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कहानी

गु दे व

-अिवनाश
गुदे व ने पहले ही िदन कहा था, 'बेटा बतकही के चकर म िजस िदन पड़े _ख़बर का मम#
भूल जाओगे.' उ)ह लगता था िक लड़का नया-नया है और ज.दी ही )यूज़ म के लोग
इसे हड़प लगे.

गुदे व अ2छे आदमी ह5 . वे अ2छे इसिलए ह5 , य8िक वे ख द
ु मानते ह5 िक पऽकािरता म
अब उनके जैसे लोग नहींबचे. अपनी भाषा, अपनी समझ पर ख द
ु उ)ह ही बहत
ु फभ है .
उ)ह इस बात का भी फभ है िक )यूज़ म के लोग भी ऐसा समझते ह5 . हर मुिँकल
वC म उनको सेनापित बनाया जाता है .
लेिकन )यूज़ म के लोग कहते ह5 िक यह मुिँकल वC िपछले कई साल8 से नहींआया
है . जब से यह ख़बिरया चैनल 24 घंटे का हआ
ु है , तब से तो एकदम नहीं.

लेिकन अतीत की भGयता से ही वह इतने ख श
ु रहते ह5 िक लगता है िक सब कुछ जैसे
बस कल शाम का ही िक़ःसा है . हालांिक यह िक़ःसा दसर8
ू के िलए रहःय ही है .
पऽकािरता म नए पौधे उग आए ह5 . िज)ह वह िकःसा याद है और जो गुदे व के दोःत-
िमऽ रहे ह5 , वे ऊंचे ओहद8 पर ह5 _उ)ह गुदे व के अतीत की चचा# करने की फुस#त नहीं.
लेिकन जैसा िक सूऽ बताते ह5 , वे बड़े लोग जब कभी ख ाली होते ह5 और उनका मन उन
ख़बर8 की ख़बर लेने का होता है , तब वे गुदे व की चचा# ज़ र करते ह5 . वे सब मानते ह5
िक गुदे व की चचा# म बड़ा आनंद है . िफ़.मी दिनया
ु के िकसी गॉिशप से भी Oयादा.

लेिकन यह सब गुदे व का पिरचय नहींहै . उनका पिरचय है उनका नाम. िकसी अ2छी
कहानी और बुरे-से-बुरे जीवन की शुआत भी नाम और गोऽ से होती है .
गुदे व का नाम है 'के'. उनका नाम कभी िसफ़# 'क' हआ
ु करता था. इसी 'क' नाम से
उ)ह8ने अपना पूरा बचपन काटा. मधुबनी म कमला बलान के िकनारे सुनसान रे त पर
बैठकर घंट8 यह सोचते रहे िक वे इस पूरे िज़ले के कलटर ह5 .
िफर जब पटना के मह ि ू म वे कुछ दोःत8 के साथ एक कमरा शेयर करके रहते थे, उस

