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सोमेश शेखर चÛ] की लंबी कहानी : पुनज[Ûम

पुनज[Ûम

-सोमेश शेखर चÛ] सोमे

नरक की अपनी उस िजंदगी से मु

हो िलया हँू म और िकसी आजाद पिरं दे की तरह,

आकाश क खुले म, एक तरफ से दसरी तरफ, इधर से उधर तथा ितधर से ितधर, गोते े ू लगा रहा हँू । पृØवी पर िकतनी जलन थी। घुटन ही घुटन थी वहाँ। जबिक यहाँ चार तरफ सुकन ही सुकन है और इतनी सारी शु ू ू और ताजी हवा है िक उसे म िजतना चाहँू अपने फफड़ म भर सकता हँू । इतना ही नहीं यहाँ म, पूरी तरह अपनी मज का खुद े मुÉतार भी हँू । मेरी मज , गाने की करती है तो म गाने लग जाता हँू । नाचने का मन ु े होने पर कãहे मटका मटका कर ठमक, भी लगा लेता हँू और हँ सने का जी करता है तो ू ठÓठे लगा लगाकर हँ सता भी हँू । जबिक मेरी पहले की िजंदगी, िकसी ऐसे सजा याÝता कदी की िजंदगी थी जहाँ, मेरा हँ सना तो दर, खुलकर रो लेने तक की मुझे इजाजत नहीं ै ू थी। यहाँ तक िक मेरी सांस तक पर इतना सÉत पहरा था िक एक एक सांस क िलए, े मुझे तड़प कर रह जाना पड़ता था, उÝफ............। सुनो तो ओ ऽ ऽ ऽ ..........। अरे यह आवाज कसी ? िकसी गहरी खोह से पुकार लगाती, िनहायत ही कमजोर आवाज ै मेरे कानो से टकराई है और म चै गया हँू । पृØवी से इतनी दर, आकाश क इस छोर पर, क े ू कोई यहाँ पहँु च कसे सकता है कहीं मुझे िकसी क पुकारने का ै ? े म तो नहीं हआ है या ु

िक मेरे कान ही तो नहीं बज उठे है नहीं, मुझे कोई भी नहीं पुकारा है और थोड़ी दे र क । । े िलए म मान भी लूं िक िकसी ने मुझे सचमुच पुकारा है तो म उसकी सुनूं ही Èय ? हँु ह , पुकार की बात अपने जेहन से झटक कर म िजस जगह पहँु चना चाहता था वहाँ क िलए े बड़ी तेजी से गोते लगा िदया हँू । अरे भई, जरा सुनो तो ऽ ऽ ऽ ऽ । इस दफा जो पुकार मुझे सुनाई पड़ी थी वह काफी तेज तथा प थी। जै े पुकारने वाला मेरे काफी नजदीक पहँु चकर मुझे पुकारा हो। मुड़कर स साला। उस आदमी को अपने पीछे लगा का उ×सव मनाने म मगन था पीछे की तरफ गौर करने पर मेरी ही शÈल सूरत का एक दसरा आदमी, बड़ी तेजी से मेरी ू तरफ बढ़ा आता मुझे िदखाई पड़ा है हरामजादा । दे ख, मेरे जबड़े कट कटा उठे है दरअसल इस समय म, िजस चरम आनंद की अव था म । पहँु चा हआ था और अपनी नरक की िजंदगी की मुि ु क िलए, म अपनी े ु उसम मुझे, िकसी भी तरह की दखल बदा[ त, नहीं थी, इसिलए, उससे अपना पीछा छड़ाने पीड, काफी तेज कर िदया हँू । लेिकन मुझसे भी तेज रÝतार म उड़कर वह थोड़ी ही दे र, म मेरे ठीक बगल आ लगा है और मेरे चेहरे पर अपनी नजरे गड़ाकरबड़ी किटलता से मुसकराया है ु ु । गु से से, उसकी तरफ ताक, म अपना मुँह, दसरी तरफ घुमा िलया हँू । एक तो उसका बीच ू म टपक पड़ना ही मेरे बदा[ त क बाहर हो रहा था ऊपर से वह मुझे दे खकर िजस े किटलता से मुसकराया था उसे दे खकर म एकदम से आग बबूला हो उठा हँू । ु ु Èय ............? तुमने भी आ×म ह×या कर िलया है ? ु िजतना जãदी हो, म उससे अपना पीछा छड़ा लेना चाहता था इसिलए उसक पूछने पर म े उसे कोई जबाब नहीं िदया हँू और न ही उसकी तरफ ताका ही हँू । मेरा खयाल था िक मेरी बे खी दे ख, यिद वह समझदार हआ तो अपने आप मेरा पीछा करना छोड़ दे गा। ु लेिकन यह Èया? उसका मेरा पीछा छोड़ना तो दर, सरककर वह मेरे एकदम पास सट ू आया है और पहले से Ïयादा किटल होकर मेरे चेहरे पर ताकता मुझसे पूछा है तुमने मेरे ु पूछने का कोई जबाब नहीं िदया आ ऽ ऽ ऽ ? हाँ, मने भी आ×मह×या कर िलया है लेिकन इससे तुàह Èया मतलब। म िजस बुरी तरह से उसे घुड़क िदया हँू दसरा कोई होता तो उसका, इसक आगे मुँह खोलने की िहàमत ही े ू नहीं पड़ती लेिकन उसकी बेहयाई की इं तहा दे िखए िक, उसपर इसका कोई असर ही न हआ है । ु

तुàहारी काफी कम है लगता हैिकसी लड़की बड़की क चÈकर म फस गए थे। Üयार । े ं

म धोखा खाए हए लगते हो। इस दफा वह िकसी खुरा[ट की तरह मेरे चेहरे पर ताक मुझे ु िचकोट खाने की तरह मुझ पर चुटकी िलया था। तुम हो हद दज क बौड़म.....। म तुमसे बात ही नहीं करना चाहता लेिकन तुम हो िक, े िचàकटो की तरह मुझसे िचपकते ही जा रहे हो। कौन थी वह लड़की जरा उसका नाम गाँव कछ म भी सुनूँ? ु ऐसा थेथर और िनल[Ïज आदमी म अपनी िजंदगी म इसक पहले कभी नहीं दे खा था। े िजस कदर म उस पर उखड़ कर, उसे बुरी तरह डाट िदया था, उसका भी उस पर कोई असर नहीं हआ था जै उसने कछ सुना ही न हो। से ु ु दे खो ओ-ओ म एक शादी शुदा आदमी हँू एक बÍचा है मुझे म िकसी लड़की वड़की क े चÈकर म नहीं फसा था समझे ए ए । ं ओ ऽ ऽ अब समझा म....... बीबी तुàहारी बदमाश थी........ वह िकसी दसरे मद[ से फसी ं ू हई थी या तो उसने तुàह मरवा िदया है या तुमने खुद ही उसक चलते आ×मह×या कर े ु िलया है िकसी लाल बुझÈकड़ सा, असली मतलब बूझकर वह िगरिगट की तरह अपनी , गद[ न हवा म िहलाने लग गया है तुम हो हद दज क नीच। तुàह मेरी जाती िजÛदगी म यूँ पूछताछ करने की िहàमत कसे े ै पड़ रही है सारी डाट डपट क बावजूद अपनी जाती िजंदगी म उसका जबरन दखल करना । े मुझसे बदा[ त नहीं हआ था और म उस पर बुरी तरह चीख पड़ा था। लेिकन मेरी चीख ु का भी उस पर कोई असर नहीं हआ था। ु दरअसल कछ औरत होती ही है बदचलन....... मद[ रहता है िफर भी दसरे मद[ से फस ु ं ू जाती ह। लेिकन मेरी औरत बदचलन नहीं थी। तब ज र वह ककशा रही होगी जीना दभर कर िदया होगा उसने तुàहारा और उससे [ ू ऊबकर तुमने आ×मह×या कर िलया है ।

प ी मेरी न तो बदचलन थी, न ही ककशा थी, बिãक म तो कहँू गा िक अगर भगवान प ी [ िकसी को दे , तो मेरी प ी की तरह। बिãक इस बात को यूँ कहँू िक दिनया की सारी ु पि याँ, मेरी प ी की तरह हो जाएँ, तो मद[ जाित ही नहीं, इस पृØवी क अ सी े दःख दिल र दर हो जाएँ। शरीर म, िजस तरह पेट से अ सी ु ू होती है उसी तरह मनु य जाित क अ सी े ह, िजसका पेट साफ है समिझए वह अ सी भली और समझदार है वह अ सी , ितशत रोग से मु ितशत ितशत रोग की उ×पि है और िजसकी प ी,

ितशत दःख दिल र प ी से सàबिÛधत होते ु ह। अब म अपनी प ी क बारे म े

ितशत दःख से मु ु

ू Èया बताऊ। आज क युग म जहाँ पि याँ, पितय क पाँव तक छना अपनी तौहीन ँ े े समझती ह, मेरी प ी खा पीकर, जब तक मेरी पूरी दे ह नहीं दबा लेती थी सोती ही नहीं थी। उसे लाख मना करता था...........यार तुम भी Èया झंझट करती हो रोज रोज, अरे कभी दःख बीमारी हो तो जो करना है करो, लेिकन अनिदने जो तुम यह सब करती हो ु िसफ मेरी आदत खराब करने क िलए। [ े दे िखए जी, मद[ को, िजतना औरत जानती ह, उतना और कोई नहीं जानता, मद[ खुद अपने को नहीं जानता। अÍछा बताओ तुम मुझे िकतना जानती हो? आपका चेहरा िजस तरह रोज उतरा रहता है जानती हँू बाहर िझझोड़ खाकर आ रहे हो और उलझन म हो.......। म आपकी उलझन तो दर नहीं कर सकती, मद[ हो बाहर डहकते ू , , हो तो िझझोड़ भी होगी और जब िझझोड़ म आदमी रहता है उलझन म रहता है तो उसे एक पाट[ नर चािहए, जो उसक िदमाग की सारी जकड़न ढीला कर दे और वह पाट[ नर, प ी े से बढ़कर दसरा और कौन होगा? ू अरे वाह ........ इस मामले म तुम तो बड़ी अÍछी पकड़ रखती हो, मनोिव£ान म तुàह पढ़ाया गया था Èया? दे िखए जी, िजंदगी की तमाम ऐसी बाते ह जो न तो िकताब म िलखी िमलती है और न ही Èलास म म उÛहे पढ़ाया ही जाता है । तुमने एकदम ठीक पकड़ा। दरअसल एक तुम ही, हो िक मुझे संभालकर रखी हई हो नहीं ु तो दÝतर म तो वह उठा पटक है िक अगर वहाँ की बात तुàह बताने लगूँ तो तुम तो पगला जाओगी।

