ऐसे बेशम आ शक़- (पुतल बाई – 1972

)
ऐसे बेशम आ शक़ ह ये आज के
ऐसे बेशम आ शक़ ह ये आज के
इनको अपना बनाना गज़ब हो गया
ऐसे बेशम आ शक़ ह ये आज के
इनको अपना बनाना गज़ब हो गया
धीरे धीरे कलाई लगे थामने
धीरे धीरे कलाई लगे थामने
इनको उं गल! थमाना गज़ब हो गया
धीरे धीरे कलाई लगे थामने
इनको उं गल! थमाना गज़ब हो गया
जो घर मे सील पे मसाला तलक ना पीस सक$
उ%ह$ ये नाज़ हम$ खाक़ मे मलाय$गे
कलाई दे खो तो चड
ू ी का बोझ सह ना सके
औस उस पे दावा के तलवार हम उठाएंगे
फरे बो म1 मे इनका नह!ं कोई सानी
ये िजस को डस ल$ , वो मांग$ ना मुड़कर पा5न
बड़ा अज़ीब द6तूर इनक7 मह8फल है
बुलाया जाता है इ:ज़त बढाआई जाती है
8फर उसके बाद वह!ं क़<ल करके आ शक़ को
बड़ी धम
ू से म=यत उठायी जाती है
खाता हमार! है जो हमने उनसे >यार 8कया
बुरा 8कया जो हसीन? पे ऐतबार 8कया
भूल हमसे हुई इनके आ शक़ बन$
भूल हमसे हुई इनके आ शक़ बन$
पास इनको बल
ु ाना गज़ब हो गया
भूल हमसे हुई इनके आ शक़ बन$

पास इनको बुलाना गज़ब हो गया ठोकरA मे थे जब तक तो सीधे थे ये ठोकरA मे थे जब तक तो सीधे थे ये अररे इनको सर पे Bबठाना गज़ब हो गया ठोकरA मे थे जब तक तो सीधे थे ये इनको सर पे Bबठाना गज़ब हो गया हम औरत? को नज़र से उतारने वाल? खबर भी है तुCहे शेखी बघारने वाल? के इस ज़मीन पे पुतल! भी एक औरत है के िजसमे मद को ललकारने क7 DहCमत है पहन के सर पे Dदलेर! का ताज़ बैठE है जो घर मे थी वो संहासन पे आज बैठE है अगर झुके तो ये Dदल Fया है जान भी दे दे जो सर उठाये तो मदG क7 जान भी ले ले अगचH फूल का इक हार है यह! औरत जो िज़I पे आये तो तलवार है यह! औरत ये पुतल! बनके ज़माने को मोड सकती है उठे तो मद का पंजा मरोड सकती है तेर! DहCमत पे पुतल! हम$ नाज़ है तेर! DहCमत पे पत ु ल! हम$ नाज़ है तेरा मैदान मे आना गज़ब हो गया तेर! DहCमत पे पुतल! हम$ नाज़ है तेरा मैदान मे आना गज़ब हो गया एक Dदन बोले फJरKते कर के ये द5ु नया क7 सैर या खद ु ा द5ु नया तेर! सूनी है औरत के बगैर ् उठ पड़े DहFमत Dदखाने के लये कुदरत के हाथ सोच ल! मौला ने औरत को जनम दे ने क7 बात इस तरह मा लक ने क7 कार!गर! क7 इNड़ीता .