इसी ख म ु ारी म एक िदन गुदे व 'दरबारे िद. 'िद. वे अपराधी जो बाद म राजनीित की राह पकड़ने वाले थे. वे कहते ह5 िक तब उनकी आंख 8 से आंसू बहने लगते थे.ली' नाम से िनकलने वाले अख़बार के द\तर पहं ु च गए. उस वC एक दरदश# ू न हआ ु करता था. वह तो था ही. अपराध बीट. िजस पर िदन म इका-दका ु समाचार के बुलेिटन थे और उसम नौकरी सरकारी हआ ु करती थी. लेिकन अब चूिंक अख़बार म काम करते हए ु दस लोग8 के बीच गुदे व सरकार को गाली भी दे लेते थे.और पांव छू कर उनकी कृ पा मांगते. आया#वत# के िलए िचिट◌्ठय8 के जिरए िजस िक़ःम की भाषा का िरयाज़ हआ ु .ली आ गए और डीयू म उ)ह8ने एडिमशन ले िलया. उनके पास इतनी ूितभा तो थी ही िक वे एक पूरा वाय िलख पाएं. उस समय अख़बार8 म जो लोग काम करते थे. पुिलस से जान-पहचान और अपरािधय8 के बीच बेज भी.. वे नहींजानते थे िक लोग उनसे इस क़दर aयार करते ह5 और उनका इतना सbमान करते ह5 .. उस समय की राजनीित.वC भी उनका नाम 'क' ही था. तो गुदे व गदगद हो जाते. इस बीट म दसरे ू िक़ःम का तबा था. उनम आज की तरह का दप# नहींथा. यहींबढ़ती उॆ के साथ उ)ह यक़ीन हो गया िक िज़ले का कलटर बनना उनके बस म नहीं. उप-संपादकी करते हए ु उ)ह8ने संपादक के चबर म लगातार हाज़री लगाई. उ)हींिदन8 पटना से िनकलने वाले आया#वत# म संपादक के नाम िचSठी िलख ा करते थे.और एक िदन उनसे अपने िलए अपराध बीट ले ही िलया. हालांिक उनका यह अफसोस कभी-कभी अब भी छलक जाता है िक पूरा एक वाय िलख ने की ूितभा के सहारे वे िकसी िज़ला के कलटर नहीं बन सके.ली म भाषा उनके साथ आई. िजसम िमSटी की ख श ु बू भरी हई ु थी. गुदे व से सांठगांठ बनाए रख ते. गुदे व को 'दरबारे िद. और गुदे व आज की तरह नौकरी की तलाश म भटकने वाले ल^डे -लपाड़े तो थे नहीं.' ऐसी भाषा. िफर वह आगंतुक नौकरी के िसलिसले म ही य8 न आया हो. जो िज़ंदगी की तमाम दसरी ू जंग हारकर मीिडया म भा_य आजमाने चले आते ह5 . संःकृ ित और समाज के संिUV दःतावेज़ ह5 .. कभी द\तर के बाहर आकर उ)ह बुलाते. बाद म गुदे व 'क' नाम के साथ ही िद.. और सोच भी नहींपाते िक . उन िदन8 को याद करते हए ु वे मानते ह5 िक वे महज िचिSठयांनहीं . गुदे व कहते ह5 .ली' म नौकरी िमल गई. वे कम ही ूतीUा करवाते थे और आगंतुक8 से आदमी की तरह िमलते थे.

