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सोमेश शेखर च

ि की कहानी : सफर

बस कती, इसके पहले ही वह उससे कूद, रे लवे ःटे शन के िटकट घर की तरफ लपक

िलया था। उसकी शे न के छटने का समय हो चुका था इसिलए वह काफी ज,दी म- था।
िटकट घर के भीतर पहँु चकर, यह जानने के िलए िक, िकस िखड़की पर उसके ःटे शन का
िटकट िमलेगा, ज,दी ज,दी, िखड़िकय3 के ऊपर टंगे बोड7 पढ़ा था। ’’यहाँ सभी जगह3 के
िटकट िमलते ह9 ’’ वाली िखड़की पर नजर पड़ते ही उसकी आँखे चमक उठी थी और वह
उसी तरफ लपक िलया था।


िटकट घर की िखड़की के ऊपर टंगी घड़ी के मुतािबक, उसकी शे न छटने म-, अब िसफ7,
तीन िमनट ही बाकी रह गए थे और इतने कम समय म- िटकट कटवाना और दौड़कर शे न
पकड़ना, उसे बड़ा नामुमिकन सा लग रहा था िजसके चलते वह घबराया हआ
ु था और

ज,दी से ज,दी िटकट कटवाकर, शे न छटने के पहले, उसे पकड़ लेने की उतावली म- था।
वैसे उसकी इस उतावली की एक वजह और भी थी वह यह िक, उसके घर की तरफ, िदन
ू जाने का मतलब था अगले चौबीस
भर म- िसफ7 यही एक शे न जाती थी और इसके छट
ु िठठर
घंटे तक, िबना खाए िपए, खून जमा दे ने वाली ठंड म-, ःटे शन पर िठठर ु कर अपनी
जान दे ना। हालांिक ठंड से बचने के िलए वह, सभी मुमिकन उपाय कर रखा था, लेिकन
जैसे जैसे शाम नजदीक आती जा रही थी, कोहरा और भी घना होता जा रहा था और
इसी के साथ ठंड भी बढ़ती जा रही थी। अभी िदन के चार ही बजे थे और वह िसर से
लेकर पांव तक जरत भरके गरम कपड़े भी पहन रखा था, बावजूद इसके उसे लगता था
ठंड उसकी हिBडय3 म- घुसड़ती जा रही है। िचं
ता उसे इसी बात की हो रही थी िक, जब
िदन के चार बजे, ठंड के चलते उसकी यह हाल है तो, रात म- यह कैसी होगी इसी को
सोचकर, वह बुरी तरह परे शान था।

िखड़की पर पहँु चकर, बड़ी बेसॄी से वह अं
दर की तरफ झाँका था। यह दे खकर िक, बाबू
अपनी सीट पर बैठा हआ
ु है, उसे बड़ी राहत िमली थी। बाबू जी एक िटकट खं
जनपुर, अपने
ःटे शन का नाम बता, िटकट के पैसे िनकालने के िलए, हाथ अपनी प9ट की जेब म- डाला
था तो एक दम से धFक रह गया था। पैसे, उसकी प9ट की जेब म- थे ही नहीं। कहींमेरी
जेब पर, िकसी पािकट मार ने, अपने हाथ तो साफ नहींकर िदए? या इस हबड़ दबड़ म-, मै

हे राःते म- ही तो नहींिगरा आया। दरअसल जब वह बस म- था, उसी समय, िटकट के
पैसे िगनकर, कमीज की ऊपरी जेब म- सहे ज िलया था िजससे िक पैसा िनकालने और

िगनने म-, वेवजह की दे री न हो। लेिकन यह बात, इस समय उसके िदमाग से पूरी तरह
उतर चुकी थी। िखड़की के पीछे बैठे बाबू को, उसने अपने गंतGय ःटे शन का नाम, पैसा
दे ने के पेँतर, इसिलए बता िदया था िक, इस बीच, िजतनी दे र म- वह अपनी जेब से पैसे
िनकालेगा, उतनी दे र म-, बाबू िटकट काटकर तैयार बैठा होगा, वह उसे पैसा पकड़ाएगा और
उससे िटकट लेकर, गाड़ी पकड़ने के िलए दौड़ पड़े गा।

कमीज की जेब म- पैसा महफूज पाकर, उसकी जान म- जान आ गई थी। िच,लर सिहत,
िटकट के िजतने पैसे बनते थे पािकट से िनकालकर, अपनी मुJठी म- िलया था और पूरा
हाथ, िखड़की म- घुसेड़, िटकट बाबू के सामने कर िदया था। बाबू जी एक िटकट खं
जनपुर।

उसके हाथ से िटकट के पैसे थाम, बाबू बड़ी सुःती से आगे की तरफ झुक आया था और
अपनी गद7 न, िखड़की के करीब तक खींच, उसे सूिचत िकया था गाड़ी अठारह घंटे लेट है।

अठारह घंटे ए ए ऽ ऽ लेट ऽ ऽ ट।

जी ई ऽ ऽ ऽ ऽ ।

िटकट काट दँ ू ऊँ ऽ ऽ ?

गाड़ी के, अठारह घंट- लेट होने की बात सुनकर, वह एकदम से बेजान सा हो गया था। बाबू
को िटकट काटने के िलए, हाँ कहे या नहीं
, उसकी कुछ समझ म- नहींआ रहा था। थोड़ी
दे र तक बाबू, अपनी गद7 न आगे की तरफ खींच, उसके जबाब का इंतजार करता बैठा रहा
था लेिकन जब उसे, उसकी तरफ से कोई जबाब नहींिमला था तो वह, झुंझलाकर िटकट
ू स, उठ खड़ा हआ
का पैसा, वापस उसकी हथेली म- ठं ु था और िटकट घर की िखड़की दडाम
से बंद करके, कमरे से बाहर िनकल िलया था।

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रामजनम से उसकी मुलाकात, असा7 पहले, एक िदन शे न मे, सफर के दौरान हई
ु थी। हआ

यह था िक उस िदन, िरजवMशन उसके पास था नहीं। शे न के िजस जनरल िडNबे म- वह
चढ़ा था उसम- इतनी भीड़ थी िक कहींखड़ा होने तक की जगह नहींथी। लोग3 के साथ,
काफी धFका-मुFकी और गाली गलौज के बाद, उसे एक कोने म-, थोड़ी सी जगह िमल गई
थी और वह वहींपर, अपने पा◌ॅव िटकाकर खड़ा हो गया था। पहले तो वह सोचा था िक
आगे चलकर, उसे कहींन कहींबैठने की जगह िमल जाएगी लेिकन जैसे जैसे शे न बढ़ती

वह. रामजनम वहींबगल की सीट पर बैठा हआ ु था। उस समय उसकी जैसी हाल थी उसे दे खकर उसे उस पर तरस आ गया था। उसे जमीन से उठाकर. अपना-अपना पता िदये थे। राम जनम अपने घर का पता िलखने के साथ. उतरने के पहले. मेरे दोःत. उसके घर कैसे पहँु चना है उस तक का एक नFशा बना िदया था। मेरे घर की तरफ तुSहारी िरँतेदारी है इसिलए तुम िसफ7 मेरे दोःत ही नहीं. उसे दे िदए थे इसके बाद उनकी आगे की याऽा काफी आसान हो गई थी। राम जनम उस िदन. जैसे वे दोनो बचपन के लंगोिटया और हमराज ह3। सफर खWम होने के पहले दोनो. दोनो मे ऐसी-ऐसी बात. महज याद3 तक ही सीिमत रही थी। . उसका मुंह धुलवाया था और अपनी माल से. सच कहता हँू बडी मजा आएगी। बोलो आओगे ना? ु आऊँगा मेरे दोःत. राम जनम उसकी याददाँत से उतर चुका था। उसके साथ का उस िदन. अपनी सीट पर बैठाया था. िडNबे म. जब भी तुम अपनी िरँतेदारी आओ. उसे अZछी तरह याद था और जब कभी वह अपनी िरँतेदारी जाने के िलए इस ःटे शन पर उतरा था या वापसी म. तो मेरे घर आना मत भूलना. सीट पर बैठे एक सRजन का ःटे शन आने पर वे. उसकी डायरी म-. और वह जहां खडा था वहीं. ु सते चले गए थे इसिलए घंटो गुजर जाने के बाद भी.हई ु थी उस िदन. लोग3 की टांग3 के बीच धSम से बैठ गया था। Fया हआ ु मेरे भाई. अपनी बैग से बोतल िनकालकर. जर आऊँगा। िबछड़ने के पहले दोन3 इस तरह एक दसरे ू से गले िमले थे जैसे दोन3 का ज म3 का साथ रहा हो। ऐसा नहींथा िक. अपने साथ. दा की एक बोतल िलए हए ु था। रात हई ु थी तो वह ःटे शन के Uलेटफाम7 से दो पैकेट खाना खरीद लाया था और दोनो उस िदन साथ-साथ खाना खाये थे और छक कर दा िपए थे। हॅ सी ठJठे के साथ. का वह सफर. ःटे शन से िनकलकर.गश आ गया है तुम तो एकदम पसीने पसीने हो रहे हो। वह जहाँ बैठा था. लगता है तुSह. एक दसरे ू को. िरँतेदार भी हये ु । भिवंय म-.और Rयादा लोग ठं उसे बैठने की कोई जगह नहींिमली थी और वह खड़े खड़े ही सफर करता रहा था। लेिकन घंटो गुजर जाने के बाद भी जब उसे बैठने की कोई जगह नहींिमली थी तो उसका िसर चकराने लग गया था और टांगे खड़ा रहने से जबाब दे गई थी. तब तक हवा करता रहा था जब तक वह पूरी तरह ठीक नहींहो गया था। इस तरह रामजनम उसे अपनी सीट पर बैठाकर खुद खड़े खड़े सफर करता रहा था। काफी दे र के बाद. उसके पानी से. अपनी सीट.शे न पकडने के िलए ःटे शन पहँु चा था तो राम जनम उसे जर याद आया था। लेिकन उसकी याद. गई थी.