दे िखए यह उठा पटक िसफ दÝतर म ही नहीं है यह उठा पटक सारी पृØवी पर चल रही [ । है पहले भी चलती थी आज भी चल रही है और आगे भी चलती रहे गी। यह संसार , क ¢े] है यु ु । यु ¢े] है यहाँ का हर जीव, जो इस पृØवी पर पै ा हआ है मरते दम तक, । द ु से घबराएँ नहीं और घबराने से जान भी नहीं बचने को। ही लड़ता है इसिलए यु

अरे वाह, तुमने तो मेरा िदमाग ही खोल िदया- अब बताइए, इतनी समझदार, बुि मान और िन ावान प ी को कोई ककशा और बदचलन कहे तो कसा लगेगा? प ी क बारे म [ ै े उसकी बात सुन मेरे जबड़े कटकटा उठे ह लेिकन म कछ बोला नहीं हँू जÏब कर िलया हँू ु अपने को। इतना ही नहीं, दसरी औरत घर म कदम रखते ही अपने म किÛ]त हो जाती ह। म और े ू मेरा पित और मेरा बÍचा। लेिकन प ी मेरी कभी भी उस तरह की सोच नहीं रखी। घर म म सबसे बड़ा हँू चार भाई ह, माँ ह, िपताजी ह, खेतीबाड़ी िसफ उतनी है िक साल क [ े मुि कल से तीन चार महीन क िलए ही अनाज होता है बाकी साल क शेष महीन म े े िबना बाजार का मुँह दे खे पेट नहीं भरता........। भाई पढ़ रहे ह उनका खचा[, लगा सगा, Ûयोता हकारी, दवा, दा , गृह थी तो भूतखाना है मड़ार है उसका पेट। झ कते जाओ, । झ कते जाओ लेिकन पूरा नहीं होगा। और एक Èलक की िजतनी तनÉवाह होती है इतना [ , बड़ा बोझ उसक संभालने क बस का भी नहीं होता। दे खो ऐसा करो, चलो तुमको घर पहँु चा े े आते ह। हम लोग यहाँ रहकर तनÉवाह का Ïयादा िह सा खा जाते ह। तुम वहाँ रहोगी तो कछ Ïयादा पै ा बचेगा। काफी कतर åय त करने पर भी खच[ पूरा न पड़ता दे ख, एक ु स िदन म प ी को घर छोड़ आने का मन बना िलया था। दसरी औरत होती, तो सुनते ही ू तुनुग जाती, हãला गै ाल करना शु त कर दे ती, लेिकन प ी ने मुझे बड़े ग े से समझाया था। दे िखए जी अकले आदमी और दो आदमी क खच म Ïयादा फरक नहीं पड़ता, थोड़ा े े सा Ïयादा लगता है अब अगर आप मुझे घर भेज दे ते ह तो मेरे खाने क अलावे वहाँ , े द कछ न कछ दसरे खच[ लगगे ही। और वहाँ कौन अपने खेत का पै ा, रखा हआ है िक ु ु ू ु चलकर उसे खाएँगे। दसरे आप अकले रहते ह तो खाने पीने पर Úयान नहीं दे ते, कसे े ै ू सूखकर काँटा हो जाते ह आपका दबला होना मुझे अÍछा नहीं लगता। ु ऐसा कहो िक तुàह दबले मद[ पसÛद ही नहीं है । ु वह तो हई है कहने का मतलब वही है । िक औरत को मोटे मद[ ही पसÛद होते ह।

अब आप तो मजाक करने लग गए जी। नहीं नहीं म जानने क िलए पूछ रहा हँू िक औरत को मोटे मद[ ही पसÛद होते ह न? े हाँ वह तो होते ह लेिकन एक बात बताइए, Èया मद को सूखी लवाई िजसम रस न हो, ए वाली अÍछी लगेगी? प ी अपने दािहने हाथ की तज[नी, ऊपर उठा, उसे हवा म, दािहने बाएं िहलाकर और गाल को अÛदर की तरफ खींच, िकसी मरिगãली औरत का खाका पेश िकया था। नहीं तब? लेिकन खचा[ पूरा नहीं होता Èया िकया जाए। ऐसा किरए आप मुझे दो चार महीने क िलए घर छोड़ कर दे ख लीिजए। अगर मेरे वहाँ े रहने से, खचा[ कम हो, तो मुझे गाँव पर रहने म कोई ऐतराज नहीं है और प ी को म िसफ तीन चार महीन क िलए नहीं बिãक पूरे साल भर क िलए गाँव पर छोड़ िदया था [ े े लेिकन इसको लेकर, उसने मुझसे कभी कोई िशकायत नहीं िकया था। अब भला ऐसी औरत को कोई उãटा पुãटा कहे तो आदमी, उसका मुँह नहीं नोच लेगा? इतना ही नहीं, दसरी औरत होती ह िक, मद[ से फरमाइश पर फरमाइश पेले रखती ह। सब ू कछ जानते हए भी िक िमयाँ को तनÉवाह िकतनी िमलती है और खच[ िकतना है और ु ु बचता Èया है िफर भी जब दे िखए, अकले म, और दो त िम] क बीच, पड़ोिसय की े े औरत क सामने, िमयाँ को जलील करती रहती है दे िखए न भाई साहब, उसी दÝतर म े । आप भी काम करते है भाभी जी को आप कसे सजागुजा कर रखते ह और एक ए ह िक, । ै तीज ×यौहार पर भी कहो िक एक अÍछी सी साड़ी लाकर दे द तो नहीं दे ते। भरी सभा म जो प ी, पित को ताने उताने मारती है वह तो मारती ही है इसी सब को लेकर वह पित , का जीना दभर िकए रखती ह, लेिकन मेरी प ी ने आज तक मुझसे कभी िकसी चीज की ू फरमाइश िकया ही नहीं। कभी कभार अगर म उसक िलए बाजार से कोई साड़ी ला भी दँ , े ू तो वह मुझपर उखड जाया करती थी। Èया ज रत थी इतनी दामी साडी लाने की, अभी घर से पै े की माँग आ गई तो Èया भेिजएगा? स अंय?

हाँ । अरे भाÊयवान कभी कभार ही सही मुझसे कछ मांगो तो सही। मेरा भी मन तुàह ु सजाने को ललकता है िक नहीं। दे िखए जी, पहनने ओढ़ने की कोई सीमा है कहीं ? और अभी म माँ क घर गई थी तो जो, े तीन सािड◌़ ाँ िमली थीं अभी तक उनकी तह भी नहीं खुली है य । वह तो है यार, लेिकन तुम मै े जाओगी तो वहीं माँ की दी हई साड़ी पहनकर, लोग कहे क ु ठ या न कह, लेिकन सोचगे तो हई, और भािभयाँ तो तुàहारी कह ही बै गी, Èयो ननद जी, मद[ की दी हई भी तो कभी पहन कर िदखाओ। ु कहती है ऐसा नहीं है िक नहीं कहती । तब ? तब Èया, दे खो जी ऐसा है िक अगर आदमी दिनया क कहने पर चलने लगे, तो उसका े ु जीना मुि कल हो जाए। दिनया कहती है कहना उसका काम है मुह बजाने की आदत है । ु दिनया की। इसिलए मैदिनया क कहने पर Úयान ही नहीं दे ती। दसरी गुर की बात यह े ु ु ू है िक अगर म आपकी दी हई साड़ी पहनकर जाने लगूँ तो साल म जो दो तीन जोड़े माँ ु दे ती है वह भी िमलना बÛद हो जाएगी। अभी तो है िक माँ समझती है िक म गरीब हँू कमजोर हँू इसिलए वह मुझे दो की जगह तीन चार सािड◌़ ाँ दे दे ती है और भािभयाँ य ु भीतर ही भीतर चाहे जो कड़कड़ाएँ लेिकन ऊपर से कछ कहने म वे संकोच करती ह। ु ु अगर म अपनी पहनकर जाने लगूँ तो वे तुरÛत माँ का हाथ पकड़ लेगी। बर िबदाई भी इसीिलए मुझे अÍछी िमल जाती है.... अब बोिलए? . अपनी इÏजत भी कोई चीज होती है िक नहीं। दे िखए जी मुझे अपने मान गया यार तुàह। ऐसा नहीं है िक मेरी प ी, घर म दिल] की तरह रहती थी। घर म रात म सोने क िलए े नाइटी थी उसक पास। रात म वह उसे पहनती थी और िदन म जब घर म रहती थी तब े भी नाइटी ही पहने रहती थी लेिकन जब शाम पड़ोिसन म बै ने का समय आता था तो, ठ अपनी झकझकी साड़ी पहन लेती थी और ऐसा बनठन कर लोग क बीच बै ती थी िक े ठ वाथ[ से मतलब है इÏजत लेकर म चाटँू गी Èया?

कोई भांप ही नहीं पाता िक हम लोग िकतने पानी म है...। अब अगर ऐसी प ी क बारे . े म कोई उãटी पुãटी बात करने लगे तो उसक मुँह पर घूंसे न मारे आदमी तो Èया करे । े समझ गया। Èया समझ गए बाज औरत होती ही ह िजभुली, पित डह बजर कर, जो कछ लाता है घर म, उसे वे अपनी ु जीभ दागने म ही उड़ा दे ती ह, पित बेचारे को हारकर काबुली पठान से कज[ लेना पड़ता है और कज[ लेते लेते उसकी यह हाल हो जाती है िक सूदखोर उसका जीना दभर कर दे ते ह ू और हारकर उसक पास खुदकशी करने क िसवा और कोई चारा ही नहीं बचता। े ु े उसकी बात सुनकर मेरी दे ह जल गई है....... वह सोचता है बाज औरत की तरह मेरी . भी औरत िजभुली थी। अभी तक इसने मेरी औरत को दे खा ही नहीं, इतना िकफायती, घर िसज[न औरत शायद ही कहीं दे खने को िमले। अब एक छोटी सी बात बताता हँू । घर की बात है नहीं बताना चािहए। लेिकन इस समय मुझे कोई भी बात बताने म कोई संकोच नहीं है......। वह बात यह हैिक अपना मुÛना है न, आिखर है तो वह बÍचा ही। उसे . Èया पता है िक म िकस कसाले म अपना िदन काट रहा हँू । ि\कट का सीजन शु े होता स े है तो..बÍचे सुर[, कबÔडी, लुकािछपी, उं चवा खलवा िजतने भी िबना पै े क खेल ह उसे न खेलकर, हर बÍचा सिचन तदलकर और गाव कर और किपल दे व की तरह ि\कट ही े ु खेलना चाहता है िजधर दे िखए, बÍचे तीन । टे या तीन लकिड◌़ ाँ गाड़कर, िवकट बना य े लगे और बांस की फÏझी या लकड़ी की पÒटी का बै । बाल चाहे टे िनस का हो, रबड़ का ट क े या कपड़े का, लगगे सÛन सÛन चै े छÈक उड़ाने। अब बÍचा तो बÍचा, चाहे मेरा हो या दसरे का। जवानी आने पर िजस तरह यौवन का बुखार चढ़ता है आदमी पर, उसी तरह ू सीजन आने पर बÍच पर ि\कट का बुखार चढ़ जाता है बिãक अब तो सीजन का कोई े । मतलब ही नहीं रहा। साल भर ि\कट का बुखार चढ़ा ही रहता है बÍच पर। मेरा मुÛना े भी, था तो िसफ चार साल का ही, लेिकन उस पर ि\कट का बुखार नहीं बिãक किहए [ े सिÛनपात चढ़ा रहता था। लेिकन उसक सिÛनपात को, उतारने की कहीं कोई गुंजाइश ही े नही थी। कारण उसका यह नहीं था िक मुÛना अभी छोटा था और मोहãले क सीिनयर े उसे अपनी टीम म संटने ही नहीं दे ते थे। बिãक कारण उसका यह था िक मुÛना जी टीम म जाते थे तो या तो उÛह बैटं ग िमलना चािहए था या बािलंग, फीिãडं ग वे िकसी भी ि सूरत म करना ही नहीं चाहते थे। एक िदन म अपने दÝतर से घर लौटा, तो दे खा मुÛना महोदय, अपने तेवर म थे।