गुदे व लपक के पहं ु चे और चूंिक वहांपऽकार8 की ज़ रत थी और गुदे व अब तक ज़ रत भर पऽकार हो गए थे..'' गुदे व ने कहा. साल8 से उनके ःवaन म एक क\यू-# सा जो लगा था.. जैसे लंबी तपःया के बाद कोई बड़े दे वता सामने ूकट हो गए ह8. जैसे कह रहे ह8_'क' िज़ंदाबाद!!! अचानक उ)ह याद आया िक अरे . िजस िदन उनको काम करने की िचSठी थमाई गई. कइय8 को अटपटा लगता है िक ये नाम तो िहंदःतान ु म पाया नहींजाता.'' चं िाःवामी ने कहा. तब वे अपने नाम से जुड़ी कोई कहानी गढ़ने की कोिशश करते ह5 और हकलाते हए ु नामकरण की का. ''नाम बदल लो. वे पांव पर ऐसे िगर गए. िजसम वे गुनाह8 के दे वता बने घूमते और िकसी सुधा को अपनी सूरत िदख ाने और उसकी सूरत दे ख ने के िलए ताक-झांक िकया करते थे. िाःवामी ने उनकी ललाट पर हाथ फेरा और अपने बाएंहाथ से एक हीरे की अं चं गूठी िनकालकर गुदे व के दािहने हाथ म रख दी. वे पूछते ह5 तो गुदे व हdथे से उख ड़ जाते ह5 .अब आप ही हमारे भा_य िवधाता ह5 . सपने म उ)ह मधुबनी की वह गली याद आई.नहीं-नहीं.. उ)ह लगा िक अब वे अपने गांव म एक तालाब ख द ु वा सकते ह5 और उसके महार पर एक िशलालेख िलख वा सकते ह5 _'क'. गुदे व ने कहा.. ''औकात म रहकर बात करो...'के' की कृ पा से यह तालाब हमारी मातृभूिम को सूेम भट. .'' तब से आज तक गुदे व को लोग 'के' नाम से जानते ह5 .'' चं िाःवामी ने कहा. जब अख़बार छोड़कर गुदे व ने टीवी की नौकरी पकड़ी.. वह हट गया था. कह और िदख ा पाएंगे.. कहते ह5 . इतना वेतन उनके िज़ले के कलटर को भी नहींिमलता था.ली' म काम करते हए ु उ)ह एक बार चं िाःवामी से िमलने का मौक़ा िमला. ''बःस.पिनक कहानी कहने की कोिशश करते ह5 . ''आज से तुbहारा नाम 'क' नहीं'के' होगा. ''आप ही कोई नाम दे द ःवामी. सपने म उ)ह8ने दे ख ा िक शहर म चहल-पहल है और इस चहल-पहल के बीच बहत ु सारे लोग उनकी तरफ़ हसरत से दे ख रहे ह5 .अब उनका 'क' कहां? 'दरबारे िद. उस रात वे सो नहींसके.. तो वेतन िमला बीस हज़ार पए. तुम जानते ही िकतना हो िहंदःतान ु को?'' लेिकन जब उनका कोई समकालीन पूछता है .और दरदश# ू न पर आधे घंटे के एक )यूज़ बुलेिटन का ःलॉट ख़रीद िलया. करोड़8 की दौलत तुbहारे दरवाज़े पर होगी.. संयोग से उन िदन8 िहंदी की एक संघसमिप#त समाचार पिऽका ने एक बड़े जनवादी पऽकार के साथ अनुबंध िकया. उ)ह रख िलया गया.दरदश# ू न के िलए समाचार ला.

ःमोिकंग ज़ोन म बतकही लड़ाने और िकसी नेता और अतीत के अपराधी के साथ महंगे रे ःतरांम ख ाने- ू िमली रहती है . िरपोट# र8 से लेकर ख़बर जमा करने वाले और आउटपुट को उन ख़बर8 की थैली थमाने वाले इनपुट डे ःक के एक आदमी ने उनके साथ राजनीित की. तो वे ःमोिकंग ज़ोन म यह कहते हए ु नज़र आते ह5 िक चैनल डू ब रहा है . इसी चैनल से. िजसे उ)हींके कहने पर रख ा गया.लेिकन अब गुदे व उस चैनल की नौकरी करते ह5 .. इन िदन8 गुदे व महीने म कुछ ख़बर यह कहकर आउटपुट को दे ते ह5 िक एसलूिसव है .. साथ का मतलब यह िक उ)ह कोई आइिडया कहींसे िमलता है . हालांिक िश\ट आठ घंटे की होती है . उनकी िकःमत भी कई बार साथ दे दे ती है . 24 घंटे के इस चैनल म चार घंटे काम करने के एवज म गुदे व को दो लाख पए िमलते ह5 . ऐसे ही एक िदन वे मािलक के पास पहं ु च.े आइिडया िदया. तो हमने कई िदन8 तक इस गाने को ख ब ू ख ेला. हालांिक वे ऐसा नहींमानते. और जैसा िक गुदे व बताते ह5 यह वही आदमी है . वे िकसी ख़बर के साथ छे ड़छाड़ कर सकते ह5 . . लेिकन चूिंक गुदे व मािलक से िमल िमलाकर रहते ह5 _इसिलए और िसफ़# इसिलए चार घंटे उ)ह शहर म घूमने. जहांम5 थोड़े ही िदन8 पहले आया हं ू. लेिकन बाद के िदन8 म हआ ु यह िक मािलक के आगे-पीछे करने म वह गुदे व का उःताद िनकल गया और एक िदन आउटपुट की उःतादी गुदे व से छीनकर उसे दे दी गई. यह तय कर सकते ह5 िक हे ड लाइन या-या होगी. िकसी िरपोट# र की ख़बर पांच बार ऑन एयर कर सकते ह5 और चाह तो एक बार चलाकर हमेशा के िलए िगरा सकते ह5 . गुदे व सामा)य िरपोट# र बना िदए गए. आउटपुट का काम टीवी म सबसे तबे का होता है . तो वे तुरंत मािलक के पास पहं ु च जाते ह5 . मानते ह5 िक वे इस चैनल के ज़ री संवाददाता ह5 और उनके िबना इस चैनल का काम नहींचल सकता. लेिकन अब गुदे व को असर यह कहते हए ु सुना जाता है िक वे राजनीित के िशकार हए ु . िकसी के पास नहींहै _और जब उनकी बात को हँ सी म उड़ा िदया जाता है . सदी का पहला गीत ढॅ। उसके बाद यह गीत पूरे )यूज़ म की ज़बान पर चढ़ा और टीवी की भाषा म कह . गुदे व कहते ह5 िक उ)ह इस चैनल म लाया गया था आउटपुट हे ड बनाकर. इससे पहले तो उ)ह इस लायक भी नहींसमझा जाता था िक उनकी कहानी िकसी से कही सुनाई जाए. ऐसा नहींहै िक गुदे व बस यूंही गुदे व ह5 . पीने की छट .और दरअसल गुदे व की कहानी यहींसे शु होती है .