उसकी बुिनयाद पर. इतने असM तक ठीक ऐसा ही कुछ. उसे दे खकर वह िवचिलत हो उठा था। रामजनम ने उसे बताया था िक वह ब9क म. उॆ के बZचे कंचे खेल रहे थे। नीम के ू थे। धौर3 की तरफ से एक नाली इधर को ही चबूतरे से थोड़ा हटकर राख के तीन बड़े ढहे . कभी- कभी ऐसे हमसफर िमल जाते है िजनसे ऐसी घिन]ता हो जाती है िक.प ही नहींबचा था। रामजनम का घर.रामजनम के घर जाने के िसवा. हम सफर के घर पहँु च कर उससे िमलने िक बात सोचना ही बेमानी सा लगता है। राम जनम को लेकर.बाबू है और उसका अपना खुद का बड़ा मकान है। लेिकन िजस जगह वह. कोिलयरी के काफी पुराने और जज7र धौर3 (छोटे -छोटे घर3) वाली एक बःती। िजस जगह वह खड़ा था वहाँ से थोड़ी दरू पर. बड़ा चबूतरा बना हआ ु था और उस चबूतरे पर मदb की दो गोल. लगता है िक उनसे अपना ज म3 का साथ हो। लेिकन सफर के दौरान की घिन]ता.काँच की छोटी िगलास. अपने घर पहँु चने का पूरा नFशा बना रखा था. ःटे शन से Rयादा दरू नहींथा. िचखने के साथ दा पीने म.थी और वे बोतल से उड़े ल उड़े ल कर. जो _ँय उसकी आँखो के सामने पेश आया था. ँमशान वैरा^य की तरह. उससे वह उसके पते तक. दो और गोल दा की बोतल3 के साथ जमी बैठी थी। उनसे थोड़ा हटकर कम. िकसी सुखद सपने की तरह याद तो आता है लेिकन. गोिलयांकर बैठी हई ु थी और हर गोल के बीच. उसके साथ भी होता रहा था और वह राम जनम के यहाँ जाने की कभी सोचा तक नहींथा। समूचे मुसािफरखाने म-. अपनी रात काटता। ऐसे म. एक पुराना नीम का पेड़ था िजसके चार3 तरफ. और उसने उसकी डायरी म.रामजनम के िलए उसके भीतर ऐसा कोई आकष7ण या िखं चाव कभी नहींमहसूस हआ ु था िक वह उससे िमलने के िलए उसके घर तक िखं चा चला जाता। सफर के दौरान.और एक बड़े पcल पर िचखना रखा हआ ु था। सबके हाथ म.िजस तरह. अपने मकान होने की बात बताया था वहाँ. जलते कोयले की ढे र को घेरकर. दा पीने म- मशगूल थी उसी तरह.जुटे हए ु थे। चबूतरे से सँटकर कोयले का एक बड़ा ढे र जल रहा था। िजस तरह नीम के पेड़ के चबूतरे पर शारािबय3 की दो गोल. िसफ7 उस सफर तक या थोड़े समय बाद तक ही मौजूद रहती है। सफर खWम होने के बाद. जब लोग अपने-अपने पिरवेष म. उसके िसवा दसरा ू एक भी मुसािफर नहींथा। ःटे शन का भी वह एक चFकर लगा आया था लेिकन वहाँ भी उसे कोई मुसािफर नहींिदखा था और न ही कोई ऐसी जगह िदखी थी जहाँ वह सुकून से हाड़ कॅपाती इस ठंड म-. दो तीन दा की बोतल.रम जाते हैतो वह सफर. उसके पास दसरा ू कोई िवक. दरू दरू तक मकान जैसा कुछ भी नहींथा। वहाँ थी तो. बड़ी आसानी से पहँु च भी िलया था। लेिकन उसके पते पर पहँु चने पर.

और इन सुवर3 और शरािबय3 की बःती म. वहाँ से उठ कर.बाबू ह9 । वह इतनी गंदी जगह. वह अभी सोच ही रहा था िक. शरािबय3 की गोल से.बाबू ऊ हँु ? थोड़ी दे र सोचने के बाद भी रामजनम.चबूतरे पर बैठा एक आदमी उसे जोर से डांटा था। ओ ओ ऽ ऽ ऽ तभी तो हम कहे . जो आदमी चबूतरे से उसे डांटा था वह. इन धौर3 के अलावा.पूछ रहा होगा. छोटी गड़ही सरीखी बन गई थीऔर उसम. नीम के चबूतरे पर गोिलया कर बैठे लोगो से दरयाgत िकया था.. पता करे या नहीं . लेिकन यहाँ.चूर लोग3 को दे ख उसका मन िगजिगजा उठा था। राम जनम ब9क म. लोगो से दरयाgत करके.आई हई ू के चलते उसका आगे का राःता बंद हो ु थी और कूड़े कताउर और राख के ढह3 चुका था.सोचा था। रामजनम जो बैक म. दरू दरू तक कोई मकान भी कहींनहींिदख रहा है? कही म9 गलत जगह तो नहींआ गया हँू ? राम जनम के बारे म-.बाबू है। बैक म. आपस म.. जब उसके hयान म. उसके पास आया था और लड़खड़ाती जुबान म. दा के नसे से झिखयाया अपने िदमाग पर जोर लगाकर वह रामजनम के बारे म. बाबू अपने रामज मा के बारे म..सुअरो का एक झुंड लोट पोट करने के साथ.राम जनम यहाँ कवन है रे भाई। इतनी दे र म-. एक आदमी उठकर. इसी बीच. कीचड़ से बजबजाती. उसके पास आ कर खड़ा हो गया था। ... कौ औन रामजनम. जवाब म. एक जगह जमा होकर.लड़ भी रहे थे। जलते कोयले से अलकतरे की गंध का धुआ ं . िजसके चलते धfरो का सारा पानी.रह कैसे सकता है? उसने मुझे यह भी बताया था िक उसका अपना खुद का एक बड़ा मकान है.उससे पूछा था। आप िकसे खोज रहे है बाबू ऊ ऊ ? यहाँ कोई रामजनम नाम का आदमी रहता है? राम जनम. यहाँ बैक का बाबू.नहींआया था तो वह. रामजनम कौन है रे भाई? अरे बाकल. बजबजाते कीचड़ की सड़ांध और वैसे ही गंदे और दा के नशे म.

सवािलया नजर3 से आंगतुक को ताकता खड़ा था। दे ख ई बाबू.काम जर करता है। Fया तुम मुझे. जोर जोर से आवाज लगाने के साथ. पहले वाले की तरह.. उसके ड़े रे के सामने नीम का बड़ा पेड़ है। राम जनम ने मुझे बताया था िक वह ब9क म.हालाँिक वह भी काफी िपया हआ ु था लेिकन. तोहे खोिज रहलो िछए! कौन? उसके चेहरे पर गहरे से ताक. उसके ड़े रे तक नहींपहँु चा दोगे? उसके आमह पर.अपना िसर िहला. उसे पहचानने की कोिशश िकया था लेिकन िफर भी वह उसे नहींपहचान सका था। सचमुच. लेिकन वह ब9क म. न तो उसकी जुबान बेकाबू थी और न ही शरीर ही। रामजनम जो बैक म.. दरवाजे की दोन3 तरफ की कवही थाम.बाबू है? यह तो हम बता नहींसकता बाबू. रामजनम दरवाजे की कवही छोड़ उसके एकदम करीब आकर... मैउसे ही खोज रहा हँू । बाबू ऊ इस धौरे के पीछे जो धौरा है न. रामजनम उसे पहचानने की कोिशश िकया था लेिकन वह उसे नहींपहचान सका था। मुझे नहींपहचाने न मेरे दोःत? नहीं। इनकार म. म9 आपको नहींपहचाना। . रामजनम के डे रे पर पहँु चा आने के िलए राजी हो गया था। रामज मा गे ए ऽ ऽ गे ए रामज मा आ ऽ ऽ। रामजनम के दरवाजे पर पहँु चकर वह उसे... वह उसे बड़ा खुशी मन से. उसके िकवाड़ का सांकल भी खटखटाया था। दो तीन आवाज के बाद.रामज मा का ड़े रा ह9 इिधर से आप चले जाओं. अपने दोन3 हाथ3 से. राम जनम घर का दरवाजा खोल. उसी लाइन म..हाँ.काम करता है आप उसी को खोज रहे है न बाबू? हाँ.