Èय , Èया हआ मुÛना बेटे? ु म आपसे नहीं बोलूँगा। Èय भई आप मुझसे खफा Èय ह? म नहीं बोलता। आिखर इन महोदय की भृकटी Èय तनी हई है बात Èया है प ी से पूछा था मने। ु , ु इÛह बै और बाल चािहए। ट अÍछा..........? Èय भई आपको बै और बाल चािहए? ट हाँ, और Êलब भी और पै भी। ड इसका मतलब आप सिचन तदलकर बनने की ठान ही िलए है । ु हाँ मुझे चािहए। ठीक है आपको चािहए तो ला दं गा लेिकन आप तो अभी बहत छोटे ह। बै इतना बड़ा , ट ू ु होता है और तीन िकलो वजन होता है उसका, आपसे उठे गा ही नहीं..... और Êलब मेरी नाप का होता है उसे कसे पहिनएगा? थोड़ा और बड़े हो जाइए तो सब कछ ला दँ गा ै ु ू आपक िलए। े लेिकन म तो बड़ा हो गया हँू यह दे िखए, मुÛना जी मेरे सामने तनकर खड़े हो गए थे और अपने िसर क ऊपर अपना दािहना हाथ रखकर, मुझे अपने बड़े होने का े िदए थे...... इतना बड़ा। थोड़ा सा और बड़ा हो जाइए, ए उं गिलयाँ थोड़ा और लàबी हो जाएँ, तब न इसम Êलब पहिनएगा? म समझ गया। माण दे

Èया समझ गए आप ? आप म कछ लाने का दम ही नहीं है इसीिलए मुझे फसला रहे ह। ु ु सुनकर म आवाक् रह गया था इतनी छोटी उ और ऐसा पकापन।

मुझे Éयाल आया, एक दफा म सप ीक एक जै पिरवार क यहाँ गया हआ था उनका डे ढ़ न े ु दो साल का बÍचा था उस समय वह कटोरी म कोई चीज िलए वह खा रहा था। मुझे भी थोड़ा दो भई। नहीं। थोड़ा सा नहीं अÍछा लो यह कलम, इसक बदले थोड़ा सा दे दो....... लड़का मेरे हाथ से कलम लेकर े अपनी जेब म रख िलया था। और पहले की ही तरह कटोरी की चीज खाने लग गया था। दो ओ..........। म उससे मांगने क िलए अपना हाथ उसक सामने बढ़ाया था तो कटोरी े े े उसने अपने पीछे कर िलया था। कलम भी लोगे और दोगे भी नहीं ? शमा[ जी यह िसÛथेिटक युग है बÍच का अब िसÛथेिटक की चालाकी दे ख जै साहब ने हँ सते हए कहा था न ु ठीक कहा अपने जै साहब। न यह बात आज से दस साल पहले की थी उस समय बÍच का िसÛथेिटक था तो आज मेरे मुÛने का कौन सा ेन था। शायद कàÜयूटर ेन ना? ेन हआ करता ु ेन होने लग गया है बÍचे ।

मुÛने की बात सुनकर म भक रह गया था। मेरा अपना बचपन था तो हमे, अगर बाऊजी से कछ लेना होता था तो उसक िलए हम लोग नंगाते थे, रोते थे, लोटपोट करते थे और ु े अपना हाथ पांव पटकते थे। बाऊ जी से िकसी चीज को हािसल करने का हमारा यह सब

हआ करता था उन िदन । लेिकन आज क बÍचे, सीधा पौ ष को ही ललकार दे ते ह। े ु

आपम लाने का दम ही नहीं है सीधा उस जगह चोट करते ह जहाँ चोट खाकर आदमी क े पास छत से कद जाने क िसवा दसरा कोई चारा ही नहीं रहता। ू े ू Èय Èया कहती हो............? दल दल म फसा म, उबरने क िलए प ी की तरफ दे खा ं े था। मुÛनू पापा को कोई कभी इस तरह की बात कहता है ? गÛदी बात है न। जािहर था प ी भी मुÛने की बात से िवकãपहीन हो चुकी थी। नहीं, पापाजी मुझे कछ भी लाकर नहीं दे ते........ मां को अपना साथ दे ता न दे ख, मुÛना ु जी थोड़ा नरम पड़ गए थे। अÍछा ठीक है म लाऊगा, आपक बै , बाल, Êलब, पै सबकछ। ँ े ट ड ु Èय जी, कहाँ से लाइएगा यह सब...... चार पाँच सौ से कम थोड़ो लगेगा सब म....... और ए अभी, उस सबक, लायक ह भी, यह भी दे खा है आपने? े बात तो तुम ठीक कहती हो लेिकन इतनी बड़ी चोट........... यह कौन सहे गा? आपको चोट बड़ी जãदी लगती है जी। अभी आप लाने को कह िदए, अब जब तक इÛह िमल नहीं जाएगा नाक म दम िकए रखगे। तो तुàहीं बताओ Èया िकया जाए.......? मोहãले क बÍचे जो ह न उÛहीं से कह सुनकर इÛह भी साथ म लगा दीिजए खेलगे सब े क साथ। े ठीक है...... प ी की सलाह मुझे जॅची थी। . दसरे ही िदन म मुÛना जी को, मोहãले क बÍच से कह सुनकर, उनक साथ लगा िदया े े ू था। लेिकन मुÛने ने मेरा सारा जोड़ धटाव ही फलकर िदया था। अब िकसी को सोस[ े िसफािरस लगाकर, अगर कहीं घुसेड़ भी िदया जाए, तो उसे सबकी सहकर ही रहना होगा न। िबनती अरदास, बहलाना फसलाना, बड़ा ही कमजोर अ ु होता है िसफािरसी को जोड़ ।

जुगाड़ लगाकर िकसी तरह, जगह तो िमल जाती है लेिकन अगर वह कहे िक म यहाँ , अपनी ही शत[ पर रहँू गा, तो यह कभी संभव है Èया? मुÛना जी को मने यह बात पहले ही समझा िदया था िक, दे खो मुÛने, अब तुàह टीम म जगह िमल गई है इसे संभालने क । े िसफ दो ही गुर है पहला तो यह िक अपने सीिनयर को खुश रखो और दसरा यह िक [ ू अपने खेल को पुÉता करो। जब तुम अपने खेल म पुÉता रहोगे तो तुàह लोग अपनी अपनी टीम म लेने क िलए दौड़े गे। मुÛने का े थान टीम म पÈका रहे , इसक िलए मने े टीम क सीिनयर को भी समझा िदया था, दे खो बेटे, मुÛना तुàहारा छोटा भाई है अगर यह े कोई बदमासी करता है तो इसे तुम एकाध रहपट दे भी दोगे तो मुझे कोई एतराज नहीं स होगा......। मुÛने को भी म खरदास िदया था िक भइया लोग, जै े कहे इनकी मानना, ठीक है न? उस समय तो मेरी बात मुÛना भी मान गया था और टीम क सीिनयर भी े े मान गए थे, लेिकन मुझे Èया पता थी िक सीिनयर लड़क, मेरी पहली बात भूलकर, दसरी ू ही बात पकड़ लगे। यानी िक मुÛना को अपना छोटा भाई मानकर उसे अपने साथ रखने े ठ की बजाए, वे अपने बड़े होने क अिधकार का द ु पयोग कर बै गे.......। लड़क ने वही िकया....... मुÛना कोई बदमासी िकया और बस, उसे वे धरकर पीट िदए े थे। लड़क से िपटने क बाद, मुÛना रोता हआ घर आया था। दोनो गालो पर उसक पाँच े ु उं गिलय क लाल लाल बर हे े Èया हआ मुÛने? ु Èया हआ बेटे.........? मुÛना बुरी तरह िपटकर आया हआ था इसिलए वह िबना ु ु जोर जोर से िचãलाए जा रहा था। Èया हआ बेटे..... मेरे बÍचे, अरे यह िकसने मारा......? प ी, मुÛने क गाल से उसका हाथ े ु हटाकर दे खा, तो उसक दोनो गाल पर पड़ी उं गिलय क बर हे दे ख वह बौखला गई े े थी.......। दे खो जी, मुÛने क गाल..... हाय हाय, िकसने मारा मेरे बेटे को। मइया अआ ऽ े ऽ ऽ ऽ.......ने ए ऽ ऽ ऽ । भइया ने, कौन भइया ने? वही िजनक साथ पापा मुझे छोड़ आए थे खेलने को। उ ऊ आ ऽ ऽ ऽ ऊ उ ऽ ऽ आ ऽ ऽ े ....... माँ की सह पाते ही मुÛना महोदय का दन और तेज हो गया था.......। टाप क े प िदखाई दे रहे थे।

ठीक है चलो म दे खती हँू िकसने मारा तुàह, जब तक म उसे लोथाड़ लोथाड़ कर पीट नहीं लूंगी मेरा कलेजा ठं डा नहीं होगा। हालांिक मुÛने का िपटना मुझे भी अÍछा नहीं लगा था लेिकन म ढे र सारे जोड़ घटाव करक अपने को शाÛत कर िलया था। अब बÍचे ह, खेल रहे ह तो उनम आपस म कछ न े ु । कछ झगड़ा लड़ाई, मारपीट तो चलती ही रहती है बÍच को लेकर कोई लड़ने जाए तो ु यह उसकी बेवकफी ही होगी....। दसरे मुÛने को रहना हैइसी मोहãले म और खेलना भी ू ू है यहीं, अब उसे लेकर कोई बवाल क ं तो मुÛने को कोई सटने दे गा अपने साथ? तीसरे अपने पास इतनी समथ[ नहीं है िक मुÛने क िलए बै , बाल, Êलब िवकट और टे िनस और े ट े हाकी सबका जुगाड़ कर सक। मान िलया िक कहीं से काढ़ मूसकर, वह सब जुगाड़ भी कर ूँ े े िलया जाए, तो मुÛना जी क साथ खेलने क िलए तो यही बÍचे रहगे ना। इसी तरह की ढे र सारी बात सोचकर म अपने को सहे ज िलया था.......। इतना सब बदा[ त कर लेना ही ठीक है लेिकन प ी, बाप रे , बाप, उस िदन उसका । चंड ी का चेचवाते घसीटते उसे, वह घर से िनकल पड़ी थी। ु कहाँ जा रही हो? आप चुप किरए जी....... अब म उस माई क लाल को िबना पीटे नहीं रहँू गी। े अरे तुम पागल हो गई हो Èया.....? इतनी दे र म मोहãले क सारे बÍचे मेरे घर क सामने े े आ इकÒठे हए थे और वहाँ अÍछा खासा मजमा लग गया था......। म झपटकर प ी का ु हाथ पकड़ उसे रोका था कहाँ जा रही हो? आप मुझे मत पकिड◌़ इस समय, वे लोग होते कौ ऽ ऽन ह मेरे बÍचे को मारने वाले। ए अरे सुनोगी भी। नहीं म आज आपका कछ नहीं सुनूगी..... प ी \ ु ु मारने वाले.........? शेरनी की तरह मेरे सामने तनकर प दे ख म दं ग रह गया था। सा¢ात प धर िलया था उसने ......। कछाड़ बगल म ख स, मुÛने का हाथ पकड़,

