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कहानी

गहना -डॉ. भावना कअर डॉ. डॉ ुँ


आज़ भी जब मुझे पा की बीती िजंदगी याद आती है तो मेरा रोम-रोम िसहर उठता है ू कलेज़ा पीड़ा क कारण टटने लगता है , नफ़रत होने लगती है इस संसार से… े पा जो मेरी सबसे करीबी सहे ली थी। हम दोन एक ही कॉलेज ही पढ़ते थे। से उसक िलये िर ता आया और आनफ -फ ानफ म े जो एक बहत बड़े िबज़नेस मैन पिरवार से था। ु उसकी शादी को आज़ तीसरा ही िदन था, घर म बड़ी पूज़ा रखी गयी थी। नान क समय े पा ने सारे गहने उतारकर बाथ म म रख िदये और पा की सास ने नान करने क े पा मÚयम

वग य पिरवार म पली बढ़ी थी, अभी उसकी पढ़ाई भी पूरी नहीं हई थी िक एक बड़े घराने ु े पा की शादी रोिहत क साथ हो गयी ,

पा को पूज़ा का जोड़ा िनकाल कर िदया और जãदी से नहा धोकर तैयार होने को कहा, बाद वह उनको लेना भूल गयी, जब वह बाहर आयी तो दे खा सभी लोग जोर-शोर से पूज़ा की तैयारी म जुटे थे। नहीं पहने?" अब पा को ज़रा भी याद नहीं था िक उसने गहने बाथ म म ही छोड़ पा तुमने गहने Èय े िदये ह। जब उसकी सास ने उसको िबना गहन क दे खा तो बोली-"

पा क तो होशो-हवास ही उड़ गये Èय िक उसको याद आ गया था िक े

वो गहने बाथ म म ही छोड़ आयी है और घर म ना जाने िकतने नौकर-चाकर ह कहीं िकसी ने चुरा िलये तो उसका Èया होगा कहीं उसी पर इãज़ाम न लग जाये Èय िक मÚयम वग य पिरवार की होने क कारण कहीं ये अमीर लोग उसको ही चोर न समझ े बैठे। तभी उसकी सास ने उसको सोच म डू बा दे खकर सवाल िकया-" पा बेटे तुमने गहने Èय नहीं पहने? Èया तुàह वो गहने पंसंद नहीं ह? अगर नहीं तो कोई बात नहीं म तुàह दसरे दे दे ती हँू उनको पहन लेना…" ू तभी पा जैसे नींद से जागी हो वो बोली-"नहीं मàमी जी ऐसी कोई बात नहीं है म पा की सास का इतना सुनना था

बाथ म म रखकर भूल गयी हंू अभी लाती हँू …” बस

िक वो करीब-करीब िबफ र ही पडी -'अरे ये Èया िकया तुमने ? तुम इतनी लापरवाह हो तुàह पता भी है ना घर म िकतने नौकर-चाकर ह अब गहने तो नहीं िमलने वाले।"

कहते-कहते वो बाथ म की ओर दौड़ी और वहाँ गहने ना पाकर उÛह ने शोर मचाना शु कर िदया घर क सारे लोग एकि]त हो गये, पा का रो-रोकर बुरा हाल था, वो बेहाल सी े होकर अपने कमरे की तरफ दौड़ी और वहाँ जाकर फू ट-फू टकर कर रोने लगी उसक आँसू े थे िक थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे , तभी उसकी िनगाह े िसंग टे बल पर पड़ी तो मारे खुशी क वो उछल पड़ी गहने सामने ही टे बल पर पड़े थे, उसने अपनी सास को े आवाज़ लगाई सभी लोग वहाँ आ गये और वहाँ रखे गहने दे खकर सभी च क पड़े सबकी जान म जान आ गयी नौकर से अभी िकसी ने ना ही कछ पूछा था ना ही बताया था… ु शािÛत नाम की उनकी नौकरानी पा क कमरे की ओर ही आ रही थी वह बोली-" े