उसे बड़े कुतूहल से िनहारते खड़े थे। उसकी पmी उसे दे ख.तुSहारा ःवागत है। रामजनम उसे पाकर एकदम से िनहाल हो उठा था। आओ मेरे दोःत आओ। दरअसल तुमने अपना चेहरा पूरी तरह चlर से तोप रखा है न. सब अपनी धमाचै कड़ी बंद करके.इन दो कुिस7य3 के अलावे कोई खिटया या पलंग नहींथी। हालांिक रामजनम के कपड़े गंदे नहींथे और न ही वही वैसा गंदा था िजतना गंदा उसका घर.लू उठाकर अपने िसर पर डाल ली थी। उसे बैठाने के िलए रामजनम. दसरी ू कुसn उसके एकदम करीब खींचकर बैठ गया था और उसका हाथ अपनी दोन3 हथेिलय3 म. और वह अपनी जेब से छोटी डायरी िनकाल. वह जमीन पर रखा था और कुसn पर बैठ. इसके िलए खुद को तैयार करने लगा था। रामजनम अपनी पmी को चाय बनाने को कहकर.अपना पता िलखकर मुझे िदया था यह दे खो.िमले थे। तुमने मेरी डायरी म. कोयले की अं गीठी पर रोिटयाँ सेक रही थी। सुरंग नुमा उसकी कोठरी.खुद के हाथ की िलखावट दे ख रामजनम को शे न के सफर के दौरान. बZचे और उसकी औरत थी। इतने गंदे माहौल म. छोटा सा एक आँगन था। आगे करीब पाँच बाई दस फुट का एक बरामदा था िजसे राम जनम अपनी रसोई की मसरफ म. रामजनम के इस गरीब खाने म. कोठरी के भीतर से दो Uलािःटक की कुिस7याँ िनकाल बरामदे म. वह अपने रहने की जगह तलाशने के साथ साथ. िजस प ने पर रामजनम अपने घर का पता िलखा था. पूरी तरह खुली हई ु थी। भीतर उसके. रामजनम के समूचे घर का सरसरी नजर3 से िफर से मुआयना िकया था। रामजनम के घर म.काफी असा7 पहले हम दोन3 शे न म. याद पड़ गई थी और वह उसे बड़ा धधाकर अपनी बाह3 म. घर के सामान. उसके साथ की मुलाकात. जमीन से प.लत हो उठता था. इसीिलए म9 तुSह.िलया हआ ु था। उसकी औरत उस समय. उसके चार बZचे कोठरी म.धमाचै कड़ी मचा रखे थे लेिकन उसे आया दे ख. उसे खोलकर उसके सामने कर िदया था। ओ ओ ऽ ऽ ऽ ओ ऽ ऽ तो आप ह9 ? डायरी म.नहींपहचान सका। गुफानुमा रामजनम के एक कमरे वाले धौरे म-. िकवाड़ की ओंट से.दबाकर चहका था। दोःत आज सुबह से ही रह रहकर मेरा मन ूफुि.डाल िदया था। कंधे से टंगा बैग. ताखे पर एक िढबरी जल रही थी। उसके पहँु चने के पहले. लगता था आज मेरे घर .भर िलया था। आओ मेरे दोःत आओ. वहाँ दस प िह घंटे कैसे गुजारे गा. नीचे उतार कर.और एक कोठरी वाले इस घर म-.

जमीन पर रख.िजतना उसे बताया था उसकी बुिनयाद पर वह उसे िकसी सqय घर पिरवार और अZछी हैिसयत का आदमी समझ रखा था। लेिकन वहाँ वैसा कुछ भी नहींथा। इतनी दे र म. म9 तुSह. मौसम भी आज काफी अZछा है दोन3 िमलकर इसका खूब जr मनाएग. नहींकोई परे शानी नहींहई ु .मेरा sयाल आया. पेटरवार आया हआ ु था। वापस लौटने के िलए ःटे शन पहँु चा.घुस गया था और थोड़ी दे र बाद. यहाँ से िनकल जाएगा। बहत ु अZछा िकए मेरे दोःत. अपनी कुसn खींच उसके काफी करीब सँट कर. तो पता चला गाड़ी अठारह घं टे लेट है। मेरे पास ूचुर समय था सोचा चलकर.जर. उसकी हिलया ु दे ख. उसकी आँखे फैली की फैली रह गई थी। िसर पर बोिसए से बुनी गोलौवा टोपी. उससे उसे लगने लगा था िक वह. तुमसे िमल आते है। रामजनम अपने बारे म.पकड़ा गई थी.जो कुछ वह दे ख चुका था. पहँु चने वाला है। और मेरी खुशनसीबी दे खो िक तुम जैसा दोःत. टे रीकाट के सफेद .ठीक है न? रामजनम उसके कंधे दबा जोर से चहका था। रामजनम की पmी कांच के दो िगलास म-. उससे िशकायत िकया था मुlत बाद तुSह. मेरे दोःत. लाल चाय उ ह. बड़ी आिजजी से उसने उसे जबाब िदया था। रामजनम अपनी चाय खWम करके उससे थोड़ी मोहलत लेकर अपनी कोठरी म. चाय गरम थी इसिलए रामजनम अपना िगलास. दे खो कैसे बन रहा है। इसकी बात से लगता है जैसे इतने िदन3 तक यह मेरी ही राह िनहारता बैठा हआ ु था। लेिकन उसने उसे कोई जबाब नहींिदया था। तुSह. जब वह कोठरी से बाहर िनकला था तो. मेरे घर पहँु चा गया। दरअसल मेरे एक िरँतेदार की मृWयु हो गई थी। उसी की तेरहवींमे म9. बहत ु ही बुरी जगह और बुरे लोग3 के बीच आ फंसा है िक रामजनम बहत ु बड़ा झुJठा और ठग है और उसे िजतनी ज. कहाँ थे इतने िदन3 तक? झुJठा साला.पाकर ध य हआ। ु हमारे पास अठारह घंटे का समय है.दी हो. मेरा कोई अजीज. यहाँ से भाग िनकलना चािहए। इसिलए वह रामजनम से कुछ इस तरह बितयाया था जैसे वह उसके साथ चाय पानी करके तुरंत.मेरा घर ढँू ढ़ने म.कोई परे शानी तो नहींहई ु मेरे दोःत? नहीं.

चलो चलते ह9 । लेिकन कहाँ. पालीथीन की थै ली म. कलाली की तरफ गया था और जब वहाँ से वह लौटा था तो उसके एक हाथ म-. मुसकुराते हए ु उससे कहा था। म9 तुSहारी परे शानी समझ गया मेरे दोःत. अपने काम म.टा-पु. रामजनम क गया था और हैरान नजर3 से. सोच रहे हो िक राम जनम मुझे.मेरे ऊपर भरोसा नहींहै. वैसे म.◌े उसके इराद3 पर शक हो उठा था और वह उस पर एकदम से चीख पड़ा था। उसकी चीख पर. अं गीठी पर रोिटयांस-कती रामजनम की पmी की तरफ. दे शी शराब की दो बोतल. तुम मुझे कहाँ ले जाना चाहते हो राम जनम ? जब से वह राम जनम के साथ उसके घर से िनकला था यह सोचकर. जैसा तुम सोच रहे हो राम जनम वैसा आदमी नहींहै। िफर भी अगर तुSह.ढकेलने के िलए.वह उसके साथ कुछ बुरा या उ. खुद को जGत िकए रखा था िक रामजनम चाहे िकतना झुJठा और फरे बी Fय3 न हो. उसके चेहरे का मुआयना करने के बाद. दरवाजे की तरफ बढ़ गया था। िवःमय से कुछ दे र.और दसरे ू म-. तो अभी कोई दे र नहींहई ु है. रामजनम की पीठ पर अपनी नजरे गड़ाए बैठा रहने के बाद.कुछ इस तरह मशगूल थी.वापस ःटे शन छोड़ आता हँू । . नीचे चेकदार लुंगी और आँख म. उन दोन3 म. जैसे उसे.से. िजस आWमीयता से उसके साथ पेश आ रहा था. तुम राम जनम को बड़ा ही लुZचा और शाितर िदमाग आदमी समझ रहे हो.टा तो नहींही करे गा। लेिकन जब वह ु की घनी झािड़य3 के बीच से गुजरती पगडंड ी की तरफ उसे चलने को कहकर. चलो म9 तुSह.एक कलाली (शराब घर) के पास पहँु चकर. रामजनम आगे बढ़कर. िकसी से कोई मतलब ही न हो। हारकर वह वहाँ से उठा था और रामजनम के पीछे पीछे चल पड़ा था। राःते म. िलए जा रहा है। लेिकन सच मानो मेरे दोःत.कुतM के ऊपर काली जैकेट. जमीन पर पड़ा उसका बैग उठाया था और अपने कंधे पर टांग. थोड़ी दे र.बकरे का गोँत था। अब मजा आयेगा मेरे दोःत.मोटा सुरमा डाल वह. सवािलया नजर3 से दे खा था। लेिकन रामजनम की पmी. यह जानने के िलए िक वह उसे कहाँ ले जाना चाहता है. रामजनम उसे थोड़ा कने के िलए कहकर. जर िकसी गuढे म. खाटी मुसलमान का प धर रखा था। चलो मेरे दोःत चलते ह9 . आगे फुटस बढ़ा था तो उस.

