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हरी भटनागर की कहानी : जाफर िमयाँ की शहनाई

कहानी

जाफर िमयाँ की शहनाई

हरी भटनागर

जाफर िमयाँ शहनाई के िलए मुहले या, अपने पूरे कःबे म! मशहर
ू थे। तीन-चार बजते
ही वे शहनाई लेकर चबूतरे पर आ बैठते और धूप िनकलने तक बजाते रहते। वे शहनाई
बजाते और ढोल पर साथ दे ता उनका दोःत, स2भू। स2भू शहनाई के बजते ही उठ बैठता
और जाफर िमयाँ के साथ ताल िभड़ाता। बताने वाले बताते ह4 िक शहनाई का ऐसा बजैया
और ढोल का ऐसा िपटै या कःबे या, दरू-दरू के इलाके म! दसरा
ू न था। सवेरे शहनाई
और ढोल न बजे तो मुहले के लोग9 की आँख! न खुलती थीं। लगता िक रात है , अभी
सोये रहो।

लेिकन अब न शहनाई है और न ढोल की आवाज़। ल2बे समय से सब कुछ ख़ामोश है


जैसे सज़ा दे दी गयी हो। और वाःतव म! सजा दे दी गयी थी। ढोल और शहनाई को नहीं
,
जाफर िमयाँ को। उस सजा से जाफर िमयाँ इतने ग़मगीन हए
ु िक उ@हो◌े◌न
ं े शहनाई
बजाना ही छोड़ िदया। शहनाई से जैसे उनका कभी कोई तालुक ही न रहा हो! और जब
शहनाई नहींबज रही थी तो ढोल य9 बजेगा? स2भू ने मारे अफ़सोस म! ढोल खूट
ँ ी के
हवाले कर िदया।
रहे शहनाई और ढोल के आदी लोग, उ@ह! लगता है िक शहनाई और ढोल की आवाज़ बस
उठने ही वाली है । ऐसा वे सोच तो लेते पर तुर@त ही अपनी गलती महसूस करते।
शहनाई या, जाफर िमयाँ ने तो दजDिगरी तक छोड़ दी। कुछ नहींकरते वे। चबूतरे पर
हर वईत ग़मगीन से बैठे रहते। न िकसी से बोलते; न बितयाते। बीवी सामने खाना रख
दे ती तो खा लेते, नहींभूखे बैठे रहते। लोग कहते िक िदमाग़ पर असर होने से उनकी
बोलती ब@द हो गयी है । अब खुदा ही उ@ह! बचा सकता है ।

एक स2भू ही है जो कहता िफरता है िक जाफर िमयाँ को कुछ नहींहआ


ु , िसवाय सदमे
के।

खैर, उस सजा की एक छोटी-सी कहानी है ।

जाफ़र िमयाँ का कु@दन शाह नाम का एक दोःत था। वह सुनार था और जाफर िमयाँ के
घर के ठीक सामने रहता था। जाफर िमयाँ ने चोरी के डर से अपनी बेटी के शादी के
जेवर और नगदी कु@दन शाह की ितजोरी म! रखवा िदये थे। इस Iयाल से िक उसके पास
सुरिKत रह! गे और िनिँफकर हो गये थे। मगर जब बेटी की सगाई हई
ु और वे जेवर और
नगदी लेने गये तो कु@दन शाह ने साफ इनकार कर िदया िक उसके पास उसने कभी
कुछ रखा ही नहीं!

जाफर िमयाँ चीखे-िचलाये। लड़े -झगड़े । इ@साफ के िलए लोग9 को बटोरा लेिकन कोई
असर नहीं। कु@दन शाह टस से मस न हआ।
ु जाफर िमयाँ की बीवी की जलती गाली से
भी नहीं। आिखर म! जाफर िमयाँ ने अपना माथा चौखट से फोड़ िलया और दाढ़ी नोच
डाली िजसका मतलब सॄ से था और इस बQदआ
ु से िक गरीब-गुबाR का जेवर पैसा मारा
है , हजम नहींहोगा; ख़ाक म! िमल जायेगा!