तो रे िडयो एफएम के साथ ज़बान लड़ाते पनवाड़ी को दे ख कर मज़ा आ गया. वही गीत था_मगर पान की लाली म भीगा हआ ु . वे अब िकसी मुगिलया स.'' लेिकन इन िदन8 वे राज दरबार8 के िक़ःसे सुनाने लगे ह5 .' आज शायद ही िवरह का वह मसला हमारे ज़ेहन म हो.तान की तरह )यूज़ म म घुसने लगे. दे श म लोकतंऽ पर ज़रा-सा कोहरा छाता है और उस वC अगर गुदे व ओबी ःपॉट पर होते ह5 . पास म मोबाइल है और सारी दिरयां ू िसमटकर बांह8 के घेरे म आ गई ह5 . पहले भी वे कुछ इसी अं दाज़ म जीते रहे ह5 लेिकन अब उनके आने म एक लचक है . ''मुिँकल से राजकुंवर ने दो-तीन शoद कहे और इतनी नफ़ासत से पेश आए िक या कहना. चैनल से लौटते हए ु जब पान की दकान ु पर ख ड़े हए ु .' पहली बार गुदे व के ूित ौnदा हई ु . एक बार िहमाचल के राजकुंवर के साथ उ)ह नाँते का मौक़ा िमला_उसका वृतांत. 'कजरारे कजरारे तेरे कारे कारे नैना. ु पहली बार जब हमने पदk पर ठमकते lँय8 के बीच उस गीत के बोल सुने_हम उतने त)मय नहींहए ु _िजतने गुदे व की इस करामात के बाद. 'न नींद नैना न अं ग चैना न आप ही आव न भेज पितया. हमारे मोबाइल म गूंज उठा_'कजरारे कजरारे तोरे कारे कारे नैना. लगा िक पूरा दे श वही गीत गा रहा है . जो लोग8 को अपनी तरफ़ ख ींचती है . ''यह चीख जनता की चीख है और तब तक गूंजती रहे गी. चलने का सलीका और बड़8 .'' गुदे व इस बात पर मु_ध थे िक नाँता करते हए ु राजकुंवर ने उ)ह चार बार भर आंख 8 से दे ख ा.' नई सदी के पहले गीत की ख ोज का ख म ु ार इस कदर चढ़ा िक गुदे व और आबामक हो गए. जब तक लोकतंऽ के दँमन ु पःत नहींहो जाते. कहते ह5 . खस ु रो के उस गीत की लरजती हई ु लय याद आ गई. बदलती हई ु दिनया ु म गुदे व की यह ख ोज िलक कर गई और पूरा )यूज़ म उनकी वंदना करने लगा. हमने भी कॉलर टोन िरसीव िकया. तो लगभग चीख ने लगते ह5 .तनत के सु. और दखु ी इस बात से िक पुरानी राजशाही की तासीर.