तुम उस औरत को अपने पास नहींरख सकते. बहिपय3 ु की तरह अपना वेष बदलते चलते हो यह Fया है? रामजनम से यह सवाल पूछते समय उसकी आवाज काफी त. दरअसल हआ ु यह था िक म9 एक मुसलमान औरत को बैठा िलया था। मुसलमान3 ने कहा िक जब तक तुम मुसलमान नहींबन जाते.तुSहींबताओ िक तुSहारी ए सब बात-.अिवvास और आतंक पैदा करने के िलए काफी नहींहै Fया ? ह9 . तुSहारे ूित. कोई भला आदमी तो नहींही रहता होगा। यही नहीं .बता िदया होता िक म9 जाित का हाड़ी (ःवीपर) हँू . हाड़ी बःती म.क ऐसा करना मेरी मजबूरी के साथ साथ. जब म9 तुSहारे घर पहँु चा था तो म9 तुSह.न तो तुSहारा अपना कोई मकान है और न ही तुम ब9क म- बाबू ही हो। जैसी गंदी बःती और घिटया लोग3 के बीच तुम रहते हो उसम.? हाँ जरत. िक अगर म9 उस िदन. तुSह. िजतनी मौज मःती म. िकसी के भी मन म. मुझे िनहाल कर िदए हो.बाबू हो और तुSहारा अपना खुद का बड़ा मकान है। लेिकन हकीकत म.. उस समय की एक बड़ी जरत थी लेिकन यह जो तुम. िक तुम मेरे वेष बदलने को लेकर काफी परे शान हो। लेिकन सच मान3.. लेिकन तुम मुझे एक बात बताओ. म9 अपना वेश बदलता हं ू तो िकसी को ठगने और धोखा दे ने के िलए नहीं .रामजनम..दे खा था और अब म9 तुSह.एकदम अलग ु ही प म.एक प म. वह वैसा ही कटता? और आज जो तुम मेरे घर पहँु चकर.रहता हँू .कटा था.चोर उचFक3 और उठाईगीर3 को छोड़. बि. म9ने कहा ठीक है म9 मुसलमान बन जाता हँू और म9 कलमा पढ़कर मुसलमान बन गया। रामजनम यह बात िजस तरह िबना िकसी लाग लपेट के और बेलौस कहा था उसे सुनकर उसे बड़े जोर का धFका लगा था। . उस िदन की तुSहारी झूठ. और पूरी तरह है मेरे दोःत. यिद तुम रामजनम की सारी असिलयत3 और हकीकत3 से वािकफ होते. तुमने मुझे बताया था िक तुम ब9क म. एक बड़ी जरत भी है। जरत.ख हो उठी थी। उसकी बात सुनकर रामजनम बड़े जोर का ठहाका लगाया था। जानता हँू मेरे दोःत. और टwटी मैला धोने का काम करता हँू तो Fया उस िदन का हमारा शे न का वह सफर. अपना घर छोड़कर फुटस के जंगल3 के बीच िलए जा रहे हो ऐसे म.दे ख रहा हँू । और ऊपर से तुम मुझे इतनी कुबेला म-.. तब भी उसके घर आते? रामजनम म9 तुSहारी बात से पूरी तरह कायल हँू । सफर को खुशगवार बनाने के िलए.

रामजनम उसे िजस बःती म...थीं। उ हीं कतार3 म. मेरे हाथ म. अःवेःटस सीट से छाए.. कहींतुSहारा Uयार-Gयार वाला चFकर तो नहींथा उससे? नहींई ऽ ऽ या ऽ ऽ र. कूड़े कताउर के ढे र और नािलयाँ. उससे पूछता. यहाँ उसकी.. दसरी ू बीबी रहती है। यह कालोनी भी रामजनम के पहले वाली कालोनी की तरह ही गंदी थी। जगह जगह राख ू ..लेकर पहँु चा फुटस था उसम-.काम करता था.ऐसा करने की Fया जरत पड़ गई थी.से एक घर के पास पहँु चकर.. बेगम दरवाजा खोलो। राम जनम के बेगम कहकर पुकारने से वह समझ गया था िक. अपनी दे ह अकड़ा िलया था। और िसफ7 इतने से फायदे के िलए तुम. अपनी गद7 न ऐंठ.लेिकन तुSहारे पास तो पहले से ही अपनी औरत और बZचे थे. उससे शादी करने से मुआबजे के उसके पैसे.. दसरा ू धम7 तक कबूल कर िलए रामजनम? लेिकन ऐसा करके म9ने कोई गुनाह कर िदया Fया. एक एक कमरे के घर3 वाली कई कतार. यहाँ भी वैसे ही बजबजा रही थी जैसा वह इसके के ढहे पहले दे खकर आया था। ...आने के साथ साथ. एक कमासुत पJठी मेरे कNजे म- आ गई थी बोलो मेरे िलए यह कोई घाटे का सौदा था Fया? अपनी इस चालाकी पर इतराता हआ ु रामजनम. मेरे दोःत? रामजनम को उसने कोई जबाब नहींिदया था। हैरान सा वह िसफ7 उसे िहकारत भरी नजर3 से घूरता खड़ा रहा था। ु (छोटे झाड़ीदार पौधे) का जंगल पार कर.उसकी औरत को मोटा मुआबजा और नौकरी िमली थी। औरत अभी पूरा पJठी थी और उसे मद7 की जरत भी थी. वह उसके दरवाजे की कुंडी खटखटाने के साथ आवाज भी िदया था. चाल िगरने से वह उसके नीचे दबकर मर गया। उसके एवज म. िफर तुSह.. Uयार Gयार जैसा कोई चFकर नहींथा उससे। तब ? हआ ु यूँ था िक उस औरत का मद7 . अपना धम7 छोड़कर. कोिलयरी म..

इसके पहले ही रामजनम.ले आया था। छोटी सी उसकी कोठरी. अपनी रसोई के मसरफ ले गीठी म.कोयला दहक रहा था और उसके पास एक मोढ़ा रखा हआ रखा था। बरामदे म.बहत ु बड़ा साहे ब है। लेिकन इसका बड़Uपन दे खो िक.वह उसे. लेिकन भीतर उसका घर. उसकी बीबी. वह उसे.भी.इतना लSबा चौड़ा पुल बांध िदया था िक उसे. तो रामजनम की बीबी के प म. औरत नहीं . बड़ी बड़ी आँख.उॆ उसकी मुिँकल से अठारह साल की रही होगी। सलवार कुतM म. अं गीठी की आग तापती बैठी हई ु थी। बाहर काफी ठंड थी लेिकन बरामदा.. गुदाज और ठॅ सी हईर ु दे ह.थोड़े इंतजार के बाद दरवाजा खुला था. काफी साफ सुथरी और सजी हई ु थी। उनके सोने के िलए एक पलंग थी िजसके िबःतरे पर साफ चlर िबछी हई ु थी। रामजनम उसे िवःतरे पर बैठा. खुद उसकी बगल बैठ गया था। . उसका मुह पकड़ लेने का मन हआ ु था। लेिकन बोलने के िलए वह अपना मुंह खोलता.अं ु था। उनके आने के पहले.पाकर मेरा तो.पढ़ती कोई लड़की लगी थी। बेगम इससे िमलो. हम लोग चलकर भीतर बैठते है। रामजनम उसकी पीठ पर हाथ रख.जो औरत उसकी आँखो के सामने ूकट हई ु थी. यह है मेरा िजगरी दोःत िशवा। बचपन म. अपनी बीबी का उससे पिरचय करवाने लग गया था। और मेरे दोःत आप ह9 मेरी बेगम अजरा। आप लोग3 जैसे ही रईस घर की बेटी है आप। इ ह.क कालेज म. दे खता ही रह गया था। कमिसन और बेहद खूबसूरत चेहरा.पकड़ी दा की बोतल और मीट का थै ला उसकी तरफ बढ़ा िदया था। बेगम यह पकड़ो मीट और यह दा की बोतल। आज. इतना बड़ा आदमी बन जाने के बाद भी. रामजनम का इंतजार करती. बड़े आमह से उसे अपनी कोठरी म. जीवन ही ध य हो गया है। अपनी बीबी का पिरचय करवाने के बाद रामजनम अपने हाथ म.िक यह बार बार हमारे गरीब खाने पर दौड़ा चला आता रहे । रामजनम के घर के बाहर जैसी भी गंदगी रही हो. पूरी तरह रंगा पुता और साफ था। उसके इस घर म. आज तक नहींभूला। रामजनम एक ही सांस म- अपनी बीबी के सामने उसकी झूठी तारीफ म. वैसी ही छोटी सी एक कोठरी और बाहर वैसा ही छोटा खुला बरामदा था। यहाँ भी. गरम था। आओ मेरे दोःत. अं गीठी की दहकती आग से. आप मेरे दोःत की ऐसी खाितर कर.हम दोन3 साथ साथ खेले खाए ह9 । आज यह ब9क म. बरामदे को उन लोग3 ने. यह मुझे. बि.