बीबीजी हम बाथ म साफ कर रहे थे तो हमने दे खा आपक गहने वहाँ पड़े ह तो हमने े े उनको आपक कमरे म लाकर रख िदय ह आप दे ख लीिजये… पा डबडबाई अँख से बस उसको थÈस ही कह पायी आज़ िव ा ने उसे लिÏज़त होने से बचा िलया था। वह िदल ही िदल म उसे दआएँ दे रही थी। ु धीरे -धीरे समय बीतता गया रोिहत क साथ, जो बहत ही अज़ीब िक म क åयि ×व का े े ु åयि था, पैसे का गु र, शराब पीना, मौज़ म ती ही उसका श क था न ही उसे पा की े े परवाह थी, न ही घर की, बस उसकी दिनया तो उसक दो त और उसक श क, अब ऐसे म ु पा एक बोिझल िज़ंदगी िबताने लगी िदनभर काम करने क बाद राहल का इÛतज़ार े ु करना और राहल का शराब पीकर दे र रात म आना और खाना खाकर सो जाना यही ु अज़ीब सी िज़ंदगी जीने लगी थी पा। वहाँ न तो उसको कोई समझने वाला ही था और न ही सुनने वाला था , पर हाँ, सुनाने वाले सब थे। हाँ इसी बीच शािÛत ज र उसकी सहे ली की तरह हो गयी थी अपना दख-सुख वह उसको ु ही बताया करती थी शािÛत बस इतना ही कह पाती -"बीबी जी ये बड़े लोग ह इनकी बात Èया बताय हम…” एक िदन सभी लोग िकसी शादी म गये हये थे, पा तिबयत खराब होने क कारण घर पर े ु ही थी, सभी नौकर-चाकर भी अपने-अपने घर जा चुक थे, पा की आँख म नींद का े नामोिनशान न था, रात क बारह बज़ चुक थे, टी०वी दे खते -दे खते आँख म भी दद[ होने े े लगा था, उसने एक नींद की गोली खाई और आँख बÛद करक िब तर पर लेट गयी, ना े जाने कब नींद ने उसे अपनी आगोश म ले िलया, तभी उसने िकसी का पश[ महसूस िकया, उसने करवट ली, सोचा राहल आ गया होगा, मगर ये Èया? ये राहल नहीं राहल क े ु ु ु ु िपता थे, मारे डर और गु से से उसक चेहरा तमतमा रहा था, उसने अपने आपको छड़ाने े

की हर तरह से कोिशश की, पर नाकामयाब रही, उसने मज़बूर होकर अपने ससुर क सामने े हाथ जोड़े , भगवान का वा ता िदया, पर उस शैतान क सर पर तो वासना का भूत सवार े था, पा रोती रही, िचãलाती रही, पर उसकी चीख तब तक दीवार से टकराकर वापस आती रहीं जब तक की व िससिकय म ना बदल गयीं। कछ समय बाद सभी लोग वापस ु आ गये िकसी ने भी उसकी िससिकय की ओर Úयान नहीं िदया, सब अपने-अपने कमर म चले गये, राहल भी मुँह फे रकर सो गया , जब राहल सुबह उठा तो उसने राहल को ु ु ु सारा वृताÛत सुनाया, राहल ने कोई खास ु िति\या नहीं की, हाँ अपनी माँ को ज र बता पा को समझाने लगे – “दे खो पा तुम पा यह िदया और माँ ने सभी घरवाल को बताया। सभी

ये बात िकसी को मत बताना दे खो घर की ही तो बात है वो कोई गैर तो नहीं है तुàहारे ससुर जी ही ह ना Èया फ क पड़ता है , ऐसा तो हाई सोसाईटीज़ म चलता ही है [ े सब सुनकार तÞध रह गयी और सोचने लगी िक यह वही पिरवार है िजसने उसक िववाह क तीन िदन बाद ही सोने क आभूषण क िलये उसको िकतनी जली कटी सुनायी े े े े ँ और आज़ जब उसकी अ मत क गहने को तार-तार िकया गया तो इन ऊची िबिãडग वाल ने उफ ! तक नहीं की। ये लोग Èया समझ िक इÏजत का गहना अनमोल होता है ये तो तो चाँदी, सोने, हीरे जवाहरात की ही कीमत जानते ह, पा ने शािÛत को बुलाया और रो-रोकर उसको सारी बात बताई, शािÛत भी बुरी तरह िबलखने लगी बोली-"बीबी जी आप िदल छोटा मत करो भगवान इनक िकये की सज़ा इनको ज र दे गा, बीबी जी छोटे मुँह और बड़ी बात पर े राहल बाबा भी तो रोज़ -रोज़ नयी-नयी जगह जाते ह, तभी तो रात को दे र से घर आते ु ह, ये बात तो सभी जानते ह िसवाय आपक। े अब पा क पास कोई चारा नहीं था िसवाय खुदकशी क Èय िक इन रईसज़ाद क साथ े ु े े

लड़ने की ना तो उसम ही ताकत थी, ना ही उसक घरवाल म । े पा बस शािÛत का चेहरा दे खती रही और उसकी आँख शूÛय म कहीं अटक गयी और वो हमेशा- हमेशा क िलये मु े ----हो गयी उस उÍचवग य पिरवार से।