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कहानी

मुखौटा -सीमा सचदे व सीमा


मेि क पास , उ लगभग सोलह साल ,बात म इतनी कशल िक बड़े -बड़ मात दे जाए , ु त, åयि ×व ऐसा िक साँवला रं , दरिमयान कद , दबली-पतली,तेज़ आँख , चु त - द ु ग ु हो जाती है | बड़ी ही चालाकी से वह दसर क बाल काट दे ती है , कवल बाल ही नहींकाटती मुँह पर े े ू े थपेड़े भी मारती है और िकसी को बुरा भी नहींलगता बिãक इसक िलए िमलती है उसको अÍछी खासी मोटी रकम भी |(जो वह िकसी और क िलए होती है ) कोई खुशी से दे ती है े तो कोई मजबूरी म लेिकन दे ती सब है ,िजसको वह अपनी उं गिलय पे नचाती है | िजस तेज़ी क साथ चेहरे पर उसक हाथ चलते है उसी आ×म-िव ास क साथ चलती है बाल म े े े कची | कभी वह अपनी गोदी म पैर रख कर िबना िकसी भेद-भाव और नफरत क करती े है दसर क पैरो और नाख़ुन की सफाई और कभी उतनी ही ईमानदारी से करती है े ू मािलश और साथ - साथ म चलती रहती है उसकी मीठी जुबान भी | अपने हाथ और जुबान म तालमेल बैठाना वह बखूबी जानती है | जी हाँ ! म जानती हँू एक ऐसी लड़की को जो एक लेिडज़ Þयूटी पाल[र म काम करती है | नहीं, वह कवल Þयूटी पाल[र म काम नहींकरती , बिãक एक घरे लू कÛया है | े घरे लू कÛया ! नहींघरे लू नौकरानी है | अरे ! वह एक छोटे बÍचे की आया भी है , अभी वह वयंभी बÍची ही है | छोटी सी गुिड़या को नहलाना,उसका लÛच बॉÈस तैयार करना कल(डे कयर) छोड़ने जाना वािपस आ कर सबका ना ता तैयार करना ,सबको ू े कल से लाना, घर ू और िफर

Èया डॉÈटर, Èया इÛजीिनयर , Èया करोड़पित मिहलाएं उसक इशारे पर नाचने को मजबूर े

िखलाना,बत[न साफ करना ,Þयूटी पाल[र म जाना और जुट जाना अपने काम म | दोपहर का भोजन भी वही बनाती है , शाम तक काय[ और िफर बÍची को जाकर रात का खाना बनाना,बत[न साफ करना,रात को कपड़े धोना,सुखाना और अगली सुबह सबक पहनने क िलए कपड़े इ तरी करना और िफर जाकर पूरी दिनया को सुलाकर े े ु सोना, सुबह सूय[ की पहली िकरण से पहले जागना उसका िनयिमत काय[ है | िफर भी

उसक चेहरे पर कभी उदासी नहींदे खी | हमेशा मु कराता हआ चेहरा अनायास ही अपनी े ु ओर आकिष[त कर लेता है | उसे दे खने पर ऐसा महसूस होता है मानो दिनया की सबसे खुश रहने वाली लड़की वही है ु | कभी कोई िशकन नहीं, और न ही कोई िशकायत | िनàमो यही नाम है उसका या िफर सभी उसे इसी नाम से बुलाते है | कभी -कभी मुलाकात हो जाती है , जब म भी अपने बÍचे को कल छोड़ने जाती हँू | दोन बÍचे एक ही ू वाभािवक है | कल म है जब िमलती है तो थोड़ी ू बातचीत होना

एक िदन ऐसे ही बात ही बात म मने पूछ िलया, (जो शायद मुझे नहींपूछना चािहए था ) तुàह िकतनी तनÉवाह िमलती है ? (िनàमो क चेहरे पर कछ अजीब से भाव दौड़ गए े ु ,लेिकन िबना मुझे महसूस करवाए उसने उ र िदया) दो हजार मैड म कवल दो हजार ....? े ु (चेहरे पर åयं ा×मक हँ सी को छपाने का असफल £ यास करती हई) बहत है मैड म | ु ु

पर तुम िदन भर काम करती हो | बÍचे को सँभालना, घर की सारी िजàमेदारी और िफर Þयूटी पाल[र म भी काम दे खना ,कसे कर लेती हो यह सब ? ै हो जाता है मैड म .....| पर इतनी कम तनÉवाह म कसे ....? तुàह तो काम करने का अनुभव है िफर तुम अपना ै वयंका काम Èय नहींशु भी नहींकरना पड़े गा.....| (िनàमो की आँख आँसुओंसे छलक आई |) मजबूरी मैड म......| बस िनàमो इतना ही बोल पाई थी िक पीछे से उसकी िकसी िनयिमत \ाहक ने आवाज़ दे कर बुलाया | िनàमो ने िबना कोई दे री िकए अपने आँसू प छ िलए और पीछे मुड़कर उसे हँ सते हए बुलाया , उसक चेहरे पर वही हँ सी थी |म उस हँ सी का राज जान चुकी थी | े ु पहली बार मुझे उसकी हँ सी नकली रखा हो | तीत हई और लगा जैसे उसने चेहरे पर मुखौटा ओढ़ ु कर लेती ?अÍछी -खासी कमाई भी होगी और इतना काम

(िजस चेहरे पर मने सदा हँ सी ही दे खी , उसकी आँख म आँसू दे खकर मुझे खुद को Êलािन अनुभव हई) ु िनàमो तो अपने उसी अं ाज म बात कर रही थी और म खड़ी हई िनàमो की मजबूरी द ु सोचने पर मजबूर थी | िकतने ही तो था मगर कोई हल नहीं| ******************************** सàपक: [ सीमा सचदे व एम. ए ,एम.एड , पी.जी.डी.सी.टी.टी.एस रामाÛजÛया लेआऊट माराथली, बगलोर ५६००३७ मन म उठने लगे थे ? मेरे पास हर का जवाब