तुSह. बेिझझक होकर पूछो मेरे दोःत. वे उभरकर ऊपर आ गई थी। बड़े ऊँचे दजM के िशकारी हो मेरे दोःत. उसके िवषय म. उसके भीतर की तमाम िझझक और संकोच गायब होकर. करने लगा है। इःसस ऽ ऽ. उनके पास रख आई थी। मान गया मेरे दोःत.थोड़ी दे र म.बुरा तो नहींलगेगा मेरे दोःत? तुम मेरे दोःत हो। तुSहारी कोई भी बात मुझे बुरी नहींलगेगी. जो उसके भीतर हलचल मचा रखी थी. वह सब कुछ तो ठीक है लेिकन एक बात म9 तुमसे पूँछू. बुरी तरह परे शान कर रखी थी. एक शे म.वह उससे जानना चाहा था। पूँछू.दो अलग-अलग तरह की और एक दसरे ू के एकदम िवपरीत िजंदिगयाँ जीते हो। बोलो जीते हो ना? हाँ जीता हँू । ऐसे म-.नहींआयी वह यह है िक. तुSह.पहँु चा आई थी। उनकी चाय खWम होते होते वह. तुम हो बड़े ऊँचे दजM के िशकारी। दा की कुछ घूँट हलक के नीचे उतरने के बाद. उसे ऐसी बात यहाँ न करने के िलए मना कर िदया था। मेरे दोःत.रामजनम की बीबी दो Uयाली चाय. भुने मूंगफली के दाने. कोठरी म. जो उसे राम जनम की दोन3 गृहिःथयाँ दे खने के बाद. एक बात जो मेरी समझ म. हो न? एकदम हँू मेरे दोःत और पूरी तरह हँू । इसका मतलब तुम एक ही समय म. िजसे उसे यहाँ नहींकरनी चािहए.रामजनम पर भी दा अपना असर कर चुकी थी और इसके चलते वह भी खुद पर अपना िनयंऽण खोने लग गया था। तुम कुछ समय पहले िहंद ू थे मेरे दोःत और अब तुम मुसलमान हो. िगलास और दा की एक बोतल. एक बड़ा ही अहम सवाल. तुम अपनी इन दोन3 िज दिगय3 के साथ तालमेल कैसे िबठाते हो? . बाहर बैठी अपनी बीबी की तरफ इशारा करके.रखकर. मुझे तुमसे बड़ी ईंया7 हो रही है। उसकी बात से रामजनम समझ गया था िक दा की नशा उस पर चढ़ गई है और उसी के सुर म. तुSहे बुरा तो नहीं लगेगा? रामजनम के मना करने पर वह कुछ दे र मूंगफली के दाने चबाता और दा की घूँट. रामजनम.सब बतायेगा। इतनी दे र म. राम जनम अपने ह3ठ पर हाथ रख.भरता चुप मारे बैठा रहने के बाद. कई बात-. गरम गरम आमलेट.वह ऐसी बात.

Rयादा से Rयादा िखला दे ने पर जुटे हए ु थे। लेिकन रामजनम की. उसके चेहरे पर ितर आई थी। कर लेते ह3गे मेरे दोःत.िखलाने लग गई थी। उसने गोँत बड़ा लजीज बनाया हआ ु था. रामजनम हॅ सते हए ु उसे जबाब िदया था। अZछा? वह कैसे? वह इस तरह िक जब म9 रामजनम होता हं ू तो मि दर जाता हँू पूजा पाठ करता हँू . रामजनम से बड़ा हंस हंसकर बात- कर रहा था और खाने की तारीफ कर करके. और वैसा ही म9. बड़ा चटखारे ले लेकर खाना भी खा रहा था. दोन3 उसे. उसे लेकर. अपनी दोन3 बीिबय3 के साथ भी िनभाता हँू । कमाल है. आxय7 से उसकी आँखे थोड़ी दे र तक फैली रही थी और िफर एक बड़ी गहरी शरारत. िजसकी भी िगलास की दा खWम होती. संभािवत खतर3 की टोह लेने म. अब तक की. बकरीद मानता हँू .. िकसी बड़े षंड़यंऽ की आशंका से िघरा हआ ु था। हालांिक िदखाने के िलए वह.। उसकी यह कटिy और उसके कहने का अं दाज काफी चुभने वाला था और वह रामजनम को चुभा भी था लेिकन ू अपने ःवभाव के अनुप. लेिकन उसकी चोर नजर. और उसे हंसकर उड़ा िदया था। इसके बाद दोन3 म. रामजनम और उसकी बीबी के चेहर3 और हाव भाव से लेकर.सच कहँू मेरे दोःत... बोतल से उड़े लकर कर उसे भर दे ता और इस तरह दोन3 दा की चुिःकयाँ लेते बड़ी दे र तक शराब पीते बैठे रहे थे। मीट पककर तैयार हो गया था तो रामजनम की बीबी. उसका मन.. अं गीठी के पास चटाई डाल.परोस-परोस कर उ ह.तालमेल िबठाने की कभी जरत ही नहींपड़ती। थोड़ी दे र सोचने के बाद.छपे ु थी। इस आदमी से मेरी. िजन कारगुजािरय3 से वह ब हो चुका था. उसकी तरफ से. महज कुछ घंट3 की मुलाकात है और वह भी चलती शे न के िडNबे म-। ऐसी मुलाकाते लोग याद रखने तक की जहमत नहींकरते। सफर खWम हआ ु और वे उसे भूल . खुद रोिटयाँ स-कने बैठ गई थी और तवे से गरम गरम रोिटयाँ उतारकर उनकी थािलय3 म. जर कर लेते ह3गे ू Fय3िक बनने की कला म.तुम बड़े ऊँचे दजM के कलाकार जो ठहर.जुटी हई उसके घर के कोने-कोने म. ु .कोई बात नहींहई ु थी.. बड़े आमह और सWकार से. दसरा ू . ईद. और वह और रामजनम. तो मुझे अपनी दोन3 िज दिगय3 म. दोन3 को खाने पर बैठा.. होली दशहरा और दीवाली ठीक वैसे ही मानता हँू जैसा एक िह द ू मनाता है और जब म9 रमजानी होता हँू तो मिःजद जाता हँू नमाज पढ़ता हँू . राम जनम उसकी इस कटिy को कोई तवRजो नहींिदया था.

जर कोई बड़ी खोट है नहींतो भला. छँ टींहई ु लगती है। इस तरह हंस हंस कर मुझे िखला रही है-जैसे म9 इसका कोई पुराना यार होऊँ। इन दोन3 के मन म. लेिकन बात Fया है? यह जान कर िक रामजनम घर म. लेिकन उसकी बीबी उठी थी और दबे पांव कोठरी से िनकलकर. रामजनम तो नहीं .. डर से उसका कलेजा मुंह को आने लग गया था। खwट.....था। बीबी के काफी िहलाने.ही है. मेरे साथ ऐसा गुड़ िचउँ टा हो रहा है जैसे. और बजाने वाले ने.खट. रामजनम की बीबी अं गीठी के पास आकर बैठी थी तो.. सांकल के बजने की आवाज Rयादा वजनी थी और बजाने वाले ने सांकल बजाने के साथ सांसो के जोर से रामजनम को आवाज भी िदया था। रामज मा गे ए ऽ ऽ ऽ । दरवाजे की खटर खटर और पुकारने वाले की आवाज पर.खट.. घर के बाहरी दरवाजे की साँकल के बजने की आवाज थी यह। आवाज कान म. खwट इस दफा. राम जनम ने उससे कहा था. उसके अZछे दोःत थे और दोन3 कोिलयरी म- काम भी करते थे। रामज मा नहींहै Fया? राम औतार ने उससे पूछा था। ह9 तो.. झकझोरने के बाद वह उठा था तो बीबी पर गुःसा गया था। लेिकन राम औतार और शंकर पर नजर पड़ते ही उसका गुःसा ..जाते ह9 लेिकन यह शsस.. ऐसा है बेगम िक रात काफी हो चुकी है और ठंड भी आज बहत ु Rयादा है तुम ऐसा करो िक एक ग3दरी लाकर यहींअं गीठी के पास डाल दोण ् खट. खwट. िकसी अनजान और अपिरिचत की. िजस दबे हाथ और आिहःती आवाज म-. यह साली तो उससे भी Rयादा.रहते थे। वे. इसकी और मेरी ज म3 की दोःती रही ह3। और इसकी बीबी. बाहरी दरवाजे की िसटिकनी खोल दे खी थी तो बाहर उसे शंकर और राम अवतार खड़े िमले थे। Fया हआ ु . कोई इतनी आवभगत कभी करता है Fया? खाना पीना खWम होते होते तक काफी रात बीत चुकी थी। रसोई का सारा काम समेट कर अपना हाथ स-कने के िलए. वे दोन3 िबना और के या उसे कुछ बताए. साँकल खटखटाया था उसे सुन.पड़ते ही वह घबराकर िवःतरे पर बैठ गया था। रात के इस पहर म-. घर के अ दर आ गए थे और अं गीठी की धधकती आंच म- अपना हाथ सेकने लग गए थे। रामजनम गहरी नींद म. उन दोन3 को अZछी तरह जानती थी.. दोन3 रामजनम केधौर3 की लाइन म. इतनी रात म-? रामजनम की औरत.

