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कहानी

बात -िववे ^ीवा तव िववे क
शाम क समय शहर क बीच बीच इस इकलौतेपाक म जब लोग यहांतफरीह क िलए े े [ े आतेह। तो हर कोई कछ न कछ बयांकरता है और सभी लोग िदन भर की थकान बात ु ु की चुि कय सेिमटातेह। अरे भाई आज सा¢ात े जी नजर नहीं रहे ह. ितवारी जी नेकहा। अरे े जी की छोिड़ये म आ म

। े देखए सामनेबच पर। शमा[ जी बोले लो भाई गुजर गए अब हमारे िदन, म ि हो गयी। तो भला जगतराम जी कसे ै

अब तो लैला मजनूंकी िकलकािरयाँ ही यहाँ गूं े ी राघवराव जी क मुं सेयेवाÈय जग े ह फटतेही बुजुग की टोली म बात की बौछार शु ू [ चुप रहतेआिखर और उसी का एक ोफसर क तमगेकी इÏजत नहींचली जाती। कहनेलगेिक अरे भाई े े प येहै । तभी पान की पीक जमीन पर उं लतेहए रमजान जी बोले डे ु

म तो िसफ इतना कहं ा िक पा ा×य सßयता हमारी सं कृ ित को खोखला बना रही है । [ ूग ै - लो कर लो बात िमयाँ आज बड़ी बड़ी बात कर रहे है और परस फशन शो की फोटो े ू ख दे कर ऐसेउड़ रहे थेिक मानो जवानी क टटे पं म िफर सेजान आ गयी हो । ख जगतराम जी मुं िबचकातेहए माहौल को गरम करनेजा ही रहे थेिक अभी कछ ही ह ु ु ल िदन पहलेटोली म शािमल हए नए नवे ेिम^ा जी बात को सàहालतेहए बोले- अजी ु ु छोिड़ए Èय हम सूखी निदया म अपनी लुिटया डु बो रहे ह। करनेदीिजए जो करतेहै हम Èया? उनकी इस बात पर जगतराम जी तुरÛत तुनक कर बोल पड़े तो Èया आप कहना चाहते िक हम अपनेबहू बेटय को ऐसेही खुला छोड़ द िक जाओ बीच बाजार म ह ि रं रिलया मनाओ। अरे भाई राघवराव जी नेभी झट सेजवाब िदया आपको Èया लगता ग है येिकसी शरीफ घर की लड़की है पूरी की पूरी बाजा िदख रही है । दे नहीं कसे ख रहे ै उस लड़क क हाथ म हाथ फसाए बैठी हई है । तभी ितवारी जी बोलेअजी छोिड़ए इन े े ं ु सामािजक बात को लाइव शो का आनÛद उठाइए और घर जाइए। िम^ा जी भी हं तेहए स ु उनकी हाँ म हाँ िमलातेहए बोल पड़े िबãकल ठीक कहा ितवारी जी पर कछ हो तब न ु ु ु आख से ी जाए। यहाँ तो िसफ बात ही हो रही है । अरे भाई आख क डाÈटर आप ह, क [ े आप ही कोई युि बताइए। ितवारी जी चुटकी ले ेहुए बोले त ।

हाँ िबãकल ु ु सही कहा साथ म दाना भी लाई है । जवाब म रिव नेभी झट मुहॅ खोल कर कहा िक चमन भइया कह दो िक एक दानेसेपे न भरे तो यहाँ पर और भी दानेखड़े है । आकर ट च च मार ले अब चमन भाई नेभी अपना तक पे िकया। मुझेतो लगता है दोन भाग । [ श त ै । क यहाँ आए है । अब ने ा जी की बात सेकाय[कता[ कसेनहींसहमत होते रिव नेभी े हामी दे ेहए कहा .अब पाक म नई घटना घट रही हो और मजनुओंका मजमा न लगे। वो भी उस जगह [ पर जहाँ कहािनयाँ िलखी नहींजाती िफर भी लोग की पं दीदा बन जाती है । िजसे स लोग उतनेही चाव सेसुनतेहै िजतनेचाव सेउसेसुनाया जाता है । चमन भइया मजनुओंक े गुट का होनहार ने ा अपनेसभी काय[कता[ओंक साथ खड़े खमोशी से त े नजारे की नजाकत को भां रहे थे िक तभी याम गुट क एक कम[ठ काय[कता[ नेिठठोली ले ेहए कहा प । े त ु चमन भइया माकट म नया िखलाड़ी आया है और आप चुप बैठे ह। अरे भाई कभी कभी दसर को भी मौका दे ा चािहए। चमन नेएक अÍछे ने ा की भांत मौक की नाजाकत न त ि े ू को समझतेहए कहा। तभी रिव नेबात म गरमी लानेक िलए कहा .हाँ भइया दे ो तो लड़की िकतनी डरी सहमी सी िदख रही है मानो त ु ख कोई उसक सामनेबÛदक ले र खड़ा हो िक िहली नहींकी गोली मार दी जाएगी। े क ू लो येभी आ गए। दर सेआतेराजे को दे तेहए याम जोर सेिचãलाया। पर येवहाँ श ख ू ु कहाँ जा रहा है । रिव नेभी आं िमचकाते ु कहा। अरे भाई जब सामनेहो लड़की तो ख हए दो त की िकसको है पड़ी। लगता है पुरानी जान पहचान है तभी तो Üयार सेइमरती िखलाया जा रहा है । चमन भइया से अब न रहा गया कमीज की बॉह को उपर उठाते भी हए उÛह नेझट सेकहा अब तो चलना ही पड़े ा। ने ा जी की शह पर भला काय[कता[ ग त ु कहाँ चुप बैठनेवालेथे फट सेहो िलए उनक पीछे और बच क करीब पहं कर याम े । े ुच नेफट सेराजे सेकहा अकलेही अकलेइमरती खाओगेकी हम भी थोड़ा रस चखओगे श े े । अरे Èयो नही याम लो तुम भी खाओ एक इमरती याम क हाथ म दे ेहए राजे े त ु श िमलो येहै मेे मामा र बोला। और साथ ही पास खड़े चमन सेबोला अरे चमन भाई इनसे क लडक माधव और येइनकी छोटी बहन माधवी। बे ारेजÛम सेही दोन अÛधेह। े े च आज ही गां सेयहाँ आए है वो अपनेिम^ा जी है न आख क डाÈटर उÛहींसेइलाज व े करवानेक िलए। खुली हवा म बैठनेको कह रहे थेतो मनेसोचा हमारे पाक सेबिढ़या े [ .पर ु ु । ु कछ भी कहो भइया िचिड़या है एकदम सही । हाँ भइया लगता है नई नई आयी है इस ु शहर म रिव भी बोल उठा। याम नेबात म और जोश भरतेहए कहा .तो Èया भइया े ु ख । हम हाथ पर हाथ धरे बस तमाशा दे गे चमन नेभी अपनी लाचारी को समटतेहए ु कहा अरे कछ होनेतो दो तब न हम कछ करे तभी याम नेआह भरतेहए कहा .

.....जगह कौन सी हो सकती है । और िफर शहर क बड़े बड़े लोग यहाँ आतेहै उनकी बात े सुनगेतो इनका भी मन बहल जाएगा। Èय भइया ठीक कहा न . समा .