खड़ी हो गई थी, वे लोग मेरे बÍचे को िखला रहे ह िक पहना रहे ह कौन होते ह वे इसे

माँ, मारने क िलए उस िदन पापा ने ही कहा था उन लोग को। मुÛना जो अभी तक भ े भ िचãलाए जा रहा था, माँ का उ\ तरह राजनीित पर उतर आया था। अंय, Èया कहा तुमने? पापा ने ही कहा था िक मुÛना को तुम लोग पीट िदया करो। मुÛने की बात से ¢णभर म ही सारी राजनीित पलटा खा गई थी और उस िदन मने दे खा था िक एक माँ, अपने बÍचे क िलए िकतना िवकराल े सारे संबंध, गÔढे म फक, \ ु प धर सकती है सारी मया[दाएं । शेरनी हो उठती है वह। लेिकन कहावत है जो कछ भगवान ु प दे खकर चुप हो गया था और कशल राजनेता की ु

करते ह अÍछा ही करते ह........। हआ यूँ िक जो बÍचे इस कांड पर तमाशा दे खने जुटे ु थे उÛह ने ि थित की नजाकत भांप िलया था और मुÛने को अपनी ग द म उठा, उसे े अपनी टीम म िबना शत[ शािमल करने का बचन दे िदए थे, चलो मुÛने तुम हम लोग क साथ खेलोगे.... तुम हमारी टीम क कÜटन बनोगे। े ै एक माँ अगर अपने बÍचे क िलए सारी हद पार कर सकती है तो बÍचा, उसकी कमजोरी े भी है...... जरा सा िकसी ने उसक बÍचे को सहला दलार िदया तो उसका कलेजा . े ु . मÈखन की तरह मुलायम भी हो उठता है...। मुÛना उस िदन िफर टीम म शािमल हो गया था। चलो एक चांटा खाकर यह परे शानी हमेशा क िलए हल हो गई। मुÛने की तरफ से िनि त हो गया था म। लेिकन दसरे ही े ू िदन, सारा बना बनाया खेल, उस ल डे ने ऐसा िबगाड़ िदया था िक िफर कभी बनने की गुंजाइश ही न रहे । िकया उसने यह था िक दसरे िदन जब वह खेलने गया तो अपने आप ू फीिãडं ग करने लग गया था और बाल जै े ही उसक पास आई वह उसे लेकर नौ दो स े ु Êयारह हो गया था और वहाँ से भागकर घर पहँु चा था और खिटया क नीचे जाकर छप े गया था। अब भला, उसकी इस बेअदबी को बÍचे कहाँ बदा[ त करने वाले थे। घेर िलया था उÛह ने मेरा घर और सबक सब, बाल से Ïयादा, मुÛने को खोज िनकालने पर उ त थे। े वह लड़का, जो उस िदन मुÛने को चांटा मारा था और डर क मारे हम लोगो क सामने े े पड़ने से कतराता था उसे तो जै े अपनी दांव िमल गई थी। स Èया हआ, तुम लोग यहाँ Èय मछे हर लगा रखे हो? ु मुÛना हम लोग का बाल लेकर भाग आया है आंटी जी।

कहाँ ? ु घर म, अÛदर ही यहीं कहीं छपा बै ा हआ है ठ ु । ठीक है तुम लोग को म दे खती हँू ।

प ी मुÛना को तलासने, कमरे म गई थी तो उसक पीछे पीछे , सारे बÍचे भी भीतर घुस े ु गए थे। मुÛना बाल िलए िदए खिटया क नीचे छपा बै ा था, प ी जानती थी मुÛना कहाँ े ठ है लेिकन वह आना कानी करती उसे खोज रही थी। ु दे िखए आÛटी यहाँ छपा है .....। Èय मुÛने ........ बाहर िनकलो ओ ऽ ऽ । नहीं िनकलूंगा। नहीं िनकलूंगा माने, को अभी म मार मारकर तुàहारा धुरा[ िबगाड़ती हँू । नहीं िनकलूंगा मुझे बाल चािहए। पहले तुम बाहर िनकलो। नहीं िनकलूंगा....। म दर खड़ा सारे नजारे दे ख रहा था। लो और चढ़ाओ उसे माथे पर. बनाओ डकत ै ू उसे......, गु सा भी लग रही थी मुझे और खुशी भी हो रही थी। अब भोगो, उस िदन तो तुमने मुझ पर भी हमला बोल िदया था, भोगो उस फल को। Èय ...... मुÛने को इसी तरह बनाओगी.....? जब सब बÍचे मेरे घर से चले गए थे तो प ी से मने अकले म पूछा था। े दे िखए जी, आपकी तो सारी िचढ़ बस मुÛने से है आप थोड़ा सा िदमाग से नहीं स चते बस अंधे भसे की तरह िजधर चले चल पड़ते ह....। म िफर बुरे फस गया था, इतनी छोटी सी ं बात म Èय भूल गया था िक माँ अपने बÍचे क बचाव क िलए सारे िनयम कानून ताक े े पर रख दे ती है ।

म तुमसे झगडा नहीं करता लेिकन बÍचे की यह आदत ठीक नहीं है और सबसे खराब बात यह है िक जब वह गलती करता है तो हम लोग को उसका साथ नहीं दे ना चािहए इससे वह िबगड़ जाएगा। मने कब कहा जी िक उसकी यह आदत ठीक है आप समझते ह िक म उसे बचा रही हँू ? और Èया है यह? आप तो सारी बात, बस चािहए और नहीं चािहए पर रखकर सोचते ह। अरे यह बात तो म भी जानती हँू िक ऐसा नहीं होना चािहए। जब जानती हो तो िफर Èय ऐसा करती हो? दे िखए जी, चाहे बÍचा हो, बड़ा हो, चाहे वह साधू संत हो, या कोई फकीर औिलया ही Èयो न । हो सब को अपने पहचान की चाह होती है अपने खुद क होने की चाह होती है अब इस । े चाह म उसकी अपनी इिÍछत व तुएँ भी शािमल ह। जब िकसी को अपनी पहचान नहीं िमलती तो उसम चोरी करने, ले भागने की वृि आ जाती है ।

लेिकन सबकी चाह पूरी ही हो सबको अपनी पहचान िमले ही यह भी तो संभव नहीं है । नहीं है इसीिलए तो वह धूतई और लैभगववल करता है [ । तो तुम मुÛने का यह काम सही ठहराती हो उसने जो िकया ठीक िकया, अपनी पहचान बनाने क िलए िकया। े नहीं। जो िकया उसने वह गलत िकया लेिकन अपनी पहचान क िलए उसक पास बाल े े होना चािहए। लेिकन इस होना चािहए का भी कहीं अÛत है ? नहीं है लेिकन कम से कम की भी तो एक नाप है िक नहीं, एक मा]ा एक रािश तो होनी , चािहए। होनी चािहए। और वह रािश यही है ।

इसीिलए तो मने उस िदन तुमसे कहा था िक मुÛने क िलए म बै बाल ला दे ता हँू । े ट आप इस बारे म िचंितत न होइए जी म सब ठीक कर लूंगी। ठीक है ठीक कर लोगी तो करो और म अपने पांव पटकता वहाँ से हट िलया था। दसरे िदन जब बÍचे रोज की तरह अपना बै बाल लेकर ि\कट खेलने जुटे, तो प ी घर ट े ू क बाहर मुÛने की खटोली डाल, ऊन का गोला और सलाई लेकर े थोड़ी ही दे र मे एक बाल आकर प ी की पीठ पर ग वेटर बुनने बै गई थी। ठ से बै गई थी..। प ी को जोर की ठ

चोट ज र लगी थी लेिकन अपने उ े य म वह सफल हो गई थी........। आÛटी जी बाल दे दीिजए, बÍचे प ी क पास आकर उससे अपने बाल क िलए िघिघयाए े े थे। दे खो, बाल खेलना है तो जाकर िकसी मै ान म खेलो यहाँ बाल िकसी को भी लग सकता द हैदे खो तुàहारा बाल मुझे लगा ना, यह दे खो। बाल तो प ी को लगा ही था इसको लेकर बÍचे अपराध बोध से \ त थे। नहीं लगेगा आÛटी जी। ठीक है अब अगर बाल लगा मुझे, तो म तुàहारा बाल नहीं दं गी......। ू ठीक है आÛटी जी नहीं लगेगा....। लेिकन बाल तो िफर भी लगना था और वह िफर उसे लगा। चूिक लड़क शत[ हार चुक थे ं े े इसिलए प ी ने बाल रख िलया था...। दे खा न आपने... मुÛने क िलए बाल हो गया न। े Èय तुमने कोई जबाब नहीं िदया? वह मेरे चेहरे की तरफ दे ख, भेद भरी मु कान िबखेर मेरे जबाब की ती¢ा करने लगा है

नहीं तुम जै ा सोचते हो मेरी प ी वै ी नहीं थी वह बड़ी घर िसज[न और समझदार स स औरत थी। अब समझा।