Gयापारी से मुदM के िलए पाँच हजार पए की पेशगी थाम चुका था। सुबह होने के पहले. कोठरी के बाहर चलती खुसुर पुसुर पर.जुटा हआ ु था। लेिकन वे लोग इतने आिहःते और दबी जुबान मे बितया रहे थे िक उ ह.ही रामजनम. उसके खुद के िदमाग से.दी अपने कपड़े पहना था और कोठरी के बाहर आकर खड़ा हो गया था। उसे बाहर खड़ा दे ख.एक िकनारे खड़ा. इनसे िभड़कर अपनी जान बचाऊं सोचा था उसने। अगर इन लोग3 ने िमलकर.उसकी अZछी शाख है और उसकी इसी साख के चलते.खड़ा दे ख. इन सालो का आसान िशकार बनने से तो अZछा िक. खुद पर काबू करके. उसे सब पूछते भी है वना7 यह काम करने वाले तो यहाँ अनेक3 घूम रहे ह9 । िबःतरे पर अपना दम साधे बैठा वह.एकदम से ठंडा पड़ गया था। आज की रात उसे मुदा7 खोदने जाना था इसी के िलए वह. वह भी {ण भर के िलए असहज हो उठा था। लेिकन तुरंत ही. यही सोचकर वह िबःतरे से उतरकर. जब वह पीछे मुड़ा था तो उसे बरामदे म. मुझे कोठरी के भीतर दबोच िलया या बाहर से सांकल चढ़ाकर कोठरी म. कोई नहींसुनेगा इसिलए यहाँ से भाग लेना ही अZछा है. अपने कान लगाए. उसे यह काम आज ही िनपटा दे ना था। अगर यह काम आज रात नहींहो गया तो इससे न िसफ7 उसकी बतकटी होगी बि.कैद कर िदया तो गुहार लगाने पर भी. उन लोग3 के भीतर Fया बात हो रही है उसे सुनने की कोिशश म. उन दोन3 को बुलाया हआ ु था लेिकन यह बात. झट उठकर खड़ा हो गया था। िदन म. शंकर और राम औतार एकदम से सकड़ से गए थे। दोन3 ने पहले तो एक दसरे ू को सवािलया नजर3 से दे खा था िफर वे रामजनम की बीबी को दे खने लग गए थे। रामजनम उस समय आंगन म. यही सबसे बड़ी खािसयत है िक वह िजतना िकसी से वादा करता है उतना और ठीक वैसे ही उसे पूरा भी करता है। इसी के चलते मािक7ट म.सुन पाना मुिँकल था। िबःतरे पर बैठे बैठे.क उसकी साख को भी बwटा लगेगा। रामजनम की. काम पूरा होने के बाद िमलने को था। धं धे की बात है यह और धं धे म. बड़े आWमिवvास . ज. पूरी तरह उतर ही गई थी। चलना नहींहै Fया? राम औतार ने उससे पूछा था तो वह. िगलास के पानी से अपना मुह धो रहा था। मुँह धोकर.दी ज. उसके हवाले कर दे ना था। शत7 के िहसाब से बाकी के दस हजार उसे. उसे कॄ से मुदा7 िनकालकर.पैसा उतना महWवपूण7 नहींहोता िजतना िक िकसी को दी हई ु बात पर कायम रहना और वादे के मुतािबक काम करके दे दे ना। Gयापारी को कल ही यहाँ से कूच भी कर जाना था इसिलए िकसी भी हाल म-.

तुम परे शान हो जाओगे। ---------- राम अवतार अपने साथ.एक ग9ता था। रामजनम छोटा सा सावेल. शराब की बोतल खाली िकए थे और बाहर िनकल पड़े थे। राम औतार के हाथ म. उसे बोलने के िलए मना कर िदया था। थोड़ी दे र म. राम औतार और शंकर को काम पर लगाकर. दो बोतल दा की ले आया था। चार3 बैठकर. राम औतार और शंकर भुकुर भुकुर कुछ खोद रहे थे लेिकन Fया खोद रहे थे. और कबर का sयाल आते ही.और कड़ाके की इस ठंड म. सबसे पीछे वह था। हम लोग कहाँ और Fया करने जा रह. तो उसे लगा िक वह िकसी कबर पर बैठा हआ ु है. अभी और इसी वy बाहर जाने की जरत पड़ गई? रामजनम की तुरंत बाहर िनकलने की बात सुन.पहँु चे थे तो उसने राम जनम से पूछा था। लेिकन रामजनम कुछ बताने की बजाय. . उसे अपने साथ िलया था और दोनो एक चबूतरनुमा जगह पर जाकर बैठ गए थे। जहाँ वे बैठे थे.छोटी टाच7 ले रखा था। तीन3 आगे आगे एक लाइन म. तुSहारे साथ नहींचल सकता राम जनम? अगर तुम चलना चाहो तो चल सकते हो मेरे दोःत.की िझड़की िपलाते हए ु उससे कहा था. हाथ से टटोलकर. एक बहत ु ही जरी काम िनपटाना हैइसिलए हम लोग बाहर िनकल रहे ह9 । इसके बाद.ह9 ? बःती से िनकलकर. वह राम जनम के पास आया था और बड़ा िमिमयाते पसीने छट हए ु उससे पूछा था. अं धेरे म-.इन तीन3 को. िबना िकसी िचखना के. तुम Fय3 उठ गये मेरे दोःत.और दसरे ू म. Uलािःटक की बोरी.चार3.एक फावड़ा और शंकर के हाथ म.पहँु चे थे। रामजनम.भी उसे ू गए थे। हीलते कांपते. जगह का अं दाजा लगाया था. इःस की आवाज िनकाल. जाकर आराम से सोओ। दरअसल हम लोग3 को अभी और इसी समय. लेिकन इतनी ठंड म. Fया म9 भी. एक िनहायत ही वीरान जगह म. अपने एक हाथ म. ह. उससे थोड़ी ही दरू पर. वह डरकर.चल रहे थे. ऐसा कौन सा जरी काम आन पड़ा हैजो इ ह..के साथ. वह बुरी तरह घबरा उठा था और इतनी ठंड म. वह उसके पास आया था और उसके कंधे पर हाथ रख. चार3 िनचाट म. उसकी अचानक की उपिःथित से हैरान परे शान शं कर और राम औतार को उसने बताया था अरे घबराओ नहींयह मेरा पुराना लंगोिटया है अपना बहत ु ही गहरा दोःत। इतनी िनयाई रात म. उसे कुछ भी िदखाई नहींपड़ रहा था। िजस चबूतरे पर वह बैठा था.

मुदM को दे खा था तो उसे सारी गड़बड़ समझ म. िजसम. कबर खोद रहे ह9 लेिकन इस समय हम. तुम इतना डर Fय3 गये? सांस के जोर से रामजनम. उसका मुदा7 बाहर िनकाल लेने के बाद राम औतार.गहरी शंका उठ खड़ी हई ु थी। इतनी ज. अपना कंकालनुमा पंजा. कबर खोद कैसे िलया? इWमीनान करने के िलए वह.दी इन दोन3 ने.कुछ पता ही नहींचला। शंकर बड़ा िगड़िगड़ाते हुए राम जनम से अफसोस ूकट िकया था। . नशे म. कबर के पास जाकर टाच7 की रोशनी म.धुc होने की वजह से.ह9 । रामजनम की िहदायत पर एकदम से चुUपी साध िलया था उसने। काम हो गया बास। कबर खोदकर.ला उठा था। हाँ बास. दोनो उसे न खोदकर. अपनी बांह म.दी? उसकी बात सुन. डांटते हए ु उससे पूछा था। हम लोग िकसी की कबर पर बैठे हए ु ह9 Fया ? हाँ यह कबर ही है। वे लोग Fया खोद रहे ह9 ? वे लोग. बड़ा फुसफुसाते हए ु उसे बताया था। इतनी ज. दरअसल झ3क म. उसे खोदकर. वे लोग िजस कबर को खोदना तय िकये थे. जोर से भींच नहींिलया होता। Fया हआ ु मेरे दोःत. यह तो बहत ु बड़ा भूल हो िगया. यिद रामजनम उसे.कुछ बोलना नहींहै हमारी जान काफी खतरे म. उसकी गद7 न पर रख िदया है। वह बड़े जोर से चीख पड़ता. बगल की एक ताजा तरीन कबर.भरकर. उसका मुदा7 बाहर िनकाल िलये थे। यह Fया कर िदया तुम दोनो ने? साबुत और ताजा मुदा7 दे ख रामजनम बुरी तरह झ.आ गई थी। दरअसल.कल ही मुदा7 दफन िकया गया था. उसके पास आकर. िदन की रोशनी म-.बगल बैठे रामजनम से एक दम से िलपट गया था। उसे लगा था कबर के भीतर गड़ा आदमी वहाँ से िनकलकर. रामजनम के मन म.