या सुख ी_घर म िकसी को नहींपता.दाढ़ी म िख ज़ाब चािहए. न उनके नौकर को. गुदे व लेिकन महिफल के शौकीन ह5 . 'हजू ु र!' एक बार दरभंगा महाराज के वंशज ने उ)ह ख ाने पर बुलाया. उ)ह लगता है इस )यूज़ म को आग लगा दे नी चािहए. दमा उ)ह बेदम िकए रहता है . बीवी की सूरत पर समय की झुरp पड़ रही है . एक बार आया था उनका चचेरा भाई. और जब भी घर से िनकलते ह5 . न ब2च8 को. बात बस इतनी थी िक गुदे व के मोबाइल पर एक लड़की का अqील एसएमएस पढ़कर उसके बारे म सवाल-जवाब कर िदया था. घर म भी.की-सी िचं गारी िदल के िकसी कोने म भड़क उठती है . वे ख श ु थे िक उ)ह8ने राजकुंवर के साथ नाँते के दौरान इसका िनवा#ह िकया. टी बैग डु बोते-डु बोते कंaयूटर ऑन करते ह5 . य8िक घर म अब भी तलवार ही िनहारा करते ह5 . मशीन से चाय िनकालते ह5 . अब बीवी इसी बात से ख फ़ा रहती है . ऐसा भी कहींआदमी हआ ु है . गांव का कोई आदमी उनके पास नहींआता. गुदे व ने पूरे छह महीने िदन-रात बीवी ू है . िफ़लहाल तलवार उनके शयनकU की शोभा है . जब भी राजकुंवर कुछ पूछते.. अपनी कार म भी और )यूज़ म म भी.और एकटक तलवार को दे ख ते रहते ह5 . वे चाहते ह5 िक इस चैनल के )यूज़ म म इस तलवार को कहींटांग द . एक तलवार भट की. वे ग़ौर करते ह5 िक इस बीच िकसी ने उनसे दआ ु -सलाम नहींकी. गांव से एक नौकर मंगवाया. एक तो दे र रात घर आते ह5 _पी-िपला कर. की सेवा की. वे दे ख ते ह5 िक इतना ऐrय# और इतने पैसे के बाद भी लोग उनसे बच रहे ह5 . दे ख ते ह5 हज़ार8 हज़ार इनहाउस मेल अपने क़dल के इंतज़ार म उनके इनबॉस म पड़े ह5 . अब वे अकेले ह5 .के मान का वह संःकार नए ज़माने म िब. गुदे व तपाक से कहते.. िबःतर पर िबख र जाते ह5 ...कुल ही नहींबचा. बीवी पूरे छह महीने तक अःपताल म पड़ी रही. बीवी तब से कुछ नहींकहती. और दो साल बाद जब वह वापस गया तो लकवा लेकर गया. आते ह5 . वे कंशोल ए से सारे मेल सलेट करते ह5 और . उ)ह8ने घर के राशन की िलःट थमा कर मंगल बाज़ार भेज िदया था. लेिकन उस हादसे के बाद बीवी की ख ामोशी अब तक नहींटटी गुदे व इस बात से परे शान रहते ह5 . अब लेिकन गुदे व की सांस उख ड़ने लगी है . सुबह की चाय का भाप कान8 म जाता है तो नींद ख ल ु ती है _लेिकन आंख 8 को बस तलवार की धार चािहए. जब से गुदे व ने उ)ह कमरे म बंद कर भर दम पीटा. वे तड़प कर रह जाते ह5 और ूितशोध की एक ह.

