कै द है । बाहर उपgÍवय| का भत है । अब ना कहोगी तो कब कहोगी


जो कछ कहना हो कह सना◌ाओ । भरपर समय है सनने सनाने का ।
ु ु ू ु ु

Îमसेज दयावती-तम तो बहत कछ कह गये म तो कछ और ह| सोच रह| थी ।


ु ु

Îम1 टर दे वान7 द-भागवान कहो ना हमने तो ऐसा वैसा कछ नह|ं कहां

Îमसेज-चलो तम जीते म हार| । अपनी बात कहती हं ।

83
Îम1 टर दे वान7 द-पहले मे र| बात सनो धÍकयानसी
ु ु
बात ना करो । तम हमेशा से जीतती आयी हो

। म तो हारा हआ Îसपाह| हं त+ हा
ु ू

रे सामने।
Îमसेज दयावती-दे खो मq

दे से ना भटकाओ । बात उपgव और कफ् य से होकर कह|ं और जा रह| है

। नजर कह|ं Îनशाना कह| लग रहा है । मेर| बात सनो ।

Îम1 टर दे वान7 द-Íब~ क

ल नह|ं म मq

दे पर ह| कायम हं ।

Îमसेज दयावती-जब तक धम का उपभोग अफ|म क| तरह और जाÎतवाद का द+ भ हं कार भरता

रहे गा तब तक उपgव मचता रहे गा । 4 य| ना धम को मानवक~ याण से जोडा जाये । जाÎतवाद क|
मा7 यता रq द कर द| जाये । ऐसा हो गया तो ऐसे उपgव नह|ं होगे । आदमी के खन से सडके

गÎलयां नह|ं नहा पायेगी ।
Îम1 टर दे वान7 द-बात तो बहत अ¯ छ|

है लेÍकन धम और जाÎत के बीच से होकर रा1 ता Íद~ ल| तक
जाता है । सार| उपgव क| जड धाÎम क और जातीय उ7 माद म है । उपgवी लोग धम को बदनाम
कर रहे ह ।सq धम ,सव समानता ,बहजनÍहताय एं व बहजन सखाय का स¯ चा
ु ु

9हर| होता है ।
साHी-चलो अ¯ छ| बात हई । उपgव क| नाक म नके ल पड गयी । कफ

् य भी कछ Íदन राͳ दस
ू ु
बजे से सबह छः बजे तक रहे गा । अब पापा दफ
ु ् तर जा सकते है , म और 9तीक 1 क

ल भी ।
पथराव का डर तो मन म रहे गा ना पापा । कई लोग मरे है । कई गल| मोह~ ले खन से लाल हए


है ।
Îम1 टर दे वान7 द-बेट| डरते नह|ं । जनता क| सरHा के Îलये पÎलस फोस जो चपे चपे पर तै नात है
ु ु
अभी भी।
Îमसेज दयावती-बेट| डरना नह|ं । भयावह सपना मानकर भल जाना । 1 क
ू ू
ल म दसरे धम के ब¯ च|


के साथ Îमलजल कर रहना । नफरत

नह|ं सq भावना के बीज बोने होगे 1 क

ल के 1 तर से तभी
ब¯ च सव धम सव समानता के नैÎतक दाÎयc व| का पालन कर सके गे ।
Îम1 टर दे वान7 द-बेट| त+ हा

र| म+ मी ठ|क कह रह| है ।सq भावना से नफरत क| जड पर 9हार Íकया
जा सकता है । ऐसा 9हार पथराव को ज7 म ह| नह|ं दे ने दे गा ।
साHी-पापा याद रखं गी ।

Îमसेज दयावती-जा बेट| अपना और 9तीक बैग जमा लो कल से 1 क

ल जाना है ना ।
साHी-हां मां
Îमसेज दयावती-दे खो छोटे -छोटे ब¯ चे Íकतने खश है । शहर क| रं गत लौटते ह|

Îम1 टर दे वान7 द- अमन तो सभी को पस7 द होता है । कौन खतर| से खेलना चाहे गा । अपने को
मौत के मंह म झोके गा।

धाÎम क/सामािजक बीमाÍरय| के 9कोप से पथराव होते है । खन ब

हते है ।
ब¯ च भी डर गये है पथराव से
Îमसेज दयावती-डर तो हम गये थे ये तो ब¯ चे है । डर कर भी तो जीवन नह|ं चलता ।
Îम1 टर दे वान7 द-हां ठ|क कह रह| हो । डर तो था ,जब तक उपgव था,शहर म कफ् य था कब कहां

से पc थर या गोल| बरस पडे । कफय म तÎन

क छट Îमलते ह| लोग जFर| चीज| के Îलये दौड पडते

थे ।
84
Îमसेज दयावती- उपgÍवयो ने ऐसा खनी खेल ह|

खेला है Íक डर बन गया है । धीरे धीरे खc म
हो जायेगा । सब कछ सामा7 य

हो जायेगा । कब तक पथराव का भत पीछा करे गा

? कब तक
शर|फ आदमी हं सते जE म संग जीयेगा ।
Îम1 टर दे वान7 द- रा* ç|य अि1 मता एवं मानवीय एकता के Îलये सा+ 9दाÎयकता के Íवष बीज को
उखाड फ कना होगा वरना ये सा+ 9दाÎयत ताकते खद को सरÍHत कर शाि7 त
ु ु
और सq भावना के
दामन जE म Îमल रहे गे ।
1 11 19 99 9- -- -बारात
इकतीस Íदस+ बर क| आÍखर| और पहल| जनवर| क| 9थम अध राͳ म न7 दन के घर एक न7 हे
फÍर° ते का अवतरण हआ । ब¯ चे

के रोने क| आवाज सनकर न7 द

न के मन म आÎतशबाजी होने
लगी । कछ दे र के बाद रमरजी काक| घर म से बाहर Îनकल| । न7 द

न आगे बढकर काक| का पांव
छये ।

रमरजीकाक|-खब तर4 क|

कर बेटवा,बेटा हआ है


चौथी औलाद बेटा के सनते ह| न7 द

न के Íदल से बोझ उतर गया । न7 दन ब¯ चे का नाम हर| रखा
। न7 दन हर| को पढा Îलखाकर दरोगा बनाने का सपना दे खने लगा पैदा होते से ह|। वह भी ऐसे
समय जब आजाद| क| जंग के शोले हर कान पर द1 तE त दे ने लगे थे । भयावह सामािजक ि1 थÎत
भी थी । तथाकÎथत छोट| जाÎत के लोगो के साथ तो जानवर से भी बरा ¯ य

वहार होता था ।
दभा¹ य

वस ऐसे समाज म न7 दन भी आहे भर रहा था । गर|बी एवं दयनीय सामािजक ि1 थÎत के
बाद भी वह Íह+ मत नह|ं हारा । हर| का नाम 1 क

ल म लाख Îम7 नÎतयां कर Îलखवा Íदया जबÍक
उसक| जाÎत के ब¯ च| का अघोÎशत Fप से 1 क

ल म 9वेश ब7 द था । हर| को भी 1 क

ल म बहत

मि° क

ल आयी । अछत जाÎत का होने के नाते उसे कHा म सब ब¯ च|

से पीछे बैठाया जाता था ।
जहां मा1 टर साहब क| आवाज भी नह|ं पहं च पाती थी । 1 क


ल म पीने तक के पानी को उसक|
परछायीं से दर रखा जाता था । लाख मि° क
ू ु
ल उठाकर भी हर| Íह+ मत नह|ं हारा अ7 ततः बारहवीं
क| पर|Hा अ¯ वल दज से पास कर Îलया पर आÎथ क कारण| आगे क| पढाई Fक गयी । हर| साल
भर कलकc त म पटसन क| क+ पनी म छोटा मोटा काम Íकया । सरकार नौकर| पहं च से दर जाती


दे खकर वह राजधानी आ गया । राजधानी म साल भर क| बेरोजगार| झे लने के बाद पÎलस क|

नौकर| Îमल गयी । नौकर| का समाचार सनकर हर| के पÍरवार म खशी क| लहर दौड़
ु ु
पड़ी ।
समय के साथ हर| आगे बढते रहे पÎलस क| नौकर| म तर4 क|

करते करते दरोगा हो गये और
उलझे हए मामले◌ा◌ं को सलझाने म उ7 हे


महारथ भी हाÎसल हो गया । हर| को लोग बड़े आदर से
हर| बाब कहते । हर| बाब क| ईमानदार| के चचा सबक| जबान पर होते । हर|बाब ने कई बड़े
ू ू ू
बड़े
और उलझे मामले सलझाये । एकाध बार स1 पे

Þ ट भी हए पर स¯ चा

ई के पथ से ÍवचÎलत नह|ं हए


एक Íदन हर|बाब थाने से काफ| दर भीड़
ू ू
भाड़ वाले से छÇ

ट| के कदन साद| ]े स म गजर रहे थे ।

एक ¯ यापार| बचाओ बचाओ Îच~ ला रहा था । कोई भी उसक| मदद के Îलये आगे नह|ं बढ रहा था
। दो आतंकवाद| लटे रे Íदनदहाड़े

¯ यापार| क| Îतजोर| Îछन रहे थे । ¯ यापार| लहलहान था पर


Îतजोर| नह|ं छोड़रहा था । ¯ यापार| के Îच~ लाने के आवाज हर|बाब के कान| म पड़ी

वह ललकारते
दौड़े और एक आतंकवाद| को दबोच Îलये । अब 4 या था आतंकवाद| ¯ यापार| को छोड़ हर|बाब पर

85
टट पडे । आतंकवाÍदयो ने दरोगाजी के उपर

दनादन प¯ चास से अÎधक बार छरे से वार कर

Íदये । दरोगाजी हर| बाब का शर|र झलनी हो गया । जांघ क| नशे कट गयी । हर| बाब Íह+ म
ू ू

नह|ं हारे वे एक आतंक| पर क« जा कर Îलये । बड़ी चालाक| से आतंक| के छरे आतंक| का पेट फाड़

Íदये । वह वह| 1 पाट पर मर गया । हर|बाब लड़

खड़ा कर Îगरने लगे तब तक दसरा आतंक| वार

कर बैठ संयोगबस वह भी दरोगाजी क| Îगरफ् त म आ गया, उसके भी पेट म छरा दरोगा जी ने

घसा Íदया पर आतंक| पेट दबाकर भाग Îनकला और दरोगाजी अधमरे वह|ं तड़

पते रहे । कोई भी
आदमी दरोगाजी को न तो अ1 पताल तक ले जाने क| और नह|ं एक फोन करने क| Íह+ मत जटा

पाया । घÞ टो बाद एक ठे लेवाले ने ठे ले पर लादकर अ1 पताल पहं चाया । कई Íदन| तक दरोगाजी

मौत से जझते रहे । इस बीच बीस बोतल खन चढ गया । अ7 त
ू ू
तः दरोगाजी ने मौत पर भी Íवजय
पा Îलया । दरोगाजी के बहादर| के चच समाचार प³| के प7 ने
ु ◌ा◌ं पर खब जगह पाये । दरोगाजी

को बहादर| का ÷े¯ ठ

पर1 का

र Îमलना चाÍहये था पर नह|ं Îमला । हां राजधानी के Hे³ Íवशे प को
आतंÍकय| से Îनजात जFर Îमल गयी । हफ् ता वसल| करने वाल| और आतंक मचाने वालो क|

Íह+ मत टट गयी । दरोगाजी सदै व Îन¯ ठा

एंव ईमानदार| से जन एवं रा¯ ç क| सेवा करते रहे । सेवा
के दौरान उनक| धम पc नी का दे हा7 त क सर क| बीमार| से हो गया । तीन| बेटे अपने अपने पÍरवार
म रम गये । बेट| अपने घर पÍरवार म खश थी । दरोगाजी शहर म अके ले रह गये । मंह बोला
ु ु
बेटा रामलखन अपने फज पर खरा उतर रहा था । पड़ोस म दर के Íर° ते

क| साल| और उनक|
बेÍटयां रे खा और गीता भी खब E या

ल रखती थी । दरोगाजी के अ7 दर प³मोह कटकट कर भरा हआ
ु ू ू

था पर प³| को दरोगाजी से

नह|ं उनक| दौलत से मोह था । समय अपनी गÎत से चलता रहा रे खा
और गीता का « याह हो गया । दरोगाजी रोट| से मोहताज रहने लगे । इसी बीच उनका ए4 सीडे Þ ट
हो गया । पैर क| हq डी टट गयी । ¯ ला

1 टर तो हआ पर दो Íदन म उतरवा Íदये 4 य|

Íक दे खरे ख
करने वाला कोई न था । दरोगाजी का रोना दे खकर उनके बड़े बेटे ने जब द1 ती अपने Îलये एक
लाचार Íवधवा दखव7 ती

दे वी को िजसका दÎनया म कोई न था अपनी मां के Fप म खोज लाया ।

बेबस लाचार Íवधवा औरत क| अि1 मता क| रHा के Îलये दरोगाजी ने छाती पर पहाड़रखकर मंजर|

दे द| । उ7 नसठ साल क| उH म दरोगाजी का पन Íववाह हो गया पर िजस बेबस लाचार Íवधवा

दखव7 ती

दे वी पर दया Íदखाये थे वह भी दरोगाजी के जीवन म मÇ

ठ| भर आग साÍबत हई। साल

भर के बाद दरोगाजी सेवाÎनवत हो गये । सेवाÎनविc त
ृ ृ
के बाद दरोगाजी दखव7 ती

दे वी को ले कर
अपनी बेट| के घर गये । अब दÎनया म सबसे ¯ या

रे दरोगाजी के Îलये बेट| दमाद नाती और नाÎतन
थे । दरोगाजी बेट| और दमाद क| वजह से तÎनक खश थे । बाक| सभी तो पैसे के भखे उ7 हे
ु ू
नजर
आते थे दखव7 ती

दे वी चार कदम और आगे थी। दमाद के Íपताजी तो दो1 त पहले और समधी बाद
म थे । खब जोड़ी

जमती थी समधी समधी क| । दरोगाजी सेवाÎनवc त

होकर गांव आ गये । बे ट|
को फट| कौड़ी

नह|ं Íदये । बेट| ने उ7 ह Îन¯ काÎसत कर Íदया पर उनक| नजरे उनके चल-अचल
स+ पÎत पर Íटक| हई थी। दखव7 ती


दे वी भी रहरहकर कलेजे म तीर भे◌ा◌ंक दे ती । दरोगाजी गम
को भलाने के Îलये खेतीबार| म Íदल लगाने लगे । उनक| मेहनत से अनपजाउ◌ू◌ं जमीन भी अ7 न
ु ु

उगलने लगी पर दरोगाजी का 1 वा1 ³ य साथ छोड़ने लगा । सरज डब रहा था दरोगाजी सबसे
ू ू
बेखबर खेत म पसीना बहा रहे थे । दरोगाजी को काम करते हए दे खकर रघ के पांव Íठठक गये◌े


वह दरोगाजी के पास गया और बोला दरोगाजी 4 यो मजदर| जैसे रात Íदन खटते◌े रहते हो । अरे

86
ये उH काम करने क| नह|ं है । आराम करने क| है पोता पोती खेलवाओं, बह बेट| से सेवा

करवाओ ।
दरोगाजी बोले -जब तक हाथ पांव आंख ठे हना सलामत है तब तक Íकसी का आÎ÷त

नह|ं रहं गा ।

रघ जीवन एक जंग है इसे जीतने का 9यास जब तक सांस है तब तक करता रहं गा । अब तो


हमारे जीवन क| द

सर| जंग शF हो गयी है ।

रघ

-दरोगाजी आपको हाड़Îनचोड़ने क| 4 या जFरत है । अरे आप तो अपने प शन से चार आदमी को
और पाल सकते है ।
दरोगाजी-कह तो ठ|क रहे हो रघ मेहनत करने म बराई 4 या
ु ु
है ?अभी तो 1 व1 थ हं । काम करने

लायक हं । गर|ब मां बाप क| औलाद हं
ू ू
। म ने बहत दख उठाये है । मां बाप को आंस से रोट|

ु ू
गीला करते हए दे खा है म ने । मां बाप के आश|वाद से कहां से कहां पहं च गया । आज मेर| औलाद
ु ु
साथ नह|ं दे रह| है । बे टे मझसे दर होते जा रहे है । 4 या
ु ू
यह Íकसी नरक के दख से कम है ।

खै र Íकसी ज7 म के पाप का फल Îमल रहा होगा मझे ।

रघ

-दरोगाजी आपक| तÍबयत ठ|क नह|ं लगी रह| है ।
दरोगाजी-हां कछ Íदन| से रह रहकर सांस जैसे अटक जा रह| है । ठ|क हो जायेगा । कोई Îच7 ता


क| बात नह|ं है । Îच7 ता तो बस अपन| से है िजसके Îलये सपने बने थे वह| Íदल म छे द कर रहे

है ।
रघ

-दरोगाजी म भी उस Íदन दं ग रह गया जब आपके बड ने आपको बेट| क| गाल| द| । सफे द रं गे
Îसर के बाल उखाड़ने तक क| धमक| Íदया था। वह भी आपके दमाद बेट| नाती और नाÎतन के
सामने । उसे ऐसा नह|ं कहना चाÍहये था ।
दरोगाजी-नासमझ है । जब उन पर पडे गी तब याद आयेगी मेरे साथ जो वे कर रहे ह । वे हमारे
Îलये नह|ं खद के जीवन म कांटा बो रहे ह । हमार| तो Íबत गयी है । थोड़े

Íदन का और मेहमान
हं । दे खना यह| लोग आंस बहायेगे । मेरे छोड़े


Fपये को पाने के Îलये रात Íदन एक कर दे ग ।
Fपये और मेर| Íवरासत तो पा जायेगे पर Íदल म कसक तो उठे गी जFर । अब तो मेर| Íह+ मत ह|
मेरा सहारा है रघ िजस Íदन मेर| Íह+ म

त छट| मै समझो गया उपर ।

रघ

-दरोगाजी ऐसा ना कहो आप तो द|घाय होओ और 1 व

1 थ रहो । अब म चलता हं । दे खो अंधेरा

छा गया है । आप भी घर जाओ भौजाई राह ताक रह| होगी ।
दरोगाजी-दÎनया मत

लबी है । घर म तो खौफ डं सता रहता है ।हं सते जE म क साथ कब तक आदमी
ज° न मना सकता है । खेत म खड़ी फसल| के साथ बाते कर मन ह~ का हो जाता है । चलो म भी
चलता हं । रघ अपने घर क| ओर दरोगाजी अपने घर क| ओर चल पडे




दरोगाजी घर आये है Þ डपाइप चलाकर बा~ ट| म पानी भरे ,हाथ पांव धोये । एक लोटा पानी पीकर
खÍटया पर बैठे । Íफर ना जानो शर|र को कौन सी ¯ याÎध पकड़ल| । दरोगाजी क| तÍबयत Íबगड़ने
लगी । रात बडी मि° क

ल म Íबती सबह होते होते तÍबयत 7 या

दा खराब हो गयी । हालत इतनी
खराब हो गयी Íक Íब1 तर से उठा नह|ं गया ।दो Íदन वह| Íब1 तर पर पड़े पड़े कराहते कराहत
एकदम से टट गये । बडी
ू ़ ◌ी मि° क

ल से द|वाल के सहारे बैठ पाते । बैठते ह|ं च4 कर आने लगते ।
Íबगड़ती हालत म बड़बडाने लगे । दरोगाजी क| तÍबयत खराब है Íक खबर उनक| बेट| के दे वर
सc यान7 द को लगी वह भागकर दरोगाजी को दे खने गया । वहां उनक| दयनीय दशा दे खकर
87
सc यान7 द घबरा गया दरोगाजी क| तÍबयत Íबगड़ती दे खकर सc यान7 द ने दरोगाजी के
छोटे बेटे रामानज को साथ लेकर अ1 प

ताल म भत| करवाया । मज डा4 टर| क| समझ म नह|ं आयी
। दद म बड़बडाते हए दे खकर एक डा4 ट

र ने तो पागलखाने भेजने तक क| ÎसफाÍरस कर द| ।
जबÍक दरोगाजी को मि1 त¯ क 7 वर था ,दो Íदन म जानलेवा हो गया था । डा4 टर बीमार| को नह|ं
समझ पाये। दरोगाजी दो Íदन अ1 पताल म तड़पते रहे इसी बीच बेटा मझला दयानज शहर से आ

गया। दरोगाजी दयानज से लड़

खड़ाते हए

बोले तम तीनो भाई आपस म लड़

ना नह|ं । मेर| चल
अचल स+ पÎत के चार Íह1 से कर लेना । तीन Íह1 सा तो तम तीन| भाईय| का होगा और चौथा

Íहसा त+ हा

र| नयी मां का । सc यान7 द से बोले बेटे दमादजी (दयान7 द बीÍटया सेवामती,नाÎनत
समन

,Fपेश और Íदनेश अभी नह|ं पहं

चे 4 या ?बस दो Íदन म इतना ह| बोल पाये थे । इसके और
कछ भी

नह|ं बोल पाये। जबान पर जैसे ताला लटक गया पर आंख| से आंस ऐसा बहना शF हआ
ू ु

क| Fका नह|ं । स+ भवतः दरोगाजी क| अि7 तम इ¯ छा बेट| दमाद से Îमलने क| थी हालत और
अÎधक Íबगड़ने लगी तब सc यान7 द बनारस लेकर भागा । बनारस जाते समय रा1 ते म हर जंग
जीतने वाले दरोगाजी मौत से हार गये । बड़े बेटे समानज जो दरोगाजी से झगड़

कर चला गया था
उसे खबर द| गयी पर वह| न आने क| िजद पर अड़ा रहा । बेट| दमाद खबर लगते ह| प7 gह सौ
Íकलोमीटर दर शहर से दरोगाजी के

अि7 तम सं1 कार म शाÎमल होने के Îलये चल पड़े ।
मौत के दसरे Íदन दरोगाजी के मतदे ह को सजाया गया । मातमी धन बनजे लगी पर हजार घर
ू ु ृ
वाले गांव म दरोगाजी के मतदे ह का लंगोट पहनाने वाला कोई न Îमला । आÍखरकार छोट| उH का

सc यान7 द ने अपने हाथ| से लंगोट पहनाया । दोपहर ढलने को आ गयी çे न लेट होने के कारण
बेट| दमाद नह|ं पहं च पाये । दरोगाजी क| आÍखर बाराता

;जनाजा@ Îनकल पड़ा । आगे आगे चार
कं ध| पर दरोगाजी का मत दे ह चल रहा था पीछे पीछे बैÞ ड