Èया ऽ ऽ ऽ ऽ ? तुम अवसाद\ त रहा करते थे िड ेसन था तुàह। यह बीमारी आजकल महामारी की तरह फल रही है तनाव की बीमारी है यह । ै नहीं मुझे तनाव की भी बीमारी नहीं थी। म आसन म। मुझे वह सब बीमारी कभी नहीं हई। ु तब तुमने ऐसा Èय िकया? राज की बात है यह .......... अपने राज को और गहरा करने क िलए म अपनी गद[ न े टे ढ़ी करक मु कराया था। े ु जरा म भी सुनूं- तुàहारा वह राज। तुम मेरा पीछा नहीं छोड़ोगे न ? नहीं नहीं छोड़ोगे, यह बात म तुàहारी िचÈकटई दे खकर ही समझ गया। समझ गया हँू म िक तुम िकतने िचÈकट हो। ठीक है वही सही, लेिकन अब बता भी दो। राज की बात यह है िक म आ×मह×या करक लोग को ऐसी ि थित म डाल दे ना चाहता े था िक वे िजÛदगी भर अपने िकए का फल भोगे। ओ ऽ ऽ ओ अब आई बात मेरी समझ म। तुàहारी योजना यह थी िक तुम खुद आ×मह×या करक मर जाओ और खून क जुम[ म दसरे पकड़े जाएँ और उÛह फांसी हो या े े ू सारी िजÛदगी जेल म चÈकी पीस, यही न? नहीं, वह नहीं, मने आ×मह×या इसिलए िकया िक वे चुहाड़ लोग, जो िदन रात िसफ [ े े चुहड़पन करते ह िजनक चुहड़पन क कारण मेरी िजÛदगी नरक हो गई थी वे अपराधबोध की आग मे इस तरह सारी िजÛदगी जल, आ×मÊलािन से इस कदर भीतर ही भीतर सुलग ाणायाम करता था सहज योगी था

िक एक िदन वे िवि¢ ले।

की अव था म पहंु चकर मेरी तरह जहर खाकर आ×मह×या कर

ऐसा आ ऽ ऽ ऽ ..... वह मेरे चेहरे पर दे ख, बड़ी कटखनी हँ सी हँ सा था- तो ऐसा कहो न, िक तुमको लोग ने इतना ] त कर रखा था िक तुम उसे बदा[ त नहीं कर पाए थे इसिलए तुमने आ×मह×या कर िलया। तुम हो हद दज क बेवकफ। म कह कछ रहा हँू और मतलब उसका तुम कछ और ही े ू ु ु िनकाल रहे हो। म कह रहा हँू िक मने आ×मह×या इसिलए िकया िक वे चुहाड़ लोग अपने िकए क प ाताप से और अपराधबोध से इस कदर \ त हो जाएँ िक वे पगलाइले सड़क े पर घूम। ओ ऽ ऽ समझ गया ..... कब िकया तुमने यह सब। कल शाम को ही ......। तब तो वे लोग इस समय तक, ज र अपराधबोध से िबलिबला रहे ह गे। िबलिबलाना ही है उÛह....... इतनी दे र म, मेरे मरने की खबर कब की, उन लोग क पास े पहँु च चुकी होगी। आप तो बड़े िदलच प आदमी है महराज, लोग को दं ड दे ने की बड़ी नायाब तरकीब ढंू ढ़ िनकाला आपने। मेरा तक सुनकर वह बड़े जोर से हँ सा था। [ अÍछी तरकीब नहीं है यह? सचमुच बड़ी नायाब तरकीब है यह। आपकी बुि वे लोग Èया िकए थे आपक साथ। े अब वह िक सा बड़ा लàबा है बताने लगूँगा तो बड़ी दे र हो जाएगी। इस समय िजतना जãदी हो म उÛह तड़पता हआ दे खना चाहता हँू अपना माथा कटते, और बाल न चते ू ु दे खना चाहता हँू । िफर भी ........... सं¢ेप म ही थोड़ा सुनूं तो। नहीं सुनूंगा तो मेरा दम िनकल जाएगा। की दाद दे ता हँू म लेिकन जरा सुनूं तो

िक सा सं¢ेप म यह है िक म िचरं तर क यहाँ िकरानी था। े वह तो बड़ी अÍछी कàपनी है । जानते हो? जानता ही नहीं बिãक म भी उसम काम िकया हँू । ओ ऽ ऽ तब तो तुम गदाधर बाबू को ज र जानते ह गे? जानता हँू और किपला को भी। भला जानूंगा Èय नहीं उसे म दोन क साथ े टोर म था। नौकरी आज कल िकतनी द ु ाÜय है तुम तो जानते ही हो

और वह कसे िमलती है यह भी तुàह पता होगी। ै जानता हँू बड़ी िसफािरश, दौड भाग क बाद, मुझे वहाँ नौकरी िमली थी और वह भी इसिलए िक े िजनक जिरए मुझे नौकरी िमली थी वे थे चीफ इं पेÈटर, िचरÛतर वाल की चुिटया हमेशा े इं पेÈटर साहब की मुÒठी म रहती थी, इसीिलए उनक कहने पर वे लोग मुझे नौकरी दे े िदए थे। यह बात तो है िसफािरश भी उसी की चलती है आजकल, िजसक हाथ म कàपनी वाल े की नकल होती है..... खै तब Èया हआ? े . र ु हआ यूं िक िजÛह ने मुझे नौकरी िदलवाया था उन बेचारे का हाट[ फल होकर मौत हो े ु गई...... उनक मरते ही गजाधर बाबू और किपला की कचाल शु े ु हो गई थी।

उनका कोई लगा सगा रहा होगा िजसे वे तुàहारी जगह भत करवाना चाहते रहे ह गे। नहीं बात ऐसी नहीं थी दरअसल वे थे ही बड़े द ु , नीच थे वे।

तब? उन लोग ने टोर का सारा काम मेरे िजàमे डाल िदया था उनक अपने भी काम। खुद े थे िक, मेरी छोटी

साले िदन भर घूमे और गÜपे मार और म खटते खटते मरता रहँू । खै, अगर बात इतनी र तक होती तो म िकसी तरह इसे झेल जाता लेिकन वे इतने िनकृ े छोटी गलितयां, तुरंत बास क सामने ले जाकर रख द। अब तुàहीं बताओ, तीन तीन आदमी का काम, अगर एक आदमी पर लाद िदया जाए और वह भी टोर का काम, जहाँ कहीं से माल आ रहा है तो उसे िगनकर लो, िकताब म चढ़ाओ, रखवाओ, दसरी तरफ ू सामान लेने वाल की भीड़, और सबक सब जै े घोड़े पर सवार ह । उÛह उनका सामान े स तुरंत चािहए, िगनकर उÛह सामान दो, रिज टर म चढ़ाओ, िबल चेक करो, पास करो, उÝफ ु े टोर मे इतना काम िक सांस लेने की फस[त नहीं और रकम रकम क काम, जब इस तरह आदमी बाई म काम कर रहा हो, तो गलितयां तो होगी ही, मुझसे भी गलितयाँ होती थी और ऐ साले काम धाम कछ करे नहीं, िदनभर बै कर गÜपे मार और मेरी गलितयां ु ठ े खोज.... और िमलते ही, उसे बास क सामने ले जाकर रख द.......। हालांिक बास यह बात जानता था िक म पूरी िन ा और मेहनत से काम करता हँू लेिकन रोज रोज, अगर िकसी क कान भरते रहो और उसे यह बताते रहो िक इस आदमी की नीयत ठीक नहीं ह और े उसक सबूत म उसकी गलितयाँ उसक सामने रखते रहो तो सुनने वाला कब तक िन प¢ े े रह सकता है और वह भी उस ि थित म, जब वह, दसरे प¢ को बुलाकर, उससे पूछे नहीं , ू ? िक भई, ऐसी िशकायत मुझे िमल रही है बात Èया है वे लोग उधर से बास का कान भर कर बाहर आते और इधर बास मुझे अपने चबर म बुला लेता। Èय तुàह नौकरी नहीं करनी है Èया.......? करनी है सर। करनी है तो ऐसे ही करोगे....... इसी तरह दो की जगह पांच िलखोगे? नहीं सर, गलती हो गई...... आगे से Úयान रखूगा। ं आप उन लोग की िचकटई बास से नहीं बताते थे? दे खो यार, िजस तरह की फटे हाली से म गुजर रहा था उसम नौकरी क बगै म िजÛदा े र नहीं रह सकता था। म ही नहीं मेरा पूरा पिरवार ही उसी पर िनभ[र था। म डरता था िक अगर म उन लोग की, बास से िशकायत क ं गा िक वे लोग िदन भर कोई काम नहीं

करते, सारे

टोर का काम एक अकले मुझ पर लाद िदए ह तो वे लोग हाथ धोकर मेरे े कर दं ,ू तो वे लोग

पीछे पड़ जाएंगे। इतना म उनकी अदब करता हँू इÏजत करता हँू तब तो वे लोग अपनी द ु ता से बाज नहीं आ रहे ह कहीं अगर म उनकी िशकायत करना, शु तो पूरी तरह मेरे द ु मन ही बन जाएंगे। और सÍची बात तो यह है िक जो कमजोर होता है उसका कोई नहीं होता और नहीं उसकी कोई सुनता ही है और उससे भी बड़ा स×य तो यह है िक अपने अि त×व का भय, आदमी को बड़ा िनरीह बना दे ता है और िनरीह क े पास दीनता, रोना, िगड़िगड़ाना और खीसे िनपोरना जै े अ , इतने कमजोर और बेअसर स क होते है िक उनसे वह अपनी र¢ा नहीं कर पाता। े अगर आदमी थोड़ा सा िनडर हो जाए तो वह अपनी र¢ा कर लेगा। लेिकन कमजोर िनडर होगा कहाँ से? अपनी उसकी कोई ताकत तो होती नहीं। दसरे भी ू उसकी मदद नहीं करते। कमजोर शु ठीक कहा तुमने। लेिकन इतना कमजोर होने क बावजूद, जब मुझसे बदा[ त नहीं हआ था तो एक िदन टोर े ु की िदनभर की सारी ि लप, रिज टर और लेजर ले जाकर बास क सामने पटक िदया था े े दे िखए सर आप ही दे ख लीिजए। सुबह से लेकर रात Êयारह बारह बजे तक म अकला ही खपता रहता हँू ...... टोर का सारा काम उन लोग ने मुझ पर लाद िदया है कहीं एक जगह भी िदखा दीिजए जो उन लोग ने कछ िकया हो। ु तो बास ने Èया कहा? दे खो कमजोर कचुवा होता है और लोग उसे कचुवा ही समझते ह, वे जानते है िक कचुवा े े े ू जमीन पर रगता है और िमÒटी खाता है और छ दे ने पर िसकड़ जाता है..... कमजोर क ु . े िलए लोग क िदमाग म एक अलग े े म ही होता है वे जानते ह िक यह ऐसा ही है और ऐसा ही रहे गा। दीनता और याचना और िनसहायता ही उसकी नीयत है ऐसे मे अगर वह । कहीं तनकर खड़ा हो जाए, तो लोग को बड़ा अटपटा लगता है बुरा लगता है वे यह नहीं , । सोचगे िक यह तना Èय , वे यह स चेगे िक यह तन कसे गया......? यह जमीन पर रगने ै वाला कचुवा तन कसे गया। वही मेरे साथ भी हआ था। म तो गया था बास से अपना े ै ु दःखड़ा रोने, लेिकन उसने, उसे दसरी तरह से ही ले िलया था।..... मेरी बात थोड़ी दे र तक ु ू से आिखरी तक, हर तरह से कमजोर ही होता है ।