मगर कु@दन शाह ख़ाक म! िमलने की बजाय िदन पर िदन तरकी करता जा रहा था।
कSचा कवेलू वाला मकान तोड़वाकर उसने पकका मकान बनवाना शुT कर िदया था।
दरवाजे◌़पर लोहे का फाटक लगवा िदया था। और रोशनी के िलए एक लVटू लटका िदया
था। जाफर िमयाँ के िलए यह सब तकलीफदे ह था। पर गाली दे ने, बाल-दाढ़ी नोचने के
िसवा कुछ भी करने म! असमथR थे।

उस िदन दोपहर को जाफर िमयाँ जबरदःत तकलीफ म! थे। इसकी वजह कु@दन शाह न
होकर वह इका था िजस पर लाउडःपीकर म! तीखी आवाज़ म! िफमी गाना बज रहा
था। यह आवाज़ इतनी तीखी और कानफोड़ थी िक जाफर िमयाँ बेचन
ै हो उठे । उ@ह9ने
इकेवाले को भQदी गािलयाँ दे नी शुT कर दींजो गाने की धुन पर मटकता हआ
ु ग@दे
इशारे करता जा रहा था।

कान म! उँ गिलयाँ रखकर तीखी आवाज़ से बचा जा सकता था मगर गुःसे के आगे यह
सूझ दम
ु दबाये कहींदबकी
ु थी। तकरीबन हजार-एक गा◌़िलयाँ दे चुके होगे जाफर िमयाँ;
िफर चुप हो गये जैसे थक गये ह9। लेिकन तीखी आवाज़ के साथ कान के राःते होती हई

एक बात उनके जेहन म! जा पहँु ची िजससे िक वे अWँय म! कहींदे खते हए
ु खोये रहे , िफर
मुःकुरा उठे । एकाएक फुतD से उठे और अ@दर आकर बीवी से पूछा िक मामोफोन कहाँ है ?
बीवी ने इशारा तो कर िदया मगर यह नहींपूछ पायी िक मामोफोन का या कर! गे। वह
घबरा-सी गयी। अभी तक तो ठीक थे, चुप रहते थे, अब...मामोफोन मांग रहे ह4 , इसका
मतलब है , कहींकुछ गड़बड़ है । नहीं
, इतने पुराने कूड़े -कबाड़ की या जTरत थी?

वह जाफर िमयाँ को डरी िनगाह9 से दे ख रही थी और जाफर िमयाँ थे िक कूड़े -कबाड़ को


उठा-उठाकर बाहर फ!कते जा रहे थे। पुराने ज़ंगखाये टीन के कनःतर, सड़ी रजाइयाँ, सड़े -
ू छाते, खाट के पावे, बाध वगैरह-वगैरह बाहर चबूतरे पर
गले कपड़9 की कतरन!, पुराने टटे
फेके जा चुके थे, गदR के साथ िजनकी तीखी ग@ध नथुन9 म! बेतरह चुनचुनाहट मचा रही
थी। मगर जाफर िमयाँ को इस तीखी ग@ध का तिनक भी अहसास नहींहो रहा था। वे
हड़बड़ी म! थे और मामोफोन को ढँू ढ रहे थे। कुछ और सामन9 को उलटने-लटकने के बाद
मामोफोन िमल गया था। खु◌़शी से वे फूले नहींसमा रहे थे।

बीवी ने पूछा िक मामोफोन का या कर! गे तो उनका जवाब था - आग बरसाय!गे।

- आग बरसाय!गे।

- हाँ।

- मामोफोन से कहींआग बरसती है ! - बुदबुदाते हए


ु बीवी ने कहा।

- ऐसी आग बरसेगी िक दफन हो जायेगा साला! अपने म! बड़बड़ाते हए


ु जाफर िमयाँ ने
हवा म! एक भQदी गाली उछाली और बाहर चबूतरे पर बैठकर मामोफोन के कल पुजZ को
साफ करने लगे।
बीवी ने िसर पर आँचल डाला और आसमान की ओर हाथ और आँख! कर अला ताला से
जाफर िमयाँ पर रहम की भीख माँगी।

जाफर िमयाँ बुरा-सा मुँह बनाकर बड़बड़ाये िक अला ताला से दआ


ु माँगने की जTरत
नहीं! आग तो बरसकर रहे गी, अला ताला भी नहींरोक पाय!गे।

काफ़ी दे र तक जाफर िमयाँ कल पुजZ को साफ़ करते रहे । आिखर म! जब मामला जमता
नहींिदखा तो उ@ह! कुछ याद आया। अ@दर आये और उस चादरे को ढँू ढने लगे िजसम!
गरम कपड़े बँ\◌ो थे िजसे कभी वे ओढ़ा करते थे। चादरा जब िमल गया तो उ@ह9ने सारे
गरम कपड़े ज़मीन पर पटक िदये और कल पुजZ को समेट बाज़ार आये, अपने दोःत, दीना
के पास जो कभी मामोफोन द]ः
ु त करता था, अब लाउडःपीकर वगैरह द]ः
ु त करता है ।

दीना ने मामोफोन दे खा और हँ स पड़ा। एकाएक उसने काम म! डू बकर ग2भीरता से कहा


- कबाड़ी की दकान
ु पीछे है !