बाजा वाले मातमी धन बजाते हए ।


सौभा¹ सबस चार कं ध| म दो कं धे उनके छोटे और मझले बेटे के शाÎमल थे ।बैÞ डबाजे को दे खकर
कछ लोग छ|ंटाकसी करने से बाज

नह|ं आ रहे थे । कछ लोग कर रहे थे Íक दरोगा क| दसरे « या
ु ू

क| बारात म भले ह| बैÞ डबाजा नह|ं बजा तो 4 या आÍखर| बारात म बीÍटया क| ससराल वालो ने

तो बजवा ह| Íदया ।कोई कहता अरे ये जनाजा नह|ं दरोगा के आÍखर| « याह क| बारात Îनकल रह|
है । भले ह| कछ लोग छ|ंटाकसी कर रहे थे पर स¯ च

तो यह| था ।
दरोगाजी का जनाजा Îनकलने के घÞ टे भर बाद बेट| दमाद भी आ गये पर जनाजा तो Îनकल चका

था । काफ| मश4 कत के बाद (दयान7 द और सेवावती ° मशान पहं चे पर 4 या

दरोगाजी का मतदे ह

गोमती नद| के Íकनारे आठमन लकड़ी क| Îचता म भ1 म होकर राख हो चका था । Îचता को पांच

मटके पानी से ठÞ डे Íकये जाने का कम काÞ ड शF था । इसी बीच (दयान7 द

और सेवावती ने
अ÷पÍरत ÷² दां
ु ू
जÎल अÍप त क| । शे प कम काÞ ड क| 9ÍHया तÎनक दे र म पर| हो गयी । पचतc व


म Íवल|न दरोगाजी के मतदे ह के अवशे प को गोमती नद| को समÍप त कर Íदया गया। Îचता एकदम

ठÞ डी हो चक| थी । गमाहट बची थी तो बस चल

-अचल स+ पÎत के बंटवारे को लेकर ।
20 20 20 20- -- -गÍड
ु ़ या का ¥ याह
काहो बेटवा कब आये शहर से । गÍड
ु ़ या के « याह के Íदन आ रहे हो ।एकाध मÍहने पहले आना था।
मायाद|न-काका राह चलते संदे श पछ रहे हो ।

88
Îमठाई-लो बेटा कछ दे र त+ हा
ु ु
रे साथ गपशप कर लेता हं । काम इतना फे ल गया है Íक मरने क|

फस त

नह|ं है ।कटाई दवांई तो हो गयी पर भसा ढोने को पड़ा

है । नह|ं ढो गया तो आंधी उड़ा ले
जायेगी ।उपर से गडी का « या

ह ।
मायाद|न-काका गडी करने लायक हो गयी ।कल क| ब¯ ची

इतनी बड़ी हो गयी । मायाद|न कछ बोल

पाता इतने म Í9या आ गयी और बोल| अरे बाबा को टट| खाट पर बैठा Íदये ह4 का


त+ बाक पछे
ू ू
Íक नह|ं । बात| म ह| म¹ न हो गये ।
मायाद|न-ह4 का

त+ बाक का हाल मै। 4 या

जानं ।मैने तो कभी खाया पीया ह|

नह|ं कहते हए सधना

बीÍटया को बलाकर मीठा पानी दे कर ह4 का


चढाकर लाने को बोले ।
सधना-पापा है Þ डपाइप पानी बार बार छोड़रह| है ।वा~ व कट गया होगा । म कये से बाबा के Îल

ये
ठÞ डा पानी लाती हं ।

मायाद|न-काका गडी के « या

ह के बारे म कछ कह रहे थे ।

Îमठाई-हां बेटा अपने को तो भगवान ने बीÍटया Íदया नह|ं । अब पोÎतय| का « या कर गंगा नहां
लंगा ।

मायाद|न-9ेम को Íकतनी बेÍटयां हो गयी है ।
Îमठाई-बेटा अभी तो चार है ।आगे भगवान क| मÍहमा ।
मायाद|न-काका गडी Íकतने बरस क| हो गयी Íक « या

ह के नाम पर उसक| मटठ| म आग भरने जा

रहे हो ।
Îमठाई-ये 4 या कह रहे हो मायाद|न । पोती का « याह करने जा रह| हं । उसक| Îच7 ता

मझे है ।

12
बरस क| हो गयी है ।
मायाद|न-सच काका तम गडी क| मÇ
ु ु ु
ठ| म आग भरने जा रहे हो । तम गडी का कल तबाह करने
ु ु
जा रहे हो । काका गडी का « या

ह नह|ं तम अपराध करने जा रहे हो ।रोक दो « या

ह गडी के साथ

अ7 याय ना करो काका ।
Îमठाई-4 या कह रहे हो ।सना है कछ Íदन पहले हमार| गडी से बहत छोट| लड़
ु ु ु

क| के « याह म म7 ³ी
तक आश|वाद दे ने गये थे ।हमार| गडी तो बारह से उपर क| होगी ।जाÎतवाद

,भÎमह|नता ऐसी

बीमाÍरयां जो शे ◌ाÍषत| वंÎचत| मÇ

ठ| म आग भर रह| है । जीवन का असल| सख Îछन रह| है ।

उनका तो कानन कछ Íबगाड़
ू ु
ह| नह|ं पा रहा है । तब तक तम बाल Íववाह रोकने वाले कानन क|
ु ू
दोहायी दे रहे हो । बेटवा तमको अपनी Íबन मां क| भांजी का « या

ह बहत पहले कर दे ना था ।

स1 ते म Îनपट जाते । उ7 नीस साल क| हो जाने पर « याह करने जा रहे हो ।
मायाद|न-हां काका मेर| भांजी गÍड
ु ़ या क| मां के साथ जो अ7 याय हआ वह तो गÍड

ु ़ ◌ा के साथ नह|ं
होने दं

गा ना । बेचार| बहन असमय मर गयी । बहनोई ने दसर| शाद| कर ल| । बेचार| गÍड
ू ु ़ या को
घर से Îनकाल Íदया ।बाप क| गलती बेट| को भगतना पड़ा

मेर| बहन का बालÍववाह न होता तो
अभी नह|ं मरती ।बहन को मरे अÇ ठारह साल हो गये । भांजी गÍड
ु ़ या को ज7 मे उ7 नीस । समय
Íकतना ज~ द| बदल जाता है । हम आंख फाड़े दे खते ह| रह जाते है ।
Îमठाई-ठ|क कह रहे हो बेटा । पर+ पराय तो तोड़ने के Îलये बनती है पर लोग द+ भ म न तोड़ते ह
ओर न तोड़ने दे ते । ऐसी ह| पर+ पराये है जाÎतवाद,Íवधवाजीवन,बालÍववाह एवं और भी बहत सी

बर| पर+ प

राये है जो स¹ य समाज के माथे पर दाग है ।समाज और शासप 9शासन ईमानदार| से
89
काम Íकया होता तो ये सामािजक बर| पर+ प

राये ना जाने कब क| खc म हो गयी हो । आज भर
भर मÇ

ठ| आग का एहसास न कराती ।क9थाओं के खc म

होने से सc ताधाÍरय| को नकशान होगा

ना इसीÎलये तो सार| सामािजक क9³ या

ओं को 1 वाथ का आ4 सीजन Íदया जा रहा है तथाकÎथत
÷े* ठजाÎत और ÷े* ठ समाज के नाम पर और कल क| थोथी पर+ प

रा के नाम पर ।
मायाद|न-काका तम तासे बात तो समाज बदलने क| कर रहे हो ।काका तमने गडी के भÍव* य
ु ु ु
के
बारे म नह|ं सोचा । न7 ह| गडी

का « याह करना 7 यायसंगत है 4 या काका । अरे काका तम जैसे

सोच वाल| के Îलये तो सामािजक क9थाओं को कचल दे ने के Îलये कमर कसकर आगे आना चाÍहये
ु ु
।क9थाओं को उखाड़

कर फ कने का व4 त आ गया है ।इन बर| पर+ प

राओं से फस त पाओ । समाज

को आदमी को आदमी होने का सखभोगने लायक बनाओ । सभी अपने पैर पर खड़े

हो मान स+ मान
के साथ जीय । क9थाओ को कचल दे ना चाÍहये
ु ु
,सांप के फन जैसे न बांस रहे ना बांसर| बाजे काका


Îमठाई-हां बेटवा बात तो अ¯ छ| बता रहे हो ।
मायाद|न-काका लाग पढ Îलख रहे है । दÎनया ने खब तर4 4 ी
ु ू
क| है ।काका क9थाओं को से Îनजात

तो पाना ह| होगा । कब तक ÍवषमतआवाÍदयो क| परोसी मÇ

ठ| भर आग के Îनशान पर आं स

बहाते रहे गे । खद को कमर कसना होगा तभी बराईयां दर भागेगी । काका बराईय| के दमन का
ु ु ू ु
व4 त आ गया है ।जमाना तेजी से बदल रहा है काका ।
Îमठाई-बेटा जमाना तो मझे बदलता हआ


नह|ं Íदखाइ◌्रर पड़ ् रहा है । एक बा~ ट| पानी बाब साहे ब

के कय से एक बा~ ट|

पानी आज भी नह|ं ले सकते ह । बाब साहे ब अंजर| भर पानी क| जगह
ू ु
जाÎतवाद के कलछले से अं जर| म आग भर दे गे ।क9थाय अपने दे श से शायद ह| खc म
ु ु ु
हो पाये ।
बड़ी-बड़ी कÎस यां तो जाÎतवाद क| बैसाखी के सहारे तो नेता लोग कबाड़

रहे है । जाÎतवाद के Îशकार
तो हम सभी है । अखबार| म अc याचार का काला ÎचÇ ठा तो रोज ह| छप रहा है । कह|ं
बलाc कार,कह|ं जते च¯ प

ल पहनकर Îनकलने पर 9Îतब7 ध कह| द~ हे

को घोड़ी पर चढ़ने पर
9Îतब7 ध इतना ह| नह|ं 1 क

ल| म ब¯ च| को अलग अलग भोजन परोसा जा रहा है जबÍक यह
योजना तो सरकार क| है यहां भी जाÎतवाद । बे टा 1 क

ल| म जाÎतवाद क9थाओं का ह| तो नतीजा

है । बेटा त+ हा

रे साथ 4 या अ¯ छा हआ है । तम इतने पढÎलखकर भी जाÎतवाद का दं श


झे ल रहे हो
। त+ हा

र| तर4 का बाÎधत कर द| है साम7 तवाÍदय| ने ।
मायाद|न-काका म भी दं श झे ल रहा है । आपक| बात म स¯ चाई है पर काका हाथ पर हाथ धरे
बैठने से भला तो नह|ं होने वाला है ना । पहले अपने घर से शFवात करनी होगी ।

Îमठाई-बेटा त+ हा

र| बात तो म समझ गया । मेर| गडी का « या

ह Fकने से तो न बालÍववाह क|
क9था खc म

होगी uk ह| जाÎतवाद ।
मायाद|न-काका 4 या कह रहे हो बालÍववाह के पीछे जाÎतवाद है ?
Îमठाई-हां बेटा।असल| जड़ तो जाÎतवाद ह| है ।िजस Íदन जाÎतवाद Îमट जायेगा ससार सामािजक
बराईयां Îमट जायेगी । प

हले तो चार साल से छोटे ब¯ च| का « याह भी हो जाता था । कभी कभी
तो ब¯ चा पैदा होने से पहले बात प4 क| हो जाता थी । कमजोर तबके के लोग ज~ द| से ज~ द|
अपनी बेट| को जाÎतपत को सौपकर गंगा नहाना चाहते थे ।

मायाद|न-ऐसा 4 य| काका ?
90
Îमठाई-मां बाप का अपनी इ7 जत बचाने के Îलये बालÍववाह करना जFर| हो गया था । बेटा
छोट| Íबरादर| के लोग| के सामने यह| एक सरÍHत उपाय था िजससे उनक| बहन बेÍटय| क| इ7 ज


बचायी जा सकती थी ।बेटा जब दे श गलाम था तब भी कमजोर तबके के लोग| पर गाज Îगरती थी

आज भी उन पर ह| Îगर रह| है ।शोÍषत आज भी आजाद नह|ं है और नह|ं सरÍHत है । पराने
ु ु
समय म तो चार| तरफ से भेÍड़ या छोटे लोग| क| इ7 जत पर कTि* ट

जमाये रहते थे । खै र
आजकल थोड़ा कम तो हआ है अc या

चार पर वंÎचत| को स+ मान से जीने का हक तो नह|ं Îमल
सका है । भले ह| Íकतने कानन बने हो पर स¯ चा

ई तो यह| है Íक छोटे Íबरादर| के लोग| पर
अc याचार कम नह|ं हआ है । बेटा जब अं 0ेजो का राज था और जमीदार| क| तती बोलती थी तब


बालÍववाह हम कमजोर तबके Îलये अपनी इ7 जत बचाने के Îलये अ¯ छ| पर+ परा थी ।
मायाद|न-काका त+ हा

र| बात सनकर मझे बालÍववाह के र
ु ु
ह1 य का पता चल गया पपर7 त

काका
पराने जमाने म अं 0ेज| का राज था साम7 त

वाÍदय| के अc याचार करने क| पर| छट थी अब तो दे श
ू ू
आजाद हो गया है काननी तौर पर सबको बराबर का हक है ।

Îमठाई-काका सब कागज म कै द है । जाÎतवाद और FÍढवाद| क9थाओं का 9चलन तो य

ह| कहता
है । भÎमह|नता और दÍरgता तो कमजोर तबके क| छाती पर आज भी सांप क| तरह लोट रह| है ।

बेटा जब तक जाÎतवाद खc म नह|ं होगा भारतीय समाज म सामािजक बराईया खc म

नह|ं हो सकती
। चाहे बाल Íववाह हो या कोई और क9था ।

मायाद|न-काका त+ हा

र| बात म स¯ चाई तो है आने वाला समय जाÎतवाद को नकार दे गा । आने
वाल| पीढ| जाÎतवाद के चH¯ य

ह म नह|ं उलझे गी उसके सामने तो बस एक ह| ल+ य होगा
उ7 जवल भÍव* य ।यह| ल+ य सार| क9थाओं को रौद दे गा । जाÎतवाद क| द|वारे ढहा दे गा । हमे भी

तो अपनी ओर से पहल करनी होगी । जाÎतवाद के Íखलाफ बालÍववाह के Íखलाफ औ◌ैर दसर|

बराईय| के Íखलाफ एक होना होगा ।

Îमठाई-हां बेटा । सामािजक स+ मान के Îलये तो जFर| हो गया है ।
मायाद|न-Íव7ान के यग म सामािजक बराई जवान है बडे
ु ु

दभा¹ य

क| बात है ।
Îमठाई-बेटा जाÎतवाद के साथ ह| Íपत सc ता

म बालÍववाह को बढावा दे रह| है ।जातीय बड़पन वं श
और ना भी ढे र| अहं कार क| बÎलबेद| पर बेÍटयां चढ रह| है ।अ7 त जातीय Íववाह क| राह म जातीय
द+ भ बड़ी Fकावट है ।जाÎतवाद सामािजक समानता,सदभावना पनपने नह|ं दे रहा है । बे टा
जाÎतवाद पर जोरदार 9हार हो जाये तो बालÍववाह क| क9था खc म

हो जायेगी ।
मायाद|न-Íववाह दो आc माओं का पÍव³ Îमलन न होकर जातीय द+ भ और खानदानी 9Îत* ठा का
सौदा हो गया है ।
Îमठाई-हां बेटवा ।
मायाद|न-काका लोग बालÍववाह और जाÎतवाद क| बराईय| को समझने लगे है । बदलाव तो आयेगा


Îमठाई-अभी शÍदयां लगे गी ।कानन का पालन करवाने वाले भी तो Íकसी ना Íकसी जातीय द+ भ

के
वशीभत होते है ।जाÎत के तराज पर आदमी को पहले तौला जाता है कानन का पायजामा बाद म
ू ू ू
पहनाया जाता है । तभी तो आजाद| के इतने बरसो◌े◌ं बाद क9थाय और FÍढयां खc म

नह|ं हई है ।

91
मायाद|न-धीरे धीरे सब साम7 य हो जायेगा भेदभाव क| द|वार ढह जायेगी । काका जाÎतवाद
बहत परानी बीमार| है ।दे खो न आजकल कोट म रे ज का चलन शF हो गया है । 9ेम Íववाह भी

ु ु
अि1 तc व म आने लगा है । इसके कठराघात से जाÎतवाद और दहे ज भी

नह|ं बंच पायेगा काका ।
Îमठाई-बेटा सजातीय 9ेमÍववाह को ह| कछ मा7 य

ता Îमल पाती है । Íवजातीय 9ेमÍववाह तो
खनखराबे क| दा1 ता

न Îलख रहा है ।बेटा सजातीय Íववाह दहे ज जैसी क9था का पोषक भी तो है ।

मायाद|न-काका बहत घमावदार बात कर रहे हो ।बालÍव◌ाह जाÎतवाद को बढावा दे ता है और


जाÎतवाद दहे ज9था को ।
Îमठाई-हां बेटा एक बराइ◌्र दसर| बराई को ह| ज7 म
ु ू ु
दे गी uk । यÍद बराईय| से बचना है तो बराई
ु ु
को खc म करना होगा ।
मायाद|न-काका आपके कहने का मतलब है Íक भारतीय समाज म सा◌ी बराईय| क| जड़

जाÍव◌ाद है

Îमठाई-हां बालÍववाह रोकना है तो जाÎतवाद खc म करना होगा ।अब म चलता हं बहत काम पड़ा
ू ु
है

मायाद|न-काका ह4 का

तो पी लो ।
Îमठाई-बेटा मझे जाने दो । मेर| आंख खल गया है । काश जाÎतवाद के दि+ भ
ु ु
य| क| खल जाती ।

मायाद|न-4 या कह रहे हो काका ।
Îमठाई-ठ|क कह रहा हं बेटा ।

मायाद|न-मतलब
Îमठाई-बेटा तम

गÍड
ु ़ या क| डोल| उठाने का इ7 तजाम कर| और म गडी क| डोल| रोकने का ।

बालÍववाह रोकना है ना बेटवा 4 योÍक गÍड
ु ़ या का जीवन खÎशय| से भरना है

हं सते जE म| से नह|ं
बेटवा तमने मेर| आंखे खोल द| ।

21-कोरा-कागज
Íदस+ बर का मह|ना खc म होने क| कं गार पर था पर7 त

जाड़ा कं पाने वाल| । सायं -सायं चलती हवा
क| छअन सई क| चभन सर|खे तन को महसस हो रह| थी । बढे ◌े और ब¯ चे
ु ु ु ू ू
ओलाव को घेरे
गरमाहट महसस कर रहे थे । मजदर लोग खेत माÎलक| के खेत
ू ू
-खÎलहान म पसीना बहा रहे थे ।
ठÞ ड से बचने के Îलये द|न ओलाव के पास बैठा डे बर| क|

मंद रोशनी म जमीन पर राख Íबछाकर
Íकताब के सवाल हल कर रहा था । इसी बीच द|न क| मां समÎत काम पर से आ गयी और द|न
ु ु ु
द|न पकारने लगी । द|न बाहर गया । समÎत ने Îसर पर से अनाज क| पोटल| द|न को थमाकर
ु ु ु ु ु
बा~ ट| से पानी लेकर हाथ पांव धोने लगी । समÎत भी ओलाव पर हा

थ-पांव सेकने लगी ।
द|न बोला मां पानी लाउ◌ू◌ं ।

समÎत

-हां बेटा ¯ यास तो लगी है । ला एक Îगलास पी लेती हं । च~ ह


चौका भी करना है । भखे

-
¯ यासे तेरे बाब भी आने म ह| ह ।

द|न

-लो मां पानी पीओ ।
समÎत Îगलास का पानी थामते हए द|न के मरझाये चे हरे को दे खक
ु ु ु

र बोल| बेटवा इतना उदास 4 य|
है । Íकयी से लड़के से झगड़ा तो 1 क

ल म नह|ं हो गया या हर|लाल मंशी ने डांट तो

नह|ं Íदया ।
द|न

-नह|ं मां ना मंशी जी ने डांटा है और ना ह| 1 क
ु ू
ल म Íकसी लड़के से झगड़ा करके आया हं ।

92
समÎत

-बेटा त इतना गमसम तो
ू ु ु
नह|ं रहता था । त परे शान तो है Íकसी न Íकसी बात से । तेर|

आंख भी लाल सख हो रह| है । तÍबयत तो ठ|क है या कोई परे शानी है । हम तो तम ब¯ च|
ु ु
क|
दे खभाल कर नह|ं पाते । सबह जाओ तो रात म आओ । माÎलक| के खेत म पसीना बहाओ। बे टा

तम मजदर मां बाप के ब¯ चे
ु ू
हो । अपनी Íक1 मत म तो गलामी Îलख द| है बढे समाज ने । तम
ु ू ु
पढ-Îलखकर कलेटर बन जाते तो मेरा जीवन सफल हो जाता ।
द|न

-मां पढ ह| तो रहा था दे खो ।
समÎत

-राख Íबछाकर सवाल हल कर रहे थे ।
द|न

-हां मां इतना कहते ह| उसक| आंख| म सावन उमड पड़ा ।
समÎत

-कापी नह|ं है ?
द|न

-नह|मां
समÎत

-तेरे बाप को आने दे कोई ¯ य

व1 था करने को कहती हं । जब तक कापी

नह|ं आती है । पढ-
पढ कर याद कर| ।
द|न

-ठ|क है मां पर मंशीजी को 4 या

Íदखाउं गा ?
समÎत

-बाप को आ जाने दो । कापी क| ¯ य

व1 था हो जायेगी ।
द|न

-ठ|क है मांकहकर द|न पढने लगा

।समÎत रोट| बनाने म जट गयी । रोट| बन गयी । द|न
ु ु ु
के बाब रघबीर के इ7 त
ू ु
जार म समÎत बार

-बार अ7 दर-बाहर करने लगी पर कह| अता-पता नह|ं ।
द|न को नींद आने लगी । ब1 ती

वाले जागते रहो,जागते रहो पकारने लगे।काफ| रात गजर जाने के
ु ु
बाद रघवीर घर आया। रघवीर
ु ु
के काफ| Íवल+ ब से आने से समÎत घबराई हई से बोल| 4 य|


जी
इतनी दे र कै से हो गयी । सन| अपने गांव म ह|

नह|ं आसपास के गांव| म पहरा पड़ने लगा है ।
खन जमा दे ने वाल| ठÞ ड

पड़रह| है । काम तो कब का खc म हो गया था । Îचलम क| लालच म
बैठे थे ना । अरे कभी -कभी तो घर ज~ द| आ जाया कर| । ब¯ च| को उजाले म दे ख Îलया कर| ।
बेटवा इ7 तजार करते -करते सो गया ।
रघवीर