नज़ार? से जाद ू ले लया. पंखड़ी से ल! नज़ाकत और क लय? से अदा. त6वीर से ख़ामो शया. सU धरती से लया. लाजवंती से शम और रातरानी से हायन. लोमड़ी से मांग ल! ता उZ क7 मFकाJरयां. आसमान से ज़ुTम मांगा. सरू जमख ु ी से ल! वफा. बाद लयA से ज़T ु फ. आईने से है रत$. आग से ग6 ु सा लया. नरू सरू ज से लया. माWखय? से शोर और मYछर से ल! अयाJरयां. इतनी चीज़$ जमा होके जब लगीं मौला के हाथ और इन सबको मलाया जब खद ु ा ने एक साथ तब कह!ं जाकर बड़ी मेहनत से एक मूरत बनी Dदलनाशी पे कबला एक Dदल[बा सूरत बनी दे खकर अपनी कलाकार! को मौला हं स पड़ा और उसी अनमोल शाई का नाम औरत रख Dदया रख चक ु ा जब नाम उसके बाद यून कहने लगा Fया म बनाकर तुझे ख़द ु परे शान हूँ म बनाकर तुझे ख़द ु परे शान हूँ अरे तझ ु को द5ु नया मे लाना गज़ब हो गया . शाख से अंगड़ाइयाँ. बल ु बल ु े से नाज़ ल!. पवन से शोWखयाँ. Oप स=यार? से मांगा. हौसला चRान से और दद पंछE से लया. ज़हर नागन से लया और साँप से डासना लया. Bबज लय? से कहर माँगा. शाम से काजल लया और सब ु ह से वादा लया.चंद से मांगा उजाला. आंख ल! हरनी से और शबनम से आँसंू ले लया. झरन? से इतलाना लया. तीर से चुभना लया. लहर से अतखे लयां मांगी. आबO मोती से ल!. रं ग उषा से लया. काटना BबYछू से मांगा. नद! से बलखाना लया.

म बनाकर तुझे ख़द ु परे शान हूँ तुझको द5ु नया मे लाना गज़ब हो गया जब मेरे मौला ने सोचा मद को पैदा करे सबसे पहले ये सवाल आया के कुदरत Fया करे प<थर? से संगDदल! और बे[खी तक़द!र से क़हर तफ ू ान? से माँगा और घाज़ाक शमशीर से ल! गधे से अFल कौ\वे से सयानापन लया और कुYछ कु<ते क7 टे ढ़! दं ू से टे ढ़ापन लया घाट ल! BबTल! से और चह ू े से माँगा भागना और उTलू से लया रात? को इसका जागना ले लया टोटे से आँख$ फेर लेने का चलन भे^ड़ये के खन ू पीने का लया द!वानापन ल! गयी _गर_गट से हरदम रं ग बदलने क7 अदा िजससे औरत को Dदया करता रहे धोखा सदा तो इसको नाफ़रमा5नयाँ बFशी गयीं शैतान क7 झूठ बोले ताके ये खाकर क़सम भगवान क7 लेके मRी मे मसाला जब ये मलवाया गया उस दम मद क7 8फतरत म$ ये पाया गया मद के पुतल? म$ िजस दम जान दौड़ाई गयी उसमे औरत क7 भी थोड़ी सी अदा पायी गयी औरत? मे मद क7 सूरत नह!ं मलती जनाब पर इ%ह!ं मदG मे मलते ह ज़नाने बेDहसाब शFल मदG क7 तो आदत के ज़नाने हो गये शFल मदG क7 तो आदत के ज़नाने हो गये Fया खद ु ा ने चाहा था और Fया ना जाने हो गये बन चक ु ा जब मद तो मौला ने मेरे यून कहा Fया के अYछा खासा बनाया था मैने इसे अYछा खासा बनाया था मैने इसे बन गया ये ज़नाना गज़ब हो गया अYछा खासा बनाया था मैने इसे बन गया ये ज़नाना गज़ब हो गया .

वाहरे पुतल!बाई Fया Dदलेर! Dदखाई तेर! DहCमत के सड़के तेर! ज़रु त के सड़के तू बहादरु तू 5नडर अFल और होश तझ ु मे िज़6म औरत का लेकर मद का जोश तझ ु मे िजसको समझे ना कोई वो उलटफेर है तू तेर! DहCमत क7 क़सम वाक़ई शेर है तू तूने जो कुaछ भी मंह ु से कहा कर Dदया तूने जो कुYछ भी मंह ु से कहा कर Dदया तेरा करके Dदखाना गज़ब हो गया तूने जो कुYछ भी मुंह से कहा कर Dदया तेरा करके Dदखाना गज़ब हो गया तेर! DहCमत पे पुतल! हम$ नाज़ है तेरा मैदान मे आना गज़ब हो गया तेर! DहCमत पे पुतल! हम$ नाज़ है .

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