जाफर िमयाँ ने उसे गुःसे से दे खा।

दीना ने कहा - अबे, ऐसे या दे खता है ! म4 कबाड़ी हँू जो मेरे पास कबाड़ ले आया।

जाफर िमयाँ ने बताया िक इसे द]ः


ु त कराना है तो दीना ठठाकर हँ स पड़ा - अबे, इसे
ठीक कराकर सुहागरात मनायेगा?

- हाँ, सुहागरात मनाऊँगा! जाफर िमयाँ ने कहा और उनकी आँख! गीली हो गयीं। उ@ह9ने
अपने साथ हए
ु जुम का बयान िकया और मामोफोन को ‘राइट' कराने की वजह बतायी।

यह बाल सुलभ हरकत थी, िफर भी दीना ने जाफर िमयाँ का िदल नहींतोड़ा और न ही
िकसी तरह की बहस की। मामोफोन की जगह उसने एक टे पिरकाडR र और बहत
ु सारे
सामान9 के साथ बड़ा-सा लाउडःपीकर िदया तािक वे अपना काम बखूबी कर सक!।

इस सामान9 को िलए हए
ु खुशी से भरे जाफर िमयाँ जब अपने दरवाजे◌़इके से उतरे तो
बीवी ने म`था पीट िलया; मुहले के लोग9 ने उ@ह! आँचयR से घेर िलया।

थोड़ी दे र म! तेज़ आवाज़ म! गाना बजा तो पूरे जँन का माहौल था। तकरीबन पूरा मुहला
इकVठा था। बSचे गाने की धुन पर िथरक रहे थे। उनके बीच जाफर िमयाँ थे जो
अनेकानेक भाव-मुिाएँ बना मटकते जाते थे।
एकाएक जाफर िमयाँ ने दे खा, बीवी नदारद है । यहाँ तक िक मुहले के सारे लोग जा चुके
ह4 । िसफ़R बSचे ह4 जो िथरक रहे ह4 । समझ गये िक पागल हरकत मानकर सब सरक गये!
उ@ह9ने िसर झटका और सोचा िक कोई मुज़ायका◌़नहीं। कोई रहे या न रहे , वे अपना
काम कर! गे, पूरी ताक़त से कर! गे।

बाहर वे काफी दे र तक खड़े रहे । गली म! अं


\◌ोरा छाया था। मSछर कान9 से टकरा रहे
थे। िकसी-िकसी घर के लोग9 के खाँसने, बोलने-बितयाने और बतRन9 की आवाज! आ रही
थीं। कोई कुcे◌ो को दरदरा
ु ु रहा था। सुभावन के घर का पला शायद खुला था िजसम!
लालटे न की पीली, मरी-सी रोशनी सड़क पर पड़ी थी। लेिकन फौरन ही वह ग़ायब हो
गयी। लगता है िक िकसी पे पला भेड़ िदया। िकसी-िकसी घर के सामने िचनिगयाँ चमक
रही थीं। लोग बीिड़याँ पी रहे थे।

जाफर िमयाँ ने कु@दन शाह के घर की ओर दे खा। अँ\◌ोरे म! ढँ का था उसका घर। लVटू


भी कई िदन से नहींजल रहा था। िकसी के बोलने-बितयाने की आवाज़ भी नहींआ रही
थी। शायद सब सो गये थे।

जाफर िमयाँ ने साँस खींचकर िसर झटका जैसे कह रहे ह9 िक सो, चैन से सो! दे खता हँू ,
कब तक सोते हो!

गली के छोर पर जब कुcे रोने लगे, वे ल2बे डग बढ़ाते, अपने चबूतरे पर

--

आये और गाने की तीखी आवाज़ का मुआयना करने लगे।

गाने की तीखी आवाज़ कुछ ऐसे गूँजती जैसे हज़ार9-हज़ार मोर एक साथ चीख-िचला रहे
ह9। लाख9-लाख कौवे ह9 जो िकसी एक कौवे पर हए
ु जुम पर ची`कार कर जुमी पर
ट9ट-पंजे मार रहे ह9। ऐसा भी लगता जैसे करोड़9 की तादाद म! मुसलमान ‘हाय हसन'
करते हए
ु छाती पीट रहे ह9। उ@हींके साथ बड़े -बड़े नगाड़े , सम, तासे मानो हाय छोड़ रहे
ह9।