-भागवान 4 य| आHेप लगा रह| हो । मै। Îचलम क| लालच म नह|ं जमींदार के बताये काम
कर रहा था । ये जमीदार लोग जोक है । हम मजदर| का खन चसकर पलते
ू ू ू
बढते ह । वे तो चाहते
है हम चारो पहर उनक| गलामी करते रहे । हम शे ◌ाÍषत वंÎचत लोग आजाद दे श के गलाम है ।
ु ु
बड़ी मि° क

ल से मोहलत Îमल| है । आ तो गया न भले ह| दे र से आया दF1 त

तो आ गया ना ।
समÎत

-आ तो गये दF1 त

पर तम दखी मन से कह रहे हो । कछ बात तो
ु ु ु
नह|ं हो गयी ।
रघबीर

-माÎलक| के इशारे पर नाचते रहे तो ठ|क है । तÎनक उफ् हई तो बात के चाबक Íदल पर


चोट कर जाते है । करे भी तो 4 या कर । इन खेत माÎलको क| गलामी तो अपनी मजबर| है ।
ु ू
सामािजक Fप से पशता का और आÎथ क Fप से दÍरg का जीवन जी रहे है ।लोग कहते

है हमारा
दे श बड़ा महान है । अरे काहे का महान है आदमी क| कद कc ते

Íब~ ल| इतनी भी नह|ं है । Íदन
रात क| मेहनत-मजदर| के बाद पेट भर अ7 न

नसीब नह|ं हो रहा है । बाक| जFरते मंह बाये खड़ी


रहती है सरसा क| तरह है ।

समÎत

-कोई कहा सनी हो गयी । खेत माÎलक ने क
ु ु
छ अपश« द कह Íदया 4 या ?
रघबीर

-जब से आंख खल| तब से तो सन रहा हं । खद खाना खाकर ढं कार मारते हए बाहर Îनकले
ु ु ु
ू ु
तो म ने कहां माÎलक अब म घर जा रहा हं । काम तो सब कर Íदये । मालम है कं स ने 4 या


कहां
?
93
समÎत

-ताने मारे होगे । बरा

-भला कहा होगा ।
रघबीर

-नरÍपशाच कहता है अरे तम मजदर| का पेट भरने लगता है तो माÎलक| का मकाबला करने
ु ू ु
लगते हो । त+ हा

र| घरवाल| छ¯ पनभोग बना कर इंतजार कर रह| होगी ।बड़ा घर वाला हआ है ।

तेरा घर कहां खड़ा है जातना है ना ? मझसे बदा° त

नह|ं हआ म ने भी कह Íदया माÎलक हमारे

दादा-परदादा से जब द1 ती अं गठा लगवाकर माÎलक बन बैठे हो । हम मजदर अछत बनाकर हमारा
ू ू ू
खन पीकर राज कर रहे हो और हम ह| आंख Íदखा रहे हो । िजसक| Íब~ ल|

उसक| को + याउ◌ू◌ं ।
बाब जमाना बदल गया है । गोरे भाग गये दम
ू ु
-दबाकर अपनी सरकार है । हमारे वोट से सरकार
बनती Íबगड़ती है । अरे Íदन भर Íक दो सेर अनाज दे ते हो । पÍरवार का पेट भरने के Îलये रोट|
भी तो नह|ं बनती । तन पर कपड़े ,सड़रहे है । बीमार| म दवा नह|ं कर पा रहे है । ब¯ चे अनपढ रह
जा रहे है । इस सब का िज+ मेदार कौन है जानते है ?जमीदार सरज बाब बोले म हं 4 या
ू ू

?म ने
भी कह Íदया हां और कौन है जमीदार और Íवषमतावाद| ¯ यव1 था के अलावा ।
समÎत

-तब 4 या बोले ?
रघबीर

-जीभ ताल से Îचपक गयी । कछ दे र सोच कर बोले आजाद| 4 या
ु ु
Îमल| मजदर| के Íदमाग

खराब होने लगे है । जा सबह ज~ द|

आ जाना ?खेत खÎलहान चारो ओर काम पसरा है ।द|न क|

मां तÎनक एक मेहरबानी कर दो ।
समÎत

-बहत थक गया हं । आग ला दो । एक Îचलम गांजा पी लं । शंकर भगवान क| कपा से
ु ू
ू ृ
Îच7 ता और थकाई छ

-म7 तर हो जायेगी ।
समÎत

-रोट| खाओं गांजा पीकर फे फड़ा 4 य| सड़ाने पर तले है । नशा खc म

होगी तब Íफर से Îच7 ता
छाती पर बैठ जायेगी ?कब तक ढठा ढाढस खद को दे ते रहोगे
ू ु
?बेटवा को आगे ¯ ढाने के बारे म
सोचो तभी Îच7 ता के बादल छं ट सके गे ?
रघबीर

-हां इसी उ+ मीद म तो जी रहा हं ।अभी तो चौथी 4 ला

स म पढ रहा है । साहब -स« बा

बनने
म अभी दे र है ।
रघबीर ओलाव सेकते

-सेकते गांजा का धं आ हवा म उड़ा

या Íफर रोट| खाकर ओलाव के पास Íबढे
पआल पर खराटे मारने लगा । सबह ज~ द|
ु ु
उठकर समÎत जानवर| को हौद लगायी चारा डाल| ।

Íफर बकर| को मड़ई से Îनकाल कर बाहर बांधी और नीम से पिc तयां तोड़कर उनके सामने डाल द|
। बकÍरया ÎमÎमयाते हए नीम क| पिc त

यां खाने लगी । इसके बाद वह घर के काम म जट गयी

।रघबीर ज~ द|

काम पर चला गया । ज~ द|-ज~ द| रोट| बनायी और मजदर| पर जाते हए बोल| द|न
ू ु

बेटा खेत से बजर| काट लाना और बाल दे ना । चारा कटा रहे गा तो त+ हा

र| छोट| बहने हौद म डाल
दे गी । हां 1 क

ल जाने से पहले जानवर| को हौदं से हटाना नह|ं भलना ।

द|न

-मां कर तो सब दं गा पर 1 क
ू ू
ल नह|ं जाउं गा ।
समÎत

-4 य| ?
द|न

-तीन Íदन से कह रहा हं तमसे पर मां त+ हे

ु ु
मालम

नह|ं ?
समÎत

-कापी नह|ं है । बेटा तेरे बाब तो हवेल| चले गये । जा उनसे पैसे मांग ला

। गांजा के Îलये
तो उनक| ¯ यव1 था हो जाती है पर बेटे के कापी-Íकताब क| ¯ यव1 था नह|ं कर पाते ।
द|न

-ठ|क है मां घर का काम करके चला जाउ◌ू◌ंगा ।
94
सÎमत

-बेटा काम छोड़ त जा बाप से पैसा मांग
ू ू
कर ला उनके पास नह|ं होगा तो जमीदार से
उधार ले लेगे दो-चार Fपया ।
जमीदार सरज बाब द|न को हवेल| क| चहरदार| के अ7 द
ू ू ु
र आते दे ख Îलये । रघबीर गोबर उठा रहा

था,तभी जमीदार बोले अरे रघबीर दे ख तेरा बेटा आया है ।

रघबीर

-द|न इस व4 त

तम यहां 1 क
ु ू
ल नह|ं जाना है 4 या आज ?4 य| आये हो ?
द|न

-बाप कापी खर|दना है आठ आना चाÍहये

एक िज1 ता कागज लेकर कापी बना लंगा ।

जमींदार सरज बाब बोले
ू ू
-4 या खाबर लेकर आया है तेरा बेटा रघबीर ।

रघबीर

-आठ आना मांग रहा है कापी खर|दने के Îलये ।
सरजबाब
ू ू
-दे दे ना । एक Íदन गांजा मत पीना । पढायेगा नह|ं तो तेरा बेटवा कलेटर कै से बनेगा ।
अभी तो चौथी म पढ रहा है ना द|न ।

द|न

-हां माÎलक ।
सरजबाब
ू ू
-रघबीर बी

एपास करे गा तब Íकसी दफतर म नौकर Îमल सके गी । आठ आना नह|ं दे पा
रहा है तो आगे क| पढाई कै से करवायेगा ।
रघबीर

-बाब उपर वाला लाज रखेगा । पसीने के सेर भर अनाज को सोना बनायेगा । हमार| 4 या


औकात है । हमार| दÎनया तो उ+ मी

द| पर Íटक| है ।
सरजबाब
ू ू
-अरे जो काम कर नह|ं सकता उसके पीछे 4 य| पड़ा ह । अपने साथ काम सीखा । पांच
बीसा जमीन और हलवाह| म ले लेना । हां ÎनयÎत मत खराब करना 4 य|Íक अब तम आजाद हो

गये हो ना । त+ हा

र| सरकार है । त+ हा

रे वोट से बनती है । दस बीसा हलवाह| म खेत Íदया हं

उसम जो पैदा करता है तेरा ह| हे ◌ाता है उपर से सेर भर मजदर| 4 या

कम है ?अरे बंधवा मजदर
ु ू
हो वैसे ह| बने रहे हो । 7 यादा सपने दे खोगे तो चारो खाने Îचत होकर Îगर पड़ोगे थक हारकर।
रघबीर

-बेटवा को पढाकर रहं गा । भ4 त

क| मदद तो भगवान को करना ह| होगा । द|न बेटा अभी

तो 1 क

ल जा । आज कछ ना कछ इ7 त
ु ु
जाम कर लंगा ।

द|न

-ठ|क है बाब जा रहा हं । मंशी जी क| डांट आज और सन लंगा । द|न वापस जाने लगा । द|न
ू ु ु ू ु ु

को जाता हआ दे खकर जमीदार सरज बाब बोले 4 या

ू ू
हआ कापी का इ7 त

जाम नह|ं हआ । आ द|न


मेर पा आ
द|न

-माÎलक 1 क

ल जाने म दे र हो जायेगी ।
सरजबाब
ू ू
- मेरे पास कछ खतौना वाला सरकार| कोरा कागज है कापी बनाने लायक । मेरे ब¯ चे

तो
उसी पर रफ करते है । त भी दो चार प7 ने

ले जा । गज-गज भर के कागज है ।
द|न

-नह|ं चाÍहये माÎलक भीख दे रहे है मझे ना ।

सरजबाब
ू ू
- नह|ं द|न त तो हमारे मजदर का बेटा है । भीख कै सी
ु ू ू
? क|मत तेरा बाप दे दे गा अगर
नह|ं भी दे गा तो वसल लंगा ।
ू ू

रघबीर

-बेटा माÎलक ठ|क कह रहे है ।
द|न

-फोकट म कौन Íकसक| मदद करता है बाब।

सरजबाब
ू ू
-सरकार| कागज है । फोकट म दे दं गा पर कोर कागज को भलाना
ू ू
नह|ं । इसक| क|मत तो
बहत है पर याद| म रखना । कलेटर बन गया तो मझे पहचान तो लेगा ना


कहते हए सरज बाब

ू ू
अपने बड़े बेटे अन7 त को बलाने लगे ।

95
अन7 त- बाब 4 य|

बला रहे है । 1 क
ु ू
ल जाने का समय हो गया है ।
सरजबाब
ू ू
-इसको पहचानते हो ।
अन7 त-हां अपने मजदर रघबीर को बेटा है ना ये तो ।
ू ु

सरजबाब
ू ू
-शाबास सह| पहचाने । रघबीर इसे कलेटर बनाना चाहता है ।

अन7 त-कलेटर
सरजबाब
ू ू
-हां । रघबीर बड़े

बड़े सपने दे खता है । लेÍकन कछ ¯ य

वधान खड़ा हो गया है ।
अन7 त-म 4 या कFं ?


रजबाब

-चार-छः प7 ने दे कोरे चौथी म पढता है ना?
अन7 त-कौन से कोरे कागज ?
सरज

-लेखपाल के पास कौन कागज होता है । वह| लेखा बह| वाला । कापी तो बन जायेगी ना चार-
छः कोरे कागज से ।
अन7 त-4 य| नह|ं ?
सरज

-दे दो द|न को कापी बना लेगा । कापी

नह|ं खर|द पा रहा है ना ।
अन7 त नफरत भर| Îनगाह| से द|न क| ओर दे खते हए सरजबाब बड़े
ु ू ू

जमीदार के साथ जाने माने
लेखपाल भी थे के कमरे म गया और कछ कोरे कागज लेकर आया और अन7 त

बाब को दे ते हए


बोला आठ-दस प7 ने ह दे दो अपने मजदर के बेट| को ताÍक कलेटर बनने म मदद

Îमल जाये ।
सरजबाब
ू ू
-लो द|न ले जाओ । बना लेना कापी ।

द|न

-÷² दा भाव से कोरा कागज सरजबाब के हाथ से थामा
ू ू
,माथे चढाया Íफर चल पड़ा ज~ द|-ज~ द|
घर क| ओर 1 क

ल जो जाना था ।
द|न अपने बाप के साथ कं धे से कं धा Îमलाते हए बी


ए तो पास कर गया पर कले4 टर नह|ं बन
पाया पर सात-आठ साल क| बेरोजगार| का दं श झे लते हए मामल| सा 4 ल

क जFर बन गया ।उधर
जमीदार साहब के बेटे अन7 त बार-बार फे ल होते -होते◌े अ7 ततः पा गये बीएपास होने का
लाइसे7 स,बड़े पद क| नौकर| । Íवरासत म Îमल गया बाप के दौलत का खजाना बड़ी भर|-पर|

जमीदार| भी । भड़क उठ| अÎभमान क| 7 वाला और ले Îलये दबे कचल| को रlदने क| कसम ।

बंधवा मजदर मां
ु ू
-बाप का बेटा द|न मामल| से ओहदे क| नौकर| पाकर भी खश था 4 य|
ु ू ु
Íक उसने
रख Íदया था कनबे के अ¯ छे

कल क| नींव और ले Îलया था मानव सेवा का dत सरजबाब के Íदये
ू ू
कोरे कागज क| याद कोरे और गर|बी के Îनदो के जE म को Íदल म बसाये ।बेटे के ने इरादे से बढे

मांता-Íपता समÎत और रघबीर क| आंखे
ु ु
चमक| उठ| थी ।
22-बेटा
रोशनी-पापा कल भइया का बथ डे है ।
नेकच7 द-4 या कल कै से ?अभी अÇ ठारह Íदन बाक| है ।
रोशनी-भल गये कल क| बा

त आज ?आपके परजाÎत के बेटे का ज7 म Íदन ।
नेकच7 द-च7 gे श का बथ डे है कल ।
रोशनी-अब आया ना याद ।
96
नेकच7 द-हां बेट| वैसे भी याद तो रोज रोज कम ह| होनी है । वैसे याद भी 4 या-4 या रखं

साÎम◌ाजक उc पीड़न ◌़आÎथ क तंगी दफतर का शोषण और भी बहत कछ । इन सब


को याद रखने
से दख ह| होना है ।

रोशनी-जानती हं आपक| मि° क


ले खास Hण तो याद रहता है ।
नेकच7 द-मझे भी याद था पर उसके उपर तकल|फ| के परते चढ गयी थी ना तभी तो Íदल को

टटोलते ह| याद आ गयी-कल च7 gे श का बथ -डे है । मनाओ भइया का बथ डे धमधाम से कल

31
जनवर| को Íफर सc तरह को अÎभन7 दन का । मझे 4 या

करना है ये तो बता दो ।
रोशनी-पापा आपको कछ

नह|ं करना है हम भाई-बहन सब कर लेगे । कल आपके परजाÎत के बेटे
अपने भइया को सर9ाइज दे गे ।
नेकच7 द-अ¯ छे से मनाओं ।वह भी अपने पÍरवार का हो गया । परजाÎत का कै से अपनी जाÎत का है
मानव जाÎत का । बेट| जाÎतपांÎत तो आदÎमयत के Íवरोधी है । आदमी के बीच जाÎत के आधार
पर भेद-भाव बहत बर| बात है । च7 gे


श छोट| जाÎत का है या बड़ी हम इससे कछ

नह|ं लेना है ।
बस लेना है तो इतना Íक वह त+ हा

रा राखी का भाई है मेरा धम का बेटा । पढा Îलख नेक इंसान है
च7 gे श । अ¯ छे आदमी के हर लHण उसमं मौजद है ।

रोशनी-य आर 0ेट पापा ।

नेकच7 द-मेर| औलादे महान बने । यह| मेर| पहल| और आÍखर| इ¯ छा है ।म जो बनना था नह|ं बन
पाया । मेरे सपने मार Íदये गये । म यो¹ य होकर बढ| ¯ य

व1 था के तराज पर ÷े* ठ

साÍबत नह|ं
हआ यो¹ य

होकर अयो¹ य करार Íदया गया । आज मामल| सी नौकर| कर रहा हं । उपर वाले


समझते ह मेर| नौकर| उनका एहसान है । बेट| हम तो गर|ब मां बाप क| औलाद है पर तम लोग|

को सामने वह दःख

नह|ं आने Íदया िजसको हमने भोगा है । मेर| बदनसीबी को मेरे कनबे के लोग

मेर| संवर| तकद|र समझते है । वे जानते है म बहत बड़ा

साहब हो गया हं । मेर| कमाई बहत है ।
ू ु
म उनसे Îछपाता हं अपनी कमाई । मै उनको हर मÍहन| ÍडमाÞ ड

]ाफट नह|ं भेजकर कत ¯ य पालन
नह|ं कर रहा हं । वे लोग समझते है म शहर म पेड़

Íहलाकर नोट बटोर रहा हं । जबÍक मेर|

तनE वाह से बड़ी मि° क

ल से खच चल पा रहा है । 1 क

ल क| फ|स,दध का Íबल

,घर का भाड़ा
Îनकालने के बाद बचता 4 या है । बडी मि° क

ल से Íकराने का समान आ पाता है । त+ हा

र| मां का
मैनेजमेÞ ट इतना बÍढया है Íक सब कछ थोड़े

से पैसे म कर लेती है । मÍहने दो मÍहने म घर-
पÍव◌ार को कछ F¯ या

भेज दे दो हं तम लोगो का पेट काटकर । बेट| तम भाई बहन पढÎलखकर

ु ु
खद के पांव खड़े

हो जाओ बस यह| भगवान से म7 नत है । खद स+ भ

लते हए दसरो को भी सहारा


दे ने क| कोÎश करना बेटा । नेक आदमी क| यह बड़ी उपलि« ध होती है ।
रोशनी- हां पापा आपने बहत दख झे ला है खै र आज भी तो कम


नह|ं हआ है । आप मि° क


ल| के
जहर को पीकर भी हम हर तकल|फ से बचाये हए है ।

नेकच7 द-कहां Íक बात कहा पहं च गयी । बात तो च7 gे

श के बथ डे क| हो रह| थी । कल क| तैयार|
करो ।
रोशनी-तैयार| तो पहले क| हो गया है । बस भइया को सर9ाइज दे ना है ।
नेकच7 द-Íफर सर9ाइज कै सी ?
रोशनी-पहल| बार ज7 म Íदन मनेगा ना?वह भी अपने घर ।
97
नेकच7 द-4 या । बीस बाइस साल का लड़का है । पहल| बार ज7 म Íदन
रोशनी-हां पापा गांव म कौन मनाता है ।
नेकच7 द-मनाते है आजकल ।
रोशनी-भइया बाइस साल का है आजकल का नह|ं है । पहल| बार ह| तो म राखी बांधी हं । भइया

क| बहत तम7 ना

थी Íक म उसको राखी बांधं । भइया क| कलाई म राखी बांधते ह| उनके आंख| से

आंस बह Îनकले थे । आंस पोछते हए बोले थे आज म ब
ू ू

हत खश हं दÎनया का सबसे क|मती
ु ू
ु ु
तोहफा रोशनी तमने मझे Íदया है राखी बांधकर । वे सगे भाई जैसे हो गये है । पÍरवार के Íह1 से
ु ु

हो गये है । कालेज म मेर| सभी सहे Îलया भइया ह| कहती है । भइया परे कालेज के भइया हो गये

है ।
नेकच7 द-भगवान िजसको Îमलाना चाहता है लाकर Îमला ह| दे ता है । वैसे ह| च7 gे श को लाकर
Îमला Íदया जैसे वह Íकसी ज7 म का Íबछड़ा

हआ बेटा हो ।

रोशनी-हम भाई-बहन क| वजह से सभी छा³-छा³ाओ का नजÍरया बदला है ।
नेकच7 द-सभी 1 क

ल-कालेज| म सहपाठ| भाई-बहन सर|खे ह| होते है । उदÞ ड 9कÎत के छा³

उलंघन
कर जाते है । सहपाÍठय| म सq भावना 1 व1 थ और समातावाद| मानव समाज क| आधारÎशला को
सTढता 9दान करती है । जाÎतवाद का दभा¹ य
ु ु
मानवता के Îलये अÎभशाप बन गया है ।
रोशनी-सच पापा जाÎत-धम के ठे के दार| ने तो आदमी को खÞ ड -खÞ ड कर Íदया है । भारत मांता क|
बेÍड़ या कट तो गयी पर इस दे श म आदÎमयत क| बेÍड़ ◌ा कब कटे गी ?काश जाÎतवाद का Íवषधर
Îसर चढकर न फफकारता तो वंÎचत शोÍषत समाज भी आदमी होने का सख भोग पाता । जाÎतवाद
ु ु
ने शोÍषत समाज क| तकद|र भी कै द कर रखी है और आदमी होने के सख से भी वंÎचत कर रखा

है । ब² द

भगवान ने तो समता के Îलये राजपाट तक छोड Íदया पर आज का आदमी जाÎतवाद जो
आदÎमयत के माथे का कोढ है उसे ह| नह|ं c याग रहे है ।
नेकचन7 द-बेट| बदलाव तो आयेगा पर धीरे -धीरे । यगो से शोÍषत समाज सताया जा रहा है । लोगो

क| मानÎसकता बदलने म व4 त तो लगेगा । कम से कम हम तो दसर| के साथ आदÎमयत के साथ

पेस आये । समतावाद को पलÍकत करने के Îलये हर स+ भ

व 9यास कर ।
रोशनी-पापा आप इतने समझौतावाद| और मानवतावाद| हो Íफर भी लोग घाव दे जाते है ।
नेकच7 द-बेट| समय के साथ चलने म समझदार| है । यÍद हवा Íवपर|त हो तो स+ भल कर चलना
उÎचत होता है । आदमी कछवा चाल से ह| सह| पर मंिजल तक तो पहं च जाता है ।

रोशनी-पापा आपके कहने का मतलब Íवषमतावाद| आदमी के मन म भरा उ7 माद धीरे धीरे खc म
होगा और ब¯ द