उसने बड़ी आिजजी से सुना था उसक बाद उसने मेरे सारे रिज टर और कागज अपनी े टे बुल पर रखवा िलया था। ठीक है तुमसे नहीं होता है न काम ? मै जानता था तुमसे होगा भी नहीं। उस बुÔढे की बात मानकर और तुàहारी गरीबी पर तरस खाकर मै े तुàह रख िलया था...... जाओ कल न आकर अपना िहसाब ले लेना। िफर ? िफर Èया, उसका िनण[य सुनते ही मुझे चÈकर आ गया था और लगा था जै े मेरी दे ह स का सारा खून ही सूख गया है । तब.......... तुàह मजा आ रहा है न लेिकन मुझ पर Èया गुजरी थी उस समय म ही जानता हँू । ू म समझ गया उसने तुमको नौकरी से िनकाल िदया और तुमने नौकरी छटने क गम म े आ×मह×या कर िलया। तुम हो यार हद दज क बेवकफ, एकदम बेहू दा..... लबर लबर आगे ही दौड़ते रहते हो । े ू ठीक है बताओ Èया हआ? ु जब बास ने सारे रिज टर, फाइल अपने पास रखवा िलया और मुझे, दसरे िदन आकर ू अपना िहसाब ले लेने को कह िदया था तो उसे सुनकर मेरी सारी दे ह घुमरने लग गई थी। अपने को संभालने क िलए म दीवाल का सहारा लेकर िकसी तरह अपने को िगरने से े बचा िलया था। और जब थोड़ी दे र वही झपटकर बास क पांव पकड़ िलया था। े सर म मर जाऊगा सर अगर आपने मुझे नौकरी से िनकाल िदया तो म मर जाऊगा। मेरी ँ ँ बीबी और माँ और बहन और भाई सब मर जाएंगे सर, म बास क पांव पकड़ ब बो े पूकाफाड़ रो पड़ा था। मेरा रोना सुनकर आिफस क कइय लोग बास क कमरे म दौड़कर े े पहँु च गए थे। गदाधर बाबू और किपला भी? क कर अपने को थोड़ा संयत कर िलया था तो

नहीं वे लोग चले गए थे। वे नहीं थे उस समय दÝतर म। तब Èया हआ? ु लोग ने काफी कह सुनकर बास को िकसी तरह मना िलया था और मेरी नौकरी बच गई थी िफर Èया हआ? ु यह बात दसरे िदन गदाधर बाबू और किपला को मालूम हई। िकसी ने उÛह नमक िमच[ ू ु लगाकर सुनाया था िक शमा[ ने, कल बास से, आप दोन की िशकायत िकया था िक आप लोग टोर म कोई काम नहीं करते िदनभर गÜपे लड़ाते है और घूमते ह।

तब..........। नीच की पहचान Èया है जानते हो? नहीं। नीच जो होते ह न, वे ऊपर से काफी पािल ड होते ह लेिकन भीतर उनक कांटे ही कांटे े भरे होते ह। िवष बुझी इतनी िवषै ी गुिच[यां उनम होती ह िक वे िदनभर, िसफ दसर को ल [ ू नुकसान पहंु चाने और िबगाड़ने म ही जुटे रहते ह। यही उनकी कृ ित ह, उनक जीने का े आसन है यह। भीतर उनक इतनी गांठ और गुिच[यां होती ह इतने åयूह होते ह िक उÛह े । । ू समझ पाना मुि कल होता है नीचता और द ु ता उनकी नस नस म दौड़ता है दसरे िदन म आिफस म आया तो दे खता हँू गदाधर बाबू और किपला दोन , बड़े मनोयोग से टोर क े काम म जुटे हए ह और मुझसे बड़ा आ×मीय होकर और हँ स हँ सकर बात कर रहे ह......। ु उनका वह åयवहार और आ×मीयता दे ख म बड़ा सÛन हआ था...... चलो जो कछ कल ु ु हआ अÍछा ही हआ। ु ु Èय ......... शमा[ जी आपको हम लोग बड़ा तंग िकए न? गदाधर बाबू म आपसे ¢मा माँगता हँू ..... म आपक पांव पकड़ता हँू । कल मेरे िदमाग म े पता नहीं कसा िफतूर भर गया था िक बास से मने आप दोन की िशकायत कर िदया ै था.........।

अÍछा आ ऽ ऽ Èया िशकायत कर िदए थे? अब छोिड◌़ उस बात को गदाधर बाबू, म आपक पांव पकड़ता हँू मने जो िकया उसका ए े फल भी तुरंत ही मुझे िमल गया था........। Èया फल िमल गया जरा म भी तो सुनूं? बास ने मुझसे सारे रिज टर और फाइल लेकर अपने पास रख िलया था और कहा था कल आकर अपना िहसाब ले लेना। िफर ? िफर म बास से बहत रोया िगड़िगड़ाया आिफस क दसरे लोग भी बहत िबनती िकए तब े ू ु ु जाकर उÛह ने मुझे माफ िकया। आपने हम लोग की Èया िशकायत िकए थे जरा वह भी तो सुनाइए? गदाधर बाबू अब आप भूल जाइए उस बात को। लीिजए यह आपका जूता है न िनकाल कर िजतने जूते मनकरे , उतने मेरे गाल पर मािरए मुझसे जो गलती हई है उसका दं ड ु दीिजए। अरे भाई जरा सुनूं तो आपने Èया कहा था बास से? मने कहा था, गदाधर बाबू िक, आप और किपला बाबू कोई काम नहीं करते, सब मेरे ऊपर लाद, िदन भर गÜपे मारते ह और घूमते ह। गदाधर बाबू यह सब बात मुझसे, िबना अपनी आंखे उठाए, िबना मेरे चेहरे पर दे खे, सामने खुले रिज टर म इिÛ याँ करते पूछते जा रहे थे। उनका तब Èया हआ? ु गदाधर बाबू अब आप मुझसे कछ पूिछए नहीं मुझे बस दं ड दीिजए, मेरे िकए की सजा ु दीिजए वर काफी िवषै ा था। ल

म Èया सजा दं गा शमा[ जी आपको......। म खुद, अपने िकए पर शिम[Ûदा हँू म ही आप से ू ¢मा चाहता हँू । आपक साथ सचमुच अÛयाय हआ है हम लोग को ऐसा नहीं करना े ु चािहए था। नहीं किपला बाबू...... आप लीिजए जूता और मुझे जुितया दीिजए, लेिकन ऐसा मत किहए.... म किपल क पांव से उसका जूता िनकाल अपने गाल पर ठाप ठाप दो तीन जूते े मारा था....। अरे यह Èया कर रहे ह आप? नहीं, जब तक आप दोन मुझे माफ नहीं किरएगा म अपना मुँह पीटता ही रहँू गा। ठीक है दीिजए मेरा जूता, माफ कर िदया आपको, बड़ी धूत[ हँ सी हँ सा था किपला। लेिकन जानते हो असली नीच की यही पहचान है तुम अपनी तरफ से चाहे िजतना भी , िनहोरा कर लो, अपना कलेजा िनकालकर उनक सामने रख दो लेिकन वे डसगे ही और े डसगे तो इसिलए नहीं िक डं सकर ही उनका कलेजा ठं डा होगा बिãक इसिलए िक डं सना ही उनकी कृ ित है उनका भोजन है िकसी को ¢मा करना वे जानते ही नहीं है , ।

िफर Èया हआ? ु उस िदन से वे लोग मेरे साथ बडे अÍछे से पेश आने लगे थे। दो िदन बीता, चार िदन , बीता दस िदन बीता म समझा मामला शाÛत हो गया है लोग ने मुझे माफ कर िदया है उनक åयवहार म कहीं कोई तãखी या कड़ु वाहट नहीं थी। सब कछ एकदम सहज े ु चल रहा था, िक एक िदन अचानक बास ने मुझे अपने चबर म बुला िलया था। जी सर। यह िबल दे खो, मेरे सामने उसने एक भुगतान िकया हआ िबल सरका िदया था। ु जी सर। और यह भी, दसरा एक और िबल उसने मेरे सामने बढ़ाया था। ू जी सर। प से

इन िबल क सामान े आये ह सर।

टोर म आये है ?

तुमने खुद िरसीव िकया था? जी सर...... कहने को तो कह िदया था मने, जी सर, लेिकन िफर मुझे Éयाल आया था िक उस िदन, किपला बाबू ने िबल और चालान मेरे सामने लाकर रख िदया था........ शमा[ जी सामान मने रखवा िलया है चालान और िबल साइन करक तुरंत दे दीिजए, इसका अभी े भुगतान होना है िव ास करक मने, जै े किपला बाबू ने कहा था, कर िदया था। ऐसा । े स करने क पीछे एक कारण और था और वह कारण यह था िक म किपला बाबू और े गदाधर बाबू दोनो को िफर नाराज नहीं करना चाहता था। म ऐसा कोई काम नहीं करना चाहता था जो उन लोग क मन मे मेरे े ित े ष पै ा करे । बिãक म अपने को इस तरह द पिरवित[त कर िलया था िक वे लोग समझे िक म उनका शािगद[ हँू उनका छोटा भाई हँू उनका चेला हँू और उनकी छ] छाया म ही म जी खा रहा हँू ....। उसक िलए मुझे चाहे े [ रात दो बजे तक खटना पड़ता था म खटता था। पूववत और उन लोग को खुश रखने का य टोर क सारे काम करता था े करता रहता था। मेरे भीतर, उन लोग क िखलाफ, े

बास से िशकायत को लेकर, एक कचोट थी। अपनी नौकरी जाने का डर था इसिलए म [ उन लोग को हमेशा खुश रखने म जुटा रहता था। इसीिलए म पूवज की कही हई यह ु बात िक िकसी भी पेपर पर द तखत करने से पहले, दे ख समझकर इ×मीनान हो लेना , ज री होता है पूरी तरह िकनारे कर िदया था। िनयमतः मुझे टोर म उतने सामान, जो िबल म िदए गए ह, आए ह िक नहीं दे ख लेना चािहए था, लेिकन उन लोग क मन म े न इस बात का िव ास जमाने क िलए िक म उनका शािगद[ हँू मै े आंख मूंदकर िबल पर े द तखत कर िदया था। तुमने खुद ने माल टोर म रखवाया था......? जब बास, इतना खोद करक मुझसे पूछने े

लगा था तो मुझे समझते दे र नहीं लगी थी िक किपला और गदाधर मुझे फसाने क िलए ं े मेरे साथ घाट कमा चुक है े । सर........ यह माल न तो मने िरसीव िकया है न ही तो इसे किपला और गदाधर ने िरसीव िकया है ? जी सर। टोर म रखवाया है ।

िम टर शमा[, तुàह दो िदन अभी नौकरी करते नहीं हआ और तुम इतने चालाक बन गए? ु चोरी नहीं सीधी डकती है यह....... बास मेरी बात सुनकर एकदम से िचãला उठा था ै इतने िदनो तक दÝतर मे मेरी िजतनी भी टांड ना Èयो न हई हो और लोग मेरे साथ ु िजतना भी बुरा पेश Èयो न आए हो सब कछ म बदा[ त कर िलया था, लेिकन ु हे राफरी और चोरी का यह इãजाम, अस े जब म सपने म भी कभी न स चा होउं , िक म टोर म था मुझे और यह बात उस ि थित म और भी, टोर म हे राफरी क ँ गा... लेिकन मुझे, े