जाफर िमयाँ ठठाकर हँ से।

-
िजस वईत तीखी आवाज़ म! गाना बजना शुT हआ
ु , कु@दन शाह खाना खा रहा था। उसने
झाँककर दे खा, जाफर िमयाँ उसकी तरफ़ भQदे इशारे करते हए
ु मटक रहे थे। उसे लगा िक
यह सब उसे तंग करने के िलए है । बोध म! पागल होते हए
ु उसने थाली उठाकर नाली पर
फ!क दी। दरवाज़े पर लात मारी। बीवी को भQदी गािलयाँ दे ते हए
ु जो उस पर बड़बड़ाने
लगी थी, खाट पर लेट गया, दाँत पीसते हए।
ु एकाएक मन हआ
ु िक उठे और जाफर िमयाँ
के मुँह पर तेजा◌़ब डाल दे । वह उठा लेिकन ऐसा करने की िह2मत न जुटा पाया। काँप
गया।

एकाएक सोचा िक वह इतना परे शान य9 है ? य9 मान बैठा िक जाफर िमयाँ का गाना-
बजाना उसे तंग करने के ख़ाितर है । जाफ़र तो पागल है , पागल! उसकी पागल हरकत पर
वह य9 परे शान होता है ? उसने ऐसा सोचा मगर दसरे
ू पल िफर परे शान हो उठा। जाफर
उसे दे खकर भQदे इशारे कर रहा था और मटक रहा था, य9? उसे तंग करने के िलए ही!
हे भगवान!!! उसने सोने की कोिशश की लेिकन वह रात भर सो न सका। बुरी तरह
करवट! बदलता रहा। रह-रहकर उठ बैठता और गािलयाँ बकता।

सवेरे वह बेतरह बौखलाया हआ


ु था। उसने जोर9 से दरवाजा खोला। अगल-बगल दे खा, कोई
न िदखा तो बाहर आ खड़ा हआ
ु लेिकन तुरंत ही घर म! तेज़ी से घुसा और जो◌़र9 से
दरवाज़ा ब@द िकया। िफर पता नहींया सोचकर उसने उतने ही जो◌़र9 से दरवाजा खोला
और बाहर आ खड़ा हआ।
ु बेचन
ै ी उसकी और बढ़ गयी थी। वह लड़ने के पूरे मूड म! िदख
रहा था। एकाएक वह िकसी पागल की तरह बड़बड़ाता हआ
ु फाटक का खटका सरका नल
की ओर फुतD से बढ़ा जहाँ पानी भरनेवाले लोग9 की भीड़ थी। उनके पास पहँु चकर वह
हाथ लहरा-लहरा कर लोग9 से कुछ कहने लगा। सुनायी तो पड़ नहींरहा था। िसर और
छाती पीटने से लग रहा था िक वह अपने ऊपर होने वाले जुम की िशकायत कर रहा है ।

जाफर िमयाँ बेहद खु◌़श थे उस िदन। उनका िनशाना सही जगह पर लगा था।

दो-चार रोज़ कु@दन शाह नहींिदखा। जाफर िमयाँ की बेचन


ै ी बढ़ी। उ@ह9ने लोग9 से पूछा
तो पता चला िक पास के शहर म! पायल! खरीदने गया है । हर वईत तो वे उस पर िनगाह
रखे ह4 ; कब िनकल गया? िफर सोचने लगे िक हो सकता है अँ\◌ोरे म! िनकल गया हो!

खै◌ऱ, कु@दन शाह घर म! हो या न हो, जाफर िमयाँ ने तीखी आवाज़ म! म@दी नहींआने
दी।
एक िदन जाफर िमयाँ की बीवी बाजा◌़र से सौदा-सुलुफ़ लेके लौटींतो उ@ह9ने बताया िक
कु@दन शाह तो कहींनहींगया, लोग झूठ बोलते ह4 । वह तो िबःतर पर पड़ा है । कहते ह4
िक उसके िसर म! बेपनाह ददR रहता है । बीवी-बSचे पैर9 से कचरते ह4 तब भी चैन नहीं
िमलता...