दबे मुदM को दे खा था और मुदा7 ठीक से दबाकर रखा गया है इस बात का इWमीनान हो लेने के बाद वापस आ गया था। -------------- शंकर और राम औतार को.था लेिकन वह काफी िवशाल था और उसके चार3 तरफ काफी लंबी और ऊँची बाउ|सी थी और बाउ|सी पर.राइफल िलये. चल पड़े थे। थोड़ी दे र चलने के बाद. बंगले के गेट पर पहँु चे थे.जुट गये थे। साबुत मुदM को कबर के भीतर.काफी वy लगता और Rयादा दे र तक वहाँ कने म. उनकी बात का भरोसा नहींहआ ु था। वह खुद जोहड़ के पास जाकर. चल इसे खोदते ह9 . अपने कंध3 पर लाद.काफी जोिखम भी था. बोरी का कंकाल अपने कंधे पर ु का एक छोटा जंगल पड़ा था। जंगल लाद. बोरी म- भरकर अपने कंधे पर लादा था. भीतर से दो अ. उनका राःता िदखाने लग गया था। पुिलया के नीचे से. रामजनम. गेट पर आया था। वह खुद को िसर से लेकर पाँव तक. मोटे . दो. एक आदमी हाथ म. गेट की तरफ दौड़ पड़े थे। कुc3 के गेट पर पहँु चने के थोड़ी ही दे र बाद.दगदगा रही थीं। जैसे ही वे दोन3. बगल की एक काफी पुरानी कबर खोदने म. इसके बाद वे तीन3. और राम औतार और शंकर साबुत मुदM को. पुरानी कबर का कंकाल.अZछा छोड़ उसे. तीन बड़े पWथर3 से उसे दबाकर. चल पड़ा था। थोड़ी दे र चलने के बाद. टाच7 की रोशनी फ-क. एक बंगला आया था। बंगला. कल उसे दे ने का वादा कर िलये ह9 । नहींिमलने पर वह गुःसा करे गा.पानी म.उतार. फुटस पार करने के बाद.सेिसयन कुcे शेर3 की तरह दहाड़ते. रामजनम के पास वापस आ गये थे। ठीक से दबा िदया है न? हाँ दबा िदया बास। लेिकन रामजनम को. चार3 एक छोटी पुिलया के पास पहं ु च कर क गए थे। रामजनम कुछ बोला नहींथा। इशारे से उन दोन3 को आगे बढ़ने के िलए कहकर. इसिलए रामजनम. वापस दफनाने म. एक जोहड़ बहता था। ताजा मुदM को कंधे पर लादे लादे रामऔवतार और शंकर पुिलया के नीचे गये थे और मुदM को पानी म. वहींसे िवदा करके. टाच7 की रोशनी म. चार3 तरफ वैपर लाइट. बड़ी एका त और सुनसान जगह म.

रामजनम के ठीक सामने आकर िगरी थी। वह दौड़कर उसे जमीन से उठा िलया था और अपने माथे से लगा. उसकी तरफ उछाल. अपनी आँखे फाड़े . उसके पूछने पर रामजनम बुरी तरह िसकुड सा गया था। अपनी सफाई म-. इस बेवकूफ को म9 अपने साथ आने से मना िकया था हजू ु र..दफनाई लाश भी नदारद है। और जब लोग3 ने दे खा िक उस कबर से सटी. यह मेरा दोःत है हजू ु र. रात म- कबर खोद कर. कबर से खोद लाए थे. चार3 तरफ ताकता िबःतरे पर बैठा रहा था। सुबह पता नहींवह और िकतनी दे र सोया रहता. उसके घर वाले सुबह.ऊनी कSबल से ढाप रखा था लेिकन चेहरा उसका खुला हआ ु था। उसका चेहरा बाघ की तरह बड़ा था और उसी की तरह खूख ँ ार भी था। यह कौन है? राम जनम के साथ. तो उ ह.खरा7टे भरने लग गया था. वह उस पर गुरा7कर. उसे लेकर उसका िदमाग उड़ सा गया था। घर पहँु चकर रामजनम तो.दफन उनके अजीज की लाश िनकाल ले गया है। .. वह िजस डरावनी और हैरत अं गेज दिनया ु से गुजर कर वापस लौटा था.फड़फड़ाती.डाल. लेिकन वह.यह समझते दे र नहींलगी थी िक कोई आदमी. अपने घर आ गया था। ------------ रामजनम के साथ.. यिद राम जनम के दरवाजे के िपटने की ू न गई होती। दर असल हआ आवाज से.क उसम. पहले की तरह ही बरामदे के अपने िबःतरे पर लेट गया था और थोड़ी ही दे र म. वापस लौट गया था। पय3 की गBडी. िबना िगने ही अपनी भीतरी जेब म. पय3 की एक गBडी.वे लोग. उसकी नींद. कबर पर पहं ु चे थे तो यह दे ख कर हैरान रह गए थे िक उनकी कबर न िसफ7 खुदी हई ु है बि. दसरे ू आदमी को खड़ा दे ख. िजस आदमी की ताजी.. टट ु यह था िक रात म. एक दसरी ू काफी पुरानी कबर. लाश. हवा म.. इस तरह की गलती दोबारा नहींकरने के िलए. बदहवास सा..उसने उससे पू◌ॅछा था। य य. बोरी का कंकाल वहींगेट पर छोड़. लेिकन यह नहींमाना। हऊ ऊम ऽ ऽ ऽ रामजनम को. उसम. करीब करीब हकलाते हए ु उसने उसे बताया था. जब अगरबcी जलाने और फूल चढ़ने के िलए. गुरा7ती आवाज म. और भी खुदी हई ु है और उसका भी कंकाल नदारत है.

इस तरह की तमाम खबर3 के िमलने पर जैसा होता है वैसा ही सब कुछ. िजस अभे~ और ःथाई दग7 ु म. इस घटना से. उसके घर की तरफ दौड़ पड़े थे। और दे खते ही दे खते के आदमी की लाश गायब हई उस घर के दरवाजे पर. रे ल रोकने. जलाने के िलए बःती से िनकल कर सड़क3 पर आ गई थी। --------- धाड़. लोगो की भारी भीड़ जमा हो गई थी। यह एक ऐसी भीड़ थी जो. इस खबर के बःती म- पहं ु चने के बाद भी हआ ु था। खबर सुनकर पहले तो लोगो को जै से हजार वो.कबर म. धाड़ राम जनम के घर के दरवाजे के िपटने की आवाज थी यह। आवाज इतनी तेज और कक7श थी िक गहरी नींद म. जैसे उनकी शरीर की सारी चेतना ही खींच ली गई हो। अपनी इस हाल से.कूद कर. उनके अजीज की लाश नहींउठा ले गया है बि. िकसी तरह उबर कर. जब लोग. इसके पहले ही यह खबर उड़कर उनकी बःती म. उनके अिःतWव और अिःमता का सवाल बताकर. अपने घर3 से िनकल कर. कबिरःतान से लौटकर. उसके घर वाल3 के िदल को उतना आघात नहींपहं ु चता. िनिxंत और सुरि{त रहने के िलए.लौटे थे तो.दफन आदमी. कबर के खुदने और उसमे से उनके अजीज की लाश िनकाल िलए जाने से पहं ु चा था। उ हे लगा था जैसे िक खोदने वाला.पहँु च गई थी। और इसके बाद. पृवी के रहने तक. कही भाग परा गया होता या नदी तालाब म.क. अजीब तरह का पागलपन सवार हो गया था और वे हा हा करते. इस हौलनाक घटना की जानकारी िकसी को दे ते. उसने उसे दरबदर करके हमेशा-हमेशा के िलए भटकने के िलए छोड़ िदया है। अपने अजीज की दग7 ु ित का यह खयाल. धाड़.थे वही दसरी ू तरफ वे बुरी तरह उcेिजत थे और उनम. उcेिजत और गुःसे से भरी हई ु थी। लेिकन जब वहांमौजूद कुछ शाितर िदमाग लोग इस घटना को.गहरा रोष था। घर के लोग. िजतना आघात उ हे . िजस घर ु थी.था एक दम से सु न रह गया था कुछ इस तरह. पहं ु चा आए थे उसे ढहाकर. रोड़ जाम करने और बसे तोड़ने. कबर खोदकर.ट का झटका सा लगा था और जो जहाँ और िजस हाल म.ट के कर. उ ह- ललकारना शु कर िदए थे तो िफर भीड़. अपनी जान दे िदया होता तो शायद. उ हे बुरी तरह परे शान करके रख िदया था। इसे लेकर जहाँ एक तरफ लोग गहरे सदमे म. उनके िसर पर. यिद िजंदा रहते. अपना आपा खो बैठी थी और अररते घहरते. पहले से ही बुरी ःतNध.वे उसे. अपनी चेतना म.होने पर भी उसे लगा था जैसे कोई उसके कान के ू गई थी और वह हड़बड़ाकर िबःतरे पास नगाड़ा पीट रहा है। इसे सुनकर उसकी नींद टट पर बैठ गया था। .