का सपना साकार होगा । एक Íदन जाÎत-धम के नशे से आदमी उपर उठ जायेगा ।
नेकच7 द-हां । तमने एक पहल भी तो कर द| है ।

रोशनी-कौन सी ?
नेकच7 द-परजाÎत के बेटे को भाई बनाकर ।
रोशनी-कल च7 दे

रश भइया का बथ डे मनाना है पापा अ¯ छ| तरह से ।
नेकच7 द-हां । अब तो वह परजाÎत का नह|ं धम का बेटा है । अव° य धमधाम से मनायेगे ।

रोशनी-पापा दे खना कल ज~ द| आ जाना । ऐसा न हो Íक सभी संगो* ठ| म बैठे -बैठे भल जाओ◌े

।के क कटने के बाद घर आओ ।
98
नेकच7 द-ऐसा नह|ं होगा बेट| । म त+ हा

रे साथ तैयार| म भी हािजर रहं गा ।

रोशनी-तैयार| तो हमार| पर| हो चक| है । अÎभन7 द
ू ु
न और सखन7 द

न ने तो अपने -अपने गलक त


फोड़Íदये है ।
रोशनी-Îगफ् ट के Îलये ?
नेकच7 द-म Îगफ् ट लाता ना ।
रोशनी-आप भी लाना परजाÎत के नह|नह|अपने धम के बेटे के Îलये । पापा अब सो जाओ रात
अÎधक हो गयी । कल दे खना आपके दफतर जाने से पहले से ह| सखन7 द

न घर संजाने म लग
जायेगा । ग« बा

रे ,चमक|ल| और ढे र सारा सजावट| सामान खर|द लाया है ।
नेकच7 द-ठ|क है । कल सब स1 प स खल जायेगा बथ डे सेÎलबरे शन का। गडनाइट बेटा
ु ु

नेकच7 द 9ातः सोकर उठे और माÎन ग वाक् पर Îनकल गये । वापस आये तो सखन7 द

न फल

Íबछाये माला गथ रहा था । सखन7 द
ू ु
न को ¯ य1 त दे खकर बोले सखन7 द

न सबेरे सबेरे माला बना रहे
हो 4 या जFरत पड़गयी ।
सखन7 द

न-पापा सब पता चल जायेगा । बना तो लेने दो । घर म रोशनी द|वाल| जैसे साफ सफाई
म जट| हई । धम पc नी


च7 gावती रसोई म ¯ य1 त थी । ग« बा

रे फलाने म लगा हआ था


। परे

पÍरवार को ¯ य1 त दे खकर नेकच7 द बोले सरज उगा

नह|ं और तैयार| शF । क|चन क| खशब घर के
ु ु ू
बाहर से नाक को भा रह| है ।
च7 gावती-दे खो जी आप Íड1 टब ना करो जो-जो कर रहा है करने दो । आप भी अपना दै नÍक काम
करो । ना° ता करो दफतर जाओ । शाम को ज~ द| आना ।
नेकच7 द-बहत बÍढया । दफतर से छÇ


ट| Îमलते ह| घर चल दं गा । ठ|क है । तम लोग कर लो
ू ु
तैयार| । कान पकड़ता हं कोई दखलअ7 दा

जी नह|ं कFं गा ।
रोशनी-शाम को बंगाल| Îमठाई लेकर आना । के क का आड र म दे चक| हं ।

नेकच7 द-ठ|क है लेकर आउ◌ू◌ंगा ।
नेकच7 द दाढ|,मछ बनाकर नहाये धोये ।पजा
ू ू
-पाठ Íकये । ना° ता Íकये और दोपहर का खाना लेकर
दफतर चल पड़े घर क| चहल-पहल छोड़कर । शाम को दे र होने लगी तो नेकच7 द बड़े साहब के
सामने हािजर हए और बोले साहब घर जा रहा हं ।
ु ू

बड़े साहब-4 य| ?हो गया टाइम ?
नेकच7 द-बेटे का ज7 म Íदन है ।
बड़े साहब दc का

रते हए बोल

-अपनी सीट पर जा बैठ । जFर| काम है परा करके जाना ।

नेकच7 द-साहब साढे सात बज गये है ।
बड़े साहब-4 या कोई पहाड़Îगर पड़ा । तÎनक सा काम दे ख Îलये तो घड़ी दे खने लगे ।
नेकच7 द- साहब सबह राइट टाइम पर दफतर रोज आता हं । डे


ढ दो घÞ टे बाद जाता हं । लंच

पीÍरयेड म भी दफतर म रहता है । आप जैसे घर जाकर सोता नह|ं हं और

नह|ं दफतर ब7 द होने
के कछ पहले आकर दफतर म बैठता हं । साहब इतना Íहटलरशाह| ठ|क


नह|ं ।
बडे साहब-अपश« द बकते हए बोले तमको नौकर| करना है क|


नह|ं ।
नेकच7 द-नौकर| करने आया हं और अब जा रहा हं घर मेरे धम के बेटे का बथ डे है ।
ू ू

99
बड़े साहब लाल-पीले होते रहे अपश« द बकते रहे । नेकच7 द मोटरसाइÍकल उठाया अं धेरे म घर
पहं चा । घर पहं चते ह| Îशकायत| का दौर शF हो गया ।
ु ु

नेकच7 द बोला -माफ करो म दे र से आया ।बड़े साहब का Íदया हं सता जE म कं धे पर लाद आया पर
घर क| सजावाट दे खकर Íदल खश हो गया ।

रोशनी-पापा ये सब सखन7 द

न क| कलाकार| है ।
नेकच7 द-सखन7 द

न अ¯ छा डे कोरे टर है मझे तो आज पता चला है । भइया के बथ डे क| तैयार| म

रौनक डाल Íदया है -1 लोगन Îलखकर, रं ग-Íबरं गे सजावट| सामान लगाकर । ग« बा

रे म भी बहत

चमक|ल| भरा है ।
च7 gावती-Îमठाई ?
नेकच7 द-लाया हं ना । रोशनी Í9ज म रख द| ।

च7 gावती-शH है भले
ु ू
नह|ं ।
नेकच7 द-धम के बेटे का ज7 म Íदन और म भल जाउ◌ू◌ं ।ऐसा हो सकता है 4 या

?
रोशनी-ठ|क है । म जान गयी आप नह|ं भल सकते कछ पर करवां चौथ के Íदन भल जाते हो 4 य|
ू ू ु

म+ मी ।
नेकच7 द-Îशकायत का दौर खc म होगा 4 या ।
च7 gावती-हो गया ।
रोशनी-हो पापा । कोई Îशकायत नह|ं । बस आप तैयार हो जाओ । म+ मी आपके पस7 द का कता

-
पायजाम 9ेस करके रखी है । भइया भी थोड़ी दे र म पहं च आयेगे । लो नाम ल| ह|

नह|ं तब तक
आ गये ।
च7 दे

रश-शैतान का नाम Îलया नह|ं शैतान हािजर कह कर हं स पड़ा ।
रोशनी-4 य| हं स रहे हो खद शैतान बनकर । तम शैतान हो या मेरे भाई ।
ु ु

च7 gे श-तेरा भाई ।
रोशनी-हं से 4 य| ।
च7 gे श-त कह रह| थी आ गया । मझे आये तो प¯ ची
ू ु
स साल हो गये ।
नेकच7 द-के क काटने का 4 या महत आ गया ।

रोशनी-कछ ल+ हे

और बाक| है । म+ मी को फस त तो रसोई से ले लेने दो । वैसे भी आपको मीठा
तो खाना नह|ं है ।
नेकच7 द-आज तो खाउं गा। च7 gे श का बथ डे आज है ना ।
रोशनी-थोड़ा चख लेना बस खाना नह|ं । मीठा से परहे ज का E याल रखना ।
च7 gावती-रोशनी तम लोग तैयार हो गये ।

रोशनी-हां म+ मी पापा भी तैयार हो गये है ।
च7 gावती-म भी आयी । बेटा रोशनी के क से7 टर टे बल पर रखो ।
रोशनी-के ट से7 टर टे बल पर लाकर सजा द|।
सखन7 द

न टे बल पर फल से है ¯ पी

बथ डे माई Íडयर ñदर Îलख चका था । ब¯ च|

ने घर तो ऐसे
सजाया था जैसे शाद| हो । बाहर क| भी रोशनी का परा E या

ल रखा गया था । दरवाजे प* ¯

-मालाओं
100
से सजे संवरे खड़े थे । अ7 दर भी कोना-कोना सजा संवरा सोधापन Íबखेर रहा था । इन सब
से अÎधक च7 gे श क| खशी उसके चे हरे पर उमक रह| थी ।

रोशनी-सखन7 द

न चाक तो लाओ ।

सखन7 द

न-लाल फ|ते और चमक|ल| से सजाया चाक लहराते हए बोला ये लो द|द| चाक ।
ू ू

रोशनी-अरे वाह Íकतना खबसरत कर Íदया सखन7 द
ू ू ु
न ने ।
सखन7 द

न-आज के महामÍहम को◌े पेश Íकया जाये बथ -डे नाइफ ।
रोशनी-लो भइया काटो दो के क ।
नेकच7 g और च7 gावती ने हाथ पकड़Îलया । धम के मां बाप पाकर च7 gे श क| आंखे भर आयी ।
च7 gावती-काटो बेटा ।
च7 दे श -हां म+ मी
रोशनी-मोमबc ती तो बझाओ ।

च7 gे श-मझे तो याद ह|

नह|ं रहा पहल| बार बथ डे जो मन रहा है ।
नेकच7 g-हर साल मनेगा बेटा हर साल
सखन7 द

न-दे खो भइया ल+ ब

अÎभन7 दन फोटो0ाफर थक रहा है अब तो काट दो ।
च7 gे श मोमबc ती को फं क मारकर बझाया Íफर के क काटा ।है ¯ पी
ू ु
बथ डे भइया क|
शभ कामनाओ के हाÍद क उ

q गार से च7 gे श का मन गद-गद हो गया । नेकच7 द और च7 gावती ने
च7 gे श को के क Íखलाये । वह अपने धम के मां-बाप का पांव छआ । च7 gे

श पापा थोडा के क तो
खा लो ।
नेकच7 द-आज तो जFर खाउं गा तÎनक पर म+ मी को अÎधक Íखलाना ।
रे ◌ाशनी-भइया पापा को अं गल|

पर लगाकर चटा दो । इतना सनते ह| सब जोर से हं स पड़े


च7 gे श के क Íखलाने के Îलये नेकच7 द ओर मडे वह उसे छाती से लगाकर बोले बेटा अब तम
ु ु
परजाÎत का बेटा नह|ं धम का बेटा हो गये हो। च7 gे श को अपार खशी Îमल गयी थी धम के मां

-
बाप और भाई-बहन पाकर । च7 दे

रश के मंह से अनायास Îनकल पड़ा

काश ऐसे सभी हो जाते तो
समता स+ व

◌ृ² द हो जाती इस पावन भÎम पर ।

23-बैडलक
नरायन बेटवा पर मझे ह|

नह|ं पर| ब1 ती

को नाज था । दे खो उसक| तर4 क| पर ऐसी नजर लगी
क| आज पागल| क| तरह मारा-मारा Íफर रहा है कहते कहते दधन क| सांस

गले म अटक गयी ।
बधन

-4 या हआ भइया

?सांस 4 यो टं ग गयी ?
दधन

-पानी का इशारा Íकया ।
बधन

-दौड़कर लोटे म पानी लाया और लोटा उसके मंह म लगा Íदया ।

दधन

-सांस ऐसी अटक| थी Íक मझे लगा Íक जान लेकर जायेगी ।

बधन

-भइया त+ हे

हमार| उH लग जाये ।
दधन

-बधन

त+ हा

र| जFरत त+ हा

रे पÍरवार को है । म तो जीते जी मरा जा रहा हं बेटे क| दद शा


दे खकर । ऐसे जीने से तो मरना बेहतर होगा ।
बधन

-भइया पर| ब1 ती

म तो त+ ह|

हो ऐसे आदमी िजसम अपनापन झलकता है । अब तो ब1 ती
पर राजनीÎत का असर Íदखने लगा है । छोटा हो या बड़ा सब चे हरे बदलने लगे है ।
101
दधन

-तमसे 4 या

Îछपा है । सब अरमान आंसओ

म बह रहे है । कमासत बेटवा पागल सर|खे हो

गया है । गम भलाने के Îलये नशे क| गोद म बैठ गया है । छाती पर पc थ

र रखकर सब कछ

दे खना पड़रहा है । कFं भी तो 4 या कFं कछ समझ म

नह|ं आ रहा है ।
बधन

-सच भइया नरायन क| तर4 क| पर 0हण लग गया है । मझे याद है जब नरायन बारहवी पास

Íकया था तब परा गांव Íकतना खश हआ । नरायन ह| पहला लड़
ू ु

का था जो बारहवी पास Íकया था
पहल| बार परे गांव म । तमने भोज भी तो Íदया । बेटवा नरायन के पास होने क| खशी
ू ु ु
म । वह|
नरायन आज बैडलक,बैडलक कहते Íफर रहा है पागल| क| तरह । भगवान ने संवर| तकद|र को ना
जाने 4 य| Íबगाड़Íदया ।
दधन

-पढाई-Îलखाई का अब 4 या मोल ।अ¯ छा कमा खा रहा था । मान 9Îत* ठा बढा रहा था पर
मायानगर| का जाद सब ल|ल गया ।

बधन

-सच कह रहे हो भइया । नरायन मायानगर| 4 या गया बनी तकद|र Fठ गयी ।
दधन

-वहां भी खब तर4 क|

Íकया गाड़ी,बंगला सब कछ तो था पर ठगा गया तभी तो पागल होकर

बैडलक बैडलक गाता Íफर रहा है ।
बधन

-नहर क| ठे के दार| म ह| लगा रहता तो पागल तो नह|ं होता । भइया ÍवÎध का यह| ले ख था ।
हम मानष 4 या

कर सकते है ?
दधन

-बेटवा का दख

नह|ं दे खा जाता । कमासत बेटा ठगा गया मोह« ब

त म । बाक| चारो बेट| क|
हाल तो दे ख रहे हो । जब तक हम बढा

-बढ| है तब तक स+ भा

ल रहे ह । हमारे मरने के बाद कौन
दे खरे ख करे गा । बेटवा लावाÍरस हो जायेगा । नरायन के गम म मर मर कर जी रहा हं । बेटवा का

दख

नह|ं सहा जा रहा है भइया बधन ।

बधन

-बहत बड़ा

दख है । िजस लड़

के क| Îमशाल द| जाती थी उसी को लोग पागल समझकर
Íख~ ल| उड़ा रहे है । मायानगर| ने इस लड़के का जीवन नरक करके परे पÍरवार क| खÎशयां Îछन
ू ु
ल| ।
दधन

-हÍरयाना से मायानगर| गया तो इसक| पc नी ने आc महc या का 9यास Íकया । अ7 ततः वह
सदा -सदा के Îलये छोड़ चल| । मायानगर| म फौजी से तलाक ले चक| दो ब¯ च|

क| मां रे शमा
नरायन क| िज7 दगी म 4 या आयी सब लट गया । धीरे

-धीरे कोठ| बंगला धन-दौलत सब हड़प कर
भगा द| ।करोड़पÎत नरायन सड़कपÎत हो गया है । फट| कौड़ी

पास नह|ं बची है दवाई तक के Îलये

बधन

-इतना समझदार लड़का दो ब¯ च| क| मां तलाकशदा रे शमा के झांसे म कै से आ गया । समझ

म नह|ं आता ।
दधन

-नरायन क| कोठ| रे शमा के घर के सामने थी । अके ला लड़का दे खकर डोरे डालने लगी ।
कचहर म « याह कर ल| । धन-धम लट कर बेआबF कर द| । मेरे बेटे नरायन को पागल करके

पराने पÎत क| गोद म जा बैठ| ।

बधन

-बेटवा रे शमा क| चाल नह|ं समझ पाया । रे शमा और पराना पÎत Îमलकर सािजश रचे होगे

तभी नरायन को राजा से रं क बनाकर खद माÎलक बन बैठे दोनो ।

102
दधन

-ना जाने कौन सा म7 ³ पढकर रे शमा कोरे कागज पर द1 तक करवा ल| । द1 तक करते ह|
नरायन राजा से रं क हो गया । आज रोट| के Îलये न1 तवान है । मेरा शर|र खद का बोझ

नह|ं उठा
पा रहा है मै इस लड़के को कै से स+ भालं ।

सखव7 ती

-Íव° वास म म ठगा गया । एक औरत ऐसा कर सकती है । सोचकर शम आती है ।बेटवा
क| दÎनया उजड़

गयी है । उसे ¯ यार से समझाओ । उसे पटर| पर लाओ । कब तक ऐसे पागल| क|
तरह घमेगा । हम जब आंख मंद लेगे तो रोट| कौन दे गा । इस बारे म भी तो सोचो । जो होना था
ू ू
हो गया । दसर| को दख दे कर कोई सख से रह पाया है । नरा
ू ु ु
यन के साथ जीने-मरने क| कसम
खाने वाल| रे शमा धन-धम लट कर ध4 के

मार कर भगा द| ।
रे शमा भी नह|ं रह पायेगी । बेटवा के मान का गम Îनकल जाता तो Íफर से जीवन नईया चल
पड़ती ।
दधन

-कौन दे खने जा रहा है ।
बधन

-भइया भौजी ठ|क कह रह| है । लडके के मन का गम Îनकालने के Îलये कछ तो करना होगा ।

दधन

-नरायन भी दोषी है । जब रे शमा के साथ सात फे रे Îलया तो Íकसी से पछा । मोहफांस म

फं सकर सब कछ गंवा बैठा । « या

ह क| खबर से नात-Íहत Íकसी के सामने मंह Íदखाने म शम आ

रह| थी । Íबरादर| वाल| ने ह4 का

-पानी ब7 द कर Íदया था बधन 4 या

तम

नह|ं जाते । िजस औरत
के Îलये नरायन घर-पÍरवार मां -बाप सब छोड़ा वह| छाती म खं जर घ|प द| । बेटवा तो पागल हो ह|
गया म भी रोज-रोज मर रहा हं बेटवा क| ÍफH म ।

सखव7 ती

-शभ

-शभ बोलो नरायन के बाप । िज7 द
ु ू
गी भर अपनी Íक1 मत म हाड़Îनचोड़ना भगवान ने
Îलख Íदया । एक लायक बेटवा था उसक| दद शा तो दे ख रहे हो । बाक| नालायक| से 4 या

उ+ मीद
कर ।बेटवा क| तकल|फ बदा° त नह|ं हो रह| है ।
दधन

-एक बेबस बाप 4 या कर नरायन क| मां त+ ह|

बताओ । रे शमा Íकतनी शाÎतर Îनकल| छल से
दौलत हड़प ल| । बेटवा को पागल बनाकर भेज द| । पढा Îलखा समझदार बेटवा पराई औरत के
मोह म मां-बाप घर-पÍरवार तक को भला Íदया । दे खो औरत का डं सा राजा से रं क हो गया ।

सखव7 ती

- बेटवा क| मेहनत क| कमाई को िजसने धोखे से हड़पने वाल| कभी भी चै न से नह|ं रह
पायेगी । हम दौलत नह|ं चाÍहये हमे बेटवा गम से उबर जाये अब तो यह| आÍखर| E वाÍहश है ।
हमारे बेटवा क| हं सी वापस कर दो◌े 9भ ।

बधन

-सच कहते है नाÎगन का डं सा आदमी उबर सकता है पर रे शमा जैसी औरत का डं सा नह|ं ।
सखव7 ती

-दे वरजी ठ|क कह रहे हो । दे खो बेटवा ने रे शमा को अपनाया 4 या ?खद का जीवन नरक

बना Îलया । पÍरवार क| सार| खÎशयां Íबखर गयी । हम एक

-एक पैसे के Îलये न1 तवान है । उधर
करोड़ो क| मालÍकन रे शम बन बै ठ| है । 4 या खब सािजश रची थी वह औरत और कामयाब भी हो

गयी । छः मह|ने तक तो मेरा बेटवा नरायन शहर म पागल| क| तरह गजारा करता रहा । कभीं

सड़क पर कभी कड़े

दान के पास तो कभी पेड़ के नीचे भखे ¯ या

स रात Íबताता रहा । कोई भीखर|
समझका एक रोट| हाथ पर रख Íदया तो खा Îलया नह|ं तो ¹ 7ू खे ¯ यासे तड़पता रहा । बड़ी
तकल|फ से गांव तक पहं च पाया था । म खद अपने बेटवा को


नह|ं पहचान पा रह| थी । वाह रे
Íक1 मत का खेल कब आदमी को राजा से रं क बना दे Íकसको पता । Íकतनी मेहनत से तर4 क| क|
राह चल पाया था । उस पर भी रे शमा क| नजर लग गयी ।
103
बधन

-सच भौजी बेटवा ठगा गया रे शमा से « याह करके । बेटवा क| बबाद| का कारण रे शमी ह|
है ।
सखव7 ती

- रे शमा ऐसा दाव मार| Íक मेरा नरायन झटके म सड़क पर आकर पागल हो गया और
सारा अÎधकार खो बैठा । हमारे घर-पÍरवार के दख को वह महाठÎगनी ज7 न

त का सख समझ रह|

होगी पर इस मां क| आह बेकार नह|ं जायेगी ।
दधन

-बात ब7 द कर| नरायन को दे ख| कह|ं औधे मंह पड़ा

कराह रहा होगा । खोज खबर Îलया करो
। उसके बाल-ब¯ चे तो नह|ं है । जब तक दÎनया म है दे खरे ख अपने Îसर पर है । बेटवा सE क
ु ू

कांटा हो गया है । भगवान नरायन से पहले मझे डइ◌ा लेना ।

सखव7 ती

-भगवान सबसे पहले मझे उठाना । मझे और अध ÍवÍHत बेटवा को Íकसके िज+ म
ु ु
सौपकर
जाओगे । शभ

-शभ बोलो नरायन के बाप । म
ु ू
एक मां हं । बेटवा के दख को खब समझती हं ।
ू ू
ु ू
कFं तो 4 या कFं बेबस हो गयी हं । शहर

-परदे स का मामला है । वहां जा भी तो नह|ं सकती ।
जाकर भी 4 या करे गे । बेटवा का अं गठा तो पहले कट गया है । अब तो भगवान के 7 या

य पर
Íव° वास है ।
दधन

-अपने हाथ म 4 या है । हम शहर म कौन पनाह दे गा । जब बेटवा के साथ सात फे रे ले कर
रे शमा दगा दे गयी तो हम छछ| को कौन पानी पछे गा ।
ु ू