- िकसी वैद-हकीम को य9 नहींिदखाता? जाफर िमयाँ ने संजीदगी ओढ़ते हए


ु कहा।

- मुए ने जैसा करा है , वैसा तो भरे गा! इसम! वैद-हकीम या कर ल!गे।

- वैद-हकीम तकलीफ की दवा द! गे! जाफर िमयाँ कुिटलता से मुःकुराये - तुम जाकर कहो
न िक इलाज कराये।

- हाँ, म4 कहँू गी उस कमीन, मुँहजले से। बीवी ने कुढ़कर कहा, - मर जाये तो अरथी पर थूकूँ
तक नहीं।

- ये ददR य9 हो गया उसे? जाफर िमयाँ ने िनहायत ही संजीदा होकर पूछा।

- पता नहीं। पान की पीक थूकते हए


ु उ@ह9ने कहा, - भाड़ म! जाये। यकायक उ@ह9ने आँख!
गोल करके पूछा, - तुम इतनी पूछ ताछ य9 कर रहे हो?

- कुछ नहीं, बस यूँ ही पूछ रहा था। कुछ भी हो, आिखर अपना पुराना दोःत ही तो है -
उ@ह9ने बीवी को बहकाना चाहा।

बीवी यकायक भावुक हो गयीं, बोलीं- यही तो म4 भी सोच रही थी। पूरी बात तो नहीं, इcा
जानती हँू िक उसे नींद नहींआती रात-रात। जागता रहता है । हर वईत उसे लगता है िक
बड़ी-बड़ी टीन की चादर! , बड़े -बड़े साम कोई छत पर पटक रहा हो...

जाफर िमयाँ मुःकुराहट िछपाये उठे और बाहर आ खड़े हए


ु जहाँ तीखी आवाज़ के िसवा
कुछ न था। उस तीखी आवाज़ म! उ@ह! लगा िक हज़ार9-हज़ार आदमी औरत-बSचे चीख-
िचला रहे ह9। जैसे भीषण आग लगी हो, सब ची`कार कर रहे ह9। कोई बचाने वाला न
हो। उ@ह! लगा िक यह रोने-चीखने, ची`कार करने वाले और कोई नहीं
, वे खुद ही ह4 ! वे
सोचने लगे िक उ@ह! कहींका न छोड़ने वाला या चैन से बैठ सकता है ! नहीं! क़तई
नहीं!!! यकायक वे गुःसे म! भर उठे और उ@ह9ने मुिट◌्ठयाँ भींचकर तेज़ आवाज़ म! कई
गािलयाँ बुल@द कीं।
इस बीच एक िरशा कु@दन शाह के दरवाजे पर आकर ]का। िरशावान ज़मीन पर उकड़ू ँ
बैठकर बीड़ी पीने लगा। थोड़ी दे र म! एक बीमार-सा आदमी जो ग@दे कपड़े म! िलपटा-सा
था, िजसे कोई औरत पकड़े हए
ु , सँभालती ला रही थी, िरशे की ओर बढ़ा। जाफर िमयाँ ने
गौर से दे खा यह आदमी और कोई नहींकु@दन शाह था और उसको सँभालने वाली कु@दन
शाह की बीवी थी। कु@दन शाह का हिलया
ु बदल गया था। चेहरे पर पीलापन छा गया था
और उसम! िसकुड़न बासी मूली जैसी थी। िसर और दाढ़ी के बाल ज़Tरत से एयादा
सफे◌़द और बेतरतीब हो रहे थे।

िरशेवान ने कु@दन शाह को िरशे म! बैठाने म! मदद दी और िरशा आगे बढ़ा ले चला।

कु@दन शाह डॉटर के पास गया। डॉटर ने उसकी नkज़ पर उँ गिलयाँ रखीं। पलक! फाड़ीं
और उनम! टाचR की रोशनी मारी। जीभ बाहर िनकलवायी और मुँह बड़ा सा फड़वाया। जब
वह ठीक से मुँह नहींफाड़ पाया तो डॉटर ने मुँह नहींदे खा। पीठ और छाती पर आला
फेरा और घुटन9 पर उँ गिलयाँ बजायीं।

यकायक क2पाउlडर पर िकसी बात पर चीखते हए


ु डॉटर ने दवा की पचD िलखी और
पाँच िदन के बाद आने को कहा।

कु@दन शाह ने दवा खायी और पाँच िदन के बाद डॉटर के पास पहँु चा। इस बार डॉटर
ने सरसरी नज़र उस पर डालकर पहले िलखींदवाइयाँ िफर से खाने को िलख दींऔर
पाँच िदन के बाद आकर हाल बताने को कहा।