गदाधर बाबू और किपला ने सािजश करक गÔढे म ढकल िदया था। े े समझ गया। Èया, िक मुझ पर चोरी का इãजाम लगा था इसिलए मने आ×मह×या कर िलया यही न? हाँ। कारण तुम वही समझोगे जानता हँू लेिकन म जो कहँू गा उसे नहीं सुनोगे। कहो Èया कहना चाहते हो वह मेरे चेहरे पर ताक बड़ी कटखनी मुसकान मुसकाया है । मने अभी बताया, न, म किपला और गदाधर बाबू दोन को इस ि थित म डाल दे ना चाहता था िक वे अपराधबोध और आ×मÊलािन से \ त होकर सारी िजÛदगी घुट, कपार पीट पीटकर और िसर क बाल नोच नोचकर चीखते-िचãलाते, पागल की तरह गली गली घूमे। े तब तो इस समय उन दोनो की कछ वै ी ही हाल हो रही होगी। ु स ओ ऽ ऽ दे खो... तुमने मुझे बात म िभड़ाकर िकतनी दे र कर िदया चलो िदखाते ह तुàह, कसे कोई अपने िकए का पाप भोगता है वह साला बास भी, जो पूरी तरह अÛधा और ै । बहरा था वह भी कसे प ाताप की आग म जल रहा होगा इस समय। ै चलो। म उसे अपने साथ लेकर बास क बंगले क ऊपर दो तीन चÈकर लगाकर नीचे उतर आया े े हँू । यह दे खो, यह बास का बंगला है और यह जो इधर बड़ी तेजी से चले आ रहे हैन, यही महाशय है गदाधर बाबू, इनकी चाल दे खकर समझ ही रहे हो न िक िकस बाई म ह इस समय वे। समझ रहा हँू ।

गदाधर बाबू जै े ही बास की बाउं ी क गेट क पास पहंु चे है बास क टे िरयर क े को स े े े ु उनक आने की जानकारी हो गई है वह मेम साहब की गोद से कदकर, पुक पुक े । ू पुकपुकाता, गेट की तरफ दौड़ा है और गदाधर बाबू, गेट खोलकर अंदर दािखल होने क े बाद, िसटिकनी लगाने क िलए जै े ही पीछे मुड़े ह क ा उनकी धोती का ढकवा, अपने े स ु ु दांत से पकड़, जमीन पर लोट पोट करक उनक साथ िखलवाड़ करने लग गया है क ा े े । ु उनकी धोती खींचकर उÛह पूरी तरह नंगा न कर दे , इस डर से वे, अपना ढकवा अपने ु हाथ से पकड़, हरी राम को पुकारने लग गए ह। हरी राम ओ हरी राम जरा जोकी को संभालो भइया ऽ ऽ ऽ। Èय मेरे बÍचे, इतने िदन से तुम मुझे दे ख रहे हो, िफर भी, जब तुम मुझे पाते हो तो े बचपना करने से बाज नहीं आते। चु चु चु, गदाधर बाबू, अपनी धोती खुलने से बचाने क साथ क े को चुचकार पुचकार कर उसे शाÛत करने म भी जुटे हए थे। ु ु जोकी, ओ जोकी, हाट आर यू डू इं ग, यू डोÛट िरकÊनाइज गदाधर, कम आन, लान क कोने े म माली को िहदायत दे ती मेम साहब जोकी की वािमभि दे ख गदगद हो गई थी। उनक बुलाते ही जोकी गदाधर बाबू का ढकवा छोड़ दौड़ लगाता मेम साहब क पास पहंु चा े ु े था और वे उसे अपनी गोदी म उठा कर उसे सहलाने लगी है । बड़ा नटखट है जोकी, मेमसाहब। गदाधर बाबू गेट से भागते दौड़ते मेमसाहब क पास े आकर खड़े हो गए थे। तुम यह धोती पहनकर Èय आते हो गदाधर जोकी को तुàहारी धोती पसÛद नहीं है । नहीं मेमसाहब जोकी है ही बड़ा नटखट, एकदम बÍच की तरह, मुझे दे खते ही शरारत करने को मचल उठता है । Èय जोकी Èया कह रहा है गदाधर पुक पुक पुक..... गदाधर का नाम सुन जोकी िफर पुकपुका उठा है । अब चुप भी करो जोकी ई ऽ ऽ गदाधर..... Èया बात है इतने सबेरे सबेरे....... साहब उठ गए ह िक नहीं मेम साहब

हाँ उठ गए ह वह अपने

टडी म बैे ह लेिकन बात Èया है ठ ?

टोर म शमा[ जो ह न मेमसाहब........।

हाँ हाँ हाँ हाँ। उसने आ×म ह×या कर िलया मेम साहब यू मीन सुइसाइड ? हाँ मेम साहब। सुइसाइड भला Èय .......? साहब को फसाने क िलए मेमसाहब। ं े åहा◌ाट......... साहब को फसाने क िलए ए........ऽ ऽ। ं े आप उसे नहीं जानती मेमसाहब बड़ा ही कलाकार आदमी था वह बड़ा ही द ु .......। उन दोन की बात सुनकर बास भी Èय गदाधर Èया बात है ? यर, वह अपना शमा[ है न, उसने सुइसाइड कर िलया है यर। तब........। बास ने ‘‘तब’’ कछ इस तरह कहा है जै े वह गदाधर को बता रहा हो िक ु स े यह भी कोई खबर म खबर हई िजसे बताने क िलए तुम इतनी दर दौड़े चले आए हो। ू ु म आपको पहले ही कहता रहा सर, यह आदमी ठीक नहीं है लेिकन यह मरदद इतना ू िगरा हआ होगा म तो कभी सोच ही नहीं सकता था। थोड़ी दे र ु िकए थे। क कर बास का ख अंदाजने क बाद, गदाधर बाबू अपना चेहरा पूरी तरह िगराकर, बास से िफर कहना शु े टडी से िनकल कर लान म आ गया है ।

यर, पीछे आपको बदनाम करने क िलए जो कछ वह करता रहा वह तो आप जानते ही े ु ह जब हर कदम पर उसकी चाल नाकाम कर िदया गया तो अब आकर उसने यह चाल चल िदया। मतलब........? गदाधर की बात सुनकर बास थोड़ा रह यमयी हो उठा है । मतलब बड़ा सीधा है सर, आ×मह×या करक ह×या का कस बनाकर आपको फसाना चाहता े े ं है वह। गदाधर तुम भी कसी बÍच जै ी बात करते हो। वह कचुवा साला मुझे Èया फसाएगा। ै स ं जानता हँू सर, आपकी सामØय[ जानता हँू लेिकन उस सब की Èया ज रत है सर, जब तक गदाधर है आपको िनि Ûत रहना है म तो िसफ आपको सूचना दे ने चला आया था। और । [ अगर कछ होगा भी तो म तो हँू न सर। आपको इतनी छोटी सी बात क िलए नाहक ु े परे शान होने की ज रत नहीं है ठीक है सर म चलकर दे खता हँू । । Èय यह तुàहारा चेहरा Èय सूख रहा है अरे अरे , यह लड़खड़ा Èय रहे हो तुम। मेरा सारा गिणत ही उलट गया। गिणत उलट गया माने...... इसक आगे भी कोई जोड़ घटाव था तुàहारा? े नहीं, मने जो सोचा था सब उसक उãटा हो रहा है े । तुम हो हद दज क बेवकफ, भ द ू े ू नहीं, म सोचता था िक आदमी की मौत, िकसी क भी कलेजे को दहला कर रख दे ने वाली े चीज होती है िकसी क मरने पर लोग को छाितयां पीट पीटकर और धाड़ मार मारकर े रोते दे खा है मने। मौत वौत कछ भी नहीं है उससे न कोई दहलता है न पसीजता है और न िकसी की ु । , द ु ता दर होती है न ही िकसी म Üयार और आ×मीयता उपजती है कोई भी घटना, चाहे । ू वह िकतनी भी हौलनाक Èय न हो, हर आदमी उसे अपने अपने ढं ग से लेता है जो नीच । कृ ित क लोग ह वे सीधी सी सीधी बात म भी खुरपंच ढंू ढ लेते ह यिद वह उनसे े

ताãलुक रखती है तो। और यिद वह उनसे ताãलुक नहीं रखती, तो िकसी को Èया पड़ी है िक कौन एÈसीडट होकर मरा और कौन जहर खाकर। लेिकन मने ऐसा कभी सपने म भी नहीं सोचा था। तुम सोच भी नहीं सकते थे। जड़ता जो है तुमम। तुम हो सरल कृ ित क आदमी और े

िनहायत मूख[ भी। इसिलए िजतना तुमने सोचा है तुàहारे सोचने की औकात ही िसफ [ उतनी मर थी। यह बात तुàहारे िदमाग म ही नहीं आएगी िक इस संसार म हर जीव, दसरी तमाम चीज की तरह मौत को भी अपने ू है यिद वह उसक । े वाथ[ क तराजू पर रखकर पहले तौलता े वाथ[ से ताãलुक रखती है तभी उससे उसका सरोकार होता है और

उसका वह सरोकार भी उससे, उतनी ही मा]ा म होती है िजतनी मा]ा म उससे उसे हािन या लाभ होता है नहीं तो भयानक से भयानक हादसा तक उसक िलए बेमतलब की चीज । े होती है और वह उसे अपने जेहन से पूरी तरह खािरज कर दे ता है दसरी बात यह है िक । ू चाहे बड़ा से बड़ा और िदल दहला दे ने वाला हादसा ही Èय न हो यिद उसका िकसी से संबंध भी होता है तो वह उस हादसे म भी अपनी िनकालता है जै े दे ख रहे हो न, गदाधर नीच । स कृ ित क िहसाब से अपना मतलब ढँू ढ़ े है तुàहारी मौत कृ ित का आदमी है द ु

को, उसने तुàहारी एक गहरी सािजश की तरह िलया है । ठीक कहा तुमने। ठीक नहीं कहा, चलो और भी दे खो, इतना ही दे खकर तुàहारी आंख नहीं खुलेगी, चलो....... े िदखाते ह, वह मेरा चचुआ पकड़ मुझे घसीटता राम िवलास क पास लाकर खड़ा कर िदया है । इसे पहचानते हो? हाँ पहचानता हँू यह रामिवलास है न.... कान पर हाथ रखकर कसे पूव छे ड़ रखा है इसे दे ख रहे हो न ? ै हाँ, दे ख रहा हँू । इसे भी तुàहारी मौत की जानकारी हो गई है वह कसे? ै