बधन

-हां भइया सब भगवान पर छोड़कर बेटावा के बारे म सोचो ।ओझा,बईद या कोई हक|म को
Íदखाओ िजससे बेटवा क| Íदमागी हालत तो ठ|क हो जाये । धन दौलत तो हाथ क| मैल हो बेटवा
ठ|क हो जायेगा तो Íफर कमा लेगा । Îच7 ता तो बेटवा के जीवन को लेकर है न Íक दौलत को
लेकर । रे शमा जो दौलत हड़प ल| है ।बेटवा क| Íदमागी हालत ठ|क होने पर वापस आ सकती है ।
दधन

-कहां लेकर जाउ सब ओर से तो हार गया ।
बधन

- भईया हार ना मानो । कोÎशश करते रहे ◌ा । कब Íकसक| दआ काम आ जाये बेटवा पहले

जैसा हो जाये । Íदमागी हालत ठ|क हो जाये । कमाने खाने लगे । भईया भगवान पर यक|न बनाये
रहो । दर-दवाई जहां तक हो सके करते रहो । उपर वाला इतना Îनद यी तो नह|ं होगा । दख Íदया

है तो दवा भी दे गा ।
दधन

-4 य| झठ| Íदला

सा दे रहे हो बधन । तम भी जानते हो 4 या
ु ु
होने वाला है । रे शमा से स+ पÎत
वापस लेना मेरे बस क| बात नह|ं है । ना अब बेटवा ठ|क हो सकता है । बेटवा का पागलपन जान
लेकर छोड़े गा बार| -बार| से हमार| Íफर नरायन क| मां क| Íफर
सखव7 ती

-बस आगे नह|ं बोलना । मरे हमारे द° म

न । अब म जा रह| हं बेटवा को ढढकर ललाती हं
ू ू

Íफर च~ ह

चौका कFं गी ।
दधन

-जा दे ख कहां Íकस हालत म पड़ा है । नरायन का दख मझसे
ु ु
नह|ं दे खा जाता । उसक|
दे खकर मेर| आc मा रो उठती है । इस दख से उबरने के Îलये कभी कभी Íवचार आता है । पोखर म

डबकर जा

न दे द पर दसरे पल मन म Íवचार आता है यह तो कायरता है । भगवान ने दख Íदया
ू ु
है सहना तो पड़े गा ।
बधन

-भईया Íह+ मत रखो ।
104
दधन

-म भी चाहता हं गम का बोझ छाती पर ना

बढे पर इससे बड़ा और 4 या गम होगा ।
कमासत बेटा पागल हो गया है । िजसके जीवन के थोड़े

Íदन बाक| है । म बेटे को कं धा दं गा

जबÍक बेटवा के कं धे पर मझे ° म

शान जाना चाÍहये पर हमारे साथ उ~ टा होने वाला है ।
बधन

-भईया नरायन ठ|क हो जायेगा । रो -रोकर अपनी हालत खराब ना करो । अब त+ हा

रे भी
आंख ठे हने पहले जैसे तो रहे

नह|ं । अब तो इस दख को भी सहना Íक

Íह+ मत जटानी पड़े

गी ÍवÎध
ने जो तकद|र म जोड़Íदया है । उसे कोई नह|ं Îमटा सकता भईया । दाF क| लत नरायन के Îलये
वैसे ह| खतरनाक हो गयी है जैसे रे शमा ।
दधन

-दाF जान ले कर रहे गी । कल Îगर पड़ा भ स के खंटे पर दो दांत टट गये । बेटवा जवानी म
ू ू
बढा हो गया । अ

1 सी साल का परÎनया Íदखता है । 4 या

कFं अब तो तकद|र म आंस बहाना ह|

बचा है ।
बधन और दधन बात कर ह| रहे थे Íक सखव7 ती
ु ु ु
नरायन का हाथ पकड़े आ गयी । बगीचा म
ग7 ना पेरने मशीन पर बै ठा आंस बहा रहा था ।

दधन

-4 या करे गा । Íबना Íवचारे जो Íकया है । उसक| आग म तो जलना ह| होगा । इसके Íकये क|
सजा परा पÍरवार भगत रहा है । अरे दÎनया भर म अब दो ब¯ चे
ू ु ु
क| मां बÍढया रे शमा ह| बची थी

इससे « याह करने के Îलये । लड़Íकय| का अकाल तो नह|ं पड़ा था । सब कछ गंवा कर मां बाप का

चै न Îछन Îलया ।
नरायन-बैडलक डै डकहते हए धड़ा

म से Îगर पड़ा ।
बधन ब¯ चे

क| नरायन को गोद म उठाकर खÍटया पर सला Íदया । सखव7 ती
ु ु
रो-रोकर नरायन के
तन पर लगे क|चड़को साफ करने लगी ।
दधन

-भागवान रहने दो । सबह पकड़

कर नहवा दे गे साफ हो जायेगा । अभी तो दो रोट| उसके पेट
म डाल । लग रहा है दम Îनकल जाएगी अभी । दे खो कै से हांफ रहा है ।
सखव7 ती

-ठ|क कह रहे हो ।पहले रोट| सक लेती हं ।

बधन

-हां भैजाई रोट| बनाओ । नरायन को Íखला कर भईया और तम भी खा लेना ।

दधन

-हां भईया पापी पेट को तो चाÍहये ह| चाहे Íकतने दख के बादल 4 यो

न छाये रहे ।
बधन

-भइया म भी घर चलता हं । ब¯ चे

परे शान हो रहे होगे । काम से सीधे इधर हा आ गया ।
भईया अब तमको भौजाई और नरायन दोन| का E या

ल रखना है ।
हां भईया ना जाने Íकस ज7 म का पाप भोगना पड़ रहा है कहते हए दधन आंख पर गमछा रखते


हए बोला जाओ भईया थक गये होगे । खेत माÎलक लोग तो

खन Îनचोड़

लेते है । दो रोट| खाकर
आराम करो सबह ज~ द|

काम पर जाना होगा । ये तो रोज क| बात है कहते हए बधन अपने घर


क| ओर चल पड़ा ।
दधन

-नरायन क| मां रोट| बन गयी हो तो ला दो रोट| डाल पहले नरायन के पेट म । दे ख कै से
कराह रहा है । आंस तो इसके कभी ब7 द

नह|ं होते । ना जाने कै सी तकद|र Îलखवा कर लाया है ।
परे पÍरवार क| तकद|र Íबगड़

गयी ।
नरायन-बैडलक डै ड ।
दधन

-इससे आगे कछ बोलने को है 4 या

?
105
नरायन-4 या बचा है ? लाईफ तबाह हो गयी । अब तो सदा के Îलये सोना चाहता हं । बहत
ू ु
थक गया हं ।

सखव7 ती

-बेटा ऐसे ना बोल हमारा तो त ह| सहारा है ।

दधन

-कौन Íकसका सहारा बनेगा यह तो उपर वाला जाने । अभी तो उसे तो खद सहारे क| जFरत

है । त+ हा

रा हमारा 4 या सहारा बनेगा । दो रोट| Íखला दे नह|ं तो Íफर कह| चला जायेगा रात म
कहां खोजेगे ?
सखव7 ती

-ठ|क कह रहे हो कहते हÞ

डठ| दो रोट| दाल म म1 सल कर लायी और पचकार

-पचकार

कर नरायन को Íखलाने क| कोÎश करने लगी पर नरायन बार बार हाथ झटक दे ता । बड़ी मि° क


से एक रोट| सखव7 ती

नरायन के पेट म उतर पायी । इसके बाद दधन और सखव7 ती
ु ु
एक -एक
रोट| खाकर पानी पीये । दधन और सखव7 ती
ु ु
के Îलये यह तो रोज का गम बन चका था ।

दधन और सखव7 ती
ु ु
नरायन क| Îच7 ता म खÍटया पकड़ Îलये । कछ ह| Íदन| म दधन क| हालत
ु ु
बहत खराब हो गयी । लकवा का अटै क हो गया । बेचारा खÍटया पर पड़ा

-पड़ा सडने लगा और छः
मह|ने के अ7 दर रामनाम सc य हो गया गया । दधन का जना

जा Îनकला । नरायन हÍड़ यां Îलये
आगे आगे चल रहा था । शवया³ा म शाÎमल लोग रामनाम सc य बोल रहे थे ।अब तो बाक| जीवन
हं सते जE म का जहर पीकर बसर करना होगा चाल|स साल का अ1 सी साल क| तरह बढा लगने

वाला नरायन लाठ| के सहारे बैडलक बैडलक बोलते हए ° म

शान क| ओर बढ रहा था । रामनाम
सc य है क| आवाज म उसक| आवाज दम तोड़रह| थी ।
2 22 23 33 3- -- -अÍभमान
भगवान मझ गर|ब क| कब तक इ+ त

हान लेते रहोगे । रहम करो । आदÎमयत के नाते कब तक
9वीन का भार उठाते रहना होगा । 9वीन स+ प7 न घर से है पर जैसे Îन* काÎसत मेर| चौखट पर आ
पड़ा है । कब तक अपने ब¯ च| क| जFरते◌ा◌ं क| बÎल चढाकर और उनके पेट पर पÇ ट| बांध कर
इस 9वीन क| जFरते पर| करे गे जो दर का भी कोई Íर° ते
ू ू
दार नह|ं है । आदÎमयत क| लाज रखने
के Îलये पनाह दे रखे है । अभी कब तक पनाह दे नी होगी चार साल से उपर तो हो गये । भगवान
मेर| मसीबत द
ु ू
र कर दे । 9वीन को नौकर| दे दे ◌ा । म उपवास रखकर तेर| कथा सनं गी । कहते
ू ू
कहते कलव7 ती

रोने लगी भगवान क| त1 वीर के सामने । भगवान ने कलव7 ती

दे वी के आंस क|

लाज रख ल| । 9वीन को यो¹ यतानसार बड़ी

क+ पनी म नौकर| Îमल गयी।
9वीन नौकर| पर जाने लगा । मोट| तनE वाह भी Îमलने लगी । 9वीन कम कलव7 ती

दे वी अÎधक
खश थी 4 य|

Íक भगवान ने उसक| पकार सन ल| थी । एक Íदन कलव7 ती
ु ु ु
दे वी बोल| भइया 9वीन
मह|ने भर काम कर चके ना

?
9वीन-हां भाभी ।
कलव7 ती

दे वी-तनE वाह कब Îमलेगी ?
9वीन-एक तार|ख के बाद पर भाभी ये सब 4 य| पछ रह| हो ।

कलव7 ती

-त+ हा

र| तनE वाह म से मझे सवा Fपये चाÍहये बस ।

9वीन-सवा Fपये से 4 या होगा ।
कलव7 ती

दे वी-बाक| जो लगेगा म कर लंगी ।

9वीन-4 या करने वाल| हो भाभी ।
106
कलव7 ती

दे वी- कथा क| म7 नत क| हं । अब

तमको नौकर| Îमल

गया । भगवान से Íकया
वादा परा करने म अब दे र

नह|ं होना चाÍहये । कथा के Íदन त+ हे

भी उपवास रखना होगा । हम
और त+ हा

रे भईया तो रखेग ह| ।
9वीन-हम उपवास रखने क| 4 या जFरत ।
कलव7 ती

दे वी-म7 नत है त+ हा

र| ।
9वीन-Íकसने क| म7 नत म ने ।
कलव7 ती

-मैने क| है । अब सवाल नह|ं करना भइया बस सवा Fपया अपनी पहल| तनE वाह से दे
दे ना परसाद म Îमला दं गी बस ।

9वीन-ठ|क है भाभी ।
कम काÞ ड के Íवqवान से कथा क| ÎतÎथ Îनि° चत कर कलव7 ती

उसके पÎत दयाशंकर, ब¯ चे और
9वीन ने उपवास रखकर कथा सने । कथा प
ु ू
रे ÍवÎध Íवधान के साथ Íवqवान रमेश पजार| ने

स+ प7 न करवायी। कलव7 ती

दे वी पहले भगवान का परसाद 9वीन को अपने हाथ| से Íखलाया । इसके
बाद पÎत-पc नी और पÍरवार परसाद 0हण Íकया । कलव7 ती

दे वी बहत खश थी । आसपास के


पÍरवार| म ह| नह|उन पÍरवार| म भी परसाद पहं चाई िजनसे काफ| दÍरयां भी थी । लोग पछते कौन

ू ू
सी म7 नत कर रखी थी भाभी तो वह बोलती दे वर क| नौकर| के Îलये । म7 नत पर| हो गयी । लो

Í9या भाभी परसाद घर म बहत काम फै ◌ेला पड़ा

है । सब क| छÇ

ट| पर है आज कथा सनने के

Îलये ।
Í9या-9वीन सगा दे वर है ।
कलव7 ती

दे वी कहती न सगा है न दर का पर आदÎमयत के नाते सगा हो गया है ।

Í9या-गैर के Îलये इतना बड़ा c याग ।
कलव7 ती

दे वी-बहन कमायेगा खायेगा सखी रहे गा । हमार| नेक| माने चाहे मत माने पर दसर| के
ु ू
साथ वैसा करे जैसा उसके साथ हमारा पÍरवार Íकया है । Í9या बहन शाम को भजन है आप भी
आना ।
Í9या-एक साथ दो काम कर रह| है ।
कलव7 ती

दे वी-भजन के Îलये बलावा तो दे ना ह| था । परसाद भी बाट रह| हं और बलावा भी दे दे
ु ु

रह| हं । बहन याद से आ जाना ।

Í9या-जFर आउं गी ।
कलव7 ती

-Í9या बहन म बहत खश हं । 9वीन क|
ु ू

नौकर| लग गयी । वह अपना खान-खच दे ख ले गा
। पÎत क| छोट| सी तनE वाह से बड़ी मि° क

ल से खच चल रहा था । अपनी हाल तो वह| थी कमाई
अठनी खरचा Fपइया । अब थोड़ी राहत Îमल जायेगी । 9वीन अपनी नौकर| पर चला जायेगा ।
अपना मकान लेकर रहे गा । उसीक नौकर| Îमल जाने से छाती का बोझ बहत कम हो गया ।

Í9या-बहन तमने भी तो अपनी औकात

नह|ं दे खी । न जान न पहचान दे वर बनाकर घर म रख ल|
उपर सा सारा खान -खरच उठा रह| हो । आज के जमाने म कोई सगे को पनाह नह|ं दे ता तम लोग

सड़क से उठाकर घर म रख Îलया 9वीन को । दे खना नौकर| 7 वाइन करने के बाद ÎगरÎगट जैसे
रं ग बदल लेगा ।
107
कलव7 ती

दे वी-बहन 9वीन से हम कोई उ+ मीद नह|ं है । वह तो अपना और अपने घर-पÍरवार
को दे खे बस । हमने कोई आस मन म रखकर पनाह नह|ं द| थी । बस इतनी सी आसा था◌ी Íक
भखे

-¯ यासे पागल| क| तरह दर-दर ध4 के खाने वाले बेरोजगार 9वीन का जीवन सधर जाये । सधर
ु ु
भी गया भगवान ने हमार| सन भी ल| । कथा भी हो गयी । शाम को भजन करवा रह| हं । इसके


बाद 9वीन जहां चाहे रहे ।
शाम को भजन शF हो गयी ÎनधाÍरत समय पर । नौ बजे तक भजन चल| । भजन के समा¯ त


होने पर सभी आग7 त

को को चाय के साथ भार| ना° ता परोसा गया । कथा,भजन सभी काय Hम
ÍवÎधपव क सफल हो गया ।

दयाशंकर के कÍठन 9यास के बाद 9वीन को नौकर| Îमल गयी पर काफ| व4 त लग गया । एहसान
के बदले 9वीन को दयाशंकर और उसके पÍरवार म कÎमयां नजर आने लगी । वह ब¯ च| के साथ
कभी-कभी बq तमीजी पर उतर जाता । यह| ब¯ चे 9वीन के Îलये अपने गलक भी तोड़

चके थे ।

दयाशंक और कलव7 ती

दे वी कभी भी 9वीन को अपने ब¯ च| से अलग नह|ं माना । तीनो ब¯ च| के
साथ उसे भी खाना परोसती ता◌ाÍक परायापन न झलके । ब¯ च| के साथ खाने सोने बैठने सार|
सÍवधा 9ा¯ त

थी 9वीन को । मोट| तनE वाह पाते ह| 9वीन िजस थाल| म खाया उसी म थकने

लगा पर दयाशंकर और कलव7 ती

नजरअं दाज कर दे ते । यह| 9वीन दयाशंकर के पÍर÷म क| रोट|
कई साल| से फोकट म तोड़रहा था । न तो 9वीन ने एहसान माना न ह| उसके पÍरवार के लोग| ने
। पÍरवार के लोगो ने तो इ~ जाम तक मढ Íदया Íक 9वीन क| कमाई पांच साल से हड़प रहे है उपर
से Íढढोरा पीट रहे है भलाई का अरे पांच Íदन कोई अपने सगे को शहर म रखने को तैयार नह|ं है
दयाशंकर पांच साल से 9वीण को आ÷य दे रहा है । मन म राम बगल म छर| । Íदखाने को तो


हमदद| है पर 9वीन क| कमाई डकार रहे है । 9वीन के पÍरवार वाल| ने इ~ जाम मढ Íदया
दयाशंकर के Îसर पर जबÍक 9वीन बेरोजगार था । दयाशंकर अपनी◌े कमाई क| रोÍटयां रोÍटयां
मफत म तोड़

वा रहा था।
दयाशंकर क| काक| मधमतीदे वी जो परदे स म रहती थी कलव7 ती
ु ु
से पछ|

कलव7 ती

सह| -सह|
बताओ 9वीन कछ

नह|ं कमा रहा है ।
कलव7 ती

दे वी-नह|ं काक| । ऐसी कोई 9ोफे शनल Íड0ी तो उनके पास नह|ं है Íक नौकर| Îमल जायेगी
। कोÎशश कर रहे है ।
मधमतीदे वी

-फोकट म रोट| तोड़वा रह| हो ?
कलव7 ती

दे वी-यह तो 9वीन अ¯ छ| तरह बता सकते है ।
मधमती

-चार Íदन तो परदे स म कोई Íखलाता ह| नह|ं तम बरस| से 4 य|

Íखला ररह| हो ।
कलव7 ती

-Íर° ते के नाते ।
मधमती

-9वीन Íर° तेदार कै से हो गया ।
कलव7 ती

-आदÎमयत के Íर° ते के नाते ।
मधमती

-इतना बड़ा धमाc मा 4 य| बन रहे हो । अरे शहर परदे स म कोई Íकसी को फोकट म नह|ं
Íखलाता ।
कलव7 ती

-हम तो Íखला रहे है । अपने ब¯ च| के Îनवाले म कटौती करके ।मेरे उपर नह|ं नेक| के
उपर इ~ जाम मढ रह| हो । काक| आप जैसे लोग| क| वजह से मसीबत म लोग हाथ लगाने से

108
कतराते है । हम तो स¯ चे मन से Îनः1 वाथ एक बेरोजगार क| मदद कर रहे है जो भखे

-¯ यासे
पागल| क| तरह भटक रहा था । काक| मसीबत म आदमी क| मदद करना अपराध होता है तो म

यह अपराध करती रहं गी ।

मधमती

-9वीन खद एक Íदन परदा उठा दे गा ।

कलव7 ती

-नौकर| Îमलने के बाद । अ¯ छा Íदन आते ह| अ¯ छाई म बराई नजर आ

ने लगती है । खै र
इसक| भी हमे परवाह नह|ं है । हमने तो नक| क| है । एक पÍरवार को स+ व

² द बनाने क| कोÎशश
क| है तन मन और धन से भी ।
मधमती क| जहर|ल| बाते सनकर कलव7 ती
ु ु ु
को ग1 सा

तो बहत आया पर वह इस जहर को पी गयी

। यह बात कलव7 ती

दयाशंकर से बतायी । दयाशं कर पीछे न हटने क| कसम खा Îलया । छोटे बड़े
सभी लोग| के सामने 9वीन क| नौकर| के Îलये Îगड़Îगडाया आÍखरकार नौकर| भी Îमल गयी ।
9वीन के पतझड़भर| िज7 दगी म बस7 त छाने लगा । वह भी इस तर4 क| के अÎभमान म आ गया
और दयाशंकर क| नेक| क| बदनेक| Îगनाने लगा । 9वीन का बड़ा भाई जो कभी कभी दयाशंकर से
फोन पर बात कर लेता । उसके बाप िजनके Îलये दयाशंकर और उसका पÍरवार फÍर° ता था ।
9वीन क| नौकर| लगते ह| सब बदल गये । कोई बात तक नह|ं करना चाहता था पर Tढ Îन° चयी
दयाशंकर नेक| क| राह से पीछे नह|ं हटा । न ह| अपने मन का मलाल 9वीन के सामने 9गट Íकया

9वीन म भी बहत बदलाव आया गया । ज~ द|

जाना दे र को आना और ¯ यवहार म कषैलापन भी
समार हो गया । 9वीन का कषैलापन दयाशंकर और उसके पÍरवार को घाव करने लगा । एक Íदन

9वीन लाल-पीला होता हआ बोला भाभी त+ हा


रे ब¯ चे मझे

परे शान करने लगे है ।
कलव7 ती

दे वी-4 या कह रहे हो 9वीन भइया ।
9वीन-हां ठ|क कह रहा हं ।

कलव7 ती

-मेरे ब¯ चे तो तमको बहत ¯ या


र करते है । बड़ा बेटा Îचराग अपनी नई साइÍकल तमको

Íदया । िजसे तम चला कर तोड़

डाले । पंचर तक नह|ं बनवाये । Îचराग,गंजन बीÍट

या शोभा त+ हा

र|
Íकतनी मदद Íकये अपने ग~ ल

क तक त+ हा

रे Îलये तोड़Íदये । वह| तमको परे शान कर रहे है ।

9वीन-तम 4 यो

मानेगी ?अपने ब¯ चो क| गलती । समझा लो ब¯ चो को ।
कलव7 ती

-Íकतने बरस से इस घर म हो ।
9वीन-साढे चार
कलव7 ती

दे वी -इतने बरस से ये ब¯ चे तमसे 1 ने

ह करते रहे । आज झगड़ा 4 य| कर रहे है ।
9वीन-त+ हा

रे ब¯ चे है तम जानो ।

कलव7 तीदे वी-समझ गयी । भईया पहले एक अ¯ छा सा घर दे ख लो Íफर Îशफट हो जाना ।
9वीन-मझे भी इस माहौल म रहना अ¯ छा