डॉटर की िहदायत मानते हए


ु कु@दन शाह पाँच िदन के बाद काँखता-कूँखता िफर िकसी
ू था। डॉटर ने
तरह पहँु चा। इस बार हालत पहले से एयादा पःत थी। पहले से एयादा टटा
उसे ऊपर से नीचे तक दे खा और माथा िसकोड़कर सामने खड़ा हो गया। जैसे मजR को
िफर से जाँचने का िवचार कर रहा हो। और बाएँ हाथ की उँ गिलयाँ ह9ठ9 पर दौड़ाने लगा।
यकायक उसने उसकी जाँच शुT कर दी। पलक! फाड़कर दे खीं। जीभ बाहर िनकलवायी।
नाखून दे खे। सीने और पीठ पर आला फेरा और गहरी साँस छोड़कर कुसD पर पसर गया।
माथे पर उसके बल था। आँख! िसकुड़ी थींऔर ह9ठ िभंचे। लगता था जैसे अभी-अभी
िचला पड़े गा। लेिकन िचलाया नहीं। बस इतना बोला िक तु2ह! कोई बीमारी नहीं।
- कोई बीमारी नहीं! कु@दन शाह काँखते हए
ु चुधी आँख! िमचिमचाता िकसी तरह उठकर
बैठता हआ
ु , रोनी आवाज़ म! बोला - कोई बीमारी नहींतो तो हालत य9 पतली है ?

इस ूँन पर डॉटर कुछ नहींबोला, एकटक उसे दे खता रहा।

प`नी कुछ बोलने को हई


ु िक कु@दन शाह ने आगे कहा- रात-रात भर नींद नहींआती,
कहींउस दजD, उस मुँहजले जाफर की कारःतानी तो नहीं...

- कौन जाफर, कौन दजD? डॉटर ने सI◌़त नज़र9 से उसे दे खा और गुःसे म! कहा - म4
िकसी दजD-बजD को नहींजानता!

सहसा कु@दन शाह की बीवी कड़कती आवाज़ म! हाथ लहराती बोली- जाफर मुआ दजD है ,
मुँहजला! िदन-रात बाजा आग की तरह फूँके रहता है , उसका नाश जाये!

डॉटर सI◌़त होकर बोला- आप या चाहती ह4 िक म4 जाकर उसका बाजा ब@द कराऊँ!
डॉटर झला उठा यकायक और मेज़ पर मुके पटकने लगा- आप दोन9 पाग़ल हो गये
ह4 , पागल! चले जाइये यहाँ से!!!

- लेिकन साब, मेरी तबीयत तभी से गड़बड़ है - कु@दन शाह काँपते पैर9 पर खड़ा अपने
दोन9 हाथ िसर पर रखे बुदबुदाया,- उसी ने टे प बजा-बजाकर...

इधर डॉटर दोन9 की बात9 पर िसर पीट रहा था, उधर जाफर िमयाँ से एक पड़ोसी ने
पूछा, - य9 िमयाँ, आज तु2हारी दकान
ू ठlडी य9 है ? कोई गाना बाना नहींहो रहा है ?

जाफर िमयाँ ने िसर िहलाते हए


ु कहा- बजाऊँगा, बजाऊँगा, परे शान न हो! कु@दन शाह को
डॉटर के यहाँ से तो लौटने दो!

लेिकन जब कु@दन शाह डॉटर के यहाँ से लौटा, िरशे से िकसी तरह उतर नहींपा रहा
था और आिख़र म! सीट से जमीन पर आ िगरा िकसी कटे पेड़ की तरह - जाफ़र िमयाँ
अपने को रोक न सके। टे पिरकाडR र को परे करते तेज़ी से दौड़े ।

कु@दन शाह के माथे पर उ@ह9ने हाथ फेरा। वह बेहोश हो गया था। दौड़कर जाफर िमयाँ
लोटे म! पानी लाए और उसके मुँह पर पानी के छींटे मारे ।
कु@दन शाह ने जब अपनी आँख! खोलींऔर फड़फड़ाते ह9ठ9 से ‘जाफर भाई' बुदबुदाया जैसे
अं
ितम साँस ले रहा हो- जाफर िमयाँ की आँख9 से झर-झर आँसू बह िनकले।

थोड़ी दे र बाद जाफर िमयाँ चबूतरे पर बैठे शहनाई बजा रहे थे। शहनाई की आवाज़ से
स2भू बैठा न रहा। घर से वह ढोल बजाता िनकला।

जाफर िमयाँ की बीवी यह सब दे ख, िसर पर आँचल डाल अला ताला से दआ


ु माँग रही
थीं।