गुदे व इसी बात से कैली से ख श ु रहते ह5 . कुछ और बताता हं ू !'' िफर वह गुदे व से कहता है . तो बहत ु िदन8 तक यही समझता रहा िक इसका नाम कैली ही है . सड़क के िकनारे के ठे ले मुझे अपनी ओर ख ींचते ह5 . हमारी सोहबत िकसी-िकसी को नसीब होती है . इसी तरह कैलाश को )यूज़ म म लोग कैली कहकर पुकारते ह5 .कंशोल िश\ट डी से सारे मेल उड़ा दे ते ह5 . या तो िबकेट के पीछे लगे रहते ह5 या िसनेमा के पीछे . तो पीडी पुकार गे. तो सीपी पुकार गे और संदीप नाम है तो स5ड ी पुकार गे. सब बकवास. वे पूछते ह5 . वे कैली से कहते ह5 . ''चलेगा या. ''छोड़ो भी. िकस पर मेहरबान ह5 और िकसको डंड ा िकया जा रहा है .' और जब वे नोएडा की सड़क8 पर कैली को टहलाते ह5 . उनका मूड बन रहा है .'' गुदे व कहते ह5 . कैली ने मुःकराकर कहा. 'सब ठीक है ' ''और चैनल म या चल रहा है ?'' कैली कहता है . जैसे िूयदश#न नाम है . ''सर ये कुछ Oयादा नहींहो जाएगा. वे कैली को अपनी कार म िबठाकर चैनल से बहत ु दरू ले जाते ह5 . कैलाश िसर नवाए उनके सामने ख ड़ा है . कोने म चिलए. म5 अब भी सड़क से िकतनी मोहoबत करता हं ू . अचानक उनकी नज़र कैलाश पर पड़ती है .क की नoज़ इ)हीं नीम-हकीम8 के हाथ8 म है . मािलक अब भी गुदे व की कोई-कोई बात मान लेते ह5 . हम सब ज़लावतन म ह5 . म5 जब शु -शु म इस चैनल म आया था. लेिकन वह अपना द:ु ख बयान करने की हालत म नहीं है . उ)ह लगता है िक उ)ह8ने कोई ऐसी बात कह दी है . तो दीवार पर गुV रोग8 का शित#या इलाज बताने वाले नीम-हकीम8 के पोःटर िदख ाते हए ु कहते ह5 िक मु. लेिकन वC क़े साथ असल का पता तो चल ही जाता है . .'' िफर कैली उ)ह बताता है िक आजकल बॉस िकसके साथ सांठगांठ म ह5 . रात-िदन की िफब मत िकया करो.'' कैली की जैसे सांस अटक रही है . या सब चल रहा है ?'' टीवी म सबका नाम छोटा करके पुकारने का चलन बन गया है . िकसी को दे श की िफब नहीं. ''और कैली. ''आज की रात तुbहारे नाम. जो िसफ़# वही कह सकते ह5 .'' कैली कहता है .फी िख लाते ह5 और कहते ह5 . चं िूकाश नाम है . सड़क के िकनारे ख ड़े होकर कु. 'यहांिकसी को ख़बर से ख ेलना नहींआता. 'दे ख ो. उ)ह लगता है िक पूरे )यूज़ म म कैली ही उनका ख रै uवाह है . पुराने िदन8 की याद िदलाते ह5 .