नह|ं लगता ।
कलव7 ती

दे वी-अ¯ छ| बात है । खब तर4 क|

करो । अपने बाल ब¯ च| को पढाओ Îलखाओ । एक बात
² यान रखना ।
9वीन-4 या?
कलव7 ती

-Íकसी क| नेक| को बदनाम नह|ं करना ।
9वीन-म भी समझता हं ।

109
कलव7 ती

दे वी-भइया दो मह|ने म आये बदलाव से म भी पÍरÎचत हो गयी हं । मैने जो कछ


Íकया है इंसाÎनयत और परमाथ के नाते Íकया है । जो तमने Íकया है मतलब बस Íकया है और

कर भी रहे हो ।
9वीन-हम मतलबी है ।
कलव7 ती

दे वी-तम अ¯ छ|

तरह समझ सकते हो ।
9वीन-4 या
कलव7 ती

दे वी- तम कह रहे हो ना साढे चार साल इस घर म रहे । इस घर का अ7 न

-जल 0हण
Íकयो ।
9वीन-हां
कलव7 ती

दे वी-तमसे घर के Íकराये या खोराक| क| कभी मांग क| गयी ।

9वीन-नह|
कलव7 ती

दे वी-नेक| के माथ अपयश 4 य| ? भइया मझसे जो हआ कर Íदया । अगर मेर| नेक|



तमको खोट नजर आती है तो Hमा कर दे ना । रह| बात अलग रहने क| तो त
ु ु
म जब चाहो तब से
रहना शF कर दो । मझसे कोई मदद चाÍहये तो Îनःसंकोच कह दे ना ।
ु ु

9वीन-एहसान करने को रहने द|िजये ।
कलव7 ती

दे वी-भईया अÎभमान मत करो । त+ हा

र| तर4 क| म इस घर क| दआये शाÎमल है ।

9वीन-हो सकता है ।
कलव7 ती

दे वी-तमको याद

नह|ं ?
9वीन-नह|ंक

कलव7 ती

दे वी-हम भी नह|ं चाहते याद रखो । याद रखना है तो इतना जFर याद रखना Íक Íकसी
जFरतम7 द क| मदद करना अपना फज समझना । यह| हमने Íकया बस ।
9वीन-मझे जFरत

नह|ं है ।
कव7 ती

दे वी-जFरत पड़े गी या नह|ं यह तो व4 त क| बात है । पद दौलत का अÎभमान अ¯ छ| बात
नह|ं । Îचराग के पापा ने हाथ जोड़-जोड़कर नौकर| लगवा Íदया । उनक| पसीने क| कमाई का नमक
खाये अब जFरत नह|ं है । Îचराग के पापा अपने Îलये Íकसी के सामने हाथ नह|ं फै लाये पर त+ हा

रे
Îलये Íकस Íकस क| चौखट पर माथा नह|ं पटके । तम हो Íक उनक| नेक| को दc का
ु ु
र रहे हो ।हमारे
ब¯ च| को गाल| दे रहे हो । चाटे मार रहे हो । अरे हमारे ब¯ च| ने त+ हा

रा 4 या Îलया है । त+ हे


Íदया ह| है । खै र मत मानो नेक| पर खशी मन से जाओ । अब तो त+ हे
ु ु
सहारे क| जFरत भी नह|ं
है । कमाओं,खाओ खब तर4 क|

करो । हमार| नेक| को मत मानना पर नेक| को गाल| तो मत दो
िजससे दसरे Íकसी क| मदद करने से कतराये ना ।

9वीन-बहत एहसान जता Íदया । सार| उH त+ हा


रे एहसान के तले दबा रहं गा 4 या

?
कलव7 ती

दे वी-नह|ं भईया हमारा कै सा एहसान । हमने जो कछ Íकया भगवान ने करवाया । हम तो

ठ|क से अपने ब¯ च| क| परवÍरश नह|ं करने क| है Îसयत रखते पर उपर वाला का चमc कार ह| है
Íक त+ हा

रे जैसे आदमी को साढे चार साल तक अपने हाथ से गरम-गरम रोÍटयां Íखलायी।
बेरोजागर| के घाव पर आदÎमयत का म~ हम लगायी ये सब हमार| और हमारे पÍरवा क| गलती थी
। ब¯ च| ने सगा काका मानकर गलती कर Íदया । Îचराग के पापा ने नौकर| लगवाकर गलती कर
110
Íदया । खै र अब तो सHम हो गये हो । सब कछ खर|द सकते हो दौलत से पर 9वीन बाब
ु ू
सं1 कार दौलत से नह|ं खर|द पाओगे। हमारे सं1 कार म शाÎमल है दसरे क| मदद करना । भले ह|

हमारे हाथ तंग रहे करते रहे गे ।
9वीन-ताना मार रह| हो ।
कलव7 ती

-ताना मारने वाल| म कौन होती हं । जहां पर खड़ी

हं 1 वा

Îभमान है अÎभमान नह|।
हक|कत बयान कर रह| हं । मै भी बाल

-ब¯ चे दार हं । मैने तो अपना समझकर Íकया पर तमको


परायापन नजर आने लगा है तो वह त+ हा

र| नजर का बदलाव है । मै तो हमेशा ह| दÍखयो का

मदद करने के Îलये तैयार रहती हं । वह| Íकया है । ठ|क है तमको तकल|फ हो रह| है तो मकान


ले लो । बनाओ खाओ । आने जाने म दस Fपया 4 य| खच करते हो । जो हम करना था कर Íदये
। तम सदा खश रहो हमार| दआये सदा त+ हा
ु ु ु ु
रे साथ रहे गी भले ह| तमने ने

क| के बदले हं सते जE म
4 य| न Íदये ।
शोभा-चाचा चाय के साथ और 4 या लाउं ।
9वीण-कछ नह|ं ।

शोभा-आज कछ 4 य|

नह|ं ।
9वीन-म जा रहा हं । बहत दे र हो गयी । दो1 त
ू ु
इंतजार कर रहे है ।
कलव7 ती

दे वी-चाय पी लो खाना भी बन गया है खा कर दो1 त| से Îमल लेना ।
9वीन-दो1 तो से Îमलना जFर| है । ना चाय ना खाना । इस घर का नमक बहत खा Îलया । अब

नह|ं कहते हए उठा गाड़ी

1 टाट Íकया । गाड़ी से उठा अÎभ◌ामन का धआं दयाशंकर के घर पर ऐसे

फै ल गया जैसे खाने के बाद 9वीन ने थाल| म थक Íदया हो ।

न7 दलाल भारती
24-दरार
संय4 त

पÍरवार था ।घर बाहर खब वैभव था। मां राजव7 ती

दे वी और बाप गनेश के साथ तीन|
भाईय| गगन,मगन और करन का पÍरवार एक साथ एक घर म एक रसोई का पका भोजन खा रहा
था । Íकसी 9कार क| कोई तंगी नह|ं थी ।कभी कोइ◌्र मसीबत आ भी गयी तो सब Îमलकर

मकाबला कर लेते थे

। सब कछ संय4 त
ु ु
था । गगन और मगन शहर म आटा पीसने का धं धा
Îमलकर करते थे । अ¯ छ| कमाई हो जाती थी और हर माह मÎनआड र भेजते रहते थे । संय4 त


पÍरवार क| गह1 थी

अ¯ छ| तरह चल रह| थी । गांव के लोग गनेश के बेट| का उदाहरण दे ते नह|ं
थकते थे । बढे गनेश क|

मान-जान भी खब थी आसपास के गांव म । गनेश क| खद के गांव म
ू ु
भी काफ| 9Îत* ठा था । गांव वाल| ने उ7 हे चौधर| क| उपाÎध से नवाज Íदया था । गगन शहर म
सेठजी के नाम से मशहर था । वह कस| पर बैठा रहता बाक| सब काम मगन स+ भा


लता था। गने श
का छे ◌ाटा बेटा करन पढाई के साथ बाप का हाथ भी खेतीबार| म बंटाता । बाप-बेटे क| मेहनत से
खेत-खÎलहान भी भरा रहता था । पÍरवार क| चाभी राजव7 तीदे वी और गनेश के हाथ म थी ।
गनेश चौधर| का मझला बेटा मगन बड़ी मेहनत,लगन और ईमानदार| के साथ चि4 कय| का कारोबार
दे ख रहा था । उसक| मेहनत को दे खकर ल+ मी जैसे ठहर गयी थी । गगन च4 क| सेठ| म बड़ा
नाम हो गया था । माÎलकाना उनके हाथ म था । गगन ने अपने बेटो क| पढाई और बेÍटय| के
« याह गौने पर खब खच Íकये । बेट| के « या

ह म भी Íदखावे म तÎनक भी कोतहाई नह|ं बरती गयी
111
थी । गगन सेठ 7 यादा होÎशयार थे । च4 क| से हई कमाई का आधा से अÎधक Íह1 सा

खद रख

लेते । बाक| के Fपये म से गांव भेजते, एक दो जो कमचार| थे उनक| तनE वाह दे ते ।
खराक|

,Íबजल| आÍद खच का Îनपटान करते । पाके ट खच के नाम पर सौ प¯ चा स F¯ ये कभी-कभार
मगन के हाथ पर भी रख दे ते ।मगन से काम Íकराये के मजदर जैसे ह| लेते । हाड़

फोड़मेहनत के
बाद गांव से शहर तक Îशकायत भी करते रहते Íक मगन मन लगाकर काम नह|ं कर रहा है च4 क|
का ¯ यापार घाटे म जाने लगा है । मगन बड़े भाई को बाप के समान आदर दे ता था । नतीजन
कभी सवाल -जवाब नह|ं Íकया । गगन भईया जो कहते Îसर लटकाये मान लेता था । गगन के
9Îत तÎनक संदे ह वह पाप समझता था पर7 त

गगन के मन म चोर घर कर चका था ।

गांव म गनेश चौधर| छोटे बेटे के साथ खेत म जटे हए थे । गगन क| समझाईस पर करन पढाई


छोड़कर खेतीबार| के काम म रम गया । करन पढाई Îलखाई का 7ान खेती म अजमाने लगा ।
नतीजन पैदावार म खब बढोतर| होने लगी । खाद

-पानी क| ¯ यव1 था शहर से आ रहे मÎनआड र से
हो जाती । कोठा-अटार| अनाज से पटा रहने लगा ।गनेश चौघर| के मान-जान म भी इजाफा हआ ।

वे अपनी बेट| क| तर4 क| से काफ| खश था ।राजव7 ती

दे वी का भी घर क| मÍहलाओं के उपर खद

दबदबा था । पÍरणाम1 वFप पÍरवार तर4 क| कर रहा था । ब¯ चे पढ Îलख रहे थे ।सय4 त

पÍरवार
का सख भरपर गनेश चौधर| क| चौखट पर बरस रहा था ।
ु ू

गगन क| पc नी तो शहर म रहती थी पर गनेश कछ Íदन के Îलये उसे गांव बला लेता और
ु ु
मगन
क| पc नी को भेज दे ता । Îमलजलकर सब हं सी

-खशी से संय4 त
ु ु
पÍरवार का सख भोग रहे थे ।

गगन के बेटे बड़ी-बड़ी 4 लास म पढ रहे थे पर मगन का इकलौता बेटा कवलदार खेतीबार| म लगा
Íदया गया 1 क

ल जाने क| उH म । शFआत म 1 क
ु ू
ल जाते समय रोने Îच~ लाने लगा । एकाध Íदन
तो 1 क

ल से भाग भी आया Íफर 4 या गगन का आदे श जार| हो गया Íक करन के साथ कवलदार
खेतीबार| के गन सीखेगा। गनेश के चाहते हए भी कवलदार पढ


नह|ं पाया । मगन ने बेटे के
भÍव* य क| भी सÎध

नह|ं ल| । वह तो गगन के Îलये ल+ मण बना हआ था पर भाई गगन उसके


हक को समेटने क| सािजश म जटा हआ था चपके
ु ु

-चपके ।

गनेश चौघर| अचानक बै ठे -बेठे 1 वग को Îसधार गये । अब पÍरवार का परा क7 çो

ल राजव7 तीदे वी के
हाथ म तो आ गया पर रह -रह कर गगन और उसका दबाव आंस दे जाता । खै र राजव7 ती

दे वी
Íह+ मत नह|ं हार| संय4 त

पÍरवार के सोधेपन को बचाये रह| । बेचार| कब तक बचाती एक Íदन वह
भी दÎनया से कच कर गयी ।
ु ू

गनेश चौधर| और राजव7 ती के गजरते ह| गगन के मन का डकै त पर| तरह जाग उठा । वह शहर
ु ू
से लेकर गांव तक क| स+ पÎत पर क« जा जमाने क| भरसक कोÎशश करने लगा । ° पैतक स+ प

Îत
म बराबर का बंटवारा तो हआ पर भाईय| के सामÍहक कमाई के धन से खड़ी


का1 तकार| को अपनी
अके ल| क| कमाई से खर|द| कहकर Îछन Îलया । गगन शहर क| चि4 4 य◌ो◌ं पर पर| तरह से

क« जा कर Îलया । परे कारोबार क| लगाम गगन अपने हाथ म ह|

नह|ं अपने नाम करवा Îलया ।
कछ ह| मह|ने

◌ा◌ं म मगन को च4 क| से बेदखल कर Íदया । पÍरवार म दरार पड़ना तो गनेश के
मरते ह| शF हो गयी थी । राजव7 ती

दे वी के मरते ह| संय4 त

पÍरवार का स|धापन चौख से Fठ
गया । वह| लोग जो एक दसरे के Îलये जान दे ने के Îलये तैयार थे अब एक दसरे के Íवरोधी हो
ू ू
गये थे ।
112
मगन धं धा से बेदखल होने के बाद रोट| को न1 तवान हो गया । भाई के द° म

न बन जाने
के बाद साल| इधर उधर नौकर| करता रहा पर वह कामयाब नह|ं हआ जैसे उसक| तकद|र ह| Fठ

गयी । आÍखरकार वह थक हारकर गांव आ गया । गांव म परख| क| Íवरासत का हा बंटवारा हआ


। दस-दस बीसा जमीन Íह1 से आयी । बाक| जमीन जो भाईय| के मेहनत के बलबते खर|द| गयी थी

उसका तो गगन ने बंटवारा ह| नह|ं होने Íदया खद के आÎधपc य

म ले Îलया । मगन और करन का
पÍरवार सड़क पर आ गया । गगन के पास दौलत और जमीन बेशमार हो गयी । मगन और करन

का पÍरवार दसरे के खेत|

म काम करने को बेबस हो गया । दस बीसा जमीन से तो साल भर के
Îलये अ7 न पैदा नह|ं हो सकता था । पास म Fपया भी नह|ं था Íक कोइ◌्र दसरा रोजी

-रोजगार कर
। गगन के मन का डकै त भाईय| को खेÎतहर मजदर बना Íदया ।

कहावत है ना जबरा मारै रोवै ना दे । वह| Íकया गगन भी भाईयो का हक Îछन Îलया ।खद तो सेठ

बन बैठा और भाईय| को खेÎतहर मजदर बना Íदया । भाईय| को बराबर का Íह1 सा

Îमल जाता तो
मगन और करन के उपर मसीबत क| Íबजल| न Îगरती । दख तो इस बात का था Íक यह Íबजल|
ु ु
एक मां के पेट से पैदा हए भाई गगन ने Îगरायी थी ।

कछ बरस पहले िज

स संय4 त

पÍरवार क| Îमशाल द| जाती थी अब कोई नाम लेने वाला नह|ं था ।
एक च~ हे

क| जगह तीन च~ हे

जलने लगे थे । दख

-तकल|फ सब अपने-अपने भगत रहे है थे

जबÍक यह| लोग एक क| तÍबयत खराब होती थी तो परा पÍरवार एक दे खरे ख करता था अपना दख
ू ु
समझकर । गगन के लोभ ने सब कछ तबाह कर Íदया । Íबखर गया सं य4 त
ु ु
पÍरवार का स|धापन
। मगन और करन का पÍरवार महलनमा घर से बेदखल होकर झोपड़ी

म रहने को बेबस हो गया ।
मगन भाई के मोह म पड़कर लाचार हो गया ।एक बेटा और तीन पͳयां सभी ÎनरHर रह गये ।

लड़के -लड़Íकय| का « याह-गौना मामा-मामी के सहयोग से हो गया । गगन अपने वैभव पर इतरा रहा
था । मगन और करन आंस से रोट| गील| कर रहे थे । करन अपनी दयनीय दशा का िज+ मे

दार
गगन को खलेआम ठहराता । ठहराता भी 4 यो

ना उसी ने तो उसे शहर नह|ं जानने Íदया था ।
करन शहर जाकर कमाने क| िजद Íकया भी था पर गगन ने कहा था हम तो कमा ह| रहे है सभी
को शहर म जाकर कमाने क| 4 या जFरत गांव क| जमींदार| को भी तो दे खने वाला चाÍहये । मां-
बाप और भाई गगन क| बात| म आकर बेचारा करन शहर क| ओर Fख नह|ं Íकया । गगन के
बताये रा1 ते पर चल पड़ा जहां उसे छल ह| Îमला ।
आÎथ क तंगी से लाचार होकर करन शहर जाकर (ट गारा करने लगा । उसक| गह1 ती

क| गाड़ी कछ

लाइन पर आने लगी ।(ट गारे का काम जब तक चलता । काम करता कमाई से जो कछ बचता

बाल-ब¯ च| का मÎनआड र कर दे ता । ब7 द हो जाता तो गांव आकर खेत माÎलक| के खेत म काम
करता कोई परमाने7 ट नौकर| तो थी नह|ं शहर मे।
मगन के Íदन तंगी म गजरने लगे । वह Íफर शहर क| ओर भागा । शहर म वह च4 क|

चलाने क|
नौकर| कर Îलया । चार छः मह|ना नौकर| कर ह| पाया था Íक खांसी से परे शान रहने लगा ।कभी -
कभी खन क| उि~ ट

यां तक हो जाती था । डा4 टर को Íदखाने के बाद पता चला Íक वह ट|बी का
रोगी हो गया है । बचपन से गगन के आÎधपc य का चि4 कयां जो चलाया था । च4 का क| आटा
धीरे -धीरे उसके फे फड़े को छलनी कर गया था । ट|बीक| बीमार| मगन को पटक द| । काम करना
मि° क

ल हो गया । शहर से वह भागकर गांव आ गया । Fपये पैसे क| तंगी के साथ अनाज क| भी
113
कमी थी । बंटवारे म Îसफ दस बीसा खेत के अलावा और कछ

नह|ं Íदया था गगन ने । वह|
खेत ह| मगन के पास बड़ी पंजी थी । काफ| सोच Íवचार कर मगन ने खेत बेचकर दवाई शF तो
ू ु
कर Íदया पर दवाई का कोई असर नह|ं हआ । दस बीसा खेत जो अनपढ बेटे के जीने का जÍर

या
था वह भी हाथ से Îनकल गया । मगन सगे बड़े भाई गगन के षणय7 ³ का Îशकार होकर ट|बीक|
भेट चढ गया । मगन क| पc नी बेचार| कलावती के उपर मसीबत का पहाड़

Îगर पड़ा । उसके पास
कफन तक का इ7 तजाम न था । गगन ने एकदम से आंखे मंद ल| थी । गगन राजा और मगन के

आÎ÷त रं क हो चके थे। बहनोई के मौत क| खबर भाई टे कच7 द

को लगी । वह बेटे के साथ बहन
के दस कोस दर घर क| ओर दौड़

पड़ा । बहन के घर का नजारा दे खकर वह दं ग रह गया । मगन
क| लाश घर म पड़ी हई थी । कलावती ब¯ च|

के साथ छाती पीट-पीट कर Íवलाप कर रह| थी ।
टे कच7 द-बहन का ढाढस बंधाया उसके आंस प|छा । दाह सं1 का

र म लगने वाल| व1 त

ओं का इंतजाम
Íकया । सरज डबते
ू ू
-डबते मगन क| मत दे ह गोमती नद| के Íकनारे पहं ची । अ~ प
ू ृ ु
वय1 क बेटा
कवलदार ने मखाÎगन Íदया मगन के मत दे ह का ÍवÎध Íवधान के साथ अि7 त
ु ृ
म सं1 कार स+ प7 न
हो गया।
कलावती के भाई ने अि7 तम सं1 कार से लेकर तेरहवीं तक का परा ब7 दो

ब1 त Íकया । र|Îत-Íरवाज
के साथ तेरहवी भी हई । मगन क| मौत के बाद कलावती बेसहारा हो गयी । जहां तक मदद होती

भाई भतीजे करते । रोजी-रोट| का जÍरया दस बीसा खेत भी Íबक चका था मगन के इलाज के Îल

ये
। दस बीसा खेत ल|ल कर भी ट|बीक| बीमार| मगन को भी ल|ल गयी ।
स7 तोष के साथ इकलौते बेटे का भÍव* य संवारने के Îलये कलावती लेकर दसर| के खेतो म मजदर|
ू ू
करने लगी । करन भी रोजी-रोट| के Îलये संघष रत् था। कलावती को घर के नाम पर बस एक मं ड़ई
और एक कमरे का न7 हा से क¯ चा घर Îमला था जो ढह चका था । Îसर छपाने के Îलये बस मंड़
ु ु

ह| बची थी । लोग कहते नह|ं थक रहे थे Íक भाईय| का हक मार कर कब तक आबाद रहोगे गगन
? मगन क| Íवधवा के ढहे एक कमरे के छोटे से घर और करन के साबत क¯ चे

घर के बीच
गगन क| महलनमा हवे ल| Íर° ते

के बीच दरार और घर| के बीच द|वार खींच कर हक हड़पने क|
चगल| कर रह| थी ।

24-पेट भर रोट|
भयंकर घनघोर काल| रात और हवा क| सांय-सांय Îसहरन पैदा कर रह| थी । कोहरे से पर| ब1 ती


ढं क चक| थी । पआल के Íब1 त
ु ु
र और रजाईय| म Îलपटे लोग| क| हÍq डयां बोल रह| थी । कc ते


ठÞ ड से Îनजात पाने के Îलये जोर -जोर से भौककर खद को गरम करने क| अथक कोÎशश कर रहे

थे । कÞ डीराम क| पc नी इतवÍरया 9सव पीड़ा से कराह रह| थी । मÍहलाय इतवÍरया क| पीड़ा को
दे खकर भगवान से 9ाथ ना कर रह| थी Íक हे भगवान बेचार| इतवÍरया क| पीड़ा को दर करो । कछ
ू ु
मÍहलाय पआल जलाकर कमरा गरम करने क| बार

-बार कोÎशश कर रह| थी । कÞ डी नीम के चबतर

पर बैठा तारे Îगन रहा था । पहरा दे ने वाले लोग कÞ डीराम को बेचै न दे खकर ठमक ठमक गये ।
जैकरन पछा 4 य|

तारे Îगन रहा है कÞ डी ?
कÞ डीराम-जैकरन भइया घरवाल| क| तÍबयत बहत खराब है ।

इतने म ब¯ चे के रोने क| आवाज कान| को सहलाने लगी ।
जैकरन-दख दर हो गया । अब तो खश हो ।
ु ू ु