यह सुबह सुबह तुàहारे घर पै ा मांगने गया था इसक यहाँ दध का पै ा बाकी है न? स े स ू हाँ...... बाकी तो है । चलो िमलते ह इससे। वह मुझे घसीटकर ठीक राम िवलास क सामने लाकर खड़ा कर े िदया है । राम िबलास कछ सुना तुमने? ु Èया हजूर। ु वह िचरं तर का टोर बाबू शमा[ थान, उसने आ×मह×या कर िलया।

हाँ साहे ब..... अभी अभी दे खकर आया हँू जहर खा िलया था उसने। उसने आ×मह×या Èयो िकया कछ जानते हो? ु कोई घपला िकया था यही सुनने मे आया था हजूर। ु तुàहारे भी कछ पै े बकाया थे न उसक यहाँ ? ु स े हाँ साहे ब दो सौ बाकी थे पानी म चला गया हजूर। ु लेिकन उतने का तो तुम उसे पानी िपला िदए होगे राम िबलास। साहे ब इसीिलए तो सÛतोष कर िलया। लेिकन साहे ब, कपनी म उसका कछ न कछ िहसाब ं ु ु तो ज र बाकी होगा। लेिकन िजतना बाकी होगा उससे Ïयादा वह खाकर बै ा होगा एडवांस ले िलया होगा राम ठ िवलास। ठीक है साहे ब नहीं िमलेगा तो Èया करगे इतना घाटा तो सहना ही पड़े गा। और दे खोगे? नहीं अब म और कछ भी नहीं दे खना चाहता। ु

दे खोगे कसे नहीं....... वह मुझे घसीटता हआ सेठ मुरारीलाल की दकान पर लाकर खड़ा ै ू ु कर िदया है । इस ल डे को म बार बार कहता था, उधार मत दो लेिकन इसने मेरे चुपक, उस िभखमंगे े को उधार दे िदया..... सेठ मुरारी लाल \ोध म आग बबूला हो, छोटे बेटे पर बरस रहे ह। े साले, आदमी पहचानते ही नहीं...... और मुरारीलाल का छोटा लड़का, दकान क एक कोने ू म जमीन म अपना माथा घुसेड़े खड़ा है और बाप की बड़बड़ाहट सुन रहा है । चलो और िदखाते ह तुमको...... मेरा चचुवा छोड़ उसने मेरी गद[ न पकड़ िलया है और मुझे धिकयाते हए एक हाल म लाकर खड़ा कर िदया है । ु दे खो यार यह आ×मह×या का कस है उसम कछ हािसल होने को नहीं ह। े ु कस तो बनाना पड़ता है शुÈला जी, कस बन गया तो कछ न कछ तो हािसल हो ही े े ु ु जाएगा कोिशश करने म Èया नुकसान है । रामजी भाई ठीक कह रहे ह शुÈला जी कस तो बनाना पड़ता है और िजतना आप सोच े रहे ह कस उतना कमजोर भी नहीं है इसम अगर तूली को घसीट िलया जाए तो कस म े । े जान आ जाएगी। तूली ई ऽ ऽ कौन तूली ? अरे वही डाइरे Èटर का साला और कौन तूली। िचÛतामिण यार तुàहारी भी बुि दोन पर शमा[ क द तखत ह। े लेिकन माल टोर से गायब भी तो कराए जा सकते ह। का िदवाला िनकल चुका है अरे उस िबल और चालान

Èया बेहू दी बात करते हो िचÛता। Èया बात कर रहे ह ए लोग, सुन रहे हो? जी ई ई । ए साले अपनी ही िफराक म है कछ बवाल करक कपनी से कछ ऐंठने का । ु े ं ु ो\ाम बना रहे है । ए लोग तुàहारी लाश कपनी क गेट पर रख लोग की सहानुभूित बटोरगे, उनसे पै ा ऐंठगे ं े स तुàहारे बाल बÍच क नाम तुàहारे कफन दफन क िलए और लोग की भावना उभाड़, े े कपनी क िखलाफ उÛह भड़काएंगे तूली क िखलाफ करगे और उससे पै ा ऐंठगे। ं े े स

लेिकन ऐसा Èय करते ह लोग? Èय िक ऐसा करने से सबको कछ िमलेगा। तुम समझते हो तुम मरकर लोग म एक ु िव फोट कर दोगे, तोप दाग दोगे, पृØवी पर भूचाल ला दोगे लेिकन तुम नहीं जानते, लोग क िलए मृ×यु भी एक व तु है तुàहारी शरीर तुम नहीं हो वह एक िबकने और खरीदने े वाली चीज है मोलभाव की चीज है । हे राम........। हे राम मत करो, चलो और भी दे खो अभी तुमने दे खा ही कहाँ ह। लेिकन अब म और कहीं नहीं जाऊगा। ँ जाओगे कसे नहीं...... वह मेरी गद[ न पकड़ मुझे धिकयाता, मेरे घर म लाकर खड़ा कर ै िदया है.... यह दे खो यह तुम मरे पड़े हो न.....? . उÝफ िकतनी दग[Ûध है यहाँ..... मेरा सारा शरीर उिãटय म नहाया हआ है .... ु ु ू और मजे की बात तो यह है िक इस शरीर को कोई छने वाला तक नहीं है यहाँ। तुàहारे े सारे दो त और द ु मन गायब ह यहाँ से, सब तुàह दे ख दे ख कर जा चुक ह.... उधर दे खो उस कोने म कौन बै ी है ठ । मेरी प ी है । उसी की तुम इतनी बड़ाई करते थे न िक वह बड़ी सुघड़ है मुझे बहत मानती है । ु एक पु ष को एक औरत िजतना समझती है पु ष खुद अपने को उतना नहीं समझता.... प ी की बात मेरे कान म घनघना उठी है.... पु ष जब डह बजर कर घर लौटता है तो . उसे एक साथी की ज रत होती है जो उसकी वेदना उसकी पीड़ा खींच उसे हãका कर दे .......। सुनती हो........ ए जी ........ म प ी को पुकारा हँू लेिकन वह तो.... जै े पथरा स सी गई है प×थर की बुत बन गई है वह.... और मुÛना उसकी गोद म अपना िसर रखे दबका पड़ा है........ . ु Èय ऽ ऽ ऽ इधर दे खो मेरी तरफ म तुàहारे सामने खड़ा हँू इस तरह तुम िनज व Èय हो गई हो... सुनती हो ओ ऽ ऽ ।

नहीं सुनेगी वह, उसक सुनने और दे खने की सारी शि े

ख×म हो गई है

ु Èया अपन से िबछड़ने का इतना गम होता है लोग को? बेवकफ कहीं क...... उसने खींचकर एक तमाचा जड़ िदया है मेरे गाल पर। पूछता है ू े ु अपन से िबछड़ने का इतना गम होता है लोग को। कल से दे खना िकस तरह मींजी लितयाई जाती है यह तुàहारी औरत, िकस तरह लोग इसकी बोिटयां चबाएंगे, तुàह यही सब दे खना है अब और दे ख दे खकर रोज ही आ×मह×या करना है.....। यह तुàहारा बेटा . जो है न दे खना िकस तरह बांय बांय िचãलाता है..... लोग क जूठन िगर जाने पर, उसे . े पेट म डाल लेने क िलए िकस तरह क े ु हे भगवान। भगवान को मत बुलाओ। तुम एक चीज बता सकते हो? यह तुàहारी औरत जो है न, वह तुàह Ïयादा से Ïयादा िखला दे ना चाहती थी और खुद बेचारी अपने आधे पेट ही खाती थी। अपना पेट भर जाने क बाद तुमने कभी दे खा था िक यह बेचारी जो तुàह इतने े रहती है उसका भी पेट भरता है िक नहीं, दे खा था कभी? नहीं । वह बेचारी आधे पेट खाती थी इसिलए िक तुम बचे रहो वह बची रहे तुàहारा पिरवार बचा रहे तुàहारी दे ह मींजने क बाद ही सोती थी िक तुàहारे दद[ काढ़ ल, तुàहारी यं]णा कम े कर दे उसका िसला उसे यह िदया तुमने? अब म Èया क ं मेरे भाई......... करने को कछ बचता भी है अभी। जो करना था सब तो कर िदया तुमने। अब तुàह ु िसफ दे खना है..... और दे ख दे ख कर आ×मह×या करना है [ . । चलो और िदखाता हँू । अब म कहीं नहीं जाऊगा ँ ेम से िखला दे ने पर जुटी से होड़ लेता है ।

जाओगे कसे नहीं, जाना तो तुàह पड़े गा और वह मुझे धिकयाता खदे ड़ता मेरी माँ क ै े सामने लाकर खड़ा कर िदया है । माँ........ को दे खकर म बड़ा अहक कर उससे िलपट लेने क िलए दौड़ा हँू लेिकन दे ह तो े मेरी है नहीं िफर भला म उससे िलपटता कसे इसिलए रोता हआ उसक पास खड़ा हो गया ै े ु हँू । कौन है रे ........... मेरा सोनू..... तू कब आया रे ......, माँ जै े मेरी दे ह की गंध से ही स मुझे पहचान गई है । बोल जबाब Èय नहीं दे ता........ इस अपनी अंधी माँ को। वह मेरे मुँह पर जोर का एक घूसा जड़ िदया है इसी की आँख का तू आपरे शन करवाकर अपने कज से उऋण हो लेना चाहता था न ? बोल बुला रही है तुझे तेरी माँ। सोनू..... तू चुप Èय हो गया रे ...... मेरे पास Èय नहीं आता.....माँ अपने दोन हाथ मेरी तरफ बढ़ा मुझे अपने पास बुलाने लग गई है । अंधेपन की दयनीयता दे ख रहा है माँ क चेहरे पर? े सोनू...... तेरी नटखटाई अभी वै ी ही है.....रे , जानती हँू जब तक तू मुझे पूरी तरह स . िखझा नहीं लेगा मेरी गोदी मे नहीं आएगा। यहाँ खड़ा खड़ा रोने से कछ नहीं होगा, जाता Èय नहीं माँ की गोदी मे वह मुझ पर चीख ु पड़ा है । लेिकन म जाऊ कसे? ं ै एक दफा और जहर खा ले, बस पहंु च जाएगा.......... दं ? ू नहीं......... माँ तेरा सोनू जहर खाकर मर गया, उसने मेरी मौत की खबर माँ को दे िदया है । मर गया........ सोनू मेरा मर गया..... अंय...... समाचार सुन माँ की पूरी शरीर एक दफा थरथराई है और वह जहाँ बै ी थी वहीं पथरा गई है ठ

माँ आ ऽ ऽ ऽ ......... और दे खोगे नहीं ई ई ऽ ऽ .... म अब पुनः अपनी उसी शरीर म जाना चाहता हँू .... उसी पिरवेश और माहौल म उसी ज ोजहद और उठा पटक म उसी åयूह और च\åयूह म, उसी आशा िनराशा म, उसी मान अपमान म Èय भला? Èय िक वहाँ जीवन है जी ई ई वन है उसने मेरी गद[ न पकड़ मुझे बड़े जोर से फश[ पर पटक िदया है म औधे ं मुँह जमीन पर िगरा हँू और मेरी आंख खुल गई है । -समा -