तो मािलक के नंबर से पचास िमःड कॉल दे ख कर उ)ह होश आ गया. लेिकन कहींठौर नहींिमल पाया. ह\ता दस िदन पर दा पीकर सड़क के िकनारे गुदे व के लुढ़कने का वह सबसे अिधक साUी रहा है . हालांिक इससे पहले भी ऐसे छोटे --मोटे मौक़े उनके जीवन म आए थे. एक बार िफर वही हादसा दरपेश था. मािलक ने सीधे कमरे म बुलाया. अब तक तो उ)ह8ने िख ज़ाब म िछपे हए ु पुरसुकून चेहरे को ही दे ख ा था_लेिकन आज उसी चेहरे से झड़ते हए ु िख ज़ाब को दे ख ने का इंतज़ार है . यहांउसने सब कुछ करने की कोिशश की.समैनिशप से लेकर दलाली तक.पर आज पता नहींय8 उसे गांव की याद आ रही है . लोग खश ु थे िक यह दप# की इमारत के सब यह दे ख ना चाहते ह5 िक मािलक के च5बर से गुदे व कौन-सा मुंह लेकर िनकलते ह5 .रात के दो बजे ह5 . उस बूढ़ी मांकी याद. कैली गुदे व की कार के अं दर बैठकर फूट-फूटकर रो रहा है . थोड़ी दे र म गुदे व िनकले तो उनके चेहरे पर ःयाह परत8 का नामोिनशान नहींथा. हालांिक हादसे इससे भी बड़े -बड़े जब- तब हए ु . िजसे उसने हर महीने कुछ पैसे भेजने का भरोसा िदया था और शहर आकर पूरी कमीनगी से भूल गया था. लेिकन हर बार वे अपनी बेवकूफी. और यहांकभी इनके तो ू कभी उनके चरण छकर अब तक अपनी नौकरी बचा रहा है . और यह तो कोई हादसा भी नहीं. नोएडा की एक सड़क के िकनारे गुदे व नीम बेहोशी म िचwा लेटे ह5 . लेिकन आज उसे अपनी िज़ंदगी गलीज़ लग रही है . . वे फौरन सौ सवा सौ की र\तार से चैनल पहं ु चे.टी चार8 ओर फैली हई ु है . उ.. अपने शाही अं ु दाज़ और अपनी कछआ चाल की वजह से वह मौक़ा ख ोते रहे . साल8 बाद एक सपना उनके आगे सच की झोली फैलाए ख ड़ा था. िजसकी उbमीद म )यूज़ म लगातार सनसना रहा था. वह एक औसत ूितभा का लड़का गांव से शहर आया था. . उ)ह याद आया िक दोपहर दो बजे से संसद भवन पर उसकी ओबी रख ी गई है . हालांिक )यूज़ म म यह रोज़ का िकःसा है और रोज़ ही )यूज़ म दहलता रहता है _लेिकन यह चीख इसिलए सबसे अलग थी य8िक यह गुदे व के िख़लाफ थी. थोड़ी दे र बाद अं दर से एकतरफ़ा चीख ने )यूज़ म को दहला िदया. दोपहर तीन बजे आंख ख ल ु ी. उbदा शराब की बेकाबू गंध हवा म उड़ रही है .. दसरे ू िदन वह सुबह छह बजे घर पहं ु चे और पूरे िदन िबःतर पर मुदा# की तरह पड़े रहे . से. एक िदन िक़ःमत के सांढ़ की तरह इस नंबर वन चैनल म आ गया.

अिवनाश िह)दी के उभरते िचSठाकार8 म से एक ह5 . कैली लपक कर उनके पास पहं ु चा.मोह. इनका िचSठा है . लेिकन तभी एक ॄेिकंग )यूज़ ने सबकी तंिा भंग कर दी. संूित एनडीटीवी म आउटपुट एिडटर.ला . **-** . िजसे उ)ह8ने हंस के टीवी मीिडया िवशेषांक ले िलए ख ास तौर पर िलख ा है .चार कदम बढ़ते ही वे हँ से. लगा जैसे कल कुछ हआ ु ही नहींथा.अिवनाश पऽकािरता के साथ किवता करते रहे ह5 . लोग8 ने कैली के पास ख ड़े गुदे व को यह फुसफुसाते हए ु सुना िक उनकी मांडु मरांव ःटे ट के ख जांची की बेटी थी और िपता बड़े ज़मींदार. यह उनकी पहली कहानी है . वे िज़ला कलटर नहींहए ु तो या_मीिडया म उनका सानी ही या है ? कैली कल की तरह ही मुःकरा रहा था. )यूज़ म म सब इस वाता#लाप से है रान होना चाह रहे थे. लगभग अSटहास की तरह. कैली को पास बुलाया. **-** रचनाकार .