114
कÞ डीराम -हां भईया ।
शÎनचर| अरे कÞ डी कहां है बधाई हो त बेटे का बाप बन गया । कÞ डी

दौड़कर शÎनचार| काक| का
पैर छआ ।

पहरा दे ने वाला जc था बहत बधाई हो कÞ डी

। जागते रहो-जागते रहे कहते हआ आगे बढ गया ।

शÎनचार| काक| ब1 ती क| औरत| को सोहर गाने के Îलये बलाने दौड़

पड़ी ।
ब¯ चे के ज7 म से छ Íदन तक सोहर क| 1 वर लहÍरयां पर| ब1 ती

को खशी क| बयार से आनि7 द


करती रह| । छठ| के Íदन तो बÍढया दावत का इ7 तजाम भी हआ था । इसी Íदन इतवÍरया काक|

ब¯ चे को कÞ डीराम क| गोद म रखते हए बोल| ले दे ख ले बेटे का मंह Íकतना स7 द

ु ु
र है । यह| बेटा
तेरे जीवन के सारे दख

-दद को हरे गा ।
कÞ डीराम-हां काक| अभी तो ये पÍरवार पेट भर रोट| के Îलये जझ रहा है । प

हले तो इस भतनाथ

क| परवÍरस अ¯ छ| तरह हो जाये ।
शÎनचर|-4 या कहा ?
इतवÍरया-भतनाथ ।

शÎनचर|-भतनाथ मतलब भोलेनाथ ।सचमच यह ब¯ चा
ू ु
संकटमोचन साÍबत होगा । अरे सन| कÞ डी


ने अपने बेटवा का नामकरण कर Íदया ।
रणछोड़-4 या ?कÞ डी ने नामकरण भी कर Íदया ।
इतवÍरया-हां ।
रणछोड़-4 या नाम रखा कÞ डीराम बताओ तो सह|।
शÎनचर|-भतनाथ ।

रणछोड़-लो पंचो कÞ डी के घर भगवान शंकर Íवराज गये है । शंकर भगवान क| जय-जयकार तो
कर दो एक बार । रणछोड़के आहवाहन पर जय-जयकार भी हो गयी ।
समय के साथ भतनाथ बढने लगे ।भतनाथ क| उH के साथ ह|
ू ू
कÞ डीराम के सपने भी बढने लगे
जमीदार के खेत म उH गंवाते गंवाते । भतनाथ के सात साल के होते ह| कÞ डी

राम 1 क

ल म
दाÍखले के Îलये ले गया पर दाÍखला नह|ं हआ भगा Íदया गया। अछत का बेटा जो था । होश


स+ भालते ह| भतनाथ ने बंधवामजदर न बनने क| कसम खा Îलया
ू ु ू
। दं बंग जमीदार| ने बहत

कोÎशश Íकये पर अटल रहा अपनी कसम पर । कई बार मार भी खाया पर खेत माÎलको के खेत
म पैर नह|ं रखा । भतनाथ शहर परदे स क| तरफ Fख न कर मां बाप से Îछप

-Îछप कर नाच-गाने
का गर सीखने लगा । भतनाथ के हठ को दे खकर उसक| मां और बाप परदे स जाने क|
ु ू
सलाह दे ते
पर वह एक Íदन मां बाप के सामने नाच मÞ डल| म शाÎमल होने क| मंशा जाÍहर कर Íदया ।
श4 ल सरत से अ¯ छा

था नाचते नाचते वह राजा के रोल म आ गया । राजा के रोल म जमीदर|
के सामने मेज के उपर कस| रख कर बैठता तो वे भी ताल| पीटने से खद को रोक
ु ु
नह|ं पाते ।
यह| तो भतनाथ क| कसम थी । भतनाथ नाच मÞ ड
ू ू
ल| क| वजह से बहत 9Îस@ हो गया । राजा

के रोल म 9ेमावती नामक क7 या उसे दे खकर मोÍहत हो गयी । अ7 ततः उसके साथ साथ फे रे
लेकर सात ज7 म के Îलये भतनाथ क| हो गयी । भतनाथ के « या
ू ू
ह के साल भर के भीतर ह| मां
दखहरनी और बाप कÞ डी

राम पेट भर रोट| के Îलये संघष रत् भगवान के घर जा बसे ।
115
मां बाप को दÎनया से फस त पा जाने के बाद
ु ु
भतनाथ अके ला हो गया । तं गी के Íदन खलने

ते◌ा लगे पर वह अपनी 9Îत7ा नह|ं तोड़ा । नाच मÞ डल| से भी इतनी कमाई नह|ं हो पाती थी
Íक वह पÍरवार के खानखच का भार उठा सका । नाच मÞ डल| का काम Îसफ « याह गौने म ह|
चलता बाक| के नौ मह|ने बेठे म4 खी मारना पड़ता । इसी बीच 9ेमावती ने दो बेÍटयां के बाद
तीसरे क7 है या को ज7 म दे Íदया । क7 है या छ‘साल का कब हो गया पता ह| नह|ं चला ।
भतनाथ को

बेटे को पढा Îलखाकर बड़ा आदमी बनाने क| लालसा थी । वह दर गांव के 1 क
ू ू
ल म
गया । हे डमा1 टर साहब के सामने हाथ जोड़कर बोला मा1 टर साहे ब मझे अपने बेटवा का दाÍखला

करवाना है ।
मा1 टरसाहे ब-त+ हा

रा बेटवा Íकतने सा का हा गया है ।
भतनाथ

-छः साल का ।
मा1 टर-कल लेकर आना दाÍखला हो जायेगा ।
भतनाथ

-मेरा बेटा सचमच पढ पायेगा इस 1 क
ु ू
ल म ना ।
मा1 टरजी- जFर । जमाना बदल गया है । सबको बराबर| का अÎधकार है । छोटे बड़े सभी के
ब¯ चे एक साथ पढ-Îलख सकते है ।
भतनाथ

-काश म भी पढ पाया होता ।
मा1 टरजी-खद से 4 या

बात कर रहे हो ।
भतनाथ

-बचपन याद आ गया । कहते हए गमछा से दोने◌ा◌ंआंखे ढं क Îलया।

मा1 टरजी-भतनाथ म समझ गया त+ हा
ू ु
रे दद को । अब कोई त+ हा

रे ब¯ च| को 1 क

ल से नह|ं भगा
पायेगा । त+ हा

रा भी बेटा कले4 टर 4 या और उचे ओहदे पर जा सकता है पढ Îलखकर । हं सी-
खशी

घर जाओ । कल बेटवा को साथ ले कर आना ।
क7 है या का दाÍखला हो गया । क7 है या का मन पढाई म खब लगने लगा । एक

-एक कर पांचवी
जमात पास कर गया और अपनी उH से 7 यादा िज+ मेदार भी हो गया । मां -बाप का रोट| के
Îलये संघष उसे अ7 दर से आ7 दोÎलत कर Íदया । एक Íदन वह चपके से शहर भाग गया । जहां

मह|न| इधर उधर दर-दर क| ठोकरे खाने के बाद एक होटल म बत न धोने का काम पा गया ।
काम के साथ वह पाट -टाइम म Íबजल| का काम सीखने लगा । मां-बाप के संघष को कम करने
के Îलये हर मह|ने मÎनआड र भी करने लगा । कछ ह| मह|ने म क

7 है या अ¯ छा Îम1 ती बन गया
। होटल क| नौकर| को अलÍवदा कह Íदया । शहर म क7 है या Îम1 ³ी के नाम से जाना जाने लगा

इधर गांव म भतनाथ और 9ेमावती को क7 है

या के गौने क| Îच7 ता सताने लगी । « याह तो आं ख
खलते ह| कर Íदये थे । इस « या

ह क| याद भी क7 है या के Îचत म तÎनक भी नह|ं था 4 य|Íक जब
« याह हआ था तो वह ठ|क से चल भी तो

नह|ं पा रहा था । क7 है या के गौने का Íदन रखकर
भतनाथ ने अपनी बीमार| का तार क7 है

या को कर Íदया । तार पाक क7 है या घबरा गया । वह
संगी -साÎथय| से हथ-उधरा लेकर तर7 त

गाड़ी पकड़Îलया ।
क7 है या दो Íदन क| रे ल Íफर बस और Íफर आठ कोस क| पैदल थकाउं या³ा कर घर पहं चा । मां

दरवाजे पर ऐसे खड़ी थी जैसे वह आतर उतारने के Îलये खड़ी हो । क7 है या मां का पैर छआ ।

116
9ेमावती ने उसे गले लगा Îलया ।क7 है या रोते हए बोला मां Íपताजी कहां है । 4 या

हो गया
है उ7 हे ।
9ेमावती-कछ

नह|ं हआ है ।

क7 है या-मां वो तार ?
9ेमावती-झठा था । तमको बलाने का बहाना था ।
ू ु ु

क7 है या-4 य| मां ।
9ेमावती-तेरे गौने का Íदन पड़गया है जो ।
क7 है या-मां गौना रोक दो चार साल के Îलये ।
9ेमावती-नह|ं Fक सकता बेटा । तेरे ससर के कहने पर Íदन पड़ा

है । तेरे Íपताजी भी साल दो
साल Fकने का बात कर रहे थे । मैने अपने कान से सने थे पर तेरे ससर
ु ु
नह|ं माने । वे बोले
समधीजी मेर| बेट| जब तक धान थी अपने घर रखा अब चावल हो गयी है । अब म इस अमानत
को नह|ं सहे ज पाउ◌ू◌ंगा । एक बेट| के बाप के ऐसी Íवनती को तेरे बाप कै से टाल सकते थे ।
गौना तो आकर रहे गा । हां त जब तब अपने पै र को मजबती से Íटका
ू ू
नह|ं पायेगा तब तक बह

का बोझ हम उठायेगे । इतने म भतनाथ आ गया । भतनाथ का पैर छते हए बोला बीमार| हालत
ू ू ू

म इतना 4 यो भाग दौड़कर रहे हो Íपताजी ?
भतनाथ

-बेटा कार-परोजन का घर है भागदौड़तो करनी पडे गी ।
क7 है या -कै सा कार-परोजन ।
भतनाथ

-क7 है या क| मां दे खो कै सा अनजान बन रहा है । जैसे इसको पता ह| नह|ं हो गौने का
Íदन Îसर पर है ।
क7 है या-गौना अभी चार साल तक नह|ं आयेगा ।
भतनाथ

-क7 है या का हाथ पकड़कर खÍटया पर बैठाया Íफर अपनी पगड़ी उसके पांव पर रखकर
बोला बेटा ऐसे ह| तेरे ससर ने अपनी पगड़ी

मेरे पैर पर रख Íदया था यह कहते हए Íक बीÍटया

राधा अब चावल हो गयी है ।बेटा अÇ ठारह साल का हो गया है । गौना लाने क| उH भी है । रख
ले पगड़ी क| मान ।
बाप के अननय

-Íवनय के आगे क7 है या झक गया । गौना बड़े

धम

-धाम से आया । मह|ना भर के
बाद क7 है या साजव7 ती को मां-बाप क| अ¯ छ| दे खभाल करने क| Íहदायत दे कर शहर चला गया ।
चार -छ मह|ने म क7 है या शहर से आता हपता-प7 gह Íदन रहता Íफर चला जाता । साजव7 ती को
सास-ससर तÎनक ना भाते । वह क7 है

या के साथ शहर जाने क| िजद करती । वह कहता िजस
मां बाप को◌े हमारे लालन-पालन क| ÍफH म पेट भर रोट| नसीब नह|ं हई उ7 हे

कै से अके ला छोड़
द । अगल| बार साथ ले जाने का वादा करके चला जाता । दो बार तो सफल हो गया । भतनाथ

और 9ेमावती को बह के शहर जाने क| इ¯ छा

का पता चल गया तो वे खद ले जाने क| िजद पर

उतर आये । अ7 ततः क7 है या साजव7 ती को शहर ले जाने का राजी हो गया । चार-छ मह|ना शहर
म रखता Íफर गांव छोड जाता । शहर क| आहो-हवा ने साजव7 ती को सास-ससर का बागी बना

Íदया । वह उ7 हे फ

ट| आंख नह|ं दे खना चाहती थी । बह क| Îशकायत दोन| बढा


-बढ| क7 है

या तक
पहं चने

नह|ं Íदये । परा मान

-स+ मान दे ते ।समय क| मार को भतनाथ और 9ेमावती

नह|ं सह पाये
थक हारकर Îगर पड़े । बढे मां बाप क| दशा को दे खकर क7 है

या ने साजव7 ती को गांव छोड़ने का
117
फै सला कर Îलया 4 य|Íक शहर म एक खÍटया डालने भर का Íकराये का घर था । इतनी
इनकम तो थी नह|ं क| वह बड़ा घर ले सके । था तो पांचवी तक पढा Îलखा Îम1 ³ी । हां शहर म
मान स+ मान के साथ रह रहा था । यह| उसक| बहत बड़ी

कमाई थी िजसके Îलये गांव के अछत

सपन| क| बात समझते थे ।
क7 है या का फै सला साजव7 ती के मन म Íवgोह क| आग भड़का Íदया । जब तक क7 है या गांव म
रहता साजव7 ती सास-ससर क| दे ख

-रे ख का 1 वांग रचती । कल से घबराकर भतनाथ और 9ेमावती

बेटे के सामने बह क| Îशकायत न करते । खै र साजव7 ती

1 वांग का मखौटा उतर

फ क| और रौg
Fप म आ गयी । बढे सास ससर के बीच द|वार खींच द| । अब 4 या
ू ु
एक तवा दो रोट| क| नौबत
आ गयी । साजव7 ती पहले खद बनाती इसके बाद बढ| सास को रोट| बनाने दे ती । भतनाथ और
ु ू ू
9ेमावती क| छाया से परहे ज करने लगी । अपने बेट| और बेटो तक को बढे सास

-सस

र के पास
फटकने नह|ं दे ती थी । कभी कभी तो 9ेमाव7 ती क| Íपटाई भी कर दे ती ।आÍखरकार साजव7 ती
क| करतत| का पता क7 है

या को तो चल गया पर वह कछ कर

नह|ं सका 4 य|Íक वह बेट| बेटे को
छोड़कर मायके जाकर रहने क| िजद पर अड़जो गयी थी । आÍखरकार ब¯ च| के उजड़ते भÍव* य
को दे खकर क7 है या भी हार मान गया । जहां तक उससे होता मां बाप क| सेवा कर लेता ।
साजव7 ती क| चोर| मदद कर दे ता । समय क| मार पतोह के अc या

चार के आगे भतनाथ 7 या

दा
Íदन नह|ं Íटक पाया । मरे हए सपने और पेट म भख लेकर सदा के Îलये सो गया भतनाथ।

ू ू
िजसक| तेरहवी तक साजव7 ती ने नह|ं करने द| अनाव° यक खच बताकर।
भतनाथ के मरते ह| 9ेमावती दाने

-दाने को मोहताज हो गयी । उसक| आंख| म हमेशा बाढ उमड़ी
रहती थी । कछ ह| मह|न| म दोन| आंख| से अं धी हो गयी । एक Íदन (टपc थ

र के ढे र पर Îगर
पड़ी िजससे उसके पैर म गहर| चोट लग गयी । चोट अ7 दर ह| अ7 दर बढता गया उभरा तो नासर

के Fप म । सड़ते पैर म क|ड़े पड़ने लगे पर साजव7 ती का पc थर Íदल नह|ं Íपघला दवाई तक
नह|ं करवाई। दोन| बेÍटया साजव7 ती क| चोर| दो रोट| 9ेमावती क| पेट म उतार दे ती । बेÍटय| ने
बÍढया को

रोट| Íखलाया है इसक| खबर साजव7 ती को लग जाती तो उनक| भी खबर लेने से नह|ं
Íहचकती थी ।क7 है या छ मह|ने या साल म हपता प7 gह Íदन के Îलये आता जो हो सकता करता
उसके जाते ह| वह| दद शा ।

साजव7 ती के एक जगह पड़े रहने के कारण उसका बढा जीÍवत शर|र तेजी से सड़

ने लगा । ऐसी
दशा म साजव7 ती ने घर के पास टट| मंड़

ई म उसे टट| खाट पर लाकर पटक द| और कc ते
ू ु

Íब~ ल| क| तरह एकाध रोट| कभी-कभी दे दे ती ।
9ेमावती मड़ई म पडी-पडी कराहती रहती । ब1 ती के लोग हालचाल पछ लेते ।सा7 त

वना के दो
बोल बोल लेते । यह भी साजव7 ती को बदा° त नह|ं होता था । परे गांव म साजव7 ती

एक
झगड़ाल औरत के नाम से कE या
ू ु
त थी । अÎधकतर लोग उससे बचकर ह| रहते थे । तÎनक -
तÎनक बात| म भी वह कई प1 त

का चढं कर गाÎलयां दे ने लगती थी । बड़ो के 9Îत उसमे तÎनक
भी आदर भाव न था । यÍद होता तो वह अपने सास-ससर क| दद शा करती ।
ु ु

मह|ने भर के अ7 न-जल को c यागने के बाद एक Íदन सया1 त

के समय 9ेमावती के भी जीवन का
अ7 त हो गया । 9ेमावती के मरने क| खबर ज~ द| ह| पर| ब1 ती

म फै ल गयी । 9ेमावती तो
जीते जी सड़ चक| थी । ब1 ती

वाल| ने आपस म रायमशÍवरा कर शीU ÍHयाकम करने का
118
इ7 तजाम कर Îलया । क7 है या को शहर से आने म परे दो Íदन जो लगने थे । गांव के

बजग| ने दाह
ु ु
-सं1 कार करना उÎचत समझा। 9ेमावती क| लाश दरवाजे से उठते ह| साजव7 ती
Îच~ ला-Îच~ ला कर रोने लगी । गांव क| औरत एक दसरे से

कहती रह| दे खो Íकतनी नेक लग रह|
है मरने के बाद जीते जी तो सकन क| रोट|

नह|ं द| । मां-बाप के चरण| म 1 वग है भल गयी

अब दे खो ढोग कर रह| है रोने का । यह भल गयी Íक सास

-ससर भी मा

-बाप ह| होते है और मां
बाप के चरण| म ह| 1 वग होता है । कर ले िजतना चाहे Íदखावे । मर चके बाबा भतनाथ औ◌ा
ु ू
9ेमावती अ+ मा लौटकर दे खने तो नह|ं आ रह| । बेचारे दोनो बढा

-बढ| जीते जीत तो पेट भर रोट|

के Îलये तरसकर गये । मरने के बाद बावनी Íखलाओं उनके पेट म जाने से तो रहा ।वे तो
िज7 दगी हं सते जE म क| धप म Íबता Íदये ।

अि7 तम सं1 कार हो जाने के बाद क7 है या शहर से आया । ÍवÎध Íवधान से बाक| ÍHया-कम परा

करवाया । हां इस ÍHया -कम म साजव7 ती सतक आगे-आगे चल रह| थी ताÍक उसक| आने वाल|
बह उसके साथ ऐसा सलक न कर । खै र सब कछ साजव7 ती

ू ु
के मताÍवक हआ । ÍHया


-कम
स+ प7 न हो गया । भतनाथ और 9ेमावती क| तेरहवी का काय Hम एक साथ स+ प

7 न करने क|
राय गांव के बजग| ने द| ताÍक साजव7 ती
ु ु
के साथ भतनाथ क| आc मी

को भी मि4 त

Îमल सके
। वह| हआ दोनो पÎत

-पc नी क| तेहवी एक साथ हई । मc य
ु ृ ु
भोज म अ¯ छे -अ¯ छे पकवान परोसे
गये जबÍक पेट भर रोट| के Îलये तरस-तरस कर भतनाथ और 9ेमावती दÎनया छोड़
ू ु
चके थे ।

25-पराई मां
अरे बाप रे ब1 ती वालो दे खो र7 ज

तो पÎलस लेकर आ रहा है । च7 न
ु ु ू
क| मां कहां हो ज~ द|
आओ दे खो त+ हा

रा र7 ज

तम पराई मां क| ममता का कc ल

कर Íदया। हमारे पालन-पोषण का
4 या Îसला दे रहा है ।हमार| जीवन भर क| कमाई को हड़पने के Îलये पÎलस लेकर आ रहा है ।

अरे तम भी सगी मां क| तरह फ क दे ती तो आज ये Íदन तो

नह|ं दे खने पड़ते ।
बस7 ती-4 या हआ 4 य|

Îच~ ला रहे हो ।4 य| बड़बड़ा रहे हो । जब पचती नह|ं तो 4 य| पी लेते हो ।
ना खद चै न से रहते हो ना तो हमे रहने दे ते हो । र7 ज
ु ू
को छाती से ब7 दÍरयां क| तरह Îचपकाये
रह| वह| बड़ा होकर द° म

न बन बैठा है । चै न Îछन रखा है ,एक तम हो पी लेते हो तो Îच~ ल

-पो
करने लगते हो । बताओ कहां आसमान Îगर रहा है । Íकस Íबल म Îछपना है ।
दौलत-दे खो र7 ज

हमार| जीवन भर क| कमाई बीसा भर घर क| जमीन हड़पने क| पर| तरक|ब

बना Îलया है । अब तो पÎलस भी आ रह| है । इस घर म जो कभी

नह|ं हआ अब हो रहा है ।

काश तम भी र7 ज
ु ू
को छाती से ना लगाती तो◌े ◌े◌े◌े◌े◌े◌े आज पÎलस न आती क| आवाज दौलत

के मंह से Îन

कल| भी नह|ं थी Íक धड़धड़ाती हई पÎलस क| जीप खड़ी


हो गयी । र7 ज

जीप से
बाहर Îनकला हाथ म पकड़ा कागज लहराते हए बोला कहा गये काका बाहर आ जाओ । ये दे खो

पÎलस के साथ कचहर| का कागज भी लाया हं दे खता हं त+ हा
ु ु
ू ू
र| कोठ| कै से बनती है । काका
कोठ| का काम तर7 त

नह|ं ब7 द करवाये तो जेल जाना पड़े गा दे खो पÎलस क| जीप भी खड़ी

है ।
दे र नह|ं लगेगी हवालात जाने म ।
दौलत-वाह रे र7 ज

संगी मां पैदाकर फ क गयी । त+ हा

र| काक| ने अपनी स7 तान समझकर तमको

पाला-पोषा । अपनी छाती से लगाये रखा । दÎनया भर क| मि° क
ु ु
ल| से तमको बचाया । तमको
ु ु
पढाया Îलखाया « याह गौना Íकया। आज दो पैसा कमाने लगा है तो हमार| ह| आंख म Îमच|
119
झ|ककर हमार| ह| स+ पÎत हÎथयाने क| सोचने लगा है । दÎनया से तो डर अपनी मां के