। राम औतार था यह जो घबराया.. लोगो की धर पकड़ कर रही है. अपना चेहरा रोप िदया था। . सारे शहर मे.भी वह पसीने पसीने हो उठा था। इसके बाद कोठरी म. राम औतार वहाँ से चला गया था तो वह बड़ा डरते डरते. राम जनम की बगल आकर बैठ गया था और उसका कंधा पकड़. बडी िघिघयानी आवाज म- उससे पूछा था.अरे कुछ सुना तैने? दरवाजा भड़भड़ाकर खुला था तो कोई दौड़कर भीतर आया था और घबराई आवाज म. राम औतार को िजस बुरी तरह डाँट रहा था उसे दे ख कर वह भौचक था। इन लोगो ने इतना बड़ा कांड़ कर िदया है और इसे लेकर. इतने दावे के साथ कैसे कह रहे हो। कहींतुम मुझे छल तो नहींरहे हो? बड़ा अधीर हो वह िमिमयाकर. हंगामा मचा हआ ु है और पुिलस चारो तरफ छापामारी करके लोगो की धर पकड़ कर रही है लेिकन इस शsस को न तो अपने िकए का कोई पxाताप है और न ही पुिलस या और िकसी की जरा सी डर ही है। राम जनम से डांट खाकर.आकर खड़ा हो गया था। राम जनम.. राम जनम मेरे दोःत. राम औतार पर बुरी तरह झ. मैअपने घर सुरि{त पहं ु च जाऊँगा तो? तुम एकदम िनिxंत रहो मेरे दोःत. मेरी नींद हराम करने पहं ु च गया ऽ ऽ। नींद म. राम जनम को यह बुरी खबर सुना रहा था। बे हू ऊ ऊ दा आ ऽ ऽ कही वह आ ऽ ऽ. बस इतनी सी बात के िलए तू सबेरे-सबेरे. और न ही िकसी और को। तुम एकदम सकुशल और खुशी-खुशी. इतनी ठंड़ म.अं य। लेिकन राम जनम तुम यह बात..जरा सा भी ड़रने की जरत नहींहै-.खलल पड़ने से राम जनम. अपने घर पहं ु चोगे। जब तक राम जनम है तुSह.ला उठा था। पुिलस छापा मारती है तो मारने दे इसमे इतना घबराने का Fया है? लेिकन चार3 तरफ मचे हंगामे और पुिलस की छापा मारी की खबर सुन.कुछ होगा. न ही मुझे. राम जनम के सामने..राम जनम से पूछा था। Fया हआ ु तू इतना घबराया Fय3 है? चारो तरफ बहत ु बड़ा हंगामा मचा हआ ु है। पुिलस जगह-जगह छापा मारी करके.. कही वह इिधर.उसका का रहना मुिँकल हो गया था और वह वहाँ से भागकर बरामदे म. इसमे न तो तुSह.

इतने दावे के साथ. उस सूरत म.हम लोग कबर. चाय पीने बैठे थे तो एक बात. कभी नहींडालेगा। राम जनम िजतने िवvास और िनडरता के साथ. जब राम जनम और वह. उसकी पीठ थपथपाकर उससे यह बात कहा था उससे उसे बड़ी आvिःत और सुकून िमला था। िनWयिबया से िनपटने के बाद. धधकती अं गीठी के पास मूढ़े ड़ाल. वे बड़ी ऊंची पहं ु च वाले आदमी है इसिलए पुिलस या और कोई हम लोग3 पर हाथ.िनिकया धोकर साफ कर लेते है। हाँ.दबा दे ते है। जब वे पूरी तरह सड़ जाते है तो उ ह.पानी म. जो उसे लगातार मथे डाल रही थी. तुम इतना घिटया और नीच काम. उसे. कबर. तो सारी कबर. उसे उसने राम जनम से पूछ िलया था। राम जनम. िक अगर यह बात राम जनम की होती तो पुिलस मेरे घर कब की पहं ु च चुकी होती। लेिकन िजन लोगो ने इसे करवाया है न..लावािरस मुदM िमल जाते ह9 । हम लोग सड़ने के िलए उ ह. बडी तादात म. कंकाल3 की मांग जब बहत ु बढ़ जाती है और लावािरस मुद€ से. हाथ मुंह धोकर. मुद€ से खाली हो जाऐगी। दर असल अःपताल3 और सड़क3 से हमे.Fय3 दबा िदया था? दर असल वह मुदा7 ताजा था। Gयापारी को िसफ7 कंकाल की जरत होती है इसिलए उसे सड़ने के िलए.खोदकर उसे पूरा करते है। लेिकन राम जनम. कंकाल3 की िजतनी िडमांड है अगर हम लोग उसे. कभी कभार. पूरी करना मुिँकल हो जाता है तो. हम लोगो ने वहांदबा िदया है। जब वह पूरी तरह सड़ जाएगा तो उसे िनकाल धोकर हम लोग साफ कर ल-गे और उसका कंकाल Gयापारी को सfप द. भला करते ही Fयो हो? .गे। Gयापारी को ओ ऽ ऽ? हा◌ॅ आँ ऽ ऽ ऽ। इसका मतलब तुम लोग यह काम Gयापार की तौर पर करते हो? हा◌ॅ आ ऽ ऽ ऽ। लेिकन Gयापार के िलए तो काफी कंकाल की जरत होती होगी। तुम लोग3 को इतना कंकाल भला िमलता कहाँ से है यही कबर खोद कर? नहींयार.खोद कर पूरी करने लग-. ऐसा मैइसिलए कह रहा हं ू मेरे दोःत. तुम लोगो ने कबर से मुदा7 उखाडने के बाद उसे जोहड के पानी म.

वह काम होता है िजससे िकसी का नुकसान होता हो या िकसी का कुछ िबगड़ता हो। मेरा अपना असूल है िक मैअगर अपने हाथ से.ली दे िलया था िक जाने दो साले को.ऐसा बुरा Fया है मेरे दोःत. िकसी का कुछ भला नहींकर सका तो उसका बुरा तो कतई नहींकँगा। िकसी का बुरा करना ही म9 घिटया काम समझता हँू । लेिकन तुSहारा यह काम भी तो बुरा ही है राम जनम. राम जनम से पूछ िलया था। इसके पहले वह. जला दो उसे बाहर चील कौओंके खाने के िलए छोड़ दो या सड़ाकर उसका कंकाल बेच दो.राम जनम उसकी इस बात पर बड़े जोर से हँ सा था और दे र तक हँ सता रहा था। इस काम को तुम घिटया और नीच कैसे कहते हो मेरे दोःत? यह काम घिटया नहींहै राम जनम? जैसा बेिहचक होकर और िजस _ढ़ता के साथ रामजनम उससे यह बात कहा था उसे सुनकर उसे बड़ी हैरानी हई ु थी। कतई नहीं. कोई नुकसान हआ ु Fया? चाय के दो तीन घूँट. मुझे इससे Fया लेना दे ना। अब तो बस नाँता करना है िमले तो दो कौर खाकर. मुद€ को सड़ाने और उ ह. इसके घर आना पड़ गया नहींतो.. कहाँ िकसी का कोई बुरा होता है। अरे मुदा7 तो मुदा7. उसके ूित उसका मन घृणा से भर गया था और वह ज.. वह हर हाल म.दी से ज. मेरे खयाल से. इससे कहींिकसी का...िनिकया धोकर... घिटया और नीच. यह सोचकर अपने मन को तस. वह मुदM की बाबत. ऐसे अधम के घर म9 आता कभी? जो करता है करे साला.मुदा7 है। मुदM को गाड़ दो. हलक के नीचे उतारने के बाद ही.दी उसके घर से िनकल भागने के िलए उतावला हो उठा था। -------- सोमेश शेखर च ि . उसके कंकाल बेचने जैसा अधम और िघनौना काम करता है तो इसे सुनकर.सड़ाना और िफर उसे िनिकया धो कर उसका कंकाल बेचना. अपने घर का राःता पकड़ लेना है। लेिकन जब राम जनम उसे यह बताया था िक वह.। दे खो मेरे दोःत. मुझे तो इसमे कोई बुराई नहींिदखती। और अगर.िछः। इसम. यह बुरा है भी तो वह. हलाकान होता रहँू । वह तो मेरे सामने ऐसे हालत पै दा हो गए थे िक मुझे... मेरे ऐसा करने से. िसफ7 तुSहारे मन के भीतर है। तुSहींबताओ. िकसी मुदM को पानी म. मुझे कौन इसके घर की बगल छा ही ड़लना है या इसके साथ िरँतेदारी जोड़ना है िक उसकी इन िघनौनी कततूत3 की सोच-सोच कर.

2284/4 शाƒी नगर. सुलतानपुर.आर ए िमौ. उू 228001 .