बददआओ से

नह|ं तो कम से कम पराई मां क| बददआओ से डर ।

र7 ज

-हम 4 य| डरे । म अपने फायदे के Îलये कछ भी कर सकता हं ।

बस7 ती-अपने ब¯ च| का हक मारकर त+ हा

रे साथ गनाह कर Íदया 4 या

?
र7 ज

-जैसी मेर| मां फ क द| वैसे तम भी फ क दे ती । जो समझना है समझो । म जो कर रहा हं


अपने ब¯ च| के भले के Îलये कर रहा हं ।

बस7 ती-भले के Îलये नह|ं बददआ बटोर रहा है र7 ज
ु ू

दौलत-4 या हमने तेरे Îलये कम Íकया है । Íक अब पÎलस लेकर आया है जबÍरया क« जे

के Îलये
। अपनी मेहनत मजदर| से कमाई जमीन म तमको Íह1 सा
ू ु
Íदया । ते रा घर बनवाया । अपने
सगे बेटे क| तरह तमको ¯ या

र Íदया ।तमने मझे 4 या
ु ु
Íदया । इतने बरस| से शहर -परदे स कर
रहा है कभी हजार पांच सौ Íदया 4 या ?
बस7 ती-Íदया है तो आंस और अब Îछन रहा है मेरे ब¯ चो

का आ÷य।
दौलत-Íकस गनाह Íक सजा दे रहा है र7 ज
ु ू
Îनरपराध पराये मां -बाप का गला रे त कर ।
र7 ज

-तम गला रे तना कहते हो काका म

अपना हक मानता हं । परा हक


नह|ं दे ना था तो पाले ह|
4 यो पढाये Îलखाये गौना « याह तक 4 य| Íकये मेहनत मजदर| कर ।

दौलत-Íर° ते के सांधेपन के Îलये । अपने पÍरवार के सद1 य के भले के Îलये । बेटा ठ|क है तम

मेरा सगा बेटा नह|ं हो पर हो तो खानदान के । तमको िज

तना Íदया हं उसके भी तम हकदार


नह|ं हो । पंचो◌े◌ं से ,ब1 ती वाल| से पछ लो ।

र7 ज

-हम Íकसी से नह|ं पछना म तो 1 टे

आड र लेकर पÎलस के साथ आया हं त+ हा
ु ु

र| जहां कोठ|
बन रह| है । अब वहां मे र| महल बनेगी ।
दौलत-मेरे जीते जी तो नह|ं ऐसा हो पायेगा ।
र7 ज

-होगा काका तम दे खते रहना ।

बस7 ती-बेटा त+ हा

रे Îलये म हं सते जE म का जहर पीती रह| तम

धlस दे रहे हो ?
र7 ज

-नह|ं पराई मां सचमव कह रहा हं । ये कागज और सामने खड़ी


पÎलस सब सह| तो है ।

काक| धlस नह|ं स¯ चाई है । मान लो और खाल| कर दो ये जमीन ।
दौलत-ऐसी सजा 4 यो दे रहे हो र7 ज

त+ हा

रे 1 वाथ से फटे 7 वा

लामखी को दे खकर कौन काका

अपने भतीजे पर रहम करे गा । त ह| बता दादा

-परदादा क| गज भर जमीन है जो थी भी गांव के
दबंग| का क« जा हो गया । िज7 दगी भर क| कमाई से दो बीसा जमीन बनाया था िजसम से
तम

को भी बांटकर दे Íदया अब पर| जमीन हड़

पना चाहते हो हमारे भी दो बेटे है वे कहां बसेगे ?
र7 7 ू◌ा-काका ये त+ हा

र| परे शानी है तम जानो हम तो बस हमारे घर के सामने क| जमीन चाÍहये


दौलत-बे◌ेटा नेक| को 4 यो लÎतया रहे हो ।
र7 ज

-काका हमारे घर के सामने त+ हा

रा घर नह|ं बनेगा बस । हमारे घर के सामने पर| जमीन

छोड़ना पड़े गा । नह|ं छोड़े तो इंजाम अ¯ छा नह|ं होगा ।
दौलत-मेरा और मेरे बेटो का खा◌ा◌ून कर दोगे ?
र7 ज

-इस जमीन के Îलये कछ भी कर सकता हं ।

120
बस7 ती-वाह रे कलयग का लोभी । इस लोभी

को छाती से लगायी अपने सगे बेट| के हक का
भी बंटवारा कर Íदया । इसके बाद भी तस~ ल| नह|ं परा हड़

पने क| तैयार| । जब तक गौना नह|ं
आया था बीमार रहने का नाटक करता रहा । गौना आते ह| घरवाल| को शहर ले जाकर बस गया
। वहां कोठ| बंगला बना Îलया यहां भी म ने घर बनाने क| जमीन द| ।हम भÎमह|न बाक|

कछ तो

पास है नह|ं । ब¯ च| के आ÷य को भी बांट द| । इसके बाद भी पÎलस जेल और कc ल

तक क|
धमक| ।
र7 ज

-मै। पहले भी कह चका हं अपने फायदे के Îलये कछ भी करने को तैयार हं ।

ू ू

बस7 ती-पराई मां ह| सह| पर हं तो मां 4 य|

खं जर भ|क रहा है ।
र7 ज

-दे खो त+ हा

रा भाषण सनने

-सनाने को पÎलस और कचहर| का 1 टे
ु ु
आड र लेकर आया हं ।

बस7 ती-हां बेटा अब त पराई मां के c या

ग को Íबसार कर आंस दे ने लायक हो गया है जो लोग

त+ हा

र| मां क| तरह फ क दे ने क| सलाह दे ते थे वह| लोग खास हो गये है 4 य| दौलत के भरोसे
ना ।
र7 ज

-दे खो बहत बकबक हो गयी। पÎलस आ गयी है । लेखपाल और नायब तहसीलदार भी पहं चने
ु ु

वाले है । काननी काम म अड़

चन मत डालो । नह|ं तो पराये बाप के साथ पराई मां को भी जेल
जाना पड़सकता है ।
बस7 ती-दे ख लो दरोगा जी इस नाग को दे खकर कोई कै से Íकसी पर रहम करे गा ?
दरोगा-सांप दध पीकर भी जहर|ला रहता है । उसका 1 व

भाव काटने को होता है काटे गा पर बचाव
के उपाय भी है उसके दां त तोड़दो । तमने दांत न तोड़

कर गलती कर Íदया । अरे तम तो खद
ु ु
ह| भÎमह|न हो दो बीसी जमीन म से र7 ज
ू ू
को भी बांटकर दे Íदये । पाल-पोष कर पढाये Îलखाये
पैर पर खड़ा कर Íदया 4 या जFरत थी । यह तो जमीन खर|द कर महल बनवा सकता है । कछ

Íदन के Îलये घर बनाने का काम रोक दो । । दौलत जमीन तमको जFर Îमलेगी । हमे तो

कचहर| के आदे श का पालन करना है ।
दौलत-एक अनाथ को पालकर गनाह कर Íदया दरोगा

?
दरोगा-नह|ं दौलत तमने तो ब

हत पÞ य


का काम Íकया ।
दौलत-ये सजा Íकस पाप क| ?
दरोगा-त+ हा

रे साथ अ7 याय नह|ं होगा दौलत । भगवान पर यक|न रखो । िजस Íव° वास के साथ
सांप को दध Íपलाकर इतना बड़ा

Íकया उसी Íव° वास के साथ स¯ चाई पर Íटके रहो । त+ हा

र|
जमीन र7 ज

नह|ं हड़प पायेगा ।अरे पर| ब1 ती

के लोग त+ हा

रे साथ है । सभी स¯ चाई को जानते
है । Íकराये के गवाह| से ना डरो ।
दरोगाजी और दौलत क| बातचीत चल ह| रह| थी इसी बीच नायब तहसीलदार क| जीप भी आ
धमक| ।
र7 ज

-दौड़कर आया और बोला लो काका तहसीलदार साहब लेखपाल को भी लेकर आये करवा लो
पैमाईस।
र7 ज

क| हां म हा Îमलाते हए◌ु दखदास बोला

-हो जायेगा दध का दध पानी का पानी । अरे र7 ज
ू ू ू

के पास भी तो कागज है ।
121
दौलत-4 या फज| कागज भी तैयार करवा Íदये दखदास दाF मगा और नगद ले दे कर ।
ु ु
ÍरटायरमेÞ ट के बाद ठगी का धं धा शF कर Íदया दखदास ।
ु ु

दखदा

स-4 या गलत है दलाल| का काम ?
दौलत-गर|ब| के आंस से E े

◌ालोगे तो बड़ी क|मत चकानी पड़े

गी । भगवान के घर म दे र है अं धेर
नह|ं ।
दरोगाजी-दखदास सना है आप दे श सेवा जन सेवा पर बÎलदान दे ने वाले Íवभाग से Íरटाय हए है ।
ु ु

ये जो कर रहे है आप दाF मगा खा पीकर इस

से तो अ7 याय हो रहा है । दे श और जनसेवा के
साथ धोखा कर रहे है ।
दखदास

-अरे Íखलाने वाला हाथ जोड़कर Íखला रहा है जेब म डाल रहा है तो 4 या हम मना कर दे
?घर आयी ल+ मी को हम 4 यो ठकराये

?
दौलत-दे ख लो दरोगाजी र7 ज

4 या 4 या नह|ं कर रहा है हमार| जीवन भर क| कमाई हड़पने के
Îलये । बदमाश| तक क| मदद ले रहा है । भल गया मेर| नेक| ।दखदास तम चाहते तो र7 ज
ू ु ु ू
को
स¯ चाई का रा1 ता Íदखा सकते थे । ऐसा नह|ं करके तमने धोखा से मझ गर|ब के आÎशयाने तक
ु ु
को हड़पने क| सािजश रच Íदये । 4 यर मेरे जीवन म आग लगा रहे हो । र7 ज

तो बे ईमान हो
गया है जमाना जान गया पर तम कम

नह|ं हो तम दोनो के मंह पर जमान थके गा दखदास ।
ु ु ू ु

र7 ज

-काका भाषण ब7 द करो । ये साहब लोग त+ हा

र| भाषण सनने

नह|ं आये है ।
दरोगाजी-हां नायब तहसीलदार साहब आप 4 या कह रहे है ।
नायबतहसीलदार साहब-र7 ज

ने धोखे से कागज तो बनवा Îलया है । मौका मआयना के आधार

पर खाÍरज हो जायेगा । दौलत ने र7 ज

के साथ वह Íकया है जो एक सगे बेटे के साथ एक मां -
बाप करते है ।
दौलत-साहब हम तो र7 ज

क| Îनगाहो म पराये मां बाप भी नह|ं रहे ।
नायबतहसीलदार-हौशला रखो दौलत अ7 याय नह|ं होगा त+ हा

रे साथ गर|ब के आंखो म स¯ चाई
पढने क| काÍबÎलयत है मझम और दरोगाजी म भी ।

दरोगा-हां नायब तहसीलदार साहब । 7 याय अ7 याय दे खते दे खते तो बाल झड़चके है । स¯ चा

ई को
जानने का तजरबा तो है ।

नायबतहसीलदार-दौलत एक सवाह है सह| सह| जबाब दे ना ।
दौलत-पÎछये साहब ।

नायबतहसीलदार-तम र7 7 ू

को घर बनाने क| जमीन द| है ।
दौलत-हां साहब ।
दरोगाजी-मान रहे हो ना ।
दौलत-हां दरोगा जी । म भगवान से डरता हं यह तो

नह|ं बोल सकता Íक र7 ज

ने जबÍरया घर
बनाया है पर अब जबÍरया मेर| खाल| जमीन हड़पने क| सािजश कर रहा है ।
नायबतहसीलदार-मामला यह नह|ं है ।
दरोगाजी -मामला 4 या है ।
नायबतहसीलदार-र7 ज

दौलत क| जमीन को अपनी कह रहा है । धोखाधड़ी से कागज तैयार करवा
Îलया है । उसी के बलबते 1 टे

आड र ले आया है ।
122
दौलत-दे ख लो साहब घर के Íपछवाड़े वाल| जमीन पर सतवाF हर साल बढता चला आ
रहा है । मना करने पर कहता है Íक त+ हा

रा घर मेरे खेत म बना है । सामने वाल| जमीन र7 ज


हड़प रहा है । मेरे तो अगवारे और Íपछवाडे

पर दसर| का क« जा

हो रहा है म कहां जाउ◌ू ?
नायबतहसीलदार-कह| नह|ं जाओगे अपनी जमीन पर काÍबज रहोगे ।
थानेदार-4 य| र7 ज

तमको फरे ब और धोखे के के स म अ7 द

र कर दे । सभी लोग त+ हे

झठा कह

रहे है । पंचनामा बनने क| दे र है Íफर सड़ते रह जाओगे । सब बेईमान करना भल जाओगे । अरे

त+ हा

रे पास Fपये क| इतनी गरमी है तो दस-बीस बीघा जमीन खर|द कर माÎलक बनता गर|ब के
आंसं म तै

रकर माÎलक बनेगा तो कम तक ऐश कर पायेगा । दौलत को तमने इतने आंस दे Íदये
ु ू
हो Íक उसम तम डबकर मर सकते हो ।
ु ू

र7 ज

-साहब जो कछ मैने Íकया है अपने बालब¯ च|

के Íहत म Íकया है ।
दरोगाजी-अपने बालब¯ च| के Íहत के Îलये दसर| का खन कर दोगे 4 या
ू ू
?
र7 ज

-ये ख

न है 4 या ?
दरोगाजी-खन से कम है 4 या

?
र7 ज

-मैने जो Íकया है सह| Íकया है आÍखरकार मेरा भी बराबर| का हक है ।
नायबतहसील-र7 ज

तम दौलत के सगे बेटे हो 4 या

?
र7 ज

-नह|ं । ये दौलत काका पराये बाप और बस7 ती काक| पराई मां मेरे तो है । आपके सामने
मेरा मां बाप बनने का दावा कर रहे थे ।
दरोगाजी-र7 ज

तेर| जबान बहत लपर

-लपर चल रह| है । ज7 म दे ने वाले से पालने वाला बड़ा होता
है । ज7 म दे कर घरे म फ क दे ना मां बाप का दाÎयc व

नह|ं होता । पैर पर चलने लायक बनाना
भी दाÎयc व होता है । बस7 ती और दौलत ने तमको

भले ह| पेदा नह|ं Íकया है पर मां बाप का
दाÎयc व Îनभाया है ।
दौलत-छोड़ो दरोगाजी अगर ये नेक| माना होता तो आज ये नौबत नह|ं आती ।
दरोगाजी-4 यो बेईमानी कर रहा है । दसरे क| जीवन भर क| कमाई को अपना बनाने पर तला
ू ू
हआ है ।त+ हा


रे पास Fपया है तम और भी जमीन Îलख

वा सकता है । त+ हा

र| बेईमानी को
दे खकर लोग रहम करना भी ब7 द कर दे गे ।
बस7 ती-दरोगाजी और तहसीलदार साहब आप दोनो से Íवनती कर रह| हं अगर र7 ज


हम दख

दे कर खश रहना चाहता है तो दे दो उसी खशी । जहां तक चाहता है नाप कर खटा गड़
ु ु ू
वा दे ◌ा
ताÍक जीवन भर का कलेष तो Îमट जाये । हम गर|ब अपने ब¯ च| क| Íवरासत म गज भर
जमीन के साथ नेक| का सं1 कार दे गे ।
दरोगाजी-अब तो शरम कर र7 ज


दौलत-दरोगाजी उसको शरम नह|ं आती । जो बÍढया कह रह| है मझे भी मंजर है । मेरे ब¯ च|
ु ु ू
क|
तकद|र म जमीन जायदाद का सख होगा तो कोई

नह|ं Îछन सके गा । कर दो र7 7 ू◌ा के मन
माÍफक दरोगाजी और तहसीलदार साहब । कम से कम हमारा पÍरवार चै न से तो सांस भर सके गा
। र7 ज

के गÞ ड|

से छटकारा तो Îमल जायेगा ।

नायबतहसीलदार-बस7 ती और दौलत तम लोग 4 या

कह रहे हो मालम है ना ।

दौलत-हां बाब । हम दोनो परे
ू ू
होशो हवाश म है ।
123
नायबतहसीलदार-लेखपाल इधर आओ ।
लेखपाल-जी सर ।
नायबतहसीलदार-र7 ज

के कागज के अनसार जमीन नाप दो ।

लेखपाल-जैसा हकम साहब ।

लेखपाल लÇ ठा लेकर नापने म जट गये । प¯ चा

स फ|ट ल+ बी और चौतीस फ|ट चौड़ी जमीन
दौलत के खन पसीने क| कमाई क| ज

मीन का र7 ज

माÎलक बन बैठा । दौलत के Íह1 से तीन
टटा

-फटा घर आया िजसम बरसात और धप के आने जाने क| भरपर गजाईश थी ।
ू ू ू ु

नायबतहसीलदार-दौलत त+ हा

रा घर भी ले रहा है र7 ज


दौलत-लेकर खश रहे तब ना ।

दखदास

-4 य| नह|ं खश रहे गा ।

दौलत-त+ हा

रे जैसे Íकराये के लोग खशी

नह|ं दे सकते । हां मनचाह| क|मत जFर ले सकते है ।
दरोगाजी-दौलत दसर| को आसं दे ने वाले खश तो
ू ू ु
नह|ं रह सकते । तम कहो तो सलहनामा का
ु ु
पंचनामा बनवा ले ।
दौलत-जFर बनवाईये साहब ।
दरोगाजी-मंशीजी ज~ द|

करो ।
मंशीजी

-पांच Îमनट म तैयार कर दे ता हं


दरोगाजी-ठ|क है ।
दरोगाजी-दौलत और बस7 ती तम दोनो तो अपने फै

सले से खश हो ना ।

दौलत और बस7 ती दोनो एक 1 वर म बोले हां सरकार र7 ज

पराये मां बाप को घाव दे कर खश है

तो हम खन पसीने क| कमाई से पाल

-पोस कर बड़ा Íकये भले ह| पराये बेटे ने लाख हं सते जE म
Íदये है पर हम उसक| खशी म जFर सर|ख होगे

? दौलत और बस7 ती क| बाते सनकर

दरोगाजी,नायबतहसीलदार और लेखपाल साहब बोले ध7 य है ये -परमाथ| पराये मां -बाप । इतने म
ब1 ती के लोग दौलत और बस7 ती क| जयजयकार करने लगे ।
समा¯ त

प1 त

क 9काशनाथ 9काशक आमि7 त³ है ।






पÎरचय

124
न÷ दलाल भारती
कÍव,कहानीकार,उप7 यासकार
ÎशHा -एमए। समाजशा1 ³ । एलएलबी। आनस ।
पो1 ट 0ेजएट Íड¯ लो

मा इन ¡ यमन Íरस|स डे वलपमेÞ ट

(PGDHRD)
ज7 म 1 थान-0ाम-चौक| ।खै रा।पोनरÎसं हपर िजला

-आजमगढ ।उ9।
ज7 मÎतÎथ-01011963
9काÎशत
प1 त


ई प1 त

उप7 यास-अमानत,Îनमाड क| माट| मालवा क| छाव।9ÎतÎनÎध का¯ य सं0ह।
9ÎतÎनÎध लघकथा सं0ह

-काल| मांट| एवं अ7 य ।
उप7 यास-दमन,चांद| क| हं सल| एवं अÎभशाप । Íवमश ।आलेख सं0ह।

मÇ

ठ| भर आग ।कहानी सं0ह। लघकथा सं0ह

-उखड़े पांव /
कतरा-कतरा आंस

/एहसासस
कÎवतावÍल / / / /काö यबोध/ // /काö यांजÍल / // /मीनाHी।काö यसं0ह। एवं अ÷ य
स+ मान Íव° व भारती 97ा स+ मान,भोपल,म9,Íव° व Íह7 द| साÍहc य अलंकरण,
इलाहाबाद।उ9।लेखक Îम³ ।मानद उपाÎध।दे हरादन।उc त

राखÞ ड।
भारती प* प

। मानद उपाÎध।इलाहाबाद,भाषा रc न,पानीपत ।
डांअ+ बेडकर फे लोÎशप स+ मान,Íद~ ल|,
का¯ य साधना,भसावल

, महारा* ç,7 योÎतबा फले ÎशHाÍवq

,इंदौर ।म9।
डांबाबा साहे ब अ+ बेडकर Íवशे ष समाज सेवा,इंदौर Íवq यावाच1 पÎत,पÍरयावां।उ9।
कलम कलाधर मानद उपाÎध ,उदयपर ।राज

। साÍहc यकला रc न ।मानद उपाÎध। कशीनगर ।उ

साÍहc य 9Îतभा,इंदौर।म9। सफ| स7 त

महाकÍव जायसी,रायबरे ल| ।उ9।
एवं अ7 य

आकाशवाणी से का¯ यपाठ का 9सारण ।कहानी,लघ कहानी

,कÍवता
और आलेख| का दे श के समाचार प³ो/पͳकओं
म एवं
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inourcity◌़yaho◌़com/Bhopal/hindi,laghukatha◌़com एवं अ7 य ई-प³ पͳकाओं
म रचनाये 9काÎशत ।

सद1 य इिÞ डयन सोसायट| आफ आथस ।इंसा। नई Íद~ ल|

साÍहिc यक सां1 क

Îतक कला संगम अकादमी,पÍरयांवा।9तापगढ।उ9।

Íह7 द| पÍरवार,इंदौर ।म² य 9दे श।
125

आशा मेमोÍरयल Îम³लोक पि« लक प1 त

कालय,दे हरादन ।उc त

राखÞ ड।

साÍहc य जनमंच,गािजयाबाद।उ9। एवं अ7 य
पदाÎधकार| सÍचव, ,, , इिÞ डयन सोसायट| आफ आथस ।इंसा। म² य 9दे श चै ¯ टर,इंदौर ।

काय काÎरणी सदT य, ,, , Íह7 द| पÍरवार,इंदौर ।म² य 9दे श।

9ÍतÍनÍध मÞ डल सदT य, ,, , साÍहc य जनमंच,गािजयाबाद।उ9। एवं अ7 य
1 थायी पता आजाद द|प,15-एम-वीणा नगर ,इंदौर ।म9!
दरभाष

-0731-4057553चÎलतवाता -09753081066
Email- nlbharatiauthor@gmail◌़com
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Îवशे ष- -- -जन9वाह।साÞ ताÎहक।I वाÍलयर।म 9प। qवारा उप÷ यास- -- -चांद| क| हं सल| का धारावाÎहक

9काशन ।

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